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अभी लोकसभा चुनाव हुए तो BJP गठबंधन को 325 सीटें, 111 पर सिमट सकती है कॉन्ग्रेस: टाइम्स नाउ नवभारत-ETG का सर्वे, बंगाल-बिहार में भी भाजपा का दबदबा

अगर अभी लोकसभा चुनाव होते हैं तो कौन जनता की पहली पसंद बनेगा – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या फिर राहुल गाँधी? लोकसभा चुनाव होने में अभी 1 साल से भी कम समय बचा है। ऐसे में ‘टाइम्स नाउ नवभारत’ ने एक सर्वे किया है, जिसमें जनता की पसंद सामने आई है। जहाँ एक तरफ भाजपा पूरी ताकत लगा कर लगातार तीसरी बार सत्ता में आने के लिए बेताब है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष भी गठबंधन बना कर मैदान में उतरने वाला है। पटना के बाद अब बेंगलुरु में उनकी बैठक होने वाली है।

उधर राजग भी अपने विस्तार में जुटा हुआ है। टाइम्स नाउ नवभारत-ETG के सर्वे में सामने आया है कि 285-325 सीटों के साथ भाजपा गठबंधन फिर से सत्ता में वापसी कर सकता है। वहीं दूसरी तरफ कॉन्ग्रेस पार्टी 150 सीटों के भीतर सिमट सकती है। अगर अभी चुनाव होते हैं तो पिछली बार के मुकाबले भाजपा की सीटें तो घटेंगी, लेकिन उसे पूर्ण बहुमत प्राप्त होगा। मध्य प्रदेश में भाजपा को 22 से 24 सीटें मिल सकती हैं। राजस्थान में भी NDA 20-22 सीटों पर रहेगी।

वहीं जिस राजस्थान में कॉन्ग्रेस पार्टी सत्ता में है, वहाँ पर उसे मात्र 3 सीटें मिलती हुई दिख रही हैं। पश्चिम बंगाल में भाजपा ने पिछली बार जो दबदबा बनाया था, वो उससे आगे बढ़ती हुई दिख रही है। यहाँ भाजपा को 18-20 सीटें मिलती हुई दिख रही हैं, वहीं वहाँ की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की सीटें इसी के आसपास होंगी। बिहार में भी भाजपा गठबंधन 22-24 सीटों पर जीत पाती हुई दिख रही है, वहीं राजद-जदयू-कॉन्ग्रेस महागठबंधन 16 से 18 सीटें जा सकती हैं।

पश्चिम बंगाल में TMC के खाते में 20-22 सीटें जा सकती हैं। कॉन्ग्रेस पार्टी को पूरे भारत में 111-149 सीटें मिल सकती हैं। TMC भारत में तीसरे नंबर की पार्टी बन कर उभर सकती है। YSRCP 24-25 सीटों के साथ तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभर सकती है, वहीं ओडिशा की सत्ताधारी पार्टी BJD के खाते में 12-14 सीटें जाएँगी। 1.35 लाख के सैम्पल में से सर्वे किया गया। 40% लोगों की प्रतिक्रिया डोर टू डोर जाकर ली गई, वहीं 60% से टेलीफोन पर बात की गई।

2 बार बैठी सुप्रीम कोर्ट, रात में दिया तीस्ता सीतलवाड़ को जमानत: ‘पद्मश्री’ के लिए पीड़ितों का इस्तेमाल, BBC का पत्रकार भी साजिश का साथी

गुजरात हाईकोर्ट ने प्रोपेगंडा एक्टिविस्ट तीस्ता सीतलवाड़ की जमानत याचिका रद्द करते हुए उन्हें तुरंत आत्मसमर्पण करने का आदेश सुनाया। हालाँकि, उसी दिन शाम को इसी मामले पर सुप्रीम कोर्ट बैठी और मामले को बड़े बेंच को हस्तानांतरित कर दिया। रात को फिर सुनवाई हुई और तीस्ता सीतलवाड़ को एक सप्ताह की राहत प्रदान कर दी गई। उन पर आरोप है कि उन्होंने 2002 में हुए गुजरात दंगों में निर्दोषों को फँसाने के लिए साजिश रची और जानबूझकर झूठे सबूत पेश करवाए।

आइए, जानते हैं कि गुजरात हाईकोर्ट ने तुरंत सरेंडर करने का आदेश देते हुए तीस्ता सीतलवाड़ को लेकर क्या कहा था। गुजरात उच्च न्यायालय ने स्पष्ट कहा था कि तीस्ता सीतलवाड़ को जमानत देने का अर्थ होगा कि दो समुदायों के बीच दुश्मनी को और बढ़ावा देना। 127 पन्नों के आदेश में जस्टिस निर्जर देसाई ने कहा कि अगर तीस्ता सीतलवाड़ को बेल दे दी जाती है तो इससे सांप्रदायिक ध्रुवीकरण बढ़ेगा और सामुदायिक वैमनस्य और गहरा होगा।

गुजरात के तत्कालीन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई भाजपा नेताओं और अधिकारियों को फँसाने की साजिश तीस्ता सीतलवाड़ ने रची थी। गुजरात उच्च न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि तीस्ता सीतलवाड़ ने पीड़ितों और और गवाहों का अपने फायदे के लिए सीढ़ी की तरह इस्तेमाल किया। उच्च न्यायालय ने कहा कि पत्रकार रहीं तीस्ता सीतलवाड़ ने पीड़ितों और गवाहों का सीढ़ी की तरह इस्तेमाल कर के अपना फायदा कमाया – वो न सिर्फ पद्मश्री से नवाजी गईं, बल्कि उन्हें योजना आयोग के सदस्य का पद भी मिला।

साथ ही हाईकोर्ट ने कहा कि गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और पूरी सरकारी मशीनरी को बदनाम कर के तीस्ता सीतलवाड़ ने सक्रिय रूप से एक लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को अस्थिर करने के लिए प्रयास किया। इसके तहत विभिन्न अदालतों से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक झूठे केस दर्ज करवाए गए। पीड़ितों और गवाहों को भड़का कर ऐसा करवाया गया। हाईकोर्ट ने ये भी पाया कि एक समुदाय विशेष की भावनाओं का इस्तेमाल कर के तीस्ता सीतलवाड़ ने पैसे जुटाए और इन पैसों का इस्तेमाल पीड़ितों के लिए नहीं किया।

गुजरात हाईकोर्ट ने कहा कि अगर ऐसे लोगों को छोड़ दिया गया तो भविष्य में ऐसे कई लोग पैदा हो जाएँगे जो किसी समुदाय की संवेदनाओं का दोहन कर के किसी खास राजनीतिक पार्टी को फायदा दिलाएँगे। पीड़ितों को भड़काया जाएगा कि न्यायपालिका से उन्हें न्याय नहीं मिल रहा है। जज निर्जर देसाई ने कहा कि सामाजिक कार्यकर्ताओं का स्वागत है, लेकिन वो पक्षपाती नहीं होने चाहिए। तीस्ता सीतलवाड़ ने कभी न्याय और शांति के लिए काम नहीं किया। इसमें रईस खान नामक एक व्यक्ति ने उनका सहयोग किया।

असल में रईस खान ने तीस्ता सीतलवाड़ को गुजरात 2002 दंगों के बाद बनाए गए राहत शिविरों की आंतरिक तस्वीरें मुहैया करवाई थीं। रईस खान को तीस्ता सीतलवाड़ ने कॉन्ग्रेस नेता अहमद पटेल से मिलवाया था। अहमद पटेल ने तीस्ता सीतलवाड़ को नरेंद्र मोदी की छवि खराब करने को कहा। उन्होंने कुछ ऐसा काम करने को कहा कि नरेंद्र मोदी को जेल हो जाए। तीस्ता सीतलवाड़ 40 दंगा पीड़ितों को लेकर एक मंच पर पहुँचीं, जहाँ अहमद पटेल भी मौजूद थे। तीस्ता ने BBC पत्रकार पंकज शंकर के साथ मिल कर पीड़ितों के कानों में ज़हर भरा।

फ्रांस में ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के नारों के बीच दफनाया गया नाहेल का शव, मस्जिद में इकट्ठा हुई भीड़: यहूदियों के मेमोरियल पर भी हमला, अब तक 2000 दंगाई गिरफ्तार

फ्रांस में नाहेल नाम के 17 वर्षीय लड़के की हत्या के बाद वहाँ हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। घटना के कुछ दिन बाद एक मस्जिद में समारोह करके नाहेल के शव को कब्रिस्तान में दफना दिया गया। इस दौरान उसके परिजनों के अलावा इब्न बदीस मस्जिद में भारी तादाद में भीड़ खचाखच भरी रही। किसी ने अगर फोटो या वीडियो बनाने की कोशिश की तो उसपर वहाँ मौजूद लोग काफी नाराज दिखे। लेकिन जो वीडियो सामने आई है उसमें भीड़ को अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगाते सुना जा सकता है।

बता दें कि फ्रांस के हालात मंगलवार से बिगड़ते जा रहे हैं। दंगाई हर जगह दंगा मचा रहे हैं। बड़ी-बड़ी इमारतों में आगजनी हो रही है। शोरूम में तोड़फोड़ और लूटपाट की जा रही है। सरकार लगातार इन्हें रोकने के लिए प्रयासरत है। लेकिन दंगाई अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे। फ्रांच के गृहमंत्री गेराल्ड डार्मनिन ने बताया कि उन्होंने स्थिति को संभालने के लिए 45000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया हुआ है। अब तक देश भर में 2000 दंगाई गिरफ्तार हो चुके हैं। बाकी हालात पर काबू करने का काम चल रहा है।

बताया जा रहा है कि दंगाइयों ने पुलिस विरोधी नारेबाजी करते हुए यहूदियों के मेमोरियल पर हमला कर दिया। यह स्मारक द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान निर्वासित 200,000 लोगों के साथ-साथ उन फ्रांसीसी लोगों को समर्पित है जिन्होंने नाजियों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी।

उल्लेखनीय है कि मंगलवार को पुलिस की गोली लगकर एक 17 साल के युवक की हुई हत्या के बाद से फ्रांस हिंसा की आग में जल रहा है। इस हिंसा का सबसे ज्यादा असर पेरिस, ल्योन और मार्सिले जैसे शहरों पर पड़ा है। पुलिस दंगाइयों को रोकने के लिए आँसू गैस का इस्तेमाल कर रही है। इन दंगों के कारण एक ओर जहाँ फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों की जर्मनी में होने वाली राजकीय यात्रा पर प्रभाव पड़ा है। वहीं फ्रांस की चिंता यह भी है कि इस बार रग्बी विश्व कप और पेरिस ओलंपिक खेल की मेजबानी उनके कंधों पर है। अगर दंगाइयों का यही हाल रहता है तो प्रभावित जगहों और चीजों को कैसे ठीक किया जाएगा।

शिक्षक शौहर ने दिया तीन तलाक, देवर छूता था प्राइवेट पार्ट: जेठ कहता था- मेरे साथ आकर सो जा, प्रेग्नेट कर दूँगा; पीड़िता के भाई से भी मारपीट

बिहार में मुजफ्फरपुर जिले से तीन तलाक का एक मामला सामने आया है। पीड़िता ने अपने देवर पर प्राइवेट पार्ट छूने और जेठ पर साथ में सोने के दबाव का भी आरोप लगाया है। शनिवार (1 जुलाई 2023) को पीड़िता से ससुराल वालों ने मारपीट की। इसकी शिकायत थाने में दर्ज करवाई गई है। पुलिस ने केस दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला मुजफ्फरपुर के थाना क्षेत्र काजी मोहम्मदपुर का है। मूल रूप से वैशाली जिले की रहने वाली पीड़िता उसरत परवीन का 2 साल पहले निकाह सातपुरा मिल्कीटोला मोहल्ले में मोहम्मद सलाम से हुआ था। मोहम्मद सलाम पेशे से शिक्षक बताया जा रहा है। पीड़िता का कहना है कि निकाह के बाद से ही उसे दहेज के लिए टॉर्चर किया जाने लगा। बच्चा नहीं होने को लेकर भी ससुराल वाले प्रताड़ित करते थे। कथित तौर पर शौहर की गैर मौजूदगी में देवर पीड़िता का प्राइवेट पार्ट टच करता था।

पीड़िता ने आरोप लगाया है कि जेठ भी बच्चे नहीं होने का ताना देता था। कहता था, ” मेरे साथ आकर सो जाओ, तुम्हें प्रेग्नेंट कर दूँगा।” पीड़िता का कहना है कि जब उसने जेठ और देबर की अश्लील हरकतों की शिकायत शौहर से की तो वह तीन तलाक देने पर उतारू हो गया। उसने शौहर पर मायके से दहेज़ में कार लाने के लिए दबाव बनाने का आरोप भी लगाया है। कहा है कि इनकार करने पर उसके साथ मारपीट की जाती थी। कई बार उसके ऊपर गर्म पानी फेंक दिया जाता था।

पीड़िता के अनुसार शनिवार को भी ससुराल वालों ने दहेज की माँग को लेकर उससे झगड़ा किया। उसकी पिटाई की। शौहर मोहम्मद सलाम तीन तलाक दे कर घर से निकल गया। इसके ससुराल वालों ने पीड़िता को घर से भगा दिया गया। जब उसका भाई आया तो उसके साथ भी मारपीट की गई। पीड़िता के अनुसार पहले भी शौहर तीन मौकों पर उसे तीन तलाक देने की कोशिश कर चुका है। लेकिन तब परिजनों के दखल से मामला शांत हो गया था।

रोबोटिक्स पढ़ो, भारत पर हमला करो: ISIS के प्लान में मैकेनिकल-इलेक्ट्रिकल इंजीनियर मुस्लिम युवा भी थे शामिल, NIA ने दाखिल की चार्जशीट

भारत में रोबोट से आतंकी हमले की साजिश रची गई थी। इसके लिए आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) ने मुस्लिम युवाओं को रोबोटिक्स की पढ़ाई करने के हुक्म दिए थे। इसमें शामिल कुछ मुस्लिम युवाओं ने मैकेनिकल और इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) के सप्लीमेंट्री चार्जशीट से यह खुलासा हुआ है। शुक्रवार (30 जून 2023) को दाखिल चार्जशीट में कर्नाटक के शिवमोगा जिले में ISIS से संबंध रखने वाले 9 लोगों को आरोपित बनाया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जिनके खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दी गई है उनके नाम मोहम्मद शारिक, माज मुनीर अहमद, सैयद यासीन, रीशान थाजुद्दीन शेख, हुजैर फरहान बेग, माजिन अब्दुल रहमान, नदीम अहमद केए, जबीउल्ला और नदीम फैजल हैं। ये सभी कर्नाटक के रहने वाले हैं। इनकी उम्र 22 साल से 32 वर्ष के बीच है। चार्जशीट में बताया गया है कि गिरफ्तार आरोपितों द्वारा रोबोटिक कोर्स किया जा रहा था। कोर्स पूरा करने के बाद आरोपित बड़े आतंकी हमलों की तैयारी में थे।

जानकारी के अनुसार माज मुनीर अहमद, सैयद यासीन, रीशान थाजुद्दीन शेख, माजिन अब्दुल रहमान और नदीम अहमद ने महज आतंकी हमलों को अंजाम देने के लिए मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। NIA के मुताबिक सभी 9 आरोपित भारत में आतंकी संगठन ISIS की विचारधारा को फैलाने का प्रयास कर रहे थे। लोगों में डर कायम करने के लिए आरोपितों ने शिवमोगा में जनवरी 2021 में IED विस्फोट किया था। इस केस की जाँच नवम्बर 2022 में NIA को सौंप दी गई थी।

NIA का दावा है कि सभी आरोपितों ने कर्नाटक के अलग-अलग हिस्सों की रेकी की थी। इन सभी का ISIS हैंडलर विदेश में बैठा था जो इन्हे निर्देश दिया करता था। इस हैंडलर से मोहम्मद शारिक, माज मुनीर अहमद और सैयद यासीन जुड़े थे। इन्होने अन्य आरोपितों को कट्टरपंथी बनाकर अपने साथ मिलाया था। 9 में से 2 आरोपितों मुनीर अहमद और सैयद यासीन के खिलाफ NIA ने मार्च 2023 में भी चार्जशीट दाखिल की थी।

26 लोग जिंदा जलकर मर गए, झूठ बोलता रहा शेख इस्माइल: बुलढाणा बस हादसे में ड्राइवर पर केस, RTO को मौके पर नहीं मिले टायर ब्लास्ट के सबूत

महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में हुई बस दुर्घटना के बाद खबर आ रही है कि पुलिस ने बस चालक दानिश शेख इस्माइल पर केस दर्ज कर लिया है। दानिश पर पुलिस को दुर्घटना के बारे में बरगलाने का और ‘टायर फटने का झूठ’ बोलने का आरोप लगा है। जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने शेख को गिरफ्तार करके अपनी हिरासत में ले लिया है। उसके ऊपर आईपीसी की धारा 304 और मोटर व्हिकल एक्ट की धारा 134, 184 और 279 लगाई गई है।

दुर्घटना में बचे लोगों में से एक शख्स ने बताया कि बस की दाहिनी साइड एक स्टील के खंभे से लड़ी थी जब ड्राइवर ने अपना कंट्रोल खोया। वहीं अधिकारियों ने जानकारी दी कि बस के पोल और डिवाइडर से टकराने के बाद वो पलट के गिर गई। उस समय जो लोग बस में आगे की तरफ थे वो बस के एक्जिट दरवाजे से फौरन निकल गए। लेकिन उसके कुछ ही देर में जब बस में आग लगी तो कुछ लोग खिड़की तोड़कर भी बाहर आए। इससे 8 लोगों की जान बची। मगर न निकल पाने की वजह से 25-26 लोगों की बस में जलकर मौत हो गई।

अमरावती रीजनल ट्रांस्पोर्ट ऑफिस ने इस मामले में अपनी जाँच के बाद बताया कि ड्राइवर द्वारा जो टायर फटने का दावा किया गया वो बिलकुल झूठा था। घटनास्थल से कोई रबड़ के टुकड़े नहीं मिले हैं। लोगों द्वारा दी गई जानकारी से ये एक मानवीय भूल के कारण घटित दुर्घटना जान पड़ती है। पुलिस को संदेह है कि चालक को नींद आ गई थी इसलिए उसने वाहन पर अपना कंट्रोल खो दिया था।

सीएम शिंदे ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए। मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपए मुआवजा देने का ऐलान किया है। उन्होंने बताया कि सरकार एक्सीडेंट के मामले में कड़े कदम उठा रही है ताकि फिर दोबारा ऐसी कोई दुर्घटना न हो।

बता दें कि शनिवार (1 जुलाई 2023) को विदर्भा ट्रैवल्स की बस 33 लोगों को लेकर नागपुर से पुणे के लिए 4 बजे रवाना हुई थी। ये बस यवतमाल जिले में करंजा बस स्टॉप पर रुकी थी। इसके बाद ही एक्सीडेंट हुआ। ड्राइवर और क्लीनर समेत 8 लोग किसी तरह बस से निकलने में कामयाब हुए वहीं 25 की बस में आग लगने के बाद जान चली गई। पुलिस ने जल चुके शवों को डीएनए टेस्टिंग के लिए भेज दिया गया है।

पहली बार वन डे वर्ल्ड कप में नहीं होगा वेस्टइंडीज, सहवाग बोले- शर्म की बात है: इमोशनल हुए गौतम गंभीर, कभी क्रिकेट में बोलती थी तूती

कभी क्रिकेट की दुनिया में वेस्टइंडीज की तूती बोलती थी। लेकिन इस साल भारत में हो रहे एकदिवसीय वर्ल्ड कप में वेस्टइंडीज नहीं खेलेगा। विश्व कप क्वालीफायर्स 2023 के सुपर सिक्स मुकाबले में स्कॉटलैंड से हार के बाद वेस्टइंडीज रेस से बाहर हो गया है। भारत के पूर्व क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने इसे शर्मनाक बताया है। वहीं उनके साथी क्रिकेटर और बीजेपी सांसद गौतम गंभीर वेस्टइंडीज के इस हश्र पर इमोशनल हो गए।

सहवाग ने ट्वीट कर कहा है, “कितनी शर्म की बात है। वेस्टइंडीज विश्व कप के लिए क्वालीफाई करने में असफल रहा। यह दर्शाता है कि केवल प्रतिभा ही काफी नहीं है। फोकस और अच्छे मैन मैनेजमेंट के साथ टीम पॉलिटिक्स फ्री होनी चाहिए। अब यहाँ से और नीचे जाने का कोई रास्ता नहीं है।”

ज़िम्बाब्वे में विश्वकप क्वालिफाइंग मैच हो रहे हैं। 1 जुलाई 2023 को हरारे स्पोर्ट्स क्लब में स्कॉटलैंड और वेस्टइंडीज का मुकाबला हुआ। यह मैचहुआ था। पहले खेलते हुए वेस्टइंडीज ने 182 रनों का टारगेट दिया। स्कॉटलैंड ने यह लक्ष्य 39 गेंदे बाकी रहते ही महज 3 विकेट खो कर हासिल कर लिया।

स्कॉटलैंड की टीम ने टॉस जीत कर वेस्टइंडीज को पहले बैटिंग करने के लिए आमंत्रित किया। वेस्टइंडीज की टीम 43.5 ओवरों में महज 181 रनों पर सिमट गई। वेस्टइंडीज की तरफ से जेसन होल्डर ने 45 रनों की पारी खेली। होल्डर के अलावा रोमारियो शेफर्ड ही स्कॉटलैंड की गेंदबाजी का कुछ देर सामना कर पाए। शेफर्ड ने 36 रन बनाने के लिए 43 गेंदें खेलीं। स्कॉटलैंड की तरफ से ब्रैंडन मैकुलम ने 3 जबकि क्रिस सोल, मार्क वाट और क्रिस ग्रीव्स ने 2-2 विकेट हासिल किए। स्कॉटलैंड के बल्लेबाजों ने ब्रैंडन मैकुलम की 69 रनों की पारी की बदौलत 182 रनों का टारगेट का महज 43.3 ओवरों में हासिल कर लिया।

वेस्टइंडीज की टीम अब तक 12 विश्वकप खेल चुकी है। वह साल 1975 और 1979 में विजेता रही थी। 1983 में फाइनल में उसे भारत से हार का सामना करना पड़ा था। लेकिन इस बार वह क्वालीफाई भी नहीं कर पाई है। बावजूद गौतम गंभीर कैरबियाई टीम के सपोर्ट में आगे आए हैं। उन्होंने ट्वीट कर कहा है, “मुझे वेस्टइंडीज से प्यार है। मुझे वेस्टइंडीज क्रिकेट से प्यार है। मुझे अब भी विश्वास है कि वे विश्व क्रिकेट में नंबर 1 टीम हो सकते हैं!”

बताते चलें कि वनडे क्रिकेट के वर्ल्ड कप 2023 (ODI World Cup 2023) का इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने शेड्यूल जारी कर दिया है। 5 अक्टूबर को इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच मुकाबले से इसकी शुरुआत होगा। फाइनल 19 नवंबर को होगा। भारत का पहला मुकाबला 8 अक्टूबर को ऑस्ट्रेलिया से होगा। पाकिस्तान और भारत की टक्कर 15 अक्टूबर को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में होगी। भारत की मेजबानी में होने वाला इस टूर्नामेंट में 46 दिनों में 48 मुकाबले होंगे। 

UP में रिटायर्ड दारोगा को दिनदहाड़े जरीफ अंसारी ने कुदाल से काटा, लेकिन Video कर रहे ‘दलित की हत्या सर्वण हिंदू ने की’ के दावे के साथ वायरल

उत्तरप्रदेश के मुजफ्फरनगर में पीएसी के रिटायर्ड दारोगा की हत्या का मामले में सोशल मीडिया पर साफ झूठ फैलाया जा रहा है। साउथ एशियन ह्यूमन राइट्स वॉच ने वीडियो को साझा करते हुए कहा है कि इस घटना ने पूरे देश को दहला दिया। ट्वीट के अनुसार एक रिटायर्ड दलित पीएसी इंस्पेक्टर को निर्ममता से मारने वाला शख्स एक अपर कास्ट हिंदू है।

इस ट्वीट के साथ वीडियो को ऐसे जोड़ा गया है कि कोई बाहर का शख्स उसे देखे तो यही सोचे कि भारत में अल्पसंख्यकों के अलावा दलितों पर कितने अत्याचार हो रहे हैं… हालाँकि हकीककत इससे थोड़ी अलग है।

रिटायर्ड पुलिसकर्मी की निर्मम हत्या का मामला मई 2023 का है। इस संबंध में एक रिपोर्ट ऑपइंडिया ने भी प्रकाशित की थी। हमने बताया था कि कैसे रिटायर्ड दलित दारोगा पर फावड़े से हमला कर करके उनकी जान ले ली गई। 17 सेकेंड में करीबन 9 बार उनके ऊपर फावड़े मारे गए। वीडियो वाकई ही दिल दहलाने वाली है। लेकिन असल में हत्यारा वो नहीं जिसे सोशल मीडिया पर बताया जा रहा है। हत्यारा जरीफ अंसारी नाम का शख्स है।

पूरा मामला मुजफ्फरनगर के सिखेड़ा गाँव का था। जहाँ 18 मई को इस जरीफ ने रिटायर्ड दारोगा गरीब दास की हत्या को अंजाम दिया था। सीसीटीवी वीडियो में उसे गरीबदास को ताबड़तोड़ फावड़े से वार करते देखा गया था। वीडियो में नजर आया था कि जरीफ ने 17 सेकेंड में गरीबदास पर 9 जानलेवा वार करने के बाद उनकी गर्दन और सिर पर कई बार पर वार किए थे। जिसके कारण उन्हें अस्पताल में भी बचाया नहीं जा सका।

जरीफ अंसारी ने इस घटना को अंजाम देने के बाद अपनी हरकत को पुलिस थाने जाकर कबूल किया था। शुरुआती पूछताछ में ये बात सामने आई थी कि गरीबदास के जरीफ अंसारी की पत्नी के साथ अवैध संबंध थे इसलिए उसने हमला किया। सीसीटीवी फुटेज में जरीफ के स्पष्ट दिखने के बाद पुलिस ने गरीबदास की हत्या मामले में जरीफ अंसारी को गिरफ्तार कर लिया था।

आगे बढ़ी रणबीर कपूर की ‘Animal’ की रिलीज डेट: ‘ग़दर 2’ के डर से निर्माताओं ने लिया फैसला? नए वाले ‘उड़जा काले काँवा’ पर 3 करोड़ व्यूज

रणबीर कपूर (Ranbir Kapoor) और रश्मिका मंदाना स्टारर फिल्म एनिमल (Animal Release Date) की रिलीज डेट टाल दी गई है। इससे पहले फिल्म 11 अगस्त को रिलीज होनी थी। चूँकि, 11 अगस्त को ही सनी देओल स्टारर ‘गदर 2’ (Gadar 2) और अक्षय कुमार की फिल्म ‘ओएमजी 2’ रिलीज होनी थी। ऐसे में माना जा रहा है कि बड़े क्लैश खासतौर से ‘गदर 2’ से बचने के लिए एनिमल की रिलीज आगे बढ़ाई गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि ‘एनिमल’ के मेकर्स को बॉलीवुड के बड़े क्लैश का अंदाजा हो गया है। ऐसे में मेकर्स ने फिल्म की रिलीज डेट आगे बढ़ाकर दिसंबर 2023 में रिलीज करने का फैसला किया है। हालाँकि, फिल्म कब रिलीज होगी इसकी अब तक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन रिपोर्ट्स में एनिमल को 1 दिसंबर या 22 दिसंबर 2023 को रिलीज करने की बात कही जा रही है। 

हालाँकि यदि फ़िल्म 1 दिसंबर को रिलीज होती है तो उसे एक बार फिर क्लैश का सामना करना होगा। दरअसल, 1 दिसंबर को ‘फुकरे 3’ और विक्की कौशल, मनोज बाजपेयी मल्टी स्टारर फिल्म ‘सैम बहादुर’ भी रिलीज होनी है। दोनों ही फ़िल्मों से फैंस को अच्छी खासी उम्मीद है। ऐसे में देखना होगा कि एनिमल के मेकर्स फिल्म को एक और क्लैश बचाते हैं या फिर रणबीर कपूर के स्टारडम पर दाव खेलने की कोशिश करेंगे।

धमाल मचाने को तैयार है ‘गदर 2’

‘गदर 2’ साल 2001 में आई फिल्म ‘गदर’ का सीक्वल है। फ़िल्म ‘गदर’ ने उस जमाने में दुनिया भर के बॉक्स ऑफिस पर  धूम मचाते हुए 111 करोड़ रुपए की कमाई की थी। ऐसे में फिल्म क्रिटिक ‘गदर 2’ से कहीं अधिक कमाई की उम्मीद कर रहे हैं। हालाँकि फिल्म के टीजर और गाने से ही इसका नजराना सामने आ चुका है।

दरअसल, 12 जून 2023 को रिलीज हुए ‘गदर 2’ के टीजर को यूट्यूब पर अब तक 2.8 करोड़ से अधिक बार देखा जा चुका है। वहीं, 29 जून को फ़िल्म का गाना ‘उड़जा काले कौआ’ रिलीज हुआ। इस गाने पर महज 2 दिन में ही यूट्यूब पर 3 करोड़ से अधिक व्यू आ चुके हैं। ऐसे में फिल्म का बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाना तय माना जा रहा है।

तेजस्वी के मंत्रालय में शाम तबादले सुबह स्टे, विधायकों-सांसदों से मुलाकात, शिक्षकों पर लाठियाँ, ‘फिट लालू’ के ‘दूल्हा’ राहुल… क्यों डरे हुए हैं नीतीश कुमार?

क्या बिहार में फिर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पलटी मारने वाले हैं? ये सवाल मीडिया में फिर से चर्चा का विषय इसीलिए बना हुआ है, जिसके दो कारण हैं – पहला ये कि वो जाने ही इसीलिए जाते हैं और दूसरा ये कि हाल में उन्होंने अपने विधायकों और विधान पार्षदों से धुआँधार मुलाकात की है। वो सभी सांसदों से भी मिलने वाले हैं। ऐसे में चर्चा गर्म है कि क्या वो फिर से महागठबंधन का दामन छोड़ कर भाजपा के साथ जाएँगे। आइए, विश्लेषण करते हैं कि क्या ये सचमुच संभव है?

हाल ही में हम सबने देखा कि किस तरह से बिहार में विपक्षी नेताओं की बैठक हुई। इसके बाद सबसे ज्यादा चर्चा लालू यादव और राहुल गाँधी की ही हुई। जहाँ लालू यादव अपने पुराने अंदाज़ में दिखे और खुद को पूरी तरह फिट बता कर एक प्रकार का सन्देश दिया, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने राहुल गाँधी को शादी करने की सलाह दी और कहा कि हम सब आपकी शादी में बरात में चलेंगे। राजनीति समझने वाले इस इशारे का मतलब लगा सकते हैं कि लालू यादव के लिए ‘दूल्हा’ कौन है।

अगर राहुल गाँधी ‘दूल्हा’ हैं और लालू यादव को भी ये स्वीकार्य है, तो निश्चित ही ये नीतीश कुमार के लिए बुरी खबर हो सकती है जिन्होंने अपने मन में प्रधानमंत्री पद की इच्छा दबाए पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु से लेकर लखनऊ और दिल्ली तक की दौड़ लगाई है। विपक्ष की बैठक में उन्हें शायद उतनी लाइमलाइट मिली नहीं जितना वो चाहते थे। दिल्ली के अध्यादेश पर अरविंद केजरीवाल और कॉन्ग्रेस भिड़ गए तो उधर अनुच्छेद-370 पर महबूबा मुफ़्ती और उमर अब्दुल्ला ने AAP को सुना दिया।

लेकिन, अबकी नीतीश कुमार के साथ दिक्कत ये है कि खुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ये कह चुके हैं कि भाजपा ने अब नीतीश कुमार और ललन सिंह (जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष) के लिए सारे दरवाजे बंद कर दिए हैं। ऐसे में अमित शाह इतनी जल्दी अपने कहे से पीछे हटेंगे, ये संभव नहीं है। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने तो हाल ही में कहा कि भाजपा ने नीतीश के लिए नो एंट्री लगा दी है। उन्होंने नीतीश कुमार पर भ्रष्टाचार और परिवारवाद को संरक्षण देने का भी आरोप लगाया

बिहार में स्वास्थ्य मंत्रालय में हुए तबादलों और अचानक उनपर लगी रोक के कारण भी नीतीश कुमार और उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के बीच अनबन के कयास लगाए जा रहे हैं। असल में हुआ क्या कि शाम के समय तबादले की अधिसूचना जारी की गई और सुबह में उस पर स्टे लग गया। इस सूची को रद्द किए जाने के बाद महागठबंधन सरकार की खूब किरकिरी हो रही है।स्वास्थ्य निदेशक प्रमुख ने नोटिफिकेशन जारी किया और विभागीय अपर मुख्य सचिव के OSD ने इस पर रोक लगा दी।

खास बात ये है कि स्वास्थ्य मंत्रालय तेजस्वी यादव के पास ही है। अब 9 संवर्ग के कर्मियों के स्थानांतरण में त्रुटियाँ बता कर इसे रोक दिया गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि किसे जानकारी दिए बगैर तबादले हुए थे – नीतीश या तेजस्वी? कुछ लोगों ने इसे अधिकारियों की आपसी पॉवर पॉलिटिक्स बता दी है, लेकिन हर बड़े नेता के विश्वासपात्र अधिकारी मंत्रालय में होते हैं ये किसी से छिपा नहीं है। गड़बड़ी डिप्टी सीएम के विभाग में हो रही है, ऐसे में सवाल उठना तो लाजिमी है।

चलिए, कुछ लोग इसे छोटी बात कह कर भी ख़ारिज कर सकते हैं और कह सकते हैं कि ये सब चलता रहता है, जहाँ एक पार्टी की सरकार है वहाँ भी 2 नेताओं के बीच ऐसी अनबन की खबरें आती रहती हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बारे में अब ये सुरक्षित रूप से कहा जा सकता है कि वो हमेशा असुरक्षित महसूस करते हैं – जिनके साथ हैं उनसे भी और जो विरोधी हैं उनसे भी। इतना ही नहीं, बिहार की जनता के प्रति भी खुद को लेकर उनके मन में असुरक्षा की ही भावना है।

आखिर तभी तो राजधानी पटना में कभी शिक्षक, कभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तो कभी छात्रों की पिटाई होती है। लेकिन, अब जब भाजपा ने अपने साथ लोजपा के दोनों धड़ों (एक अनाधिकारिक रूप से), मुकेश सहनी (लगभग आ ही गए हैं) और उपेंद्र कुशवाहा को अपने साथ जोड़ रखा है, ऐसे में इस प्रकार की हर एक घटना पर भी चौतरफा प्रहार होगा। ताज़ा खबर ये है कि 3000 शिक्षकों ने गाँधी मैदान से राजभवन की तरफ मार्च किया था, जिन पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया है और कई घायल हुए हैं।

शिक्षक अभ्यर्थियों को लेकर डोमिसाइल पॉलिसी में बदलाव कर के महागठबंधन सरकार ने निर्णय लिया है कि अब बिहार के बाहर के अभ्यर्थी भी इसमें शामिल हो सकते हैं। 1.7 लाख रिक्तियों के लिए पहले से ही बेरोजगारी से जूझते बिहार के लोग इससे परेशान हैं। पुलिस का कहना है कि विरोध प्रदर्शन बिना अनुमति के किया जा रहा था। चिराग पासवान ने कहा है कि नीतीश कुमार हर बात का जब लाठी से दे रहे हैं। उन्होंने नीतीश पर पीएम बनने की महत्वाकांक्षा सवार होने की बात करते हुए कहा कि छात्रों की माँग जायज है।

इस घटना पर टिप्पणी करने में मुकेश सहनी भी पीछे नहीं रहे। VIP के नेता ने तुरंत टिप्पणी की कि 18 वर्षों से सरकार चलाने के बावजूद नीतीश कुमार अब तक शिक्षकों के दिलों में जगह नहीं बना पाए हैं। उन्होंने भी शिक्षकों पर लाठीचार्ज की निंदा करते हुए कहा कि शिक्षक ही भविष्य तैयार करते हैं, ऐसे में उनके साथ ऐसा करना सही नहीं है। किस गठबंधन के साथ जाना है, उनके इसी बयान से कयास लगाए जा सकते हैं। अमित शाह के साथ उनकी बैठक भी हुई है।

चिराग पासवान, पशुपति कुमार पारस, मुकेश सहनी और उपेंद्र कुशवाहा के अलाव जीतन राम माँझी जैसे नेताओं के साथ भाजपा नीतीश कुमार के खिलाफ क्षेत्रीय महागठबंधन तैयार करने की ओर अग्रसर है। वहीं दूसरी तरफ नीतीश कुमार देश भर के नेताओं को खुश कर के भाजपा विरोधी गठबंधन तैयार कर रहे हैं। नीतीश कुमार उद्धव ठाकरे का हश्र देख चुके हैं, जिनके पास न सत्ता रही न पार्टी। ऐसे में उनके मन में एक असुरक्षा की बड़ी भावना ने घर कर लिया है, ये साफ़ है।

भाजपा ने नीतीश कुमार के लिए सारे दरवाजे बंद कर दिए हैं। 3 बड़े नेता (कुशवाहा, माँझी और सहनी) जो उनके साथ हुआ करते थे, वो छिटक गए हैं। शिक्षकों पर लाठीचार्ज और नियमों में परिवर्तन के बाद एक बड़े समूह के बीच उनकी थू-थू हो रही है। बिहार में एक के बाद एक पुल गिर रहे हैं, जिससे भ्रष्टाचार का आलम पता चलता है। नीतीश कुमार डरे हुए हैं, उद्धव का हश्र देख कर भाजपा से और विपक्षी एकता बैठक में लालू यादव का रवैया देख कर अपने साथी दल से। और हाँ, जनता से भी।