Home Blog Page 1283

‘मेरा किया वादा मुझे सोने नहीं देता…’: PM ने ‘मोदी की गारंटी’ का समझाया अर्थ, इंटरव्यू में कहा- सिर्फ हिंदी पट्टी की पार्टी नहीं BJP, अब देश के हर कोने में मौजूद

हाल ही में संपन्न हुए पाँच राज्यों के विधानसभा चुनावों में ‘मोदी की गारंटी’ को लेकर भाजपा चुनावी मैदान में थी। इसके अच्छे नतीजे भी देखने को मिले। भाजपा को तीन राज्यों- राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में जबरदस्त बहुमत मिला और वहाँ सरकार बनी। मोदी की गारंटी क्या है और इन राज्यों में नए चेहरों को क्यों कमान सौंपी गई, लेकर पीएम मोदी ने अपनी बात रखी है।

इंडिया टुडे ग्रुप के एडिटर-इन-चीफ तथा चेयरपर्सन अरुण पुरी, वाइस-चेयरपर्सन कली पुरी और ग्रुप एडिटोरियल डायरेक्टर राज चेंगप्पा से खास बातचीत में पीएम पीएम मोदी ने राजनीति लेकर अर्थनीति तक, विकास से लेकर विश्वास तक, हर मुद्दे पर खुलकर अपनी बात रखी। प्रधानमंत्री का विस्तृत इंटरव्यू इंडिया टुडे के आगामी अंक में प्रकाशित किया जाएगा। हालाँकि, सामने आए इसके प्रमुख अंश में पीएम मोदी कई मुद्दों पर बातें कीं।

पीएम मोदी ने समझाया ‘मोदी की गारंटी’ का मतलब

‘मोेदी की गारंटी’ को लेकर पूछे गए एक सवाल पर पीएम मोदी ने कहा कि गारंटी का मतलब सिर्फ बोलना नहीं है, बल्कि इसके साथ बँध जाना होता है। उन्होंने कहा, “मेरा किया वादा मुझे सोने नहीं देता, बल्कि कड़ी मेहनत के लिए प्रेरित करता है। मोदी की गारंटी का मतलब गरीबों का विश्वास है। देश का हर गरीब जानता है कि मोदी अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटेगा।”

पीएम मोदी ने कहा कि सभी राजनीतिक दलों ने गरीबों का विश्वास तोड़ा है, लेकिन उन्हें विश्वास है कि ‘मोदी की गारंटी’ कभी नहीं टूटेगी। उन्होंने कहा, “यही विश्वास मुझे प्रेरणा देती है। इसके लिए मैं जी-जान से काम करता हूँ और गारंटी को पूरा करता हूँ। ये कोई शब्द या चुनावी वादा नहीं है, बल्कि मेरी दशकों की कड़ी मेहनत है। समाज के प्रति संवेदनशीलता की अभिव्यक्ति है।”

राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में नए चेहरों को क्यों सौंपी कमान?

पीएम मोदी से जब राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में तीन नए चेहरों को मुख्यमंत्री बनाने पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने इसे सीधे-सीधे खुद से जोड़ दिया। पीएम मोदी ने कहा, “जब मैं गुजरात का मुख्यमंत्री बना था तो मेरा कोई प्रशासनिक अनुभव नहीं था। मैं तो विधानसभा तक के लिए नहीं चुना गया था। इसे भले ही लोग नया ट्रेंड मान रहे हों, क्योंकि परिवारवादी पार्टियों में लोग परिवार के बाहर कुछ सोच ही नहीं पाते, पर हमारी पार्टी अलग-अलग प्रयोग करने की अभ्यस्त है।”

पीएम मोदी ने कहा कि लोकतंत्र में नई पीढ़ियों और नए खून को अवसर देना बहुत जरूरी है। यही लोकतांत्रिक मंथन ही लोकतंत्र को जीवंत बनाता है, जबकि परिवारवादी पार्टियों को यह लोकतांत्रिक मंथन कठिन लगता है। उन्होंने कहा, “हमारी पार्टी के कार्यकर्ताओं को यह भरोसा है कि वो भी मेहनत के दम पर ऊपर उठ सकते हैं। हमारी पार्टी कैडर बेस्ड पार्टी है और हमारे यहाँ ऐसे ही काम होता है।”

आर्टिकल 370 और जम्मू-कश्मीर में बदलाव

पीएम मोदी से इस इंटरव्यू में आर्टिकल 370 के खात्मे और जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक बदलाव को लेकर भी सवाल पूछे गए। इस पर पीएम मोदी ने कहा, “कभी नेहरू जी ने संसद में कहा था कि आर्टिकल 370 घिसते-घिसते खत्म हो जाएगी, लेकिन 70 दशकों तक इसने जम्मू-कश्मीर को थाम कर रखा। जम्मू-कश्मीर में महिलाओं, गरीबों, अल्पसंख्यकों को वंचित रखा गया। अब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोग अपना भविष्य बनाने के लिए स्वतंत्र हो गए हैं।”

उन्होंने कहा कि आर्टिकल 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर पर भारत का संविधान पूरी तरह से लागू हो गया, जो समानता की बात करता है। आज आतंकवाद निचले स्तर पर पहुँच गया है और पर्यटन रिकॉर्ड ऊँचाइयाँ छू रहा है। उन्होंने जी-20 की बैठक का भी उदाहरण दिया, जो जम्मू-कश्मीर में आयोजित की गई थी। उन्होंने कश्मीर में स्थाई शांति लाने के उपायों के बारे में भी बताया।

पीएम मोदी ने कहा कि केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा, विकास, इंफ्रा में निवेश और सरकारी प्रक्रियाओं का पुनर्गठन कर रही है। संसद में जम्मू-कश्मीर का प्रतिनिधित्व था, लेकिन आर्टिकल 370 हटने के बाद लोकतंत्र को हर कश्मीरी तक पहुँचाया जा रहा है। अब त्रिस्तरीय पंचायतीराज व्यवस्था लागू की गई है। जमीन से जुड़े 35 हजार नेता लोगों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

बीजेपी आज देश के हर कोने में मौजूद

इस इंटरव्यू में पीएम मोदी ने बीजेपी को हिंदी पट्टी की पार्टी बोलने वालों को आईना दिखाया है। उन्होंने कहा, “बीजेपी के बनने के बाद से हम ये बातें सुन रहे हैं। कभी ब्राह्मण-बनिया पार्टी भी कहा गया, तो कभी कहा गया कि हमें सिर्फ शहरों में समर्थन मिलता है। कभी हमें हिंदी पट्टी की पार्टी कहा गया, लेकिन हमने सबको गलत साबित कर दिया है। आज बीजेपी देश के हर कोने में मौजूद है।”

उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, “केरल के स्थानीय निकायों में बीजेपी प्रमुख विपक्षी पार्टी है। बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड में बीजेपी प्रमुख विपक्षी दल है। 6 माह पहले तक कर्नाटक में हमारी सरकार थी। पुदुचेरी में बीजेपी की सरकार है। देश के 16 राज्यों में बीजेपी की सरकारें हैं, तो 8 राज्यों में हम मुख्य विपक्षी दल हैं। पूर्वोत्तर के 6 राज्यों में हमारी सरकार है।”

प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा, “यहाँ तक कि लोकसभा के नजरिए से देखें तो दक्षिण भारत में हम सबसे बड़ी पार्टी हैं। दो लोकसभा सीटों की विनम्र शुरुआत से अब 303 तक की हमारी यात्रा पर विचार कीजिए। बीजेपी कैडर बेस्ड पार्टी है। अकेले उनकी हमारी मेहनत से सफलता नहीं मिली, बल्कि बीजेपी को आगे ले जाने में हर कार्यकर्ता ने अपना योगदान दिया है।”

पीएम मोदी ने समझाई बुनियादी ढांचे में निवेश से रोजगार बढ़ने की बात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नौकरियों और रोजगार को लेकर पूछे गए सवाल पर कहा कि भाजपा सरकार का लक्ष्य रोजगार सृजन है। जो कई तरीकों से होता है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने बुनियादी ढाँचे में सबसे ज्यादा 10 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया है। साल 2013-14 में ये आँकड़ा महज 1.9 लाख करोड़ रुपए का था। इस निवेश से मेट्रो लाइन की लंबाई 248 किमी से बढ़कर 905 किमी हो गईं, क्या इससे नौकरियाँ पैदा नहीं हुईं?

पीएम मोदी ने कहा, “इन 10 सालों में एयरपोर्ट की संख्या 74 से बढ़कर 149 हुई, क्या इससे नौकरियाँ नहीं बढ़ीं? मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 से बढ़कर 706 हुई, क्या इससे नौकरियों का सृजन नहीं हुआ? साल 2014 की तुलना में सड़कों का दोगुना निर्माण हुआ। पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। कृषि पैदावार बड़ी है। क्या इससे रोजगार नहीं बढ़ा?”

उन्होंने बेरोजगारी के सवाल पर भी अपनी बात रखी। प्रधानमंत्री ने कहा, बेरोजगारी दर साल 2018-19 में 5.8 थी, जो अब 3.2 प्रतिशत रह गई है। उन्होंने सवालिया लहजे में पूछा कि ‘आँकड़े क्या बताते हैं’? उन्होंने कहा, “31 मार्च 2014 को ईपीएफओ से 11.78 करोड़ लोग ही जुड़े थे। अब 27.74 करोड़ लोग ईपीएफओ से जुड़े हैं। क्या ये आँकड़े रोजगार से नहीं जुड़े हैं?”

5 ट्रिलियन इकॉनमी का टारगेट एकदम हकीकत, हम हासिल कर के रहेंगे

पीएम मोदी ने इकॉनमी को लेकर कहा कि साल 2014 में जब भाजपा की सरकार आई तो भारत की अर्थव्यवस्था 20 खरब डॉलर यानी कि 167 लाख करोड़ रुपए की थी। अब ये आँकड़ा लगभग दोगुना होकर 37.5 खरब डॉलर यानी 312 लाख करोड़ रुपए का हो गया है। उन्होंने कहा कि अब तक की सबसे बड़ी महामारी के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था सँभली हुई है और आगे बढ़ रही है।

गुजरात का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, “जब 2001 में मैं गुजरात का सीएम बना तो गुजरात की इकॉनमी 26 अरब डॉलर यानी 2.17 लाख करोड़ रुपए की थी। जब मैंने गुजरात छोड़ा, तब तक ये बढ़कर 133.5 अरब डॉलर (11.1 लाख करोड़ रुपए) पहुँच चुकी थी और अब ये लगभग 260 अरब डॉलर की है। 23 सालों का ये रिकॉर्ड ही बताता है कि हम किस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।”

पीएम मोदी ने विपक्ष के महंगाई के आरोपों से जुड़े सवाल पर कहा कि दुनिया भर में महंगाई बढ़ी है। इसके बावजूद 2014-15 और 2023-24 के बीच औसतन महंगाई महज 5.1 प्रतिशत रही, जबकि 2004-2014 के बीच ये दर 8.2 प्रतिशत रही थी। उन्होंने कहा कि कोरोना के समय वैश्विक सप्लाई चेन नष्ट हो गया था। पूरी दुनिया में तनाव फैला हुआ है। मंदी का दबाव है, फिर भी भाजपा सरकार महंगाई पर लगाम लगाए हुए है।

संभल में भाई के फाँसी लगाने के बाद दूसरा भी फँदे पर झूला: सूचना मिलने पर पंजाब से घर लौट रहा था बड़ा भाई, रास्ते में उसने भी कर ली सुसाइड, कहा- घर की लाज रखना

उत्तर प्रदेश के संभल में 19 से 22 साल के बीच के तीन भाइयों ने एक के बाद एक फाँसी लगा ली, जिसमें से दो की मौत हो गई। वहीं, एक भाई की हालत गंभीर है। दरअसल, छोटे भाई पान सिंह यादव ने फाँसी लगाकर आत्महत्या ली। इसी सदमे में बीच वाले भाई ने भी फाँसी लगा ली। वहीं, पंजाब में रहने वाले बड़े भाई को जब इसकी जानकारी मिली तो वह घर के लिए ट्रेन पकड़ ली, लेकिन रास्ते में उतर कर रेलवे पुलिया पर फाँसी लगा ली।

ये मामला संभल जिले के धनारी थाना क्षेत्र के औरंगाबाद गाँव की है। रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार (28 दिसंबर 2023) को 19 साल के पान सिंह, उससे बड़े बृजेश सिंह और सबसे बड़े भाई 22 साल के मुनेश सिंह ने फाँसी लगा ली। पिता से विवाद के बाद छोटे भाई पान सिंह ने जंगल में शाम चार बजे के आसपास फाँसी लगाकर जान दे दी। इसकी सूचना जब घर पर पहुँची तो कोहराम मच गया।

सभी लोग छोटे भाई के शव को लाने गए तो बीच वाले भाई बृजेश सिंह ने शाम को करीब 6 बजे घर के कमरे में फाँसी लगा ली। उसे घरवालों ने किसी तरह से बचाया और अस्पताल में भर्ती कराया, जहाँ उसकी हालत गंभीर है। इन सबकी जानकारी बड़े भाई मुनेश सिंह को लगी तो वह पंजाब से गाँव के लिए ट्रेन पकड़ लिया, लेकिन संभल के धनारी रेलवे स्टेशन पर उतरा रेलवे पुल के पास फाँसी लगा ली।

सबसे बड़े भाई मुनीश ने रेलवे पुलिया पर गमछे से फाँसी लगाने से पहले अपने परिजनों को कॉल किया था और आकर शव ले जाने के लिए कहा था। मुनेश के चचेरे भाई अनेकपाल के मुताबिक, “मुनीश ने घर पर कॉल करके कहा कि एक भाई मर गया और दूसरा भी मरने वाला है। दो भाई नहीं रहेंगे तो मैं अकेले जीकर क्या करूँगा। मैं फाँसी लागने जा रहा हूँ। मेरी डेडबॉडी आकर ले जाना।”

घटना पान सिंह और मुनेश सिंह की मौत हो गई है। वहीं, परिजनों ने पुलिस को सूचित किए बिना ही इनका अंतिम संस्कार कर दिया। वहीं, बृजेश सिंह की हालत गंभीर है और एक निजी अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है। एक के बाद एक करके तीनों भाइयों के फाँसी लगाने से विजय सिंह यादव के घर में मातम पसरा हुआ है और पूरे इलाके में दहशत का माहौल बना हुआ है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बड़े भाई मुनेश सिंह ने फाँसी लगाने से पहले अपने हाथ पर ही एक सुसाइड नोट लिखा है। सुसाइड नोट में उसने लिखा है, “हम दोनों भाइयों की आत्मा को शांति मिले। हमारे घर की लाज रखना। सब लोगों को राम-राम।” इस घटना के पीछे असली वजह क्या है, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। परिवार भी खुलकर कुछ बता नहीं रहा है।

फाँसी लगाने की इन घटनाओं की जानकारी मिलते ही एसपी, एसडीएम और तहसीलदार मौके पर पहुँचे। इस मामले में पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है। वहीं, मृतक के चचेरे भाई ने बताया कि तीनों भाइयों में सबसे छोटे पान सिंह ने पंजाब जाने की जिद की थी, लेकिन पिता ने मना कर दिया था। इसकी वजह से बुधवार (27 दिसंबर 2023) को उसका पिता के साथ विवाद हुआ और दूसरे दिन उसने फाँसी लगा ली।

‘फिर आएगा मोदी…’: लोकसभा चुनाव के लिए BJP ने जारी किया चुनावी गीत, कॉन्ग्रेस ने ‘स्मृति ईरानी’ जैसी आवाज में जारी किया वीडियो तो यूजर लेने लगे मजे

भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव 2024 के लिए एक गीत जारी किया है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा किए गए कामों को गिनाया गया है। इस गीत में पीएम मोदी को एक व्यक्ति ही नहीं, बल्कि पूरे देश का गौरव बताया गया है। ‘फिर आएगा मोदी’ शीर्षक नाम वाले गीत में विपक्षी दलों पर निशाना भी साधा गया है।

खास बात ये है कि इस गीत में मोदी सरकार के उन कामों को केंद्र में रखा गया है, जो देश की बड़ी आबादी को फायदा पहुँचा रहे हैं। इस गीत की शुरुआत होती है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंदिरों में दर्शन के विजुअल्स से, शैंगोल की स्थापना से और भारत देश का गौरव बढ़ाते पीएम मोदी की तस्वीरों से। करीब 10 मिनट के इस गीत के शुरुआती बोल हैं…

बजे डंका, काम के दम का…
राम जी देंगे सद्बुद्धि, फिर आएगा मोदी…

गीत में आगे राम मंदिर, आर्टिकल 370 से लेकर सर्जिकल स्ट्राइक, सड़कों के जाल, एयरपोर्ट से लेकर वंदे भारत ट्रेन, उज्ज्वला, एम्स, आईआईटी, आईआईएम, हर घर पानी, हर घर बिजली, जनधन योजना, किसान सम्मान निधि, कमजोर वर्ग को मुफ्त अनाज और आयुष्मान भारत से गरीबों का मुफ्त इलाज जैसी योजनाओं का जिक्र है।

यही नहीं, गीत में स्वच्छ भारत से लेकर प्रधानमंत्री आवास, डिजिटल इंडिया, तीन तलाक, स्टार्टअप क्रांति, खेलो इंडिया, चंद्रयान, आदित्य मिशन से लेकर नई शिक्षा नीति, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, स्किल इंडिया, मेक इन इंडिया, जी-20 सम्मेलन को भी जगह दी गई है।

इस गीत के माध्यम से विपक्षी दलों के जुटान, परिवारवाद और भ्रष्टाचार को भी निशाना बनाया गया है, लेकिन फोकस मोदी सरकार के कामों पर है। इस गीत को भारतीय जनता पार्टी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट्स पर गुरुवार (28 दिसंबर 2023) को साझा किया, जो तेजी से वायरल हो रहा है।

वहीं, दूसरी ओर कॉन्ग्रेस पार्टी ने एक वीडियो अपने सोशल मीडिया पेज हैंडल पर शेयर किया है, जिसका शीर्षक है ‘गूजबम्प्स… कमिंग सून’। ये अलग बात है कि कॉन्ग्रेस के वीडियो पर लोग कॉन्ग्रेस को ही ट्रोल कर रहे हैं, क्योंकि उस वीडियो में जो आवाज है, वो कथित तौर पर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी से मैच कर रही है।

लोग कमेंट्स के माध्यम से बता भी रहे हैं कि कॉन्ग्रेस अपने प्रचार के लिए बीजेपी नेताओं की आवाज उधार ले रही है। हालाँकि, आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से उस वीडियो को डिलीट कर दिया गया है, लेकिन तब तक लोग उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर चुके थे।

बता दें कि अगले साल लोकसभा चुनाव होने वाले हैं, जिसके लिए सभी दलों ने कमर कस ली है। इस चुनाव में मुख्य मुकाबला एनडीए और विपक्षी दलों के बीच है। एनडीए की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगुवाई करेंगे, जबकि विपक्षी दलों का अब तक कोई चेहरा तय नहीं हो पाया है। विपक्षी दलों में सबसे बड़ी कॉन्ग्रेस पार्टी है।

मुुँह में सेब और गुदा में गाजर: 5 स्टार होटल की किचन में कर्मचारी को नंगा कर घंटों कुर्सी से बाँधे रखा, फ्रांस के स्टार शेफ ने इस्तीफा

फ्रांसीसी स्टार शेफ ऑरेलियन लार्ज्यू (Aurelien Largeau) ने फ्रांस के मशहूर 5 स्टार होटल ‘होटल डु पलाइस (Hotel du Palais)’ की नौकरी से अचानक इस्तीफा दे दिया है। इस मिशेलिन स्टार शेफ का यह फैसला जिस घटना का नतीजा है, वो इंसानियत को शर्मसार करने वाली है।

दरअसल, दक्षिण-पश्चिमी फ़्रांस के बियारिट्ज स्थित इस होटल के किचन में एक कर्मचारी के मुँह में सेब और गुदा में गाजर ठूँसकर उसे नंगे बदन घंटों तक कुर्सी पर बाँधकर बैठाया गया था। जब ये सब हो रहा था तो होटल के किचन बिग्रेड के साथ स्टार शेफ लार्ज्यू भी इस मजबूर और अपमानित महसूस कर रहे शख्स को निहार रहे थे।

इस वाकए की वीडियो क्लिप वायरल होने के बाद स्टार शेफ ऑरेलियन लार्ज्यू के नौकरी छोड़ने की खबर आई है। होटल चेन की तरफ से गुरुवार (28 दिसंबर 2023) को लार्ज्यू के नौकरी छोड़ने की जानकारी शेयर की गई। 31 साल के ऑरेलियन लार्ज्यू के नाम पर मिशेलिन स्टार शेफ का तमगा जुड़ा है।

अभियोजक जेरोम बौरियर के मुताबिक, बेयोन सरकारी अभियोजक के दफ्तर ने होटल के इस हेल्पिंग हैंड के यौन उत्पीड़न और हिंसा के आरोपों की प्रारंभिक जाँच शुरू कर दी है। इस होटल के मालिक हयात की प्रवक्ता ने एएफपी को बताया कि प्रबंधन को इस परेशान करने वाली घटना के बारे में बताया गया था। दरअसल इस घटना की फुटेज ऑनलाइन शेयर की गई थी।

हयात की प्रवक्ता ने कहा, “यह घटना उन मूल्यों को प्रतिबिंबित नहीं करती, जिनकी हम रक्षा करते हैं। हमने जाँच की है और सही फैसले लिए हैं। हमारे सहयोगियों, ग्राहकों और भागीदारों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और भलाई हमारे लिए पहली प्राथमिकताएँ हैं।”

हालाँकि, उन्होंने इस वाकए के बारे में विस्तार से कुछ नहीं बताया, लेकिन फ्रांस के रीजनल डेली सूड औएस्ट (Sud Ouest) ने लिखा है कि ये घटना होटल की रसोई के शुरुआत की प्रथा हेजिंग के तहत की गई थी। इसके तहत रसोई में काम करने वाले शख्स के मुँह में सेब और गुदा में गाजर डालकर नंगा करके घंटों तक एक कुर्सी से बाँध दिया गया था। इस दौरान किचन ब्रिगेड के लोग वहाँ खड़े उसे देख रहे थे।

सूद औएस्ट ने लिखा ये अपमानजनक घटना शेफ ऑरेलियन के अधिकार क्षेत्र में और उनकी मौजूदगी में हुई थी। हालाँकि अब इस शर्मनाक वाकए की फुटेज को इंटरनेट से हटा दिया गया है। बताते चलें कि फ्रांसीसी कानून के तहत हेजिंग पर प्रतिबंध है। इसका मतलब सख्त शारीरिक प्रशिक्षण और दीक्षा के हिस्से के तौर पर अक्सर मुश्किल अपमानजनक काम करवाने से है।

रिपोर्टों में कहा गया है कि फ्रांसीसी रेस्तराँ में यह प्रथा अभी भी होती है। इसे कभी-कभी एक टेस्ट के तौर पर प्रयोग किया जाता है, जिसमें ये पता किया जाता है कि जूनियर कर्मचारी नौकरी के दबाव को सँभाल सकते हैं या नहीं। हाल के सालों में फ्रांस में कई खाना पकाने वाले पेशेवरों ने रसोई में हिंसा के खिलाफ अभियान शुरू किया है। इनमें से एक का नाम ‘हैंड्स ऑफ माई किचन हैंड’ और दूसरे का नाम ‘रेस्पेक्ट योर किचन’ है।

बताते चलें कि होटल डू पलाइस बियारिट्ज़ में समुद्र तट पर एक पाँच सितारा होटल है। इसमें एक रात बिताने की औसत कीमत 400 यूरो (445 डॉलर) से अधिक है। फ्रांसीसी स्टार शेफ ऑरेलियन लार्ज्यू इस होटल के किचन का काम सँभालते थे।

‘…तो 400 सीट जीत जाएगी BJP’: 2024 में हार देख कॉन्ग्रेस नेता सैम पित्रौदा EVM पर खिसियाए, छेड़छाड़ का सबूत माँगने पर तिलमिलाए

इंडिया ओवरसीज कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रौदा ने हाल ही में ईवीएम पर सवाल उठाए और कहा कि अगर ईवीएम को फिक्स (सही) नहीं किया जाएगा तो हो सकता है कि भाजपा लोकसभा चुनावों में 400 सीट जीत जाए। ऐसा उन्होंने अजीत अंजुम को दिए इंटरव्यू में कहा।

उन्होंने इस साक्षात्कार के दौरान ईवीएम पर सवाल तो उठा दिए। हालाँकि जब उन्हें याद दिलाया गया कि चुनाव आयोग ने तो कहा ही था कि जो कह रहे हैं कि ईवीएम में गड़बड़ है वो आकर साबित करें या इसे हैक करके दिखाएँ। तो इस पर पित्रौदा ने फौरन जवाब दिया कि इसका वो क्यों सबूत देंगे।

सैम पित्रोदा ने तिलमिलाकर कहा, “वे (चुनाव आयोग) हमसे सबूत क्यों माँग रहे हैं? ये तो उन्हें साबित करना चाहिए कि ईवीएम के साथ छेड़छाड़ नहीं की गई है। आप मुझे साबित करें कि मेरा वोट डाला हुआ गिना जाता है। आप इसे आज वीवीपैट के साथ साबित नहीं कर सकते। आज की ईवीएम है कोई स्टैंडअलोन मशीन नहीं है।”

कॉन्ग्रेस नेता ने हाल ही में ईवीएम संबंधी अपनी चिंता चुनाव आयोग के आगे भी रखी थी। इस इंटरव्यू में उन्होंने इस संबंध में बात करते हुए कहा, “मैंने चुनाव आयोग के जवाब का इंतजार किया लेकिन जब ऐसा नहीं हुआ तो मैंने बोलने का फैसला किया। इसका इस बात से कोई लेना-देना नहीं है कि पाँच राज्यों में चुनाव खत्म हो चुके हैं और 2024 का चुनाव आ रहा है।…चुनाव आयोग को विश्वास के पुनर्निर्माण के लिए जवाब देना चाहिए।”

उन्होंने कहा, अगर चुनाव आयोग ऐसा करता है तो वो और मजबूत होगा। निर्णय लेना देश पर होना चाहिए। ईवीएम को अगले चुनाव से पहले ही ठीक करना होगा। अगर ईवीएम ठीक नहीं होती हैं तो शायद बीजेपी का 400 का आँकड़ा सही हो जाए। अगर होती है तो शायद 400 सीट न मिले।

अपने इंटरव्यू में सैम पित्रौदा ने बार-बार चुनाव आयोग से ये साबित करने को कहा कि ईवीएम में कोई गड़बड़ी नहीं होती जबकि चुनाव आयोग 2017 में ही ये दावा कर चुका है कि ईवीएम मशीनें गड़बड़ नहीं हो सकतीं।

बता दें कि ईवीएम पर विवाद कोई नया नहीं हैं। जब-जब विपक्षी पार्टी ने चुनाव हारे हैं या भाजपा को ज्यादा मार्जिन से जीतते हुए देखा है तो उन्होंने हमेशा ईवीएम पर सवाल उठाए हैं। यही जब उनकी जीत किसी राज्य में हुई तो ईवीएम का रोना कहीं नहीं रोया गया।

रात को करता रेप, जबरन पढ़वाता था नमाज, माँस खाने को करता था मजबूर: दानिश के कैद में 2 महीने तक रही 14 साल की हिंदू लड़की

कानपुर में लव जिहाद से जुड़ा एक वीभत्स मामला सामने आया है। यहाँ दानिश नाम के युवक ने इंस्टाग्राम के माध्यम से 14 साल की एक नाबालिग लड़की को बड़े-बड़े सपने दिखाकर अपने प्रेमजाल में फँसा लिया। लड़की जब उसके चंगुल में फँस गई, तो उसने लड़की को अगवा कर लिया और उसे बंधक बनाकर लगातार दुष्कर्म करता रहा। इतना ही नहीं, उससे प्रतिबंधित मांस खाने और नमाज पढ़ने के लिए विवश करता था।

दानिश लड़की को इंस्टाग्राम पर बँगले और गाड़ियों की तस्वीरें भेजा करता था। वह अपने आपको बेहद अमीर दिखाता था। हालाँकि, दानिश एक नाले पर बनी एक कमरे की झुग्गी में परिवार के साथ रहता था। लड़की जब उसके झाँसे में आ गई तो उसे अपनी झुग्गी में बंधक बना लिया। एक कमरे की झुग्गी में जब उसके परिवार के लोग सो जाते थे तो वह लड़की का मुँह दबाकर उसके साथ दुष्कर्म करता था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये मामला कानपुर के चकेरी थाना क्षेत्र का है। दानिश पुत्र गुलफाम 14 साल की लड़की को 22 अक्टूबर 2023 को मिलने के लिए बुलाया था। जब लड़की आई तो वह उसे मैकूपुरवा लेकर गया और वहाँ बंधक बना लिया। वह नाबालिग से दो महीने तक दुष्कर्म करता रहा। इस दौरान लड़की ने भागने की कई बार कोशिश की, लेकिन नाकाम रही।

पीड़िता ने बताया है कि दानिश उसे जबरन मांस खिलाता था और नमाज पढ़वाता था। इसमें उसका परिवार भी उसकी मदद करता था। मना करने पर उसे मारा-पीटा जाता था। यही नहीं, दानिश उससे 30 दिसंबर 2023 को उसका धर्मांतरण कराकर उससे जबरन निकाह करने भी करने वाला था। हालाँकि, इस बीच उसके बारे में हिंदू संगठनों को जानकारी तो वे उसे दानिश के चंगुल से मुक्त कराकर लाए।

इतना ही नहीं, मांस खाने, नमाज पढ़ने और निकाह करने से मना करने पर दानिश उसे हत्या की धमकी देता था। लड़की के पिता एक फैक्ट्री में काम करते हैं। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी का तीन महीने पहले सोशल मीडिया पर एक मुस्लिम लड़के से जान-पहचान हुई थी। बाद में वह उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर अपने साथ लेकर चला गया। लड़की के पिता की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

हिंदू संगठनों ने किशोरी को बचाया

विहिप के जिला उपाध्यक्ष आनंद सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा, “मैकूपुरवा के पास की रहने वाली दुर्गा वाहिनी की कार्यकर्ता ने उन्हें किशोरी के बंधक होने की सूचना दी थी, जिसके बाद विहिप और बजरंग दल के कार्यकर्ता आरोपित के ठिकाने पर पहुँचे। पहले तो डरी-धमकी लड़की ने आरोपित के पक्ष में बात की, लेकिन बाद में रोने लगी और आपबीती बताई।”

उन्होंने आगे बताया, “आरोपित और उसका परिवार उसे जबरन माँस खिलाते थे। बोलते थे कि इससे तुम हिंदू से मुस्लिम बन जाओगी, फिर तुम्हारा निकाह करा देंगे। वो लोग रोज उसे नमाज पढ़वाते थे। मना करने पर पीटते थे। एक दिन युवक और उसका पत्रकार साथी मौलाना को लेकर ठिकाने पर पहुँचे और 30 दिसंबर 2023 को निकाह की बात कही।”

आनंद सिंह बताया कि इसके बाद उनकी टीम दानिश के ठिकाने पर पहुँची और उसे मुक्त कराकर पुलिस के माध्यम से घर पहुँचा दिया। इस मामले में कानपुर कमिश्नरेट के एडीसीपी-ईस्ट ने बताया कि आरोपित दानिश को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसके खिलाफ सुसंगत धाराओं में केस दर्ज किया गया है और आगे की कार्रवाई की जा रही है।

पीड़िता ने हिंदू संगठनों से अपनी आपबीती में बताया कि दानिश ने इंस्टाग्राम पर बंगले और कार की तस्वीरें लगा रखी थी। वो बंगले के आसपास खड़े होकर फोटो खींचता था और भेजता था। जब वो उसे लेकर आया तो एक झोपड़ी में ले गया। इस झोपड़ी में पर्दा टंगा था और उसी में पूरा परिवार रहता था। जब सब लोग सो जाते थे तो वो मुँह दबाकर दुष्कर्म करता था और शोर मचाने पर धमकाता था।

बांग्लादेश में हिंदू परिवार की 8 एकड़ जमीन पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने किया कब्जा, धमकाया: ‘लैंड जिहाद’ पर पुलिस भी नहीं कर रही सुनवाई

भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में सत्तारूढ़ अवामी लीग (एएल) पार्टी से जुड़े इस्लामी कट्टरपंथियों के एक समूह ने एक हिंदू परिवार की जमीन पर कब्जा कर लिया है। यह मामला हितबंध उपजिले के पारुलिया गाँव का है। पीड़ित हिंदू परिवार ने अपनी 8 एकड़ जमीन पर कब्जे की शिकायत पुलिस से भी की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। उलटा आरोपितों ने पीड़ित परिवार को धमकाया और उन पर हमला किया।

पीड़ितों की पहचान रथींद्र नाथ रॉय और उनकी पत्नी सुशीला रानी के तौर पर हुई है। उनका आरोप है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद भी पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, जमीन हड़पने वालों में एएल नेता हफीजुल इस्लाम, अबुल कलाम, हजरत अली और रेदवान अहमद शामिल हैं। हफीजुल और अबुल क्रमशः पतिकपारा यूनियन वार्ड नंबर 4 के पार्टी अध्यक्ष और महासचिव हैं।

पीड़ित परिवार ने उनकी जमीन कब्जाने वाले इन आरोपितों और उनके समर्थकों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हिंदू परिवार का कहना है कि उन्हें अपनी ही जमीन पर जाने पर गंभीर नतीजे भुगतने की धमकी दी गई है। पीड़ित रथींद्र ने बताया कि 40 से 45 साल पहले कटाव के कारण उनकी पैतृक भूमि का बड़ा हिस्सा तीस्ता नदी ने निगल लिया था। लगभग 10 साल पहले उसी जगह पर नदी के तल से एक विशाल भूभाग उभरा और धीरे-धीरे नदी से घिरी भूमि में बदल गया।

उन्होंने बताया कि उसके बाद से इस जमीन पर खेती कर रहे थे। लेकिन 13 नवंबर 2023 को जब वे और उनकी पत्नी सुशीला मक्के की रोपाई के लिए गए तो आरोपित उस जमीन पर अपना दावा करने लगे। उन्होंने बताया कि आरोपितों और उनके समर्थकों ने उन्हें बेरहमी से पीटा और जमीन से भगा दिया। रथींद्र की पत्नी सुशीला का कहना है कि आरोपित अब उनके पति पर एक गैर-न्यायिक स्टांप पर दस्तखत करने का दबाव डाल रहे हैं। इसमें लिखा है कि वह जमीन का मालिकाना हक उन्हें सौंप रहे हैं।

आरोपितों में से एक अबुल कलाम ने दावा किया कि उसने तीन अन्य लोगों के साथ मिलकर हाल ही में रथींद्र नाथ से 80 लाख टका में आठ एकड़ जमीन खरीदी हैं। भारतीय मुद्रा में यह रकम करीब 60.39 लाख रुपए बैठती है। अबुल कलाम का कहना है कि यहाँ पर गैर-न्यायिक स्टांप पर दस्तखत कर जमीनें खरीदी या बेची जाती हैं, क्योंकि चर क्षेत्रों में जमीन की रजिस्ट्री नहीं होती है। एक अन्य आरोपित हजरत अली ने जमीन का सौदा 87 लाख टका में होने की बात कही है।

वहीं हितबंध पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी शाह आलम ने इस बारे में शिकायत मिलने की पुष्टि की है। उनका कहना है कि जमीन से जुड़ा मामला होने के कारण पतिकापरा यूनियन परिषद के चेयरमैन को स्थानीय स्तर पर इस मामले को सुलझाने के लिए कहा गया है। परिषद के चेयरमैन मजीबुल आलम अवामी लीग की उपजिला ईकाई के संगठन सचिव भी हैं। उनका कहना है कि रथींद्र की शिकायत सही पाने जाने पर आरोपितों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

बताते चलें कि बांग्लादेश में चुनाव होने जा रहे हैं। इससे पहले ही हिंदू समुदाय को राजनीतिक हिंसा का शिकार होना पड़ रहा है। धार्मिक उत्पीड़न से बचने के लिए यहाँ के खुलना डिवीजन के शैलकुपा उपजिले में कई हिंदू परिवारों को अपने घर खाली करने और सस्ते दामों पर बेचने के लिए मजबूर होने के मामले सामने आए हैं।

नवंबर 2023 में कालबेला की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि अल्पसंख्यक समुदाय को इस्लामवादियों से खतरे का सामना करना पड़ रहा है। कई हिंदू परिवार देश के अन्य हिस्सों में पलायन कर रहे हैं। सत्येन्द्रनाथ साहा नाम के एक मृत हिंदू के घर पर कब्ज़ा कर 4 मंजिला इमारत बना दी गई थी। ‘जुबो लीग’ के अध्यक्ष (शैलकुपा उपजिला) शमीम हुसैन मोल्ला और उसके पिता सबदर हुसैन मोल्ला पर इस हिंदू परिवार की संपत्ति कब्जाने का आरोप लगाया गया था। बता दें कि ‘जुबो लीग’ सत्तारूढ़ शेख हसीना के नेतृत्व वाली बांग्लादेश अवामी लीग पार्टी की युवा शाखा है।

सत्येन्द्रनाथ साहा की बहू का आरोप है कि ‘जुबो लीग’ नेता ने उनके घर और काली मंदिर पर जबरन कब्जा कर लिया। स्थानीय सांसद मोहम्मद अब्दुल हई से शिकायत के बावजूद आरोपितों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। दिलचस्प बात यह है कि अब्दुल हई झेनाइदाह निर्वाचन क्षेत्र से बांग्लादेश अवामी लीग पार्टी के नेता भी हैं।

चुनाव खत्म होते ही राष्ट्रसेवा के मिशन पर निकल पड़े प्रबल प्रताप जूदेव: 8 परिवारों को सनातन में वापस लेकर लौटे, कहा- आजीवन करवाता रहूँगा घर वापसी

छत्तीसगढ़ के जशपुर का जूदेव परिवार धर्मांतरित लोगों की घर वापसी के लिए अभियान चलाने को लेकर प्रसिद्ध रहा है। छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों के बाद फिर से बीजेपी नेता अखिल भारतीय घर वापसी प्रमुख प्रबल प्रताप सिंह जूदेव इस मिशन में जुट गए हैं। किलकिला धाम में उन्होंने 8 परिवारों की सनातन में वापसी करवाई है। इस दौरान उन्होंने हमेशा की तरह सभी लोगों के चरण पखारकर, उन्हें नमन कर हिंदू धर्म में उनकी वापसी करवाई। इससे ठीक पहले कोरबा में उन्होंने 101 परिवारों की घर वापसी करवाई थी।

ये सभी लोग ईसाई मिशनरियों की लालच में आकर हिंदू धर्म छोड़ चुके थे। लेकिन अब वापस मिशनरियों की चालबाजी समझने के बाद इन्होंने दोबारा सनातन में लौटने का फैसला किया और प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने इन्हें सम्मान देते हुए घर वापसी कराई।

अपने एक्स अकॉउंट पर जारी तस्वीरों के साथ उन्होंने बताया कि राष्ट्रविरोधी ताकतों को मुँहतोड़ जवाब देने के लिए किलकिलेश्वर धाम, पत्थलगाँव (छत्तीसगढ़) की पावन धरा में 8 परिवार के सदस्यों की ‘घर वापसी’ हुई। उन्होंने धर्म जागरण, आर्य समाज ,किलकिलेश्वर धाम न्यास का हृदय से धन्यवाद देते हुए कहा, “मैं संकल्पित हूँ आजीवन सनातन की रक्षा हेतु घर वापसी करवाता रहूँगा।”

बता दें कि इससे पहले उन्होंने छत्तीसगढ़ के कोरबा में धर्मांतरण का शिकार हुए 101 परिवारों की धर्म सेना ने विधि-विधान से हिंदू धर्म में घर वापसी कराई। उस समय भी उन्होंने लोगों के गंगा जल से पैर पखारकर उनका सम्मान किया, हाथ जोड़ नमन किया और उन्हें तिलकर घर वापसी की बधाई दी। इसके अलावा उन्होंने इसी सी वर्ष की शुकुआत में उन्होंने 1100 लोगों की सामूहिक घर वापसी करवाई थी। अप्रैल में उन्होंने 100 परिवार की घर वापसी करवाई थी।

अभिनेत्री रश्मिका मंदाना से लेकर कई हस्तियाँ हो चुकी हैं DeepFake की शिकार: जानिए ये AI तकनीक कितनी चिंताजनक और इससे बचाव के लिए क्या हैं उपाय

DeepFake तकनीकी ‘डीप लर्निंग’ और ‘नकली’ का एक संयोजन है, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) में एक अत्याधुनिक सीमा का प्रतिनिधित्व करता है। यह अति-यथार्थवादी छवियों, वीडियो या ऑडियो रिकॉर्डिंग में हेरफेर करने या उत्पन्न करने के लिए परिष्कृत एल्गोरिदम और तंत्रिका नेटवर्क का उपयोग करता है। शुरुआत में मनोरंजन उद्योग में रचनात्मक अभिव्यक्ति के लिए एक उपकरण के रूप में उभरते हुए डीपफेक ने एक गहरा मोड़ ले लिया है।

दुर्भावनापूर्ण कुछ शरारती लोग इस तकनीक की शक्ति का उपयोग धोखा देने, हेरफेर करने और गलत सूचना फैलाने के लिए कर रहे हैं। राजनेताओं से लेकर मशहूर हस्तियों तक को इसके जरिए निशाना बनाया जा रहा है। इसके संभावित लक्ष्य बहुत बड़े हैं, जो गोपनीयता, प्रतिष्ठा और यहाँ तक कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं एवं अखंडता तक के लिए खतरा पैदा करते हैं।

डीपफेक के दुरुपयोग से निपटने के प्रयासों में उन्नत पहचान उपकरण, कानूनी ढाँचे का विकास और सार्वजनिक जागरूकता जरूरी है। जैसे-जैसे समाज डीपफेक तकनीक से उत्पन्न नैतिक और सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है, वैसे-वैसे इसे रोकने को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। हालाँकि, इस तकनीकी हथियार की दौड़ में आगे रहने की दौड़ जारी है, जिसका लक्ष्य नवाचार और इसके अनपेक्षित परिणामों के खिलाफ सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना है।

डीपफेक तकनीक से बढ़ते खतरे के जवाब में दुनिया भर की सरकारें एआई-जनित सामग्री के दुरुपयोग को रोकने के लिए निर्णायक कदम उठा रही हैं। विधायी निकाय स्वतंत्र अभिव्यक्ति को संरक्षित करने और व्यक्तियों, व्यवसायों और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को डीपफेक के संभावित हानिकारक प्रभावों से बचाने के लिए काम कर रहे हैं।

1. दुर्भावनापूर्ण डीपफेक निर्माण को अपराध बनाना: हाल की विधायी पहलों का उद्देश्य दुर्भावनापूर्ण इरादे से डीपफेक के निर्माण और प्रसार को अपराध बनाना है। कई देश ऐसे कानून पेश कर रहे हैं, जो प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने, गलत सूचना फैलाने या जनता की राय को प्रभावित करने के लिए डिज़ाइन की गई हेरफेर वाली सामग्री का उत्पादन या साझा करने वाले व्यक्तियों पर जुर्माना अथवा कारावास सहित कई तरह के दंड लगाते हैं। ये उपाय अपराधियों को उनके कार्यों के लिए सामाजिक परिणामों के प्रति जवाबदेह ठहराते हुए एक निवारक के रूप में तय करना है।

2. गोपनीयता संरक्षण कानून: डीपफेक तकनीक द्वारा व्यक्तिगत गोपनीयता पर आक्रमण को पहचानते हुए कानून निर्माता मौजूदा गोपनीयता सुरक्षा कानूनों में बदलाव कर रहे हैं। ये उपाय व्यक्तियों को डिजिटल मीडिया में उनकी समानता पर अधिक नियंत्रण देने पर ध्यान केंद्रित करते हैं, जिसमें व्यक्तियों से जुड़े डीपफेक के निर्माण और वितरण के लिए स्पष्ट सहमति की आवश्यकता होती है। इसका लक्ष्य कानूनी सुरक्षा उपाय स्थापित करना है, जो स्वतंत्र अभिव्यक्ति के अधिकार का सम्मान करते हुए नुकसान की सँभावना को कम करता है।

3. चुनाव-विशिष्ट कानून: लोकतंत्र में खतरों पर बढ़ती चिंता के जवाब में अधिकांश देश चुनाव-विशिष्ट कानून बना रहे हैं। ये कानूनी ढाँचे राजनीतिक अभियानों के दौरान हेरफेर की गई सामग्री से उत्पन्न चुनौतियों का समाधान करते हैं। इसका उद्देश्य लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की अखंडता को सुनिश्चित करना है। इन कानूनों के प्रावधानों में अक्सर सार्वजनिक धारणा और चुनावी परिणामों पर डीपफेक के प्रभाव का प्रतिकार करने के लिए त्वरित तंत्र शामिल होते हैं।

4. कॉर्पोरेट सुरक्षा उपाय: डीपफेक के खतरों के मद्देनजर व्यापार क्षेत्र को भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इसने कानून निर्माताओं को कंपनियों और अधिकारियों की सुरक्षा के लिए कानूनी ढाँचे तैयार करने के लिए प्रेरित किया जाता है। ये कानून कॉर्पोरेट जासूसी, प्रतिष्ठा की क्षति और वित्तीय बाजारों पर डीपफेक तकनीक के संभावित दुष्प्रभाव जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करते हैं। कानूनी उपाय मजबूत साइबर सुरक्षा प्रथाओं को लागू करने के लिए व्यवसायों की जिम्मेदारी पर जोर देते हैं और हेरफेर की गई सामग्री के उपयोग के माध्यम से निगमों का शोषण करने वालों के खिलाफ कानूनी सहारा के महत्व पर जोर देते हैं।

5. नागरिक उपचार: दुर्भावनापूर्ण डीपफेक गतिविधियों को अपराध घोषित करने के अलावा, कानून में हेरफेर के पीड़ितों को सशक्त बनाने के लिए नागरिक उपायों को चिन्हित किया जा रहा है। ये कानूनी तंत्र व्यक्तियों और व्यवसायों को उनकी समानता के दुरुपयोग या झूठी जानकारी के प्रसार से होने वाले नुकसान के लिए मुआवजे की माँग करने के साधन प्रदान करते हैं। इसके अलावा, यह दंडात्मक उपायों और क्षतिपूर्ति के रास्ते दोनों की पेशकश करती हैं।

6. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: इंटरनेट की वैश्विक प्रकृति को देखते हुए कई देश डीपफेक के दुरुपयोग से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता को पहचान रहे हैं। ऐसे समझौते और संधियाँ स्थापित करने के लिए राजनयिक प्रयास चल रहे हैं, जो डीपफेक अपराधों में शामिल व्यक्तियों की जाँच और मुकदमा चलाने में सीमा पार सहयोग की सुविधा प्रदान करते हैं। इस सहयोगात्मक दृष्टिकोण का उद्देश्य एआई-जनित सामग्री के दुरुपयोग से उत्पन्न वैश्विक चुनौतियों के खिलाफ एक एकीकृत मोर्चा बनाना है।

जैसे-जैसे डीपफेक तकनीक का विकास जारी है, वैसे-वैसे समाज की सुरक्षा के लिए कानूनी प्रतिक्रियाएँ भी विकसित होनी चाहिए। कानून नुकसान को रोकने की आवश्यकता के साथ स्वतंत्र अभिव्यक्ति को संतुलित करने की जटिलताओं से निपट रहे हैं। कठोर कानून डीपफेक से उत्पन्न चुनौतियों का समाधान करते हैं।

बताते चलें कि बॉलीवुड अभिनेत्री रश्मिका मंदाना का एक वीडियो सामने आया था। इसमें जारा पटेल नाम की एक ब्रिटिश-इंडियन इन्फ्लुएंसर के वीडियो में छेड़छाड़ करके रश्मिका का चेहरा लगा दिया गया था। जारा अक्सर अंतरंग वस्त्रों में तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड करती रहती हैं। इसके बाद रश्मिका ने दिल्ली पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसी तरह इसका शिकार अभिनेतत्री काजोल, ऐश्वर्या राय, रतन टाटा सहित कई नामचीन हस्तियाँ हो चुकी हैं।

सॉफ्टवेयर कंपनी के ‘खड़ूस बॉस’ को सेक्स चैट में फँसाया, फिर पत्नी से लेकर HR तक को भेज दी नंगी तस्वीरें: ‘टॉर्चर’ का कर्मचारियों ने लिया ‘अजीब इंतकाम’

खड़ूस बॉस से बदला लेने की ऐसी कहानी आपने शायद ही सुनी हो! गुजरात के वडोदरा में एक सॉफ्टवेयर कंपनी के बॉस से बदला लेने के लिए दो कर्मचारियों ने उसे हनीट्रैप में उलझाया। फिर उसकी नंगी तस्वीरें उसकी पत्नी से लेकर कंपनी के एचआर तक को भेज दी। तीन महीने तक टॉर्चर झेलने के बाद जब बॉस ने पुलिस से शिकायत की तो पूरे मामले का खुलासा हुआ।

पुलिस ने आईपी एड्रेस के माध्यम से हनीट्रैप का जाल बिछाने वाले लोगों का पता लगाया तो दोनों उसी कंपनी के पूर्व कर्मचारी निकले। इनमें एक महिला और एक पुरुष हैं। कथित तौर पर बॉस की प्रताड़ना से तंग आकर दोनों ने नौकरी छोड़ी थी। फिर महिला के नाम से इंस्टाग्राम पर फेक अकाउंट बनाकर बॉस को फँसाया।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार फेक अकाउंट से दोनों कर्मचारियों ने करीब चार महीने पहले बॉस के साथ सेक्स चैट शुरू किया। उसे एक वेबसाइट से डाउनलोड की गई कुछ नंगी तस्वीरें भेजी। बॉस उनके जाल में उलझ गया। उसे लगा कि वह किसी महिला के साथ चैट कर रहा है। उसने भी अपनी नंगी तस्वीरें भेज दी। इसके बाद बॉस को फेक अकाउंट से मैसेज आने बंद हो गए।

चैट बंद होने के कुछ दिन बाद बॉस को ही ईमेल पर दोनों ने उसकी नग्न फोटोज और चैट के स्क्रीनशॉट भेजे। इसके बाद कंपनी के एचआर डिपार्टमेंट को इसी तरह का ईमेल भेजा गया। यह सिलसिला यहीं नहीं रुका। बॉस की पत्नी को भी उसकी नंगी तस्वीरें और चैट पहले मेल किए गए और फिर स्पीडपोस्ट के जरिए तस्वीरों का प्रिंट आउट उस दफ्तर में भेजा गया जहाँ वह काम करती है।

पुलिस के मुताबिक इंतकाम का यह प्लान बॉस की कथित डाँट के कारण नौकरी छोड़ने वाली महिला कर्मचारी ने अपने एक पुरुष सहकर्मी के साथ मिलकर बनाया था। रिपोर्ट में पीड़ित और आरोपितों की पहचान नहीं बताई गई है। पुलिस के अनुसार पीड़ित इस मामले को आगे बढ़ाने को तैयार नहीं है। हालाँकि पुलिस ने दोनों आरोपितों को सीआरपीसी 41 (ए) के तहत बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस भेजा था। वडोदरा के एसीपी (साइबर क्राइम) हार्दिक मकाडिया ने इसे कॉर्पोरेट दुश्मनी का मामला बताया है।