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बिन अनुमति हो रहा क्रिकेटरों के नाम-फोटो का इस्तेमाल, खिलाड़ियों ने HC का दरवाजा खटखटाया: NFT बनाने और बाँटने पर रोक की माँग

भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार प्लेयर मोहम्मद सिराज, हर्षल पटेल, अर्शदीप सिंह समेत 5 क्रिकेटरों और रेरियो (Rario) ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की है। इस याचिका में ऑनलाइन फैंटेसी स्पोर्ट्स प्लेटफॉर्म्स (OPS) को उनकी फोटो और नाम का उपयोग कर एनएफटी (नॉन फंजिबल टोकन) बनाने और उसे बाँटने पर रोक लगाने की माँग की गई।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय क्रिकेटर हर्षल पटेल, अर्शदीप सिंह, मोहम्मद सिराज, उमरान मलिक, शिवम मावी और डिजिटल कलेक्टेबल प्लेटफॉर्म रेरियो ने दिल्ली हाई कोर्ट की सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ यह याचिका दायर की है।

बता दें कि इससे पहले गत 26 अप्रैल 2023 को सिंगल बेंच ने कहा था कि ऑनलाइन फैंटेसी प्लेटफॉर्म क्रिकेटरों और मशहूर हस्तियों के नाम और उनकी फोटो का उपयोग कर सकते हैं। ऐसा करना स्वतंत्रता के अधिकार के तहत आता है।

खिलाड़ियों और रेरियो की याचिका पर गुरुवार (11 मई 2023) को दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस मनमोहन और सौरभ बनर्जी की डिवीजन बेंच ने सुनवाई की। इस दौरान भारत के पूर्व सॉलिसिटर जनरल और वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने रेरियो की ओर से प्रस्तुत हुए। वहीं मुकूल रोहतगी ने खिलाड़ियों का पक्ष रखा। इस दौरान रेरियो की ओर से दलील पेश करते हुए वकील हरीश साल्वे ने कहा है कि रेरियो ने खिलाड़ियों के अधिकारों को मान्यता दी थी। खिलाड़ियों के नाम और फोटो का उपयोग करने के बदले उन्हें पैसे दिए गए थे।

वहीं, हरीश साल्वे ने अपनी दलील में कहा है, “ट्रेडिंग के लिए कुछ कार्ड्स बनाकर फैटेंसी प्लेटफॉर्म्स ने सही नहीं किया है। ट्रेंडिंग कार्ड किसी खिलाड़ी के प्रदर्शन के अनुसार तैयार नहीं किया जाता। बल्कि यह तो किसी भी व्यक्ति के व्यक्तित्व के आधार पर तैयार होता है। आप सुनील गावस्कर का उदाहरण ले सकते हैं। अगर आज कोई किसी बैट पर डिजिटल तरीके से सुनील गावस्कर के हस्ताक्षर कर लेता है और फिर कहता है कि यह उनका बैट है। ऐसे में तो वह उनकी प्राइवेसी का हनन कर रहा है।”

साल्वे ने यह भी कहा है कि यदि फैंटेसी प्लेटफॉर्म टीम बनाने के लिए खिलाड़ियों की जानकारी का उपयोग कर रहे हैं तो कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन NFT के लिए उपयोग करने पर वह एक संपत्ति की तरह हो जाता है। इस तरह से उस पर खिलाड़ियों का ही अधिकार होगा। इसलिए फैंटेसी प्लेटफॉर्म को खिलाड़ियों की अनुमति के बिना एनएफटी नहीं बनाना चाहिए।

वहीं, खिलाड़ियों की ओर से पेश हुए वकील मुकुल रोहतगी ने दिल्ली हाई कोर्ट में कहा है, “रिंकू सिंह नाम के एक क्रिकेटर हैं। उन्होंने 5 छक्के मारकर मैच जिताया था अब वह मशहूर हो गए हैं। इसलिए वह पैसा कमाने और अपने व्यक्तित्व का उपयोग करने के हकदार हैं।” हालाँकि कोर्ट ने बिना किसी नतीजे में पहुँचे मामले की सुनवाई 23 मई तक के लिए टाल दी। साथ ही कोर्ट ने दोनों पक्षों को अपनी-अपनी दलीलें लिखित में पेश करने का आदेश दिया।

NFT क्या है?

एनएफटी (NFT) को नॉन-फंजिबल टोकन (Non Fungible Token) कहा जाता है। यह एक तरह की डि‍जिटल संपत्ति होती है। इसे ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी के जरिए बनाया और उपयोग किया जाता है। इस टेक्नोलॉजी की सहायता से फोटो, वीडियो, पेंटिंग समेत अन्य डिजिटल संपत्तियों की खरीदी-बिक्री होती है। सीधे शब्दों में समझें तो यदि किसी फोटो या वीडियो की पूरी दुनिया में कोई दूसरी कॉपी नहीं है तो इसे NFT के जरिए खरीदा और बेचा जाता है।

दिल्ली पुलिस ने WFI अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह का बयान दर्ज किया, जाँच के लिए SIT भी गठित: बजरंग पुनिया बोले- पहलवानों का मोबाइल ट्रैक करवा रही सरकार

दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने शुक्रवार (12 मई 2023) को पहलवानों द्वारा दर्ज कराए गए यौन शोषण के मामले में भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह का बयान दर्ज किया। दिल्ली पुलिस ने बताया कि बृजभूषण सिंह ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार किया है।

भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह के अलावा, कुश्ती महासंघ के सहायक सचिव विनोद तोमर के भी बयान दर्ज किए गए। इस मामले में विनोद तोमर भी आरोपित हैं। दिल्ली पुलिस द्वारा भाजपा सांसद के खिलाफ दर्ज दो मामलों में दो बार बयान दर्ज किए हैं। अभी और भी बयान दर्ज किए जा सकते हैं। वहीं, पुलिस ने उनसे कुछ दस्तावेज भी माँगे गए हैं।

इस मामले में दिल्ली पुलिस के साथ ही SIT भी बृजभूषण शरण सिंह से पूछताछ करेगी। मामले की जाँच के लिए 6 पुलिसकर्मियों की एक विशेष जाँच दल (SIT) का गठन किया गया है, जिसमें 4 महिला पुलिसकर्मी हैं। इसके अलावा, महिला DCP की देखरेख में 10 पुलिसकर्मियों की भी एक टीम बनाई गई है।

दिल्ली पुलिस का कहना है कि पहलवानों की शिकायत पर दिल्ली पुलिस की टीमें उत्तर प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक और हरियाणा गई थी और वहाँ जाकर साक्ष्य जुटा चुकी हैं। दिल्ली पुलिस ने आगे कहा कि देश के बाहर जहाँ भी आरोप लगाए गए हैं, दिल्ली पुलिस उसकी जाँच के लिए संबंधित एजेंसियों के संपर्क में है।

उत्तर प्रदेश के कैसरगंज से भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने अपनी सफाई मे कुछ वीडियो साक्ष्य और मोबाइल डाटा दिल्ली पुलिस को सौंपने की बात कही है। वो जल्द ही इसे दिल्ली पुलिस के सामने प्रस्तुत करेंगे।

इससे पहले गुरुवार (11 मई 2023) को एक नाबालिग महिला पहलवान ने मजिस्ट्रेट के सामने अपना बयान दर्ज कराया। उधर, दिल्ली के जंतर मंतर पर 23 अप्रैल 2023 से धरना दे रहे पहलवानों ने आरोप लगाया कि पुलिस मामले में धीमी गति से कार्रवाई कर रही है।

धरना देने वाली एक पहलवान साक्षी मलिक ने कहा कि आरोप लगाने वाली सभी 7 महिला पहलवानों के साथ-साथ बृजभूषण शरण सिंह का नार्को टेस्ट कराया जाना चाहिए और जो भी गलत हो उसे तुरंत फाँसी पर लटका दिया जाए।

इस बीच पहलवानों ने सरकार पर एक बार फिर आरोप लगाया है। बजरंग पुनिया ने कहा कि धरना देने वाले पहलवानों का नंबर ट्रैक किया जा रहा है। पुनिया ने कहा, उन्होंने कहा, “आजकल हमारे फोन नंबर की जासूसी की जा रही हैं। हमारे साथ ऐसा बर्ताव किया जा रहा है, जैसे की हमने कोई अपराध किया है। जो भी हमारे संपर्क में है, उसी जासूसी की जा रही है।”

बताते चलें कि पहलवानों ने इस साल जनवरी में धरना दिया था, तब उन्होंने यौन शोषण का आरोप लगाकर जाँच की माँग की थी। तब उन्होंने पुलिस में FIR दर्ज नहीं कराई थी। जाँच के बाद कमिटी ने अपनी रिपोर्ट दे दी। उसके बाद 23 अप्रैल से पहलवान फिर से जंतर मंतर पर धरने पर बैठ गए।

पहले उन्होंने कहा कि यौन शोषण को लेकर दिल्ली पुलिस उनकी रिपोर्ट नहीं लिख रही है। इसके बाद वे सुप्रीम कोर्ट गए और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ दो FIR दर्ज की गई। इसके बाद पहलवानों ने अपनी माँग को आगे बढ़ाते हुए का कि WFI चीफ अध्यक्ष पद के साथ-साथ सांसद की सदस्यता छोड़ें।

हालाँकि, बृजभूषण शरण सिंह ने इससे साफ इनकार कर दिया और कहा कि सांसदी इन पहलवानों की दी हुई नहीं है, जो उनके कहने पर वे छोड़ देंगे। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि जब उन पर मामला दर्ज हो ही गया तो वे एक आरोपित के रूप में अपने पद से इस्तीफा नहीं देंगे।

इसके बाद पहलवान उनकी तुरंत गिरफ्तारी की माँग पर अड़े हुए हैं और जंतर मंतर पर धरने पर बैठे हुए हैं। उन्होंने जाट समुदाय के खापों से भी समर्थन माँगा था। इसके बदले में वहाँ खाप नेता और किसान नेता भी आए। इस दौरान ‘मोदी तेरी कब्र खुदेगी’ और ‘हमें चाहिए आजादी’ जैसे आपत्तिजनक नारे लगाए गए।

‘देश के अन्य हिस्सों में चल रही The Kerala Story, फिर बंगाल में बैन क्यों’: CJI चंद्रचूड़ ने जारी किया नोटिस, TMC सरकार की तरफ से कॉन्ग्रेस नेता वकील

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगला और तमिलनाडु की सरकार को नोटिस जारी किया है। ये वो 2 राज्य हैं, जहाँ ‘The Kerala Story’ को प्रतिबंधित किया गया है। फिल्म के निर्माताओं ने इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। जहाँ पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी TMC सरकार ने ही इसे बन कर दिया, तमिलनाडु के मल्टीप्लेक्स एसोसिएशन ने इसे बैन कर रखा है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ अब इस मामले को बुधवार (10 मई, 2023) को सुनेगी।

फिल्म के निर्माता ‘Sunshine Pictures’ की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने बताया कि कैसे पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा था कि ये फिल्म एक समुदाय विशेष के खिलाफ है और इसे दिखाए जाने से कानून व्यवस्था की समस्या उत्पन्न हो सकती है। उन्होंने बताया कि 3 दिन बिना किसी समस्या के फिल्म चली, फिर भी इसे बैन कर दिया गया। वहीं तमिलनाडु में धमकियों के कारण थिएटरों ने इसे निकाल दिया, फिल्म ‘शैडो बैन’ का सामना कर रही है।

वहीं पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से कॉन्ग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी वकील के रूप में पेश हुए, जिन्होंने कहा कि इस फिल्म के संबंध में सभी मुद्दों पर हाईकोर्ट जाने बोला गया है और इस मामले में भी ऐसा ही किया जाना चाहिए। CJI चंद्रचूड़ ने इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि फिल्म देश भर में रिलीज हुई है और पश्चिम बंगाल शेष भारत से अलग नहीं है। उन्होंने पूछा कि जब देश के अन्य हिस्सों में फिल्म चल सकती है, फिर पश्चिम बंगाल में क्या समस्या है?

DY चंद्रचूड़ ने पूछा कि आखिर इस फिल्म को बैन क्यों किया गया? उन्होंने कहा कि अगर लोगों को लगेगा कि ये फिल्म अच्छी नहीं है, तो वो नहीं देखेंगे। उन्होंने कहा कि देश के कई ऐसे हिस्सों में ये फिल्म चल रही है जहाँ की डेमोग्राफी पश्चिम बंगाल की तरह ही है, फिर इस फिल्म को अनुमति क्यों नहीं दी गई? सिंघवी ने राज्य सरकार के अधिकारों का जिक्र किया। CJI ने कहा कि राज्य सरकार को सुने बिना वो कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं कर सकते।

सिडनी में नहीं चला खालिस्तानियों का प्रोपेगेंडा, SFJ के ‘जनमत संग्रह’ पर रोक: पोस्टर हटाए, बेहिसाब पैसों की लेन-देन पर जाँच जारी

ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में अधिकारियों ने खालिस्तानियों के एक कार्यक्रम को रद्द कर दिया है। सिडनी के ब्लैकटाउन सिटी के लीज़र सेंटर स्टैनहोप में सिख फॉर जस्टिस (SFJ) द्वारा जनमत संग्रह का कार्यक्रम प्रस्तावित था। कार्यक्रम के खिलाफ सैकड़ों शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। ऑस्‍ट्रेल‍िया के अध‍िकार‍ियों ने कर्मचारियों और आम लोगों की सुरक्षा और काउंसिल की संपत्ति की सुरक्षा के मद्देनजर इस प्रोपेगेंडा प्रोग्राम की अनुमति नहीं दी।

ब्लैकटाउन सिटी काउंसिल की एक प्रवक्ता ने द ऑस्ट्रेलिया टुडे को जानकारी दी कि काउंसिल ने शुक्रवार (12 मई 2023) की सुबह SFJ की बुकिंग को रद्द कर दिया है क्योंकि यह कार्यक्रम काउंसिल की पॉलिसी के ख‍िलाफ है। उन्होंने कर्मचारियों, पर‍िषद की संपत्तियों और आम लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। प्रवक्ता ने कहा कि काउंसिल भारत या पाकिस्तान के आंतरिक मामलों खासकर किसी तरह की राजनीतिक स्थिति का समर्थन या आलोचना नहीं करता। ऐसे में इस तरह के कार्यक्रम को अनुमती नहीं दी जा सकती।

बता दें ऑस्ट्रेलियाई हिंदू एसोसिएशन ने प्रस्तावित खालिस्तानी कार्यक्रम के खिलाफ शिकायत करते हुए ब्लैकटाउन काउंसिल से संपर्क कर कार्यक्रम रद्द करने की माँग की थी। ऑस्ट्रेलियाई सुरक्षा खुफिया संगठन (ASIO), ऑस्ट्रेलियाई संघीय पुलिस (AFP), न्यू साउथ वेल्स पुलिस, और विदेश मामलों और व्यापार विभाग (DFAT) ने भी खालिस्तानी कार्यक्रम को रद्द करने में प्राधिकरण की सहायता की।

द ऑस्ट्रेलिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार अरविंद गौड़ उन लोगों में से एक हैं, जिन्होंने सिख फॉर जस्टिस के कार्यक्रम के खिलाफ शिकायत की थी। गौड़ ने ही अधिकारियों को जानकारी दी थी कि कार्यक्रम के लिए तैयार किए गए पोस्टर व बैनर में आतंकी गतिविधियों में शामिल रहे लोगों की प्रशंसा की गई है। इस पर काउंसिल के सीईओ केरी रॉबिन्सन ने उन्हें जवाब भेजा था। केरी ने बताया कि अधिकारियों की तरफ से ऐसे तमाम बैनर व पोस्टर हटाए जा रहे हैं जिनमें आतंकियों का गुणगान किया जा रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार विक्टोरिया में रज‍िस्‍टर्ड ‘सिख फॉर जस्टिस प्राइवेट लिमिटेड’ को लेकर जाँच भी चल रही है। यह जाँच बेहिसाब पैसों के लेन देन को लेकर की जा रही है।

इससे पहले शुक्रवार (5 मई 2023) की सुबह खालिस्तानी आतंकियों ने सिडनी के स्वामीनारायण मंदिर (BAPS Swaminarayan Temple) में तोड़फोड़ की थी। आतंकियों ने पीएम मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लिख दिए थे। मंदिर के दरवाजे पर खालिस्तानी झंडा भी लटका दिया गया था। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रेलिया में हिंदू मंदिरों पर हमले को लेकर चिंता जाहिर की थी और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज (Anthony Albanese) से इस मुद्दे पर बात की थी।

मानव बम बनकर मुझे मारने आए थे हैदराबाद में पकड़े गए आतंकी, पुलिस ने छिपायाः MLA राजा सिंह का दावा, अमित शाह को लिखा पत्र

हैदराबाद के गोशमहल से विधायक T राजा सिंह ने दावा किया है कि मानव बम के द्वारा उनकी हत्या की साजिश रची गई है। उन्होंने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र भी लिखा है। इस पत्र में उन्होंने खुद और अपने परिवार के खिलाफ आतंकी गतिविधियों की बात करते हुए लिखा है कि आतंकी मानव बम का इस्तेमाल कर के उनकी हत्या की साजिश रच रहे हैं। उन्होंने इस दौरान एक खबर का लिंक भी भेजा है।

ये खबर अक्टूबर 2022 की है, जब हैदराबाद में 3 आतंकी दबोचे गए थे। अब्दुल ज़ाहिद, मोहम्मद समीउद्दीन और हसन फारूक के पास से हैण्ड ग्रेनेड्स के अलावा 5.15 लाख रुपए भी बरामद हुए थे। ये लोग पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी ISI से संपर्क में थे और ‘लोन वुल्फ अटैक’ की प्लानिंग कर रहे थे। मालकपट से इन्हें गिरफ्तार किया गया था। ये हमले कर के आम लोगों में दहशत फैलाना चाहते थे। अब्दुल ज़ाहिद 2017 के एक आतंकी हमले में साजिश था, लेकिन 12 साल बाद बरी होने में कामयाब रहा था।

टी राजा सिंह ने बताया है कि तेलंगाना के ख़ुफ़िया विभाग ने उन्हें कोई भी जानकारी देने से इनकार कर दिया है। उन्होंने बताया कि वो मात्र 2 गार्ड्स के साथ सार्वजनिक सभाओं में जाते हैं, ऐसे में उन्हें अपनी सुरक्षा की चिंता सता रही है। उन्होंने कहा कि कुछ संगठन और लोग उनके लिए खतरा हैं, लेकिन पुलिस कार्रवाई के संबंध में कोई जानकारी नहीं दे रही। उन्होंने हैदराबाद को आतंकियों का नया अड्डा बताते हुए कहा कि अब्दुल ज़ाहिद और दो अन्य आतंकियों की गिरफ़्तारी इसी क्रम में हुई है।

विधायक टी राजा सिंह ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लिखा पत्र

टी राजा सिंह ने बताया कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय और भारतीय फोन नंबरों से धमकी भरे कॉल्स भी आते हैं। उन्होंने 2016-17 में गिरफ्तार आतंकियों द्वारा अपने घर पर रेकी किए जाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने हैदराबाद में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी किए जाने की भी माँग की है। ऑपइंडिया से बात करते हुए टी राजा सिंह ने बताया कि जब तेलंगाना सरकार ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया था, तब ये तीनों आतंकी गिरफ्तार हुए थे।

विधायक टी राजा सिंह ने ऑपइंडिया को बताया, “ये तीनों आतंकी गणेश चतुर्थी और नवरात्रि में सार्वजनिक स्थानों पर हमले करने वाले थे। इनसे पूछताछ के दौरान उपस्थित रहे एक अधिकारी ने उन्हें बताया कि इनका टार्गेट आप (विधायक राजा सिंह) हैं। ये पदयात्रा के दौरान मुझ पर हमला करने वाले थे। मुझे बताया गया कि पुलिस वालों ने जानबूझ कर ये बात छिपाई, ताकि मुझे पब्लिसिटी नहीं मिल सके। मुख्यमंत्री KCR के आदेश से ये सब हुआ।”

‘पाकिस्तानी फौज ने जिन्ना को स्लो प्वाइजन देकर मारा’: भारत में ‘हिंदूराज’ के समर्थक अल्ताफ हुसैन का दावा, कहा- खुद को अल्लाह से भी ताकतवर समझते है आर्मी जनरल

पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरफ्तार को लेकर वहाँ के सैन्य प्रतिष्ठान पर सवाल उठाए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि कभी सेना के दुलारे रहे इमरान खान को उसकी शह पर पद से अपदस्थ करके शहबाज शरीफ को प्रधानमंत्री बनाया गया है। इसके बाद शहबाज शरीफ की सरकार ने सेना के कहने पर इमरान खान के खिलाफ कई मुकदमे दर्ज किए।

पाकिस्तान मामलों के जानकारों का कहना है कि एक तरफ सेना और शहबाज शरीफ और बिलावल भुट्टो जरदारी हैं तो दूसरी तरफ इमरान खान और देश की न्यायपालिका है। दोनों गुटों के बीच रस्साकशी जारी है। इसी तहत सुप्रीम कोर्ट ने 9 मई 2023 को इमरान खान की हुई गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए उन्हें रिहा कर दिया था।

लंदन में निर्वासन का जीवन जी रहे पाकिस्तान के प्रमुख नेता एवं मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट (MQM) के प्रमुख अल्ताफ हुसैन ने कहा कि पाकिस्तान के निर्माण के वक्त से ही मुल्क की सियासत पर सेना का कब्जा है। उन्होंने कहा कि जो एक बार फौज का मुखबिर (करीबी के अर्थ में) बन जाता है वो उस गैंग से वापस नहीं निकल पाता। बदले में फौज उसे भरपूर करप्शन करने की छूट देती है।

DW उर्दू को दिए इंटरव्यू में अल्ताफ हुसैन ने कहा, “पाकिस्तान में गद्दार मूल रूप से फौजी जनरैल हैं। पाकिस्तान में दूसरों को गद्दारी का इल्जाम लगाने वाले फौजी जनरल हैं। पाकिस्तान की जो 2 परसेंट एलीट आर्मी है, वो रूल कर रही है पाकिस्तान में पिछले 75 सालों से। वे अल्लाह से भी खुद को ताकतवर समझते हैं। इन्होंने ये हाल कर दिया है कि IMF के वेंटिलेटर पर पाकिस्तान चल रहा है।”

पाकिस्तान में फौज की करतूतों के बारे में बात करते हुए अल्ताफ हुसैन ने कहा, “मिलिट्री स्टैबलिशमेंट ने सबसे पहले फाउंडर ऑफ पाकिस्तान कायदे आजम (मुहम्मद अली जिन्ना) को रास्ते से अलहदा किया प्वाइजन देकर, स्लो प्वाइजन… इसके बाद इन्होंने उनके राइट हैंड लियाकत अली खान को शहीद किया रावलपिंडी के भरे जलसे में…. उसके बाद मोहतरमा फातिमा जिन्ना को कत्ल किया अयूब खान के जमाने में।”

उन्होंने आगे कहा, “मिलिट्री का हमेशा से कब्जा रहा। 1947 के बाद आर्मी और उनके जेनरल ने सरकार की सारी सिस्टम पर कब्जा कर लिया। मुल्क में चाहे नवाज शरीफ की हुकूमत हो, आसिफ अली जारदारी की हुकूमत हो, बेनजीर भुट्टो की हुकूमत हो…. किसी की भी हुकूमत हो, वे सजदा जाकर ISI के हेडक्वार्टर और उससे पहले रावलपिंडी के GHQ (सेना मुख्यालय) में करेंगे। उसके बगैर वे हुकूमत नहीं कर पाएँगे।”

इंटरव्यू के दौरान अल्ताफ हुसैन ने कहा कि जब-जब MQM के खिलाफ पाकिस्तान में ऑपरेशन चलाया गया, तब-तब खुदा-ना-खास्ता नवाज शरीफ की सरकार थी। दरअसल, जून 1992 में MQM के खिलाफ ऑपरेशन शुरू हुआ तो मुल्क में नवाज शरीफ की हुकूमत थी। बेनजीर के दौर में भी वो ऑपरेशन जारी रहा। 1998 में उनके खास हकीम सईद का कत्ल कर दिया गया। उसके बाद साल 2013 में MQM के खिलाफ फिर ऑपरेशन शुरू हुआ।

नवाज शरीफ से रिश्ते को लेकर अल्ताफ हुसैन ने कहा, “मैं उन्हें अपना दोस्त समझता था। उसे हर वक्त मैंने मदद की, लेकिन बार-बार नवाज शरीफ ने मुझे धोखा दिया। हो सकता है कि नवाज शरीफ दोबारा पाकिस्तान चले जाएँ और वजीरे आजम बना दिए जाएँ। जो एक बार फौज का मुखबिर बन जाए, वो वापस उस माफिया गैंग से वापस नहीं आ सकता।” उन्होंने कहा कि इमरान खान मिट्ठी छुरी हैं।

कौन हैं अल्ताफ हुसैन?

अल्ताफ हुसैन को पाकिस्तान में मुहाजिर माना है। मुहाजिर पाकिस्‍तान का वह समुदाय है, जो उर्दू जुबान बोलता है और बँटवारे के समय भारत से पाकिस्‍तान आया था। पंजाबी वर्चस्व वाले पाकिस्तान में मुहाजिरों को दोयम दर्जे का नागरिक माना जाता है और उनके साथ भेदभाव किया जाता है।

अल्ताफ हुसैन के परिवार का संबंध आगरा की नाई की मंडी इलाके से है। विभाजन से पहले अल्‍ताफ हुसैन के पिता यहीं रहा करते थे और भारतीय रेलवे में कार्यरत थे। साल 1947 में विभाजन के बाद बेहतर भविष्‍य की चाह में उनका परिवार पाकिस्‍तान के कराची में जाकर बस गया। वहीं पर 17 सितंबर 1953 में अल्‍ताफ हुसैन का जन्‍म हुआ। 

1980 में अल्‍ताफ ने मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट (MQM) की स्‍थापना की, जो मुहाजिरों की मुहाफिज पार्टी मानी जाती है। MQM का कराची के शहरी इलाके और सिंध तथा हैदराबाद इलाके में मजबूत जनाधार है। माना जाता है कि भारत से जाने वाले मुस्लिमों को उन्हें एकतरफा समर्थन मिलता है। वहीं, पाकिस्‍तान की नेशनल एसेंबली में MQM चौथी सबसे बड़ी पार्टी है।

अल्‍ताफ हुसैन ने फार्मेसी की पढ़ाई पूरी करने के बाद कराची के एक अस्‍पताल में नौकरी शुरू की थी। कॉलेज के दिनों से ही अल्‍ताफ राजनीति में सक्रिय हो गए थे। नौकरी करने के कुछ समय बाद अल्‍ताफ हुसैन सक्रिय राजनीति में आ गए और MQM नाम से राजनीतिक पार्टी का गठन किया।

सेना और पाकिस्तान की राजनीति में पाकिस्तानी पंजाब के वर्चस्व के बाद उनके खिलाफ समय-समय पर कई तरफ के आरोप लगाए गए। उन पर भारत के साथ संबंध होने के अलावा पाकिस्तान में ड्रग तस्करी करने से लेकर हत्या और दंगा करने तक के आरोप लगाए गए और उनके खिलाफ ऑपरेशन चलाया गया। इसके बाद साल 1992 में वे लंदन चले गए और वहीं से MQM का काम देखने लगे।

भारत-पाकिस्तान के बँटवारे का विरोध

अल्ताफ हुसैन समय-समय पर भारत बँटवारे का विरोध करते रहे हैं। उन्होंने भारत और पाकिस्तान को फिर से एक साथ आने की अपील की। साल 2019 में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भारत में शरण माँगी थी। उन्होंने कहा था, अगर प्रधानमंत्री मोदी मुझे मेरे साथियों के साथ भारत में शरण देते हैं तो मैं भारत आने के लिए तैयार हूँ। वहाँ मेरे दादा-दादी और हजारों रिश्तेदार दफन हैं।

उन्होंने अयोध्या में राममंदिर बनाने के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले पर कहा था कि वर्तमान सरकार को भारत में ‘हिंदूराज’ स्थापित करने का हक है। उन्होंने इस फैसले का विरोध करने वाले हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी की भी आलोचना की थी। उन्होंने कहा था, “इस्लाम के नाम पर पाकिस्तान बना है तो आपको हिंदुस्तान में रहने की जरूरत नहीं है। जाइए और पाकिस्तान में रहिए मौलाना असदुद्दीन ओवैसी।”

साल 2016 में अल्‍ताफ हुसैन ने एक इंटरव्‍यू में कहा था कि पाकिस्‍तान दुनिया का कैंसर है। इसको लेकर पाकिस्तान में बवाल हो गया। उसके बाद पाकिस्तान में MQM के नेताओं के खिलाफ कार्रवाई तेज हो गई। इसको देखते हुए हालाँकि बाद में उन्होंने माफी माँग ली और दबाव में आकर कहना पड़ा कि मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट पार्टी के फैसले अब वह खुद नहीं करेंगे, बल्कि सारे फैसले पार्टी की कोऑर्डिनेशन कमिटी करेगी।

पार्टी में दूसरे नंबर की हैसियत रखने वाले फारूक सत्तार सहित पार्टी के कई सांसदों और नेताओं को पकड़ लिया गया और महीनों तक जेल में रखा गया। सत्तार जब जेल से बाहर निकले तो उन्होंने अल्ताफ हुसैन का विरोध किया और MQM-P (मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट- पाकिस्तान) नाम से एक अलग पार्टी बना ली। सेना के शह पर बनी इस पार्टी में MQM के कई बड़े नेता शामिल हो गए।

पूरी दुनिया में सनातन धर्म की ज्योति फैलाना ‘आर्ष विद्या समाजम’ का लक्ष्य, ‘लव जिहाद’ पीड़िताओं की मदद: ‘The Kerala Story’ वाली पीड़िता का भी बना सहारा

फिल्म ‘The Kerala Story’ देश भर में सुर्खियाँ बटोर रही है। वास्तविक घटनाओं पर आधारित इस फिल्म में 3 ऐसी लड़कियों की कहानी है, ‘लव जिहाद’ में फँस कर जिनका जीवन तबाह हो जाता है। इन लड़कियों का इस्लामी धर्मांतरण करा कर उनकी तस्करी की जाती है, फिर ISIS स्लेव बना दिया जाता है। हालाँकि, कुछ ऐसी भी संस्थाएँ हैं जो ऐसी पीड़ित लड़कियों की मदद करती हैं। उन्हीं में से एक ‘आर्ष विद्या समाजम’ भी है।

यहाँ हम इसी संस्था के बारे में जानेंगे, जो ‘लव जिहाद’ से पीड़ित लड़कियों को उनकी जड़ों तक लौटाने, समाज में उन्हें सम्मान दिलाने और मानसिक रूप से उन्हें मजबूत करने की दिशा में कई वर्षों से काम कर रहा है। ये एक शैक्षणिक संस्थान है, जो पंच-कर्तव्य (अध्ययन, अनुष्ठान, प्रचारण, अध्यापन और सनातन धर्म का संरक्षण) का लक्ष्य लेकर चल रहा है। इस संस्थान का जन्म ही ऋग्वेद के मंत्र ‘कृण्वन्तो विश्‍वमार्यम्’ की प्रेरणा से हुआ था, जिसका अर्थ है – संसार के सभी मनुष्यों को श्रेष्ठ कर्मों वाला बनाइए।

‘आर्ष विद्या समाजम’ की स्थापना का उद्देश्य और सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार में योगदान

संस्था का मानना है कि एक ईश्वरीय प्रेरणा से उसका जन्म हुआ और पूरे विश्व को सनातन धर्म की शिक्षा देकर उन्हें अच्छा बनाने का आदेश मिला। संस्था गुरु परंपरा पर विश्वास रखती है। ‘आर्ष विद्या समाजम’ का मानना है कि दुनिया में आजकल जितनी भी बुराइयाँ फ़ैल रही हैं, उसका मुख्य कारण है युवाओं में धर्म के प्रति जागरूकता का अभाव। संस्था का लक्ष्य है कि दुनिया में एक व्यक्ति भी ऐसा न हो, जिसने ‘सनातन धर्म’ का नाम न सुना हो।

‘आर्ष विद्या समाजम’ मुख्य रूप से 4 मुख्य कोर्स की शिक्षा देती है – आध्यात्मिक शास्त्रम, आर्ष योग विद्या, भारतीय संस्कृति और विद्यार्थी नैपुण्य वर्ग। साथ ही ये विभिन्न धर्मों की तुलना करते हुए उनके बीच का अंतर भी लोगों को बताता है। अब जानते हैं कि इस संस्था की स्थापना किसने की थी। योगाचार्य KR मनोज ने सन् 1999 में इसकी नींव रखी थी। सद्गुरु शंकर गुरुदेव से उन्हें इसकी प्रेरणा मिली थी। वो सनातन धर्म, योग विद्या और तंत्र विद्या में दक्ष हैं।

KR मनोज आत्रेय, क्रिया योग और तंत्र – इन तीन परंपराओं में भी दक्ष हैं। मात्र 4 वर्ष की उम्र से उन्होंने इनकी प्रैक्टिस शुरू कर दी थी। ‘आर्ष विद्या समाजम’ से जुड़ी 5 अन्य संस्थाओं की भी उन्होंने स्थापना की है – शिवशक्ति योगविद्या केन्द्रम, मनीषा सांस्कारिक वेदी, विज्ञानभारती विद्या केन्द्रम, बौद्धिकम बुक्स और साधना शक्ति केन्द्रम। महावतार बाबाजी के क्रिया योग को भी उन्होंने सीखा है। महावतार बाबाजी की ही गुरु परंपरा में ‘योगदा आश्रम’ भी चलता है, जो कि एक अलग संस्था है।

केआर मनोज इन सबके अलावा नीलकेश्वरानंद परमहंस के भी भक्त हैं। परमहंस योगानंद द्वारा स्थापित राँची स्थित योगदा आश्रम से भी उन्होंने शिक्षा प्राप्त की है। इसके अलावा भी कई आध्यात्मिक केंद्रों से उन्होंने अपने जीवन के शुरुआती दिनों में शिक्षा प्राप्त की। उनकी संस्था ‘शिवशक्ति योगविद्या केन्द्रम’ वैज्ञानिक आधार पर योग की शिक्षा देती है, जो ‘नाथ संप्रदाय’ पर आधारित है। वहीं ‘मनीषा सांसारिक वेदी’ ने भारत के इतिहास और संस्कृति के अलावा विरासत के बारे में शिक्षा देती है, आक्रमणों के बारे में और स्वतंत्रता संग्राम के बारे में भी बताती है।

संस्कृत, वास्तु शास्त्र, ज्योतिष इत्यादि के बारे में भी यहाँ पढ़ाया जाता है। वहीं ‘बौद्धिकम बुक्स एन्ड पब्लिकेशंस’ के जरिए ‘अध्ययन से क्रांति’ का लक्ष रखा गया है। इसके द्वारा सनातन धर्म से जुड़ी पुस्तकों का प्रकाशन किया जाता है। ये किताबें डिजिटल फॉर्मेट में भी उपलब्ध हैं। पॉडकास्ट्स, वीडियो ब्लॉग्स और पत्रिकाएँ भी प्रकाशित की जाती हैं। वहीं ‘साधना शक्ति केन्द्रम’ के जरिए मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए विभिन्न प्रकार की साधनाओं को सिखाया जाता है।

‘आर्ष विद्या समाजम’ की वेबसाइट पर बताया गया है कि संस्था किन चीजों में विश्वास रखती है और क्या करती है। इसके मुख्य कंटेंट्स अंग्रेजी और मलयालम भाषा में होते हैं। इसमें सनातन धर्म के बारे में भी अच्छे से समझाया गया है, इससे जुड़े शब्दों को परिभाषित किया गया है। आप वेबसाइट पर जाकर उन 30 सवालों और उनके जवाबों को पढ़ सकते हैं, जिससे आपको सनातन धर्म के बारे में विस्तृत रूप से जानने को मिलेगा।

‘लव जिहाद’ पीड़िता ने श्रुति ने बताया कैसे ‘आर्ष विद्या समाजम’ ने की उसकी मदद

पीड़ित लड़कियों ने ‘PGurus’ के वीडियो में बताया था कि कैसे ‘आर्ष विद्या समाजम’ ने उसकी मदद की। वैशाली, अनघ और श्रुति ने इस दौरान अपने साथ हुई क्रूरता के बारे में भी बताया था। श्रुति ने बताया कि जब उन्होंने इस्लाम अपनाया, तब उनके परिवार वालों के लिए ये हैरानी भरा फैसला था और वो इसे बर्दाश्त नहीं कर पा रहे थी, उनकी स्थिति दयनीय हो गई थी। हालाँकि, अब उन्होंने घर-वापसी कर ली है, लेकिन उनके पिता को फिर भी भरोसा नहीं हो रहा था कि उन्होंने इस्लाम को मानना छोड़ा है या नहीं।

इस दौरान योगाचार्य मनोज ने उनके पिता और परिवार के अन्य सदस्यों को ये भरोसा दिलाया कि श्रुति हिन्दू धर्म में वापस आ चुकी हैं। गुरु ने परिवार को बताया कि श्रुति को उसके किए का पछतावा है और वो अपनी तरह की अन्य पीड़ित लड़कियों की भी मदद कर रही है, उन्हें अँधेरे से निकालने में, उन्हें हिन्दू धर्म में वापस लाने में। योगाचार्य मनोज ने परिवार को आश्वस्त किया कि वो अब चिंता न करें, वो सिर उठा कर चलें क्योंकि उनकी बेटी अच्छा कार्य कर रही है।

इसके बाद उनके परिवार का श्रुति में भरोसा कायम हुआ। उन्होंने अपने अनुभव को लेकर पुस्तक लिखा, जूनियर लड़कियों को इस बारे में जागरूक किया और वीडियो के जरिए भी अपने अनुभव साझा किया। उनके इन प्रयासों में ‘आर्ष विद्या समाजम’ ने उनकी मदद की। इसके बाद उनके पिता को लोगों के फोन कॉल आने लगे, श्रुति की प्रशंसा में। योगाचार्य मनोज से मिलने से पहले तो श्रुति ने सनातन धर्म का नाम तक नहीं सुना था।

श्रुति का कहना है कि इसीलिए योगाचार्य KR मनोज ने सनातन धर्म को लेकर एक कोर्स बनाया, जिसमें बेसिक से लेकर इसके बारे में बताया जाता है। श्रुति का कहना है कि धर्मांतरण का एक बड़ा कारण है कि हमें अपने धर्म और संस्कृति के बारे में नहीं पता है, इसी दिशा में ‘आर्ष विद्या समाजम’ प्रयास कर रहा है। उन्होंने बताया कि ‘आर्ष विद्या समाजम’ में कई ‘लव जिहाद’ पीड़िताएँ रह रही हैं। श्रुति के बारे में बता दें कि उनका ब्रेनवॉश भी उनकी मुस्लिम साथियों ने ही किया था।

वह कॉलेज पढ़ने के लिए गई थी। लेकिन वहाँ मुस्लिम साथियों ने उसका ब्रेन वॉश कर धर्म परिवर्तन करवा दिया। फिर वह रहमत के नाम से जानी जाने लगी। केरल के कासरगोड की रहने वाली श्रुति का कहना है कि फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ के ट्रेलर में जो कुछ दिखाया गया है, वह सही है। उनके साथी हिन्दू धर्म को लेकर उनके अल्पज्ञान का फायदा उठा कर इस्लाम के बारे में अच्छी-अच्छी बातें करते थे और हिन्दू धर्म को लेकर निशाना साधने वाली बातें करते थे।

आप ‘आर्ष विद्या समाजम’ के यूट्यूब चैनल पर भी जाकर उनके वीडियोज देख सकते हैं, जिसमें इस्लाम की धारणाओं को तथ्यों के साथ काटा गया है। फिल्मों से होने वाले प्रोपेगंडा का भी इसमें जवाब दिया गया है। हिजाब को लेकर भी संस्था ने तथ्यों के साथ अपनी बात रखी थी। संस्था ने हलाल मांस पर भी प्रतिबंध की माँग की थी। केरल में ‘मुस्लिम लीग’ के नेता किस तरह घृणा फैलाते हैं और कुरान से प्रेरित होकर ऐसी बातें करते हैं, इस बारे में भी संस्था ने बताया था।

4 लोग, 60 दिन: असम में CM हिमंता ने बना दी एक्सपर्ट कमिटी, एक से ज्यादा निकाह (बहुविवाह) पर रोक की तैयारी

बहुविवाह पर रोक लगाने की दिशा में असम सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने 4 सदस्यीय एक्सपर्ट कमिटी का गठन कर दिया है। यह कमिटी पता लगाएगी कि बहुविवाह पर रोक के लिए विधानसभा के पास अधिकार है या नहीं।

इस एक्सपर्ट कमिटी की अध्यक्ष रिटायर्ड जस्टिस रूमी फूकन होंगी। असम के एडवोकेट जनरल देबजीत सैकिया, असम के अतिरिक्त महाधिवक्ता नलिन कोहली और वकील नेकिबुर जमान कमिटी के मेंबर होंगे। इसकी जानकारी देते हुए सरमा ने गुरुवार (11 मई 2023) को ट्वीट कर कहा, “मैंने बहुविवाह को समाप्त करने के उद्देश्य से कानून बनाने के लिए विधानसभा के पास अधिकार हैं या नहीं, इसका पता लगाने के लिए विशेषज्ञों की एक समिति बनाने का ऐलान किया था। अब राज्य सरकार ने इस समिति का गठन कर दिया है। इस समिति को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 60 दिनों की समय सीमा दी गई है।”

यह समिति इस बात की जाँच करेगी कि विधानसभा को राज्य में बहुविवाह पर रोक लगाने का अधिकार है या नहीं। इसके अंतर्गत समिति को भारतीय संविधान के नीति निर्देशक तत्व अनुच्छेद 25 तथा मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एक्ट 1937 के प्रावधानों की भी जाँच करनी होगी। 9 मई को सरमा ने बहुविवाह पर रोक लगाने के लिए विशेषज्ञों की समिति बनाने का ऐलान किया था। सीएम ने कहा था कि यह समिति कानूनी विशेषज्ञों सहित समाज के प्रबुद्ध वर्ग से भी बातचीत करेगी।

गौरतलब है कि देश में मुस्लिमों को बहुविवाह यानी एक से अधिक निकाह करने की छूट है। मुस्लिमों को छोड़कर कोई अन्य व्यक्ति यदि एक से अधिक विवाह करता है तो इसे IPC की धारा 494 और 495 के तहत दण्डनीय अपराध माना जाता है। वहीं, मुस्लिम IPC की धारा 494 के तहत पहली बीवी की सहमति से 4 निकाह कर सकता है। दरअसल, मुस्लिमों को यह छूट मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) 1937 के तहत दी गई है। हालाँकि मुस्लिम महिलाओं को 4 निकाह करने का अधिकार नहीं है। यदि किसी मुस्लिम महिला को दूसरी निकाह करनी होती तो उसे पहले शौहर को तलाक देना होता है।

इमरान खान की पार्टी में पाकिस्तान के चीफ जस्टिस की सास, जमानत पर बोलीं मरियम नवाज- आप भी ज्वाइन कर लो PTI: महिला मंत्री ने पूछा- जजों के घर में आग लगेगी तो…

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को कल मुल्क की सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई। चीफ जस्टिस उमर अता बंदियाल की अगुवाई में तीन जजों की पीठ ने उन्हें जेल से रिहा करने का फैसला सुनाया। इस निर्णय के बाद जस्टिस बंदियाल पर पाकिस्तान की सरकार भड़की हुई है। सत्ताधारी पार्टी के नेता जजों के घर जलाने की बात कर रहे हैं। चीफ जस्टिस को पाकिस्तान की तहरीक-ए-इंसाफ में शामिल होने को कहा जा रहा है।

इमरान खान और चीफ जस्टिस बंदियाल की करीबियाँ

बता दें कि पाकिस्तान सरकार के मंत्रियों का इस तरह चीफ जस्टिस पर नाराज होना पिछले कुछ वाकयों के मद्देनजर है। उमर अता बंदियाल ने 2 फरवरी 2022 को पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के तौर पर शपथ ली ती। इसके बाद ऐसे कई मौके आए जब उन्होंने इमरान खान की माँगों पर सुनवाई की।

इसी वर्ष जनवरी में जब पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा में विधानसभा भंग हुई तो इमरान खान जल्द चुनाव कराए जाने पर जोर देने लगे। वहीं शहबाज सरकार इसका विरोध कर रही थी। ऐसे में बंदियाल ने इस मुद्दे पर खुद स्वत: संज्ञान ले लिया और चुनाव की तारीख अक्टूबर से मई में कर दी। शहबाज सरकार को ये चीज नागवार गुजरी और उन्होंने संसद में ऐसा प्रस्ताव पारित किया जिसके बाद चीफ जस्टिस के पास किसी भी मामले पर खुद संज्ञान लेने का अधिकार छिन गया।

चीफ जस्टिस बंदियाल की सास का पीटीआई कनेक्शन

बंदियाल की करीबियों के अलावा उनकी सास भी एक वजह हैं जो सत्ताधारी पार्टी इस समय उनको निशाना बना रही हैं। कुछ दिन पहले बंदियाल की सास महजबीन नून और इमरान खान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ के वकील तारिक रहीम की बीवी राफिया तारिक के बीच हुई बातचीच की ऑडियो वायरल हुई थी।

दोनों महिलाओं बातचीत में कथित रूप से मुख्य न्यायधीश के स्टैंड की तारीफ कर रही थीं और जल्द चुनाव कराए जाने पर पक्ष रख रही थीं। इसमें अता बंदियाल की सास साफ बता रही थीं कि वह जल्द चुनाव कराने के सीजेपी के फैसले के पक्ष में हैं बस उन्हें अपने दामाद की थोड़ी चिंता है।

उनकी यह ऑडियो वायरल होने के बाद मरियम नवाज ने पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट को ‘सास कोर्ट’ कहा था। उन्होंने कहा था कि कोर्ट के फैसले बीवियों और सास की पसंद-नापसंद के आधार पर लिए जा रहे हैं। ऐसे तरीके मुल्क के लिए खतरनाक है।

पाकिस्तान की सत्ताधारी पार्टी के नेताओं ने साधा जज पर निशाना

तो इस तरह पाकिस्तान के चीफ जस्टिस से सत्तारूढ़ पार्टी पहले ही नाराज थी और अब इमरान खान को रिहाई देने के बाद तो शहबाज सरकार के मंत्री उनपर अधिक हमलावर हो गए हैं। नवाज शरीफ की बेटी मरियम नवाज ने भी इमरान की रिहाई को लेकर चीफ जस्टिस पर निशाना साधा।

उन्होंने कहा कि चीफ जस्टिस आज देश के खजाने से 60 अरब रुपए गबन करने वाले अपराधी को रिहा करके बहुत खुश थे। देश की सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील संस्थानों पर हमलों के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार चीफ जस्टिस हैं, जो एक अपराधी की ढाल बनकर आग में घी डालने का काम कर रहे हैं। उनको चीफ जस्टिस का पद छोड़कर उनकी सास की तरह पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी में शामिल हो जाना चाहिए।

पाकिस्तान सरकार में सूचना प्रसारण मंत्री मरियम औरंगजेब ने इमरान खान को चीफ जस्टिस बंदियाल का ‘लाड़ला’ कहा। मरियम ने सुप्रीम कोर्ट के जजों को धमकी देते हुए कहा कि आज पाकिस्‍तान जल रहा है, कल को अगर जजों के घरों में घुसकर कोई आग लगाएगा तो … औरंगजेब ने कहा कि आप फैसला करें, किसी का घर नहीं बचेगा।

मरियम औरंगजेब ने कहा कि किसी का घर नहीं बचेगा। सियासतदानों के घर, गृह मंत्री राणा सनाउल्‍लाह का घर जलाया गया, एंबुलेंस जली, मस्जिद जली, स्‍कूल जले क्‍यों वे इस देश के नहीं हैं। रेडियो पाकिस्‍तान आपका नहीं है। इस मुल्‍क को जलाने वाला, सियासत के नाम पर दहशतगर्द और किस भ्रष्‍टाचार के केस में उसे 60 अरब रुपए का जवाब देना है। अगर अदालत ने सजा दी होती तो यह हालात नहीं होते, आज मुल्क जल नहीं रहा होता।

गुजरात के द्वारकाधीश मंदिर में उड़ाए नोट, मोबाइल नहीं ले जा सकते फिर भी बने वीडियोः सुरक्षा चूक के बाद जाँच के आदेश

पिछले दिनों गुजरात के द्वारका स्थित जगत मंदिर में भगवान द्वारकाधीश के सामने नोट उड़ाते लोगों के वीडियो वायरल हुए थे। मंदिर में मोबाइल फोन ले जाने पर प्रतिबंध है। ऐसे में इस बड़ी चूक से श्रद्धालुओं में नाराजगी है। वायरल वीडियो को लेकर सख्त कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं।

दुनिया भर में विख्यात द्वारकाधीश जगत मंदिर में वीआइपी दर्शनार्थियों ने भक्ति की जगह अपने रसूख का प्रदर्शन किया। भगवान श्री कृष्ण के सामने नोट उड़ाए। कुछ लोग तो भगवान की तरफ नोटों की गड्डी फेंकते नजर आए। कृष्ण भक्तों का कहना है कि भगवान द्वारकाधीश विष्णु के अवतार हैं। माता लक्ष्मी भगवान विष्णु की पत्नी हैं। ऐसे में द्वारकाधीश के सामने पैसे फेंक कर भगवान के सामने माता लक्ष्मी का अपमान किया गया। वीडियो के वायरल होते ही कृष्ण भक्तों में नाराजगी फैल गई।

स्थानीय कलेक्टर ने द्वारका मंदिर के इस वायरल वीडियो की जाँच के आदेश दिए हैं। फिलहाल किसी के खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं की गई है। ऐतिहासिक द्वारकाधीश मंदिर पुरातत्व विभाग के अधीन है, जिसे एक ट्रस्ट द्वारा संचालित किया जाता है। इस मंदिर में मोबाइल और कैमरा जैसे इलेक्ट्रॉनिक सामान ले जाने पर प्रतिबंध है। इसके अलावा वीडियो शूटिंग और फोटोग्राफी भी सख्त वर्जित है।

मंदिर परिसर में वीडियोग्राफी के लिए पुरातत्व विभाग के कार्यालय से अनुमति लेनी होती है। वीडियो वायरल होने के बाद पता चला कि मंदिर के नियमों को ताक पर रख दिया गया था और कई लोगों के नोट फेंकने व उड़ाने का वीडियो बनाया गया। वीडियो के वायरल होने के बाद नाराज लोगों ने वीडियो बनाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की है।

घटना से संबंधित कई वीडियो वायरल हैं। एक वीडियो में पुजारी के वेश में एक शख्स नोटों की गड्डी भगवान की तरफ फेंकता नजर आ रहा है। अन्य वीडियो में कुछ लोग नाचते हुए नोट बरसाते नजर आ रहे हैं। बता दें कि जिस स्थान पर यह वीडियो बनाया गया, वहाँ फोटो लेना भी मना है। आश्चर्य की बात यह है कि मौजूद पुजारी ने भी भक्तों को नियम तोड़ने से नहीं रोका।

मंदिर में नोट उड़ाने और फेंके जाने का वीडियो सामने आने के बाद प्रभारी कलेक्टर एसडी धनानी ने जाँच के आदेश दे दिए हैं। इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो इसके लिए मंदिर प्रशासन को सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। बता दें कि द्वारकाधीश मंदिर के वीडियो वायरल होने से सुरक्षा के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर भी सवाल उठ रहे हैं।