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पश्चिम बंगाल के एक स्कूल में ब्लास्ट: टीचर और 10 छात्राएँ घायल, पुलिस कर रही मामले की जाँच

पश्चिम बंगाल के एक स्कूल में विस्फोट की घटना सामने आई है। यह विस्फोट मंगलवार (1 अगस्त, 2023) को बंगाल के उत्तर 24 परगना के बशीरहाट उपखंड के टाकी नगरपालिका में टाकी षष्ठीचरण नीलमाधव उच्च बालिका विद्यालय में हुई।

स्कूल की प्रयोगशाला में अमोनिया से भरे एक जार में ब्लास्ट हो गया। इसके कारण विज्ञान के शिक्षक समेत कम से कम 10 छात्राएँ गंभीर रूप से घायल हो गई हैं। घटना के बाद जहाँ घायल छात्राओं को अस्पताल पहुँचाया गया वहीं स्कूल की लेबोरेटरी में ब्लास्ट से अन्य छात्राओं में भी दहशत फैल गई है। 

स्कूल लेबोरेटरी में ब्लास्ट

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अर्नब गुहा दास नाम के विज्ञान के शिक्षक 12वीं कक्षा की कुछ छात्राओं के साथ काफी दिनों से बंद स्कूल के ‘प्रयोगशाला’ में साइंस की प्रैक्टिकल की क्लास ले रहे थे। उसी दौरान यह ब्लास्ट हुआ। हालाँकि, प्राथमिक जाँच के आधार पर यह दावा किया जा रहा है कि अमोनिया गैस से भरे एक जार के फटने से यह दुर्घटना हुई।

स्कूल में जब यह हादसा हुआ, तब छात्राएँ विभिन्न केमिकल्स डालकर कुछ प्रयोग कर रही थीं। रिपोर्ट के अनुसार, ब्लास्ट की तेज आवाज सुनकर विद्यालय के अन्य शिक्षक व छात्र दौड़कर जब प्रयोगशाला की तरफ आए तो पहले तो यह समझ नहीं पाए कि आखिर हुआ क्या है और धमाके की यह आवाज कहाँ से आई है। लेकिन जब लेबोरेटरी की ओर देखा तो शिक्षक और छात्राएँ घायल हालत में जमीन पर पड़ी हुई मिलीं। 

बता दें कि घायल शिक्षक और छात्राओं को अफरा-तफरी में लेबोरेटरी से बाहर निकाला गया और उन्हें टाकी ग्रामीण अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उनका इलाज चल रहा है। वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, छात्राओं की हालत गंभीर बताई जा रही है।  

जाँच के आदेश 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, विद्यालय ने बताया कि विज्ञान की यह प्रयोगशाला काफी दिनों से बंद थी। अभी तक हालाँकि यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि अमोनिया कंटेनर में विस्फोट कैसे और क्यों हुआ? पुलिस मामले की जाँच कर रही है। वहीं शिक्षा विभाग के हस्तक्षेप के बाद विद्यालय की ओर से भी इसकी जाँच का आदेश दिया गया है। 

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल के शिक्षा विभाग ने भी पूरी घटना को लेकर रिपोर्ट तलब की है। जिला उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने स्कूल के प्रिंसिपल से पूरी घटना की रिपोर्ट माँगी है।

मंदिर पर हमला नहीं, हिंदू बंधक नहीं… आरफा, जुबैर, लल्लनटॉप ऐसे बचा रहे इस्लामी कट्टरपंथियों को: FIR से लिबरल गैंग बेनकाब

हरियाणा के मेवात के नूहं में 31 जुलाई 2023 को हिंदुओं की जलाभिषेक यात्रा पर मुस्लिम भीड़ ने हमला किया। करीब 800-900 हथियारबंद इस्लामवादियों ने मंदिर में जल चढ़ाने आए हजारों भक्तों पर हमला किया। इससे मंदिर के कुछ हिस्से छतिग्रस्त हो गए। हालाँकि वामपंथी लिबरल कट्टरपंथियों को बचाने की कोशिश में लगे हुए हैं।

इस्लामवादियों के काले चेहरे को छिपाने में ऑल्ट न्यूज के मोहम्मद ज़ुबैर का नाम न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता। जुबैर ने ‘लल्लनटॉप’ की मंदिर के पुजारी के बयान वाली रिपोर्ट से 21 सेकंड की क्लिप के जरिए यह बताने की कोशिश की कि दंगाइयों ने मंदिर पर हमला नहीं किया था। हालाँकि इस मामले में ड्यूटी मजिस्ट्रेट मुकुल कथूरिया की शिकायत पर दर्ज FIR कुछ और ही कहती है।

इस्लामी भीड़ द्वारा मंदिर पर पथराव, गोलियाँ: FIR

नूहं हिंसा को लेकर दर्ज की गई कई एफआईआर ऑपइंडिया के पास है। ड्यूटी मजिस्ट्रेट के रूप में तैनात सिंचाई और जल संसाधन विभाग, हरियाणा के कार्यकारी इंजीनियर मुकुल कथूरिया की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई एफआईआर में से एक में साफ तौर पर कहा गया है कि 800-900 इस्लामवादियों ने मंदिर में मौजूद भक्तों पर पथराव किया और गोलियाँ चलाईं। हमले में मंदिर क्षतिग्रस्त हो गया।

हमले के समय डीएम कथूरिया, उनके ड्राइवर खुर्शीद, इंस्पेक्टर राजबाला और अन्य लोग जलाभिषेक यात्रा के दौरान ड्यूटी के लिए नल्हड़ मंदिर में तैनात थे। जब भक्त मंदिर में भगवान शिव की पूजा कर रहे थे, तभी स्थानीय मेवाती और राजस्थानी बोलने वाली इस्लामवादियों की भीड़ प्लानिंग के हिसाब से पास के खेतों और पहाड़ों से मंदिर की ओर आई।

(साभार:हरियाणा पुलिस)

कथूरिया ने दर्ज कराया है कि दंगाइयों के हाथों में डंडे, पत्थर और अवैध हथियार थे। वे अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगा रहे थे। भीड़ ने मंदिर में पहुँचकर पूजा में खलल डालने के लिए पथराव और गोलीबारी शुरू कर दी। ड्यूटी मजिस्ट्रेट के तौर पर उन्होंने स्थिति को शांत करने की कोशिश की और इस्लामिक भीड़ से पीछे हटने का अनुरोध किया। लेकिन दंगाइयों ने उनकी बात नहीं सुनी। वे अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगाते हुए मंदिर के करीब जाने लगे। इस दौरान फिर एक बार हिंदुओं को निशाना बनाकर फायरिंग की।

यह FIR भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 147, 148, 149, 323, 332, 353, 186, 188, 295 ए, 153 ए, 452, 427, 307 और शस्त्र अधिनियम की धारा 25 के तहत दर्ज की गई। एफआईआर में आदिल, तामिल, अरसाद, अजहरुद्दीन, कासिर, सकील, जुनैद, सलामुद्दीन, इकबाल, आजाद, इलियास, अकबर, राहुल पुत्र जूना, सलीम, इक्का उर्फ काला, तौहीद, याहाय, जावेद, शाहरुख, हारीस, अहमद, आसिफ, शोएब समेत कई दंगाइयों को नामजद किया गया।

वामपंथियों और लिबरलों का दावा: मंदिर पर हमला हुआ ही नहीं

मंदिर में हमले की खबरों के बीच ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर ने ‘लल्लनटॉप’ की रिपोर्ट की 21 सेकंड की क्लिप को रीट्वीट किया। इस क्लिप में मंदिर के पुजारी दीपक शर्मा ने कहा कि हमला मंदिर के करीब नहीं हुआ था।

दिलचस्प बात यह है कि जब ऑपइंडिया ने 4 मिनट से अधिक के वीडियो को देखा तो सामने आया कि पुजारी ने साफ तौर पर कहा था कि हमले के दौरान प्रशासन ने उन्हें बाहर आने से मना किया था। इसलिए वह बाहर नहीं आए। उन्होंने यह भी कहा था कि मंदिर के अंदर तक उन्होंने आवाजें सुनी थी। लेकिन हमला मंदिर से एक-डेढ़ किलोमीटर दूर हुआ। पुजारी के ये दावे किसी भी तरह से मेल नहीं खाते।

मंदिर के पुजारी ने जो कहा, उसमें से 3 मूल बातों को पढ़िए:

  1. पुजारी ने यह भी कहा, “मुझे इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है क्योंकि हमें अंदर रहने के लिए कहा गया था। श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता था। मैं बाहर नहीं गया।”
  2. पहाड़ों से हो रही पत्थरबाजी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने फिर कहा, “मैं फिर कहना चाहता हूँ कि मैं बाहर नहीं आया। मैं एक पुजारी हूँ। हम अंदर ही रहते हैं।”
  3. यह पूछे जाने पर कि उन्हें अंदर रहने के लिए क्यों कहा गया था, उन्होंने बताया, “लगभग 4,000 लोग अंदर फँसे हुए थे। इनमें महिलाएँ और लड़कियाँ भी शामिल थीं। अंदर रहना ही बेहतर था। मंदिर के अंदर कुछ नहीं हुआ। मंदिर से एक-डेढ़ किलोमीटर दूर जो कुछ भी हुआ हो।”

‘लल्लनटॉप’ के एक अन्य वीडियो में, रिपोर्टर ने मंदिर के पास मचाए गए आतंक को दिखाया है। जब वह जले हुए वाहनों, पथराव और टूटी हुई काँच की बोतलों के निशान दिखाते हुए सड़क पर जा रहे थे, तो यह स्पष्ट था कि दंगे मंदिर से एक-डेढ़ किलोमीटर दूर नहीं हुए। यही नहीं, इस वीडियो में ‘लल्लनटॉप’ ने मंदिर में भंडारे के लिए प्रसाद बनाने आए लोगों से भी बात की। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि वे घण्टों तक मंदिर में ही फँसे थे। इसके बाद सुरक्षा बलों द्वारा उन्हें बचाया गया।

‘द वायर’ की संदिग्ध पत्रकार आरफ़ा ख़ानम शेरवानी भी कहाँ पीछे रहने वाली थीं। आरफा ने कहा कि हरियाणा के गृह मंत्री कह रहे हैं कि मंदिर में भक्तों को बंधक बनाया गया था। लेकिन पुजारी दावों का खंडन कर रहे हैं।

‘द वायर’ ने पुजारी के हवाले से कहा, “लोगों को बंधक क्या बनाएँगे? वे परमात्मा की शरण में थे। अचानक पता चला की माहौल खराब है। इन लोगों को बंधक कैसे बनाया जा सकता है? वे सर्वशक्तिमान की शरण में थे। लेकिन उन्हें अचानक पता चला कि बाहर की स्थिति अच्छी नहीं है। चूँकि बाहर की स्थिति खराब हो गई थी, इसलिए लोग अंदर फँस गए।”

वामपंथी मीडिया रिपोर्टिंग को अगर हम फिर से पढ़ें तो पुजारी ने कहा है कि लोग मंदिर के अंदर फँसे हुए थे क्योंकि बाहर की स्थिति खराब थी। यह तो ठीक ऐसा ही हुआ कि लुटेरों द्वारा हमला किए गए बैंक में लोगों को ‘बंधक’ नहीं बनाया गया था, बल्कि वे सिर्फ ‘अंदर फँस गए’ थे।

दूसरी और महत्वपूर्ण बात – किसी भी 21 सेकंड के वीडियो के जरिए मेवात में हुई हिंदू विरोधी हिंसा को नहीं दिखाया जा सकता। पूरे वीडियो को देखें तो इस्लामिक भीड़ द्वारा मचाए गए आतंक से हुए नुकसान का जिक्र करते हुए रिपोर्टर ने कहा है कि हमला प्री-प्लान्ड लगता है। मतलब साफ है कि इस्लामिक भीड़ ने हमला किया था। लेकिन उन्हें बचाने की जल्दी में ज़ुबैर, आरफा जैसे लोगों ने पूरी बात पर ध्यान नहीं दिया… क्योंकि इन्हें फैलाना है प्रोपेगेंडा, मुस्लिमों को दिखाना है पीड़ित।

हिंदू यहाँ आएँ तो उन्हें काट दो: VHP ने मेवात के नेता मामन खाँ और आफताब को नूहं हिंसा के लिए ठहराया जिम्मेदार, कहा- दोगुने जोश से दोबारा होगी यात्रा

हरियाणा के नूहं जिले में हिंदुओं की ब्रजमंडल जलाभिषेक यात्रा पर कट्टरपंथी मुस्लिमों द्वारा 31 जुलाई 2023 को हमला किया गया था। इस हमले में 6 लोगों की मौत हो गई है। वहीं, अब तक 116 लोगों को हिरासत में लिया गया है। इस हमले का विश्व हिंदू परिषद देश भर में विरोध कर रही है।

विश्व हिंदू परिषद ने इस हिंसा के लिए कॉन्ग्रेस को दोषी ठहराया और कहा कि यह हिंसा एक दिन की शुरुआत नहीं थी। वीएचपी के महासचिव सुरेंद्र जैन ने कहा कि यह कई महीने पहले से की गई थी। इसकी तैयारी काफी दिन से चल रही थी।

सुरेंद्र जैन ने कहा कि मेवात का एक मुस्लिम नेता है मामन खाँ। यह कॉन्ग्रेस का विधायक है। मामन खाँ ने चार महीने पहले विधानसभा में कहा था कि किसी की हिम्मत है तो मेवात में घुसकर दिखा दे।

वीएचपी महासचिव ने कहा, “आज उन्होंने (मामन खाँ ने) ट्वीट किया है- मेवात में तरह-तरह की अफवाह चल रही है, आपको कोई चिंता करने की जरूरत नहीं है। वो हत्यारों को कह रहे हैं- मैंने आपके लिए पहले भी लड़ाई लड़ी थी, अब लड़ूँगा। विधानसभा में भी और बाहर भी।”

वीएचपी महासचिव सुरेंद्र जैन ने कहा कि एक और कॉन्ग्रेसी नेता हैं आफताब साहब। उन्होंने कहा कि अगर गाँव में पुलिस वाले आएँ तो उनके हाथ-पैर तोड़ दो। उनकी चिंदी-चिंदी कर दो। उन्होंने कहा कि आफताब मेवात में ही रहते हैं।

एक और कॉन्ग्रेसी नेता का हवाला देते हुए सुरेंद्र जैन ने कहा कि वो नेता कहते हैं कि जितने भी हिंदू आए हैं, वे वापस नहीं जाना चाहिए। इनको मार दो, काट दो। इनका खाना बना लो। इनके मांस को खा लो, लेकिन इनको जाने ना दो। जैन ने कहा कि ये सारे कुछ ऐसे फैक्ट्स हैं, जो सामने आए हैं।

सुरेंद्र जैन ने हिंदुओं पर हमलों के लिए इन नेताओं को दोषी ठहराया। उन्होंने कहा, “कल के नरसंहार के लिए जिम्मेदार हैं ये लोग। कल के नरसंहार के लिए जिम्मेदार हैं ओवैसी जैसे नेता, जो इनके पापों पर पर्दा डालने के लिए कहते हैं कि ये तो प्रतिक्रिया थी… भड़काया गया था।”

उन्होंने सवाल उठाया, “अगर किसी ने भड़काया तो क्या तो तुम बच्चों को मार दोगे? गोलियों से भून दोगे? मोर्टार चला दोगे? उनको जिंदा जला दोगे? पहाड़ों पर चढ़कर उनको गोलियों से मारोगे? पुलिस को मारोगे, उनकी चौकियाँ जला दोगे… ये किसी भी सभ्य समाज का लक्षण नहीं हो सकता।”

कॉन्ग्रेस एवं अन्य सेक्युलर नेताओं पर निशाना साधते हुए जैन ने कहा, “इन घटनाओं के लिए उन्होंने सेक्युलर नेताओं को दोषी ठहराया और कहा कि वो वोटों की खातिर इन्हें भड़काते हैं। राहुल गाँधी एवं ऐसे अन्य नेता जो टुकड़े-टुकड़े गैंग के साथ जुड़े हुए हैं वो इनको भड़काने की कोशिश करते हैं।”

सुरेंद्र जैन ने कहा कि हिंसा के कारण जलाभिषेक यात्रा अधूरी रह गई। उन्होंने कहा, “हम सभी मंदिरों में जा पाए। जल्दी ही आसपास के गाँवों में महापंचायत की जाएगी। यह यात्रा दोबारा कब शुरू होगी, इसका निर्णय समाज लेगा। यह यात्रा दोबारा होगी और पहले से ज्यादा जोर-शोर से होगी।”

सुरेंद्र जैन ने कहा कि इस घटना को लेकर हिंदू समाज में रोष है। उन्होंने कहा कि हरियाणा के मुख्यमंत्री से घटना में बलिदान हुए हिंदुओं के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपए देने की माँग की जाएगी। उन्होंने पूरे मेवात को चारों तरफ से सील करने की भी माँग की।

गौरतलब है कि इस घटना के विरोध में आज बुधवार को विश्व हिंदू परिषद एवं बजरंग दल के कार्यकर्ता देश भर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। इस घटना में शामिल आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई करने की माँग की जा रही है।

1992 दंगों में जिस गुरुकुल को किया तबाह, वहाँ फिर घुस रही थी मुस्लिम भीड़: खौफनाक मंजर देख एक व्यक्ति ‘विक्षिप्त’ – चश्मदीद ने सब बताया

हरियाणा के नूहं क्षेत्र में 31 जुलाई को मेवात शोभा यात्रा पर हुए हमले के बाद अब तक 44 FIR दर्ज हुईं हैं। इस हिंसा में अब तक 116 उपद्रवियों को गिरफ्तारियाँ हुईं हैं, जिन्हे रिमांड पर लेकर पूछताछ होने जा रही है। इलाके में रैपिड एक्शन फ़ोर्स उतार दी गई है। इस बीच घटना के चश्मदीदों ने ऑपइंडिया को हिंसा के दौरान मुस्लिम भीड़ द्वारा की गई क्रूरता के बारे में बताया। साथ ही सामने आए कई वीडियो में अल्लाह हु अकबर, नारा ए तकबीर बोलती भीड़ सड़कों पर घूमती दिखी।

जिस गाँव के शक्ति सैनी को मार कर बड़कली चौक के पास फेंक दिया गया था, वहाँ से एक पीड़ित हिन्दू ने ऑपइंडिया को सम्पर्क किया। सुरक्षा की चिंता में हमसे बात करने वाले व्यक्ति ने अपना नाम गुप्त रखने की माँग की। पीड़ित हिन्दू ने हमसे बताया कि भाड़स गाँव मुस्लिम बाहुल्य है। गाँव में लगभग 4500 वोट है, जिसमें लगभग 3800 वोट मुस्लिमों के हैं। गाँव में हिन्दुओं की आबादी में सैनी, प्रजापति और SC समुदाय के लोग हैं। गाँव के प्रधान का नाम शौकत है।

घटना के दिन का जिक्र करते हुए हमें बताया गया कि उस दिन आस-पास के गाँव में रहने वाले चरमपंथी मुस्लिमों की भीड़ टोली बना कर पूरे नूहं में घूम रही थी। यही भीड़ भाड़स गाँव में भी घुसी। गाँव के प्रधान से उन्होंने बीच से हट जाने के लिए कहा। दावा है कि भीड़ गाँव में बचे हिन्दुओं को मारना चाहती थी। हमें यह भी बताया गया कि ग्राम प्रधान शौकत ने जवाब दिया, “कर के तुम सब चले जाओगे और भुगतना हमें पड़ेगा।” बताया गया कि गाँव में थोड़ी देर पहले पुलिस का DSP आया था और गाँव के प्रधान से सबकी सुरक्षा करने में सहयोग करने के लिए कहा था।

पीड़ित हिन्दू ने हमें बताया कि भीड़ तीन बार गाँव में घुसने का प्रयास की। हर बार भीड़ में पहले से अधिक लोग हुआ करते थे। इस बीच पुलिस की मूवमेंट के बारे में पूछने पर हमें बताया गया:

“खाकी वाले तो अपनी खुद की जान बचाते छिप रहे थे।”

हमसे बात करने वाले शख्स ने यह भी बताया कि जब भीड़ गाँव में नहीं घुस पाई तो वह बड़कली चौक की तरफ बढ़ गई। यहाँ एक युवा आचार्य तरुण गुरुकुल चलाते हैं। गुरुकुल में कई छोटे-छोटे बच्चे वेदपाठ करते हैं। भीड़ इस गुरुकुल में घुसना चाह रही थी। सही समय पर बच्चों ने गुरुकुल के गेट बंद कर लिए, वरना बड़ी घटना हो सकती थी।

पीड़ित हिंदू हमसे बातचीत में काफी डरा हुआ था। हालाँकि वह अपने घर में था फिर भी काफी धीमी आवाज में बात कर रहा था। काँपती आवाज में उसने हमें आगे बताया कि गुरुकुल के बच्चों की चीखने और चिल्लाने की आवाजें काफी दूर तक सुनाई दे रहीं थीं।

बातचीत के दौरान यह भी दावा किया कि इस खौफनाक मंजर को देख कर गुरुकुल में खाना बनाने वाला रसोइया मानसिक विक्षिप्त सा हो गया है और अभी तक पागलों जैसी हरकतें कर रहा है। उसने बताया कि दूर कहीं पुलिस के सायरन को सुनने के बाद भीड़ तितर-बितर हुई और बच्चों की जान बच पाई।

ग्रामीण ने हमें आगे बताया कि गुरुकुल को साल 1992 में बाबरी ढाँचा ध्वस्त होने के बाद तबाह कर दिया गया था। आचार्यों ने फिर से उसे बसाया लेकिन इस बार उससे भी भयानक हालात दिखे। हालाँकि अब गाँव में रैपिड एक्शन फ़ोर्स तैनात है लेकिन हिंसा के बाद के 24 घंटे उन्होंने बिना किसी पुलिस सुरक्षा के काटने का दावा किया। इस पूरी बातचीत की रिकॉर्डिंग ऑपइंडिया के पास मौजूद है।

हस्तमैथुन, अप्राकृतिक सेक्स, लिंग, शराब, नग्नता: अक्षय कुमार की OMG-2 को सेंसर बोर्ड ने दिया ‘A’ सर्टिफिकेट, 27 बड़े बदलाव के बाद मिली रिलीज की हरी झंडी

हिंदुओं के भगवान पर आधारित विवादास्पद फिल्म ओ माई गॉड-2 (OMG-2) को सेंसर बोर्ड ने पास कर दिया है। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने इसे ‘A’ सर्टिफिकेट दिया है। ये प्रमाण पत्र तक फिल्म में 27 बदलावों के बाद दिए गए हैं। इसके अलावा भी कई सीन को बदला गया है।

गौरतलब है कि अक्षय कुमार और यामी गौतम की मुख्य भूमिका वाली इस फिल्म का टीजर और कई गाने रिलीज हो चुके हैं। हालाँकि, इसका ट्रेलर जारी नहीं किया गया था, क्योंकि सेंसर बोर्ड से इसे हरी झंडी नहीं मिली थी। अब कई सीन में बदलाव कर दिया गया है तो फिल्म भी जल्द ही रिलीज होगी।

इसका ट्रेलर आज 2 अगस्त 2023 को रिलीज किया जाएगा। अक्षय कुमार ने फिल्म का एक वीडियो शेयर करते हुए इंस्टग्राम पर इसकी जानकारी दी। साझा किए गए वीडियो में अक्षय कहते हैं- ‘रख विश्वास, तू है शिव का दास’। इसमें वह तांडव करते हुए भी दिखाई दे रहे हैं। 11 अगस्त को रिलीज होने वाली इस फिल्म की एडवांस बुकिंग शुरू हो गई है।

फिल्म में जो बदलाव किए गए हैं, उसको लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा हो रही है। कहा जा रहा है कि अक्षय कुमार पहले फिल्म में शिव बने थे। अब उनके किरदार को बदल दिया गया है और वे अब शिव के दूत और भक्त नजर आएँगे। इसमें ‘नंदी मेरे भक्त… जो आज्ञा मेरे प्रभु’ डायलॉग को जोड़ा गया है। इसके साथ ही शिवजी के दूत को नशे में होने के विजुअल को भी बदला गया है।

इसके अलावा, नगा साधुओं की नग्नता को भी हटा दिया गया है। उसकी जगह साधुओं को दिखाया गया है। इसके अलावा, एक विज्ञापन बोर्ड से कॉन्डोम का ऐड हटाया गया है। फिल्म में बोले गए शिवजी के लिंग को शिवलिंग या शिवरूप से बदला गया है। फिल्म में ‘मैं टाँग क्यों उठाऊँ’ डायलॉग को भी बदला गया है।

फिल्म में महिलाओं को लेकर मंदिर से की जा रही घोषणा ‘भगवान को भक्ति महिलाएँ नहीं देख सकतीं’ को बदलकर ‘ओ लाल शर्ट वाले भईया… बाबा का ध्यान करते रहें’ करने को कहा गया है। फिल्म में जहाँ-हाँ ‘सवोदय’ लिखा हुआ है, उसे भी बदलने को कहा गया है। प्रसाद के रूप में ‘अल्कोहल… व्हिस्की, रम’ चढ़ने की बात को ‘वहाँ मदिरा चढ़े हैं’ किया गया है।

फिल्म में सेक्स वर्कर द्वारा अप्राकृतिक सेक्स करते हुए दिखाई गईं कलाकृतियों के सामने किए जा रहे प्रश्न को भी बदलने के लिए कहा गया है। ‘स्त्री की योनि हवन कुंड है’ जैसे डायलॉग को भी हटाया गया है। एक डॉक्टर द्वारा हस्तमैथुन के बारे में की जा रही बात को भी बदलने के लिए कहा गया है।

एक लड़के द्वारा किए जा रहे हस्तमैथुन में भी बदलाव किया गया है। कोर्ट में जज को सेल्फी लेते हुए दिखाने और हराम शब्द को पाप से बदलने के लिए भी कहा गया है। इस तरह फिल्म में कुल 27 बड़े बदलाव किए गए हैं।

नल्हड मंदिर से जिन्दा बचा लिए गए थे प्रदीप कुमार, घर लौटते हुए मुस्लिम भीड़ ने मार डाला: घायल चश्मदीद का दावा- बच्चे-बूढ़े सबने घेर कर मारा

हरियाणा के नूहं इलाके में सोमवार (31 जुलाई 2023) को हिन्दू जलाभिषेक यात्रा पर मुस्लिम भीड़ ने हमला किया था। इस हमले में 2 होमगार्ड सहित मिठाई बनाने वाले शक्ति सैनी और बजरंग दल के अभिषेक राजपूत की हत्या कर दी गई। अब इसी हिंसा की भेंट प्रदीप कुमार भी चढ़ गए हैं। प्रदीप कुमार नल्हड मंदिर के पास हुए हमले में सुरक्षित बचा कर नूहं पुलिस लाइन तक लाए गए थे। दंगाई शायद उनकी ताक में बैठे थे। उन्हें मंगलवार (1 अगस्त 2023) को नूहं पुलिस लाइन से घर जाने के दौरान भीड़ ने घेर कर मार डाला।

ऑपइंडिया ने प्रदीप कुमार के साथ घटना के समय मौजूद कपिल कुमार त्यागी से बात की। कपिल त्यागी को भी इस हमले में काफी चोटें आईं हैं और उनका इलाज चल रहा है। कपिल त्यागी ने हमें बताया कि वो और प्रदीप पुलिस द्वारा नल्हड मंदिर से रेस्कयू करके नूहं की पुलिस लाइन लाए गए थे। रात में काफी देर तक पुलिस लाइन में रखने के बाद सुबह होने से पहले रात के लगभग 2 से 3 बजे के बीच पुलिस ने उन्हें गुरुग्राम तक छोड़ने की बात कह कर साथ चलने को कहा। कपिल की कार स्विफ्ट डिजायर को प्रदीप ही चला रहे थे। पीछे हिन्दू संगठनों से जुड़ीं 3 महिलाएँ भी बैठी थीं, जो इन दोनों के साथ अपने-अपने घरों के लिए रवाना की गईं थीं।

कपिल ने हमें आगे बताया कि उनके वाहन के साथ हिन्दू संगठन से जुड़े लोगों की एक और अर्टिगा कार चल रही थी। इन 2 वाहनों के आगे-आगे पुलिस की जिप्सी मौजूद थी। थोड़ी दूर जाने के बाद सोहना क्षेत्र में जिप्सी में मौजूद पुलिस वालों ने आगे रास्ता क्लियर होने की बात करते हुए हिन्दू संगठन के सदस्यों को बिना सुरक्षा के आगे जाने के लिए कहा। हालाँकि कपिल के मुताबिक वो चाहते थे कि पुलिस और आगे तक उनके साथ चले लेकिन जवाब में उन्हें सीमा क्षेत्र का हवाला दिया गया।

कपिल त्यागी का दावा है कि जिस सड़क से उन्हें जाना था, वो काफी सुनसान थी। पुलिस के बिना वो थोड़ी ही दूर चले थे कि एक अपरिचित स्कॉर्पिओ तेजी से उनके आगे से निकली। जब उनकी गाड़ी 2 से 3 किलोमीटर और आगे बढ़ी तभी सड़क के दोनों तरफ मुस्लिमों की भीड़ दिखाई पड़ी। लगभग 300 की संख्या में इस भीड़ में बच्चे से लेकर बूढ़े तक मौजूद थे। भीड़ ने कपिल की कार को घेर लिया और पत्थरबाजी करने लगी। पत्थरबाजी में कार के शीशे टूट गए। पीछे बैठी महिलाओं को भी चोटें आईं। इस बीच एक पत्थर कार चला रहे प्रदीप कुमार के सिर पर लगा और वो अचेत हो गए।

हमसे बात करते हुए कपिल ने आगे बताया कि अन्धेरा देख कर उन्होंने महिलाओं को कार से उतर कर भागने को कहा। इस बीच वो खुद ही भीड़ के सामने आ गए। भीड़ में कुछ लोग उन्हें घसीटने लगे और कुछ लोग कार में मौजूद अचेत हो चुके प्रदीप कुमार को बाहर खींचने लगे। महिलाएँ सम्भवतः कहीं आस-पास छिप गईं थीं। कपिल भीड़ से खुद को छुड़ा कर कभी भागते तो कभी भीड़ उन्हें फिर पकड़ लेती थी। इसी बीच कपिल की गाड़ी के साथ चल रही हिन्दू संगठन की एक अन्य अर्टिगा पर भी पत्थर चले लेकिन वो भीड़ से जैसे-तैसे निकल कर आगे चली गई।

कपिल का कहना है कि निकल कर आगे चली गई इसी अर्टिगा ने थोड़ी दूर पर चौराहे पर मौजूद पुलिस वालों को पीछे हो रहे हमले की जानकारी दी। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस टीम वहाँ पहुँची, जिसे देख कर भीड़ तितर-बितर हुई। पुलिस टीम ने ही कपिल को भीड़ के चंगुल से बचाया और आस-पास छिपी महिलाएँ भी जैसे-तैसे तब बच पाईं। कपिल का आरोप है कि हिंसक मुस्लिम भीड़ अपने साथ जाते-जाते उनके साथी प्रदीप कुमार को भी घसीट ले गई। बाद में अस्पताल में उनकी मौत की खबर मिली।

देहांत के समय प्रदीप कुमार का इलाज दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में चल रहा था। कपिल के मुताबिक वो घायल थे और उनको यह पता नहीं चल पाया कि प्रदीप को पुलिस ने कैसे बचाया और फिर कब अस्पताल ले गए। फिलहाल कपिल त्यागी का इलाज चल रहा है। उनको कई गंभीर चोटें आईं हैं

कपिल त्यागी इस बात को लेकर भी हैरान हैं कि मुस्लिम भीड़ को उनकी सटीक मुखबिरी कैसे हुई, जबकि वो सीधे पुलिस लाइन से निकले थे। मृतक प्रदीप कुमार गुरुग्राम में बजरंग दल के पदाधिकारी थे। वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के जिला बागपत के रहने वाले बताए जा रहे हैं। गुरुग्राम में वो छोटा-मोटा काम करके अपना और अपने परिवार का गुजारा करते थे। गुरुग्राम के हिन्दू संगठन से जुड़े लोगों का कहना है कि पुलिस उनके पार्थिव शव को सीधे पैतृक गाँव बागपत भेजना चाहती है।

दिमाग में खून के थक्के जमे हैं: ट्रेन में फायरिंग करने वाले चेतन के परिजनों ने बताई मानसिक हालत, साथी बोले- घटना से पहले तबीयत खराब की कही थी बात

जयपुर से मुंबई जा रही ट्रेन Jaipur Mumbai Express में रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स यानी आरपीएफ़ के एक जवान ने 31 जुलाई 2023 को चलती ट्रेन में चार लोगों की गोली मार दी थी। इस मामले में खुलासा हुआ है कि चेतन सिंह चौधरी नाम के इस इस जवान की तबीयत नहीं रहती है। परिवार ने बताया कि उसके दिमाग में खून का थक्का थमा हुआ है।

चेतन फिलहाल रेलवे पुलिस की हिरासत में है। जिन लोगों की चेतन ने हत्या की है, उनमें चेतन के एस्कॉर्ट ड्यूटी प्रभारी ASI टीकाराम मीणा भी शामिल थे। इसके अलावा अब्दुल कादिर, असगर और एक अज्ञात व्यक्ति की हत्या की गई है।

उस घटना को लेकर विपक्षी दल हेट क्राइम का आरोप लगा रहे हैं। हालाँकि, परिजनों का कहना है कि चेतन के दिमाग में खून का थक्का जमा है। इसका इलाज कराया जा रहा था। चेतन के सहकर्मी RPF जवान अमय घनश्याम आचार्य ने भी कहा है कि घटना से पहले चेतन ने तबीयत खराब होने की बात कही थी।

चेतन के परिजनों का कहना है कि वह हमेशा तनाव में और अवसादग्रस्त रहता था। चेतन की भाभी प्रीति चौधरी का कहना है, “उनकी तबीयत काफी समय से खराब है। उनका इलाज चल रहा था और वह दवाइयाँ ले रहे थे। उनके मस्तिष्क में खून का थक्का भी पाया गया था।”

चेतन की भाभी ने आगे कहा, “चेतन को गुस्से की समस्या नहीं थी, लेकिन वह हमेशा तनावग्रस्त और दबाव में रहते थे। वह परिवार से दूर रहते थे, इसलिए हम जान भी नहीं पाते थे कि वह अपनी दवाएँ समय पर लेते थे या नहीं।” परिजनों का कहना है कि चेतन कभी किसी विवाद में नहीं फँसा। घर-परिवार में सबसे अच्छा रिश्ता था। अपने सहकर्मियों से उसका कभी झगड़ा नहीं हुआ।

प्रीति ने कहा, “कुछ साल पहले घर की देहरी पर फिसलने से चेतन के सिर में चोट लगी थी। शुरू में सब ठीक था। दो-तीन साल पहले से उनके सिर में तेज दर्द रहने लगा। डॉक्टर को दिखाया गया तो उसने बताया कि शायद सिर में सूज़न आ गई होगी। जाँच हुई तो पता चला कि उनके सिर में खून के थक्के जम गए हैं।”

बाद की स्थिति के बारे में बताते हुए प्रीति ने कहा, “इसका इलाज चला, लेकिन ववो चीज़ों को भूलने से लगे थे। हमेशा सुस्त रहते थे। इसको लेकर उनसे घर में कोई कुछ नहीं कहता था।दवाई भी चल रही थी और सब कुछ ठीक सा था। हमें नहीं पता था कि ऐसा कुछ भी हो जाएगा।”

ट्रेन में मौजूद आरपीएफ कॉन्स्टेबल अमय घनश्‍याम आचार्य ने बताया कि घटना से पहले 33 वर्षीय चेतन ने कहा था कि वह अस्वस्थ है। इसके बाद उसे दूसरे कोच में स्थानांतरित कर दिया गया। वहाँ पर उन्होंने चेतन से रायफल ले ली और चेतन एक खाली सीट पर लेट गया। हालाँकि, वह ज्यादा देर तक नहीं सो सका।

थोड़ी बाद चेतन उठा और गुस्से में अपनी रायफल ली और मीणा की ओर गया। मीणा ने समझाने की कोशिश की, लेकिन वह शायद किसी की बात नहीं सुन रहा था। वह अलग ही दुनिया में था। तबीयत खराब होने की वजह से चेतन अगले स्टेशन पर उतर जाना चाहता था, लेकिन मीणा ने ऐसा करने से रोक दिया और कहा कि ड्यूटी के अभी दो घंटे बाकी हैं।

चेतन चौधरी उत्तर प्रदेश के हाथरस का रहने वाला है। साल 2007 में आरोपित के पिता बच्चू चौधरी का ड्यूटी के दौरान निधन हो गया था। इसके बाद चेतन को 2009 में आरपीएफ कॉन्स्टेबल की नौकरी मिली थी। वहीं, उसका भाई लोकेश चौधरी मथुरा में ट्रक ड्राइवर का काम करता है।

विपक्षी दल इस घटना को हेट क्राइम से जोड़कर भाजपा सरकार को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। हालाँकि, रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि इस घटना से पहले किसी तरह की बहस नहीं हुई थी। पश्चिमी रेलवे ने बताया है कि मामले की जाँच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है।

पश्चिमी रेलवे पुलिस कमिश्नर ने बताया कि चेतन की तबीयत गड़बड़ थी। इसी में उसने अपना आपा खो दिया। उसने पहले टीकाराम को मारा, उसके बाद उसे जो दिखा उसे मार दिया।

ये सब मुस्लिम भीड़ ने किया: सुनिए उस पुलिस वाले की बात, जो नूहं में घटनास्थल पर थे, पत्थरबाजी में जो घायल भी हुए

हरियाणा के मेवात क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नूहं जिले में सोमवार (31 जुलाई 2023) को हिंदुओं के ब्रजमंडल जलाभिषेक यात्रा पर कट्टरपंथी मुस्लिमों द्वारा हमला कर दिया गया। इस हमले में कई लोग मारे गए। वहीं, दर्जनों गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया। इस हिंसा के पीछे की कहानी एक-एक करके सामने आ रही है।

हिंसा के प्रत्यक्षदर्शी लोगों ने बताया कि किस तरह हिंसा को अंजाम दिया गया और उन्मादी भीड़ की वास्तविक मंशा क्या थी। कहा जा रहा है कि हिंदुओं पर हमले के दौरान एके-47 से भी फायरिंग की गई थी। कई लोगों ने बताया कि 14 साल छोटे-छोटे बच्चे भी फायरिंग कर रहे थे।

ऐसा ही एक और वीडियो सामने आया है, जिसमें हरियाणा पुलिस का एक घायल कर्मी नूूहं दंगों को लेकर जानकारी दे रहा है। वीडियो में उस शख्स के सिर पर पट्टी बंधी और उसके आसपास अन्य पुलिसकर्मी खड़े हैं। अंकुर सिंह नाम के एक ट्विटर यूजर ने इस वीडियो को शेयर किया है।

वीडियो में पुलिसकर्मी कहता दिख रहा है, “शोभायात्रा नॉर्मल चल रही थी। इसके बाद एकदम से भीड़ हुई और पथराव शुरू हो गया। बजरंग दल वाले निकल रहे थे, उसके बाद एकदम ये निकलना शुरू हुए… मोहम्मडन (मुस्लिम)। उन्होंने एक रैली सी निकालनी शुरू कर दी। बजरंग दल वाले आ रहे थे वापिस, जाने के लिए उस टाइम।”

बताते चलें कि मेवात (Mewat, Haryana) में सोमवार (31 जुलाई 2023) को भारी हिंसा हुई। हिंसा में 2 होमगार्ड जवानों और एक नागरिक की हत्या कर दी गई। घायलों की संख्या 60 से अधिक बताई जा रही है, जिनमें दर्जनों पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। पुलिस सहित ब्रजमंडल जलाभिषेक यात्रा में शामिल लोगों के 30 से अधिक वाहनों को या तो तोड़ डाला गया है या जला दिया गया।

तनाव को देखते हुए नूहं, गुरुग्राम, रेवाड़ी और फरीदाबाद में धारा 144 लागू कर दी गई है। स्कूल-कॉलेजों के साथ-साथ इंटरनेट को भी बंद कर दिया गया है। दंगाइयों के बीच फँसे लोगों को बचाकर नूहं पुलिस लाइन लाया गया है। बचाये गए लोगों का दावा है कि हिंसा की साजिश कम-से-कम 6 महीना पहले से रची जा रही थी।

हिन्दुओं को हरियाणा पुलिस ने नल्हड शिव मंदिर से बचाकर बाहर लाया है। बचाए गए लोगों में एक साधु के वेश वाले व्यक्ति ने बताया, “हिन्दुओं की पहली बस, जो मंदिर में जल चढ़ाकर गई, उसे 1 किलोमीटर बाद जला दिया गया। इसके बाद 14-15 और गाड़ियों को जलाया गया।”

पीड़ित ने आगे बताया कि मामले की जानकारी होने पर कुछ हिन्दू घटना के बारे में जानने गए तो उनके वाहनों को भी जला दिया गया। उन्होंने कहा कि उन पर हमले के लिए आतंकवादियों द्वारा प्रयोग किए जाने वाले AK 47 का इस्तेमाल किया गया था। एक अन्य पीड़ित ने कहा, “प्राचीन शिव मंदिर 3 तरफ से पहाड़ों से घिरा है। तीनों तरफ से गोलियाँ चलीं।”

मेवात में RAF का स्थायी स्टेशन स्थापित करेगी मोदी सरकार, अमित शाह जल्द रखेंगे आधारशिला: नूहं में हिंदुओं पर हमले के बाद रिपोर्ट में दावा

हरियाणा के मेवात में मोदी सरकार रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) का एक विशेष और स्थायी स्टेशन स्थापित करेगी। मुस्लिम बहुल यह जिला काफी संवेदनशील माना जाता है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक आरएएफ के स्थायी स्टेशन की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जल्द ही आधारशिला रखेंगे। उन्होंने गुरुग्राम के सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह को यह भरोसा दिलाया है।

यह खबर ऐसे समय में सामने आई है जब मेवात के नूहं में 31 जुलाई 2023 को हिंदुओं की जलाभिषेक यात्रा पर इस्लामी भीड़ ने हमला किया था। फायरिंग, पत्थरबाजी और आगजन की थी। हिंदू श्रद्धालु कई घंटों तक बंधक जैसी स्थिति में फँसे रहे थे।

फर्स्टपोस्ट ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि गुरुग्राम के सांसद ने केंद्रीय मंत्री अमित शाह से मुलाकात की है। इस दौरान उन्होंने मेवात में आरएएफ के स्थायी शिविर की अपनी पुरानी माँग को उनके सामने रखा। बताया जा रहा है कि शाह ने उन्हें इसकी जल्द आधा​रशिला रखने का भरोसा दिलाया है।

उल्लेखनीय है कि राव इंद्रजीत सिंह ने यह माँग 2014 में मेवात के तौरू में सांप्रदायिक हिंसा के बाद की थी। उस समय यह प्रस्ताव तत्कालीन गृह मंत्री राजनाथ सिंह को भेजा गया था। उन्होंने इसे अपनी सैद्धांतिक मँजूरी भी दे दी थी। इंद्री गाँव का चयन शिविर की स्थापना के लिए किया गया था। लेकिन इसके बाद से यह मामला लटका हुआ है। अब अमित शाह ने बिना किसी देरी के इसे आगे बढ़ाने की बात कही है।

वहीं हरियाणा के अतिरिक्त मुख्य सचिव टीवीएसएन प्रसाद ने केंद्रीय गृह सचिव को एक पत्र लिखकर एक सप्ताह के लिए रैपिड एक्शन फोर्स की 20 कंपनियाँ भेजने की माँग की है। इस पत्र में प्रसाद ने कहा है, “मुझे आरएएफ की 20 कंपनियों की माँग को लेकर आपको पत्र लिखने के लिए कहा गया है। प्रदर्शनकारियों, उपद्रवियों और असामाजिक तत्वों के हिंसक विरोध के कारण नूहं जिले में सांप्रदायिक तनाव, हिंसक घटनाएँ, जान माल को खतरा और सार्वजनिक अशांति की स्थिति उत्पन्न हो गई है।”

VHP और बजरंग दल करेंगे विरोध प्रदर्शन

हमले के विरोध में विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल दो अगस्त 2023 को देशव्यापी प्रदर्शन करेंगे। जिला मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन के दौरान जिहाद का पुतला फूँका जाएगा। इसकी घोषणा 1 अगस्त को मीडिया को जारी बयान में विहिप ने की है। साथ ही मेवात को मिनी पाकिस्तान बताते हुए संकल्प लिया है कि इसे हिंदुओं का कब्रिस्तान नहीं बनने दिया जाएगा।

‘उनका प्लान किसी तरह हिंदुओं को मंदिर में रोकने और रात में सफाया करने का था’: प्रत्यक्षदर्शी ने बताया नूहं में क्या चाहती थी हमलावर भीड़

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने मेवात के नूहं में हिंदुओं की जलाभिषेक यात्रा पर हुए हमले के पीछे बड़ी साजिश का अंदेशा जताया है। पीड़ित भी जो कुछ बता रहे हैं उससे पता चलता है कि हमला अचानक नहीं हुआ। इसकी पूरी तैयारी की गई थी। 31 जून के हुए इस हमले के शिकार बने एक विहिप कार्यकर्ता ने ऑपइंडिया से बातचीत में कहा है कि मुस्लिम भीड़ हिंदुओं का इंतजार कर रही थी। उनका प्लान हिंदुओं को रात तक रोककर रखने और सफाया करने का था। उन्होंने बताया कि 16-16 साल के लड़के भी फायरिंग कर रहे थे।

ऑपइंडिया को इस प्रत्यक्षदर्शी ने बताया, “भीड़ हिंदुओं के नल्हड़ महादेव मंदिर आने और उसके बाद आधे लोगों के फिरोजपुर झिरका की ओर जाने का इंतजार कर रही थी। जब कुछ हिंदू उस ओर चले गए तब मुस्लिमों ने गाड़ियों पर पथराव और फायरिंग शुरू कर दी। हम दर्शन कर फिरोजपुर झिरका जाने के लिए निकल रहे थे। तभी फोन आया कि वहाँ पथराव हो चुका है। जब हम वहाँ पहुँचे तो देखा कि गाड़ियों पर फायरिंग और पथराव हो चुका था। वहाँ हमारे कुछ लोग घायल पड़े हुए थे। जब हम घायलों को सँभाल रहे थे तभी 50-60 लोगों की भीड़ ने पथराव शुरू कर दिया। हम खाली हाथ थे। इसलिए कुछ नहीं कर सके।”

उन्होंने आगे बताया, “पथराव से बचने के लिए जब हम पीछे हटे तब जमकर फायरिंग होने लगी। 1-2 राउंड नहीं, बल्कि 200-250 राउंड फायरिंग हुई। समझ नहीं आ रहा था कि कहाँ से फायरिंग हो रही थी। वे पत्थर मारकर घर में छिप जाते थे। लेकिन हम लोग एकदम खुले में थे। वे जैसे चाह रहे थे, वैसे मार रहे थे। न जाने कितने लोगों को मेरे सामने गोली लगी है। गाड़ियों में जिंदा जला दिए गए वहाँ मौजूद पुलिस हमें हमारे हालात पर छोड़कर फरार हो गई थी। एक बजे से 6 बजे तक हम किसी तरह खुद को बचाते रहे।”

हमने उनसे लोगों को गाड़ियों में जिंदा जलाने के दावे को लेकर सवाल किया तो उनका जवाब था, “मीडिया दिखा नहीं रहा है। जिन लोगों को मौका नहीं मिला (भागने का) उन्हें जिंदा जलाया गया। बसें फूँक दी गईं। मस्जिद से हथियार से लैस 200-250 लोग निकल कर आए थे। जब फायरिंग होनी शुरू हुई तब हमने अपने कदम पीछे खींच लिए। तब उन लोगों ने सारी बसें और गाड़ियाँ फूँक दीं। इसके बाद जब हम मंदिर गए तब भी वहाँ 3 तरफ से घेरकर फायरिंग हुई। वहाँ पुलिस मौजूद थी। इसकी गवाह है। पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की थी।”

उन्होंने आगे बताया, “उनका मकसद था कि हिंदुओं को किसी तरह रातभर मंदिर में रोक लो। इसके बाद रात में घुसकर इनका नाम-ओ-निशान मिटा दो। नल्हड़ महादेव मंदिर में महिलाएँ, छोटी-छोटे बच्चे, बुजुर्ग डरे-सहमे बैठे हुए थे। पुलिस-प्रशासन ने आने के बाद जवाबी कार्रवाई की। इसके बाद हम लोगों को सही सलामत निकाला और फिर बसों के द्वारा सिविल लाइन ले जाया गया। जब हम अपने घर के लिए जा रहे थे, तब भी पथराव हुआ। उनकी तैयारियों को देखकर यह नहीं लगता है कि अचानक से हिंसा हुई है। इसके लिए पहले से तैयारी हो रही थी। सोलह-सोलह साल के लड़के घुटने पर बैठकर फायरिंग कर रहे थे।”