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दिल्ली का बॉस कौन, सुप्रीम कोर्ट ने खींच दी लकीर: पुलिस-कानून व्यवस्था-जमीन केंद्र की, ट्रांसफर-पोस्टिंग सहित बाकी सब NCT सरकार की

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की प्रशासनिक सेवाओं पर नियंत्रण के अधिकार के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने आज (11 मई 2023) अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि दिल्ली की प्रशासनिक सेवाओं पर दिल्ली में चुनी गई सरकार का अधिकार होगा। इसके अलावा अधिकारियों की पोस्टिंग और ट्रांसफर से जुड़े निर्णय भी दिल्ली सरकार कर पाएगी। वहीं केंद्र का अधिकार दिल्ली में व्यवस्था, पुलिस और जमीन से जुड़े मामलों में रहेगा।

दिल्ली की आम आदमी पार्टी और एलजी विनय कुमार सक्सेना के बीच चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एमआर शाह, जस्टिस कृष्णा मुरारी, जस्टिस हीमा कोहली और जस्टिस पीएमस नरसिम्हा ने सर्वसम्मति से अपना फैसला सुनाया।

पीठ ने कहा राज्य के पास भी शक्ति है, लेकिन राज्य की कार्यकारी शक्ति, संघ के मौजूदा कानून के अधीन होगी। कोर्ट ने कहा कि वो साल 2019 के जस्टिस भूषण के फैसले से सहमत नहीं है। प्रशासन चलाने की असल शक्ति निर्वाचित सरकार के पास होनी चाहिए। अगर संवैधानिक रूप से चुनी गई सरकार को ये अधिकार नहीं मिलते तो जवाबदेही के लिए ट्रिपल चेन का सिद्धांत निरर्थक हो जाएगा।

अदालत ने यह भी कहा कि अगर अधिकारी मंत्रियों को रिपोर्ट करना बंद कर देते हैं या उनके निर्देशों का पालन नहीं करते हैं, तो सामूहिक जिम्मेदारी का सिद्धांत प्रभावित होता है। अधिकारियों को लगता है कि वे सरकार के नियंत्रण से अछूते हैं, जो जवाबदेही को कम करेगा और शासन को प्रभावित करेगा।

इस फैसले के साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा दिल्ली में पब्लिक ऑर्डर, पुलिस और लैंड पॉवर एलजी के पास ही रहेगी। ऐसा इसलिए क्योंकि दिल्ली अन्य केंद्रशासित प्रदेशों जैसा प्रदेश नहीं है। कोर्ट ने कहा कि दिल्ली विधानसभा के पास भूमि, लोक व्यवस्था और पुलिस को छोड़कर सूची 2 में सभी विषयों पर कानून बनाने की शक्ति है।

बता दें कि दिल्ली सरकार और केंद्र के बी कामकाज के अधिकार को लेकर विवाद पुराना है। इस संबंध में एक फैसला 4 जुलाई 2018 को भी आया ता। हालाँकि सर्विसेज और अधिकारियों पर नियंत्रण जैसे मुद्दों को आगे की सुनवाई पर छोड़ दिया गया था। इसके बाद राजधानी दिल्ली में प्रशासनिक सेवाएँ के नियंत्रण का अधिकार किसके पास रहेगा इस पर एक फैसला साल 2019 में आया। लेकिन तब पीठ के दोनों जजों के मत अलग-अलग थे। आगे यह मामला मुख्य न्यायाधीश को रेफर किया गया ताकि तीन जजों की बेंच गठित हो सके। अंत में यह मामला पाँच जजों की पीठ ने सुना और 18 जनवरी 2023 को फैसला सुरक्षित रख लिया।

शिवसेना का झगड़ा अब सुप्रीम कोर्ट की 7 जजों वाली बेंच के हवाले, कहा- उद्धव ठाकरे ने खुद दिया इस्तीफा, इसलिए नहीं बहाल हो सकती उनकी सरकार

महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गुट की विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई करते सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (11 मई 2023) को मामले को बड़ी बेंच के पास भेज दिया। वर्तमान मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे समेत 16 विधायकों ने तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से बगावत कर दिया था। इससे वहाँ की महाविकास अघाड़ी (MVA) सरकार गिर गई थी।

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली 5 जजों की संवैधानिक पीठ ने इस मामले को 7 जजों की बेंच के पास भेज दिया है। इस पीठ में जस्टिस एमआर शाह, जस्टिस कृष्ण मुरारी, जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस पीएस नरसिम्हा शामिल रहे। मामला बड़ी बेंच को भेजे जाने के बाद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे सहित बगावत करने वाले 16 विधायकों पर फैसला फिलहाल टल गया है। सुप्रीम कोर्ट की बड़ी बेंच इन विधायकों की अयोग्यता के मामले में फैसला सुनाएगी।

उद्धव ठाकरे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी, देवदत्त कामत और अधिवक्ता अमित आनंद तिवारी पेश हुए। वहीं, एकनाथ शिंदे गुट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज किशन कौल, हरीश साल्वे, महेश जेठमलानी और अभिकल्प प्रताप सिंह शामिल हुए। 17 फरवरी 2023 को शुरू हुई इस मामले की सुनवाई में राज्यपाल कार्यालय की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह उद्धव सरकार की बहाली का आदेश नहीं दे सकता, क्योंकि उन्होंने फ्लोर टेस्ट का सामना किए बिना इस्तीफा दे दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर उद्धव ठाकरे ने इस्तीफा नहीं दिया होता तो यथास्थिति बहाल हो सकती थी। दरअसल, उद्धव ठाकरे के वकीलों ने राज्य में पुरानी सरकार बहाल करने की माँग सुप्रीम कोर्ट से की। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि पार्टी के आंतरिक विवाद में फ्लोर टेस्ट का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

सुनवाई के दौरान सर्वोच्च अदालत ने यह भी कहा कि फ्लोर टेस्ट के लिए राज्यपाल का फैसला गलत था और एकनाथ शिंदे समूह के व्हिप की नियुक्ति में भी स्पीकर गलत थे। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि महाराष्ट्र के राज्यपाल ने संविधान के अनुरूप काम नहीं किया था। राज्यपाल को बगावत करने वाले गुट के पत्र पर भरोसा नहीं करना चाहिए था। पत्र में यह संकेत नहीं था कि उद्धव ठाकरे ने समर्थन खो दिया है।

दरअसल, महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की सरकार के 16 विधायकों ने बगावत कर दिया था। उस दौरान एकनाथ शिंदे ने एक पत्र जारी कर कहा था कि उनके पास 35 विधायकों का समर्थन है। इसके बाद डिप्टी स्पीकर ने सभी 16 बागी विधायकों की सदस्यता रद्द करने का नोटिस दिया, लेकिन बागियों ने सुप्रीम कोर्ट का रूख किया और उन्हें वहाँ से राहत मिल गई।

इसके बाद 28 जून 2022 को राज्यपाल ने उद्धव ठाकरे को बहुमत साबित करने के लिए कहा। उद्धव ठाकरे गुट ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रूख किया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने फ्लोर टेस्ट पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। इसके बाद उद्धव ठाकरे ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। 30 जून को भाजपा के सहयोग से एकनाथ शिंदे महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री बने। विधानसभा में नए स्पीकर ने शिंदे गुट को सदन में मान्यता दे दी। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई तक इस मामले में चुनाव आयोग को भी किसी तरह का निर्णय लेने से रोक दिया था।

हिरोइन तो हिरोइन, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री का स्पेशल असिस्टेंट भी निकला जमूरा: कहा- RSS के कहने पर हिंसा, भारत में बँटी मिठाइयाँ

एक होते हैं नागरिक। एक होते हैं सठियाए नागरिक। पाकिस्तान (Pakistan) क्यों बर्बाद मुल्क है, इसका पता आप वहाँ के सठियाए लोगों के बयानों से भी लगा सकते हैं। अब ये सठियाए पाकिस्तानी अपने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरफ्तारी (Imran Khan arrested) के बाद भड़की हिंसा का तोहमत भारत पर मढ़ने में लगे हैं।

इसमें पाकिस्तानी हिरोइन से लेकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Shehbaz Sharif) के स्पेशल असिस्टेंट तक शामिल हैं। हिरोइन सहर शिनवारी (Sehar shinwari) ने इस हिंसा के लिए भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय एजेंसी राॅ पर एफआईआर की तमन्ना जताई थी। अब शरीफ के स्पेशल असिस्टेंट अत्ता तरार (Atta Tarar) ने भी इस हिंसा का जिम्मेदार भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को बताया है।

तरार ने बुधवार (10 मई 2023) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “जो लोग तोड़फोड़ और आगजनी कर रहे हैं, वे भारत से आरएसएस और बीजेपी द्वारा भेजे गए लोग हैं। पाकिस्तान में RSS के लोग सक्रिय है, जो ये सब करके देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।” उन्होंने कहा, “ये मुट्ठी भर लोग भाजपा और आरएसएस से संबंधित हैं। कल जो घटना (पीटीआई समर्थकों की हिंसा) हुई, वह आरएसएस के कहने पर हुई। भारत में भाजपा और आरएसएस ने इसका जश्न मनाया। भारत में मिठाइयाँ भी बाँटी गई हैं।”

तरार ने दावा किया, “इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद बड़ी संख्या में लोग उनके समर्थन में नहीं आए। लगभग 50 लोगों के केवल कुछ छोटे समूह थे, जिन्होंने यह जताया है कि वे राष्ट्रीय सुरक्षा संस्थानों के खिलाफ देश के अंदर और बाहर एक अभियान शुरू कर रहे हैं। इन लोगों की पहचान कर ली गई है। उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। सब पर आतंकवाद का मामला दर्ज होगा। उन्हें कोई नौकरी या वीजा भी नहीं मिलेगा। इसके साथ ही इन लोगों को करैक्टर सर्टिफिकेट भी जारी नहीं किया जाएगा।”

बता दें कि इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने बुधवार (10 मई 2023) को पूरे पाकिस्तान में बंद और प्रदर्शन का ऐलान किया था। इसको देखते हुए लगभग पूरे पाकिस्तान में इंटरनेट सेवा को बंद कर दी गई थी। लाहौर, पेशावर, क्वेटा, कराची और रावलपिंडी सहित कई जगहों पर हिंसा की खबरें भी सामने आईं। इस दौरान कई लोगों के मारे जाने और दर्जनों के घायल होने की बात भी सामने आई है। वहीं, बड़े पैमाने पर वाहनों और संपत्तियों को नुकसान पहुँचाया गया।

बम फेंका और सराय में जाकर सो गए: SGPC ने जारी किया CCTV फुटेज, गोल्डन टेंपल के पास तीसरे धमाके के बाद 5 गिरफ्तार

पंजाब के अमृतसर में स्वर्ण मंदिर (Golden Temple Amritsar) के पास बुधवार (10 मई 2023) देर रात धमाका हुआ। 5 दिनों के भीतर इस इलाके में हुआ यह तीसरा विस्फोट है। पुलिस ने 5 लोगों को गिरफ्तार कर इन धमाकों की गुत्थी सुलझा लेने का दावा किया है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी (SGPC) ने सीसीटीवी फुटेज जारी कर बताया है कि बम फेंकने के बाद संदिग्ध एक सराय में जाकर सो गए थे। प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष एचएस धामी ने इन धमाकों को पंजाब सरकार की नाकामी बताया है।

न्यूज एजेंसी एएनआई ने पंजाब पुलिस के सूत्रों के हवाले से बताया है कि अमृतसर विस्फोट की साजिश रचने वाले 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनका मकसद शांति भंग करना था। ब्लास्ट के लिए पटाखों वाला विस्फोटक इस्तेमाल किया गया था। गिरफ्तार लोगों में एक नवविवाहित जोड़ा भी बताया जा रहा है। यह जोड़ा गुरदासपुर का रहने वाला है। ये श्री गुरु राम दास सराय के कमरा नंबर 225 में ठहरे हुए थे।

बताया जा रहा है कि रात के 12:12 श्री गुरु राम दास सराय के टॉयलेट से विस्फोटक बाहर फेंका गया था, जिससे जोरदार धमाका हुआ। आसपास के दुकानदारों ने तत्काल इसके बारे में पुलिस को सूचित किया। इस बीच एसजीपीसी के कर्मचारियों को एक आदमी टाॅयलेट में जाता और बाहर निकलता दिखाई पड़ा। सीसीटीवी से ट्रेस कर उसे पकड़ा गया और पुलिस के हवाले कर दिया गया। इस बीच वह सराय में जाकर लेट चुका था। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि शुरुआती पूछताछ में ही नवविवाहित जोड़े ने धमाकों को लेकर सारा मामला साफ कर दिया। इसके बाद पुलिस ने उनके तीन अन्य साथियों को गिरफ्तार किया।

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष एचएस धामी ने ​इसे पंजाब सरकार की नाकामी बताते हुए कहा है कि पहले हुए दो विस्फोट की जाँच को लेकर राज्य सरकार ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। अगर उन्होंने मामले को गंभीरता से लेकर जाँच को होती तो इसका असर दिखाई देता। उन्होंने कहा, “रात को एक बार फिर हृदय विदारक घटना हुई, जिसने हम सभी को सचेत कर दिया है। मैं मौजूदा सरकार से कहना चाहता हूँ कि अगर आप इस पवित्र स्थल की रक्षा करने में नाकाम हैं, तो किसी और मौका दें। हम अपनी खुद की टास्क फोर्स को मजबूत करेंगे। हम पुलिस से इस मामले की गहन जाँच का अनुरोध करते हैं।”

बता दें कि स्वर्ण मंदिर के पास सबसे पहले 6 मई 2023 को अमृतसर के हेरिटेज स्ट्रीट में ब्लास्ट हुआ था। इस धमाके में करीब 6 लोग घायल हुए थे। शुरुआत में इसे रेस्टोरेंट की चिमनी में हुआ ब्लास्ट बताया जा रहा था, लेकिन बाद में घटनास्थल से कुछ संदिग्ध चीजें बरामद हुई थी। इसके बाद 8 मई 2023 को स्वर्ण मंदिर से लगभग 800 मीटर दूर एक और ब्लास्ट हुआ। इस बार कोल्ड ड्रिंक के कैन में बम डालकर उसे लटका दिया गया था।

दिल्ली में कुत्तों के आतंक का इलाज खोजने को सेमिनार, ‘पशु प्रेम’ के नाम पर मानवों में झूमाझटकी: योगिता भयाना की थप्पड़बाजी का Video वायरल

दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब (Constitution Club of India) में बुधवार (10 मई 2023) को एक सेमिनार का आयोजन किया गया था। विषय था- कुत्तों के काटने का आतंक, समाधान क्या। पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय गोयल की तरफ से आयोजित विचार गोष्ठी में इस आतंक का समाधान क्या मिला, यह स्पष्ट नहीं है। लेकिन यह गोष्ठी ‘पशु प्रेम’ के नाम पर हुई झूमाझटकी और थप्पड़बाजी का एक वीडियो वायरल होने के बाद से चर्चा में बनी हुई है।

वायरल वीडियो में दो महिलाओं को थप्पड़ का आदान प्रदान करते हुए देखा जा सकता है। इनमें से एक एनिमल एक्टिविस्ट योगिता भयाना है। वीडियो में देख सकते हैं कि धक्का-मुक्की के बीच योगिता एक महिला को थप्पड़ मारती है, जवाब में वह महिला भी उन्हें तमाचा खींच देती है।

मानवों के बीच हुए इस थप्पड़कांड की शुरुआत योगिता भयाना के नारेबाजी करते हुए अचानक मंच पर चढ़ने से हुआ। उन्हें और अन्य एक्टिविस्टों को जब सेमिनार में मौजूद लोगों तथा पुलिस ने रोकने की कोशिश की तो हाथापाई और गाली-गलौच शुरू हो गई। योगिता भयाना ने दावा किया है कि कार्यक्रम के आयोजकों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया। उन्होंने आरोप लगाया, “हम अपने मन की बात कहना चाहते थे। हमें मंच देने के बजाय उन्होंने हमें पीटना शुरू कर दिया।”

विजय गोयल ने भी अपने ट्विटर हैंडल से एक वीडियो साझा कर इस हंगामे के बारे में बताया है। उन्होंने कहा है, “बुधवार को हमने आवारा कुत्तों के काटने की समस्या पर कांस्टीट्यूशन क्लब में मीटिंग रखी थी। इस बैठक में पूरी दिल्ली के आरडब्ल्यूएस प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। यह बैठक तीन घंटे तक चली। इसमें आए सभी लोगों ने अपने-अपने विचार और आवारा कुत्तों के काटने की समस्या का समाधान बताया। जब हमारी मीटिंग हो रही थी, उसी के बराबर में मेनका गाँधी के नाम पर एक और मीटिंग रख ली गई। पता नहीं मेनका गाँधी को बदनाम करने के लिए या फिर उन्होंने ही यह मी​टिंग रखवाई। उन लोगों ने हमारी मीटिंग में आकर हंगामा किया। इस दौरान वो लोग कह रहे थे कि हम मीटिंग नहीं होने देंगे।”

गोयल ने कहा है कि देश भर में 6 करोड़ 40 लाख कुत्ते हैं। केवल दिल्ली के अंदर 6 लाख कुत्ते हैं, जो कहीं भी गली, मोहल्ले और बाग में लोगों को काट रहे हैं। इसलिए लोग इनसे बहुत परेशान हैं। उन्होंने हाथों में डंडा लेकर चलना शुरू कर दिया है। कुत्तों को लोग नफरत की निगाह से न देखें, सम्मान की निगाह से देखें। इसके लिए जरूरी है कि हम कुछ कदम उठाएँ। लेकिन उन लोगों ने हंगामा किया। बावजूद मीटिंग सफलतापूर्वक सम्पन हुई। हंगामे करने वाले लोगों को बाहर कर दिया गया। मीटिंग में दिल्ली नगर निगम द्वारा ज्यादा से ज्यादा कुत्तों की नसबंदी करने और सभी की गणना की करने की बात तय हुई। साथ ही सभी कुत्तों को रैबीज का टीका लगाना होगा और बेसहारा कुत्तों को गोद लेने की राष्ट्रीय नीति बनानी होगी।

बता दें कि हाल में दिल्ली-एनसीआर में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक पर कुत्तों के हमलों के कई मामले सामने आए हैं। मार्च 2023 में दिल्ली के वसंत कुंज इलाके में दो भाइयों को आवारा कुत्तों ने नोच-नोचकर मार डाला था। इनमें एक भाई की उम्र 7 साल थी और दूसरे की महज 5 साल थी। वहीं दिल्ली से सटे गाजियाबाद में 2022 में एक साल की बच्ची रिया पर आवारा कुत्ते ने बेरहमी से हमला कर दिया था। कुत्ते के हमले में बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई थी। 36 घंटे तक चले ऑपरेशन में पीड़िता को 115 टाँके लगे थे।

50 बच्चों में अकेला इंडियन और बाकी खिलाफ… NSA के बेटे ने सुनाया पाकिस्तान में पढ़ाई का किस्सा, कहा- ऐसे में राष्ट्रवाद खुद ही पैदा हो जाता है

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल (NSA Ajit Doval) के पाकिस्तान में काम करने से जुड़े कई किस्से हैं। लेकिन शायद कम ही लोगों को पता हो कि उनके बेटे शौर्य डोभाल (Shaurya Doval) ने पाकिस्तान में पढ़ाई भी की है। शौर्य ने 1981 से 1987 के बीच करीब छह साल पाकिस्तानी स्कूलों में पढ़ाई की है। उस समय उनके पिता इस्लामाबाद स्थित भारतीय दूतावास में तैनात थे।

शौर्य ने पाकिस्तानी स्कूलों में पढ़ाई का यह किस्सा लल्लनटॉप को दिए एक इंटरव्यू में सुनाया है। एक सवाल का जवाब देते हुए शौर्य ने बताया कि उनकी पढ़ाई देशभर में हुई है। मिजोरम से पढ़ाई शुरू हुई। इसके बाद कुछ समय सिक्किम में पढ़ाई की। फिर पाकिस्तान में। शौर्य ने बताया कि वे करीब 6-7 साल पाकिस्तान के इस्लामाबाद में रहे थे। जब उस समय सुरक्षा के हालात को लेकर उनसे पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उस समय अफगानिस्तान का क्राइसिस चल रहा था। पाकिस्तान का पूरा फोकस उधर था। पंजाब का संकट शुरू नहीं हुआ था। इसलिए पाकिस्तान में भारतीय राजनयिक और उनके परिवारों के लिए वैसा सुरक्षा खतरा नहीं था।

जब उनसे कहा गया कि पाकिस्तान में पढ़ाई करना अलग बात है तो शौर्य ने कहा कि यह कुछ ऐसा ही था जैसे आप देश के दूसरे हिस्सों में बड़े होते हैं, पढ़ते हैं। हाँ, केवल एक अंतर था कि 50 बच्चों में मैं अकेला इंडियन था और बाकी खिलाफ। ऐसे में आप जीवन में दो चीजें सीखते हैं। पहला, अपने देश से प्रेम करना। दूसरा, अकेले लड़ना। उन्होंने आगे कहा, “जैसे एक क्रिकेट मैच हो रहा है और 49 लड़के एक तरफ हैं, आप अकेले दूसरी तरफ तो फिर आपमें राष्ट्रवाद खुद ही पैदा हो जाता है। आपमें अकेले लड़ने की क्षमता खुद ही आ जाती है।”

इस दौरान शौर्य से पाकिस्तान के स्कूलों में इतिहास की पढ़ाई को लेकर भी सवाल किया गया। उन्होंने कहा कि उस समय उम्र कम होने की वजह से उन्हें इन चीजों की वैसी समझ नहीं थी। लेकिन वहाँ के बच्चों को चीजें अलग तरह से दिखाई जाती है। उनका इतिहास 1947 से शुरू होता। उससे पहले की हर चीज को वे नजरंदाज कर देते हैं। यदि थोड़ा बहुत पढ़ाते भी हैं तो इस तरह से जिससे मुस्लिामें को हिंदुओं पर सुपर दिखाया जा सके।

उन्होंने कहा, “उनमें एक गलत धारणा होती है कि 1947 के पहले वे हिंदुस्तान के हुक्मरान थे और 47 के बाद उन्होंने नई कंट्री बना ली और अब उसके हुक्मरान हैं। पाकिस्तानियों की हिस्ट्री सिंध में मोहम्मद बिन कासिम के आने के बाद शुरू होती है और इसे वह पाकिस्तान की हिस्ट्री मानते हैं। सिंधु घाटी सभ्यता में भी वे हड़प्पा और मोहनजोदड़ो के बारे में ही पढ़ते हैं और उसके बाद सीधे कासिम पर आ जाते हैं। गुप्त, मौर्य काल की कोई बात नहीं होती है। चोल वगैरह के बारे में तो उनका इंट्रेस्ट ही नहीं है।”

पाकिस्तान में इतिहास की ऐसी पढ़ाई को लेकर टिप्पणी करते हुए शौर्य ने कहा, “कहा गया है न कि अगर आप अनपढ़ हैं तो उसकी कीमत आपको चुकानी पड़ती है।” उन्होंने यह भी बताया कि पाकिस्तान में उनके कुछ दोस्त भी बने थे। लेकिन आज उनसे कोई संपर्क नहीं है। उन्होंने कहा, “भारत लौटने के बाद उनसे संपर्क खत्म हो गया, क्योंकि उस समय इंटरनेट जैसा कोई माध्यम नहीं था।”

The Kerala Story: राजनीति के कारण राज्य कर रहे बैन, विदेश में एकसाथ 37+ देशों में होगी रिलीज – कमाई में रणवीर-सलमान से आगे

‘द केरल स्टोरी’ (The Kerala Story) एकसाथ 37 से भी ज्यादा देशों में रिलीज होगी। शुक्रवार 12 मई 2023 को। फिल्म की हिरोइन अदा शर्मा ने ट्वीट कर यह जानकारी दी है।

मतलब जो प्यार इस फिल्म को अभी तक भारत के लोगों से मिला, वही अब विदेशी धरती पर भी होगा। कट्टरपंथी इस्लाम से जुड़ा जो मैसेज इस फिल्म के जरिए हिंदुस्तानी लोग देख-समझ पाए, वही अब विदेशी भी समझेंगे।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 37 देशों में से कुछ जगहों पर ‘द केरल स्टोरी’ हिंदी में रिलीज की जाएगी जबकि कुछ जगहों पर हिंदी के साथ-साथ तमिल में भी। जैसे आयरलैंड के लोग ‘द केरल स्टोरी’ (The Kerala Story) को सिर्फ हिंदी में देख पाएँगे जबकि इंग्लैंड में रहने वाले इसे हिंदी और तमिल दोनों भाषाओं में देख सकेंगे।

37 देशों के सिनेमा घरों में ‘द केरल स्टोरी’ के रिलीज होने का मतलब है – कॉन्ग्रेसी/वामपंथी विचारधारा वाले लोगों के घाव पर नमक रगड़ना। ऐसा इसलिए क्योंकि बैन लगा कर भी ये लोग ‘द केरल स्टोरी’ (The Kerala Story) के सक्सेस को रोक नहीं पाए। तुष्टिकरण की राजनीति के चलते पश्चिम बंगाल में फिल्म पर बैन लगाया गया। तमिलनाडु में सिनेमा घरों के मालिकों को नुकसान की धमकी देकर शैडो-बैन करवाया गया। हुआ क्या लेकिन?

हुआ यह कि ‘द केरल स्टोरी’ (The Kerala Story) रिलीज के पाँचवें दिन ही हाफ सेंचुरी पार कर गई। मंगलवार (9 मई 2023) तक इस फिल्म ने 2 राज्यों में बिना कमाई किए 56.86 करोड़ रुपए का बिजनेस कर लिया। 37 देशों में रिलीज के बाद फिल्म का मैसेज भी ग्लोबल दुनिया तक जाएगा, साथ ही साथ फिल्म का बिजनेस भी बढ़ेगा। दोनों मामलों में कॉन्ग्रेसी/वामपंथी लोगों की जलेगी।

The Kerala Story: कमाई में रणवीर-सलमान से आगे

मंगलवार (9 मई 2023) को ‘द केरल स्टोरी’ ने 11.14 करोड़ रुपए का बिजनेस किया। रिलीज के बाद पहले मंगलवार के कलेक्शन को देखा जाए तो 2023 की यह दूसरी सबसे सक्सेसफुल मूवी है। इससे ज्यादा शाहरुख की पठान (23 करोड़ रुपए) ही कमा पाई है।

रणवीर की ‘तू झूठी मैं मक्कार’ (6.02 करोड़ रुपए), सलमान खान की ‘किसी का भाई किसी की जान’ (6.12 करोड़ रुपए) और अजय देवगन की ‘भोला’ (4.4 करोड़ रुपए) के बिजनेस से काफी आगे निकल गई है ‘द केरल स्टोरी’ (The Kerala Story)

दोजख की आग, कुरान, इस्लामी अध्ययन… 5-6 साल में ही मैं हिंदू-विरोधी, राष्ट्र-विरोधी हो गई, माता-पिता को काफिर मानने लगी: अनघा जयगोपाल और विशाली शेट्टी की कहानी

सुदीप्तो सेन की फिल्म ‘केरल स्टोरी (The Kerala Story)’ ने इस्लामी धर्मांतरण की साजिशों को सार्वजनिक बहस का मुद्दा बना दिया है। कई पीड़ित खुद सामने आकर अपनी आपबीती सुना रहे हैं। अनघा जयगोपाल और विशाली शेट्टी दो ऐसी महिलाएँ हैं, जिन्होंने धर्मांतरण और फिर सनातन धर्म में वापस आने के अपने अनुभव बताए हैं।

अनघा जयगोपाल (Anagha Jayagopal) और विशाली शेट्टी (Vishali Shetty) ने अपने अनुभव का विस्तार से वर्णन किया है। दोनों का कहना है कि केरल स्टोरी ने न केवल केरल या देश के अन्य राज्यों की स्थिति के बारे में बताती है, बल्कि यह दुनिया भर में जो कुछ हो रहा है, उसकी भी वास्तविकता को दर्शाती है।

अनघा जयगोपाल की आपबीती

अनघा जयगोपाल केरल के एर्नाकुलम की रहने वाली हैं। उनके सहपाठियों और सहकर्मियों द्वारा उसका ब्रेनवॉश किया गया था। उन्होंने कहा, “मैं बौद्धिक जिहाद की शिकार थी, न कि इस फिल्म में दिखाए गए लव जिहाद की। लेकिन, लव जिहाद होता है। यह निश्चित रूप से मौजूद है।”

जयगोपाल ने कहा, “मेरी धर्मांतरण की कहानी 2013-2014 से शुरू होती है। फिल्म द केरला स्टोरी की मुख्य पात्र शालिनी उन्नीकृष्णन कई सवालों का सामना करती है। जैसे कि वास्तव में हमारे कितने भगवान हैं, हम इस प्रकार के देवताओं की पूजा क्यों करते हैं आदि। मुझे अपने रूममेट्स और सहकर्मियों आदि से इसी तरह के सवालों का सामना करना पड़ता था। उस समय मैं चुप रही, क्योंकि मैं इन सवालों का जवाब नहीं दे सकी थी।”

ब्रेनवॉश की अपनी कहानी को लेकर उन्होंने आगे बताया, “जब मैंने उन सवालों को अपने माता-पिता से पूछा तो वे भी उनका जवाब नहीं दे पाए। उन्होंने मुझसे कहा कि हम इन प्रथाओं का पालन कर रहे हैं, क्योंकि हमारे पूर्वजों ने ऐसा किया है। मैं संतुष्ट नहीं थी। मैंने सोशल मीडिया पर इसके बारे में और जानना चाहा, लेकिन वहाँ भी मुझे कोई ठोस जवाब नहीं मिला। इसलिए मैंने सोचा कि हिंदू धर्म का कोई मतलब नहीं है।”

जयगोपाल आगे कहती हैं, “इस तरह के सवाल पूछना धर्म परिवर्तन के लिए उनका पहला कदम है। वे आपको भ्रमित कर देंगे। वे आपका धर्म तय करना शुरू कर देंगे। इस चरण में भले ही आप चुप रहें और जवाब न दें, लेकिन वे धीरे-धीरे ब्रेनवॉश करने की प्रक्रिया शुरू कर देंगे। दूसरे चरण में वे हमारे धर्म की आलोचना करने लगे। उस समय भी मैं उनके प्रश्नों का कोई उत्तर नहीं दे सकी तो उन्होंने धीरे-धीरे मुझे बताया कि इस्लाम ही असली रास्ता है और अल्लाह ही एकमात्र ईश्वर है।”

जयगोपाल ने आगे कहा, “उन्होंने मुझे पैगंबर मोहम्मद और कुरान वगैरह के बारे में बताया और साथ ही उन्होंने मुझे बताया कि इस्लाम में कहा जाता है कि एक महिला को इस तरह के कपड़े पहनने चाहिए। तब वह नरक की आग से बच जाएगी। यदि कोई महिला अपने पति के अलावा अन्य पुरुषों के सामने खुद को प्रदर्शित करती है तो वह नरक की आग में जलती है। धीरे-धीरे उन्होंने मुझे उस विचारधारा में खींच लिया।”

डर का इस्तेमाल कर कैसे ब्रेनवॉश किया जाता है, इसको लेकर जयगोपाल आगे बताती हैं, “उन्होंने मुझे इस मनःस्थिति में बनाए रखने के लिए मुख्य रूप से नरक के भय का उपयोग किया। धीरे-धीरे, उन्होंने मेरे साथ कुरान के अनुवाद और एमएम अकबर और जाकिर नाइक के वीडियो साझा किए। मैंने उन सभी वीडियो को देखना शुरू कर दिया।”

उन्होंने आगे कहा, “धीरे-धीरे मैं अपने मस्तिष्क में इस्लामी विचारधारा को बैठाती गई और 5-6 साल के इस्लामी अध्ययन के बाद मैं हिंदू-विरोधी, राष्ट्र-विरोधी और यहाँ तक कि मानव-विरोधी हो गई। मैं ये मानने लगी कि गैर-इस्लामी सिर्फ काफिर होते हैं। कुरान में लिखा है कि काफिरों को कोई तवज्जो नहीं दी जानी चाहिए। कुरान में कहा गया था कि उनके साथ जितना हो सके क्रूर व्यवहार किया जाना चाहिए। मेरा ब्रेनवॉश किया गया था।”

खुद को हिंदू विरोधी बना दिए जाने को लेकर जयगोपाल कहती हैं, “मैं अपने माता-पिता को काफिर मानती थी। मैं हिंदू देवताओं, हिंदू धर्म और हिंदू संस्कृति से नफरत करती थी। उस समय हिंदू शब्द से मुझे सबसे ज्यादा नफरत थी। उन्होंने मुझे हिंदू धर्म, हिंदू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हर हिंदू संगठनके खिलाफ कई बातें बताईं। छह साल के बाद मैं समाज में एक मुस्लिम महिला के रूप में अपनी पहचान बनाना चाहती थी। इसलिए मुझे कानूनी तौर पर धर्म परिवर्तन करना पड़ा।”

अपने धर्मांतरण के बारे में और अधिक बताते हुए उन्होंने कहा, “साल 2020 में मैंने धर्म परिवर्तन केंद्र को कॉल किया। मैंने उनसे कहा कि मैं धर्म परिवर्तन करना चाहती हूँ। उन्होंने बताया कि फिलहाल लॉकडाउन है। इसलिए नए दाखिले नहीं लिए जा रहे हैं। मेरे पास और कोई चारा नहीं था। यह मेरे कार्यस्थल के पास था। मैंने नौकरी छोड़ दी और घर आ गई। वहाँ मैं एक मुस्लिम महिला की तरह इस्लाम का पालन करने लगी। मैंने हिजाब और फुल बाजू पहनना शुरू कर दिया। मैं इस्लाम में कही गई सभी बातों का पालन कर रही थी।”

यह पूछे जाने पर कि वह हिंदू धर्म में वापस कैसे आईं, अनघा जयगोपाल ने कहा, “उस समय RSS के कुछ कार्यकर्ताओं को मेरे बारे में पता चला। उन्होंने मुझे खोजा और उन्हें पता चला कि मैं धर्मांतरित होने जा रही हूँ। मेरा परिवार एक संगठन के साथ है, जो अर्श विद्या समाजम है। मेरे भाई मेरे पास आए और कहा कि यह मत सोचो कि उनके पास तुम्हारे सवालों का कोई जवाब नहीं है। यह मत सोचना कि तुम्हारे सवालों का जवाब किसी के पास नहीं है। कोई ऐसी जगह है, जहाँ सारे सवालों के जवाब मिल सकते हैं।”

जयगोपाल आगे कहती हैं, “मैंने कहा कि मैं एक शर्त पर वहाँ आने को तैयार हूँ। एक बार जब मैं उस जगह को छोड़ दूँगी तो मैं पूर्ण हिंदू या पूर्ण मुस्लिम हो जाऊँगी। इस शर्त के साथ मैं अर्श विद्या समाजम में गई। वहाँ मैं आचार्य श्री मनोज से मिली। उन्होंने कुरान और हदीस के ही तथ्यों की ओर इशारा करके मुझे इस्लाम की धोखाधड़ी और खतरे का एहसास कराया। मुझे एहसास हुआ कि मैं उस रास्ते पर कितना खतरनाक तरीके से जा रही थी।”

वह आगे बताती हैं, “मैंने फैसला किया कि मैं जिस दौर से गुजर चुकी हूँ, वह किसी और लड़की को नहीं झेलना चाहिए। इसलिए, मैंने जीवन भर के लिए अर्श विद्या समाज के साथ काम करने का फैसला किया। मैं पिछले तीन साल से अर्श विद्या समाज से जुड़ी हुई हूँ। अब भी हमें प्रतिदिन लगभग 10 से 20 फोन कॉल आ रहे हैं कि हमारा बच्चा कट्टरपंथी बन रहा है। कृपया हमारी मदद करें।”

विशाली शेट्टी की आपबीती

अनघा जयगोपाल की तरह ही विशाली शेट्टी ने भी धर्मांतरण के अपने अनुभव को साझा किया। उन्होंने कहा कि फिल्म ने मजबूती के साथ सच्चाई को सामने रखा है। उन्होंने कहा, “कट्टरवाद और इस्लाम में मेरा ब्रेनवॉश मेरे कार्यस्थल में हुआ। मैं बेंगलुरु में एक आईटी कंपनी में काम कर रही थी। मैंने केरल में शुरुआत की और फिर बेंगलुरु आ गई। यहीं से इस्लाम में मेरा कट्टरवाद शुरू हुआ।”

विशाली बताती हैं, “मेरे सहकर्मियों ने मुझसे मेरे धर्म के बारे में सवाल पूछने शुरू कर दिए। इसकी शुरुआत में मैंने सामान्य ज्ञान और तर्क के साथ बचाव करने की कोशिश की, लेकिन बाद में मेरे पास उनके सवालों के जवाब नहीं थे। उस समय मेरे मन में भ्रम पैदा होने लगा। उन्हें उस शून्यता का आभास हो गया और उन्होंने अपनी विचारधाराओं को मेरे सामने रखने लगे।”

विशाली आगे बताती हैं, “उन्होंने मुझे इस्लामी विचारधारा के बारे में जानकारी देनी शुरू कर दीं। बा में मुझे लगने लगा कि कि वे जो कह रहे हैं, वह सही है। इस दौरान आपको लगने लगता है कि आप अब तक जिस धर्म का पालन करते आ रहे हैं, वह पूरी तरह से गलत है। मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ। मैं अर्श विद्या समाज के संपर्क में आई और वहाँ हम कट्टरवाद की भ्रांतियों को समझ पाए। इसके बाद एक बार फिर हम सनातन धर्म में वापस आ गए।”

उन्होंने ‘द केरल स्टोरी’ और उस राज्य की वास्तविकता के बारे में पूछे जाने पर कहा कि यह सिर्फ केरल तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, “हमने फिल्म देखी है। फिल्म जो दिखाती है, उससे हम आपको बता सकते हैं कि यह वही है जो आज न केवल केरल और भारत के कई जगहों पर, बल्कि दुनिया भर में हो रहा है। समाज में क्या हो रहा है यह फिल्म सटीक ढंग से दर्शाती है।”

धर्मांतरण करने वाले लोगों की घरवापसी के बारे में विशाली ने बताया, “अर्श विद्या समाज पिछले 23 वर्षों से धर्मांतरित लोगों को वापस सनातन में लाने का कम कर रहा है। अपने अनुभव में ही हम 7000 से अधिक लोगों को वापस ला चुके हैं। यह एक कदम-दर-कदम रणनीतिक धर्मांतरण प्रक्रिया है, जो अपने चरम रूप में उस हद तक कट्टरता की ओर ले जा सकती है, जहाँ ब्रेनवॉश किया गया व्यक्ति आईएसआईएस में शामिल हो जाता है। कई मामलों में हम उन्हें पहले चरण में वापस ला देते हैं। अगर उन्हें सनातन में वापस नहीं लाया गया होता तो निश्चित रूप से वे उस अवस्था में पहुँच जाते। इन 7000 लोगों में महिला और पुरुष दोनों हैं।”

बड़ी संख्या में लोगों को जबरन इस्लाम में परिवर्तित किए जाने के दावों की पुष्टि करते हुए उन्होंने कहा, “ऐसे ज्यादातर मामलों में हम खुलकर नहीं बता सकते, क्योंकि वे लोग सार्वजनिक रूप से बात करने के लिए तैयार नहीं होते हैं। यह सामाजिक प्रतिष्ठा और अन्य विभिन्न चीजों के कारण है। खासतौर पर जब बात किसी लड़की की हो तो वो सामने आकर इस बारे में बात नहीं करते हैं। इस फिल्म ने निश्चित रूप से एक ऐसा माहौल बनाया है, जहाँ अधिक से अधिक लोग कह रहे हैं कि यह वास्तव में हो रहा है।”

लव जिहाद को विशाली ने लव ट्रैप जिहाद बताया। उन्होंने कहा कि यह एक लड़की को धर्मांतरित करने की योजना के ट्रैप दर्शाता है। उन्होंने यह भी कहा कि अंतर-धार्मिक संबंध में कोई समस्या नहीं है, अगर धर्मांतरण के लिए ऐसा कोई जाल नहीं है। उसने कहा कि अगर यह केवल एक लड़के और लड़की के बीच का रिश्ता है तो इसमें कोई समस्या नहीं है। कोई भी दो लोग प्यार में पड़ सकते हैं और एक रिश्ते में आ सकते हैं और शादी कर सकते हैं। समस्या यह है कि प्यार के नाम पर कट्टरवाद और कदम-कदम पर ब्रेनवॉश किया जाता है।

कट्टरवाद की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा, “हम इसे लव जिहाद कहने के बजाय लव ट्रैप जिहाद कहना चाहेंगे। ये लोग महिलाओं या युवतियों को प्रेम के बहाने फँसा रहे हैं और उसके जरिए धीरे-धीरे उनका धर्म परिवर्तन कर रहे हैं। पहले कदम में वे उन्हें फँसाते हैं। दूसरे चरण में वे लड़कियों से कहते हैं कि अगर मेरे परिवार को तुम्हें अपने घर में स्वीकार करना है तो तुम्हें धर्म परिवर्तन करना होगा। उनका कहना है कि यह सिर्फ शादी करने के लिए है। वे कहते हैं कि यह सिर्फ नाम के लिए है, सिर्फ माता-पिता को स्वीकार करने के लिए आपको शादी के लिए धर्म परिवर्तन करना होगा।”

विशाली शेट्टी ने आगे कहा, “धर्मांतरण केवल कागजी कार्रवाई या औपचारिकता नहीं है। धर्मांतरण प्रमाणपत्र प्राप्त करने से पहले उसे इस्लामी अध्ययन पर दो महीने का उचित पाठ्यक्रम पूरा करना होता है। इस प्रक्रिया में उन्हें वही सिखाया जाता है, जो फिल्म में दिखाया गया है। धर्मांतरण में क्या होता है, फिल्म में जो दर्शाया गया है, उसे सटीक दर्शाया गया है। जो रिश्ते लड़की या लड़के के इस तरह के रास्ते पर कदम-दर-कदम कट्टरता की ओर ले जाते हैं, वे देश-विरोधी, मानव-विरोधी और समाज-विरोधी मानसिकता अपनाते हैं। यही समस्या है।”

केरल से ISIS में शामिल होने गए लोगों की संख्या की रिकॉर्ड की गई रिपोर्ट में उन्होंने दावा किया है कि जो 150 या 200 लोग शामिल हुए हैं उनमें से अधिकांश लोग मुस्लिम हैं और केवल एक छोटी संख्या अन्य धर्मों से है। उन्होंने कहा, “यदि मुस्लिम खुद ISIS में शामिल हो रहे हैं तो यह देश के मुस्लिम समुदाय के लिए ही एक समस्या है। इसलिए उन्हें पहले इस ब्रेनवॉशिंग के खिलाफ लड़ना होगा। यह केवल समाज के एक निश्चित वर्ग के लिए समस्या नहीं है। यह पूरी मानवता की समस्या है।”

कर्नाटक में 38 सालों का टूटेगा मिथक या होगी त्रिशंकु विधानसभा: एग्जिट पोल में काँटे की टक्कर, जानिए किसको मिलेंगी कितनी सीटें

कर्नाटक विधानसभा चुनाव (Karnataka Assembly Election 2023) के लिए मतदान आज बुधवार (10 मई 2023) एक ही चरण में पूरा हो गया। राज्य के 224 विधानसभा सीटों के लिए 65.69 प्रतिशत लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है। वोटों की गिनती 13 मई 2023 को होगी।

चुनाव आयोग के आँकड़ों के अनुसार, राज्य में शाम 5 बजे तक हुए मतदान में 65.69 प्रतिशत मतदान हुआ है। बीबीएमपी दक्षिण जिले को छोड़कर सभी जिलों में 50 प्रतिशत से अधिक वोटिंग हुई है। इस बार के चुनावों में मतदान करने के लिए कुल 42,48,028 नए मतदाता पंजीकृत किए गए हैं।

बता दें कि राज्य के कुल 224 सीटों के लिए 2,615 उम्मीदवार मैदान में हैं। सरकार बनाने के लिए बहुमत के तिलिस्मी आँकड़े 113 तक पहुँचना जरूरी है। किस पार्टी के हाथ में राज्य की बागडोर जाएगी, इसका फैसला 13 मई होगा। कर्नाटक चुनाव में हिस्सा लेने वाली प्रमुख पार्टियाँ भाजपा, कॉन्ग्रेस और जनता दल सेक्युलर (JDS) है।

अभी तक 38 साल में कोई भी सरकार लगातार दोबारा चुनकर नहीं आई है। हालाँकि, जिस तरह से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में मिथक टूटे हैं, कुछ ऐसा ही इस बार कर्नाटक में होने की उम्मीद जताई जा रही है। वोटिंग खत्म होने के साथ ही एग्जिट पोल भी सामने आ गए हैं। इनमें से अधिकांश एग्जिट पोल में भाजपा और कॉन्ग्रेस के बीच काँटे की टक्कर बताई गई है।

‘जन की बात’ एवं ‘एशियानेट सुवर्णा न्यूज’ की एग्जिट पोल के अनुसार, भाजपा को 94-117 सीटें मिलती दिखाई गई हैं। वहीं, कॉन्ग्रेस को 91-106 और जेडीएस को 14-24 और अन्य को 0-2 सीटें दी गई हैं। अगर वोट प्रतिशत की बात की जाए तो भाजपा को 37.5-39 प्रतिशत, कॉन्ग्रेस को 38-40 प्रतिशत और जेडीएस को 14-17 प्रतिशत वोट मिलने की संभवाना जताई गई है।

एजेंसी के अनुसार, मुंबई कर्नाटका क्षेत्र के कुल 50 सीटों में से भाजपा को 31 और कॉन्ग्रेस को 19 सीटें दी गई हैं। वहीं, कोस्टल कर्नाटका की कुल 19 सीटों में से भाजपा को 15 और कॉन्ग्रेस 4 सीटें मिलने की बात कही गई है। ओल्ड मैसूर क्षेत्र की कुल 57 सीटों में से भाजपा को 15, कॉन्ग्रेस को 24, जेडीएस को 16 और अन्य को 2 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है।

वहीं, बेंगलुरु क्षेत्र की कुल 32 सीटों में भाजपा को 17 और कॉन्ग्रेस को 15 सीटें मिलने का अनुमान है। हैदराबाद कर्नाटका क्षेत्र की कुल 40 सीटों में से 15 भाजपा, 24 कॉन्ग्रेस और 1 सीट जेडीएस को मिलती दिख रही हैं। सेंट्रल कर्नाटका की कुल 24 सीटों में 13 भाजपा, 11 कॉन्ग्रेस और 2 जेडीएस को मिलने का अनुमान है।

हालाँकि, अलग-अलग एजेंसियों के अनुसार सभी दलों को अलग-अलग सीटें मिलती दिख रही हैं। न्यूज नेशन-CGS की एग्जिट पोल में भाजपा को 114, कॉन्ग्रेस को 86 और जेडीएस को 21 सीटें दी गई हैं। वहीं, अन्य के खाते में 3 सीटें गई हैं।

ZEE न्यूज-Matrize के एग्जिट पोल के अनुसार, कर्नाटक विधानसभा चुनावों में भाजपा को 79-94 सीटें, कॉन्ग्रेस को 103-118 सीटें और जेडीएस को 25-33 सीटें दी गई हैं। वहीं, अन्य को 2-5 सीटें दी गई हैं।

टीवी9 भारतवर्ष और polstrat के अनुसार, राज्य में भाजपा को 88-98, कॉन्ग्रेस को 99-109 और जेडीएस को 21-26 सीटें मिल सकती हैं। वहीं, अन्य को 0-4 सीटें मिल सकती हैं।

P Marq-Republic की एग्जिट पोल के अनुसार, राज्य में भाजपा 85-100, कॉन्ग्रेस को 94-108 सीटें और जेडीएस को 24-32 सीटें मिलती दिखाई दे रही हैं। वहीं, अन्य को 2-6 सीटें दी गई हैं।

अपने हत्यारे का ही इलाज कर रही थी केरल की महिला डॉक्टर… पुलिस लेकर आई थी पट्टी करवाने, डॉक्टर को सर्जरी वाले चाकू से काट डाला

केरल के कोट्टारक्कारा में स्थित हॉस्पिटल में एक मरीज ने बुधवार (10 मई 2023) को चाकू मारकर महिला डॉक्टर की हत्या कर दी। इलाज कराने के लिए पुलिस आरोपित को हॉस्पिटल लेकर आई थी। इस घटना पर केरल हाई कोर्ट ने पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा है यदि वह डॉक्टरों को सुरक्षा नहीं दे सकते तो हॉस्पिटल बंद कर देना चाहिए।

दरअसल, डॉक्टरों की सुरक्षा हमेशा से ही बड़ा मुद्दा रहा है। पुलिस हिरासत में रहने के दौरान आरोपित द्वारा महिला डॉक्टर की हत्या करना केरल की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। ऐसे में केरल हाई कोर्ट ने मामले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई की।

सुनवाई के दौरान जस्टिस देवन रामचंद्रन और जस्टिस कौसर एडप्पागथ की खंडपीठ ने राज्य सरकार से कहा है कि यदि आप डॉक्टरों की रक्षा नहीं कर सकते हैं, तो अस्पतालों को बंद कर दें। यही नहीं, हाई कोर्ट ने इस संबंध में केरल पुलिस प्रमुख को गुरुवार (11 मई 2023) को ऑनलाइन पेश होने और मामले पर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।

कोर्ट ने पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना जताते हुए कहा है, “माता-पिता के हालात की कल्पना करें। वे अपनी बेटी को अस्पताल में काम करने के लिए नहीं बल्कि सेवा करने के लिए भेजते हैं। लेकिन उसे एक ताबूत में वापस भेजा जा रहा है। जो आज हुआ है यह बेहद बुरा है।”

बता दें कि कोट्टारक्कारा के एक हॉस्पिटल में पुलिस आरोपित संदीप को इलाज के लिए लेकर आई थी। इस दौरान जब महिला डॉक्टर वंदना दास उसके घाव पर पट्टी लगा रही थीं, तब उसने सर्जरी में इस्तेमाल होने वाली चाकू मारकर उनकी हत्या कर दी। मृत डॉक्टर वंदना दास महज 22 वर्ष की थीं। वह अजीजिया मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में हाउस सर्जन थीं। लेकिन अपनी ट्रेनिंग के लिए वह कोट्टारक्कारा के हॉस्पिटल में आई हुई थीं।

इस मामले में एक पुलिस अधिकारी ने कहा है कि आरोपित ने शराब पी रखी थी। इलाज के दौरान वह हिंसक हो गया। हमले में कुछ पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। महिला डॉक्टर वंदना दास की हत्या के बाद डॉक्टरों में काफी गुस्सा है। तिरुवनंतपुरम में हाउस सर्जन एसोसिएशन के बैनर तले मेडिकल छात्रों ने केरल सरकार के विरोध में नारेबाजी करते हुए जमकर प्रदर्शन किया।