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JDU में नीतीशे कुमार… ललन सिंह का अध्यक्ष पद से इस्तीफा: तेजस्वी यादव के भविष्य से लेकर NDA में वापसी तक की अटकलों ने पकड़ा जोर

दिल्ली में आयोजित जेडीयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में ललन सिंह ने शुक्रवार (29 दिसंबर 2023) को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपने इस्तीफे के बाद नीतीश कुमार का नाम अध्यक्ष पद के लिए प्रस्तावित किया, जिसे सभी नेताओं ने मान लिया। इसके साथ ही नीतीश कुमार ने एक बार फिर से पार्टी की कमान अपने हाथ में ले ली है।

बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड (JDU) के सुप्रीमो नीतीश कुमार अब तक पार्टी की कमान अपने भरोसेमंद साथियों के हाथों में देते आए हैं और वो स्वयं सत्ता चलाते रहे हैं। हालाँकि, पिछले कुछ समय से पार्टी में चल रही खींचतान को देखते हुए उन्होंने सारी ताकत अपने हाथ में ले ली है। नीतीश कुमार अब बिहार के मुख्यमंत्री के साथ ही जेडीयू का अध्यक्ष पद भी सँभालेंगे।

इस्तीफा देते हुए ललन सिंह ने कहा, “नीतीश कुमार जी के कहने पर ही मैंने राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सँभाली थी। आगे मुझे लोकसभा चुनाव लड़ना है। ऐसे में एक साथ पार्टी की जिम्मेदारी सँभालना चुनौती होगी। इसलिए मैं नीतीश कुमार जी को पार्टी अध्यक्ष की जिम्मेदारी सँभालने का प्रस्ताव रखना चाहता हूँ।” हालाँकि, खबर लिखे जाने तक इसकी औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। माना जा रहा है कि बैठक खत्म होने के बाद इसकी घोषणा होगी।

जदयू नेता और बिहार सरकार में मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा, “जेडीयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक होगी। अगर वे हमारे प्रस्ताव को स्वीकार करते हैं तो नीतीश कुमार पार्टी अध्यक्ष होंगे। ललन सिंह ने सीएम नीतीश कुमार से कहा कि वह चुनाव में व्यस्त रहेंगे, इसलिए वह चाहते हैं पार्टी अध्यक्ष का पद उन्हें सौंप दें और नीतीश कुमार ने इसे स्वीकार कर लिया…।”

कार्यकारिणी की बैठक में पार्टी की तरफ से 4 प्रस्ताव भी रखे गए, जिसमें सीट शेयरिंग पर फैसला लेने की पूरी जिम्मेदारी नीतीश कुमार पर ही छोड़ दी गई है। वो ही इंडी गठबंधन से जुड़ा हर काम देखेंगे। इस बैठक के दौरान जातिगत जनगणना और सरकारी नौकरियों पर भी प्रस्ताव रखा गया। पार्टी की बैठक में सांसदों के संसद से निलंबित होने की घटना पर भी प्रस्ताव लाया गया।

बता दें कि पिछले कई दिनों से इस बात की चर्चा हो रही थी कि ललन सिंह उर्फ राजीव रंजन सिंह को जेडीयू अध्यक्ष पद से हटाया जा सकता है। हालाँकि, ललन सिंह ने इससे साफ इनकार किया था। इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी इसे अफवाह बताया था और कहा था कि ऐसा कुछ नहीं होने जा रहा है।

नीतीश कुमार को जेडीयू का अध्यक्ष बनाने से पार्टी को फायदा भी हो सकता है। वो इंडी गठबंधन के साथ मजबूती से बारगेनिंग कर सकते हैं। चूँकि, इंडी गठबंधन को खड़ा करने का आइडिया उन्हीं का था, लेकिन बाद में राजनीतिक महत्वकांक्षा और पार्टियों के बीच खींचतान के कारण उन्हें दरकिनार कर दिया गया। अब हालात ऐसे हो गए हैं कि नीतीश कुमार की NDA में वापसी की भी अटकलें चल रही हैं।

केले का बागान, साड़ी में टीचर, जींस-कुर्ते में छात्र… गोद में उठाकर चुम्मा चाटी: कर्नाटक के स्कूल का ‘एजुकेशनल टूर’ वाला वीडियो वायरल

कर्नाटक के एक सरकारी स्कूल की टीचर का उसके स्टूडेंट के साथ कराया गया रोमांटिक फोटोशूट सोशल मीडिया पर हर जगह वायरल है। फोटोज में स्टूडेंट-टीचर दोनों एक दूसरे को चूमते हुए और गले लगते हुए दिखाई दे रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, ये कर्नाटक के चिक्कबल्लापुर जिले के मुरुगमल्ला गाँव के स्कूल से जुड़ी खबर है। स्टूडेंट-टीचर दोनों निजी तस्वीरों में किसी फिल्मी सीन की तरह पोज देने की कोशिश कर रहे हैं। फोटो में टीचर ने साड़ी पहनी हुई है और छात्र ने जींस-कुर्ता। देख सकते हैं कि फोटो में स्टूडेंट अपनी टीचर को गुलाब देकर उनको पल्लू पकड़ता है। एक में उन्हें चूमता है। अगले में टीचर उसे चूमती हैं और फिर वो अपनी टीचर को गोद में भी उठाए दिखता है।

हैरान करने वाली बात तो यह है कि फोटोशूट में नजर आ रही टीचर, स्कूल की प्रधानाध्यापिका है। वहीं छात्र कक्षा 10 का छात्र है। इन दोनों की फोटोज देख बवाल मच गया है। छात्र के माता-पिता हैरान परेशान हैं। वहीं अन्य अभिभावकों ने प्रधानाध्यापिका के पर कड़ी कार्रवाई की माँग की।

इस संबंध में एजुकेशन ऑफिसर के पास भी शिकायत पहुँचीं। शिकायत में प्रधानाध्यापिका के व्यवहार की जाँच कराने की माँग की गई। अभिभावक इस टीचर पर कड़ी कार्रवाई चाहते थे, जिसके बाद उन्होंने शिकायत की और फिर बीईओ के स्कूल पहुँचने की बात भी सामने आई। कहा जा रहा है कि बीईओ की जाँच में पता चला कि प्रधानाध्यापिका ने कुछ तस्वीरों को डिलीट कर दिया था। वहीं वायरल तस्वीर तब खींची गई थी जब स्कूल स्टाफ और छात्र एजुकेशनल ट्रिप पर गए थे। ये तस्वीरें अन्य छात्र द्वारा क्लिक करवाई गई थीं।

JNU की दीवारों पर लिखा ‘बाबरी मस्जिद फिर बनेगी’, गाँधी-इंदिरा के फोटो के साथ कॉन्ग्रेस के छात्र संगठन NSUI का नाम भी

जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय (JNU) मेें एक बार फिर से आपत्तिजनक नारे लिखे गए हैं। इस बार जेएनयू के भाषा अध्ययन केंद्र में स्प्रे-पेंट से ‘बाबरी मस्जिद फिर बनेगी’ के स्लोगन लिखे गए हैं। स्लोगन के साथ ही 6 दिसंबर की तारीख भी लिखी हुई है। यही नहीं, इसके साथ ही एनएसयूआई का ठप्पा भी लगा है, जिसमें महात्मा गाँधी, सरदार भगत सिंह और इंदिरा गाँधी की तस्वीरें हैं। हालाँकि, एनएसयूआई ने कहा है कि ये काम शरारती तत्वों का है।

‘बाबरी मस्जिद फिर बनेगी’ और NSUI की सफाई

जानकारी के मुताबिक, जेएनयू के भाषा अध्ययन केंद्र की दीवारों पर ‘Rebuild Babri Masjid’ और ‘6 December’ लिखा मिला है। ये स्लोगन ऐसे समय में लिखा गया है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या जा रहे हैं और 22 जनवरी 2024 को अयोध्या में भव्य राम मंदिर का लोकार्पण होने जा रहा है। वहीं, 6 दिसंबर की तारीख वह तारीख है, जब कारसेवकों ने विवादित बाबरी ढाँचे को गिरा दिया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले में NSUI के जेएनयू इकाई के अध्यक्ष सुधांशु शेखर की सफाई आई है। सुधांशु शेखर का कहना है कि उनके संगठन का नाम काले मार्कर से पहले ही लिखा गया था। बाद में वहाँ विवादित स्लोगन लाल रंग से लिख दिए गए। ये NSUI को बदनाम करने की कोशिश है। उन्होंने माँग की है कि पूरे इलाके की सीसीटीवी कैमरों की जाँच कराई जाए तो आरोपित पकड़े जा सकते हैं।

स्लोगन लिखे जाने पर जुर्माना

दरअसल, इस साल अक्टूबर में JNU में विवादित नारे लिखे जाने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने नए नियम बनाए थे। उस समय जेएनयू की दीवारों पर ‘फ्री कश्मीर’, ‘तेरी कब्र खुदेगी’ और ‘भगवा जलेगा’ जैसे स्लोगन लिखे गए थे। इसके बाद जेएनयू प्रशासन ने विश्वविद्यालय परिसर में किसी भी तरह के विवादित धार्मिक, सांप्रदायिक, जातिवादी या राष्ट्र-विरोधी टिप्पणियों वाले पोस्टर या पैम्फलेट को छापने, प्रसारित करने या चिपकाने पर रोक लगा दी थी। आदेश को नहीं मानने वालों पर भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया था।

इन नियमों के तहत पोस्टर या पैम्फलेट के अलावा यदि कोई छात्र किसी शैक्षणिक और प्रशासनिक परिसर के 100 मीटर के दायरे में भूख हड़ताल, धरना या किसी अन्य तरह के विरोध-प्रदर्शन में शामिल पाया जाता है या इनमें से किसी भी परिसर के प्रवेश या निकास को बाधित करते हुए पाया जाता है तो उस पर जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अलावा, उसे 2 महीने के लिए छात्रावास या फिर परिसर से बाहर करने का प्रावधान किया गया था। इसमें 10 हजार रुपए से लेकर 30 हजार रुपए तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

नए नियमों के तहत हर तरह की जबरदस्ती जैसे कि घेराव, धरना या परिसर में कोई भी बदलाव (दीवारों को गंदा करना, परिसर की संपत्ति को नुकसान पहुँचाना) अब प्रतिबंधित सूची में हैं। मैनुअल में कहा गया है कि जिस छात्र को यूनिवर्सिटी में अपने अध्ययन के दौरान पाँच या उससे अधिक बार सज़ा मिलेगी, उसे हमेशा के लिए निष्कासित कर दिया जाएगा।

महाराष्ट्र ISIS मॉड्यूल पर NIA ने कसा शिकंजा, 6 आतंकियों के खिलाफ दायर की चार्जशीट, ‘DIY किट’ के जरिए बढ़ा रहे थे नेटवर्क

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (ISIS) मॉड्यूल केस में छह आरोपियों के खिलाफ गुरुवार (28 दिसंबर 2023) को चार्जशीट दायर की। गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत NIA ने ये चार्जशीट NIA स्पेशल कोर्ट के न्यायाधीश एके लाहोटी की अदालत में दायर की है।

चार्जशीट में 16 लोगों को संरक्षित गवाह बनाया गया है। इसमें 6 आरोपितों पर ISIS के इशारे पर भारत में आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया है। एनआईए के मुताबिक, आरोपितों के इस्लामिक स्टेट (IS) के साथ रिश्ते थे और वो देश के युवाओं को भारत विरोधी एजेंडे का प्रचार करने के लिए लुभाने की कोशिश कर रहे थे।

दरअसल NIA ने आईएसआईएस मॉड्यूल केस (ISIS Module Case) के दौरान इस साल जुलाई में महाराष्ट्र के कई जगहों पर छापेमारी की थी। छापेमारी के दौरान मुंबई का ताबिश नासिर सिद्दीकी, जुल्फिकार अली बड़ौदावाला उर्फ लालाभाई, शरजील शेख, बोरीवली-पडघा का आकिफ अतीक नाचन, पुणे का जुबैर नूर मोहम्मद शेख उर्फ अबू नुसैबा और अदन अली सरकार पकड़े गए थे।

एनआईए के मुताबिक, सभी आरोपित प्रतिबंधित ISIS के सदस्य हैं। इनमें से दो आरोपियों- जुल्फिकार अली बड़ौदावाला और आकिफ अतीक नाचन के खिलाफ ISIS के पुणे मॉड्यूल केस में धमाके के लिए आईईडी बनाने के आरोप में चार्टशीट दाखिल की जा चुकी है। वहीं, दो आरोपितों- ताबिश और जुल्फिकार ने आईएसआईएस के स्वयंभू खलीफा (नेता) के प्रति निष्ठा की शपथ ली थी।

एनआईए ने खुलासा किया है कि महाराष्ट्र आईएसआईएस आतंकी मॉड्यूल के सदस्य अपने संपर्क में आने वाले लोगों के साथ भारत में आतंकी संगठन की हिंसक विचारधारा को फैलाने के लिए ‘DIY (डू इट योरसेल्फ) किट’ शेयर कर रहे थे। इस किट के जरिए आरोपित अपनी आतंकी योजनाओं को अमलीजामा पहनाने के लिए पैसा भी जुटा रहे थे।

चार्जशीट में ये भी कहा गया है, “महाराष्ट्र आईएसआईएस आतंकी मॉड्यूल मामले (एनआईए आरसी-02/2023/एनआईए/एमयूएम) में अब तक की एनआईए जाँच में आईएसआईएस के विदेशी हैंडलरों की भागीदारी के साथ मिलकर एक बड़ी साजिश रचने का खुलासा हुआ है।” इसके साथ ही एक ऐसे जटिल नेटवर्क का पता चला है, जिसमें कट्टरपंथी भारत में ISIS की हिंसक विचारधारा फैला रहे थे।

जाँच एजेंसी ने बताया कि उसकी मुंबई ब्रॉन्च को आरोपितों के पास से ‘हिजरा’ यानी सीरिया में रहने से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री बरामद की है। इसमें आईएसआईएस के प्रकाशित ‘वॉयस ऑफ हिंद’ और ‘वॉयस ऑफ खुरासान’ जैसी प्रोपेगेंडा पत्रिकाएँ भी मिलीं। एजेंसी ने कहा कि जब्त सामग्री से साफ पता चलता है कि आरोपितों के आईएसआईएस के साथ मजबूत रिश्ते हैं।

बताते चलें कि एनआईए को गृह मंत्रालय से देश की एकता, अखंडता, सुरक्षा और संप्रभुता को प्रभावित करने की साजिश की जानकारी मिली थी। इसके बाद ही एनआईए ने 28 जून 2023 को ताबिश सिद्दीकी और अन्य के खिलाफ ISIS की आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देकर भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने के तहत केस दर्ज किया था। इस केस में आगे की जाँच आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 173(8) के प्रावधानों के तहत जारी है।

कर्नाटक के हुड़दंगियों को 24 घंटे में ही बेल, हीरो जैसा वेलकम: बोले CM सिद्धारमैया- बिजनेस करना है तो साइनबोर्ड पर लिखो 60% कन्नड़

कर्नाटक में कन्नड़ भाषा के लिए हुड़दंग करने वाले प्रदर्शनकारियों की माँग मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मान ली है। उन्होंने कहा है कि राज्य भर में बिजनेस करने वालों को अपने साइनबोर्ड पर 60 परसेंट जगह कन्नड़ भाषा को देनी होगी। उन्होंने बताया कि इस संबंध में जल्द ही विधेयक लाने वाले हैं।

बता दें कि इससे पहले इस मुद्दे पर बेंगलुरु महानगर पालिके ने आदेश जारी किया था कि जिन बोर्ड्स पर 60 फीसदी कर्नाटक को जगह नहीं दी गई होगी उन्हें कैंसिल कर दिया जाएगा। उन्होंने इस काम के लिए फरवरी 2024 तक का समय दिया। लेकिन, इसी बीच कई कन्नड़ समर्थक अभियान चलाकर उन लोगों के खिलाफ आवाज उठाने लगे जो बिन कन्नड़ भाषा वाला साइन बोर्ड दुकान पर लगाकर बैठे थे। इस दौरान कई जगह तोड़फोड़ भी हुई।

ऐसे में बेंगलुरु पुलिस ने सड़क पर उतरे ‘कर्नाटक रक्षाणा वेदिके’ के 15 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करके जेल में डाला। हालाँकि बाद में वो बेल पर रिहा हो गए और जेल से बाहर आते ही उनका स्वागत किसी हीरो की तरह फूल माला से किया गया। उन्होंने कहा कि चाहे 100 मामले दर्ज करवा दो लेकिन वो पीछे नहीं हटेंगे।

वहीं सीएम सिद्धारमैया ने ये सब देख कहा था कि वो किसी के प्रदर्शन करने से बिलकुल नाराज नहीं हैं। लेकिन अगर किसी ने कानून अपने हाथ में लिया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

https://www.indiatoday.in/india/karnataka/story/karnataka-government-siddaramaiah-directs-shops-signboards-60-percent-kannada-feb-end-after-rampage-2481571-2023-12-28?utm_source=directhp&utm_medium=clicktopstories&utm_campaign=hptopstories

इस पर कर्नाटक रक्षाणा वेदिका के अध्यक्ष टीएन नारायण गौड़ा ने कहा कि वो लोग जेल जाने से नहीं डरते हैं। लाठी-डंडा भी झेल लेंगे। उन्होंने कहा, “पुलिस का इस्तेमाल कन्नड़ कार्यकतर्ताओं को रोकने के लिए किया जा रहा है। यही लोग तुम्हें लोकसभा चुनाव में पाठ पढ़ाएँगे।”

बता दें कि कर्नाटक में साइनबोर्ड पर कन्नड़ भाषा न दिखने के कारण प्रदर्शन हो रहा था। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि अलग अलग राज्य के लोग आकर बेंगलुरु में बिजनेस कर रहे हैं लेकिन अपनी दुकान पर उन्होंने नेमप्लेट पर कन्नड़ भाषा को जगह नहीं दी है। वहाँ बस अंग्रेजी लिखी है। समूह ने कहा था अगर बेंगलुरु में रहना है तो कन्नड़ भाषा को सम्मान देना होगा।

समूह की इस माँग को भाजपा नेताओं ने भी समर्थन दिया। सांसद प्रहलाद जोशी ने प्रदर्शनकारियों का साथ देते हुए कहा कि- हर कोई साइनबोर्ड पढ़ने में समर्थ होना चाहिए और हर किसी को अंग्रेजी पढ़नी आनी चाहिए। आखिर समस्या क्या है साइनबोर्ड में कन्नड़ पर लिखने में… जैसे अंग्रेजी में लिखते हो वैसे ही दूसरी भाषा में लिखना है जैसे हिंदू। ये कोई इंगलैंड तो है नहीं।

अयोध्या से अबू धाबी तक हिंदुओं के लिए आया गौरव का क्षण, 14 फरवरी को पहले हिंदू मंदिर का उद्घाटन करेंगे PM मोदी: 2018 में रखी थी आधारशिला

2024 की 22 जनवरी को अयोध्या के भव्य राम मंदिर में भगवान रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा होगी। उसके बाद 14 फरवरी को अबू धाबी में पहले हिंदू मंदिर का उद्धाटन होगा। इसके लिए बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था का न्योता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वीकार कर लिया है।

बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था ने एक बयान में बताया है कि 27 दिसंबर को स्वामी ईश्वरचरणदास और स्वामी ब्रह्मविहरिदास ने निदेशक मंडल के साथ पीएम मोदी से उनके दिल्ली के 7 लोक कल्याण मार्ग स्थित आधिकारिक आवास पर मुलाकात की। उन्हें संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की राजधानी अबू धाबी में ​बने इस मंदिर के निर्माण को लेकर जानकारी दी। साथ ही इसका उद्घाटन करने का आमंत्रण पत्र सौंपा।

पीएम के साथ बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था के लोगों की यह बैठक करीब एक घंटे तक चली। इस दौरान वैश्विक सद्भाव के लिए अबू धाबी मंदिर के महत्व और वैश्विक मंच पर भारत के आध्यात्मिक नेतृत्व के लिए पीएम मोदी के दृष्टिकोण पर चर्चा हुई।

इस दौरान पीएम ने अबू धाबी में बीएपीएस हिंदू मंदिर परियोजना में शामिल लोगों, स्वयंसेवकों और समर्थकों की कोशिशों को सराहा। उन्होंने कहा, “अबूधाबी का मंदिर वसुधैव कुटुंबकम के आदर्श को प्रतिबिंबित करेगा। यह एक आदर्श आध्यात्मिक स्थान होगा जो न केवल मान्यताओं और परंपराओं में निहित है, बल्कि विविध संस्कृतियों और सभ्यताओं का संगम है। ये आध्यात्मिक सद्भाव का सार और आगे बढ़ने के मार्ग का प्रतीक है।”

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 11 फरवरी 2018 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अबू धाबी में पहले हिंदू मंदिर की आधारशिला रखी थी। पीएम मोदी ने अबू धाबी में बनने वाले भव्य हिंदू मंदिर के लिए 125 करोड़ भारतीयों की ओर से क्रॉउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान को धन्यवाद दिया था। उन्होंने इसे भारत की पहचान का जरिया बताया था।

अबू धाबी का मंदिर 55 हजार वर्गमीटर में फैला हुआ है। मंदिर का निर्माण प्राचीन हिंदू शिल्प शास्त्र के मुताबिक किया गया है। इस मंदिर की उम्र करीब 1000 साल है यानी एक हजार साल तक मंदिर मजबूती से खड़ा रहेगा। 1,000 साल की नींव के डिजाइन के बारे में बात करते हुए, बीएपीएस के प्लानिंग सेल संजय पारिख ने 2021 में बताया था, “यह पूरी तरह से सुदृढ़ संरचना होगी और इसमें हमारे प्राचीन शिल्प शास्त्र के अनुसार किसी भी लौह धातु का उपयोग नहीं किया जाएगा।”

अधनंगी पार्टी से हिला रूस, लिंग पर मोजा चढ़ाकर रैपर ने किया परफॉर्म: फौजियों की शिकायत के बाद गिड़गिड़ाकर माफी माँग रहे हैं सितारे

रूस में नए साल से पहले हुई एक न्यूड पार्टी काफी विवादों में है। बताया जा रहा है कि इस पार्टी में रैपर सिर्फ मोजे पहनकर पर्फॉर्म करने स्टेज पर आ गया था, जिसके बाद उसपर कार्रवाई हुई और 15 दिन के लिए जेल भेज दिया गया। साथ ही रैपर के ऊपर 2 लाख रूबल यानी 1 लाख 80 हजार रुपए का जुर्माना भी लगा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रैपर का नाम निकोलाई वासिलयेव है। उसे वैसियो नाम से भी जाना जाता है। वैसियो पर आरोप लगा कि वो पार्टी पूरा नंगा होकर आया और सिर्फ एक मोजे से सिर्फ अपना लिंग छिपाया था।

इसके अलावा उसने अपने तन पर कुछ नहीं पहना था। ऐसे में उसी फोटो वीडियो जब वायरल हुई तो इस पर कोर्ट ने संज्ञान लिया और 15 दिनों के लिए जेल की सजा सुनाई। साथ ही 1 लाख 80 हजार रुपए से ज्यादा का जुर्माना लगाया।

इस कार्रवाई के बाद पार्टी में शामिल हुई अन्य हस्तियों ने भी माफी माँगी है। पॉप स्टार फिलिप किरकोरोव ने भी इस पार्टी में शामिल होने के लिए माफी माँगी। उन्होंने कहा कि हर किसी के जीवन में ऐसा समय आ जाता है जब वो गलत रास्ते पर चला जाता है। गैरजिम्मेदारी के लिए उन्होंने कहा कि वो शर्मिंदा हैं।

ब्लॉगर अनास्तासिया इविलेवा ने कहा कि उन्हें अपने किए पर पछतावा है। उन्होंने खुद को एक दूसरा मौका दिए जाने की भी अपील की। अनास्तासिया की फोटोज में भी देख सकते हैं कि उन्होंने इस पार्टी में ब्लैक कलर का ट्रांसपेरेंट कपड़ा पहना था।

बताया जा रहा है कि ये पार्टी अनास्तासिया ने ही 20 दिसंबर को आयोजित की थी, जिसकी तस्वीरें बाद में वायरल हो गईं। इन्हें देख ये बहस भी छिड़ गई कि आखिर देश में युद्ध के कारण तनाव का माहौल है उस समय पर ऐसी हाई प्रोफाइल पार्टी क्यों की गई।

इसकी क्लिप देख रूसी सैनिक भी नाराज हुए कि वो किन हालातों से जूझ रहे हैं और ये हस्तियाँ मौज कर रही हैं। इस संबंध में रूसी सैनिकों ने शिकायत भी की थी। जिसके बाद जब बात पुतिन तक पहुँची तो वह भी इसे देख बहुत नाराज हुए।

एक वीडियो क्लिप भी सामने आई है। इसमें देखने को मिल रहा है कि रूस के राष्ट्रपति पुतिन के प्रवक्ता का वीडियो सर्कुलेट हो रहा है। इसमें वो पार्टी में हिस्सा लेने वाले एक सेलेब्रिटी की सफाई सुन रहे हैं।

30 दिसंबर को अयोध्या में रहेंगे PM मोदी, एयरपोर्ट महर्षि वाल्मीकि के नाम: 6 जनवरी से विमान सेवा, 22 जनवरी को रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा

22 जनवरी 2024 को अयोध्या के भव्य राम मंदिर में भगवान रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा होनी है। उससे पहले 30 दिसंबर 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में होंगे। इस दौरान वे अयोध्या के अत्याधुनिक रेलवे स्टेशन और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का उद्घाटन करेंगे। इसके अलावा वे जनसभा और रोड शो भी करेंगे।

अयोध्या का नवनिर्मित एयरपोर्ट, महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा अयोध्या धाम कहलाएगा। इससे पहले 27 दिसंबर को रेलवे स्टेशन का नाम अयोध्या जंक्शन से अयोध्या धाम करने का फैसला किया गया था। 30 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस नवनिर्मित एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन का उद्घाटन करने के साथ कई अन्य परियोजना भी राष्ट्र को समर्पित करेंगे।

इस एयरपोर्ट से विमानों का परिचालन 6 जनवरी से शुरू होगा। 6 जनवरी को पहली फ्लाइट सुबह 11:55 बजे दिल्ली से उड़ान भरेगी और दोपहर 1:15 बजे अयोध्या पहुँचेगी। यही फ्लाइट दोपहर 1:45 बजे अयोध्या से रवाना होकर 3 बजे दिल्ली पहुँचेगी। पहले चरण में अयोध्या से दिल्ली और अहमदाबाद के लिए भी उड़ानें शुरू होंगी। 11 जनवरी 2024 से अहमदाबाद और अयोध्या के बीच हफ्ते में तीन दिन फ्लाइट होंगी।

पीएम मोदी 30 दिसंबर को पुनर्विकसित अयोध्या धाम जंक्शन का उद्घाटन करेंगे। यहाँ से नई अमृत भारत और वंदे भारत ट्रेनों को हरी झंडी दिखाएँगे। इसके बाद वे महर्षि वाल्मिकी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा का उद्घाटन करेंगे। पीएमओ के मुताबिक अयोध्या में प्रधानमंत्री का 30 दिसंबर को सुबह करीब 11:15 बजे से शुरू हो जाएगा।

पीएम मोदी एक सार्वजनिक सभा को भी संबोधित करेंगे। इस दौरान वे उत्तर प्रदेश के लिए 15,700 करोड़ रुपए से अधिक की कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। इनमें अयोध्या और उसके आसपास के क्षेत्रों के विकास के लिए लगभग 11,100 करोड़ रुपए की परियोजनाएँ तो राज्य के अन्य हिस्सों के लिए लगभग 4600 करोड़ रुपए की परियोजनाएँ शामिल हैं।

राम मंदिर जैसा बना एयरपोर्ट

अयोध्या एयरपोर्ट नागर शैली में राममंदिर की तरह बनाया गया है। यहाँ एयरपोर्ट की दीवारों पर रामायण से जुड़ी अहम घटनाओं को उकेरा गया है। इस एयरपोर्ट का वास्तु और डिजाइन पूरी तरह से भगवान राम के जीवन से प्रेरित है।

इसे आर्किटेक्ट विपुल वार्ष्णेय की निगरानी में बनाया गया है। वार्ष्णेय के मुताबिक, एयरपोर्ट के सात शिखर नागर शैली में बने हैं। मुख्य शिखर बीच में और आगे 3 और पीछे 3 शिखर हैं। इसके अलावा एयरपोर्ट के बाहर तीर-धनुष का बड़ा म्यूरल बनाया गया है। यह एयरपोर्ट रामायण के सात कांड से प्रेरित सात स्तंभों पर से टिका है। अयोध्या एयरपोर्ट का पहला चरण 1,450 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से तैयार हुआ है।

एयरपोर्ट टर्मिनल भवन का क्षेत्रफल 6500 वर्गमीटर है। ये सालाना लगभग 10 लाख यात्रियों की क्षमता के हिसाब से बनाया गया है। इस एयरपोर्ट के टर्मिनल की इमारत में कई तरह की आधुनिक सुविधाएँ दी गई हैं। यहाँ इंसुलेटेड रूफिंग सिस्टम, एलईडी लाइटिंग, वर्षा जल संचयन, वाटर ट्रीटमेंट प्लाँट, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, सौर ऊर्जा संयंत्र इसकी खूबियों को बढ़ातें हैं।

उधर दूसरी तरफ अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन पहला चरण 240 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से तैयार किया गया। इस तीन मंजिला आधुनिक रेलवे स्टेशन में लिफ्ट, एस्केलेटर, फूड प्लाजा, पूजा की जरूरतों के लिए दुकानें, क्लॉक रूम, चाइल्ड केयर रूम, वेटिंग हॉल जैसी आधुनिक सुविधाओं दी गई है।

UP की शाबिया बनी सीता, संजय के साथ मंदिर में लिए सात फेरे: परिवार के विरोध पर बोली- मैं बालिग, अपनी जिंदगी का फैसला लेने का मुझे अधिकार

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में परिजनों के विरोध के बावजूद एक मुस्लिम लड़की ने अपने हिंदू प्रेमी के साथ विवाह किया है। इस युवती का नाम शाबिया है। घर वापसी के बाद उसका नाम सीता रखा गया है। 27 दिसंबर 2023 को हिंदू विधि-विधान के साथ उसने मंदिर में शादी की। इस दौरान बजरंग दल और अन्य हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ता मौजूद थे।

रिपोर्ट के अनुसार 20 साल की साबिया जिले बहुआ ब्लॉक के नरतौली गाँव की रहने वाली है। 22 साल का संजय उसकी पड़ोस के गाँव सोनबरसा का रहने वाला है। दोनों के बीच तीन साल से प्रेम संबंध चल रहा था। लेकिन शाबिया का परिवार दोनों की शादी का विरोध कर रहा था। पहले दोनों ने कोर्ट मैरिज का फैसला किया। लेकिन शाबिया के परिजनों ने वहाँ हंगामा कर दिया। इसके बाद बजरंग दल से जुड़े लोगों ने तांबेश्वर शिव मंदिर में दोनों की शादी करवाई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक संजय का नरतौली गाँव में आना-जाना था। इसी दौरान शाबिया से उसकी मुलाकात हुई थी। बुधवार (27 दिसंबर 2023) को प्रेमी जोड़े ने कोर्ट के माध्यम से राजीनामा लिखा। लेकिन इस दौरान लड़की के परिजनों ने हंगामा कर दिया। इसकी सूचना मिलते ही हिंदू संगठनों से जुड़े लोग मौके पर पहुँच गए। दोनों को तांबेश्वर मंदिर ले गए। यहाँ प्रेमी जोड़े ने मन्त्रोचारण के बीच मंदिर में सात फेरे लिए और हमेशा के लिए एक-दूजे के हो गए।

शादी के बाद शाबिया ने बताया, “मैं जब 17 साल की थी, तब से संजय से मेरा अफेयर चल रहा है। इसमें धर्म की कोई बात नहीं है। अब मैं 20 साल की हो गई हूँ। बालिग हूँ और मुझे मेरी जिंदगी का फैसला लेने का पूरा अधिकार है।” शादी के बाद हिंदू संगठन के लोगों ने नवविवाहित जोड़े को 10 हजार रुपए का चेक भी सौंपा, ताकि उन्हें अपनी जिंदगी को शुरू करने में कोई दिक्कत नहीं आए। शादी के बाद संजय और सीता (शाबिया) दिल्ली के लिए रवाना हो गए।

कनाडा में हिंदू मंदिर के प्रमुख के परिवार को खालिस्तानियों ने बनाया निशाना, बेटे के घर पर फायरिंग: यहीं हुई थी आतंकी निज्जर की हत्या

कनाडा के सरे में लक्ष्मी नारायण मंदिर के अध्यक्ष सतीश कुमार के बड़े बेटे के घर पर खालिस्तानियों ने ताबड़तोड़ गोलियाँ बरसाई। मीडिया खबरों के अनुसार, इस दौरान घर पर 11 से 14 बार फायरिंग हुई। घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है लेकिन बताया जा रहा है कि घर को काफी नुकसान हुआ है। पुलिस सीसीटीवी देख आरोपितों का पता लगाने का प्रयास कर रही है।

जानकारी के मुताबिक यह घटना उसी शहर में घटी है जहाँ खालिस्तानी निज्जर की हत्या हुई थी। 27 दिसंबर 2023 की सुबह सरे में करीबन 8:00 बजे 80 एवेन्यू के 14900 ब्लॉक में गोलियाँ चलाई गईं। फिर सरे रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस के बयान से पता चला कि जिस घर पर गोलीबारी की गई वो हिंदू मंदिर के प्रमुख के बड़े बेटे का घर है।

गोलीबारी की सूचना मिलने के बाद पुलिस कई घंटों तक घटनास्थल पर रही और घटनास्थल का मुआएना करती रही। उन्होंने गवाहों से बात की, सीसीटीवी फुटेज देखे। आस-पड़ोस में छापेमारी लेकिन ज्यादा जानकारी नहीं मिली। अब सरे की आरसीएमपी जनपल इन्वेस्टिगेशन यूनिट ने जाँच को अपने हाथ में ले लिया है और अधिकारी हमले के पीछे के मकसद का पता लगाने के लिए काम कर रहे हैं।

बता दें कि कनाडा में सक्रिय खालिस्तानी तत्वों के कारण हिंदू मंदिर पर हमले की घटनाएँ अब तक कई बार सामने आ चुकी है। जिस मंदिर के अध्ययक्ष के बेटे के घर यह हमला हुआ है, उससे पहले उस मंदिर को भी खालिस्तानी निशाना बना चुके हैं। तब, लक्ष्मी नारायण मंदिर में भारत विरोधी पेंटिंग की गई थी। वहीं बाहर खड़े होकर नारेबाजी भी हुई थी। इसी तरह टोरंटो में भी मंदिर के भीतर तोड़फोड़ की घटना सामने आई थी। इसके अलावा ब्रैम्पटन में भी एक प्रमुख हिंदू मंदिर में काफी तोड़फोड़ हुई थी।