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छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास में मिले घर को बना दिया चर्च, 25 जनजातीय लोगों के धर्मांतरण पर हिंदू संगठनों ने की कार्रवाई की माँग

छत्तीसगढ़ के बेमेतरा में सामूहिक धर्मान्तरण में जनजातीय समुदाय के 25 से ज्यादा लोगों ने ईसाई मत अपना लिया है। धर्म परिवर्तन प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने घर में हुआ है। कुछ घरों पर क्रॉस के चिन्ह भी लगे मिले हैं। घटना से नाराज हिन्दू संगठनों ने प्रशासन में शिकायत दर्ज करवाई है। आरोप है कि धर्मान्तरित लोगों को बीमारी से मुक्ति और आर्थिक स्थिति ठीक होने का लालच दिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला बेमेतरा के थाना क्षेत्र खम्हरिया का है। यहाँ के हिन्दू संगठन से जुड़े सदस्यों को वार्ड नंबर 13 में रहने वाले गोंड बिरादरी के 5 परिवारों की पूजा पद्धति और रहन-सहन में बदलाव की जानकारी मिली। इसी दौरान उन्हें पता चला कि पहले प्रार्थना के लिए रायपुर जाने वाले ये परिवार अब अपने ही घर के पास प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने एक मकान में जाने लगे हैं।

आरोप है कि इस मकान को उन सभी ने चर्च में तब्दील कर दिया है। यहाँ ईसा मसीह की रोज प्रार्थना होने की भी बातें सामने आईं। बताया जा रहा है कि धर्मान्तरित हुए परिवार पहले नाच-गाना के साथ कबाड़ आदि का काम करके अपनी आजीविका चलाते थे। हालाँकि उनके कामकाज आज भी पारम्परिक हैं, लेकिन उन सभी ने अपनी जीवन शैली बदल डाली है।

हरिभूमि ने अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में बताया है कि धर्मान्तरित हुए लोगों ने गुड्डी नाम की एक बीमार महिला को चर्च में जाने पर फायदा होने का दावा किया। साथ ही उन्होंने अपनी आमदनी बढ़ने और नशे की लत से दूर होने का भी श्रेय भी चर्च में होने वाली प्रार्थना को दिया है। ईसाई बने कुछ लोगों के नाम के तौर पर हरिभूमि ने लाम्भा सोनवानी, बासमुंद जोगी, मुरली जोगी तथा देवकी छेदैया को बताया है।

पहले ये सभी दुर्ग, रायपुर, भिलाई और कवर्धा जैसे शहरों में बने चर्च में प्रार्थना के लिए जाया करते थे। बाद में भागदौड़ से बचने के लिए इन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने एक घर को ही चर्च बना डाला। यह पूरी तहसील क्षेत्र का एकमात्र चर्च बताया जाता है। इस मकान में क्रॉस के निशान के साथ ईसाई मत की कुछ किताबें भी देखे जाने का दावा किया गया है।

हालाँकि धर्मान्तरित हुए पाँच जनजातीय परिवारों के 25 लोगों का कहना है कि उनके जाति प्रमाण पत्र अभी तक नहीं बने हैं। साथ ही वो किसी भी शासकीय योजना के लाभार्थी नहीं होने का भी दावा करते हैं। खुद को मिले लोन को भी धर्मान्तरित लोग प्रभु यीशु की कृपा बता रहे हैं। इस पैसे से उन्होंने गाड़ी की किश्त भरी है। उनका कहना है कि धर्मांतरण के बाद से उनके साथ अच्छा हो रहा है।

मामले का खुलासा होते ही हिन्दू संगठनों ने 25 सदस्यों का धर्मान्तरण करवाने वाले समूह पर कार्रवाई की माँग उठाई है। विश्व हिन्दू परिषद ने PM आवास योजना के तहत बने उन घरों को सील करने की भी माँग की है, जहाँ क्रॉस के निशान बने हुए हैं। बेमेतरा के डीएम रणवीर शर्मा ने मामले की जाँच करवा के कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

AAP विधायक की वसूली से परेशान डॉक्टर ने दी थी जान, कोर्ट ने ठहराया दोषी: सजा होते ही जाएगी प्रकाश जरवाल की विधायकी

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने आम आदमी पार्टी के विधायक प्रकाश जरवाल को दोषी पाया है। कोर्ट ने प्रकाश जरवाल को आईपीसी की धारा 306 और 120बी के तहत दोषी करार दिया है। अभी अदालत ने सजा पर फैसला नहीं सुनाया है। जल्द ही इस मामले में फैसला सुना दिया जाएगा। माना जा रहा है कि प्रकाश जरवाल को करीब 10 साल की सजा होगी, जिसके बाद उनकी विधायकी भी चली जाएगी। आम आदमी पार्टी के विधायक प्रकाश जरवाल पर एक डॉक्टर को आत्महत्या के लिए उकसाने का केस चल रहा था। डॉक्टर ने अपने सुसाइड नोट में विधायक का नाम लिखा था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोर्ट द्वारा आम आदमी पार्टी के विधायक प्रकाश जरवाल समेत कुल तीन लोगों को दोषी ठहराया गया है। आईपीसी की धारा 306 के तहत प्रकाश जारवाल को 10 साल तक की सजा हो सकती है।

राउज एवेन्यू कोर्ट में स्पेशल जज एमके नागपाल ने फैसला सुनाते हुए आप विधायक को दोषी करार दिया। आम आदमी पार्टी विधायक प्रकाश जरवाल पर डॉक्टर राजेंद्र भाटी को खुदकुशी के लिए उकसाने के आरोप लगे थे, जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें इस मामले में दोषी करार दिया। साल 2021 के नवंबर महीने में कोर्ट के एक अन्य बेंच ने आम आदमी पार्टी के विधायक के खिलाफ आरोप तय किए थे। अब इसमें कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराया है।

डॉक्टर का सुसाइड नोट

बता दें कि दिल्ली में डॉक्टर की खुदकुशी का मामला करीब 4 साल पुराना है। 18 अप्रैल 2020 को दिल्ली के नेब सराय इलाके में 52 वर्षीय डॉक्टर राजेन्द्र सिंह ने फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। मृतक के पास से एक 2 पेज का सुसाइड नोट मिला था जिसमें उन्होंने आत्महत्या के लिए इलाके के विधायक प्रकाश जरवाल और उनके सहयोगी कपिल को जिम्मेदार ठहराया था। पुलिस ने एक डायरी भी बरामद की थी, जिसमें लिखा था, “मेरा इस इलाके में एक क्लीनिक है और मेरे कुछ वाटर टैंकर दिल्ली जल बोर्ड में किराए से चलते थे, लेकिन एमएलए प्रकाश जरवाल और उसका सहयोगी कपिल नागर मुझसे हर टैंकर के हिसाब से पैसे माँगने लगे। कुछ पैसे दिए भी गए लेकिन बाद में मेरे सभी टैंकर प्रकाश जरवाल ने दिल्ली जल बोर्ड से हटवा दिया।”

सुसाइड नोट में लिखा था, “टैंकरों को दिल्ली जल बोर्ड से हटवाने के बाद जब उन्हें ओखला के दिल्ली जल बोर्ड के लगवाया गया तो टैंकरों को वहाँ से भी प्रकाश जरवाल द्वारा हटवा दिया गया।” नोट के अनुसार प्रकाश जरवाल और उसके सहयोगी से उन्हें जान से मारने की धमकी भी मिल रही थी और धमकियों के कारण उनका जीना मुश्किल हो गया था। जानकारी के मुताबिक, विधायक ने डॉक्टर से पिछले 5 सालों में 5 लाख रुपए लिए भी थे। डॉक्टर उन्हें रुपए देते रहे, ताकि उनके परिवार को परेशान न किया जाए। लेकिन, फिर भी विधायक व उनके सहयोगियों द्वारा बार-बार रुपए की माँग की गई। डॉक्टर ने सुसाइड नोट में अपनी अंतिम इच्छा यही बताई है कि विधायक व उसके साथी को कड़ी से कड़ी सज़ा दी जाए।

प्रकाश जरवाल का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की मौजूदगी में दिल्ली के तत्कालीन मुख्य सचिव अंशु प्रकाश के साथ बदसलूकी के मामले में वो गिरफ़्तार किए जा चुके हैं। इसके अलावा उन पर राजद की एक महिला के शोषण करने का भी आरोप लगा था। वो सीएम केजरीवाल के साथ ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ में भी जुड़े हुए थे।

जिस जामनगर में अनंत-राधिका की प्री वेडिंग सेरेमनी, वहाँ अंबानी परिवार ने बनवाए 14 मंदिर: भाटीगल संस्कृति का रखा ध्यान, भित्ति शैली की नक्काशी

अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट की शादी से पूर्व मुकेश अंबानी-नीता अंबानी ने गुजरात के जामनगर में 14 मंदिरों को बनवाया है। यहाँ सुंदर नक्काशी वाली देवी-देवताओं की मूर्तियाँ स्थापित की जाएगी। हाल में मुकेश अंबानी और नीता अंबानी ने इन मंदिरों के दर्शन भी किए।

जानकारी के मुताबिक अनंत की शादी से पहले अंबानी परिवार ने जामनगर के मोती खवाड़ी स्थित एक मंदिर परिसर में ये 14 मंदिर बनवाए हैं। मंदिर में भित्ति शैली की नक्काशी है और सुंदर देवी-देवताओं की मूर्तियाँ भी। मंदिर को भूली हुई भाटीगल संस्कृति को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है। सभी मंदिर भारतीय वास्तुकला और आध्यात्मिक पहचान को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं। यहाँ पीढ़ियों से चली आ रही कलात्मक विरासत देखते बनती है।

हाल ही में रिलायंस फाउंडेशन की संस्थापक और चेयरमैन नीता अंबानी ने इस मंदिर का दौरा किया था, जिसका एक वीडियो रिलायंस फाउंडेशन के आधिकारिक एक्स हैंडल पर साझा हुआ था। वीडियो के साथ पोस्ट में इसे अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट की शादी की शुभ शुरुआत कहा गया।

इस वीडियो में दिखा था कि नीता अंबानी ने मंदिर परिसर का दौरा करके वहाँ पर भक्तों और कारीगरों से भी बात की थी। मूर्तिकारों को इस वीडियो में कहते सुना गया था कि उन्हें बहुत ही शुभ अवसर पर बुलाया गया है, ऐसा लग रहा है कि वह खुद इस शादी का हिस्सा हैं। वीडियो में जानकारी दी जा रही है कि मंदिर बनाने वालों में अलग-अलग समुदाय के लोग हैं।

जामनगर में अनंत-राधिका की प्री-वेडिंग

गौरतलब है कि अनंत और राधिका की शादी से पहले अंबानी परिवार ने जामनगर में प्री-वेडिंग कार्यक्रम रखे हैं। इस भव्य आयोजन में देश-विदेश से कई लोगों को आमंत्रित किया गया है। ये प्री-वेडिंग सेरेमनी 1 से 3 मार्च तक आयोजित की जाएगी। पूरा कार्यक्रम जामनगर के रिलायंस ग्रीन्स कॉम्प्लेक्स में होगा। ऐसा कहा जाता है कि इस परिसर में लगभग एक करोड़ पेड़ लगाए गए हैं। एशिया की सबसे बड़ी अंबावाड़ी भी यहीं है।

इस प्री-वेडिंग फंक्शन में विदेश से भी कई मशहूर हस्तियाँ शामिल होंगी। इस सूची में बैंक ऑफ अमेरिका के सीईओ ब्रायन थॉमस, कतर के पीएम मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान बिन जसीम अल थानी, एडीएनओसी के सीईओ सुल्तान अहमद अल जबीर, फॉरेस्ट डी रोथ्सचाइल्ड के चेयरमैन एल रोथ्सचाइल्ड, भूटान का शाही परिवार, तकनीकी निवेशक यूरी मिलनर, एडोब के सीईओ शांतनु नारायण शामिल हैं। इसके अलावा लूप सिस्टम्स के सीईओ जेम्स मर्डोक, हिलहाउस कैपिटल के संस्थापक झांग लेई, एक्सोर के सीईओ जॉन अल्केन और ब्रुकफील्ड एसेट मैनेजमेंट के सीईओ ब्रूस फ्लैट शामिल हैं।

दवा लेने आई नाबालिग, आसिफ ने शटर गिराकर किया रेप: लाइसेंस दवा दुकान का, फिर भी ‘डॉक्टर’ बन करता था इलाज

उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर में एक नाबालिग लड़की से रेप का मामला सामने आया है। यह आरोप मोहम्मद आसिफ नाम के एक फर्जी डॉक्टर पर लगा है, जिसकी क्लिनिक में पीड़िता इलाज के लिए गई थी। रेप के बाद आसिफ ने पीड़िता को जान से मारने की धमकी देते हुए अपना मुँह बंद रखने के लिए कहा। घटना रविवार (25 फरवरी 2024) की बताई जा रही है।

पुलिस ने FIR दर्ज करके मामले की जाँच शुरू कर दी है। केस दर्ज होने के बाद से आसिफ फरार है और उसकी तलाश में दबिश दी जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना मुज़फ्फरनगर के थाना क्षेत्र बुढ़ाना की है। यहाँ के एक गाँव की रहने वाली महिला ने 26 फरवरी 2024 (सोमवार) को अपनी 14 साल की बेटी के साथ हुए दुष्कर्म की शिकायत दर्ज करवाई है।

शिकायत में पीड़िता ने बताया कि रविवार को उसकी बेटी की तबियत खराब थी। इलाज के लिए वो अकेली ही पास की एक क्लिनिक में दवा लेने गई थी। यह क्लिनिक डॉक्टर का फर्जी काम करने वाले आसिफ की थी। आसिफ क्लिनिक में अकेला था। उसने लड़की को अंदर बुलाया और खाने के लिए कोई दवा दी। इसके बाद आसिफ ने क्लिनिक का शटर गिराकर पीड़िता से रेप किया।

आरोप के मुताबिक, जब पीड़िता वापस लौटने लगी तब उसने जान से मारने की धमकी दी और अपना मुँह बंद रखने को कहा। घर आकर लड़की ने सारी बात अपने परिजनों को बताई। अगले दिन 26 फरवरी को पीड़िता की माँ ने बुढ़ाना कोतवाली में डॉक्टर आसिफ के खिलाफ केस दर्ज करवाया। पुलिस ने पॉक्सो एक्ट सहित कई अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया, जिसके बाद वह फरार हो गया।

मुजफ्फरनगर के ड्रग्स इंस्पेक्टर पवन शाक्य ने मीडिया को बताया कि मोहम्मद आसिफ के पास मेडिकल स्टोर चलाने का लाइसेंस है, लेकिन उसके पास डॉक्टरी की प्रैक्टिस का कोई अधिकृत प्रमाण पत्र नहीं है। बता दें कि प्रैक्टिस का प्रमाण पत्र नहीं होने के बावजूद वह लोगों को उनकी बीमारियों के लिए दवाइयाँ देता था।

फुगाना के डिप्टी एसपी रवि शंकर मिश्रा ने कहा है कि आरोपित की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमों का गठन किया गया है। उन्होंने कहा कि नाबालिग पीड़िता का मेडिकल परीक्षण करवाया जा रहा है। साथ ही पीड़ित लड़की की काउंसलिंग भी करवाई जा रही है। लड़की के परिजनों ने आरोपित डॉक्टर पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। आरोपित और पीड़िता दोनों एक ही समुदाय के बताए जा रहे हैं।

25 कौआ, 20 कुत्ता, 3 बिल्ली… बकरी की मौत का बदला महिला ने 50 पशु-पक्षियों को मारकर लिया, सबको जहर खिलाया

ओडिशा के जगतसिंहपुर जिले में एक महिला द्वारा कई पशु-पक्षियों को जहर देकर मारने की खबर सामने आई है। इस महिला की उम्र 45 है और इसका नाम दुखी बारिक है। महिला पर आरोप है कि उसने ऐसा अपनी पालतू बकरी की मौत का बदला लेने के लिए किया था। मृत पशु-पक्षियों में कुत्ते, बिल्ली और कौवे हैं शामिल हैं। इनके शव अलग-अलग इलाकों में बिखरे पाए गए थे।

इस घटना से स्थानीय लोगों में नाराजगी है और आरोपित के खिलाफ कार्रवाई की माँग की जा रही है। पुलिस ने महिला के खिलाफ FIR दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है। अभी तक आरोपित की गिरफ्तारी की सूचना नहीं है। बखरपुर के नारायण नंदा ने अपने साथ कई ग्रामीणों को ले कर तिर्तोल थाने में महिला के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना जगतसिंहपुर जिले के थाना क्षेत्र तिर्तोल की है। यहाँ के गाँव बखरपुर में दुखी बारिक की पालतू बकरी पर सोमवार (26 फरवरी 2024) को एक आवारा कुत्ते ने हमला कर दिया था। इस हमले में बकरी की मौत हो गई थी। बताया जा रहा है कि महिला अपनी बकरी की मौत से काफी दुखी हुई।

बकरी की मौत उस महिला के लिए बहुत बड़ा नुकसान था। इसकी भरपाई न होने पर महिला ने आवारा कुत्तों से बदला लेने का मन बना लिया। उसने खाने में जहर डालकर उसे आसपास के जानवरों में बाँट दिया। इस जहरीले खाने को कुत्तों के अलावा बिल्लियों और कौवों ने भी खाया। इसके कारण उनकी मौत हो गई।

अब तक मिली जानकारी के मुताबिक, जहर के प्रभाव से 25 कौवे, 20 कुत्ते और 3 बिल्लियों की मौत हो गई है। मंगलवार (27 फरवरी) को इनके शव चतरा, बखरपुर, अमीरपुर और तिर्तोल के अलग-अलग हिस्सों में पाए गए हैं। इस घटना की जानकारी होते ही स्थानीय लोगों में नाराजगी फ़ैल गई। लोगों ने आरोपित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की।

शिकायतकर्ता नारायण नंदा ने बताया है कि जहर को महिला ने अपनी ही मरी बकरी के मांस में डालकर इधर-उधर फेंका था। इस घटना पर प्रभारी इंस्पेक्टर (आईआईसी) अभिमन्यु नायक ने बताया कि केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी गई है। मौत के कारणों की जाँच के लिए मृत पशु-पक्षियों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है।

एक्स्ट्रा सीटें जीत BJP ने राज्यसभा का गणित बदला, बहुमत से NDA अब 4 सीट ही दूर: जानिए उच्च सदन में किसकी कितनी ताकत

देश भर में राज्यसभा की 56 सीटों के लिए मंगलवार को चुनाव हुए। इसमें से बहुत सारे सीटों (41) पर उम्मीदवारों को निर्विरोध चुना गया, लेकिन तीन राज्यों उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक में 15 सीटों के लिए चुनाव कराने पड़े। इन 56 सीटों में से बीजेपी को 30 सीटों पर जीत मिली, जिसमें 20 निर्विरोध चुने गए, तो 10 को चुनाव के जरिए जीत मिली। उत्तर प्रदेश में बीजोपी को 8 सीटों पर, तो हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक में एक-एक सीटों पर जीत मिली। इसी के साथ बीजेपी ने राज्यसभा में बहुमत की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। इस समय राज्यसभा में बीजेपी के पास 97 सीटें हो गई हैं, और वो सबसे बड़ी पार्टी है। हालाँकि एनडीए अभी भी बहुमत में नहीं है और वो राज्यसभा में बहुमत के लिए 121 सदस्यों से 4 कम यानी 117 सीटों पर है।

इन राज्यों में हुए चुनाव, बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी

राज्यसभा की जिन 56 सीटों के लिए चुनाव हुए, उनमें से उत्तर प्रदेश से 10 सीटें, महाराष्ट्र और बिहार से 6-6 सीटें, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश से 5-5 सीटें, गुजरात और कर्नाटक से 4-4 सीटें और आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, राजस्थान और ओडिशा से तीन-तीन सीटें और 1-1 सीट उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश से थी। इसमें उत्तर प्रदेश की 10 में से 8 सीटों पर बीजेपी, 2 सीटों पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवारों को जीत मिली।

महाराष्ट्र में बीजेपी को तीन, कॉन्ग्रेस को एक, एनसीपी (अजीत पवार गुट) को एक और शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) को एक सीट पर जीत मिली। बिहार की 6 सीटों में से बीजेपी के 2 सांसद, जेडीयू के एक सांसद, कॉन्ग्रेस के एक सांसद और आरजेडी के 2 सांसद जीते। पश्चिम बंगाल में 4 पर टीएमसी तो एक पर बीजेपी को जीत मिली। मध्य प्रदेश में बीजेपी को 4 तो कॉन्ग्रेस को एक सीट पर जीत मिली। गुजरात में बीजेपी ने चारों सीटें जीती, तो कर्नाटक में बीजेपी को एक और कॉन्ग्रेस को तीन सीटों पर जीत मिली।

आंध्र प्रदेश में तीनों सीटें वाईएसआरसीपी को मिली, तो तेलंगाना में कॉन्ग्रेस को दो और एक सीट बीआरएस को मिली। राजस्थान में कॉन्ग्रेस को एक सीट तो बीजेपी को 2 सीटों पर निर्विरोध जीत मिली। ओडिशा से बीजेपी को 1 तो बीजेडी को 2 सीटें मिली। उत्तराखंड, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और छत्तीसगढ़ से बीजेपी को सभी एक-एक सीट पर जीत मिली।

ये है राज्यसभा में पार्टियों के हिसाब से सीटों का गणित

राज्यसभा में किसी भी हाल में अधिकतम सदस्यों की संख्या 250 की होती है, लेकिन अभी के हिसाब से ये संख्या 245 है। इसमें 233 का चुनाव राज्य की विधानसभाओं के जरिए होती है, तो 12 को राष्ट्रपति नामांकित करते हैं। हालाँकि इस समय 5 सीटें खाली हैं, जिसमें चार सीटें जम्मू-कश्मीर की हैं, तो एक नामांकन वाली सीट भी खाली है। इस तरह से सदन में अभी कुल संख्या 240 सांसदों की हो गई है, जिसमें बहुमत के लिए 121 सीटों की जरूरत है। नामांकित 12 सदस्यों में से अभी 11 सदस्य ही हैं, जिसमें से 5 बीजेपी में शामिल हो चुके हैं। इन नामांकित सदस्यों की संख्या मिलाकर कुल 97 सांसद बीजेपी के पास हैं।

एनडीए की बात करें तो अभी कुल 117 सांसद एनडीए के खेमे में हैं। जिसमें 97 सांसद बीजेपी के हैं, तो जेडीयू के 5, दो निर्दलीय और जेडीएस, एनसीपी(अजित पवार), आरएलडी, पीएमके, एजीपी, एमएनएफ, टीएमसी (एम), एनपीपी, आरपीआई (ए), यूपीपीएल के एक-एक सांसद हैं। कॉन्ग्रेस और उसके गठबंधन की बात करें तो इस खेमे में 92 सांसद हैं। विपक्षी गठबंधन में सबसे ज्यादा 29 सांसद कॉन्ग्रेस के, टीएमसी के 13 सांसद, डीएमके और आप के 10-10 सांसद हैं। आरजेडी के 6 सांसद, सीपीएम के 5 सांसद हैं।

राज्य सभा के 240 सांसदों में 30 सांसद किसी भी खेमे में नहीं हैं। ये 30 सांसद सबसे ज्यादा वाईएसआरसीपी और बीजेडी के 9-9, बीआरएस के 7, एआईएडीएमके के तीन, टीडीपी के एक और बीएसपी के 1 सांसद हैं। इनमें से बीजेडी-वाईएसआरसीपी के सांसद मुद्दों पर अधिकतर समय सरकार के साथ दिखते हैं। यही वजह है कि राज्यसभा में बहुमत से चार सीटों के कम आँकड़ों के बावजूद सरकार का कोई काम नहीं रुकता है।

राज्यसभा में चुनाव का गणित क्या है?

भारत के संसद में दो सदनों की व्यवस्था है। एक लोकसभा और दूसरा राज्यसभा। लोकसभा में सांसद जनता द्वारा सीधे तौर पर चुने जाते हैं। इसे आम सदन भी कहा जाता है। वहीं, राज्य सभा को उच्च सदन कहते हैं। इनमें चुने जाने के लिए निश्चित योग्यता की जरूरत होती है। हालाँकि राज्यसभा के लिए चुनाव अपरोक्ष तरीके से होता है। इसका मतलब है कि इस सदन के लिए जनता नहीं, बल्कि जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि ही वोट डालते हैं। ये प्रतिनिधि राज्यों की विधानसभा से होते हैं। ध्यान रहे, विधानसभा, न कि विधानपरिषद। चूँकि विधानपरिषद के लिए भी लोग सीधे जनता द्वारा नहीं चुने जाते हैं, ऐसे में राज्यसभा के लिए सिर्फ जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि ही वोट डालते हैं। हर राज्य में राज्यसभा सीट के लिए वोटिंग का फॉर्मूला भी अलग होता है।

इसे इस बात से समझें कि राज्य की राज्यसभा की खाली सीटों में एक जोड़कर उससे कुल विधानसभा सीटों में भाग दिया जाता है और फिर उसमें एक जोड़ दिया जाता है। विधायकों को एक पर्जी पर अपनी पसंद के हिसाब से वरीयता बतानी होती है। हर विधायक का वोट एक बार ही गिना जाता है। प्राथमिकता के आधार पर विधायक को बताना होता है कि उसकी पहली पसंद कौन है, दूसरी कौन। पहली पसंद के वोट जिसे ज्यादा मिलेंगे, वही जीत जाएगा।

उदाहरण के लिए उत्तर प्रदेश को सामने रखते हैं। यहाँ 10 सीटों पर चुनाव हुए। उत्तर प्रदेश की विधानसभा में 403 सीटें होती हैं। ऐसे में सभी सदस्यों के वोट की कुल ताकत 100 के बराबर होती है। इस तरह से उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए कुल 403X100=40,300 वोट हुए। अब इसे 10 सीटों+1=11 से भाग देंगे, तो संख्या आती है 3663। यानी उत्तर प्रदेश में हर सीट के लिए 36+ वोट यानी 37 वोटों की जरूरत पड़ती है। ये 37 वोट 37 विधायकों के हुए। इस तरह से अगर प्रथम वरीयता के वोटों से ही जीत मिल जाती है, तो 37-37 विधायकों के हिसाब से बीजेपी को 7 सीटें सीधे तौर पर मिल गईं। आठवीं सीट के लिए सपा के बागी विधायकों, बीएसपी विधायक, राजा भैया के विधायकों ने वोट बीजेपी के पक्ष में किया और बीजेपी को 10 में से 8 सीटों पर जीत मिल गई।

1979 में DDA फ्लैट के लिए भरा फॉर्म, 45 साल बाद घर मिलने का आया मौका: दिल्ली हाई कोर्ट को देना पड़ा दखल

दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बाद एक व्यक्ति की 45 वर्ष पुरानी आकांक्षा पूरी हो गई। दरअसल, ईश्वर चंद जैन सन 1979 में दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) की नई पैटर्न पंजीकरण योजना (एनपीआर योजना) के तहत निम्न आय समूह (LIG) फ्लैट के लिए आवेदन किया था। इतने साल गुजर जाने के बाद भी उन्हें इसका आवंटन नहीं किया गया था।

इस मामले पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने डीडीए को निर्देश दिया कि वह जैन को चार सप्ताह के भीतर उस दर पर फ्लैट प्रदान करे, जो वर्ष 1996 में फ्लैट के आवंटन की तारीख पर प्रचलित थी। कोर्ट ने कहा कि अधिकांश दिल्ली वासियों का सपना है कि उनके नाम पर शहर में एक संपत्ति हो, लेकिन डीडीए की यह विफलता दुर्भावनापूर्ण, मनमाना और कदाचार के समान है।

एनपीआर योजना के तहत वही व्यक्ति डीडीए फ्लैट के लिए पात्र था, जिसके पास पति, पत्नी, उसके नाबालिग या आश्रित बच्चे, आश्रित माता-पिता, नाबालिग भाई एवं बहनों के नाम पर लीजहोल्ड या फ्रीहोल्ड आधार पर पूर्ण या आंशिक रूप से कोई आवासीय घर या प्लॉट नहीं है। ईश्वर चंद जैन ने इस योजना में 3 अक्टूबर 1979 को आवेदन किया था।

ईश्वर चंद जैन के आवेदन के बाद उन्हें जुलाई 1980 में पंजीकरण का प्रमाण पत्र जारी किया गया था। योजना के लगभग 17 वर्षों के बाद डीडीए ने मार्च 1996 में एक ड्रॉ आयोजित किया था। इस ड्रॉ में ईश्वर चंद जैन को दिल्ली के रोहिणी इलाके में एक फ्लैट के लिए सफल घोषित किया गया। इसके बाद आगे की कार्रवाई शुरू की गई।

आगे चलकर डीडीए ने याचिकाकर्ता को उनके पते नंबर-3 पर एक डिमांड सह आवंटन पत्र (डीएएल) जारी किया था, लेकिन याचिकाकर्ता इस राशि का भुगतान करने में विफल रहा। हालाँकि, कोर्ट ने माना कि डीएएल को इस पते पर भेजना निरर्थक था, क्योंकि जैन ने 1988 में प्राधिकरण को सूचित किया था कि उनका नया पता अब हिसार में है।

कोर्ट ने कहा, “डीडीए के रिकॉर्ड में सही पता होने के बावजूद याचिकाकर्ता को गलत पते पर भेजा गया डीएएल कानून की नजर में कोई माँग नहीं है। डीडीए पर यह दायित्व है कि वह याचिकाकर्ता को नए दिए गए पते पर डीएएल जारी करे, जो डीडीए के रिकॉर्ड पर अंतिम ज्ञात पता था।”

इसलिए, अदालत ने डीडीए को आदेश दिया कि वह जैन को 1996 में उस समय प्रचलित दरों पर फ्लैट का आवंटन करे। अदालत में जैन की ओर से अधिवक्ता प्रवीण कुमार अग्रवाल और अभिषेक ग्रोवर पेश हुए, जबकि डीडीए का प्रतिनिधित्व अधिवक्ता अजय ब्रह्मे ने किया।

हिमाचल के CM ने इस्तीफे से किया इनकार, पर मंत्री विक्रमादित्य ने पद छोड़ बढ़ा दिया दर्द: बीजेपी के 15 MLA सस्पेंड

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अपने पद से इस्तीफा देने की खबरों को नकार दिया है। सुखविंदर सिंह के कॉन्ग्रेस विधायकों की नाराजगी के चलते इस्तीफ़ा देने की खबर पहले आई थी। इससे कुछ देर पहले हिमाचल प्रदेश विधानसभा की कार्यवाही से नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर समेत 15 भाजपा विधायकों को निलंबित कर दिया गया। भाजपा ने विधानसभा में मतों के विभाजन की माँग की थी। स्पीकर ने उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया था। उन्हें मार्शलों ने घेर लिया जिसके बाद वह विधानसभा से निकाल दिए गए थे।

हिमाचल विधानसभा स्पीकर ने भाजपा विधायक जयराम ठाकुर,विपिन परमार, रणधीर शर्मा, लोकेन्द्र कुमार, विनोद कुमार, हंस राज, जनक राज, बलबीर वर्मा, त्रिलोक जमवाल, सुरेन्द्र शौरी, दीप राज, पूर्ण चन्द्र, इंद्र सिंह गाँधी, दलीप ठाकुर और रणवीर सिंह को निलंबित किया है।

CM सुक्खू के इस्तीफे की खबर से कुछ देर पहले ही हिमाचल कॉन्ग्रेस के बड़े नेता और पूर्व CM वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य सिंह ने भी सरकार से इस्तीफ़ा दे दिया था। उन्होंने सरकार में अनसुनी का आरोप लगाते हुए या इस्तीफ़ा पेश किया था। उनका कहना था कि विधायकों की बात नहीं सुनी जा रही और अब आगे का निर्णय पार्टी हाईकमान करेगा।

गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश में यह सियासी उथलपुथल कल (27 फरवरी, 2024) के राज्यसभा चुनाव के बाद चालू हुई है। कल सम्पन्न हुए चुनाव में भाजपा प्रत्याशी की जीत हुई थी। इस चुनाव में कॉन्ग्रेस के 6 और 3 निर्दलीय ने भी भाजपा का समर्थन किया था। यह 9 विधायक आज विधानसभा भी पहुँचे थे। इन्होने बाहर मीडिया से बताया कि वह भाजपा के साथ हैं।

भाजपा ने राज्यसभा वोटिंग के बाद कॉन्ग्रेस सरकार के अल्पमत में होने की बात कही थी और विधानसभा में चल रहे बजट सत्र में वोटिंग के दौरान मत विभाजन की माँग की थी। भाजपा विधायकों ने स्पीकर पर पक्षपातपूर्ण कार्यवाही करने का आरोप लगाया था। दिसम्बर 2022 में कॉन्ग्रेस हिमाचल प्रदेश में सत्ता में आई थी। कॉन्ग्रेस ने राज्य में 40 सीट जीती थी। 3 सीट निर्दलीय जबकि विपक्षी भाजपा ने 25 सीट पर विजय हासिल की थी।

हालाँकि अब 14 महीने बाद परिस्थितियाँ बदल गई हैं। हिमाचल कॉन्ग्रेस में CM सुक्खू के प्रति काफी नाराजगी थी, उनका इस्तीफा लिए जाने की बात हो रही थी। कल से चालू हुए राजनीतिक संकट के बाद स्थानीय कॉन्ग्रेस विधायकों ने सुक्खू की जगह पर किसी और को मुख्यमंत्री बनाने की माँग की है। अब उनका इस्तीफ़ा सामने आया है।

कॉन्ग्रेस ने यहाँ स्थिति संभालने के लिए कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा को भेजा है। वह यहाँ डैमेज कंट्रोल की कोशिश में जुटे हैं। दूसरी तरफ भाजपा के विजयी राज्यसभा उम्मीदवार हर्ष महाजन ने कहा है कि उनके सम्पर्क में कई कॉन्ग्रेस विधायक और हैं और जल्द ही राज्य में भाजपा की सरकार बनेगी।

नुसरत जहाँ ने संदेशखाली की पीड़िताओं को छोड़ा बेसहारा, ‘धारा 174’ का बना रहीं बहाना: पार्टी-फोटो, सोशल मीडिया में बिजी हैं TMC की सांसद

पश्चिम बंगाल के बशीरहाट की तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) सांसद नुसरत जहाँ को संदेशखाली की पीड़िताओं के दर्द से कोई फर्क नहीं पड़ रहा। वह इस समय भी कोलकाता के फिल्म कार्यक्रमों को प्राथमिकता दे रही हैं न कि संदेशखाली को। उनसे जब अब तक संदेशखाली न जाने की वजह पूछी गई तो उन्होंने बड़ा अजीब जवाब दिया।

नुसरत जहाँ हाल में ‘बंगाल नेशनल प्राइड’ कार्यक्रम में शामिल होने गई थीं। इस कार्यक्रम में वह लाल साड़ी और बड़े-बड़े ईयरिंग पहन पहुँचीं। वहाँ मीडिया से मुखातिब होते वक्त उनसे एक पत्रकार ने उनसे पूछ लिया कि वो अब तक संदेशखाली क्यों नहीं गईं, तो इस पर कोई संवेदनशील बयान देने की बजाय उन्होंने कहा कि अभी संदेशखाली में 174 धारा लागू है इसलिए वह वहाँ नहीं जा सकतीं।

दिसचस्प बात तो ये है कि जहाँ नुसरत जहाँ ऐसे बयान दे रही हैं। वहीं दूसरी ओर अन्य पार्टियों के नेता हर हाल में पीड़िताओं से मिलने के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं।

खैर, नुसरत जहाँ ने ऐसा पहली बार नहीं किया है। संदेशखाली का जब मामला ताजा-ताजा उठा था और पूरा देश महिलाओं के साथ हुए अत्याचारों की बात जानकर सन्न था, उस समय भी टीएमसी सांसद इस मुद्दे पर बोलने की बजाय इंस्टाग्राम पर एक्टिव थीं और अपने अलग-अलग इवेंट की फोटोज-वीडियो डाल रहीं थीं।

उनके इंस्टा अकॉउंट को खँगालने पर पता चलता है कि कुछ दिन पहले ही वो ‘कलकत्ता टाइम्स फूड गाइड पार्टी’ में कैमरे के आगे पोज दे रही थीं। उससे पहले भी वो किसी न किसी ब्रांड के लिए फोटोशूट करती बार-बार देखी गई थीं।

लेकिन, 8 फरवरी से लेकर अब तक एक भी बार उन्होंने संदेशखाली पर कुछ नहीं बोला। उनके सोशल मीडिया पर भी इस संबंध में कोई पोस्ट नहीं देखने को मिलता। उलटा जब विपक्षी नेताओं ने उनकी इस चुप्पी पर सवाल किया था तो इससे पहले उन्होंने जवाब दिया था कि वो लोग आग में घी डाल रहे हैं।

उन्होंने कहा था- “ऐसी गंभीर स्थिति में किसी को भी दूसरों को उकसाना नहीं चाहिए बल्कि एकजुट होकर राज्य प्रशासन का समर्थन करना चाहिए। राज्य सरकार वह कर रही है जिसकी जरूरत है और अधिकारी स्थानीय लोगों की अथक सहायता कर रहे हैं। इस घटना का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। हमारा काम आग बुझाना है। आग में घी डालना नहीं। एक जन प्रतिनिधि के तौर पर मैं लगातार अधिकारियों के संपर्क में हूँ।”

बंगाल पुलिस की ‘सेफ कस्टडी’ में है शाहजहाँ शेख, मोबाइल के साथ पंचसितारा इंतजाम भी मिला: ‘संदेशखाली के हैवान’ पर सुवेंदु अधिकारी का दावा

पश्चिम बंगाल के कुख्यात संदेशखाली मामले में वांछित सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) का नेता शाहजहाँ शेख को बंगाल पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। बंगाल पुलिस ने शाहजहाँ को मंगलवार-बुधवार (27-28 फरवरी 2024) की रात 12 बजे उसे हिरासत में ले लिया। बंगाल भाजपा के नेता सुवेंदु अधिकारी ने ये दावा किया है।

सुवेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की बंगाल पुलिस ने शाहजहाँ को अपनी सेफ कस्टडी में लिया है। इसके साथ ही प्रभावशाली मध्यस्थों के माध्यम से पुलिस के साथ समझौते के बाद उसे बरमजुर-2 ग्राम पंचायत से दूर ले जाया गया है। भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि पुलिस ने ऐसा इसलिए किया, ताकि उसकी पुलिस और न्यायिक हिरासत के दौरान उचित देखभाल की जा सके।

सुवेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया साइट X पर अपने पोस्ट में कहा, “संदेशखाली का बदमाश शेख शाहजहाँ कल रात 12 बजे से ममता पुलिस की सुरक्षित हिरासत में है। प्रभावशाली मध्यस्थों के माध्यम से ममता पुलिस के साथ एक समझौते के बाद, उसे बरमजुर-II ग्राम पंचायत क्षेत्र से दूर ले जाया गया, ताकि पुलिस और न्यायिक हिरासत में रहने के दौरान उनकी उचित देखभाल की जाएगी।”

अपने ट्वीट में उन्होंने आगे कहा, “सलाखों के पीछे रहने के दौरान उसे 5 सितारा सुविधाएँ दी जाएँगी और उसके पास एक मोबाइल फोन भी होगी। इसके माध्यम से वह ‘तोलामूल पार्टी’ का नेतृत्व करने में सक्षम होगा। यहाँ तक कि वुडबर्न वार्ड में एक बिस्तर भी उसके लिए तैयार और खाली रखा जाएगा, ताकि वह चाहे तो वहाँ कुछ समय बिता सके।”

बता दें कि दो दिन पहले कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा था कि संदेशखाली के आरोपित शाहजहाँ शेख को फरारी को लेकर कड़ा रूख अपनाया था और राज्य की ममता बनर्जी सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी। हाई कोर्ट ने कहा कि शेख शाहजहाँ के खिलाफ 4 साल से शिकायतें आ रही हैं। अब तक 42 चार्जशीट दाखिल हो चुके हैं, इसके बावजूद उसे गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया? 

हाई कोर्ट ने कहा था कि आरोपित को तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए। हाई कोर्ट के सख्त रुख को देखते हुए टीएमसी के प्रवक्ता कुणाल घोष ने शेख शाहजहाँ की गिरफ्तारी को लेकर बात कही। उन्होंने कहा था कि शेख शाहजहाँ को 7 दिनों के भीतर गिरफ्तार कर लिया जाएगा। वहीं, हाई कोर्ट ने यह भी कहा था कि शाहजहाँ के खिलाफ कोई स्टे ऑर्डर नहीं है।

अदालत ने कहा कि यह लोगों में भ्रम फैलाया जा रहा है कि कोर्ट ने शाहजहाँ की गिरफ्तारी पर स्टे ऑर्डर दिया है। दरअसल, रविवार (25 फरवरी 2024) की शाम को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सांसद भतीजे अभिषेक बनर्जी ने कहा था कि कोर्ट के ऑर्डर की वजह से शेख शाहजहाँ को पुलिस गिरफ्तार नहीं कर रही है।

इसके बाद मंगलवार (27 फरवरी 2024) को पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में पुलिस ने शाहजहाँ शेख के करीबी TMC नेता अजित मैती को गिरफ्तार कर लिया है। उस पर जमीन हड़पने के आरोप हैं। 23 फरवरी को भीड़ ने अजीत मैती के घर हमला कर दिया था और उसे चप्पलों से पीटा था।

दरअसल, सुंदरबन के टापू पर बसे संदेशखाली में महिलाओं ने TMC नेता शाहजहाँ शेख पर यौन उत्पीड़न, जमीन हड़पने, मजदूरी छिनने और मारपीट सहित कई तरह के गंभीर आरोप लगाए थे। महिलाओं का कहना है कि शाहजहाँ शेख जिसे महिला को चाहे उसे अपनी हवस का शिकार बनाता था। इससे पहले शाहजहाँ शेख के घर पर ED ने राशन घोटाला मामले में रेड डाली थी। तब से वह फरार है।