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‘शिव मंदिर है अजमेर दरगाह, हो ASI सर्वे’: हिंदू संगठन ने की माँग तो मुस्लिमों ने करा दी ‘भावनाएँ आहत’ होने की FIR, अल्पसंख्यक आयोग भी एक्टिव

राजस्थान के अजमेर स्थित ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह को पूर्व का हिन्दू मंदिर बताते हुए इसका ASI से सर्वे कराने की माँग पर विवाद खड़ा हो गया है। दरगाह से जुड़े 2 सदस्यों ने इस मामले में 2 अलग-अलग FIR दर्ज करवाई है। राज्य अल्पसंख्यक आयोग ने भी मंगलवार (27 फरवरी 2024) को ऐसी माँगों को 2 समुदायों के बीच नफरत फैलाने वाला बताते हुए पुलिस से कार्रवाई की रिपोर्ट 7 दिनों के भीतर तलब की है। आयोग ने कार्रवाई के लिए प्रदेश के DGP से भी मुलाकात की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अजमेर दरगाह के दीवान के बेटे नसरुद्दीन चिश्ती ने इस मामले में दरगाह थाने में मुकदमा दर्ज करवाया है। मुकदमा में उन्होंने हिन्दू शक्ति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सिमरन गुप्ता को आरोपित किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि सिमरन गुप्ता ने पंकज सहित अपने अन्य साथियों के साथ एक वीडियो बनाकर अजमेर दरगाह के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की है। उन्होंने इसे मज़हबी भावनाओं को आहत करने वाला बताते हुए कार्रवाई की माँग की है।

इसके अलावा, अजमेर दरगाह का एक प्रतिनिधिमंडल राज्य अल्पसंख्यक आयोग से भी मिला। मुलाकात में प्रतिनिधिमंडल ने हिन्दू शक्ति दल के सदस्यों के बयानों को आपत्तिजनक बताते हुए कार्रवाई की माँग की। इस मुलाकात के बाद राजस्थान राज्य अल्पसंख्यक आयोग ने अजमेर के जिलाधिकारी को एक ज्ञापन भेजकर सिमरन गुप्ता और उनके साथियों पर हुई कार्रवाई की रिपोर्ट तलब की है। जवाब देने के लिए डीएम अजमेर को 7 दिनों का समय दिया गया है।

ज्ञापन में एक सप्ताह पहले अजमेर दरगाह के एक खादिम शकील अब्बासी द्वारा सिमरन गुप्ता और उनके साथियों पर क्लॉक टॉवर थाने में दर्ज FIR का भी जिक्र किया गया है। उसमें की गई कार्रवाई की जानकारी माँगी गई है। इसके बाद राज्य अल्पसंख्यक आयोग का एक प्रतिनिधि मंडल मंगलवार (27 फरवरी 2024) को राजस्थान के DGP यूआर साहू से मिला। मुलाकात के बाद प्रतिनिधमंडल को आश्वासन मिला कि जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ निष्पक्षता से कार्रवाई की जाएगी।

ये है हिन्दू शक्ति दल की माँग

बताते चलें कि 23 फरवरी 2024 को हिन्दू शक्ति दल के सिमरन गुप्ता ने अपने साथी पंकज के साथ एक वीडियो जारी किया था। इस वीडियो में उन्होंने अजमेर दरगाह में मौजूद जन्नती दरवाजे को पूर्व में हिन्दुओं का शिव मंदिर बताया था। इसी के साथ दरगाह के पास जो ढाई दिन का झोपड़ा है, उसे सिमरन ने पहले सरस्वती माता का मंदिर बताया। वीडियो में सिमरन ने तारागढ़ के किले को प्राचीन हिंदू राजाओं की धरोहर बताते हुए इसे जिहादियों द्वारा कब्जा की गई जगह बताया था। उन्होंने अजमेर के ADM सिटी को एक ज्ञापन देते हुए इन सभी स्थानों की ASI जाँच की माँग की थी।

पहले भी उठी है ASI सर्वे की माँग

बताते चलें कि ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की अजमेर स्थित दरगाह के ASI सर्वे की माँग पहली बार नहीं उठी है। इस से पहले भी जनवरी 2024 में महाराणा प्रताप सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजवर्धन सिंह परमार ने दरगाह को पूर्व का हिन्दू मंदिर बताते हुए ASI सर्वे की माँग उठाई थी। तब राजवर्धन सिंह ने कहा था कि वो पहले इस मामले को अशोक गहलोत की नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार के संज्ञान में ला चुके हैं।

जय बजरंगबली… हनुमान भक्त निकले टीम इंडिया के विकेटकीपर, नेटिजन्स बोले- जिंदगी ध्रुव बनाए तो ‘जुरेल’ बनना, ‘राठी’ नहीं

राँची में भारत-इंग्लैंड के बीच हुए टेस्ट सीरीज में भारतीय विकेटकीपर ध्रुव जुरेल के प्रदर्शन के बाद हर जगह उनकी चर्चा है। उनकी पारी को याद करके कहा जा रहा है कि अगर जुरेल नहीं होते, तो मैच इंडिया के हाथ से निकल गया था।

इतनी तारीफों के बीच अब उनका सोशल मीडिया पर किया गया ट्वीट भी वायरल हो गया है। इस ट्वीट में उन्होंने ‘जय बजरंगबली’ लिखा है। ये ट्वीट उन्होंने 27 फरवरी को किया गया था।

ट्वीट के नीचे तमाम क्रिकेट फैंस उनकी तारीफें कर रहे हैं। उनकी फोटो शेयर करके लोग जय बजरंगबली बोल रहे हैं और कह रहे हैं कि जुरेल पर हमेशा हनुमान जी की कृपा बने रहे।

एक यूजर कहता है कि बजरंग बली हमेशा आगे आते हैं जब टीम को उनकी जरूरत होती है।

एक यूजर लिखते हैं कि अगर जिंदगी आपको ‘ध्रुव’ बनने का मौका दे तो ध्रुव जुरेल बनिए, ध्रुव राठी नहीं। इसी तरह कुछ यूजर ध्रुव को पक्का सनातनी बता रहे हैं।

एक यूजर ने कहा- “आपका ट्वीट पढ़कर गर्व हो रहा है। हमें लगा था कि आप बदल जाओगे और बाकियों जैसे सेकुलर हो जाओगे लेकिन आपने हमें गर्व महसूस कराया। बहुत खुशी है आप जल्द ही दूसरों की जगह लेंगे। भारतीय क्रिकेट टीम में आप कुछ बड़ा करोगे। जय बजरंगबली।”

भारत-इंगलैंड मैच में ध्रुव जुरेल का प्रदर्शन

बता दें कि भारत-इंग्लैंड के बीच टेस्ट सीरीज का चौथा मैच राँची में खेला गया था। इस टेस्ट मैच को भारतीय टीम ने 5 विकेट से जीता था। इंग्लैंड ने दूसरी पारी में भारतीय टीम के सामने 192 रनों का लक्ष्य रखा था, जिसे भारतीय टीम ने कप्तान रोहित शर्मा के आक्रामक अर्धशतक और शुबमन गिल के नाबाद अर्धशतक के दम पर जीत लिया। इस दौरान शुभमन गिल 52 रन बनाकर नाबाद लौटे थे, तो ध्रुव जुरेल भी 39 रन बनाकर नाबाद लौटे थे। ध्रुव जुरेल के ही बल्ले से भारतीय टीम के लिए विजयी रन निकले थे।

ध्रुव जुरेल ने पहली पारी में भी शानदार 90 रनों की पारी खेली थी। उन्होंने 171 रनों पर टीम के 6 विकेट गिर जाने के बावजूद टीम को 307 रनों के स्कोर तक पहुँचाया था और आखिरी बल्लेबाज के रूप में आउट हुए थे। वहीं, मैच की दूसरी पारी में धैर्यपूर्वक नाबाद 39 रन बनाकर टीम को टीम दिलाई। इस मैच में ध्रुव ने कुल 129 रन बनाए और विकेट के पीछे 3 कैच भी लिया, जिसके बाद उन्हें मैच का सबसे बेहतरीन खिलाड़ी यानी ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ का अवॉर्ड भी दिया गया था।

ISRO के विज्ञापन में तमिलनाडु सरकार ने लगाया चीन का रॉकेट: बोले PM मोदी- यह भारतीय वैज्ञानिकों का अपमान, माफी माँगे DMK

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तमिलनाडु दौरे के वक्त ‘कुशालशेखरपट्टीनम’ में ISRO के नए लॉन्च कॉम्प्लेक्स की नींव रख दी गई है। लेकिन इससे पहले इसे लेकर DMK की सरकार ने स्थानीय अखबार में जो विज्ञापन दिया, उसके कारण उनकी उसपर फजीहत हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पर डीएमके पर निशाना साधा।

दरअसल, जो विज्ञापन डीएमके सरकार की ओर से दिए गए हैं उसमें मुख्यमंत्री स्टालिन और प्रधानमंत्री मोदी की फोटो के पीछे रॉकेट नजर आ रहा है जिसपर कि चीन का झंडा दिखाई दे रहा है। इस विपज्ञापन की तस्वीर आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग स्टालिन सरकार की हरकत का विरोध कर रहे हैं और कुछ मजाक बना रहे हैं।

PM मोदी ने तिरुनेलवेली में तो रैली को संबोधित करते हुए कहा, “डीएमके एक ऐसी पार्टी है जो काम तो करती नहीं, लेकिन झूठा क्रेडिट लेने के लिए आगे रहती है। ये कौन नहीं जानता कि लोग हमारी स्कीम पर अपने स्टिकर चिपका देते हैं। अब तो इन्होंने हद कर दी। इन्होंने तमिलनाडु में इसरो लॉन्च पैड का क्रेडिट लेने के लिए उसपर चीन का स्टिकल चिपका दिया है।”

डीएमके सरकार द्वारा दिया गया विज्ञापन

पीएम ने कहा- “ये तमिलनाडु डीएमके के नेताओं के लिए देखना अब संभव नहीं लगता। ये लोग कुछ देख ही नहीं पाते। जो देख नहीं पाते उन्हें क्या कहते हैं आपको मालूम है। इसलिए ये लोग भारत की प्रगति देखने को तैयार नहीं है, भारत के स्पेस की प्रगति देखने को तैयार नहीं हैं और जो पैसे आप देते हैं उन पैसों से इन लोगें ने विज्ञापन दिया और उसमें भारत के स्पेस का चित्र नहीं रखा। भारत के स्पेस की सफलता को वो तमिलनाडु के सामने नहीं रखना चाहते थे। उन्होंने हमारे वैज्ञानिकों का अपमान कर दिया। हमारे स्पेस सेक्टर का अपमान किया। आपके टैक्स के पैसों का अपमान किया। आपका अपमान किया। ऐसा करने वालों को अब सजा देने का मौका आ गया है।”

पीएम मोदी से पूर्व इस मामले को तमिलनाडु के भाजपा नेता अन्नामलाई ने भी उठाया। उन्होंने कहा, “DMK मंत्री थिरु अनिता राधाकृष्णन द्वारा आज तमिल अखबारों को दिया गया यह विज्ञापन चीन के प्रति DMK की प्रतिबद्धता को दर्शाता है और इस बात का उदाहरण है कि उन्होंने हमारे देश की संप्रभुता को दरकिनार किया। उन्होंने याद दिलाया कि तमिलनाडु को पहले अंतरिक्ष केंद्र मिल जाता है। लेकिन डीएमके के कारण ऐसा संभव नहीं हुआ और सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र आंध्र प्रदेश में बना, न कि तमिलनाडु में।

बता दें कि तमिलनाडु में इसरो का नया लॉन्च कॉन्प्लेक्स 986 करोड़ रुपए की लागत से बनेगा। इसमें 5 फैसिलिटी और एक मोबाइल लॉन्च स्ट्रक्चर शामिल होगा। यहाँ से हर 24 लॉन्च किए जाएँगे। इसके निर्माण की जानकारी देते हुए इसरो चीफ एस सोमनाथ ने कहा- भूमि अधिग्रहण पूरा हो चुका है, तमिलनाडु सरकार ने जमीन भी ट्रांसफर कर दी है। निर्माण होने में 2 साल लगेंगे। योजना है कि 2 साल बाद यरहाँ एसएसएलवी लॉन्च किया जाए।

छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास में मिले घर को बना दिया चर्च, 25 जनजातीय लोगों के धर्मांतरण पर हिंदू संगठनों ने की कार्रवाई की माँग

छत्तीसगढ़ के बेमेतरा में सामूहिक धर्मान्तरण में जनजातीय समुदाय के 25 से ज्यादा लोगों ने ईसाई मत अपना लिया है। धर्म परिवर्तन प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने घर में हुआ है। कुछ घरों पर क्रॉस के चिन्ह भी लगे मिले हैं। घटना से नाराज हिन्दू संगठनों ने प्रशासन में शिकायत दर्ज करवाई है। आरोप है कि धर्मान्तरित लोगों को बीमारी से मुक्ति और आर्थिक स्थिति ठीक होने का लालच दिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला बेमेतरा के थाना क्षेत्र खम्हरिया का है। यहाँ के हिन्दू संगठन से जुड़े सदस्यों को वार्ड नंबर 13 में रहने वाले गोंड बिरादरी के 5 परिवारों की पूजा पद्धति और रहन-सहन में बदलाव की जानकारी मिली। इसी दौरान उन्हें पता चला कि पहले प्रार्थना के लिए रायपुर जाने वाले ये परिवार अब अपने ही घर के पास प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने एक मकान में जाने लगे हैं।

आरोप है कि इस मकान को उन सभी ने चर्च में तब्दील कर दिया है। यहाँ ईसा मसीह की रोज प्रार्थना होने की भी बातें सामने आईं। बताया जा रहा है कि धर्मान्तरित हुए परिवार पहले नाच-गाना के साथ कबाड़ आदि का काम करके अपनी आजीविका चलाते थे। हालाँकि उनके कामकाज आज भी पारम्परिक हैं, लेकिन उन सभी ने अपनी जीवन शैली बदल डाली है।

हरिभूमि ने अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में बताया है कि धर्मान्तरित हुए लोगों ने गुड्डी नाम की एक बीमार महिला को चर्च में जाने पर फायदा होने का दावा किया। साथ ही उन्होंने अपनी आमदनी बढ़ने और नशे की लत से दूर होने का भी श्रेय भी चर्च में होने वाली प्रार्थना को दिया है। ईसाई बने कुछ लोगों के नाम के तौर पर हरिभूमि ने लाम्भा सोनवानी, बासमुंद जोगी, मुरली जोगी तथा देवकी छेदैया को बताया है।

पहले ये सभी दुर्ग, रायपुर, भिलाई और कवर्धा जैसे शहरों में बने चर्च में प्रार्थना के लिए जाया करते थे। बाद में भागदौड़ से बचने के लिए इन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने एक घर को ही चर्च बना डाला। यह पूरी तहसील क्षेत्र का एकमात्र चर्च बताया जाता है। इस मकान में क्रॉस के निशान के साथ ईसाई मत की कुछ किताबें भी देखे जाने का दावा किया गया है।

हालाँकि धर्मान्तरित हुए पाँच जनजातीय परिवारों के 25 लोगों का कहना है कि उनके जाति प्रमाण पत्र अभी तक नहीं बने हैं। साथ ही वो किसी भी शासकीय योजना के लाभार्थी नहीं होने का भी दावा करते हैं। खुद को मिले लोन को भी धर्मान्तरित लोग प्रभु यीशु की कृपा बता रहे हैं। इस पैसे से उन्होंने गाड़ी की किश्त भरी है। उनका कहना है कि धर्मांतरण के बाद से उनके साथ अच्छा हो रहा है।

मामले का खुलासा होते ही हिन्दू संगठनों ने 25 सदस्यों का धर्मान्तरण करवाने वाले समूह पर कार्रवाई की माँग उठाई है। विश्व हिन्दू परिषद ने PM आवास योजना के तहत बने उन घरों को सील करने की भी माँग की है, जहाँ क्रॉस के निशान बने हुए हैं। बेमेतरा के डीएम रणवीर शर्मा ने मामले की जाँच करवा के कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

AAP विधायक की वसूली से परेशान डॉक्टर ने दी थी जान, कोर्ट ने ठहराया दोषी: सजा होते ही जाएगी प्रकाश जरवाल की विधायकी

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने आम आदमी पार्टी के विधायक प्रकाश जरवाल को दोषी पाया है। कोर्ट ने प्रकाश जरवाल को आईपीसी की धारा 306 और 120बी के तहत दोषी करार दिया है। अभी अदालत ने सजा पर फैसला नहीं सुनाया है। जल्द ही इस मामले में फैसला सुना दिया जाएगा। माना जा रहा है कि प्रकाश जरवाल को करीब 10 साल की सजा होगी, जिसके बाद उनकी विधायकी भी चली जाएगी। आम आदमी पार्टी के विधायक प्रकाश जरवाल पर एक डॉक्टर को आत्महत्या के लिए उकसाने का केस चल रहा था। डॉक्टर ने अपने सुसाइड नोट में विधायक का नाम लिखा था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोर्ट द्वारा आम आदमी पार्टी के विधायक प्रकाश जरवाल समेत कुल तीन लोगों को दोषी ठहराया गया है। आईपीसी की धारा 306 के तहत प्रकाश जारवाल को 10 साल तक की सजा हो सकती है।

राउज एवेन्यू कोर्ट में स्पेशल जज एमके नागपाल ने फैसला सुनाते हुए आप विधायक को दोषी करार दिया। आम आदमी पार्टी विधायक प्रकाश जरवाल पर डॉक्टर राजेंद्र भाटी को खुदकुशी के लिए उकसाने के आरोप लगे थे, जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें इस मामले में दोषी करार दिया। साल 2021 के नवंबर महीने में कोर्ट के एक अन्य बेंच ने आम आदमी पार्टी के विधायक के खिलाफ आरोप तय किए थे। अब इसमें कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराया है।

डॉक्टर का सुसाइड नोट

बता दें कि दिल्ली में डॉक्टर की खुदकुशी का मामला करीब 4 साल पुराना है। 18 अप्रैल 2020 को दिल्ली के नेब सराय इलाके में 52 वर्षीय डॉक्टर राजेन्द्र सिंह ने फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। मृतक के पास से एक 2 पेज का सुसाइड नोट मिला था जिसमें उन्होंने आत्महत्या के लिए इलाके के विधायक प्रकाश जरवाल और उनके सहयोगी कपिल को जिम्मेदार ठहराया था। पुलिस ने एक डायरी भी बरामद की थी, जिसमें लिखा था, “मेरा इस इलाके में एक क्लीनिक है और मेरे कुछ वाटर टैंकर दिल्ली जल बोर्ड में किराए से चलते थे, लेकिन एमएलए प्रकाश जरवाल और उसका सहयोगी कपिल नागर मुझसे हर टैंकर के हिसाब से पैसे माँगने लगे। कुछ पैसे दिए भी गए लेकिन बाद में मेरे सभी टैंकर प्रकाश जरवाल ने दिल्ली जल बोर्ड से हटवा दिया।”

सुसाइड नोट में लिखा था, “टैंकरों को दिल्ली जल बोर्ड से हटवाने के बाद जब उन्हें ओखला के दिल्ली जल बोर्ड के लगवाया गया तो टैंकरों को वहाँ से भी प्रकाश जरवाल द्वारा हटवा दिया गया।” नोट के अनुसार प्रकाश जरवाल और उसके सहयोगी से उन्हें जान से मारने की धमकी भी मिल रही थी और धमकियों के कारण उनका जीना मुश्किल हो गया था। जानकारी के मुताबिक, विधायक ने डॉक्टर से पिछले 5 सालों में 5 लाख रुपए लिए भी थे। डॉक्टर उन्हें रुपए देते रहे, ताकि उनके परिवार को परेशान न किया जाए। लेकिन, फिर भी विधायक व उनके सहयोगियों द्वारा बार-बार रुपए की माँग की गई। डॉक्टर ने सुसाइड नोट में अपनी अंतिम इच्छा यही बताई है कि विधायक व उसके साथी को कड़ी से कड़ी सज़ा दी जाए।

प्रकाश जरवाल का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की मौजूदगी में दिल्ली के तत्कालीन मुख्य सचिव अंशु प्रकाश के साथ बदसलूकी के मामले में वो गिरफ़्तार किए जा चुके हैं। इसके अलावा उन पर राजद की एक महिला के शोषण करने का भी आरोप लगा था। वो सीएम केजरीवाल के साथ ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ में भी जुड़े हुए थे।

जिस जामनगर में अनंत-राधिका की प्री वेडिंग सेरेमनी, वहाँ अंबानी परिवार ने बनवाए 14 मंदिर: भाटीगल संस्कृति का रखा ध्यान, भित्ति शैली की नक्काशी

अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट की शादी से पूर्व मुकेश अंबानी-नीता अंबानी ने गुजरात के जामनगर में 14 मंदिरों को बनवाया है। यहाँ सुंदर नक्काशी वाली देवी-देवताओं की मूर्तियाँ स्थापित की जाएगी। हाल में मुकेश अंबानी और नीता अंबानी ने इन मंदिरों के दर्शन भी किए।

जानकारी के मुताबिक अनंत की शादी से पहले अंबानी परिवार ने जामनगर के मोती खवाड़ी स्थित एक मंदिर परिसर में ये 14 मंदिर बनवाए हैं। मंदिर में भित्ति शैली की नक्काशी है और सुंदर देवी-देवताओं की मूर्तियाँ भी। मंदिर को भूली हुई भाटीगल संस्कृति को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है। सभी मंदिर भारतीय वास्तुकला और आध्यात्मिक पहचान को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं। यहाँ पीढ़ियों से चली आ रही कलात्मक विरासत देखते बनती है।

हाल ही में रिलायंस फाउंडेशन की संस्थापक और चेयरमैन नीता अंबानी ने इस मंदिर का दौरा किया था, जिसका एक वीडियो रिलायंस फाउंडेशन के आधिकारिक एक्स हैंडल पर साझा हुआ था। वीडियो के साथ पोस्ट में इसे अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट की शादी की शुभ शुरुआत कहा गया।

इस वीडियो में दिखा था कि नीता अंबानी ने मंदिर परिसर का दौरा करके वहाँ पर भक्तों और कारीगरों से भी बात की थी। मूर्तिकारों को इस वीडियो में कहते सुना गया था कि उन्हें बहुत ही शुभ अवसर पर बुलाया गया है, ऐसा लग रहा है कि वह खुद इस शादी का हिस्सा हैं। वीडियो में जानकारी दी जा रही है कि मंदिर बनाने वालों में अलग-अलग समुदाय के लोग हैं।

जामनगर में अनंत-राधिका की प्री-वेडिंग

गौरतलब है कि अनंत और राधिका की शादी से पहले अंबानी परिवार ने जामनगर में प्री-वेडिंग कार्यक्रम रखे हैं। इस भव्य आयोजन में देश-विदेश से कई लोगों को आमंत्रित किया गया है। ये प्री-वेडिंग सेरेमनी 1 से 3 मार्च तक आयोजित की जाएगी। पूरा कार्यक्रम जामनगर के रिलायंस ग्रीन्स कॉम्प्लेक्स में होगा। ऐसा कहा जाता है कि इस परिसर में लगभग एक करोड़ पेड़ लगाए गए हैं। एशिया की सबसे बड़ी अंबावाड़ी भी यहीं है।

इस प्री-वेडिंग फंक्शन में विदेश से भी कई मशहूर हस्तियाँ शामिल होंगी। इस सूची में बैंक ऑफ अमेरिका के सीईओ ब्रायन थॉमस, कतर के पीएम मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान बिन जसीम अल थानी, एडीएनओसी के सीईओ सुल्तान अहमद अल जबीर, फॉरेस्ट डी रोथ्सचाइल्ड के चेयरमैन एल रोथ्सचाइल्ड, भूटान का शाही परिवार, तकनीकी निवेशक यूरी मिलनर, एडोब के सीईओ शांतनु नारायण शामिल हैं। इसके अलावा लूप सिस्टम्स के सीईओ जेम्स मर्डोक, हिलहाउस कैपिटल के संस्थापक झांग लेई, एक्सोर के सीईओ जॉन अल्केन और ब्रुकफील्ड एसेट मैनेजमेंट के सीईओ ब्रूस फ्लैट शामिल हैं।

दवा लेने आई नाबालिग, आसिफ ने शटर गिराकर किया रेप: लाइसेंस दवा दुकान का, फिर भी ‘डॉक्टर’ बन करता था इलाज

उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर में एक नाबालिग लड़की से रेप का मामला सामने आया है। यह आरोप मोहम्मद आसिफ नाम के एक फर्जी डॉक्टर पर लगा है, जिसकी क्लिनिक में पीड़िता इलाज के लिए गई थी। रेप के बाद आसिफ ने पीड़िता को जान से मारने की धमकी देते हुए अपना मुँह बंद रखने के लिए कहा। घटना रविवार (25 फरवरी 2024) की बताई जा रही है।

पुलिस ने FIR दर्ज करके मामले की जाँच शुरू कर दी है। केस दर्ज होने के बाद से आसिफ फरार है और उसकी तलाश में दबिश दी जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना मुज़फ्फरनगर के थाना क्षेत्र बुढ़ाना की है। यहाँ के एक गाँव की रहने वाली महिला ने 26 फरवरी 2024 (सोमवार) को अपनी 14 साल की बेटी के साथ हुए दुष्कर्म की शिकायत दर्ज करवाई है।

शिकायत में पीड़िता ने बताया कि रविवार को उसकी बेटी की तबियत खराब थी। इलाज के लिए वो अकेली ही पास की एक क्लिनिक में दवा लेने गई थी। यह क्लिनिक डॉक्टर का फर्जी काम करने वाले आसिफ की थी। आसिफ क्लिनिक में अकेला था। उसने लड़की को अंदर बुलाया और खाने के लिए कोई दवा दी। इसके बाद आसिफ ने क्लिनिक का शटर गिराकर पीड़िता से रेप किया।

आरोप के मुताबिक, जब पीड़िता वापस लौटने लगी तब उसने जान से मारने की धमकी दी और अपना मुँह बंद रखने को कहा। घर आकर लड़की ने सारी बात अपने परिजनों को बताई। अगले दिन 26 फरवरी को पीड़िता की माँ ने बुढ़ाना कोतवाली में डॉक्टर आसिफ के खिलाफ केस दर्ज करवाया। पुलिस ने पॉक्सो एक्ट सहित कई अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया, जिसके बाद वह फरार हो गया।

मुजफ्फरनगर के ड्रग्स इंस्पेक्टर पवन शाक्य ने मीडिया को बताया कि मोहम्मद आसिफ के पास मेडिकल स्टोर चलाने का लाइसेंस है, लेकिन उसके पास डॉक्टरी की प्रैक्टिस का कोई अधिकृत प्रमाण पत्र नहीं है। बता दें कि प्रैक्टिस का प्रमाण पत्र नहीं होने के बावजूद वह लोगों को उनकी बीमारियों के लिए दवाइयाँ देता था।

फुगाना के डिप्टी एसपी रवि शंकर मिश्रा ने कहा है कि आरोपित की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमों का गठन किया गया है। उन्होंने कहा कि नाबालिग पीड़िता का मेडिकल परीक्षण करवाया जा रहा है। साथ ही पीड़ित लड़की की काउंसलिंग भी करवाई जा रही है। लड़की के परिजनों ने आरोपित डॉक्टर पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। आरोपित और पीड़िता दोनों एक ही समुदाय के बताए जा रहे हैं।

25 कौआ, 20 कुत्ता, 3 बिल्ली… बकरी की मौत का बदला महिला ने 50 पशु-पक्षियों को मारकर लिया, सबको जहर खिलाया

ओडिशा के जगतसिंहपुर जिले में एक महिला द्वारा कई पशु-पक्षियों को जहर देकर मारने की खबर सामने आई है। इस महिला की उम्र 45 है और इसका नाम दुखी बारिक है। महिला पर आरोप है कि उसने ऐसा अपनी पालतू बकरी की मौत का बदला लेने के लिए किया था। मृत पशु-पक्षियों में कुत्ते, बिल्ली और कौवे हैं शामिल हैं। इनके शव अलग-अलग इलाकों में बिखरे पाए गए थे।

इस घटना से स्थानीय लोगों में नाराजगी है और आरोपित के खिलाफ कार्रवाई की माँग की जा रही है। पुलिस ने महिला के खिलाफ FIR दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है। अभी तक आरोपित की गिरफ्तारी की सूचना नहीं है। बखरपुर के नारायण नंदा ने अपने साथ कई ग्रामीणों को ले कर तिर्तोल थाने में महिला के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना जगतसिंहपुर जिले के थाना क्षेत्र तिर्तोल की है। यहाँ के गाँव बखरपुर में दुखी बारिक की पालतू बकरी पर सोमवार (26 फरवरी 2024) को एक आवारा कुत्ते ने हमला कर दिया था। इस हमले में बकरी की मौत हो गई थी। बताया जा रहा है कि महिला अपनी बकरी की मौत से काफी दुखी हुई।

बकरी की मौत उस महिला के लिए बहुत बड़ा नुकसान था। इसकी भरपाई न होने पर महिला ने आवारा कुत्तों से बदला लेने का मन बना लिया। उसने खाने में जहर डालकर उसे आसपास के जानवरों में बाँट दिया। इस जहरीले खाने को कुत्तों के अलावा बिल्लियों और कौवों ने भी खाया। इसके कारण उनकी मौत हो गई।

अब तक मिली जानकारी के मुताबिक, जहर के प्रभाव से 25 कौवे, 20 कुत्ते और 3 बिल्लियों की मौत हो गई है। मंगलवार (27 फरवरी) को इनके शव चतरा, बखरपुर, अमीरपुर और तिर्तोल के अलग-अलग हिस्सों में पाए गए हैं। इस घटना की जानकारी होते ही स्थानीय लोगों में नाराजगी फ़ैल गई। लोगों ने आरोपित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की।

शिकायतकर्ता नारायण नंदा ने बताया है कि जहर को महिला ने अपनी ही मरी बकरी के मांस में डालकर इधर-उधर फेंका था। इस घटना पर प्रभारी इंस्पेक्टर (आईआईसी) अभिमन्यु नायक ने बताया कि केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी गई है। मौत के कारणों की जाँच के लिए मृत पशु-पक्षियों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है।

एक्स्ट्रा सीटें जीत BJP ने राज्यसभा का गणित बदला, बहुमत से NDA अब 4 सीट ही दूर: जानिए उच्च सदन में किसकी कितनी ताकत

देश भर में राज्यसभा की 56 सीटों के लिए मंगलवार को चुनाव हुए। इसमें से बहुत सारे सीटों (41) पर उम्मीदवारों को निर्विरोध चुना गया, लेकिन तीन राज्यों उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक में 15 सीटों के लिए चुनाव कराने पड़े। इन 56 सीटों में से बीजेपी को 30 सीटों पर जीत मिली, जिसमें 20 निर्विरोध चुने गए, तो 10 को चुनाव के जरिए जीत मिली। उत्तर प्रदेश में बीजोपी को 8 सीटों पर, तो हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक में एक-एक सीटों पर जीत मिली। इसी के साथ बीजेपी ने राज्यसभा में बहुमत की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। इस समय राज्यसभा में बीजेपी के पास 97 सीटें हो गई हैं, और वो सबसे बड़ी पार्टी है। हालाँकि एनडीए अभी भी बहुमत में नहीं है और वो राज्यसभा में बहुमत के लिए 121 सदस्यों से 4 कम यानी 117 सीटों पर है।

इन राज्यों में हुए चुनाव, बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी

राज्यसभा की जिन 56 सीटों के लिए चुनाव हुए, उनमें से उत्तर प्रदेश से 10 सीटें, महाराष्ट्र और बिहार से 6-6 सीटें, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश से 5-5 सीटें, गुजरात और कर्नाटक से 4-4 सीटें और आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, राजस्थान और ओडिशा से तीन-तीन सीटें और 1-1 सीट उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश से थी। इसमें उत्तर प्रदेश की 10 में से 8 सीटों पर बीजेपी, 2 सीटों पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवारों को जीत मिली।

महाराष्ट्र में बीजेपी को तीन, कॉन्ग्रेस को एक, एनसीपी (अजीत पवार गुट) को एक और शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) को एक सीट पर जीत मिली। बिहार की 6 सीटों में से बीजेपी के 2 सांसद, जेडीयू के एक सांसद, कॉन्ग्रेस के एक सांसद और आरजेडी के 2 सांसद जीते। पश्चिम बंगाल में 4 पर टीएमसी तो एक पर बीजेपी को जीत मिली। मध्य प्रदेश में बीजेपी को 4 तो कॉन्ग्रेस को एक सीट पर जीत मिली। गुजरात में बीजेपी ने चारों सीटें जीती, तो कर्नाटक में बीजेपी को एक और कॉन्ग्रेस को तीन सीटों पर जीत मिली।

आंध्र प्रदेश में तीनों सीटें वाईएसआरसीपी को मिली, तो तेलंगाना में कॉन्ग्रेस को दो और एक सीट बीआरएस को मिली। राजस्थान में कॉन्ग्रेस को एक सीट तो बीजेपी को 2 सीटों पर निर्विरोध जीत मिली। ओडिशा से बीजेपी को 1 तो बीजेडी को 2 सीटें मिली। उत्तराखंड, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और छत्तीसगढ़ से बीजेपी को सभी एक-एक सीट पर जीत मिली।

ये है राज्यसभा में पार्टियों के हिसाब से सीटों का गणित

राज्यसभा में किसी भी हाल में अधिकतम सदस्यों की संख्या 250 की होती है, लेकिन अभी के हिसाब से ये संख्या 245 है। इसमें 233 का चुनाव राज्य की विधानसभाओं के जरिए होती है, तो 12 को राष्ट्रपति नामांकित करते हैं। हालाँकि इस समय 5 सीटें खाली हैं, जिसमें चार सीटें जम्मू-कश्मीर की हैं, तो एक नामांकन वाली सीट भी खाली है। इस तरह से सदन में अभी कुल संख्या 240 सांसदों की हो गई है, जिसमें बहुमत के लिए 121 सीटों की जरूरत है। नामांकित 12 सदस्यों में से अभी 11 सदस्य ही हैं, जिसमें से 5 बीजेपी में शामिल हो चुके हैं। इन नामांकित सदस्यों की संख्या मिलाकर कुल 97 सांसद बीजेपी के पास हैं।

एनडीए की बात करें तो अभी कुल 117 सांसद एनडीए के खेमे में हैं। जिसमें 97 सांसद बीजेपी के हैं, तो जेडीयू के 5, दो निर्दलीय और जेडीएस, एनसीपी(अजित पवार), आरएलडी, पीएमके, एजीपी, एमएनएफ, टीएमसी (एम), एनपीपी, आरपीआई (ए), यूपीपीएल के एक-एक सांसद हैं। कॉन्ग्रेस और उसके गठबंधन की बात करें तो इस खेमे में 92 सांसद हैं। विपक्षी गठबंधन में सबसे ज्यादा 29 सांसद कॉन्ग्रेस के, टीएमसी के 13 सांसद, डीएमके और आप के 10-10 सांसद हैं। आरजेडी के 6 सांसद, सीपीएम के 5 सांसद हैं।

राज्य सभा के 240 सांसदों में 30 सांसद किसी भी खेमे में नहीं हैं। ये 30 सांसद सबसे ज्यादा वाईएसआरसीपी और बीजेडी के 9-9, बीआरएस के 7, एआईएडीएमके के तीन, टीडीपी के एक और बीएसपी के 1 सांसद हैं। इनमें से बीजेडी-वाईएसआरसीपी के सांसद मुद्दों पर अधिकतर समय सरकार के साथ दिखते हैं। यही वजह है कि राज्यसभा में बहुमत से चार सीटों के कम आँकड़ों के बावजूद सरकार का कोई काम नहीं रुकता है।

राज्यसभा में चुनाव का गणित क्या है?

भारत के संसद में दो सदनों की व्यवस्था है। एक लोकसभा और दूसरा राज्यसभा। लोकसभा में सांसद जनता द्वारा सीधे तौर पर चुने जाते हैं। इसे आम सदन भी कहा जाता है। वहीं, राज्य सभा को उच्च सदन कहते हैं। इनमें चुने जाने के लिए निश्चित योग्यता की जरूरत होती है। हालाँकि राज्यसभा के लिए चुनाव अपरोक्ष तरीके से होता है। इसका मतलब है कि इस सदन के लिए जनता नहीं, बल्कि जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि ही वोट डालते हैं। ये प्रतिनिधि राज्यों की विधानसभा से होते हैं। ध्यान रहे, विधानसभा, न कि विधानपरिषद। चूँकि विधानपरिषद के लिए भी लोग सीधे जनता द्वारा नहीं चुने जाते हैं, ऐसे में राज्यसभा के लिए सिर्फ जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि ही वोट डालते हैं। हर राज्य में राज्यसभा सीट के लिए वोटिंग का फॉर्मूला भी अलग होता है।

इसे इस बात से समझें कि राज्य की राज्यसभा की खाली सीटों में एक जोड़कर उससे कुल विधानसभा सीटों में भाग दिया जाता है और फिर उसमें एक जोड़ दिया जाता है। विधायकों को एक पर्जी पर अपनी पसंद के हिसाब से वरीयता बतानी होती है। हर विधायक का वोट एक बार ही गिना जाता है। प्राथमिकता के आधार पर विधायक को बताना होता है कि उसकी पहली पसंद कौन है, दूसरी कौन। पहली पसंद के वोट जिसे ज्यादा मिलेंगे, वही जीत जाएगा।

उदाहरण के लिए उत्तर प्रदेश को सामने रखते हैं। यहाँ 10 सीटों पर चुनाव हुए। उत्तर प्रदेश की विधानसभा में 403 सीटें होती हैं। ऐसे में सभी सदस्यों के वोट की कुल ताकत 100 के बराबर होती है। इस तरह से उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए कुल 403X100=40,300 वोट हुए। अब इसे 10 सीटों+1=11 से भाग देंगे, तो संख्या आती है 3663। यानी उत्तर प्रदेश में हर सीट के लिए 36+ वोट यानी 37 वोटों की जरूरत पड़ती है। ये 37 वोट 37 विधायकों के हुए। इस तरह से अगर प्रथम वरीयता के वोटों से ही जीत मिल जाती है, तो 37-37 विधायकों के हिसाब से बीजेपी को 7 सीटें सीधे तौर पर मिल गईं। आठवीं सीट के लिए सपा के बागी विधायकों, बीएसपी विधायक, राजा भैया के विधायकों ने वोट बीजेपी के पक्ष में किया और बीजेपी को 10 में से 8 सीटों पर जीत मिल गई।

1979 में DDA फ्लैट के लिए भरा फॉर्म, 45 साल बाद घर मिलने का आया मौका: दिल्ली हाई कोर्ट को देना पड़ा दखल

दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बाद एक व्यक्ति की 45 वर्ष पुरानी आकांक्षा पूरी हो गई। दरअसल, ईश्वर चंद जैन सन 1979 में दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) की नई पैटर्न पंजीकरण योजना (एनपीआर योजना) के तहत निम्न आय समूह (LIG) फ्लैट के लिए आवेदन किया था। इतने साल गुजर जाने के बाद भी उन्हें इसका आवंटन नहीं किया गया था।

इस मामले पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने डीडीए को निर्देश दिया कि वह जैन को चार सप्ताह के भीतर उस दर पर फ्लैट प्रदान करे, जो वर्ष 1996 में फ्लैट के आवंटन की तारीख पर प्रचलित थी। कोर्ट ने कहा कि अधिकांश दिल्ली वासियों का सपना है कि उनके नाम पर शहर में एक संपत्ति हो, लेकिन डीडीए की यह विफलता दुर्भावनापूर्ण, मनमाना और कदाचार के समान है।

एनपीआर योजना के तहत वही व्यक्ति डीडीए फ्लैट के लिए पात्र था, जिसके पास पति, पत्नी, उसके नाबालिग या आश्रित बच्चे, आश्रित माता-पिता, नाबालिग भाई एवं बहनों के नाम पर लीजहोल्ड या फ्रीहोल्ड आधार पर पूर्ण या आंशिक रूप से कोई आवासीय घर या प्लॉट नहीं है। ईश्वर चंद जैन ने इस योजना में 3 अक्टूबर 1979 को आवेदन किया था।

ईश्वर चंद जैन के आवेदन के बाद उन्हें जुलाई 1980 में पंजीकरण का प्रमाण पत्र जारी किया गया था। योजना के लगभग 17 वर्षों के बाद डीडीए ने मार्च 1996 में एक ड्रॉ आयोजित किया था। इस ड्रॉ में ईश्वर चंद जैन को दिल्ली के रोहिणी इलाके में एक फ्लैट के लिए सफल घोषित किया गया। इसके बाद आगे की कार्रवाई शुरू की गई।

आगे चलकर डीडीए ने याचिकाकर्ता को उनके पते नंबर-3 पर एक डिमांड सह आवंटन पत्र (डीएएल) जारी किया था, लेकिन याचिकाकर्ता इस राशि का भुगतान करने में विफल रहा। हालाँकि, कोर्ट ने माना कि डीएएल को इस पते पर भेजना निरर्थक था, क्योंकि जैन ने 1988 में प्राधिकरण को सूचित किया था कि उनका नया पता अब हिसार में है।

कोर्ट ने कहा, “डीडीए के रिकॉर्ड में सही पता होने के बावजूद याचिकाकर्ता को गलत पते पर भेजा गया डीएएल कानून की नजर में कोई माँग नहीं है। डीडीए पर यह दायित्व है कि वह याचिकाकर्ता को नए दिए गए पते पर डीएएल जारी करे, जो डीडीए के रिकॉर्ड पर अंतिम ज्ञात पता था।”

इसलिए, अदालत ने डीडीए को आदेश दिया कि वह जैन को 1996 में उस समय प्रचलित दरों पर फ्लैट का आवंटन करे। अदालत में जैन की ओर से अधिवक्ता प्रवीण कुमार अग्रवाल और अभिषेक ग्रोवर पेश हुए, जबकि डीडीए का प्रतिनिधित्व अधिवक्ता अजय ब्रह्मे ने किया।