Home Blog Page 1337

3500 मंदिर तोड़े, 2400 महिलाओं का बलात्कार और नंगा करके परेड… बांग्लादेश में बाबरी से पहले ही शुरू हो गया था आतंक, पुलिस के सामने आग लगा रही थी इस्लामी भीड़

6 दिसंबर, 1992 – ये वो तारीख़ है जिसकी बरसी हर साल हिन्दू संगठनों द्वारा ‘शौर्य दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। हालाँकि, हिन्दू विरोधी इस दिन हिन्दुओं को ये एहसास दिलाने की कोशिश करते हैं कि उन्होंने एक दूसरे मजहब के इबादतगाह को ध्वस्त कर दिया। जबकि सचाई ये है कि उस ढाँचे को इस्लामी आक्रांताओं द्वारा राम मंदिर को ध्वस्त कर के बनवाया गया है। इस दौरान यही वामपंथी-लिबरल गिरोह ये भूल जाता है कि जब हिन्दू राम मंदिर के लिए संघर्ष कर रहे थे, उस दौरान बांग्लादेश में क्या हो रहा था।

असल में राम मंदिर के लिए जब भारत में संघर्ष चल रहा था और बाबरी ढाँचे के ध्वस्त होने की अफवाह भर फैली थी, तभी बांग्लादेश में हिन्दुओं के खिलाफ हिंसा शुरू हो गई थी। हिन्दुओं ने तो 5 शताब्दी तक संघर्ष कर के न्यायिक रास्ते से राम मंदिर का अधिकार प्राप्त किया, लेकिन इस्लामी भीड़ नियम-कायदे नहीं मानती है। 2 नवंबर, 1989 – ये वो दिन था जब प्रतीकात्मक रूप से राम मंदिर के लिए पहला पत्थर उस विवादित स्थल पर रखा गया था।

जैसे ही बांग्लादेश में इसकी खबर पहुँची, वहाँ हिंसा शुरू हो गई। अक्टूबर 1990 में ही बांग्लादेश की मीडिया द्वारा ये अफवाह फैला दी गई थी कि भारत में बाबरी ढाँचे को ध्वस्त कर दिया गया है। वहाँ की मीडिया ने भी इसमें बड़ी भूमिका निभाई। बांग्लादेश में उस समय कैसा माहौल था उसे इसी से समझ सकते हैं कि 1988 में तत्कालीन तानाशाह राष्ट्रपति हुसैन मुहम्मद इरशाद ने इस्लाम को बांग्लादेश का आधिकारिक मजहब घोषित कर दिया। अब आते हैं 30 अक्टूबर, 1990 वाले दिन।

इरशाद उस दिन ‘बंग भवन’ में एक यूथ कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। वो कह रहे थे कि जब वो वो वहाँ हैं अल्पसंख्यकों के खिलाफ कोई हिंसा नहीं होगी। ठीक उसी समय कट्टरपंथी मुस्लिमों की भीड़ हिन्दुओं की दुकानों पर हमले कर रही थी। भीड़ ने गौरी मठ को निशाना बनाया। जो ‘बंग भवन’ के दक्षिण में स्थित था। यानी, इरशाद के कार्यक्रम से कुछ किलोमीटर की दूरी पर हिन्दुओं से जुड़ी संपत्तियों को आग के हवाले किया जा रहा था। ‘ह्यूमन राइट्स कॉन्ग्रेस फॉर बांग्लादेश माइनॉरिटीज (HRCBM)’ ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि ये सब पुलिस-प्रशासन के सामने हुआ।

रिपोर्ट में कहा गया कि 1989-90 में बांग्लादेश में हिन्दुओं के खिलाफ जो हिंसा हुई उसे दंगा नहीं कहा जा सकता, क्योंकि ये एक ही पक्ष द्वारा किया गया था 1964 की तरह। इन अत्याचारों में तब की सत्ताधारी पार्टियाँ भी शामिल थीं। 1992 में सत्ताधारी पार्टी BNP (बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी) का साथी जमात-ए-इस्लामी खुद हिंसा में शामिल था। रिपोर्ट में बताया गया है कि सिर्फ 1989-90 में 1000 से ज़्यादा महिलाओं का बलात्कार हुआ, सैकड़ों मंदिरों को ध्वस्त कर दिया गया और हिन्दू अल्पसंख्यकों के घरों को लूट कर आग के हवाले कर दिया गया।

6 दिसंबर, 1992 की रात को तो चटगाँव में हिन्दुओं के खिलाफ आतंक का नंगा नाच हुआ। कुतुब्दीया में 3 बच्चों को ज़िंदा जला दिया गया। इसके बाद राजधानी ढाका और मुल्क के अन्य हिस्सों में हिंसा फैली। HBCUC (हिन्दू, बौद्ध, क्रिस्चियन यूनिटी काउंसिल) ने ग्राउंड पर दौरा कर के रिपोर्ट तैयार की थी और नुकसान का पता लगाया था। इस रिपोर्ट में सामने आया था कि हिन्दुओं के 28000 घरों, 3500 मंदिरों/धार्मिक संस्थानों और 2500 व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को या तो नुकसान पहुँचाया गया था या उन्हें पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया था।

इस रिपोर्ट की मानें तो 15 लोगों की हत्या कर दी गई थी और 2400 हिन्दू महिलाओं का बलात्कार हुआ था। सरकार ने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए न तो कोई प्रयास किया और न ही इस्लामी कट्टरपंथियों को रोकने की कोई कोशिश की। अनुमान लगाया गया था कि हिन्दुओं के 14.80 करोड़ टका की संपत्ति को नुकसान पहुँचाया गया। उस समय ये 46.25 लाख डॉलर के करीब होगा, जिसकी वैल्यू आज की तारीख़ में 39 करोड़ रुपए के आसपास होगी।

ओल्ड ढाका स्थित शंखरी बाजार में तो हिन्दुओं की एक भी दुकान को नहीं छोड़ा गया था। सिलहट जिले में तो अल्पसंख्यकों के साथ ऐसा बुरा बर्ताव हुआ कि उनकी आने वाली कई पीढ़ियों को ये याद रहेगा। भोला से तत्कालीन सांसद तौफ़ीद अहमद और ‘ऑल पार्टी अलायंस’ के सेक्रेटरी नरुल इस्लाम नाहिद का मानना था कि ऊपर जो आँकड़े हैं, वो कम ही थे। मतलब अत्याचार इससे ज़्यादा हुआ था। महिलाओं के साथ न सिर्फ सामूहिक बलात्कार हुआ था, बल्कि उन्हें सड़क पर नग्न चलने के लिए बाध्य कर दिया गया था।

कई कम उम्र की लड़कियों का भी बलात्कार हुआ, जिनमें 5 साल की लड़कियाँ भी शामिल थीं। कुछ गाँवों में तो 5 साल से लेकर 70 साल तक की किसी भी महिला को नहीं छोड़ा गया था। तस्लीमा नसरीन ने अपने उपन्यास ‘लज्जा’ में भी इसका जिक्र किया है कि कैसे 1992 में ढाकेश्वरी मंदिर पर हमला किया गया था। मुख्य मंदिर को फूँक दिया गया। देवी-देवताओं के मनोरंजन के लिए बने ‘नाटमंदिर’ को भी आग के हवाले कर दिया गया। मंदिर के पास स्थित श्रीदम घोष को भी जला दिया गया।

माधव गुड़िया मठ को भी ध्वस्त कर दिया गया। जयकाली मंदिर को भी नहीं छोड़ा गया। ब्रह्मो समाज के परिसर में घुस कर सब कुछ तबाह कर दिया गया। डेमरा में शोणि अखाड़ा मंदिर को लूट लिया गया। बृहभद्र और लोकी बाजार में जहाँ तक नज़र जाती थी तबाही ही दिखती थी। इस्लामपुर रोड पर छाता और आभूषण बेचने वाले दुकानों को लूट लिया गया। 300 आतंकियों ने मिल कर 25 घरों को निशाना बनाया। कई हिंदू दुकानों के नाम को उर्दू नामों से बदल दिया गया।

लेखिका तस्लीमा नसरीन ने इन घटनाओं का जिक्र ‘लज्जा’ में किया है। वो लिखती हैं कि कैसे नोबाबपुर रोड पर स्थित ‘मोरोचंद’ नाम की एक मिठाई की दुकान को तोड़ डाला गया। साथ ही रयेर बाजार स्थित माँ काली के मंदिर में उनकी प्रतिमा को तोड़ कर जमीन पर गिरा दिया गया। ठठरी बाजार में बट्टाली मंदिर को तबाह कर के लूट लिया गया। नोबाबपुर में ‘कामधोन पोशारी’ और ‘शुक्ल मिष्ठान्न भण्डार’ जैसी दुकानों को लूट लिया गया। जतिन एन्ड कंपनी की एक फैक्ट्री को ही आग के हवाले कर दिया गया।

सोडोरघट रोड पर स्थित रतन शंकर बाजार को पूरी तरह तबाह कर दिया गया। इसी तरह नाग देवता के मंदिर को धूल में मिला दिया गया। तस्लीमा नसरीन लिखती हैं कि ये दंगे नहीं थे, क्योंकि दंगा में दोनों पक्ष झगड़ते हैं। जबकि ये एक पक्ष द्वारा दूसरे समुदाय पर अत्याचार था। क्या आपने बाबरी पर हंगामा मचाने वालों को कभी इस तबाही का जिक्र करते हुए देखा है? जिस इस्लामी भीड़ ने बांग्लादेश में 1989-92 में ये तबाही मचाई, हिन्दुओं पर प्रताड़ित किया – इस पर बात क्यों नहीं की जाती है।

लालबाग रोड पर स्थित दुर्गा मंदिर, पुष्पराज साहा लेन पर स्थित गिरीगोवर्धन जीतू मंदिर, हरनाथ घोष लेन पर स्थित रघुनाथ जिउ अखाड़ा और लालबाग़ स्थित कमरांगीचर शमशान – इन सभी को 1990 में ही बर्बाद कर दिया गया था। भारतीय दूतावास की तरफ हजारों मुस्लिमों ने मार्च किया। इसी भारत ने बांग्लादेश को आज़ादी दिलाई थी। उस दौरान सूत्रपुर में 14 मंदिरों को ध्वस्त किया गया था। नगर बेलटोली लेन में 17 हिन्दुओं को चाकू घोंप दिया गया था।

10 सुरक्षाबलों का हत्यारा आतंकी हंजला अदनान कराची में खल्लास: ‘अज्ञात बंदूकधारियों’ ने चलाई गोली, पाकिस्तानी सेना करवा रही थी इलाज

लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी हंजला अदनान (Hanzla Adnan) मारा गया है। हंजला अदनान ने जम्मू कश्मीर में 2015 और 2016 के दौरान सुरक्षा बलों के काफिलों पर हमला करवाया था। इनमें 10 सुरक्षाबल बलिदान हुए थे। हंज़ला की हत्या पाकिस्तान के शहर कराची में अज्ञात बंदूकधारियों ने कर दी। वह लश्कर के सरगना हाफिज सईद का ख़ास था।

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, कराची में 2 और 3 दिसम्बर 2023 की रात को हंज़ला अदनान को उसके घर के बाहर अज्ञात बंदूकधारियों ने मार दिया। आश्चर्य की बात यह कि इसके बाद इस आतंकी को पाकिस्तानी सेना अस्पताल ले गई, जहाँ उसकी मौत हो गई। इस हमले में उसे चार गोलियाँ लगी थीं। इलाज के दौरान 5 दिसम्बर 2023 को हंजला की मौत हो गई।

हंज़ला अदनान हाफिज सईद के साथ ही उसके दामाद खालिद वलीद के लिए काम करता था। 5 अगस्त 2015 को इसी हंजला के आदेश पर दो आतंकियों ने साथ मिल कर जम्मू श्रीनगर हाइवे पर सीमा सुरक्षा बल के एक काफिले पर हमला कर दिया था। इस हमले में 2 BSF जवानों की मौत हो गई थी जबकि 10 जवान घायल हो गए थे।

इस हमले में जवानों ने जवाबी कार्रवाई में एक आतंकी को मार गिराया था जबकी दूसरे को जिंदा पकड़ लिया गया था। इससे पूछताछ में यह जानकारी सामने आई थी कि यह दोनों ही आंतकी पाकिस्तान से भारत में घुसपैठ करके आए थे। हंज़ला अदनान इन आतंकियों का हैंडलर था, जो पाकिस्तान में बैठ कर इन हमलों की साजिश रच रहा था।

इसके बाद हंज़ला अदनान ने इसके बाद 25 जून 2016 को कश्मीर के पंपोर इलाके में एक CRPF के काफिले पर हमला करवाया था। इस हमले में 8 CRPF जवानों की मौत हुई थी। हमले में बड़ी संख्या में जवान घायल भी हुए थे।

CRPF के ये जवान पास की एक फायरिंग रेंज से प्रैक्टिस करके वापस लौट रहे थे, तब लश्कर के तीन आतंकियों ने इन पर हमला कर दिया था। इस हमले की जवाबी कार्रवाई में दो आतंकी मौके पर मार गिराए गए थे, जबकि एक हमलावर फरार होने में सफल रहा था। यह तीनों आतंकी पाकिस्तानी बताए गए थे।

यह भी बताया गया था कि कश्मीर में नया बना आतंकी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट की जिम्मेदारी भी यही हंज़ला ही सम्भाल रहा था। यह उत्तरी कश्मीर में इस आतंकी समूह की गतिविधियों को हैंडल करता था। यहाँ नए आतंकी भेजने और हमले करवाने की जिम्मेदारी पाकिस्तान ने इसे दी थी।

बताते चलें कि इससे पहले इसी सप्ताह में 26/11 के मुंबई हमलों के साजिशकर्ता साजिद मीर के खाने में जहर मिलाकर उसे खिला दिया गया था। इस काम को भी किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा किया गया बताया गया। जानकारी के अनुसार, साजिद अब वेंटीलेटर पर है।

अज्ञात बन्दूकधारियों ने बीते दिनों पाकिस्तान के भीतर ऐसे कई आतंकियों को मारा है, जो भारत में हमले कराने के दोषी रहे हैं। मार्च 2022 से लेकर अक्टूबर 2023 के बीच ऐसे कम से कम 15 आतंकियों की हत्या अज्ञात बंदूकधारियों ने की है। इनमें खालिस्तानी आतंकी परमजीत पंजवार और एअर इंडिया विमान का अपहरण करने वाले आतंकी ज़हर मिस्त्री जैसे नाम शामिल हैं।

जिसके घर 5 करोड़ रुपए, उसके पिता चौकीदार… अब कुएँ में लाश: महादेव ऐप घोटाला और CM भूपेश बघेल को ₹508 करोड़ रिश्वत से है कनेक्शन

छत्तीसगढ़ के महादेव बुक सट्टा घोटाले में गिरफ्तार एक आरोपित असीम दास के पिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। उनका शव एक कुँए में तैरता पाया गया है। जिस फार्म हाउस में सुशील दास की मौत हुई, वहाँ वह चौकीदारी का काम करते थे। पूरे मामले में आश्चर्यजनक यह भी है कि असीम के घर पर 2 नवम्बर 2023 को ED ने जब छापा मारा था, तब 5 करोड़ रुपए बरामद हुए थे।

असीम दास के 62 वर्षीय पिता सुशील दास की मौत दुर्ग जिले के अंडा थाना क्षेत्र में अछौती गाँव में हुई, जहाँ पुलिस ने उनका शव एक कुँए में तैरता पाया। आशंका यह भी जताई गई है कि सुशील दास ने मौत से पहले शराब पी थी और इसके बाद कुँए में छलाँग लगाकर उन्होंने आत्महत्या कर ली।

यह भी जानकारी सामने आई है कि असीम दास के पिता उसके गिरफ्तार होने के बाद से काफी परेशान थे और इसी कारण से वह लगातर शराब पीने लगे थे। महादेव बुक सट्टा घोटाले में आरोपित असीम के घर पर 2 नवम्बर 2023 को ED ने छापा मारा था। इसके पश्चात न्यायालय में पेश करके उसे जेल भेज दिया था। वह तबसे ही जेल में बंद है। ED का कहना था कि असीम दास ही नेताओं को इस घोटाले के पैसे पहुँचाता था।

गौरतलब है कि महादेव बुक घोटाला में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का नाम भी आया था। यह कहा गया था कि इस घोटाले के सम्बन्ध में उन्हें ₹508 करोड़ की धनराशि दी गई। यह खुलासा असीम दास के हवाले से ही ED ने किया था।

ED ने कहा था, “महादेव ऐप के कुछ बेनामी बैंक खातों का पता लगाया है, जिसमें 15.59 करोड़ रुपए की शेष राशि फ्रीज कर दी गई है। असीम दास को गिरफ्तार कर लिया है। उससे पूछताछ और उसके पास से बरामद फोन की फॉरेंसिक जाँच से शुभम सोनी (महादेव नेटवर्क के उच्च पदस्थ आरोपितों में से एक) द्वारा भेजे गए एक ईमेल में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पूर्व में नियमित भुगतान किए गए हैं और अब तक महादेव ऐप द्वारा लगभग 508 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया है।”

इस महादेव बुक घोटाला ऐप में नाम आने के बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की छवि को काफी धक्का लगा था। छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों में इस मुद्दे को प्रधानमंत्री मोदी ने भी उठाया था। राज्य में कॉन्ग्रेस की हार में इस घोटाले का भी बड़ा रोल माना जा रहा है। महादेव ऐप के मालिक शुभम सोनी का एक वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें वह भूपेश बघेल को पैसे देने की बात कहता दिखा था।

कैसे काम करता था महादेव बुक ऐप?

महादेव ऐप दुबई से ऑपरेट होता था। इसके अधिकांश यूजर छत्तीसगढ़ के थे। लोग ऐड के साथ-साथ एजेंटों के जरिए सट्टेबाजी के इस जाल में फँसते थे। इसके बाद वे दिए गए या बताए गए नंबर पर संपर्क करते थे। इस ऐप की खास बात यह थी कि यूजर दिए गए नंबर पर सिर्फ ह्वाट्सएप के जरिए ही संपर्क कर सकते थे। संपर्क करने के बाद उन्हें एक प्राइवेट ग्रुप में जोड़ा जाता था, जहाँ सट्टेबाजी का खेल शुरू होता था।

प्राइवेट ग्रुप में जोड़ने के बाद यूजर को कंपनी से संबंधित 5-6 वेबसाइटों पर अपना अकाउंट बनाना पड़ता था। इसके बाद यूजर को एक कॉन्टैक्ट नंबर दिया जाता था। इस नंबर के जरिए यूजर अपने अकाउंट में पैसे जमा करते थे। इससे उन्हें प्वॉइंट मिलते थे। इन प्वॉइंट के आधार पर ऐप पर विभिन्न खेलों में सट्टेबाजी की जाती थी।

शुरुआत में यूजर को खूब जिताया जाता था। इससे उसमें उत्साह जगता था और वह अधिक पैसे जमा करके प्वॉइंट्स बटोर कर सट्टेबाजी करता था। हालाँकि, बाद में वह अपना सारा पैसा हार जाता था। इससे कंपनी को फायदा होता था। जो यूजर शुरुआत में जीतने के बाद अपने प्वॉइंट को एनकैश कराना चाहता था, उसे एक और नंबर दिया जाता था। उससे संपर्क करने पर उसे भुगतान हो जाता था। ये सारे लेनदेन बेनामी खातों से होते थे।

ED ने अपनी जाँच में पाया कि सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल सट्टेबाजी से होने वाली कमाई को अपने विदेशी खातों में भेजने के लिए हवाला नेटवर्क का इस्तेमाल करते थे। महादेव ऐप के हवाला का सारा काम कोलकाता का रहने वाला विकास छपरिया देखता था। इस मामले की जाँच में जब ED ने दबाव जारी रखा, तो सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल के परिवार के ज्यादातर लोग दुबई में शिफ्ट हो गए।

कुल मिलाकर ये लोग दुबई में बैठकर भारत से कमाई करते थे, लेकिन भारत सरकार को किसी तरह का टैक्स नहीं देते थे। भारत सरकार ही नहीं, बल्कि यूजर्स को भी हजारों करोड़ रुपए का चूना इस ऐप के जरिए लगाया गया। इससे हुई कमाई को फिल्म इंडस्ट्री, होटल व्यापार, रियल एस्टेट सहित विभिन्न जगहों पर इन्वेस्ट करने के साथ-साथ हवाला के जरिए नौकरशाहों और सफेदपोशों को भी भुगतान की गई।

नेशनल खिलाड़ी, लॉरेंस बिश्नोई का ‘मैनेजर’, सब-इंस्पेक्टर का बेटा… करणी सेना अध्यक्ष की हत्या की साजिश रचने वाला संपत नेहरा, करता सलमान खान का भी मर्डर

राजस्थान की राजधानी जयपुर में मंगलवार (5 दिसंबर, 2023) को करणी सेना के अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की घर में घुस कर हत्या कर दी गई, जिसका CCTV वीडियो भी सामने आया। इसके बाद राजपूत समाज ने पूरे राजस्थान में बंद का आह्वान किया है। अब सामने आया है कि पंजाब के बठिंडा स्थित जेल में बंद गैंगस्टर संपत नेहरा ने इस हत्याकांड की साजिश रची। वो लॉरेंस बिश्नोई का गैंगस्टर है। इस हत्याकांड की साजिश के संबंध में 10 महीने पहले ही राजस्थान पुलिस के पास इनपुट आ गया था।

संपत नेहरा कभी राष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी हुआ करता था, लेकिन फिर वो अपराध की दुनिया में घुस गया। कॉलेज के दिनों में लॉरेंस बिश्नोई से उसकी दोस्ती हुई थी। उसे एक ऐसा अपराधी माना जाता है, जिस पर लॉरेंस बिश्नोई आँख बंद कर के भरोसा करता रहा है। खेल में संपत नेहरा ने कई अवॉर्ड जीते थे। उसे लॉरेंस बिश्नोई का सबसे खास गुर्गा माना जाता है। कई गैंगवॉर, हथियारों की सप्लाई और हवाला के पैसों को इधर-उधर भेजना – इन सब में संपत नेहरा एक्सपर्ट है।

वो भी लॉरेंस बिश्नोई की तरह ही जेल से ही अपराध का गिरोह चलाता है। संपत नेहरा को लॉरेंस बिश्रोई गैंग में नए लड़कों को जोड़ने और उन्हें हथियार उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। संपत नेहरा एक तरह से बिश्नोई गैंग का ‘मैनेजर’ है। संपत नेहरा जब जेल से बाहर था तब वो अपराध को अंजाम देने के बाद अपनी पहचान बदल कर दक्षिण भारत में भाग जाता था और वहाँ रहने लगता था। उसे अभिनेता सलमान खान की हत्या की साजिश रचने के मामले में गिरफ्तार किया गया था, जिन्हें लॉरेंस बिश्नोई कई बार धमकी दे चुका है।

संपत नेहरा राजस्थान के रायगढ़ का रहने वाला है और उसके पिता रामचंदर चंडीगढ़ पुलिस में ASI हुआ करते थे। उसका बचपन पंजाब में ही बीता। पंजाब यूनिवर्सिटी में उसकी मुलाकात लॉरेंस बिश्नोई से हुई। DAV कॉलेज में वो बिश्नोई का जूनियर था। डीकैथलॉन हर्डल रेस खेल में उसने राष्ट्रिय स्तर पर सिल्वर मेडल जीता। लॉरेंस बिश्नोई ने कॉलेज में SOPU (स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन ऑफ पंजाब यूनिवर्सिटी) नामक ग्रुप बनाई थी, जिसका मुखिया संपत नेहरा ही था। 2016 में कार लूट में वो पहली बार गिरफ्तार हुआ।

उस पर रंगदारी से जुड़े कई मामला दर्ज हैं और वो पहचान छिपाने में एक्सपर्ट है। उस पर 25 मामले दर्ज हैं, जिनमें 12 केस मर्डर के हैं। उस पर 2 लाख रुपए का इनाम है। पंजाब, राजस्थान और हरियाणा – 3 राज्यों में उसने आतंक फैलाया। संपत नेहरा ने मुंबई जाकर सलमान खान के घर की रेकी भी की थी। उसे ही सलमान खान की हत्या का काम लॉरेंस बिश्नोई को सौंपा था। उन्हें निशाना बनाने के लिए खरीदी गई राइफल उसने ही 4 लाख रुपए में खरीदी थी।

वो तेलंगाना में पहचान छिपा कर इस साजिश में रचा हुआ था, लेकिन हरियाणा पुलिस ने उससे पहले ही उसे गिरफ्तार कर लिया। लॉरेंस बिश्नोई ने एक बुकी को ‘कच्चा चबा जाऊँगा’ कह कर धमकाया था, साथ ही पंजाब के गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या में भी उसका नाम आया था। इन मामलों में दिल्ली पुलिस ने संपत नेहरा को हिरासत में लेकर पूछताछ की। कुछ अन्य पंजाबी गायक भी बिश्नोई गैंग के निशाने पर हैं। संपत नेहरा पहले दिल्ली की मंडोली जेल में बंद था और उसने अपनी जान को खतरा बताया था जिसके बाद उसे तिहाड़ में भेजा गया था।

बठिंडा जेल में लॉरेंस बिश्नोई गैंग के कुछ अन्य अपराधी भी बंद हैं। उस पर 12 हत्याओं के अलावा गैर-इरादतन हत्या के 6 और डकैती के भी 5 मामले दर्ज हैं। साथ ही फिरौती के 3 मामले उस पर दर्ज हैं। साइबराबाद से गिरफ्तार संपत नेहरा 17 जनवरी, 2018 को राजस्थान के सादुलपुरा कोर्ट परिसर में हिस्ट्रीशीटर अजय जैतपुरा की हत्या में भी वॉन्टेड है। हरियाणा पुलिस को उसे गिरफ्तार करने में कई दिन लगे थे, जिस दौरान ह्यूमन इंटेलिजेंस से लेकर तकनीकी सर्विलांस तक का सहारा लिया गया।

15 दिन हरियाणा पुलिस ने उसकी गिरफ़्तारी के लिए तेलंगाना में डेरा डाला। ऑपरेशन 3 दिनों तक चला। हैदराबाद में 2 MBA ग्रेजुएट्स के साथ उसने फ़्लैट ले रखा था। 8 हत्या के प्रयासों के मामले में भी शामिल होने की बात उसने कबूल की है। मानेसर में बेस बना कर वो गुरुग्राम में अपना नेटवर्क फैला रहा था। उसने अनिल चिप्पी और काला जठेरी गैंग से हाथ मिलाया था। गुरुग्राम में प्रभाव रखने वाले कुशाल और अमित डगर गैंग को हटाने की उसने साजिश रची थी।

संपत नेहरा ने 5 साल पहले कोर्ट में गिड़गिड़ाते हुए अपने लिए बुलेटप्रूफ जैकेट तक की माँग कर दी थी। उसने कहा था कि विरोधी गैंग उसकी हत्या करा सकते हैं। कोर्ट ने पुलिस को उसकी सुरक्षा के बंदोबस्त करने के निर्देश दिए थे। जब हत्या के मामले में पहलवान सुहील कुमार मंडोली के जेल में डाले गए, तब संपत नेहरा ने खुद को जान का खतरा बताया था। तभी उसे शिफ्ट किया गया था। अब करणी सेना के अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की हत्या में वो फिर से सुर्ख़ियों में है।

इस मामले में पुलिस ने जयपुर के झोटवाड़ा निवासी रोहित राठौड़ को गिरफ्तार किया है। वो मूल रूप से नागौर के मकराना का रहने वाला है। वहीं हरियाणा के महेंद्रगढ़ के रहने वाले नितिन फौजी को भी गिरफ्तार किया गया है। बाड़मेर, चूरू और राजसमंद में भी विरोध प्रदर्शन चालू है और बाजार बंद करवा दिए गए हैं। बता दें कि सुखदेव सिंह गोगामेड़ी के घर में घुस कर हत्यारों ने बातचीत करते-करते अचानक 20 सेकेण्ड में ताबड़तोड़ 17 राउंड फायरिंग कर डाली जिसमें उनकी मौत हो गई।

जिन सनातनियों को डेंगू-मलेरिया बताया CM के बेटे ने, उसी राज्य में तूफान-बारिश के बीच राहत पहुँचा रही BJP-RSS

तमिलनाडु में तूफ़ान मिचौंग (Cyclone Michaung) से भारी तबाही मची है। तमिलनाडु में इस तूफ़ान से अब तक 17 मौतें हो चुकी हैं। अभी भी चेन्नई समेत कई शहरों के बड़े हिस्से पानी में डूबे हैं। इस बीच लोगों की मदद और राहत बचाव के लिए भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे हुए हैं।

मौसम विभाग का कहना है कि मिचौंग से होने वाली बारिश अब पूरी हो गई है। चेन्नई में ट्रेनों का संचालन भी दोबारा चालू हो गया है। चेन्नई के एयरपोर्ट पर भी पानी भर गया था, जिसे निकाल कर अब उड़ानें भी चालू कर दी गई हैं।

तूफ़ान मिचौंग के कारण चेन्नई शहर में हुई बारिश बीते सात दशक में सबसे अधिक हुई है। इस दौरान चेनई के अधिकांश इलाके जलमग्न हो गए। इनमें कई पॉश कॉलोनी भी शामिल हैं। इन सभी इलाकों में राहत बचाव टीमें अब पहुँच रही हैं।

इस मिचौंग तूफ़ान के बाद बनी गंभीर परिस्थितयों में भाजपा के कार्यकर्ता लगातार लोगों को राहत पहुँचा रहे हैं। भाजपा के कार्यकर्ता तूफ़ान से प्रभावित इलाकों में लोगों को फ़ूड पैकेट, दवाइयाँ और अन्य राहत का सामान बाँट रहे हैं।

चेन्नई के अंदर जलमग्न इलाकों में भाजपा कार्यकर्ता घर-घर जाकर उन्हें राहत पहुँचा रहे। तमिलनाडु भाजपा के इस कदम की अब प्रशंसा हो रही है। इन कार्यकर्ताओं ने कई जगह पर फ़ूड स्टाल भी लगाए हैं, जहाँ से लोगों को खाना बाँटा जा रहा है।

तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के अन्नामलाई खुद राहत बचाव कार्यक्रम को देख रहे हैं। अन्य प्रदेशों की भाजपा यूनिट ने भी तमिलनाडु में राहत सामग्री भेजी है। गोवा, कर्नाटक, केरल समेत अन्य राज्यों से भाजपा कार्यकर्ता राहत सामग्री लेकर तमिलनाडु के भीतर पहुँच रहे हैं।

इस बीच मौसम विभाग ने बताया है कि अब यह तूफ़ान आंध्र प्रदेश पहुँच कर एक दबाव क्षेत्र में बदल चुका है। इसके कारण आज आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में भारी बारिश होने की संभावना है।

गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के बेटे उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को डेंगू मलेरिया के समान बताया था। हालाँकि अब अधिकांश सनातनी कार्यकर्ता ही तमिलनाडु में राहत बचाव में जुटे हुए हैं।

तमिलनाडु में इस तूफ़ान के कारण हजारों एकड़ फसलें भी डूबी हुई हैं। राज्य के बड़े हिस्से में बिजली और मोबाइल नेटवर्क भी बाधित है, इसे दोबारा चालू करने का प्रयास किया जा रहा है। अब आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और ओडिशा को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

पंजाब जेल में करणी सेना अध्यक्ष की हत्या की साजिश, 10 महीने पहले ही राजस्थान पुलिस के पास थी सूचना: 2 शूटर गिरफ्तार, राजस्थान बंद का आह्वान

राजस्थान में ‘श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना’ के अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की हत्या के बाद 2 शूटर्स को गिरफ्तार किया गया है। वहीं एक अन्य व्यक्ति नवीन सिंह शेखावत मौके पर ही मौत हो गई थी। अब सामने आया है कि पंजाब के बठिंडा जेल में बंद संपत नेहरा ने इस हत्याकांड की साजिश रची थी। वो लॉरेंस बिश्नोई गिरोह का गैंगस्टर है। राजस्थान पुलिस को इस संबंध में सूचित कर दिया गया है। जयपुर पुलिस ने अपील की है कि शांति बनाए रखा जाए।

राजस्थान पुलिस ने आगाह किया है कि सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की फर्जी खबर न फैलाई जाए। DGP उमेश मिश्रा ने जानकारी दी कि हरियाणा में उनके समकक्ष से बातचीत की गई है। सीमाओं पर निगरानी रखी जा रही है। अपराधियों को पकड़ने के लिए माहिर माने जाने वाले ADG (कानून व्यवस्था) दिनेश MN की छुट्टी को रद्द कर दिया गया है। बीकानेर में भी दबिश दी जा रही है। रोहित गोदारा का वहाँ प्रभाव है, जिसने इस हत्याकांड की फेसबुक के माध्यम से जिम्मेदारी ली है।

सुखदेव सिंह गोगामेड़ी के एक परिचित अजीत भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। जयपुर के अलावा जोधपुर, कुचामन, जैसलमेर, कोटा और बूंदी जैसे इलाकों में भी विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। उदयपुर और सिरोही में भी बंद का ऐलान किया गया है। राजपूत समाज ने बुधवार (6 दिसंबर, 2023) को राजस्थान में बंद का आह्वान किया है। व्यापार मंडल से भी पुलिस संवाद कर रही है। लोगों की माँग है कि सुखदेव सिंह गोगामेड़ी के परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और उच्च न्यायालय के जज से इस मामले की जाँच कराई जाए।

पुलिस ने जयपुर के झोटवाड़ा निवासी रोहित राठौड़ को गिरफ्तार किया है। वो मूल रूप से नागौर के मकराना का रहने वाला है। वहीं हरियाणा के महेंद्रगढ़ के रहने वाले नितिन फौजी को भी गिरफ्तार किया गया है। बाड़मेर, चूरू और राजसमंद में भी विरोध प्रदर्शन चालू है और बाजार बंद करवा दिए गए हैं। बता दें कि सुखदेव सिंह गोगामेड़ी के घर में घुस कर हत्यारों ने बातचीत करते-करते अचानक 20 सेकेण्ड में ताबड़तोड़ 17 राउंड फायरिंग कर डाली जिसमें उनकी मौत हो गई।

वीडियो में देखा जा सकता है कि सुखदेव सिंह गोगामेड़ी के सामने 2 युवक बैठ कर उनसे बातचीत कर रहे होते हैं, बगल में नवीन शेखावत बैठा होता है। वो एक कॉल रिसीव करते हैं तभी सामने बैठे युवक गोलियाँ बरसाने लगते हैं। नवीन शेखावत को ही गोली मारी जाती है। हमलावर जाते-जाते करणी सेना के अध्यक्ष के सिर में भी गोली मार कर जाते हैं। उनका गार्ड उन्हें बचाने की कोशिश करता है लेकिन सफल नहीं हो पाता। गोगामेड़ी आनंदपाल के एनकाउंटर के बाद हुए विरोध प्रदर्शन और ‘पद्मावत’ को लेकर निर्देशक संजय लीला भंसाली को थप्पड़ मारने के कारण चर्चा में आए थे।

फरवरी 2023 का एक पत्र भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें पंजाब पुलिस द्वारा राजस्थान पुलिस को संपत नेहरा द्वारा जेल से सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की हत्या की साजिश रचने की जानकारी दी गई है। सूचना में बताया गया था कि राजस्थान में सांप्रदायिक दंगे भड़काने के लिए इस हत्या की साजिश रची जा रही थी। सूचना में ये भी बताया गया था कि संपत नेहरा ने इस काम के लिए AK-47 का जुगाड़ भी कर लिया है।

CM के लिए चुने गए रेवंत रेड्डी तो सोनिया गाँधी बन गईं ‘तेलंगाना की माँ’: जिसे KCR सरकार ने 7 बार करवाया हाउस अरेस्ट, उसी ने ठोक दी BRS की ताबूत में कील

कॉन्ग्रेस पार्टी ने घोषणा कर दी है कि रेवंत रेड्डी तेलंगाना के अगले मुख्यमंत्री होंगे। वो फ़िलहाल राज्य में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हैं। मुख्यमंत्री पद का दायित्व मिलने की घोषणा के बाद रेवंत रेड्डी ने सोशल मीडिया के माध्यम से आलाकमान का धन्यवाद दिया। उन्होंने इस दौरान सोनिया गाँधी को ‘हम सब की प्रिय तेलंगाना की माँ’ तक बता दिया। वहीं उन्होंने प्रियंका गाँधी को करिश्माई नेता करार दिया। रेवंत रेड्डी ने इस दौरान कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं को भी उनकी मेहनत के लिए धन्यवाद दिया।

रेवंत रेड्डी ने तेलंगाना में चुनाव प्रचार के दौरान अपने भाषणों के माध्यम से जनता से संपर्क साधा और KCR की सरकार पर हमलावर रहे। उन्हें 1 दिन की जेल भी हुई थी। चेरलापल्ली सेन्ट्रल जेल से निकलने के बाद उन्होंने ऐलान किया था कि वो ये सुनिश्चित करेंगे कि मुख्यमंत्री KCR के लिए तेलंगाना में कोई राजनीतिक जमीन न बचे। रेवंत रेड्डी ने ABVP से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी और 2017 में कॉन्ग्रेस में आने से पहले लंबे समय तक TDP में रहे।

2021 में उन्होंने पार्टी ने जब प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी तब संगठन में कई लोग उन्हें जानते तक नहीं थे। दिसंबर 2018 में जब उन्होंने केसीआर के कोसी दौरे के खिलाफ प्रदर्शन का ऐलान किया था तो उन्हें हाउस अरेस्ट में डाल दिया गया था। मार्च 2020 में KCR के बेटे KTR के नए-नए बने फार्महाउस के ऊपर से ड्रोन उड़ने के लिए उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में रखा गया। दिसंबर 2020 से लेकर मार्च 2023 तक 7 बार तेलंगाना पुलिस ने उन्हें हिरासत में रखा।

जुलाई 2021 में तेलंगाना में जमीनों के ई-ऑक्शन में 1000 करोड़ रुपए के घोटाले के आरोपों के बाद उन्होंने प्रदर्शन का ऐलान किया, तो उन्हें जुबली हिल्स स्थित उनके आवास में ही हाउस अरेस्ट कर लिया गया। उसी साल दिसंबर में भूपलपल्ली में धान खरीद के मुद्दे पर किसानों के प्रदर्शन में शामिल होने से रोकने के लिए उन्हें हाउस अरेस्ट किया गया। मार्च 2022 में उन्हें ओस्मानिया यूनिवर्सिटी में जाने से रोक दिया गया। उस दौरान कई परीक्षाओं में हुए पेपर लीक के बाद राज्य में आंदोलन तेज़ था।

वित्तीय आयोग द्वारा ग्राम पंचायत को फंड न देने के बाद सरपंचों ने आंदोलन किया था, उसमें भी उन्हें रेवंत रेड्डी का साथ मिला और उस दौरान उन्हें फिर हाउस अरेस्ट किया गया। न सिर्फ BRS, बल्कि अपनी पार्टी के लोग भी उनके पीछे लगे थे। आलाकमान से शिकायत की गई कि वो एकतंत्रीय व्यवस्था चलाते हैं और अपने समर्थकों को आगे बढ़ाते हैं। कुछ नेताओं ने पार्टी छोड़ भी दी। कर्नाटक में जीत से भी तेलंगाना में कॉन्ग्रेस को फायदा मिला।

वहीं भाजपा ने जुलाई 2023 में अचानक से फायरब्रांड नेता बंदी संजय कुमार को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा कर उनकी जगह केंद्रीय मंत्री G किशन रेड्डी को भेज दिया। इससे भाजपा का चुनावी अभियान कमजोर पड़ा। रेवंत रेड्डी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और जनता पार्टी के नेता रहे जयपाल रेड्डी की भतीजी से शादी की है। छात्र नेता के रूप में ही उन्होंने महबूबनगर में गाँवों में पाँव जमाने शुरू कर दिए थे। TDP ने उन्हें कोदंगल में अपना आधार मजबूत करने का अवसर दिया। अब वो तेलंगाना के मुख्यमंत्री बन रहे हैं।

मेरे अब्बा को ऐसे राज्य की जेल में भेजो, जहाँ BJP की सरकार न हो… UP जेल में हो सकती है हत्या: सुप्रीम कोर्ट पहुँचा माफिया मुख्तार अंसारी का बेटा

उत्तर प्रदेश के माफिया मुख्तार अंसारी के बेटे ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई है कि वो उसके अब्बा को बांदा के बजाय किसी ऐसी राज्य की जेल में ट्रांसफर करने का आदेश दें, जहाँ भाजपा की सरकार न हो। अपनी याचिका में उमर अंसारी ने आशंका जताई है कि बांदा जेल में उसके अब्बा की हत्या भी हो सकती है। उमर ने उत्तर प्रदेश सरकार पर अपने पूरे परिवार के उत्पीड़न का भी आरोप लगाया है। याचिका सोमवार (4 दिसंबर 2023) को लगाई गई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उमर अंसारी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए कहा कि बांदा जेल में उसके अब्बा की जान को खतरा है। याचिका में आगे बताया गया कि उत्तर प्रदेश पुलिस छोटे-मोटे अपराध करने वाले कुछ किराए के अपराधियों को बांदा जेल ले जाकर जेल के अंदर ही मुख्तार अंसारी की हत्या करवा सकती है। पुलिस पर ये भी आरोप लगाया गया है कि वो जेल में इन अपराधियों को हथियार पहुँचा सकती है। इस घटना को गैंगवार का भी नाम देने की आशंका जताई गई है।

उमर अंसारी के मुताबिक कृष्णानंद राय हत्याकांड में शामिल तमाम आरोपितों की एक के बाद एक हो रही हत्याओं से वो और मुख्तार अंसारी काफी परेशान हैं। बताते चलें कि मुख्तार अंसारी भी कृष्णानंद राय हत्याकांड में मुख्य आरोपित है।

याचिका में दावा यह भी किया गया है कि 18 मई 2023 को मुख्तार अंसारी की बैरक में कुछ संदिग्ध लोग भी आए थे। साथ ही इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा 3 मई 2023 दिए गए उस आदेश का भी हवाला दिया गया है, जिसमें माफिया मुख्तार की सुरक्षा बढ़ाने के लिए प्रदेश सरकार को निर्देश मिले थे।

अपनी याचिका में उमर अंसारी ने आगे बताया है कि उसके अब्बा की हत्या के बाद उत्तर प्रदेश शासन इसे सुरक्षा में चूक का नाम देकर रफा-दफा करने का प्रयास कर सकती है। याचिकाकर्ता ने समाधान के तौर पर मुख्तार को ऐसे राज्य की जेल में ट्रांसफर करने की माँग की है, जहाँ भाजपा की सरकार न हो।

माफिया मुख्तार अंसारी के बेटे उमर अंसारी ने सुप्रीम कोर्ट में यह भी बताया है कि उत्तर प्रदेश सरकार न सिर्फ उसके अब्बा बल्कि पूरे परिवार का उत्पीड़न कर रही है। उमर ने सुप्रीम कोर्ट से यह भी गुहार लगाई है कि उसके अब्बा की अदालतों में सुनवाई पेशी नहीं बल्कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से करवाई जाए।

उमर अंसारी ने अपनी माँगों के समर्थन में अतीक अहमद और अशरफ की हत्या का हवाला दिया और बताया कि कैसे इन दोनों को पुलिस सुरक्षा में मार दिया गया था। अपनी याचिका को उमर ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत मिला अधिकार बताया।

दलित लड़की को जबरन खिलाया गोमांस, इस्लामी धर्मांतरण और यौन शोषण भी: अपहरण कर ले जा रहे थे शोएब के परिवार वाले, तभी आ गई यूपी पुलिस

उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले से ‘लव जिहाद’ का मामला सामने आया है। यहाँ शोएब नाम के एक व्यक्ति पर एक दलित लड़की के धर्मांतरण का आरोप लगा है। पीड़िता के पिता ने यह भी बताया है कि उनकी बेटी को जबरन गोमांस खिलाया गया और यौन शोषण किया गया। सोमवार (4 दिसंबर, 2023) को पुलिस ने बताया कि इस मामले में केस दर्ज कर के जाँच और कार्रवाई की जा रही है। नामजद आरोपितों में महिलाएँ भी शामिल हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला हरदोई जिले के थाना क्षेत्र सुरसा के एक गाँव का है। पीड़िता का पिता परिवार पालने के लिए हरियाणा के सोनीपत जिले की एक फैक्ट्री में नौकरी करता है। 17 जून, 2023 को उसकी 18 वर्षीय बेटी को सोनीपत से ही उत्तर प्रदेश के ही फ़िरोज़ाबाद जिले का रहने वाला शोएब अपने साथ बहला-फुसला कर भगा ले गया। पीड़ित परिवार ने अपने स्तर पर लड़की की काफी खोजबीन की लेकिन उनको सफलता नहीं मिल पाई।

इस बीच रविवार (3 दिसंबर, 2023) को अपहृता लड़की खुद ही अपने गाँव हरदोई चली आई। यहाँ आ कर उसने बताया कि शोएब उसे ले कर फ़िरोज़ाबाद गया था। यहाँ पीड़िता को इस्लाम कबूल करवाया गया और गोमांस खिलाया गया। आरोपित ने पीड़िता से निकाह कर के उसका यौन शोषण भी किया। आरोप है कि पीड़िता को शारीरिक और मानसिक तौर पर प्रताड़ित करने में शोएब और उसका पूरा परिवार भी शामिल था। रविवार को जैसे-तैसे मौक़ा पा कर पीड़िता पहले अपनी मौसी के घर और फिर वहाँ से अपने हरदोई स्थित गाँव में आ गई। यहाँ उसने परिजनों को आपबीती बताई।

पीड़िता को घर में न पा कर शोएब और उसके परिजनों ने खोजबीन शुरू की। इसी तलाश में वो सभी पीड़िता के हरदोई स्थित गाँव तक पहुँच गए। थोड़े समय तक रेकी के बाद यहाँ शोएब और उसके घर वाले लड़की को उसके घर से जबरन अपने साथ ले जाने लगे। इसी बीच दोनों पक्षों में विवाद शुरू हो गया। ग्रामीणों ने इसकी सूचना डायल 112 पर पुलिस को दी। पुलिस ने फ़ौरन मौके पर पहुँच कर विवाद कर रहे 3 लोगों को हिरासत में ले लिया। बाकी अन्य लोग पुलिस को देख कर भाग खड़े हुए।

पीड़िता की तहरीर पर पुलिस ने शोएब, नजमा खां, आकिब, रेशमा, मेहराज और 5 अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। इन सभी पर IPC की विभिन्न धाराओं के साथ SC/ST एक्ट और उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म सम्परिवर्तन अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है। 3 लोगों के हिरासत में होने की खबर है। हरदोई के एडिशनल MP नृपेंद्र सिंह के मुताबिक मामले की जाँच और जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है। फरार आरोपितों की तलाश में पुलिस जुटी हुई है।

मस्जिद की लाउडस्पीकर से तेज आवाज में देते थे अजान, कई बार समझाया, नहीं माने तो सीतापुर पुलिस ने मौलवी-मुतवल्ली पर की FIR

तय मानक से अधिक आवाज में लाउडस्पीकर बजाने पर उत्तर प्रदेश की सीतापुर पुलिस ने एक मस्जिद के मौलवी और मुतवल्ली पर एफआईआर दर्ज की है। मौलवी का नाम अब्दुल्ला, जबकि मुतवल्ली का नाम बब्बू खान है।

जिस मस्जिद से तेज आवाज में लाउडस्पीकर से अजान दी जा रही थी वह पुलिस लाइन के ही पास है। आवाज कम करने को लेकर मौलवी और मुतवल्ली को पुलिस ने कई बार समझाया। लेकिन इन पर कोई फर्क नहीं पड़ा। इसके बाद रविवार (3 दिसंबर 2023) को इन पर FIR दर्ज की गई।

मामला सीतापुर जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र का है। मामले में शिकायतकर्ता खुद पुलिस है। चौकी इंचार्ज सब इंस्पेक्टर अश्मित भारती ने अपने ही थाने में इसकी तहरीर दी है। तहरीर में उन्होंने बताया कि 3 दिसंबर को वे अपने क्षेत्र में गश्त कर रहे थे। इसी दौरान पता चला कि पुलिस लाइन के बगल बनी मस्जिद में तेज आवाज में लाउडस्पीकर बजाया जा रहा है। बकौल चौकी इंचार्ज इस वजह से मस्जिद के आसपास रहने वालों को काफी असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा था।

पुलिस लाइन के पास बनी इस मस्जिद में मौलवी के तौर पर सीतापुर का ही रहने वाला दीन मोहम्मद का बेटा अब्दुल्ला और मुतवल्ली के रूप में इसी जिले का निवासी सरताज का बेटा बाबू खान नियुक्त है। सब इंस्पेक्टर अश्मित के मुताबिक इन दोनों को पहले भी कई बार माइक की आवाज को मानकों के हिसाब से रखने के लिए समझाया गया था। हालाँकि इसका दोनों पर कोई फर्क नहीं पड़ा। पुलिस ने अब्दुल्ला और बब्बू खान की इस हरकत को उत्तर प्रदेश शासन की नियामवली और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन माना है।

पुलिस ने दोनों आरोपितों पर IPC की धारा 188 के साथ ध्वनि प्रदूषण नियमन व नियंत्रण नियम 2000 की धारा 5/6 के तहत कार्रवाई की है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। बताते चलें कि मज़हबी स्थलों पर लगे अवैध लाउडस्पीकरों को हटाने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस 15 दिनों के विशेष अभियान पर है। सीतापुर जिले में इस अभियान के तहत अब तक 12 लाउडस्पीकर हटवाए गए हैं, जबकि 356 माइकों की आवाज कम कराई गई है।