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पहली बीबी के रहते दूसरी से निकाह, चार बच्चों को किया दाने-दाने को मोहताज: समझाने गई सास तो दामाद नईम अंसारी ने कर दी हत्या

झारखण्ड के दुमका से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जहाँ पहली बीबी के रहते दूसरी स्त्री से निकाह और पहली सास की हत्या का मामला सामने आया है। आरोप के मुताबिक दामाद ने अपनी दूसरी बीबी के घरवालों के साथ मिलकर पहली बीबी की माँ की पहले पिटाई की और फिर गला दबा कर हत्या कर दिया। घटना झारखण्ड के शिकारीपाड़ा थाना क्षेत्र के शिवतल्ला गाँव की है। 

दरअसल, इस मामले में मंगलवार (7 नवंबर, 2023) की शाम शिकायत मिलने के बाद ससुराल समझाने गई 55 साल की मोमिन बीबी पर दामाद और सौतन के घरवालों ने पिटाई करने के बाद गला दबा दिया। वहीं पुलिस ने मृतका के बेटे नौशाद अंसारी के बयान पर दामाद नईम अंसारी, कैरामत मियाँ, जियाउल अंसारी, चुनकी खातून, सोनाभन बीबी, पुसिया अंसारी व रिजाउल अंसारी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है। वहीं मुख्य आरोपित फरार है। पुलिस आरोपित नईम अंसारी की तलाश कर रही है।

क्या है पूरा मामला 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मृतका रांगा गाँव की रहने वाली थी। मृतका के बेटे नौशाद ने बताया कि उसकी बहन की शादी शिवतल्ला गाँव के नईम अंसारी के साथ हुई थी। चार बच्चे होने के बाद भी नईम ने गाँव  की एक दूसरी महिला से निकाह कर लिया।

निकाह करने के बाद बहन को अनाज के लिए तरसाने लगा। मंगलवार को बहन ने माँ को फोन कर बताया कि घर में अनाज नहीं है। नईम अंसारी बच्चों को भूखा रख रहा है, खाने को अनाज तक नहीं दे रहा। जिसके बाद वह बेटे के साथ बेटी की ससुराल दामाद को समझाने गई। इस दौरान 55 साल की मोमिन बीबी पर दामाद नईम अंसारी और दूसरी बीबी के घरवालों ने माँ-बेटे पर हमला कर दिया।

दामाद नईम अंसारी ने पहले तो धक्का-मुक्की की। इसके बाद जीजा नईम ने फोन कर दूसरी बीबी के घरवालों को बुला लिया। उन लोगों ने घर आते ही उसकी और माँ  की जमकर पिटाई की। फिर नईम ने माँ  का गला दबा दिया, जिससे वह बेहोश हो गई। बाद में उसे अस्पताल ले जाया गया जहाँ उसकी मौत हो गई।

आरोप के मुताबिक वह बस दामाद को समझाने गई थी कि वह अपने बच्चों को भूखा ना रखे। बस इसी बात पर दामाद और सास में विवाद शुरु हुआ जिसके बाद उसने सास का गला दबा कर हत्या कर दी। वहीं पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है।

पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है, पुलिस ने मृतका मोमिन बीबी के बेटे नौशाद अंसारी के बयान पर दामाद नईम अंसारी, कैरामत मियाँ, जियाउल अंसारी, चुनकी खातून, सोनाभन बीबी,पुसिया अंसारी व रिजाउल अंसारी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है। इस मामले में पुलिस आगे की कारवाई कर रही है। 

कतर के कोर्ट में भारत ने की अपील, नौसेना के 8 पूर्व अधिकारियों को सुनाई थी मौत की सजा: विदेश मंत्रालय बोला- मामला संवेदनशील, अटकलें ना लगाएँ

भारतीय नौसेना के 8 पूर्व अधिकारियों को कतर में दी गई मौत की सजा पर भारत सरकार ने वहाँ की कोर्ट में अपील की है। इसकी जानकारी भारत के विदेश मंत्रालय ने दी है। दरअसल, अक्टूबर में कतर की एक अदालत ने इन सभी को सजा सुनाई थी। ये सभी सितंबर 2022 में जासूसी के झूठे आरोप में गिरफ्तार किया था।

विदेश मंत्रालय ने गुरुवार (9 नवंबर 2023) को कहा, “फैसला गोपनीय है। निर्णय देने वाली अदालत ने हमारी कानूनी टीम के साथ साझा किया गया। सभी कानूनी विकल्पों पर विचार करते हुए अपील दायर की गई है। हम कतर के अधिकारियों के संपर्क में हैं। हमें 7 नवंबर को जेल में बंद भारतीयों के साथ एक और कांसुलर एक्सेस भी मिला।”

विदेश मंत्रालय ने आगे कहा, “हम सभी भारतीयों को कानूनी और कांसुलर समर्थन देना जारी रखेंगे और हम सभी से मामले की संवेदनशील प्रकृति को देखते हुए अटकलों में शामिल नहीं होने का आग्रह करते हैं।” मंत्रालय ने कहा कि वह कतर में बंद भारतीय अधिकारियों के परिवार के सदस्यों के साथ भी संपर्क में है।

कतर की क्यों कैद में हैं पूर्व अधिकारी

नौसेना के ये सभी पूर्व अधिकारी कतर की राजधानी दोहा की एक प्राइवेट कंपनी में काम कर रहे थे। ये कंपनी टेक्नोलॉजी और कंसल्टेंसी का काम करती है। 30 अगस्त 2022 को कतर की खुफिया एजेंसियों ने इन पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाते हुए इन्हें हिरासत में ले लिया था।

शुरुआत में इन पूर्व अधिकारियों पर व्यवसायिक प्रतिद्वंद्विता और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप बताया गया, लेकिन बाद में सामने आया कि इन्हें जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। मिडिल-ईस्ट की मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ये सभी पूर्व अधिकारियों को इजरायल के लिए जासूसी करने के आरोप में हिरासत में लिया है। हालाँकि, कतर की तरफ से इस बारे में सार्वजनिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। 

भारतीय नौसेना से सेवानिवृत्त ये सभी अधिकारी पिछले 5 सालों से दाहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजी एंड कंसल्टेंसी नाम की एक कंपनी में काम कर रहे थे। यह कंपनी मिडिल-ईस्ट में स्थित एक देश के मिलिट्री अधिकारी की बताई जाती है। यह कंपनी कतर की नौसेना को ट्रेनिंग और कंसल्टेंसी देने का काम करती है।

इन अधिकारियों के साथ ओमान के एक सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी स्क्वाड्रन लीडर खमीस अल अजमी को भी हिरासत में लिया गया था। हालाँकि, खमीस अल अजमी को 18 नवंबर 2022 को ही रिहा कर दिया गया, बाकी सभी भारतीय अधिकारियों को अभी भी हिरासत में रखा गया है।

भारतीय अधिकारियों पर आरोप

दरअसल, भारतीय नौैसेना के पूर्व अधिकारी कैप्टन सौरभ वशिष्ठ, कमांडर पूर्णेंदु तिवारी, कैप्टन बीरेंद्र कुमार वर्मा, कमांडर सुगुनाकर पकाला, कमांडर संजीव गुप्ता, कमांडर अमित नागपाल और नाविक रागेश कतर की एक निजी फर्म दाहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजीज एंड कंसल्टेंसी सर्विसेज के लिए काम करते थे।

डिफेंस सर्विस प्रोवाइडर ऑर्गनाइजेशन दाहरा का स्वामित्व रॉयल ओमानी एयरफोर्स के एक रिटायर्ड स्क्वाड्रन लीडर खामिस अल-अजमी के पास है। यह प्राइवेट फर्म कतर के सशस्त्र बलों को प्रशिक्षण और संबंधित सेवाएँ उपलब्ध कराती थी। अजमी को भी भारतीयों के साथ 30 अगस्त 2022 को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन उन्हें फीफा वर्ल्ड कप के पहले नवंबर 2022 में रिहा कर दिया गया।

जानकारी के मुताबिक इन भारतीयों को इजरायल के लिए एक सबमरीन प्रोग्राम की जासूसी करने का दोषी ठहराया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, कतर ने साल 2020 में इटली में बनी हाईटेक सबमरीन खरीदने के लिए एक समझौता किया था। ट्राइस्टे स्थित जहाज बनाने वाली कंपनी ‘फिनकेंटियरी एसपीए’ के साथ यह समझौता हुआ था।

कतर ने समझौते के तहत चार कॉर्वेट (जहाज़ का एक प्रकार) और एक हेलीकॉप्टर का ऑर्डर भी दिया था। इस प्रोजेक्ट के तहत कंपनी को कतर में नौसेना का एक बेस बनाना था। इसके साथ ही नौसैनिक बेड़े की देखरेख भी करनी थी। इसके लिए कतर ने जिस दाहरा कंपनी को यह काम दिया, उसमें ये सभी भारतीय काम कर रहे थे।

कतर के अधिकारियों का आरोप है कि ये 8 भारतीय अधिकारी इस प्रोग्राम की गोपनीय जानकारी इज़रायल से साझा कर रहे थे। कतर की इंटेलिजेंस एजेंसी ‘कतर स्टेट सिक्योरिटी’ ने दावा किया था कि उसने भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारियों के उस सिस्टम को इंटरसेप्ट कर लिया था, जिससे वो कथित रूप से जासूसी कर रहे थे। हालाँकि, कतर ने भारत के साथ कोई भी सबूत साझा नहीं किया है।

‘आतंकियों की हमदर्द है कॉन्ग्रेस, जहाँ-जहाँ सत्ता में आई तबाही लाई’: पीएम मोदी ने कॉन्ग्रेस पर बोला हमला, कहा- PFI बैखौफ निकालती है रैली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 नवंबर 2023 को मध्य प्रदेश के सतना, छतरपुर, नीमच और राजस्थान के उदयपुर में जनसभा को संबोधित किया। एक दिन में की गई इन चार रैलियों में प्रधानमंत्री ने भाजपा सरकार की उपलब्धियों के बारे में बताया और कॉन्ग्रेस पर जमकर हमला बोला।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भाजपा सरकार ने मध्य प्रदेश में विकास की नई गाथा लिखी है। उन्होंने राज्य में बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं में अभूतपूर्व सुधार को भाजपा सरकार की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। पीएम ने कहा कि भाजपा सरकार ने किसानों, गरीबों और युवाओं के लिए कई कल्याणकारी योजनाएँ शुरू कीं।

PFI कॉन्ग्रेस की वजह से बेखौफ होकर निकालती है रैली : पीएम मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने राजस्थान के उदयपुर में रैली को संबोधित किया और वहाँ के चुनावी माहौल को बदलकर रख दिया। उदयपुर के बलीचा प्रांगण से मेवाड़ के आराध्य देव एकलिंग नाथ और बायण माता को नमन किया। उन्होंने कहा कि मेवाड़ के कण-कण में देश प्रेम की महक है, महान ऋषियों के साधना का बल है।

पीएम मोदी ने महाराणा प्रताप, महारानी कर्णावती और महारानी पद्मनी को भी नमन किया। उन्होंने पन्ना धाय के बलिदान को भी याद किया। इसके साथ ही उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की भक्त मीरा बाई को भी याद करते हुए मेवाड़ की पावन भूमि को नमन किया। उन्होंने कहा कि रानी फुल कँवर की बलिदान ने इस धरती का मान बढ़ाया।

पीएम मोदी ने फिर कॉन्ग्रेस को सीधे निशाने पर ले लिया। कॉन्ग्रेस को बेरोजगारी, अपराध, आतंकवाद जैसे मुद्दों पर जमकर घेरा। पीएम ने कहा कि राजस्थान में कॉन्ग्रेस सरकार के कारण पीएफआई जैसे संगठन बेखौफ रैली निकाल रही है। आतंकियों की हमदर्द कॉन्ग्रेस सरकार राजस्थान को बर्बाद कर रही है।

पीएम मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस सरकार की तुष्टीकरण की नीति ने राजस्थान की संस्कृति, विरासत और गौरव को खतरे में डाल दिया है। उदयपुर में कन्हैलाल के साथ हुई आतंकी घटना कॉन्ग्रेस सरकार पर बहुत बड़ा दाग है। ऐसी घटना यहाँ इसलिए हुई, क्योंकि यहाँ आतंकियों का साथ देने वाली सरकार है।

पीएम मोदी ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि किस ने सोचा था कि राजस्थान में कभी रामनवमी और कांवड़ यात्रा तक पर बैन लग जाएगा, लेकिन कॉन्ग्रेस की सरकार ने यह पाप भी किया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने एमपी के सतना, छतरपुर और नीमच में की रैली

प्रधानमंत्री चुनावी रण में पूरी तरह से उतर चुके हैं। उन्होंने एमपी के सतना, छतरपुर और नीमच में चुनावी रैलियाँ की। नीमच में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “आप सबका आशीर्वाद एमपी के विकास को है, एमपी की समृद्धि को है। ये आशीर्वाद भाजपा के ट्रैक रिकॉर्ड को है। ये आशीर्वाद मोदी की गारंटी के लिए है।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “सत्ता में बने रहने के लिए कॉन्ग्रेस ने हमेशा बाँटो और राज करो की नीति अपनाई है। कॉन्ग्रेस की कुनीति से देश में आतंक और अराजकता को बढ़ावा मिला है। आजादी के समय राष्ट्र निर्माण का जो जज्बा था, वो कॉन्ग्रेस ने एक परिवार की भक्ति में कुचल कर रख दिया।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा, “कॉन्ग्रेस की सरकार चाहे केंद्र में रही हो या फिर राज्य में, उसने हमेशा भ्रष्टाचार के नए रिकॉर्ड बनाए हैं। मोदी की गारंटी यानी हर गारंटी के पूरा होने की गारंटी। भाजपा की डबल इंजन सरकार ने लाखों परिवारों का जीवन बदला है।”

जहाँ-जहाँ कॉन्ग्रेस आई तबाही लाई: मोदी

नीमच से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने छतरपुर में जनसभा को संबोधित किया। पीएम मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस के लिए पूरा देश दिल्ली से शुरू होता था और दिल्ली में ही खत्म हो जाता था। कॉन्ग्रेस के नेता विदेशी दोस्तों को भारत की गरीबी दिखाने के लिए ले जाते थे। सोने का चम्मच लेकर पैदा हुए कॉन्ग्रेस के नेताओं के लिए गरीब एक मजाक बन गया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा, “कॉन्ग्रेस के नेता जिन झुग्गियों में फोटो खिंचाकर वापस आ जाते थे, उन गरीबों को आज मोदी पक्के घर दे रहा है। आज बच्चों को पोषण की चिंता ये गरीब का बेटा मोदी कर रहा है।” उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस सिर्फ विरोध करने वाली पार्टी है।

पीएम मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने हमेशा देश और समाज के विकास में बाधा डाली है। कॉन्ग्रेस ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का भी विरोध किया था। पीएम मोदी ने मध्य प्रदेश के लोगों से भाजपा को फिर से मौका देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार मध्य प्रदेश को एक विकसित राज्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

मोहम्मद मजहर ने राहुल बन हिन्दू महिला को फँसाया, नशीला पदार्थ खिलाकर किया रेप, बोला- इस्लाम कबूल लो, पाकिस्तान ले जाऊँगा

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में लव जिहाद का सनसनीखेज मामला सामने आया है। दरअसल, लखनऊ के मड़ियाँव इलाके में मुस्लिम युवक ने अपनी पहचान छिपाकर हिंदू महिला को प्रेमजाल में फँसाया, फिर नशीला पदार्थ खिलाकर उसके साथ दुष्कर्म किया और अश्लील वीडियो बना लगातार शारीरिक शोषण करता रहा।

इस मामले में महिला को मोहम्मद मजहर ने राहुल नाम से प्रेम जाल में फँसाया था। वहीं जब भेद खुला तो काफी देर हो गया था। जिसके बाद महिला ने विरोध किया। जिसके बाद मजहर ने पीड़िता को जबरन मीट खिलाकर बच्चों के साथ धर्मांतरण करने का दबाव बनाते हुए पाकिस्तान ले जाने की बात कही।

फिलहाल, इस मामले में पीड़िता ने आरोपित मजहर, उसके बहनोई और दोस्त के खिलाफ केस दर्ज कराया है। वहीं, पुलिस ने मुख्य आरोपित मजहर को गिरफ्तार कर जाँच शुरू कर दी है।

क्या है पूरा मामला 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सीतापुर की महिला का अपने पति से विवाद चल रहा था। महिला कुछ माह पहले लखनऊ आई और मड़ियाँव इलाके में रहने लगी। यहाँ किराए का कमरा तलाशने के दौरान उसकी मुलाकात एक पेट्रोल पंप कर्मचारी मोहम्मद हसन से हुई।

मोहम्मद हसन ने महिला का मोबाइल नंबर अपने साथी मोहम्मद मजहर को दे दिया। इसके बाद मजहर ने राहुल बनकर महिला को फोन किया और कमरा दिलाने की बात कही। यहीं से बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ और उसने महिला को प्यार के जाल में फँसा कर शादी करने की बात कही।

मोहम्मद मजहर ने इसी दौरान हिन्दू पीड़िता को नशीला पदार्थ खिलाकर उसके साथ दुष्कर्म किया और अश्लील वीडियो बना लिया। जिसके बल पर महिला का शारीरिक रूप से शोषण करने लगा। कुछ वक्त गुजर जाने के बाद आरोपित की असलियत पता चली तो पीड़िता ने विरोध किया।

इस पर आरोपित मजहर महिला पर इस्लाम कबूलने का दबाव बनाने लगा। यही नहीं उसने महिला पर उसके बच्चों का मजहब बदलकर पासपोर्ट व वीजा बनवाकर पाकिस्तान चलकर रहने की बात कही। जब महिला ने विरोध किया तो मोहम्मद मजहर ने पीड़िता, उसके बच्चों व पति को जान से मारने की धमकी दी।

गौरतलब है कि इस पूरे मामले में मुख्य आरोपित मजहर को गिरफ्तार कर लिया गया है वहीं पूरे मामले की जाँच जारी है। 

‘इसको कोई सेंस नहीं, ऐसे ही बोलते रहता है’: ‘तू-तड़ाक’ पर उतरे नीतीश, भरे सदन में महादलित जीतराम मांझी का किया अपमान; बोले पूर्व सीएम- मुसहर हूँ इसलिए जलील किया

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आजकल अपनी बदजुबानी की वजह से चर्चा में हैं। कभी महिलाओं को लेकर गलतबयानी तो कभी महादलित को सदन में बेइज्जत करने को लेकर चर्चा में हैं। आज गुरुवार (9 नवंबर 2023) तो उन्होंने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी का पूरे सदन में अपमान कर दिया। उन्होंने शब्दों की मर्यादा पार करते हुए उनके लिए ‘तू-ताम’ तक कर दिया।

दरअसल, जीतनराम मांझी सदन में आरक्षण की व्यवस्था की खामियों को लेकर अपनी बात रख रहे थे, तभी नीतीश कुमार तमतमा कर उठे और जीतनराम मांझी को खरी खोटी सुनाने लगे। सीएम नीतीश कुमार ने तो यहाँ तक कह दिया कि ‘इसे (जीतनराम मांझी को) कोई सेंस नहीं है। इसे तो मैंने अपनी मूर्खता के चलते मुख्यमंत्री बना दिया था’।

बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र के चौथे दिन सदन में नीतीश कुमार का व्यवहार चर्चा में है। मांझी को लेकर नीतीश कुमार ने कहा, “इसको कुछ आइडिया नहीं है। ये तो मेरी गलती है कि मैंने इस आदमी को बना दिया मुख्यमंत्री। इसको कोई सेंस नहीं है। अइसे ही बोलते रहता है। कोई मतलब नहीं है। हम कह रहे थे कि आप लोगों के साथ ही रहिए, भाग के चला आया 7 पार्टी में। यही जानकर हमने भगा दिया उधर।”

भाजपा विधायकों की तरफ से आवाज उठने पर भी नीतीश कुमार नहीं रुके। नीतीश कुमार ने आगे कहा, “अरे सुनो बैठो ना यार, बैठिए, भूलिए मत, जब 2013 में आप लोगों को छोड़ दिए थे… अरे चुप ना रहो यार। कुछ जानते हो? हम इसको (माँझी की तरफ इशारा करके) (मुख्यमंत्री) बना दिए। इसके बाद जितने लोग मेरा पार्टी के थे, सब हमको दो ही महीने में कहने लगा कि गड़बड़ है, इसको हटाइए। अंत में हमको बाध्य किया तो फिर हम सीएम बन गए। कहता रहता है कि ये भी मुख्यमंत्री था। ये क्या मुख्यमंत्री था? ये तो मेरी मूर्खता से मुख्यमंत्री बना।”

नीतीश कुमार ने पत्रकारों की तरफ इशारा करके कहा कि वो मांझी को भाव ना दिया करें। नीतीश कुमार बोले, “आप बिना मतलब के इसको (मांझी) को रोज पब्लिश करते हो। कोई सेंस है इसमें?” इस बीच जब भाजपा विधायक हंगामा करने लगे तो नीतीश कुमार ने कहा, “एक मेरा सुझाव है कि आप ही लोगों के पीछे ये (मांझी) घूम रहा है। ये गवर्नर बनना चाहता है। ये हम लोगों के साथ था तो भी उल्टा-पुल्टा बोलता था। लगा दीजिए गवर्नर इसको… यही बनना चाहता है ये।”

गुस्से में मानो नीतीश कुमार गुस्से में सब कुछ भूल बैठे हों। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार चौधरी ने हस्तक्षेप किया और कहा कि क्यों नहीं एक महादलित को मुख्यमंत्री बना देते तो उन्होंने भाजपा को भी लपेटे में लेने की कोशिश की। उन्होंने अपील को अनसुना करते हुए कहा, “आप बनाए थे? कौन बनाया? तुम जानते हो, हम्हीं ने बनाया। अरे गर्वनर काहे नहीं बना देते।”

नीतीश ने आगे कहा, “यह गर्वनर बनने के चक्कर में ही रोज चक्कर लगाता है। इसके परिवार का लोग इसके खिलाफ है। आप जान लीजिए ये कोई काम का आदमी नहीं है। अरे इसको ले जाइए न। नारा लगा रहे हो? क्या जानते हो, इसको कौन मुख्यमंत्री बनाया। मैं चाहता हूँ कि तुम इन लोगों के साथ रहो।”

मैं भुइयाँ मुसहर, इसीलिए नीतीश कुमार ने किया जलील

इस घटना को लेकर सदन के बाहर पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “मैं नीतीश कुमार से हर मामले में सीनियर हूँ, फिर भी उन्होंने हमारा अपमान किया। नीतीश कुमार ने अपनी लाज बचाने के लिए सीधे-साधे आदमी का इस्तेमाल किया। मैं मुसहर हूँ, इसलिए मुझे सदन में जलील किया गया।”

मांझी ने कहा, “नीतीश कुमार 1985 में विधायक बने। हम 1980 में विधायक बने। उनकी उम्र 74 साल है। मेरी उम्र 80 साल है। मैं उनसे सीनियर हूँ। इसके बावजूद वो तुम-ताम करते हैं। विधानसभा में तुम-ताम करना कहाँ तक उचित है। इसलिए मुझे लगता है कि वो मानसिक संतुलन खो बैठे हैं।”

नीतीश कुमार द्वारा गवर्नर बनाए जाने के ताने पर पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने कहा कि उन्हें साल 2017 में ही राज्यपाल बनने का ऑफर दिया गया था, लेकिन उन्होंने जनता के बीच में रहकर जनसेवा की राह चुनी थी। उन्होंने कहा कि उन्होंने गवर्नर बनने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था।

बता दें कि नीतीश कुमार सदन में दो दिन पहले भी विवादास्पद बयान देकर फँसे थे। 7 नवंबर 2023 को महिलाओं की शिक्षा और जनसंख्या नियंत्रण पर बात करते हुए नीतीश कुमार ने विधानसभा में कहा था, “अगर पढ़ लेगी लड़की, और जब शादी होगा तब लड़का लड़की का तो जो पुरुष है वो तो रोज रात में शदिया होता है उसके साथ करता है ना उसी में और पैदा हो जाता है। लड़की पढ़ लेती है तो हमको मालूम था कि उ करेगा ठीक है! लेकिन अंतिम में भीतर मत घुसाओ उसको बाहर कर दो! करता तो है।”

विधान परिषद में उन्होंने कहा था, “उसी समय लड़की भी जब पढ़ी-लिखी रहती है तो कहती है कि ठीक है, रात में करो लेकिन अपना जो तुमको निकलने लगे तो बाहर निकाल कर फेंक दो। यही करके लड़की सब अब सबको समझा रही है। ज़रा जान लीजिए। लड़की सब सभी को समझाती है कि अपने पति को कंट्रोल में रखिए।”

उनके इस बयान को ‘सेक्स एजुकेशन’ बताते हुए बिहार के उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने बचाव किया था। हालाँकि, चौतरफा हमला होने और विवाद बढ़ने के बाद नीतीश कुमार ने मीडिया के सामने हाथ जोड़कर माफी माँग ली थी। उनके इस बयान की देश ही नहीं, बल्कि विदेश में भी आलोचना हो रही है।

महिला विधायक ने नीतीश कुमार को बोला ‘बंडा’

महिलाओं को लेकर नीतीश कुमार के बयान पर बिहार भाजपा की महिला विधायकों ने मोर्चा खोल दिया है। बिहार के पश्चिम चंपारण से भाजपा विधायक भागीरथी देवी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस किया। इस दौरान भागीरथी देवी ने कहा, “नीतीश जब विधानसभा आते थे तो एक चिलम पीते थे, फिर चढ़ा रहे हैं दो चिलम… जब कल महिला के ऊपर बोले तब वो चार चिलम पीकर आए थे।”

भागीरथी देवी ने आगे कहा, “नीतीश कुमार के खुद बेटी या पत्नी तो है नहीं। वह तो बंडा (विधुर या जिसकी पत्नी का निधन हो गया हो) हैं। दूसरों को देखकर उनको जलन होती है। वो कहते हैं कि लड़का-लड़की सब प्यार-मोहब्बत करती है तो लेके घूमती है… तो लेके सोता है… तो उनको फूल जाता है जिसे निकाल कर फेंक देती है। अरे नीतीश कुमार को शर्म है? ऐसा बोला जाता है।”

बिहार में आरक्षण 75% करने वाला बिल पास, जानिए इसे लागू करने की राह में हैं कौन-सी दिक्कतें?


बिहार में आरक्षण को 75% करने वाला बिल गुरुवार (9 नवंबर 2023) को बिहार विधानसभा में पारित हो गया। इस बिल के तहत बिहार में अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), EBC और EWS के आदि मिलाकर आरक्षण की मौजूदा सीमा 50% को बढ़ाया गया है।

हालाँकि, इसे लागू कैसे किया जाएगा, इस को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। इस अधिनियम को लागू करने की राह में कई दिक्कतें हैं। सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण की सीमा 50% तय की है। इसके ऊपर आरक्षण को बढ़ाना संवैधानिक रूप से चुनौतीपूर्ण है।

बिहार में अब आरक्षण की सीमा 75% होगी

अब तक पिछड़ा-अति पिछड़ा वर्ग को 30 प्रतिशत आरक्षण मिल रहा था, लेकिन नए कानून के तहत इस वर्ग को 43 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलेगा। इसी तरह, पहले अनुसूचित जाति (SC) वर्ग को 16 प्रतिशत आरक्षण था, अब 20 प्रतिशत मिलेगा।

अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग को पहले एक प्रतिशत आरक्षण था, जो बढ़कर दो प्रतिशत हो गया है। केंद्र सरकार द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के लिए दी गई 10 प्रतिशत आरक्षण की सीमा बनी रहेगी। इस तरह से कुल आरक्षण की सीमा अब 75 प्रतिशत तक पहुँच चुकी है।

सर्वसम्मति से पास हुआ प्रस्ताव

बिहार सरकार के प्रस्ताव का विपक्ष ने भी समर्थन किया है। इस तरह से ये विधेयक सर्वसम्मति से पास हुआ है। हालाँकि, सरकार को आरक्षण 75% करने वाले अधिनियम को लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से आरक्षण की सीमा बढ़ाने के लिए अनुमति लेनी होगी।

अगर इतिहास को देखें तो कई मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने कई राज्य सरकारों की इस तरह की अपील को खारिज कर दिया है। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र जैसी सरकारों को सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के चलते अपने राज्य में आरक्षण को 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ाने वाले कदम को वापस खींचना पड़ा था।

दरअसल, 1992 में सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने इंदिरा साहनी केस के फैसले में तय किया था कि आरक्षण की सीमा 50 फीसदी से ज्यादा नहीं हो सकती है। मंडल कमीशन की सिफारिश पर अमल के फैसले के खिलाफ इंदिरा साहनी की अपील पर यह फैसला आया था।

फिलहाल तमिलनाडु ही देश का ऐसा इकलौता राज्य है, जहाँ 69 प्रतिशत आरक्षण लागू है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने इंदिरा साहनी फैसले के आधार पर मराठा और जाट आरक्षण को 50 फीसदी की सीमा को लाँघने वाला बताकर खारिज कर दिया था।

इस राज्यों को झटका दे चुका है सुप्रीम कोर्ट

आरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट के गुस्से का शिकार कई राज्य हुए हैं। इसमें आंध्र प्रदेश भी शामिल है। आंध्र प्रदेश में साल 1986 में आरक्षण को बढ़ाने का फैसला हुआ था, लेकिन साल 1998 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया था।

महाराष्ट्र की बात करें तो राज्य में मराठा आरक्षण की माँग लंबे समय से हो रही है। साल 2018 में महाराष्ट्र सरकार ने मराठा समुदाय को 16 प्रतिशत आरक्षण दे दिया था, लेकिन जून 2019 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने ये आरक्षण घटाकर शिक्षा में 12 प्रतिशत और नौकरी में 13 प्रतिशत कर दिया था।

बॉम्बे हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने इंदिरा साहनी केस का हवाला देते हुए खारिज कर दिया था। हालाँकि अब भी राज्य में ईडब्ल्यूएस कोटे को मिलाकर 62 प्रतिशत आरक्षण है, जो तय सीमा से 2 प्रतिशत ज्यादा है।

मध्य प्रदेश में साल 2019 में राज्य सरकार की नौकरियों में 73 प्रतिशत का आरक्षण लागू किया गया था। हालाँकि, इस पर पहले हाईकोर्ट फिर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी। इसके अलावा राजस्थान, महाराष्ट्र, झारखंड जैसे राज्यों में भी आरक्षण का मामला लंबित है।

आरक्षण लागू कराने का एक रास्ता तो है, लेकिन…

हालाँकि, आरक्षण को लागू कराने का एक रास्ता नीतीश कुमार की सरकार के पास है, लेकिन क्या उस रास्ते पर चलकर नीतीश कुमार की सरकार सफल हो पाएगी? दरअसल, संविधान की नौंवी अनुसूची में केंद्रीय और राज्यों के कानूनों की एक लिस्ट है, जिसे न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती।

संविधान की नौंवी अनुसूची को पहले संविधान संशोधन के जरिए 1951 में जोड़ा गया था। संविधान के अनुच्छेद 31ए और 31बी के तहत इसमें शामिल कानूनों को न्यायिक समीक्षा से संरक्षण हासिल है। हालाँकि अगर कोई भी कानून मूल अधिकारों का हनन करेगा तो कोर्ट उसे रद्द भी कर सकती है।

तमिलनाडु सरकार ने इसी व्यवस्था को अपनाकर राज्य में 69 प्रतिशत आरक्षण लागू किया है। तत्कालीन मुख्यमंत्री जे जयललिता ने इससे संबंधित एक विधेयक विधानसभा में पास कराकर उसे संविधान की नौंवी अनुसूची में शामिल करने के लिए राष्ट्रपति के पास भेज दिया था। केंद्र सरकार की सलाह पर राष्ट्रपति ने इस आग्रह को मान लिया था।

बिहार सरकार ने जारी किए जाति आधारित जनगणना के आँकड़े

बता दें कि मंगलवार (7 नवंबर, 2023) बिहार सरकार ने जातिगत जनगणना के आँकड़ों के बाद विधानसभा के पटल पर पूरे बिहार की शैक्षणिक और आर्थिक स्थिति का आँकड़ा रखा। इसके मुताबिक, बिहार में कुल 2 करोड़ 76 लाख 68 हजार 930 परिवार हैं, जिसमें से 94 लाख 42 हजार 786 परिवार गरीब हैं।

ये कुल परिवारों का 34.13 प्रतिशत आँकड़ा है। इस गणना के हिसाब से बिहार में सामान्य वर्ग के कुल 43 लाख 28 हजार 282 परिवार हैं, जिसका 25 प्रतिशत से अधिक हिस्सा गरीबी में जीवनयापन कर रहा है।

पराली जलाने की घटनाएँ पंजाब में 6 गुना अधिक फिर भी दिल्ली में प्रदूषण के लिए जिम्मेदार हरियाणा, ये है केजरीवाल सरकार का गणित: झूठ का माहौल बनाने में जुटी AAP 

भले ही पंजाब में खेतों में पराली जलाने की घटनाएँ केवल 24 घंटों में ही 2,000 का आँकड़ा क्यों न पार कर गई हो, लेकिन आम आदमी पार्टी (आप) सोशल मीडिया पर एक्स (ट्विटर) पर यह माहौल बनाने में लगी है कि 2022-23 में पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में 55 प्रतिशत की कमी आई है। खासतौर से पंजाब में कथित तौर पर 65.6 प्रतिशत खेतों में आग लगने की घटनाएँ दर्ज की गई हैं, जबकि हरियाणा में 5.3 प्रतिशत दर्ज की गई हैं।

हालाँकि, आप के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने पुलिस और प्रशासन को पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। फिर भी पंजाब सरकार के आँकड़ों को ही माने तो पता चलता है कि राज्य के 21 जिलों में खेतों में आग लगाने की घटनाओं में वृद्धि देखी गई है।

संगरूर में किसानों द्वारा 8 नवंबर को खेत में आग लगने के 466 मामले दर्ज किए गए जिससे कुल संख्या 4,070 हो गई, जो सभी जिलों में सबसे अधिक है। वहीं लुधियाना में 8 नवंबर को 96 मामले दर्ज किए गए, जिससे खेत में आग लगाने की कुल संख्या 1,089 हो गई। दक्षिण मावला में 24 घंटों में खेत में आग लगने के 861 मामले दर्ज किए गए, जिसमें बठिंडा, फरीदकोट, मनसा, फिरोजपुर, मुक्तसर, मोगा और फाजिल्का शामिल हैं।

इससे पंजाब में खेतों में आग लगाने की कुल संख्या 22,981 हो गई है। इस बीच, हरियाणा सरकार ने 2022 की तुलना में इस साल पराली जलाने की घटनाओं में 38 प्रतिशत की कमी दर्ज की है। पिछले दो वर्षों में, हरियाणा ने पराली जलाने की घटनाओं में 57 प्रतिशत की कमी दर्ज की है।

इसकी बड़ी वजह यह है कि भाजपा शासित राज्य हरियाणा ने खेत में आग के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है, 1,256 चालान काटे गए हैं और 32.55 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। 72 एफआईआर दर्ज की गईं और 44 आग बुझाई गईं।

इसके अलावा, हरियाणा सरकार ने पराली जलाने को पूरी तरह से समाप्त करने के उद्देश्य से एक नई नीति की घोषणा की है। ‘हरियाणा एक्स-सीटू मैनेजमेंट ऑफ पैडी स्ट्रॉ पॉलिसी 2023’ का लक्ष्य टिकाऊ ऊर्जा के लिए धान की पुआल का उपयोग करना और 2027 तक फसल अवशेष जलाने को खत्म करना है।

हरियाणा सरकार ने किसानों को सब्सिडी पर 19,141 लाख फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) मशीनें मंजूर की हैं। 940 लाख एकड़ क्षेत्र को 1,000 रुपए प्रति एकड़ के प्रोत्साहन के लिए पंजीकृत किया गया है।

इसके अलावा, राज्य सरकार ने कथित तौर पर 30 नवंबर तक या वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग द्वारा जीआरएपी चरण को रद्द किए जाने तक तत्काल प्रभाव से गुरुग्राम और फरीदाबाद में बीएस-III पेट्रोल और बीएस-IV डीजल एलएमवी (4-पहिया) पर प्रतिबंध लगा दिया है। 

नासा के फायर इंफॉर्मेशन फॉर रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम (एफआईआरएमएस) की सैटेलाइट इमेजरी में पंजाब को लाल बिंदुओं से ढका हुआ दिखाया गया है, जो राज्य में खेत की आग के गंभीर स्तर को दर्शाता है, जबकि हरियाणा में यह काफी कम दिखाई दे रहा है। सैटेलाइट इमेजरी में दर्ज डेटा पिछले 24 घंटों का है।

फिर भी, आम आदमी पार्टी ने दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में खतरनाक वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) स्तर के लिए हरियाणा सरकार पर आरोप लगाया है। भले ही AAP दिल्ली और पंजाब दोनों जगह हैं सत्तारूढ़, उसमें से पंजाब में पराली जलाना अपने चरम पर है तो दिल्ली में  जहाँ की AQI वर्तमान में 426 है। लेकिन दिल्ली की ख़राब हवा और प्रदूषण के लिए आम आदमी पार्टी समय-समय पर भाजपा शासित हरियाणा सरकार पर हमला करती रही है जो असली वजह है उससे मुँह मोड़ती रही है। 

अब कुत्ते के साथ नहीं रहेंगी महुआ मोइत्रा: वकील जय अनंत के घर पहुँचा ‘हेनरी’, TMC महिला सांसद ने मानी हार?

जिस हेनरी को लेकर तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा और उनके पूर्व पार्टनर के बीच विवाद हुआ था, वह अपने असली मालिक के घर पहुँच गया है। उद्योगपति से कैश और गिफ्ट लेकर संसद में सवाल पूछने की आरोपित महुआ पर वकील जय अनंत देहाद्राई ने हेनरी को चुराने का आरोप लगाया था। अब देहाद्राई ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके कहा कि हेनरी घर लौट आया है।

दरअसल, हेनरी एक कुत्ते का नाम है जिस पर महुआ और देहाद्राई अपनाद-अपना दावा जताया था। अब सुप्रीम कोर्ट के वकील जय अनंत देहाद्राई ने सोशल मीडिया एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक हेनरी नाम के कुत्ते के साथ अपना वीडियो शेयर किया है और लिखा है, “हेनरी का फिर से स्वागत है! सभी के समर्थन, प्रार्थनाओं और शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद। हेनरी घर वापस आकर रोमांचित है।”

दरअसल, अधिवक्ता जय अनंत देहाद्राई ने 19 अक्टूबर 2023 को दिल्ली के पुलिस कमिश्नर संजय अरोड़ा को एक पत्र भेजकर महुआ के खिलाफ शिकायत की थी। इसमें उन्होंने बताया था कि महुआ ने उनके कुत्ते ‘हेनरी’ को न सिर्फ चुरा लिया, बल्कि उसे अवैध तरीके से अपने पास भी रखी हुई हैं। उनका ये पालतू कुत्ता मात्र 3 साल का है। इसे उन्होंने नई दिल्ली के जनकपुरी स्थित दुकान से खरीदा था।

अधिवक्ता जय अनंत देहाद्राई ने कहा था कि उन्होंने जनवरी 2021 में 75,000 रुपए में इस कुत्ते को खरीदा था। पैसों का भुगतान उन्होंने 2 इंस्टॉलमेंट्स में किया था। उन्होंने 10,000 रुपए और 65,000 रुपए के भुगतान की 2 रसीदें भी दिल्ली पुलिस को भेजी हैं। साथ ही उन्होंने ‘केनल क्लब ऑफ इंडिया (KCI)’ से अपने कुत्ते का पंजीकरण भी कराया था। उन्होंने पत्र में बताया है कि हेनरी से उनका रिश्ता एक अभिभावक और बच्चे का है।

अनंत जय देहाद्राई ने इस शिकायती पत्र में लिखा, “जब से हेनरी 40 दिन का था, तभी से मैं उसकी देखभाल कर रहा हूँ। मैं उसकी सभी ज़रूरतों और चिंताओं को समझता हूँ। 10 अक्टूबर, 2023 से ही महुआ मोइत्रा ने मेरे उस कुत्ते का अपहरण कर के छिपा कर अपने पास रखा हुआ है। उन्होंने मुझे ब्लैमेल और प्रताड़ित करने के लिए ऐसा किया है। मैंने उनके खिलाफ CBI में जो शिकायत दायर की है, उसका बदला लेने के लिए उन्होंने ऐसा किया है।”

जय अनंत देहाद्राई ने दिल्ली पुलिस को लिखे पत्र में कहा था कि वो हाथ जोड़ कर पूरी मानवता के साथ विनती करते हैं कि हेनरी को उसके असली अभिभावक के पास रहने दिया जाए। उन्होंने कहा कि जल्द से जल्द उन्हें उनके कुत्ते हेनरी से मिलवाया जाए। उन्होंने अपनी जान को भी खतरा बताया और कहा था कि वो डर के साये में जी रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके जीवन और उनकी स्वतंत्रता की रक्षा की जाए, उन्हें उनके कुत्ते हेनरी को वापस लाने में उनकी मदद की जाए।

देहाद्राई ने 20 अक्टूबर 2023 को मामले की सुनवाई के दौरान कहा था कि महुआ के एडवोकेट शंकरनारायणन ने कुत्ता हेनरी को देने और सीबीआई में दायर महुआ के खिलाफ शिकायत को वापस लेने की बात उनसे की थी। देहाद्राई ने यह भी दावा किया था कि उनके कुत्ते ‘हेनरी’ को जानबूझकर टेलीग्राफ लेन आवास में कैद करके रखा गया है, ताकि CBI को भीतर घुसने से रोका जा सके।

उन्होंने कहा था कि ‘हेनरी’ रोटवीलर नस्ल का एक बड़ा कुत्ता है, जो वैसे तो सीधा-सादा है, लेकिन वो मजबूत रक्षात्मक स्वभाव का भी है। बताते चलें कि देहाद्राई के पत्र के आधार पर ही भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर महुआ के खिलाफ दर्शन हीरानंदानी के फेवर में काम करने का आरोप लगाया था। इसके बाद यह मामला संसद की आचार समिति के पास गया था। बाद में यह CBI के पास चला गया।

IIT BHU की छात्रा के साथ छेड़छाड़ नहीं, हुआ था गैंगरेप: पीड़िता ने मजिस्ट्रेट को सुनाई उस रात की रोंगटे खड़े करने वाली आपबीती, FIR में बढ़ाई गई धारा

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) में बीटेक की छात्रा के साथ छेड़खानी और कपड़े उतरवाकर वीडियो बनाने के मामले में एक और सनसनीखेज खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है कि छात्रा द्वारा मजिस्ट्रेट के सामने जो बयान दिया गया है उसमें गैंगरेप की बात सामने आने के बाद वाराणसी के लंका थाने की पुलिस द्वारा गैंगरेप की धारा भी बढ़ाई गई है।

दरअसल, मीडिया रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराए गए बयान में कहा है कि उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म हुआ था। वहीं वाराणसी की लंका पुलिस ने उसके बयान के आधार पर दर्ज मुकदमे में सामूहिक दुष्कर्म और इलेक्ट्रानिक साधनों के जरिए यौन उत्पीड़न करने से संबंधित धारा बढ़ाई हैं। क्योंकि पीड़िता को निर्वस्त्र कर उसका वीडियो भी बनाया गया था। ऑपइंडिया के पास FIR की कॉपी मौजूद है।

क्या है पूरा मामला 

IIT बीएचयू की एक छात्रा अपने क्लासमेट के साथ 1 नवंबर, 2023 की रात में हॉस्टल से बाहर निकलकर टहल रही थी। इसी दौरान उसके साथ दरिंदगी की बात सामने आई है। इस मामले में मजिस्ट्रेट को दिए बयान में तीनों आरोपितों ने बंदूक से पहले डरा धमका कर छात्रा को निर्वस्त्र किया। उसके बाद आरोपितों ने छात्रा का वीडियो बनाया और उसके बाद तीनों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया था।

हालाँकि, इससे पहले FIR में यही बात सामने आई थी कि छात्रा के साथ छेड़छाड़ की गई और उसका निर्वस्त्र कर वीडियो बनाया गया। वहीं घटना के 8 दिन बीत जाने के बाद भी अभी तक पुलिस के हाथ खाली हैं। तीनों आरोपित फरार बताए जा रहे हैं। पीड़िता ने तीनों आरोपितों के हुलिया के बारे में FIR में विस्तार से बताया है। लेकिन अभी भी आरोपित पकड़े नहीं जा सके हैं जबकि पुलिस द्वारा परिसर के साथ ही हाईवे और आसपास के सड़कों पर लगे सीसीटीवी कैमरे भी खंगाले गए।

मजिस्ट्रेट के सामने पेशी के बाद बढ़ाई गईं धाराएँ

वहीं बुधवार (8 November, 2023) को मजिस्ट्रेट के सामने पेशी के दौरान पीड़िता का बयान दर्ज किया गया। इस दौरान यह बात सामने आई की छात्रा के साथ गैंगरेप भी हुआ था। ऐसे में इस मामले में आईपीसी की धारा 376 D बढ़ाई गई है।

इससे पहले, लंका पुलिस ने छेड़खानी के आरोपों में केस दर्ज किया था। इसमें छात्रा के बयान के मुताबिक भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (डी) और 509 को बढ़ाया गया है। मामले की अब विवेचना का जिम्मा अभी तक लंका थाने के इंस्पेक्टर सहजानंद श्रीवास्तव के पास था लेकिन अब धाराएँ बढ़ने पर थानाध्यक्ष शिवाकांत मिश्र केस की विवेचना करेंगे। 

गौरतलब है कि BHU के इस मामले में तीनों आरोपितों की गिरफ्तारी करने के लिए काशी हिंदू विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा धरना प्रदर्शन लगातार जारी है। बुधवार को भी हुए धरना प्रदर्शन में करीब 5000 से अधिक छात्र-छात्राएँ शामिल हुए। इसके अलावा बुधवार शाम छात्र-छात्राओं द्वारा जस्टिस रैली भी निकल गई। 

स्पेन में फैला रहे थे कट्टरपंथ, चला रहे थे धर्म परिवर्तन का रैकेट: 14 पाकिस्तानियों को पुलिस ने पकड़ा, जिहादी नेटवर्क का खुलासा

स्पेन पुलिस ने आतंक पर कार्रवाई करते हुए 14 पाकिस्तानियों को गिरफ्तार किया है। इन सभी को हमास के हमले से बढ़ाई गई सतर्कता के बाद गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि यह सभी स्पेन में एक बड़ा जिहादी नेटवर्क चला रहे थे।

जानकारी के अनुसार, यह सभी पाकिस्तानी आतंकी तहरीक-ए-लब्बैक से जुड़े हुए हैं। यह पार्टी पाकिस्तान में पूर्णतः शरिया लागू करने की माँग करती रहती है। इस पार्टी ने बीते कुछ समय में कई बड़े हिंसक प्रदर्शन भी किए हैं।

जानकारी के मुताबिक, ये सारे पाकिस्तानी स्पेन के राज्य कैटालूनिया, वालेंसिया, लोग्रोनो और विटोरिया जैसे राज्यों में रह रहे थे। यह जानकारी सामने आई है कि इन सभी आतंकियों ने एक ऐसा नेटवर्क तैयार किया है जिससे कट्टरपंथी विचारधारा का प्रसार किया जाता था। यह लोग ऐसा मैटेरियल प्रसारित करते थे जिससे अन्य लोगों को कट्टरपंथी बनाया जा सके।

अब इन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा, अभी इनसे पूछताछ चल रही है। हमास के हमले के बाद स्पेन समेत तमाम यूरोपियन देशों में आतंकी खतरे को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की जा रही है और जिहादियों पर कार्रवाई हो रही है। स्पेन के सबसे बड़े अखबार यूरो वीकली ने बताया है कि यह पाकिस्तानी धर्म परिवर्तन का रैकेट भी चला रहे थे।

पिछले महीने स्पेन की पुलिस ने कार्रवाई करके 4 संदिग्धों को पकड़ा था। इसमें से एक ऐसा शख्स सामने आया था जो कई ऐसे ही नेटवर्क को चला रहा था। इस आतंकी ने अपना नाम खलीफा रखा हुआ था। गिरफ्तार किए लोगों में एक दम्पति भी था जो कि इसी माध्यम से मिले थे।

एक जानकारी के अनुसार, स्पेन में लगभग 1 लाख पाकिस्तानी रहते हैं। इनमें से आधे से ज्यादा कैतालूनिया राज्य में रहते हैं। इनमें से अधिकतर वो लोग हैं जो रोजगार की तलाश में पाकिस्तान पहुँचे हैं। इनमें से बड़ी संख्या पाकिस्तानियों की भी है जो अवैध रूप से यूरोप पहुँचे है। बीते कुछ वर्षों में स्पेन में पाकिस्तानियों के प्रति लोगों में संदेह की भावना बढ़ी है।