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‘मेरी HMT चोरी की Rolex से बेहतर है’: जय अनंत देहाद्राई ने तस्वीर से पूर्व पार्टनर महुआ मोइत्रा पर साधा निशाना, TMC नेता ने कसा तंज तो मिला करारा जवाब

पिछले कुछ सप्ताह से अधिवक्ता जय अनंत देहाद्राई और तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा के बीच का विवाद सुर्ख़ियों में बना हुआ है। अब जय अनंत देहाद्राई ने एक तस्वीर शेयर कर के टीएमसी सांसद पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर HMT कंपनी की घड़ी पहने हुए तस्वीर शेयर की और लिखा, “मेरी HMT चोरी की Rolex से ज़्यादा अच्छी है।” बता दें कि इस ट्वीट से उन्होंने महुआ मोइत्रा पर तंज कसा है।

महुआ मोइत्रा घूस के बदले संसद में सवाल पूछने के मामले की आरोपित हैं और इस मामले में संसद की एथिक्स कमिटी ने उनसे पूछताछ भी की है। महुआ मोइत्रा पर कारोबारी दर्शन हीरानंदानी से महँगे तोहफे और कैश लेकर अडानी समूह को निशाना बनाने के लिए संसद में सवाल पूछने के आरोप हैं। वहीं वकील जय अनंत देहाद्राई ने उन पर अपने कुत्ते ‘हेनरी’ के अपहरण का आरोप लगाया था, जिसे अब लौटा दिया गया है। महुआ मोइत्रा सोशल मीडिया पर लगातार मोदी सरकार पर हमलावर हैं।

‘X’ पर पश्चिम बंगाल के AITC के आईटी एवं सोशल मीडिया सेल के स्टेट जनरल सेक्रेटरी नीलांजन दास ने जय अनंत देहाद्राई के इस तस्वीर पर तंज कसा। उन्होंने अधिवक्ता की रोलेक्स घड़ी पहने हुए तस्वीरें शेयर की और लिखा, “आप रोलेक्स में भी अच्छे लगते हो। हीही, ये खुद खरीदा?” इस पर अधिवक्ता ने उन्हें जवाब देते हुए कहा, “क्या तुम्हें ये पसंद नहीं आया? ये एक शानदार रोलेक्स सबमैरीनर है। मैंने इसे अपनी आय से खरीदा है, जो मैंने केस लड़-लड़ कर कमाए हैं।”

उन्होंने आगे जवाब दिया कि इस घड़ी के साथ इसका क्रय बिल भी है। इससे पहले उन्होंने दावा किया था कि संसद में जो सवाल पूछे गए थे वह दुबई में तैयार हुए थे। इसी तरह प्रधानमंत्री मोदी को गाली देने वाला भाषण दिल्ली केनिंग लेन में लिखे गए थे। उन्होंने कहा था, “आदतन झूठी को पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि सवाल कैसे ‘मिस्‍ट्री टाइपिस्‍ट’ को भेजे गए। टेलीपैथी? सवाल दुबई में ‘बनाए’ गए। नरेंद्र मोदी के खिलाफ भाषण कैनिंग लेन में तैयार हुए। जब भूलने की बीमारी खत्म होगी, तो फर्नीचर और रोलेक्स को छोड़कर 2 करोड़ रुपए भी मिलेंगे।”

‘मैं वापस आ रहा हूँ, आमि KKR’ : गौतम गंभीर ने की कोलकाता नाईट राइडर्स में वापसी, ‘लखनऊ सुपर जायन्ट्स’ को कहा अलविदा

पूर्व भारतीय क्रिकेटर और भाजपा सांसद गौतम गंभीर ने आईपीएल की टीम लखनऊ सुपर जायन्ट्स से अलग होने का निर्णय लिया है। वह अपनी पुरानी टीम कोलकाता नाईट राइडर्स में वापस आ रहे हैं। वह अभी तक लखनऊ के कोच थे। इस विषय में उन्होंने एक्स (पहले ट्विटर) पर जानकारी दी है।

गौतम गंभीर वर्ष 2021 से ही लखनऊ सुपर जायन्ट्स के कोच थे। आईपीएल में लखनऊ फ्रैंचाइज़ी को वर्ष 2021 में आरपी संजीव गोएन ग्रुप ने खरीदा था और इसको आईपीएल में नई टीम के तौर पर शामिल किया गया था। बता दें कि गम्भीर इससे शुरुआत से ही जुड़े हुए हैं।

इससे पहले वह वर्ष 2011-2017 के बीच वह कोलकाता नाईट राइडर्स के कप्तान थे और उन्होंने टीम को 2012, 2014 सीजन में खिताबी जीत दिलाई थी। गंभीर ने 2017 में कोलकाता टीम छोड़ दी थी और दिल्ली डेयर डेविल्स में कप्तान बन गए थे। हालाँकि, 2018 में ही उन्होंने क्रिकेट से संन्यास ले लिया था।

गंभीर ने लखनऊ छोड़ने पर एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा है, “मेरी लखनऊ सुपर जायंट्स के साथ यात्रा समाप्त हो गई है। मुझे लखनऊ के ख‍िलाड़‍ियों, कोच, सपोर्ट स्टाफ और टीम से जुड़े प्रत्येक शख्स से सपोर्ट मिला। मैं डॉ संजीव गोयनका को थैंक्स कहना चाहूँगा। टीम के लिए शुभकामनाएँ।”

अब वह कोलकाता टीम के नए कोच बनेंगे जबकि लखनऊ ने ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कोच जस्टिन लैंगर को अपना कोच नियुक्त किया है। गंभीर ने कोलकाता में कोच के तौर पर लौटने पर कहा है, “मुझे बहुत ज्यादा चीजें भावुक नहीं करती लेकिन कोलकाता के साथ जुड़ना अलग बात है।”

आगे उन्होंने कहा, “मैं वहीं वापस आ गया हूँ जहाँ से शुरुआत हुई थी। आज मेरे दिल में एक अलग आग है क्योंकि मैं कोलकाता नाईट राइडर्स की जर्सी दोबारा पहनने वाला हूँ। मैं ना केवल कोलकाता नाईट राइडर्स में वापस आ रहा हूँ बल्कि ‘सिटी ऑफ़ जॉय’ के शहर कोलकाता वापस आ रहा हूँ। मैं वापस आ गया हूँ, मैं भूखा हूँ, मैं नम्बर 23 हूँ। मैं KKR हूँ।”

कोलकाता नाईट राइडर्स के मालिक शाहरुख खान ने गंभीर के टीम में वापस आने पर कहा है कि उनके ‘कप्तान’ अब ‘मेंटर’ के रूप में वापस आ रहे हैं। वह हमेशा से ही परिवार का हिस्सा रहे हैं। उनको हमेशा से ही मिस किया जा रहा था।

एक और शरणार्थी संकट से जूझेगा भारत, विद्रोह के बाद टूट की कगार पर म्यांमार! भाग-भाग कर भारत में शरण ले रहे फौजी, जानिए पड़ोसी देश में क्या चल रहा

हाल के कुछ दिनों से पड़ोसी देश म्यांमार से बड़ी संख्या में शरणार्थी भारत के पूर्वोत्तर राज्य मिज़ोरम में घुस रहे हैं। इन शरणार्थियों में बड़ी संख्या में म्यांमार के फौजियों की भी है। ये सभी लोग म्यांमार की सेना और विद्रोही समूहों के बीच जारी लड़ाई से बच कर भागे हैं। बीते एक माह से यह लड़ाई और भीषण हो गई है।

मिजोरम में बड़ी संख्या में शरणार्थी आने के कारण अब यह प्रश्न उठ रहा है कि क्या भारत एक और शरणार्थी संकट के मुहाने पर खड़ा है? म्यांमार में लड़ रहे विद्रोहियों के हाथ में देश का बड़ा हिस्सा सैन्य शासन से निकलकर उनके हाथों में आ चुका है। देश के राष्ट्रपति भी चिंता जता चुके हैं कि अगर समय रहते इन्हें नहीं रोका गया तो देश टूट सकता है।

क्यों म्यांमार में लड़ रहे हैं सेना और सशस्त्र समूह?

दरअसल, म्यांमार में वर्ष 2021 में सेना ने लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार का तख्तापलट कर दिया था। म्यांमार की सेना (Junta) तब से देश में शासन चला रही है। म्यांमार की सेना ने आंग सान सू की अगुवाई वाली सरकार को सत्ता से बाहर करके उस पर नियंत्रण कर लिया था।

म्यांमार में वैसे भी सैन्य शासन का पुराना इतिहास रहा है। साल 1962 से लेकर साल 2011 तक वहाँ सैन्य शासन में रहा है। म्यांमार में लोकतांत्रिक सुधारों की माँग आंग सान सू की लंबे समय से करती आ रही हैं। साल 2011 में उन्होंने सफलता भी पाई थी और देश में पहली बार आम चुनाव हुए थे।

चुनावों में आंग सान सू की पार्टी को जोरदार जीत मिली थी। इसके पश्चात 2010 और 2020 में भी उनकी पार्टी को जीत मिली थी। लोकतांत्रिक सरकार के कारण देश पर सेना की पकड़ ढीली होती जा रही है। इसके बाद सेना ने साल 2021 में सैन्य तख्तापलट करके लोकतांत्रिक सुधारों को रोक दिया। तब से वहाँ सैन्य शासन है।

जहाँ पहले सेना के शासन के विरुद्ध कोई बड़े आन्दोलन नहीं होते थे, वहीं 2021 के तख्तापलट के बाद स्थितियाँ बदल गई हैं। 2021 के तख्तापलट के बाद लोकतंत्र समर्थकों के एक धड़े ने सेना के विरुद्ध सशस्त्र विद्रोह कर दिया। हालाँकि, उन्हें शुरुआत में कोई विशेष सफलता नहीं मिली, लेकिन अब म्यांमार के बड़े हिस्सों को कब्जों में ले रहे हैं।

म्यांमार की सेना के खिलाफ चल रहे इस अभियान को लड़ाई में शामिल समूहों ने नेशनल यूनिटी गवर्मेंट का नाम दिया है। इसमें पीपल्स डिफेन्स फ़ोर्स, चिनलैंड डिफेंस फ़ोर्स, बर्मा कम्युनिस्ट पार्टी समेत अन्य कई लड़ाके समूह शामिल हैं। इनकी माँग है कि देश में सेना को सत्ता समेत अन्य कामकाज से बाहर किया जाए।

अब यह शरणार्थी संकट क्यों खड़ा हुआ?

वर्तमान शरणार्थी संकट के पीछे सेना और इन विरोधी समूहों की लड़ाई है। भारत की 1,600 किलोमीटर से अधिक लंबी सीमा म्यांमार से लगती है। वर्ष 2021 के तख्तापलट के बाद लगातार छोटी-छोटी संख्या में शरणार्थी भारत आ रहे थे।

अक्टूबर माह में म्यांमार में सैन्य शासन के विरुद्ध लड़ने वाले तीन सशस्त्र समूहों- तांग नेशनल लिबरेशन आर्मी, अराकान आर्मी और म्यांमार नेशनल डेमोक्रेटिक अलायन्स आर्मी ने ‘ऑपरेशन 1027’ नाम से एक अभियान चालू किया था। इन्होंने अपने गठबंधन का नाम ‘थ्री ब्रदरहुड अलायन्स’ रखा है।

तब से लगातार म्यांमार-चीन सीमा पर स्थित शान राज्य और भारत सीमा पर स्थित चिन (Chin) राज्य में विद्रोही समूहों ने बड़े हिस्सों पर कब्जा कर लिया है। इन्होंने सेना को भी बड़ा नुकसान पहुँचाया है। म्यांमार के इन विद्रोही समूहों ने शान राज्य में सेना की सैकड़ों पोस्ट पर हमला करके इन पर कब्ज़ा कर लिया है।

अलायन्स का कहना है कि उसने अब तक 150 मिलिट्री पोस्ट और 6 शहरों पर अपना कब्जा जमा लिया है। म्यांमार के सैनिक यहाँ से भाग रहे हैं। भाग ना पाने वाले सैनिक या तो मारे जा रहे हैं या फिर आत्मसमर्पण कर रहे हैं। एक जानकारी के अनुसार, अब तक 400 से अधिक सैनिक विद्रोही समूहों के समक्ष आत्मसमर्पण कर चुके हैं।

चिन राज्य में इन विद्रोही समूहों ने हाल ही में हमला करके 2 सैन्य पोस्ट पर कब्जा कर लिया था। इसके डर से बड़ी संख्या में सैनिक और आम नागरिक भाग कर भारत में घुस रहे हैं। इन्हें अभी शरणार्थी कैम्पों में रखा गया है। यहाँ इन्हें खाना-पानी दिया जा रहा है।

म्यांमार के कम-से-कम 26,000 लोग भारत में शरण माँग रहे हैं। 2021 में भी बड़ी संख्या में लोग म्यांमार से भागकर भारत आए थे, लेकिन स्थितियाँ थोड़ी सुधरने पर उन्हें वापस भेज दिया गया था। बड़ी संख्या में म्यांमार के नागरिकों का भारत में इलाज चल रहा है। यदि यह समस्या जल्द नहीं सुलझती है तो शरणार्थियों की संख्या बढ़ सकती है।

सरफराज खान ने मुक्के और पत्थरों से पीट-पीट कर ले ली 77 साल के बुजुर्ग की जान, गलत तरीके बाइक चलाने पर टोकने से भड़का, CCTV फुटेज से हुआ खुलासा

कर्नाटक के बेंगलुरु में एक 77 साल के बुजुर्ग को बाइक सवार सरफराज खान ने पीट-पीट कर मार डाला। दरअसल, बुजुर्ग की गलती इतनी थी कि सड़क पर गलत तरीके से वाहन चलाते दिखे एक बाइक सवार को उन्होंने टोक दिया था। इस बात की कीमत उन्हें अपनी अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बुजुर्ग की गलती महज इतनी थी कि उन्होंने पैलेस गुट्टाहल्ली इलाके के पास लापरवाही से गाड़ी चलाने के लिए एक मोटरसाइकिल सवार सरफराज खान को डाँट लगा दी थी। इससे गुस्साए सरफराज ने उन्हें पीट-पीट कर मार डाला। उन पर ये हमला तब हुआ जब वो अपनी डायबिटीज की दवाई खरीदने के लिए एक मेडिकल शॉप पर जा रहे थे। मृतक बुजुर्ग की पहचान मुनेश्वरा ब्लॉक निवासी कृष्णप्पा के तौर पर की गई।

ऐसे हुआ खुलासा

बता दें कि इस घटना का खुलासा 16 नवंबर, 2023 को पुलिस के सड़क दुर्घटना का केस दर्ज करने के बाद हुआ था। पुलिस ने यह मानते हुए कि केस दर्ज किया था कि ये बुजुर्ग बीती रात को मेडिकल शॉप जाते वक्त अपने स्कूटर से गिर गए। लेकिन इस बुजुर्ग की मौत का सच बाद में सामने आया। मृतक बुजुर्ग के बेटे सतीश कुमार को उनकी मौत को लेकर कुछ गड़बड़ी होने का शक था। इसी वजह से उन्होंने अपने घर के पास के सीसीटीवी फुटेज की जाँच की। जहाँ उनके पिता मरे मिले थे क्योंकि वो जगह उनके घर के पास ही थी।

जब उन्होंने ये फुटेज देखी तो वो हैरान रह गए। उन्होंने देखा कि एक शख्स उनके पिता के साथ बहस करते हुए उन पर हमला कर रहा था। इस सीसीटीवी फुटेज को आधार बना व्यालिकावल पुलिस ने 17 नवंबर, 2023 को हत्या का मामला दर्ज किया।

इसके बाद पुलिस ने इस इलाके के आगे के सीसीटीवी खंगाले और आरोपित की पहचान 35 साल के सरफराज खान के तौर पर की। वो एक वेल्डर और मैकेनिक है। वो पहले मृतक बुजुर्ग के इलाके में ही रहा करता था।

पुलिस के मुताबिक, मौजूदा वक्त में वो आरटी नगर इलाके में रहने लगा था। वो अक्सर अपने दोस्तों से मिलने और उनके साथ पार्टी करने के लिए पैलेस गुट्टाहल्ली आता रहता था। बुधवार 15 नवंबर की रात भी वह पैलेस गुट्टाहल्ली की तरफ जा रहा था।

इसी दौरान कृष्णप्पा करीब 8:30 बजे अपने स्कूटर से मेडिकल स्टोर के लिए निकले थे। पुलिस के मुताबिक, खान ने अपनी बाइक कृष्णप्पा के स्कूटर से टकरा दी। इससे उनका संतुलन लगभग बिगड़ गया और वो गिरने ही वाले थे।

इसे लेकर कृष्णप्पा ने गुस्से में खान से सही से बाइक चलाने को कहा। इससे भड़के खान ने कृष्णप्पा पर मुक्कों की बरसात करने के साथ ही उन पर पत्थरों से हमला कर दिया। पुलिस ने आगे बताया कि सरफराज खान के एक दोस्त रतन ने बुजुर्ग कृष्णप्पा पर हो रहे हमले को रोकने की कोशिश की थी, लेकिन वो इसमें कामयाब नहीं हुआ।

इस हमले की वजह से कृष्णप्पा सड़क पर गिर गए। इसके बाद आरोपित सरफराज और उसका दोस्त रतन दोनों वहाँ से चले गए। एक राहगीर ने पुलिस को सूचित किया और कृष्णप्पा को पास के अस्पताल में ले जाया गया। हालात नाजुक होने पर महावीर जैन अस्पताल ले जाया गया। जहाँ इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

यदि मृतक के बेटे सतीश कुमार ने सीसीटीवी फुटेज की दोबारा से जाँच नहीं की होती, तो खान शायद सजा से बच गया होता। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ”हम जल्द से जल्द खान के खिलाफ हत्या का मामला दाखिल करेंगे।”

‘₹1 करोड़ नहीं हजारों करोड़ जुर्माना लगाओ, मौत की सज़ा दे दो’: बोले स्वामी रामदेव – सुप्रीम कोर्ट का सम्मान, पर योग, आयुर्वेद और सनातन के खिलाफ काम कर रही फार्मा लॉबी

मीडिया में खबर चल रही है कि सुप्रीम कोर्ट ने योगगुरु बाबा रामदेव की कंपनी ‘पतंजलि’ को फटकार लगाई है और झूठा विज्ञापन प्रसारित न करने की सलाह दी है। अब बाबा रामदेव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के इस पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि मीडिया के हजारों साइट्स पर एक खबर को वायरल किया जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने ‘पतंजलि’ को फ़टकार लगाई कि झूठा प्रोपेगंडा करोगे तो करोड़ों रुपए का जुर्माना लगेगा। उन्होंने कहा कि हम देश के सुप्रीम कोर्ट, कानून एवं संविधान का सम्मान करते हैं।

लेकिन, साथ ही उन्होंने साफ़ किया कि झूठा प्रोपेगंडा या दुष्प्रचार हम नहीं कर रहे हैं, बल्कि डॉक्टरों के एक ऐसे गिरोह ने संस्था बना रखी है जो योग, आयुर्वेद, प्राकृतिक उपचार और सनातन सांस्कृतिक मूल्यों के खिलाफ प्रोपेगंडा फैलाती रहती है। उन्होंने कहा कि ये झूठा प्रोपेगंडा ये है कि सिंथेटिक वर्ल्ड में बीपी, शुगर, थायराइड, अस्थमा, अर्थराइटिस, लिवर-किडनी फेलियर का कोई समाधान नहीं है। उन्होंने इस दौरान 3 तथ्यों को गिनाया और अपनी बात को साबित करने का प्रयास किया।

बाबा रामदेव ने कहा कि हर दिन उनके पास सैकड़ों वास्तविक जीवन के साक्ष्य आते हैं, जिनमें से कुछ मरीजों को उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी बिठा रखा था। उन्होंने कहा कि ये सब बीपी, शुगर, अर्थराइटिस और मोटापे के मरीज हैं। उन्होंने बताया कि 8 दिन में हम लोगों का मोटापा 12-15 किलो तक कम कर देते हैं। बाबा रामदेव ने ये भी कहा कि ये साधारण सी बात है, सिंथेटिक वर्ल्ड में किसी चीज का इलाज नहीं है तो ये कहना कि प्राकृतिक उपचार व्यवस्था में जो हम इंटेग्रेटी एन्ड एविडेंस बेस्ड ट्रीटमेंट सिस्टम से जो लोगों का इलाज करते हैं ये झूठ नहीं सच है।

बाबा रामदेव ने कहा, “यदि हम झूठे हैं तो हम पर सैकड़ों नहीं बल्कि हजारों करोड़ रुपयों का जुर्माना लगाया जाए। और, हमें मौत की सज़ा भी दी जाए तो हमें स्वीकार है। हम झूठ नहीं बोल रहे हैं तो जो झूठा प्रोपेगंडा कर रहे हैं उन पर जुर्माना लगाया जाए, उन्हें दंड दिया जाए। क्योंकि, ये पिछले 5 वर्षों से बहुत ख़राब प्रोपेगंडा चल रहा है, जिसमें मुझे और ‘पतंजलि’ को निशाना बनाया जा रहा है। योग, आयुर्वेद और नेचुरोपैथी और चरक-धन्वन्तरि जैसे ऋषियों की प्राचीन परंपरा को झुठलाया जा रहा है।”

बाबा रामदेव ने कहा कि प्रोपेगंडा फैलाया जा रहा है कि योग और आयुर्वेद में कुछ भी नहीं रखा है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के जजों अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और प्रशांत कुमार मिश्रा ने ‘पतंजलि’ पर प्रति उत्पाद 1 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाने की चेतावनी दी थी। उन्होंने ‘पतंजलि’ के विज्ञापनों को ‘झूठा’ और ‘भ्रामक’ बताते हुए कहा कि ये सब तुरंत बंद होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी बीमारी को ठीक कर देने के झूठे दावे नहीं किए जाने चाहिए।

तेलंगाना में अब मुस्लिम JAC ने कॉन्ग्रेस को दिया समर्थन, विधानसभा चुनावों के लिए तहरीक मुस्लिम शब्बन और IUML पहले ही आ चुके हैं साथ

तेलंगाना में हो रहे विधानसभा चुनावों में मुस्लिमों ने मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर (KCR) की पार्टी BRS और ओवैसी की AIMIM को जोरदार झटका दिया है। अब तेलंगाना मुस्लिम संगठन संयुक्त कार्यसमिति (TSMOJAC) ने आगामी विधानसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस को समर्थन देने का ऐलान किया है। TSMOJAC को JAC भी कहा जाता है।

इससे पहले तहरीक मुस्लिम शब्बान और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) कॉन्ग्रेस को समर्थन दे चुके हैं। राज्य में चुनाव से पहले कॉन्ग्रेस को मुस्लिम संगठनों का बढ़ता जा रहा समर्थन, यहाँ चुनावी समीकरणोंं को पलट सकता है। TSMOJAC ने आरोप लगाया है कि बीते 10 सालों से बीआरएस और भाजपा के बीच आपसी राजनीतिक समझ की खिचड़ी पक रही है।

उसने बीआरएस पर मुस्लिमों को नजरअंदाज करने का आरोप भी लगाया और कहा कि बीआरएस सरकार ने जानबूझकर मुस्लिमों से किए गए वादों को नजरअंदाज किया है। JSMOJAC ने ये भी आरोप लगाया कि बीआरएस सरकार में उनके 12 फीसदी आरक्षण की भी अनदेखी की जा रही है।

JSMOJAC ने आगे कहा, “(एआई) एमआईएम पार्टी बीआरएस का समर्थन करने की वकालत करती है, जिसने मुस्लिम समुदाय से किए गए वादों को पूरा करने के बजाय भेदभावपूर्ण रवैये वाली भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के साथ राजनीतिक गठबंधन किया है।”

समिति ने कहा कि मुस्लिम समुदाय बीआरएस प्रशासन को उखाड़ फेंकने की कोशिश कर रहा है। उसने केसीआर सरकार पर भाजपा के राष्ट्र-विरोधी कानून का समर्थन करने का आरोप भी लगाया। ये सब देखते हुए जेएसी ने मंगलवार (21 नवंबर,2023) को एक प्रेस रिलीज जारी कर मुस्लिम मतदाताओं से कॉन्ग्रेस को वोट देने की अपील की है।

इसमें कहा गया है, “हमने तेलंगाना मुस्लिम संगठनों की राज्य समिति, जेएसी की तरफ से इस विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस पार्टी को अपना समर्थन देने का फैसला किया है। हम राज्य के सभी मुसलमानों से अनुरोध करते हैं कि वे इस एक बात पर एकजुट हों और मिलकर कॉन्ग्रेस को वोट दें और अपने वोट की ताकत दिखाएँ।”

TSMOJAC का मानना है कि कॉन्ग्रेस को समर्थन देने के बाद यदि राज्य में उसकी सरकार बनती है तो जेएसी के मुस्लिम घोषणापत्र की माँगों को लागू करवाने के लिए कॉन्ग्रेस पर दबाव बनाया जा सकता है।

जेएसी के राज्य संयोजक सैयद सलीम पाशा और सह-संयोजक शेख यूसुफ बाबा ने ये भी साफ कर दिया है कि साल 2024 के लोकसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस को समर्थन देने का फैसला राज्य में सत्ता में आने की स्थिति में मुस्लिम समुदाय को किए वादों को पूरा करने के प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा।

जेएसी नेताओं के मुताबिक, कॉन्ग्रेस पार्टी की अल्पसंख्यक घोषणा मसौदा समिति ने उनसे संपर्क साधा था। उनका यह भी दावा है कि जेएसी की घोषणा पत्र में शामिल आठ अहम माँगों को कॉन्ग्रेस ने अपनी अल्पसंख्यक घोषणा पत्र में शामिल किया है।

इस दौरान जेएसी के नेताओं ने ये भी खुलासा किया कि 11 नवंबर 2023 को जेएसी की राज्य समिति और जिला समितियों के प्रमुखों की एक बैठक हुई थी। इसमें पता चला कि अधिकतर लोगों का झुकाव कॉन्ग्रेस पार्टी की तरफ हैं। इसे देखते हुए कॉन्ग्रेस को समर्थन देने का फैसला किया गया।

बताते चलें कि तेलंगाना की कुल लगभग 3.52 करोड़ आबादी में 13 फीसदी मुस्लिम वोटर हैं। राज्य की 119 विधानसभा सीटों की लगभग 45 विधानसभा सीटों पर मुस्लिमों का खासा असर है। ऐसे में इन वोटों पर सभी राजनीतिक पार्टियों की नजर बनी हुई है।

गौरतलब है कि 30 नवंबर 2023 को इन सीटों पर मतदान होना है। इसके नतीजे 3 दिसंबर 2023 को आएँगे। इससे पहले इस चुनावी राज्य में बीजेपी, कॉन्ग्रेस, बीआरएस और AIMIM सभी पार्टियाँ वोटरों को लुभाने का भरसक प्रयास कर रही हैं।

कोई सरकारी डॉक्टर, कोई टीचर, कोई पुलिस… पर जुटाते थे आतंकियों के लिए पैसे: टेरर लिंक में जम्मू-कश्मीर के 4 कर्मचारी बर्खास्त

जम्मू कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत एक और बड़ी कार्रवाई की गई है। इस कार्रवाई के अंतर्गत 4 सरकारी कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। बर्खास्त हुए सरकारी कर्मचारियों में एक डॉक्टर, एक पुलिस का जवान, शिक्षक और उच्च शिक्षा विभाग में प्रयोगशाला बियरर शामिल हैं। इन सभी पर पाकिस्तानी एजेंडे को बढ़ावा देने और आतंकी गतिविधियों को समर्थन करने का आरोप है। राज्यपाल द्वारा यह आदेश मंगलवार (21 नवम्बर, 2023) को दिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बर्खास्त होने वाले कर्मचारियों के नाम फारुख अहमद मीर, डॉ निसार उल हसन, अब्दुल मजीद भट और अब्दुल सलाम राठोर है। बता दें कि इसमें से फारुख अहमद मीर शिक्षा विभाग में अध्यापक था। वह मूलतः कुपवाड़ा के उस्मानाबाद का रहने वाला है। बर्खास्त हुआ दूसरा स्टाफ निसार उल हसन बारामुला जिले का रहने वाला है। फ़िलहाल वह श्रीनगर के SMS अस्पताल के मेडिकल विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत था।

बर्खास्त हुआ तीसरा स्टाफ अब्दुल मजीद भट है जो मूल रूप से कुपवाड़ा जिले का निवासी है। अब्दुल मजीद जम्मू कश्मीर पुलिस में कांस्टेबल था। वहीं चौथे स्टाफ का नाम अब्दुल सलाम राठोर है। अब्दुल सलाम उच्च शिक्षा विभाग में लैब बियरर के पद पर नौकरी कर रहा था। अब्दुल सलाम राठोर मूल रूप से कुलगाम का रहने वाला है। इन सभी की सेवाएँ भारतीय संविधान के अनुच्छेद 11 के तहत समाप्त की गईं हैं। सभी आदेश तत्काल लागू करने के निर्देश हैं जिसकी जानकारी संबंधित विभागों को दे दी गई है।

बताया जा रहा है कि चारों स्टाफ पाकिस्तानी एजेंडे पर काम कर रहे थे। ये सभी कश्मीर में आतंकवाद को समर्थन कर रहे थे। इनके लिंक भी आतंकियों से जुड़े पाए गए जिनके लिए ये पैसे भी जुटा रहे थे। बताते चलें कि पिछले 3 वर्षों में सरकार ने देश विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे 50 से अधिक सरकारी कर्मचारियों व अधिकारियों को बर्खास्त किया है। इसी साल जून महीने में कश्मीर विश्वविद्यालय के एक जनसंपर्क अधिकारी, राजस्व विभाग के एक अधिकारी और एक पुलिस स्टाफ को पाकिस्तानी आतंकियों के लिए पैसे जुटाने के आरोपों के चलते बर्खास्त कर दिया गया था।

इससे पहले अक्टूबर 2022 में जम्मू कश्मीर सरकार ने 5 कर्मचारियों को आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में बर्खास्त कर दिया था। इन आरोपितों में से पुलिस कॉन्स्टेबल, चौकीदार, जल शक्ति विभाग, बैंक और ग्राम अधिकारी भी शामिल थे।

जिस पत्रकार के लिए झूठे थे पाकिस्तानी अधिकारी, अब वही बन गया Pak का ‘एजेंट’: कहा- भारत ने छोड़े मौत के दस्ते

जहाँ भारत में मीडिया का एक धड़ा लगातार देश को बदनाम करने में लगा रहता है, वहीं विदेशी मीडिया का एक बड़ा हिस्सा भी भारत को आगे बढ़ते हुए नहीं देखना चाहता। अब अमेरिकी NGO मीडिया संस्थान ‘The Intercept’ को ही ले लीजिए। इसमें एक लेख आया है, जिसमें दावा किया गया है कि गुप्त दस्तावेजों से पता चला है कि भारत के ‘डेथ स्क्वाड्स (मौत का दस्ता)’ की पहुँच अब वैश्विक हो गई है। इसमें कनाडा और पाकिस्तान के इस प्रोपेगंडा को आहे बढ़ाया जा रहा है कि विदेश में कई सिख एवं कश्मीरी ‘कार्यकर्ताओं’ को RAW मरवा रही है।

इस लेख को लिखा है मुर्तज़ा हुसैन और रयान ग्रीम ने। हास्यास्पद ये जानना है कि इसे किसके हवाले से लिखा गया है। इसे लिखा गया हैं ‘The Intercept’ को लीक हुए पाकिस्तानी ख़ुफ़िया रिपोर्ट के। इसमें पाकिस्तानी अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि वहाँ के स्थानीय अपराधियों और विद्रोही गुटों के साथ मिल कर भारत की ख़ुफ़िया एजेंसी RAW हत्याएँ करवा रही हैं। बता दें कि सितंबर 2023 में कनाडा सरकार ने भारत पर खालिस्तानी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आरोप लगा दिया था।

इसी तरह ‘The Intercept’ ने अमेरिका के खालिस्तानियों को भी ‘सिख कार्यकर्ता’ बताते हुए उनकी जान को ख़तरा बताया था। 1985 में एयर इंडिया फ्लाइट में बम धमाके के जिम्मेदार रिपुदमन सिंह मलिक की हत्या के लिए भी इस लेख में जिक्र किया गया है, जिसकी 75 वर्ष की आयु में 2022 में हत्या कर दी गई थी। साथ ही पाकिस्तान में लखबीर सिंह रोड समेत 2 खालिस्तानियों की हत्या की साजिश रचने का आरोप भी भारत पर लगाया गया है।

उसके कनैडियन बेटे भगत सिंह से बात कर के भी इस परिवार को भारत से ख़तरा होने की बात कही गई है। पाकिस्तान में अज्ञात लोगों द्वारा आतंकियों की हत्या के लिए भी मुर्तज़ा हुसैन के इस लेख में भारत को जिम्मेदार ठहराया गया है। बता दें कि ये वही मुर्तज़ा हुसैन है, जिसने कभी पाकिस्तानी अधिकारियों को झूठा बता चुका है। अपने ही मीडिया संस्थान का लेख शेयर करते हुए उसने लिखा था कि पाकिस्तानी अधिकारी आधा या चौथाई सच्चाई भी नहीं, बल्कि पूरा का पूरा ही झूठ बोलते हैं।

उस लेख में बताया गया था कि पाकिस्तान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री अनवार-उल-हक़ ने कहा है कि रूस-यूक्रेन युद्ध में वो किसी भी तरफ नहीं जाना चाहता, बल्कि न्यूट्रल रहना चाहता है। उन्होंने कहा था कि चीन को नियंत्रित करने की पश्चिमी देशों की कोशिशों के विरोध के लिए पाकिस्तान क्षमाप्रार्थी नहीं हैं। इसमें दावा किया गया था कि पाकिस्तान ने यूक्रेन को सैन्य साजोसामान दिया, जिसके बाद अमेरिका ने उसे IMF से 6 महीने का लोन दिलाया।

उत्तरकाशी रेस्क्यू ऑपरेशन पर PM मोदी की सीधी नजर, पीएमओ के पूर्व सलाहकार भी मौके पर: 41 मजदूरों के सुरंग से जल्द बाहर आने की उम्मीद

उत्तराखंड में स्थित उत्तरकाशी की सिलक्यारा सुरंग में फँसे 41 मजदूर जल्द ही बाहर आ सकते हैं। सुरंग के भीतर ड्रिलिंग का काम फिर से चालू हो गया है। ये मजदूर 12 नवम्बर 2023 से सुरंग के भीतर फँसे हुए हैं। हाल ही में एक अन्य पाइप और कैमरे को मजदूरों तक पहुँचने पर उनके जल्द निकलने की उम्मीद जगी थी।

दरअसल, ये मजदूर 12 नवम्बर 2023 की सुबह सुरंग में अचानक मलबा आ जाने के कारण सभी इसके अंदर फँस गएृ। इसके बाद से इन्हें रेस्क्यू करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इस रेस्क्यू में NDRF, SDRF, राज्य प्रशासन, BRO और अंतरराष्ट्रीय एक्सपर्ट भी लगे हुए हैं। सबसे पहले मलबा हटाने की कोशिश की गई थी, लेकिन लगातार नया मलबा आ जाता था।

इसके पश्चात ऑगर मशीनें लगाकर 3 फीट की व्यास वाली पाइप के जरिए मजदूरों को निकालने का प्रयास किया गया था। इन पाइप को मलबे के बीच से गुजार कर मजदूरों तक पहुँचाने का प्लान बनाया गया था। इसके लिए पाइप को वायुसेना ने उत्तरकाशी तक पहुँचाया भी है। इस मामले पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रधानमंत्री मोदी लगातार नजर बनाए हुए हैं।

पाइप को अंदर धकेलने के लिए अमेरिकी ऑगर मशीनों का सहारा लिया जा रहा है। हालाँकि, मशीनों में खराबी आने और अन्दर से पहाड़ के दरकने की आवाजों के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन को रोकना पड़ा था। इसके अतिरिक्त, मशीनों से डाले जाने वाले पाइप में दूसरा पाइप जोड़ने के लिए वेल्डिंग भी करनी पड़ती है, जिसे ठंडा किया जाता है। इसमें भी समय लगता है।

हालाँकि, घटनास्थल पर बीते दो दिनों में काफी अच्छी प्रगति हुई है। सबसे पहले मजदूरों तक 6 इंच व्यास वाला पाइप पहुँचाया गया, जिसके माध्यम से खाना-पानी और फिर कैमरा भेजा गया। इसके जरिए मजदूरों से लाइव कॉनट्रैक्ट भी किया गया है। इन मजदूरों को इस पाइप के माध्यम से कपड़े और माइक्रोफोन भेजे गए।

पाइप अन्दर भेजने में काफी अच्छी प्रगति हो रही है। कुल 60 मीटर का इलाका ऐसा है, जिसमें मलबा आया है, अभी तक इसमें से 39 मीटर तक पाइप भेजा जा चुका है। 20-25 मीटर और पाइप डालने के बाद मजदूर बाहर आ सकेंगे। उत्तरकाशी के पुलिस अधीक्षक का कहना है कि कल से काफी अच्छी प्रगति हो रही है।

सुरंग के बाहर उत्तराखंड सरकार ने लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस भी भेज दी है। मजदूरों के बाहर आने के तुरंत बाद ये एम्बुलेंस उन्हें लेकर मेडिकल चेकअप के लिए लेकर जाएगी।

सुरंग से मजदूरों को निकालने के लिए बाक़ी रास्तों पर भी काम चालू हो गया है। सुरंग के दूसरे मुहाने बड़कोट की तरफ से भी खुदाई चालू हो गई है।

सुरंग में ऊपर की तरफ से वर्टिकल ड्रिलिंग का भी काम चालू हो गया है। घटनास्थल पर पीएमओ में पूर्व ऑफिसर भाष्कर खुलबे, पीएमओ में अफसर मनोज घिल्डियाल, अंतरराष्ट्रीय सुरंग एक्सपर्ट अर्नाल्ड डिक्स और अन्य अधिकारी मौजूद हैं।

‘मैं दाऊद गैंग से हूँ, पीएम मोदी और सीएम योगी को मारना है’: मुंबई पुलिस ने कामरान आमिर खान को गिरफ्तार किया

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में पुलिस को फोन पर एक हॉस्पिटल को उड़ाने और राजनीतिक हत्या करने की धमकी दी गई है। एक अज्ञात कॉलर ने मंगलवार (21 नवम्बर 2023) को खुद को दाऊद इब्राहिम गैंग का मेंबर बताते हुए मुंबई पुलिस को कॉल किया। कॉलर ने कहा कि गुजरात की एक महिला और एक कश्मीरी युवक के साथ मिलकर वह बड़े कांड को अंजाम देने की तैयारी में है।

पुलिस ने सर्विलांस की मदद से कॉलर को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान 29 वर्षीय कामरान आमिर खान के रूप में हुई है। पूछताछ में उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की हत्या की साजिश रचे जाने की जानकारी दी है। उसने बताया कि इसके लिए उसे दाऊद इब्राहिम की गैंग से निर्देश मिले हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंगलवार को रात में मुंबई पुलिस के कंट्रोल रूम में एक अज्ञात युवक की कॉल आई। कॉलर ने अपनी पहचान बताए बिना जल्द ही मुंबई में बहुत बड़ी घटना को अंजाम देने की बात कही। उसने पुलिस को बताया कि सना नाम की गुजरात की रहने वाली एक महिला कश्मीर के निवासी आसिफ नाम के व्यक्ति के सम्पर्क में है।

कॉलर ने बताया कि ये दोनों मिलकर मुंबई में कोई बड़ा कांड करने वाले हैं। इस दौरान कॉलर ने समा और आसिफ का मोबाइल नंबर भी पुलिस को नोट करवाया है। कांड के तौर पर आरोपित ने मुंबई के जेजे हॉस्पिटल को निशाना बनाने की भी धमकी दी। कॉलर ने खुद को दाउद इब्राहिम गैंग का बताया और अंत में फोन काट दिया। इसके बाद पुलिस ने उसके फोन को सर्विलांस पर लगा दिया।

फोन के आधार पर पुलिस ने कॉलर कामरान आमिर खान को गिरफ्तार कर लिया। कामरान मुंबई के सायन इलाके का रहने वाला है। उसने वह खुद के दाऊद इब्राहिम गैंग से जुड़े होने की बात पर अड़ा रहा। उसने बताया कि उसको दाऊद गैंग से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की हत्या करने की साजिश रचने के लिए निर्देश मिले हैं।

पुलिस सूत्रों के आधार पर कामरान को मानसिक तौर पर अस्वस्थ बताया गया है और हॉस्पिटल में दिखाने के दौरान भीड़ से परेशान होकर उसने पुलिस को कॉल करक दिया था।। पुलिस ने आरोपित पर IPC की धारा 505 (2) के तहत कार्रवाई की है। आरोपित पहले भी फर्जी कॉल करने के मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है। न्यूज़ 18 की रिपोर्ट में गिरफ्तार आरोपित का नाम शोएब बताया गया है।