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जिंदगी भर कठमुल्लापन से लड़ते रहे तारिक फ़तेह, उनकी मौत के बाद भी मजहबियों ने दिखा दिया रंग: इस्लामी कट्टरपंथियों ने Haha से मनाया जाने का जश्न

स्कॉलर तारिक फ़तेह का निधन हो गया है। उनका जन्म पाकिस्तान में हुआ था, लेकिन वो परिवार के साथ कनाडा में रह रहे थे। उनकी बेटी नताशा ने उनके निधन की सूचना दी। इस्लाम के इतिहास पर पुस्तकें लिख चुके तारिक फतह से कट्टर मुस्लिम नफरत करते थे, जो उनके निधन के बाद भी दिख रहा है। कई कट्टर मुस्लिमों ने उनके निधन पर जश्न मनाना शुरू कर दिया है। उनके निधन वाली खबर पर ‘हाहा’ रिएक्शंस डाले जा रहे हैं।

नताशा फ़तेह ने उनके निधन की खबर देते हुए उन्हें ‘पंजाब का शेर’, ‘हिंदुस्तान का बेटा’, ‘कनाडा को प्यार करने वाला’, ‘सच बोलने वाला’, ‘न्याय के लिए लड़ने वाला’ और ‘दबे-कुचले लोगों की आवाज’ करार दिया। उन्होंने लिखा कि तारिक फ़तेह ने आखिरकार अपनी मशाल आगे सौंप दी है। साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि उनके द्वारा शुरू की गई क्रांति उनलोगों के साथ जारी रहेगी, जो उन्हें जानते और प्यार करते थे।

उनका जन्म 20 नवंबर, 1949 को कराची में हुआ था। उनका परिवार विभाजन के दौरान बॉम्बे से कराची चला गया था। 60 और 70 के दशक में उन्होंने एक क्रांतिकारी छात्र नेता के रूप में अपनी पहचान बनाई। फिर वो अपनी बेधड़क पत्रकारिता के ले पहचाने जाने लगे। पाकिस्तान की सरकार और फ़ौज को उनका ये रवैया पसंद नहीं आया, जिस कारण उन्हें जेल भी जाना पड़ा। उन्हें पाकिस्तान छोड़ कर कनाडा में शरण लेनी पड़ी।

वो खुद को ‘पाकिस्तान में जन्म भारतीय’ बताते थे और उन्हें ये मानने में कोई गुरेज नहीं था कि उनके पूर्वज हिन्दू थे। तारिक फतह पंजाबी मुस्लिम परिवार से आते थे। 1996 से 2006 तक उन्हें ‘मुस्लिम क्रॉनिकल’ नामक शो होस्ट करने के लिए भी जाना जाता है। वो इस्लाम और मुस्लिम समाज में सुधारों के पक्षधर थे। उनकी पुस्तकों ‘The Jew Is Not My Enemy’ और ‘Chasing a Mirage’ को लोगों ने खूब पसंद किया था।

जब फेसबुक पर ‘Times Of India’ ने लंबी बीमारी के बाद लेखक तारिक फ़तेह फतह के निधन की खबर दी, तो पोस्ट पर ‘हाहा’ रिएक्शंस की बाढ़ आ गई। इनमें अधिकतर कट्टर मुस्लिम थे। जहाँ अधिकतर लोग, खासकर भारतीय, उनके निधन पर गमगीन दिखे, वहीं इस्लामी कट्टरपंथी इस दौरान जश्न मनाते नजर आए। लोगों ने उन्हें एक महान व्यक्तित्व करार दिया और साथ ही उन्हें आईना दिखाया, जो उनके निधन पर जश्न मना रहे हैं।

तारिक फतह निधन वाली खबर पर कट्टर मुस्लिमों ने दिया हाहा रिएक्शन

भारत के कई न्यूज़ चैनलों पर तारिक फ़तेह हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी में अपनी बात रखते हुए और बहस में हिस्सा लेते हुए दिखते थे। ‘आप की अदालत’ में रजत शर्मा ने उनका इंटरव्यू लिया था, जो ‘इंडिया टीवी’ पर आया था और खासा वायरल हुआ था। वो अक्सर तथ्यों और इतिहास को सामने रख कर पाकिस्तान को बेनकाब कर देते थे। वो कहते हैं कि कट्टरपंथी ‘मुल्ला का इस्लाम’ में मानते हैं जबकि वो ‘अल्लाह के इस्लाम’ में भरोसा रखते हैं।

NIA ने सील की हिजबुल सरगना सैयद सलाउद्दीन के बेटे की संपत्ति: कहने को लैब में काम, असली में आतंक के लिए जुटाता था फंड

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने आतंकवादी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के सरगना सैयद सलाहुद्दीन के बेटे की संपत्ति कुर्क कर ली। सैयद सलाहुद्दीन का बेटा सैयद अहमद शकील भी आतंकी है। फिलहाल वह आतंकी फंडिंग के मामले में जेल में बंद है। एनआईए ने यह कार्रवाई यूएपीए के तहत की।

सैयद सलाहुद्दीन के बेटे सैयद अहमद की जिन संपत्तियों को NIA ने कुर्क किया है वह जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर व बडगाम शहर में हैं। संपत्तियों को कुर्क कर एनआईए ने वहाँ कुर्की का नोटिस बोर्ड लगा दिया है। इस बोर्ड में लिखा है, “सभी को सूचित किया जाता है कि नरसिंह गढ़, मोहल्ला राम बाग, श्रीनगर में स्थित सैयद सलाहुद्दीन के बेटे सैयद अहमद शकील की संपत्तियों को कुर्क कर लिया गया है। वह घोषित आतंकवादी है। एनआईए ने यह कार्रवाई विशेष अदालत के आदेश से गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत की है।”

गौरतलब है कि सैयद सलाहुद्दीन के दो बेटे सैयद अहमद शकील और सैयद यूसुफ सरकारी नौकरी में थे। लेकिन दोनों ही साल 2018 में आतंकवादी गतिविधियों के लिए फंडिंग जुटाते पाए गए थे। इसके बाद साल 2021 में जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने दोनों को ही बर्खास्त कर दिया था। इन दोनों के साथ ही प्रशासन ने आतंकी गतिविधियों में संलिप्त 9 अन्य सरकारी कर्मचारियों को भी बर्खास्त किया था।

एनआईए ने जाँच में पाया था कि मोस्ट वांटेड आतंकी सैयद सलाहुद्दीन के दोनों बेटे सैयद अहमद शकील और सैयद यूसुफ हिजबुल मुजाहिदीन की आतंकवादी गतिविधियों के लिए फंड इकट्ठा कर रहे थे। दोनों ये फंड हवाला के जरिए इकट्ठा करते और ट्रांसफर करते पाए गए थे। सैयद अहमद शकील शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एसकेआईएमएस), सौरा में लैब तकनीशियन के रूप में काम करता था। वहीं, सैयद यूसुफ जम्मू-कश्मीर के कृषि विभाग में काम कर रहा था। नौकरी से बर्खास्त करने के बाद अब संपत्ति कुर्क करने को हिजबुल मुजाहिदीन और आतंकवाद पर बड़ी चोट के रूप में देखा जा रहा है।

रैपर बादशाह ने माँगी माफी, ‘सनक’ गाने का बोल बदलेंगे: सेक्स… फाड़ता फिरूँ रैप में ‘भोलेनाथ’ का इस्तेमाल कर विवादों में घिरे थे

अपने नए गाने ‘सनक’ में आपत्तिजनक शब्दों के साथ ‘भोलेनाथ’ का इस्तेमाल करने को लेकर रैपर बादशाह (Badshah) ने माफी माँग ली है। उन्होंने गाने के लिरिक्स में बदलाव कर इसे दोबारा रिलीज करने की बात कही है। महाकाल के पुजारियों ने इस गाने पर आपत्ति जताते हुए उनसे माफी माँगने का कहा था। ऐसा नहीं होने पर उज्जैन सहित अन्य शहरों में FIR करवाने की चेतावनी भी दी थी।

बादशाह ने सोमवार (24 अप्रैल 2023) को इंस्टाग्राम पर पोस्ट कर कहा, “मेरी जानकारी में आया है कि हाल ही में रिलीज हुए मेरे ‘सनक’ गाने से कुछ लोगों की भावनाएँ आहत हुई हैं। मैं कभी भी जानबूझकर या अनजाने में किसी को ठेस नहीं पहुँचाऊँगा। मैं अपनी आर्टिस्टिक क्रिएशन और म्यूजिकल कंपोजीशन को बहुत ईमानदारी के साथ आप तक पहुँचाता हूँ। हाल में हुई घटना के बाद मैंने इस बारे में ठोस कदम उठाते हुए अपने गानों के कुछ हिस्सों को बदला है और सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नए वर्जन के साथ पुराने वर्जन को बदल दिया है, ताकि कोई और इससे आहत न हो।”

बादशाह ने आगे लिखा, “रिप्लेसमेंट में थोड़ा समय लगेगा, जिसके बाद गाने का नया वर्जन रिलीज हो जाएगा। मैं आप सभी से विनम्र निवेदन करता हूँ कि तब तक थोड़ा धैर्य बनाएँ रखें और उन सभी से माफी माँगता हूँ, जिनकी भावनाओं को मैंने अनजाने में ठेस पहुँचाई। मेरे फैंस मेरे लिए सबसे बड़ा सपोर्ट हैं, इसलिए मैं उनको सबसे ज्यादा महत्व देता हूँ।” रैपर का यह इंस्टाग्राम पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

बता दें कि ‘सनक’ में अश्लील शब्दों के साथ भगवान भोलेनाथ को जोड़ने पर उज्जैन के महाकाल मंदिर के पुजारी सहित कई शिव भक्तों ने आपत्ति जताई थी। महाकाल मंदिर के वरिष्ठ पुजारी महेश ने कहा था कि हिंदू सनातन में छूट का दुरुपयोग हो रहा है। साधु-संत, कथावाचक सभी ऐसी चीजों पर मौन हैं। फिल्म स्टार हो या गायक उन्हें भगवान के नाम पर अश्लीलता फैलाना का कोई अधिकार नहीं है। देश भर में एक साथ उन पर कार्रवाई होनी चाहिए।

वहीं, अखंड हिंदू सेना के संस्थापक एवं महामंडलेश्वर आचार्य शेखर ने इस गाने पर आपत्ति जताते हुए कहा था, “कोई भी गाना बनाओ हमें कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन हमारे देवी-देवताओं का नाम सम्मान से लिया जाना चाहिए। यदि उनके नाम और सम्मान के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ किया जाता है, तो हम बर्दाश्त नहीं करेंगे।” परमहंस अवधेशपुरी महाराज ने भी बादशाह के गाने में आपत्तिजनक शब्दों के इस्तेमाल पर प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। उन्होंने कहा था कि इस तरह से भगवान शिव का पावन नाम लेना सरासर गलत है।

खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह हो या उसके साथी, असम के डिब्रूगढ़ जेल में ही क्यों किए जा रहे कैद: जानें वजह और इतिहास, कई अन्य कुख्यात भी रहे यहाँ

भगोड़े खालिस्तानी समर्थक अमृतपाल सिंह (Amritpal Singh) को पंजाब पुलिस ने रविवार (23 अप्रैल 2023) को मोगा जिले के रोडे गाँव से गिरफ्तार किया। पंजाब में कानून-व्यवस्था न बिगड़े इसलिए उसे और उसके सहयोगियों को असम में अंग्रेजों के जमाने की डिब्रूगढ़ सेंट्रल जेल भेज दिया गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमृतपाल अपने नौ सहयोगी दलजीत सिंह कलसी, पापलप्रीत सिंह, कुलवंत सिंह धालीवाल, वरिंदर सिंह जोहल, गुरमीत सिंह बुक्कनवाला, हरजीत सिंह, भगवंत सिंह, बसंत सिंह और गुरिंदरपाल सिंह औजला के साथ डिब्रूगढ़ जेल में बंद है।

डिब्रूगढ़ जेल को देश की आजादी के पहले स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने वाले भारतीयों को रखने के लिए बनाया गया है। पूर्वोत्तर में कंक्रीट से बनी ये पहली जेल है। हालाँकि, आजादी के बाद इसमें देश के खिलाफ काम करने वाले कई कुख्यात कैदियों को रखा गया है। इसमें उल्फा के उग्रवादियों से लेकर अब खालिस्तान समर्थकों को रखा जाना शामिल है। यह इस क्षेत्र की सबसे पुरानी और सबसे सुरक्षित जेलों में से एक है।

अंग्रेजों द्वारा इसे 1859-60 में में बनाया गया था। जेल परिसर 15.54 एकड़ भूमि में फैला हुआ है और असम पुलिस के ब्लैक कैट कमांडो, सीआरपीएफ और अन्य सुरक्षा कर्मियों से घिरा हुआ है। रिपोर्टों से पता चलता है कि अपने 170 वर्षों के इतिहास में डिब्रूगढ़ सेंट्रल जेल में कभी भी जेल ब्रेक की घटना नहीं हुई है।

ऐसा माना जा रहा है कि खालिस्तानी समर्थकों को असम ले जाने का एक कारण उन्हें असमिया भाषा न आना भी हो सकता है, क्योंकि जो कैदी असमिया नहीं जानते हैं, वे विशेष रूप से अन्य कैदियों के साथ कम बातचीत करते हैं। उदाहरण के लिए दिल्ली की तिहाड़ जेल और राजस्थान की जेलों में कई कैदी पंजाबी बोल और समझ सकते थे। इनमें से कुछ जेलों में कई पंजाबी गैंगस्टर और अलगाववादी भी बंद हैं।

इसके अलावा, अगर अमृतपाल और उसके सहयोगियों को पंजाब की जेल में रखा जाता, तो राज्य में कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती थी। उसे असम ले जाकर पंजाब में अमृतपाल के पक्ष में उठने वाली आवाज को दबाया जा सकता है। कुछ लोग यह भी कह सकते हैं कि असम ही क्यों, गुजरात, उत्तर प्रदेश या महाराष्ट्र क्यों नहीं? दरअसल, महाराष्ट्र की जेलों में कई हाईप्रोफाइल अपराधियों को रखा गया है। एक कारण यह भी हो सकता है कि असम इन राज्यों की तुलना में पंजाब से काफी दूर है। इससे असम की तुलना में इन राज्यों में कानून-व्यवस्था बिगाड़ने के मकसद से भीड़ जुटाना थोड़ा आसान है।

बता दें कि एक राज्य के हाईप्रोफाइल अपराधियों को दूसरे राज्य में शिफ्ट करने का यह कोई पहला मामला नहीं है। 2021 में जम्मू-कश्मीर से 26 बंदियों को उत्तर प्रदेश की आगरा सेंट्रल जेल में ट्रांसफर किया गया था।

‘हिंदुत्व भीड़ ने मुस्लिम बुजुर्ग को बेरहमी से मार डाला, काट दी दाढ़ी’: ‘उम्माह’ वाले ने शेयर किया 2 साल पुराना झूठ, तब ओवैसी-जुबैर गिरोह की खुल गई थी पोल

सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर के दावा किया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में हिन्दू भीड़ ने एक मुस्लिम बुजुर्ग को मार डाला। न सिर्फ ALTNews चलाने वाले मोहम्मद जुबैर, बल्कि प्रोपेगंडा पत्रकार राना अय्यूब और AIMIM के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने भी कभी इस झूठ को आगे बढ़ाया था। हालाँकि, इस संबंध में गाजियाबाद पुलिस की छानबीन के बाद सब दूध का दूध और पानी का पानी हो गया। ये आरोप झूठा निकला था।

‘उम्माह’ के लिए काम करने वाले मजीद फ्रीमैन ने सोशल मीडिया पर इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा, “ये दिल तोड़ने वाला है। हिंदुत्व भीड़ ने उत्तर प्रदेश में एक मुस्लिम बुजुर्ग को क्रूरता से मार डाला। इससे पहले उन पर हमला किया गया और उनकी दाढ़ी को कैंची से काट डाला गया। रोज-रोज हिन्दू कट्टरपंथियों द्वारा मुस्लिमों के खिलाफ होने वाली इस हिंसा को रोका जाना चाहिए।” हालाँकि, लोगों द्वारा आईना दिखाए जाने और सच्चाई बताए जाने के बावजूद उसने अब तक ट्वीट डिलीट नहीं किया है।

आगे बढ़ने से पहले बता दें कि एक तो ये मामला 2 साल पुराना है, ऊपर से ये वैसा नहीं है जैसा इसे बता कर पेश किया जा रहा है। जून 2021 में भी इस मामले को लेकर काफी हो-हंगामा हुआ था और तब भी इसका फैक्ट-चेक हुआ था तो ये आरोप झूठे निकले थे। मोहम्मद जुबैर को अपना ट्वीट डिलीट करना पड़ा था और उसने कबूला था कि ये मामला जैसा दिख रहा है वैसा नहीं है। उस समय कई इन्फ्लुएंसर्स ने इस झूठ को फैलाया था।

तब जिन लोगों ने इस झूठ को आगे बढ़ाया था, उनमें हिदायत करीम, ‘The Wire’, वारिस पठान, मोहम्मद शादाब, मोहम्मद शोएब पठान, फैजान सिद्दीकी, डॉ शमा मोहम्मद, साक्षी जोशी, सबा नकवी, हसीबा अमीन, सुचित्रा विजयन, सुजाता, अशरफ हुसैन, सुफियान खान, स्वरा भास्कर और अरफ़ा खानुम शेरवानी जैसे ट्विटर के जाने-पहचाने नाम शामिल हैं। जिस घटना के बारे में बात की जा रही है, वो कस्बा अनूपशहर के बुलंदशहर के मीरा मोहल्ला निवासी अब्दुल समद से जुड़ा है।

आगे बढ़ने से पहले ये भी बता दें कि मजीद फ्रीमैन ने लेस्टर और बर्मिंघम में हिन्दुओं के खिलाफ हुई हिंसा के दौरान भी जम कर झूठ फैलाया था। वो एक इस्लामी कट्टरवादी है। उसने लेस्टर में कुरान का अपमान होने की झूठी खबर फैलाई थी। हालाँकि, इसका कोई वीडियो या सबूत सामने नहीं आया। इसके बाद मुस्लिम भीड़ सड़कों पर निकली और जम कर हिंसा की गई। उसने ये झूठ भी फैलाया कि एक मुस्लिम लड़के को पकड़ कर हिन्दू भीड़ ने उसका मजहब पूछा और उसे पीटा।

‘हिंदुत्व भीड़ ने मुस्लिम बुजुर्ग को मार डाला’ – फैलाया जा रहा झूठ, अब जानिए सच्चाई

गाजियाबाद पुलिस ने इस मामले में सच्चाई बताई थी। पुलिस ने बताया था कि ये घटना जून 5, 2021 की है, जिसके बारे में पुलिस के समक्ष 2 दिन बाद रिपोर्ट दर्ज कराई गई। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की जब पुलिस ने जाँच की तो पाया कि पीड़ित अब्दुल समद बुलंदशहर से लोनी बॉर्डर स्थित बेहटा आया था। वो एक अन्य व्यक्ति के साथ मुख्य आरोपित परवेश गुज्जर के घर बंथना गया था। वहीं पर कल्लू, पोली, आरिफ, आदिल और मुशाहिद आ गए।

वहाँ पर बुजुर्ग के साथ मारपीट शुरू कर दी गई। अब्दुल समद ताबीज बनाने का काम करता है। आरोपितों का कहना है उसके ताबीज से उनके परिवार पर बुरा असर पड़ा। अब्दुल समद गाँव में कई लोगों को ताबीज दे चुका था। आरोपित उसे पहले से ही जानते थे। पुलिस ने बताया था कि मुख्य आरोपित पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। कल्लू और आदिल भी गिरफ्तार कर लिए गए। अन्य अभियुक्तों की भी धर-पकड़ की गई थी।

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित लोनी में मुस्लिम बुजुर्ग से मारपीट के मामले को सांप्रदायिक रंग देने के आरोपित सपा नेता उम्मेद पहलवान पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई की गई थी। पूछताछ में पता चला था कि केस दर्ज होने के बाद खुद को फँसता देख उम्मेद पहलवान ने अब्दुल समद से हलफनामे पर यह लिखवाने की कोशिश की थी कि उससे जबरन ‘जय श्री राम’ बुलवाया गया था। इसके बाद आरोपित ने वीडियो को वायरल कर दिया।

BBC ने जिसको बताया ‘राॅबिनहुड’, उसका बेटा नंगा कर बेल्ट से पिटाई करवाता था: एनकाउंटर में ढेर हुआ था असद, मोबाइल में मिले कई वीडियो

प्रयागराज में 15 अप्रैल 2023 को माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या के बाद आपने लिबरलों का क्रंदन सुना होगा। माफिया भाइयों के अपराधों पर पर्दा डालने के लिए उन्हें कई विशेषणों से महिमामंडित किया गया। बीबीसी ने अतीक को ‘राॅबिनहुड’ बताया था। लेकिन अतीक और उसके कुनबे की रोज एक से एक खौफनाक करतूतें सामने आ रही है। अब एक वीडियो सामने आया है जिसमें अतीक का बेटा असद एक युवक की नंगा कर बेल्ट से पिटाई करवा रहा है।

फरवरी 2023 में प्रयागराज में उमेश पाल की हुई हत्या में असद शामिल था। बाद में उसे यूपी एसटीएफ ने झाँसी में एनकाउंटर में ढेर कर दिया था। उसके पास से बरामद मोबाइल फोन में पुलिस को कई वीडियो मिले हैं। युवक को नंगा करके पीटने का वीडियो इनमें से एक है।

असद के फोन से पुलिस को कई ऐसे सबूत मिले हैं, जिससे यह पता चलता है कि वह अपने बाप अतीक की तरह माफिया बनना चाहता था। इनमें से एक वीडियो ऐसा है जिसमें 3-4 लड़के जमीन पर बैठे एक व्यक्ति को नंगा कर पीट रहे हैं।

वीडियो में जिसकी पिटाई हो रही है, वह असहाय हो जमीन पर बैठा दिखाई दे रहा है। एक लड़का हाथ में बेल्ट लिए हुए है। पीड़ित पैंट पहनने की कोशिश करता है तो एक लड़का पैंट छीन उस पर लात-घूँसे बरसाता दिखाई दे रहा है। वीडियो 19 जनवरी 2021 का बताया जा रहा है।

कहा जा रहा है कि यह वीडियो असद के लखनऊ स्थित फ्लैट का है। इसी घर में असद रहता था। अपना डर जमाने के लिए वह इस फ्लैट में वह लोगों की पिटाई करता था। इसका वीडियो बनवाकर व्हाट्सएप ग्रुप में शेयर किया जाता था। हालाँकि इस वीडियो में असद दिखाई नहीं दे रहा है। लेकिन कहा जा रहे है कि वह भी इस मारपीट में शामिल था।

अतीक के दफ्तर में मिले खून के धब्बे

प्रयागराज के चकिया इलाके में स्थित अतीक अहमद के दफ्तर में खून से सना चाकू और जगह-जगह खून के धब्बे मिले हैं। यही नहीं, दफ्तर में साड़ी और कुछ अंडर गारमेंट्स तथा टूटी हुई चूड़ियाँ मिलने की बात भी सामने आई है। अतीक के खंडहर हो चुके दफ्तर में जब पुलिस पहुँची तो यह पूरी तरह अस्त-व्यस्त मिला। खून के धब्बे ग्राउंड फ्लोर से लेकर सीढ़ियों और फर्स्ट फ्लोर तक दिखाई दे रहे थे। फर्स्ट फ्लोर के कमरे में रखे सोफे पर एक सफेद दुपट्टा मिलने की बात सामने आई है। इस पर भी खून के निशान मिले हैं। दफ्तर में टूटी हुई चूड़ियाँ भी मिली हैं।

अतीक अहमद के इस दफ्तर में जगह-जगह सामान बिखरा हुआ है। किचन से लेकर अलमारी तक सब सामान अस्त-व्यस्त कर दिया गया है। इसको लेकर कहा जा रहा है कि किसी ने कागज या अन्य सामान खोजने की कोशिश की है। पुलिस को आशंका है कि दफ्तर में महिला की हत्या हुई है। इसके बाद उसकी लाश को बाहर ले जाकर ठिकाने लगाया गया।

इस मामले में प्रयागराज के एसीपी सत्येंद्र प्रसाद तिवारी का कहना है, “मैंने मौके पर पहुँचकर जाँच की है। नीचे सीढ़ी के पास और ऊपरी सीढ़ी पर खून के धब्बे दिख रहे हैं। अंदर एक कमरा है, किचन है वहाँ भी खून के धब्बे दिखाई दे रहे हैं। इसको देखते हुए सीनियर अधिकारियों को सूचना दी गई है। फोरेंसिक लैब की टीम मौके पर पहुँचने वाली है। जाँच के बाद सामने आएगा कि खून कैसा है, किसका है, घटना को अंजाम देने वाला लोग कौन हो सकते हैं। यहाँ सीसीटीवी कैमरे भी लगे हुए हैं। इनकी भी जाँच की जाएगी।”

‘राजनीतिक दल दूर रहें’ से ‘सभी पार्टियाँ हमारा समर्थन करें’ तक कैसे पहुँच गए जंतर-मंतर पर जुटे पहलवानः जानिए सब कुछ

भारतीय पहलवानों और भारतीय कुश्ती महासंघ का विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गया है। विनेश फोगाट और 7 अन्य पहलवानों ने भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह के खिलाफ FIR दर्ज करने की माँग को लेक सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। उनकी याचिका में माँग है कि कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष के खिलाफ केस दर्ज करके कार्रवाई हो।

इस मामले पर बजरंग पूनिया का भी बयान सामने आया है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की है कि आकर उनके धरना प्रदर्शन को सपोर्ट किया जाए। बजरंग पूनिया ने कहा,

“हम सभी का समर्थन लेने के लिए तैयार हैं, भले ही यह राजनीतिक हो। अब की बार सबका वेलकम है, चाहे बीजेपी आए, कॉन्ग्रेस आए या आम आदमी पार्टी आए, कोई भी पार्टी आए सबका वेलकम है, क्योंकि जब हम मेडल जीते तो किसी पार्टी का झंडा नहीं लेते तिरंगा लेते हैं और जो बधाई देते हैं वो भी एक पार्टी के नहीं होते। अब किसी एक पार्टी से नहीं जुड़े। हम सभी देशवासियों से जुड़े हैं। सब आइए साथ देने। अगर हम अपनी बहन-बेटियों के लिए नहीं लड़े तो फिर कभी किसी के लिए नहीं लड़ सकते।”

बता दें कि पहलवानों का यह धरना पहले जनवरी में हुआ था उसके बाद इसकी शुरुआत फिर से अप्रैल में हुई। इस अंतराल में बजरंग पूनिया का बयान बदल गया है। पहले उन्होंने अपने धरने से किसी भी राजनीतिक दल को दूर रहने को कहा था। तब इनके समर्थन में कम्युनिस्ट पार्टी की वृंदा करात भी आईं थी और बजरंग पूनिया ने उन्हें मंच से उतारकर कहा था कि वो इस धरने को राजनैतिक नहीं बनाना चाहते। इस बार वो कह रहे हैं कि चाहे भाजपा हो कॉन्ग्रेस हो या फिर आम आदमी पार्टी…हर कोई उनके समर्थन में आ सकते हैं।

पूरा घटनाक्रम

  • तीन महीने पहले 18 जनवरी 2023 को भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष और पहलवानों के बीच का एक विवाद सामने आया।
  • विनेश फोगाट, बजरंग पुनिया, साक्षी मलिक समेत कई पहलवानों जंतर-मंतर पर इकट्ठा हुए । उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बृजभूषण शरण सिंह पर यौन शोषण, तानाशाही-मनमानी, अपशब्दों का इस्तेमाल, मानसिक प्रताड़ना देना और धमकाना जैसे आरोप लगाए।
  • पहलवानों की सीधी माँग की कि कुश्ती महासंघ को भंग किया जाए और बृजभूषण शरण सिंह से इस्तीफा लेकर उन्हें जेल भेजा जाए।
  • पहलवानों की माँग देखते हुए 19 जनवरी को शास्त्री भवन में खेल मंत्रालय के प्रतिनिधियों ने बुलवाया। यहाँ पहलवान रवि दहिया, विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बबीता फोगाट की मुलाकात खेल मंत्री अनुराग ठाकुर से हुई।
  • खेल मंत्री से बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला। उल्टा पहलवान प्रेस कॉन्फ्रेंस करके अपनी नाराजगी जाहिर करते रहे। उन्होंने कहा कि वो पीएम मोदी से मिलना चाहते हैं।
  • 20 जनवरी को विवाद देखते हुए भारतीय ओलंपिक संघ आगे आया और उनके द्वारा WFI प्रमुख के खिलाफ 7 सदस्यीय टीम गठित की गई। इसमें मैरी कॉम, डोला बनर्जी, अलकनंदा अशोक, योगेश्वर दत्त, सहदेव यादव और 2 अधिवक्ता को रखा गया। इसकी टीम की अध्यक्ष मैरी कॉम को बनाया गया।
  • इधर खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने भी समस्या का समाधान करने के लिए डीजी सीआई संग बैठक की। फिर 7 घंटे तक उनकी मीटिंग पहलवानों के साथ चली।
  • बैठक के बाद ओवरसाइट कमेटी बनाई गई, जिसका अध्यक्ष भी मैरीकॉम को बनाया गया। टीम में लिंपिक मेडल विजेता रेसलर योगेश्वर दत्त, द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित तृप्ति मुरगुंडे, TOPS CEO राजगोपालन और राधा श्रीमन शामिल थे। बाद में इसमें बबीता फोगाट को भी शामिल किया।
  • खेल मंत्री ने पहलवानों को आश्वासन दिया कि उनके साथ न्याय होगा। 21 जनवरी को प्रदर्शन समेट लिया गया।
  • विवाद के करीबन 55 दिन बाद एक खबर आई कि खेल मंत्री द्वारा बनाई गई ओवरसाइट कमेटी जल्द मंत्रालय को रिपोर्ट देगी। इस रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया कि  WFI अध्यक्ष पर यौन उत्पीड़न का इल्जाम लगाने वाले रेसलर्स कमेटी को अपने आरोपों का सबूत नहीं पाए।

    सूत्रों के नाम पर आई दैनिक भास्कर की खबर में कितनी सच्चाई है इसकी पुष्टि ऑपइंडिया नहीं करता। पहलवान बजरंग पूनिया का कहना है कि उन्हें कमेटी ने कभी नहीं बताया कि रिपोर्ट सबमित हुई या नहीं।
  • पहले प्रदर्शन के करीबन 95 दिन बाद एक बार फिर भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई की माँग हो रही है। इस बार उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाई है कि बृज भूषण शरण सिंह के खिलाफ एफआईआर हो, उन्हें जेल भेजा जाए। इस संबंध में महिला आयोग से भी पहलवानों ने गुहार लगाई।
  • प्रदर्शन के शुरू होने के बाद केंद्रीय खेल मंत्रालय ने गठित जाँच समिति से 24 अप्रैल को एक रिपोर्ट माँगी।
  • खेल मंत्रालय ने चुनावों को लेकर कहा है कि भारतीय ओलंपिक संघ एक एड-हॉक कमेटी बनाएगा। ये कमेटी 45 दिनों में कुश्ती महासंघ के चुनाव कराएगी। कमेटी ही खिलाड़ियों का चुनाव करेगी और साथ ही रोजमर्रा के कामों पर नजर रखेगी।

ममता बनर्जी को साधने चले थे नीतीश-तेजस्वी, बंगाल की CM ने कहा – पहले बिहार में बैठक करिए, फिर सोचेंगे आगे क्या करना है: किंतु-परंतु में उलझी है विपक्षी एकता

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इन दोनों विपक्ष को एकजुट करने के मिशन में हैं। भले ही राज्य में क़ानून व्यवस्था चरमराई हुई हो, वो अन्य राज्यों के दौरे कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने दिल्ली जाकर कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी और AAP सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की थी। अब वो बिहार के डिप्टी CM तेजस्वी यादव के साथ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मिलने कोलकाता पहुँचे, जहाँ तीनों ने मीडिया से भी बात की।

नीतीश कुमार ने बताया कि सभी विपक्षी पार्टियों को साथ लाने और लोकसभा चुनाव 2024 की तैयारियों को लेकर बातचीत हुई। उन्होंने दावा किया कि आगे जो भी किया जाएगा, वो देशहित में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आज जो लोग सत्ता में हैं, उन्हें कुछ नहीं करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि वो लोग केवल अपनी पब्लिसिटी कर रहे हैं, देश के विकास के लिए कुछ नहीं कर रहे। इस दौरान ममता बनर्जी ने भी इतिहास याद करते हुए बताया कि जयप्रकाश नारायण का अभियान बिहार से ही शुरू हुआ था।

TMC सुप्रीमो ने बताया कि उन्होंने नीतीश कुमार से आग्रह किया है कि बिहार में सभी विपक्षी पार्टियों की एक बैठक रखी जाए, जिसमें तय होगा कि हमें आगे क्या कदम उठाना है। उन्होंने कहा कि पहला उद्देश्य यही है कि लोगों को सन्देश दिया जाए कि हम एक हैं। उन्होंने कहा कि वो पहले भी कह चुकी हैं कि उन्हें कोई आपत्ति नहीं है बस भाजपा को जीरो बनाना है। उन्होंने दावा किया कि मीडिया के समर्थन और बड़े-बड़े झूठ बोल कर भाजपा के लोग बड़े हीरो बन गए हैं।

इस दौरान तीनों नेताओं ने कहा कि उनमें महागठबंधन बनाने को लेकर कोई ईगो नहीं है और 2024 का लोकसभा चुनाव ‘जनता बनाम भाजपा’ होने जा रहा है। नीतीश कुमार ने विपक्ष की तरफ से ‘एक सीट, एक उम्मीदवार’ का फॉर्मूला रखा, जिस पर सीएम ममता ने कहा कि सोच, विजन और मिशन स्पष्ट हो तो कोई दिक्कत नहीं है। अब नीतीश-तेजस्वी सपा प्रमुख अखिलेश यादव से मिलने लखनऊ भी जाने वाले हैं। सीएम नीतीश ने कहा कि ममता बनर्जी के साथ काफी सकारात्मक बातचीत हुई है।

अयोध्या में जुटे VHP से जुड़े वकील और रिटायर्ड जज, समलैंगिक विवाह के खिलाफ प्रस्ताव पारित: पहले भी भारतीय संस्कृति के लिए बताया था घातक

अयोध्या में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन (22-23 अप्रैल 2023) में विश्व हिंदू परिषद (VHP) के कानूनी प्रकोष्ठ ने समलैंगिक विवाह के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया है। इसमें निचली अदालतों से लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) तक से जुड़े विभिन्न राज्यों के 500 से अधिक अधिवक्ताओं और सेवानिवृत्त जजों ने भाग लिया। समलैंगिक विवाह को हिंदू संगठन पहले भी भारतीय संस्कृति के लिए घातक बता चुका है।

विश्व हिंदू परिषद ने 24 अप्रैल 2023 को अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से प्रेस रिलीज जारी कर प्रस्ताव पास किए जाने की जानकारी दी है। इसमें कहा गया है समलैंगिक विवाह पर निर्णय लेने में कोई जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि देश सामाजिक-आर्थिक क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण मुद्दों का सामना कर रहा है। इसमें गरीबी उन्मूलन, बुनियादी जरूरतें जैसे मुफ्त शिक्षा का अधिकार, प्रदूषण मुक्त वातावरण का अधिकार, जनसंख्या नियंत्रण शामिल हैं।

प्रस्ताव में कहा गया है कि भारतीय समाज पुरुषों और महिलाओं के बीच विवाह को मान्यता देता है। विवाह की संस्था केवल दो विपरीत लिंग का मिलन ही नहीं है, बल्कि मानव जाति की उन्नति भी है। विहिप के मुताबिक, भारतीय समाज में विवाह को दो विपरीत लिंग के जोड़ों का पवित्र मिलन माना गया है। शादी सिर्फ दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो परिवारों का मिलन होता है। यह भारत में एक त्योहार के रूप में मनाया जाता है। यदि समलैंगिक विवाह की अनुमति दी जाती है तो यह तो ऐसा संभव नहीं होगा।

हिंदू संगठन ने कहा कि वर्तमान मामला समलैंगिक विवाह के पक्ष में संसद को कानून बनाने के लिए निर्देशित करने के इरादे से उसकी शक्तियों पर स्पष्ट रूप से अतिक्रमण करने का प्रयास है। इसके अलावा, वीएचपी ने यह भी कहा कि शीर्ष अदालत संसद को सोलह साल पहले छोड़ी गई एक रिपोर्ट की सिफारिशों को स्वीकार करने के लिए निर्देश दे, जो ईसाई या इस्लाम कबूलने वाले दलितों के आरक्षण से संबंधित है।

बता दें कि इससे पहले विश्व हिंदू परिषद ने कहा था कि जिस ‘जल्दबाजी’ से सुप्रीम कोर्ट समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने की याचिकाओं का निस्तारण कर रहा है, वह उचित नहीं है। विहिप के संयुक्त महासचिव सुरेंद्र जैन ने शनिवार (22 अप्रैल 2023) को कहा था, “देश में समलैंगिक विवाह (Same-sex Marriage) को कानूनी मान्यता देने से नए विवाद पैदा हो सकते हैं। यह भारतीय संस्कृति के लिए घातक सिद्ध होगा।” जैन ने कहा था कि इस विषय पर आगे बढ़ने से पहले सुप्रीम कोर्ट को धर्मगुरुओं, चिकित्सा क्षेत्र, समाज विज्ञानियों और शिक्षाविदों की समितियाँ बनाकर उनकी राय लेनी चाहिए।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में LGBTQ+ व्यक्तियों के मौलिक अधिकारों को लागू करने की माँग को लेकर याचिका दायर की गई थी। इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली 5 जजों की बेंच सुनवाई कर रही है।

उमेश पाल की हत्या से पहले बरेली जेल में हुई मीटिंग, अशरफ से मिलने पहुँचे शूटरों का वीडियो आया सामने: गुड्डू मुस्लिम की ओडिशा-छत्तीसगढ़ में तलाश

प्रयागराज में 24 फरवरी 2023 में हुई उमेश पाल हत्याकांड की जाँच कर रही पुलिस टीम को एक बेहद अहम सुराग मिला है। हत्या से पहले गुड्डू मुस्लिम, गुलाम, असद और उस्मान बरेली जेल में माफिया अतीक अहमद के भाई अशरफ से मिलने गए थे। 11 फरवरी 2023 को हुई ये मुलाकात लगभग ढाई घंटे चली थी। असद पुलिस एनकाउंटर में ढेर हो चुका है। अतीक और अशरफ की प्रयागराज के काॅल्विन हाॅस्पिटल के बाहर शूटरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। वहीं गुड्डू मुस्लिम की तलाश UP STF छत्तीसगढ़ और ओडिशा में कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उमेश पाल की हत्या से पहले 11 फ़रवरी को असद के साथ गुड्डू मुस्लिम, गुलाम और उस्मान अशरफ से मिलने बरेली जेल गए थे। इस मुलाकात का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में उमेश पाल की हत्या करने वाले चारों शूटरों की जेल कोई खास तलाशी होती भी नहीं दिख रही है। चारों बेरोकटोक जेल के अंदर जाते दिखाई दे रहे हैं। तीनों की अगवानी करता एक काॅन्स्टेबल भी दिखाई दे रहा है।

गुड्डू मुस्लिम की ओडिशा और छत्तीसगढ़ में तलाश

एक रिपोर्ट के मुताबिक उमेश पाल हत्याकांड में शामिल मुख्य आरोपित बमबाज गुड्डू मुस्लिम की छत्तीसगढ़ और ओडिशा में तलाश हो रही है। पुलिस को ख़ुफ़िया इनपुट के तौर पर इन दोनों राज्यों में गुड्डू मुस्लिम की लोकेशन मिली थी। कुछ समय पहले गुड्डू की लोकेशन ओडिशा के बरगढ़ में मिली थी। वहाँ टीम के पहुँचने से पहले गुड्डू फरार हो चुका था। छत्तीसगढ़ के महासमुंद में गुड्डू बमबाज के एक अपराधी से अच्छे रिश्ते बताए जा रहे हैं। इसके आधार पर पुलिस ने वहाँ भी छापा मारा है। बताया जा रहा है कि पुलिस को 5 लाख के इनामी गुड्डू की लोकेशन छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती इलाके सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के पास सोहेला क्षेत्र के गाँव सरिया में मिली है।