Home Blog Page 1592

‘चोटी-तिलक देख कर थूका, पीट-पीट कर सिर फोड़ दिया’: भाई ने बताया आकाश सैनी ने स्वामी प्रसाद मौर्य पर क्यों फेंका जूता, पुलिस में दी शिकायत

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य पर जूते फेंकने वाले आकाश सैनी के परिवार ने कहा है कि उसे बहुत मारा-पीटा गया था, इसी कारण उसने जूता फेंका। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य फ़िलहाल MLC (विधान पार्षद) हैं और सपा के महासचिव भी हैं। आकाश के भाई विकास सैनी ने लखनऊ के विभूतिखंड थाने में सोमवार (21 अगस्त, 2023) को एक तहरीर दी, जिसमें उन्होंने बताया कि आकाश अपने साथियों के साथ ‘इंदिरा गाँधी प्रतिष्ठान’ में आयोजित एक कार्यक्रम में गए थे।

आकाश सैनी के भाई ने इस तहरीर में पूरे घटनाक्रम के बारे में बताया है। उनकी मानें तो चूँकि आकाश ने तिलक लगाया हुआ था और चोटी रखी हुई थी, इसीलिए सपा कार्यकर्ताओं ने टिप्पणी की। विरोध करने पर उन्हें पकड़ लिया गया। इसी बीच शोर-शराबा देख कर स्वामी प्रसाद मौर्य वहाँ पहुँचे। उन्होंने पूछताछ की कि क्या हो रहा है। बताया जा रहा है कि इसी दौरान स्वामी प्रसाद मौर्य के 40-50 समर्थकों ने आकाश पर हमला बोल दिया। उन्हें जम कर पीटा गया।

इस मारपीट के कारण आकाश सैनी का सिर फूट गया है, ये भी जानकारी दी गई है। ये भी आरोप है कि उसके मुँह पर थूका गया और उसे अपशब्द भी कहे गए। पुलिस ने कहा है कि तहरीर के आधार पर जाँच की जाएगी। आकाश सैनी के समर्थन में ‘अखिल भारतीय हिन्दू महासभा’ ने भी विरोध प्रदर्शन किया। हालाँकि, स्वामी प्रसाद मौर्य ने थूकने के आरोप को ख़ारिज किया है। आकाश सैनी वकील की वेशभूषा में स्वामी प्रसाद मौर्य के कार्यक्रम में पहुँचे थे।

पुलिस किसी तरह आकाश सैनी का बीच-बचाव कर के उसे थाने ले गई। शांतिभंग के तहत उसके खिलाफ कार्रवाई की गई है। प्रदर्शन कर रहे हिन्दू संगठन ने उसे रिहा करने की माँग भी की है। बता दें कि स्वामी प्रसाद मौर्य ने तुलसीदास कृत ग्रन्थ रामचरितमानस पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसके बाद हिन्दू संगठनों ने उनके खिलाफ खूब विरोध प्रदर्शन किया था। बता दें कि रामचरितमानस का गाँव-गाँव में पाठ होता है और आराधना, रामधुन और अखंड रामायण पाठ के दौरान इसका पाठ किया जाता है।

‘चंद्रयान 3’ का मजाक उड़ाने वाले प्रकाश राज के खिलाफ पुलिस में शिकायत, कार्रवाई की माँग: अभिनेता ने कार्टून शेयर कर ISRO पर कसा था तंज

मोदी सरकार के खिलाफ अक्सर गलतबयानी करने वाले अभिनेता प्रकाश राज इस बार चंद्रयान-3 (Chandrayan-3) मिशन पर ट्वीट कर फँस गए हैं। कर्नाटक के बगलाकोट जिले में अभिनेता प्रकाश राज के खिलाफ उनकी सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर केस दर्ज किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें उन्होंने कथित तौर पर भारत के महत्वाकांक्षी तीसरे चंद्रयान मिशन का मजाक उड़ाया है। पुलिस ने मंगलवार (22 अगस्त, 2023) को बताया कि उनके खिलाफ ये शिकायत हिंदू संगठनों के नेताओं ने बनहट्टी पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई है और इस पर कार्रवाई करने की माँग की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी लोग अभिनेता राज को जमकर खरी-खोटी सुना रहे हैं।

वहीं ‘ऑल्ट न्यूज’ का को-फाउंडर मोहम्मद जुबैर तुरंत उनके समर्थन में उतर आया। हालाँकि, अभिनेता राज ने अपनी सफाई में कहा कि नफरत केवल नफरत देखती है। उन्होंने कहा, “मैं आर्म्सस्ट्रांग के समय के एक जोक के संदर्भ में बात कर रहा था।”

दक्षिण भारत की अधिकतर फिल्मों में विलेन का रोल करने वाले अभिनेता ने रविवार (20 अगस्त) को माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर (एक्स) पर एक शर्ट और लुंगी पहने चाय डालते हुए एक कैरीकैचर शेयर किया था। इसके साथ ही उन्होंने लिखा था, “चंद्रयान से आई पहला तस्वीर …#विक्रम लैंडर,#जस्टआस्किंग”

‘केरल के चायवालों पर कर रहा था बात’

इसे ट्वीट के बाद से ही उन्हें भारी विरोध और आलोचना झेलनी पड़ रहा है। लोग उन्हें ट्रॉल करते हुए कह रहे हैं कि चंद्रयान-3 मिशन देश के गौरव से जुड़ा है। सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्से को देखते हुए अभिनेता राज ने अपनी सफाई में कहा, “नफरत केवल नफरत देखती है। मैं आर्म्सस्ट्रांग टाइम्स के एक जोक के हवाले से बात कर रहा था जो हमारे केरल के चायवालों का उत्सव मना रहे थे। ट्रोल्स ने कौन सा चायवाला देख लिया। अगर आप जोक का मतलब नहीं समझते हैं तो वो जोक आप पर ही होता है। बड़े हो जाए, केवल कह रहा हूं।”

इसे लेकर लोगों ने प्रकाश राज को खासा ट्रोल किया है। मीडिया में प्रकाश राज के ट्वीट को लेकर चल रही न्यूज पर ‘ऑल्ट न्यूज’ का को-फाउंडर मोहम्मद जुबैर तुरंत उनके समर्थन में उतर आया। उसने ट्वीट कर ‘इंडिया टुडे’ से सवाल किया कि आपने कैसे निष्कर्ष निकाला कि प्रकाश राज इसरो के पूर्व चीफ और मून मिशन का मजाक उड़ा रहे हैं?

पीएम मोदी के खिलाफ उलटी-सीधी बातें करने में माहिर

अभिनेता प्रकाश राज अक्सर पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ उलटी-सीधी बातें करने की वजह से चर्चा में रहते हैं। वो कोविड महामारी के दौरान भी पीएम मोदी पर तंज कसने से बाज नहीं आए थे। तब जनता कर्फ्यू को लेकर उन्होंने ने ट्वीट किया था कि केरल सरकार की तरह आर्थिक पैकेज पर विचार कब होगा। उनके द्वारा इस तरह ट्वीट्स किया जाना कई यूजर्स को पसंद नहीं आया। एक्टर ने लिखा कि पहले क्या असर करेगा, कोरोना या कुछ मत करोना।

चंद्रयान-3 23 अगस्त को उतरेगा चाँद की जमीं पर

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अनुसार, चंद्रयान-3 23 अगस्त को लगभग शाम 06:04 बजे भारतीय मानक समयानुसार पर चंद्रमा पर उतरने के लिए तैयार है। इसका लाइव एक्शन 23 अगस्त, 2023 को शाम 06:27 बजे से इसरो वेबसाइट, इसके यूट्यूब चैनल, फेसबुक और सार्वजनिक प्रसारक डीडी नेशनल टीवी पर होगा।

संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस और चीन के बाद यह उपलब्धि हासिल करने वाला भारत दुनिया का चौथा देश होगा, लेकिन चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला भारत दुनिया का अकेला देश होगा। चंद्रयान-3 मिशन को 14 जुलाई, 2023 को दोपहर 2:35 बजे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से जीएसएलवी मार्क 3 (एलवीएम 3) हेवी-लिफ्ट लॉन्च वाहन के माध्यम से लॉन्च किया गया था।

भाई के सामने अनाथ बच्ची का गैंगरेप: तेलंगाना में 8 दरिंदों ने घर में घुस कर दिया वारदात को अंजाम, गर्दन पर चाकू रख कर किया सामूहिक बलात्कार

तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में एक अनाथ नाबालिग लड़की के साथ उसके भाई के सामने सामूहिक दुष्कर्म की घटना सामने आई। आरोप है कि सोमवार (21 अगस्त, 2023) सुबह गाँजे के नशे में धुत 8 लोग एक घर में घुस आए। इसके बाद वहाँ मौजूद 4 बच्चों को धमका कर शांत करा दिया। इसके बाद चाकू की नोक पर दलित पीड़िता के साथ बलात्कार किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला हैदराबाद के मीरपेट इलाके का है। यहाँ 16 साल की लड़की माता-पिता की मौत के बाद अपने 14 साल के भाई के साथ एक घर में रह रही थी। सोमवार सुबह करीब 9:30 बजे पीड़िता अपने भाई व 3 अन्य बच्चों के साथ खेल रही थी। तभी गाँजे के नशे में धुत 8 आरोपित घर में घुस आए। इसके बाद लड़की की गर्दन पर चाकू रखकर उसे डराते हुए तीसरी मंजिल पर ले गए।

वहीं कुछ आरोपितों ने घर में मौजूद लड़की के भाई और अन्य बच्चों को धमकाकर उन्हें बाहर जाने से मना कर दिया। विरोध करने पर आरोपितों ने लड़की के भाई के साथ बेरहमी से मारपीट की। इस दौरान लड़की के शोर मचाने के पर आरोपित वहाँ से भाग गए। घटना के बाद पीड़िता ने अपने घर के पास में रहने वाली अपनी बड़ी बहन को मामले की जानकारी दी। पुलिस ने मुकदमा दर्ज करते हुए मामले की जाँच शुरू की।

पीड़िता के भाई का कहना है कि आरोपित आसपास के लोग ही हैं। इनमें से घर के ग्राउंड फ्लोर में रहने वाला टायसन भी शामिल है। आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस आयुक्त डीएस चौहान ने एक जाँच टीम गठित की है। इस मामले में पुलिस ने अब तक 3 संदिग्ध आरोपितों को गिरफ्तार किया। इसमें स्थानीय हिस्ट्रीशीटर अबेद लाला भी शामिल है। इस मामले में आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस आयुक्त डीएस चौहान ने एक जाँच टीम गठित की है। पीड़िता को ‘सखी केन्द्र’ में भेजा गया है।

सजायाफ्ता अपराधी लालू यादव, छाता तान कर चलते DSP… बालू माफिया का दामाद है पुलिस अधिकारी, BJP ने याद किया – कभी RJD सुप्रीमो का थूकदान भी उठाते थे अधिकारी

बिहार में जिस लालू यादव और उनके परिवार को उनकी पार्टी राजद और उसके समर्थक ‘सामाजिक न्याय का मसीहा’ बताते हैं, उनके कारनामे ऐसे हैं कि जिससे गरीबों का भला होना तो दूर नुकसान ही हुआ है। चाहे चारा घोटाला हो या फिर बिहार को अपराध के गर्त में धकेल देना, लालू यादव के कारनामे जग-जाहिर हैं। अब गोपालगंज में एक SDPO को लालू यादव का छाता पकड़ कर चलते हुए देखा गया, जो उन्हें बारिश से बचा रहा था। लालू यादव एक सजायाफ्ता अपराधी होने के बावजूद बिहार सरकार की खिदमत का लाभ उठा रहे।

बता दें कि RJD अध्यक्ष लालू यादव मंगलवार (22 अगस्त, 2023) को गोपालगंज पहुँचे थे, जो उनका गृह जिला है। सुबह थावे स्थित मंदिर में उन्होंने पूजा-अर्चना की। इस दौरान उनके साथ बिहार के जलवायु परिवर्तन, वन एवं पर्यावरण मंत्री तेज प्रताप यादव भी थे, जो उनके बड़े बेटे हैं। जमानत पर बाहर लालू यादव जब मंदिर पहुँचे उस समय बारिश तेज हो गई थी। इस दौरान DSP अनुराग कुमार उनका छाता उठाए हुए चलते दिखे। लालू यादव और राबड़ी देवी 7 साल बाद गोपालगंज पहुँचे हैं।

बिहार में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने कहा है कि वो दिन दूर नहीं जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी इसी तरह लालू यादव के लिए छाता लेकर चलेंगे। सम्राट चौधरी ने कहा कि हम तो अपना छाता खुद उठा कर चलते हैं लेकिन बिहार में एक अपराधी के लिए एक डीएसपी छाता लेकर चल रहा है। उन्होंने इसे लोकतंत्र का मजाक करार दिया। उन्होंने कहा कि बिहार में लालू यादव ‘सुपर पॉवर’ हैं। उन्होंने पूछा कि अगर वो बीमारी हैं तो अस्पताल में क्यों नहीं हैं, इलाज क्यों नहीं करा रहे?

बता दें कि स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर ही लालू यादव को जमानत मिली है। अब अनुराग कुमार ने सफाई देते हुए कहा है कि तेज बारिश थी और उनके पास हथियार था, इसीलिए उन्होंने छाता रखा हुआ था। उन्होंने कहा कि वो मानवता के नाते लालू यादव के साथ छाता तान कर चल रहे थे। हथुआ के डीएसपी ने कहा कि उन्होंने गुडफेथ में ऐसा किया, उनकी मंशा ठीक थी और उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया। डीएसपी अनुराग कुमार ने कहा कि उन्होंने कानून सम्मत काम किया है।

भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने कहा कि राज्य में एक समय था जब लालू यादव का थूकदान भी अधिकारी उठाया करते थे। अनुराग कुमार हथुआ के डीएसपी हैं, जबकि मंदिर गोपालगंज सदर में, ऐसे में वो वहाँ क्यों थे? – ये सवाल भी पूछा गया है। अनुराग कुमार को गोपालगंज के बालू माफिया सुभाष यादव का दामाद भी बताया जा रहा है। सुभाष यादव को लालू का करीबी माना जाता है। सरकार में उनका रसूख है। कहा जाता है कि सरकार में अपने लोगों के लिए वो पैरवी भी कराते हैं।

कहीं पेट के बहाने छाती दबाता वार्ड ब्वाय, कहीं प्राइवेट पार्ट टच करता टीचर तो कहीं दोस्त की बेटी से रेप करता अधिकारी… मासूमियत आखिर कैसे बचे?

दिल्ली सरकार के बाल विकास विभाग का अधिकारी रहते प्रेमोदय खाखा (Premoday Khakha) ने दोस्त की बेटी का जिस तरीके से शोषण किया, उसका दर्द जिस्मानी से कहीं अधिक जेहनी होता है, जो ताउम्र नासूर सा सालता रहता है।

रिपोर्टिंग के दिनों में मेरा ऐसी बहुत सी सच्ची कहानियों से राब्ता हुआ है, जिनमें बेहद करीबी लोगों ने शारीरिक शोषण किया और इसके बाद भी वो पीड़िताओं के घरों पर आते रहे और सम्मान पाते रहे। वहीं पीड़ित बच्चियाँ चीखकर तो क्या, हलके से भी अपने साथ हुए इस वहशी बर्ताव पर चूँ तक नहीं कर पाई। सिसकती रहीं, अकेले ही अपने कमरों में या फिर बचने की कोशिश करती रही ऐसे वहशी दरिंदों से।

अपने ही साथ का वो वाकया मुझे आज भी चैन नहीं लेने देता। मेरे साथ भद्दा और खौफ में डाल देने वाला ये वाकया तब घटा था, जब बीमारी की वजह से मैं हॉस्पिटल में थी। उस वक्त उम्र महज 15 या 16 साल रही होगी। हॉस्पिटल के वार्ड ब्वाय ने पेट दबाने के बहाने मेरी छाती दबा डाली। दर्द और अपमान से मेरे आँसू निकल आए, लेकिन मैं किसी से कुछ कह नहीं पाई। बस खुद को ही दोषी मानती रही। न जाने क्यों? लेकिन आज भी उस वाकए को याद कर मैं सिहर उठती हूँ।

ऐसे ही आपबीती एक पुलिस अधिकारी की वाइफ ने मेरे साथ साझा की थी। उनसे मेरा परिचय चाइल्ड एब्जूज पर स्टोरी करते वक्त साल 2011-12 में हुआ था। उन्होंने मुझे बताया था कि उन्हें पढ़ाने उनके घर एक टीचर आते थे। घर में सब लोग उनकी बहुत इज्जत करते थे, लेकिन वो किसी हैवान से कम नहीं था। पढ़ाने के बहाने वह अकेले कमरे में उनके प्राइवेट पार्ट्स छूता था। उन्होंने बताया कि कई बार उन्होंने अपनी माँ से कहने की कोशिश की, लेकिन खुल के कह नहीं पाई।

इस पुलिस अधिकारी की पत्नी का मानना था कि शायद हमारी (लड़कियों) परवरिश ही घरों में ऐसे की जाती है कि शरीर को लेकर कुछ भी हो उन्हें छुपे और दबे स्वरों में ही कहने की इजाजत होती है। यौन शोषण के लिए हमेशा खुद को ही दोषी ठहराने की मानसिकता में वे जकड़ दी जाती हैं। पुलिस अधिकारी की ये पत्नी बचपन में अपने साथ हुए इस तरह के व्यवहार को कभी भुला नहीं पाई, लेकिन एक बात जरूर अच्छी हुई कि वो अपनी बेटी को सब खुलकर कह देने की हिम्मत दे पाईं।

लेकिन ऐसी न जाने कितनी औरतें, बच्चियाँ और युवतियाँ होंगी जो कहीं न कहीं अपने सीने में ये राज दफन कर अंदर ही अंदर घुट रही होंगी। गुड टच, बैड टच, मी टू जैसे चाहे कितने ही अभियान चले, पॉक्सो एक्ट जैसे कितने ही कानून क्यों न बन जाए, लेकिन बचपन में यौन शोषण का शिकार होने के बाद मन से उस भयानक वक्त का खौफ निकालना संभव नहीं। यह पीड़िताओं को मानसिक और मनोवैज्ञानिक तौर पर भी कमजोर और तोड़ कर रख देता है।

महज 14 साल की उम्र से ही दिल्ली सरकार के अधिकारी प्रेमोदय खाका की गंदी मानसिकता और हरकतों का शिकार हुई नाबालिग बच्ची के दर्द अंदाजा शायद ही कोई लगा पाए। उसे एक ‘मामा’ जैसे भरोसेमंद शख्स ने जिदंगी भर के लिए उसके जिस्म, दिल और दिमाग पर ऐसे जख्म दे दिए हैं, जिसके घाव शायद ही कभी भर पाएँगे। यहाँ ये बात भी ध्यान देने वाली है कि बच्ची अपनी माँ को वक्त रहते सब कुछ क्यों नहीं बता पाई? बात फिर वहीं आती है कि बच्चों के साथ बेहद खुला रिश्ता शायद ही कोई माँ-बाप रख पाते हैं।

जहाँ पर आकर वो बेझिझक अपनी बात रख सकें। उसे कहीं से भी ये न लगे कि उसके बात सुनने पर पेरेंट्स उसे जज करेंगे। वहीं हमारे रहन-सहन में कहीं न कहीं हम बच्चों के दिमाग ये बात बैठाते रहे हैं कि प्राइवेट पार्ट पर बात करना बुरी बात है। कुछ अपवादों को छोड़ दिया जाए तो इन अंगों से जुड़ी कोई भी बात होने पर सीधे पेरेंट्स को बताने से बच्चे हिचकते ही हैं।

शायद यही वजह रही होगी कि 14 साल में वहशी प्रेमोदय खाखा के नवंबर 2020 से जनवरी 2021 के दौरान रेप किए जाने के बाद भी वो बच्ची अपनी माँ से कुछ नहीं कह पाई। फोन पर माँ से वो बात तो करती थी, लेकिन उसने कभी ये नहीं बताया कि उस पर क्या बीत रही है। शायद उसे पैनिक अटैक नहीं आते और वो हॉस्पिटल में नहीं जाती तो जाने कितनी बार ‘मामा’ के भेष में छिपा वो वहशी दरिंदा उसका रेप करता और गर्भपात करवाता रहता।

इसमें सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि प्रेमोदय खाखा की पत्नी सीमा रानी (Seema Rani) खुद एक औरत होने और खुद के बच्चे होने के बाद कैसे अपने ही बेटे से उस बच्ची के लिए अबॉर्शन पिल्स मँगवाती है। वो अपने बेटे को किस तरह का इंसान बना रही है। इससे तो वो यही सीख रहा है किसी का भी रेप करो और फिर अबॉर्शन पिल्स से गर्भपात करवा दो और साफ बचकर निकल जाओ।

फरवरी 2021 में जब नाबालिग बच्ची ने वहशी प्रेमोदय खाखा की पत्नी सीमा रानी को अपने पीरियड मिस होने की बात बताई। उसने अपने बेटे से अर्बाशन पिल्स मँगवाकर उसका गर्भपात करवा दिया। समझ सकते है उस बच्ची का ट्रॉमा जो लगातार रेप का शिकार होती रही और मदद माँगने पर उसे और शोषण झेलना पड़ा?

अप्रैल 2021 में 4 महीने बाद मुश्किल से ये नाबालिग लड़की अपनी माँ को कह पाई कि उसकी तबियत ठीक नहीं वो उसे घर ले जाएँ, लेकिन तब भी उसने अपने साथ हुए वहशीपन की बात नहीं बताई। वो घटना के दो साल बाद अगस्त के शुरुआत में अपनी खुद की माँ को ये कह पाई। इतना ही नहीं उसने उस जगह पूजा के लिए जाना भी छोड़ दिया जहाँ अक्सर प्रेमोदय खाखा आया करता था।

महज 14 साल की उम्र में कई बार रेप का शिकार होने वाली ये नाबालिग लड़की लगातार इतना वहशीपन झेलने के बाद किस तरह से खुद को सँभाल रही होगी। अब ये बच्ची 17 साल की हो गई और 12 वीं में पढ़ रही है, लेकिन उसके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का क्या जो खेलने-खुश रहने की उम्र में गुमसुम रहने और पैनिक अटैक झेलने को मजबूर है।

भले ही प्रेमोदय खाखा को कड़ी सजा मिल जाए, लेकिन क्या इस बच्ची का बचपन वापस आ पाएगा? क्या वो कभी मानसिक तौर पर स्थिर हो पाएगी? इस खौफनाक वाकए को क्या वो कभी भूल पाएगी? शायद नहीं। बच्ची को उस वक्त खुद के जिस्म और जेहन पर वहशीपन झेलना पड़ा, जब वह पिता की मौत के गम से उबर भी नहीं पाई थी। इस तरह से बचपन में यौन हिंसा और शोषण के शिकार हुए बच्चों के लिए ये दर्द उनकी जिंदगी में ताउम्र नासूर की तरह रिसता है।

यहाँ एक बात और ध्यान देने की है कि बच्चियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी पेरेंट्स की भी है। उनको अपने बच्चों के साथ ऐसा रिश्ता रखना चाहिए कि वो सब कुछ उन्हें बताने की हिम्मत रखें, ताकि हर बच्चा-बच्ची इस तरह की घिनौनी हरकतों का शिकार बनने से बच पाए। बच्चों के व्यवहार में बदलाव आने पर तुरंत उससे बात करें, क्योंकि इस मुद्दे पर बात करना और बोलना निहायत जरूरी है।

बच्चों का यौन शोषण वो भी अपने करीबी और भरोसेमंद लोगों के द्वारा होना इस समाज की घिनौनी सच्चाई है। इस सच्चाई का सामना करने के लिए सामना आना होगा, ताकि जिस्म के भूखे वहशी दरिंदे किसी भी मासूम को अपना शिकार न बना पाए। बच्चों का यौन शोषण समाज में बसा एक कोढ़ है। पेरेंट्स को बच्चों की बातें को संजीदगी से लेना चाहिए, वो कुछ भी बताते हैं तो अनजान न बने, उनकी बात न टाले, उन्हें तसल्ली से सुने।

किसी खास परिचित से मिलने से बच्चा बच रहा है या किसी रिश्तेदार के आने पर उसके व्यवहार में बदलाव आ रहा है तो इसे गंभीरता से लें। यूनिसेफ और दिल्ली के एनजीओ ‘सेव दि चिल्ड्रन’ के सहयोग से महिला और बाल विकास मंत्रालय ने साल 2007 में एक स्टडी किया था। इससे पता चला था कि बच्चों के यौन शोषण में 50 फीसदी उनके भरोसेमंद और परिचित ही होते हैं। साथ ही लड़कों और लड़कियों में यौन शोषण का स्तर बराबर है।

साल 2022 के द नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो आँकड़े भी इसकी तरफ इशारा करते हैं कि भारत में 109 बच्चे हर दिन किसी न किसी तौर से यौन शेाषण का शिकार होते हैं और यह परेशानी हर साल लगातार बढ़ती जा रही है। बच्चों का यौन शोषण शारीरिक हो या भावनात्मक उनकी मानसिक सेहत पर गहरा असर डालता है, जो उन्हें ताउम्र परेशान करता है।

मासूमियत सुरक्षित रहे इसके लिए बच्चों को लोगों के गलत हाव-भाव, गलत इशारों और व्यवहार के बारे में बताएँ, ताकि ऐसा होने पर वह तुरंत बता सकें। पूरी कोशिश करें कि बच्चे को संकोची न बनाएँ। उनके लगातार गुमसुम रहने और असामान्य व्यवहार को नजरअंदाज न करें। इस तरह की अनहोनी होने पर बच्चों को सहज करने की पूरी कोशिशें करें। हो सकें तो काउंसलर के पास ले जाएँ।

बच्चों को सेक्स एजुकेशन देने की भी बेहद जरूरत है। लेकिन उसमें इतना सलीका, सहजता और सरलता होनी चाहिए कि वो इसे आसानी से समझ सकें और भ्रम में न पड़े। बच्चों को खेल में ही ऐसी जानकारी दी जाएँ कि उन्हें इस संवेदनशील विषय को समझने में आसानी होगी। मासूमियत का ये दौर यौन हिंसा और शोषण के दौर से न गुजरे इसके लिए समाज में जागरूकता बेहद जरूरी है।

जिस BRICS के लिए दक्षिण अफ्रीका गए PM मोदी, उससे जुड़ने को बेचैन हैं 40 देश: जानिए कैसे G7-EU से मुकाबले को तैयार हो रहा नया वैश्विक संगठन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी BRICS (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) से में हिस्सा लेने के लिए दक्षिण अफ्रीका पहुँचे हैं। इससे पहले जून में इन सभी देशों के के विदेश मंत्रियों के बीच केपटाउन में बातचीत हुई थी। अब 22-24 अगस्त, 2023 को इन सभी देशों के राष्ट्राध्यक्षों की मुलाकात होनी है। अक्सर G-7 के प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखा जाने वाला ये समूह अब खुद को विस्तार देने की सोच रहा है। विदेश मंत्रियों की हुई बैठक में अल्जीरिया, अर्जेंटीना, ईरान, सऊदी अरब, UAE, इजिप्ट और कज़ाख़िस्तान के विदेश मंत्री भी मौजूद थे।

बैठक के बाद दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्री नलेडी पंडोर ने कहा था कि संघाई स्थित ‘न्यू डेवलपमेंट बैंक’ ने ब्रिक्स के मंत्रियों को एक नई मुद्रा के इस्तेमाल को लेकर भी प्रेजेंटेशन दिया, जिससे वैश्विक प्रतिबंधों से ये देश प्रभावित न हो पाएँ। दुनिया की 41% जनसंख्या ब्रिक्स देशों में रहती है, साथ ही ये समूह दुनिया की 24% GDP का स्वामित्व रखता है और दुनिया के 16% कारोबार पर भी इन देशों का कब्ज़ा है। ब्रिक्स के विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद अंतरराष्ट्रीय कारोबार में स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल और व्यापारिक लेनदेन में भी इसके इस्तेमाल को लेकर भी चर्चा हुई।

बता दें कि पिछले साल ही यूक्रेन के साथ युद्ध के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ट्रांसफर के लिए एक अलग वैकल्पिक व्यवस्था की वकालत की थी। उन्होंने वीडियो लिंक के जरिए ब्रिक्स के सम्मेलन को संबोधित करते हुए एक ‘अंतरराष्ट्रीय रिजर्व करेंसी’ का सुझाव भी दिया था। उन्होंने यहाँ तक कहा था रूस कारोबार और आर्थिक समझौतों को अपने विश्वसनीय दोस्तों भारत और चीन की तरफ मोड़ रहा है। नई कॉमन करेंसी लाने के पीछे उद्देश्य है ब्रिक्स देशों के आर्थिक, भौगोलिक और जनसांख्यिकी हितों को सुरक्षित रखा जाए।

2009 में ब्रिक्स की स्थापना हुई थी और 2015 में इसने ‘न्यू डेवलपमेंट बैंक’ की स्थापना की। विकासशील देशों और उभरते हुए बाजारों में इंफ़्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए संसाधनों को जुटाया जा सके। पहले इसे ‘ब्रिक्स डेवलपमेंट बैंक’ के रूप में जाना जाता था। ब्रिक्स चाहता है कि ‘वर्ल्ड बैंक’ और ‘इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF)’ में पश्चिमी आधिपत्य को खत्म किया जा सके। G20, नाटो और यूरोपियन यूनियन जैसे पश्चिमी संघों से मुकाबले के लिए कई अन्य देश हैं जो ब्रिक्स में शामिल होना चाहते हैं।

लगभग 40 देश ऐसे हैं जो BRICS में शामिल होना चाहते हैं। कई देशों ने NBD में निवेश भी किया है, जिसमें अल्जीरिया ताज़ा है। अल्जीरिया ने 1.5 बिलियन डॉलर के निवेश के साथ बैंक से जुड़ने के लिए आवेदन दिया। बांग्लादेश और UAE 2021 में इस बैंक से जुड़ चुके हैं। अर्जेंटीना, जिम्बाब्वे और सऊदी अरब भी इसमें शामिल होने को लेकर विचार कर रहे हैं। सऊदी अरब दुनिया का सबसे बड़ा तेल विक्रेता है, ऐस में वो एशिया में अपने निवेश और बाजार को विस्तार देने के लिए इस बैंक से जुड़ना चाहता है।

रूस पर पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण ब्रिक्स के बाजारों पर भी खराब असर पड़ा है। NBD में 18.98% हिस्सा उसी का है। मार्च 2022 में NBD ने अनिश्चितताओं और पाबंदियों के कारण रूस में नए लेनदेन रोकने का ऐलान किया था। हालाँकि, भारत और ब्राजील ब्रिक्स को विस्तार देने का विरोध कर रहे हैं क्योंकि इससे समूह में चीन का प्रभाव बढ़ने की भी आशंका है। भारत चाहता है कि भविष्य में देशों को इसकी सदस्यता देने के लिए नियम-कानून बनें। वहीं ब्राजील नहीं चाहता कि इसे अमेरिका-EU के विरोधियों का अड्डा बना दिया जाए।

ब्रिक्स इस चीज को लेकर लगभग एकमत है कि द्विपक्षीय व्यापारों के लिए स्थानीय (उन देशों की) मुद्राओं का इस्तेमाल किया जाए। रूस का नाम लिए बिना प्रतिबंधों, बॉयकॉट और नाकेबंदियों से बचने के लिए इसकी ज़रूरत पर बल दिया गया। भारत ने रुपया-रूबल समझौते को पुनर्जीवित करने की कोशिश की, लेकिन रूस ने 40 बिलियन से अधिक के भारतीय रुपए सरप्लस में रखने से इनकार कर दिया और करेंसी को कन्वर्ट कराने में खर्च अधिक होने के कारण बात आगे नहीं बढ़ सकी।

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के UAE दौरे में रुपया-दिरहम को लेकर भी एक समझौता हुआ। बताया गया कि ये वैश्विक अर्थव्यवस्था में डॉलर के प्रभाव को कम करने के लिए नहीं था, बल्कि खाड़ी देशों में भारतीय रुपए के चलन को बढ़ाने और दोनों देशों के पेमेंट और मैसेजिंग सिस्टम को मजबूत करने के लिए हुआ। अब तक RBI ने 18 देशों को रुपए में व्यापार करने की अनुमति दी है। चीन पहले से ही युआन का इस्तेमाल कर के 120 देशों के साथ व्यापार कर रहा है। हालाँकि, निकट भविष्य में ब्रिक्स की कॉमन करेंसी आने की कोई उम्मीद नहीं है।

विश्लेषण इस पर भी हो रहा है कि क्या ब्रिक्स नया वर्ल्ड ऑर्डर स्थापित करेगा? ‘इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट’ ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ वॉरंट जारी कर रखा है, ऐसे में वो यूक्रेन से युद्ध के बीच दक्षिण अफ्रीका में होने वाले समिट में नहीं आएँगे, बल्कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से शामिल होंगे। रूस-यूक्रेन युद्ध और अमेरिका-चीन तनाव के बीच में ब्रिक्स की ये बैठक हो रही है। अभी हमने बताया कि ब्रिक्स देश कैसे GDP-जनसंख्या के मामले में G-7 से आगे हैं, लेकिन IMF में उनकी वोटिंग की हिस्सेदारी सिर्फ 15% ही है।

ग्लोबल साउथ (गरीब देशों) में भी असंतोष का माहौल है। दुनिया में असंतुलन की स्थिति का भय है, क्योंकि अमेरिका किसी भी देश पर प्रतिबंध लगा कर उसे अलग-थलग कर सकते हैं। भारत ने भी कहा है कि वो खुले विचार के साथ ब्रिक्स के विस्तार को देख रहा है। भारत का इस दिशा में सकारात्मक रुख है, ऐसे में ब्रिक्स का एक्सपेंशन तय लग रहा है। ये ब्रिक्स का 15वाँ समिट हो रहा है। 2019 के बाद पहली बार ब्रिक्स की इस तरह की कोई बैठक हो रही है।

अरावली की पहाड़ियों में छिपा था नूहं हिंसा का आरोपित आमिर, पुलिस ने एनकाउंटर के बाद किया गिरफ्तार

हरियाणा के मेवात के नूहं में हुई हिंसा का आरोपित आमिर गिरफ्तार हो गया है। वह अरावली की पहाड़ियों में छिपा था। सोमवार (21 अगस्त, 2023) रात एनकाउंटर के बाद वह पकड़ा गया। उसके पैर में गोली लगी है। उसके पास से अवैध कट्टा समेत 5 कारतूस बरामद हुए हैं।

नूहं में 31 जुलाई 2023 को हिंदुओं की जलाभिषेक यात्रा पर मुस्लिम भीड़ ने हमला किया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आमिर के तावड़ू में अरावली की पहाड़ियों के बीच सीलखो पहाड़ में बने एक खंडहर में छिपे होने की सूचना पुलिस को मिली थी। उसे गिरफ्तार करने के लिए पुलिस की एक टीम मौके पर पहुँची। आमिर ने पुलिस को देखते ही फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी फायरिंग की।

फायरिंग में पुलिस की एक गोली आमिर के दाएँ पैर में जा लगी। इसके बाद वह गिर गया और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल उसका इलाज नल्हड़ मेडिकल हॉस्पिटल में चल रहा है।

आज तक ने अपनी रिपोर्ट में आरोपित का नाम वसीम बताया है। उस पर ₹25000 का इनाम होने की जानकारी दी है। उस पर नूहं हिंसा के दौरान पुलिस से हथियार छीनकर फायरिंग करने का आरोप है। इसके अलावा तावड़ू में हत्या समेत दिल्ली-एनसीआर में करीब 100 आपराधिक घटनाओं में शामिल होने के भी आरोप हैं।

बता दें कि नूहं हिंसा के आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने 10 अगस्त को भी एनकाउंटर किया था। पुलिस को सूचना मिली थी कि हिंदुओं की जलाभिषेक यात्रा पर हुए हिंसक हमले के 2 आरोपित राजस्थान से नूहं लौट रहे हैं। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 2 आरोपितों को गिरफ्तार किया था। इनकी पहचान मुनसैद और सैकूल के रूप में हुई थी। गिरफ्तारी से पहले पुलिस और आरोपितों के बीच एनकाउंटर भी हुआ था। इस दौरान भी एक आरोपित को गोली लगी थी। आरोपितों के पास से कट्टा, कारतूस और बाइक बरामद हुई थी।

बुराड़ी का चर्च, सन्डे प्रेयर और दोस्त की बेटी का बलात्कार: जानिए दिल्ली के अधिकारी ने कैसे की हैवानियत, गिरफ्तारी से पहले भागने की भी कोशिश

दिल्ली पुलिस ने एक ईसाई अधिकारी को गिरफ्तार किया है, जिसने 3 महीने तक अपनी दोस्त की नाबालिग बेटी का बलात्कार किया। साथ ही उनकी बीवी सीमा रानी को भी गिरफ्तार किया गया है, जो पीड़िता को गर्भपात की गोलियाँ खिलाती थी। दिल्ली सरकार ने भी उसे निलंबित कर दिया है। प्रेमोदय खाखा नाम का ये अधिकारी दिल्ली की महिला एवं विकास विभाग में बतौर डिप्टी डायरेक्टर कार्यरत था। बुराड़ी में ये घटना हुई। नाबालिग लड़की लगातार आ रहे पैनिक अटैक के कारण अस्पताल में भर्ती है। गिरफ़्तारी से पहले आरोपित ने बीवी सहित भागने की कोशिश भी की थी।

घटना अक्टूबर 2020 से लेकर जनवरी 2021 तक की है, जब लड़की की उम्र मात्र 14 साल हुआ करती थी। फ़िलहाल पीड़िता 17 साल की है। अक्टूबर 2021 में पीड़िता के पिता की मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद उसकी माँ ने उसे आरोपित के घर पर पालन-पोषण के लिए रखा था। लड़की आरोपित को ‘मामा’ कह कर बुलाती थी। अब पता चला है कि दोनों परिवार 1998 में चर्च के माध्यम से संपर्क में आए थे। वो चर्च में रविवार की प्रार्थना अटेंड करना जाते थे, उसी दौरान इनकी मुलाकात हुई और वो करीब आए।

जिस चर्च के रोल को NCPCR (राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग) के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो भी कह चुके हैं कि इस पूरे प्रकरण में चर्च का रोल संदिग्ध है। ये पहले शाहदरा में स्थित था और इसका नाम है ‘अमेजिंग ग्रेस चर्च’। अपने जीवन में कई समानताओं के कारण दोनों परिवार करीब आए। दोनों परिवार मूल रूप से झारखंड की राजधानी राँची से ताल्लुक रखते हैं और ईसाई मजहब के लूथरवाद (ईसाई मजहब की प्रोटेस्टैंट शाखा का एक हिस्सा) से संबंध रखते हैं। जब वो दिल्ली आए, तो उन्होंने लूथरवाद का चर्च खोजना शुरू किया और उन्हें शाहदरा में उन्हें ये चर्च मिला।

इस चर्च की स्थापना 1992 में अजीत कुमार होरो ने की थी। वो शाहदरा के ही बिहारी कॉलोनी में रहता था और वहीं चर्च बनाया गया। वो भी राँची का ही रहने वाला था। उसे दिल्ली में लूथरवाद का कोई चर्च नहीं मिला था, इसीलिए उसने इस चर्च की स्थापना की। ये छोटा सा 3 दशक पुराना चर्च 2002 में मुखर्जी नगर चला गया था, उसके बाद 2015 में बुराड़ी चला गया। हालाँकि, मात्र 30 परिवार ही इस चर्च के सदस्य हैं। चर्च के करीबी लोगों ने बताया है कि दोनों परिवार पिछले 25-30 वर्षों से एक-दूसरे को जानते थे।

होरो समेत चर्च के अन्य सदस्यों का कहना है कि ये मानना कठिन है कि प्रेमोदय खाखा ने बच्ची के साथ बलात्कार किया। हालाँकि, अब तो ये भी साफ़ हो चुका है कि वर्कप्लेस पर भी उसने महिलाओं का यौन शोषण किया और जिस ‘सेवा कुटीर’ में वो सुपरिटेंडेंट था वहाँ मौजूद बच्चों के यौन शोषण की बात भी सामने आई थी। वहाँ वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप भी लगे थे। दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा कई पत्र इस संबंध में भेजे गए, लेकिन विभाग इसे नज़रअंदाज़ करती रही।

‘कौम के लिए 1-2 करोड़ मुस्लिम मर भी जाएँ तो कोई बात नहीं’: राज्यपाल रह चुके कॉन्ग्रेस नेता ने किया ‘तलवार से मुकाबले’ का ऐलान, बोले – ‘जय गंगा मैया’ कहना शर्म की बात

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व राज्यपाल अजीज कुरैशी ने ज़हर उगलते हुए अपनी इस्लामी कट्टरपंथी सोच का परिचय दिया है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस के दफ्तर में मूर्तियाँ बिठाना और हिंदुत्व की बातें करना डूब मरने वाली बात है। साथ ही उन्होंने ‘गंगा मैया की जय’ नारे को भी आपत्तिजनक करार दिया। उन्होंने घुड़की दी कि अगर ये सब कहने के लिए कॉन्ग्रेस पार्टी उन्हें निकाल देती है तो निकाल दे। अज़ीज कुरैशी के बारे में बता दें कि वो उत्तर प्रदेश के अलावा उत्तराखंड और मिजोरम के भी राज्यपाल रह चुके हैं।

साथ ही उन्होंने भड़काऊ बयान देते हुए कहा कि 22 करोड़ मुस्लिमों ने चूड़ियाँ नहीं पहन रखी हैं, इनमें से 1-2 करोड़ अगर मर भी जाते हैं तो कोई बात नहीं। अजीज कुरैशी ‘मध्य प्रदेश उर्दू एकेडमी’ के अध्यक्ष भी रहे हैं। 1973 में उन्हें मध्य प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार में मंत्री भी बनाया गया था। 1984 में उन्हें राज्य के सतना लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुना गया था। उनका परिवार अरब-पठान नस्ल से ताल्लुक रखता है और वो भोपाल से आते हैं। वो अक्सर उर्दू ही बोलते रहे हैं।

इतने बड़े-बड़े पदों पर काबिज रहने के बावजूद अब वो हिन्दू विरोधी विचारधारा का खुला प्रदर्शन कर रहे हैं। विदिशा के लटेरी में आयोजित कार्यक्रम में एक के बाद एक ज़हर उगलते हुए उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस हिंदुत्व के एजेंडे पर चल रही है, जो ठीक नहीं है। प्रियंका गाँधी द्वारा नर्मदा नदी की पूजा किए जाने पर भी उन्होंने निशाना साधा। उन्होंने कहा, “कॉन्ग्रेस के कुछ लोग आज बात करते हैं हिंदुत्व की, यात्रा की, जय गंगा मैया, जय नर्मदा मैया। शर्म की बात है। मुझे कोई डर नहीं है, निकाल दो पार्टी से।”

उन्होंने आगे कहा कि नेहरू के वारिश, कॉन्ग्रेस के लोग आज धार्मिक यात्रा निकालते हैं, जय बोलते हैं, ‘गर्व से कहो हिन्दू हूँ’ बोलते हैं। बकौल अजीज कुरैशी, कॉन्ग्रेस दफ्तर में प्रतिमाओं को बिठाया जाना डूब मरने की बात है। उन्होंने पूछा कि जब मुस्लिमों को आप पुलिस-सेना-नेवी में नहीं लेते, तो मुस्लिम वोट क्यों दे आपको? उन्होंने कहा कि हद एक हद तक बर्दाश्त कर लेंगे, लेकिन पानी अगर हद से गुजर जाएगा तो हमने कोई चूड़ियाँ नहीं पहन रखी हैं हाथों में।

अजीज कुरैशी यहीं नहीं रुके। उन्होंने और भड़काऊ बयानबाजी करते हुए कहा, “22 करोड़ में से अगर 1 करोड़ लोग शहीद हो जाएँ कौम के लिए, कौम का कर्ज अता करने के लिए, कौम का हक़ जमाने के लिए – तो कोई हर्ज नहीं। एक हद तक बर्दाश्त कर लेंगे उनकी ज्यादतियों को। उनकी मस्जिदें, घर और दुकानें जला दो, उनके बच्चों को यतीम कर दो, हमारी बहनों की हाथों की चूड़ियाँ तोड़ दो। एक हद तक बर्दाश्त करेंगे, लेकिन पानी हद से ऊपर गुजरेगा तो तलवार निकलेगी और तलवार से मुकाबला होगा।”

उन्होंने केंद्र सरकार पर भी हमला बोला। अजीज कुरैशी ने कहा कि इस देश में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ कि प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री की बातों से लोग डरें। उन्होंने ये तक कह दिया कि भारत में मुस्लिम मौत के साये में जी रहे हैं। उन्होंने बुलडोजर कार्रवाई और एनकाउंटर में अपराधियों की मौतों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वो ये नहीं कह रहे हैं कि ये सब मुस्लिमों पर हो रहा, लेकिन कार्रवाई का जो अनुपात है वो दिखाता है कि ये मुस्लिम विरोधी है।

मोनू मानेसर ने नहीं दिया हेट स्पीच, हिंसा में बिट्टू बजरंगी की गिरफ्तारी नहीं: ह​रियाणा की ADGP ममता सिंह, नूहं के नल्हड़ मंदिर में फँसे हिंदुओं को बचाया था

हरियाणा के मेवात के नूहं में 31 जुलाई 2023 को हुई हिंसा में गौरक्षक मोनू मानेसर और बिट्टू बजरंगी की भूमिका नहीं थी। यह बात हरियाणा की अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून और व्यवस्था) ममता सिंह ने कही है। उन्होंने कहा है कि मोनू मानेसर ने हेट स्पीच नहीं दिया था।

महिला आईपीएस अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया है कि बिट्टू बजरंगी की गिरफ्तारी नूहं में हिंसा भड़काने को लेकर नहीं हुई है। ममता सिंह वही पुलिस अधिकारी हैं, जिन्होंने हिंसा के दौरान नल्हड़ मंदिर में बंधक बने हिंदू श्रद्धालुओं को बचाया था।

एडीजीपी ममता सिंह ने 18 से बातचीत के दौरान कहा, “यदि आप 31 जुलाई की यात्रा से पहले मोनू मानेसर के सोशल मीडिया पोस्ट का ऑडियो सुनें, तो वह कहता है कि मैं यात्रा में शामिल होने आ रहा हूँ। आप भी इसमें शामिल हों’। मुझे नहीं लगता कि केवल यह ऐलान करना कि वह एक यात्रा के लिए आ रहा है, यह किसी भी तरह से हेट स्पीच के अंतर्गत आता है।”

वहीं, बिट्टू बजरंगी की गिरफ्तारी पर उन्होंने कहा, “मीडिया यह कह रही है कि बिटटू बजरंगी को हिंसा के लिए गिरफ्तार किया गया।लेकिन यह गलत है। दो अलग-अलग मुद्दे हैं। भड़काऊ पोस्ट के मामले में फरीदाबाद पुलिस ने केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया था। वहीं नूहं पुलिस ने इसलिए गिरफ्तार किया है, क्योंकि यात्रा के दिन बिटटू बजरंगी ने एडिशनल एसपी से झगड़ा किया था।”

उन्होंने कहा है, “बिट्टू तलवार और अन्य हथियार लेकर जा रहा था। इस सब चीजों की अनुमति नहीं थी। एडिशनल एसपी ने उन्हें रोकने की कोशिश की। लेकिन बजरंगी और उसके लोगों ने तलवार और हथियार वापस छीन लिए। बिटटू और उसके लोगों ने एडिशनल एसपी व उनकी टीम को काम करने से रोका। इसलिए पुलिस के काम में बाधा डालने के आरोप में उसे गिरफ्तार किया गया है।”

गौरतलब है कि नूहं पुलिस ने 15 अगस्त को फरीदाबाद स्थित घर से बिट्टू बजरंगी को गिरफ्तार किया था। यह कार्रवाई नूहं जिले की ASP उषा कुंडू की शिकायत पर दर्ज एफआईआर के आधार पर हुई थी। FIR में कुंडू ने भी कहा था कि 31 जुलाई 2023 को 15 से 20 व्यक्तियों का एक समूह नल्हड़ मंदिर की ओर जा रहा था। इनमें से कुछ के हाथ में तलवारें और त्रिशूल जैसे हथियार थे। इनसे पुलिसकर्मियों ने हथियार लेने की कोशिश की तो वे नारेबाजी करने लगे और हाथापाई पर उतर आए। हालाँकि इनसे हथियार लेने में पुलिस कामयाब रही। लेकिन शिकायत के अनुसार बाद में बिट्टू बजरंगी और उसके साथी सरकारी गाड़ी से फिर हथियार छीनकर ले गए।