अफगानिस्तान की तालिबानी सरकार ने अब महिलाओं पर ईद के त्योहार में शामिल होने पर रोक लगा दी है। रिपोर्टों के अनुसार तालिबानी हुकूमत ने देश के बगलान और तखर प्रान्तों में महिलाओं के घर से निकलने पर पाबंदी लगा दी। पाबंदी लगाए जाने का कारण पुरुषों के साथ मेल जोल और हिजाब न पहनना बताया जा रहा है।
अफगानिस्तान की ‘खामा प्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, मुल्क के बगलान और तखर में महिलाओं के लिए सख्त आदेश जारी किए गए थे। इस आदेश के अनुसार, ईद-उल-फितर के दिन महिलाओं के समुह में बाहर निकलने पर मनाही थी। फरमान में यह भी कहा गया कि ईद की नमाज में तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबतुल्ला अखुंदजादा के लिए दुआ करना जरूरी है। हुकूमत की ओर से जारी फरमान की कॉपी को नातीक मलिकजादा नाम के एक फ्रीलांस पत्रकार ने ट्वीट किया है।
In a new decree on the occasion of the upcoming Eid, the Taliban have ordered that #women are not allowed to travel or walk outside during the days of Eid.
रिपोर्टों के अनुसार, तालिबानी हुकूमत ने अप्रैल की शुरुआत में अफगानिस्तान के हेरात में परिवारों और महिलाओं को बगीचों या बाहरी स्थानों पर भोजन करने से मना कर दिया था। अधिकारियों की मानें तो तालिबान द्वारा लगाए जा रहे इन प्रतिबंधों का कारण महिलाओं और पुरुषों का मेल जोल और महिलाओं का हिजाब न पहनना है।
साल 2021 में तालिबान अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज हुआ था। इसके बाद से ही देश में महिलाओं और अल्पसंख्यकों के अधिकारों का हनन शुरू हुआ। दुनिया भर में निंदा के बावजूद अफगानिस्तान की तालिबानी सरकार आए दिन महिलाओं के खिलाफ नए-नए पाबंदियों वाले फरमान जारी करती रहती है। अफगानिस्तान में छठी कक्षा के बाद लड़कियों की उच्च शिक्षा पर प्रतिबंध लगा हुआ है।
इसके अलावा देश में महिलाओं के संयुक्त राष्ट्र (UN) के लिए काम करने पर भी मनाही है। महिलाओं के सार्वजनिक स्थानों पर भी काम करने की मनाही है। महिलाएँ का बिना किसी पुरुष के घर से निकलना सख्त मना है। घर से बाहर सर से लेकर पाँव तक ढँका रहना भी जरूरी है। आए दिन तालिबानी फरमानों की विश्व बिरादरी आलोचना करता रहता है।
देश भर में कुत्तों के हमले की घटनाएँ बढ़ती जा रहीं हैं। हालिया मामला आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम का है। यहाँ कुत्तों के हमले में 18 महीने की बच्ची की मौत हो गई। कुत्तों के हमले के समय बच्ची घर में अकेली थी। घटना शुक्रवार (21 अप्रैल 2023) शाम की है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला श्रीकाकुलम जिले के जी सिगदम मंडल के मेट्टावलसा का है। यहाँ, 18 माह की बच्ची अपने घर के भीतर बिस्तर पर लेटी हुई थी। इसी दौरान कुत्तों ने उस पर हमला कर दिया। कुत्ते उसे मुँह पर दबाकर पास में स्थित एक बगीचे में ले गए। बगीचे में ही कई कुत्तों ने मिलकर बच्ची को बुरी तरह नोच खाया।
इस घटना के बाद जब बच्ची की माँ घर लौटी तो उसने देखा कि बच्ची घर पर नहीं है। इसके बाद उन्होंने आस-पड़ोस में पूछताछ की। पूछताछ के बाद भी जब बच्ची का पता नहीं चला तो उन्होंने आसपास के इलाके में ढूँढ़ना शुरू किया। इस पर उन्हें एक बगीचे में बच्ची के रोने की आवाज सुनाई दी। मौके पर देखा तो कुत्तों के हमले से बच्ची बुरी तरह घायल हो चुकी थी। आनन-फानन में घरवाले बच्ची को लेकर हॉस्पिटल पहुँचे। जहाँ डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया।
कुत्तों के हमले से मॉर्निंग वॉक करने गए व्यक्ति की हुई थी मौत
बता दें कि उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में कुत्तों के हमले में सफदर अली नामक व्यक्ति की मौत हो गई थी। रविवार (16 अप्रैल 2023) की सुबह करीब 6:30 बजे यूनिवर्सिटी के पार्क में मॉर्निंग वॉक करने गया था। जहाँ कुत्तों के एक झुंड ने उस पर हमला कर दिया। हमले के बाद वह गिर गया। इसके बाद कुत्तों ने उसके हाथ, पैर और पेट व अन्य अंगों को नोंचकर घायल कर दिया। इससे उसकी मौत हो गई। घटना का वीडियो भी सामने आया था।
सफदर अली रोज की तरह पार्क में घूमने आया था। इसी दौरान कुत्तों के हमले से यह घटना हो गई। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के गार्ड ने उसके शव को देखकर पुलिस को सूचना दी थी। इसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुँचकर जाँच शुरू की। जाँच के दौरान आसपास के CCTV खँगालने के बाद मामले की सच्चाई सामने आई।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि ईद मनाई जा रही है, नमाज पढ़े जा रहे हैं लेकिन कहीं भी सड़क जाम नहीं किया गया। ईद की नमाज सड़कों पर नहीं मस्जिद में पढ़ी जा रही है क्योंकि सबको मालूम है कि यहाँ कानून का राज है। अब प्रदेश में दंगे नहीं होते। यूपी की कानून व्यवस्था दूसरे राज्यों के लिए उदाहरण बन गई है।
सीएम योगी राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्षों के दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन करने पहुँचे थे। सम्मेलन लखनऊ के सिग्नेचर बिल्डिंग में आयोजित किया गया है। इस मौके पर सीएम योगी ने कहा कि पहले राज्य में राजनीतिक संक्रमण था। जिसकी वजह से राज्य को माफियाओं ने जकड़ रखा था। पहले राज्य लोक सेवा व चयन आयोग की भर्ती नहीं हो पाती थी। भाई भतीजा वाद व जाति वाद हावी था।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा, “वर्ष 2017 में जब मैंने राज्य की कमान संभाली थी तो उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग, अधीनस्थ सेवा चयन आयोग, उच्चतर शिक्षा चयन आयोग और माध्यमिक शिक्षा चयन आयोग से जुड़ी परीक्षाओं में शिकायतों की ढेर लगी हुई थी। भर्ती की कई प्रक्रियाओं में न्यायालय का स्टे लगा हुआ था। मैंने अधिकारियों से भर्ती प्रक्रिया में जरूरी सुधार और पारदर्शीता लाने के लिए कहा। अब राज्य में पारदर्शी तरीके से भर्ती होती है।”
आज ईद है, ईद की नमाज पढ़ी जा रही है लेकिन कहीं भी सड़क पर नमाज नहीं हो रही, कोई आवागमन बंद नहीं है क्योंकि सभी को मालूम है कि ये कानून का राज है और ये सब के लिए समान है: उ.प्र. CM योगी आदित्यनाथ pic.twitter.com/8g5A9GLPUs
मुख्यमंत्री योगी ने अपने संबोधन के दौरान राज्य के कानून व्यवस्था पर भी बात की। उन्होंने कहा पहले उपद्रव होते थे अब उत्सव होते हैं। योगी आदित्यनाथ ने कहा, “आज ईद है, ईद की नमाज पढ़ी जा रही है लेकिन कहीं भी सड़क पर नमाज नहीं हो रही। कोई आवागमन बंद नहीं है क्योंकि सभी को मालूम है कि यहाँ कानून का राज है और ये सब के लिए समान है।” सीएम योगी ने कहा कि कानून व्यवस्था में सुधार का ही नतीजा है कि दुनिया भर के निवेशक यूपी में निवेश के लिए आकर्षित हो रहे हैं।
राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का अपमान करने के मामले में पुलिस ने मोहम्मद सैफ कुरैशी नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया। मामला दादरा एवं नगर हवेली का है। आरोपित अपनी दुकान में तिरंगे से माँस की सफाई कर रहा था। गिरफ्तारी शुक्रवार (21 अप्रैल, 2023) को हुई।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला दादरा एवं नगर हवेली के सिलवासा जिले के बाविसा फलिया का है। यहाँ मोहम्मद सैफ कुरैशी की चिकन शॉप नामक माँस की दुकान थी। इस दुकान में वह तिरंगे से माँस की सफाई करता था। घटना का वीडियो भी सामने आया था। वीडियो के सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के साथ ही आरोपित के खिलाफ कार्रवाई की माँग की जा रही थी।
इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपित मोहम्मद सैफ कुरैशी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था। जहाँ से कोर्ट ने उसे जेल भेज दिया है। फिलहाल, नगर पालिका ने इस दुकान को सील कर दिया है। दुकान के मालिक की पहचान हाशिम कुरैशी के रूप में हुई।
भारतीय ध्वज संहिता-2002
राष्ट्रीय ध्वज किसी भी देश के लिए गर्व की बात है। राष्ट्रीय ध्वज को फहराने व इसका उपयोग करने तथा क्षतिग्रस्त होने पर इसे नष्ट करने के लिए भारतीय ध्वज संहिता-2002 के तहत निर्धारित नियमों का पालन करना होता है। ध्वज संहिता के अनुसार, फटे या क्षतिग्रस्त राष्ट्रीय ध्वज को नष्ट करने के दो तरीके हैं। पहला इसे दफनाना और दूसरा जलाना। दोनों ही तरीकों में निर्धारित सभी नियमों का पालन करना जरूरी है।
भारतीय ध्वज संहिता 2002 के अनुसार, राष्ट्रीय ध्वज को दफनाने के लिए, लकड़ी के बॉक्स में क्षतिग्रस्त झंडे को इकट्ठे करने के बाद उसे मोड़ कर ठीक ढंग से रखना चाहिए। इसके बाद बॉक्स को जमीन में दफनाया जाना चाहिए। ध्वज दफन होने के बाद कुछ समय के लिए मौन रखना होता है। वहीं, एक अन्य तरीका अग्नि संस्कार है। इसके लिए एक सुरक्षित स्थान पर साफ सफाई करने के बाद वहाँ आग जलाना होता है।
इसके बाद झंडे को अच्छी तरह से मोड़ कर उसे आग के मध्य में रखना होता है। गौरतलब है कि यदि राष्ट्रीय ध्वज को बिना मोड़े जलाया जाता है तो इसे एक आपराधिक कृत्य माना जाता है। इसके अलावा, किसी भी अन्य तरीके से राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करना अपराध है।
जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में स्थित मार्तण्ड सूर्य मंदिर में ईद पर पटाखे फोड़ने का मामला सामने आया है। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में कई लड़के पटाखे जलाते हुए देखे जा सकते हैं। याद हो कि ये वही मंदिर है, जिसके अब सिर्फ अवशेष बचे हुए हैं और विशाल भरद्वाज की फिल्म ‘हैदर’ में इसे ‘शैतान की गुफा’ बता कर इसे बदनाम किया गया था।
वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि लड़के मंदिर में उछल-कूद मचा रहे हैं। इसी दौरान कुछ लड़के पटाखे फोड़ते हुए भी देखे जा सकते हैं। इनमें से एक लड़का सफेद कपड़े में दिखाई दे रहा है। उसके सिर में टोपी भी देखी जा सकती है। इससे स्पष्ट प्रतीत होता है कि मंदिर में पटाखे फोड़ने वाले लोग इस्लामवादी हैं।
वीडियो | कश्मीर के मार्तंड #SunTemple में #Eid पर पटाखे फोड़े गए ।
बता दें कि मार्तण्ड सूर्य मंदिर देश के गिने-चुने सूर्य मंदिरों में से एक है। इस मंदिर को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने संरक्षित स्मारक घोषित किया है। यही नहीं, इस मंदिर में हिंदुओं के पूजा करने पर पुरातत्व विभाग आपत्ति तक जता चुका है। वहीं ईद पर पटाखे फोड़ने की घटना सामने आने के बाद एएसआई ने अब तक किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं दी है।
ललितादित्य मुक्तापीड ने करवाया था भव्य मंदिर का निर्माण
कश्मीर में एक बहुत ही पराक्रमी राजा हुआ थे जिनका नाम था ललितादित्य मुक्तापीड। कहा जाता है कि मार्तण्ड सूर्य मंदिर का निर्माण उन्होंने ही करवाया था। उनका तो सन् 761 में निधन हो गया और उनके बाद उनके वंश के अधिकतर राजा दुर्बल साबित हुए, लेकिन ये मंदिर लोगों को अपने प्रिय राजा की याद दिलाता रहा। मार्तण्ड सूर्य मंदिर की भव्यता की तुलना विजयनगर सम्राज्य की राजधानी हम्पी से होती रही है। अफ़सोस ये कि इस्लामी आक्रांताओं की बर्बरता के कारण हम्पी के भी अब सिर्फ अवशेष ही बचे हैं। वो शहर, जिसकी तुलना तब के रोम से होती थी।
उस समय भारत, ईरान और मध्य एशिया के कई क्षेत्रों में करकोटा वंश के ललितादित्य मुक्तापीड का शासन फैला हुआ था। भले ही इस मंदिर का भव्य निर्माण उन्होंने कराया हो, इससे जुड़ी कथा महाभारत में पांडवों तक जाती है। मार्तण्ड सूर्य मंदिर के आसपास कुल 84 अन्य छोटे-छोटे मंदिर हुआ करते थे, जिनके आज सिर्फ अवशेष ही बचे हैं। ओडिशा के कोणार्क और गुजरात के मोढेरा की तरफ मार्तण्ड सूर्य मंदिर का स्थान भी देश में उच्चतम था।
15वीं शताब्दी की शुरुआत में इस्लामी आक्रांताओं ने इसे जड़ से मिटाने की ठान ली और इसे अवशेषों में बदल दिया। एक पूरी की पूरी फ़ौज को इस मंदिर को तोड़ने में पूरे एक साल लग गए, जिससे इसकी मजबूती का अंदाज़ा लगाया जा सकता है। इससे तीन किलोमीटर की दूरी पर ही मट्टन में शिव मंदिर स्थित है, जहाँ आज भी पूजा-पाठ होता है। यहाँ एक जल के कुंड के भीतर ही शिवलिंग स्थित है। श्रद्धालु वहाँ आज भी दर्शन के लिए जाते हैं।
अनंतनाग शहर से पूर्व दिशा में इसकी दूरी 3 किलोमीटर है और ये जम्मू कश्मीर की राजधानी श्रीनगर से 64 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। ये एक किस्म के पठार पर स्थित है। उस समय इसकी कलाकृतियाँ देख कर लोग अचंभे से भर जाते थे। सिकंदर शाह मीरी ने उनमें से कई मंदिरों को ध्वस्त कर के उन्हीं ईंट-पत्थरों का इस्तेमाल कर मस्जिदें बनवाई। उसने इसकी जड़ों को खोदना शुरू किया और उनमें से पत्थर निकाल कर लकड़ियाँ भर देता था। इसके बाद उन लकड़ियों में वो आग लगवा देता था। इस तरह उसने मार्तंड सूर्य मंदिर को ध्वस्त कर डाला।
ये भी जानने लायक बात है कि इस मंदिर को नष्ट करने की सलाह उसे एक ‘सूफी फकीर’, जिसे आजकल ‘सूफी संत’ भी कहते हैं, उसने दी थी। उसका नाम था – मीर मुहम्मद हमदानी। वो कश्मीर के समाज को इस्लामी बनाना चाहता था। वो इलाके में ब्राह्मणों के वर्चस्व को तोड़ कर सारी संपदा हथियाना चाहता था। इसके बाद कई भूकंप भी आए, जिनमें मंदिर को क्षति पहुँची। जिस पठार पर इसे बनाया गया था, वहाँ से तब अधिकतर कश्मीर घाटी को देखा जा सकता था।
टीवी अभिनेत्री और मॉडल उर्फी जावेद ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से नई तस्वीरें शेयर की हैं। तस्वीरें को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि उर्फी अपने दोस्तों के साथ गर्मियों की छुट्टियाँ मना रही हैं। ईद के दिन पोस्ट किए गए उर्फी की बोल्ड तस्वीरों को देखकर इस्लामवादी भड़क गए। उर्फी को बिकनी में देखकर उन्हें खूब कोसा जा रहा है।
इंस्टाग्राम पर उर्फी ने एक साथ कई तस्वीरें और वीडियो शेयर किए। जिसमें उर्फी किसी स्विमिंग पूल में दोस्तों के साथ नजर आ रही हैं। कुछ तस्वीरों में उर्फी बिकिनी पहन कर पोज देती हुई नजर आ रही हैं। उनकी ये तस्वीरें खूब वायरल हो रही हैं लेकिन कुछ लोग उनके पोस्ट पर कमेंट कर निशाना भी साध रहे हैं। उर्फी को ‘बदनसीब’ कहते हुए मोहम्मद इमरान नाम के यूजर ने लिखा कि तुझे तो ईद भी नसीब नहीं है बदनसीब औरत।
उर्फी जावेद ने इंस्टाग्राम पर अपलोड की तस्वीरें
असरार खान नाम के यूजर ने लिखा कि इनमें से एक भी मुस्लिम नहीं है, यदि कोई मुस्लिम होता तो आज के दिन इस तरह की तस्वीरें पोस्ट नहीं की जाती।
उर्फी पर मुस्लिम लड़कियों ने भी खूब निशाना साधा। असरा नाम की यूजर ने लिखा, “ईद वाले दिन भी ये सब…बेशरम हो? तुम जैसों को क्या खुशी ईद की जब रमजान में भी तुम न सुधर पाई।”
मेहविश कासिम नाम की यूजर ने लिखा, “इंसान होने के नाते तुम्हें शर्म आनी चाहिए। ईद वाले दिन तो कपड़े पहन लेती।” नेहा अंसारी ने लिखा, “हद कर दी तूने घटिया लड़की। छी.. तौबा…थू-थू…। आज ईद है और आज के दिन भी? तुम कितनी घटिया हो यार। अल्लाह तूझे जहन्नम के आग में जलाएँगे। थू… है।
उर्फी के इंस्टाग्राम पोस्ट का स्क्रीनशॉट
इस तरह पोस्ट में यूजर्स ने कमेंट कर उन्हें ईद की याद दिलाई। बता दें उर्फी अपने अतरंगी कपड़ों और बोल्ड लूक्स की वजह से अक्सर ट्रोलर्स के निशाने पर रहती हैं। उर्फी ने कई मशहूर धारावाहिकों जैसे ये रिश्ता क्या कहलाता है, बेपनाह, भैया की दुल्हनिया, मेरी दुर्गा और बिग बॉस ओटीटी में नजर आ चुकी हैं।
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता सिद्धारमैया (Siddaramaiah) ने कहा है कि यदि उनकी सरकार राज्य की सत्ता में वापसी करती है तो मुस्लिमों के लिए 4 प्रतिशत का कोटा फिर से बहाल कर दिया जाएगा। पिछले महीने ही बोम्मई सरकार ने राज्य में 4 प्रतिशत आरक्षण को खत्म कर दिया था। सिद्धारमैया ने टीपू जयंती बहाल करने को लेकर कहा है कि इस पर विधायकों और मंत्रिमंडल के साथ बैठक के बाद सलाह लिया जाएगा।
सिद्धारमैया ने इंडिया टुडे के राउंड टेबल कार्यक्रम में शिरकत करते हुए राज्य के विधानसभा चुनाव में जीत का दावा किया। वे पत्रकार राजदीप सरदेसाई के सवालों का जवाब दे रहे थे। इस दौरान उनसे राज्य में 4 प्रतिशत मुस्लिम आरक्षण खत्म किए जाने को लेकर सवाल किया गया। जवाब देते हुए सिद्धारमैया ने कहा कि यदि राज्य में कॉन्ग्रेंस की सरकार बनती है तो बीजेपी द्वारा खत्म किए गए मुस्लिम आरक्षण को फिर से लागू कर दिया जाएगा। सिद्धारमैया ने कहा कि हम लिंगायत और वोक्कालिगा समुदाय के लिए भी आरक्षण की व्यवस्था करेंगे।
बता दें कि मार्च 2023 में कर्नाटक की बसवराज बोम्मई सरकार ने मुस्लिम आरक्षण को खत्म कर दिया था। सरकार ने वोक्कालिगा और लिंगायत समुदाय के आरक्षणों में 2-2 प्रतिशत की वृद्धि कर दी थी। बीजेपी सरकार ने मुस्लिमों को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) श्रेणी के तहत मिलने वाले आरक्षण श्रेणी में शामिल कर दिया था। इसके तहत आर्थिक रुप से कमजोर वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण प्राप्त होता है। सीएम बोम्मई ने कहा था कि मुस्लिमों को 4 प्रतिशत की जगह अब 10 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलेगा।
इसी कार्यक्रम में शिरकत करते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा था कि कॉन्ग्रेस ने असंवैधानिक रूप से राज्य में चार प्रतिशत मुस्लिम आरक्षण को लागू किया था। उन्होंने कहा कि इसे लागू करने के लिए कॉन्ग्रेस संविधान के खिलाफ चली गई थी। इसे भाजपा सरकार ने खत्म कर अन्य समुदायों का आरक्षण बढ़ाया।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जनपद नालंदा में एक बार फिर से विस्फोट की खबर है। हालाँकि यह विस्फोट किस किस्म का है इसका खुलासा अभी तक नहीं हो पाया है। जाँच टीम मौके पर पहुँच कर सैम्पल जमा कर रही है। घटना में किसी के घायल या हताहत होने की कोई खबर नहीं है। घटना शनिवार (22 अप्रैल 20,23) की है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला बिहार शरीफ के पहाड़पुरा गाँव का है। यहाँ शनिवार को अचानक ग्रामीणों ने तेज आवाज सुनने का दावा किया। आवाज एक घर से आई थी। खुद को प्रत्यक्षदर्शी बता रहे राम प्रवेश कुमार का कहना है कि उन्होंने धुँआ देखा और जोरदार आवाज सुनी। जानकारी के मुताबिक, ब्लास्ट 1 बार हुआ था। दावा किया गया है कि ब्लास्ट में एक व्यक्ति का हाथ क्षतिग्रस्त हो गया है जिसके चलते घटनास्थल पर खून के छींटे भी देखे गए हैं। बाद में आस-पास के लोगों ने पुलिस को सूचना दी।
मामले की जानकारी होते ही नालंदा के DM और SP घटना स्थल पर पहुँचे। जिलाधिकारी शुभंकर ने बताया कि CCTV फुटेज व मौके पर मिले अन्य प्रमाणों की जाँच करवाई जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टया मामला ब्लास्ट का नहीं लग रहा है। उनका कहना है कि जिस घर की घटना बताई जा रही है, वहाँ ऐसा कोई नुकसान नहीं हुआ है जो ब्लास्ट से दिखे। CCTV में धुआँ देखे जाने की बात स्वीकारते हुए DM नालंदा ने कहा कि मौके पर FSL टीम को बुलाया गया है जिसकी जाँच रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
वहीं घटनास्थल पर पहुँचे SP नालंदा ने कहा कि घटना स्थल पर खून के छींटे मिले हैं और 2 लोग घायल हुए हैं जो फिलहाल अस्पताल में नहीं है। उन्होंने कहा कि दोनों घायलों को ट्रेस करने के बाद उनसे घटना की असल वजह सामने आएगी। SP ने CCTV फुटेज के आधार पर सफेद धुआँ निकलने की बात स्वीकारी। गौरतलब है कि साल 2023 में रामनवमी जुलूस के दौरान नालंदा में सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई थी। आरोप था कि शोभा यात्रा मस्जिद के आगे से निकलते ही हमलावरों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी थी। इस मामले में बिहार पुलिस ने दोनों पक्षों पर कार्रवाई की है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक लगातार चर्चा में बने हुए हैं। अब सोशल मीडिया पर उनकी गिरफ्तारी की अफवाह फैलाई जा रही है। वहीं, दिल्ली पुलिस ने कहा है कि सत्यपाल मलिक खुद थाना आए। वह यहाँ से जाने के लिए वह स्वतंत्र हैं।
दरअसल, सत्यपाल मलिक का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में, उन्होंने कहा है, “आज खापों के लोग एकजुटता दिखाने के लिए आए थे। मेरे घर पर इतनी जगह नहीं है। इसलिए, एक पार्क में खाने का इंतजाम किया। इसके बाद उन्होंने कहा कि यह गैर-कानूनी है। यहाँ यह सब नहीं हो सकता। इसके बाद मैंने कहा कि हमें ले चलो। हम थाने आ गए। हमारे कई ग्रुप हैं जिन्हें इन लोगों ने कई थानों में बंद किया है।”
ये सरकार तो कुछ भी कर सकती है मरवा भी सकती है अरैस्ट भी कर सकती है, But I am not bothered I am ready to fight..#SatyapalMalik
यही नहीं, भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने भी ट्वीट कर एक वीडियो शेयर किया था। इस वीडियो में उन्होंने कहा था कि सत्यपाल मलिक ने खापों के प्रधान और जन प्रतिनिधियों का एक कार्यक्रम आयोजित किया था, लेकिन पुलिस ने जबरदस्ती कर कार्यक्रम बंद करा दिया। यही नहीं, गुरुनाम सिंह ने अपनी गिरफ्तारी के साथ ही सत्यपाल मलिक समेत खाप के कई नेताओं की गिरफ्तारी की बात कही थी।
साथियों मुझे,खाप प्रधान व सत्यपाल मलिक सभी को दिल्ली आर.कि.पूरम में गिरफ़्तार कर लिया गया है! pic.twitter.com/LSjrLR3RW6
सत्यपाल मलिक और गुरुनाम सिंह चढूनी के वीडियो के बाद सोशल मीडिया यूजर्स द्वारा सत्यपाल मलिक की गिरफ्तारी और उन्हें हिरासत में लिए जाने की बातें कही जाने लगीं। AAP नेता संजय सिंह ने ट्वीट कर दावा किया, “चार राज्यों के राज्यपाल रह चुके सत्यपाल मलिक जी को गिरफ्तार कर लिया गया। इनका जुर्म ये है की इन्होंने बताया मोदी ने इनके पास दलाल भेजा था। पूँजीपतियों के साथ मिलकर मोदी और BJP भ्रष्टाचार करती है।”
चार राज्यों के राज्यपाल रह चुके सत्यपाल मलिक जी को गिरफ़्तार कर लिया गया। इनका जुर्म ये है की इन्होंने बताया मोदी ने इनके पास दलाल भेजा था। पूँजीपतियौ के साथ मिलकर मोदी और BJP भ्रष्टाचार करती है। pic.twitter.com/UoXcw7IBdo
वहीं, ‘डीयू जाट स्टूडेंट्स यूनियन’ ने एक वीडियो शेयर किया। इस वीडियो के अंत में यह कहते हुए सुना जा सकता है कि सत्यपाल मलिक को सीबीआई जाँच के लिए आरके पुरम थाने लाया गया। इसलिए, अब उनके समर्थक थाने के बाहर जुट रहे हैं।
एक यूजर ने ट्वीट कर दावा किया, “सत्यपाल मलिक जी को गिरफ्तार किया गया। लेकिन पुलवामा हमले की जाँच बिना देश चुप नहीं बैठेगा। मलिक से भी पूछताछ करो पर पुलवामा की जाँच भी शुरू करो राजा जी।”
हिम्मत सिंह गुर्जर नामक यूजर ने लिखा, “सारी हद पार कर दी बीजेपी ने। दिल्ली पुलिस ने पूर्व गवर्नर श्री सत्यपाल मलिक के साथ खाप नेता ईश्वर नैन सहित अन्य लोगों को हिरासत में लिया। पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक व अन्य को आर के पुरम से हिरासत में लिया गया।”
— HIMMAT SINGH GURJAR -हिम्मत सिंह गुर्जर (@himmatsinghgur1) April 22, 2023
क्या बोली दिल्ली पुलिस
इस पूरे मामले में दक्षिण पश्चिम पुलिस उपायुक्त मनोज सी का कहना है कि सत्यपाल मलिक अपने समर्थकों के साथ अपनी इच्छा से आरके पुरम थाने में आए थे। उन्हें कहा गया है कि वह जा सकते हैं। वहीं, हिंदुस्तान ने एक अन्य अधिकारी के हवाले से कहा है कि आरके पुरम के एक एमसीडी पार्क में एक कार्यक्रम होना था। सत्यपाल मलिक को कहा गया कि पार्क कार्यक्रम या बैठक के लिए नहीं है। इसके लिए उन्होंने अधिकारियों से अनुमति भी नहीं ली थी।
इसके बाद सत्यपाल मलिक और उनके समर्थक वहाँ से चले गए। लेकिन, बाद में मलिक खुद थाने पहुँच गए। उन्हें किसी ने बुलाया नहीं।
False information is being spread on social media handles regarding detention of Sh. Satyapal Malik, Ex. Gov.
Whereas, he himself has arrived at P.S. R K Puram alongwith his supporters. He has been informed that he is at liberty to leave at his own will.#DelhiPoliceUpdates
दिल्ली पुलिस ने ट्वीट कर भी गिरफ्तारी को अफवाह करार दिया। ट्वीट में लिखा गया, “पूर्व गवर्नर सत्यपाल मलिक को हिरासत में लिए जाने के संबंध में सोशल मीडिया हैंडल पर गलत जानकारी फैलाई जा रही है। वह खुद अपने समर्थकों के साथ पीएस आरके पुरम पहुँचे हैं। उन्हें कहा गया है कि वह अपनी इच्छा से जाने के लिए स्वतंत्र हैं।”
दिवंगत सुषमा स्वराज (Sushma Swaraj) के सबसे चर्चित और ऐतिहासिक भाषणों में से एक जून 1996 को लोकसभा में दिया गया था। इसमें उन्होंने बताया था कि कैसे तथाकथित सेकुलरों का सेकुलरिज्म हिंदुओं को गाली देने से शुरू होता है। कैसे हिंदू और राष्ट्र हित की बात करने वालों को साम्प्रदायिक घोषित कर दिया जाता है। उन्होंने यह भी कहा था कि अच्छा हिंदू वह होता है जो अपने धर्मों का अनुसरण करते हुए दूसरों के मजहब का सम्मान करे। यही परिभाषा उन्होंने एक अच्छे मुस्लिम, सिख और ईसाई के लिए भी बताई थी। सही मायनों में यही सेकुलरिज्म है।
लेकिन, हमने सेकुलरिज्म की जो परिभाषा गढ़ रखी है या हम पर जो थोप दी गई है, वह मुस्लिम तुष्टिकरण से शुरू होकर मुस्लिम तुष्टिकरण पर ही खत्म हो जाती है। इस सेकुलरिज्म में हिंदू भावनाओं की, उनके त्योहारों की कोई जगह नहीं है। इस सेकुलरिज्म में ईद के दिन नमाजियों पर फूल बरसाना भाईचारा होता है। लेकिन ‘मुस्लिम काॅलोनी’ से रामनवमी की शोभा यात्रा निकालना उन्मादी हिंदू हो जाना होता है।
आप कहेंगे कि इतने ज्ञानी तो आप भी हैं, फिर मैं क्यों ज्ञान दे रहा हूँ। इसकी वजह उत्तर प्रदेश से आया वह वीडियो है, जिसमें बाराबंकी के पीरबटावन स्थित ईदगाह से ईद की नमाज पढ़कर निकले नमाजियों पर हिंदू फूलों की बारिश करते दिख रहे हैं। सोशल मीडिया के तमाम प्लेटाफाॅर्मों से लेकर व्हाट्सएप पर आए वे संदेश हैं जो ईद की बधाइयाँ बाँट रहे हैं। ऐसा करने की भारत जैसे ‘धर्मनिरपेक्ष देश’ के प्रधानमंत्री या प्रधान सेवक की मजबूरी समझी जा सकती है। सियासी मजबूरी उनकी भी समझी जा सकती जो हिंदुत्व और राष्ट्रवाद की राजनीति करते हैं। लेकिन आम हिंदुओं की वह कौन सी मजबूरी है जो उन्हें कथित भाईचारे की मिसाल बनने को इतना उद्वेलित करती है? पॉलिटिकली करेक्ट दिखने की चूल मचा देती है?
इसका कारण हम पर थोप दी गई वह ‘सोच’ लगती है, जिसको सुषमा स्वराज ने अपने उस ऐतिहासिक भाषण में बेनकाब किया था। उन्होंने बताया था कि सिखों का नरसंहार करने वाले, राम भक्तों पर गोली चलाने वाले, हिंदू शरणार्थियों को भगाने वाले, मुस्लिम घुसपैठियों को बसाने वाले इस देश में खुद को ‘सेकुलर’ कहते हैं। लेकिन, जैसे ही कोई हिंदुओं की बात करता दिखता है, उसे ‘साम्प्रदायिक’ घोषित कर दिया जाता है। इस थोपी गई सेकुलरिज्म को चुनौती देते हुए सुषमा स्वराज ने कहा था, “हम साम्प्रदायिक हैं, हाँ, हम साम्प्रदायिक हैं, क्योंकि हम वंदे मातरम् गाने की वकालत करते हैं। हाँ, हम साम्प्रदायिक हैं, क्योंकि राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान के लिए लड़ते हैं। हम साम्प्रदायिक हैं, क्योंकि धारा 370 को समाप्त करने की माँग करते हैं। हाँ, हम साम्प्रदायिक हैं, क्योंकि हिन्दुस्तान में गोरक्षा और उसके वंश और वर्धन की बात करते हैं। हम साम्प्रदायिक हैं, क्योंकि हिंदुस्तान में समान नागरिक संहिता बनाने की माँग करते हैं। हम साम्प्रदायिक हैं, क्योंकि कश्मीरी शरणार्थियों के दर्द को जुबान देने का काम करते हैं।”
सेकुलरिज्म की थोपी गई परिभाषा को विस्तार देने की नीयत से ही सोनिया गाँधी वह कानून ला रही थीं, जिसमें दंगा होने पर हिंदू ही जिम्मेदार माना जाता। इसी परिभाषा को आज ‘मुस्लिम काॅलोनी’ के नाम पर विस्तार दिया जा रहा है। मजहबी आतंकियों को ‘पीड़ित/भटका हुआ’ बताना इसी परिभाषा के तहत चली आ रही पुरानी परिपाटी है जो अब ‘मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी’ तक पहुँच चुकी है। यही सेकुलरिज्म माफिया-आतंकी अतीक अहमद में अखिलेश यादव, मायावती, काॅन्ग्रेस, ओवैसी जैसों को मजहब देखने की ताकत देता है। इसी सेकुलरिज्म की उपज इफ्तार के नाम पर वह जलसा है जो हिंदू त्योहारों पर हमलों के बाद भी होता है। इसी सेकुलरिज्म के कारण हिंदू पहले पत्थर खाने, फिर गुनहगार ठहराए जाने को अभिशप्त हैं। इसी सेकुलरिज्म के अनुसार हिंदू राष्ट्र की पताका लगाने, हिंदू राष्ट्र लिखा टी शर्ट पहनने पर आपकी गिरफ्तारी हो जाती है। इसके ही कारण ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगाकर भीड़ आपको जेल भेज देती है। इसके कारण ही ‘जय श्रीराम’ का उद्घोष हिंसक हो जाता है और नारा ए तकबीर शांति का संदेश।
मैं आपको कोई बहुत पुरानी बातें याद नहीं दिला रहा। पटना में जुमे की नमाज के बाद माफिया अतीक अहमद के समर्थन में नारेबाजी तो 22 अप्रैल 2023 को मनी ईद से एक दिन पहले की है। जिस पाक रमजान महीने के बाद यह ईद आई है, उसी दौरान काजल हिंदुस्तानी की गिरफ्तारी हमने देखी है। ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगाने वाली भीड़ देखी है। देश के कई राज्यों में रामनवमी शोभा यात्राओं पर हुए हमले देखे हैं। यह भी देखा है कि कैसे हिंदू त्योहारों पर तमाम तरह की प्रशासनिक बंदिश लगाई गई है।
मैं यह नहीं कह रहा कि आप भी उनकी तरह हो जाए। वैसे भी उनके जैसा होना हिंदुत्व नहीं है। लेकिन ईद के नमाजियों पर फूलों की बारिश करना भी हिंदुत्व नहीं है। उन्हें ससम्मान उनके त्योहारों के साथ छोड़ देना हिंदुत्व है। इसलिए उस लिजलिजेपन को त्याग दीजिए जो आपके भीतर कथित सेकुलरिज्म से पैदा होता है। इसी लिजलिजेपन के कारण सेकुलरिज्म की यह परिभाषा दशकों से ढोई जा रही है। यही सियासी दलों को उनका तुष्टिकरण/तृप्तिकरण करने देता है। यही ईद के फूल को रामनवमी पर हिंदुओं पर बरसने वाला पत्थर बना देता है।
जिस दिन आम हिंदू सेकुलर दिखने के इस रोग से मुक्त हो जाएगा, उसी दिन तुष्टिकरण/तृप्तिकरण की राजनीति के साथ-साथ हिंदुओं पर पत्थरबाजी करने वालों का भी बधिया हो जाएगा। सो, सेकुलर नहीं। अच्छा हिंदू बनिए।