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Melodi मुलाकात के बाद चीन को करारा झटका, इटली ने जिनपिंग के ड्रीम प्रोजेक्ट BRI से किया किनारा: दिल्ली के G20 के बाद ही दे दिए थे संकेत

यूरोपीय देश इटली ने चीन को करारा झटका दिया है। उसकी महत्वाकांक्षी परियोजना बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) से आधिकारिक तौर पर किनारा कर लिया है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के लिए यह रणनीतिक तौर पर बड़ा झटका है।

यह खबर ऐसे समय में सामने आई है जब पिछले दिनों दुबई में आयोजित संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP 28) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी इतालवी समकक्ष जॉर्जिया मेलोनी की मुलाकात हुई थी। इस दौरान दोनों के संबंधों में काफी गर्मजोशी देखी गई थी। मेलोनी ने पीएम मोदी के साथ सेल्फी लेते हुए उसे Melodi हैशटैग के साथ सोशल मीडिया में पोस्ट भी किया था।

वैसे इस परियोजना से इटली के मोहभंग होने की जानकारी दिल्ली में जी 20 शिखर सम्मेलन के दौरान ही आ गई थी। उस समय यह बात सामने आई थी कि चीन के प्रधानमंत्री को इटली ने इस परियोजना से हाथ खींचने के बारे में बता दिया है। इसी सम्मेलन में चीन-पाकिस्तान जैसे पारंपरिक विरोधियों की नींद उड़ाते हुए भारत ने इंडिया-मिडल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर प्रोजेक्ट की घोषणा की थी।

अब खबर आ रही है कि चार महीनों की बातचीत के बाद इटली ने आधिकारिक तौर पर बीआरआई से अलग होने का निर्णय ले लिया है। इटली G7 समूह का अकेला देश था जो चीन के इस इनिशिएटिव से जुड़ा था। अब उसने चीन के साथ चार वर्ष पूर्व किए गए समझौते को रद्द कर दिया है। इतालवी अखबारों का कहना है कि जॉर्जिया मेलोनी का प्रधानमंत्री पद पर होना इस फैसले की सबसे बड़ी वजह है।

चीन ने वर्ष 2019 में इटली के साथ यह समझौता किया था। इसके तहत चीन, इटली में 20 बिलियन यूरो (लगभग ₹18,000 करोड़) के प्रोजेक्ट विकसित करता। इससे दोनों देशों के बीच कनेक्विटिविटी को और मजबूत करने का उद्देश्य रखा गया था। इटली ने इससे पहले अक्टूबर में नई दिल्ली में हुई G20 समिट के समय ही चीन को यह स्पष्ट कर दिया था कि वह आगे और ज्यादा दिन BRI के साथ नहीं रह पाएगा। इटली का कहना था कि इस पूरे समझौते से उनको वैसे परिणाम नहीं मिले जैसी उन्हें आशा थी।

इटली पर अमेरिका समेत तमाम पश्चिमी देशों ने दबाव बनाया हुआ था कि वह चीन के साथ किए गए इस समझौते पर आगे ना बढ़े। जॉर्जिया मेलोनी की सरकार आने के बाद इसको लेकर संभावनाएँ बढ़ गईं थी कि अब इटली इससे बाहर आ जाएगा। इसके लिए बीते 4 माह से चीन के साथ गुप्त तौर पर बातचीत चल रही थी।

इटली चाहता था कि वह चीन के बाजार में बड़े स्तर पर सामान निर्यात करे, लेकिन यह सम्भव नहीं हो पाया क्योंकि 2019 में समझौता करने के तुरंत बाद कोविड आ गया जिससे आवाजाही बंद हो गई। इसी बीच चीन की दादागीरी भी सामने आई। इटली का यह निर्णय नई दिल्ली में चीन को बताना और फिर प्रधानमंत्री मोदी से इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी के मुलाक़ात के बाद फैसले का ऐलान करना बड़ा संकेत है।

क्या है चीन का BRI

बेल्ट एण्ड रोड इनिशिएटिव अथवा वन बेल्ट-वन रोड चीन की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है। इस परियोजना के माध्यम से चीन अपने देश को एशिया, अफ्रीका और यूरोप के कई देशों से रोड और रेलवे लाइन के माध्यम से जोड़ना चाहता है। उसकी यह परियोजना प्राचीन सिल्क रूट का ही आधुनिक संस्करण है।

हालाँकि चीन इसे व्यापार सुगमता और वैश्विक व्यापार के अवसरों की वृद्धि की एक पहल के रूप में प्रचारित करता है, किन्तु भारत समेत कई देश इसे चीन की एक गहरी साजिश बताते हैं। एक ऐसी साजिश जिसके तहत चीन अल्पविकसित और विकासशील देशों में विकास के नाम पर उन्हें भारी कर्ज में लाद देता है।

इसका उदाहरण भारत के पड़ोसी देश श्रीलंका में दिख चुका है, जहाँ चीन ने हम्बनटोटा बंदरगाह को विकसित किया और जब इसके लिए दिए गए लोन को श्रीलंका वापस नहीं कर पाया तो उसने इस बंदरगाह पर कब्जा कर लिया। इसके पश्चात चीन के कर्ज को श्रीलंका वापस नहीं कर पाने के कारण भारी आर्थिक संकट में भी आ गया।

इससे पहले पश्चिमी गुट के एक अन्य बड़े देश ऑस्ट्रेलिया ने भी 2021 में BRI से किनारा कर लिया था। ऑस्ट्रेलिया ने कहा था कि वह चीन के साथ चार समझौतों को रद्द कर रहा है। ऑस्ट्रेलिया ने इस फैसले को राष्ट्रहित में बताया था।

अमित शाह ने संसद में गिनाई नेहरू की 2 गलती, लोकसभा ने पास कर दिया जम्मू-कश्मीर पर 2 बिल: कहा- यह कश्मीरी पंडितों को अधिकार देगा

लोकसभा ने बुधवार (6 दिसंबर 2023) को जम्मू-कश्मीर से जुड़े दो महत्वपूर्ण विधेयकों को पास कर दिया। इनके नाम हैं- जम्मू और कश्मीर आरक्षण (संशोधन) विधेयक 2023 तथा जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन विधेयक 2023। बिल पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कश्मीर पर देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की ओर से की गई दो गलतियों का भी जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि पहली गलती यह थी कि हमारी सेना जीत रही थी और नेहरू ने सीजफायर कर दिया। ऐसा नहीं होता तो आज पीओके भी भारत का हिस्सा होता। उनकी दूसरी गलती जम्मू-कश्मीर के मसले को संयुक्त राष्ट्र में ले जाना था। शाह ने बताया कि शेख अब्दुल्ला को लिखे एक पत्र में नेहरू ने अपनी इन गलतियों को स्वीकार भी किया था।

अमित शाह ने कहा, “दो बड़ी गलतियाँ जो पंडित जवाहर लाल नेहरू के प्रधानमंत्री काल में हुई। उनके लिए गए निर्णयों के कारण सालों तक कश्मीर में शांति नहीं हुई। एक जब हमारी सेना जीत रही थी तब पंजाब के इलाके आते ही सीजफायर कर दिया गया और पाक अधिकृत कश्मीर का जन्म हुआ। अगर सीजफायर तीन दिन लेट हुआ होता तो POK भारत का हिस्सा होता। कश्मीर जीते बगैर सीजफायर कर लिया और दूसरा संयुक्त राष्ट्र के भीतर कश्मीर के मसले को ले जाने की बहुत बड़ी गलती की।”

विधेयकों पर चर्चा करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि इसके जरिए विधानसभा में दो सीटें कश्मीर विस्थापितों और एक सीट पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर से भारत आने वालों के लिए आरक्षित होंगी। इसी तरह विधानसभा में सीटों की भी संख्या बढ़ाई गई है। जम्मू में पहले 37 सीटें थीं, अब 43 हो जाएँगी। कश्मीर की सीटें 46 से बढ़कर 47 हो जाएँगी। शाह ने कहा, “PoK के लिए 24 सीटें आरक्षित कर दी गई हैं, क्योंकि PoK हमारा है।”

चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री ने कश्मीरी पंडितों के विस्थापन का जिक्र करते हुए कहा कि ये बिल उनके अधिकार दिलाने का काम करेगा। उन्हें प्रतिनिधित्व देने का काम करेगा। गृह मंत्री ने चर्चा के दौरान कहा कि जो लोग पूछते हैं कि अनुच्छेद 370 के हटने के बाद से जम्मू-कश्मीर में क्या बदला है, उन्हें जानना चाहिए कि 5 अगस्त 2019 के बाद उन लोगों की आवाज सुनी गई है जिनकी पहले नहीं सुनी गई थी।

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “जब आतंकवाद शुरू हुआ और आतंकवाद ने हर किसी को निशाना बनाकर भगाया, तो घड़ियाली आँसू बहाने वाले मैंने बहुत नेता देखे। शब्दों से सांत्वना देने वाले मैंने बहुत नेता देखे, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने सही मायने में पीड़ितों के आँसू पोछने का काम किया है।”

गृह मंत्री ने आतंकवाद पर बोलते हुए कहा, “1994-2004 के बीच आंतकवाद के 40,164 मामले सामने आए। 2004-2014 के बीच 7217 मामले सामने आए। 2014-23 के बीच आतंक के मामलों में 70% की कमी आई है। इसीलिए मैंने कहा कि आतंकवाद और अलगाववाद की मूल जड़ में अनुच्छेद 370 था।”

अब ये बिल राज्यसभा में पेश किए जाएँगे। वहाँ से भी इन विधेयकों के इसी सत्र में पारित होने की संभावना है।

‘वह मुझे PM नहीं बनाएँगी’: प्रणब मुखर्जी ने बेटी को पहले ही बता दिया था सोनिया गाँधी के मन की बात, राहुल लगते थे अपरिपक्व

भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने अपने पिता पर एक किताब लिखी है। इसमें कॉन्ग्रेस और सोनिया गाँधी से जुड़े कई प्रकरण का जिक्र है। शर्मिष्ठा मुखर्जी ने यह किताब अपने पिता की डायरी, उनसे हुए संवाद और अपने शोध के आधार पर लिखी है।

किताब का नाम- इन प्रणब, माई फादर:ए डॉटर रिमेम्बर्स (In Pranab, My Father: A Daughter Remebers) है। इसका विमोचन 11 दिसम्बर 2023 को दिल्ली में होगा। इसमें शर्मिष्ठा ने 2004 के लोकसभा चुनावों के बाद प्रधानमंत्री पद को लेकर पिता के साथ हुई अपनी बातचीत के बारे में भी बताया है। इसी दौरान प्रणब मुखर्जी ने उन्हें बता दिया था कि वे प्रधानमंत्री नहीं होंगे।

शर्मिष्ठा ने किताब में सोनिया गाँधी और प्रणब के बीच के रिश्ते, राहुल गाँधी को लेकर उनके विचार और देश के राजनीतिक माहौल पर उनके विचारों को लेकर लिखा है। गौरतलब है कि प्रणब मुखर्जी कॉन्ग्रेस के वरिष्ठतम नेताओं में से एक थे। वह रक्षा, वित्त और विदेश जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय सँभाल चुके थे। वह 2012 से लेकर 2017 तक देश के राष्ट्रपति भी रहे थे। प्रणब मुखर्जी का निधन अगस्त 2020 में हो गया था।

2004 के आम चुनावों में एनडीए की हार के बाद कॉन्ग्रेस नेता सोनिया गाँधी से प्रधानमंत्री बनने की अपील कर रहे थे। लेकिन विपक्ष के विरोध के चलते सोनिया को खुद की इस दौड़ से बाहर होने के लिए मजबूर होना पड़ा था। इसके बाद कॉन्ग्रेस के तब के वरिष्ठ नेता प्रणब मुखर्जी और मनमोहन सिंह में से किसी के प्रधानमंत्री बनने की खबरें तैरने लगी थी।

आजतक के अनुसार, शर्मिष्ठा ने इस विषय में किताब में लिखा है, “इस पद के लिए शीर्ष दावेदारों के रूप में डॉ. मनमोहन सिंह और प्रणब मुखर्जी के नामों पर चर्चा हो रही थी। मुझे कुछ दिनों तक बाबा से मिलने का मौका नहीं मिला, क्योंकि वह बहुत व्यस्त थे। लेकिन मैंने उनसे फोन पर बात की। मैंने उनसे उत्साहित होकर पूछा कि क्या वह पीएम बनने जा रहे हैं। उनका दो टूक जवाब था- नहीं, वह मुझे पीएम नहीं बनाएँगी। वह मनमोहन सिंह होंगे।” उन्होंने आगे कहा, “लेकिन उन्हें जल्द इसकी घोषणा करनी चाहिए। यह अनिश्चितता देश के लिए अच्छी नहीं है।”

प्रधानमंत्री बनने को लेकर प्रणब मुखर्जी से उनकी बेटी ने प्रश्न पूछा था कि क्या वह देश का प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं? इसके जवाब में प्रणब मुखर्जी ने कहा था, “बेशक, मैं प्रधानमंत्री बनना चाहूँगा। किसी भी योग्य राजनेता की यह महत्वाकांक्षा होती है। लेकिन सिर्फ इसलिए कि मैं इसे चाहता हूँ इसका मतलब यह नहीं है यह नहीं है कि मुझे यह मिल जाएगा।”

सोनिया गाँधी के विषय में प्रणब मुखर्जी का मानना था कि वह एक मेहनती और प्रतिभाशाली नेता हैं और भारत की जटिलताओं को समझने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। लेकिन राहुल गाँधी को लेकर उनका मानना था कि वह राजनीतिक रूप से परिपक्व नहीं हैं। उन्होंने राहुल को मनमोहन कैबिनेट में शामिल होकर अनुभव लेने की सलाह भी दी थी, पर कॉन्ग्रेस नेता ने इस पर भी अमल नहीं किया था।

7 महीने से फरार IPS का बिहार की कोर्ट में सरेंडर, दोस्त को हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस बना DGP को करवाया था कॉल: कहा था- केस हटाओ, बढ़िया पोस्टिंग दो

बिहार में 7 महीने से फरार चल रहे IPS आदित्य कुमार ने आखिरकार मंगलवार (5 दिसंबर 2023) को कोर्ट में सरेंडर कर दिया। सरेंडर के बाद उन्हें बेउर जेल भेज दिया गया है। भारतीय पुलिस सेवा 2011 बैच के अधिकारी आदित्य पर 15 अक्टूबर 2022 को शराब माफियाओं के खिलाफ लापरवाही बरतने एक आरोप में FIR दर्ज हुई थी। अपने बचाव में आदित्य कुमार ने बिहार के तत्कालीन DGP को पटना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के नाम से फर्जी कॉल भी करवाई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आदित्य कुमार पर 15 अक्टूबर 2022 को आर्थिक अपराध ईकाई (EOW) ने FIR दर्ज करवाई थी। FIR में IPS आदित्य पर शराब माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया गया था। यह केस गया जिले के थाना फतेहपुर में दर्ज हुआ था। केस दर्ज होने के बाद शासन ने आदित्य कुमार को सस्पेंड कर दिया था। अपनी गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए आदित्य कुमार फरार हो गए।

इस बीच बिहार के तत्कालीन DGP एस के सिंघल को एक फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को पटना हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बताया था। उसने DGP से कहा कि वो आदित्य कुमार के खिलाफ चल रही कार्रवाई बंद करवा दें। साथ ही कॉलर ने आदित्य कुमार को किसी बढ़िया जगह तैनाती देने के लिए भी कहा। DGP को शक हुआ तो उन्होंने नंबर की जाँच करवाई। जाँच में वो नंबर आदित्य कुमार के ही दोस्त अभिषेक अग्रवाल का निकला। इस मामले में भी केस दर्ज हुआ था। इसमें आदित्य और उसके दोस्त अभिषेक अग्रवाल को नामजद किया गया था।

पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आदित्य के दोस्त अभिषेक को गिरफ्तार कर लिया। हालाँकि खुद IPS आदित्य पुलिस के हत्थे नहीं चढ़े और फरार रहे। नवंबर 2023 को आदित्य कुमार ने गिरफ्तारी से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। बिहार शासन से तलब की गई रिपोर्ट आने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने आदित्य कुमार की जमानत अर्जी खारिज कर दी। इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने आदित्य को 2 हफ्तों में सरेंडर करने का आदेश दिया। 2 हफ्तों की समय सीमा बीत जाने के अंदर ही आखिरकार मंगलवार को आदित्य ने पटना की एक अदालत में सरेंडर कर दिया।

9 नवंबर को घर से गाड़ी ठीक कराने निकला सेना का जवान, 5 दिसंबर को वीडियो में करणी सेना के अध्यक्ष को सिर में गोली मारते दिखा

राजस्थान के जयपुर में मंगलवार (5 दिसंबर, 2023) को ‘श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना’ के अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की घर में घुस कर हत्या कर दी गई, जिसका CCTV फुटेज भी सामने आया। इस मामले में 2 शूटरों को गिरफ्तार किया गया है – मकराना के रोहित और हरियाणा स्थित महेंद्रगढ़ के नितिन फौजी। नितिन फौजी भारतीय सेना में है। उसने ही करणी सेना के अध्यक्ष के सिर में गोली मारी थी। वो पंजाब के बठिंडा के जेल में बंद संपत नेहरा से संपर्क में था, जिसने इस हत्याकांड की साजिश रची।

संपत नेहरा को लॉरेंस बिश्नोई का ‘मैनेजर’ कहा जाता है। पहले वो राष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी हुआ करता था, लेकिन पंजाब यूनिवर्सिटी के DAV कॉलेज में लॉरेंस बिश्नोई के संपर्क में आने के बाद उसने अपराध की दुनिया में कदम रखा। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और पंजाब में भी इस हत्याकांड के बाद छापेमारी चल रही है। पूरे राजस्थान में बंद के आह्वान के बाद प्राइवेट स्कूल भी नहीं खुले। बसों का परिचालन बाधित कर दिया गया है और दुकानें बंद हैं।

महेंद्रगढ़ के डोंगरा का रहने वाला नितिन फौजी भारतीय सेना में है और नवंबर महीने में ही वो छुट्टी पर आया था। 9 नवंबर को वो ये कह कर निकला कि वो गाड़ी ठीक कराने जा रहा है, लेकिन उसके बाद वो वापस नहीं लौटा। परिजनों से भी उसका कोई संपर्क नहीं है। वहीं राजस्थान पुलिस को पंजाब पुलिस ने 10 महीने पहले ही सूचना भेजी थी कि सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की हत्या की साजिश संपत नेहरा रच रहा है। DGP उमेश मिश्रा ने कहा कि अपराधियों की तलाश में दबिश दी जा रही है।

गैंगस्टर रोहित गोदारा के गुर्गों से भी पूछताछ चल रही है, जिसने फेसबुक के माध्यम से इस हत्याकांड की जिम्मेदारी ली थी। राजस्थान में संपत नेहरा और रोहित गोदारा ने मिल कर कई वारदातों को अंजाम दिया है। सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की हत्या के लिए उनके ही पुराने गनर को माध्यम बना कर बदमाश उनके घर में घुसे थे। एक डील का लालच दिया गया था। बातचीत के लिए इंटरनेट कॉलिंग का इस्तेमाल किया गया था। सरदारशहर में 2019 में भींवराज सारण की हत्या के मामले में भी रोहित गोदारा आरोपित है।

दोगड़ा जाट निवासी नितिन फौजी के बारे में और जानकारियाँ सामने आई हैं। अब उसका मकान सुनसान पड़ा हुआ है। घर में उसके माँ-बाप हैं, जबकि उसकी पत्नी बहरोड़ स्थित मायके में रहती है। नितिन फौजी के पिता कृष्ण कुमार भी भारतीय सेना से रिटायर्ड हैं। दोगड़ा पुलिस ने कहा कि राजस्थान पुलिस ने अब तक कोई संपर्क नहीं किया है। नितिन फौजी 19 जाट बटालियन में कार्यरत है। 1 साल पहले उसकी शादी हुई थी। फ़िलहाल उसका कोई बच्चा नहीं है।

नेपाल बॉर्डर पर 108 मदरसे, खाड़ी देशों से आए ₹150 करोड़: तालीम के नाम पर विदेश से आया पैसा कहाँ हुआ खर्च, जाँच कर रही यूपी SIT

नेपाल की सीमा से लगे उत्तर प्रदेश के इलाकों में चल रहे 108 मदरसों में विदेशी फंडिंग के सबूत मिले हैं। पता चला है कि तालीम के नाम पर इन मदरसों को खाड़ी देशों से करीब 150 करोड़ रुपए की फंडिंग हुई है। यह पैसा कहाँ खर्च हुआ, इसकी जाँच उत्तर प्रदेश SIT कर रही है।

ऑपइंडिया ने अक्तूबर 2022 में भारत-नेपाल सीमा पर चल रहे अवैध मस्जिद और मदरसों का खुलासा किया गया था। इसके बाद मदरसों को हो रही फंडिंग की जाँच के लिए यूपी सरकार ने एडीजी मोहित अग्रवाल के नेतृत्व में तीन सदस्यीय एसआइटी का गठन किया था। रिपोर्ट के अनुसार एसआईटी की पड़ताल में 108 मदरसों को विदेशी फंडिंग के प्रमाण मिले हैं। इन मदरसों से उनके बैंक खातों का पूरा ब्यौरा माँगा गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक SIT जाँच में खुलासा हुआ है कि बीते 2 वर्षों में भारत-नेपाल सीमा पर बने मदरसों के लिए लगभग 150 करोड़ रुपए की विदेशी फंडिंग हुई है। इस फंडिंग का लाभ लगभग 108 मदरसों को मिला है। ज्यादातर पैसे सऊदी अरब और उसके आसपास के खाड़ी देशों से भेजे गए हैं।

SIT टीम की जाँच के दायरे में कुल 25 हजार मदरसे हैं। जाँच के पहले चरण में उन मदरसों को चिन्हित किया गया है जो गैर मान्यता प्राप्त हैं। नेपाल बॉर्डर के अलावा देवबंद और कुछ अन्य हिस्सों में भी ऐसे कई मदरसे मिले हैं जिनको चलाने के लिए विदेश से पैसे आए। जाँच एजेंसी की नजर विदेशी पैसे के अलावा दिल्ली के एक NGO पर भी है। इस NGO से 3 वर्षों के अंदर कई मदरसों को लगभग 20 करोड़ रुपयों की फंडिंग की गई है। इस NGO से यह पता लगाने का प्रयास चल रहा है कि उनके पास ये पैसा कैसे और कहाँ से आया। साथ ही इसके द्वारा दिया गया पैसा मदरसों ने किस काम के लिए खर्च किया।

इस बात की भी आशंका जताई जा रही है कि विदेशों से मिले इन पैसों को तालीम की जगह देश विरोधी कार्यों पर खर्च किया गया हो। बताते चलें कि नेपाल सीमा पर अवैध इबादतगाहों व मदरसों को ले कर ऑपइंडिया की टीम अक्टूबर 2022 में लगभग 15 दिनों तक ग्राउंड पर रही। इस दौरान नेपाल के भी सांसद ने यह स्वीकार किया था कि भारत-नेपाल सीमा पर संदिग्ध गतिविधियाँ जोर पकड़ रही हैं।

पब्लिक पूछ रही कौन बनेंगे CM, इधर BJP ने चुनाव जीतने वाले 9 MP और मोदी के 2 मंत्रियों का इस्तीफा लेकर बढ़ा दिया सस्पेंस

मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भाजपा ने अपने 21 सांसदों को चुनाव लड़ाया था, जिनमें से 12 जीत कर आए हैं। अब इन सभी से इस्तीफा ले लिया गया है। बुधवार (6 दिसंबर, 2023) को पार्टी ने ये फैसला लिया। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष JP नड्डा ने इन सभी सांसदों के साथ बैठक की, फिर उनके साथ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलने पहुँचे। उनकी मौजूदगी में सभी सांसदों ने स्पीकर को इस्तीफा सौंपा। इसके साथ ही केंद्रीय कैबिनेट से 3 मंत्री भी कम हो गए हैं।

राजस्थान से जिन सांसदों ने इस्तीफा दिया है, वो हैं – जयपुर (ग्रामीण) के राज्यवर्धन सिंह राठौड़, राजसमंद से दीया कुमारी, अलवर से बाबा बालकनाथ और राज्यसभा सांसद किरोड़ी लाल मीणा। मध्य प्रदेश से जिन सांसदों ने इस्तीफा दिया है, वो हैं – मोरेना से नरेंद्र सिंह तोमर, दमोह से प्रह्लाद पटेल, जबलपुर से राकेश सिंह, सीधी से रीति पाठक और नर्मदापुरम से उदय प्रताप सिंह। छत्तीसगढ़ से इन सांसदों ने इस्तीफा दिया – रायगढ़ से गोमती साईं, बिलासपुर से अरुण साव और सुरगुजा से रेणुका सिंह।

इस तरह राजस्थान से 4, मध्य प्रदेश से 5 और छत्तीसगढ़ से 3 सांसदों ने इस्तीफा दिया। राठौड़ ने झोटवाड़ा, दीया ने विद्याधर नगर, बालकनाथ ने तिजारा, मीणा ने सवाई माधोपुर, तोमर ने दिमनी, पटेल ने नरसिंहपुर, राकेश ने जबलपुर पश्चिम, पाठक ने सीधी, उदय प्रताप ने गाडरवारा, साईं ने पथलगाँव, साव ने लोरमी और रेणुका ने भरतपुर-सोनहत से जीत दर्ज की है। मध्य प्रदेश में भाजपा ने 163, राजस्थान में 115 और छत्तीसगढ़ में 54 सीटें अपने नाम की हैं। महंत बालकनाथ योगी ने अभी इस्तीफा नहीं दिया है, लेकिन चर्चा है कि वो भी इस्तीफा दे देंगे।

भाजपा के कई सांसद चुनाव हार भी गए। राजस्थान में भगीरथ चौधरी (सांसद अजमेर से, चुनाव हारे किशनगढ़ से), नरेंद्र खीचड़ (लोकसभा सांसद झुंझनूँ से, हारे मंडावा विधानसभा क्षेत्र से) और देवजी पटेल (सांसद जालौर से, चुनाव हारे सांचौर से) चुनाव है गए। मध्य प्रदेश में मंडला से सांसद सिंह कुलस्ते जिन्हें निवास से लड़ाया गया था और सतना के गणेश सिंह चुनाव हार गए। इसी तरह छत्तीसगढ़ में विजय बघेल हार गए। उन्हें दुर्ग से लड़ाया गया था, जबकि वो पाटन से सांसद थे।

अमेरिकी संसद में भी हार्वर्ड, पेन और MIT अध्यक्षों की दिखी ‘यहूदी घृणा’, कहा- नरसंहार के नारे गलत नहीं, हत्याएँ होंगी तो देखेंगे

अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डीसी में 5 दिसम्बर को सुनवाई हुई है, जिसमें ‘कैम्पस के नेताओं को जिम्मेदार ठहराए जाने और यहूदी विरोधी भावनाओं को बढ़ावा देने’ को लेकर सुनवाई हुई। कॉलेजों में यहूदी विरोधी घृणा के कारण ये सुनवाई करनी पड़ी।

गौरतलब है कि 7 अक्टूबर, 2023 को इजरायल पर इस्लामी आतंकी संगठन हमास के हमले के बाद अमेरिका के कई विश्वविद्यालयों में छात्रों ने इसका जश्न मनाया था और यहूदियों के विरोध में नारे लगाए थे। यहूदी छात्रों को परेशान भी किया गया था। हार्वर्ड के छात्रों ने हमास के समर्थन में एक प्रेस रिलीज भी जारी किया था।

इस मामले में अब ‘कॉन्ग्रेस’ (अमेरिकी संसद) सुनवाई कर रही है। संसद ने अमेरिका के हार्वर्ड (Harvard) की अध्यक्ष क्लाऊडीन गे, मैसाचुएट्स इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (MIT) की अध्यक्ष सैली कोर्नब्लथ और पेन (Penn) विश्वविद्यालयों की अध्यक्ष एलिज़ाबेथ मैगिल को सुनवाई में बुलाया गया था।

इस दौरान जब कॉन्ग्रेस सदस्य एलिसी स्टेफनिक ने इन तीनों से यूनिवर्सिटी कैम्पस में यहूदियों के नरसंहार के नारे लगाए जाने की निंदा करने को कहा तो इससे इन्होंने मना कर दिया। उनका कहना था कि उनके विश्वविद्यालयों के नियमों के अंतर्गत यह गलत नहीं है। इसलिए वह इसको गलत नहीं ठहराएँगी।

अब स्टेफनिक ने ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर इनके त्यागपत्र की माँग की है। उन्होंने एक्स पर लिखा, “हार्वर्ड, पेन और MIT की अध्यक्षों ने यह मानने से इनकार कर दिया है कि यहूदियों के नरसंहार का ऐलान उनके नियमों के अनुसार किसी की बेइज्जती या उत्पीड़न है। उन्होंने यहाँ तक कह दिया है कि यह नरसंहार के नारे कार्रवाई में बदलने जरूरी हैं। यानी नरसंहार हो। यह अस्वीकार्य और यहूदी विरोधी है। इन सभी को आज ही त्याग पत्र दे देना चाहिए।”

इस सुनवाई के दौरान स्टेफनिक ने प्रश्नों का इन तीनों से स्पष्ट रूप से ‘हाँ’ या ‘ना’ में उत्तर देने को कहा कि यहूदियों के नरसंहार के नारे लगाना उनके विश्वविद्यालयों के नियमों के अनुसार उत्पीड़न है या नहीं। हालाँकि, यह तीनों स्पष्ट जवाब देने से बचती रहीं और इधर-उधर घुमा कर उत्तर दिया।

इस पर MIT की अध्यक्ष कोर्नब्लथ ने कहा कि यहूदियों के नरसंहार के नारों को तभी उत्पीड़न माना जाएगा जब वह सच में बदल जाएँ। पेन विश्वविद्यालय की अध्यक्ष मैगिल ने कहा कि यह तबी उत्पीड़न जाएँगे जब यह आचरण बन जाएँ। हार्वर्ड की अध्यक्ष गे ने भी कुछ ऐसी ही बात की। इनके इस जवाबों से स्टेफनिक गुस्सा हो गईं और कहा कि इन जवाबों में कोई स्पष्टता नहीं है। उनका कहना था कि यह तीनों इस मामले में स्पष्ट जवाब नहीं दे रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह तीनों अपने विश्वविद्यालयों में यहूदियों के विरुद्ध नारों पर सही एक्शन नहीं ले पाईं।

स्टेफनिक की इन तीनों से काफी तगड़ी बहस हुई। स्टेफनिक का कहना था कि इन लोगों का जवाब हाँ में होना चाहिए था। उन्होंने कहा कि इन तीनों का आचरण अस्वीकार्य है। उनका कहना था कि यहूदियों के खिलाफ नारों पर एक्शन ना ले पाना इन तीनों की भारी चूक है।

बीवी को खुश करने के लिए दूसरे का जला दिया प्राइवेट पार्ट, कार से फायर किए क्रैकर्स: पुलिस को वीडियोग्राफर ऑटो वाले की भी तलाश

सालगिरह पर अपनी पत्नी को इम्प्रेस करने के चक्कर में एक रईसजादे ने दूसरे व्यक्ति का प्राइवेट पार्ट जला दिया। घटना पंजाब के मोहाली की है। आरोपित रचित कपूर सालगिरह पर कार से पटाखे फोड़ रहा था। इसकी चपेट में पीछे से आ रहा एक स्कूटर सवार युवक आ गया और कथित तौर पर उसके प्राइवेट पार्ट जल गए।

घटना शनिवार (2 दिसंबर 2023) की है। पुलिस ने आरोपित को घटना के बाद गिरफ्तार कर लिया। घायल युवक का अस्पताल में इलाज चल रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना मोहाली के सेक्टर-69 से एयरपोर्ट रोड की है। यहाँ 2 दिसंबर की रात रचित कपूर ढाई करोड़ रुपए की लग्जरी कार मस्टैंग ले कर पहुँचा। कार में रचित की पत्नी भी सवार थी।

वह सड़क पर ही अपनी शादी की सालगिरह मनाने लगा। उसने अपनी कार पर पटाखे रख कर हवाई शॉट चलाया। पीछे से वीडियो बनाने के लिए उसने एक ऑटो ड्राइवर को पैसे दे रखे थे। इस स्टंट का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

इसी आतिशबाजी के बीच एक स्कूटर सवार रचित की कार के बगल से गुजरा। स्कूटर सवार का आरोप है कि कार सवार द्वारा छोड़ा गया हवाई शॉट उसके कपड़ों पर आ गिरा। इस वजह से उसके कपड़ों के साथ प्राइवेट पार्ट भी जल गया।

पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने रचित कपूर के खिलाफ केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया। आगे की जाँच और कार्रवाई के लिए पुलिस ने उसको 2 दिनों के कस्टडी रिमांड पर लिया था। शुरुआती पूछताछ में रचित ने बताया कि वो पटाखों वाला स्टंट कर अपनी बीवी को इम्प्रेस करना चाहता था।

जाँच में सामने आया है कि रचित की मस्टैंग कार का अब तक 14 बार चालान हो चुका है। इसमें 13 चालान चंडीगढ़ और 1 चालान केरल में हुआ है। घटना के बाद आरोपित अपनी कार को दिल्ली में छोड़ आया था। पुलिस कार बरामद करने दिल्ली रवाना हो चुकी है। पीछे से वीडियो बना रहे ऑटो ड्राइवर की भी तलाश की जा रही है। आरोपित रचित कपूर का चंडीगढ़ के सेक्टर-19 में कपड़ों का शोरूम है।

गुजरात का ध्वज, बिहार का स्तंभ: 7000 को राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा का निमंत्रण, विराट-सचिन से लेकर अमिताभ-अंबानी तक शामिल

अयोध्या में राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम 22 जनवरी, 2024 को होना है। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और RSS प्रमुख मोहन भागवत उपस्थित रहेंगे। 450 वर्षों के संघर्ष के बाद हिन्दुओं को राम मंदिर मिल रहा है, ऐसे में स्वाभाविक है कि उत्साह चौगुने स्तर पर होगा। ऐसे में ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ ने आम लोगों से अपील की है कि वो जहाँ हैं वहीं भजन-कीर्तन करें, आसपास के मंदिरों में कार्यक्रम आयोजित करें, अयोध्या में बहुत अधिक भीड़ न लगे इसके लिए ये कहा गया है।

राम मंदिर में गुजरात का ध्वज

राम मंदिर में गुजरात से आया ध्वज लहराएगा। द्वारकाधीश की भूमि पर अयोध्या नरेश के मंदिर के लिए ध्वज स्तम्भ बनाने का कार्य शुरू हो गया है। अहमदाबाद में ऐसे 7 ध्वस्त स्तम्भों का निर्माण चल रहा है। ‘श्री अंबिका इंजीनियरिंग वर्क्स’ को इन ध्वस्त स्तम्भों के निर्माण का कार्य सौंपा गया है। मुख्य स्तम्भ सहित इनका वजन 5500 किलोग्राम होगा। कंपनी के MD भारत मेवाड़ा ने भी इसकी पुष्टि की है। राम मंदिर के चारों ओर 800 मीटर लंबी रिंग रोड भी तैयार की गई है।

इस पथ पर चल कर मंदिर की पूरी परिक्रमा की जा सकेगी। परिक्रमा का हिन्दू धर्म में विशेष महत्व है। फर्श के 60% हिस्से पर मार्बल लगाया भी जा चुका है। नृत्य मंडप के साथ-साथ रंग मंडप का भी शिखर तैयार कर लिया गया है। वहीं गुजरात में जो स्तम्भ बनाए जा रहे हैं, उनकी लंबाई 44 फ़ीट है और उन्हें नागर शैली में बनाया जा रहा है। एक ध्वज स्तम्भ है, जबकि बाकी 6 ध्वज दंड। इन्हें बनाने के लिए पीतल की धातु का इस्तेमाल किया जा रहा है। शास्त्रों के हिसाब से इन्हें बनाया जा रहा है। मंदिर में प्रतिमा के बाद मुख्य केंद्र यही होगा।

बिहार के समाजसेवी राकेश पांडेय लगवा रहे ‘राम स्तम्भ’

वहीं ‘ब्रावो फार्मा’ के संस्थापक राकेश पांडेय ने अयोध्या में राम मंदिर के लिए ‘राम स्तम्भ’ के निर्माण कार्य का बीड़ा उठाया है। हाल ही में चम्पारण के 100 युवाओं को कश्मीर के तीर्थस्थलों की निःशुल्क यात्रा कराने वाले राकेश पांडेय बिहार में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई सामाजिक कार्य कर रहे हैं। स्थानीय डिविजनल कमिश्नर द्वारा स्थापित ‘अयोध्या संरक्षण एवं विकास निधि समिति’ ने बताया कि 2 करोड़ रुपए की लागत से बन रहा ये ‘राम स्तम्भ’ राम जन्मभूमि मंदिर की तरफ जाने वाले रास्ते में लगेगा और नगर के समृद्ध इतिहास को बताएगा।

अयोध्या में निर्माणाधीन राम मंदिर के दर्शन को पहुँचे उद्योगपति राकेश पांडेय

ऐसे 25 ‘राम स्तम्भ’ ‘ब्रावो फाउंडेशन’ द्वारा लगवाए जाएँगे। इनकी ऊँचाई 6 मीटर और चौड़ाई 1.5 मीटर होगी। ‘अयोध्या संरक्षण एवं विकास निधि समिति’ ने ‘ब्रावो फाउंडेशन’ का स्वागत करते हुए अयोध्या की महिमा में योगदान के लिए धन्यवाद दिया। संस्था ने कहा कि इन ‘राम स्तम्भ’ से न सिर्फ अयोध्या की सांस्कृतिक विरासत में इनका अलग स्थान होगा। साथ ही ये स्तम्भ आर्किटेक्चर के मामले में दर्शनीय होंगे और श्रद्धा का भी केंद्र होंगे। राकेश पांडेय राम मंदिर के उद्घाटन कार्यक्रम में भी मौजूद रहेंगे।

राम मंदिर के लिए 8000 विशेष अतिथियों को न्योता

राम मंदिर के लिए 8000 गणमान्य अतिथियों को न्योता दिया गया है, जो प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे। इनमें पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर, भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान रहे विराट कोहली, वयोवृद्ध अभिनेता अमिताभ बच्चन और देश के सबसे अमीर उद्योगपति मुकेश अंबानी को भी आमंत्रण भेजा गया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इस कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे। सचिन और विराट अक्सर धार्मिक कार्यक्रमों का हिस्सा बनते रहते हैं।

विराट कोहली को वृन्दावन स्थित प्रेमानंद महाराज के आश्रम में और महाकाल मंदिर में भी पूजा-अर्चना करते हुए पत्नी अभिनेत्री अनुष्का शर्मा के साथ देखा गया था। इसी तरह सचिन तेंदुलकर भी अक्सर गणेश चतुर्थी पर विधि-विधान से पूजा करते रहे हैं। 1990 के राम मंदिर आंदोलन में बलिदान देने वाले कारसेवकों के परिवारों को भी बुलाया गया है। साथ ही 4000 साधु-संत देश भर से इस कार्यक्रम में शिरकत करेंगे। कार्यक्रम काफी भव्य होने वाला है और इसमें सभी देशों के राजदूत भी उपस्थित रहेंगे।