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न एजेंडा-न चेहरा, इसलिए विपक्ष विहीन है भारत का प्रजातंत्र: भरोसे की कमी और नेतृत्व के अभाव से गहराता ही जा रहा है संकट

लोकतंत्र की सफलता का शर्त लोकप्रिय संप्रभुता भी है। सरल शब्दों में कहें तो आम जनता ही सर्वोपरि है। अब्राहम लिंकन ने इसकी ही व्याख्या ‘जनता का, जनता द्वारा, जनता के लिए शासन’ के तौर पर की है। पर इसका मतलब यह नहीं होता कि धनाढ्य वर्ग ही सभी करों का भुगतान करे या आम जनता कानूनों का बोझ ढोए।

ऐतिहासिक रूप से देखें तो लोकतांत्रिक संघर्षों ने ‘सुधार’ और ‘क्रांति’ दोनों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक प्रगति के जुड़वाँ हथियारों के रूप में इस्तेमाल किया है। लोकतांत्रिक सरकारें जनता की जरूरतों, इच्छाओं, हितों और आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व नहीं कर रही हैं। चुनाव सिर्फ सत्ता के लिए वोट बैंक की लड़ाई मात्र बनकर रह गए हैं, जहाँ चुनाव एक डाटा बेस की गणित की पहेली के समान है।

सरकारें वैश्विक, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय पूँजीपति वर्गों के पीछे खड़ी हैं और उनके हितों को कायम रख रही हैं। जनता अलगाव से पीड़ित है। यह एक वैश्विक प्रवृत्ति है। यह किसी विशेष क्षेत्र और जनसंख्या तक ही सीमित नहीं है। मानव जीवन के अस्तित्व, नागरिक अधिकार, गरिमा और दुनिया में शांति की खातिर इस वैश्विक प्रवृत्ति को आगे बढ़ने से रोकने की जरूरत है।

इसके लिए स्थानीय कार्यों एवं क्षेत्रीय एकजुटता पर आधारित एक अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण की जरूरत है, जिसमें लोगों की जरूरतों के आधार पर क्षेत्रीय आवश्यकताओं को स्वीकार करने की क्षमता हो। हालाँकि, विपक्षी दल कुछ विशिष्ट सामाजिक समूहों तक सीमित प्रतिनिधित्व में अटके रह गए हैं और अपने दायरे को और फैलाने में असमर्थ रहे हैं।

बुरी खबर यह है कि भारत के विपक्ष के पास अभी भी कोई चेहरा नहीं है, जबकि अच्छी खबर यह है कि इसका हल निकालने के लिए उसके पास अभी भी कुछ महीनों का समय है। विपक्ष का समकालीन संकट मुख्य रूप से राजनीतिक दलों में भरोसे की कमी और नेतृत्व के अभाव को दिखाता है। पिछले कुछ वर्षों में विपक्ष की एक प्रमुख विफलता यह रही है कि वह एक राजनीतिक एजेंडा निर्धारित करने में विफल रहा है।

इतिहास सफल और असफल दोनों लोकतांत्रिक आंदोलनों के उदाहरणों से भरा पड़ा है। ध्यान भटकाने वाली रणनीति शासक वर्गों की विफलता को छिपाने और उनकी विफलता को देश, सरकार और लोकतंत्र की विफलता के रूप में प्रचारित करने में मदद करती है। कमजोर देश और आज्ञाकारी सरकारें पूँजी के विस्तार के लिए उपयोगी हैं।

इतना ही नहीं, निष्क्रिय लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत मजबूत देश और शक्तिशाली सरकारें भी पूँजी के विस्तार के लिए उतनी ही उपयोगी हैं। भ्रामक युक्तियों का उपयोग दुनिया के विभिन्न हिस्सों में अपंग लोकतंत्र को केवल प्रतिक्रियावादी राजनीति और पूंजीवादी शोषण को छिपाने के पोस्टर के रूप में इस्तेमाल करने के लिए किया गया है।

लोकतंत्र सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक परिवर्तन का एक उपकरण है। लोकतांत्रिक घाटा या लोकतंत्र का संकट प्रगतिशील भविष्य की दिशा में परिवर्तन में देरी करता है। अप्रभावी विपक्ष या विपक्ष की अनुपस्थिति लोकतांत्रिक व्यवहार को कमजोर करती है। जातिवाद की राजनीति किसी धर्म की राजनीति का रूप न बन जाए इसके लिए राजनीतिक पार्टियों को सचेत रहना होगा।

किसी भी देश की प्रगति उसके आर्थिक भविष्य पर ही निर्भर करती है और इसे सार्थक करने का मार्ग सभी प्रकार की विचारधाराओं को साथ लेकर चलने से ही हासिल होगा। लोकतंत्र कोई ऐसी चीज़ नहीं है, जो केवल चुनाव के समय घटित होती है और ना ही यह ऐसी चीज़ नहीं है, जो केवल एक घटना के साथ घटित होती है। यह एक सतत निर्माण प्रक्रिया है।

मुस्लिम कर सकते हैं 4 निकाह, लेकिन हर बीवी का रखना होगा ख्याल: हाई कोर्ट ने इस्लामी कानून का दिया हवाला, कहा- शौहर नहीं कर सकता भेदभाव

मद्रास हाई कोर्ट ने इस्लामी कानून को आधार बताकर एक मामले की सुनवाई करने के दौरान कहा है कि मुस्लिम पुरुष बिना किसी समस्या के चार निकाह कर सकता है लेकिन उसे सभी बीवियों का बराबर ख्याल रखना पड़ेगा।

मद्रास हाई कोर्ट ने निकाह को लेकर यह टिप्पणी हाल ही में एक मुकदमे की सुनवाई में की। यह मुकदमा एक मुस्लिम महिला ने अपने शौहर के खिलाफ दायर किया था। महिला का कहना था कि उसके शौहर और उसके परिवार वालों ने उसको प्रताड़ित किया।

महिला के अनुसार, उसके शौहर के परिवार वाले उसके गर्भवती होने के दौरान उसे ऐसा खाना देते थे जो कि उसे पसंद नहीं था और सही से साड़ी ना बाँधने के लिए भी परेशान करते थे। साथ ही जब महिला का गर्भपात हो गया तो उसे इस बात के लिए भी प्रताड़ित किया गया कि उसके कोई बच्चा नहीं है।

महिला ने यह भी कहा कि इसके बाद जब वह अत्याचार नहीं सहन कर पाई तो वह अपने मायके चली गई। उसके शौहर ने उसे दूसरे निकाह की धमकी दी। महिला ने दावा किया कि उसका शौहर एक दूसरी महिला के साथ रह भी रहा है। उसे इस मामले में न्याय दिया जाए।

कोर्ट में बात पहुँचने के बाद जहाँ महिला के शौहर ने उसके सभी आरोपों से इनकार किया। वहीं कोर्ट ने इस मामले में कहा कि उसका शौहर उसके साथ गलत कर रहा था। उसने अपनी पहली और दूसरी बीवी के साथ समान व्यवहार नहीं किया।

हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई जज RMT टीका रमन और और पीबी बालाजी ने की। बेंच ने मुस्लिमों में बहुविवाह का हवाला देते हुए कहा, “उसने पहली और दूसरी बीवी को इस्लामिक कानून के अंतर्गत समान तरीके से नहीं रखा। इस्लामिक कानून के अंतर्गत मुस्लिमों को एक से अधिक निकाह करने की इजाजत है लेकिन उन्हें सभी बीवियों को बराबर रखना पड़ेगा।”

कोर्ट ने यह भी माना कि शौहर ने अपनी पहली पत्नी के साथ कई क्रूरताएँ की है। कोर्ट का कहना था कि भले ही उसकी पहली बीवी मायके में रह रही थी लेकिन उसे उसका ख्याल रखना था। अगर दोनों के बीच बात नहीं बनती तो उसे तलाक देना चाहिए था लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। ऐसे में वह अपने कर्तव्यों में फेल हुआ है।

हाई कोर्ट ने इसी के साथ निचली अदालत के फैसले को मान्यता दे दी। निचली अदालत ने निकाह खत्म करने की बात कही थी। हाई कोर्ट ने इसे सही निर्णय बताया और कहा कि किसी भी तरीके से निकाह में हस्तक्षेप नहीं है।

पति का चलाता था गाड़ी और पत्नी से निकाह के ख्वाब देखता था समीर खान, नहीं मानी तो कॉन्ग्रेस की पूर्व पार्षद लक्ष्मी पुरोहित का रेत दिया गला

राजस्थान के बीकानेर में लक्ष्मी पुरोहित नाम की एक महिला का उसके ड्राइवर समीर खान ने गला काटकर हत्या कर दी है। हत्यारा समीर खान कॉन्ग्रेस की पूर्व पार्षद इस महिला का ड्राइवर था। लक्ष्मी का सोमवार (25 दिसंबर 2023) को गला काटने के बाद खुद की जान लेने की भी कोशिश की। हालाँकि, बाद में पता चला कि समीर अपनी जान लेने की कोशिश की कहानी गढ़ रहा था। उसने पुलिस से बचने के लिए खुद को चोट पहुँचाई थी।

यह मामला बीकानेर के नया शहर थाना इलाके का है। पूर्व पार्षद लक्ष्मी पुरोहित अब अपने घर के पास ही ब्यूटी पार्लर चलाती थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लक्ष्मी सोमवार की शाम को मंदिर जाने की बात कहकर घर से निकली थी, लेकिन रात 10 बजे तक नहीं आई। इसके बाद महिला के पति राजेश पुरोहित ने थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा दी।

इस बीच, गंगानगर रोड पर एक महिला का शव पड़ा मिला। महिला की शिनाख्त करने के लिए पुलिस ने राजेश पुरोहित को बुलाया। इसके बाद शव की शिनाख्त लक्ष्मी के रूप में हुई। इस मामले में राजेश पुरोहित ने समीर खान के नाम से नामजद रिपोर्ट लिखवाई थी। उन्होंने बताया था कि समीर उनकी पत्नी पर गलत नजर रखता था और वह लक्ष्मी से निकाह करना चाहता था।

पुलिस की जाँच में पता चला है कि समीर खान की 47 साल की लक्ष्मी से जान पहचान पहले से ही थी। समीर खान ने घटना वाले दिन लक्ष्मी पर जोर देकर मिलने के लिए बुलाया था। इसके बाद वह लक्ष्मी को लेकर आरसीपी कॉलोनी लेकर गया था। माना जाता है कि उसी जगह पर उसने हत्या की घटना को अंजाम दिया और फिर लाश को फेंक दिया।

लक्ष्मी के पति राजेश पुरोहित शिक्षा विभाग में सरकारी कर्मचारी हैं। उन्होंने 6 साल पहले एक कार खरीदी थी और समीर खान को ड्राइवर रखा था। इस बीच उसकी खराब नीयत को देखते हुए एक महीने में ही उसे नौकरी से निकाल दिया था। इसके बावजूद वह लक्ष्मी के घर आना आता था। राजेश पुरोहित ने बताया है कि समीर खान उन्हें लगातार धमकी देता था कि वह लक्ष्मी को किडनैप करके उससे शादी कर लेगा।

कॉन्ग्रेस की पार्षद रही थी लक्ष्मी

लक्ष्मी पुरोहित और पति राजेश पुरोहित पूल रूप से राजस्थान के नागौर के रहने वाले हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, लक्ष्मी ने नागौर में रहते हुए कॉन्ग्रेस की टिकट पर नगर परिषद का चुनाव लड़ा था और उस पर उन्होंने पार्षद का चुनाव भी जीता था। इसके बाद लक्ष्मी अपने पति के साथ बीकानेर आ गई। नागौर से बीकानेर आने के बाद लक्ष्मी की राजनीतिक सक्रियता लगभग खत्म हो गई थी।

आरोपित को पुलिस ने किया गिरफ्तार

बीकानेर एसपी तेजस्विनी गौतम ने बताया कि समीर ने ही लक्ष्मी को बुलाया था और वहाँ बात पर दोनों का झगड़ा हो गया। उसके बाद उसने लक्ष्मी का गला काट दिया। लक्ष्मी की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने आरोपित को अस्पताल से गिरफ्तार किया है। अस्पताल में उसने कहानी गढ़ी थी कि वह अपनी जान लेना चाहता था और ट्रेन से हादसा भी हो गया, लेकिन वो बच गया। पुलिस ने उसकी कहानी को झूठा पाया।

‘हमारे पूर्व छात्र को आपसे प्यार हो गया है, लेकिन आप…’: पश्चिम बंगाल में कॉलेज के लेटरहेड पर छात्रा को ‘लव लेटर’, प्रिंसिपल का साइन और मुहर भी

पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्धमान (PURBA BARDHAMAN) जिले के गुशकारा महाविद्यालय से एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। कॉलेज के लेटरहेड पर लिखा एक लव लेटर वायरल है। इस पर कॉलेज प्रिंसिपल के हस्ताक्षर और मुहर भी हैं। वायरल लेटर में कॉलेज की एक छात्रा को इसी कॉलेज के एक पूर्व छात्र ने प्रपोज कर रखा है।

महाविद्यालय के प्रिंसिपल सुदीप चट्टोपाध्याय के मुताबिक यह मामला साइबर क्राइम का है। पुलिस को इसकी सूचना दे दी गई है। उनका कहना है कि इस मामले पर पूर्व छात्र और लड़की के अभिभावकों को कॉलेज में बुलाया गया है। सोमवार (25 दिसंबर,2023) को लिखे इस लेटर का मजमून कुछ इस तरह है, “हमारे गुशकारा महाविद्यालय में पढ़ने वाली पाँचवें सेमेस्टर की छात्रा के लिए कॉलेज के एक पूर्व छात्र के मन में काफी वक्त से आर्कषण है।”

गुशकारा महाविद्यालय के लेटर हेड पर लिखा गया लव प्रपोजल (फोटो साभार: आजतक)

लेटर हेड में आगे छात्रा का नाम लिखकर कहा गया है, “कम में कहें तो हमारे पूर्व छात्र को आपसे प्यार हो गया है, लेकिन आप उन्हें कोई जवाब नहीं दे रही हैं। इस वजह से वो खुद की पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पा रहा है। मैं आपसे करबद्ध प्रार्थना करता हूँ कि कृपया कुछ ऐसा करें, जिससे हमारे छात्र को भविष्य में कोई परेशानी न हो और वह ठीक से पढ़ाई कर सके।”

कॉलेज की मुहर और प्रिंसिपल सुदीप चट्टोपाध्याय के दस्तखत वाले इस वायरल लेटर से हंगामा मच गया। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आरोपित पूर्व छात्र ने यह पत्र एक पुराने नोटिस को स्कैन कर, सीलबंद और दस्तखत कर लिखा था। इस बीच, प्रिंसिपल सुदीप चट्टोपाध्याय ने कहा, “दो महिला छात्रों और एक पूर्व छात्र ने हमारे सामने कबूल किया कि वे ही इस घटना के पीछे थे, उसने (पूर्व छात्र) कॉलेज की फर्जी मुहर और दस्तखत बनाकर ऐसा किया। उसने माफ़ी माँगी और बांड भर दिया।”

प्रिंसिपल सुदीप चट्टोपाध्याय ने आगे कहा, “आरोपितों ने वादा किया कि ऐसी घटना कभी नहीं घटेगी। हमने खासकर उनके भविष्य के बारे में सोचकर एफआईआर दर्ज नहीं की है। हालाँकि, पूरे मामले की सूचना पुलिस को दे दी गई है।” जानकारी के मुताबिक इस पूर्व छात्र ने लेटरहेड पर लव प्रपोजल लिखने की गलती मानते हुए कहा कि उसे एहसास तक नहीं था कि उसकी इस हरकत का इतना बड़ा मसला बन जाएगा।

उधर दूसरी तरफ गुशकारा महाविद्यालय में पढ़ रही जिस छात्रा को पूर्व छात्र ने ये लव प्रपोजल भेजा था उसका कहना है कि उसे ये लेटर व्हॉटसएप पर मिला था। उसका कहना है कि उसने उसे यूँ ही इसे मजाक में अपने स्टेटस में लगाया था। हालाँकि उसका कहना था कि कुछ वक्त बाद ही उसने स्टेट्स डिलीट कर दिया, लेकिन यह वायरल हो गया। छात्रा ने कॉलेज को लिखकर दिया है कि इस घटना से कॉलेज और प्रिंसिपल का कोई लेना-देना नहीं है। कॉलेज का ये लेटरहेड एडिट कर बनाया हुआ है।

PM मोदी की रणनीति से बची जिंदगियाँ: भारत के 8 पूर्व नौसैनिकों को अब फाँसी नहीं देगा कतर, सुनवाई के समय भारतीय राजदूत भी थे कोर्ट में मौजूद

कतर के दहरा ग्लोबल कंपनी में कथित जासूसी के आरोप में फाँसी की सजा पाए नौसेना के 8 पूर्व अधिकारियों को अब फाँसी नहीं दी जाएगी। कतर की अदालत ने इनकी अपीलों पर विचार करने के बाद उनकी मौत की सजा को कैद में बदल दी है। जिस समय इस मामले की सुनवाई कोर्ट में चल रही थी, उस समय वहाँ कतर में भारत के राजदूत भी मौजूद थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत सरकार ने फाँसी की सजा पाने वाले 8 पूर्व नौसैनिक अधिकारियों से कांसुलर एक्सेस हासिल किया था। इसके बाद से सरकार उन्हें हर तरह कानूनी सहायता लगातार मुहैया करा रही थी। बताते चलें कि फाँसी की सजा मिलने के बाद इन नौसैनिकों ने कतर की उच्चतर कोर्ट में अपील की थी।

इसको लेकर भारत के विदेश मामलों के मंत्रालय ने अपने बयान में बताया है कि सभी 8 पूर्व नौसैनिकों की फाँसी की सजा टल गई है। हालाँकि, इसमें ये नहीं बताया गया कि इन पूर्व नौसैनिकों को कितनी सजा मिली है। मंत्रालय ने कहा कि कतर की अपील अदालत के के फैसले पर गौर किया है, जिसमें सजाएँ कम कर दी गई हैं। और अब विस्तृत फैसले की प्रतीक्षा है।

विदेश मंत्रालय ने बताया, “हम दहरा ग्लोबल मामले में अगले कदम पर निर्णय लेने के लिए कानूनी टीम के साथ-साथ परिवार के सदस्यों के साथ निकट संपर्क में हैं। कतर में हमारे राजदूत और अन्य अधिकारी परिवार के सदस्यों के साथ आज अपील अदालत में उपस्थित थे। हम मामले की शुरुआत से ही उनके साथ खड़े रहे हैं।”

विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में आगे कहा, “हम सभी को (कतर की अदालत में बंद 8 पूर्व नौसैनिकों को) कांसुलर और कानूनी सहायता देना जारी रखेंगे। हम इस मामले को कतर के अधिकारियों के समक्ष भी उठाना जारी रखेंगे। इस मामले की गोपनीय और संवेदनशील प्रकृति के कारण इस समय कोई और टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।”

बता दें कि कतर कोर्ट ने 26 अक्टूबर 2023 को इन भारतीयों को कथित जासूसी के आरोप में मौत की सजा दी थी। इस पर भारत ने हैरानी और चिंता जाहिर की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए कतर की जेल में बंद पूर्व नौसैनिकों की ओर से अपील दायर की थी और इसे दायर करने में भारत सरकार ने मदद की थी।

वहीं, विदेश मंत्रालय ने गुरुवार (23 नवंबर 2023) को कहा कि फैसला गोपनीय है। प्रथम दृष्ट्या अदालत ने फैसला सुनाया है, जिसे भारत की कानूनी टीम के साथ साझा किया गया। इसके बाद भारत ने कानूनी विकल्पों पर विचार करते हुए अपील दायर की थी। इसी अपील पर अब फैसला आया है और फाँसी को टाल दी गई है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा था कि भारत इस मामले को लेकर कतर के अधिकारियों के साथ बातचीत कर रहा है और सरकार पूर्व नौसैनिकों को सभी कानूनी और दूतावास संबंधी सहायता देना जारी रखेगी।

दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों से पहले प्रशांत भूषण के ऑफिस में योगेंद्र यादव ने की थी बैठक, उमर खालिद और शरजील इमाम भी थे मौजूद: चार्जशीट से खुलासा

साल 2020 में दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों में सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण का कनेक्शन सामने आया है। चार्जशीट में मौजूद जानकारी और अन्य दस्तावेजों से पता चलता है कि जहाँ पर बैठकर साजिशकर्ताओं ने चक्का जाम आदि की प्लानिंग की, वो जगह कोई और स्थान नहीं बल्कि 6/6 जंगपुरा है, जहाँ प्रशांत भूषण का कार्यालय भी है।

दिल्ली पुलिस ने हिंदू विरोधी दंगों के मामले में 2700 पेजों की चार्जशीट दाखिल की है जिसमें 700 पन्ने सिर्फ ये क्रोनोलॉजी समझाने में लगाए गए कि कैसे इतने बड़े दंगों के बीज बोए गए। इसमें उस मीटिंग का जिक्र है जो सीएए विरोध प्रदर्शन से पहले हुई थी।

सूत्रों से प्राप्त चार्जशीट में शामिल की गई फोटो

चार्जशीट के मुताबिक, 8 दिसंबर 2019 को ये मीटिंग जंगपुरा बेसमेंट में हुई थी। इसमें योगेंद्र यादव, शरजील इमाम और उमर खालिद शामिल थे। इस बैठक की एक फोटो भी चार्जशीट में शामिल की गई है। साथ ही बताया गया है कि यहीं डिस्कस हुआ था कि चक्का जाम और प्रदर्शन कैसे करना है।

ये बैठक जंगपुरा एक्स्टेंशन ही हुई। इसका खुलासा शरजील इमाम और अरशद वारसी की मैसेज चैट से भी होता है। जंगपुरा की इसी बैठक के बाद हिंसा भड़काने की शुरूआत हुई और प्रदर्शन के आड़ में हिंदुओं के खिलाफ माहौल बनाना शुरू किया गया।

अब ये जंगपुरा की बैठक की जो तस्वीर चार्जशीट में लगाई गई है उसका एड्रेस साफ तौर पर- 6/6, जंगपुरा एक्स्टेंशन लिखा है। इस एड्रेस को अगर गूगल पर डालेंगे तो ये प्रशांत भूषण के ऑफिस के एड्रेस से मेल खाता मिलेगा।

सुप्रीम कोर्ट में उनके चैंबर का एड्रेस 6/6 जंगपुरा ही है। इसका जिक्र कई कोर्ट के दस्तावेजों में भी है। नीचे 2021 में डाली गई उनके रजिस्ट्रार को लिखे पत्र में इस एड्रेस को देखा जा सकता है।

बता दें कि 6/6 जंगपुरा का एड्रेस सिर्फ दिल्ली हिंदू विरोधी दंगों में सामने नहीं आया। इससे पहले भी इस जगह से कई भारत विरोधी कैंपेन की साजिश रची जा चुकी है। यहाँ NAPM (नेशनल अलायंस फॉर पीपुल्स मूवमेंट) का भी दफ्तर है, जिसकी स्थापना सीएए विरोधी प्रदर्शनों में सक्रिय रहने वाले मेधा पाटकर ने की थी। NAPM का हाथ तमाम इस्लामी कट्टरपंथी के अपराधों को धो-पोंछने और हिंदुओं को दोषी बनाने की कोशिशों में सामने आ चुका है। इसके अलावा दिल्ली दंगों के समय बी इनकी संलिप्ता देखी गई थी।

नोट- दिल्ली दंगों की साजिश मामले में प्रशांत भूषण का नाम आने के बाद इस संबंध में ऑपइंडिया ने उन्हें ईमेल किया है। खबर लिखने तक उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। यदि आगे उनकी प्रतिक्रिया मिलेगी तो ये खबर अपेडट की जाएगी।

(यह रिपोर्ट मूल रूप से नुपूर जे शर्मा ने अंग्रेजी में लिखी है। इसे विस्तार से पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।)

गाली सुनकर क्यों जा रहा है, नामर्द है क्या… दोस्त ने कहा और मंगेश ने उमा पर चढ़ा दी कार, एक्स को बॉयफ्रेंड के साथ होटल में देख हो गया था आगबबूला

जयपुर में उमा सुथार की कार से कुचलकर हत्या करने के मामले में पुलिस ने मंगेश अरोड़ा को गिरफ्तार किया है। मंगेश का दावा है कि कभी उसके उमा के साथ रिलेशन थे। बाद में वह राजकुमार की गर्लफ्रेंड बन गई। कथित तौर पर इसका बदला लेने के लिए ही उसने दोनों पर कार चढ़ा दी थी। इस घटना में उमा की मौत हो गई थी।

यह घटना 26 दिसंबर 2023 की है। जयपुर के एक नाइटक्लब के बाहर आरोपित ने नशे में धुत होकर उमा की इंडेवर कार से कुचलकर हत्या कर दी थी। राजकुमार घायल हो गया था। उसका इलाज चल रहा है। इसका वीडियो भी वायरल हुआ था। घटना के बाद मंगेश फरार हो गया था, लेकिन बाद में पकड़ा गया।

27 दिसंबर को जयपुर पुलिस के सामने पहुँच कर मंगेश ने आत्मसमर्पण किया है। पूछताछ में उसने बताया है कि उमा पहले उसकी गर्लफ्रेंड थी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मंगेश ने पुलिस को बताया कि मृतका उमा सुथार 6 महीने पहले तक उसकी गर्लफ्रेंड थी। लेकिन बाद में वह राजकुमार के साथ रिलेशन में आ गई थी। मंगेश ने यह भी बताया कि वह एक लड़की के साथ जयपुर के उस होटल में क्रिसमस की रात को 10 बजे पहुँचा था, जिसके बाहर उसने दोनों पर कार चढ़ा दी थी।

इस होटल में उमा और राजकुमार पहले से मौजूद थे। राजकुमार यहाँ निवेश कर एक रूफटॉप रेस्टोरेंट बनवा रहा है। राजकुमार भी मंगेश का परिचित है। राजकुमार के साथ उमा को देखकर मंगेश और उसके साथ के लोगों ने कमेंट भी किए थे। इसके बाद मंगेश यहाँ से निकल गया और रात को 2 बजे दुबारा होटल आया।

इस बार मंगेश अपने महिला मित्र और दोस्तों के साथ शराब पी। इसके बाद राजकुमार और उमा से मंगेश का विवाद दोबारा चालू हो गया। राजकुमार और उमा इसके बाद कैब बुक करके वापस जाने के लिए होटल से बाहर निकल आए।

मंगेश भी अपनी गाड़ी में बैठ गया था। इसी दौरान मंगेश के एक दोस्त गौरव ने कहा, “गाली सुनकर क्यों जा रहा है, नामर्द है क्या?” इसके बाद मंगेश ने गाड़ी बैक कर राजकुमार और उमा पर चढ़ा दी। राजकुमार टक्कर लगने से जख्मी होकर फेंका गया, जबकि उमा की पहियों के नीचे आने से मौत हो गई।

युवती की कार से कुचल कर हत्या करने वाला मंगेश हरियाणा के सिरसा का रहने वाला है। वह करीब 9 साल पहले पढ़ाई ले लिए जयपुर आया था। बाद में यहीं उसने कपड़ों का शोरूम खोल लिया। उसकी कुछ पुलिसवालों के साथ भी फोटो सामने आई है।

ऑपइंडिया एक्सक्लूसिव: रॉबर्ट वाड्रा को थंपी से किसने मिलवाया? आर्म्स डीलर संजय भंडारी से सोनिया गाँधी के लिंक का ED की चार्जशीट में जिक्र

कई सालों से एक नाम बार-बार सामने आता है, वो नाम है संजय भंडारी का। संजय भंडारी आर्म्स डीलर यानि हथियारों की डील में दलाली करने वाला खिलाड़ी है। संजय भंडारी फरार है और उसे लंदन से प्रत्यर्पित की कोशिश की जा रही है। संजय भंडारी का नाम रफाल सौदे से लेकर यूरो फाइटर तक की डील में सामने आया है। अब हरियाणा के चर्चित जमीन खरीद घोटालों में भी उसका नाम सामने आया है।

संजय भंडारी का गाँधी परिवार से कनेक्शन सामने आया है। जिस जमीन घोटाले में रॉबर्ड वाड्रा, प्रियंका गाँधी, राहुल गाँधी तक के नाम आ रहे हैं, उसके तार अब सोनिया गाँधी तक जुड़ रहे हैं। ये तार उनके निजी सचिव के जरिए जुड़ रहे हैं। इन सारी कड़ियों को जोड़ा है प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ED ने पीएमएलए कोर्ट में दाखिल किए गए 84 पेज की सप्लीमेंट्री चार्जशीट में सारी कहानी बताई है।

ईडी की चार्जशीट में रॉबर्ड वाड्रा, प्रियंका गाँधी वाड्रा, प्रॉपर्टी डीलर सीसी थंपी, हथियार डीलर संजय भंडारी और प्रॉपर्टी डीलर एचएल पाहवा के बारे में बताया गया है। इन सबके साथ सोनिया गाँधी के लिंक जुड़े मिले हैं। इस लिंक का सूत्रधार बना था सोनिया गाँधी का निजी सचिव पीपी माधवन। माधवन पर जून 2022 में एक दलित महिला ने बलात्कार का मामला दर्ज कराया था।

ईडी ने यह चार्जशीट 22 दिसंबर 2023 को दाखिल की है। इसमें बताया गया है कि सोनिया गाँधी के पीए पीपी माधवन ने थंपी को रॉबर्ड वाड्रा से मिलवाया था। बाद थंपी के लिंक से संजय भंडारी और वाड्रा जुड़े। इसी मामले में सुमित चड्ढा नाम का एक और आरोपित भी है, जो संजय भंडारी का करीबी है। यह पहली बार है कि ईडी ने अपनी चार्जशीट में वाड्रा का नाम लिया है।

ईडी की चार्जशीट के पेज नंबर 43 पर लिखा है, “जाँच के दौरान सीसी थंपी ने पीएमएलए की धारा 50 के तहत अपना बयान दर्ज कराया है। ये बयान 19 जून 2019 को दर्ज कराया गया, जिसमें उसने स्वीकार किया कि वो रॉबर्ड वाड्रा को 10 वर्ष से अधिक समय से जानता है। रॉबर्ट वाड्रा से उसका परिचय सोनिया गाँधी के पीए माधवन ने कराया था। वह रॉबर्ड वाड्रा से कई बार मिला है, यहाँ तक कि यूएई में भी।”

ईडी की चार्जशीट की कॉपी में सोनिया गाँधी, रॉबर्ट वाड्रा का नाम

पीएमएलए कोर्ट में दाखिल सप्लीमेंट्री चार्जशीट में सोनिया गाँधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा, सीसी थम्पी और हथियार डीलर संजय भंडारी के बीच सीधा कनेक्शन बताया गया है। इसमें कहा गया है कि सोनिया गाँधी के पीए माधवन ने वाड्रा को थम्पी से मिलवाया था। संजय भंडारी और उनके सहयोगियों के खिलाफ पीएमएलए मामले में दिल्ली का रियल एस्टेट डीलर चेरुवथुर चक्कुट्टी थंपी सातवाँ आरोपित है।

दरअसल, थंपी ने जमीन की खरीद-बिक्री के लिए एचएल पाहवा को पैसे दिए। ये पैसे संजय भंडारी से जुड़े थे, जिसने गैर कानूनी तरीके से हथियारों की दलाली से पैसे बनाए थे। यही नहीं, संजय भंडारी ने ही लंदन से लेकर फरीदाबाद तक रॉबर्ड वाड्रा को प्रॉपर्टी दी। संजय भंडारी के लिए थंपी काम करता था, जिसने पाहवा को पैसे दिए। वो पैसे घूम कर राहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी और रॉबर्ट वाड्रा तक गए।

ईडी की चार्जशीट में जमीन सौदों की विस्तार से जानकारी जानकारी

संजय भंडारी के खिलाफ ईडी का मामला और गाँधी परिवार से संबंध

ईडी की सप्लीमेंट्री चार्जशीट में यह साबित हुआ कि थंपी रॉबर्ट वाड्रा का करीबी सहयोगी था। इस संबंध का खुलासा वित्तीय लेनदेन के माध्यम से हुआ, जिसमें लंदन की प्रॉपर्टी का रेनोवेशन और फरीदाबाद में जमीन का सौदा भी शामिल है। इसके साथ ही राहुल गाँधी और सीसी थंपी के बीच संबंधों का भी खुलासा हुआ है।

थंपी ने एचएल पाहवा को जो पैसे दिए थे, उससे राहुल गाँधी को अपार फायदा पहुँचा। ठीक इसी तरह प्रियंका गाँधी ने भी पाहवा से कम कीमत पर जमीन खरीदी और बाद में ज़मीन को बढ़ी हुई कीमत पर वापस बेच दिया गया। इन लेनदेनों के लिए भी पैसे थंपी ने दिए, जो संजय भंडारी के लिए काम करता था।

किस तरह से की गई पैसों की हेराफेरी, स्रोत-ईडी

इस मामले पर हमारी साल 2019 की विस्तृत रिपोर्ट को यहाँ देखी जा सकती है। ऑपइंडिया ने साल 2019 में एचएल पाहवा और प्रियंका वाड्रा के बीच कनेक्शन को एक्सपोज किया था।

अयोध्या में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा से पहले शराब की बिक्री बैन, 84 कोसी परिक्रमा क्षेत्र से हटाई जाएँगी दुकानें: योगी सरकार का फैसला

अयोध्या के भव्य राम मंदिर में 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा होनी है। उससे पहले उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बड़ा फैसला किया है। इसके तहत अयोध्या की 84 कोसी परिक्रमा क्षेत्र में शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इस क्षेत्र में पहले से मौजूद दुकानें शिफ्ट की जाएँगी।

शराबबंदी के इस फैसले के बारे में उत्तर प्रदेश के आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल ने श्री राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से मुलाकात के दौरान जानकारी दी। उन्होंने बताया कि श्रीराम मंदिर क्षेत्र पहले से ही मद्य निषेध क्षेत्र है। अब सरकार ने 84 कोसी परिक्रमा क्षेत्र को भी मद्य निषेध के दायरे में लाने का निर्णय किया है

अग्रवाल ने बताया कि इस संबंध में आबकारी विभाग को निर्देश दिए जा चुके हैं। परिक्रमा क्षेत्र में मौजूद शराब की दुकानें शिफ्ट की जाएंगी। 84 कोसी परिक्रमा क्षेत्र में अयोध्या के साथ-साथ फैजाबाद, बस्ती, अंबेडकर नगर, सुल्तानपुर का भी इलाका आता है। जानकारी के मुताबिक इस क्षेत्र में शराब की 500 से अधिक दुकानें हैं। सभी दुकानें बंद कर दी गईं हैं।

बताते चलें कि सीएम योगी ने अयोध्या यात्रा के दौरान ऐसा करने के संकेत दे दिए थे। सीएम योगी कहा था कि यह एक धार्मिक नगरी है, इसलिए जनभावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। यहाँ माँस और शराब का सेवन प्रतिबंधित होना चाहिए। उन्होंने ये भी कहा था कि ‘धर्मनगरी’ अयोध्या शहरी विकास का मॉडल होगी। यहाँ 24 घंटे सात दिन पीने का पानी लोगों को मुहैया करवाया जाएगी। सीएम योगी ने विकास के कई कामों की समीक्षा के दौरान कहा कि अयोध्या आने वाले हर एक भक्त को यहाँ से मन में शांति, संतोष और आनंद के साथ लेकर वापस जाना चाहिए।

गौरतलब है यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ गुरुवार (28 दिसंबर,2023) को भी अयोध्या के दौरे पर हैं। अब अयोध्या रेलवे स्टेशन का नाम बदल कर ‘अयोध्या धाम जंक्शन’ कर दिया गया है। श्रीराम जन्मभूमि परिसर में चारों वेदों की सभी शाखाओं का पारायण और यज्ञ अनवरत चल रहा है। देश के सभी प्रांतों से मूर्धन्य वैदिक विद्वानों और यज्ञाचार्यों को इस अनुष्ठान में सम्मिलित होने के लिए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास द्वारा आमंत्रित किया जा रहा है। ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ ट्रस्ट ने बताया है कि यह अनुष्ठान प्राण-प्रतिष्ठा तक अनवरत चलता रहेगा।

‘महिषासुर/अंधकासुर हमारा राजा’: कर्नाटक में ‘दानव संहार’ की परंपरा के दौरान शिव-पार्वती की मूर्ति पर दूषित जल फेंका, पुलिस ने दर्ज की FIR

कर्नाटक के नन्जानगुडु में एक हिन्दू पारंपरिक रीति में खलल डालने का वीडियो सामने आया है। वहाँ हर साल माता पार्वती और भगवान शिव के हाथों दानव अंधकासुर के वध को दिखाने और दानव के वध का उत्सव मनाने का रिवाज है। इस साल भी ऐसा ही किया जा रहा था। इसी दौरान विरोध कर रहे कुछ लोगों ने मूर्तियों पानी फेंक दिया। इस मामले में FIR दर्ज करवाई गई है।

दरअसल, कर्नाटक के मैसूरू में नन्जानगुडु में कंटेश्वरा प्रभु का मंदिर है। कंटेश्वरा या नन्जुन्देश्वरा को भगवान शिव का रूप माना जाता है। नंजू माने कन्नड़ में विष पीना होता है। इस मंदिर में हर वर्ष ‘अंधकासुर संहार’ की परम्परा रही है। इसमें भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्तियों द्वारा मंदिर के पास स्थित राक्षस मंडप के पास अंधकासुर की रंगोली को बिगाड़ा जाता है।

इस दौरान प्रदर्शित किया जाता है कि प्रभु ने दानव का संहार किया। हालाँकि, इस बार इस परम्परा पर बवाल हो गया है। ‘दलित संघर्ष समिति’ नाम के एक संगठन ने इस परम्परा को रोकने की माँग की है। समिति का कहना है कि यह अंधकासुर/महिषासुर उनका राजा था। इसलिए इस रिवाज से उनकी भावनाएँ आहत होती हैं।

जब 27 दिसम्बर 2023 की शाम को नन्जानगुडु में भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्तियों को लाया गया तो कुछ उपद्रवियों ने उन मूर्तियों पर पानी फेंक दिया। सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर लोगों में आक्रोश दिख रहा है। सोशल मीडिया यूजर्स आरोप लगा रहे हैं कि पानी में थूक भी मिलाया गया था।

यह पूरी घटना कैमरे में कैद हो गई है। इस मामले को लेकर एक भक्त ने दलित संघर्ष समिति के विरुद्ध पुलिस में मामला दर्ज करवाया है। पुलिस के पास दर्ज करवाई गई FIR में पाँच लोगों का नाम लिया गया है। जिन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, उनके नाम हैं- बलाराजू, नारायण, नागभूषण, नतेश और अभि।

यह अनुष्ठान पूरे क्षेत्र में, विशेषकर गांवों में मनाया जाता है। भक्त अपनी परम्परा में खलल डाले जाने पर काफी आक्रोशित हैं। पुलिस अब मामले की जाँच कर रही है।