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500 पन्नों की रिपोर्ट, क्या जाएगी महुआ मोइत्रा की लोकसभा सदस्यता: जानिए TMC सांसद पर कार्रवाई की एथिक्स पैनल ने क्यों की सिफारिश

तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा (Mahua Moitra) की मुश्किलें बढ़ गई हैं। लोकसभा की आचार समिति (Ethics Committee) ने उनकी सदस्यता खत्म करने की सिफारिश की है। टीएमसी सांसद के खिलाफ जाँच कर रही समिति ने 500 पन्नों की रिपोर्ट पेश की है। मोइत्रा पर कारोबारी से पैसे और गिफ्ट लेकर सवाल पूछने का आरोप है।

महुआ मोइत्रा पर संसद में पैसे लेकर प्रश्न पूछने और संसद पोर्टल की लॉगइन आईडी-पासवर्ड कारोबारी दर्शन हीरानंदानी को देने के आरोप हैं। समिति ने महुआ के इन कामों को गंभीर आपराधिक, संदेहास्पद और अनैतिक बताया है। उसने कहा है कि उन पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। समिति ने महुआ पर लगे आरोपों की जाँच की समयबद्ध तरीके से जाँच करने की अनुसंशा भी की है।

गौरतलब है कि भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने अक्टूबर में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक पत्र लिख कर महुआ मोइत्रा के खिलाफ जाँच की माँग की थी। उन्होंने कहा था कि मोइत्रा के पूर्व पार्टनर जय अनंत देहाद्राई ने उन्हें इस विषय से अवगत कराया है।

निशिकांत दुबे ने कहा था कि TMC सांसद ने जितने भी प्रश्न बीते दिनों में लोकसभा में पूछे हैं उनमें से अधिकांश अडानी समूह के विरुद्ध हैं और ऐसा दर्शन हीरानंदानी के व्यापार को फायदा पहुँचाने के लिए किया गया था। यह सब हीरानंदानी से महँगे गिफ्ट और पैसे लेने के बदले किया गया।

समिति ने माना है कि महुआ ने अपनी संसद आईडी ‘अनाधिकारिक व्यक्ति’ से साझा की। महुआ ने दर्शन हीरानंदानी से महँगी वस्तुएँ और सुविधाएँ ली। समिति ने इसे गंभीर दुराचार बताते हुए गंभीर कार्रवाई की सिफारिश की है।

अब इस रिपोर्ट को संसद के शीतकालीन सत्र में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को सौंपा जाएगा। इसके बाद वह महुआ मोइत्रा पर कार्रवाई का निर्णय लेंगे। समिति ने इससे पहले निशिकांत दुबे की शिकायत पर जय अनंत देहाद्राई, महुआ मोइत्रा को पूछताछ के लिए बुलाया था।

महुआ ने पहले समिति के सामने तय तारीख पर पेश होने से इनकार कर दिया था। बाद में जब वह 2 नवम्बर 2023 को समिति के सामने पेश हुईं तो बैठक छोड़ कर चली गईं। महुआ के साथ समिति में शामिल विपक्ष के सांसदों ने भी खूब हंगामा काटा था।

आचार समिति ने महुआ के इस आचरण पर भी प्रश्न उठाए हैं और उनसे सहयोग ना मिलने की बात कही है। यदि समिति की अनुशंसा पर लोकसभा स्पीकर एक्शन लेते हैं तो महुआ की सदस्यता जा सकती है। निशिकांत दुबे की शिकायत के आधार पर लोकपाल ने भी महुआ मोइत्रा के खिलाफ सीबीआई जाँच के आदेश दिए हैं।

मोहम्मद शमी की दूसरी बीवी बनने को तैयार है हिरोइन, पर अंग्रेजी सीखने की रखी शर्त: नेटीजन्स बोले- कोलकाता वाली लड़कियों से दूर रहना

वर्ल्ड कप 2023 में अपनी शानदार गेंदबाजी से सबका दिल जीतने वाले भारतीय क्रिकेट टीम के गेंदबाज मोहम्मद शमी इन दिनों एक शादी के प्रपोजल के कारण से चर्चा में है। उन्हें एक एक्ट्रेस ने कहा है कि वो उनसे निकाह करने को तैयार हैं, बस उनकी एक शर्त है।

एक्ट्रेस का नाम पायल घोष है। पायल ने शमी से शादी करने की इच्छा सोशल मीडिया पर खुल्लमखुल्ला जताई है। नीचे पोस्ट में देख सकते हैं कि पायल घोष ने लिखा-

“शमी तुम अपना इंग्लिश सुधार लो। मैं तुमसे निकाह के लिए तैयार हूँ।”

पायल ने यह पोस्ट 2 नवंबर को किया था। लेकिन चर्चा में ये ट्वीट अब आया है। कुछ यूजर्स ने ऐसी बात सोशल मीडिया पर लिखने पर पायल घोष का मजाक भी उड़ाया है।

किसी ने कहा, “तुम उससे निकाह करना चाहती हो, पर वो तुमसे निकाह नहीं करेगा क्योंकि तुम उसके लायक नहीं हो।”

एक यूजर ने कहा किसी का मजाक बनाना अच्छा नहीं है और वैसे भी कोलकाता की लड़कियों से तो शमी अब दूर ही रहने वाले हैं।

शमी के ऊपर बीवी हसीन जहाँ के तंज

बता दें कि मोहम्मद शमी की पहली पत्नी कोलकाता से ही है। उनके साथ विवादों के चलते शमी पर कुछ समय पहले काफी उंगलियाँ उठी थी। आज भी रह रहकर हसीन जहाँ सोशल मीडिया या मीडिया के जरिए शमी पर तंज कसती रहती हैं।

कुछ दिन पहले उन्होंने एक पोस्ट डाला था जिसमें एक भैंसा दिखाकर उसे कहा था- ये अमरोहा का भैंसा है। लोगों ने अंदाजा लगाया था कि चूँकि शमी अमरोहा से हैं तो इसीलिए पोस्ट के लिए हसीन जहाँ उन्हीं का मजाक उड़ा रही हैं।

इसी तरह शमी के वर्ल्ड कप परफॉर्मेंस को देखते हुए भी हसीन जहाँ का कमेंट आया था। उन्होंने मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में कहा था- “कुछ भी है वो अच्छा परफॉर्म कर रहा है। अच्छा खेलेगा, टीम में बना रहेगा तो अच्छा कमाएगा और हमारा भविष्य सुरक्षित रहेगा। मैं टीम इंडिया को शुभकामनाएँ दूँगी लेकिन उसे नहीं।”

हीरोइन रश्मिका मंदाना के बाद अब सचिन तेंदुलकर की बेटी बनी डीपफेक का शिकार, भाई के साथ थी फोटो, AI की मदद से गैर के गले में हाथ डाले दिखाया…

फेमस एक्ट्रेस रश्मिका मंदाना के बाद अब क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर की बेटी सारा तेंदुलकर डीपफेक (Deep Fake) तकनीकी का शिकार बन गई हैं। उनकी एक तस्वीर को डीपफेक तकनीकी के दम पर एडिट कर दी गई है। इस तस्वीर में उनके साथ भाई हैं, लेकिन उनकी जगह किसी और की तस्वीर लगा दी गई।

असली तस्वीर में सारा अपने भाई अर्जुन तेंदुलकर के साथ हैं, लेकिन डीपफेक तकनीकी से अर्जुन तेंदुलकर के चेहरे पर इंटरनेशनल क्रिकेटर और सारा के रूमर्ड बॉयफ्रेंड शुभमन गिल का चेहरा लगा दिया गया। यही नहीं, उस तस्वीर को सोशल मीडिया पर ये कहकर प्रचारित किया गया कि सारा तेंदुलकर ने शुभमन गिल के साथ अपने रिश्ते पर मुहर लगा दी है।

ये तस्वीर की जा रही वायरल

एबीपी की रिपोर्ट के मुताबिक, सारा तेंदुलकर की डीपफेक तस्वीर पोस्ट करते हुए धोनी पोपा नाम के एक अकाउंट से ट्वीट किया गया। इस अकाउंट से लिखा गया कि सारा तेंदुलकर ने कंफर्म कर दिया है कि वो शुभमन गिल को डेट कर रही हैं। हालाँकि, सच्चाई कुछ और ही है।

सारा तेंदुलकर की डीपफेक तस्वीर, फोटो साभार : एबीपी न्यूज

क्या है इस फोटो की सच्चाई?

ये फोटो वास्तव में AI जेनेरेटेड डीपफेक तकनीकी की मदद से बनाई गई है। असली फोटो खुद सारा तेंदुलकर ने अपनी प्रोफाइल पर पोस्ट किया था, जिसमें उनके साथ उनके भाई अर्जुन तेंदुलकर हैं। ये तस्वीर अर्जुन तेंदुलकर के 24वें जन्मदिन के मौके पर सारा ने शेयर की थी।

इस तस्वीर में अर्जुन तेंदुलकर कुर्सी पर बैठे हैं और सारा तेंदुलकर ने उनके कंधों पर हाथ रखी हुई हैं। सारा ने कई तस्वीरें अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर भी पोस्ट की थी, जिसमें चौथी तस्वीर को डीपफेक की मदद से एडिट किया गया है।

बता दें कि हाल ही में रश्मिका मंदाना का डीपफेक वीडियो वायरल हुआ था। इस बारे में उन्होंने एक लंबा नोट शेयर किया था। अभिनेत्री रश्मिका मंदाना ने अपने फर्जी वायरल वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि उनके लिए यह डरावना है और और दुखी करने वाला है।

रश्मिका ने कहा था कि यह सिर्फ उनके लिए नहीं, बल्कि उन सबके लिए डरावना है जो तकनीक का उपयोग करते हैं। रश्मिका के इस फेक वीडियो पर अमिताभ ने भी अपनी आपत्ति जताई थी। इस घटना ने केंद्रीय आईटी मंत्रालय को जाँच शुरू करने और यह सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित किया कि जल्द ही उनकी रिपोर्ट दी जाए।

फ्रेंच किताबें और अंग्रेजी सिनेमा देखने वाला ‘लाल कॉटेज’ का लाल ऐसे बन गया हिंदुत्व का सबसे बड़ा नायक: कहानी तब की जब ‘पाकिस्तान’ में लगती थी संघ की शाखा

भारत के पूर्व उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी बुधवार (8 नवंबर, 2023) को 96 वर्ष के हो गए। मध्य प्रदेश में चुनावी रैलियों में व्यस्त रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शाम को उन्हें जन्मदिवस की बधाई देने के लिए नई दिल्ली स्थित उनके आवास पर पहुँचे। लालकृष्ण आडवाणी ही वो नेता हैं, जिन्होंने रथयात्रा कर के राम मंदिर के मुद्दे को हवा दी थी और इसके 2 वर्ष बाद बाबरी ढाँचे को ध्वस्त कर दिया गया था। उन्हें राम मंदिर आंदोलन का नायक कहें तो ये अतिशयोक्ति नहीं होगी।

कराची में हुआ था लालकृष्ण आडवाणी का जन्म

लालकृष्ण आडवाणी के बारे में बता दें कि उनका जन्म 8 नवंबर, 1927 को सिंध (जो अब पाकिस्तान में है) के कराची शहर में हुआ था। उनका परिवार में उनके अलावा सिर्फ उनके माता-पिता और बहन ही थे। उनके जन्म के तुरंत बाद उनके परिवार ने जमशेद क्वार्टर्स (पारसी कॉलोनी) मोहल्ले में ‘लाल कॉटेज’ नाम का एकमंजिला बँगला बनवाया था। उसी मोहल्ले में कई समृद्ध पारसी समाज के लोग रहते थे। सिंधी हिन्दुओं की आमिल शाखा से उनका परिवार ताल्लुक रखता था।

आमिल समाज के बारे में बता दें कि ये लोग लोहानो वंश के 2 मुख्य भागों में से जुड़े थे जो वैश्य समुदाय से आते थे। मुस्लिम बादशाह भी अपने प्रशासकीय तंत्र में इनकी सहायता लेते थे। ये लोग नानकपंथी होते थे और सिख धर्म से इनकी नजदीकी थी। आगे चल कर सिंध में सरकारी नौकरियों में भी इनका दबदबा रहा। लालकृष्ण के दादा धरमदास खूबचंद आडवाणी संस्कृत के विद्वान थे और एक सरकारी हाईस्कूल के प्रधानाध्यापक भी। उनके पिता किशिनचंद एक व्यापारी थे।

लालकृष्ण आडवाणी का पालन-पोषण संयुक्त परिवार वाले माहौल में हुआ और उन्हें उनके दादा और नानी का भरपूर प्यार मिला। उनके जन्म के समय सिंध अंग्रेजों के बॉम्बे प्रेसिडेंसी का हिस्सा हुआ करता था। उनके घर के मुख्य देवता गुरु ग्रन्थ साहिब ही हुआ करते थे। ‘गुरु मंदिर’ नामक स्थानीय गुरुद्वारा में हिन्दू और सिख अपने-अपने त्योहार पूरे उल्लास के साथ मनाया करते थे। उनके जन्मदिन पर कभी केक नहीं काटा जाता था, बल्कि गुरु ग्रन्थ साहिब का पाठ हुआ करता था।

फिल्मों से लालकृष्ण आडवणी को था विशेष प्यार

आपको ये जान कर सुखद आश्चर्य होगा कि लालकृष्ण आडवाणी बचपन में और युवावस्था में अंग्रेजी फ़िल्में देखा करते थे और खूब अंग्रेजी किताबें पढ़ते थे, ऐसे में बाद में यही लालकृष्ण आडवाणी हिंदुत्व के सबसे बड़े नायक के रूप में उभरे। उनकी शिक्षा-दीक्षा ‘सेंट पैट्रिक्स हाईस्कूल फॉर बॉयज’ में हुई थी। एक ऐसे स्कूल में, जिसकी स्थापना सन् 1845 में आयरलैंड से आए कैथोलिक मिशनरियों ने की थी। वहाँ एक चर्च भी था। पाकिस्तान के राष्ट्रपति रहे परवेज मुशर्रफ भी उसी स्कूल से पढ़े थे।

1936-42 तक की अवधि लालकृष्ण आडवाणी के जीवन में इसी स्कूल में गुजरी। सिनेमा और अंग्रेजी पुस्तकों से लालकृष्ण आडवाणी का लगाव उनके शुरुआती जीवन का एक विशेष हिस्सा है, जिसका जिक्र उन्होंने अपनी आत्मकथा ‘मेरा देश, मेरा जीवन‘ में भी किया है। इसमें उन्होंने बताया है कि कैसे वो अपने 4 मामाओं में सबसे छोटे सुंदर मामा के साथ अक्सर फ़िल्में देखने निकल जाते थे। उन्होंने ‘फेंकेंस्टाइन’ नामक एक डरावनी फिल्म का जिक्र किया है, जो उन्होंने उस जमाने में देखी थी।

ये 1931 की एक हॉरर फिल्म थी, जिसे पेबी वेबलिंग के एक नाटक के आधार पर बनाई गई थी। ये नाटक मैरी शेली की 1818 में आए उपन्यास पर आधारित थी। इसी के नाम पर फिल्म का नाम भी रखा गया। ‘यूनिवर्सल स्टूइडियोज’ ने इस फिल्म का निर्माण किया, जिसके के रीमेक बन चुके हैं। हालाँकि, लालकृष्ण आडवाणी के जीवन में एक ऐसा समय भी आया जब उन्होंने 15 वर्षों तक 1942-56 के दौरान कोई फिल्म नहीं देखी। फिर वो जब मुंबई अपने सुंदर मामा के यहाँ गए तो उन्होंने ‘हाउस ऑफ वेक्स’ नामक फिल्म देखी।

ये एक थ्रीडी फिल्म थी। ये भी एक मिस्ट्री हॉरर फिल्म थी। उस समय 3D बड़ी बात हुआ करती थी, ऐसे में फिल्म को लेकर खासी चर्चा थी। ऊपर से ये रंगीन फिल्म भी थी। जब 1942 में देश में अंग्रेजों के खिलाफ ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ शुरू हुआ, लालकृष्ण आडवाणी ने उसी साल सिंध वाले हैदराबाद स्थित दयाराम गिदूमल कॉलेज में एडमिशन लिया। उसी दौरान विदेशी साहित्य में उनकी रुचि जगी। कॉलेज की लाइब्रेरी में वो पुस्तकें पढ़ने में समय व्यतीत करने लगे।

उन्होंने साइंस फिक्शन लिखने वाले फ्रेंच लेखक जूल्स वर्न के सारे उपन्यास पढ़ डाले – ‘जर्नी टू द सेंटर ऑफ द अर्थ’, ‘ट्वेंटी थाउजेंड लीग्स अंडर द सी’, ‘अराउंड द वर्ल्ड इन 80 डेज’ इत्यादि। यूरोप के साहित्य में जूल्स वर्न का विशेष स्थान है, जो एडवेंचर से भरे उपन्यास लिखा करते थे और तकनीक का इस्तेमाल खूब करते थे। उनके साहित्य को विलियम सेक्सपियर से भी ज़्यादा बार अनुवादित किया गया है। 2010 के दशक में वो सबसे ज़्यादा अनुवादित किए जाने वाले फ्रेंच लेखक थे।

केवल उन्हें ही नहीं, बल्कि कॉलेज की लाइब्रेरी में लालकृष्ण आडवाणी ने चार्ल्स डिकेंस का ‘अ टेल ऑफ टू सिटीज’ और एलेक्जेंडर ड्यूमा का ‘द थ्री मस्केटियर्स’ नामक उपन्यास भी पढ़ी थी। इसमें पहले वाला उपन्यास एक फ्रेंच डॉक्टर की कहानी है, जो फ्रांस में हुई क्रांति से पहले के लंदन और पेरिस में सेट है। फ़्रांस के जेल में कैद उस डॉक्टर और इंग्लैंड में उसकी बेटी से उसके मिलने की ये कहानी है, जिसे उसने कभी नहीं देखा होता है।’

वहीं दूसरा वाला उपन्यास एक एडवेंचर वाला है, जिसमें 17वीं शताब्दी के एक युवक की कहानी है। सोचिए, लालकृष्ण आडवाणी उस समय फ्रेंच लेखकों के कितने दीवाने हो उठे थे। ये उस ज़माने की बात है जब भारत आज़ाद भी नहीं हुआ था। लालकृष्ण आडवाणी तब क्रिकेट के भी दीवाने थे और रेडियो पर स्थानीय भाषाओं में कमेंट्री सुना करते थे। लेकिन, उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण क्षण तब आया था जब 14 वर्ष की आयु में उन्होंने RSS (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) की सदस्यता ली।

RSS का लालकृष्ण आडवणी के जीवन पर विशेष प्रभाव

अपने एक दोस्त के माध्यम से वो शाखा में पहुँचे थे। वहीं उनकी जान-पहचान पूर्णकालिक प्रांत प्रचारक राजपाल पुरी से हुई जो उनके मार्गदर्शन भी बने। दीनदयाल उपाध्याय के अलावा उनका ही सबसे ज़्यादा प्रभाव लालकृष्ण आडवाणी पर रहा। स्कूली ज्ञान और घर के लाड़-दुलार में धनी रहे आडवाणी को देश-दुनिया की गतिविधियों के बारे में संघ की शाखा से ही पता चलता था। श्यामदास की बौद्धिक चर्चा में उन्हें आक्रांताओं से देश को आज़ाद कराने की लड़ाई में कूदने की प्रेरणा मिली।

उसी दौरान उन्हें द्विराष्ट्र वाले सिद्धांत के बारे में भी पता चला, जिसके तहत मुस्लिम नेता अपने लिए अलग इस्लामी मुल्क माँग रहे थे। विभाजन के बारे में सोच कर ही वो हैरान हो उठते थे। इसी दौरान उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज, महाराणा प्रताप और गुरु गोविन्द सिंह के बारे में पुस्तकें पढ़ीं। राजस्थान यात्रा के दौरान उन्होंने जेम्स टॉड की ‘एन्नेल्स एन्ड एंटीक्विटिज ऑफ राजस्थान’ नामक पुस्तक भी पढ़ी। इन्हीं सब के कारण उनके भीतर बदलाव आए और वो राष्ट्रवाद की तरफ झुकते चले गए।

लालकृष्ण आडवाणी की प्रतिभा के बारे में भी जान कर आपको सुखद आश्चर्य होगा। मात्र 17 वर्ष की उम्र में एक शिक्षक के रूप में उन्होंने अपनी पहली नौकरी की, तब उनके कई छात्र उनकी ही उम्र के थे। यहाँ एक और पुस्तक का जिक्र करना पड़ेगा, जिसने लालकृष्ण आडवाणी के जीवन पर बड़ा प्रभाव डाला, जो है – डेल कार्नेगी की ‘How to Win Friends & Influence People’, यानी दोस्त कैसे बनाएँ और लोगों को प्रभावित कैसे करें।

लालकृष्ण आडवाणी, वीर सावरकर और एक सिख दोस्त

इसी दौरान लालकृष्ण आडवाणी ने राजपाल पुरी की सलाह के बाद वीर विनायक दामोदर सावरकर की 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम पर लिखी पुस्तक पढ़ी। इस पुस्तक को खरीदने के लिए उन्होंने अपनी जमापूंजी से 28 रुपए खर्च किए थे। इसी से उन्हें प्रेरणा मिली कि वो अपना जीवन राष्ट्रकार्य को समर्पित करें। नवंबर 1947 में ऐसा समय भी आया जब आडवणी सावरकर से उनके बम्बई स्थित आवास पर मिले और विभाजन को लेकर दोनों के बीच चर्चा हुई।

इसी दौरान उन्हें अपने एक सिख दोस्त की याद आई। कराची का उक्त सिख उनके घर के पास ही रहता था, RSS का समर्पित स्वयंसेवक भी था। विभाजन के पूर्व जब दंगे शुरू हो गए थे तब उसके परिवार को भी प्रताड़ित किया गया और उन्हें वहाँ से पलायन करना पड़ा। जान बचाने के लिए उसे अपने केस कटवाने पड़े और बाल मुँडवाने पड़े। इससे उसे इतना सदमा पहुँचा कि वो कई वर्षों तक मानसिक विक्षिप्त रहा। कराची में अपने अंतिम दिनों में लालकृष्ण आडवणी स्वामी रंगनाथानन्द द्वारा गीता व्याख्या सुनते थे, जिसका उनके जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा।

ये थे लालकृष्ण आडवाणी के बचपन और शुरुआती युवावस्था के दिन। आज से 33 वर्ष पहले यानी 1990 में आडवाणी ने हिन्दुओं को जोड़ने और राम मंदिर निर्माण की माँग के लिए गुजरात के सोमनाथ से अयोध्या तक के लिए रथ यात्रा निकाली। यह 25 सितम्बर को सोमनाथ से निकली थी और इसको अलग-अलग प्रदेशों से होते हुए 30 अक्टूबर, 1990 को अयोध्या पहुँचना था। इस यात्रा के सारथी वही नरेंद्र मोदी थे, जो आज देश के प्रधानमंत्री हैं। उस समय वे गुजरात भाजपा के संगठन महामंत्री हुआ करते थे। असल में, राष्ट्रीय स्तर पर मोदी का अवतरण इसी रथ यात्रा के जरिए हुआ था।

₹15000 करोड़ महादेव सट्टेबाजी ऐप मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रमोटर सहित 32 पर FIR, छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल को ₹508 करोड़ देने का है आरोप

मुंबई पुलिस ने महादेव बेटिंग ऐप मामले में 15,000 करोड़ रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में 32 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। एफआईआर के अनुसार, महादेव बेटिंग ऐप एक अवैध जुआ ऐप था। यह ऐप 2019 में लॉन्च किया गया था और इसके माध्यम से यूजर क्रिकेट, फुटबॉल, टेनिस और अन्य खेलों में सट्टा लगाते थे।

इस मामले में भाजपा ने एक आरोपित शुभम सोनी का वीडियो जारी किया था। उसमें सोनी ने कहा था कि बताया था कि छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल को 2023 के विधानसभा चुनाव के लिए 508 करोड़ रुपए दिए गए थे। माटुंगा पुलिस के अनुसार, ऐप के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर, मुख्य आरोपी रवि उप्पल, शुभम सोनी और अन्य लोगों के खिलाफ मंगलवार (7 नवंबर 2023 ) को पहली FIR दर्ज की गई।

पुलिस अधिकारी ने बताया कि 30वीं कुर्ला अदालत के निर्देश पर भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 120-बी (साजिश), आईटी अधिनियम (साइबर आतंकवाद के लिए) और जुआ अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। एफआईआर के मुताबिक, आरोपितों ने साल 2019 से अब तक लोगों से करीब 15,000 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की है।

बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पिछले सप्ताह कहा था कि फॉरेंसिक विश्लेषण और एक ‘कैश कूरियर’ द्वारा दिए गए बयान से चौंकाने खुलासे हुए हैं। यह बात सामने आई है कि महादेव सट्टेबाजी ऐप के प्रमोटरों ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री बघेल को अब तक लगभग 508 करोड़ रुपए का भुगतान किया है। ईडी ने कहा था कि इस बात की जाँच की जाएगी।

भाजपा द्वारा जारी वीडियो में शुभम सोनी कहा था कि वह ऐप का मालिक है और उसके पास छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल को अब तक 508 करोड़ रुपए का भुगतान करने के सबूत हैं। बता दें कि केंद्र सरकार ने प्रवर्तन निदेशालय की अपील पर 5 नवंबर 2023 को महादेव ऐप और रेड्डीअन्नाप्रिस्टोप्रो जैसे अवैध सट्टेबाजी से जुड़े 22 ऐप्स को ब्लॉक करने के आदेश दिए थे।

बता दें कि 22 अवैध सट्टेबाजी प्लेटफार्मों पर प्रतिबंध लगाने की कार्रवाई प्रवर्तन निदेशालय द्वारा एक अवैध सट्टेबाजी ऐप सिंडिकेट के खिलाफ की गई जाँच और उसके बाद छत्तीसगढ़ में महादेव ऐप के संबंध में की गई लगातार छापेमारी के बाद की गई है।

मनी लॉन्ड्रिंग क्या है?

मनी लॉन्ड्रिंग एक ऐसा तरीका है जिससे अवैध धन को वैध दिखाया जाता है। मनी लॉन्ड्रिंग के कई तरीके हैं, जिनमें निवेश करना, व्यवसाय खरीदना, संपत्ति खरीदना और रिश्वत देना शामिल हैं। भारत में मनी लॉन्ड्रिंग की रोकथाम के लिए कई कानून हैं। इनमें मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम 2002 और आपराधिक प्रक्रिया संहिता 1973 शामिल हैं।

‘केजरीवाल इस्तीफा दें या जेल से सरकार चलाएँ’: जनता से सवाल पूछेगी AAP, ED की पूछताछ से पहले संभावित गिरफ़्तारी को भुनाने में लगी पार्टी

आम आदमी पार्टी (AAP) ने दिल्ली आबकारी नीति के मामले में पूछताछ के लिए बुलाए गए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की संभावित गिरफ्तारी का राजनीतिक फायदा उठाने की तैयारी की है। अब AAP पूरे देश में लोगों से इस मुद्दे पर जुड़ कर भावनात्मक समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है। AAP कार्यकर्ता ने लोगों से पूछेगी कि क्या केजरीवाल को दिल्ली के सीएम पद से इस्तीफा देना चाहिए या जेल से ही वो सरकार चलाएँ।

तिहाड़ जेल से सरकार चलाने की तैयारी!

आम आदमी पार्टी के विधायक और दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के प्रभारी दुर्गेश पाठक इस बारे में जानकारी दी। पाठक ने मंगलवार (7 नवंबर 2023) को कहा कि आम आदमी पार्टी अरविंद केजरीवाल को लेकर लोगों की राय जानेगी। इसके लिए दिल्ली भर में हर घर तक पार्टी पहुँचेगी और सड़क-सड़क पर लोगों से राय पूछेगी।

पाठक ने कहा कि दिल्ली के एक-एक व्यक्ति से संपर्क करके पार्टी जनमत संग्रह कराएगी। इसमें लोगों से पूछा जाएगा कि क्या मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भाजपा के सामने झुक जाना चाहिए और इस्तीफा दे देना चाहिए या फिर दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद रहकर भी दिल्ली की सरकार चलानी चाहिए।

पार्षदों-विधायकों की माँग, जेल से चलाई जाए सरकार

आम आदमी पार्टी के नेता दुर्गेश पाठक ने कहा, “एमसीडी की बैठक में कई अहम फैसले लिए गए हैं। इसके बाद इसी बैठक में विधायकों और पार्षदों ने माँग की है कि अगर अरविंद केजरीवाल को प्रवर्तन निदेशालय (ED) जेल में भी डाल देती है तो उन्हें जेल से ही सरकार चलाना चाहिए। इसके बाद फैसला हुआ है कि ये फैसला जनता पर छोड़ देनी चाहिए।”

पाठक ने आगे कहा, “अब इस मुद्दे पर दिल्ली और पूरे देश में जनमत संग्रह कराया जाएगा। इसी जनसंवाद से पता चल जाएगा कि क्या अरविंद केजरीवाल को दिल्ली के सीएम पद से इस्तीफा दे देना चाहिए या तिहाड़ जेल से सरकार चलानी चाहिए। इसके लिए AAP के पार्षद और विधायक देश भर में अभियान चलाकर लोगों की राय जुटाएँगे।”

ईडी के नोटिस पर नहीं पहुँचे अरविंद केजरीवाल

पाठक का बयान ED द्वारा दिल्ली आबकारी नीति घोटाले से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जाँच के सिलसिले में अरविंद केजरीवाल को तलब करने के एक हफ्ते बाद आया है। केजरीवाल ने यह कहते हुए समन को नजरअंदाज कर दिया था कि यह राजनीति से प्रेरित था। वो पूछताछ के लिए ED के सामने पेश होने की जगह मध्य प्रदेश में अपनी पार्टी के लिए चुनाव प्रचार कर रहे हैं।

450 रोहिंग्या मुस्लिमों को वापस भेजने के बाद 47 दलाल गिरफ्तार: 7 राज्यों में NIA और असम पुलिस की कार्रवाई, घुसपैठियों को बसाने के पीछे पूरा का पूरा गिरोह

असम में त्रिपुरा से ट्रेन के माध्यम से पहुँचे 450 रोहिंग्या मुस्लिमों को वापस भेज दिया गया। असम के स्पेशल DGP (विशेष पुलिस महानिदेशक) हरमीत सिंह ने बताया कि सूचना के आधार पर पुलिस सतर्क थी। अवैध घुसपैठियों को सीमा सुरक्षा बलों की सहायता से वापस भेजा गया। जुलाई में असम के स्पेशल टास्क फ़ोर्स (STF) ने एक ऑपरेशन लॉन्च किया था। इस अवैध घुसपैठ और मानव तस्करी में सक्रिय दलालों की पहचान करने के लिए ये ऑपरेशन चलाया गया था।

SDGP ने बताया कि ऐसे 10 दलालों को त्रिपुरा से दबोचने में कामयाबी मिली। उनसे पूछताछ के आधार पर जाँच की गई तो पता चला कि ये राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है जिसके दुष्प्रभाव कई राज्यों पर पड़े हैं। उन्होंने बताया कि पहले दिन से ही मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा (जो राज्य के गृह मंत्री भी हैं) को इस मामले की जानकारी थी और सरकार ने इस मामले को NIA (राष्ट्रीय जाँच एजेंसी) के पास भेजने का निर्णय लिया। फिर केंद्रीय गृह मंत्रालय से इस संबंध में निवेदन किया गया।

असम के विशेष पुलिस प्रमुख हरमीत सिंह ने जानकारी दी कि NIA ने इस मामले की जाँच अपने हाथों में ली और मिलजुल कर जाँच की गई जिसके बाद देश भर में ऐसे दलालों की सूची तैयार की गई जो घुसपैठियों की मदद करते हैं। बकौल स्पेशल DGP, अब इस मामले में बुधवार (8 नवंबर, 2023) को तड़के सुबह ऑपरेशन लॉन्च किया गया जिसमें 47 ऐसे दलाल पकड़े गए हैं जो एक गिरोह बना कर काम कर रहे थे। इनमें से 25 तो अकेले त्रिपुरा से गिरफ्तार किए गए हैं।

वहीं 9 कर्नाटक से, 5 दलाल असम से, 3 पश्चिम बंगाल से, 3 तमिलनाडु से और एक-एक हरियाणा और तेलंगाना से दबोचे गए हैं। SDGP ने बताया कि NIA और असम पुलिस ने मिल कर परस्पर सहयोग करते हुए ये अभियान चलाया है। इसमें विभिन्न स्थानीय पुलिस ने भी मदद की। असम पुलिस की इस प्रकरण में 17 टीमें ग्राउंड पर हैं। बता दें कि म्यांमार और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी मुल्कों से बड़ी संख्या में रोहिंग्या मुस्लिम भारत में आकर बसे हुए हैं।

समर्थन माँगने आया कॉन्ग्रेस का कैंडिडेट, रोते हुए पैरों में गिर पड़ा विधायक का बेटा: बोला- गोली मार दो, भागे कार्यकर्ता

राजस्थान के अलवर जिले की राजगढ़-लक्ष्मणगढ़ विधानसभा क्षेत्र में एक अजीब मामला सामने आया है। इस सीट से कॉन्ग्रेस प्रत्याशी मांगीलाल मीणा विधायक जौहरी लाल मीणा के घर समर्थन माँगने के लिए पहुँचे। इस दौरान जौहरी लाल का बेटा फूट-फूटकर रोने लगा और कॉन्ग्रेस प्रत्याशी के पैरों में गिर गया। इसके बाद वे वहाँ से भाग गए।

जानकारी के मुताबिक, इस सीट से कॉन्ग्रेस ने वर्तमान विधायक जौहरी लाल का टिकट काट दिया है। उनकी जगह पार्टी ने मांगीलाल मीणा को टिकट दिया है। जब मांगीलाल विधायक जौहरी लाल के घर पहुँचे तो जौहरी लाल का बेटा उनके पैरों में गिरकर फूट-फूटकर रोने लगा। उसने ऐसी माँग की कि मांगीलाल उलटे पाँव वहाँ से निकल गए।

जौहरी लाल के बेटे ने कहा कि उसके परिवार के साथ कॉन्ग्रेस और भाजपा दोनों ने धोखा किया है। उसके भाई को राजनीतिक साजिश के तहत फँसाया गया और उसे जेल भेज दिया गया। जौहरी लाल के बेटे ने कहा कि यदि उसे जल्दी नहीं निकाला गया तो वो जेल में ही मर जाएगा।

जौहरी लाल के बेटे ने कहा, “इन लोगों के कारण ही मेरा भाई जेल में है। उसे जमानत नहीं मिलेगी तो वो मर जाएगा। उसकी मौत की जिम्मेदारी कॉन्ग्रेस और भाजपा के प्रत्याशियों की होगी। ये दोनों ही हमारे परिवार को तबाह करना चाहते हैं। मेरे भाई को राजनीति की वजह से फँसाया गया है। हमें गोली मार दी जाए। ऐसी राजनीति से तो अच्छा है कि हम मर ही जाएँ”

बता दें कि जौहरी लाल मीणा के एक बेटे को गैंगरेप के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। फिलहाल वह जेल में बंद है। परिवार ने उसे राजनीतिक वजहों से फँसाने का आरोप लगाया है। कहा जा रहा है कि बेटे के गैंगरेप में फँसने के कारण ही जौहरी लाल का टिकट कॉन्ग्रेस ने काटा है।

इस घटना के बाद राजगढ़-लक्ष्मणगढ़ विधानसभा सीट पर कॉन्ग्रेस के विधायक रहे जौहरी लाल मीणा ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। उन्होंने कॉन्ग्रेस हाईकमान पर पैसे लेकर टिकट बेचने का भी आरोप लगाया। जौहरी लाल ने कहा कि उनका टिकट मांगीलाल मीणा को बेच दिया गया।

सेक्स और बच्चे पैदा करने में अमीरी-गरीबी, साक्षर-अनपढ़, जाति-धर्म का क्या रोल: नीतीश ने जो कहा और भारत सरकार के आँकड़ों में क्या है कनेक्शन?

बिहार विधानसभा में मंगलवार (7 नवंबर 2023) को जनसंख्या वृद्धि पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा दिए गए बयान पर कल से हंगामा मचा हुआ है। नीतीश कुमार का बयान महिलाओं की शिक्षा और उनके सेक्स के प्रति रवैये को लेकर था। आखिरकार नीतीश को अपने बयान पर माफी माँगनी पड़ी है।

हालाँकि, नीतीश कुमार का बयान कुछ भी रहा हो, यह जानना जरूरी है कि आखिर महिला और पुरुष के बीच होने वाले सेक्स और बच्चे पैदा करने में अमीरी-गरीबी, पढ़ाई-लिखाई और जाति धर्म का क्या रोल है? इन सब प्रश्नों के उत्तर हमें बीते समय में सामने आए देश के कुछ सर्वे बताते हैं।

ऐसा ही एक सर्वे होता है नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS) का। इसके जरिए सरकार देश में परिवारों से जुड़ी हुई महत्वपूर्ण जानकारी इकट्ठा करती है। इसी सर्वे में एक हिस्सा होता है टोटल फर्टिलिटी रेट यानी TFR का।

आखिर TFR क्या है?

TFR वह संख्या होती है, जो बताती है कि देश में एक महिला अपने जीवनकाल में औसतन कितने बच्चों को जन्म देती है। किसी भी देश का TFR यदि 2.1 से अधिक होता है तो उसकी जनसंख्या बढ़ती है। यानी देश की महिलाओं के औसतन 2.1 से अधिक बच्चे होते हैं, तो इससे देश की जनसंख्या बढ़ती है।

NFHS-5 सर्वे के आधार पर वर्तमान में भारत का औसत TFR 2 है। इसका अर्थ है कि देश की जनसंख्या अब घटने की तरफ जाएगी। वहीं, बिहार में TFR का यह आँकड़ा 2.98 है। इसका मतलब है कि बिहार में महिलाएँ देश की औसत दर से अधिक बच्चे पैदा कर रही हैं।

हालाँकि, समय के साथ बिहार के TFR में कमी आई है, लेकिन अभी भी यह देश के कई राज्यों और राष्ट्रीय औसत से अधिक है। अब प्रश्न यह उठता है कि आखिर TFR का नीतीश कुमार के बयान से क्या लेना-देना है।

दरअसल, सर्वे में यह सामने आया है कि TFR पर महिला की पढ़ाई-लिखाई, उसकी आर्थिक पृष्ठभूमि, उसके धर्म और जाति और यहाँ तक कि वह शहर या गाँव किस इलाके में रहती हैं। इसका फर्क पड़ता है। यह बात इसी NFHS-5 में सामने आई है।

नीतीश के बयान का जाति-धर्म, पढ़ाई-लिखाई और शहर-गाँव से क्या लेना-देना?

NFHS की रिपोर्ट के अनुसार, देश में जो महिलाएँ अनपढ़ हैं, उनके सबसे ज्यादा बच्चे हैं। ऐसी महिलाओं के औसतन 2.82 बच्चे हैं। जिन महिलाओं की शिक्षा 5 वर्ष से कम हुई है, उनके औसतन 2.3 बच्चे हैं। वहीं, 5-7 वर्ष की शिक्षा पाने वाली महिलाओं के 2.21 बच्चे हैं।

8-9 वर्ष तक शिक्षा पाने वाली महिलाओं के 2.12 बच्चे हैं, जबकि 10-11 साल की शिक्षा पाने वाली महिलाओं के 1.88 बच्चे हैं। वहीं, 12 साल से अधिक शिक्षा पाने वाली महिलाओं के सबसे कम 1.78 बच्चे हैं।

नीतीश TFR

किसी महिला के कम या अधिक बच्चे पैदा करने पर मात्र शिक्षा का ही नहीं, बल्कि उसके आवासन और आर्थिक स्थिति का भी फर्क पड़ता है। जहाँ शहरों में रहने वाली महिलाओं के 1.6 बच्चे हैं, वहीं ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाली महिलाओं के 2.41 बच्चे हैं।

शहरी क्षेत्रों में महिलाओं के कम बच्चे पैदा करने का कारण अच्छी शिक्षा व्यवस्था, एकल परिवार व्यवस्था और रहन-सहन का महंगा होना एक कारण हो सकता है।

सिर्फ शिक्षा और आवास ही नहीं, जाति-धर्म भी एक फैक्टर

कोई महिला कितने बच्चे पैदा करती है, इस पर उसके धर्म और जाति का भी फर्क पड़ता है। यदि धर्म के आधार पर देखा जाए तो देश में सर्वाधिक TFR मुस्लिमों का है। हिन्दू, सिख, ईसाई तथा बौद्ध अब 2 के TFR से कहीं नीचे आ चुके हैं। आने वाले समय में इनकी जनसंख्या घटेगी, जबकि मुस्लिमों की जनसंख्या बढ़ेगी।

देश में पिछड़ी और अनुसूचित जाति एवं जनजातियों में भी महिलाएँ, अन्य वर्गों की महिलाओं की तुलना में अधिक बच्चे पैदा कर रही हैं। सामान्य वर्ग में TFR अब रिप्लेसमेंट लेवल (जितने बच्चे पैदा होने पर जनसंख्या यथावत बनी रहे) से कहीं नीचे हैं।

किसी परिवार के पास कितनी सम्पत्ति है, इसका फर्क उस परिवार की महिला के बच्चे पैदा करने पर पड़ता है। NFHS की रिपोर्ट बताती है कि देश में अधिक पैसे वाले लोग कम बच्चे पैदा कर रहे हैं, जबकि सबसे निर्धन लोग सबसे अधिक बच्चे पैदा कर रहे हैं।

तो क्या नीतीश का बयान सही सिद्ध होता है?

नहीं, नीतीश कुमार के बयान में उपयोग की गई भाषा पर अधिकांश लोगों को आपत्ति है। नीतीश कुमार ने जिस प्रकार से विधानसभा के भीतर सेक्स को लेकर बात की, उससे महिला विधायक भी नाराज थीं। वह अपनी बात को अन्य तरीके से समझा सकते थे, जिससे लोगों को गुस्सा नहीं आता। हालाँकि, उन्होंने अब माफ़ी भी माँग ली है।

MMS वीडियो लीक होने के बाद गुनगुन गुप्ता ने कर ली आत्महत्या? इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर को लेकर सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावे, जानिए क्या है सच्चाई

सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर गुनगुन गुप्ता का एक अश्लील वीडियो वायरल हो गया था, जिसके बाद वो खासी चर्चा में आ गईं। इस वीडियो के सामने आने के बाद ये चर्चा चलने लगी कि गुनगुन गुप्ता ने आत्महत्या कर ली है। आने डांस के वीडियो के कारण इंस्टाग्राम पर लोकप्रिय गुनगुन गुप्ता मात्र 19 साल की हैं और उनके कंटेंट खासे वायरल होते हैं। अब उनके आत्महत्या की बात कही जा रही है। दावा किया जा रहा है कि अपने वायरल अश्लील वीडियो से आहत होकर उन्होंने आत्महत्या कर ली है।

इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर गुनगुन गुप्ता के आत्महत्या के दावे

‘ukweb’ नामक ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) हैंडल ने पूरे टीवी के खबर वाले फॉर्मेट में गुनगुन गुप्ता के आत्महत्या की बात कही। उसने तस्वीरों के साथ लिखा, “ब्रेकिंग न्यूज़: गुनगुन गुप्ता का हुआ निधन। वायरल वीडियो की वजह से की ख़ुदकुशी।” इसने जो तस्वीर शेयर की उसमें गुनगुन गुप्ता की फोटो पर माला पहनाई हुई है, जैसे मृतकों की तस्वीर पर पहनाते हैं। साथ ही अपनी वेबसाइट पर भी वीडियो के लिंक्स शेयर किए। हालाँकि, अश्लील वीडियो का लिंक शेयर करना गलत है।

ठीक इसी तरह की हूबहू पोस्ट एक अन्य ट्विटर हैंडल ने भी की:

इसी तरह की चीजें फेसबुक पर भी चलाई गईं। ‘राजस्थान का लड़का’ नामक फेसबुक पेज ने एक वीडियो डाल कर लिखा, “गुनगुन गुप्ता का आत्महत्या से पहले का ये आखिरी वीडियो वायरल।”

गुनगुन गुप्ता के आत्महत्या के दावे वाला वीडियो वायरल

MMS वीडियो लीक के बाद गुनगुन गुप्ता ने की आत्महत्या?

आपने देखा कि कैसे गुनगुन गुप्ता के आत्महत्या की बातें कही जा रही हैं। हालाँकि, सच्चाई ये है कि गुनगुन गुप्ता के आत्महत्या को लेकर कोई भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। उनके इंस्टाग्राम हैंडल पर भी 2 दिन पहले तस्वीर अपलोड की गई है, ऐसे में अचानक उनके आत्महत्या की बात अफवाह की है। अगर ऐसा कुछ होता तो उनके किसी सोशल मीडिया हैंडल से ज़रूर ऐसी जानकारी दी जाती। किसी मेनस्ट्रीम मीडिया संस्थान में भी ये खबर नहीं है, ऐसे में ये विश्वसनीय नहीं ही लगती।

याद दिलाते चलें कि सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर गुनगुन गुप्ता का अश्लील वीडियो लीक हो गया था। इस वीडियो में वो एक लड़के के साथ वीडियो कॉल पर दिखाई दे रही हैं। गुनगुन गुप्ता इंस्टाग्राम पर खासी सक्रिय हैं, जहाँ उनके 59 लाख फॉलोवर्स हैं। इतना ही नहीं, स्नैपचैट पर भी उनके 6 लाख से अधिक फॉलोवर्स हैं। इसी तरह फेसबुक पर उनके 2 लाख से ज़्यादा फॉलोवर्स हैं। यूट्यूब पर भी 66,000 लोगों ने उनके चैनल को सब्स्क्राइब कर रखा है। ऐसे में उनका वीडियो वायरल होना चर्चा का विषय बना हुआ है।

इसमें गुनगुन गुप्ता कथित तौर पर वीडियो कॉल पर कपड़े उतारते हुए नज़र आ रही हैं। वो अपने स्तन और प्राइवेट पार्ट्स दिखाती नज़र आ रही हैं। वहीं वीडियो कॉल पर उनके साथ जुड़ा लड़का भी एक्सप्रेशंस दे रहा है। टेलीग्राम पर ये वीडियो खासा वायरल हो रहा है। गुनगुन गुप्ता ने इस पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया जारी नहीं की है। इंस्टाग्राम पर उनके डांस वाले वीडियो अक्सर वायरल होते हैं। एक वीडियो में वो गरीबों को वस्त्र वितरित करते हुए भी दिखाई दे रही हैं।