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JNU की महिला कुलपति ने कहा- RSS से होने पर गर्व, पूछा- क्या तीस्ता सीतलवाड़ की तरह हमारे लिए भी रात को खुलेगी सुप्रीम कोर्ट

दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्विद्यालय (JNU) की कुलपति शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित ने 17 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट से सवाल किया है। उन्होंने कहा कि तीस्ता सीतलवाड़ को राहत देने के लिए रात में कोर्ट खुली थी। इसी तरह क्या उनके लिए भी हो सकता है? उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू होने और संघ से जुड़ाव पर उन्हें गर्व है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जेएनयू की पहली महिला कुलपति शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित ने यह बात महाराष्ट्र के पुणे में आयोजित पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में कही। उन्होंने कहा, “वामपंथी विचारधारा अब भी मौजूद है। आप लोग जानते होंगे कि तीस्ता सीतलवाड़ को जमानत देने के लिए सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने शनिवार रात को कोर्ट खोल दिया था। क्या ऐसी ही व्यवस्था हम लोगों के लिए भी होगी?”

उन्होंने आगे कहा, “राजनीतिक सत्ता में बने रहने के लिए आपके पास नैरेटिव पावर होना चाहिए। हमें इसकी जरूरत है। जब तक हमारे पास नैरेटिव पावर नहीं होगी, तब तक हम एक दिशाहीन जहाज की तरह हैं।”

वहीं धूलिपुड़ी पंडित ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से अपने जुड़ाव को याद करते हुए कहा, “मैं बचपन में ‘बाल सेविका’ थी। मुझे संस्कार आरएसएस से ही मिले हैं। मुझे यह कहने में गर्व है कि मैं आरएसएस से हूँ। मुझे यह कहने में भी गर्व है कि मैं हिंदू हूँ। यह कहने में मैं बिल्कुल भी नहीं संकोच नहीं करती।” इसके बाद उन्होंने जय श्री राम का नारा लगाते हुए कहा, “गर्व से कहती हूँ मैं हिंदू हूँ।”

उन्होंने आगे कहा कि वामपंथ और आरएसएस अलग-अलग विचारधाराएँ हैं। 2014 के बाद से इन दोनों विचारधाराओं के बीच संघर्ष में एक बड़ा बदलाव आया है। बता दें कि जेएनयू की कुलपति बनने के बाद जब उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में राष्ट्रीय ध्वज और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तस्वीर लगाने का फैसला किया तो कुछ लोगों ने इसका विरोध किया था।

इस पर उन्होंने उन लोगों से कहा था कि वे टैक्स देने वालों के पैसे से जेएनयू में फ्री का खाना खा रहे हैं। इसलिए उन लोगों को राष्ट्रीय ध्वज और पीएम मोदी की तस्वीर के सामने झुकना चाहिए। वह देश के प्रधानमंत्री हैं उनका किसी पार्टी से कोई संबंध नहीं है। अब एक साल से अधिक का समय बीत चुका है। कोई भी विरोध नहीं करता।

बिहार में बनने जा रहे नालंदा विश्वविद्यालय का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “मैं हाल ही में बख्तियारपुर में स्थित नालंदा विश्वविद्यालय गई थी। हमें बख्तियारपुर का नाम बदलना चाहिए। यह किस तरह का नाम है?” देश की प्राचीन सभ्यता के बारे में उन्होंने कहा, “हमारी भारतीय सभ्यता श्रेष्ठ, नारीवादी और दुनिया में सबसे महान है। द्रौपदी पहली नारीवादी हैं न कि फ्रांसीसी दार्शनिक सिमोन डी बेउवार।”

एक दिन में दो बार खुला सुप्रीम कोर्ट, रात में दी जमानत

गौरतलब है कि गुजरात दंगों के बाद नरेंद्र मोदी सरकार को बदनाम करने की साजिश रचने वाली तीस्ता सीतलवाड़ की जमानत रद्द करते हुए गुजरात हाईकोर्ट ने शनिवार रात, 1 जुलाई 2023 को तुरंत आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था।

लेकिन, इसके बाद तीस्ता सीतलवाड़ उसी दिन सुप्रीम कोर्ट पहुँच गई थी। जहाँ पहले बेंच ने सुनवाई की। लेकिन दो जजों की राय अलग-अलग रही। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने रात में ही दो अन्य जजों को बेंच का हिस्सा बनवाया। इसके बाद सुनवाई हुई और फिर तीस्ता सीतलवाड़ को जमानत दे दी गई थी।

तमिलनाडु में गणेश पूजा नहीं आसान, चेन्नई पुलिस ने थमाई शर्तों की लंबी लिस्ट: मूर्ति कारीगरों के आँसू देख भी नहीं पसीजा हाईकोर्ट

हाल ही में तमिलनाडु में कारीगरों द्वारा बनाई गई गणेश प्रतिमाओं को सील किए जाने का मामला सामने आया था। वहीं अब अब ग्रेटर चेन्नई पुलिस ने एक फरमान जारी करके कहा है कि हिन्दुओं को विनायागार (गणेश) पांडाल लगाने के लिए बिजली विभाग, पुलिस, अग्निशमन विभाग, हाईवे विभाग और स्थानीय निकाय से पहले इस बात की इजाजत लें कि क्या वह पांडाल लगा सकते हैं।

इन सब शर्तों के अलावा DMK शासित राज्य की पुलिस ने कई अन्य शर्तें भी गणेश चतुर्थी त्योहार को लेकर लगाई हैं जिसमें मूर्ति की ऊँचाई, धार्मिक नारे न लगाने, पटाखे ना फोड़ने और गणेश मूर्तियों को प्रवाहित करने से सम्बंधित भी नियम लागू कर दिए हैं। यहाँ तक कि ऐसे स्थानों पर पांडाल लगाने से भी मना कर दिया गया है जहाँ कोई स्कूल या अस्पताल हैं।

आप भी एक बार ग्रेटर चेन्नई पुलिस द्वारा हिन्दुओं को जारी की गई इन गाइडलाइन्स को एक बार देखिए:

  • 1. जिन लोगों को जमीन पर गणेश प्रतिमा स्थापित की जानी है वो स्थानीय निकाय, हाइवे विभाग और अन्य सरकारी विभागों से अनुमति लें।
  • 2. अग्निशमन विभाग, बिजली विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र लें।
  • 3. सारे नियमों को मानते हुए एक फ़ार्म भरके स्थानीय पुलिस थाने से अनुमति लें।
  • 4. गणेश प्रतिमा की ऊँचाई 10 फीट से अधिक नहीं होनी चाहिए।
  • 5. मूर्तियों को धार्मिक स्थलों, अस्पतालों और स्कूलों के आसपास नहीं बनाया जा सकता।
  • 6. ऐसे नारे ना लगाए जाएँ कि दूसरे धर्म के लोग आहत हो जाएँ।
  • 7. दो व्यक्तियों को 24 घंटे मूर्तियों के पास तैनात किया जाए।
  • 8. पूजा पांडालों पर किसी भी राजनीतिक दल के समर्थन वाले बैनर पोस्टर नहीं लगाए जा सकते।
  • 9. आग से बचाने वाले नियम माने जाएँ, हर समय इस बात की निगरानी की जाए।
  • 10. पुलिस द्वारा निर्धारित दिनों पर ही प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाए, प्रतिमाओं को चौपहिया वाहनों में रखा जाए और उन्हीं रूट से ले जाया जाए जो पुलिस बताए।
  • 11. कहीं पर भी पटाखे ना फोड़े जाएँ, ना ही पांडालों में ना विसर्जन यात्रा के दौरान।

चेन्नई पुलिस ने यह सारे नियम ट्विटर पर एक नोटिस डालकर जारी किए हैं। लोगों ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। लोगों ने चेन्नई पुलिस से प्रश्न पूछा है कि क्या वह अन्य मजहबों के त्यौहार पर क्या वह ऐसी ही एडवायजरी देते हैं और अगर ऐसा नहीं है तो फिर केवल हिन्दुओं के लिए ही ऐसे नियम क्यों हैं।

गणेश चतुर्थी के लिए चेन्नई पुलिस द्वारा लाए गए नियम एवं शर्तें
गणेश चतुर्थी के लिए चेन्नई पुलिस द्वारा लगाए गए नियम एवं शर्तें

लोगों ने यह भी प्रश्न पूछा है कि हाल ही में चेन्नई में ही हुए एआर रहमान के कॉन्सर्ट के लिए क्या एडवायजरी दी गई थी? गौरतलब है कि इस कॉन्सर्ट में कई महिलाओं के साथ छेड़खानी हुई थी और इसके गड़बड़ प्रबन्धन को लेकर चेन्नई के प्रशासन की खूब आलोचना हुई थी।

चेन्नई पुलिस ने यह सब नियम जारी करते हुए यह भी लिखा है कि नारों से किसी अन्य धर्म को समस्या ना हो। ऐसे में सवाल उठ सकता है कि क्या चेन्नई पुलिस ने पहले ही मान लिया है कि हिन्दुओं द्वारा लगाए जाने वाले नारों से अन्य धर्म के लोग भड़केंगे? हालाँकि, यह पहला मौका नहीं है जब गणेश चतुर्थी में खलल डालने का प्रयास ना किया गया हो।

इससे पहले हिन्दू देवी-देवताओं की मूर्तियाँ बनाने वाले कारीगरों के कारखानों को भी DMK सरकार ने सील करवा दिया था। यह कारीगर इस समय भगवान गणेश की मूर्तियाँ बना रहे थे जो कि इनकी आय का एकमात्र स्रोत हैं। अधिकारियों ने निर्दयता से इनके कारखानों को प्रदूषण के नाम पर सील कर दिया था।

हिन्दू कारीगरों पर हुए इस अत्याचार को मद्रास हाईकोर्ट ने सुनते हुए रविवार (17 सितंबर, 2023) को इनकी मूर्तियों की बिक्री को मंजूरी तो दे दी, लेकिन फिर एक डिवीजन बेंच ने एकल पीठ के फैसले को पलट दिया। कारीगरों पर आरोप था कि उन्होंने प्लास्टर ऑफ़ पेरिस की मूर्तियाँ बनाई है जबकि उनका कहना था कि मूर्तियाँ ऐसी सामग्री से बनी हैं जो कि पानी में पूरी तरह से घुल जाती हैं। गणेश चतुर्थी पर नियम कानून बनाने वाली डीएमके के ही नेता उदयनिधि स्टालिन ने बीते दिनों सनातन को डेगू और मलेरिया जैसा बताकर खत्म करने की बात कही थी जिसका पूरे देश में विरोध हुआ था।

वहीं सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में डाली गई याचिका पर त्वरित सुनवाई से इनकार कर दिया है।

ऑटो पायलट मोड में उड़ रहा था दुनिया का सबसे खतरनाक लड़ाकू विमान, हो गया गायब: अमेरिका ने आम लोगों से माँगी मदद, ₹1248 करोड़ में आता है एक F-35

अमेरिका का सबसे एडवांस फाइटर जेट एफ-35 लाइटनिंग-II खो गया है। इस एफ-35 फाइटर जेट की खूबियाँ ही अब सरकार के गले की फाँस बन गई हैं। जी हाँ, एफ-35 लाइटनिंग-II फाइटर जेट जिस स्टील्थ टेक्नोलॉजी (रडार की पकड़ से दूर) की वजह से सबसे खतरनाक माना जाता है, उसी टेक्नोलॉजी की वजह से वो गायब हो गया है। वो ऑटो पायलट मोड पर था और उसका पायलट इजेक्ट (प्लेन से बाहर निकलना) कर गया था।

12 अरब रुपए से ज्यादा कीमत का फाइटर जेट गायब

एफ-35 फाइटर जेट को अमेरिका ने अपने नाटो के सहयोगी देशों को भी दिया है। हालाँकि, ये बहुत महँगा भी है। इसके एक यूनिट की कीमत 150 मिलियन डॉलर यानि 12 अरब 48 करोड़ रुपए से अधिक है।

साउथ कैरोलिना राज्य के तटीय इलाके में स्थित चार्लसन ज्वॉइंट बेस से उड़ान भरने के बाद एफ-35 जब आसमान में था, तभी कुछ खराबी आने पर पायलट उसे ऑटो पायलट मोड में डालकर खुद बाहर निकल गया। चूँकि इसकी रफ्तार बहुत ज्यादा होती है, साथ ही ये ऑटो पायलट मोड में होने की वजह से सीधे किसी से टकरा भी नहीं सकता। ऐसे में अमेरिकी रक्षा विभाग के लोगों को लगता है कि ये शायद किसी झील या समंदर में गिर गया हो। ऐसे में उसने आम लोगों से मदद की अपील की है।

एफ-35 की रेंज बहुत ज्यादा

चूँकि, ये फाइटर जेट रडार की पकड़ में नहीं आता, तो इसकी ट्रैकिंग मुश्किल है। ऐसे में ये किस जगह गिरा होगा, इसकी कोई जानकारी नहीं है। हो सकता है कि ऑटो पायलट मोड पर होने की वजह से ये जहाज उस जगह से बहुत दूर निकल गया हो और ऐसी किसी जगह पर हो, जहाँ इनसानी रिहाइश ही न हो। ये जगह घटनास्थल के पास से लेकर 1000 हजार या डेढ़ हजार किलोमीटर से भी ज्यादा दूर हो, क्योंकि इसकी रेंज 2000 हजार किलोमीटर से ज्यादा की है।

स्थानीय नेता ने एयरफोर्स को घेरा, लापरवाही का लगाया आरोप

अब इस मुद्दे पर स्थानीय जन प्रतिनिधि नैंसी मैक ने अमेरिकी एयरफोर्स को घेरा है। उन्होंने आम लोगों से मदद माँगने की घटना पर गुस्सा उतारते हुए कहा है कि क्या अमेरिकी एयरफोर्स, एक ऐसा फाइटर जेट खोजने की कोशिश कर रही है, जिसमें कोई ट्रैकिंग डिवाइस ही नहीं है? या वो चाहती है कि आम लोग इस जेट को ढूंढें और उसे ऑन करें? उनके शब्दों पर गौर करें तो वो हैरानी जताने के साथ तंज करते हुए लापरवाही का आरोप लगा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस हादसे में फाइटर जेट से इजेक्ट करने वाला पायलट सुरक्षित है। उसे जरूरी मेडिकल सहायता दी जा रही है। हालाँकि, ये नहीं पता चल पाया है कि प्लेन में ऐसी कौन सी खराबी आई थी कि उसे प्लेन को ऑटो पायलट मोड में डालकर इजेक्ट करना पड़ा।

जो बचाना चाहती थी सबकी जान, फैजल ने उसको कुचल कर मार डाला: पीड़ित परिजन बोले- कई महीनों से छेड़खानी, घर तक आ गए थे शाहबाज और उसके साथी

उत्तर प्रदेश के अम्बेडकरनगर जिले में शुक्रवार (15 सितंबर, 2023) को एक नाबालिग हिन्दू लड़की की हत्या कर दी गई थी। स्कूल से घर लौट रही साइकिल सवार छात्रा का दुपट्टा बाइक सवार आरोपितों द्वारा खींचा गया था, इसके बाद कुचल दिया गया था। इस मामले में पुलिस ने मुठभेड़ के बाद अरबाज़, शाहबाज़ और फैज़ल को गिरफ्तार किया है। मृतका को लम्बे समय से परेशान किया जा रहा था। एक बार तो आरोपित उसके घर पहुँच गए थे। ऑपइंडिया से बात करते हुए मृतका के परिजनों ने घटना में चौथे आरोपित के भी शामिल होने की जानकारी दी।

इस पूरे घटनाक्रम की जमीनी हकीकत पता करने ऑपइंडिया की टीम रविवार (17 सितंबर, 2023) को मृतका के गाँव पहुँची। गाँव सबसे नजदीकी बाजार टांडा से लगभग 15 किलोमीटर दूर हीरापुर बाजार के पास है। जब हम घर पहुँचे तो पीड़िता के परिजन बाहर ही मौजूद थे। घर का बाहरी हिस्सा बेहद जर्जर हालत में था। नाबालिग के पिता ने हमें बताया कि गरीबी के बावजूद उन्होंने बेटियों की पढ़ाई और शादियाँ की। थोड़े ही देर में हमसे बातचीत करते हुए लड़की के पिता भावुक हो गए।

मृतका के घर का बाहरी हिस्सा

हत्या व पॉक्सो की धाराएँ जोड़ी गईं, SHO सस्पेंड

इस घटनाक्रम पर बोलते हुए अम्बेडकर नगर जिले के पुलिस अधीक्षक ने बताया कि मामले में हत्या की धारा-302 व पॉक्सो एक्ट की बढ़ोतरी की गई है। हंसवर थाने के SHO रितेश कुमार को सस्पेंड कर के नए थाना प्रभारी की तैनाती की गई है।

‘बेटी के कातिलों की संख्या 4’

मृतका के पिता ने अपनी बेटी के कुल कातिलों की तादाद 4 बताई। चौथे आरोपितों के तौर पर उन्होंने सलीम के बेटे मुन्नू का नाम बताया। मुन्नू अर्थालवा नाम के गाँव का रहने वाला है। पीड़ित पिता ने बताया कि बेटी की लाश देख कर उन्हें कुछ समझ में नहीं आ रहा था और चौथे आरोपित को नामजद करना भूल गए। उन्होंने सलीम के बेटे मुन्नू पर भी बाकी आरोपितों की तरह कार्रवाई की माँग की। साथ ही कहा कि वो इसकी प्रतीक्षा में हैं कि आरोपितों के घर पर बुलडोजर कब चलेगा। मृतका की बहन और पिता ने इस मामले को सोची-समझी साजिश के तहत हत्या करार दिया है। फिलहाल मुन्नू की गिरफ्तारी अभी नहीं हुई है।

घर तक आ गए थे पीछा करने वाले

मृतका की बड़ी बहन ने ऑपइंडिया से बात करते बताया कि उनकी बहन को कई महीनों से आरोपित परेशान कर रहे थे। वो लड़की का लगातार पीछा किया करते थे। इसी दौरान लगभग 2 महीने पहले चारों आरोपित 2 बाइकों से लड़की के घर तक पहुँच गए थे। बहन ने आगे बताया, “छोटी बहन साइकिल ले कर घर पहुँची। वो काफी डरी हुई थी। उसने पीछा करने वालों के बाहर तक आने की बात बताई। मेरा ऑपरेशन हुआ था फिर भी मैं बाहर तक निकली। तब तक चारों भाग चुके थे।”

पहले दुपट्टा खींचा, फिर बाइक चढ़ा दी

ऑपइंडिया ने घटना की चश्मदीद लड़की से बात की। चश्मदीद मृतका की चचेरी बहन है। हमें बताया गया कि घटना वाले दिन से पहले भी सभी आरोपितों लड़कियों का पीछा 2 बाइकों से किया करते थे। वो सभी लड़कियों के पास से तेजी से बाइक ले कर गुजरते थे। घटना के दिन मृतका का एक बाइक सवार ने दुपट्टा खींच लिया जिस से वो लड़खड़ा कर गिर पड़ी। इसी दौरान साथ चल रहे दूसरे बाइक सवार ने पीड़िता के सिर पर टायर चढ़ा दिया। बुरी तरह से घायल पीड़िता की आख़िरकार मौत हो गई।

हमसे बात करते हुए चश्मदीद पीड़िता फूट-फूट कर रो रही थी। उनका दावा है कि चारों आरोपित बाकी लड़कियों को भी ऐसे ही परेशान किया करते थे।

बुजुर्ग दादा हुए बेसहारा

ऑपइंडिया से बात करते हुए मृतका के लगभग 75 वर्षीय दादा फूट-फूट कर रोने लगे। उन्होंने कहा कि उनकी पोती उनके बुढ़ापे का एकमात्र सहारा थी। मृतका की माँ का देहांत कई साल पहले हो चुका था। 2 बड़ी बहनों की शादियाँ हो चुकी हैं और वो ज्यादातर अपने ससुराल में ही रहती हैं। एक भाई कक्षा 5 में पढ़ता है जो अभी बहुत छोटा है। बुजुर्ग ने बताया कि घर का खाना बनाने से ले कर सभी के कपड़े और बिस्तर तक उनकी पोती ही व्यवस्थित रखती थी।

डॉक्टर बनना चाहती थी मृतका

मृतका के पिता ने बताया कि उनकी बेटी डॉक्टर बन कर लोगों की सेवा करना चाहती थी। क्लास 12 के बाद वो अपनी बेटी को पढ़ने के लिए कहीं बाहर भेजने वाले थे। वहीं मृतका की बहन ने भी अपने पिता की बातों को दोहराया। बहन के मुताबिक, वो पढ़ने में काफी तेज थी और उनकी मौत पर स्कूल के पूरे स्टाफ ने घर पर आकर शोक प्रकट किया।

पढ़ने में होनहार थी छात्रा

ऑपइंडिया की टीम छात्रा के पढ़ाई वाले कमरे में गई। छात्रा की नोटबुक बेहद सलीके और अच्छी हैंडराइटिंग में लिखी हुई थी। रसायन विज्ञान में मृतका को उनके टीचरों द्वारा ‘Good’ लिख कर शाबाशी दी गई थी। डिसेक्शन बॉक्स को भी बेहद सलीके से सहेज कर रखा गया था। एक पूरी आलमारी किताबों से भरी दिखी। छात्रा में चित्रकारी की भी अच्छी कला थी। हमें कई चित्र दिखाए गए जिसे खुद मृतका ने पेंसिल की मदद से बनाया था। इन चित्रों में एक लड़की की फोटो भी है जिसने टोपी पहन रखी है।

मृतका की नोटबुक

जिस जगह मृतका पढ़ाई करती थी वहाँ माता लक्ष्मी की एक तस्वीर भी लगी हुई है। छात्रा के घर वालों ने बताया कि वो बहुत धार्मिक विचारधारा की भी थीं।

मृतका की चित्रकारी और पढ़ाई का कमरा

सबने माँगा मृत्युदंड

ऑपइंडिया ने मृतका के चाचा, पिता, बहन और दादा से बात की तो सभी ने एक स्वर में आरोपितों को मृत्युदंड से कम कुछ भी मंजूर नहीं बताया। छात्रा के पिता ने कहा कि उन्हें तब ही संतुष्टि मिलेगी जब सभी 4 आरोपित फाँसी पर झूल जाएँगे। वहीं मृतका के दादा ने रोते हुए कहा, “‘ओका सामने खड़ियाय के गोली मार जाई।” (उसे मेरे सामने खड़ा कर के गोली मारी जाए)। मृतका की बड़ी बहन ने भी कहा, “जैसे मेरी बहन को मारा है वैसे उनको भी मारा जाए।”

कॉपी में लिखा- मैं घर जाना चाहती हूँ और फंदे से झूल गई रिचा: जिस सुसाइड को मंत्री ने बताया ‘अफेयर’, उसके पिता ने कहा- लड़के करते थे छेड़छाड़

डॉक्टर बनने के सपने लेकर झारखंड के राँची से 16 साल की रिचा सिन्हा कोचिंग करने राजस्थान के कोटा आई थी। लेकिन 12 सितंबर 2023 को अपने हॉस्टल के कमरे में वह फंदे से लटकी मिली। रिचा के पिता के अनुसार एक बार उसने फोन पर छेड़छाड़ की भी शिकायत की थी।

पुलिस को इस मामले में कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। लेकिन दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार कोचिंग के नोटबुक के पन्नों में सुसाइड से पहले उसने घर वापस जाने की बात लिखी थी।

नोट बुक में रिचा सिन्हा ने हर पन्ने में कुछ शब्द लिख छोड़े हैं। पहले पन्ने पर लिखा है, “मैं वापस घर जाना चाहती हूँ।” दूसरे पर लिखा है, “पर मैं जा नहीं सकती।” तीसरे पर लिखा, “मैं क्या करूँ समझ नहीं आ रहा है।” चौथे पन्ने पर लिखा है, “मेरे जाने के बाद सब परेशानी खत्म हो जाएगी। मेरी मम्मी को दुख होगा।” पाँचवे और आखिरी पन्ने में लिखा है, “मेरे पापा और दीदी को खुशी होगी।”

इन 5 लाइनों को पढ़कर समझा जा सकता है कि रिचा परेशान थी और घर जाना चाहती थी। आत्महत्या से करीब आधे घंटे पहले उसने अपनी माँ से बात भी की थी। इस बातचीत में उसने कहा था कि उसका मन नहीं लग रहा है। घर लौटना चाहती है। मृतक लड़की के पिता का कहना है कि उनकी बेटी ने कई बार कहा था कि उसका मन नहीं लग रहा। लेकिन मन न लगने के कारण को लेकर उन्होंने कहा कि माँ और बहन से बात करते हुए उसने एक बार छेड़छाड़ का जिक्र किया था। उसने कहा था कि कोचिंग से हॉस्टल आने-जाने में परेशानी होती है। लड़के कमेंट करते हैं और छेड़छाड़ होती है। उन्होंने यह भी कहा है कि कोचिंग संस्थानों में बच्चों की बातें सुनी नहीं जाती है। उनकी बातें दबा दी जाती है।

गौरतलब है कि रिचा की आत्महत्या को राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार के मंत्री शांति धारीवाल ने प्रेम प्रसंग से जोड़ दिया था। उन्होंने कहा था, “कोटा में रिलेशनशिप की वजह से सुसाइड होते हैं। आपको सुनकर दुख होगा कि आज भी एक लड़की ने आत्महत्या की है। लेकिन आत्महत्या का कारण यह था कि उसने जो लेटर छोड़ा, वह लव अफेयर का था। अब तक जितनी भी आत्महत्या हुई है उनमें स्टडी करने की जरूरत है कि यहाँ पर ऐसा क्यों हुआ?”

उनके इस बयान पर मृतक छात्रा के परिवार ने ऐतराज जताया था। रिचा के पिता ने कहा था, “ऐसी कोई जानकारी मेरे पास नहीं है, यदि उनके पास इस बात के सबूत हैं तो वो हमें दिखाएँ। मेरी बेटी ऐसा नहीं कर सकती।” पीड़ित पिता ने कहा था, “पुलिस प्रशासन भी यही कह रहा है कि ऐसा कोई नोट नहीं मिला है, जिसमें प्रेम प्रसंग जैसा कोई मामला सामने आया हो। फिर मंत्री शांति धारीवाल के पास यह जानकारी कहाँ से आई।”

केरल CM की बेटी के ‘भ्रष्टाचार’ के खिलाफ खोला मोर्चा, अपने ही घर में मृत मिले: RTI एक्टिविस्ट की याचिका पर होनी थी सुनवाई

केरल में 47 साल के आरटीआई एक्टिविस्ट गिरीश बाबू की संदिग्ध मौत हो गई है। उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की बेटी वीणा के कथित भ्रष्टाचार की विजिलेंस जाँच को लेकर याचिका दायर कर रखी थी। इस पर कोर्ट में सुनवाई से ठीक पहले उनकी मौत की खबर आई।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार गिरीश बाबू कोच्चि के कलमस्सेरी में अपने परिवार के साथ रहते थे। 18 सितंबर 2023 की सुबह बेडरूम में पत्नी ने उन्हें मृत पाया। पुलिस के अनुसार प्रारंभिक जाँच से ऐसा लगता है कि उनकी मौत का दिल का दौरा पड़ने से हुई है। हालाँकि मौत के सही कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल पाएगा।

यह भी बताया जा रहा है कि गिरीश बाबू को कुछ स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ भी थी। पिछले महीने के एक फेसबुक पोस्ट से पता चलता है कि वे इसका उपचार भी करवा रहे थे।

आरटीआई के जरिए केरल में भ्रष्टाचार की लगातार पोल खोलने के कारण गिरीश बाबू सुर्खियों में रहते थे। उन्होंने मुख्यमंत्री समेत कई ‘बड़े’ लोगों के खिलाफ खुलासे किए थे। उन्होंने पलारीवट्टोम फ्लाईओवर घोटाले का खुलासा किया था।

हाल ही में मुख्यमंत्री की बेटी वीणा विजयन पर बिना काम के एक प्राइवेट कंपनी से तीन साल तक पैसे लेने का आरोप लगा था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार आयकर जाँच से यह बात सामने आई थी कि वीणा और उनकी कंपनी को हर महीने कुल 8 लाख रुपए बिना काम के मिलते थे। इस तरह से 3 साल तक वीणा और उनकी कंपनी एक्जॉलॉजिक सॉल्यूशंस ने 1.72 करोड़ रुपए कथित तौर पर कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड नाम की कंपनी से लिए थे।

वीणा विजयन के खिलाफ मामले को गिरीश बाबू मुवत्तुपुझा की अदालत में लेकर गए थे। लेकिन ये मामला खारिज कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने ऊपरी अदालत में अर्जी लगाई थी। इस मामले में गिरीश ने आयकर अंतरिम बोर्ड ऑफ सेटलमेंट, नई दिल्ली की रिपोर्ट के आधार पर जाँच की माँग की थी। उन्होंने याचिका में सीएम पिनराई विजयन के साथ ही यूडीएफ नेताओं रमेश चेन्निथला, पीके कुन्हालीकुट्टी और वीके इब्राहिमकुंजु का नाम भी शामिल किया था। आरोप लगाया कि इनलोगों को भी रिश्वत मिली थी। इस याचिका पर 18 सितंबर को ही सुनवाई होनी थी। लेकिन 18 सितंबर 2023 की सुबह उनकी मौत का पता चला।

सरकारें आएँगी, सरकारें जाएँगी… संसद के विशेष सत्र में PM मोदी ने अटल बिहारी वाजपेयी को किया याद, कई बड़े फैसले लिए जाने के दिए संकेत

प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार (18 सितम्बर, 2023) से चालू हुए संसद के 5 दिवसीय विशेष सत्र के पहले मीडिया से बात करते हुए बड़े संकेत दिए। प्रधानमंत्री ने संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी, PMO में मंत्री जितेन्द्र सिंह और कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के साथ बात करने के बाद मीडिया से कहा कि यह सत्र छोटा लेकिन ‘ऐतिहासिक’ होने वाला है।

प्रधानमंत्री के इस ऐलान से कि यह ऐतिहासिक निर्णयों का सत्र है, राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस सत्र में ही कोई बड़ा विधेयक सरकार प्रस्तुत करेगी। कयास लगाए जा रहे हैं कि इसी सत्र में UCC, महिला आरक्षण बिल या फिर ‘एक देश एक चुनाव’ से सम्बंधित कोई बड़ा निर्णय सामने आ सकता है। हालाँकि, सदन की कार्यवाही के पहले दिन ऐसी कोई घोषणा होने की सम्भावना कम है क्योंकि आज का दिन लोकसभा अध्यक्ष ने पूरा दिन सांसदों द्वारा वर्तमान संसद भवन से जुड़ी हुई यादों पर बोलने के लिए दिया है।

इसके बाद 19 सितम्बर को गणेश चतुर्थी के दिन संसद की कार्यवाही नए संसद भवन में स्थानांतरित कर दी जाएगी। अभी तक जो भी जानकारी सरकार की तरफ से दी गई है, उसमें कोई भी बिल ऐसा नहीं है जो बड़ी बहस का मुद्दा बने। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसके बाद लोकसभा को संबोधित किया, जहाँ उन्होंने संसद भवन की पिछले 75 वर्षों की यात्रा को रेखांकित किया।

प्रधानमंत्री ने इस दौरान बताया कि संसद प्रारंभ होने से लेकर अब तक 7500 से अधिक व्यक्ति दोनों सदनों में सांसद के रूप में सेवाएँ दे चुके हैं, जिनमें 650 से अधिक महिलाएँ रही हैं। उन्होंने इस दौरान संसद के पूर्व सदस्यों से लेकर वर्तमान सदस्यों तक के योगदान को भी बताया। प्रधानमंत्री ने संसद भवन के भीतर इस बात पर भी प्रकाश डाला कि आजादी के समय भारत के विषय में आशंकाएँ व्यक्त की गई थीं लेकिन संसद ने उन सभी आशंकाओं को झूठ सिद्ध कर दिया।

प्रधानमंत्री ने सदन में काम करने वाले सभी कर्मचारियों का भी धन्यवाद किया कि वह इस संसद को सुचारु रूप से चलाने के लिए लगातार मेहनत करते आए हैं। प्रधानमंत्री ने पंडित नेहरु द्वारा आजादी की मध्यरात्रि पर दिए गए भाषण और पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा ऐतिहासिक भाषण ‘सरकारें आएँगी, सरकारें जाएँगी, लेकिन ये देश रहना चाहिए’ का जिक्र भी लोकसभा में किया।

उन्होंने सांसदों द्वारा बीमारी और कोरोना जैसी विकट परिस्थितियों के बीच काम करने को भी सराहा। प्रधानमंत्री ने वर्ष 2014 के उस लम्हे को भी याद किया जब वह सदन पहुँच कर उसे प्रणाम करके अन्दर गए थे। प्रधानमंत्री ने सदन द्वारा लिए गए बड़े निर्णयों को भी बताया। उन्होंने उत्तराखंड, झारखंड और छत्तीसगढ़ के निर्माण को याद किया। उन्होंने भारत अमेरिका परमाणु समझौते की भी बात की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अनुच्छेद-370 का खात्मा ऐसा कदम था जिसे सदन कभी नहीं भूलेगा। प्रधानमंत्री ने 1965 के युद्ध के दौरान सदन से सैनिकों की हिम्मत बढ़ाने, हरित क्रान्ति लाने और बांग्लादेश के निर्माण को लेकर लिए गए निर्णयों का भी जिक्र किया गया। प्रधानमंत्री ने अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार द्वारा ‘सर्व शिक्षा अभियान’ के प्रारंभ किए जाने के ऐतिहासिक निर्णय को भी याद किया।

मनमोहन सिंह की सरकार के दौरान हुए ‘कैश फॉर वोट’ कांड की याद भी प्रधानमंत्री ने सदन को दिलाई। प्रधानमंत्री के इस भाषण के दौरान विपक्ष ने कई बार शोर मचाने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हुए।

टीएस सिंहदेव को खड़गे ने फटकारा, छत्तीसगढ़ के डिप्टी CM को माँगनी पड़ी माफी: कहा था- PM मोदी भेदभाव नहीं करते

पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कॉन्ग्रेस वर्किंग कमेटी (विस्तारित सीडब्ल्यूसी) की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अनावश्यक प्रशंसा नहीं करने का आदेश दिया। दरअसल, वह छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री टीएस सिंह देव द्वारा केंद्र की मोदी सरकार की प्रशंसा करने के बाद हुई कॉन्ग्रेस की किरकिरी से नाराज हैं। टीएस सिंह देव ने गुरुवार (14 सितंबर,2023) को रायगढ़ के एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी के साथ मंच साझा करते हुए केंद्र की मोदी सरकार की जमकर तारीफ की थी। 

क्या है पूरा मामला 

छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री टीएस सिंह देव ने एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ की थी। उस कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री ने कहा था, “आज आप यहाँ कुछ देने आएँ हैं। आपने छत्तीसगढ़ को बहुत कुछ दिया है और मुझे विश्वास है कि भविष्य में भी आप हमें और भी बहुत कुछ देते रहेंगे।”

उन्होंने आगे कहा, “हमने हमेशा केंद्र सरकार के मार्गदर्शन में काम किया है और मैं यह कहने से नहीं चूकना चाहता कि, मेरे अनुभव में, मुझे कोई पक्षपात महसूस नहीं हुआ… राज्य में, जब भी हमने कुछ माँगा। केंद्र सरकार, उन्होंने… कभी मदद से इनकार नहीं किया और मेरा मानना ​​है कि आगे चलकर राज्य और केंद्र हमारे देश और राज्य को आगे ले जाने के लिए सभी क्षेत्रों में मिलकर काम करेंगे।”

वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने भी हाथ जोड़कर और सिर झुकाकर आभार व्यक्त किया और बाद में उनसे हाथ भी मिलाया। उसी की एक क्लिपिंग सोशल मीडिया एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर वायरल हो गई।

कॉन्ग्रेस की हुई किरकिरी 

इसी वीडियो को कई भाजपा नेताओं ने भी केंद्र पर कथित तौर पर राज्य में योजनाओं को लागू नहीं करने का आरोप लगाने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की आलोचना करते हुए इसे साझा किया, जबकि उनके डिप्टी ने उनसे अलग जाते हुए प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ की थी।

बता दें कि कॉन्ग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) कथित तौर पर छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से पहले अपने वरिष्ठ नेता द्वारा प्रधानमंत्री की प्रशंसा से किए जाने से असमंजस की स्थिति में थी कि विरोध में क्या कहे। उनका उप मुख्यमंत्री ही PM मोदी की तारीफ कर रहा है। 

उपमुख्यमंत्री को माँगनी पड़ी माफी 

बता दें कि PM मोदी के साथ मंच साझा करने और उनकी प्रशंसा में कहे गए अपने शब्दों पर सफाई देते हुए टीएस सिंहदेव ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री की गरिमा को ध्यान में रखते हुए ऐसे शब्द कहे हैं। उन्होंने कहा, ‘हमारे राज्य में आतिथ्य सत्कार की परंपरा है। सरकारी मंच पर प्रधानमंत्री की गरिमा को ध्यान में रखते हुए बातें कही गईं। मैं मंच पर आरोप-प्रत्यारोप में नहीं पड़ना चाहता था। मेरा बयान केवल मेरे विभाग की माँगों से संबंधित था।”

इसी मामले में कॉन्ग्रेस के एक प्रवक्ता ने भी सोशल मीडिया पर हुई किरकिरी के बाद कहा कि सिंह देव जी केवल पीएम की कुर्सी का सम्मान कर रहे थे। छत्तीसगढ़ कॉन्ग्रेस के मीडिया सेल प्रभारी सुशील आनंद शुक्ला ने कहा, “सिंह देव जी पीएम के साथ मंच साझा कर रहे थे और इसलिए वह कूटनीतिक व्यवहार कर रहे थे।”

टीएस सिंह देव से नाराज मल्लिकार्जुन खड़गे 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सीडब्ल्यूसी की बैठक में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने निराशा व्यक्त करते हुए वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता की खिंचाई की। डिप्टी सीएम को पीएम की प्रशंसा के लिए माफी माँगने के लिए कहा गया। वह भी ऐसा तब हुआ जब टीएस सिंह देव ने कथित तौर पर छत्तीसगढ़ की कॉन्ग्रेस प्रभारी कुमारी शैलजा से पहले ही माफी माँग ली थी, जब उन्होंने उन्हें गलती बताई थी।

बैठक में मौजूद एक दूसरे नेता ने कहा, “उन्होंने (खड़गे) सिंह देव से कहा कि उनकी माफी से गलती ठीक नहीं होगी। उन्होंने सिंह देव और अन्य सभी सीडब्ल्यूसी सदस्यों से सावधान रहने और अनावश्यक रूप से पीएम की प्रशंसा नहीं करने को कहा। वहीं कॉन्ग्रेस के दूसरे नेताओं को सावधान करने के लिए सिंगदेव का उदाहरण भी दिया।

उन्होंने कहा, “कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने तब उनसे कहा कि खेद होने के बावजूद, नुकसान हो चुका है। एक उपमुख्यमंत्री और एक वरिष्ठ सदस्य के रूप में, लोग उनकी बातों को गंभीरता से लेंगे।” 

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस पहले ही डैमेज कंट्रोल मोड में आ चुकी थी। वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता पी.चिदंबरम ने बयान देते डैमेज कण्ट्रोल करने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा कि सिंह देव केवल “प्रोटोकॉल” का पालन कर रहे थे। इसलिए  डिप्टी सीएम ने कोई विभाजनकारी मुद्दा नहीं उठाया या कोई राजनीतिक बयान नहीं दिया। जयराम रमेश ने भी कहा कि सिंह देव का आचरण “प्रधानमंत्री के विपरीत था, जिन्होंने हर सरकारी समारोह में कॉन्ग्रेस को गाली दी थी।”

जनेऊ काटा, बच्चियों का रेप, पूजा के बर्तन में थूका… ‘रजाकार’ के टीजर में निजाम की बर्बरता: दिखाया कैसे पेड़ पर लटकाई हिन्दुओं की लाशें

तेलुगू फिल्म ‘रज़ाकार’ का टीजर रिलीज हो गया है। ये फिल्म भारत के इतिहास की सच्ची घटनाओं पर आधारित है। इसमें बताया गया है कि कैसे 15 अगस्त, 1947 को जब भारत को स्वतंत्रता मिली तब हैदराबाद आज़ाद नहीं हो पाया था। वहाँ निज़ाम का शासन था, इस्लामी शासन। बता दें कि आतंकी संगठन रज़ाकार की स्थापना कासिम रिजवी ने की थी। उसने मजलिस-ए-इत्तहादुल मुसलमीन (MIM) नामक पार्टी बनाई थी। वो एक फौजी की वेशभूषा में रहता था और हिन्दुओं पर अत्याचार करता था।

फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे निज़ाम के शासन को बनाए रखने के लिए कासिम रिजवी ने हर घर पर इस्लामी झंडा लगाने का आदेश दिया। उसे ब्राह्मणों का यज्ञोपवीत काट डालते हुए भी दिखाया गया है। साथ ही वो निज़ाम से कहता है कि हैदराबाद इस्लामी राज्य है। उसे कहते हुए दिखाया गया है कि भारत पहले से ही कई समस्याओं से जूझ रहा है, ऐसे में हैदराबाद इस्लामी राज्य बना रहेगा। वो कहता है, “चारों तरफ मस्जिदें बनाई जानी चाहिए। हिन्दुओं का जनेऊ काट कर आग लगा दिया जाना चाहिए।”

टीजर में ये भी दिखाया गया है कि कैसे घोड़ों पर बैठ कर रज़ाकार आतंकी हिन्दुओं का कत्लेआम कर रहे हैं, तलवार से उन्हें काट रहे हैं, बंदूक से गोली मार रहे हैं। हिन्दुओं की मूँछें शेव कर के उन्हें इस्लामी टोपी पहनाई जा रही है। रज़ाकार फौजी कह रहे हैं कि जो ‘काफिर’ इस्लाम अपनाने से मना करे, उसे खत्म कर डालो। साथ ही किताबों से संस्कृत, तेलुगू, कन्नड़ और मराठी जैसी भाषाओं को हटा कर अरबी पढ़ाने का आदेश दिया गया। ब्राह्मणों की शिखा जबरन काटे जाने की घटनाएँ भी दिखाई गई हैं।

एक दृश्य में एक इस्लामी कट्टरपंथी को एक पुजारी के पूजा के लोटे में थूकते हुए दिखाया गया है। हिन्दुओं को बाँध कर उन्हें घसीटा जा रहा है। एक दृश्य में दिखाया गया है कि सैकड़ों हिन्दुओं की हत्या कर के उन्हें पेड़ पर लटका दिया गया है। एक दृश्य में दिखाया गया है कि जहाँ हिन्दू घरों की महिलाएँ रो रही हैं, उनके सामने ही मर्दों को पानी में फेंका जा रहा है। ‘अल्लाहु अकबर’ नारे के साथ हत्याएँ की जा रही हैं। साथ ही लिखा है कि ये फिल्म सच्ची घटनाओं पर आधारित है।

जैसे जम्मू कश्मीर में हिन्दू महिलाओं के साथ क्रूरता की गई, वैसे ही दिखाया गया है कि हैदराबाद में भी रज़ाकारों ने हिन्दू महिलाओं और लड़कियों के साथ अत्याचार किया, उनका बलात्कार किया। एक ब्राह्मण को धारदार हथियार के ऊपर डाल कर उसका शरीर चीर डाला गया। इस तेलुगू फिल्म का निर्माण ‘समरवीर क्रिएशन्स’ द्वारा किया जा रहा है। टीजर लॉन्च के अवसर पर हैदराबाद के गोशमहल से भाजपा विधायक T राजा सिंह भी मौजूद रहे।

2001 में लोकतंत्र और देश की आत्मा पर हुआ था हमला… पुराने संसद भवन में अंतिम दिन, बोले विशेष सत्र में PM मोदी – कई लोगों का स्वभाव बन गया है भारत पर शक करना

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पुराने संसद भवन में कार्यवाही के अंतिम दिन लोकसभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि हम भले ही नए भवन में जा रहे हैं, लेकिन पुराना भवन पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा। उन्होंने इस पुराने भवन के निर्माण के सम्बन्ध में कहा कि इसको बनाने का निर्णय विदेशियों का था लेकिन इसको बनाने में लगा परिश्रम, पसीना और पैसा भारत के लोगों का था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि चंद्रयान-3 की सफलता से पूरा भारत ही नहीं बल्कि विश्व अभिभूत है। उन्होंने सदन के माध्यम से देश के वैज्ञानिकों और उनके साथियों को बधाई दी और उनका अभिनन्दन किया। प्रधानमंत्री मोदी ने गुटनिरपेक्षता आंदोलन समिट के बाद सर्वसम्मति से प्रशंसा प्रस्ताव पास होने की याद दिलाते हुए उसे G-20 से जोड़ा।

प्रधानमंत्री ने इसकी सफलता को देश को समर्पित किया और कहा कि यह कोई एक व्यक्ति या पार्टी की सफलता नहीं है। उन्होंने पूरे देश में होने वाले आयोजन को गौरव बढ़ाने वाला बताया। उन्होंने अफ्रीकन यूनियन के G20 में शामिल होने को लेकर भी बात की। प्रधानमंत्री ने विपक्ष और विदेशी आलोचकों पर हमला बोलते हुए कहा कि भारत के प्रति शक करने का स्वभाव बहुत से लोगों का बना हुआ है और वह कह रहे थे कि कोई घोषणा पत्र नहीं आएगा लेकिन भारत के नेतृत्व में यह सम्भव हुआ है।

उन्होंने कहा कि भारत में पूरा विश्व अपना मित्र खोज रहा है यह हमारे संस्कारों का परिणाम है जो कि हमें विवेकानंद और वेदों से मिला है। उन्होंने पुराने संसद भवन को छोड़ने वाले पल को काफी भावुक करने वाला बताया। उन्होंने कहा कि यहाँ हमारे खट्टे-मीठे अनुभव रहे हैं। उन्होंने कहा कि संघर्ष और गौरव का माहौल रहा है जो कि हमारी साझी विरासत है।

वर्ष 2014 में संसद को प्रणाम करके उसमें प्रवेश करने वाले पल को भी प्रधानमंत्री ने याद किया। उन्होंने कहा कि यह देश के सामान्य मानव की लोकतंत्र के प्रति श्रद्धा है कि एक चाय बेचने वाला बच्चा पार्लियामेंट पहुँच गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि सदन की संरचना समय के साथ बदली है और इसमें सभी वर्गों के लोग आज शामिल हैं और यहाँ पूर्ण रूप से समावेशी वातावरण है।

प्रधानमंत्री ने महिला सदस्यों के योगदान को गिनाया। उन्होंने लोकसभा के सबसे बुजुर्ग सदस्य शफीकुर्रहमान बर्क और सबसे कम उम्र की सदस्य चंद्रानी मुर्मू का जिक्र भी किया। उन्होंने कोरोना के दौरान सांसदों की मेहनत का उल्लेख भी किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी के बाद भारत के प्रति जताई गई आशंकाओं को गलत सिद्ध करने का कार्य इस संसद भवन ने किया है। उन्होंने इसी संसद भवन के भीतर संविधान निर्माण का उल्लेख भी किया। प्रधानमंत्री ने संसद के स्टाफ की प्रशंसा भी की। संसद भवन पर वर्ष 2001 में हुए आतंकी हमले को प्रधानमंत्री ने लोकतंत्र और देश की आत्मा पर हमला करार दिया, उन्होंने इस हमले में बलिदान हुए जवानों को भी याद किया और श्रद्धांजलि दी।