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हिंदू लड़की को ‘लव जिहाद’ में फाँसकर संबंध बनाता रहा शहवाज खान, बोला- शादी से पहले मुस्लिम बनो; मना करने पर दी जान से मारने की धमकी

मध्य प्रदेश के दमोह में शहवाज खान नाम के युवक पर ‘लव जिहाद’ का आरोप लगा है। शहवाज पर 20 वर्षीय एक हिंदू युवती ने शादी के नाम पर दुष्कर्म करने और धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने का आरोप लगाया है। युवती ने पुलिस को बताया कि वह करीब डेढ़ साल पहले आरोपित शहवाज से मिली थी।

ये मामला मध्य प्रदेश के दमोह कोतवाली इलाके का है। पीड़िता ने बताया कि धगट चौराहे के पास बाजार मोहल्ला में रहने वाले शहवाज खान पुत्र नसीर खान से डेढ़ साल पहले उसकी जान पहचान हुई थी। इसके बाद दोनों आपस में मिलने-जुलने लगे थे।

पीड़िता ने बताया कि शादी का झाँसा देकर शहवाज ने उसे जबलपुर नाका पर संचालित टाउनवैरी रेस्टोरेंट बुलाया। वहाँ उसने एक केबिन में बुलाकर शादी का वादा किया और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। पीड़िता का आरोप है कि इसके बाद शहवाज ने कई बार उससे संबंध बनाए।

शादी करने से पहले धर्म परिवर्तन का डाला दबाव

पीड़ित लड़की ने बताया कि कुछ समय बाद जब उसने शहवाज पर शादी के लिए दबाव डालना शुरू किया तो उसने धर्म परिवर्तन कर मुस्लिम बनने के लिए कहा। लड़की का कहना है कि जब उसने मना किया तो शहवाज ने उसे जान से मारने की धमकी दी।

लड़की ने आगे बताया, “शुरू में मैंने इस बारे में किसी को नहीं बताया, लेकिन राखी के त्योहार के समय भी उसने डरा-धमकाकर मुझसे संबंध बनाया और किसी को बताने पर फिर से धमकी दी। इसके बाद सारी घटना मैंने अपने माता-पिता को बता दी।”

इसके बाद पीड़िता परिजन के साथ गुरुवार (5 अक्टूबर 2023) को दमोह कोतवाली में शिकायत दर्ज करने गई। इसके बाद पुलिस ने संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया।शिकायत दर्ज कराने के बाद पुलिस ने पीड़िता का मेडिकल कराया।

मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत भी केस दर्ज

इस मामले में थाना इंचार्ज विजय सिंह राजपूत ने कहा कि शिकायत मिलने के बाद जरूरी जाँच पड़ताल की और फिर मामला दर्ज कर लिया गया। इस मामले में आरोपित शहवाज खान के खिलाफ IPC की धारा 376, 366, 506, 3-2-5, 3(1) W (।।) व एससी एसटी की धारा 3/5 और मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत मामला दर्ज की गई। उन्होंने बताया कि आरोपित को गिरफ्तार करने की कोशिश की जा रही है।

दमोह में इस साल जनवरी में भी आया था लव जिहाद का मामला

बता दें कि इस साल जनवरी में भी लव जिहाद का मामला सामने आया था, जिसमें लड़की दमोह की थी और बेंगलुरु में नौकरी करने गई थी। वहाँ फारुख नाम के युवक ने खुद का नाम राजू बताकर उसे जाल में फँसा लिया था और युवती का शोषण करता था।

इस दौरान आरोपित ने इस हिंदू युवती के सारे दस्तावेज भी अपने कब्जे में ले लिए थे। उसने अश्लील फोटो वीडियो बनाकर लड़की को प्रताड़ित भी किया। लड़की किसी तरह से बेंगलुरु से भागकर दमोह पहुँची थी।

दमोह में 2021 में भी लव जिहाद का एक मामला हुआ था, जिसमें कॉलेज जाने वाली लड़की को मुस्लिम युवक ने जाल में फँसा लिया था। इसके बाद लड़की अपने घर से 3 लाख रुपए लेकर उस मुस्लिम युवक के साथ फरार हो गई थी।

‘हिंदुओं को फाँसने के मिलते हैं पैसे, ये कौम का काम’: रिजवान ने करन बनकर हिंदू लड़की को फाँसा, धर्मांतरण और दो बच्चे पैदा करने के बाद खोला राज

गुजरात के सूरत से लव जिहाद का नया मामला सामने आया है। यहाँ रिजवान गफ्फार खान नाम के मुस्लिम युवक ने खुद को करन बताकर एक हिंदू लड़की को अपने जाल में फाँस लिया। वो उसे दिल्ली लेकर गया और फिर पोल खुलने के डर से उसने लड़की को डरा धमकाकर मुस्लिम बना लिया, लेकिन इससे पहले ही उसने हिंदू रीति-रिवाज से लड़की से शादी की थी। शादी के बाद वो उसे दिल्ली लेकर आया और लड़की को अपने मुस्लिम होने की जानकारी दी, फिर उसका धर्म परिवर्तन कराकर निकाह भी कर लिया। वो उसे अपने गाँव लेकर गया और पूरी तरह से मुस्लिमों की तरह घर की चारदीवारी तक ही सीमित कर दिया।

इन सबके बीच उसके दो बच्चे भी हो गए। इसके कई साल बाद वो दूसरी हिंदू लड़कियों को इंस्टाग्राम के माध्यम से जाल में फँसाने लगा, तो हिंदू से मुस्लिम बनी पहली लड़की ने ऐतराज जताया। इसके बाद रिजवान ने जो खुलासा किया वो चौंकाने वाला है। रिजवान ने बताया कि वो ‘कौम का काम’ कर रहा है। उसे पैसों की जरूरत है। ऐसे में वो एक और हिंदू लड़की को फाँस कर ले आएगा, तो उसे पैसे मिलेंगे। इसके बाद लड़की किसी तरह से उसके चंगुल से भागकर सूरत पहुँची और पूरा वाकया घर वालों को बताया, जिसके बाद मामला दर्ज कराया गया।

ये पूरा मामला सूरत के पांडेसरा थाना इलाके का है। पीड़ित लड़की की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कराने के बाद सूरत पुलिस ने आरोपित रिजवान को गिरफ्तार कर लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है। इस मामले को लेकर सूरत पुलिस के एसीपी एमडी उपाध्याय ने मीडिया को जानकारी दी।

जानकारी के मुताबिक, पीड़ित लड़की साल 2018 में आरोपित रिजवान गफ्फार शाह के संपर्क में आई थी। उस समय उसकी उम्र 17 साल थी और रिजवान उसे करन के तौर पर मिला था। पीड़ित लड़की एक फैक्ट्री में काम करती थी और आरोपित ऑटोरिक्शा चलाता था और लड़की को लाने और छोड़ने का काम करता था। कुछ समय बाद दोनों के बीच दोस्ती हुई जो ‘प्रेम संबंध’ में बदल गई। इस दौरान उन दोनों ने शादी कर ली। शादी के समय लड़की नाबालिग थी। उसके बाद वो उसे दिल्ली लेकर चला गया। दिल्ली में उसने बताया कि उसका असली नाम रिजवान है। लेकिन तबतक पीड़िता गर्भवती हो गई थी। इसी वजह से वो रिजवान के साथ ही रहने लगी।

मूर्ति पूजा पर लगाया बैन, मुस्लिम बनाकर ले गया गाँव

पीड़िता की शिकायत है कि रिजवान ने उससे कहा कि वे (मुस्लिम) मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं करते हैं और इसलिए लड़की को पूजा नहीं करनी चाहिए। इसके साथ ही आरोपित ने उस पर इस्लाम धर्म अपनाने का दबाव बनाया। इसके बाद लड़की को जबरन इस्लाम में परिवर्तित कर दिया गया और रिजवान उसे उत्तर प्रदेश में अपने परिवार के पास ले गया। यूपी जाकर पीड़िता ने एक बेटी को जन्म दिया। आरोप है कि इसके बाद रिजवान ने पीड़िता से यह कहते हुए मारपीट की कि उसे बेटा चाहिए। लड़की ने शिकायत में यह भी कहा कि यूपी में उसे बुर्का पहनने के लिए मजबूर किया गया और घर से निकलने पर भी रोक लगा दी गई।

इसी बीच लड़की दूसरी बार गर्भवती हो गई और उसे एक और बच्चा हुआ। पीड़ित ने बताया कि काफी बाद में उसे पता चला कि रिजवान अन्य हिंदू लड़कियों के भी संपर्क में था। जिसके बारे में पूछताछ करने पर रिजवान ने उसे बताया कि वह जितनी अधिक हिंदू लड़कियों को बहकाता है, उन्हें उतने ही अधिक पैसे दिए जाते हैं। उसने कहा, “मुझे अभी और पैसों की जरूरत है और हम जितनी ज्यादा हिंदू लड़कियाँ लाएँगे, इस्लाम का उतना ही ज्यादा प्रचार होगा। यह कौम की मजबूती का काम।”

आखिरकार जब प्रताड़ना असहनीय हो गई तो लड़की ने अपने परिजनों को इसकी जानकारी दी और सूरत आकर पांडेसरा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। इसके आधार पर सूरत पुलिस ने केस दर्ज कर लव जिहाद के आरोपित रिजवान गफ्फार शाह को गिरफ्तार कर लिया।

जिसे राखी बाँधती थी दिव्या, उसी शौकीन ने तलवार से किया हमला: विश्वासघाती को लोगों ने धूना, एनकाउंटर के बाद गाजियाबाद पुलिस ने दबोचा

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में 16 साल की एक लड़की पर तलवार से हमला कर जान से मारने की कोशिश की गई। आरोपित की पहचान शौकीन के रूप में हुई है। पीड़िता उसे अपना भाई मानते हुए राखी बाँधती थी। पुलिस जब शौकीन को गिरफ्तार कर मेडिकल के लिए ले जा रही थी, तभी उसने पिस्टल छीनकर भागने की कोशिश की। इसके बाद एनकाउंटर में पुलिस ने उसे पकड़ लिया। उसके पैर में गोली लगी है। आरोपित के दूसरे समुदाय के होने के कारण इलाके में तनाव है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला गाजियाबाद के मोदीनगर इलाके की जगतपुरी कॉलोनी का है। यहाँ रहने वाले संजय उपाध्याय की बेटी दिव्या उपाध्याय 9वीं क्लास में पढ़ती है। गुरुवार (5 अक्टूबर 2023) की शाम वह रोज की तरह घर के पास रहने वाले टीचर के पास ट्यूशन पढ़ने जा रही थी। इसी दौरान 35 साल के शौकीन ने पीछे से आकर उस पर तलवार से ताबड़तोड़ वार किए।

मौके पर मौजूद लोगों ने ईंट-पत्थर से हमला कर पीड़िता को छुड़ाया। आसपास के लोगों ने पकड़कर शौकीन की पिटाई कर दी। इसी दौरान पुलिस को सूचित कर उसे सौंप दिया गया। तलवार से हुए इस हमले में दिव्या बुरी तरह से जख्मी हो गई है। उसके शरीर पर 9 जगह हमले के निशान हैं। सिर, गर्दन और हाथ में गंभीर घाव और कोहनी में फ्रैक्चर हुआ है।

पीड़िता के पिता संजय उपाध्याय और शौकीन अच्छे दोस्त हैं। दोनों का घर आमने-सामने है। संजय और शौकीन साथ में रँगाई-पुताई का काम भी करते हैं। शौकीन की पत्नी उससे अलग रहती है। संजय के परिजनों का कहना है कि अकेले रहने के कारण वह अक्सर उन्हीं के यहाँ खाना भी खाता था।

परिजनों का कहना है कि रक्षाबंधन पर दिव्या शौकीन को राखी बाँधती थी और वह उसे भाई मानती थी, लेकिन शौकीन इन सबका यह नतीजा देगा, किसी ने भी इसकी कल्पना नहीं की थी। पीड़िता के पिता संजय का कहना है कि कुछ दिन पहले दिव्या की स्कूल की एक लड़की किसी के साथ भाग गई थी। इस पर शौकीन दिव्या को भी स्कूल जाने से रोकने लगा।

परिजनों को लगा कि उनकी बेटी उसे भाई मानती है, इसलिए वह यह सब कर रहा है। यहाँ तक कि वह उसे कोचिंग भी अकेले नहीं जाने देता था। शौकीन ने ही संजय से बात कर दिव्या का स्कूल भी बदलवा दिया था। वह हर बात में दिव्या को टोकता था, लेकिन परिजन शौकीन की नीयत नहीं समझ पाए थे।

पीड़िता के एक परिजन का कहना है कि शौकीन को फाँसी की सजा होनी चाहिए। यदि पुलिस सजा नहीं दिला सकती तो शौकीन को उन्हें सौंप दिया जाए। वह न्याय कर देंगे। इसके बदले में जो सजा होगी वह भुगतने को तैयार हैं।

बता दें कि शौकीन को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस मेडिकल के लिए उसे हॉस्पिटल लेकर जा रही थी। इसी दौरान उसने पुलिस से बंदूक छीनकर भागने की कोशिश की। फिर पेड़ की ओट में छिपकर फायरिंग करने लगा। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी फायरिंग की तो उसके दाएँ पैर में गोली जा लगी है। इसके बाद पुलिस ने उसे दबोच लिया।

रकीबुल हसन ने मारा पीटा, भूखा रखा, कुत्ते से कटवाया, रेप, दूसरे मर्द के साथ सुलाने की धमकी… : नेशनल शूटर तारा शाहदेव की दर्दनाक कहानी, 9 साल बाद मिला इंसाफ

झारखंड की नेशनल शूटर तारा शाहदेव के मामले फैसला आ चुका है। किस तरह से रकीबुल हसन ने खुद को हिंदू रंजीत कोहली बताकर उन्हें धोखा दिया और शादी की थी। बाद में उन पर इस्‍लाम कबूलने का दबाव बनाया गया और ऐसा नहीं करने पर उनकी पिटाई की जाती थी और कई बार कुत्ते से भी कटवाया गया। उन्हें कई-कई दिनों तक भूखा रखा जाता था। उनके साथ रेप और जबरदस्ती की जाती रही।

लव जिहाद इसी मामले में हाल ही में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने दोषी रकीबुल हसन उर्फ रंजीत कोहली को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही रकीबुल की अम्मी कैशर रानी को 10 साल और साजिश रचने के आरोपित रहे हाईकोर्ट के बर्खास्त रजिस्ट्रार मुश्ताक अहमद को 15 साल कैद की सजा सुनाई है। सभी दोषियों पर 50-50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। बता दें कि मुस्ताक अहमद ही वो शख्स था जिसने रकीबुल को रंजित कोहली बनाकर तारा से मिलवाया था। 

वहीं इस फैसले के बाद तारा शाहदेव ने कहा, ”मैं कोर्ट और सीबीआई को धन्यवाद देना चाहती हूँ, जिन्होंने मुझे न्याय दिलाया। ये न्याय सिर्फ मेरे लिए नहीं है, देश की हर बेटी को ये भरोसा मिलेगा कि जो भी उनके साथ ऐसा करेगा, उसे सजा मिलेगी।”

अभी तक आपको तारा शाहदेव के इस मामले की झलक मिल गई होगी कि कितनी बुरी तरह से एक राष्ट्रीय शूटर को सताया गया, उसने क्या-क्या सहा इसी पर हम आगे बात करने जा रहे हैं। हाल ही में जब इस मामले में 9 साल बाद फैसला आया है तो आइए जानते हैं तारा शाहदेव की दर्दनाक कहानी।

क्या हुआ था उस दिन जब वह शादी के जोड़े में अपने पति के घर पहुँची? कैसे उन्हें शादी के दो दिन बाद ही उस समय झटका लगा जब ये कहा गया कि अपना धर्म परिवर्तन कर इस्लाम कबूल करो और तारा से सारा बन जाओ। इस तरह से देश के लिए गोल्ड जीतने वाली राष्ट्रीय खिलाड़ी अब लव जिहाद के एक ट्रैप में फँस चुकी थी। 

कैसे हुई रकीबुल हसन से मुलाकात

नेशनल शूटर तारा शाहदेव के माँ की 2014 में ही मौत हो गई थी। वो अपनी माँ की मौत से टूट गईं थी लेकिन शूटिंग कैंप में जाती रहीं। इसी दौरान पीली बत्ती लगे वाहन में विजिलेंस रजिस्ट्रार मुश्ताक अहमद (हाईकोर्ट में पदस्थापित) व रंजीत कुमार कोहली उर्फ रकीबुल हसन उनका प्रैक्टिस देखने आते थे। मुस्ताक की मदद से रंजित कोहली से यहीं उनकी मुलाकात हुई। कहते हैं रंजित ने मुस्ताक अहमद की मदद से तारा को सहारा दिया और फिर कुछ ही दिनों में शादी के लिए प्रपोज भी कर दिया।

लव जिहाद ने बर्बाद किया तारा का जीवन

सब कुछ बहुत तेजी से हो रहा था। 20 जून, 2014 को ही मुश्ताक की मौजूदगी में सगाई हुई और 7 जुलाई, 2014 को तारा की शादी रंजीत से हो गई। इससे पहले कि तारा इस शादी की खुशियाँ भी मना पातीं कि 8 जुलाई यानी शादी के अगले दिन ही तारा को पता चला कि रंजित कोहली दरअसल मुस्लिम है और उसका असली नाम रकिबुल हसन है।

ऐसे हुआ मामले का खुलासा

तारा ने इस मामले में जानकारी देते हुए बताया कि ससुराल में शादी के अगले ही दिन मंत्री हाजी हुसैन अंसारी के यहाँ से इफ्तार पार्टी का निमंत्रण मिला। जिसमें जनाब रकीबुल हसन खान के नाम का संबोधन था। यह कार्ड भी तारा ने कोर्ट में सुनवाई के दौरान प्रस्तुत किया था। तारा ने बताया कि उनके बुरे दिन की शुरुआत तब हुई जब 9 जुलाई, 2014 को रंजीत 20-25 हाजी को लेकर घर आया और जबरन इस्लाम कबूलने के लिए दबाव बनाने लगा।

इस दौरान विरोध करने पर उनके साथ बुरी तरह मारपीट की गई। इस्लाम कबूल करवाने के लिए रकीबुल हसन ने दरिंदगी की सारी हदें पार कर दी थीं। करीब डेढ़ महीने तक उसने अपने कब्जे में रखते हुए तारा को न तो खाना-पीना दिया और न ही किसी से मिलने देता था। वह बार-बार कहता था कि इस्लाम धर्म कबूल करना होगा। ऐसा नहीं करने पर तारा का चेहरा सलामत नहीं रहेगा। उन्हें कई बार कुत्ते से कटवाया गया, ताकि वह डर से धर्म परिवर्तन कर लें। यह सिलसिला लगातार एक महीने से अधिक समय तक चलता रहा और शारीरिक और मानसिक तौर पर उन्हें प्रताड़ित किया जाता रहा है। 

नेशनल शूटर को जबरदस्ती बना दिया गया सारा 

नेशनल शूटर तारा जो उस समय गोल्ड मेडल जीत चुकी थीं। उनके साथ रोज मारपीट होने लगी थी, एक दिन मौलवी बुलाकर जबरदस्ती तारा को सारा बना दिया गया। इसके बाद तारा अगर मुस्लिम रीति रिवाज मानने से इनकार करती तो उन्हें खूब पीटा जाता, भूखा रखा जाता। छुप छुपकर घर की नौकरानी उन्हें रोटी देती थी। तारा के साथ बेड पर जोर जबरदस्ती की जाती। रकीबुल तारा के साथ रेप करता, उनकी मर्जी के बिना उनके साथ बेड शेयर करता। इतना ही नहीं तारा को यह धमकी भी दी जाने की लगी कि उनके साथ गैर मर्दों को सुलाया जाएगा। 

9 साल बाद मिला तारा को इंसाफ

कई महीनों तक तारा ये सब सहती रही, लेकिन एक दिन मौका पाकर वो घर से बचकर बाहर निकली। इसके बाद तारा ने अपनी आपबीती पुलिस को बताई। इसके बाद ही तारा शाहदेव की दर्दनाक कहानी सबके सामने आई। इस मामले में तारा शाहदेव ने 2015 में झारखंड हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की, जिसमें उन्होंने अपने पति रकीबुल हसन और उसके परिवार के खिलाफ जबरन धर्म परिवर्तन और प्रताड़ना के आरोप लगाए। हाईकोर्ट ने मामले की जाँच सीबीआई को दी। और अब 9 साल बाद जाकर तारा शाहदेव को इंसाफ मिला है।

31 साल की सजा भुगत रही ईरान की नरगिस मोहम्मदी को नोबेल शांति पुरस्कार: जिस लेखक ने एक वाक्य में लिख डाला उपन्यास, उसे साहित्य का नोबेल

स्वीडिश अकादमी ने शुक्रवार (6 अक्टूबर 2023) को नोबेल शांति पुरस्‍कार 2023 ईरान की मानवाधिकार कार्यकर्ता न‍रगिस मोहम्‍मदी को दिया। वहीं, गुरुवार (5 अक्टूबर 2023) को नॉर्वेजियन लेखक जॉन फॉसे को साहित्य में 2023 के नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया।

नरगिस को स्वतंत्रता सेनानी बताते हुए नोबेल समिति ने कहा कि वो ईरान में महिलाओं के दमन के खिलाफ डटकर खड़ी रहीं। मोहम्मदी साल 2010 से लगभग जेल में ही हैं। बताते चलें कि बीते साल नोबेल शांति पुरस्कार बेलारूस के मानवाधिकार एक्टिविस्ट एलेस बालियात्स्की को दिया गया था।

समकालीन रंगमंच के हैं उस्ताद

समिति ने 64 साल के फॉसे के काम की तारीफ करते हुए कहा कि उनके नए विचारों से ओतप्रोत नाटक और गद्य अनकहे को आवाज देते हैं। बीते साल साहित्य का नोबेल फ्रांसीसी लेखिका एनी एर्नाक्स को गया था। हालाँकि फॉसे इस पुरस्कार के मिलने से पहले ही साहित्य जगत में खासे मशहूर है। उन्हें केवल एक वाक्य में उपन्यास रचने वाले लेखक के तौर पर जाना जाता है।

पुरस्कार के लिए फॉसे ने आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार साहित्य का सम्मान है, जिसका सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य बिना किसी विचार के सिर्फ साहित्य होना है। पुरस्कार के तौर पर उन्हें 11 मिलियन स्वीडिश क्रोना दिए गए। भारतीय मुद्रा में देखा जाए तो ये करीब राशि 8 करोड़ 30 लाख रुपए है।

साहित्य की दुनिया में उनके लेखन को लेकर कहा जाता है कि वो जिंदगी लिखते हैं। उनका लेखन इंसानी असुरक्षा और चिंताओं पर केंद्रित है। नॉर्वे के तटीय शहर हाउगेसुंड में 1959 में पैदा हुए जॉन फॉसे को सबसे अहम समकालीन यूरोपीय लेखकों में से एक माना जाता है।

उन्हें फ्रांसीसी डेली अखबार ले मोंडे ने ’21वीं सदी का बेकेट’ और कनाडा के द ग्लोब एंड मेल ने उन्हें समकालीन थिएटर में सबसे प्रभावी लेखकों में से एक बताया है। फॉसे का पहला उपन्यास ‘रेड, ब्लैक’ 1983 में आया था।

तब से उन्होंने कई उपन्यास, कहानियाँ, कविताएँ, निबंध संग्रह और यहाँ तक ​​कि बच्चों की किताबें भी प्रकाशित की हैं। उनका लिखा पहला अंग्रेजी नाटक टाइटल ‘एंड वी विल नेवर बी पार्टेड’ 1994 में प्रकाशित हुआ था। इसके बाद उन्होंने लगभग 40 नाट्य रचनाएँ लिखीं।

एक वाक्य वाला महान उपन्यास

फॉसे की महान कृति उनकी ‘सेप्टोलॉजी’ है। ये 2019-2021 तक तीन खंडों में ‘द अदर नेम’, ‘आई इज़ अनदर’ और ‘ए न्यू नेम’ टाइटल से प्रकाशित हुई हैं। ये 1250 पेज का गद्य है। ये एक उम्रदराज़ कैथोलिक कलाकार एस्ले की जिंदगी के बारे में है। वो सुदूर दक्षिण-पश्चिम नॉर्वे में रहता है और वक्त, कला और अपनी पहचान के लिए जूझ रहा होता है।

उसे अपने वजूद के खत्म होने, याददाश्त कम होने जैसी परेशानी से दो-चार होना पड़ता है। ये कलाकार खुद से कला और भगवान पर बात करता है। उसकी इसी बात और सोच को बगैर किसी पूर्ण विराम के एक वाक्य में फॉसे ने लिखा है। इसे इस तरह से लिखने की वजह है कि रीडर इस बुजुर्ग कलाकार के जीवन में खुद जी के देख सके। इसकी खासियत ही ये एकालाप है।

नोबेल समिति ने नरगिस को ‘स्वतंत्रता सेनानी’ कहा

साल 2023 का नोबेल शांति पुरस्कार ईरान की 51 साल की नरगिस मोहम्मदी को दी गई। नोबेल समिति ने उन्हें ‘स्वतंत्रता सेनानी’ कहा। उन्हें ये नाम देश में महिलाओं के उत्पीड़न के खिलाफ उनकी लड़ाई के लिए दिया गया है। मोहम्मदी को पुरस्कार देते वक्त नोबेल समिति के चीफ ने कहा कि उन्होंने सिस्टम में रचे-बसे भेदभाव और उत्पीड़न के खिलाफ महिलाओं के लिए लड़ाई लड़ी, जिसके लिए उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ी।

साल 2010 से जेल में रहने के बावजूद वहाँ की महिलाओं के खिलाफ हो रहे बुरे व्यवहार को दुनिया को बताने और उसके खिलाफ आवाज उठाने में कामयाब रहीं। नरगिस ईरान में डिफेंडर्स ऑफ ह्यूमन राइट्स सेंटर की उपाध्यक्ष हैं। इसकी स्थापना साथी नोबेल पुरस्कार विजेता शिरीन एबादी ने की थी। उनके पति बच्चों सहित निर्वासन में रहते हैं।

नरगिस मोहम्मदी को ईरान की इस्लामी शासन की पुलिस ने 13 बार गिरफ्तार किया। उन्हें पाँच बार दोषी ठहराया गया और कुल 31 साल जेल की सजा सुनाई गई। वह फिलहाल कथित प्रोपेगेंडा फैलाने के आरोप में जेल में हैं। बीते साल उन्होंने महसा अमिनी को लेकर भी विरोध जताया।

तेहरान के एविन जेल से एक पत्र में नरगिस ने बताया कि कैसे देश भर में चल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों में हिरासत में ली गई महिलाओं का यौन शोषण किया जा रहा था। दरअसल ईरान में सख्त ड्रेस कोड न मानने आरोप में गिरफ्तार की गई 22 साल महसा अमिनी की सितंबर 2022 में हिरासत में मौत के बाद वहाँ विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया था।

Asian Games 2023: हॉकी में भारत को गोल्ड, एशियाई खेलों में सबसे ज्यादा गोल्ड के साथ-साथ पहली बार मेडलों का ऐतिहासिक शतक!

भारतीय हॉकी टीम ने शुक्रवार (6 अक्टूबर 2023) को शानदार खेल दिखाते हुए एशियन गेम्स (Asian Games 2023) का गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया। कप्तान मनप्रीत सिंह की अगुवाई वाली टीम इंडिया ने जापान को 5-1 के बड़े अंतर से हराकर यह जीत दर्ज की।

इसके साथ ही हॉकी टीम पेरिस ओलंपिक के लिए भी क्वालीफाई कर गई है। एशियन गेम्स में भारत के खाते में अब तक 22 गोल्ड समेत कुल 95 मेडल आ गए हैं। इसके पहले एशियन गेम्स की हॉकी में 2014 में गोल्ड मिला था। 9 साल बाद भारत ने एक बार फिर से स्वर्ण पदक जीता है।

चीन के हांगझोउ में खेले जा रहे 19वें एशियन गेम्स में भारतीय हॉकी टीम शुरुआत से बेहतरीन फॉर्म में थी। फाइनल में भी यह दबदबा कायम रहा। जापान के खिलाफ हुए इस मुकाबले में पहले हाफ में ही 3-0 की बढ़त हासिल कर ली थी, जो कि दूसरे हाफ में भी जारी रही।

भारत की ओर से हरमनप्रीत सिंह (32वें और 59वें मिनट), अभिषेक (48वें मिनट), अमित रोहिदास (36वें मिनट) और मनप्रीत सिंह (25वें मिनट) ने गोल दागे। वहीं, जापान की ओर से एकमात्र गोल एस तनाका ने 51वें मिनट में किया।

एशियन गेम्स के इतिहास में भारतीय हॉकी टीम का अब तक शानदार इतिहास रहा है। टीम इंडिया ने हॉकी में रिकॉर्ड 16वीं बार मेडल जीता है। इस बार हासिल हुआ यह चौथा गोल्ड मेडल है। कुल मिलाकर देखें तो भारत ने हॉकी में अब तक 4 गोल्ड, 9 सिल्वर और 3 ब्रॉन्ज मेडल जीते हैं।

एशियन गेम्स में शतक के करीब भारत

एशियन गेम्स में भारत ने 22 गोल्ड, 34 सिल्वर और 39 ब्रॉन्ज के साथ अब तक 95 मेडल अपने नाम किए हैं। इसके अलावा विभिन्न खेलों में 5 मेडल पक्के हो चुके हैं। ऐसे में भारत का पदकों का शतक तय माना जा रहा है।

एशियन गेम्स मेडल टैली देखें तो 185 गोल्ड के साथ चीन पहले स्थान पर है। वहीं, 44 गोल्ड के साथ जापान दूसरे और 36 गोल्ड के साथ कोरिया तीसरे नंबर और 22 गोल्ड के साथ भारत चौथे नंबर पर है।

OBC आरक्षण का 97% लाभ मिला सिर्फ 25% जातियों को, 2633 जातियों में 983 को नहीं मिला एक भी फायदा

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि चाहे परमानेंट नौकरियाँ हों या ठेके पर, अगर कम से कम 45 दिन की नौकरी है तो एससी, एसटी, ओबीसी आरक्षण का लाभ मिलेगा। हालाँकि इस बीच रोहिणी आयोग की रिपोर्ट की चर्चा हो रही है।

रोहिणी आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में 2633 जातियाँ OBC की श्रेणी में आती हैं। इनमें से 983 जातियों को अभी तक आरक्षण का कोई लाभ नहीं मिला है। यानी, कुल OBC आबादी का लगभग 37% हिस्सा अभी भी आरक्षण के लाभ से पूरी तरह वंचित है।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो रोहिणी आयोग ने नौकरियों और शिक्षा में 97 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का लाभ ओबीसी की 25 प्रतिशत जातियाँ उठा रही हैं। शेष 75 प्रतिशत जातियों की भागीदारी सिर्फ 3 प्रतिशत ही है। इसमें भी 983 ओबीसी जातियों की हिस्सेदारी शून्य है।

ओबीसी को चार वर्गों में बाँटने की सिफारिश

रोहिणी आयोग की रिपोर्ट करीब 1100 पन्नों की है, जिसे दो भागों में बाँटा गया है। इस रिपोर्ट के पहले हिस्से में आरक्षण का फायदा पा रही जातियों में उनकी हिस्सेदारी से जुड़ी बातें हैं तो दूसरे हिस्से में मौजूदा समय में ओबीसी में शामिल 2633 पिछड़ी जातियों से संबंधित है।

इसमें 2633 पिछड़ी जातियों की सामाजिक पहचान, जनसंख्या में उनके आनुपातिक प्रतिनिधित्व और अब तक आरक्षण नीतियों से उन्हें मिले लाभों की जानकारी है। हालाँकि कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, 3000 जातियों की जानकारी इस रिपोर्ट में है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, रोहिणी आयोग ने ओबीसी की 3000 जातियों को 4 वर्गों में विभाजित करने का सुझाव दिया है। इन वर्गों में आरक्षण का पूरा लाभ, अधूरा लाभ, बिल्कुल लाभ नहीं ले पाने वाली और एकदम अक्षम जातियों का 4 वर्ग तैयार हो सकता है, जिन्हें 10 प्रतिशत, 5 प्रतिशत, 8 प्रतिशत, जो भी डाटा इस आयोग की सिफारिश के साथ होगा, उन्हें मिल जाएगा।

कोटे के अंदर कोटा सिस्टम से होगा कमजोर वर्गों को लाभ?

ओबीसी में आरक्षण की बात करें तो इसमें शामिल ऐसी कुछ जातियाँ हैं, जो सबसे ज्यादा फायदा उठा रही हैं। ऐसे में अभी ओबीसी जातियों की राजनीति को लेकर मुखर रहने वाली ताकतवर ओबीसी जातियों का कोटा इस सिस्टम की वजह से घट जाएगा। ऐसे में संभव है कि ये जातियाँ अपने पुराने रहनुमाओं को छोड़कर नए विकल्प तलाशें।

वहीं, जिन जातियों को आरक्षण का लाभ अब तक नहीं मिल पाया है, या बहुत कम मिला है, रोहिणी आयोग की सिफारिशों की वजह से उनका कोटा बढ़ जाएगा। चूँकि जातियों की आर्थिक, सामाजिक, शैक्षिक स्थिति का अध्ययन करने और उसी अनुपात में कोटे के अंदर कोटा सिस्टम पर सलाह देने के लिए इस आयोग का गठन किया गया था।

ऐसे में कमजोर वर्ग के लोग आगे बढ़कर अपनी हिस्सेदारी क्लेम भी कर पाएँगे। अभी ओबीसी में सिर्फ दो वर्ग है- एक क्रीमी लेयर और दूसरा गैर-क्रीमी लेयर। इनमें से क्रीमी लेयर वाले आरक्षण का फायदा ज्यादा उठा पाते हैं, क्योंकि वो आर्थिक और शैक्षणिक स्तर पर मजबूत होते हैं।

ऐसे में इन वर्गों का 4 वर्गों में विभाजन होते ही उन कमजोर जातियों का फायदा होगा, जो वंचित हैं। चूँकि इस आयोग के आँकड़े सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, इसलिए पक्का नहीं बता सकते कि आयोग ने क्या सिफारिशें की हैं और किस तरह के डाटा का इस्तेमाल किया गया है।

‘फ्री की रेवड़ी’ पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकारों से माँगा जवाब, बिहार में जातीय जनगणना की रिपोर्ट पर रोक से किया इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र और राज्य सरकारों से “फ्री की रेवड़ी” की राजनीति पर जवाब माँगा। कोर्ट ने कहा कि यह राजनीति देश के लिए हानिकारक है और इसे रोकने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने एक अन्य मामले की सुनवाई करते हुए बिहार की जातीय जनगणना के आँकड़ों को जारी करने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है।

मुफ्त की रेवड़ियों पर सख्त हुई सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने ‘मुफ्त की रेवड़ी‘ वाले कल्चर पर नाराजगी जताई है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के साथ ही, मध्य प्रदेश, राजस्थान और चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर शुक्रवार तक जवाब माँगा है। इस केस की सुनवाई चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच कर रही है। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने याचिका कर्ता से पूछा कि वो सीधे यहाँ क्यों पहुँचे, तो याचिकाकर्ता भट्टूलाल जैन की ओर से कहा गया कि दो राज्यों में चुनाव हैं। दोनों राज्यों पर काफी कर्ज है, उसके बावजूद बड़े वादे किए जा रहे हैं।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उनकी याचिका को दूसरों मामलों के साथ जोड़ा जा सकता है, क्योंकि ऐसी याचिकाएँ सुप्रीम कोर्ट में पहले से लंबित हैं, जिनपर सुनवाई चल रही है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकारों और चुनाव आयोग ने शुक्रवार तक जवाब माँगा है, साथ ही अगली सुनवाई के लिए 4 सप्ताह का समय भी दिया है।

बिहार की जातीय जनगणना के आँकड़ों को जारी करने की इजाजत

एक अन्य अहम मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को जातीय जनगणना के और आँकड़े प्रकाशित करने से रोकने से मना कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार को नीतिगत फैसले लेने से नहीं रोका जा सकता। जस्टिस संजय खन्ना और जस्टिस एस एन भट्टी की बेंच में इस मामले की सुनवाई हुई।

इसमें एक एनजीओ ने कहा है कि जातीय जनगणना के आँकड़ों को जारी करने से रोका जाए, क्योंकि इससे लोगों की निजी जानकारी बाहर आ जाएगी। हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने जातिगत जनगणना पर रोक नहीं लगाई, ये जरूर किया है कि बिहार सरकार को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है।

जदयू ने किया फैसले का स्वागत

वहीं सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जदयू ने स्वागत किया है। बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि जातिगत जनगणना का समर्थन करने वालों के लिए ये खुशी का मौका है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इसका श्रेय जाता है। उन्होंने ही पंचायत राज सिस्टम में महिलाओं और दलितों को आरक्षण भी दिया था।

‘सर को 2 चप्पल मार के चला गया’: लाइव क्लास में स्टूडेंट ने की टीचर की पिटाई, ‘फिजिक्स वाला’ का Video हुआ वायरल

‘फिजिक्स वाला’ एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार कारण है एक वीडियो, जिसमें क्लासरूम के अंदर एक छात्र टीचर की चप्पलों से पिटाई करता नजर आ रहा है। यह सब लाइव स्ट्रीम के दौरान हुआ। कुछ स्टूडेंट्स ने वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। अब यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

वायरल वीडियो की शुरुआत में ‘फिजिक्स वाला’ का एक टीचर स्मार्टबोर्ड के सामने खड़े होकर पढ़ाते नजर आ रहे हैं। अगले ही सेकंड टीचर बाईं ओर देखता है। तभी एक छात्र हाथ में चप्पल लेकर उसे पीटना लगता है। वह टीचर को 2 बार चप्पल मारता है। इसके बाद उसकी पकड़ ढीली हो जाती है और चप्पल हाथ से छूट जाती है।

इसके बाद क्या हुआ और यह सब क्यों व कैसे हुआ यह स्पष्ट नहीं है। लेकिन इस वीडियो को मोबाइल पर देख रहे शख्स को ‘सर को दो चप्पल मार के चला गया’ कहते सुना जा सकता है। इस वीडियो को लेकर अब तक टीचर और ‘फिजिक्स वाला’ की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

वायरल वीडियो को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर ‘Ghar Ke Kalesh’ नामक यूजर ने 5 अक्टूबर 2023 को शेयर किया है। अब तक इसे 7 लाख से अधिक बार देखा चुका है। साथ ही इसको लेकर नेटिजेन्स अलग-अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं। गणेश मौर्य नामक यूजर ने पूछा, “क्या मामला है? उसने टीचर को क्यों मारा?” इस पर सब्यसाची साधु नामक यूजर ने लिखा, “उसकी गर्लफ्रेंड को आई लव यू बोला था।”

एक यूजर ने वायरल मीम शेयर किया। इसमें लिखा था, “जी भर कर लड़ो। समाप्त कर दो एक-दूसरे को।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “आजकल टीचर की क्या हालत बन गई है। कोई गाली खा रहा कोई चप्पल।”

निखिल नामक यूजर ने लिखा, “सर WWE की क्लास भी लाइव देने लगे। बिजनेस बहुत अधिक बढ़ रहा है।”

मनोज चौबे नामक यूजर ने वायरल मीम शेयर किया। इसमें लिखा था, “ये सब क्या देखना पड़ रहा है। अच्छा है मैं अंधा हूँ।”

पीयूष प्रकाश नामक यूजर ने लिखा, “फिजिक्स लॉ ऑफ मोशन विद प्रैक्टिकल” यानी ‘फिजिक्स के गति के नियम प्रैक्टिकल के साथ।’

सलमा नामक यूजर ने लिखा, “फिजिक्स वाला से स्टूडेंट नहीं सँभल रहे।”

रुद्र नामक यूजर ने मीम शेयर किया। इसमें लिखा था, “ई तो साला होना ही था।”

अल्टीमेटम के बाद अपने राजनयिकों को निकालने में जुटा कनाडा, भेजे जा रहे हैं सिंगापुर और कुआलालंपुर: खालिस्तानी आतंकी की हत्या के आरोप पर भारत सख्त

भारत द्वारा अल्टीमेटम दिए जाने के बाद कनाडा से यहाँ से अपने राजनयिकों को वापस तय समय से पहले ही बुला लिया है। कहा जा रहा है कि कनाडा के ये राजनयिक या सिंगापुर चले गए हैं या मलेशिया की राजधानी कुआलालंमपुर चले गए हैं। कहा जा रहा है कि ये राजनयिक दिल्ली से बाहर तैनात थे।

दरअसल, खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आरोप कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत पर लगाया था। इसके बाद दोनों देशों के संबंध खराब हो गए थे। कनाडा ने एक भारतीय राजनियक को छोड़ने के लिए कहा तो भारत ने भी कनाडा के एक राजनयिक को भारत छोड़ने के लिए कह दिया।

भारत ने दो कदम आगे बढ़कर कनाडाई नागरिकों को वीजा देने पर भी पाबंदी लगा दी। इसके साथ ही भारत ने कनाडा से अपने 41 राजनयिकों को वापस बुलाने के लिए कहा था। भारत ने इसके लिए 10 अक्टूबर तक का समय दिया था। भारत ने कहा था कि इसके बाद इन राजनयिकों को राजनयिक छूट नहीं दी जाएगी।

भारत ने तर्क दिया था कि कनाडा में तैनात भारतीय राजनयिकों की संख्या से कहीं अधिक कनाडाई राजनयिकों की संख्या है। भारत ने कहा था यह संख्या बराबर करने के लिए कनाडा को भारत में तैनात अपने 41 राजनयिकों को वापस बुलाना होगा।

भारत के सख्त रूख को देखते हुए ही कनाडा ने ऐसे राजनयिकों को मलेशिया या सिंगापुर भेजना शुरू कर दिया। ये राजनयिक मुंबई, बेंगलुरु आदि जगहों पर तैनात थे। इससे पहले कनाडा की विदेश मंत्री ने भारत से बातचीत की गुहार लगाई थी, लेकिन भारत ने कह दिया थआ कि इन राजनयिकों को जाना ही होगा।

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता अरिंदम बागची ने गुरुवार कहा कि राजनयिकों के भारत छोड़ने की समय सीमा को लेकर कनाडा के साथ बातचीत की जा रही है। उन्‍होंने कहा कि भारत चाहता है कि दोनों देशों में मौजदू राजनयिकों की संख्या में समानता आए।

बागची ने कहा कि भारत पहले ही कह चुका है कि यहाँ कनाडाई राजनयिकों की बहुत अधिक उपस्थिति है। प्रवक्ता ने कहा, “हमारे आंतरिक मामलों में उनके हस्तक्षेप को देखते हुए हमने अपनी संबंधित राजनयिक उपस्थिति में समानता लाने की माँग की है।”

इससे पहले कनाडा की विदेश मंत्री मेलानिए जोली ने कहा था कि कनाडा भारत के साथ विवाद को बढ़ाना नहीं चाहता है। यह कनाडा के लिए बहुत ही ज्‍यादा चुनौत‍ीपूर्ण समय है। उन्होंने कहा था कि यह बेहद महत्‍वपूर्ण है कि कनाडा के राजनयिक भारत में रहकर काम करते रहें।

बताते चलें कि भारत में कनाडाई राजनयिकों की संख्या लगभग 60 है और भारत चाहता है कि कनाडा इस संख्या में 41 राजनयिकों की कमी करे। रिपोर्ट के मुताबिक, कनाडा में भारतीय राजनयिकों की संख्या लगभग 20 है।