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अमेरिकी राष्ट्रपति भारत आकर G20 से पहले पादरी के साथ करते हैं प्रार्थना-भोज… चुप हैं वामपंथी-सेक्युलर क्योंकि निशाना सिर्फ हिंदू धर्म को है बनाना 

देश के राजधानी दिल्ली में G-20 शिखर सम्मलेन से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने एक मजहबी अनुष्ठान किया लेकिन उस पर किसी ने कोई बवाल नहीं किया। वहीं भारत में प्रधानमंत्री मोदी या मुख्यमंत्री योगी जैसे राजनेता जब भी कोई राजनीतिक कार्य से पहले पूजा-पाठ या धार्मिक अनुष्ठान करते हैं तो वामपंथियों से लेकर खुद को सेक्युलर कहने वाले सभी धड़े पीछे पड़ जाते हैं क्योंकि मूल में हिन्दू धर्म होता है। और हिन्दू धर्म का विरोध ही लेफ्ट-लिबरल गैंग का मुख्य एजेंडा है। 

अब चाहे वह संसद में सेंगोल की स्थापना हो, राम मंदिर का शिलान्यास, काशी विश्वनाथ या महाकाल कॉरिडोर का उद्घाटन या प्रधानमंत्री मोदी द्वारा किसी मंदिर में पूजा-पाठ, तब-तब यही सेक्युलर गैंग यह सिखाने जरूर आता है कि राष्ट्र का कोई धर्म नहीं होता, राष्ट्र सेक्युलर होता है। जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति के ईसाई पादरी को बुलाकर विशेष प्रार्थना और भोज के आयोजन से उन्हें कोई समस्या नहीं क्योंकि विरोध तो केवल सनातन हिन्दू धर्म का करना है, उसको नीचा दिखाना है, उसके अलावा बाकी सब सेक्युलर है। 

अमेरिकी राष्ट्रपति ने शिखर सम्मलेन से पहले किया विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन 

नई दिल्ली में G-20 शिखर सम्मलेन के दो दिवसीय (9-10 सितम्बर, 2023) बैठक से पहले भारत में अमेरिकी दूतावास के अधिकारी यह सुनिश्चित करने में लगे रहे कि बैठक से पहले जो बाइडेन की इच्छानुसार हॉली कम्यूनियन सर्विस (एक पवित्र भोज सेवा) का आयोजन कराया जा सके। इसके लिए दिल्ली के ईसाई मजहबी आयोजन के प्रमुख फादर निकोलस डायस से एक सप्ताह पहले ही संपर्क कर सब कुछ तय कर दिया गया था।

बता दें कि फादर निकोलस डायस, जो बेनौलीम, गोवा के रहने वाले हैं और तीन दशकों से अधिक समय से विभिन्न ईसाई मजहबी आयोजनों और उपदेशों के लिए काम कर रहे हैं, उन्होंने शिखर सम्मेलन शुरू होने से पहले ही प्रार्थना सेवा के लिए राष्ट्रपति बाइडेन के अनुरोध को पूरा करने में लग गए। इसी के लिए शनिवार (9 सितम्बर, 2023) सुबह लगभग 9 बजे, फादर डायस होटल आईटीसी मौर्य में थे, जहाँ, राष्ट्रपति बाइडेन के साथ, एक छोटे अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने 30 मिनट की पवित्र भोज सेवा में भाग लिया।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जो जानकारी निकलकर सामने आई है उसके मुताबिक यह कहा जा रहा है कि राष्ट्रपति बाइडेन इस मामले में बिलकुल स्पष्ट थे कि वह अपने दो दिवसीय जी-20 कार्यक्रम की शुरुआत भारत मंडपम में पवित्र यूचरिस्ट और प्रार्थना के साथ शुरू करना चाहते हैं। वहीं फादर निकोलस डायस ने भी द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “हमने मिलकर प्रतिभागियों के साथ-साथ शिखर सम्मेलन की सफलता और उन वैश्विक मुद्दों के लिए प्रार्थना की, जिन पर G-20 शिखर सम्मलेन में चर्चा होनी थी।”

फादर ने आगे बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक संक्षिप्त बातचीत में उनको बताया कि कैसे उनकी दादी का उनके जीवन और कैथोलिक पालन-पोषण का बहुत बड़ा योगदान है। फादर ने अमेरिकी राष्ट्रपति को उपहार में बेबिनका (गोवा का एक पुर्तगाली व्यंजन) भी भेंट किया जो भारत में ईसाई मजहब की जड़ों, प्रभाव और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। साथ ही उन्होंने भारत के तटीय राज्यों तक पहली बार सेंट फ्रांसिस जेवियर द्वारा कैसे ईसाई धर्म पहुँचा इसकी भी चर्चा की। 

भारत और हिन्दू धर्म की हर पहचान से है सेक्युलरों को नफरत 

इतना सब कुछ हुआ वह भी विश्व के एक सबसे शक्तिशाली राष्ट्र के मुखिया द्वारा, जिसने एक वैश्विक शिखर सम्मलेन से पहले भी अपनी ईसाई पहचान और मज़हब के अनुकूल आचरण को विदेशी धरती पर भी नहीं छोड़ा। लेकिन, इस पर न कहीं कोई बवाल हुआ और न सोशल मीडिया पर ही कोई चर्चा देखने को मिली। क्योंकि, लेफ्ट-लिबरलों की दृष्टि में यहाँ डेमोक्रेसी और राष्ट्र का धर्म जैसी बातें नहीं आती। वहीं आपको याद होगा यह गैंग कब-कब बवाल नहीं किया है। चाहे वह संसद भवन में पहली बार प्रवेश से पहले मंगलाचरण हो, राम मंदिर का शिलान्यास, काशी विश्वनाथ या महाकाल कॉरिडोर का उद्घाटन हो, अयोध्या में दिवाली सहित कई मंदिरों के जीर्णोद्धार के बाद उद्घाटन भी शामिल है। 

असली बवाल तो लेफ्ट-लिबरल गैंग ने तब काटा था हाल ही में नए संसद भवन के उद्घाटन के पहले सेंगोल की स्थापना की बात आई। बता दें कि चोल राजवंश के प्रतीक ‘सेंगोल’ को राजदंड के रूप में देखा जाता है, जो शासक को न्याय और धर्म की याद दिलाता रहता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब नए संसद भवन में लोकसभा अध्यक्ष की कुर्सी के बगल में इसे स्थापित किया और इस दौरान तमिल पुरोहितों का समूह, जिन्हें ‘अधीनम’ कहा जाता है, वो मौजूद रहे। उनकी ही निगरानी में ये पूरा का पूरा कार्यक्रम संपन्न हुआ। तब भी इस लेफ्ट लिबरल गिरोह ने न सिर्फ उसका विरोध किया बल्कि हिन्दू धर्म को जड़ से उखाड़ने जैसी बातें की थी। 

और हाल ही में इन्हें विदेशी गुलामी का प्रतीक ‘इंडिया’ इतना भा गया है कि ये अब ‘भारत’ के विरोध में भी हाथ धो कर पड़ गए हैं। क्योंकि भारत में इन्हें हिन्दुओं का वर्चस्व दिखाई दे रहा है जबकि इंडिया इनके लिए सेक्युलर शब्द है।  

बेटा कहे जाने का विरोध करने पर आलोक की चाकुओं से गोद कर हत्या, यामीन, गुगा और राजा की तलाश: फरीदाबाद की घटना

हरियाणा के फरीदाबाद में 2 युवकों पर चाकुओं से हमला किया गया। इस हमले में आलोक नाम के युवक की मौत हो गई है। एक अन्य पीड़ित शिवम गंभीर रूप से घायल है। शिवम का अस्पताल में इलाज चल रहा है। हमले के बाद सभी आरोपित फरार हो गए हैं। पुलिस ने यामीन, राजा और गुगा पर FIR दर्ज कर ली है। घटना शनिवार (9 सितम्बर 2023) की है।

FIR कॉपी के मुताबिक यह घटना फरीदाबाद के पल्ला थानाक्षेत्र की है। मूल रूप से बिहार के मधुबनी जिले के निवासी नवीन कुमार चौधरी ने इस मामले में शिकायत दी है। नवीन फिलहाल दिल्ली के जैतपुर में किराए पर रहते हैं। शिकायत में उन्होंने बताया कि उन्हें 9 सितंबर को रात एक बजे अपने सबसे छोटे 21 वर्षीय बेटे आलोक को चाकू मारे जाने की जानकारी मिली थी। साथ ही शिवम नाम के एक अन्य व्यक्ति को भी बेरहमी से पीटे जाने के बारे में बताया गया। आलोक के दोस्त राहुल नेगी ने हमले के लिए यामीन, गुगा और राजा को जिम्मेदार बताया। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

इस सूचना के बाद आलोक के परिजनों ने खोजबीन शुरू की। लगभग 3 घंटे बाद घायल आलोक अपने परिजनों को पंचशील कॉलनी के एक पार्क में घायल अवस्था में मिले। परिजनों ने उन्हें दिल्ली के एम्स (AIIMS) अस्पताल में भर्ती करवाया। इलाज के दौरान ही आलोक ने दम तोड़ दिया।

पुलिस ने इस केस को IPC की धारा 302 और 34 के तहत दर्ज कर लिया है। पुलिस ने आरोपितों का केस फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाने का भी एलान किया है। फरार आरोपितों को पकड़ने के लिए क्राइम ब्रांच की 4 टीमें लगाई गई हैं।

हमले में गंभीर रूप से घायल शिवम का इलाज अस्पताल में चल रहा है। उनकी हालात चिंताजनक बताई जा रही है। हरियाणा के बजरंग दल पदाधिकारी ललित भाटी ने इस मामले में ऑपइंडिया से बातचीत की। ललित के मुताबिक आलोक और शिवम लव जिहाद के खिलाफ काम करते थे। कुछ समय पहले ही उन्होंने एक हिन्दू लड़की को लव जिहाद से बचाया था। लेकिन फरीदाबाद पुलिस ने इन दावों का खंडन किया है।

पुलिस ने X/ट्विटर पर एक लंबे पोस्ट में बताया है कि मृतक और आरोपितों की पहले से जान पहचान थी। इनका रोज का मिलना जुलना था। आलोक ने बेटा कहने का विरोध किया जिसके कारण उस पर हमला किया गया। बजरंग दल से जुड़ाव और किसी लड़की को बचाने के कारण हमला किए जाने के दावों को पुलिस ने झूठ बताया है।

पुलिस का कहना है कि नामजद आरोपितो राजा, यामीन और बुगा उर्फ गुगा उर्फ गोगा उर्फ अजहर की तलाश क्राइम ब्रांच की चार टीमें कर रही है। आमलोगों से भी पुलिस ने इनकी जानकारी देने की अपील की है।

अपडेट: इस मामले में फरीदाबाद पुलिस द्वारा वस्तुस्थिति स्पष्ट किए जाने के बाद हमने खबर में जरूरी बदलाव किए हैं

गले में भगवा गमछा, आँखों में ईश्वर भक्ति: PM बनकर नहीं, ‘प्राउड हिन्दू’ होकर ऋषि सुनक ने अक्षरधाम मंदिर में की पूजा

दिल्ली में चल रहे G20 सम्मेलन के दूसरे दिन ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने अक्षरधाम मंदिर में दर्शन किए। रविवार (10 जुलाई 2023) को इस दर्शन के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। इस दौरान सुनक की पत्नी अक्षता मूर्ति भी मौजूद रहीं। मंदिर में कुछ देर समय बिता कर ब्रिटिश प्रधानमंत्री राजघाट की तरफ निकल गए।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सुनक की यात्रा से पहले ही पुलिस ने मंदिर और आसपास के इलाकों में बैरिकेड लगा दिए थे। सुबह-सुबह 7 बजे सुनक अपनी पत्नी के साथ मंदिर पहुँचे। यहाँ उन्होंने स्वामीनारायण सम्प्रदाय के मंदिर अक्षरधाम में पारम्परिक ढंग से पूजा अर्चना की। सुनक की पत्नी भी भारतीय परिधान में थीं। दोनों ने गले में भगवा गमछा डाल रखा था। मंदिर में दर्शन के दौरान बारिश हो रही थी। हालाँकि इसकी वजह से किसी प्रकार की कोई बाधा नहीं आई। वीडियो में पुलिस के जवानों को रेनकोट में मुस्तैद देखा जा सकता है।

बताते चलें कि ऋषि सुनक ने भारत आने से पहले खुद को ‘प्राउड हिन्दू’ बताते हुए मंदिर में जाने का एलान किया था। तभी से कयास लगाए जा रहे थे कि वो अक्षरधाम मंदिर जा सकते हैं। मंदिर में सुनक लगभग 40 मिनट तक रहे। इस दौरान उन्होंने मंदिर प्रशासन से जुड़े लोगों से बातचीत की। मंदिर की कलाकृतियों को देखा। फिर पत्नी अक्षता के साथ राजघाट की तरफ निकल गए।

ऋषि सुनक के मंदिर दर्शन के बाद वहाँ के डायरेक्टर ज्योतिंद्र दवे का बयान सामने आया है। ज्योतिंद्र ने बताया कि दर्शन के दौरान ब्रिटिश प्रधानमंत्री की आँखों में एक सच्चे ईश्वर भक्त के भाव थे। साथ ही उन्होंने इसे राजकीय नेता की यात्रा के बजाय भगवान के एक भक्त की यात्रा कहा। ऋषि सुनक द्वारा खुद को ‘प्राउड हिन्दू’ कहे जाने वाले बयान पर ज्योतिंद्र का दावा है कि उन्होंने जो कुछ भी सुना था, वो सच पाया।

पाव, चटनी, पान, चाय, मिठाई… G20 के शाकाहारी डिनर में दिखी भारत की विविधता, ‘नालंदा यूनिवर्सिटी’ के सामने मेहमानों का स्वागत

G20 समिट में शामिल होने आए मेहमानों के सम्मान में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू डिनर होस्ट कर रही हैं। इसके मेन्यू में सभी शाकाहारी व्यंजन शामिल किए गए हैं। मेन्यू भारतीय परंपरा, रीति-रिवाज और देश की विविधता को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।

भारत मंडपम के लेवल-3 में आयोजित इस डिनर में शामिल होने आए मेहमानों का स्वागत नालंदा यूनिवर्सिटी के बैकग्राउंड के सामने हुआ। डिनर में दुनियाभर के राष्ट्राध्यक्षों, डेलीगेट्स, भारत के प्रधानमंत्री, उपराष्ट्रपति, सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्रीय और राज्य मंत्री समेत करीब 170 लोगों को आमंत्रित किया गया है। साथ ही उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, व पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भी बुलावा भेजा गया है।

इस डिनर के मेन्यू में शुरुआती भोजन यानी स्टारर के तौर पर, पात्रम ‘ताजी हवा का झोंका’ में दही के गोले और भारतीय मसालेदार चटनी से सजे कंगनी श्रीअन्न (मिलेट) लीफ क्रिस्प (दूध, गेहूँ और मेवा युक्त) रखा गया है। वहीं, मुख्य भोजन यानि मेन कोर्स में वनवर्णम ‘मिट्टी के गुण’, ग्लेजड कॉरेस्ट मशरूम, कुटकी श्रीअन्न (मिलेट) क्रिस्प और करी पत्ते के साथ तैयार केरल काल चावल के साथ परोसे गए कटहल गैलेट (दूध और गेहूँ युक्त)।

वहीं रोटी में मुंबई का पाव कलौंजी के स्वाद वाले मुलायम बन (दूध और गेहूँ युक्त)। इसके अलावा, दूसरी रोटी में बाकरखानी इलायची के स्वाद वाली मीठी रोटी रखी गई है। मिष्ठान यानी मीठे में, मधुरिमा ‘स्वर्ण कलश’ इलायची की खुशबू वाला साँवा का हलवा, अंजीर-आडू मुरब्बा और अंबेमोहर राइस क्रिस्प्स (दूध और श्रीअन्न, गेहूँ और मेवा युक्त) है। पेय पदार्थ यानि कि पीने के लिए कश्मीरी कहवा, फिल्टर कॉफी और दार्जलिंग चाय रखी गई है। खाने-पीने यानि डिनर के बाद मेहमानों के लिए पान के स्वाद वाली चॉकलेट की पत्तियाँ रखी गईं हैं।

भोज खाने दिल्ली पहुँचे CM नीतीश कुमार, उधर उनके ही मंत्री ने कहा – ‘G20 समिट देश के समय की बर्बादी’

G-20 समिट में दुनिया भर के दिग्गज नेता शिकरत कर रहे हैं। भारत की अध्यक्षता में हो रही इस समिट पर पूरी दुनिया नजर गढ़ाए बैठी है। रात्रिभोज में हिस्सा लेने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी पहुँचे। लेकिन, नीतीश कुमार के मंत्री मदन सहनी इसे समय की बर्बादी बता रहे हैं। सहनी ने कहा कि पीएम मोदी इस तरह के सम्मेलन आयोजित कर अपना और देश दोनों का समय बर्बाद करते हैं।

मदन सहनी बिहार के दरभंगा जिले के बहादुरपुर से जदयू विधायक और नीतीश कुमार सरकार में समाज कल्याण मंत्री हैं। सहनी ने मीडिया से बात करते हुए पीएम मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “अभी तक माननीय प्रधानमंत्री जी देश और विदेश घूमते रहे हैं। फायदा के नाम पर तो हम लोग जीरो समझते हैं। यदि उनके 9 साल के कार्यकाल का आकलन करें तो देश के सबसे विफल प्रधानमंत्री की सूची में मोदी सबसे निचले पायदान पर रहेंगे।”

मदन सहनी ने आगे कहा, “हम लोगों को लगता है कि G-20 का सम्मेलन हो या मोदी विदेश जाते हों, ये अपना समय तो बर्बाद करते ही हैं। देश का समय भी बर्बाद करते हैं।” जदयू नेता मदन सहनी के इस बयान पर I.N.D.I.A. गठबंधन बँटा हुआ नजर आ रहा है। कॉन्ग्रेस प्रवक्ता असितनाथ तिवारी ने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि G-20 सम्मेलन निरर्थक ऐसा नहीं जा सकता। जदयू नेता मदन सहनी के इस बयान पर I.N.D.I.A. गठबंधन बँटा हुआ नजर आ रहा है। कॉन्ग्रेस प्रवक्ता असितनाथ तिवारी ने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि G-20 सम्मेलन निरर्थक है ऐसा नहीं जा सकता।

वहीं, एनडीए गठबंधन की सदस्य RJLP के प्रवक्ता चंदन सिंह ने कहा मदन सहनी पर हमला बोला। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या मदन सहनी को पता है G-20 सम्मेलन क्या है? इस सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री के नेतृत्व में पूरी दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण राजनयिक एक साथ बैठे हुए हैं। पूरी दुनिया में भारत का डंका बज रहा है। बिहार के मंत्री का ये बयान ऐसे समय में आया है, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दिल्ली पहुँच कर राष्ट्रपति द्वारा आयोजित भोज में शिरकत की।

G-20 क्या है?

G-20 का मतलब GROUP-20 से है। यह दुनिया के 19 शक्तिशाली देशों और यूरोपियन यूनियन (यूरोप के देशों का समूह) का समूह है। इस वर्ष इस समूह में अफ्रीकी यूनियन भी जुड़ गया है। G20 की स्थापना 1999 में हई थी। यह समूह दुनिया की 85 प्रतिशत अर्थव्यवस्था और 75 वैश्विक व्यापार को नियंत्रित करता है। अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, चीन, भारत, रूस जैसे देश हर साल G-20 समिट में मिलते हैं और दुनिया की आर्थिक स्थिति समेत अन्य मुद्दों पर चर्चा करते हैं।

PM मोदी ने लॉन्च किया ‘ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस’: जैव ईंधन के लिए वैश्विक सहयोग को बढ़ावा, संयुक्त सैटेलाइट मिशन के लिए भी पहल

G-20 सम्मेलन के पहले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ग्लोबल बायोफ्यूल एलायंस (Global Biofuel Alliance) के गठन का ऐलान किया। इसमें भारत के अलावा अमेरिका और ब्राजील प्रारंभिक सदस्य के रूप में जुड़ गए हैं। पीएम मोदी ने जी-20 में शामिल सभी देशों से इस एलायंस में शामिल होने का आग्रह किया। साथ ही पेट्रोल में 20% एथनॉल मिलाने की पहल की है। इस एलायंस का उद्देश्य जैव ईंधन के लिए वैश्विक सहयोग और इसके उपयोग को बढ़ावा देना है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने G-20 समिट के पहले सत्र ‘वन अर्थ’ को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा, “आज समय की माँग है कि सभी देशों को ईंधन मिश्रण के क्षेत्र में मिलकर काम करना चाहिए। हमारा प्रस्ताव पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण को 20 प्रतिशत तक ले जाने के लिए वैश्विक स्तर पर पहल करने का है। या फिर एथनॉल की जगह हम वैश्विक भलाई के लिए कोई और मिश्रण विकसित करने पर काम कर सकते हैं।”

PM ने आगे कहा, “यह मिश्रण ऐसा होना चाहिए जो जलवायु सुरक्षा में योगदान देते हुए एक स्थिर ऊर्जा आपूर्ति कर सके। इसको लेकर हम ग्लोबल बायोफ्यूल एलायंस (वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन) शुरू कर रहे हैं। भारत आप सभी को इस पहल में शामिल होने के लिए आमंत्रित करता है।”

प्रधानमंत्री ने भारत को कई धर्मों और लोकतंत्र की जननी बताते हुए कहा कि भारत आस्था, आध्यात्मिकता और परंपराओं की विविधता का देश है। दुनिया के कई प्रमुख धर्मों ने यहाँ जन्म लिया। लोकतंत्र की जननी के रूप में, संवाद और लोकतांत्रिक सिद्धांतों में हमारा विश्वास हमेशा से ही अटूट रहा है। हमारा आचरण ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के सिद्धांत पर आधारित है। इसका अर्थ है, विश्व एक परिवार है।

उन्होंने आगे कहा कि विश्व को एक परिवार मानने की यही धारणा हर भारतीय को ‘वन अर्थ’ की जिम्मेदारी की भावना से भी जोड़ती है। इसी भावना के चलते भारत ने COP-26 में ‘ग्रीन ग्रिड इनिशिएटिव- वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड’ शुरू किया था। दशकों से कॉर्बन क्रेडिट पर चर्चा हो रही है। इसमें यह कहा जाता है कि क्या नहीं किया जाना चाहिए। यह एक निगेटिव नजरिया है। पॉजिटिव नजरिए के लिए हमें ग्रीन क्रेडिट पर ध्यान देना चाहिए। भारत का प्रस्ताव है कि G-20 के देश ‘ग्रीन क्रेडिट इनिशिएटिव’ पर काम शुरू करें।

G-20 सेटेलाइट मिशन की पहल करते हुए कहा है कि भारत के मून मिशन, चंद्रयान की सफलता से सभी परिचित हैं। इससे प्राप्त डेटा पूरी मानवता के लिए फायदेमंद होगा। इसी भावना के साथ, भारत ‘G-20 सेटेलाइट मिशन फॉर इनवायरमेंट एंड क्लाइमेट ऑब्जर्वेशन’ का प्रस्ताव कर रहा है। इससे प्राप्त जलवायु और मौसम के आँकड़ों को सभी देशों, विशेष रूप से ग्लोबल साउथ के देशों के साथ साझा किया जाएगा। भारत सभी G-20 देशों को इस पहल में शामिल होने के लिए आमंत्रित करता है।

पशु-पक्षी, देवी-देवता, नदी-पहाड़… एक पहिये में सब कुछ: विज्ञान और अध्यात्म का मिश्रण है कोणार्क का चक्र, बंगाल में इस्लामी आक्रांताओं के संहार के बाद खड़ा हुआ था सूर्य मंदिर

भारत की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित G20 समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जहाँ सभी विदेशी राष्ट्राध्यक्षों का स्वागत किया, वहाँ पीछे ओडिशा में स्थित कोणार्क सूर्य मंदिर के चक्र की प्रतिमूर्ति बनी हुई थी। इसने सबका ध्यान अपनी तरफ आकर्षित किया। असल में G20 के जरिए मोदी सरकार ने भारत की संस्कृति का भी प्रचार-प्रसार किया और उसके तहत ही ऐसा किया गया था। एक तरह से अब कोणार्क का चक्र, पहिया, अब वैश्विक हो गया है और इसे एक बड़ी पहचान मिली है, सम्मान मिला है।

ऐसे में, आइए हम कोणार्क के सूर्य मंदिर के बारे में जानते हैं। ओडिशा के कोणार्क में स्थित इस मंदिर को पूर्वी गंगवंश के राजा नरसिंहदेव ने 13वीं शताब्दी के मध्य में बनवाया था। इसे इसकी संरचना और कलाकृतियों के लिए जाना जाता है। 19वीं शताब्दी के इतिहासकार जेम्स फ़र्ग्यूशन ने कहा था कि जितने मंदिर शेष भारत में हैं, उससे ज़्यादा अकेले ओडिशा में हैं। कोणार्क के सूर्य मंदिर के ऊपरी हिस्सा अब नहीं है, लेकिन फिर भी इसकी भव्यता कम नहीं हुई है।

कोणार्क नाम के पीछे भी एक कारण है। जहाँ ‘अर्क’ का अर्थ सूर्य है, वहीं ‘कोण’ का मतलब अंग्रेजी वाला एंगल। यूरोप से आने वाले यात्रियों ने इस मंदिर को ‘काला पैगोडा’ कहा था। एशिया में बड़ी-बड़ी धार्मिक संरचनाओं को ‘पैगोडा’ कहा जाता था। कोणार्क में भव्य मंदिर भले ही बाद में बना हो, इसका महत्व पुराणों में भी वर्णित है। ब्रह्म पुराण में लिखा है कि कोणादित्य (कोणार्क) उत्कल (ओडिशा) में भगवान सूर्य के भक्तों के लिए एक पवित्र स्थल है। एक और कहानी है सूर्य उपासना की, जो भविष्य पुराण और साम्ब पुराण में वर्णित है।

सूर्य पूजा की पौराणिक कथा, साम्ब और कुष्ठ रोग

भगवान श्रीकृष्ण और जाम्बवती का एक बेटा था – साम्ब। भगवान श्रीकृष्ण की पत्नियाँ जब स्नान कर रही थीं, तब नारद जी के कहने पर साम्ब वहाँ पहुँच गया था। इस कारण श्रीकृष्ण ने उसे कुष्ठ रोग से ग्रसित होने का श्राप दिया। साम्ब ने स्वयं के निर्दोष होने की बात साबित की, लेकिन श्राप वापस नहीं लिया जा सकता था। अतः, उसे भगवान सूर्य की आराधना करने को कहा गया। सूर्य को चर्मरोग का हरण करने वाला माना जाता है। आज विज्ञान भी मानता है कि सूर्य के प्रकाश से चमड़े की कई बीमारियों में लाभ हो सकता है।

साम्ब को मित्रवन में चंद्रभागा नदी के तट पर तपस्या करने के लिए कहा गया। 12 वर्षों के बाद सूर्यदेव की कृपा से जब उसकी बीमारी ठीक हुई, तब उसने सूर्य मंदिर बनवाने का निर्णय लिया। हालाँकि, स्थानीय ब्राह्मणों के इनकार के बाद उसने शकद्वीप (ईरान/पर्शिया) से पारसी पुजारियों को लेकर आना पड़ा, जिसे मागी कहते हैं। भगवान सूर्य की तस्वीर में बूट्स देख सकते हैं आप यहाँ, जो मध्य एशियाई निर्माण कला का प्रभाव है। मध्य एशिया से प्रवासी यहाँ पहली शताब्दी में ही आए थे।

साम्ब के तपस्या का जो स्थल है, उसे साम्बपुर के नाम से जाना गया। ये जगह अभी पाकिस्तान में स्थित मुल्तान में है। चंद्रभागा नदी, चेनाब का ही प्राचीन नाम था। वहीं कोणार्क में समुद्र द्वारा बनाया गया एक झील भी है, जिसे ‘चंद्रभागा’ नाम से जाना गया। जगन्नाथपुरी का इतिहास समेटे ओडिशा के प्राचीन ताड़पत्र वाले दस्तावेज ‘मदल पंजी’ में लिखा है कि राजा पुरंदर केसरी ने कोणार्क मंदिर बनवाया। केसरी वंश को हराने वाले गंग वंश ने भी कोणार्क देवता के सामने अपना सिर झुकाया। नरसिंहदेव (1238-64) ने यहाँ भव्य मंदिर बनवाया।

कोणार्क का सूर्य मंदिर: यूरोपियनों ने कहा – ‘ब्लैक पैगोडा’

उनके वंशज भी कोणार्क में पूजा करते रहे। मुकुंदराजा (1569-68) के निधन के बाद यवनों (इस्लामी आक्रांताओं) ने हमला किया और जब वो मंदिर को ध्वस्त करने में सफल नहीं हुए तो ताम्बे के कलश और पद्म-ध्वजा ले गए। गंग राजवंश के ताम्रपत्रों में लिखा है कि नरसिंहदेव ने उषारश्मि (सूर्य) का मंदिर त्रिकोण के कोने में ‘महत (महान) कुटीर’ बनवाया। नरसिंह देव ने अपने बेटे का नाम भी ‘भानु’ रखा था, जो भगवान सूर्य का नाम है। वो भानुदेव कहलाए। बताया जाता है कि इस्लामी आक्रांताओं को हराने के बाद उन्होंने ये भव्य मंदिर बनवाया था।

16वीं शताब्दी तक इस मंदिर की लोकप्रियता कई सीमाओं को पार कर चुकी थी। बंगाल के वैष्णव संत चैतन्य महाप्रभु भी यहाँ पहुँचे थे। वो पुरी भी तीर्थयात्रा के लिए गए थे। अकबर के दरबारी अबुल फज़ल तक ने लिखा है कि कैसे ये इतना भव्य मंदिर है कि जो देखता है वो बस देखता ही रह जाता है। मंदिर का शिखर कैसे गिरा, इस पर अलग-अलग मत हैं। ज्यादातर विद्वानों का मानना है कि इस्लामी आक्रांताओं ने मंदिर को जो नुकसान पहुँचाया था, उस कारण ऐसा हुआ।

जेम्स फ़र्ग्यूशन ने शिखर की ऊँचाई 45.72 मीटर होने का अंदाज़ा लगाया था। मुख्य मंदिर की बात करें तो इसे एक विशाल रथ के रूप में बनवाया गया था, जिसमें 12 चक्के हैं। साथ ही इसमें 7 सजे-धजे घोड़ों को दौड़ते हुए दर्शाया गया है। मंदिर में कई कलाकृतियाँ हैं, जिनमें भगवान सूर्य और अन्य देवी-देवताओं के साथ-साथ नृत्यांगनाओं, पक्षियों और जानवरों तक को दिखाया गया है। शेर, हाथी और घोड़ों की मूर्तियाँ हैं दीवारों में। जिराफ, ऊँट, हिरन, बाघ, सूअर, बन्दर और बैल भी हैं।

कोणर्क मंदिर के पहिये/चक्र: क्या है इसका महत्व

साथ ही नाग और नागकन्याओं को दिखाया गया है, आधा मनुष्य और आधा साँप के रूप में। अब बात करें हैं पहियों, यानी चक्र की। वही चक्र, जिसके सामने G20 नेताओं के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाथ मिलाया, उनका स्वागत किया, तस्वीरें क्लिक करवाईं। कोणार्क के मंदिर में ये पहिये इतने अच्छे से बनाए गए हैं कि रथ में पहियों को जोड़ने के लिए जिस कील का इस्तेमाल होता था उन्हें भी एकदम सटीक जगह पर लगाया गया है। ये एक विशेष प्रकार की कला है, जो इसे खास बनाता है और इस मंदिर की मुख्य विशेषता है।

इस पहिये की पतली वाली तीलियों में 30 दाने (मनके) बने हुए हैं। साथ ही कमल के फूल की पत्तियाँ बनी हुई हैं। वहीं कुछ पहियों में नृत्य करती हुई आकृतियों को एकदम साम्य में दिखाया गया है। इसके केंद्र में कई कन्याओं की आकृतियाँ हैं, कुछ अन्य आकृतियाँ भी हैं। शिव-पार्वती, बाँसुरी बजाते श्रीकृष्ण, और हाथी पर बैठे एक राजा की भी मूर्ति है जिसके सामने एक समूह खड़ा है। आज यही चक्र भारत की शान बन कर दुनिया के सामने हमारे वैभव और हमारे समृद्ध इतिहास का प्रदर्शन कर रहा है।

इन पहियों का बड़ा महत्व है। इस चक्र में 8 बाहरी और 8 भीतरी तीलियाँ हैं। 12 जोड़े पहिये साल के 12 महीनों का प्रतिनिधित्व करते हैं। साथ ही 8 तीलियाँ दिन के 8 पहर को दिखाती हैं। सूर्य की स्थिति के हिसाब से समय बताने के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जाता था। इसे ऐसे तैयार किया गया था कि सूर्य का प्रकाश भी इससे पास हो और जो छाया बनती थी, उसका इस्तेमाल समय देखने के रूप में किया जाता था। पृथ्वी, सूर्य और चन्द्रमा की गतियों को ध्यान में रखते हुए इसे बनाया गया था, एक ‘Sundial’ के रूप में।

कई धार्मिक समारोहों के लिए भी समय की गणना इसका इस्तेमाल कर के की जाती थी। इन पहियों का डायमीटर 9 फ़ीट 9 इंच है। भारत के करेंसी नोट्स पर भी आप कोणार्क के इस चक्र को देख सकते हैं। इसकी 24 तीलियाँ दिन-रात के 24 घंटों को दर्शाते हैं। यानी, खगोलीय और वैज्ञानिक गणनाओं को ध्यान में रखा गया था इस पहिये के निर्माण के समय। ऐसा नहीं कि सिर्फ मूर्तिकारों ने इसे बना दिया। विद्वानों की देखरेख में सारा काम किया गया था। इस पहिये में पूरी प्रकृति है – पशु-पक्षी, नदी-पहाड़, देवी-देवता।

अब आप सोच रहे होंगे कि पहिये की परछाई से समय कैसे पता चलेगा? इसके लिए पहियों के बीच में ऊँगली रखी जाती है और उसकी छाया से समय पता चलता है। 12 पहिये 12 राशियों को भी दिखाते हैं। इसे कानून का पहिया भी कहा जाता है। ये जीवन चक्र के लगातार चलायमान होने को भी दर्शाता है। पतली वाली तीलियाँ डेढ़ घंटे (90 मिनट) के समय को बताती हैं। ये कुछ वैसा ही है, जैसे आजकल हम घड़ी देखते हैं। ये अध्यात्म ही नहीं, बल्कि उसके साथ-साथ विज्ञान का भी मिश्रण है।

गंगवंश के नरसिंहदेव, जिन्होंने कोणार्क में बनवाया सूर्य मंदिर

नरसिंहदेव को नरसिंह-I भी कहा जाता है। उनके बारे में जिक्र मिलता है कि उनका विजय अभियान दक्षिण भारत तक फैला हुआ था। आंध्र प्रदेश के द्राक्षाश्रम में एक शिलालेख में उन्हें गोदावरी का राजा कहा गया है। ‘मदल पंजी’ में यहाँ तक लिखा है कि उन्होंने 12 वर्ष दक्षिण भारत में गुजारे और रामेश्वरम के सेतुबंध तक पहुँचे। उन्होंने जब गद्दी संभाली थी, तो ओडिशा एक तरफ बंगाल के मुस्लिम शासकों और दूसरी तरफ पूर्वी डेक्कन के काकतीया वंश से लड़ाई में जूझ रहा था।

उनके पिता अनंगभीम-III ने भी गंगवंश की सीमाओं को मुस्लिम आक्रांताओं से बचाने के लिए तैयारियाँ की थीं। हालाँकि, नरसिंहदेव ने इस मामले में आक्रामक नीति अपनाई। सन् 1243 में ओडिशा के सैनिकों ने लक्ष्मणावती (अब का मालदा जिला) में घुस कर मामलुक मुस्लिम शासकों को मजा चखाया। कटासिन में भयंकर लड़ाई हुई, जहाँ जहाँ बड़ी संख्या में इस्लामी आक्रांताओं का संहार किया गया। बंगाल के शासक इज्जुद्दीन तुगरिल तुगान खाँ को वहाँ से भागना पड़ा।

सन् 1245 में नरसिंहदेव की सेना फिर से लक्ष्मणावती पहुँची। तुगान खाँ की राजधानी को घेर लिया गया और उसे दिल्ली और अवध से सहायता के लिए गुहार लगानी पड़ी। जब तक मदद के लिए फ़ौज आती, ओडिशा की सेना मॉनसून के महीने में वापस लौट चुकी थी। इस युद्ध का नायक सेनापति सबंतोर (सामंतराय) को माना जाता है। इसके बाद इख़्तियाउद्दीन उज़बक बंगाल का शासक बनाया गया और वो इस हार का बदला लेना चाहता था। जाजनगर के राय के दामाद सामंतराय ने उसे भी हराया।

गंगवंश के ताम्रपत्र में लिखा है कि इस युद्ध में ओडिशा की ऐसी जीत हुई थी कि गंगा नदी का एक बड़ा हिस्सा मुस्लिम महिलाओं के रोने के कारण उनके आँसुओं के साथ कहने वाले काजल से लाल हो गया था। इस्लामी आक्रांताओं से बचा कर राधा और गौड़ परंपरा के संन्यासियों को भी भुवनेश्वर में जगह दी गई। हावड़ा, हुगली और मेदिनीपुर जैसे बंगाली इलाके नरसिंहदेव के साम्राज्य का हिस्सा बन गए थे। इन्हीं विजय अभियानों ने उन्हें कोणार्क में भव्य मंदिर बनवाने के लिए प्रेरित किया।

नरसिंहदेव ने कई मंदिर बनवाए। उन्होंने बालासोर के रमुना में गोपीनाथ मंदिर बनवाया। उन्होंने कपिलास में महादेव के मंदिर बनवाया। सिम्हाचलम के नरसिंह मंदिर में उन्होंने कई निर्माण कार्य करवाए। सिवाई संतरा को कोणार्क में मंदिर बनवाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। बताया जाता है कि जब वो परेशान थे तब एक बूढ़ी महिला ने उन्हें बताया था कि मंदिर बनवाने के लिए नदी के बीच में पत्थर फेंकने से कुछ नहीं होगा, किनारे से निर्माण कार्य शुरू करवाना पड़ेगा।

G-20 समिट के बीच IIT की प्रोफेसर दिव्या द्विवेदी ने की हिन्दू धर्म को खत्म करने की बात, वामपंथी कविता कृष्णन की मंशा – फिर से गुलाम हो जाए भारत

भारत जहाँ 9 और 10 सितंबर, 2023 को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित G-20 शिखर सम्मेलन में विश्व के नेताओं और गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत कर रहा है वहीं लेफ्ट-लिबरल ब्रिगेड इस अवसर का भी लाभ उठाकर अपने हिंदू विरोधी और पूर्वाग्रह से ग्रसित सोच को आगे बढ़ाने में लगा है। आईआईटी दिल्ली की प्रोफेसर दिव्या द्विवेदी और कविता कृष्णन इसी गुट की ऐसी महिलाएँ हैं, जो PM मोदी और हिंदुओं के प्रति अपनी नफरत को छिपा नहीं सकीं और हिंदू धर्म और भारत के खिलाफ जहर उगलने के लिए जी-20 के मंच का भी बड़ी बेशर्मी से इस्तेमाल करने लगीं।

फ्रांसीसी मीडिया आउटलेट फ्रांस-24 से बात करते हुए प्रोफेसर दिव्या द्विवेदी, जो द कारवाँ, वायर और स्क्रॉल जैसे कई वामपंथी मीडिया पोर्टलों से जुड़ी एक स्तंभकार भी हैं, ने कहा कि वह हिंदू धर्म के बिना भारत के भविष्य को देखती हैं। दिव्या द्विवेदी ने विदेशी मीडिया के सामने आर्यन थ्योरी की बात करते हुए भारत से हिन्दू धर्म को मिटाने की वकालत की।

दिव्या ने कहा, “दो भारत हैं। बहुसंख्यक आबादी पर अत्याचार करने वाले नस्लीय जाति व्यवस्था का अतीत का भारत और फिर भविष्य का भारत है, जो जाति उत्पीड़न और हिंदू धर्म के बिना एक समतावादी भारत है। यह वह भारत है जिसका अभी तक प्रतिनिधित्व नहीं आया है, लेकिन वह इंतजार कर रहा है, दुनिया को अपना चेहरा दिखाने के लिए तरस रहा है।”

इस बिंदु पर, फ्रांस 24 के पत्रकार ने उनसे सवाल करते हुए भारतीय रिक्शा चालक की कहानी बताते हुए उनसे उनकी राय पूछी कि भारत द्वारा किए गए डिजिटलीकरण और वैश्वीकरण जैसे उपायों से देश के नागरिकों को कैसे लाभ हो रहा है। उन्होंने दिव्या द्विवेदी को बताया कि कैसे रिक्शा चालक ने उन्हें समझाया कि पीएम मोदी की डिजिटल इंडिया पहल ने उन्हें न केवल अपने ग्राहकों, बल्कि पूरी दुनिया से जुड़ने और अपना व्यवसाय बढ़ाने में मदद की।

उन्होंने आईआईटी प्रोफेसर से पूछा की कि क्या रिक्शा चालक का व्यक्तिगत अनुभव यह सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त है कि भारत का भविष्य उज्जवल है। हालाँकि, मोदी के प्रति गहरी घृणा से भरी प्रोफेसर ने फ्रांसीसी पत्रकार की बात को खारिज कर दिया, और ऐसी कहानियों को मीडिया द्वारा गढ़ी कहानी कह कर ख़ारिज कर दिया। 

कविता कृष्णन ने भी उगला भारत के खिलाफ जहर 

फ्रांस-24 से बातचीत करते हुए वामपंथी कविता कृष्णन तो कदम और आगे जाते हुए भारत पर अमेरिका द्वारा प्रतिबन्ध लगाने की वकालत करने लगीं। एक तरफ जहाँ आज पूरा विश्व भारत की मेधा और डेमोक्रेसी का लोहा मान रहा है। यहाँ तक कि विश्व बैंक ने भी मोदी सरकार के UPI, DPI और जन-धन योजना की मदद से वित्तीय समावेशन के 47 साल के लक्ष्य को मात्र 6 साल में तय कर लेने पर जहाँ G-20 शिखर सम्मलेन से पहले ही एक रिपोर्ट शेयर कर तारीफ की है वहीं कविता कृष्णन जैसी वामपंथी मोदी सरकार के प्रति अपनी घृणा को दबा नहीं पा रहीं हैं। 

फ़्रांसिसी मीडिया से बात करते हुए रूस से तेल आयात करने को लेकर अमेरिका द्वारा प्रतिबन्ध लगाने की बात की। इसमें सबसे बड़ा विरोधाभास यह है कि वह इस इंटरव्यू में डेमोक्रेसी को लेकर बातचीत कर रहीं थीं। 

भारत को नीचा दिखाने का हर समय वामपंथी गिरोह ने किया पूरा प्रयास 

लेफ्ट लिबरल गिरोह और उससे जुड़े राजनेता, जैसे कि कॉन्ग्रेस के राहुल गाँधी, जो वैश्विक मंचों पर भारत को अपमानित करने का कोई मौका नहीं छोड़ते हैं, के नक्शेकदम पर चलते हुए, दिव्या द्विवेदी ने भी भारत के खिलाफ जहर उगलना जारी रखा और दावा किया कि भारत में भयंकर जातिवाद और भेदभाव है और आज भी भारत में उच्च वर्ग का दबदबा कायम है।

इतना ही नहीं अभी तक विदेशी मीडिया के सामने जो उन्होंने हिंदू धर्म और मोदी के खिलाफ जो जहर उगला वह पर्याप्त नहीं था। आईआईटी प्रोफेसर दिव्या यहीं नहीं रुकीं, उन्होंने वैश्विक मीडिया के सामने भारत को और नीचा दिखाने के लिए कहा कि भारत में केवल मुट्ठी भर ऊँची जाति के लोग ही आकर्षक और शक्तिशाली पदों पर बने हुए हैं। उन्होंने मूल रूप से यह बताने की कोशिश की कि मोदी के भारत में न केवल अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव किया जा रहा है, बल्कि दलित, आदिवासी और निचली जाति के समुदायों जैसे अन्य समुदायों के साथ भी भेदभाव किया जा रहा है। 

उन्होंने आगे कहा कि ऊँची जाति के 10% लोग देश के 90% संसाधनों और पदों पर काबिज हैं और यह सिलसिला अभी भी जारी है। 

जब फ़्रांस 24 के पत्रकार ने हस्तक्षेप करते हुए प्रोफ़ेसर दिव्या द्विवेदी से पूछा कि भारत ही एकमात्र स्थान नहीं है जहाँ भेदभाव मौजूद है। इस पर प्रोफ़ेसर दिव्या ने कहा, “भारतीय आबादी का 90 प्रतिशत हिस्सा पिछले 3000 वर्षों से नस्लीय उत्पीड़न, बहिष्कार और यहाँ तक ​​कि हिंदू धर्म के रूप में झूठे वर्चस्व का सामना कर रहा है और यही वह भारत है जिसे हम अब कलंकित होते हुए देख रहे हैं… यहाँ तक ​​कि आगे भी यही हाल रहने वाला है। इस सम्मेलन में लोगो के रंग में भी सत्तारूढ़ दल के रंगों का वर्चस्व है।”

द्विवेदी ने भाजपा और आरएसएस के प्रति अपनी घृणा का प्रदर्शन करते हुए कहा, “आरएसएस, जो कि भाजपा का मूल संगठन है, न केवल एक फासीवादी संगठन है बल्कि देश के उच्च जाति वर्चस्ववादी हितों को संरक्षण देता है।”

दिव्या द्विवेदी और उनकी हिंदू विरोधी कट्टरता

दिव्या द्विवेदी एक सहायक प्रोफेसर हैं जो आईआईटी-दिल्ली में दर्शन और साहित्य पढ़ाती हैं। उन्होंने मोहनदास करमचंद गाँधी पर एक किताब का सह-लेखन भी किया है। हिंदुओं और हिंदू धर्म के प्रति उनकी गहरी नफरत पिछले कई मौकों पर प्रदर्शित हुई है।

‘मर्यादा पुरुषोत्तम पैगंबर मुहम्मद’: जन्माष्टमी के कार्यक्रम में बिहार के शिक्षा मंत्री का ‘ज्ञान’, रामचरितमानस का भी अपमान कर चुके हैं राजद नेता

बिहार के शिक्षा मंत्री और राजद नेता चंद्रशेखर यादव विवादित बयानों के चलते सुर्खियों में बने रहते हैं। अब उन्होंने इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद को मर्यादा पुरुषोत्तम बताया है। चंद्रशेखर ने कहा कि शैतानों की संख्या अधिक होने के बाद परमात्मा ने पैगंबर मुहम्मद को पैदा किया। चंद्रशेखर के इस बयान को भाजपा ने तुष्टीकरण करार दिया है।

‘राष्ट्रीय जनता दल (RJD)’ के विधायक और शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर बिहार के नालंदा जिले के हिलसा में जन्माष्टमी पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। इसी दौरान उन्होंने कहा, “जब शैतानियत बढ़ गई दुनिया में, ईमान खत्म हो गया, बेईमान और शैतान ज्यादा हो गए तो मध्य एशिया के इलाके में ईश्वर ने, प्रभु ने, परमात्मा ने मर्यादा पुरुषोत्तम प्रोफेट मुहम्मद साहब को पैदा किया। ईमान लाने के लिए। इस्लाम ईमान वालों के लिए आया। इस्लाम बेइमानी और शैतानी के खिलाफ आया। मगर बेईमान भी खुद को मुस्लिम कहते हैं तो इसकी इजाजत खुदा नहीं देता है।”

बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर के इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी हमलावर है। बिहार बीजेपी के मीडिया प्रभारी दानिश इकबाल ने कहा है कि चंद्रशेखर का यह बयान तुष्टिकरण की पराकाष्ठा है। शिक्षा मंत्री ने पहले एक धार्मिक ग्रंथ को लेकर निंदनीय बयान दिया था। अब यह बयान भी समाज को बाँटने वाला है। RJD की यह परंपरा रही है। इस पार्टी ने इसी तरह से समाज को बाँटकर धर्म की राजनीति की है।

दानिश इकबाल ने यह भी कहा कि शिक्षा मंत्री ने एक मजहब के वोट बैन के तुष्टीकरण के लिए इस तरह का बयान दिया है। उन्हें ऐसे बयान नहीं देने चाहिए। सभी धर्म शांति का संदेश देते हैं। बीजेपी सभी धर्मों का सम्मान करती है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ऐसे शिक्षा मंत्री पर कार्रवाई करनी चाहिए।

वहीं भाजपा प्रवक्ता अरविंद सिंह ने कहा कि चंद्रशेखर दिमागी दोष के शिकार हो गए हैं। RJD ने हिंदुओं की है और न ही मुस्लिमों की। यह पार्टी एक परिवार की गुलाम हो कर रह गई है। ये लोग कभी हिंदुओं तो कभी मुस्लिमों और कभी रामायण तो कभी मुहम्मद के बारे में करते हैं। इनका काम लोगों को धर्म और जाति के आधार पर लोगों को लड़ाकर वोट लेने का है। इसकी जितनी निंदा की जाए कम है।

रामचरितमानस पर दिया था विवादित बयान

बता दें कि चंद्रशेखर रामचरितमानस पर बयान देकर लंबे समय तक चर्चा में रहे थे। उनके बयान के चलते RJD और JDU की जमकर थू-थू हुई थी। दरअसल, 11 जनवरी, 2023 को चंद्रशेखर ने रामचरितमानस के एक दोहे “अधम जाति में विद्या पाए, भयहु यथा अहि दूध पिलाए” का जिक्र करते हुए कहा था कि यह समाज में नफरत फैलानेवाला ग्रंथ है। उन्होंने कहा कि दोहे में अधम का अर्थ नीच होता है जिसे उन्होंने जाति से जोड़ते हुए कहा कि इस दोहे के अनुसार नीच जाति अर्थात दलितों-पिछड़ों और महिलाओं को शिक्षा ग्रहण करने का अधिकार नहीं था।

वहीं, 28 फरवरी, 2023 को दिए एक अन्य बयान में चंद्रशेखर ने कहा था, “मैं अपने पुराने बयान पर कायम हूँ। रामचरितमानस में जो भी कूड़ा-कचरा है, उसकी सफाई होनी चाहिए। अभी तो कुछ ही दोहों पर सवाल किया है, दर्जनों दोहे ऐसे हैं, जिसे बदलने की जरूरत है। मैं रामचरितमानस पर चुप रहने वाला नहीं हूँ। इसमें कई ऐसे दोहे हैं, जिस पर आगे भी सवाल उठाता रहूँगा।”

पिछले सम्मेलनों के मुकाबले दोगुना काम, सभी की सहमति वाला घोषणा-पत्र: G20 के दिल्ली समिट में बना इतिहास, PM मोदी ने मारा हथौड़ा

भारत की अध्यक्षता में नई दिल्ली में हो रहा जी-20 शिखर सम्मेलन के घोषणा पत्र पर सभी देशों की सहमति बन गई है। इसकी जानकारी खुद प्रधानमंत्री मोदी ने दी है। भारत की अध्यक्षता में जी-20 अब तक के इतिहास का सबसे सफल सम्मेलन साबित हुआ है।

प्रधानमंत्री के हवाले से सत्ताधारी भाजपा ने X पोस्ट में लिखा, “हमारी टीमों की कड़ी मेहनत और आप सभी के सहयोग के कारण, नई दिल्ली जी20 नेताओं के शिखर सम्मेलन घोषणापत्र को सर्वसम्मति प्राप्त हुई है। यह मेरा प्रस्ताव है कि हमें इस नेताओं की घोषणा को अपनाना चाहिए। मैं इस घोषणा को अपनाने की ऐलान करता हूँ।”

भारतीय जी-20 की अध्यक्षता की अधिकांश प्राथमिकताओं का उद्देश्य ग्लोबल साउथ या विकासशील देशों को लाभ पहुँचाना था। नेताओं की घोषणा का मसौदा तैयार करने में शामिल भारतीय वार्ताकारों को भरोसा था कि नई दिल्ली के अधिकांश प्रस्तावों को समूह के नेतृत्व द्वारा समर्थन दिया जाएगा। आखिरकार ऐसा हुआ।

इस घोषणा पत्र को रविवार (10 सितंबर 2023) को लीडर्स समिट के बाद घोषित किया जाएगा। यह भारत की अध्यक्षता की बड़ी जीत मानी जा रही है। इससे पहले पीएम मोदी ने जी20 सम्मेलन के पहले सत्र में कहा था, “21वीं सदी की दुनिया को नयी दिशा देने का समय है।” इस दौरान पीएम ने देश का नाम लेते समय ‘भारत’ शब्द का इस्तेमाल किया।

भारत की G20 अध्यक्षता इसके इतिहास में सबसे महत्वाकांक्षी रही है। इस बार 73 परिणाम (line of Efforts) और 39 संलग्न दस्तावेज़ (अध्यक्षता दस्तावेज़, कार्य समूह के परिणाम दस्तावेज़ शामिल नहीं) शामिल हैं। इस तरह पिछले सम्मेलनों की अपेक्षा इस बार 112 परिणामों और प्रेसीडेंसी दस्तावेज़ों दोगुना मूल कार्य हुआ है।

बताते चलें कि भारत के पहल पर ही 55 देशों के संघ अफ़्रीकन यूनियन को जी-20 में स्थायी सदस्य बनाया गया है। इस नाइजीरिया के प्रेसीडेंसी ने लिखा, “G20 का स्थायी सदस्य बनने पर अफ़्रीकन यूनियन को बधाई। एक महाद्वीप के रूप में हम G20 मंच का उपयोग करके वैश्विक मंच पर अपनी आकांक्षाओं को और आगे बढ़ाने के लिए तत्पर हैं।”