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प्राइवेट पार्ट्स दिखाती लड़की, एक्सप्रेशंस देता लड़का: इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर गुनगुन गुप्ता का MMS वीडियो वायरल, टेलीग्राम पर शेयर कर रहे लोग

सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर गुनगुन गुप्ता का कथित रूप से अश्लील वीडियो लीक हो गया है। इस वीडियो में वो एक लड़के के साथ वीडियो कॉल पर दिखाई दे रही हैं। गुनगुन गुप्ता इंस्टाग्राम पर खासी सक्रिय हैं, जहाँ उनके 58 लाख फॉलोवर्स हैं। इतना ही नहीं, स्नैपचैट पर भी उनके 6 लाख से अधिक फॉलोवर्स हैं। इसी तरह फेसबुक पर उनके 2 लाख से ज़्यादा फॉलोवर्स हैं। यूट्यूब पर भी 66,000 लोगों ने उनके चैनल को सब्स्क्राइब कर रखा है। ऐसे में उनका वीडियो वायरल होना चर्चा का विषय बना हुआ है।

इसमें गुनगुन गुप्ता कथित तौर पर वीडियो कॉल पर कपड़े उतारते हुए नज़र आ रही हैं। वो अपने स्तन और प्राइवेट पार्ट्स दिखाती नज़र आ रही हैं। वहीं वीडियो कॉल पर उनके साथ जुड़ा लड़का भी एक्सप्रेशंस दे रहा है। टेलीग्राम पर ये वीडियो खासा वायरल हो रहा है। गुनगुन गुप्ता ने इस पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया जारी नहीं की है। इंस्टाग्राम पर उनके डांस वाले वीडियो अक्सर वायरल होते हैं। एक वीडियो में वो गरीबों को वस्त्र वितरित करते हुए भी दिखाई दे रही हैं।

हालाँकि, मीडिया में कहा जा रहा है कि इन्फ्लुएंसर की टीम ने इस वीडियो का संज्ञान लिया है और इसे प्रसारित होने से रोकने के लिए कार्यवाही शुरू कर दी है। गुनगुन गुप्ता को TikTok से पहचान मिली थी, लेकिन चीन के एप्स को प्रतिबंधित किए जाने के क्रम में भारत सरकार ने टिकटॉक पर भी बैन लगा दिया, जिसके बाद वो इंस्टाग्राम पर वायरल होने लगीं। ‘बचपन का प्यार नहीं भूल जाना रे’ पर रील बनाने के बाद उन्हें 10 करोड़ व्यूज रिकॉर्ड मिले थे।

उनकी उम्र मात्र 19 वर्ष बताई जाती है। वायरल वीडियो के दौरान एक फोन नंबर भी फ्लैश होता है, जो दीपू चावला के नाम से शो होता है। हालाँकि, साफ़ है कि ये वीडियो प्राइवेट है और इसे सोशल मीडिया में शेयर नहीं किया जाना चाहिए। फिर भी ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर भी कई लोग इसे शेयर कर रहे हैं जो गलत है। किसी की प्राइवेट वीडियो वायरल करना भी यौन अपराध है। गुनगुन गुप्ता का पक्ष इस पर अभी नहीं आया है, ऐसे में अफवाहें भी नहीं फैलाई जानी चाहिए।

BJP नेता की निर्मम हत्या… एक छुटपुट घटना: CM बघेल का बयान, मौत पर कर डाली खुद की वाहवाही वाली राजनीति

छत्तीसगढ़ में चुनाव मतदान से 2 दिन पहले बस्तर में भाजपा नेता रतन दुबे की निर्मम हत्या कर दी गई और जब मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से इस पर जवाब माँगा गया तो उन्होंने बातों ही बातों में इसे एक छोटी घटना करार दे दिया।

सीएम बघेल ने मीडिया से बात करते हुए रतन दुबे के परिवार के प्रति पहले संवेदना व्यक्त की और फिर अपनी वाहवाही वाले अंदाज में बोले कि उनकी फोर्स के कारण नक्सली प्रभाव कम हुआ। लोग दूर-दूर इलाकों में जाते हैं। लेकिन ऐसी छुट-पुट घटनाएँ भी हो रही हैं।

समाचार एजेंसी एएनआई द्वारा शेयर वीडियो में उन्हें कहते सुना जा सकता है-

“जिले स्तर के पदाधिकारी की मृत्यु हुई है। पूरे परिवार के प्रति मैं संवेदना व्यक्त करता हूँ लेकिन लगातार हमारे फोर्स के दबाव के चलते नक्सली पीछे हो गए हैं। कहीं-कहीं छुटपुट घटनाएँ हो रही हैं इससे इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन जो पहली वाली स्थिति थी उसमें और अब में जमीन-आसमान का फर्क है।”

मुख्यमंत्री द्वारा ऐसी बात कहे जाने के बाद लोग उनकी वीडियो देख पूछ रहे हैं कि एक व्यक्ति को निर्मम ढंग से मार दिया गया और ये छोटी घटना लगती है उनको। एक यूजर कहता है- छोटा वाकया। जब कोई कॉन्ग्रेसियों को कुछ होता है तभी इनके लिए वो घटना बड़ी होती है।

एक यूजर ने कहा कि भूपेश बघेल सरकार छत्तीसगढ़ को नक्सल हिंसा से बचाने में असमर्थ रहे इसलिए जनता ने इनपर से अपना विश्वास खो दिया है।

रतन दुबे की बस्तर में नक्सलियों ने की हत्या

उल्लखनीय है कि 4 नवंबर की शाम छत्तीसगढ़ के बस्तर में रतन दुबे की हत्या चुनाव प्रचार के बाद भरी भीड़ के बीच की गई थी। रिपोर्ट्स में बताया गया कि प्रचार खत्म होने के बाद मंच के पास मुर्गों की लड़ाई का आयोजन किया गया, जिसके कारण वहाँ भीड़ जमा हो गई थी। इसी दौरान ग्रामीणों के वेश में आए पुरुषों का एक समूह चुपचाप भीड़ से अलग हो गया और मंच के पास आने लगा।

दुबे ने उन्हें तुरंत देख खतरे को भांप लिया। वह मंच से कूदकर भागने लगे। हंगामे के कारण ग्रामीणों की नजर भी वहाँ पड़ी और सबने देखा कि बंदूक, खंजर और कुल्हाड़ी लिए लोगों का एक समूह दुबे का पीछा कर रहा थे। कुछ दूर पीछा करने के बाद एक नक्सली ने दुबे पर पीछे से गोली मारी। जैसे ही वो नीचे गिरे वैसे ही उनके ऊपर पीछे खंजर और कुल्हाड़ी लेकर हमला बोल दिया गया। ये घटना जरघाटी थाने से 5 किलोमीटर दूर शाम करीब 5:30 हुई। पुलिस इस मामले की जाँच कर रही है।

इससे पहले 16 जनवरी को भाजपा कार्यकर्ता बुधराम करतम की हत्या की गई थी। इसके बाद भाजपा नेता नीलकंथ कक्कम को मारा गया था। 10-11 फरवरी में नारायणपुर के ही उपाध्यक्ष साग साहु और दंतेवाड़ा में रामधर अलामी की हत्या हुई थी।

आरा शेख ने मंदिर में घुस कर पैंट उतारा, शिवलिंग पर किया पेशाब, वीडियो वायरल: पश्चिम बंगाल पुलिस ने बताया मानसिक बीमार

सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक वीडियो में एक शख्स हिन्दू मंदिर में घुस कर शिवलिंग के सामने पेशाब करता दिख रहा है। यह वीडियो पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले का बताया जा रहा है। आरोपित की पहचान कथित तौर पर आरा शेख के रूप में हुई है। पुलिस द्वारा केस दर्ज करके आरोपित को गिरफ्तार किए जाने की सूचना है। घटना मंगलवार (31 अक्टूबर 2023) की बताई जा रही है, जिसके बाद आम लोगों में नाराजगी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला मुर्शिदाबाद जिले के सालार ब्लॉक का है। यहाँ के वायरल हो रहे 36 सेकेंड के वीडियो की शुरुआत में आरा शेख बहस करता दिख रहा है। कुछ ही सेकेंड के बाद आरा शेख मंदिर के अंदर घुस कर मूर्ति तक पहुँच जाता है। मौके पर मौजूद कुछ लोग शेख को रोकने की कोशिश करते हैं। हालाँकि आरा शेक नहीं रुकता है। इसके बाद उसने मंदिर के गर्भगृह में घुस कर शिवलिंग के आगे पैंट खोल कर पेशाब किया। मौके पर मौजूद किसी व्यक्ति ने इस घटना का वीडियो बना लिया, जो बाद में वायरल हो गया।

इस वीडियो को @HinduVoice_in नाम की X प्रोफ़ाइल द्वारा शनिवार (4 नवंबर 2023) को शेयर किया गया। वीडियो के वायरल होने के बाद लोगों में नाराजगी फ़ैल गई। हिन्दू समाज ने इस घटना को अपनी आस्था पर प्रहार बताया है और आरोपित आरा शेख के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग उठने लगी।

आदर्श पांडेय सनातनी ने पश्चिम बंगाल पुलिस को टैग करते हुए लिखा, “यदि इस राष्ट्र में आप लोगों ने संविधान की शपथ ली है तो ऐसे धार्मिक भावनाओं को आहत करने वालो लोगों पर कठोरतम कार्यवाही की आपसे अपेक्षा है।”

वहीं दुर्गेश कौशिक ने इसी वीडियो पर कहा, “अखिर चाहते क्या हो। आधा बंगाल तो ले ही चुके हो। आधे में घुस गए हो। कुछ साल तो जीने दो। इतनी जल्दी क्यों बांग्लादेश बना कर बंगाल को निकालना चाहते हो?”

मीडिया पोर्टल Newsroompost.com ने इस मामले में सालार पुलिस स्टेशन के एक पुलिस अधिकारी से बात करने का दावा किया है। न्यूज़रूम पोस्ट के मुताबिक पुलिस अधिकारी ने आरोपित की गिरफ्तारी की पुष्टि की है। आरोपित आरा शेख को मानसिक तौर पर बीमार भी बताया गया और साल 2017 से उसकी बीमारी का इलाज चलने की बात कही गई। मीडिया पोर्टल ने अपनी रिपोर्ट में आरोपित आरा शेख के कथित मेडिकल कागजों के साथ स्थानीय थाने पर हुई बातचीत का ब्यौरा भी प्रस्तुत किया है।

गोली लगते ही ‘जय श्रीराम’ का उद्घोष कर गिर जाते थे कारसेवक, ईश्वर की सेवा में न्यौछावर होने के लिए शरीर पर लिखवा लिया था नाम-पता

साल 1990 का दशक हर मायने में भारतीय जनमानस में बदलाव का दशक था। एक तरफ मंडल कमीशन को लागू किया गया था तो दूसरी तरफ राम जन्मभूमि अयोध्या पहुँचे कारसेवकों का नरसंहार किया गया था। मंडल कमीशन लागू करके देश की एक बड़ी आबादी को आरक्षण का लाभ देकर तत्कालीन प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह विलेन बन गए तो दूसरी तरफ कारसेवकों पर गोलियाँ चलवाकर उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ‘मुल्ला मुलायम’ बन गए और सेक्युलर जमात के हीरो बन गए।

इन दोनों घटनाओं ने भारतीय राजनीति और जनमानस को बेहद गहराई तक प्रभावित किया। OBC आरक्षण ने पिछड़ों में समृद्धि लाने का काम किया तो अयोध्या गोलीकांड ने हिंदुओं में नवचेतना का संचार किया। उन्हें पता लगा कि उनके अराध्य के दर्शन करने पर भी जालियाँवाला बाग कांड की तर्ज पर उन्हें गोलियों से छलनी किया जा सकता है।

आज अयोध्या में भव्य राम मंदिर बन रहा है। हर तरफ भगवान राम की गूंज सुनाई दे रही है, लेकिन इस भव्य मंदिर के लिए हिंदुओं खासकर कारसेवकों ने अपने सीने पर गोलियाँ खाईं और ‘जय श्रीराम’ बोलकर अयोध्या की पुण्य भूमि पर अपने नश्वर शरीर को त्याग दिया। कारसेवकों को पता था कि उन्हें मृत्यु को वरण करना पड़ सकता है, फिर भी वे पीछे नहीं हटे।

शास्त्रों में कहा गया है कि मानव शरीर निर्जीव हो जाने के बाद भी वह बिनी किसी पूर्वाग्रह या ईर्ष्या के सम्मान का अधिकारी होता है, लेकिन मुलायम सिंह यादव की पुलिस ने इस सार्वभौमिक नियमों की भी अनदेखी की और मृत रामभक्तों के शवों को क्षत-विक्षत किया। आज हम उसी अयोध्या की भूमि पर सांसारिक शरीर के त्याग की बात करेंगे।

साल 1990 के अक्टूबर के अंत और नवंबर की शुरुआत की मद्धिम-मद्धिम बयार शीतकाल के आगमन का आभास देने लगी थी। लगभग 400 वर्षों से मुक्ति का मार्ग दे रहे अयोध्या के राम मंदिर को लेकर हिंदुओं में छटपटाहट थी। हिंदू नेताओं एवं संतों के आग्रह पर कारसेवकों का जनसैलाब अयोध्या पहुँच चुका था, लेकिन यहाँ सब कुछ सामान्य नहीं था। राजनीति के मोहरे साधने के चक्कर में मुलायम सिंह यादव ड्रैक्युला बने बैठे थे।

अयोध्या में कारसेवकों को आगमन को देखते हुए कदम-कदम पर पुलिस बल तैनात थी। शहर में आने वाले हर रास्ते पर बैरियर लगाकर सुरक्षाबलों के हवाले कर दिया गया था। बड़ी-बड़ी इमारतों पर पुलिस के जवान हथियार लिए निशाना साधे बैठे थे। हर सुरक्षाकर्मी के हाथ में हथियार थे। शहर की फिजा में भयानक शांति थी, लेकिन कारसेवकों का ‘जय श्रीराम’ का उद्घोष उसे तोड़ने का प्रयास कर रहा था।

देश के कोने-कोने से आए कारसेवकों का जत्था शहर में प्रवेश करने की कोशिश कर रहा था। इसी दौरान भक्तों के कानों में गोलियों की आवाज सुनाई देने लगी। अयोेध्या का वातावरण बारूद की गंध से मलिन हो चला। कुछ कारसेवक गोलियों से बचने के लिए भगवान का नाम लेते हुए जमीन पर लेट गए। इनमें युवा से लेकर बुजुर्ग तक शामिल थे। इसके बावजूद इन पर लाठियाँ बरसाईं जाने लगीं। बूटों से कुचला जाने लगा। यहाँ तक कि उन पर घोड़े दौड़ाए गए।

कितने ही लोगों के अंग भंग हुए, कितने ही लोग काल कल्वित होकर ईश्वर के पास प्रस्थान कर गए। जो घायल थे, वे फिर भी पीछे हटने को तैयार नहीं थे। जय श्रीराम का उद्घोष करते रहे। शायद इन्होंने 30 अक्टूबर की घटना को जानकर स्वयं को ईश्वर की सेवा में न्यौैछावर करने के प्रण के साथ ही अयोध्या के लिए प्रस्थान किया था। इसलिए इन्होंने अपने शरीर के विभिन्न अंगों पर अपने नाम पर पता लिख दिया था कि अगर राजनीति के इस दुष्चक्र में उनका शरीर निर्जीव भी हो जाए तो वह ससम्मान घर तक पहुँचा दिया जाए।

जो कारसेवक अयोध्या नगर में प्रवेश कर गए और गलियों से होकर गुजरने लगे, उन पर गोलियाँ बरसाई जाने लगीं। यह कारसेवकों का दृढ़ता ही थी कि वे गोली खा रहे थे और जय श्रीराम कहकर शरीर त्याग रहे थे। जो कारसेवक गोलियों से बचने के लिए आसपास के घरों में घुस गए थे, उन्हें पुलिस ने बाहर निकाला और इन निहत्थे लोगों को गोली मारकर हत्या कर दी। जिन घरों में अंदर से दरवाजा बन कर दिया गया था, उसे पुलिस ने तोड़ दिया।

राजस्थान के बीकानेर से आए दो भाइयों- शरद कोठारी और राम कोठारी के बलिदान से कौन भला परिचित नहीं होगा। दोनों भाई भी आतंक के इस माहौल में खुद को बचाने के लिए एक घर में छिपे हुए थे। पुलिस ने घर का दरवाजा तोड़ा और बड़े भाई शरद कोठारी को बाहर निकालकर उनके सिर में गोली मार दी। अपने भाई को बचाने के लिए राम कोठारी दौड़े तो उन्हें भी गोली मार दी गई। दोनों भाइयों की घटनास्थल पर ही मौके पर ही मौत हो गई।

मुलायम सिंह यादव ने अयोध्या के बारे में बयान दिया था कि वहाँ परिंदा भी पर नहीं मार सकता। 30 अक्टूबर को कोठरी भाइयों ने गुम्बद के ऊपर भगवा ध्वज फहरा दिया था, लेकिन दो दिन बाद 2 नवंबर को दोनों भाई बलिदान हो गए। कहा जाता है कि इस नरसंहार में दर्जनों लोगों की जान गई थी, लेकिन चार-पाँच शवों को छोड़कर पुलिस ने सारे शव उठा लिए थे। उन शवों का आज तक पता नहीं चल पाया।

उस समय विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार में महबूबा मुफ्ती के पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद केंद्रीय गृहमंत्री थे। कारसेवकों पर गोली चलाने से वे ख़ुश थे और इसके लिए उन्होंने मुलायम सिंह यादव की पीठ थपथपाई थी। मुलायम सिंह भी अपनी इस कार्रवाई को सरकारी मर्दानगी समझते थे। यही कारण है कि समय-समय पर वे इसका गुणगान भी करते थे।

नवंबर 2017 में अपने 79वें जन्मदिन के मौके पर समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए कहा था कि देश की ‘एकता और अखंडता’ के लिए अगर सुरक्षा बलों को गोली चला कर लोगों को मारने भी पड़े तो ये सही था। इतना ही नहीं, उन्होंने यहाँ तक कहा दिया था कि अगर और लोगों को मारना पड़ता तो सुरक्षा बल ज़रूर मारते।

मुलायम ने गर्व के साथ कहा था कि इस गोलीकांड में 28 कारसेवकों को मौत के घाट उतार दिया गया था। मंदिर आंदोलन को अंजाम तक पहुँचाने वाली भाजपा इस हत्याकांड के लिए मुलायम सिंह यादव को हमेशा कोसती रही। हालाँकि, जब पिछले सा मुलायम सिंह यादव की मौत हुई तो भाजपा सरकार ने उन्हें देश के द्वितीय सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया।

अगर मुलायम ने गोली नहीं चलवाई होती तो शायद आज राम मंदिर नहीं बन रहा होता। मुलायम ने जिस चीज को दबाने के लिए गोली चलाई, शायद उन्हें पता नहीं था कि वो हिंदुओं की गर्भनाल है, उसी आत्मा में रची-बसी है। मुलयाम सिंह यादव ने शरीर छीना लेकिन, मन को उसके आराध्य से अलग नहीं कर पाए। आखिरकार उस घटना के 33 साल बाद यह सपना भी साकार हो गया।

उत्तराखंड में आ सकता है बड़ा भूकंप, नेपाल में आने वाले भूकंप पश्चिम की तरफ बढ़ रहे: IIT कानपुर के साइंटिस्ट ने जताई चिंता

नेपाल में तबाही मचाने वाले भूकंप को देखने के बाद आईआईटी कानपुर के एक साइंटिस्ट ने भविष्य में आने वाले खतरे पर बात की है। साइंटिस्ट ने कहा है कि ये कम मैग्नीट्यूड के ज्यादा भूकंप आना एक बड़े भूकंप के आने की आशंका है।

साइंटिस्ट का नाम प्रोफेसर जावेद मलिक है। आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा- “एक ही जगह पर बार-बार भूकंप आना चिंताजनक बात है। इसके अलावा कम मैग्नीट्यूड के ज्यादा भूकंप आना भी एक बड़े भूकंप की आशंका है। उनके मुताबिक अगर यही हाल रहा तो इससे भारत का उत्तराखंड भी प्रभावित हो सकता है।”

उन्होंने बताया कि ये एक ट्रेंड देखा गया है कि नेपाल में आने वाले भूकंप वेस्ट की तरफ बढ़ रहे हैं। अगर ऐसा ही रहा तो इसका दुष्प्रभाव उत्तराखंड पर पड़ेगा। संभव है उत्तराखंड में भी ऐसा बड़ भूकंप आए। अनुसंधान के दौरान यह भी सामने आया है कि दरारों में जब पानी जाता है तो उससे वाटर प्रेशर बनता है और उसकी वजह से भूकंप की आशंका बढ़ जाती है।

जानकारी के मुताबिक आईआईटी कानपुर में एक प्रोजेक्ट के चलते फॉल्ट लाइंस को मार्क किया गया जहाँ भूकंप आने की आशंका है या वहाँ भविष्य में प्लेट्स खिसक सकती है। उनकी इस स्टडी से अर्बन डेवलपर्स और प्लॉनर्स को आसानी होगी।

उन्हें पता चलेगा कि किन जगहों पर भारी कंस्ट्रक्शन और प्रोजेक्ट्स नहीं लाने हैं ताकि भूकंप की आशंका से सुरक्षित रहा जा सके। इस स्टडी ने यह भी अनुमान लगाया है कि अगर भूकंप आएगा तो कितने मैग्नीट्यूड का आएगा।

बता दें कि नेपाल में शुक्रवार को आए भूकंप से भारी तबाही मची। जिसमें 129 लोगों की मौत हुई जबकि कई घायल हो गए। भूकंप का सबसे ज्यादा प्रभाव रुकूम पश्चिम और जाजरकोट में पड़ा। किसी परिवार ने अपने घर के कई सदस्यों को खो दिया तो कहीं पूरा परिवार तबाह हो गया।

द काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट बताती है कि जिस समय भूकंप आया उस समय पंफा रावत जाजरकोट से भारत में अपने बेटे से बात कर रही थीं। अचानक भूकंप आया, घर गिरा और वो उनके पति और दो बेटे मलवे में समा गए। पड़ोसियों ने मशक्कत से उन लोगों को वहाँ से निकाला जब उनकी जान बच पाई। इसी तरह एक परिवार के 6 के 6 सदस्य भूकंप के कारण चल बसे।

सीडीओ सुनार ने बताया कि जिले में जितने पत्थर और मिट्टी के घर थे सभी क्षतिग्रस्त हो गए हैं। वो लोग अब भी राहत-बचाव कार्य कर रहे हैं। घायलों को इलाज देने का प्रयास हो रहा है मगर स्वास्थ्यकर्मियों, उपकरणों और दवाइयों की कमी के कारण दिक्कत आ रही है। हालात ये हैं कि अभी कोई अंदाजा नहीं लगाया जा सका है कि इस भूकंप ने कितनी तबाही मचाई

ऐसे ही रुकुम वेस्ट में इस आपदा से 52 से ज्यादा लोगों की जान गई। एक स्थानीय ने सुनाया कि कैसे एक घर में कुछ मेहमान आ रहे थे वो लोग भी इस भूकंप के कारण मलवे में दबकर मर गए। ऐसी कहानी सरस्वती की भी है। सरस्वती ने बताया कि जब घर गिरा तो वो बेहोश हो गई थीं। होश में आने के बाद पता चला कि उनकी बेटी और नाति-नातिन अब इस दुनिया में नहीं।

इस भूकंप में नालागड़ की डिप्टी मेयर सरिता सिंह की भी मृत्यु हो गई। खालंगा में घर गिरने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया लेकिन रास्ते में उनकी मौत हो गई। बताया जा रहा है कि नेपाली कॉन्ग्रेस की ओर से वो डिप्टी मेयर पिछले सार बनी थीं। लेकिन एक भूकंप ने उनके राजनैतिक करियर के साथ उनकी जिंदगी भी उनसे ले ली।

CRPF की गाड़ी को भीड़ ने घेरा, ड्राइवर को नीचे खींचने की कोशिश और पत्थरबाजी: श्रीनगर में हिंसक भीड़ को सुरक्षा बलों ने किया तितर-बितर

कश्मीर के श्रीनगर में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की गाड़ी से 2 बाइक सवारों की टक्कर हो गई। इस एक्सीडेंट में 1 बाइक सवार की मौत हो गई। वहीं दूसरा बाइक सवार घायल हो गया, जिसे अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। मृतक का नाम मंज़ूर अहमद है। इस घटना के बाद स्थानीय भीड़ ने CRPF के वाहन को घेर लिया और तोड़फोड़ की। इसके बाद स्थानीय पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया। घटना शनिवार (4 नवंबर 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह घटना श्रीनगर के चिनार चौक इलाके की है। शनिवार को CRPF की 25वीं बटालियन की QRT का वाहन इसी चौक के पास से गुजर रहा था। अचानक ही JK 01AM 4913 नंबर की एक TVS ज्यूपिटर स्कूटी सवार 2 युवक उधर से गुजरे। चौक के पास इनकी बाइक की CRPF के बंकर वाहन से टक्कर हो गई। इस टक्कर में बाइक चला रहा व्यक्ति मंज़ूर अहमद बुरी तरह से घायल हो गया। घायल मंज़ूर को आसपास के लोगों ने अस्पताल पहुँचाया, जहाँ उसने दम तोड़ दिया।

इस घटना से चौक पर मौजूद भीड़ भड़क उठी। भीड़ ने CRPF के वाहन को घेर लिया। वो ड्राइवर को नीचे उतरने के लिए दबाव बना रहे थे। ऑपइंडिया को मिले वीडियो में कुछ लोग दरवाजा भी पीटते दिखाई दे रहे हैं। इस दौरान एक व्यक्ति वाहन के आगे चढ़ कर शीशे पर हमला करता है। वहीं दूसरा व्यक्ति ड्राइवर की साइड से चढ़ कर खिड़की में हाथ डालने का प्रयास करता है। नीचे तमाम लोग ड्राइवर को गंदी-गंदी गालियाँ देते सुने जा सकते हैं।

वायरल हो रहे एक अन्य वीडियो में कुछ लोगों को सुरक्षा वाहनों पर पत्थरबाजी करते भी देखा गया।

मौके पर पुलिस बल के साथ अतिरिक्त सुरक्षा बलों ने पहुँच कर हालात को काबू किया और हिंसक हो रही भीड़ को तितर-बितर किया। पुलिस ने घटना का संज्ञान लिया है। मामले में जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

‘हिन्दू कीड़े-मकोड़े की तरह मसले जाएँगे… योगी ने कुछ नहीं किया, हमारी सरकार आने पर सब जाएँगे जेल’: अयान कुरैशी को UP पुलिस ने दबोचा

सोशल मीडिया पर उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले से एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में खुद को अयान कुरैशी बता रहा एक मुस्लिम युवक हिन्दुओं को कीड़ा-मकोड़ा कहते हुए अपनी सरकार आने पर सब सफा (मतलब सारे विपक्षी साफ, सारे विरोधी साफ, सारे किए गए काम साफ इत्यादि) हो जाने जैसी बयानबाजी कर रहा है। आरोपित हिन्दुओं के त्योहारों पर बंद होने वाली मांस की दुकानों के फैसले पर भी आपत्ति जताता दिख रहा। पीछे मुस्लिम समुदाय के ही कुछ अन्य लोग भी दिखाई दे रहे हैं, जो अयान कुरैशी का समर्थन कर रहे हैं। पुलिस ने वायरल वीडियो का संज्ञान लेकर FIR दर्ज कर ली है। अयान कुरैशी हिरासत में ले लिया गया है।

यह वीडियो मसूरी थानाक्षेत्र का है। न्यूज़ गैलरी नाम के एक यूट्यूब चैलन ने इसे शनिवार (4 नवंबर 2023) को पब्लिश किया है। 7 मिनट 48 सेकेंड के इस यूट्यूब वीडियो में पत्रकार ने रफ़ीकाबाद में रहने वाले लोगों से सवाल-जवाब किए। इसी दौरान अयान कुरैशी ने भी जवाब दिया। अयान ने कहा, “भाई हिन्दू क्या है? तुम इंडिया में रहने के बाद सिर्फ हिन्दू-हिन्दू हो। कौन से देश में हैं हिन्दू, ये बताओ मुझे। बाबर का इतिहास और उसका इतिहास क्या कर रहे हो… आप कुछ भी कर लो बस इंडिया तक ही सीमित हो।”

सरकार द्वारा हिन्दू तीर्थस्थलों को उनके पौराणिक नाम फिर से देने पर भी अयान कुरैशी ने आपत्तिजनक बयानबाजी की। उसने कहा, “प्रयागराज का नाम वो रख दिया, ये रख दिया। भाई तुम्हारी सरकार है, तुम कुछ भी रख दो। जिस दिन हमारी सरकार आएगी, उस दिन सब सफा (मतलब सारे विपक्षी साफ, सारे विरोधी साफ, सारे किए गए काम साफ इत्यादि) हो जाएगा। जो पहले का था, वही रहेगा।”

कर्नाटक बुर्का विवाद पर भी अयान कुरैशी ने कहा कि मुस्लिम लड़कियों की मर्जी, वो कुछ भी पहनें। इस दौरान अजीब ढंग से अयान ने करवा चौथ जैसे हिन्दू त्योहारों का नाम लेते हुए इस दौरान बंद करवाई जाने वाली मांस की दुकानों पर आपत्ति जताई।

मुर्गे का मांस बेचने वाला अयान कुरैशी ने गायों के संरक्षण पर भी तंज कसा। उसने कहा कि जैसे गाय की चिंता की जा रही है वैसे ही बिल्ली, मुर्गे और भैंसे की भी फ़िक्र की जाए। अयान के मुताबिक योगी आदित्यनाथ ने एक भी काम अच्छा नहीं किया है। अंत में अयान ने कहा, “इस्लाम जिंदा था, है और रहेगा भी।”

इस पूरे इंटरव्यू के दौरान अयान कुरैशी के पीछे मौजूद कुछ लोगों की भीड़ इस बयानबाजी का समर्थन करते हुए बीच-बीच में नारेबाजी करती रही। कैमरे में नहीं दिख रहे बगल खड़े किसी शख्स ने यह भी कहा कि बाबर उनका है।

भारत में रहने, भारतीय लोगों के पैसों पर पलने वाले अयान कुरैशी ने हद तब कर दी, जब उसने कहा:

“मुसलमानों की लड़ाई केवल यहूदियों से है। ये क्या हैं हिन्दू? ये कीड़े-मकोड़े की तरह मसले जाएँगे।”

इस बयान पर पत्रकार ने आपत्ति जताई और ऐसा न बोलने की हिदायत दी। हालाँकि इस हिदायत का अयान कुरैशी पर कोई फर्क नहीं पड़ा और वो अपनी बात पर कायम रहा। इस दौरान एक अन्य व्यक्ति ने सरकार को ढोंगी कहा। अंत में अयान ने कहा, “ये सरकार जाने के बाद इन्हें छुपने की कहीं जगह नहीं मिलेगी। ये सब जेल में जाएँगे। एक-एक कर के। सफा बिलकुल। हम तो इतना जानते हैं।”

इस वायरल वीडियो का गाजियाबाद पुलिस ने संज्ञान लिया है। ACP मसूरी के मुताबिक वीडियो के आधार पर केस दर्ज कर लिया गया है। आरोपित अयान कुरैशी को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

जर्मनी के हैम्बर्ग एयरपोर्ट पर कार लेकर घुसा शख्स, किए फायर: उड़ानें रद्द, पुलिस ने इलाके को घेरा, साथ में रखा है बच्चा

जर्मनी के हैम्बर्ग में एक सिरफिरा एयरपोर्ट के रनवे पर गाड़ी लेकर घुस गया है। आशंका जताई जा रही है कि वह एक अपहरणकर्ता है। एयरपोर्ट पर आने-जाने वाली सैकड़ों उड़ानों को या तो फिलहाल रोक दिया गया है या फिर रद्द कर दिया गया है।

हैम्बर्ग पुलिस द्वारा एक्स (पहले ट्विट्टर) पर दी गई जानकारी के अनुसार, शनिवार को स्थानीय समय शाम 8:00 बजे एक सिरफिरा अपनी गाड़ी को एयरपोर्ट के बैरियर तोड़ते हुए रनवे तक ले गया, जिससे एयरपोर्ट का कामकाज रुक गया।

अभी तक सामने आई जानकारी के अनुसार, एयरपोर्ट पर गाड़ी ले जाने वाले 35 साल के शख्स के साथ 4 साल का एक बच्चा भी है। पुलिस इसे अपहरण का मामला मानकर चल रही है। इस शख्स की पत्नी ने बताया है कि बच्चे को अपने पास रखने के विवाद में उसने अपहरण किया है। पति-पत्नी के बीच बच्चे को अपने रखने को लेकर पहले से विवाद चल रहा था।

इस शख्स ने अपनी गाड़ी से दो बार हवाई फायर किया और जलती हुई बोतलें भी फेंकी। पुलिल ने फायरिंग की पुष्टि नहीं की है। हालाँकि, यह स्पष्ट नहीं है कि उसने किसी हमले की धमकी दी है या नहीं। हैम्बर्ग पुलिस उससे सम्पर्क साधने में सफल रही है और मनोवैज्ञानिकों के साथ उससे बातचीत कर रही है।

इस शख्स की पत्नी ने कहा कि आरोपित उसके संपर्क में है। इस दौरान हैम्बर्ग से उड़ने वाले सभी विमानों से लोगों को निकालकर आसपास के होटल में ले जाया गया है। किसी भी नई उड़ान पर रोक लगा दी गई है। बाहर से आने वाली उड़ानों का रास्ता बदल दिया गया है।

एयरपोर्ट जाने वाली सड़कों और रेल को भी कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया है। सोशल मीडिया पर हैम्बर्ग एयरपोर्ट से कुछ वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें देखा जा सकता है कि कुछ हवाई जहाज़ों के पास जमीन पर आग लगी हुई है और उसे सुरक्षाकर्मी उसे बुझाने का प्रयास कर रहे हैं।

इस पूरी घटना में अभी तक किसी के घायल होने या मारे जाने की सूचना नहीं मिली है। स्थानीय पुलिस और एयरपोर्ट सुरक्षा के अतिरिक्त घटनास्थल पर जर्मनी की स्पेशल फ़ोर्स, स्वाट और अन्य टीमें पहुँची हैं।

छत्तीसगढ़ में BJP नेता की दिनदहाड़े हत्या: नक्सलियों ने दौड़ा-दौड़ा कर खंजर-कुल्हाड़ी से किए वार, पहले धमकी दी थी- कोई बस्तर वोट माँगने मत आना

छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनावों से पहले बस्तर में भाजपा नेता रतन दुबे की हत्या कर दी गई। दुबे बस्तर में भाजपा के जिला उपाध्यक्ष और नारायणपुर जिला पंचायत सदस्य थे। कथिततौर पर चुनाव प्रचार के लिए आयोजित रैली के बाद ही रतन दुबे पर नक्सलियों ने दिनदहाड़े धारदार हथियार से हमला बोला।

बता दें कि दुबे की हत्या से पहले नक्सलियों ने 10 दिन पहले धमकी दी थी कि कोई राजनैतिक पार्टी का कार्यकर्ता या प्रत्याशी बस्तर में वोट माँगने न आए। लेकिन 7 और 17 को मतदान के मद्देनजर रतन दुबे वोटों के लिए गए और नक्सलियों ने उन्हें वहीं जान से मार दिया।

पुलिस का कहना है कि उन्होंने इस केस को दर्ज कर लिया है और आगे जाँच की जा रही है। दुबे नारायणपुर जिला के पंचायत सदस्य थे और कौशलनगर के ढौदई क्षेत्र में रैली करने आए थे।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, प्रचार खत्म होने के बाद मंच के पास मुर्गों की लड़ाई का आयोजन किया गया, जिसके कारण वहाँ भीड़ जमा हो गई थी। इसी दौरान ग्रामीणों के वेश में आए पुरुषों का एक समूह चुपचाप भीड़ से अलग हो गया और मंच के पास आने लगा।

दुबे ने उन्हें तुरंत देख खतरे को भांप लिया। वह मंच से कूदकर भागने लगे। हंगामे के कारण ग्रामीणों की नजर भी वहाँ पड़ी और सबने देखा कि बंदूक, खंजर और कुल्हाड़ी लिए लोगों का एक समूह दुबे का पीछा कर रहा थे।

कुछ दूर पीछा करने के बाद एक नक्सली ने दुबे पर पीछे से गोली मारी। जैसे ही वो नीचे गिरे वैसे ही उनके ऊपर पीछे खंजर और कुल्हाड़ी लेकर हमला बोल दिया गया। ये घटना जरघाटी थाने से 5 किलोमीटर दूर शाम करीब 5:30 हुई। पुलिस इस मामले की जाँच कर रही है

भाजपा के छत्तीसगढ़ प्रभारी ओम प्रकाश माथुर ने कहा, “रतन दुबे को नक्सलियों में टुकड़ों में काट दिया। मैं अपील करता हूँ पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं से उनकी मौत का बदला चुनाव जीत कर लिया जाए। टारगेट किलिंग लगातार हो रही है। ये दिखाता है कि छत्तीसगढ़ में हालात बद्तर हैं। नक्सली डरे हैं क्योंकि जानते हैं कि भाजपा सत्ता में आई तो वो नहीं रह पाएँगे।”

उल्लेखनीय है कि इससे पहले 16 जनवरी को भाजपा कार्यकर्ता बुधराम करतम की हत्या की गई थी। इसके बाद भाजपा नेता नीलकंथ कक्कम को मारा दया था। 10-11 फरवरी में नारायणपुर के ही उपाध्यक्ष साग साहु और दंतेवाड़ा में रामधर अलामी की हत्या हुई थी।

जेल के बाहर भी आतंकी रहेगा ‘कैद’, भागेगा तो दबोचा जाएगा: जम्मू-कश्मीर पुलिस GPS ट्रैकर इस्तेमाल करने वाली देश की पहली पुलिस बनी

आतंकियों को जमानत पर छोड़ने के बाद उन पर कड़ी निगाह रखी जाएगी। इसके लिए उनके पैरों में GPS ट्रैकर डालने का निर्णय लिया है। ऐसा करने वाली जम्मू-कश्मीर पुलिस देश की पहली पुलिस फोर्स बन गई है। आतंकियों के पैरों में डाले गए इस ऐंकलेट के जरिए आतंकी की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी।

GPS ट्रैकर एंकलेट एक डिवाइस होती है। इसे किसी शख्स के टखने के चारों तरफ चिपका दिया जाता है। इसे लगाने के बाद वह व्यक्ति जहाँ भी जाएगा, उसके बारे में ऑपरेटर को जानकारी मिलती रहेगी। अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे देशों में जमानत या परोल पर जाने वाले कैदियों के लिए इस डिवाइस का इस्तेमाल किया जाता है।

पुलिस का कहना है कि इस डिवाइस को NIA की स्पेशल कोर्ट के एक आदेश के बाद इस्तेमाल में लाया गया है। NIA की स्पेशल कोर्ट ने पुलिस को एक खूँखार आतंकी पर नजर रखने के लिए उस पर जीपीएस ट्रैकर लगाने का निर्देश दिया था। पश्चिमी देशों में इस डिवाइस का इस्तेमाल घर में नजरबंद कैदियों की निगरानी के लिए भी किया जाता है।

जिस आतंकी पर पहली बार इस ट्रैकर का इस्तेमाल किया गया है, उसका नाम गुलाम मोहम्मद भट्ट है। भट्ट को UAPA के तहत गिरफ्तार किया गया था। उसने जमानत के लिए कोर्ट में आवेदन किया था। जमानत पर सुनवाई लंबित रहने के कारण आरोपित ने कोर्ट से अंतरिम जमानत की माँग की थी। इसके बाद कोर्ट ने यह निर्णय दिया।

आरोपित गुलाम भट्ट पर कई आतंकी संगठनों से जुड़े होने के आरोप हैं। वह प्रतिबंधित आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन केकहने पर कश्मीर में आतंकी फाइनेंसिंग में शामिल हो गया था। ऐसे ही एक मामले में उसे गिरफ्तार किया गया था। उसे 2.5 लाख रुपए की टेरर फाइनेंसिंग करते समय गिरफ्तार किया गया था।

वहीं, एक अन्य मामले में आतंकी संगठन से जुड़ने और साजिश रचने के आरोप में NIA कोर्ट और दिल्ली की पाटियाला हाउस कोर्ट ने उसे दोषी ठहरा चुकी है। इसको देखते हुए कोर्ट ने पुलिस से उस पर कड़ी निगरानी रखने के लिए कहा था। इसके बाद अभियोजन पक्ष की दलील के बाद कोर्ट ने उस पर जीपीएस ट्रैकर लगाने का निर्देश दिया।