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20 दिन और बढ़ाई गई मनीष सिसोदिया की न्यायिक हिरासत, शराब घोटाला में जेल में बंद हैं AAP नेता: वकीलों की धीमी गति पर कोर्ट ने फटकारा

दिल्ली के राउज अवेन्यू कोर्ट ने शराब घोटाले में जेल में बंद आम आदमी पार्टी (AAP) नेता और दिल्ली के पूर्व उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की न्यायिक हिरासत को 11 दिसम्बर, 2023 तक बढ़ा दिया है। कोर्ट ने इस मामले की विस्तार से सुनवाई करते हुए पाया कि अभी प्रवर्तन निदेशालय (ED) कुछ और कागज जमा करेगा।

कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय को नोटिस भेजते हुए कहा कि 24 नवम्बर को इसी मामले में जेल में बंद आरोपित बिनय बाबू की अंतरिम जमानत याचिका पर बहस होगी। कोर्ट ने मामले में वकीलों की धीमी गति पर भी चिंता जताई और उन्हें जल्दी प्रक्रिया पूरा करने को कहा।

गौरतलब है कि दिल्ली के पूर्व उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को दिल्ली शराब घोटाला नीति मामले में 9 मार्च 2023 में प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया था। वह तब से कई बार कोर्ट के समक्ष जमानत के लिए याचिका लगा चुके हैं, लेकिन कोर्ट ने उन्हें कोई राहत नहीं दी है। इसी मामले में आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह भी जेल में बंद हैं।

गौरतलब है कि मनीष सिसोदिया और अन्य आरोपितों पर वर्ष 2021 में लाई गई शराब नीति के जरिए घोटाले का आरोप है। बताया गया है कि दिल्ली सरकार ने नई शराब नीति लाकर निजी शराब विक्रेताओं को बड़ा फायदा पहुँचाया। इन व्यापारियों से फायदे के एवज में सैकड़ों करोड़ रुपए आम आदमी पार्टी को मिले जिन्हें उसने चुनाव लड़ने में उपयोग किया।

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान मनीष सिसोदिया से भी प्रश्न पूछे। सिसोदिया समेत अन्य आरोपियों से कोर्ट ने कहा कि आप अब तक जाँच एजेंसी से कागजों की सॉफ्ट कॉपी माँग रहे थे और अब हार्ड कॉपी माँग रहे हैं। आप इसकी सुनवाई में देर लगाना चाहते हैं क्या?

वहीं इस मामले की जांच एजेंसी ED ने कहा कि उसने सभी आरोपितों के वकीलों को मेल के जरिए कागज उपब्ध करवा दिए हैं। ED का कहना है कि अब उन्हीं कागजों की हार्ड कॉपी माँगी जा रही है जिससे सुनवाई में देरी हो। हाल ही में कोर्ट ने मनीष सिसोदिया को उनकी पत्नी से मिलने की इजाजत दी थी। कोर्ट ने उन्हें 6 घंटे की मोहलत दी थी।

दलित सफाईकर्मी को मुस्लिम युवकों ने पीटा, जयपुर में धरने पर बैठे वाल्मीकि समाज के लोग: भाजपा ने बताया- गहलोत का ‘मुगलकाल’

राजस्थान की राजधानी जयपुर में दलित समुदाय के एक सफाईकर्मी के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। पिटाई का आरोप मुस्लिम समुदाय के व्यक्ति पर लगा है। वहीं घटना के विरोध में भाजपा प्रत्याशी आचार्य बालमुकुंद ने वाल्मीकि समुदाय के लोगों के साथ हाथों में झाड़ू ले कर प्रदर्शन किया है। इस मामले में पुलिस केस दर्ज कर के जाँच कर रही है। घटना सोमवार (20 नवम्बर, 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना जयपुर के शास्त्री नगर थानाक्षेत्र की है। यहाँ के किशनपोल इलाके के वार्ड नंबर 55 में वाल्मीकि समुदाय के एक सफाईकर्मी के साथ एक मुस्लिम युवक ने मारपीट की। इस हमले में पीड़ित सफाईकर्मी बुरी तरफ से घायल हो गया जिसका इलाज अस्पताल में चल रहा है। पीड़ित के परिजनों का आरोप है कि जब उन्हें घटना की सूचना मिली तो वो शिकायत करने थाने पहुँचे लेकिन पुलिस ने उनकी FIR दर्ज नहीं की। घटना के चलते अन्य सफाईकर्मियों में आक्रोश फ़ैल गया।

हवामहल से भारतीय जनता पार्टी के विधानसभा प्रत्याशी आचार्य बालमुकुंद को जब इस मामले की जानकारी हुई तो वो भी अपने साथियों के साथ थाने पहुँचे। उन्होंने पुलिस पर आरोपितों को बचाने का आरोप लगाते हुए समर्थकों के साथ धरना दिया। इस दौरान जय श्री राम और भारत माता की जय के नारे लगे। जिसके बाद दबाव में आकर पुलिस ने आखिरकार मारपीट करने वाले युवकों पर FIR दर्ज की।

बताया जा रहा है कि कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया गया है जिनसे पूछताछ की जा रही है। वहीं पुलिस ने धरना दे रहे लोगों को कड़ी कार्रवाई का भरोसा दे कर शांत करवाया।

प्रदर्शन के दौरान अन्य सफाईकर्मियों ने आरोप लगाया कि उनके साथ मुस्लिम समुदाय के लोग आए दिन मारपीट करते हैं। साथ ही उन्होंने प्रशासन पर अपनी शिकायतों को अनदेखा करने का भी आरोप लगया। धरने के दौरान आचार्य बालमुकुंद ने आरोप लगाया कि सिर्फ एक ही क्षेत्र में नहीं बल्कि कई इलाकों में वर्ग विशेष के लोगों ने आतंक मचा रखा है। उन्होंने गहलोत सरकार के शासन को ‘मुगलकाल’ का नाम दिया। आचार्य बालमुकुंद का यह भी दावा है कि कॉन्ग्रेस शासन की मुस्लिम तुष्टिकरण नीति से परेशान हो कर उनके हजारों कार्यकर्ता भारतीय जनता पार्टी ज्वाइन कर रहे हैं।

दिल्ली में वायु के बाद अब ‘जल’ संकट! मंत्री आतिशी ने वित्त सचिव पर फोड़ा ठीकरा, पानी के लिए तरसेगी राजधानी

दिल्ली की जनता अब साफ हवा के बाद साफ पानी के लिए तरसने वाली है। दिल्ली सरकार ने बलि का बकरा भी ढूँढ लिया है। अब दिल्ली सरकार की मंत्री आतिशी ने कहा है कि वित्त सचिव ने दिल्ली जल बोर्ड का पैसा रोक लिया है, वो फंड ही जारी नहीं कर रहे हैं, तो दिल्ली में अब जल संकट आना तय है। आतिशी ने कहा कि चीफ सेक्रेटरी के कहने पर वित्त सचिव आशीष वर्मा ने अगस्त से जल बोर्ड के सारे फण्ड बंद कर दिए हैं। वित्त मंत्री के लिखित आदेश की बाद भी फंड को जारी नहीं कर रहे हैं, जिसकी वजह से इमरजेंसी जैसे हालात को पैदा करता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले में आतिशी ने LG को चिट्ठी लिखकर हस्तक्षेप करने को कहा है। चिट्ठी में उन्होंने लिखा है कि दिल्ली में पानी की परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि चीफ सेक्रेटरी के कहने पर वित्त सचिव आशीष वर्मा ने अगस्त से जल बोर्ड के सारे फंड बंद कर दिए हैं। जय बोर्ड के पास सैलरी और रूटीन कामों के लिए भी पैसे नहीं बचे हैं।

जल मंत्री आतिशी ने दिल्ली के उप-राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना से तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील करते हुए कहा है कि सभी ठेकेदारों ने काम करने से मना किया गया है। आने वाले दिनों में कई इलाकों में पानी की भारी किल्लत, गंदा पानी और सीवर ओवरफ्लो हो सकते हैं। अगर ऐसा हुआ, तो दिल्ली में महामारी का खतरा बढ़ सकता है। ये समस्या इमरजेंसी जैसे हालात पैदा करता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फंड जारी करने को लेकर वित्त विभाग और दिल्ली जल बोर्ड के बीच पिछले कुछ माह से खींचतान चल रही है। दिल्ली जल बोर्ड आवंटित बजट से 1,800 करोड़ रुपये अधिक मांग रहा है, जिसे जारी करने से वित्त विभाग ने इनकार कर दिया है। इस मामले के सामने आने के बाद दिल्ली की राजनीति भी गरमा सकती है, जिसके बाद विपक्षी पार्टियाँ दिल्ली सरकार को निशाने पर ले सकती हैं।

मदरसे में मौलाना ने नाबालिग छात्र के साथ किया मुख और गुदा मैथुन: अश्लील वीडियो से कई बच्चे बने हवस का शिकार, यूपी पुलिस ने दबोचा

उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर जिले में मदरसे के अंदर नाबालिग किशोर से दुष्कर्म का मामला सामने आया है। इस मामले में पुलिस ने दीनी तालीम देने वाले मौलाना इजरायल को गिरफ्तार किया है। वहीं पीड़ित किशोर की उम्र 18 साल बताई जा रही है जिसका आरोपित मौलाना ने अश्लील वीडियो भी बना लिया था। ऐसा आरोप है कि मौलाना ने मदरसे के अन्य छात्रों के साथ भी अश्लील हरकतें की हैं। घटना रविवार (19 नवंबर, 2023) की है।

यह मामला मुज़फ्फरनगर के थानाक्षेत्र खतौली का है। यहाँ मदरसा सिद्दीकचा में आसपास के कई बच्चे दीनी तालीम लेते हैं। बच्चों को तालीम देने का काम मौलाना इजरायल को मिला हुआ है जो मुज़फ्फरनगर के ही सद्दीक नगर मोहल्ले का रहने वाला है। पीड़ित छात्र भी इसी मदरसे में पढ़ता है। 19 नवंबर को पीड़ित छात्र खुद थाने पहुँचा और हयात के बेटे मौलाना इजरायल के खिलाफ तहरीर दी। तहरीर में पीड़ित ने अपने साथ 3 वर्षों से कुकर्म किए जाने की जानकारी दी।

शिकायत में पीड़ित छात्र ने बताया कि लगभग 3 साल पहले जब उसकी उम्र 15 साल थी तब वह मदरसे में पढ़ने गया था। शुरू से ही मौलाना इजरायल पीड़ित पर गंदी नजर रखने लगा था। उसने बच्चे को बहला फुसला कर अपने झाँसे में लिया। बाद में उसने पीड़ित के साथ मुख और गुदा मैथुन किया।

जब पीड़ित छात्र ने मौलाना इजरायल की इस हरकत का विरोध किया तो उसको जान से मारने की धमकियाँ दी गईं। पीड़ित छात्र इन धमकियों से डर कर खामोश रहा और मौलाना 3 साल तक अपनी मनमर्जी करता रहा। बता दें कि ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी भी मौजूद है।

वहीं मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आरोपित मौलाना ने पीड़ित छात्र की अश्लील वीडियो भी बना ली थी। इसी वीडियो को दिखा कर वह नाबालिग को ब्लैकमेल करता रहा।

रविवार (19 नवम्बर) को भी इजरायल ने एक बार फिर से पीड़ित को बुला कर कुकर्म किया। तब पीड़ित के सब्र का बाँध टूट गया और आखिरकार पीड़ित ने मौलाना की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई। पुलिस ने मौलाना इजरायल के खिलाफ IPC की धारा 377 और 506 के साथ पॉक्सो एक्ट की धारा 3/4 के तहत FIR दर्ज की है। पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए 20 नवम्बर को मौलाना को गिरफ्तार कर लिया। वहीं अब मामले में जाँच और आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

हाईकोर्ट ने कहा – ‘मंदिरों में काम नहीं कर सकते गैर-हिन्दू’: ईसाई महिला से शादी कर बदल लिया था धर्म, दलित बता की थी नौकरी

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा है कि हिन्दू मंदिरों में केवल वही लोग काम कर सकते हैं जो हिन्दू हैं। हिन्दू मंदिरों में दी जाने वाले नौकरियों में मुस्लिमों और ईसाइयों या अन्य धर्मों के लोगों को नौकरियाँ नहीं दी जा सकती। आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने यह निर्णय एक व्यक्ति द्वारा दायर याचिका पर दिया।

दरअसल, P सुदर्शन बाबू नाम के एक ईसाई व्यक्ति ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के समक्ष यह याचिका दायर की थी कि उसे ईसाई होने के कारण श्रीशैलम देवस्थानम बोर्ड की नौकरी से ना निकाला जाए। हाईकोर्ट ने उसकी यह याचिका रद्द कर दी। दरअसल, ईसाई पी सुदर्शन को वर्ष 2002 में आंध्र प्रदेश के मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग का प्रबंधन करने वाले श्रीशैलम देवस्थानम बोर्ड में रिकॉर्ड असिस्टेंट के तौर पर नौकरी दया के आधार पर दी गई थी। जब उसे 2002 में नौकरी मिली तो वह ‘माला’ नाम की अनुसूचित जाति से संबंध रखता था।

जानकारी के अनुसार, नौकरी पाने के कुछ वर्षों के बाद उसने एक ईसाई महिला से विवाह कर लिया। इसके पश्चात उसके खिलाफ लोकायुक्त के पास शिकायत दर्ज करवाई गई कि उसने अपना असली ईसाई मजहब छुपाया है और खुद को हिन्दू बताकर नौकरी हासिल की है। सुदर्शन ने इसके बदले लोकायुक्त को अपने पुराने कागज दिखाए जिसमें उनकी अनुसूचित जाति को लेकर जानकारी दर्ज थी।

हालाँकि, लोकायुक्त के समक्ष होली क्रॉस चर्च के भी कागज लाए गए। लोकायुक्त ने उसके सभी कागजों की जाँच और अन्य सभी बिन्दुओं को देखते हुए स्पष्ट किया कि सुदर्शन ने अपना मजहब छुपाया है। इसी के चलते उसको नौकरी से निकाल दिया गया।

सुदर्शन ने वर्ष 2012 में अपने नौकरी से निकाले जाने के विरुद्ध आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उसका कहना था कि उसने नौकरी लेते समय अपना धर्म नहीं छुपाया है। हालाँकि, उच्च न्यायालय ने उसकी बात नहीं मानी। कोर्ट ने कहा कि उसका विवाह एक ईसाई महिला से हुआ है और यदि उसने बिना धर्म बदले महिला से विवाह किया होता तो यह विशेष विवाह अधिनियम के अंतर्गत आता। इस विवाह के लिए उसे प्रमाण पत्र भी दिया जाता। यह सुदर्शन के मामले में नहीं हुआ। ऐसे में स्पष्ट है कि महिला-पुरुष दोनों का धर्म एक ही था।

कोर्ट ने यह भी कहा कि होली क्रॉस चर्च के रिकॉर्ड में उसके नाम के आगे रिलीजन वाले कॉलम में ईसाई दर्ज है और उसने इस पर हस्ताक्षर किए थे। ऐसे में यह स्पष्ट होता है कि वह ईसाई है। वह श्रीसेलम मंदिर में काम नहीं कर सकता है इसलिए उसकी याचिका खारिज की जाती है।

बागेश्वर धाम सरकार को धमकियाँ दे रहा मुस्लिम से निहंग सिख बना तूफान सिंह: मर गई थी अम्मी, गुरुद्वारे में छोड़ गया था अब्बा

मुस्लिम से निहंग सिख बना तूफ़ान सिंह उर्फ़ हरमनदीप सिंह बागेश्वर धाम सरकार पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री को धमकियाँ दे रहा है। वह इससे सम्बंधित वीडियो इन्स्टाग्राम पर डाल रहा है। तूफ़ान सिंह ने 1 नवम्बर 2023 को इन्स्टाग्राम पर एक वीडियो डाली थी, जिसमें उसने बागेश्वर धाम सरकार को धमकाया था। धमकी देने से पहले उसने धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री की एक वीडियो क्लिप भी अपने वीडियो में चलाई थी। इस वीडियो में वह हिन्दुओं के लिए समस्याएँ खड़ी करने वालों को चेतावनी देते हुए दिखते हैं।

तूफ़ान सिंह इस वीडियो में कहता है, “वो (पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री) सिखों को धमका रहा है। मेरा वीडियो उसे भेज देना, मैं उसे बताना चाहता हूँ कि बेटे तुम किसे धमका रहे हो? वो तुम्हारे जैसे 20 आदमियों पर रोज चलते हैं। हम किसी को भड़काते नहीं लेकिन जब समय आता है तो अपने और दूसरों के धर्म के लिए सर कटा देते हैं। क्या तुम हमें धमका रहे हो? जाकर अपने बाप को धमकाओ। ये सब कहने के बाद पंजाब में घुस कर दिखाओ। हम तुम्हें पीटेंगे और सिखाएँगे कि कैसे धमकी दी जाती है। हम धमकाते नहीं हम एक्शन लेते हैं।”

तूफ़ान सिंह ने पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री की जो क्लिप अपने वीडियो में चलाई है, उसमें वह सिखों नहीं बल्कि पंजाब में धर्मांतरण करवाने वाली ईसाई मिशनरियों पर बात कर रहे थे। वह इस वीडियो में कहते हुए दिखते हैं, “मेरा विरोध करने वालों पहले मुझे कभी पढ़ो, मुझे समझो, मुझे सुनो। हम तुम्हारे खिलाफ नहीं है, लेकिन तुम हमारे सनातन को छेड़ोगे तो छोड़ेंगे नहीं। आप बीज मत बोइए, फल आपको नहीं काटना पड़ेगा। मैं पंजाब सरकार से हाथ जोड़ के प्रार्थना करता हूँ कि इस व्यास गद्दी की बात सुनते हुए कड़ा धर्मांतरण कानून लाएँ।”

गौरतलब है कि साल 2023 के अक्टूबर में पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री पंजाब पहुँचे थे और उन्होंने यहाँ तेजी से चल रहे ईसाई धर्मांतरण पर बात की थी। उन्होंने कहा था कि धर्मान्तरण करने वालों को गुरुद्वारों और मंदिरों में घुस कर हिन्दुओं को नहीं बरगलाना चाहिए। उन्होंने कहा था कि वह हालेलुइया चिल्लाने वालों को हिन्दुओं को धर्मान्तरित नहीं करने देंगे।

इसको लेकर उनके खिलाफ एक ईसाई समूह ने शिकायत भी दर्ज करवाई थी। कुल मिलाकर मामला यह है कि तूफ़ान सिंह ने जिस वीडियो के आधार पर पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री को धमकी दी, दरअसल उसमें कथा सुनाने के दौरान सिखों नहीं बल्कि ईसाई मिशनरियों का विरोध किया था। यहाँ यह भी प्रश्न उठता है कि आखिर तूफ़ान सिंह है कौन?

तूफ़ान सिंह: पहले मुस्लिम, फिर निहंग और कट्टरपंथी

जानकारी के अनुसार, तूफ़ान सिंह का जन्म एक मुस्लिम परिवार में हुआ था। उसकी अम्मी की मौत उसके जन्म के समय हो गई थी। उसके अब्बा उसे गुरुद्वारे में छोड़ गए थे। वह यहीं रह कर पला बढ़ा है और बड़े होने पर उसने सिख धर्म अपना लिया। उसने यह जानकारी खुद एक वीडियो में दी थी।

तूफ़ान सिंह केवल इसी कारण से विवादों में नहीं है कि उसने पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री को धमकी दी है। वह पहले भी सोशल मीडिया पर खालिस्तान, अमृतपाल सिंह और जरनैल सिंह भिंडरावाले का समर्थन करते हुए देखा जा चुका है।

फरवरी 2023 में सामने आए एक वीडियो में वह पुलिस वालों से छीनी हुई दंगा रोधी जैकेट पहने भी नजर आया था। उसने इस वीडियो में पुलिस वालों को ‘भइये’ कह कर संबोधित किया। ‘भइये’ पंजाब में हिंदी भाषी राज्यों से आए मजदूरों के लिए अपमानजनक तौर पर इस्तेमाल किया जाता रहा है। जिस विरोध प्रदर्शन में वह दिखा था, उसमें 33 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। इसके पश्चात उसका नाम और फोटो पुलिस द्वारा जारी की गई वॉन्टेड लिस्ट में भी था।

विरोध-प्रदर्शन करने वाले लोग जेलों में बंद कुछ सिखों की रिहाई की माँग कर रहे थे। इनमें पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के हत्यारे भी थे। पुलिस ने जब इन प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोशिश की थी, इन्होंने पुलिस पर हमला बोल दिया था।

तूफ़ान सिंह के कई अन्य वीडियो भी सामने आए हैं। अपने इन्स्टाग्राम अकाउंट पर डाले गए एक वीडियो में वह एक पिस्टल से फायर करते हुए दिखता है। दूसरे पोस्ट में वह भिंडरावाले की फोटो वाले टीशर्ट पहने हुए है।

Chandigarh: Sikh protesters go on a rampage on Chandigarh-Mohali border, 33 cops injured, riot gear looted

एक अन्य वीडियो में वह दावा करता है कि वह पंजाब की सरकार से लड़ रहा है, जो सिखों का दमन कर रही है और बंदी सिखों को नहीं छोड़ रही। गौरतलब है कि कट्टर खालिस्तानी लोग सरकार से लड़ने का बहाना लेकर हिंसात्मक गतिविधियाँ करते रहे हैं। एक अन्य वीडियो में वह खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह का समर्थन करता है, जहाँ वह बताता है कि अमृतपाल दुबई से सिखों का कल्याण करने के लिए वापस आया है।

तूफ़ान सिंह सोशल मीडिया का उपयोग पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री और सरकार के खिलाफ बयानबाजी के लिए कर रहा है। ऐसे अन्य भी कई सोशल मीडिया इन्फ़्लुएन्सर हैं, जो यही करके समाज में घृणा फैला रहे हैं। तूफ़ान सिंह का छोटी उम्र में कट्टरपंथी बन जाना इसका सबूत है।

केजरीवाल के ‘चेहरा चमकाने’ पर सुप्रीम कोर्ट से फटकार, कहा – ‘दिल्ली सरकार का प्रचार वाला बजट फ्रीज करके RRTS में डाल देंगे’: रैपिड रेल के लिए नहीं दे रही पैसे

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को रैपिड रेल प्रोजेक्ट में पैसा नहीं देने के लिए फटकार लगाई और कहा कि आपका प्रचार वाला बजट उसमें डाल देंगे। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार के प्रचार वाले बजट को तुरंत प्रभाव से फ्रीज भी कर दिया है और कहा है कि अगर एक सप्ताह में दिल्ली सरकार ने रैपिड रेल प्रोजेक्ट का पैसा नहीं जारी किया, तो ये (प्रचार वाला) पैसा रैपिड रेल ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट में डाल दिया जाए।

इस मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली की केजरीवाल सरकार के विज्ञापन पर तीन सालों का बजट 1100 करोड़ रुपए है। सिर्फ इसी साल के लिए इसका बजट 550 करोड़ रुपए है, लेकिन इस प्रोजेक्ट के लिए दिल्ली सरकार 415 करोड़ रुपए नहीं दे रही है। ऐसे में दिल्ली सरकार ये 415 करोड़ रुपए एक सप्ताह में रिलीज करे, वर्ना उसके प्रचार बजट का पैसा हम इस प्रोजेक्ट के लिए ट्रांसफर कर देंगे।

एएनआई ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इस मामले की जानकारी देते हुए सुप्रीम कोर्ट के हवाले से कहा, “आरआरटीएस प्रोजेक्ट के लिए फंड नहीं देने पर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को चेताया। दिल्ली सरकार ने अदालत के आदेश का पालन क्यों नहीं किया? हम आपके (दिल्ली सरकार के) विज्ञापन बजट पर रोक लगा देंगे। हम इसे अटैच करेंगे और इसे यहाँ ले जाएँगे।”

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि विज्ञापन के लिए दिल्ली सरकार का फंड प्रोजेक्ट के लिए ट्रांसफर किया जाए, हालाँकि, इस आदेश को एक सप्ताह की अवधि के लिए स्थगित रखा है और कहा कि अगर फंड ट्रांसफर नहीं किया गया तो आदेश लागू हो जाएगा।”

अदालत ने राज्य सरकार पर नाराजगी जताते हुए कहा कि आपकी तरफ से भुगतान का आश्वासन दिया गया। हमने पहले भी कहा था कि आपका प्रचार का पैसा जब्त कर लिया जाएगा। अब हम इसे जब्त करने का आदेश दे रहे हैं। सिर्फ 1 हफ्ते तक यह आदेश स्थगित रहेगा। तब तक आपने कदम नहीं उठाए तो आदेश लागू हो जाएगा। ऐसे में अदालत ने साफ कर दिया है कि अगर फंडिंग नहीं हुई, तो दिल्ली सरकार को विज्ञापन बजट से हाथ धोना पड़ सकता है।

बता दें कि दिल्ली-मेरठ, दिल्ली-अलवर और दिल्ली-पानीपत आरआरटीएस के लिए दिल्ली सरकार पर इस साल के 565 करोड़ रुपए बकाया हैं। यहाँ हैरानी वाली बात ये है कि दिल्ली सरकार का इस साल का विज्ञापन बजट 550 करोड़ रुपए हैं। यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए विज्ञापन बजट को जब्त करने की बात कही है। इस मामले पर अब अगली सुनवाई 28 नवंबर, 2023 को होनी है।

क्या है रैपिड रेल प्रोजेक्ट?

रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) एक नई, सेमी-हाई स्पीड, रेल-आधारित कम्यूटर ट्रांजिट प्रणाली है। आरआरटीएस को हर 15 मिनट में और आवश्यकतानुसार हर 5 मिनट में इंटरसिटी आवागमन के लिए हाई-स्पीड ट्रेनें प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया है।

बता दें कि आरआरटीएस की डिजाइन गति 180 किमी प्रति घंटे और परिचालन गति क्षमता 160 किमी प्रति घंटे है। दिल्ली से जुड़े कुल 3 आरआरटीएस प्रोजेक्ट हैं। इसमें से पहला प्रोजेक्ट दिल्ली मेरठ, दूसरा दिल्ली-अलवर और तीसरा दिल्ली-पानीपत के बीच है। इन प्रोजेक्ट्स के जरिए दिल्ली को यूपी, राजस्थान और हरियाणा से जोड़ा जाएगा। वहीं मेरठ वाले प्रोजेक्ट का कुछ हिस्सा पूरा किया जा चुका है।

सूअर की बलि दे रहे थे दलित, विरोध करने लगे मुस्लिम: 7 साल में एक बार आती है रविदास समाज की जो पूजा, उसमें डाला व्यवधान

झारखंड के गोमिया में दलित समाज द्वारा सूअर की बलि देने के एक पारम्परिक कार्यक्रम के दौरान विवाद खड़ा हो गया। यह विवाद मुस्लिम समुदाय द्वारा आपत्ति जताने के बाद हुआ। मुस्लिम पक्ष का आरोप है कि कटे सूअर के कुछ टुकड़े उनके मोहल्ले में भी बिखेरे गए थे। फिलहाल गाँव में तनावपूर्ण शांति है। इलाके में पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है। घटना रविवार (19 नवंबर, 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला बोकारो के गोमिया के गाँव अइयर का है। यहाँ रविवार को रविदास समाज के लोगों ने अपनी पारम्परिक पूजा की। इस पूजा के दौरान सूअर की बलि दी गई। बताया जा रहा है कि सूअर की बलि के बाद उसके मांस को आसपास के लोग अपने साथ ले गए। मुस्लिम समुदाय के लोगों का आरोप है कि बलि चढ़ाने वालों ने मांस के टुकड़ों को इधर-उधर बिखेर दिया। कुछ टुकड़े मुस्लिम बस्ती में भी मिले। कुछ ही देर में यह खबर फैल गई और मुस्लिम समुदाय के लोग अपने-अपने घरों से निकल आए।

हालात तनावपूर्ण होता देख कर रविदास समुदाय के लोग भी मोर्चे पर डट गए। दलित समुदाय के लोगों का कहना है कि उनका ये त्योहार 7 साल में एक बार आता है जिसमें वो पारम्परिक तौर पर सूअर की बलि देते हैं। ऐसा वो धान की कटाई से पहले अपने इष्ट देव को खुश करने के लिए करते हैं। रविदास समुदाय के लोग अपनी पूजा में किसी भी प्रकार का व्यवधान नहीं चाहते थे। मामले की जानकारी मिलते ही मौके पर भारी पुलिस बल पहुँचा। पुलिस ने दोनों पक्षों को समझा-बुझा कर अलग किया।

बाद में रविदास समाज और मुस्लिम पक्ष के बीच जिले के सीनियर प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में बैठक हुई। बैठक में दोनों ही पक्ष खुद को सही और दूसरे को गलत बता रहे थे। आख़िरकार सीनियर अधिकारियों ने दोनों पक्षों को फिलहाल शांति बनाए रखने के लिए कहा। बातचीत के दौरान दोनों पक्षों के बीच जमीनी विवाद भी निकल कर सामने आया। प्रशासनिक अधिकारियों ने जनजातीय लोगों के धर्म महासम्मेलन के बाद इस मामले का स्थाई समाधान निकालने की बात कही है। गाँव में एहतियातन पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

गौरतलब है कि अगस्त 2021 में बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में इस से मिलता-जुलता विवाद हुआ था। तब देवरिया के रामलीला गाछी बाजार में शुक्रवार (20 अगस्त, 2021) को ताजिया जुलूस और सुअरिया मेला के आयोजन को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद हो गया था। तब मुस्लिम पक्ष ने ताजिया जुलूस के दौरान लगने वाले सुअरिया मेले का विरोध किया था।तनाव और तनातनी बढ़ने के चलते दोनों पक्षों के लोग चोटिल हुए थे। आक्रोशित हिन्दुओं की पुलिस के साथ भी झड़प हुई थी।

मर गईं जवाहर लाल नेहरू की ‘वनवासी पत्नी’, जिसके कारण ताउम्र झेला समाज का बहिष्कार, उनके पर-नाती राहुल गाँधी कभी मिलने भी नहीं गए

जवाहरलाल नेहरू की वनवासी जनजाति ‘पत्नी’ बुधनी मंझियाइन (Budhni Mejhan) का शुक्रवार (17 नवंबर, 2023) की देर रात झारखंड में पंचेत के नजदीक अपने घर में निधन हो गया। 80 साल की बुधनी की मौत हार्ट अटैक की वजह से हुई। दरअसल, पंडित नेहरू की वजह से उन्हें अपने संथाली समुदाय से ताउम्र बहिष्कार का सामना करना पड़ा था।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, रविवार (19 नवंबर, 2023) को उनका अंतिम संस्कार किया गया। वो अपने पीछे अपनी 60 साल की बेटी रत्ना और 35 साल के पोते बापी को छोड़ गई हैं। उनकी मौत के बाद पंचेत पंचायत के मुखिया भैरव मंडल ने जवाहरलाल नेहरू की ‘वनवासी पत्नी’ के सम्मान में एक स्मारक बनाने के लिए दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) को पत्र लिखा है।

उन्होंने रत्ना के लिए घर और पेंशन की भी माँग की है। हालाँकि इसे लेकर डीवीसी के डिप्टी चीफ इंजीनियर सुमेश कुमार ने कहा, “ये फैसला शीर्ष अधिकारियों से सलाह के बाद ही लिए जा सकते हैं।”

पंडित नेहरू बने बुधनी के बहिष्कार की वजह

बता दें कि 6 दिसंबर, 1959 के दिन बुधनी की जिंदगी ने नया मोड़ ले लिया था। उस दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू वहाँ दामोदर नदी पर बनाए गए पंचेत बाँध के उद्घाटन के लिए पहुँचे थे। दामोदर घाटी निगम (DAC) ने पंडित नेहरू के स्वागत के लिए 15 साल की लड़की बुधनी मंझियान को चुना था।

इस दौरान बुधनी बेहद खुश थी, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि इस पल से उनकी जिंदगी एक बेहद परेशानी भरा मोड़ लेने जा रही है। दरअसल, ये पहला बाँध था जिसका उद्घाटन किसी वनवासी महिला से करवाया जा रहा था। यहीं वजह रही की कि जवाहरलाल नेहरू ने बुधनी को सराहना के तौर पर एक माला दे दी।

बस उत्साह और खुशी के मौके पर दी गई यही माला उनको ताउम्र की परेशानी दे गई। पंडित नेहरू चाहते थे कि बाँध का उद्घाटन किसी ऐसे शख्स से कराया जाए जिसने इसे बनाने में योगदान दिया हो। यही वजह रही कि इसके लिए लोकल मजदूर बुधनी को बुलाया गया था।

पंचेत बाँध के उद्घाटन की उसी रात इस घटना की चर्चा के लिए संथाली समाज की पंचायत बुलाई गई। बुधनी को संथाली पंयाचत में जब यह बताया गया कि जनजातीय परंपराओं के हिसाब से अब उनकी शादी जवाहरलाल नेहरू से हो चुकी है, तो वह खौफ में आ गई, क्योंकि एक-दूसरे को माला पहनाई गई थी।

वनवासी परंपराओं के हिसाब से पंचायत ने पंडित नेहरू के बुधनी के पति होने का ऐलान कर दिया। वनवासी रिवाज के मुताबिक, पंडित नेहरू वनवासी नहीं थे इसलिए संथाली समुदाय ने उनका बहिष्कार किया। इस वजह से खुद ब खुद बुधनी का भी समुदाय ने बहिष्कार कर दिया।

हालाँकि, उस वक्त बुधनी ने दामोदर घाटी निगम में काम करना जारी रखा, लेकिन वो वहाँ अधिक दिनों तक नहीं रह सकीं। इस घटना के दो साल बाद ही 1962 में बुधनी को नौकरी से निकाल दिया गया मजबूरन बुधनी बाद में झारखंड चली गईं और वहाँ 7 साल तक जीने के लिए जद्दोजहद करती रहीं।

इसके बाद में उनकी मुलाक़ात सुधीर दत्ता नाम के एक शख्स से हुई। वो उनके करीब आ गईं। दोनों शादी करना चाहते थे, लेकिन नहीं कर सके। उन्हें डर था कि समाज में उन्हें इसके दुष्परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। हालाँकि, इसके बावजूद वो साथ रहे और दोनों के तीन बच्चे भी हुए।

राजीव गाँधी गए थे मिलने

बताया जाता है कि 1985 में जब राजीव गाँधी को बुधनी के बारे में पता चला तो इसके बाद उन्होंने उनका पता लगा लिया और बुधनी उनसे मिलने भी गईं। इसका फायदा ये हुआ कि उन्हें दामोदर घाटी निगम में उनकी नौकरी वापस मिल गई।

वहीं बुधनी से जब 2016 में उनकी उम्मीदों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “मैं राहुल गाँधी से अपील करती हूँ कि वह हमें एक घर और मेरी बेटी के लिए नौकरी दिलाएँ, ताकि हम अपना बाकी जीवन शांति से बिता सकें।”

बुधनी के साथ बाँध का उद्घाटन करने वाले रावोण मांझी ने एक बार बीबीसी से कहा था, ”जवाहरलाल नेहरू ने हमें मुफ्त बिजली और घर देने का वादा किया था, लेकिन कुछ नहीं हुआ।” जब उनसे बुधनी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह उस घटना को याद नहीं करना चाहते।

PM मोदी ने ऐसा क्या कह दिया कि मुस्कुराने लगे रोहित शर्मा और विराट कोहली: वीडियो में दिखा टीम इंडिया के ड्रेसिंग रूम का नज़ारा, प्रधानमंत्री ने दिया न्योता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खिलाड़ियों से ड्रेसिंग रूम में जाकर मिले और उनका हौसला बढ़ाया। पीएम मोदी द्वारा खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाने का वीडियो अब सामने आया है, जिसमें वो खिलाड़ियों की हौसला-अफजाई करते हुए कहते हैं कि पूरा देश आपके साथ खड़ा है। उन्होंने भारतीय टीम के खिलाड़ियों से एक-एक कर मुलाकात की और सभी का हौसला बढ़ाया। इस दौरान भारतीय क्रिकेट टीम के कोच राहुल द्रविड से भी वो गले मिले और उनसे हौसला बनाए रखने को कहा।

पीएम मोदी का टीम इंडिया के खिलाड़ियों से ड्रेसिंग रूम में मुलाकात का वीडियो सामने आया है। इसमें देखा जा सकता है कि पीएम मोदी टीम के सभी खिलाड़ियों से मुलाकात कर रहे हैं। वह सबसे पहले कप्तान रोहित शर्मा और विराट कोहली से मिलते हैं। वो रोहित शर्मा ने बोलते हैं, “आप लोग 10 मैच जीतकर यहाँ तक आए हैं। ये तो होता रहता है। मुस्कुराइए भाई, देश आप लोगों को देख रहा है।” वीडियों में पीएम मोदी रोहित और विराट के कंधे को थपथपाते हुए भी दिख रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी खिलाड़ियों को दिल्ली आने का भी न्यौता दिया है और उनसे संपर्क करने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि मैं यहाँ बस हौसला बढ़ाने आ गया था, आप लोग दिल्ली आइए, तो जरूर मिलिए। आपसे मुलाकात के लिए समय निकालेंगे।

पीएम मोदी टीम इंडिया के कोच राहुल द्रविड़ से कहते हैं, “आप लोगों ने बहुत मेहनत की है।” इस दौरान पीएम मोदी ने रविंद्र जडेजा से गुजराती में बातचीत की, तो जसप्रीत बुमराह से भी पूछा कि क्या वो गुजराती में बात करते हैं, इसके जवाब में बुमराह कहते हैं “थोड़ो-थोड़ो (थोड़ा-थोड़ा)।” फिर वो श्रेयस अय्यर, सूर्य कुमार यादव, कुलदीप यादव से भी मिलते हैं।

पीएम मोदी ने मोहम्मद शमी को गले से लगा लिया और कहा कि आपने इस बार बहुत अच्छा किया है। वहीं, KL राहुल का नाम लेकर उनका हौसला भी पीएम मोदी बढ़ाते दिखे। समाचार एजेंसी ANI ने पीएमओ के हवाले से ये वीडियो जारी किया है और लिखा है, “19 नवंबर को गुजरात के अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में आईसीसी विश्व कप फाइनल के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टीम इंडिया से उनके ड्रेसिंग रूम में मुलाकात की। पीएम ने खिलाड़ियों से बात की और पूरे टूर्नामेंट में उनके प्रदर्शन के लिए उनका हौसला बढ़ाया।”

बता दें कि भारतीय क्रिकेट टीम विश्व कप के फाइनल मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया से 6 विकेट से हार गई। पिछले 10 सालों में भारतीय टीम एक भी आईसीसी ट्रॉफी नहीं जीत पाया है। इस हार के बाद सभी खिलाड़ियों के चेहरे मायूसी से भरे नजर आए थे। खुद पीएम मोदी इस मौके पर स्टेडियम में मौजूद थे और उन्होंने विजेता कप्तान पैट कंमिस को ट्रॉफी भी सौंपी और इसके बाद रात में भारतीय ड्रेसिंग रूप में जाकर उन्होंने फाइनल मुकाबला हारने वाले खिलाड़ियों से मुलाकात की।