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पैगंबर मोहम्मद के जन्मदिन पर मुस्लिम भीड़ नए रास्ते से निकाल रहा थी जुलूस, हिंदुओं ने रोका तो की मारपीट, छतों से पथराव भी

उत्तर प्रदेश के सीतापुर में 28 सितंबर 2023 को मुस्लिमों के बरावफात जुलूस के नए इलाके से जाने पर बवाल हो गया। इस दौरान कट्टरपंथी मुस्लिमों ने हिंदू समुदाय पर जमकर पथराव किया। इसका वीडियो भी वायरल हुआ है। वीडियो में पहचान के आधार अब तक पाँच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, अन्य आरोपितों की पहचान की कोशिश जारी है।

मामला सीतापुर जिले के सदरपुर गाँव के अंतर्गत आने वाले गाँव बनवीरपुर का है। पीड़ित हिंदुओं ने पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में कहा है कि मुस्लिम समुदाय के लोग गाँव के दक्षिणी छोर से उत्तर की ओर जुलूस निकाल रहे थे। इसके पहले इस रास्ते से कभी भी जुलूस नहीं निकाला गया था।

लोगों ने आरोप लगाया कि जब इस बारे में उनसे बात कही गई तो मुस्लिम समाज के जिन लोगों के निर्देश में इस जुलूस का आयोजन हो रहा था, उन्होंने हिंदुओं से गाली-गलौच करने लगे और हाथापाई शुरू कर दी।

हिंदू पक्ष ने कहा कि इसके बाद मुस्लिमों की ओर से उन पर पथराव कर दिया गया। हिंदू पक्ष ने आरोप लगाया कि एक साजिश के तहत पहले से ईंट-पत्थर आदि छतों पर जमाकर लिए गए थे। वही उन पर बरसाए जाने लगे।

पीड़ित का यह भी आरोप है कि मुस्लिम समुदाय के आरोपितों ने उनके घर में घुस गए और महिलाओं की अश्लील हरकतें कीं। इस दौरान उनसे गाली-गलौच भी की गई। शिकायकर्ता का कहना है कि इससे इलाके में रोष व्याप्त है। हिंदुओं को अपनी जान का डर सताने। लगा है।

जिन लोगों ने इस बवाल को हवा दी, उनके नाम हैं- सलीम, पुत्तान, इश्तियाक, सानू, अइतुल्ला, सैमुल्ला, रहीम, गुफरान, शीबू, मोइन,कादिर। इसके अलावा, पुलिस ने FIR में 25 अज्ञात लोगों के भी नाम दर्ज किए गए हैं। पीड़ित ने इलाके में हेट क्राइम रोकने का भी अनुरोध किया।

लेख में उदयनिधि स्टालिन के बयान की आलोचना, पत्रकार अभिजीत मजूमदार पर तमिलनाडु में FIR: खोज रही पुलिस

पत्रकार अभिजीत मजूमदार ने बताया है कि तमिलनाडु पुलिस अब उनके पीछे पड़ी हुई है। उन्होंने जानकारी दी कि जिस मीडिया संस्थान के लिए वो लिखते हैं और टीवी शो करते हैं, उसके दफ्तर में तमिलनाडु पुलिस के अधिकारी उन्हें खोजते हुए पहुँचे थे। तमिलनाडु पुलिस के 4 अधिकारियों ने वहाँ पहुँच कर उनके बारे में पूछताछ की। दरअसल, उन्होंने Firstpost में एक लेख के जरिए उदयनिधि स्टालिन द्वारा सनातन धर्म को डेंगू-मलेरिया बताने हुए इसे खत्म करने के बयान की आलोचना की थी।

‘Earshot’ नामक पॉडकास्ट प्लेटफॉर्म के संस्थापक अभिजीत मजूमदार ने ये भी बताया कि उनके खिलाफ तमिलनाडु में FIR भी दर्ज की गई है। इसके बाद उनके खिलाफ वकीलों और अब पुलिसकर्मियों को लगाया गया है। इसके बाद उन्होंने तंज कसा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ऐसे ही लोगों द्वारा फासीवादी कहा जाता है। बता दें कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और DMK के मुखिया एमके स्टालिन के बेटे मंत्री उदयनिधि स्टालिन के बयान के बाद हिन्दू कार्यकर्ताओं, भाजपा और कई संगठनों के वाला साधु-संतों ने भी आलोचना की थी।

बता दें कि फर्स्टपोस्ट ‘नेटवर्क 18’ मीडिया संस्थान का ही हिस्सा है, जिसके अंतर्गत ‘न्यूज़ 18’ टीवी चैनल भी आता है। जिस लेख को लेकर ये FIR दर्ज की गई है, उसका शीर्षक था – ‘उदयनिधि स्टालिन द्वारा हिन्दुओं के नरसंहार की बात करने से तमिलनाडु में भाजपा को बड़ा फायदा मिला है।’ इसमें उन्होंने विश्लेषण किया था कि उनके इस बयान से भले उनके समर्थक खुश हो जाएँ, लेकिन इससे उनके खिलाफ एक बड़ा वर्ग ध्रुवीकृत भी होगा। उन्होंने लिखा था कि पेरियार द्वारा ज़हरीला बना दिए गए तमिलनाडु में इस तरह का बयान आश्चर्यजनक नहीं है।

इस लेख में अभिजीत मजूमदार ने याद किया था कि कैसे 70 के दशक में पेरियार की रैली में हिन्दू देवी-देवताओं की तस्वीरों को जूते-चप्पल से मारा गया था और ‘ब्राह्मणों द्वारा निचली जातियों पर अत्याचार’ के विरोध के नाम पर ये सब किया गया था। उन्होंने ध्यान दिलाया कि कैसे चोल, पल्लव और परांतक के हिन्दू साम्राज्यों का स्थल रहे तमिलनाडु में अब हिन्दुओं के खिलाफ घृणा सामान्य हो गई है। उन्होंने लिखा था कि अब सनातन के पुनर्जागरण के साथ तमिलनाडु में एक शांत बदलाव आ रहा है और BJP के प्रदेश अध्यक्ष के अन्नामलाई के इर्दगिर्द ये बदलाव हो रहा है।

उन्होंने तमिलनाडु के वैदिक इतिहास का जिक्र करते हुए लिखा था कि सनातन धर्म वहाँ भी हमेशा से विद्यमान रहा है। अभिजीत मजूमदार ने अपने लेख मे ये भी पूछा था कि इस्लामी आक्रांताओं और अंग्रेजों द्वारा किए गए नरसंहारों के लिए क्या उदयनिधि स्टालिन कभी इस्लाम या ईसाई मजहब को खत्म करने की बात कर सकते हैं? उन्होंने इस लेख में ये भी लिखा था कि पेरियार ने अपनी गोद ली हुई बेटी से शादी कर ली, जो उनसे 40 साल छोटी थी। साथ ही अपनी पत्नी को गुंडों से धमकी दिलवाई कि वो मंदिर न जाए।

JNU के प्रोफेसर और वैज्ञानिक आननद रंगनाथन ने भी अभिजीत मजूमदार का समर्थन किया है। उन्होंने लिखा है कि उदयनिधि स्टालिन का बयान न सिर्फ हिन्दू विरोधी है, बल्कि माँ की हत्या करने जैसा भी है। आनंद रंगनाथन ने बताया कि अभिजीत मजूमदार ने अपनी लेख में ये पंक्ति लिखी थी और अब तमिलनाडु पुलिस उनके पीछे पड़ी है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की चुप्पी पर भी सवाल उठाया और कहा कि वो अभिजीत मजूमदार के साथ खड़े हैं।

याद दिला दें कि बिहार के यूट्यूबर मनीष कश्यप पर भी NSA (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) तमिलनाडु सरकार ने ही लगाया था और उन्हें जेल में डाल दिया था। मनीष कश्यप ने राज्य में बिहारी मजदूरों पर अत्याचार किए जाने का आरोप लगाते हुए वीडियो बनाए थे। उदयनिधि स्टालिन के बयान के बाद भाजपा की आईटी सेल के अध्यक्ष अमित मालवीय पर भी FIR दर्ज की गई थी, जिन्होंने इस बयान की आलोचना की थी। इसी तरह, पत्रकार पीयूष राय के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी, क्योंकि उन्होंने एक संत द्वारा उदयनिधि स्टालिन को चेतावनी वाली खबर शेयर की थी।

उन्नाव महादेव मंदिर में जावेद का हमला, 8 घायल, 1 की हालत गंभीर: ‘मानसिक विक्षिप्त’ बताने में फिर जुटा मीडिया… कट्टर इस्लामी लोगों का बचाव क्यों?

उन्नाव के बांगरमऊ में स्थित बोधेश्वर महादेव मंदिर में मुस्लिम युवक जावेद ने श्रद्धालुओं पर हमला करके उन्हें मारने की कोशिश की। जावेद ने इस दौरान हिन्दू श्रद्धालुओं को हत्या के इरादे से दौड़ा-दौड़ा कर डंडे से पीटा। हमलावर जावेद को स्थानीय लोगों ने मंदिर में तैनात पीएसी की सहायता पकड़ कर पुलिस को सौंप दिया है।

जानकारी के अनुसार, उन्नाव के बांगरमऊ के पश्चिमी टोला में स्थित प्राचीन बोधेश्वर महादेव मंदिर में 29 सितम्बर को सुबह 10:30 बजे दरगाह क़स्बा निवासी जावेद लाठी लेकर घुसा और एकाएक हिन्दू श्रद्धालुओं की हत्या की नीयत से मारने लगा।

उसके इस हमले में 8 लोग घायल हुए हैं, जिनमें से एक गंभीर है। गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को लखनऊ भेजा गया है। घायल होने वाले कुछ लोगों के नाम कृष्ण कुमार तिवारी, मिलन सिंह और कैलाश सिंह हैं। जावेद के मंदिर में हमले का यह वीडियो मंदिर के सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया है।

घटना के वीडियो में देखा जा सकता है कि जावेद मंदिर में घुस कर पहले एक बूढ़े व्यक्ति पर हमला करता है और लाठी से उन पर वार करता है। इसके बाद वह एक अन्य व्यक्ति पर भी लाठी से वार करता है और उनके सर पर भी लाठी मारता है।

मंदिर में उपस्थित अन्य श्रद्धालुओं ने जावेद को पीएसी की सहायता से पकड़ कर पुलिस के हवाले किया है। उन्नाव पुलिस ने इस सम्बन्ध में युवक को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है और उसके ऊपर हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज किया है।

स्थानीय लोगों ने इस मामले में सड़क जाम करके विरोध प्रदर्शन किया और आरोपित के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

मंदिर पर हमला करने वाला ‘मानसिक विक्षिप्त’ बताने का चलन

जावेद के मंदिर और हिन्दू श्रद्धालुओं पर इस हमले के बाद उसे अब सिरफिरा और मानसिक विक्षिप्त बताने का प्रयास चालू हो गया है। हालाँकि, यह कोई नई बात नहीं है कि मंदिर में हमला या मूर्तियों का अपमान करने के लिए घुसे कट्टर मुस्लिम को मानसिक विक्षिप्त बता कर मामले को दबाया गया हो। मीडिया पहले भी यह करते आया है, इस बार भी यही किया जा रहा।

मीडिया रिपोर्ट्स में जावेद को ‘सिरफिरा’, ‘सनकी’ और ‘मानसिक विक्षिप्त’ करार दिया जा रहा है जबकि उन्नाव पुलिस द्वारा घटना को लेकर जारी किए गए आधिकारिक प्रेस नोट में इस बात का कहीं भी जिक्र नहीं है कि हमलावर जावेद मानसिक रूप से कमजोर है।

साल 2023 में ‘मानसिक विक्षिप्त’ के और मामले

इसी वर्ष अप्रैल माह में बिहार के मुजफ्फरपुर से एक घटना सामने आई थी, जिसमें मोहम्मद मोइउद्दीन ने एक मंदिर में घुस कर देवी दुर्गा की प्रतिमा के सामने पेशाब किया था। बिहार पुलिस ने इस मामले में मुस्लिम युवक को गिरफ्तार किया था और उसे मानसिक विक्षिप्त बता दिया था।

2022 में कहाँ-कहाँ रचा गया यह प्रोपेगेंडा

1.
अप्रैल 2022 में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में स्थित गोरखनाथ मंदिर में अहमद मुर्तजा नाम के एक युवक ने मंदिर की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मी पर बाँके (एक तरह का धारदार हथियार, जो लकड़ी चीरने के काम आता है) से हमला कर दिया था। मुर्तजा इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) की जिहादी विचारधारा से प्रभावित था।

मुर्तजा के परिवार ने कोर्ट के सामने उसे मानसिक रूप से कमजोर बताने का प्रयास किया था, जिसे कोर्ट ने मानने से इंकार कर दिया। फैसला सुनाने से पहले कोर्ट ने मुर्तजा की चिकित्सीय जाँच करवाई थी जिसमें वह पूरी तरह से स्वस्थ निकला था। जनवरी 2023 में कोर्ट द्वारा मुर्तजा को फाँसी की सजा सुनाई गई। उसे देश के विरुद्ध युद्ध छेड़ने का दोषी पाया गया था।

2.
सितम्बर 2022 में तेलंगाना के हैदराबाद में बुर्काधारी दो मुस्लिम महिलाओं ने एक मंदिर में घुस कर देवी प्रतिमा को खंडित किया था और एक व्यक्ति ने जब उन्हें रोकने का प्रयास किया तो उन्होंने उस पर भी हमला कर दिया। इन महिलाओं ने एक चर्च में मदर मैरी की प्रतिमा भी तोड़ने की कोशिश की थी।

इस मामले में स्थानीय विधायक जेएच मेराज के स्पष्टतया यह बताने के बाद कि महिलाएँ मंदिर में मूर्ति तोड़ने के लिए घुसी थीं, हैदराबाद पुलिस ने इन्हें मानसिक रोगी बता दिया था। महिलाओं के भाई ने बताया था कि उसकी दोनों बहने ‘सीजोफ्रिनिक’ हैं।

3.
सितंबर 2022 में ही झारखंड के राँची से एक ऐसा ही मामला सामने आया था, जिसमें एक मुस्लिम युवक रमीज ने मंदिर का ताला तोड़ कर हनुमान जी की प्रतिमा तोड़ दी थी। गिरफ्तार किए जाने पर उसे राँची पुलिस मानसिक रोगी बता रही थी। लोगों ने पुलिस के इस दावे पर प्रश्न उठाए थे।

गौरतलब है कि जिस मंदिर में घुस कर रमीज ने हनुमान जी की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त किया था, उस पर पहले भी पथराव हुआ था। इस पथराव को रोकने के लिए पुलिस ने फायरिंग की थी, जिसमें दो उपद्रवी मारे गए थे।

4.
अक्टूबर 2022 में उत्तर प्रदेश के मेरठ में भी एक ऐसा ही मामला सामने आया था, जिसमें शोएब नाम का एक युवक महादेव मंदिर में शिवलिंग पर पेशाब करता देखा गया था। यह घटना सीसीटीवी में भी कैद हो गई थी। शोएब को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने उसे ‘मंदबुद्धि’ बता दिया था।

वामपंथी मीडिया संस्थानों और लिबरल पत्रकारों की यह प्रवृत्ति रही है कि हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान करने वालों को मानसिक विक्षिप्त बता कर उनसे पल्ला झाड़ लिया जाए और उनके अपराध को कम करके आँका जाए। कट्टरपंथी इस्लामी विचारधारा के कारण आतंकी हमले हो या मंदिर में घुस कर देवी-देवताओं का अपमान… मीडिया और वामपंथी चमचे हमेशा से ‘मानसिक विक्षिप्त’ का कार्ड खेलते आया है। मकसद इनका वही रहता है – मजहब की कट्टर विचारधारा को छिपा कर रखना। सोशल मीडिया के आने से जनता के सामने इनका नकाब उतरने लगा है।

जयपुर में बाइक की टक्कर के बाद 2 गुटों में लड़ाई, 1 युवक की मौत: कट्टर इस्लामी भीड़ अब सड़क पर, सारे बाजार बंद, कर रहे उग्र प्रदर्शन

राजस्थान की राजधानी जयपुर में हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। सुभाष चौक पर दुर्घटना में बाइक सवारों में झड़प हुई, जिसने बाद में सांप्रदायिक रंग ले लिया। अब इस मामले में 2 गुटों में हुई झड़प में एक युवक की मौत हो गई है। मृतक के परिजन लाश के साथ प्रदर्शन कर रहे हैं और उन्होंने पोस्टमॉर्टम तक कराने से इनकार कर दिया। इसके बाद राजस्थान के मुख्यमंत्री ने मृतक के परिवार को एक सरकारी नौकरी और 50 लाख रुपए बतौर मुआवजा देने की घोषणा की।

अब खबर आ रही है कि इस ऐलान के बाद पुलिस-प्रशासन ने समझा-बुझा कर परिवार को मृतक के शव के पोस्टमॉर्टम के लिए मनाया। सीएम अशोक गहलोत ने परिवार को एक डेयरी बूथ देने की घोषणा भी की है। सुभाष चौक पर 2 बाइकों में टक्कर के बाद इस प्रकरण की शुरुआत हुई थी। इसके बाद दोनों तरफ से भीड़ जमा हो गई और हिंसा में इक़बाल नामक युवक की मौत हो गई। CCTV में भी ये घटना कैद हुई है। परिजनों का कहना है कि इक़बाल के सिर पर रॉड से मारा गया, जिससे काफी अधिक खून बह गया और उसकी मौत हो गई।

SMS अस्पताल में शव को भेज कर पोस्टमॉर्टम कराया गया और फिर आगे की विधिक कार्यवाही की गई। पुलिस ने हिंसा में शामिल आरोपितों की पहचान करने का दावा किया है और कहा है कि उन्हें जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। शनिवार (30 सितंबर, 2023) को जयपुर के बाजार बंद रहे और सड़क पर लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। हजारों लोगों की भीड़ के सामने पुलिस भी बेबस दिखी। जनप्रतिनिधियों और पुलिस-प्रशासन ने बैठक कर मामले को शांत करने पर मंथन की।

फूटा खुर्रा इलाके के रहने वाले उक्त युवक की मौत की खबर सोशल मीडिया के जरिए तेज़ी से फ़ैल गई। उसके घर के बाहर पहले लोग जमा हुए, फिर सड़कों पर उतर गए। रामगंज और घाटगेट में इस तनाव का सबसे ज़्यादा असर पड़ा। कई पुलिस अधिकारी मौके पर मौजूद थे। शुक्रवार की रात 10:55 बजे बाइकों में टक्कर हुई थी, और जयपुर तभी से सुलग रहा है। कई व्यापारी अपनी-अपनी दुकानें बंद कर चलते बनें। युवक की मौत के बाद कार्रवाई की माँग को लेकर थाने का भी घेराव किया गया।

महिलाओं की इज्जत और जिंदगी से नहीं, अपनी राजनीति से प्यार है राहुल-प्रियंका गाँधी को: उज्जैन कांड पर हंगामा, लेकिन जयपुर-बंगाल कांड में चुप्पी

महिलाओं से बलात्कार के मामले में नंबर एक राज्य राजस्थान की राजधानी में एक महिला का जला हुआ शव बरामद हुआ है। कहा जा रहा है कि महिला का बलात्कार करने के बाद हत्या की गई है और पहचान छिपाने के लिए शव को जला दिया गया। इसी तरह की एक घटना दो दिन पहले बंगाल से भी आई थी। उसमें भी महिला का हाथ पाँव से बाँधकर गला काट दिया गया था और चेहरे को जला दिया गया था।

इन दोनों मामलों में कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी और उनकी बहन प्रियंका गाँधी वाड्रा ने चुप्पी साध रखी है। दो दिन पहले उज्जैन में एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार हुआ था। इसको लेकर दोनों भाई-बहन ने जबरदस्त बवाल काटा था। हालाँकि, राजस्थान कॉन्ग्रेस शासित होने और बंगाल I.N.D.I गठबंधन का हिस्सा होने के कारण यहाँ के दोनों मामलों ने ये मुँह नहीं खोल रहे हैं।

दरअसल, राजस्थान की राजधानी जयपुर में शुक्रवार (18 सितंबर 2023) की सुबह एक महिला का अधजला शव सड़क पर फेंका हुआ मिला था। मृतका का आधा चेहरा और कपड़े में लाल रंग का कुर्ता अधजला बचा है। बाकी शरीर जल गया है। करीब 25 साल की मृतक महिला के चेहरे और सिर पर खून के निशान मिले हैं। चेहरा जला होने के कारण उसकी पहचान नहीं हो पाई है।

प्रथमदृष्टया माना जा रहा है कि मृतका के सिर पर भारी चीज से वार किया गया है, जिसके कारण उसकी मौत हो गई है। पुलिस ने रेप की आशंका से भी इनकार नहीं किया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हत्या के बारे में पूरी जानकारी का पता चलेगा। पुलिस ने मृतका की पहचान के लिए जयपुर और जयपुर ग्रामीण के थानों में सूचना दे दी है।

इसको लेकर आम लोगों में गुस्सा फैल गया है और वे सड़कों पर उतर आए हैं। हालाँकि, इतना सब कुछ होने। के बावजूद कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी और उनकी बहन प्रियंका गाँधी वाड्रा ने इस पर एक शब्द नहीं बोला। इससे पता चलता है कि अपराध को लेकर राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस में कोई मलाल नहीं होता, बल्कि वे अपराध के स्थान को लेकर राजनीति के अवसर तलाशते हैं। इसकी सोशल मीडिया पर उन दोनों की खूब आलोचना हो रही है।

वहीं, भाजपा विधायक बिहारी लाल ने कहा, "जयपुर ग्रामीण के जमवारामगढ़ उपखंड क्षेत्र के बाढ़ पापड़ रोड पर महिला का जला हुआ शव मिला। प्रदेश की राजधानी में भी महिला सुरक्षा पर सरकार नाकाम साबित हो रही हैं मान लिया राज्य संभालने में नाकाम हैं पर अब तो राजधनी मे भी अपराध धड़ले से हो रहे हैं।"

उसी तरह बंगाल की घटना पर भी दोनों भाई खामोश रहे, ताकि विघटन के कगार पर खड़े I.N.D.I. गठबंधन में किसी तरह की दरार ना पड़ जाए। दरअसल, पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में एक बांग्लादेशी महिला की हत्या कर दी गई थी और उसका शव स्वर्णपुर के गोबिंदपुर इलाके के फील्ड में पड़ा मिला। महिला के हाथों को रस्सी से बाँध दिया गया था। उसकी गर्दन को चाकू से कर मौत के घाट उतारा गया था।

अपराधियों ने उसकी पहचान को छिपाने के लिए चेहरे को भी जला दिया था। इस मामले में पुलिस ने उसने प्रेमी नासेर मिल्स को गिरफ्तार किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मृतक महिला का नाम सोमैया अख्तर है। वह मूल रूप से बांग्लादेश के ढाका की रहने वाली थी और मुंबई में एक ब्यूटी पार्लर में काम करती थी।

स्थानीय लोग जब उस जगह पर फूल तोड़ने के लिए गए तो उन्हें महिला का शव मिला। महिला के शव मिलने का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें उसके चेहरे के हिस्से को जला दिया गया है। उसके दोनों हाथों के घुटने से नीचे से एक लकड़ी के सहारे बाँध दिया गया था। वहीं, चेहरे पर कपड़े डालकर आग लगा दी गई थी। जमीन पर चारों तरफ खून फैला हुआ था।

लेकिन, इससे अलग भाजपा शासित राज्य मध्य प्रदेश में सामने आई घटना को लेकर राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी का रूख अलग रहा। उज्जैन में एक नाबालिग लड़की के साथ एक ऑटो वाले ने बलात्कार कर दिया था। इसके बाद खून से लथपथ उस लड़की ने लोगों से मदद माँगते हुए 8 किलोमीटर पर सड़कों पर टहलती रही थी। अंत में एक आश्रम के महंत ने उसकी मदद की और उसके बारे में पुलिस को सूचना दी। तब जाकर मामला सामने आया था। इस पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ऑटो रिक्शा चालक को पकड़ लिया है।

चूँकि, मध्य प्रदेश भाजपा शासित है और वहाँ विधानसभा के चुनाव भी होने वाले हैं। ऐसे में राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी इस मामले पर जमकर ट्वीट किया। उन्होंने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक को घेरा और उन्हें बेशर्म बता दिया।

राहुल गाँधी ने अपने ट्वीट कहा था, "मध्य प्रदेश में एक 12 साल की बच्ची के साथ हुआ भयावह अपराध, भारत माता के हृदय पर आघात है। महिलाओं के खिलाफ़ अपराध और नाबालिग बच्चियों के खिलाफ़ हुए दुष्कर्म की संख्या सबसे ज़्यादा मध्य प्रदेश में है। इसके गुनहगार वो अपराधी तो हैं ही जिन्होंने ये गुनाह किए। साथ ही प्रदेश की भाजपा सरकार भी है, जो बेटियों की रक्षा करने में अक्षम है।"

राहुल गाँधी ने आगे कहा, "न न्याय है, न कानून व्यवस्था और न अधिकार - आज, मध्य प्रदेश की बेटियों की स्थिति से पूरा देश शर्मसार है। मगर, प्रदेश के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री में बिल्कुल शर्म नहीं है - चुनावी भाषण, खोखले वादों और झूठे नारों के बीच बेटियों की चीखें उन्होंने दबा दी हैं।"

वहीं, उनकी बहन प्रियंका गाँधी ने इस मामले में कहा था, "भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन में एक छोटी बच्ची के साथ हुई बर्बरता आत्मा को झकझोर देने वाली है। अत्याचार के बाद वह ढाई घंटे तक दर-दर मदद के लिए भटकती रही और फिर बेहोश होकर सड़क पर गिर गई, लेकिन मदद नहीं मिल सकी।"

उन्होंने आगे कहा था, "ये है मध्य प्रदेश की कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा? भाजपा के 20 साल के कुशासन तंत्र में बच्चियां, महिलाएं, आदिवासी, दलित कोई सुरक्षित नहीं है। लाडली बहना के नाम पर चुनावी घोषणाएं करने का क्या फ़ायदा है अगर बच्चियों को सुरक्षा और मदद तक नहीं मिल सकती?"

कॉन्ग्रेस ने जिसे ‘लड़की हूँ, लड़ सकती हूँ’ का चेहरा बनाया, दफ्तर के बाहर कार्यकर्ताओं ने उसे ही पीटा: पानी माँगती रही अर्चना गौतम, जमीन पर पड़े थे बुजुर्ग पिता

नई दिल्ली स्थित कॉन्ग्रेस के दफ्तर के बाहर पार्टी की ही महिला नेता अर्चना गौतम के साथ मारपीट का वीडियो सामने आया है। बता दें कि अर्चना गौतम ‘बिग बॉस 16’ का हिस्सा रही थीं। उन्होंने कॉन्ग्रेस पार्टी में शामिल होकर विधानसभा चुनाव भी लड़ा था। पार्टी ने उन्हें प्रियंका गाँधी के अभियान ‘लड़की हूँ, लड़ सकती हूँ’ का चेहरा भी बनाया था। अब कॉन्ग्रेस दफ्तर के बाहर पार्टी के कार्यकर्ताओं ने अपनी ही महिला नेता और उनके बुजुर्ग पिता के साथ मारपीट की है।

बता दें कि अक्टूबर 2022 से फरवरी 2023 तक चले ‘बिग बॉस 16’ में अर्चना गौतम शीर्ष 5 में भी पहुँची थी। वीडियो में देखा जा सकता है कि भीड़ अर्चना गौतम और उनके पिता के साथ मारपीट कर रही है। इस दौरान उनके पिता जमीन पर गिर जाते हैं। अर्चना गौतम अपने पिता के लिए पानी माँगती हुई मिन्नतें करती हैं, लेकिन कोई पानी तक नहीं देता। वीडियो में उन्हें चीखते-चिल्लाते हुए भी देखा जा सकता है। अर्चना गौतम संसद में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ पास होने पर कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रियंका गाँधी को बधाई देने पहुँची थी।

इसी दौरान उनके साथ मारपीट की है। बता दें कि इस अधिनियम पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हस्ताक्षर के बाद अब ये कानून बन गया है। इसके बाद लोकसभा और विधानसभा चुनावों में महिलाओं को 33% आरक्षण दिए जाने का रास्ता साफ़ हो गया है। अर्चना गौतम कॉन्ग्रेस पार्टी का सोशल मीडिया से लेकर जमीन तक पर सक्रियता के समर्थन करती रही हैं। मेरठ के हस्तिनापुर से उन्होंने 2022 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव उन्होंने लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का मुँह देखना पड़ा था।

अर्चना गौतम ‘खतरों के खिलाड़ी’ शो में भी नज़र आई थीं। भाजपा ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि जिस तरह कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने दफ्तर के बाहर अर्चना गौतम और उनके पिता के साथ मारपीट की है, वो इकलौता उदाहरण नहीं है। उन्होंने कॉन्ग्रेस नेता अल्पना वर्मा से कॉन्ग्रेस नेताओं द्वारा शराब पीकर बदसलूकी मामला उठाया, जिस पर मध्य प्रदेश में FIR भी हुई है। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे कॉन्ग्रेस शासित राजस्थान में भी महिलाओं के साथ अपराध की घटनाएँ बढ़ गई हैं।

जो राहुल गाँधी OBC सचिवों की संख्या गिना रहे थे… उनके कॉन्ग्रेसी राज्यों में गिनती है शून्य, I.N.D.I. गठबंधन वाले राज्यों में अधिकांश ऊँची जातियों से

कॉन्ग्रेस और विपक्ष के अन्य दलों के शासन वाले राज्यों में अधिकांश नौकरशाह (मुख्य सचिव, सचिव) सामान्य वर्ग से हैं। कॉन्ग्रेस द्वारा स्वयं शासित किसी भी राज्य में मुख्य सचिव पिछड़ी जातियों से नहीं है, एक रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। यह खुलासा राहुल गाँधी के ओबीसी वर्ग से आने वाले नौकरशाहों को लेकर किए गए दावों के बाद हुआ है।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि कॉन्ग्रेस शासित छतीसगढ़, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक में राज्य के मुख्य सचिव सामान्य वर्ग से आते हैं। इसके अतिरिक्त, कॉन्ग्रेस के सहयोगियों द्वारा शासित राज्यों में भी तमिलनाडु को छोड़ कर सभी राज्यों में मुख्य सचिव सामान्य वर्ग से हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, हिमाचल प्रदेश में प्रबोध शर्मा, छतीसगढ़ में अमिताभ जैन, कर्नाटक में वन्दिता शर्मा और राजस्थान में ऊषा शर्मा मुख्य सचिव हैं। इन सभी राज्यों में कॉन्ग्रेस की अपने दम पर बहुमत की सरकार है।

वहीं, कॉन्ग्रेस की अगुवाई वाले I.N.D.I. गठबंधन वाले राज्यों- बिहार में आमिर सुबहानी, झारखंड में सुखदेव सिंह, पश्चिम बंगाल में एचके द्विवेदी और पंजाब में अनुराग वर्मा तथा केरल में वीएन वेणु को मुख्य सचिव बनाया गया है। तमिलनाडु मात्र एक ऐसा राज्य है, जहाँ शिव दास मीणा (अनुसूचित जनजाति) से आने वाले मुख्य सचिव हैं।

कॉन्ग्रेस नेता और सांसद राहुल गाँधी ने हाल ही में महिला आरक्षण बिल के संसद से पारित होने पर ओबीसी आरक्षण का मुद्दा उठाया था और कहा था कि केंद्र सरकार में ओबीसी नौकरशाहों को नियुक्ति नहीं मिल रही है। राहुल ने कहा था कि केंद्र के 90 सचिवों में से मात्र 3 ओबीसी हैं।

गौरतलब है कि मुख्य सचिव किसी भी राज्य का सबसे बड़ा नौकरशाह होता है। अधिकांश सरकारें अपने पसंद के आईएएस अधिकारियों की नियुक्ति मुख्य सचिव के तौर पर करती हैं। ऐसे में कॉन्ग्रेस ओबीसी नौकरशाहों की नियुक्ति क्यों नहीं कर रही, राहुल गाँधी को अपनी ही पार्टी के मुख्यमंत्रियों से यह प्रश्न पूछना चाहिए।

ऐसा नहीं है कि सिर्फ राज्यों में ही कॉन्ग्रेस ने ओबीसी नौकरशाहों को अनदेखा किया हो, बल्कि जब केंद्र की सत्ता में कॉन्ग्रेस काबिज थी तब भी उसने पिछड़े वर्गों से आने वाले अधिकारियों को कोई ख़ास तवज्जो नहीं दी थी। कॉन्ग्रेसी प्रधानमंत्रियों के निजी और प्रधान सचिव भी ऊँची जातियों से ही आते रहे हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार में प्रधान सचिव रहे TKA नायर और पुलोक चैटर्जी भी सामान्य वर्ग से आते थे। इससे पहले राजीव गाँधी के प्रधान सचिव रहे पीसी अलेक्जेंडर भी ओबीसी नहीं थे। राजीव गाँधी के शासन में प्रधान सचिव रही सरला ग्रेवाल और बीजी गणेश भी पिछड़े वर्ग के नहीं थे।

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के प्रधान सचिव एलके झा और पीएन धर भी सामान्य वर्ग से थे जबकि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के प्रमुख सचिव रहे हीरूभाई पटेल भी सामान्य वर्ग से थे।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट से यह भी खुलासा हुआ है कि वर्ष 1985 से 1989 के बीच जब राजीव गाँधी प्रधानमंत्री थे, तब केंद्र सरकार का कोई भी सचिव आरक्षित वर्ग से नहीं था जबकि वर्तमान में 7 सचिव आरक्षित वर्ग से आते हैं। इसके अलावा 2014 तक केंद्र में ओबीसी वर्ग से आने वाले संयुक्त सचिव/अतिरिक्त सचिवों की संख्या मात्र 2 थी जो कि अब 63 पहुँच चुकी है।

पीएमओ में मंत्री जितेन्द्र सिंह ने इस मामले पर कहा है कि किसी भी आईएएस अधिकारी को सचिव के स्तर पर पहुँचने के लिए कम से कम ढाई दशक लगते हैं। ओबीसी वर्ग के नौकरशाहों की पहली भर्ती वर्ष 1995 में हुई थी। ऐसे में अब धीमे धीमे उनकी नियुक्ति सचिव के पदों पर हो रही है।

जितेन्द्र सिंह ने यह भी कहा कि केंद्र में नियुक्तियाँ सभी तरह के मूल्यांकन के बाद होती हैं, जबकि कॉन्ग्रेस सरकार वाले राज्यों में नियुक्तियाँ राजनीति से प्रेरित होती होती हैं।

मोतिहारी में गणपति विसर्जन शोभायात्रा पर तेजाब से हमला: CCTV खंगाल रही बिहार पुलिस, घायलों की संख्या स्पष्ट नहीं

बिहार के मोतिहारी में गणपति विसर्जन यात्रा पर असामाजिक तत्वों ने तेज़ाब फेंक दिया। इस घटना के यात्रा में शामिल 3 लोग झुलस गए हैं। यह घटना 28 सितम्बर 2023 की शाम को मोतिहारी शहर के व्यस्त इलाके में हुई। इस घटना के बाद यात्रा निकालने वाले लोगों और हिंदुओँ में रोष व्याप्त है।

जानकारी के अनुसार, मोतिहारी में गणपति प्रतिमा की स्थापना की गई थी जिसको विसर्जित करने के लिए यात्रा निकाली जा रही रही थी। यात्रा जब मोतिहारी के द्वारदेवी चौक से बढ़कर मीना बाजार के मधुबन चौक पर पहुँची तो कुछ असामाजिक तत्वों ने यात्रा में शामिल लोगों पर तेज़ाब फेंक दिया। इसमें तीन लोग झुलस गए।

घायलों को उपचार के लिए निजी अस्पतालों में भर्ती करवाया गया। घटनास्थल पर हंगामा मच गया और हिन्दू विरोध प्रदर्शन करके दोषियों की तुरंत गिरफ्तारी करने की माँग करने लगे। मौके पर पहुँची पुलिस को सड़क पर तेज़ाब मिले हैं। आरोपितों की पहचान के लिए आसपास के सीसीटीवी कैमरों की जाँच की जा रही है।

हिंदी समाचार वेबसाइट जागरण के अनुसार, कहा जा रहा है कि पुलिस के सामने अब तक जख्मी नहीं आए है। वहीं, पुलिस की भारी उपस्थिति और स्थानीय हिन्दू नेताओं के समझाने के बाद इलाके में शांति है, लेकिन एक खामोश तनाव बना हुआ है। बाद में पुलिस की मौजूदगी में गणेश प्रतिमा का विसर्जन कराया गया।

मोतिहारी के अपर पुलिस अधीक्षक श्रीराज ने कहा कि यात्रा पर असामाजिक तत्वों द्वारा कुछ तरल पदार्थ फेंकने की सूचना मिली थी, जिस पर पुलिस कार्रवाई कर रही है। उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की है।

बिहार के मोतिहारी के अलावा उत्तर प्रदेश के कुशीनगर और बदायूं से भी ऐसी खबरें आई हैं। पैगंबर मोहम्मद के जन्मदिन पर गुरुवार (28 सितंबर 2023) को निकले बारावफात जुलूस के दौरान शामिल लोगों ने कुशीनगर में पत्थरबाजी की। सुल्तानपुर में तिरंगे के अपमान का मामला सामने आया है। बदायूं में एक वीडियो वायरल है, जहाँ भीड़ ‘सिर तन से जुदा’ के नारे लगाती दिख रही है।

स्कॉटलैंड में खालिस्तानियों ने भारतीय उच्चायुक्त को गुरुद्वारा में घुसने से रोका, कहा – ‘ब्रिटेन के किसी भी गुरुद्वारे में भारतीय अधिकारियों का स्वागत नहीं’

खालिस्तान के खिलाफ भारत द्वारा वैश्विक स्तर पर लिए स्टैंड से इसके आतंकी बौखला गए हैं। UK के स्कॉटलैंड में खालिस्तान समर्थक सिखों ने भारतीय उच्चायुक्त विक्रम दुरईस्वामी को गुरुद्वारा में प्रवेश करने से रोक दिया। खालिस्तान समर्थकों ने शुक्रवार (29 सितंबर 2023) को अंजाम दी गई इस घटना में उच्चायुक्त को कार से नीचे उतरने ही नहीं दिया।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, दोरईस्वामी जब अल्बर्ट ड्राइव पर स्थित ग्लासगो गुरुद्वारा के पास पहुँचे कट्टरपंथी ब्रिटिश सिख कार्यकर्ताओं के एक समूह ने घेर लिया कहा। इस दौरान उन्होंने ‘आपका स्वागत नहीं है (You are not welcome) के नारे लगाए। कुछ देर रुकने के बाद दुरईस्वामी वहाँ से चले गए।

इस घटना के बारे में जानकारी देते हुए एक खालिस्तान समर्थक सिख ने कहा कि उनमें से कुछ को पता चला कि दोराईस्वामी ने अल्बर्ट ड्राइव पर ग्लासगो गुरुद्वारा की गुरुद्वारा समिति के साथ एक बैठक की योजना बनाई है। इसके बाद खालिस्तानी सिखों का एक समूह वहाँ पहुँच गया और उन्हें गुरुद्वारा में घुसने से रोक दिया।

उस व्यक्ति का कहना था, “मुझे नहीं लगता कि जो कुछ हुआ, उससे गुरुद्वारा समिति बहुत खुश है। हालाँकि, ब्रिटेन के किसी भी गुरुद्वारे में भारतीय अधिकारियों का स्वागत नहीं है।” उसने आगे कहा, “हम यूके-भारत की मिलीभगत से तंग आ चुके हैं। हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद से हालिया तनाव के कारण ब्रिटिश सिखों को निशाना बनाया जा रहा है। अवतार सिंह खंडा और जगतार सिंह जोहल के साथ भी ऐसा ही हुआ है।”

सामने आए वीडियो में भारतीय उच्चायुक्त को लंगर परोसने के लिए टेबल लगाया गया था और उस पर सफेद चादर बिछाए गए थे। इस दौरान एक सिख कार्यकर्ता वीडियो बना रहे व्यक्ति को रोकने की कोशिश करता है।

इस बीच, सूत्रों ने बुधवार (27 सितंबर 2023) को समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि कनाडा में स्थित खालिस्तान समर्थक तत्व भोले-भाले सिख युवाओं को वीजा प्रायोजित कर वहाँ बुला रहे हैं। इसका एकमात्र उद्देश्य कनाडाई धरती पर अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए उनका उपयोग करना है।

बता दें कि ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में खालिस्तान समर्थक सिखों द्वारा भारतीय राजनयिकों को धमकाने और सड़कों पर बवाल करने के साथ-साथ हिंदुओं को पिटने एवं मंदिरों में तोड़फोड़ में शामिल रहे हैं। इसको लेकर NIA जाँच भी कर रही है।

नरेंद्र मोदी स्टेडियम में क्रिकेट वर्ल्ड कप मैच के दौरान आतंकी हमले की धमकी, खालिस्तानी आतंकी पन्नू के खिलाफ अहमदाबाद में FIR दर्ज

गुजरात पुलिस ने भगोड़ा खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। यह FIR शुक्रवार (29 सितंबर 2023) को अहमदाबाद में दर्ज की गई। पन्नू ने 14 अक्टूबर 2023 को अहमदाबाद में होने वाले क्रिकेट विश्वकप में भारत-पाक मैच के दौरान आतंकी हमलों की धमकी दी थी। उसने ऑडियो मैसेज रिकॉर्ड और कई लोगों को फोन कॉल करके धमकी दी है।

यूएपीए समेत कई धाराओं में केस दर्ज

अहमदाबाद के साइबर क्राइम डीसीपी अजीत राजियन ने समाचार एजेंसी ANI से कहा, “विभिन्न सोशल मीडिया हैंडल पर पहले से रिकॉर्ड किए गए धमकी भरे संदेश प्रकाशित कर माहौल खराब करने का प्रयास किया गया। पन्नू के खिलाफ IPC की धारा 121(A), 153(A)(B), 505 और UAPA एवं आईटी एक्ट 66F के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।”

बता दें कि 27 सितंबर 2023 को भारत में कई लोगों को यूके के फोन नंबर +44 7418 343648 से कॉल आई, जिसमें आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू का पहले से रिकॉर्ड किया गया ऑडियो मैसेज था। इस ऑडियो मैसेज के जरिए खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू माहौल खराब करने की कोशिश करता दिखाई दे रहा है।

रिकॉर्डेड मैसेज में पन्नू कहता है, “शहीद निज्जर की हत्या पर हम आपकी बुलेट के खिलाफ बैलेट का उपयोग करने जा रहे हैं। हम आपकी हिंसा के ख़िलाफ़ वोट का इस्तेमाल करने जा रहे हैं। इस अक्टूबर में विश्व क्रिकेट कप नहीं होगा। यह विश्व आतंक कप की शुरुआत होगी। यह संदेश एसएफजे जनरल काउंसिल गुरपतवंत सिंह पन्नू का है।”

गौरतलब है कि कनाडा के सरे शहर में खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद हत्या कर दी गई थी। इसका आरोप खालिस्तानी समूह भारत पर लगा रही हैं। खालिस्तानी समर्थक कनाडाई प्रधानमंत्री ने अपने देश की संसद में इस बात का दावा किया था। इसके बाद खालिस्तानियों ने कनाडा में ओटावा, टोरंटो और वैंकूवर में भारतीय मिशनों के प्रमुखों की हत्या के लिए पोस्टर लगाए।

इस बीच, बीते 23 सितंबर को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) ने चंडीगढ़ के सेक्टर 15 सी में खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू की संपत्तियों को जब्त कर लिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जाँच एजेंसी ने खालिस्तानी आतंकवादी के खिलाफ एक नया डोजियर जारी किया है, जिसे अन्य देशों की जाँच एजेंसियों के साथ साझा किया जाएगा। नए डोजियर के मुताबिक, पन्नू खालिस्तान बनाना चाहता है और भारत को कई हिस्सों में बाँटना चाहता है। उसके खिलाफ विभिन्न राज्यों में 16 मामले दर्ज हैं।