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अयोध्या राम मंदिर के लिए चाहिए 20 पुजारी, आए 3000 आवेदन: 200 का चल रहा इंटरव्यू, पूजा पद्धति भी बदलेगी

अयोध्या में 22 जनवरी को रामलला अपने भव्य मंदिर में विराजमान हो जाएँगे। इसी बीच रामलला के इस भव्य मंदिर में पुजारी बनने के लिए करीब 3 हजार उम्मीदवारों ने आवेदन किया था जिनमें से करीब 200 उम्मीदवारों को पुजारी पद के लिए इंटरव्यू में बुलाया गया है। बता दे कि इन चयनित हुए 200 उम्मीदवारों में से इंटरव्यू के द्वारा 20 उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा जिन्हें 6 महीने की ट्रेनिंग दी जाएगी।

श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने सोमवार (21 नवंबर, 2023) को बताया कि तीन सदस्यीय पैनल इन 200 चयनित अभ्यर्थियों से अयोध्या स्थित विश्व हिन्दू परिषद के मुख्यालय कारसेवक पुरम में साक्षात्कार कर रहा है। उनके अनुसार पैनल में वृंदावन के प्रसिद्ध हिंदू उपदेशक जयकांत मिश्रा और अयोध्या के दो महंत मिथिलेश नंदिनी शरण और सत्यनारायण दास शामिल हैं। 

कोषाध्यक्ष ने बताया कि उम्मीदवारों से इंटरव्यू के दौरान अभ्यर्थियों से संध्या वंदन क्या है, इसकी विधि क्या है और इस पूजा के मंत्र क्या हैं? भगवान राम की पूजा के लिए कौन-कौन से ‘मंत्र’ हैं और इसके लिए ‘कर्म कांड’ क्या हैं, इत्यादि सवाल पूछे जा रहे हैं?

जिनका चयन नहीं हुआ वे उम्मीदवार भी ले सकते हैं ट्रेनिंग 

ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने बताया कि इंटरव्यू में शामिल 200 उम्मीदवारों में से 20 योग्य उम्मीदवारों को चुना जाएगा जिन्हें 6 महीने की ट्रेनिंग के बाद राम मंदिर के पुजारी के रूप में नियुक्त किया जाएगा। साथ ही उन्हें अलग-अलग विभिन्न पदों पर भी तैनात किया जाएगा।

गोविंद देव गिरि के मुताबिक, जिन्हें ट्रस्ट द्वारा चयनित नहीं किया गया है वे भी 6 महीने की ट्रेनिंग में भाग ले सकते हैं। ट्रेनिंग के पश्चात उन्हें प्रमाण पत्र भी दिए जाएँगे। हालाँकि, इन उम्मीदवारों को वर्तमान में नहीं तो उसके बाद भविष्य में रामलला के मंदिर में पुजारी बनने के लिए अवसर दिया जाएगा।

बता दें कि उम्मीदवारों को दिए जाने वाली ट्रेनिंग शीर्ष संतों के द्वारा तैयार धार्मिक पाठ्यक्रम पर आधारित होगी। इस दौरान उम्मीदवारों को फ्री में आवास और भोजन मिलेगा इसके साथ ही इन्हें 2,000 रुपए का भत्ता भी प्रदान किया जाएगा। 

रामानंदीय संप्रदाय के अनुसार होगी रामलला की पूजा 

गौरतलब है कि रामलला के मंदिर में पूजा की पद्धति मौजूदा पद्धति से बिल्कुल भिन्न होगी। यहाँ पूजा पद्धति रामानंदीय संप्रदाय के मुताबिक होगी। इसके लिए विशेष अर्चक होंगे।

बता दें कि अयोध्या की अन्य मंदिरों की तरह पंचोपचार विधि (सामान्य तरीके) से राम जन्मभूमि परिसर में स्थित अस्थाई मंदिर में अबतक पूजा होती थी जिसमें भगवान को नए वस्त्र धारण कराना, भोग लगाना, आरती और फिर सामान्य रूप से पूजन पद्धति शामिल है लेकिन रामलला के इस भव्य मंदिर में उनकी प्राण प्रतिष्ठा के बाद सबकुछ बदल जाएगा। मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के बाद रामानंदीय परंपरा के मुताबिक यहाँ के मुख्य पुजारी, सहायक पुजारी और सेवादार रामलला की पूजा आराधना करेंगे। 

भारत में मस्जिदें बनाने के लिए विदेशी फंडिंग, महानगरों में रोहिंग्या मुस्लिमों को बसाने की साजिश: देवबंद से जुड़े आतंकियों के तार, यूपी ATS ने सेंट-टोपी वाले को पकड़ा

उत्तर प्रदेश पुलिस की आतंकवाद निरोधक शाखा (ATS) ने 11 अक्टूबर, 2023 को 10 संदिग्ध आतंकियों के खिलाफ FIR दर्ज करवाई थी। इनके नाम आदिल उर रहमान अशरफी, अबू हुरैरा गाज़ी, शेख नज़ीबुल हक, मोहम्मद राशिद, कफीलुद्दीन, अज़ीम, अब्दुल अव्वल, अबु सालेह, अब्दुल गफ्फार और अब्दुल्ला गाजी हैं। इन सभी पर विदेशों से अवैध तौर पर पैसे मँगवा कर भारत में मस्जिदें बनवाने, रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों को भारत में अवैध तौर पर बसाने और देश विरोधी गतिविधियाँ चलाने का आरोप है।

इस पूरे मामले में खास बात ये है कि यूपी ATS द्वारा गिरफ्तार अधिकतर साजिशकर्ता देवबंद के दारुल उलूम से जुड़े पाए गए। इन 10 आरोपितों में दिल्ली निवासी अब्दुल अव्वल अवैध तरीके से उत्तर प्रदेश, दिल्ली और असम के निवासियों के कागजात को हासिल कर के बैंक खाते खुलवाता है। बाद में वो खाते दिल्ली के ही अब्दुल गफ्फार को सौंप देता है। गफ्फार इन खातों में विदेशों से पैसे मँगवाता है। ये पैसे मँगवाने में अबु सालेह भी गफ्फार की मदद करता है।

विदेशों और देश के कई अन्य हिस्सों में मँगवाया गया ये धन हवाला के जरिए नजीबुल शेख तक पहुँचाया जाता था। नजीबुल शेख की सहारनपुर में दारुल उलूम देवबंद के पास टोपी और परफ्यूम की दुकान हैं।

बंगाल का नजीबुल, दारुल उलूम के सामने सेंट-टोपी की दुकान

ATS के मुताबिक, मूल रूप से पश्चिम बंगाल और अस्थाई तौर पर देवबंद में रह रहे नजीबुल ने बांग्लादेशी अतीक उर रहमान को अपने सहयोगी के रूप में रखा हुआ था। अतीक उर रहमान ने फर्जी कागजात से भारत का आधार व पैन कार्ड आदि बनवा रखा था। ये सभी एक गैंग के तौर पर काम कर रहे थे जो बांग्लादेशियों व रोहिंग्या नागरिकों को भारत में घुसपैठ करवाते थे और उनके भारतीय कागजात बनवाया करते थे। इन बांग्लादेशियों को दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और पूर्वोत्तर भारत के अलग-अलग हिस्सों में बसाया जा रहा था।

11 अक्टूबर, 2023 को ATS को मुखबिर से सूचना मिली कि इस नेटवर्क से जुड़े कुछ संदिग्ध लखनऊ के चारबाग स्टेशन पर मौजूद हैं। ATS ने दबिश दे कर आदिलुर रहमान अशर्फी को दबोच लिया। इधर इसी दिन ATS की सहारनपुर यूनिट ने अबू हुरैरा और नजीबुल शेख को दबोच लिया। इन सभी से ATS मुख्यालय लखनऊ ला कर पूछताछ की गई। नजीबुल ने खुद को पश्चिम बंगाल का निवासी बताया जो फिलहाल देवबंद में दारुल उलूम के सामने परफ्यूम और टोपी की दुकान चला रहा था।

पूछताछ में नजीबुल ने कबूल किया कि उसे हवाला से पैसे मिलते थे। वहीं आदिलुर रहमान ने अपना असल नाम आदिल अहमद अशरफी बताया जो मूलतः बांग्लादेश का रहने वाला है। फर्जी कागजात से भारतीय बना आदिल अहमद फ़िलहाल देवबंद दारुल उलूम में पढ़ाई कर रहा था। इस नेटवर्क ने हाल में ही एक बांग्लादेशी महिला को अवैध तौर पर बॉर्डर पार करवा कर किसी इब्राहिम नाम के भारतीय पुरुष को 70,000 रुपए में बेच दिया था। महिला को बरामद करने के बाद इब्राहिम सहित गिरफ्तार कर लिया गया है, उसके कागजात फर्जी पाए गए हैं। पश्चिम बंगाल के रहने वाले वाले तीसरे आरोपित अबू हुरैरा ने बताया कि वो फिलहाल दारुल उलूम में देवबंद की छत्ता मस्जिद में रहता था।

UP ATS ने इन सभी से इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल उपकरण, मोबाइल, ATM कार्ड, संयुक्त अरब अमीरात की मुद्रा, भारतीय कैश, सिमकार्ड, आधार कार्ड, मदरसे का कार्ड, पैन कार्ड और पासपोर्ट बरामद किया। इन सभी आरोपितों पर IPC की धारा 120- बी, 419, 420, 467, 468, 471, 370 और विदेशी अधिनियम 1946 की धारा 14 के तहत कार्रवाई की है। इसमें से 3 आरोपित गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इनके नाम आदिल उर रहमान, नजीबुल शेख और हुरैरा गाज़ी हैं। बाकी सभी फरार चल रहे हैं। फिलहाल इस केस की विवेचना ATS के मेरठ यूनिट प्रभारी इंस्पेक्टर धर्मेंद्र यादव कर रहे हैं। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

ऑपइंडिया को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, विदेशी पैसों से मस्जिदों का निर्माण पहले चरण में पाकिस्तान सीमा से लगे पंजाब और बांग्लादेश बॉर्डर के पास पश्चिम बंगाल में होना था। हालाँकि, ATS फिलहाल इस आतंकी नेटवर्क की जड़ और इसके आर्थिक स्रोतों का पता लगाने में जुटी हुई है। साथ ही अभी इन मस्जिदों के निर्माण का मकसद भी सामने आना बाकी है।

दारुल उलूम में लगातार की जा रही थी बांग्लादेशी घुसपैठियों की मदद

उत्तर प्रदेश ATS की जाँच में आदिल उर रहमान अशरफी के पास से दारुल उलूम देवबंद का पहचान पत्र मिला था। वह मूलतः बांग्लादेश का रहने वाला बताया गया। हालाँकि, बाद में दारुल उलूम ने आदिल उर रहमान को अपना छात्र मानने से इनकार कर दिया था। यद्यपि ऑपइंडिया को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, आदिल उर रहमान अक्सर देवबंद के अंदर आया-जाया करता था। वह यहाँ कई बार नमाज़ पढ़ते और पढ़ाते हुए भी देखा गया था।

इसी केस में पकड़ा गया एक अन्य आरोपित भी देश विरोधी कृत्यों में शामिल था। वो खुद को गाज़ी बताता था। उसका नाम अबू हुरैरा है जो भले ही पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले का रहने वाला था लेकिन फिलहाल वो दारुल उलूम देवबंद की छत्ता मस्जिद में रहता था। बांग्लादेशी घुसपैठियों का पैसा अपने खाते में मँगवाने वाला पश्चिम बंगाल में 24 परगना निवासी शेख नजीबुल दारुल उलूम देवबंद के सामने ही लम्बे समय से परफ्यूम और टोपी बेचने की दुकान चला रहा था।

इस से पहले 19 जुलाई, 2023 को UP ATS ने एक अन्य FIR दर्ज की थी। तब ATS ने हबीबुल्लाह मिस्बाह और अहमदुल्लाह को गिरफ्तार किया था। हबीबुल्लाह मूल रूप से बांग्लादेश के दिनाजपुर का रहने वाला निकला था जिसके पास दारुल उलूम देवबंद का परिचय पत्र बरामद हुआ था। वह दारुल उलूम देवबंद के पास रुखसाना बिल्डिंग में रहता था। हबीबुल्लाह कुछ समय तक आदिल उर रहमान का रूम पार्टनर भी रह चुका है। इन अवैध घुसपैठियों ने भी फर्जी तरीके से भारतीय पहचान पत्र बनवा रखे थे।

इन सभी के अलावा ATS ने 28 अप्रैल 2022 को भी एक FIR दर्ज करवाई थी। तब तलहा तालुकदार बिन फारुख नाम के आतंकी को गिरफ्तार किया गया था। तलहा मूलतः बांग्लादेश का रहने वाला था जो फर्जी कागजातों से भारतीय बन कर दारुल उलूम देवबंद की बिल्डिंग दर ए जदीद के कमरा नंबर 61 में रहता था। ATS को तलहा तालुकदार के पास से दारुल उलूम देवबंद के वजीफे की रसीद भी बरामद हुई थी। पूछताछ में तलहा तालुकदार ने कबूल किया था कि उसके साथ सलाउद्दीन सालिम और इफ्तकार नाम के 2 अन्य बांग्लादेशी भी अवैध तौर पर दारुल उलूम में रह कर अरबी पढ़ रहे थे।

‘मुझे और मेरी बेटी को लात-घूँसों से पीटा’: गौतम सिंघानिया पर बीवी ने लगाए हिंसा के आरोप, बताया- कैसे अंबानी परिवार ने बचाई जान

रेमंड (Raymond) के मालिक गौतम सिंघानिया पर उनकी पत्नी नवाज मोदी ने हिंसा के आरोप लगाए हैं। पिछले दिनों सिंघानिया ने पत्नी से अलग होने की जानकारी दी थी। नवाज के अनुसार गौतम ने उन्हें और उनकी नाबालिग बेटी को करीब 15 मिनट तक पीटा था। लात और घूँसों से मारा था। नवाज ने यह भी बताया है कि अंबानी परिवार ने उनकी जान बचाई थी।

हाल में एक वीडियो भी वायरल हुआ था जिसमें दीपावली के दिन सिंघानिया ने अपनी पत्नी नवाज मोदी को घर के अंदर नहीं घुसने दिया था। अब इंडिया टुडे से बातचीत में नवाज ने उस घटनाक्रम के बारे में बताया है जब गौतम सिंघानिया ने उनकी और बेटी की पिटाई की थी। नवाज के अनुसार यह घटना 10 सितंबर की है। गौतम के जन्‍मदिन की पार्टी चल रही थी और सुबह के 5 बज चुके थे।

उन्होंने कहा, “मैं और मेरी दोनों बेटियाँ भी कुछ दोस्‍तों के साथ मौजूद थीं। उसने अचानक से हमला कर दिया और वहाँ से गायब हो गया। मैं केवल कल्‍पना कर सकती थीं कि वह बंदूकें या कोई हथियार लेने गया है।” नवाज ने बताया कि वह अपनी बेटी को खींचकर दूसरे कमरे में ले गईं और फिर उसकी पीठ को सहारा देने के लिए तौलिया लेने चली गईं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नवाज ने पुलिस को कॉल किया। आरोप है कि गौतम सिंघानिया ने पुलिस को घर में आने से रोक दिया। वह अपनी बीवी को धमकियाँ देते हुए पुलिस को अपनी जेब में रखने की बात बता रहे थे।

नवाज के अनुसार इस मामले में अंबानी परिवार ने उनकी मदद की। नीता और अनंत ने उनलोगों की जान बचाई। पुलिस कार्रवाई में मदद की। नवाज मोदी ने भगवान का धन्यवाद करते हुए कहा कि संयोग से उस समय नीता और अनंत अंबानी फोन लाइन पर थे। नीता अंबानी के ही दबाव में पुलिस गौतम सिंघानिया के कई बार रोकने के बावजूद घर में घुसी और नवाज मोदी व उनकी बेटी निहारिका को बचा कर बाहर लाई। कथित तौर पर पुलिस गौतम सिंघानिया पर FIR दर्ज करने से भी कतरा रही थी, लेकिन नीता अंबानी के दबाव में FIR दर्ज करनी पड़ी थी।

नवाज़ मोदी के इन आरोपों पर अभी तक गौतम सिंघानिया की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। उन्होंने अपनी 2 बेटियों की फ़िक्र करते हुए अपनी प्राइवेसी का सम्मान करने की दुहाई दी है। बताते चलें कि नवाज मोदी ने तलाक के बदले अपने पति गौतम सिंघानिया की सम्पत्ति में 75% हिस्सेदारी की माँग की है। दोनों पति-पत्नी के तौर पर 32 वर्षों तक एक साथ रहे।

कुछ वर्षों पहले ही गौतम सिंघानिया का उनके पिता विजयपत सिंघानिया के साथ विवाद सामने आया था। 2015 में उन्होंने कंपनी समूह का स्वामित्व अपने बेटे गौतम को सौंप दिया, लेकिन 36 मंजिला JK टॉवर में रहने के लिए उन्हें एक अदद घर तक नहीं मिला। दोनों का विवाद अदालत तक गया। उन्हें कंपनी में पद से भी हटा दिया गया।

स्कूलों में हो सकती है रामायण-महाभारत की पढ़ाई, NCERT पैनल का सुझाव- इतिहास की किताब में शामिल करें

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद यानी NCERT के पैनल ने स्कूलों में बच्चों को रामायण और महाभारत महाकाव्यों को पढ़ाने की सिफारिश की है। अगर इस हाई लेवल पैनल की सोशल साइंस कमेटी की तरफ से दी गई इन सिफारिशों पर मुहर लगती है तो वह दिन दूर नहीं जब बच्चे घरों में ही नहीं बल्कि स्कूली किताबों में भी मर्यादा पुरोषत्तम श्रीराम और गीता के ज्ञान के बारे में पढ़ पाएँगे।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इन दो महाकाव्यों को स्कूली किताबों में इतिहास के पाठ्यक्रम में भारत के शास्त्रीय काल के तहत रखे जाने की संभावना है। हालाँकि, अभी ये तय नहीं किया गया है कि रामायण-महाभारत किस क्लास के किस चैप्टर में पढ़ाए जाने है। पैनल अध्यक्ष और इतिहासकार रिटायर्ड प्रोफेसर सीआई आईजैक के मुताबिक, पैनल ने यह प्रस्ताव भी रखा कि स्कूल की हर क्लास में दीवार पर संविधान की प्रस्तावना भी लिखी जाए। इसके साथ ही यह प्रस्तावना क्षेत्रीय भाषा में होनी चाहिए।

उन्होंने आगे कहा, “पैनल ने इतिहास के पाठयक्रम को चार कालों शास्त्रीय काल, मध्यकालीन काल, ब्रिटिश काल और आधुनिक भारत में बाँट कर पढ़ाने की सिफारिश की है। अभी, भारतीय इतिहास को स्कूली किताबों में तीन कालों प्राचीन, मध्यकालीन और आधुनिक के तहत पढ़ाया जाता है।”

पैनल ने यह भी प्रस्ताव दिया है कि पाठ्यपुस्तकों में केवल एक या दो के बजाय भारत पर शासन करने वाले सभी राजवंशों को जगह दी जानी चाहिए। पैनल की सिफारिश पर अब 19 सदस्यीय राष्ट्रीय पाठ्यक्रम और शिक्षण सामग्री समिति विचार करेगी। इस समिति को पाठ्यक्रम, पाठ्यपुस्तकों और शिक्षण सामग्री को आखिरी रूप देने के लिए जुलाई में अधिसूचित किया गया था।

बताते चलें कि पैनल की ये सिफ़ारिशें सामाजिक विज्ञान के लिए तैयार की गई हैं। इन्हें बस अब एनसीईआरटी की मंजूरी मिलनी बाकी है। NCERT ने बीते साल स्कूलों में सामाजिक विज्ञान पाठ्यक्रम को संशोधित करने के लिए सात सदस्यों का ये पैनल बनाया था। इस पैनल ने स्कूली किताबों के जरिए छात्रों को वेदों और आयुर्वेद के ज्ञान देने लिए एक भारतीय ज्ञान प्रणाली बनाने का भी सुझाव दिया था, ताकि बच्चों को इस बारे में सही जानकारी मिल पाए।

यही नहीं कमेटी ने ये भी सिफारिश की है कि स्कूली किताबों में इंडिया की जगह भारत लिखा जाए। पैनल के ये सुझाव NCERT की नई टेक्स्ट बुक तैयार करने में मददगार साबित होंगे। बीते महीने अक्टूबर में ही NCERT ने कहा था कि सिलेबस को नए तरीके से तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है।

हिंदू बन महिला से की शादी, फिर इस्लाम कबूलने का बनाने लगा दबाव: पीड़िता का दावा- पहले भी हिंदू महिला को मुस्लिम बना चुका है नावेद

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से लव जिहाद का एक मामला सामने आया है। यहाँ एक हिन्दू महिला ने नावेद उर्फ रिक्की नाम के व्यक्ति पर मज़हब छिपाकर उससे संबंध बनाने और फिर मजबूर करके शादी करने का आरोप लगाया है। शिकायत में पीड़िता ने रिक्की की अम्मी और भाई पर धर्मांतरण के लिए दबाव बनाने और प्रताड़ित करने की बात कही है। पुलिस ने केस दर्ज कर के सोमवार (20 नवंबर 2023) को आरोपित को गिरफ्तार कर लिया।

महिला ने आरोप लगाया है कि उसका मतांतरण कराने के लिए एक मौलवी को भी बुलवाया गया था। आरोपित रिक्की उर्फ़ नावेद इस से पहले भी एक हिन्दू लड़की का धर्मांतरण करके उससे निकाह कर चुका है। इसके बाद नावेद ने उसे धर्मांतरित हिंदू महिला को तलाक दे दिया है। नावेद पर 2 बच्चों का खतना करवाने और उनमें से 1 को जबरन अपने पास रखने का भी आरोप है।

मामला गाजियाबाद के शालीमार गार्डेन थाना क्षेत्र का है। 20 नवम्बर को थाने में दी गई शिकायत में हिन्दू महिला ने बताया कि साल 2015 में उसकी मुलाकात रिक्की से हुई थी। रिक्की दिल्ली के वजीराबाद का रहने वाला है। रिक्की ने खुद को हिन्दू बताया था। उसके बाद 10 जुलाई 2015 में दोनों ने शादी कर ली। शादी के बाद पीड़िता 2 बच्चों की माँ बनी। इस बीच उसे रिक्की के मुस्लिम और असली नाम नावेद होने की जानकारी मिली।

ऑपइंडिया के पास मौजूद शिकायत की कॉपी के अनुसार, पीड़िता ने बताया कि रिक्की की पहले भी एक बीवी थी, जिससे उसने तलाक ले लिया है। उसने मज़हब और तलाकशुदा होने की बात छिपाने को ले कर रिक्की से विरोध भी दर्ज करवाया था। हालाँकि, पीड़िता के विरोध का रिक्की पर कोई फर्क नहीं पड़ा। वो अपनी अम्मी गुलनाज और भाई जावेद के साथ मिल कर पीड़िता को दहेज़ लाने के लिए प्रताड़ित करने लगा।

शिकायत में कहा गया है कि कुछ दिन बीत जाने पर रिक्की ने एक मौलवी को बुलवाया और पीड़िता पर इस्लाम कबूल करने का दबाव बनाया। नावेद ने पीड़िता का नाम नाज़िया रख दिया और उसे उसी नाम से बुलाने लगे। पीड़िता का कहना है कि मुस्लिम ना बनने पर नावेद ने उसे को जान से मारने की धमकी भी दी गई। इसके साथ ही उसकी माँ का गला काटने की भी धमकी दी।

रिक्की और उसके घर वालों की प्रताड़ना से दुखी हो कर पीड़िता गाजियाबाद स्थित अपने मायके में आ कर रहने लगी। आरोप है कि 2 नवंबर 2023 को रिक्की अपने कुछ साथियों के साथ पीड़िता के मायके में आ धमका। यहाँ रिक्की ने अपनी सास का गला काटने की कोशिश की। बाद में वो धमकी देते हुए साथियों संग फरार हो गया। 19 नवंबर (रविवार) को रिक्की फिर से पीड़िता के मायके पहुँचा। यहाँ उसने पीड़िता से मारपीट की। चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग जुटे और रिक्की को पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया।

20 नवंबर को पीड़िता की तहरीर पर पुलिस ने नावेद उर्फ़ रिक्की के खिलाफ IPC की धारा 419, 420, 498- A, 323, 504 और 506 के साथ दहेज़ प्रतिषेध अधिनियम 1961 की धारा 3/4 के साथ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म सम्परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021 की धारा 3/5(1) के तहत केस दर्ज कर लिया। इस मामले में नावेद के साथ उसकी अम्मी गुलनाज और जावेद को नामजद करते हुए 2 अन्य अज्ञात पर कार्रवाई की है। नावेद को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले में आगे की जाँच और कार्रवाई की जा रही है।

जिसे तलाक दिया वो भी थी हिन्दू

ऑपइंडिया ने विस्तृत जानकारी के लिए पीड़िता से बात की। पीड़िता ने अपनी पहचान उजागर न करने की माँग करते हुए उसने दावा किया कि नावेद उससे पहले भी एक हिन्दू लड़की से निकाह कर चुका है, जो दिल्ली में भजनपुरा इलाके की रहने वाली है। नावेद ने अपनी पहली हिन्दू बीवी को इस्लाम कबूल करवाया और बाद में उसे तलाक दे दिया था। नावेद ने अपनी पहली हिन्दू बीवी को तमन्ना नाम दिया था। पीड़िता का यह भी दावा है कि नावेद ने अपनी पहली बीवी को डरा-धमका कर रखा हुआ है, जिससे वो शिकायत दर्ज नहीं कर रही है।

दोनों बच्चों का करवा दिया खतना

पीड़िता ने ऑपइंडिया को आगे बताया कि वो नावेद से निकाह के बाद 2 बच्चों की माँ बनी थी। इनमें से वो एक बच्चे को नावेद के चंगुल से अपने एक बच्चे को छुड़वा पाई है, जबकि दूसरा बच्चा अभी भी आरोपित के परिवार वालों के पास है। दोनों बच्चे नाबालिग हैं। पीड़िता दोनों को हिन्दू ही रखना चाहती थीं और लगभग 4 माह दोनों को नावेद से बचा कर रखी थी। आरोप है कि दोनों का खतना मौका पाकर नावेद ने करवा दिया और उनके नाम भी इस्लामी मान्यताओं वाले रख दिए। पीड़िता ने अपने बच्चों को वापस दिलाने की भी गुहार लगाई।

मौलवी नावेद का दोस्त

नावेद का घर पीड़िता की रिश्तेदारी के बगल में था। यहीं दोनों की मुलाकात और बातचीत हुई थी। पहले नावेद ऑटो चलाता था। बाद में उसने पीड़िता की माँ से पैसे लेकर गाड़ियों को खरीदने-बेचने का काम शुरू किया था। जो मौलवी पीड़िता को इस्लाम कबूल करवाने के लिए बुलवाया गया था, उसे पीड़िता ने नावेद का दोस्त बताया है। ऑपइंडिया को पीड़िता ने बताया कि अभी पुलिस ने नावेद को गिरफ्तार किया है, लेकिन उसके परिवार के बाकी आरोपित व अन्य लोग नहीं पकड़े गए हैं। उन्होंने पुलिस प्रशासन से आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की।

जिस कप्तान ने ऑस्ट्रेलिया को जिताया वर्ल्ड कप, उसे अपने ही देश में एयरपोर्ट पर कोई पूछने तक नहीं आया: वीडियो में अकेले दिखे पैट कमिंस

ICC वनडे वर्ल्ड कप 2023 के फाइनल मैच में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को 6 विकेट से हरा दिया। तेज़ गेंदबाज पैट कमिंस की कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया ने ये कमाल किया। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए इस क्रिकेट मैच में 1.25 लाख से भी अधिक दर्शक पहुँचे थे। अब ऑस्ट्रेलिया की टीम ट्रॉफी के साथ अपने देश पहुँच गई है। टीम के कप्तान पैट कमिंस का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वो ऑस्ट्रेलिया के सिडनी एयरपोर्ट पर दिखाई दे रहे हैं।

हालाँकि, इस दौरान गौर करने वाली बात ये रही कि ऑस्ट्रेलियाई टीम या उसके कप्तान के स्वागत में वहाँ की जनता में कोई खास उत्साह नहीं दिखा। जैसा कि सोचा जा रहा था कि वर्ल्ड कप जीतने के बाद ऑस्ट्रेलिया की जनता बड़ी संख्या में एयरपोर्ट पर अपनी टीम का स्वागत करने आएगी, जैसा कि अक्सर भारत या अन्य देशों में विजेता टीमों एवं खिलाड़ियों के साथ देखा जाता रहा है – वैसा कुछ भी नहीं हुआ। सब कुछ एकदम शांत-शांत सा रहा।

पैट कमिंस बुधवार (22 नवंबर, 2023) की सुबह सिडनी एयरपोर्ट पहुँचे। ऑस्ट्रेलिया के लिए ये छठी ODI वर्ल्ड कप जीत है। 30 वर्षीय कप्तान के स्वागत में इस दौरान बस कुछ मीडियाकर्मी ही मौजूद थे, आम लोगों का कोई अता-पता नहीं था। इसके उलट भारत में क्रिकेटरों का भव्य स्वागत होता रहा है। IPL में जीत के बाद भी उस टीम के गृह राज्य में भव्य स्वागत होता है। जबकि ताज़ा वीडियो में देखा जा सकता है कि पैट कमिंस के स्वागत के लिए वहाँ सिर्फ एक अधिकारी होता है जो उनसे हाथ मिलाता है और फिर उनके साथ जाता है।

इस दौरान पैट कमिंस अपनी ट्रॉली और बैग खुद लेकर जाते हुए दिख रहे हैं। वर्ल्ड कप के पहले 2 लीग मैचों में हार के बाद ऑस्ट्रेलिया बैकफुट पर रही, लेकिन उसके बाद कंगारू टीम ने लगातार जीत पर जीत दर्ज की और चैंपियन का ख़िताब अपने नाम किया। अब पैट कमिंस का इस जीत के बावजूद उनके देश में स्वागत न होने पर लोग कह रहे हैं कि वो कैब बुक कर के चुपचाप अपने घर चले गए होंगे। मैच से पहले पैट कमिंस ने कहा था कि एक बड़ी भीड़ को चुप कराने ज़्यादा संतोषजनक कुछ नहीं होता।

‘इमरान खान अच्छा आदमी नहीं, उसे घर मत आने दो’: तलाक पर बुशरा बीबी के पूर्व शौहर ने तोड़ी चुप्पी, कहा- मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) सुप्रीमो इमरान खान पर पत्नी बुशरा बीबी के पहले पति खावर फरीद मानेका ने सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। मानेका का आरोप है कि PTI चीफ ने उनकी शादीशुदा खुशहाल जिंदगी बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। बता दें कि क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान खान का यह तीसरा निकाह था।

जियो न्यूज आज शाहजेब खानजादा शो में मानेका ने सोमवार (20 नवंबर, 2023) को ये खुलासे किए हैं। उनका दावा है कि इमरान ने “पीर मुरीदी” की आड़ में बुशरा बीबी के साथ उनकी शादीशुदा जिंदगी तबाह कर दी

उन्होंने कहा, “हमारी शादी 28 साल तक चली थी। हमारी शादीशुदा जिंदगी बहुत खुशहाल थी और इमरान खान ने पीर-मुरीदी (एक दीनी उस्ताद और मुरीद के बीच का रिश्ता) की आड़ में इसे बर्बाद कर दिया।”

बताते चलें कि मुस्लिमों की पीरी मुरीदी प्रथा में मुस्लिम पीर अपने मुरीद की कोई रहस्यमयी बात बताकर खुद को सूफ़ी संतों के बराबर साबित करते हैं। बुशरा बीबी यही काम करती हैं। इसके चलते ही इमरान खान से उनकी नजदीकियाँ बढ़ी। बुशरा की बहन ने दोनों की मुलाकात करवाई थी। इमरान बुशरा के मुरीद बने तो घर में उनका आना-जाना बढ़ता गया।

मानेका ने इमरान पर आरोप लगाया कि वो उनकी रजामंदी के बगैर उनके घर आते थे और वह उनके साथ उस वक्त उनकी बीवी रही बुशरा की मुलाकात से खुश नहीं थे। उन्होंने ऐसे ही एक वाकए का जिक्र कर बताया कि एक बार उन्होंने अपने घरेलू नौकर की मदद से इमरान को घर से बाहर खदेड़ दिया था।

मानेका ने आगे कहा कि बुशरा बीबी को नवंबर 2017 में उन्होंने तलाक दिया था। इसके डेढ़ महीने बाद ही बुशरा ने इमरान से निकाह कर लिया। उन्होंने कहा कि दोनों के निकाह के बारे में उनको कोई खबर नहीं थी।

उन्होंने आगे कहा, “मुझे और मेरे बच्चों को इस निकाह के बारे में पता नहीं था। जब जियो और द न्यूज ने इसकी की खबर दी, तो मैंने इससे इनकार कर दिया।” बता दें कि इमरान खान ने जनवरी 2018 में बुशरा बीबी से निकाह किया था। उस दौरान बुशरा इद्दत में थीं।

मुस्लिमों में ये उस वक्त को कहा जाता है जब कोई औरत अपने खाबिंद से तलाक के बाद अलगाव में होती हैं। मार्च 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक, यही वजह रही कि इस निकाह को पाकिस्तानी आवाम से छिपाने के लिए इसकी तस्वीरें 18 फरवरी को जारी की गईं।

ऐसे बढ़ीं इमरान की बुशरा से नजदीकियाँ

मानेका का कहना है कि इस्लामाबाद में पीटीआई के विरोध प्रदर्शन के दौरान ही बुशरा की बहन मरियम वाटो ने और उनकी बीवी और इमरान खान की मुलाकात करवाई थी। इस मुलाकात के बाद दोनों के बीच इस्लामाबाद में अक्सर मुलाकातों का दौर चलने लगा था।

मानेका ने ये भी कहा, “मेरी अम्मी कहती थीं कि इमरान खान अच्छे इंसान नहीं हैं, उन्हें घर में मत आने दो।” दोनों के बीच के रिश्तों का खुलासा करते हुए उन्होंने बताया कि पीटीआई चीफ के कहने पर फराह गोगी ने उनकी तत्कालीन बीवी बुशरा को एक फोन नंबर दिया था। इस नंबर पर वो रात भर गुप्त तरीके से इमरान से बात करती थीं।

उनका आरोप है कि इस्लामाबाद के बानी गाला इलाके में इमरान के घर पर उनकी इजाजत के बगैर दोनों मिलते थे। मानेका ने कहा, “इमरान से निकाह करने से छह महीने पहले बुशरा बीबी मुझसे अलग हो गई और पंजाब के पाकपट्टन शहर में अपने घर चली गई। मेरे बुलाने के बाद भी घर लौटने से इनकार कर दिया।”

मानेका ने आगे बताया कि एक दिन उन्हें फराह गोगी से एक टेक्स्ट मैसेज मिला था इसमें उन्होंने ‘पिंकी’ (बुशरा बीबी का निकनेम) को तलाक देने के लिए कहा था। उन्होंने कहा, “मैं बुशरा के पास गया और उनसे पूछा कि क्या आप तलाक चाहती हैं? उसने अपना सिर झुका लिया और कोई जवाब नहीं दिया।”

बताते चलें कि फराह का पूरा नाम फरहत शहजादी है। वह बुशरा बीबी की बेस्ट फ्रेंड हैं। फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) ने गोगी पर मार्च 2023 में पाकिस्तान में करीबन 849 मिलियन की मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया।

उन्होंने आगे बताया कि 14 नवंबर, 2017 को फराह गोगी के जरिए ही उनकी तत्कालीन बीवी ने उन्हें को तलाक के कागजात भेजे थे। उन्होंने कहा कि बाद में फराह गोगी और पीटीआई चीफ के करीबी सहयोगी जुल्फी बुखारी ने उनसे कागजात पर तलाक की तारीख बदलने और चुप रहने के लिए कहा क्योंकि इमरान खान प्रधानमंत्री बनना चाहते थे।

हमास ने 50 महिला-बच्चे बंधकों को रिहा करने का रखा प्रस्ताव, इजरायल ने 4 दिन के लिए किया सीजफायर: नेतन्याहू बोले- आतंकी संगठन के खात्मे तक ऑपरेशन जारी रहेगा

इस्लामी आतंकी संगठन हमास द्वारा 7 अक्टूबर 2023 को आतंकी हमले के बाद इजरायली कार्रवाई से फिलिस्तीन सहम गया है। अब हमास ने इजरायल के 50 बंधकों को छोड़ने का निर्णय लिया है। जिन लोगों को हमास छोड़ेगगा, उनमें सारे महिलाएँ और बच्चे हैं। इजरायल की युद्ध कैबिनेट ने इस सम्बन्ध में 4 दिन के सीजफायर को मंजूरी दी है।

गाजा से रिहा होने वालों में 3 अमेरिकी नागरिक भी हैं। हमास द्वारा लोगों को रिहा करने की घोषणा के बाद इजरायल ने भी कुछ फिलितीनियों को रिहा करने का निर्णय लिया है। इजरायल ने यह भी कहा है कि वह प्रत्येक 10 बंधकों के छोड़े जाने पर सीजफायर 1 दिन के लिए बढ़ा देगा।

अमेरिका ने भी इस सीजफायर की पुष्टि की है। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बायडेन ने इस सीजफायर का स्वागत किया है। बंधकों के छोड़े जाने की प्रक्रिया बृहस्पतिवार (23 नवंबर 2023) से शुरू होने की संभावना है। यह भी आशा जताई जा रही है कि 50 से अधिक लोग भी छोड़े जा सकते हैं।

इजरायल और हमास के बीच यह सीजफायर मुस्लिम देश क़तर की मध्यस्थता से हुआ है। इस्लामी आतंकी संगठन हमास ने भी इस समझौते की पुष्टि की है। हमास ने कहा है कि इस डील में इजरायल की जेलों में बंद 150 फिलिस्तीनियों को छोड़ने की बात हुई है। अब इजरायल 4 दिन तक अपना सैन्य ऑपरेशन रोकेगा और हमास भी आतंकी हमला नहीं करेगा। इस बीच गाजा में राहत सामग्री भी भेजने को अनुमति मिल गई है।

यह सीजफायर अस्थाई है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का कहना है कि अभी युद्धविराम नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, “हम युद्ध लड़ रहे हैं और युद्ध लड़ते रहेंगे, जब तक हमारे सभी लक्ष्य पूरे नहीं हो जाते। हमारा लक्ष्य है कि हमास को खत्म किया जाए, हमारे सभी नागरिकों को छुड़वाया जाए और गाजा में इजरायल के लिए खतरे का कोई निशान तक ना बचा रहे।”

गौरतलब है कि इस्लामी आतंकी संगठन हमास ने 7 अक्टूबर 2023 को गाजा से इजरायल पर अचानक हमला कर दिया था। इसमें 1,400 से अधिक लोगों की मौत हो गई है। वहीं, बड़ी संख्या में लोग घायल भी हुए थे। हमास ने इजरायल के भीतर से 230 से अधिक लोगों को बंधक भी बना लिया था।

इसके बाद इजरायल ने हमास के खिलाफ युद्ध का ऐलान कर दिया और तब से गाजा पर बमबारी कर रहा है। इजरायल ने गाजा में थल सेना भी भेजा है। गाजा में अब तक 13,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। हाल ही में बंधकों के परिजनों ने प्रदर्शन करके इजरायली सरकार से माँग की थी कि वे उनके परिजनों को हमास से मुक्त करवाएँ। इसी क्रम में यह सीजफायर हुआ है।

‘पाकिस्तान के प्लेयर्स को हजम नहीं हो रहा तो मैं क्या करूँ’: मोहम्मद शमी ने ‘एक्स्ट्रा लेयर बॉल’ पर धोया, कहा- सुधर जाओ, वसीम अकरम का भी किया जिक्र

क्रिकेट वर्ल्ड कप में सर्वाधिक विकेट लेने वाले भारतीय गेंदबाज मोहम्मद शमी ने पाकिस्तान के बड़बोले खिलाड़ियों को सुधर जाओ का संदेश दिया है। एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर की मूर्खता पर दुख जताया। उनसे वर्ल्ड कप में भारतीय गेंदबाजों को एक्स्ट्रा लेयर वाली बॉल मिलने के दावे को लेकर सवाल किया गया था।

स्पोर्ट्स फैशन ब्रांड प्यूमा (Puma) के साथ बातचीत में मोहम्मद शमी ने कहा, “मैं कई दिन से सुने जा रहा था, जब से वर्ल्ड कप चल रहा था। पहले तो मैं खेल नहीं रहा था। जब मैं खेला तो 5 विकेट लिए, नेक्स्ट मैच में 4 विकेट लिए, फिर 5 विकेट लिए। कुछ पाकिस्तान के प्लेयर्स को हजम नहीं हो रही ये बात, अब मैं क्या करूँ?”

उन्होंने कहा “उनके (पाकिस्तानी) दिमाग में ये है कि हम बेस्ट हैं, भाई बेस्ट वो होता है जो टाइम पर परफॉर्म करे। मैं उसी को मानता हूँ जो हार्ड वर्क करे, टाइम पर परफॉर्म करे और अपनी टीम के लिए खड़ा रहे। आप उसमें कंट्रोवर्सी बनाए चले जा रहे हो। तुम्हें बॉल कुछ और कलर की मिली, कुछ कम्पनी की बॉल मिल रही है, ICC ने तुम्हें अलग से दे दिया, सुधर जाओ यार, ये क्या है?” आप यह बातचीत नीचे लगे वीडियो में 38 से 45 मिनट के बीच सुन सकते हैं।

दरअसल, वर्ल्ड कप के दौरान मोहम्मद शमी और अन्य भारतीय गेंदबाजों शानदार प्रदर्शन के बाद पाकिस्तान के पूर्व खिलाड़ी हसन रजा ने कहा था कि मोहम्मद शामी, मोहम्मद सिराज या जसप्रीत बुमराह अगर सीम या स्विंग करा पा रहे हैं तो इसकी वजह है उनको दी जाने वाली अलग तरह की गेंद। उनके अनुसार इस अलग तरह की गेंद पर कुछ एक्स्ट्रा लेयर या एक्स्ट्रा कोटिंग की गई थी।

4 मिनट के अपने जवाब में हसन रजा ने कहा कि मोहम्मद शामी, मोहम्मद सिराज या जसप्रीत बुमराह जिस तरह से बॉल फेंक रहे हैं, वो एलन डोनल्ड की याद दिला रहा और इसके पीछे वजह यह है कि इनको अलग तरह की गेंद दी जा रही है। हसन के मुताबिक इसके पीछे अंपायर या ICC या BCCI किसी का भी हाथ हो सकता है।

इस दावे को लेकर सवाल पूछे जाने पर मोहम्मद शमी ने पाकिस्तान के पूर्व गेंदबाज वसीम अकरम का भी जिक्र किया। अकरम ने भी हसन रजा और पाकिस्तानी फैन्स को इन दावों पर फटकार लगाई थी। उन्होंने बताया था कि अंतरराष्ट्रीय मैच में कैसे गेंद का चुनाव होता है।

शमी ने हसन रजा के दावे पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि यदि आप खिलाड़ी न हो। इस स्तर पर आपने खेला नहीं हो। फिर इस तरह के दावे समझ भी आते हैं। लेकिन जब आप पूर्व खिलाड़ी होकर ऐसी बातें करेंगे तो मुझे लगता है कि लोग हँसने के अलावा कोई और काम नहीं करेंगे।

साथ ही उन्होंने दूसरों की सफलता को इंजॉय करने की सीख भी दी। उन्होंने कहा, “मैं तो किसी को ब्लेम नहीं करता हूँ, मैं तो दुआ करता हूँ कि और 10 लोग ऐसा प्रदर्शन करें। मुझे तो कभी जलन होती नहीं। यदि आप दूसरे की सफलता को इंजॉय करना सीख लोगे तो मुझे लगता है कि काफी बेहतर खिलाड़ी बनोगे।” शमी ने इंटरव्यू के दौरान पत्नी हसीन जहाँ के साथ विवाद और मानसिक तनाव पर भी बात की। अपनी क्रिकेट यात्रा के बारे में भी बताया। मोहम्मद शमी ने वर्ल्ड कप 2023 में 24 विकेट लिए हैं। उन्हें ICC की टीम में भी शामिल किया गया है।

अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस आया और चला गया… आखिर परिवार-समाज-देश के लिए खपते पुरुष भाइयों को लेकर चुप्पी क्यों?

8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस आता है और इसे लेकर तमाम विमर्श गढ़े जाते हैं, तमाम प्रोग्राम्स आयोजित किए जाते हैं और इसके साथ ही ऐसी पीड़ा का विमर्श तैयार होता है, जहाँ पर किसी और के लिए कोई स्थान नहीं है। इसमें हर पुरुष को दोषी ठहरा दिया जाता है। उनकी आत्माओं पर वेदनाओं का बोझ बताकर तमाम पुरुषों को उसका उत्तरदायी ठहरा दिया जाता है।

मगर 8 मार्च के कुछ ही महीने बाद आने वाला अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस आता है और चुपचाप विदा ले जाता है। ऐसे विदा लेता है, जैसे वह मायने ही नहीं रखता है। उसका मायने न रखना ही हमारे लिए सबसे अधिक दुखदायी है। पूरे समाज के लिए यह चुप्पी बहुत खलने वाली है क्योंकि समानता का जो द्वन्द्व आज प्रस्तुत किया जा रहा है, उसमें पुरुष को अनावश्यक ही खलनायक बनाया जा रहा है।

जिन भारतीय पुरुषों ने अपनी मातृभूमि और माँ के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया, न जाने कितने पुरुषों के सिरों की मीनारें इसी बात पर बना दी गई थीं क्योंकि उन्होंने धर्म परिवर्तन से इनकार कर दिया था और अपनी स्त्रियों का मान बचाने के लिए युद्ध का मार्ग चुना था, उन्हीं पुरुषों को विमर्श में वैसा खलनायक बनाकर पेश कर दिया जाता है, जिसने सदियों से स्त्रियों पर अत्याचार किए थे।

जबकि वह तो हर युग में सहायक बन कर खड़ा रहा। वह खड़ा रहा ऐसी छाँव बनकर, जिसके तले सभ्यता और संस्कृति अपना आकार लेती रहीं। वह मिटता रहा मगर माँ समान संस्कृति की रक्षा करता रहा।

जिन सफल महिलाओं की चर्चा होती है, उनके सहायक रहे पुरुषों की चर्चा क्यों नहीं होती है? यह प्रश्न तो पूछना ही होगा? क्यों 19 नवम्बर को जब अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाया जाता है तो उन पुरुषों पर बात नहीं होती जो अपने जीवन की ही नहीं बल्कि समाज की स्त्रियों के पीछे खड़े हो गए?

जब रानी लक्ष्मीबाई की बात होती है तो क्यों उन्हें सैन्य शिक्षा दिलाने वाले पुरुषों की बात नहीं होती? जब रानी दुर्गावती या रानी अवंतिबाई की बात होती है तो उन तमाम सैनिकों की बात क्यों नहीं होती जिन्होंने उनकी एक ललकार पर अपना जीवन शत्रुओं का नाश करने के लिए बलिदान कर दिया?

जो महिला खिलाड़ी हैं, उनके कोच आदि के योगदान पर बात क्यों नहीं होती? क्या हम एक दिन के लिए भी अपने जीवन के पुरुषों का आभार व्यक्त नहीं कर सकते? क्या हम एक दिन नहीं निकाल सकते उन लाखों पुरुषों के लिए, जो चुपचाप बलिदान ही नहीं हुए बल्कि विमर्श में अपयश लेकर चल रहे हैं?

पुरुष दिवस पर समाज की इस चुप्पी को लेकर मैं बरखा त्रेहन, जो अपने पुरुष भाइयों के लिए पुरुष आयोग के माध्यम से निरंतर संघर्ष कर रही हूँ, बहुत आहत होती हूँ, बहुत दुखी होती हूँ!

बार-बार इस विमर्श में फैले अन्याय से दुखी होती हूँ, मगर फिर काम में लग जाती हूँ क्योंकि यह चुप्पी जो ठहरी है, वह टूटेगी ही एक न एक दिन! मुझे इसे लेकर पूरा विश्वास है। साल-दर-साल, मैं अपने पुरुष भाइयों के साथ खड़ी रहूँ और समाज की इस चुप्पी पर तब तक प्रश्न करती रहूँगी, जब तक वह हमारे गुमनाम नायकों पर बात नहीं करते, मैं इस लड़ाई को लड़ती रहूँगी!