Home Blog Page 1530

संसद का विशेष सत्र शुरू, बोले PM मोदी- यह ऐतिहासिक निर्णयों का सत्र: चंद्रयान और G20 की सफलता का भी किया जिक्र

संसद का विशेष सत्र आज (18 सितंबर 2023) से शुरू हो गया है। यह सत्र 22 सितंबर तक चलेगा। सत्र की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मीडिया से बात की। इस दौरान उन्होंने यह कहकर बड़े संकेत दिए कि इस सत्र में ऐतिहासिक निर्णय होंगे।

संसद के विशेष सत्र पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “संसद का यह सत्र छोटा है, लेकिन समय के हिसाब से यह बहुत बड़ा है, ऐतिहासिक निर्णयों का यह सत्र है। इस सत्र की एक विशेषता है अब तक कि 75 वर्षों की यात्रा एक नए मुकाम से आरम्भ हो रही है।”

इस दौरान उन्होंने चंद्रयान -3 की सफलता पर भी बात की। प्रधानमंत्री ने कहा कि जब ऐसे मिशन सफल होते हैं तो उससे अनेकों संभावनाएँ खुलती हैं। प्रधानमंत्री के साथ इस दौरान पीएमओ में मंत्री जितेन्द्र सिंह और संसदीय कार्य मंत्री प्रहलाद जोशी भी थे।

प्रधानमंत्री ने G20 की सफलता को भी अभूतपूर्व बताया। उन्होंने इसके आयोजन को संघीय ढाँचे का उत्तम उदारहण और विविधता के जश्न के तौर पर बताया। उन्होंने G20 में सर्वसम्मति से घोषणा-पत्र तैयार होने को भारत के उज्ज्वल भविष्य का संकेत बताया।

देश को 2047 तक विकसित बनाने का संकल्प भी प्रधानमंत्री ने दोहराया। उन्होंने कहा, “सभी सांसदों को अधिकाधिक समय मिले, उमंग और उत्साह के वातावरण में मिले। रोने-धोने के लिए बहुत समय होता है, करते रहिए। जीवन में कुछ पल ऐसे होते हैं जो उमंग और विश्वास भर देते हैं। मैं आशा करता हूँ कि पुरानी बुराइयों को छोड़ कर और उत्तम से उत्तम अच्छाइयों को साथ लेकर नए संसद भवन में प्रवेश करेंगे।”

प्रधानमंत्री ने गणेश चतुर्थी का संदर्भ देते हुए बताया कि गणेश जी विघ्नहर्ता माने जाते हैं इसलिए भारत की विकास यात्रा में कोई विघ्न नहीं रहेगा। गणेश चतुर्थी के दिन यह प्रस्थान नव भारत के सभी सपनों को चरितार्थ करने वाला बनेगा। उल्लेखनीय है कि नए संसद भवन में कामकाज गणेश चतुर्थी पर 19 सितंबर से शुरू होगा।

मणिपुर में छुट्टी पर आए भारतीय सेना के जवान की हत्या, कनपटी पर बन्दूक रख 3 अज्ञात लोगों ने किया था अपहरण

मणिपुर में छुट्टी पर आए भारतीय सेना के एक जवान 41 वर्षीय सर्टो थांगथांग कॉम, जो रक्षा सेवा कोर (डीएससी) में थे, की हत्या कर दी गई है। भारतीय सेना के एक जवान कॉम की अज्ञात लोगों ने अपहरण कर लिया था और बाद में उनकी हत्या कर दी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मणिपुर के लीमाखोंग मिलिट्री स्टेशन पर तैनात भारतीय सेना के जवान छुट्टी पर थे। इसी दौरान तारुंग, नेइकानलोंग, हैप्पी वैली,  इंफाल में उनके घर से अपहरण किए जाने के एक दिन बाद घर से लगभग 14 किलोमीटर दूर अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी।

वहीं इस मामले में अधिकारियों ने बताया कि रविवार (17 सितम्बर, 2023) को मणिपुर के इंफाल पूर्वी जिले के सोगोलमांग पुलिस स्टेशन के तहत आने वाले मोंगजाम के खुनिंगथेक गाँव में भारतीय सेना के एक जवान का शव मिला। जिनकी पहचान कांगपोकपी जिले के लीमाखोंग में सेना की रक्षा सुरक्षा कोर (डीएससी) प्लाटून के सिपाही सेर्टो थांगथांग कॉम के रूप में की गई। शव की पहचान की पुष्टि उनके भाई और बहनोई ने की है। जिन्होंने कहा कि सैनिक की हत्या उसके सिर में एक ही गोली मारकर की गई थी। वहीं लोकल पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। 

रक्षा मंत्रालय, नागालैंड, मणिपुर और शेष अरुणाचल प्रदेश के जनसंपर्क अधिकारी (पीआरओ) और प्रवक्ता ने भी इस मामले में जानकारी देते हुए सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, “एक भारतीय सेना के सिपाही सर्टो थांगथांग कॉम (41) का 3 अज्ञात बदमाशों द्वारा अपहरण कर लिया गया और बाद में उनकी हत्या कर दी गई, जब वे तारुंग, हैप्पी वैली, इम्फाल पश्चिम में छुट्टी पर थे। वह डीएससी प्लाटून, लीमाखोंग, मणिपुर में तैनात थे। वहीं उनकी पत्नी और 2 बच्चे जीवित हैं।”

अधिकारियों के मुताबिक, अज्ञात हथियारबंद लोगों ने शनिवार (16 सितम्बर, 2023) की सुबह करीब 10 बजे छुट्टी पर आए सिपाही कॉम का उनके घर से अपहरण कर लिया। जिसके बाद सिपाही की तलाश लोकल पुलिस और सेना लगातार कर रही थी। 

वहीं कॉम के 10 साल के बेटे के बयान के मुताबिक जो इस पूरे घटना का गवाह भी है, उसने बताया कि अचानक तीन बदमाश घर में घुस आए, उस वक़्त सिपाही सर्टो थांगथांग घर के बरामदे पर बैठ कर उससे बातचीत कर रहे थे। अचानक उनके पिता के सिर पर पिस्तौल रख कर उन्हें जबरन एक सफेद रंग की गाड़ी में बैठा लिया और अपने साथ लेकर चले गए। 

सेना से मिली जानकारी के अनुसार, सैनिक के परिवार में उनकी पत्नी, एक बेटी और एक बेटा है। वहीं सेना ने जानकारी देते हुए बताया कि अंतिम संस्कार परिवार की इच्छा के अनुसार किया जाएगा। सेना ने शोक संतप्त परिवार की हरसंभव सहायता के लिए एक टीम दिल्ली से भेजी गई है। सेना ने एक बयान जारी करके कहा है कि वह इस हत्याकांड की कड़ी निंदा करती है और इस कठिन समय में उनके परिवार के साथ खड़ी है। 

PM मोदी को हिंदू क्रिकेटर ने दी शुभकामना, कॉन्ग्रेसी ‘पिद्दी’ को हुआ अपच: ‘पप्पू’ के चमचे को मिला ‘अखंड भारत’ वाला जवाब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रविवार (17 सितंबर 2023) को जन्मदिन था। उन्हें दुनिया भर से शुभकामना संदेश मिले। पाकिस्तान के हिन्दू क्रिकेटर दानिश कनेरिया ने भी पीएम मोदी को बर्थ डे विश करते हुए X/ट्विटर पर पोस्ट किया। लेकिन कॉन्ग्रेसी ट्रोल को यह पसंद नहीं आया।

पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर कनेरिया ने अपने पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भारत का रखवाला बताया था। उन्होंने लिखा, “भारत के रखवाले, भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ। पीएम मोदी ने साबित कर दिया है कि भारत दुनिया का नेतृत्व कर सकता है। आज पूरी दुनिया “वसुधैव कुटुंबकम्” की बात कर रही है। मैं भगवान राम से उनके अच्छे स्वास्थ्य और सफलता के लिए प्रार्थना करता हूँ।”

दानिशा कनेरिया का यह संदेश पाकिस्तानियों सहित लेफ्ट-लिबरल लॉबी को चुभ गया। कई लोग उनकी आलोचना करने लगे। ऐसा ही डॉ निम्मो यादव (@niiravmodi) नाम के एक्स हैंडल ने भी किया। यह एक पैरोडी अकाउंट है और सोशल मीडिया में कॉन्ग्रेसी ट्रोल के तौर पर जाना जाता है।

डॉ निम्मो यादव नामक हैंडल ने कनेरिया के पोस्ट पर तंज करते हुए लिखा, “हमारे निजी मामले में हस्तक्षेप न करें दानिश कनेरिया। हम नहीं चाहते कि कोई पाकिस्तानी हमारे प्रिय प्रधानमंत्री के बारे में एक भी शब्द कहे।”

इसके जवाब में दानिश कनेरिया ने लिखा, “काबुल से कामरूप तक, गिलगित से रामेश्वरम तक, हम एक हैं। लेकिन अगर पिद्दी नहीं समझेगा तो मैं क्या कर सकता हूँ। इसलिए, अपनी सलाह पप्पू के घर पर रखें।” उल्लेखनीय है कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी के कुत्ते का नाम पिद्दी है।

इसके बाद डॉ निम्मो ने पोस्ट कर कहा, “तुम पाकिस्तानी हो, हमारे लिए आप हमेशा पाकिस्तानी ही रहोगे। तुम आईएसआई एजेंट हो। तुम भक्तों को मूर्ख बना सकते हो लेकिन मेरे जैसे कट्टर राष्ट्रवादी और देशभक्त को नहीं! यदि तुम आईएसआई एजेंट नहीं हो तो बस ‘हिंदुस्तान जिंदाबाद और पाकिस्तान मुर्दाबाद’ कहो। तुम्हारे यह कहने का इंतजार है दानिश।” 

दस साल तक पाकिस्तान के लिए क्रिकेट खेल चुके हैं कनेरिया

गौरतलब है कि पाकिस्तान के लिए क्रिकेट खेलने वाले दानिश कनेरिया आखिरी हिंदू क्रिकेटर हैं। उनके बाद से किसी हिंदू क्रिकेटर को पाकिस्तान के इंटरनेशनल टीम में डेब्यू करने का मौका नहीं मिला है। हिन्दू होने के नाते दानिश अक्सर हिंदू त्योहारों पर पोस्ट करते रहते हैं। 

बता दें कि दानिश कनेरिया ने साल 2000 और 2010 के बीच पाकिस्तान के लिए क्रिकेट खेला और देश के सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले स्पिनर के रूप में अपना करियर समाप्त किया। बाद में उन पर स्पॉट फिक्सिंग मामले में इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड ने उन पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया था। उनके क्रिकेट में कई महान रिकॉर्ड्स हैं। वहीं उन्होंने अपनी टीम के साथियों पर खराब व्यवहार और बदतमीजी के आरोप भी लगाए थे।

जिसने बनाया Google, एलन मस्क की वजह से हुआ उसका तलाक! रिपोर्ट में दावा – दुनिया के सबसे अमीर शख्स से था बीवी का लव अफेयर, दोनों ने संबंध भी बनाए

सर्च इंजिन ‘Google’ के सह-संस्थापक सर्गेई ब्रिन और उनकी पत्नी निकोल शनाहन के बीच तलाक हो गया है। दोनों ने 26 मई, 2023 को तलाक दिया था। लेकिन, इसके दस्तावेज अब सामने आए हैं। दावा किया जा रहा है कि निकोल शनाहन का दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलन मस्क के साथ अफेयर की खबर के बाद तलाक हुआ है।

‘बिजनेस इनसाइडर’ ने रिपोर्ट में दावा किया है कि अपने रिश्तों में मतभेद की बात कहते हुए सर्गेई ब्रिन ने जनवरी 2022 में तलाक के लिए कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। लेकिन, साल 2021 में निकोल शनाहन के एलन मस्क से अफेयर की खबर सामने आने के बाद दोनों अलग रह रहे थे। हालाँकि अब आधिकारिक तौर पर अलग हो गए हैं।

ब्रिन और शनाहन साल 2015 से एक-दूसरे को डेट कर रहे थे। शनाहन कि प्रेग्नेंट होने के बाद साल 2018 में दोनों ने शादी कर ली थी। शादी के दो सप्ताह बाद ही शनाहन ने एक लड़की को जन्म दिया। उनकी बेटी की उम्र अब 4 साल है, जिसकी दोनों के पास जॉइंट कस्टडी रहेगी।

बता दें कि वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अपनी रिपोर्ट में एलन मस्क और निकोल शनाहन के संबंधों को लेकर दावे किए थे। यह भी दावा था कि मस्क और शनाहन ने आपस में संबंध बनाए थे। इसके अलावा ‘डेली मेल’ ने भी अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि दिसंबर 2021 में आयोजित हुए मियामी एक आर्ट इवेंट में एलन मस्क और निकोल शनाहन एक दूसरे के करीब आ गए थे। लेकिन, फिर दोनों अलग हो गए।

शनाहन के साथ अफेयर की खबरें सामने आने के बाद एलन मस्क ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक बार लिखा था, “सर्गेई और मैं दोस्त हैं। कल रात पार्टी में साथ थे। मैं और निकोल बीते 3 साल में सिर्फ 3 बार ही मिले हैं। इन मुलाकातों के दौरान कई लोग साथ थे। कुछ भी रोमांटिक नहीं था।” इसके अलावा शनाहन भी मस्क के साथ अपने संबंधों के दावे खारिज कर चुकीं हैं।

गौरतलब है कि ‘न्यूयॉर्क पोस्ट’ ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया था कि शनाहन के साथ अफेयर की खबरें सामने आने के बाद एलन मस्क ने घुटने पर बैठकर ब्रिन से माफी माँगी थी। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया था कि माफी माँगने के बाद ब्रिन और मस्क के बीच संबंध सुधरे नहीं हैं। यानी कि दोनों की दोस्ती भी टूट चुकी है।

अभिनेत्री ज़रीन खान के खिलाफ कोर्ट ने जारी किया गिरफ़्तारी का वॉरंट: आरोप – पैसा ले लिया लेकिन नहीं आई नाचने

बॉलीवुड एक्ट्रेस और ‘कैरेक्टर ढीला’ गाने पर परफॉर्म करके स्टारडम हासिल करने वाली ज़रीन खान के खिलाफ कोलकाता में गिरफ्तारी वॉरंट जारी हुआ है। उन पर धोखाधड़ी के आरोप लगे हैं। हालाँकि, ज़रीन खान ने कहा है कि उन्हें इस मामले के बारे में कुछ पता नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर मीडिया को कोई जानकारी चाहिए, तो वो उनकी PR टीम से संपर्क करे। अभिनेत्री ने बताया कि फिलहाल वो अपने वकील से संपर्क कर रही हैं कि कैसे गिरफ्तारी से बचा जाए।

साल 2018 का है मामला

जानकारी के मुताबिक, ये मामला साल 2018 का है। उन्होंने कोलकाता के दुर्गा पूजा के दौरान आयोजित किए गए एक कार्यक्रम में नाचने के लिए पैसा लिया था। लोग कार्यक्रम में उनका इंतजार कर रहे थे, लेकिन वो आईं ही नहीं। आयोजकों ने इस मामले में ज़रीन खान की शिकायत की थी, जिसमें कई तारीखों पर उनकी हाजिरी के लिए नोटिस जारी किया गया था। लेकिन, वो किसी भी तारीख पर नहीं पेश हुईं। इसके बाद कोर्ट ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट जारी किया है।

सियालदाह कोर्ट में चार्जशीट दाखिल

इस मामले में जांच अधिकारी ने चार्जशीट कोलकाता के सियालदाह कोर्ट को सौंप दी है। बताया जा रहा है कि पिछले 5-6 सालों में ज़रीन खान ने किसी भी नोटिस का जवाब नहीं दिया और न ही खुद कभी कोर्ट में आई। यही नहीं, उन्होंने कभी बेल के लिए भी याचिका नहीं दी। इस बारे में जब ज़रीन खान से मीडिया ने सवाल पूछा तो उन्होंने एकदम अनजान की तरह ही जवाब दिया। उन्होंने कहा कि मुझे इस मामले की कोई जानकारी नहीं है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले में उनका मैनेजर बेल ले चुका है, लेकिन ज़रीन ने अभी तक कोई बेल के लिए अप्लाई तक नहीं किया।

छोटे-मोटे कार्यक्रम की वजह से नहीं गई थी जरीन!

पुलिस के मुताबिक, ज़रीन खान और उनके मैनेजर दोनों की आयोजकों से बातचीत हुई थी। ज़रीन खान और उनके मैनेजर को बताया गया कि ये बड़ा कार्यक्रम होगा, जिसमें पश्चिम बंगाल सरकार के बड़े मंत्री और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी शामिल होंगी, लेकिन ये कार्यक्रम छोटा सा निकला। इसकी वजह से लोग इंतजार करते रह गए, लेकिन वो कार्यक्रम में आई ही नहीं। उन्होंने भी इस मामले में आयोजकों के खिलाफ काउंटर एफआईआर दर्ज कराई है।

अभिनेत्री का शोषण, फिल्म शूट करने गई थी बांग्लादेश: TMC नेता हैं सयंतिका बनर्जी, डायरेक्टर कमरुल और प्रोड्यूसर मनिरुल ने भी दिया आरोपित का साथ

तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) नेता और बांग्ला फिल्म इंडस्ट्री की अभिनेत्री सायंतिका बनर्जी ने बांग्लादेश में शोषण का आरोप लगाया है। वो बांग्लादेशी फिल्म ‘छायाबाज’ की शूटिंग के लिए कॉक्स बाजार इलाके में थीं। आरोप है कि यहीं पर एक कोरियोग्राफर ने उन्हें गलत तरीके से लगातार छुआ। उन्होंने आपत्ति जताई, तो प्रोड्यूसर और डायरेक्टर ने उनका साथ नहीं दिया, बल्कि उसी कोरियोग्राफर के साथ काम करने का दबाव डाला। इसके बाद वो बांग्लादेश से बिना शूटिंग पूरी किए ही वापस कोलकाता लौट आईं।

कोरियोग्राफर पर गंभीर आरोप

इस मामले में कुछ समय से चर्चाएँ चल रही थीं, लेकिन उन्होंने अब मीडिया से बातचीत में इस पूरे मामले का खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि कोरियोग्राफर माइकल ने उन्हें कई बात गलत तरीके से छुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि कोरियोग्राफर ने उन्हें धमकाया भी। इस मामले में उन्होंने फिल्म के प्रोड्यूसर पर भी सहयोग न करने का आरोप लगाया और इसी लिए उन्होंने फिल्म के निर्माता से भी संपर्क करने की कोशिश की। लेकिन, उन्होंने कहा कि कोरियोग्राफर के साथ ही काम करना पड़ेगा। इसके बाद वो बांग्लादेश से वापस लौट आईं।

जायद खान के साथ लीड रोल में सायंतिका

सायंतिका बनर्जी बांग्लादेशी अभिनेता जायद खान के साथ दो फिल्मों में काम करने के लिए बांग्लादेश में थीं। जिस फिल्म की बात हो रही है, उसके डायरेक्टर का नाम ताजू कमरुल है। इस फिल्म के प्रोड्यूसर मनिरुल इस्लाम ने भी इस मामले में सायंतिका की कोई मदद नहीं की। सायंतिका ने कहा कि वो इंडस्ट्री में मौजूद ऐसी चीजों को बाहर लाना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि इस फिल्म में पहले कोई और कोरियोग्राफर था, लेकिन बाद में माइकल को जोड़ा गया।

इस घटना ने भारत और बांग्लादेश दोनों में रहने वाले उनके प्रशंसकों को हैरान कर दिया है। लोगों ने सोशल मीडिया पर उनके लिए न्याय माँगा है। बता दें कि सायंकिता बांग्ला सिने की मशहूर एक्ट्रेस हैं। उन्होंने साल 2021 में राजनीति में कदम रखा था। उन्हें टीएमसी में पदाधिकारी भी बनाया गया था।

घायल राजकुमार अग्रहरि को इस्लामी भीड़ ने पुलिस जीप से निकाला, मार डाला… 16 साल बाद धराया गोरखपुर दंगों का मास्टमाइंड शमीम, तब CM योगी को भी जाना पड़ा था जेल

उत्तर प्रदेश पुलिस ने गोरखपुर में साल 2007 में हुए दंगों के मुख्य अपराधी मोहम्मद शमीम को गिरफ्तार किया है। वह पिछले 16 साल से फरार चल रहा था। इस बीच कोर्ट ने उसे आजीवन कारावास की सजा भी सुनाई थी। लेकिन, सुनवाई के दौरान वह एक भी बार कोर्ट में पेश नहीं हुआ। गोरखपुर में हुआ यह वही दंगा है, जिसमें सीएम योगी आदित्यनाथ की गिरफ्तारी हुई थी।

क्या है मामला

25 जनवरी, 2007 को गोरखपुर में मुहर्रम जुलूस निकल रहा था। इस दौरान नसीराबाद की मीनारा मस्जिद के पास राजकुमार अग्रहरी नामक युवक खड़ा हुआ था। मुहर्रम जुलूस में शामिल मोहम्मद शमीम से उसका किसी बात को लेकर विवाद हुआ। इसके बाद शमीम और उसके अब्बा शफीउल्लाह समेत जुलूस में शामिल इस्लामी भीड़ ने गालियाँ देते हुए उस पर हमला बोल दिया। इस हमले में राजकुमार बुरी तरह से घायल हो गया।

मौके पर पहुँची पुलिस घायल राजकुमार अग्रहरी को अपनी जीप में डालकर हॉस्पिटल की ओर ले जा रही थी। इसी दौरान इस्लामी भीड़ ने राजकुमार को पुलिस की जीप से खींच लिया और उस पर चाकू, तलवार से ताबड़तोड़ वार किए। पहले से ही घायल राजकुमार इस्लामवादियों की चाकू और तलवार के वार सह नहीं पाए और उनकी मौत हो गई। मुहर्रम जुलूस के दौरान हुई इस हत्या के बाद गोरखपुर में दंगे भड़क गए।

बेटे की हत्या के बाद राजकुमार के पिता ने मोहम्मद शमीम और उसके अब्बा शफीउल्लाह समेत अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। इसके बाद पुलिस ने आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। लेकिन, कोर्ट ने 16 अगस्त, 2007 को मोहम्मद शमीम को जमानत दे दी। जमानत मिलते ही वह फरार हो गया। इसके बाद कोर्ट ने उसके खिलाफ कई बार गैर-जमानती वारंट जारी किए। लेकिन, वह कोर्ट में हाजिर नहीं हुआ।

साल 2012 में कोर्ट ने मोहम्मद शमीम और उसके अब्बा शफीउल्लाह को आजीवन कारावास की सजा सुना दी। शफीउल्लाह पहले से ही जेल में था, लेकिन शमीम फरार होकर चेन्नई चला गया था। अब वह वापस लौटा तो अपने परिवार के साथ न रहकर किराए के मकान में रह रहा था। इसकी जानकारी मिलते ही पुलिस ने उसे 12 सितंबर को गिरफ्तार कर लिया।

जब संसद में फूट-फूट कर रोए योगी आदित्यनाथ

मुहर्रम जुलूस के दौरान हुई हिंदू युवक की हत्या को लेकर गोरखपुर में दंगे भड़क गए थे। जब गोरखपुर हिंसा की आग में जल रहा था, तब गोरखपुर के तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ कुशीनगर में थे। हत्या की जानकारी मिलते ही उन्होंने वहीं से धरना-प्रदर्शन करने का आह्वान कर दिया। उनके आह्वान के बाद भाजपा के कई नेता गोलघर के चेतना तिराहे में धरने पर बैठ गए। योगी आदित्यनाथ भी इस कार्यक्रम में शामिल होने आ रहे थे।

इसकी जानकारी मिलते ही सूबे के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने अधिकारियों को योगी आदित्यनाथ को गिरफ्तार करने के निर्देश दे दिए। अधिकारियों ने उनकी गिरफ्तारी के लिए पूरे इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। योगी आदित्यनाथ की गिरफ्तारी की जानकारी लगते ही शहर में भीड़ उमड़ पड़ी। पुलिस लाइंस से योगी को जेल ले जाने में 8 घण्टे का समय लग गया। जबकि दूरी महज 4 किमी ही थी।

इसके बाद गोरखपुर में दंगे और तेज गए। जगह-जगह आगजनी और हिंसा की खबरें आने लगीं। पूरे शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया। हिंदू व्यक्ति की हत्या और योगी आदित्यनाथ की गिरफ्तारी के विरोध व्यापारियों ने अपनी दुकानें बंद कर दीं। गिरफ्तारी के 11 दिन बाद 7 फरवरी, 2007 को जब योगी को जेल से रिहा किया गया, तब ही गोरखपुर में दुकानें खुलीं। दंगों का यह मुद्दा 12 मार्च, 2007 को संसद में उठा। इस दौरान योगी आदित्यनाथ ने मुलायम सिंह पर पूर्वाग्रह के तहत गिरफ्तार करने और प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। इस दौरान वह संसद में रो पड़े थे।

श्रीलंका के ग्राउंड कर्मचारियों को मिलेंगे ₹42 लाख, एशिया कप में भारत की जीत के बाद जय शाह का ऐलान: कुलदीप यादव बने ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज’

एशिया कप में भारत द्वारा श्रींलका पर शानदार जीत के बीच BCCI के सचिव जय शाह ने श्रीलंका के क्रिकेट मैदानों में काम करने वाले स्टाफ और पिच क्यूरेटर्स को 50,000 डॉलर की धनराशि देने की घोषणा की है। जय शाह ने यह ऐलान ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर किया। भारतीय रुपयों में देखा जाए तो यह धनराशि लगभग 42 लाख होगी।

गौरतलब है कि इस बार एशिया कप हाइब्रिड मोड में आयोजित किया गया था, इसके अंतर्गत भारत के मैच श्रीलंका में आयोजित किए गए थे। भारत के सभी मैचों पर इस बार बारिश का साया रहा है लेकिन ग्राउंडस्टाफ की मेहनत की वजह से कोई भी मैच रद्द नहीं हुआ इसलिए उनकी जमकर प्रशंसा की गई।

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण मैच भारत-पाकिस्तान का सुपर फोर स्टेज का मैच रहा। इस मैच में पहले दिन बारिश के कारण खेल रोकना पड़ा और ग्राउंड स्टाफ ने कड़ी मेहनत से कई बार पिच को ढँका और खेल के लायक बनाया। अगले दिन भी भारी बारिश के बावजूद ग्राउंडस्टाफ ने स्थितियों को सामान्य करते हुए मैच को संभव बनाया और भारत को जीत हासिल हुई।

एशिया कप के लिए मैदान को सही करते ग्राउंडस्टाफ
एशिया कप के लिए मैदान को सही करते ग्राउंडस्टाफ

भारत पाकिस्तान के अलावा भारत-श्रीलंका के बीच होने वाले एशिया कप के फाइनल में भी बारिश हुई जिसके कारण मैच देरी से चालू हुआ। मैच पर बारिश का प्रभाव होने के बावजूद मैदान और पिच को ग्राउंडस्टाफ ने इसे खेलने लायक बनाया। श्रीलंका के ग्राउंडस्टाफ की इसी मेहनत को देखते हुए ही BCCI के सचिव और एशियन क्रिकेट काउंसिल के अध्यक्ष जय शाह ने उन्हें पुरस्कार दिया है।

पुरस्कार के अतिरिक्त, भारत के कप्तान रोहित शर्मा ने भी अपने इन्स्टाग्राम अकाउंट पर ग्राउंडस्टाफ की तारीफ की थी। जय शाह के इस कदम पर कई भारतीय ट्विटर हैंडलों ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों के मजे भी लिए। एक सटायर हैंडल ने पाकिस्तानी खिलाड़ी फखर जमान की एक फोटो डालते हुए लिखा कि अब जब पैसों का ऐलान हो गया है तो वह वापस श्रीलंका जा रहे हैं। दरअसल, फखर ने ग्राउंडस्टाफ की मैदान के कवर खींचने में सहायता की थी।

वहीं, भारत ने श्रीलंका पर रिकॉर्ड 10 विकेट से जीत हासिल करते हुए 51 रनों का लक्ष्य मात्र 6 ओवर में हासिल कर लिया। इससे पहले मुहम्मद सिराज और हार्दिक पांड्या की बोलिंग के कारण श्रीलंका मात्र 50 रनों पर आल आउट हो गया था। इसमें ‘प्लेयर ऑफ़ द मैच’ मोहम्मद सिराज तथा ‘प्लेयर ऑफ द सीरिज’ कुलदीप यादव को घोषित किया गया है।

भारत ने आठ बार एशिया कप जीत लिया है। अब भारत 22 सितम्बर से ऑस्ट्रेलिया से द्विपक्षीय सीरीज खेलने वाला है।

नहीं, फेल नहीं हुआ है भारत का ‘प्रोजेक्ट चीता’… दक्षिण अफ्रीका को भी कमाल दिखाने में लग गए थे 20 साल, हम भी हो रहे हैं कामयाब: जानिए 1 साल में क्या-क्या बदलाव

वर्ष 2022 में अपने जन्मदिन के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नामीबिया से लाए गए चीतों को मध्य प्रदेश स्थित कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा था। तब मीडिया और सोशल मीडिया में ये बड़ी बहस का मुद्दा बना था। जहाँ विपक्षी पार्टी कॉन्ग्रेस ने इसका श्रेय लूटने की कोशिश की, वहीं लिबरल-वामपंथी गिरोह के पत्रकारों ने इसे गैर-ज़रूरी बता दिया। उन चीतों में से 9 की अब तक मौत हो चुकी है, जिनमें से 6 वयस्क थे और 3 शिशु। इसके बाद ये नैरेटिव चलाया जाने लगा कि ‘प्रोजेक्ट चीता’ फेल हो गया है।

चीतों को नामीबिया से लाए जाने के समय जो लोग आलोचना कर रहे थे, उन्हें मौका मिल गया। इस साल विभिन्न बीमारियों के कारण चीतों की मौत का सिलसिला सा चल पड़ा। वहीं नामीबिया से जब और चीते मँगाए जाने की खबर आई तो लोग मीम बना कर मजाक उड़ाने लगे। वहीं कइयों ने निष्कर्ष निकाल लिया कि भारत का मौसम और वातावरण ही उनके लिए ठीक नहीं है। भारत जैसे विशाल देश में जहाँ नदी, पहाड़, पत्थर जंगल, समुद्र और मैदान सब कुछ हैं – वहाँ इस तरह की बातें बचकानी हैं।

‘प्रोजेक्ट चीता’: विशेषज्ञों की निगरानी में हो रहा है काम

वो 17 सितंबर, 2022 का दिन था, जब जंगली जीवों के संरक्षण के क्रम में भारत ने देश में फिर से चीतों की जनसंख्या बढ़ाने का निर्णय लिया। चीते भारत से विलुप्त हो चुके थे। ये आज नहीं, बल्कि चीतों को दोबारा लाए जाने से 75 साल पहले हो हो गया था। चीता को धरती पर सबसे तेज़ दौड़ने वाला जानवर कहा जाता है। चीते 100 किलोमीटर प्रति घंटा से भी अधिक की रफ़्तार से दौड़ सकते थे। साथ ही वो दौड़ते-दौड़ते तुरंत रफ़्तार बढ़ाने की क्षमता के भी धनी होते हैं।

भारत ने चीते इसीलिए नहीं लाए ताकि देश ये कह सके कि हमारे पास चीते हैं। बल्कि चीतों के संरक्षण के साथ-साथ उनकी जनसंख्या बढ़ाने के लिए ऐसा किया गया। उन्हें प्राकृतिक खजाने के रूप में समझा गया। इस कार्यक्रम के तहत नामीबिया से 8 और फिर फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते लाए गए। कुल 20 चीते कूनो नेशनल पार्क में छोड़े गए। ये भारत के लिए पहली अंतरमहाद्वीपीय ट्रांसलोकेशन की प्रक्रिया थी। ऐसा नहीं है कि आनन-फानन में चुनावों या दिखावे के लिए ये सब किया गया।

‘प्रोजेक्ट चीता’ की निगरानी करने वालों में सरकारी अधिकारियों के अलावा वैज्ञानिक, वन्यजीवन वैज्ञानिक और पशुओं के डॉक्टर भी शामिल हैं। न सिर्फ भारत, बल्कि नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका के विशेषज्ञों को भी इस प्रक्रिया में जोड़ा गया है। हर प्रक्रिया की सफलता का एक पैमाना होता है। ‘प्रोजेक्ट चीता’ की भी तात्कालिक, या यूँ कहें कि शॉर्ट टर्म सफलता के लिए 6 पैमाने तय किए गए थे, जिनमें से 4 पर ये परियोजना खरी उतरी है। पहले ही ये लक्ष्य रखा गया था कि लाए गए चीतों में 50% सर्वाइवल दर होना चाहिए।

इसमें ये परियोजना सफल रही है। दूसरा पैमाना था, ”होम रेंज की स्थापना करना। इकोलॉजी में जानवरों का ‘होम रेंज’ उसे कहते हैं, जहाँ वो स्वच्छंद होकर भोजन-पानी के लिए विचरण करते हैं और प्रजनन करते हैं। इसका अर्थ है, ये जानवर इसे अपना क्षेत्र समझने लगते हैं। इसके कैलकुलेशन का एक फॉर्मूला होता है, जो इकोलॉजिस्ट करते हैं। तीसरा उद्देश्य था – कूनो नेशनल पार्क में ये चीते प्रजनन करें। इसमें भी ‘प्रोजेक्ट चीता’ सफल रहा है और शिशु चीतों के जन्म हुए हैं।

चौथा फैक्टर है – आसपास के इलाके को फायदा पहुँचना। ये हुआ है। बहुत अच्छे से हुआ है। कूनो नेशनल पार्क में चीतों के आने के बाद शिवपुर और मोरेना जिलों के इलाकों में जमीन के दाम बढ़े हैं। चीतों को देखने के लिए कूनो नेशनल पार्क में पर्यटकों की संख्या बढ़ गई है। इससे पार्क के आसपास रहने वालों लोगों के व्यवसाय चमके हैं और उन्हें रोजगार मिला है। चीतों को ट्रैक करने के लिए भी स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार दिया गया है। जो लोग ‘प्रोजेक्ट चीता’ को असफल बता रहे हैं, वो इसकी चुनौतियों को कम कर के आँक रहे हैं।

कूनो नेशनल पार्क के आसपास जमीन के भाव काफी बढ़ गए हैं और निवेशक भी खूब आ रहे हैं। 9 चीतों की मौत के कारण तात्कालिक रूप से भले ही ये प्रक्रिया अब धीमी हो गई हो, लेकिन लॉन्ग टर्म में इससे फायदा होना ही है। रियल एस्टेट के दाम बढ़ने का अर्थ है कि निवेशक आ रहे हैं, कारोबार बढ़ रहा है। चीतों के आने की घोषणा के बाद से ही शिवपुर में जमीन के भाव 3 गुना बढ़ गए थे। शिवपुर जिला कुपोषण से पीड़ित था, ऐसे में वहाँ की अर्थव्यवस्था चमकने से जनता का फायदा है।

भारत में प्राचीन काल में मौजूद रहे हैं चीते, ये ‘विदेशी’ नहीं

एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप में जानवरों को लेकर आ ना और फिर उनका संरक्षण करना बच्चों का खेल नहीं है। ऐसा थोड़े है कि भारत चीतों का घर नहीं रहा है। गुजरात और मध्य प्रदेश की गुफाओं में जो पेंटिंग हैं वो बताते हैं कि प्राचीन काल में भी चीते यहाँ रहते थे बड़ी संख्या में। मुग़ल बादशाह चीतों को लेकर शिकार पर जाते थे। अंग्रेजों के काल में बड़े पैमाने पर उनका शिकार हुआ। 19वीं सदी में उनकी संख्या 10,000 थी लेकिन कुछ ही वर्षों बाद वो विलुप्त हो गए।

बताया जाता है कि भारत के अंतिम स्वदेशी चीते का शिकार छत्तीसगढ़ के कोरिया के महाराजा रामानुज प्रताप सिंह देव ने किया था। ये पूरी तरह मानव समाज की ही गलती थी कि एक दुर्लभ जीव विलुप्त ही हो गया। एक ऐसा जीव जिसकी फुर्ती और बहादुरी की मिसाल दी जाती है। उसी गलती को भारत सुधारने की कोशिश कर रहा है। 20 चीतों को स्थानांतरित किया गया और इस प्रक्रिया में एक भी मौत नहीं हुई, ये भी एक बड़ी बात थी। चीतों की मौतों की दुःखद खबर के बीच सकारात्मक खबरें भी हैं।

इन चीतों में से अधिकतर भारतीय वातावरण में खुद को ढालने में सक्षम हो रहे हैं, यानी वो अपनी सामान्य गतिविधियों में रुचि ले रहे हैं – शिकार करना, क्षेत्र में घूमना-फिरना, अपने शिकार को मारने के बाद भोजन की सुरक्षा करना, तेंदुए-लकड़बग्घों जैसे अन्य मांसाहारी जानवरों का पीछा करने या उनसे उलझने से बचना, जंगल में अपना क्षेत्र सुनिश्चित करना, आपसी गुटबाजी में झगड़े करना, नर-मादा की जोड़ियाँ बनना, प्रजनन और मनुष्यों के साथ कोई टकराव न होना।

एक मादा चीते ने बच्चे को जन्म दिया तो कई रिकॉर्ड्स टूटे और 75 साल बाद ऐसा हुआ। 6 महीने का वो बच्चा अभी ठीक है, स्वस्थ है। उसका विकास भी ठीक से हो रहा है। ये बड़ी बात हमें नोट करने की आवश्यकता है कि अप्राकृतिक कारणों से चीतों की कोई मौतें नहीं हुई हैं, जैसे – शिकार, तस्करी, जाल में फँसना, ज़हर दिया जाना, दुर्घटना, आपसी झगड़ा। इन वजहों से कोई मौत नहीं हुई। स्थानीय लोग ‘प्रोजेक्ट चीता’ को लेकर सहयोग कर रहे हैं, इसीलिए ये संभव हो पाया है।

चीतों को लाए जाने का क्रम जारी रहेगा। सैकड़ों वर्षों में जो गलती हमने बार-बार कर के भारत को चीता विहीन कर डाला है, वो एक झटके में नहीं सुधरेगी। ये किसी चमत्कार से नहीं होगा। यही कारण है कि अगले 5 वर्षों तक अफ्रीका से चीतों को लाए जाने का सिलसिला जारी रहेगा। हर साल एक दर्जन चीते लाए जाएँगे। ये एक लंबी प्रक्रिया है। सिर्फ कूनो नेशनल पार्क ही नहीं, अन्य वैकल्पिक व्यवस्थाएँ भी विकसित की जा रही हैं। जैसे, मंदसौर-नीमच का ‘गाँधी सागर वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी’ और सागर, दमोह व नरसिंहपुर में स्थित ‘नौरादेही वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी’।

इसके लिए गाँधी सागर WLS में काम चल रहा है और इस साल के अंत तक क्वारंटाइन और अन्य व्यवस्थाओं को तैयार कर लिया जाएगा। चीतों को लेकर एक रिसर्च सेंटर और मैनेजमेंट ट्रेनिंग सेंटर भी बनेगा। यानी, ये प्रोजेक्ट लॉन्ग टर्म का लक्ष्य लेकर चलाया जा रहा है। भारत चीतों के संरक्षण में सफल होता है तो अन्य देश इसका अनुकरण करेंगे, भारतीय विशेषज्ञों की पूछ बढ़ेगी। कूनो स्थित सेसईपुरा में केंद्रीय और मध्य प्रदेश के वन्य जीवन मंत्रालयों के अधिकारी एक समारोह में भी शामिल हुए, जहाँ ‘प्रोजेक्ट चीता’ के 1 वर्ष पूरे होने पर ‘चीता मित्रों’ को प्रोत्साहित किया गया।

‘प्रोजेक्ट चीता’ के 1 साल: कूनो नेशनल पार्क में हुआ आयोजन

ये ‘चीता मित्र’ की चीतों की देखभाल कर रहे हैं और उन्हें समझने का प्रयास कर रहे हैं। हमें राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के प्रमुख और वन एवं पर्यावरण मंत्रालय में एडिशनल सेक्रेटरी SP यादव की एक बात पर गौर करना चाहिए। इससे उन लोगों को जवाब मिल जाएगा, जो ये कह रहे हैं कि चीते मर रहे हैं तो और चीते क्यों लाए जा रहे हैं, या फिर जो लोग चीतों का मीम बना कर लिख रहे हैं – “अब बख्श दो”। अगर भारत का वातावरण चीतों के लिए एकदम प्रतिकूल होता तो कोई भी विशेषज्ञ उन्हें यहाँ लाने की सलाह ही नहीं देता।

SP यादव ने बताया कि कैसे दक्षिण अफ्रीका की 9 कोशिशें विफल रहीं और 200 चीतों की मौतें हुईं, तब जाकर वो चीतों के संरक्षण में सफल हुआ। सोचिए, भारत में अभी से हाय-तौबा मचाई जा रही है। 20 साल लगे दक्षिण अफ्रीका को, तब जाकर उसने ये कर दिखाया। फ़िलहाल कूनो नेशनल पार्क में अफ्रीका से लाए गए 14 चीते और एक शिशु हैं। 3 शिशुओं की मौत अत्यधिक गर्मी के कारण हुई है। दक्षिण अफ़्रीकी विशेषज्ञों ने कम्युनिकेशन गैप को लेकर सवाल उठाया था, लेकिन यादव ने इसे नकारते हुए कहा है कि निगरानी सही तरीके से की जा रही है।

भारत ने ‘International Big Cat Alliance’ भी बनाया है, ऐसे में भारत के लिए ये प्रतिष्ठा का विषय भी है। अप्रैल 2023 में ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ के सफल 50 वर्ष पूरे होने पर इसकी घोषणा की गई। बाघ शेर, बर्फीले तेंदुए, तेंदुए, जैगुआर, पूमा और चीता – इन 7 कैट्स के संरक्षण के लिए ये अंतरराष्ट्रीय अलायंस बनाया गया। इसमें 97 देश शामिल हैं, जिनमें अधिकतर एशिया और अफ्रीका के हैं। भारत ने 100 मिलियन डॉलर के कोष की स्थापना के साथ ही इसकी शुरुआत की।

भारत की कंपनियाँ भी ‘प्रोजेक्ट चीता’ में सहयोग कर रही हैं। जैसे, ‘हीरो मोटोकॉर्प्स’ ने कर्मचारियों की सुविधा के लिए 50 मोटरबाइक दान में दिया। इससे जो फ्रंटलाइन कर्मचारी हैं, उनके आवागमन में सुविधा होगी और उनके समय की बचत भी होगी। वो तेजी से मूवमेंट कर सकेंगे। ‘प्रोजेक्ट चीता’ ने सिर्फ भविष्य के लिए सही है, बल्कि स्थानीय समुदायों को भी इससे फायदा होगा। इसीलिए, ये जारी रहना चाहिए। चीतों के मरने को लेकर जो लोग जश्न मनाते हुए कूद रहे हैं कि भारत की किरकिरी हो गई, उन्हें इसकी संवेदनशीलता का अंदाज़ा नहीं है।

इतनी जल्दी निष्कर्ष पर पहुँचना ठीक नहीं, भारत भी कर दिखाएगा

ऐसा नहीं है कि जो लोग आलोचना कर रहे उनमें छोटे स्तर के लोग ही शामिल हैं। भाजपा के ही सांसद वरुण गाँधी ने इसे क्रूरता करार देते हुए कहा कि ये असावधानी का सबसे बुरा प्रदर्शन है और हमें सिर्फ ‘स्थानीय पशु-पक्षियों’ के संरक्षण पर ध्यान देना चाहिए। इस दौरान वो शायद भूल गए कि चीते भारत के ‘स्थानीय’ पशु ही रहे हैं। ऐसा नहीं होता तो हिन्दू धर्मग्रंथों में उनका जिक्र नहीं होता। नवरात्री के दौरान लगभग हर घर में दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है।

ये तो हमें पता ही है कि देवी के 9 रूप बताए गए हैं, जिनमें तृतीया चंद्रघंटा है। उनका वाहन चिता ही वर्णित है। तस्वीरों में भी उन्हें चीते के साथ दिखाया जाता है। उन्हें असुरों का नाश करने वाली माना गया है, ऐसे में चीता जैसे फर्राटेदार, तेज, फुर्तीले, शक्तिशाली और शिकार में निपुण जानवर का उनका वाहन होना आश्चर्यजनक बात नहीं है। इससे पता चलता है कि सनातन में चीतों का महत्व है और भारत में उनकी अच्छी-खासी संख्या में मौजूदगी रही है। इसी तरह, अन्य प्राचीन ग्रंथों में भी चीता का वर्णन है।

जो भारत के वन्य कर्मचारी हैं, वो भी सीखते-सीखते ही सीखेंगे। प्रशिक्षण अलग बात है, अनुभव अलग। अभी कुछ चीतों को क्वारंटाइन में ही रखा गया है, जिन्हें चरणबद्ध तरीकों से रिलीज किया जाएगा। अफ्रीका से जो चीते लाए जा रहे हैं, उनमें पहले से भी कोई बीमारी हो सकती है जो बाद में पता चले। पहले चीते की मौत जिस रोग से हुई, वो उसे वहीं पनपा था। अधिकारियों और विशेषज्ञों ने एक्शन प्लान भी तैयार किया है। आने वाले चीतों और मौजूदा चीतों को उसी हिसाब से रिलीज किया जाएगा।

स्टैंडअप कॉमेडी के नाम पर परोसा झूठ पर झूठ, बटोरी सहानुभूति: मोदी विरोधी कॉमेडियन हसन मिन्हाज की खुली पोल, बेटी को लेकर भी गढ़ दी फर्जी कहानी

अमेरिकन कॉमेडियन “पैट्रियट एक्ट” और “द डेली शो” के पूर्व होस्ट हसन मिन्हाज ने “द किंग्स जस्टर” सहित अपने पिछले स्टैंड-अप शो में भावनात्मक सच के नाम पर झूठ परोसा है। हालाँकि, ये शो नेटफ्लिक्स पर टॉप रेटेड हैं। दरअसल, हसन-मिन्हाज ने हाल ही में द न्यू यॉर्कर में छपी एक रिपोर्ट में यह स्वीकार किया है कि मैंने कॉमेडी के नाम पर जो भी बोला वो सब सच नहीं था। चाहे वो नस्लीय भेदभाव की बात हो, एंथ्रेक्स स्टोरी, बेटी के हॉस्पिटल में एडमिट होने की सब फेक है जिसे बस सहानुभूति और पब्लिक अटेंशन के लिए कंटेंट के रूप में इस्तेमाल कर दर्शकों को सच के नाम पर बेवकूफ बनाया गया।

द न्यू यॉर्कर में क्लेयर मेलोन की एक रिपोर्ट में मिन्हाज ने स्वीकार किया है कि उन्होंने अपनी स्टैंड-अप कहानियों में दर्शकों के साथ ऐसे कई किस्से साझा किए हैं। जो तथ्यात्मक रूप से सच नहीं है, बल्कि अपनी लोकप्रियता, कंटेंट और एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए जोड़-तोड़ और झूठ के सहारे परोसा गया है। अभी तक जिन कहानियों और कटाक्ष को लोग सच मान रहे थे। वही इस नए खुलासे के बाद लोग खुद को ठगे हुए महसूस कर रहे हैं और अब सोशल मीडिया पर मिन्हाज को खरी-खोटी सुना रहे हैं।

एक यूजर ने लिखा, “जब मैंने पहली बार आज का हसन मिन्हाज पर आर्टिकल देखी तो दिमाग चकरा गया क्योंकि हम सभी मंच के लिए कहानियों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं और एडिट करते हैं, लेकिन इसे पढ़ने के बाद मैं वास्तव में भौचक्का रह  गया, दरअसल, यह सायकोटिक व्यवहार है और यह स्टैंडअप कॉमेडी के पूरे उद्देश्य को ही विफल कर देता है।”

रिपोर्ट में, मिन्हाज ने खुद ही खुलासा किया है कि उनकी हास्य शैली में 70% बातें भावनात्मक होती हैं जिसका अर्थ है कि ये घटनाएँ किसी न किसी रूप में घटित हुई हैं, लेकिन उनकी नहीं है और शेष 30% अतिशयोक्ति और कल्पना का मिश्रण है। कुल मिलाकर जिसे वो भावनात्मक सच कह रहे हैं वह भी उनकी न होकर किसी और की है।

मिन्हाज ने इसी रिपोर्ट में कबूल किया है, “मेरी शैली की हर कहानी सच्चाई के इर्द-गिर्द बुनी गई है। मेरी कॉमेडी अर्नोल्ड पामर सत्तर प्रतिशत ‘भावनात्मक सच्चाई’ है और फिर तीस प्रतिशत अतिशयोक्ति, कल्पना है।” एक तरह से, मिन्हाज ने अपनी कहानियों में अपने श्रोताओं के सामने सीधे-सीधे झूठ परोसने का खुद ही दावा किया है और इसे “भावनात्मक सच्चाई” के नाम पर उचित ठहराने की कोशिश की है। 

मेलोन ने मिन्हाज को उनके स्टेज शो की याद दिलाते हुए कहा भी है, “भावनात्मक सच्चाई पहले है। तथ्यात्मक सच्चाई बाद में है।” दूसरे शब्दों में कहें तो झूठ ज़्यादा और सच बहुत कम है। 

आपको याद होगा हसन ने अपने शो “द किंग्स जस्टर” में एक दर्दनाक घटना शेयर की थी जिसमें एक रहस्यमय सफेद पदार्थ वाले एक लिफाफे का जिक्र था जो उनके घर पर आया था। जिसको देखकर उनका शुरुआती डर यह था कि यह एंथ्रेक्स हो सकता है। जैसा कि कॉमेडियन हसन मिन्हाज ने अपने विशेष कार्यक्रम के दौरान बताया था। इसी शो में उन्होंने यह भी कहा वह सफ़ेद पाउडर गलती से उनकी बेटी पर गिर गया, जिससे बाद उन्हें हॉस्पिटल जाना पड़ा था। मिन्हाज ने शो में कहा था कि उन्हें तब राहत मिली, जब डॉक्टर ने पुष्टि की कि यह एंथ्रेक्स नहीं है।

अब उसी मिन्हाज ने द न्यू यॉर्कर की रिपोर्ट में कबूल किया है कि उनकी बेटी कभी भी किसी सफेद पाउडर के संपर्क में नहीं आई थी या उसे अस्पताल में भर्ती कराने की आवश्यकता जैसी कोई बात नहीं थी।

इतना ही नहीं एक हास्य अभिनेता के रूप में, मिन्हाज ने नस्लीय भेदभाव का शिकार होने का भी रोना रोया है। उनकी कहानियों में से एक में एक लड़की द्वारा उन्हें एक प्रोग्राम में शामिल होने से मना कर दिया गया था। तब मिन्हाज ने आरोप लगाया था कि इसकी वजह था उनका ब्राउन होना था। लेकिन अब यह सामने आ गया है कि यह सब एक झूठ था।

मिन्हाज के कबूलनामे पर भड़के लोग 

जाहिर है, मिन्हाज के हजारों प्रशंसक और दर्शक जो अब तक कॉमेडी के नाम पर उनकी कहानियों को सच मान रहे थे अब ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। इस खुलासे के बाद हसन मिन्हाज ज़बरदस्त तरीके से ट्रोल किया जा रहा है।

गब्बर नाम के एक यूजर ने पोस्ट किया, “स्टैंड अप कॉमेडियन हसन मिन्हाज ने सहानुभूति बटोरने के लिए अपने खिलाफ नस्लवाद की कहानियाँ गढ़ी। यहाँ तक ​​कि अपनी छोटी बेटी का भी इस्तेमाल किया। ये सब धोखेबाज हैं। ऐसे धोखाधड़ी करने वाले या तो उजागर हो चुके हैं, या उजागर होने का इंतजार कर रहे हैं।”

वहीं एक दूसरे यूज़र ने पोस्ट किया, “हसन मिन्हाज का मामला शिक्षाप्रद है। जब कोई समाज विक्टिमहुड को बढ़ावा देता है, तो हर कोई ऑप्रेशन ओलंपिक के शीर्ष पर पहुँचना चाहता है। जब पीड़ित होने से आपको पैसा और प्रसिद्धि मिलती है – तो पीड़ित होने का निर्माण भी किया जा सकता है। झूठ को “भावनात्मक सत्य” जैसी भाषा से उचित ठहराया जा सकता है।”

अभिषेक द्विवेदी नाम के एक यूजर ने लिखा, “हसन मिन्हाज ने एक नया शब्द गढ़ा है: आप किसी और के सच को अपना सकते हैं और उसे अपने झूठ के साथ मिलाकर “भावनात्मक सच” बता सकते हैं। इसलिए, झूठ अब “भावनात्मक सच” है।

आप ऐसे और भी पोस्ट देख सकते हैं जहाँ हसन मिन्हाज को उसके झूठ के लिए ट्रोल किया गया है। वहीं कई वामपंथी उसके बचाव में भी उतर आए हैं।

बरखा दत्त ने पोस्ट किया है, “हसन मिन्हाज एक्सपोज़ में आज की एक्ट की तरह कहानी कहने की सभी गलतियाँ शामिल हैं – आप खुद को एक गहन शोध वाले व्यंग्यकार के रूप में प्रस्तुत करते हैं, जो स्पष्ट रूप से पुरानी दुनिया के पत्रकारों की तुलना में अधिक दिलचस्प तरीके से समाचारों से डील करते हैं। लेकिन पकड़े जाने पर आप कहते हैं, आप अभिनेता हैं, पत्रकार नहीं।”

इतना ही नहीं हसन मिन्हाज ने लोगों को भावनात्मक रूप से बेवकूफ बनाने में अपनी हर कहानी में जमकर झूठ परोसने में कोई कसर नहीं छोड़ी। यहाँ तक कि उसकी कॉमेडी में न सिर्फ मजहबी एजेंडा बल्कि मोदी विरोध भी शामिल रहा है। जिसका अब पूरी तरह से खुलासा हो गया है।