पुलवामा हमले के बाद पाकिस्तान को भारत ने चौतरफा घेरा। आर्थिक से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक और सामरिक से लेकर रसद सप्लाई तक। यह घेराव इतना ‘कष्टदायक’ था कि पाक पीएम इमरान को शांति के लिए याचना मोड में आना पड़ा। जो भी रही-सही कसर थी, उसे 26 फरवरी को पूरा कर दिया गया – पाक में घुस कर, भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमानों द्वारा लगभग 300 आतंकियों को मार कर।
We realise it’s election year, and a desperation across the border. Fact of the matter is, Indian jets were forced to retreat in haste by Pakistan army patrols and dumped fuel, which in their scramble they thought was a bomb.#Pakistan
इसकी प्रतिक्रिया हुई। पाकिस्तानी सरकार द्वारा और वहाँ की जनता से भी। जहाँ पाक सेना ने ‘कुछ भी नहीं हुआ, भारतीय वायु सेना के जहाज जल्दी भाग गए’ बोलकर अपनी इमेज बचाई, वहीं पाकिस्तानी नागरिकों ने अपनी सरकार और आर्मी की जमकर क्लास लगाई।
I regret supporting PTI. This is your response? They came into Pakistan and bombed us and this is Imran Khan's response?
They’ve breached your country and this is all you have to say yikes. Whether they did or did not drop bombs you need to retaliate because words will do nothing for you but more for them. https://t.co/D96H4ETT6H
Humein tu Quetta , Parachinar aur Thar mein bhi dhoond letay hein ke tweet kyoun kiyaay, yahan poora jahaz humaray soobay KP mein ghuss gaya aur khabar tak na huee?
आपको बता दें कि भारतीय वायुसेना ने क़रीब 12 मिराज-2000 लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल करते हुए PoK में मौजूद आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया। भारतीय वायुसेना ने 1000 किलोग्राम वजन वाले बम गिरा कर पाकिस्तानी ज़मीन पर स्थित कई आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया। भारत के विदेश सचिव विजय गोखले ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जानकारी दी कि नियंत्रण रेखा के पार बालाकोट में स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों पर भारत ने हवाई हमला कर उसे पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है।
भारतीय वायुसेना ने मंगलवार तड़के पाकिस्तान के बालाकोट में स्थित जैश-ए-मोहम्मद के मुख्य ठिकाने पर हवाई हमला किया, जिसमें विदेश सचिव विजय गोखले के अनुसार बड़ी संख्या में आतंकवादी, उनके ट्रेनर तथा वरिष्ठ कमांडर ढेर हो गए हैं। विदेश सचिव के मुताबिक, कैम्प का संचालन जैश के सरगना मसूद अज़हर का बहनोई यूसुफ अज़हर कर रहा था, जो मारा गया है।
पाकिस्तान में तबाही मचाने के बाद इंडियन एयर फोर्स के फाइटर प्लेन भारतीय सीमा में वापस आ गए। इसके कुछ ही घंटों के बाद एक पाकिस्तानी ड्रोन ने भारत की सीमा में घुसने की कोशिश की। ये कोशिश गुजरात बॉर्डर पर कच्छ में हुई। यहीं पर इंडियन एयरफोर्स ने पाकिस्तानी ड्रोन को तुरंत ही मार गिराया।
Indian Army has shot down a Pakistani spy drone in Abdasa village, in Kutch, Gujarat. Army and police personnel present at the spot. pic.twitter.com/84wUJY916l
इंडिया टुडे के अनुसार इंडियन इंटेलिजेंस एजेंसियाँ पुलवामा हमले के बाद से ही पाकिस्तान के 13 लॉन्च पैड पर निगरानी रख रहीं थीं। इन्हीं में से एक लॉन्च पैड से पाकिस्तानी ड्रोन ने भारतीय सीमा में घुसने की कोशिश की।
अयोध्या भूमि विवाद पर कोर्ट ने आज (फरवरी 26, 2019) सुनवाई करते हुए कहा है कि कोर्ट इस मामले पर अगले मंगलवार (मार्च 5, 2019) को आदेश देने के लिए निर्णय लेगा कि क्या समय बचाने के लिए मामला अदालत की निगरानी में मध्यस्थता के लिए भेजा सकता है।
बता दें कि आज सुबह राम जन्म भूमि और बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई शुरू हुई, जिसके बाद एक बार फिर से इस मामले को अगले मंगलवार तक के लिए टाल दिया गया।
Ayodhya Ram Janmabhoomi-Babri Masjid land dispute case: Supreme Court says it will pass order on next Tuesday on whether the case may be sent for court-monitored mediation to save time. pic.twitter.com/8R7iHb8AeE
इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ती एस ए बोबड़े, न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति धनंजय वाई चन्द्रचूड़ की पाँच सदस्यीय पीठ ने सुनवाई की।
बता दें कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के 2010 के फैसले के ख़िलाफ 14 याचिकाएँ दाखिल की गई। इस मामले में हाई कोर्ट ने मामले को निपटाते हुए फैसला सुनाया था और कहा था कि अयोध्या में 2.77 एकड़ विवादित भूमि को तीन पक्षों सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला के बीच बाँट दी जाए।
सुप्रीम कोर्ट इस मामले को लगातार आगे खींच रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले के कुल दस्तावेज 38000 पेज से ज्यादा हैं। और हाईकोर्ट का फैसला ही 8170 पन्नों का है। ऐसे में अनुवाद की स्वीकार्यता पर विवाद चल रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनुवाद को लेकर हिंदू पक्ष ने कभी भी ऐतराज़ नहीं किया है जबकि मुस्लिम पक्ष को अब भी आपत्ति है। कोर्ट का कहना है कि यदि अभी सभी पक्षों को दस्तावेजों का अनुवाद स्वीकार्य है तो वह सुनवाई शुरू होने के बाद उस पर सवाल नहीं उठा सकेंगे। मुख्य न्यायाधीश का इसपर कहना है कि यदि दस्तावेजों के अनुवाद पर विवाद जारी रहा तो हम इस पर अपना समय बर्बाद नहीं करने जा रहे।
कोर्ट ने दस्तावेजों की स्थिति और मामले से जुड़े सीलबंद रिकॉर्ड पर सेक्रेटरी जनरल की ओर से दायर रिपोर्ट की प्रतियों का जिक्र करते हुए दोनों पक्षों के वकीलों से उनका अध्ययन करने को कहा।
भारतीय वायुसेना ने जिन पाकिस्तानी क्षेत्रों में स्थित आतंकी ठिकानों पर बमबारी कर उन्हें तबाह किया है, उनमें बालाकोट सबसे अहम है। बालाकोट पाकिस्तान के ख़ैबर पख़्तूनख़्वा प्रान्त के मानसेहरा ज़िले में स्थित है। कंधार विमान हाईजैक कांड के बाद भारत सरकार द्वारा छोड़े गए आतंकियों में शामिल आतंकी मसूद अज़हर ने पाकिस्तान पहुँचते ही जैश-ए-मोहम्मद की स्थापना की और उसका सबसे पहले बेस कैम्प बालाकोट में ही बनाया था। अभी हाल ही में पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्थित आतंकियों को भी बालाकोट की तरफ ढकेल दिया गया था, ताकि भारत द्वारा किसी भी तरह की संभावित जवाबी कार्रवाई के दौरान उन्हें सुरक्षित रखा जा सके।
मानसेहरा के इलाके जिनमें बालाकोट भी शामिल है
पाकिस्तान को सपने में भी यह अंदेशा नहीं था कि भारतीय वायुसेना इतनी अंदर तक घुस सकती है। सूत्रों के अनुसार, वायुसेना ने बालाकोट में आज मंगलवार (फरवरी 26, 2019) तड़के 3.45 से 3.53 तक बमबारी कर आतंकी कैम्पों को तबाह कर दिया। बालाकोट स्थित आतंकियों को मार गिराना भारतीय वायुसेना बहुत बड़ी उपलब्धि है क्योंकि यह क्षेत्र पूरी तरह से पाकिस्तान में स्थित है। इसे आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का होमग्राउंड माना जाता है। आतंकी सैफुर रहमान सैफ़ी सहित अन्य तालिबानियों की मदद से यहाँ आतंक का गढ़ का निर्माण किया गया था ताकि भारत में हमले किए जा सके। सैफ़ी को आत्मघाती दस्ते का संस्थापक माना जाता है।
ताज़ा स्ट्राइक के बाद आतंकियों सहित उनके पोषकों का भी मनोबल टूट गया होगा क्योंकि यह आतंकियों के सबसे बड़े प्रशिक्षण कैम्प में से भी एक था। भारतीय ख़ुफ़िया सूत्रों के मुताबिक़, सिर्फ़ बालाकोट में स्थित कैम्पों से हज़ार से भी अधिक आतंकीयों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। एक और जानने लायक बात यह भी है कि बालाकोट एबटाबाद से बस 50 किलोमीटर की दूरी पर ही स्थित है। एबटाबाद में ही अमेरिका ने ओसामा बिन लादेन को मार गिराया था। इस स्ट्राइक के बाद भारत ने यह भी दिखा दिया है कि अगर अमेरिका अपने हितों की रक्षा के लिए पाकिस्तान के भीतर किसी बड़े ऑपरेशन को अंजाम दे सकता है तो भारत भी देश की सुरक्षा के लिए ऐसा करने में सक्षम है।
आपको जनवरी 2016 में हुआ पठानकोट हमला याद होगा। उस हमले में हमारे 7 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए थे व एक नागरिक की भी मृत्यु हो गई थी। जैश ने ही उस हमले की भी जिम्मेदारी ली थी। हमले के बाद एक आतंकी ने हिंदुस्तान टाइम्स से फोन पर बात करते हुए कहा था कि ख़ैबर पख़्तूनख़्वा में उनका ही क़ानून चलता है और वहाँ बालाकोट क्षेत्र में उनका सबसे बड़ा प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया गया है। उसने बताया था कि बाकी छोटे-मोटे कैम्पों को इधर-उधर शिफ्ट किया जाता रहता है। यही कारण है कि जब भारतीय वायुसेना ने स्ट्राइक्स के लिए नक्शा तैयार किया होगा, तब बालाकोट को एक अहम निशाना माना गया होगा।
गूगल मैप पर श्रीनगर को रख कर समझें बालाकोट का भूगोल
रियाज़ हसन की पुस्तक ‘Life as a Weapon: The Global Rise of Suicide Bombings‘ में भी इस बात का जिक्र किया गया है कि कैसे बालाकोट 21वीं सदी की शुरुआत में अमेरिका विरोधी आतंकियों का एक हब बन गया था। यहाँ बैठकें होती थी और रणनीति पर चर्चा की जाती थी। अफ़ग़ानिस्तान में आतंक फैलाने वाले तालिबानियों ने भी यही शरण ली थी। आतंकी सैफ़ी को यहीं हुई बैठक में पाकिस्तान के पंजाब क्षेत्र का दयित्व दिया गया था और सुसाइड बॉम्बिंग या आत्मघाती हमले वाले हथकंडे की रणनीति भी यहीं से बनाई गयी थी। पुस्तक में यह भी बताया गया था कि बालाकोट कश्मीरी आतंकियों व तालिबानी आतंकियों का एक संगम बन चुका था।
2001 में जम्मू-कश्मीर विधानसभा पर जो हमला हुआ था, उसकी पूरी की पूरी प्लानिंग भी बालाकोट में ही की गई थी। उस हमले में 38 लोग मारे गए थे। भारतीय वायुसेना के ताज़ा स्ट्राइक के बाद पाकिस्तानी खेमे में बड़ा हड़कंप मच गया है और बैठकों का दौर शुरू हो गया है। वहाँ के विदेश मंत्री क़ुरैशी ने एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई, जिसमे पाकिस्तानी नेताओं व अधिकारियों के लटके हुए चेहरे देखने लायक थे। पाक प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी एक बैठक बुलाई है। जो भी हो, भारत ने पाकिस्तान के इतने भीतर घुस कर उसे अपनी शक्ति का एहसास करा दिया है।
भारतीय विदेश मंत्रालय में टॉप IFS अधिकारी विदेश सचिव विजय गोखले ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जानकारी दी है कि नियंत्रण रेखा के पार बालाकोट में स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों पर भारत ने हवाई हमला कर उसे पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है।
श्री गोखले ने बताया कि जैश-ए-मोहम्मद की भारत पर और भी हमले करने की योजना थी जिसकी हमें पक्की सूचना मिली थी इसलिए नियंत्रण रेखा के पार जाकर ‘preemptive strike’ करना जरूरी हो गया था। भारत ने नियंत्रण रेखा के पार बालाकोट में जैश के सबसे बड़े ठिकाने पर हमला किया है जिसमें बड़ी संख्या में आतंकी और जैश के टॉप कमांडर मारे गए हैं। श्री गोखले ने यह भी कहा कि यह ऑपरेशन जंगल के भीतर स्थित आतंकी ठिकानों को लक्षित कर के ही किया गया था इसलिए कोई सिविलियन नहीं मारा गया है।
#WATCH Foreign Secy says,"This facility in Balakot was headed by Maulana Yusuf Azhar alias Ustad Ghauri, brother in law of JeM Chief Masood Azhar…The selection of the target was also conditioned by our desire to avoid civilian casualty. It's located in deep forest on a hilltop" pic.twitter.com/QENnnkU5Rh
पाकिस्तान को जैश की आतंकी गतिविधियों के बारे में जानकारी कई बार दी गई थी लेकिन पाकिस्तान ने उस पर कोई कार्रवाई नहीं की इसलिए भारत को यह एक्शन लेना पड़ा। मसूद अज़हर 2001 पर भारतीय संसद पर हमले के अलावा कई दूसरे आतंकी हमलों का दोषी है। जैश-ए-मोहम्मद ने ही 14 फरवरी 2019 को CRPF के काफिले पर हमला किया था जिसमें 40 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए थे।
Foreign Secretary: India is firmly&resolutely committed to taking all measures to fight the menace of terrorism.This non-military pre-emptive action was targeted specifically at JeM camp. The selection of the target was also conditioned by our desire to avoid civilian casualties. pic.twitter.com/IKoK9G2NS5
सुबह जगते ही पहली ख़बर मिली कि भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट तक जाकर 3:30 से 4:00 बजे सुबह के बीच 1000 किलो के विस्फोटक 10 से 12 मिराज फ़ाइटर जेट्स के ज़रिए गिराए और आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद के तीन कैम्पों को तबाह कर दिया। पाकिस्तानियों ने इस बार उरी हमले के बाद के सर्जिकल स्ट्राइक की तरह इसे नकारा नहीं है, बल्कि उन्होंने बताया कि उनकी धरती में भारतीय वायुसेना के जेट घुस आए थे, जिन्हें उन्होंने ‘भगा दिया’।
हालाँकि, रक्षा विशेषज्ञ बताते हैं कि ऐसे हमलों के लिए कुछ मिनट का समय काफी होता है। हम भारी मात्रा में विस्फोटक लेकर उड़ते हैं, हमें पता होता है कि कहाँ गिराना है, गिराते हैं, और वापस लौट आते हैं। ये बात और है कि विडियो फ़ुटेज और तमाम तरह की बातों के लिए सेना और सरकार को अब तैयार रहना होगा क्योंकि पिछली बार पाकिस्तान तो छोड़िए, अपने ही घर के लोगों ने अपनी सेना की क्षमता पर, उनकी बातों पर सवाल खड़े करते हुए सबूत माँगे थे।
आगे पाकिस्तानी सेना ने ख़बर की है कि भारतीय वायुसेना के जेट ‘जल्दबाज़ी में विस्फोटक कहीं भी गिराकर भाग गए’ और उन्हें कोई डैमेज नहीं हुआ। पाकिस्तान ने न सिर्फ स्वीकारा है, बल्कि चार तस्वीरें भी शेयर की हैं। जबकि, भारतीय सेना ने कहा है कि तीन कैम्प तबाह कर दिए गए हैं, और पाकिस्तानियों ने फर्जी तस्वीरें जारी की हैं क्योंकि वो अपने देश के लोगों के सामने डैमेज की बात स्वीकार नहीं सकते। भारतीय वायुसेना ने अभी तक इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन सेना के सूत्रों ने बताया है कि न सिर्फ लाइन ऑफ़ कंट्रोल बल्कि पाकिस्तान के भीतर जाकर इंडियन एयर फ़ोर्स ने जवाबी हमला किया है।
ज़ाहिर है कि इससे हमारी मीडिया के पत्रकार समुदाय विशेष को ये पसंद नहीं आ रहा, वो भी तब जब पाकिस्तान ने स्वयं ही स्वीकार कर लिया हो। भारतीय माओवंशी पत्रकार गिरोह के चुने हुए सदस्य अभी तक सबूत नहीं माँग रहे, और शायद ‘अपर कास्ट हिन्दू नेशनलिस्ट’ लोगों के ट्वीट के स्क्रीनशॉट्स लेने में व्यस्त हैं। सूत्र यह भी बताते हैं कि खूफिया मैग्जीन के पत्रकारों ने पाकिस्तान फोन लगाकर पूछा है कि पाकिस्तान के जिस हिस्से में बम गिराया गया, वहाँ के लोग किस जाति के थे।
पाकिस्तानी और आतंकियों के हिमायती पत्रकार समूह ने लोगों की भावनाओं का, उनके संवेदनाजन्य गुस्से को हिन्दू और सवर्ण जातियों से जोड़ते हुए, पुलवामा के बलिदानियों की जाति का विश्लेषण करते हुए बताया था कि राष्ट्रवाद की भावना सिर्फ इन्हीं हिन्दुओं में है, वो भी जो सिर्फ मेट्रो शहरों तक सीमित हैं। जबकि अपने इस वाहियात बात के लिए कोई प्रूफ नहीं दिया था। जबकि एक फेसबुक पोस्ट लिखकर हमें छोटे शहरों और गाँवों के लोगों के सेना प्रति कृतज्ञता और हमले के प्रति रोष की कई तस्वीरें मिलीं।
जब पुलवामा हमला हुआ था, तब पाकिस्तान ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। कुछ दिनों के बाद इमरान खान ने घिसे हुए कैसेट की तरह ‘एक्शेनेबल एविडेंस’ माँगा और एक भी बार हमलों की निंदा भी नहीं की। उसके बाद भारत ने लगातार कई क़दम उठाते हुए पाकिस्तान को आर्थिक रूप से क्षति पहुँचानी शुरू की, उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग किया, सिंधु जल समझौते पर एक्शन लिया, कश्मीरी अलगाववादियों की सुरक्षा वापस ली और 150 को गिरफ़्तार किया, कश्मीर में अर्धसैनिक बलों की 100 अतिरिक्त टुकड़ियाँ तैनात की, यासीन मलिक जैसे लोगों पर रेड की जा रही है।
इसके बाद से पाकिस्तान बिलबिलाया हुआ था, और वहाँ की मीडिया में हास्यास्पद रूप से टमाटरों की ख़रीद न होने पर अपने ‘एटमी ताकत’ होने की बात भी की गई थी। इसके साथ ही वाघा बॉर्डर पर सैकड़ों करोड़ों के माल के साथ फँसे पाकिस्तानी व्यापारियों के पास कहीं जाने को नहीं।
जब पाकिस्तान को लग गया कि इस बार शायद भारत दोबारा हर तरफ से घेर कर मारेगा, तब इमरान खान ने ‘शांति का एक मौका दीजिए‘ की अपील की थी। शांति के लिए भारत ने, और खासकर मोदी सरकार ने इतने मौक़े दिए कि उनके समर्थक और विरोधी दोनों ही उनके सीने का नाप माँगने लगे थे। लेकिन पाकिस्तान की तरफ से आतंकी हमले रुके नहीं, कश्मीर में लगातार आतंकी पनपते ही रहे।
यही कारण था कि पुलवामा हमलों के बाद पूरे देश में, छोटे से लेकर बड़े शहरों में, बच्चे-युवा-बुज़ुर्गों, सोशल मीडिया पर, स्कूलों में, हर जगह रोष था, और जवानों के बलिदान के बदले पाकिस्तानियों को सबक सिखाने की माँग की जा रही थी। लेकिन वामपंथी मीडिया को ये पसंद नहीं था। ऐसे माहौल में संवेदना और क्रोध दोनों ही एक सामान्य और सहज भाव बनकर सामने आते हैं, उस वक्त वामपंथी मीडिया गिरोह के लोगों ने जनसामान्य की भावनाओं का मजाक उड़ाया और बलिदानियों की जाति बताकर पूरे नैरेटिव को मोड़ने की कोशिश की।
हालाँकि, ये लोग भूल गए कि भारतीय नागरिक हर ऐसे मौक़े पर सेना के साथ डटकर खड़े रहते हैं, और इनके जैसे पाकिस्तान-हिमायती पत्रकारों और छद्मबुद्धिजीवियों को चुन-चुनकर लताड़ते हैं। कल ही ‘राष्ट्रीय समर स्मारक’ पर राजनीति करते हुए कपिल सिब्बल ने पूछा कि स्मारक बनाने से क्या होता है!
सुबह जब से यह ख़बर आई है, पाकिस्तानियों के ट्विटर हैंडलों को पढ़कर प्रतीत होता है कि वो ख़ौफ़ में हैं। साथ ही, जैसे-जैसे इस स्ट्राइक की डीटेल्स आ रही हैं, भारत से प्रेम करने वाले लोग संतुष्टि से सरकार को, सेना को आभार प्रकट कर रहे हैं कि ऐसा करना बहुत ज़रूरी था।
अब वामपंथी मीडिया गिरोह के धूर्त पत्रकारों का इंतजार है कि वो कैसे हमें ज्ञान देते हैं कि ‘जब पाकिस्तान शांति के लिए हाथ बढ़ा रहा है, तब हम उस पर हमला क्यों कर रहे हैं’। अब हमें वही पत्रकार, जो मोदी के सीने का नाप माँग रहे थे, बताएँगे कि शांति का कोई विकल्प नहीं, युद्ध से कुछ नहीं मिलता। मोदी विरोधी नेता और दोनों हाथों में लड्डू लेकर घूमने वाले लोगों ने सुर बदल लिए हैं।
यूजुअल सस्पैक्ट्स ने ट्वीट करते हुए सवाल उठाना शुरु कर दिया है।
If this is Balakote in KPK it’s a major incursion & a significant strike by IAF planes. However if it’s Balakote in Poonch sector, along the LoC it’s a largely symbolic strike because at this time of the year forward launch pads & militant camps are empty & non-functional.
भारत के लोग, राष्ट्रवादी लोग जो हर उम्र, जगह, जाति, धर्म और समुदाय से आते हैं, वो लगातार फेसबुक, ट्विटर और व्हाट्सएप्प के ज़रिए अपनी बातों को शेयर कर रहे हैं। इसमें आश्चर्य नहीं होगा कि एक दिन बाद माओवंशियों के गिरोह का कोई पत्रकार इस हेडलाइन के साथ आर्टिकल न लिख दे: वॉर मोंगरिंग अपर कास्ट हिन्दूज बेइंग फ़ॉर ब्लड ऑन सोशल मीडिया। मतलब, ‘युद्ध की बात करने वाले उच्च जाति के हिन्दू सोशल मीडिया पर ख़ून और हिंसा की बातें कर रहे हैं’।
ज़ाहिर है कि कोई भी राष्ट्रवादी ऐसी हेडलाइन पढ़कर आह्लादित ही होगा।
नोट: लेख सुबह 10 बजे के करीब लिखा गया था, और समय बीतने के साथ धूर्त पत्रकार मंडली अपना नैरेटिव उसी पैटर्न पर फैलाती पाई गई।
भारतीय वायुसेना की कड़ी कार्रवाई से थर्राए पाकिस्तान ने आपात बैठक बुलाई है। बता दें कि भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में घुसकर 300 के क़रीब (एबीपी न्यूज़ के आँकड़े) आतंकियों को मार गिराया है। 1000 किलो बम की वर्षा कर जैश सहित कई आतंकी संगठनों के ठिकानों को तबाह कर दिया गया। पाकिस्तान में इस कार्रवाई को लेकर हलचल तेज हो गई है। पाकिस्तान सरकार ने तत्काल आपात बैठक बुलाई है। ख़बरों के अनुसार, पाकिस्तान की हाई पॉवर्ड बैठक में कई मंत्री सहित बड़े अधिकारीगण उपस्थित रहेंगे।
.@PMOIndia in meeting discussing strike on #Pakistan. Forces have been placed on their highest alert on both sides of the LOC in #Kashmir.
ख़ुद पाकिस्तानी सेना ने भारतीय वायुसेना द्वारा सीमा पार किए जाने की खबर का सबूत दिया है। भारतीय वायुसेना ने क़रीब 12 मिराज-2000 लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल करते हुए PoK में मौजूद आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया। ख़बर है कि पाकिस्तानी आतंकी ठिकानों पर 20 मिनट से भी अधिक तक लगातार बम बरसाए गए। अभी दोनों तरफ सुरक्षाबालों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
Govt Sources to CNN-News18: Pakistan Foreign Minister, Shah Mehmood Qureshi summons emergency meeting to review the situation after Indian Air Force attack@ShereenBhan@Parikshitl
उधर टाइम्स नाउ के सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाक़ात की। बता दें कि पाकिस्तानी विदेश मंत्री क़ुरैशी ने पहले ही अपना जापान दौरा रद्द कर दिया था। इसके लिए ‘अस्थिर क्षेत्रीय हालात’ को वजह बताई गई थी। क़ुरैशी की उच्च स्तरीय बैठक के बाद इस बाबत और जानकारी मिलने की उम्मीद है। भारतीय वायुसेना ने सभी एयर डिफेंस सिस्टम को अलर्ट पर रखा है। पाकिस्तानी वायुसेना द्वारा किसी भी तरह की जवाबी कार्रवाई से निपटने के लिए ऐसा किया गया है।
इधर भारत में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी (CSS) की बैठक चल रही है। इस बैठक में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और गृह मंत्री राजनाथ सिंह भी उपस्थित हैं।
अलगाववादी नेता यासीन मलिक के घर पर राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने छापा मारा है। ख़बरों के अनुसार, सुबह साढ़े सात बजे से ही यह रेड चालू है। सूचना यह भी है कि यासीन मालिक के अलावा कई अन्य कश्मीरी अलगाववादियों के ठिकानों पर NIA की छापेमारी चालू है। मलिक को गत शुक्रवार (फरवरी 22, 2019) को गिरफ़्तार किया गया गया था। उस से पहले भारत सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सभी अलगाववादियों सहित 160 कश्मीरी नेताओं की सुरक्षा वापस ले ली थी।
NIA, meanwhile, has raided the residence of terrorist turned separatist Yasin Malik in Maisuma, Srinagar. Raid underway since 7:30am today. More details are awaited. #Kashmirpic.twitter.com/RRvqW68nFN
एक अन्य बड़ी ख़बर के मुताबिक़, भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों पर बम वर्षा कर उन्हें तबाह कर दिया। सरकार एक के बाद एक कई कड़े क़दम उठाते हुए पाकिस्तान को लगातार घेरने की कोशिश कर रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान को अलग-थलग करने से लेकर कश्मीर में अलगववादियों पर शिकंजा कसने तक- भारत ने हर तरफ से सख़्त रवैया अपना कर आतंकवाद के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई करने के संकेत दिए थे।
ताज़ा छापेमारी यासीन मलिक के श्रीनगर के मैसुमा स्थित आवास पर की जा रही है। मालिक जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट का चेयरमैन है। 52 वर्षीय मलिक कश्मीर की कथित आज़ादी की वकालत करता रहा है। उसके घर पर NIA की छापेमारी को भारत सरकार की नयी कश्मीर नीति का संकेत है। एक से एक बदलते घटनाक्रम के बीच यह साफ़ हो गया है कि सरकार इन अलगाववादियों पर अब नरम रुख नहीं रखना चाहती। मलिक पर छापेमारी ख़त्म होने के बाद इस बारे में और अधिक जानकारी मिलेगी।
एक अन्य ख़बर के मुताबिक़, मलिक के साथ-साथ अन्य अलगाववादी नेताओं मीरवाइज़ उमर फ़ारुख़, साबिर शाह, अशरफ़ सेहराई के यहाँ भी छापेमारी चल रही है। तस्वीरों में मलिक के घर के बाहर मौजूद सुरक्षाकर्मी देखे जा सकते हैं।
ताज़ा ख़बरों के अनुसार, भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान में एक बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया है। ख़ुद पाकिस्तानी सेना ने इसकी तस्दीक की है। पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ ग़फ़ूर ने एक के बाद एक ट्वीट कर भारतीय विमानों एयरक्राफ्ट्स द्वारा एलओसी लांघे जाने की बात कही है। पाकिस्तानी मेजर ने कहा:
“भारतीय एयरक्राफ्ट्स ने ज़ल्दबाज़ी से भागने के चक्कर में पेलोड खुले में गिरा दिया। मुज़फ़्फ़राबाद सेक्टर से भारतीय विमानों की घुसपैठ हुई। पाकिस्तान वायु सेना ने समय पर और प्रभावी प्रतिक्रिया देते हुए ज़ल्दबाज़ी में पेलोड जारी किया जो बचते हुए बालाकोट के पास गिर गया। कोई हताहत या नुक़सान नहीं। भारतीय वायु सेना ने नियंत्रण रेखा का उल्लंघन किया। पाकिस्तान वायु सेना ने उन्हें तुरंत काउंटर किया। भारतीय विमान वापस चले गए।”
Indian aircrafts intruded from Muzafarabad sector. Facing timely and effective response from Pakistan Air Force released payload in haste while escaping which fell near Balakot. No casualties or damage.
Indian aircrafts intruded from Muzafarabad sector. Facing timely and effective response from Pakistan Air Force released payload in haste while escaping which fell near Balakot. No casualties or damage.
हालाँकि पाकिस्तानी पत्रकारों की मानें तो भारतीय वायु सेना ने यह हमला सिर्फ LoC क्रॉस करके नहीं बल्कि पाकिस्तान के अंदर तक घुस के किया है।
Just to be clear: #Balakot is not in Azad Kashmir.
If Indian Air Force planes dropped payload in Balakot, they crossed across the LOC, and then across the entirety of Azad Kashmir, and then into Khyber Pakhtukhwa.
ANI ने वायुसेना के सूत्रों के हवाले से कहा कि भारतीय वायुसेना ने क़रीब 12 मिराज-2000 लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल करते हुए PoK में मौजूद आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया है। समाचार एजेंसी ने कहा कि भारतीय वायुसेना ने एक हज़ार किलोग्राम वजन वाले बम गिरा कर पाकिस्तानी ज़मीन पर स्थित कई आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया। आज सुबह साढ़े 3 बजे भारतीय वायुसेना के मिराज लड़ाकू विमानों के एक ग्रुप ने सीमापार में जैश के कैम्पों पर बम बरसाए।
IAF Sources: 12 Mirage 2000 jets took part in the operation that dropped 1000 Kg bombs on terror camps across LOC, completely destroying it pic.twitter.com/BP3kIrboku
IAF Sources: 12 Mirage 2000 jets took part in the operation that dropped 1000 Kg bombs on terror camps across LOC, completely destroying it pic.twitter.com/BP3kIrboku
अभी तक भारतीय वायुसेना ने आधिकारिक रूप से इसकी पुष्टि नहीं की है। लेकिन, इसके बाद से ही एयरफोर्स के बेसकैंप पर कई तरह की गतिविधियाँ देखने को मिल रही हैं। इससे पहले पाकिस्तान ने राजौरी जिले में नियंत्रण रेखा के पास सीजफायर का उल्लंघन किया था। बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी पुलवामा हमले के बाद लगातार कई बार कह चुके हैं कि दोषियों को छोड़ा नहीं जाएगा। मीडिया में भी ऐसे क़यास लगाए जा रहे थे कि भारत आतंकी ठिकानों को तबाह करने के लिए कुछ बड़ा करने वाला है।
“मानव जब जोर लगाता है, पत्थर पानी बन जाता है।” जब भी अहमद अली जैसे लोगों की कहानियों से रूबरू होता हूँ तो रामधारी सिंह ‘दिनकर’ जी द्वारा रचित ‘रश्मिरथी’ की ये पंक्तियाँ अनायास ही दिमाग में गूँज उठती हैं। भारत देश का एक सत्य यदि इसकी गरीबी, अशिक्षा और आज़ादी के वर्षों बाद भी अभाव में जीने वाली बड़ी जनसंख्या है, तो असम के रिक्शा चलाने वाले अहमद अली की कहानी भी इसका दूसरा सत्य है।
स्वामी विवेकानंद का मानना था कि प्रेरणाहीन जीवन पशु के सामान होता है और हम सबके भीतर एक नायक हमेशा विद्यमान होता है, जरुरत बस उसे जगाने की होती है। सुबह उठकर रिक्शा चलाना और शाम को लकड़ियाँ काटना अहमद अली की दिनचर्या थी। लेकिन इस दिनचर्या के बीच ही अहमद अली को एक चिंता थी, जो उन्हें दिन-रात खटकती थी और वो थी बच्चों की पढ़ाई की।
बच्चों की शिक्षा निश्चित रूप से हर माँ-बाप की चिंता हो सकती है, लेकिन मेट्रो शहरों में- सुविधा के बीच बैठे व्यक्ति और असम के एक दूरस्थ इलाके में रहने वाले व्यक्ति की इस चिंता में पीढ़ियों, सदियों से चली आ रही सामजिक उपेक्षा और आर्थिक विपन्नता का फासला होता है। ज़ाहिर सी बात है कि जिस गाँव और कस्बे ने कभी स्कूल ही नहीं देखा और सुना हो, वहाँ का एक रिक्शा चलाने वाला अहमद अली यदि अपनी अगली पीढ़ी की शिक्षा और सम्मान को लेकर चिंतित है, तो वह अवश्य ही समाज के लिए एक बड़ी प्रेरणा का विषय बन जाता है।
अहमद अली के प्रयासों को देशभर में पहचान तब मिली, जब मार्च 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ‘मन की बात’ रेडियो प्रसारण के 42वें संस्करण के माध्यम से शिक्षा के लिए किए गए उनके योगदान को जनता के सामने रखा। प्रधानमंत्री ने अपने कार्यक्रम में अहमद अली के निःस्वार्थ सेवा भाव को बड़ी ही उत्सुकता के साथ लोगों के सामने पेश किया था।
वर्ष 1970 की बात है, जब अहमद अली को पहली बार अपने बच्चों की शिक्षा और उनके जीवन स्तर को लेकर चिंता हुई। कारण था कि वो नहीं चाहते थे कि उनकी आने वाली पीढ़ी भी उसी तंगी, बदहाली और अशिक्षा के अन्धकार के बीच अपना जीवन गुजार दे। इसलिए उन्होंने अपने प्रयासों से, मेहनत मजदूरी के साथ एक ऐसे सपने की दिशा में अहर्निश प्रयास किए, जिसकी वजह से वो सारे देशवासियों के लिए मिसाल बन गए।
असम के करीमगंज जिले के मधूरबंद गाँव के रहने वाले अहमद अली अपने रिक्शे में स्कूली बच्चों को लाने और ले जाने का काम करते थे। इसी बीच उनके मन में इस विचार ने जन्म लिया कि उनके बच्चे भी ऐसा जीवन जीने का अधिकार रखते हैं, जिसमें शिक्षा हो, शिष्टाचार हो और गरीबी ना हो।
अहमद अली का मानना है कि वो इस काम के लिए प्रधानमंत्री के शुक्रगुजार हैं कि उनके कार्य को आज देशभर में सराहना मिल रही है। पिछले 4 दशकों में अहमद अली ने अपनी कड़ी मेहनत से मधूरबंद और उसके आस-पास के इलाकों में 9 स्कूलों का निमार्ण कराया। जिसमें 3 प्राथमिक स्कूल, 5 माध्यमिक स्कूल और 1 हाई स्कूल शामिल है।
पहला स्कूल बनाने के लिए अहमद अली ने अपनी ही पुस्तैनी जमीन का एक टुकड़ा बेच दिया था और दूसरा हिस्सा स्कूल के लिए दान कर दिया था। स्कूल चलाने के लिए कुछ धन अहमद अली ने अपनी मेहनत, बचत और कुछ चंदे के रूप में जुटाया। अहमद का समर्पण भाव और उनकी लगन देखकर इस काम में बहुत से ऐसे स्थानीय लोग भी उनके साथ जुड़ गए थे, जिन्होंने उनके प्रयासों की सराहना की और जिस तरह से भी वो मदद कर सकते थे उन्होंने की।
ऐसे भी दिन थे जब स्कूल चलाने के लिए आर्थिक कमी के कारण अहमद अली ने दिन में रिक्शा चलाया और रात को लकड़ी बेचने का काम किया। उस पूरे इलाके में एक भी स्कूल नहीं था और जब अहमद अली को पहली संतान हुई तब उन्हें इस कार्य की प्रेरणा भी मिली। कुछ लड़के तो शिक्षा ग्रहण करने के लिए बाहर के नजदीकी शहर चले भी जाते थे, लेकिन लड़कियाँ फिर भी स्कूल जाने से वंचित रह जाती थीं।
अहमद अली ने दृढ़ संकल्प किया और एक शिक्षा अधिकारी की मदद से वर्ष 1978 में माध्यमिक स्कूल का निर्माण किया। ये वो शिक्षा अधिकारी थे जिन्हें अहमद अली अक्सर अपने रिक्शा में बिठाकर ले जाया करते थे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब अहमद अली का ज़िक्र अपने ‘मन की बात’ रेडियो प्रसारण के माध्यम से किया, उसके बाद उन्हें समाज में अलग पहचान मिलनी शुरू हुई। नरेंद्र मोदी ने अपने प्रोग्राम में कहा था, “मुझे आपके पत्रों में पढ़ने को मिलता है कि कैसे असम के करीमगंज के एक रिक्शा-चालक अहमद अली ने अपनी इच्छाशक्ति के बल पर ग़रीब बच्चों के लिए 9 स्कूल बनवाए हैं, तब इस देश की अदम्य इच्छाशक्ति के दर्शन होते हैं।”
आज के समय में शिक्षा के लिए किए गए उनके प्रयास प्रेरणा बन चुके हैं। अहमद अली का मानना है कि यद्यपि वो स्वयं अशिक्षित हैं, लेकिन उन्होंने एक शिक्षित अशिक्षित व्यक्ति के बीच के फासले को महसूस किया है और इसी बात ने उन्हें दिशा देने का काम किया। वर्ष 1990 में यह एक हाईस्कूल में तब्दील हो चुका था, जिसमें प्रति वर्ष 100 से ज्यादा छात्र पढ़ रहे थे। लेकिन नई चुनौती अब हाईस्कूल के बाद बच्चों की शिक्षा को जारी रखना है।
82 साल के अहमद अली आज गुवाहाटी से करीब 300 किलोमीटर दूर एक गाँव में रह रहे हैं। आँकड़े चाहे कुछ भी कहें, भारत देश का एक बड़ा वर्ग अभी भी ऐसा है, जो आज भी शिक्षा, गरीबी और सामाजिक पिछड़ेपन में जी रहा है। इसके लिए हम चाहें तो शासन-प्रशासन की इच्छाशक्ति को जिम्मेदार ठहरा सकते हैं। लेकिन भारत देश में अहमद अली जैसी प्रेरणाएँ हैं, जो इस बात का उदाहरण हैं कि इस देश का नागरिक चुनौतियों से लड़ने का हौसला रखता है।
इस रविवार (फरवरी 24, 2019) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात‘ प्रोग्राम का 53वाँ एपिसोड जारी किया। अपने इस कार्यकाल में नरेंद्र मोदी ने तमाम ऐसी पहल की हैं, जिनके माध्यम से देश के हर तबके को उनसे जुड़ने का मौका मिला। इस प्रोग्राम के माध्यम से जो सबसे बड़ा वर्ग सरकार में विश्वास करने लगा है, वह समाज का वो हिस्सा है, जो हमेशा उपेक्षित महसूस करता आया था।
विगत 5 वर्षों में हमने देखा कि मीडिया गिरोह ने अपनी भूमिका प्राइम टाइम से लेकर नई-पुरानी सड़कों तक, खूब सक्रियता से निभाई। मीडिया गिरोह ने सरकार की योजनाओं को गरीब और जरूरतमंदों तक पहुँचाने से बेहतर सरकार पर आए दिन मनगढंत आरोप लगाना समझा और इस कार्य में ही पूरा दम-खम लगा दिया। कभी असहिष्णुता के ‘हैशटैग’ चर्चा में उछाले गए तो कभी लोकतंत्र की हत्या को हवा देने का प्रयास किया गया। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सफल कार्यकाल का शायद यही सबसे बड़ा कारण है कि वो अपने ध्येय से ध्यान न हटाकर सदैव लोककल्याण के लिए समर्पित रहे।
इस सरकार से पहले तक सत्तापरस्त लोग राजशाही में इतने व्यस्त हुआ करते थे कि उन्हें इस वर्ग पर ध्यान देने की कभी फुर्सत नहीं हो पाई थी। शायद यही कारण है कि जब भी प्रधानमंत्री शोषित और पिछड़े वर्ग को सम्मान और पहचान दिलाने का कार्य करते हैं तो यह मीडिया गिरोह अपने आकाओं के साथ नरेंद्र मोदी पर टूट पड़ता है। चाहे नरेंद्र मोदी को विपक्ष कितना भी घेरने का प्रयास करे लेकिन सच्चाई यह है कि वह आज एक ‘स्टेट्समैन’ और जनता के नेता हैं और भविष्य की सरकारों के लिए, चाहे वो किसी की भी हों, एक मील का पत्थर हैं।