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‘टिकट के बदले घूस लेते हैं डीके शिवकुमार’: कर्नाटक काॅन्ग्रेस नेता के खिलाफ चुनाव आयोग से शिकायत, उम्मीदवारों पर कार्रवाई की माँग

कर्नाटक में 10 मई 2023 को विधानसभा चुनाव होने हैं। इसके पहले कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार पर पार्टी उम्मीदवारों से रिश्वत लेने का आरोप लगा है। केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे ने कॉन्ग्रेस नेता पर उम्मीदवारों को बी-फॉर्म जारी करने के दौरान रिश्वत माँगने का आरोप लगाया है। केंद्रीय मंत्री ने चुनाव आयोग से डीके शिवकुमार के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है।

शोभा करंदलाजे ने मुख्य चुनाव अधिकारी (Chief electoral officer) मनोज कुमार मीणा को शिकायत दी है। शिकायत में उन्होंने कहा है कि डीके शिवकुमार ने खुले तौर पर स्वीकार किया है कि कॉन्ग्रेस पार्टी ने उम्मीदवारों से टिकट के बदले पैसे लिए हैं। भाजपा नेत्री ने चुनाव आयोग से अपनी शिकायत में कहा कि यह घूसखोरी और आचार संहिता के उल्लंघन का मामला है। करंदलाजे ने शिवकुमार समेत उन उम्मीदवारों के खिलाफ भी कार्रवाई की माँग की है जिनपर पैसों के बदले टिकट हासिल करने का आरोप है।

इसके पहले प्रदेश कॉन्ग्रेस प्रमुख शिवकुमार 29 मार्च 2023 को प्रजा ध्वनि यात्रा के दौरान कलाकारों पर 500 रुपए के नोट उड़ाए थे। खुली बस से नोट उड़ाने को लेकर भी उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी। इस घटना का एक वीडियो भी वायरल हुआ था जिसमें शिवकुमार नोट उड़ाते नजर आ रहे थे। इसे लेकर उनकी खूब आलोचना भी हुई थी। इसके अलावा कर्नाटक के कॉन्ग्रेस प्रमुख डीके शिवकुमार 2019 में मनी लॉन्ड्रिंग केस में जेल की हवा भी खा चुके हैं।

विवादों के कारण डीके शिवकुमार को शक था कि उनका नामांकन रद्द किया जा सकता है। ताजा जानकारी के मुताबिक कर्नाटक प्रदेश कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष का नामांकन स्वीकार कर लिया गया है। 10 मई को कराए जा रहे चुनाव में इस साल कुल 3044 उम्मीदवार मैदान में हैं। मुख्य मुकाबाला भाजपा, कॉन्ग्रेस और जेडीएस के बीच है। चुनाव के नतीजे 13 मई को घोषित किए जाएँगे।

‘तेरे बाप की जमीन है?’: नदी में बहा देते हैं मल-मूत्र, मना करने पर दी गालियाँ – उत्तराखंड के सैनिक क्षेत्र में बनी अवैध मुस्लिम बस्ती का वीडियो

उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो सैनिक क्षेत्र में बनी एक अस्थाई बस्ती का बताया जा रहा है, जिसमें कथित तौर पर मुस्लिम समाज के एक व्यक्ति से कुछ लोगों को बहस करते देखा जा सकता है। बहस करने वाले व्यक्तियों का आरोप है कि पास से बह रही नदी में बस्ती में रह रहे लोगों द्वारा मल-मूत्र बहाया जा रहा है। उत्तराखंड पुलिस ने मामले में केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। एक आरोपित पर 5000 रुपए का जुर्माना भी ठोंका गया है।

मिली जानकारी के मुताबिक, यह मामला अल्मोड़ा के रानीखेत इलाके का है। आरोप है कि यहाँ सैनिक क्षेत्र कैंटोमेंट बोर्ड पड़ता है, जिसके पास मुस्लिम समाज के कुछ लोग अस्थाई पर तौर कच्ची बस्ती बना कर रह रहे हैं। लगभग 2 मिनट 20 सेकेंड के एक वीडियो में कुछ लोग इस बस्ती में पहुँचते है और वहाँ रहे रहे लोगों पर नदी में गंदगी के साथ मल-मूत्र बहाने का आरोप लगाते हैं। वीडियो में एक नाली भी दिखाई दे रही है, जिससे पानी नीचे जाता दिख रहा है। इस बहस के दौरान बस्ती के कुछ लोग मौके पर जमा हो जाते हैं और बहस शुरू हो जाती है।

इस बहस में शिकायतकर्ता उन सभी पर अवैध तौर पर सरकारी जमीन पर कब्ज़ा करने का भी आरोप लगाता है। जवाब में वह मुस्लिम व्यक्ति किसी से भी न डरने और जा कर शिकायत कर देने का ताव देता है। उसने उलटे शिकायत करने गए व्यक्ति को गंदी-गंदी गालियाँ देते हुए कहा, “तू है कौन ? तेरे बाप की जमीन है?” वह बाकी लोगों को बुला कर लाने का भी ताव देता है। थोड़ी देर बाद बस्ती का रहने वाला वह व्यक्ति फावड़े से बह रही नाली को रोक देता है। हालाँकि, इसके बाद भी बहस जारी रहती है।

इस बहस में आरोपित शिकायतकर्ताओं को नोटिस भी भिजवाने का ताव देता है।

अल्मोड़ा पुलिस ने शुक्रवार (21 अप्रैल, 2023) को अपने एक ट्वीट में बताया कि नाली को पूरी तरह से बंद करवा दिया गया है और संबंधित आरोपित पर 5 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। हालाँकि, कुछ नेटीजेंस उत्तराखंड पुलिस के जवाब से संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने इस जुर्माने को छोटी सज़ा बताई। इसके बाद अगले दिन 22 अप्रैल 2023 (शनिवार) को अल्मोड़ा पुलिस ने आरोपित पर FIR दर्ज कर के कार्रवाई किए जाने की जानकारी दी है।

ऑपइंडिया से स्थानीय रानीखेत के भाजपा नेता मनीष चौधरी ने बात की। उन्होंने बताया कि जिस इलाके का ये मामला है वह जगह धोबी मोहल्ला आम से जानी जाती यही और पूरी तरह से रक्षा मंत्रालय के अधीनस्थ है। वीडियो में बहस करते लोग कौन हैं या कहाँ से आए हैं इस बारे में मनीष ने खुद को भी अनभिज्ञ बताया। उन्होंने बताया कि स्थानीय पुलिस प्रशासन ने हिन्दू संगठनों को 2 दिन पहले ही बुला कर मामले को तूल न देने की अपील करते हुए उचित कार्रवाई किए जाने का भरोसा दिया था।

‘जब राज्यपाल थे तब अंतरात्मा क्यों नहीं जगी’: सत्यपाल मलिक के आरोपों पर बोले अमित शाह, कहा- अमृतपाल पर पंजाब सरकार ने अच्छा काम किया

जम्मू-कश्मीर के अंतिम राज्यपाल रहे सत्यपाल मलिक पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने शनिवार (22 अप्रैल 2023) को कहा है कि मलिक जब सत्ता में बैठे थे, तब चुप थे। उस समय उनकी अंतरात्मा क्यों नहीं जगी? गृह मंत्री ने पंजाब में खालिस्तान की लहर की बातों को भी इनकार किया है।

दरअसल, पिछले सप्ताह एक इंटरव्यू में सत्यपाल मलिक ने पुलवामा हमले समेत कई मुद्दों को लेकर केन्द्र सरकार पर निशाना साधा था। इंडिया टुडे के कार्यक्रम में बोलते हुए अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जनता और पत्रकारों को इन लोगों की विश्वसनीयता पर विचार करना चाहिए। अगर यह सब सही है तो जब वह राज्यपाल थे तब क्यों चुप रहे?

गृह मंत्री ने आगे कहा है कि वह देश की जनता को यह कहना चाहते हैं कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने ऐसा कुछ नहीं किया, जिसे छिपाना पड़े। उन्होंने आगे कहा है कि समय-समय पर कोई रूप बदलता है तो इस पर क्या किया जा सकता है। जनता को ऐसे लोगों की पहचान कर लेनी चाहिए। सत्यपाल मलिक ने जो आरोप लगाए हैं, वह सार्वजनिक चर्चा के विषय नहीं हैं।

दुनिया भर में बढ़ रही खालिस्तानी गतिविधियों तथा ब्रिटेन में स्थित भारतीय उच्चायोग में हुए हमले को लेकर अमित शाह ने कहा, “हमने NIA को इतना सक्षम बनाया है कि वह इस बात की जाँच कर सके कि विदेशी धरती पर भारत के खिलाफ कोई साजिश तो नहीं हो रही। भाजपा सरकार भारतीय उच्चायोग पर किसी भी तरह के हमले को बर्दाश्त नहीं करेगी। हम मामले को गंभीरता से ले रहे हैं और भारतीय कानूनों के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”

भगोड़े अमृतपाल सिंह और पंजाब में खालिस्तानी लहर के बारे में पूछे जाने पर अमित शाह ने कहा, “पंजाब में कोई खालिस्तानी लहर नहीं है। सरकार अपना काम कर रही है। हम स्थिति पर बहुत बारीकी से नजर रख रहे हैं। केंद्र सरकार इसका समर्थन कर रही है। कोई भी भारत की एकता और संप्रभुता पर हमला नहीं कर सकता।”

खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह को गिरफ्तार करने में पंजाब पुलिस की नाकामी को लेकर उन्होंने कहा है कि कई बार होता है, लेकिन जिस प्रकार से वह पहले खुलेआम घूमता था, अब ऐसा नहीं होगा। अब वह खालिस्तानी गतिविधियों को आगे नहीं बढ़ा पाएगा। उन्होंने पंजाब सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि पंजाब सरकार ने अच्छा काम किया है।

इसके अलावा, केंद्रीय गृह मंत्री ने कर्नाटक में मुस्लिमों को मिलने वाले आरक्षण को लेकर कहा है कि वह आरक्षण संविधान के खिलाफ था। कॉन्ग्रेस ने असंवैधानिक रूप से राज्य में 4 प्रतिशत मुस्लिम आरक्षण को लागू किया था। इसे लागू करने के लिए कॉन्ग्रेस संविधान के खिलाफ चली गई थी। इसे भाजपा सरकार ने खत्म कर अन्य समुदायों का आरक्षण बढ़ाया है।

बता दें कि मार्च 2023 में कर्नाटक की बोम्मई सरकार ने मुस्लिम आरक्षण को खत्म करते हुए कहा था कि इस फैसले से सभी लोगों को फायदा मिलेगा। उन्होंने कहा था कि मुस्लिमों को जहाँ 4 प्रतिशत की जगह अब 10 प्रतिशत का लाभ मिलेगा, वहीं वोक्कालिगा और लिंगायत समुदाय के आरक्षणों में भी 2-2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

बिना चाँद देखे सऊदी अरब ने मना ली ईद? कई इस्लामी देशों ने किया किनारा, खगोलविदों ने कहा- चाँद निकलने के सबूत दिखाओ

रमजान के बाद ईद-उल-फितर की तारीख तय करना अक्सर इस्लामी देशों में बहस का विषय रहा है। आमतौर पर यह तारीख लूनर कैलेंडर से तय की जाती है। लेकिन इसे पक्का तभी माना जाता है जब ईद से एक दिन पहले चाँद नजर आ जाए। कुछ देश इसके लिए अपने कुछ स्थानीय चाँद देखने वालों पर यकीन कर लेते हैं और कुछ सऊदी अरब पर छोड़ देते हैं कि जब वो ईद मनाएँगे तभी ईद होगी।

इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ। लोग सऊदी अरब पर भरोसा करके बैठे थे और सऊदी ने ईद का दिन शुक्रवार बता दिया। सऊदी के ऐलान के बाद ही ये बहस गरमा गई कि क्या वाकई ईद शुक्रवार को होनी चाहिए। कुछ खगोलविद निकलकर आए जिन्होंने चुनौती दी कि ईद शुक्रवार को नहीं हो सकती क्योंकि गुरुवार को चाँद दिख ही नहीं सकता। एक कुवैती खगोलविद ने तो कहा अगर ऐसा है कि गुरुवार को चाँद दिखा तो उसकी फोटो सबूत के तौर पर पेश की जाए।

बावजूद इस चुनौती के सऊदी ने 13 में से 2 क्षेत्रों में चाँद नजर आने पर पर ईद शुक्रवार को मनाई। जबकि मोरक्को, पाकिस्तान, ओमान, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, भारत और जापान में शनिवार को ईद मनाई गई। साथ ही कुवैती खगोलविद की चुनौती पर सऊदी अरब से चाँद की फोटो दिखाने को कहा गया। इस पर एक सऊदी के खगोलविद मुलहम-अल-हिंद ने धुंधली चांद की फोटो खींचकर दिखाई और कहा कि ये चार्ज कपल्ड डिवाइस इन्फ्रारेड कैमरे का प्रयोग करके खींची गई है।

उल्लेखनीय है कि इस तरह ईद की तारीखों में हेर-फेर के बाद कई इस्लामी देश और मुस्लिम लोग सऊदी अरब से नाराज हैं। उनका मत यही है कि गुरुवार को किसी कीमत पर चाँद का दिखना संभव नहीं था तो सऊदी ने ईद कैसे मनाई। ईराक के शिया मौलवी अली-अल-सिस्तानी ने भी ईद शनिवार को बताई।

इसी तरह लेबनान में भी शिया इस्लामिक काउंसिल ने ईद शनिवार की बताई। इसके अलावा ब्रिटिश सरकार ने भी माह की शुरुआत में यही अनुमान लगाया था कि गुरुवार को यूरोप, अफ्रीका, एशिया और ऑस्ट्रेलिया के बड़े-बड़े क्षेत्र में चंद्रमा नहीं दिखाई देंगे जिसके बाद कई मुस्लिमों ने सऊदी के पल्ला झाड़ते हुए ईद शनिवार की मानी।

“जहाँ शिवलिंग मिला वहाँ वजू की इजाजत नहीं दी जा सकती”, सुप्रीम कोर्ट में यूपी सरकार की दो टूक, ज्ञानवापी मस्जिद कमेटी ने माँगी थी इजाजत, SC ने कहा पानी की पूरी व्यवस्था करें

वाराणसी के विवादित ज्ञानवापी ढाँचे में मिले शिवलिंग के पास वजू करने की मुस्लिमों की माँग को उत्तर प्रदेश की सरकार ने नकार दिया है। सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार (21 अप्रैल 2023) को हुई बहस के दौरान यूपी सरकार ने साफ-साफ कह दिया कि ज्ञानवापी में जिस स्थान पर शिवलिंग मिला है, उस एरिया में वजू की इजाजत नहीं दी जा सकती।

दरअसल, ज्ञानवापी मस्जिद इंतेजामिया कमेटी की तरफ से रमजान और ईद के दौरान परिसर में ही वजू की माँग की गई थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद और मंदिर पक्ष को डीएम की मौजूदगी में बैठकर फैसला लेने के लिए कहा था। डीएम की मौजूदगी में हुई बैठक में जब कोई हल नहीं निकल सका तो शुक्रवार (21 अप्रैल 2023) को सुप्रीम कोर्ट में ही मामले की सुनवाई हुई।

सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने वाराणसी के डीएम को नमाजियों के लिए पानी और शौचालय की व्यवस्था करने निर्देश दिया। रमजान और ईद के दौरान मस्जिद मुस्लिम पक्ष परिसर में ही वजू की माँग कर रहा था। मस्जिद कमेटी की तरफ से कोर्ट में एडवोकेट हुजैफा अहमदी पैरवी कर रहे थे।

हुजैफा अहमदी ने सर्वोच्च कोर्ट में दलील दी कि 400 सालों से मुस्लिम मस्जिद के अंदर के उस इलाके में वजू करते आए हैं। इसलिए उन्हें इजाजत मिलनी चाहिए। इस पर कोर्ट ने उत्तर प्रदेश की सरकार से पूछा कि क्या शुक्रवार और शनिवार (21-22 अप्रैल 2023) के लिए कोई व्यवस्था नहीं की जा सकती?

इस पर यूपी सरकार का पक्ष रख रहे सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि डीएम से बात हुई है। जहाँ शिवलिंग मिलने की बात है, वहाँ वजू की इजाजत नहीं दी जा सकती है। वजू के लिए पहले से ही पानी के ड्रम और मोबाइल शौचालय की व्यवस्था की गई है। मस्जिद पक्ष के लोग परिसर में ही वजू करने की माँग कर रहे हैं।

इस पर सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि कुछ और सुविधाएँ दी जानी चाहिए, ताकि रोजेदारों और नमाजियों को परेशानी न हो। जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि वहाँ पानी के टब क्यों नहीं लगवा दिए गए। यूपी सरकार ने बताया कि मस्जिद से 70 मीटर की दूरी पर वॉशरूम और वजू के लिए व्यवस्था की गई है।

एसजी तुषार मेहता ने इस पर कोर्ट को आश्वस्त किया कि जिला अधिकारी मौके पर पर्याप्त संख्या में पानी के टब का इंतजाम करवा देंगे। कोर्ट ने एसजी के बयान को आदेश में दर्ज कर लिया। बता दें कि ज्ञानवापी परिसर में कराए गए सर्वे के दौरान वजूखाने से शिवलिंग निकला था। जिसे मस्जिद पक्ष फव्वारा बता रहा था।

सर्वोच्च अदालत ने नवंबर 2022 को अपने एक फैसले में ज्ञानवापी परिसर में मिले ‘शिवलिंग’ और उसके आसपास के क्षेत्र को सुरक्षित रखने का आदेश दिया था। वजूखाने के इलाके को सील कर दिया गया है और सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी गई है।

बता दें कोर्ट ने मुख्य मामले की सुनवाई के लिए 7 अगस्त 2023 की तारीख तय की हुई है। मुख्य मामले में मस्जिद कमेटी ने ज्ञानवापी परिसर के सर्वे कराने के आदेश को चुनौती दी है।

पहले काॅन्ग्रेस अब कम्युनिस्ट, क्या राजनीतिक विरोध में PM मोदी की सुरक्षा से हो रहा खिलवाड़?

आपको याद होगा, जब जनवरी 2022 में पंजाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में चूक का मामला सामने आया था। कहने के लिए ये भले ही सुरक्षा में चूक का मामला हो, लेकिन बात 140 करोड़ लोगों के देश के सबसे बड़े नेता की हो तो ये काफी हल्का शब्द लगता है। अब केरल में कुछ उसी तरह का मामला सामने आ रहा है, जहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे में आत्मघाती हमले की धमकी दी गई है। सबसे बड़ी बात कि पुलिस पर ही गंभीर आरोप लगे हैं।

यहाँ ये भी देखना चाहिए कि अक्सर विपक्षी दल इससे शुरू में पल्ला झाड़ने के अंदाज़ में हलके में लेते हैं। उन्हें शायद इसकी गंभीरता का भान नहीं होता, या फिर हर एक चीज को लेकर राजनीति खेलने की आदत उन्हें इस कदर धूर्त बता देती है कि प्रधानमंत्री को भी वो विरोधी नेता के रूप में ही देखते हैं। इसी तरह, जब पंजाब में पीएम मोदी की सुरक्षा में चूक का मामला सामने आया था, तब वहाँ चरणजीत सिंह चन्नी मुख्यमंत्री थे और कॉन्ग्रेस की सरकार थी।

कुछ ही महीनों पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह को सीएम के पद से हटा कर उनकी जगह चन्नी को लाया गया था, जिनके नेतृत्व में कॉन्ग्रेस अगला विधानसभा चुनाव लड़ी और बुरी तरह हारी भी। नवजोत सिंह सिद्धू के साथ उनकी अदावत कई बार सामने आई थी। तब पंजाब कॉन्ग्रेस के नेताओं ने पीएम मोदी की सुरक्षा में चूक की बात स्वीकार नहीं की थी और इसे राजनीति के के नजरिए से देखा था। लेकिन जब जाँच हुई तो सब दूध का दूध और पानी का पानी हो गया।

पिछले महीने ही खबर आई कि बठिंडा में पीएम मोदी की सुरक्षा में चूक के मामले में तत्कालीन मुख्य सचिव और DGP समेत 9 बड़े अधिकारियों पर गाज गिरने वाली है, यानी उनकी लापरवाही सामने आई है। पंजाब में अब भी भाजपा की सरकार नहीं है, AAP की सरकार है जो भाजपा की विरोधी पार्टी ही है। जाँच के बाद जो रिपोर्ट सामने आई थी, उस पर अमल करने में भी पंजाब सरकार ने 6 महीने की देरी की, जिसके बाद केंद्र सरकार को उन्हें याद दिलाना पड़ा।

और ये केंद्र सरकार की जाँच में सच्चाई सामने नहीं आई थी, बल्कि इसकी जाँच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने ही समिति गठित की थी। उस समिति ने जाँच की तो उसमें सामने आया कि इन अधिकारियों का व्यवहार काफी लापरवाही भरा था। रिटायर्ड जज इंदु मल्होत्रा इस समिति की अध्यक्ष थीं। पीएम मोदी के रूट को लेकर पंजाब पुलिस को एडवांस में सब कुछ बता दिया गया था। लेकिन, एक फ्लाईओवर पर उन्हें काफी देर रुकना पड़ा था, क्योंकि प्रदर्शनकारी की आड़ में हिंसक तत्वों ने उन्हें घेर लिया था।

इस मामले में पंजाब पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठे, जो प्रदर्शनकारियों के साथ चाय की चुस्की लेते हुए दिखी। पंजाब सरकार बयान बदलती रही। प्रोटोकॉल्स का उल्लंघन करते हुए फ्लाईओवर के पास एक बाजार को भी खुला रखा गया था, जिसके अंदर एक शराब की दुकान भी बेधड़क खुली हुई थी। प्रदर्शनकारियों ने गाँव वालों को भी सड़क जाम करने के लिए उकसाया। लाठी लेकर दौड़ रहे युवक ग्रामीणों को जमा कर रहे थे। कई किसान यूनियन वहाँ सक्रिय थे। एक ग्रामीण ने बताया कि गुरुद्वारा पर सन्देश भेजा गया कि लोग जमा हों।

नया मामले कुछ यूँ है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केरल दौरे को लेकर आत्मघाती हमले की धमकी वाला पत्र सामने आया है, जिसके बाद पूरे राज्य में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। पुलिस और जाँच एजेंसियाँ इस पत्र को लेकर छानबीन करने में लग गई हैं। हालाँकि, प्रदेश भाजपा ने आरोप लगाया है कि पीएम मोदी के दौरे को लेकर जो VVIP सिक्योरिटी प्लान है, उसे केरल पुलिस लीक कर रही है। केरल पुलिस के ADG की ही एक रिपोर्ट के सामने आने के बाद ये आरोप लगे हैं।

49 पन्ने की जो रिपोर्ट लीक हुई है, उसे केरल के ADGP (इंटेलिजेंस) टीके विनोद कुमार ने तैयार किया था। उन्होंने इसमें पीएम मोदी के दौरे को लेकर सुरक्षा खतरे पर आगाह किया है। हाल ही में जिस तरह से PFI को देश भर में बैन किया गया, आशंका जाहिर की गई है कि कट्टरपंथी इस्लामी संगठन के कुछ लोग साजिश रच रहे हैं। कोच्चि पुलिस कमिश्नर ने एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई है। पीएम मोदी केरल को राज्य की पहली ‘वन्दे भारत’ की सौगात देने वाले हैं।

हाल ही में इस तरह से बंगाल से लेकर हैदराबाद तक ‘वन्दे भारत’ ट्रेनों को कट्टरपंथी सोच वाले पत्थरबाजों द्वारा नुकसान पहुँचाया गया है, ये साफ़ है कि इस ट्रेन के नाम और इससे वो खुश नहीं हैं। ऐसे में केरल सरकार को इसमें पहले से सतर्कता बरतनी चाहिए थी और पीएम मोदी की सुरक्षा के मामले को गंभीरता से हैंडल करना चाहिए था। वो उस राज्य के भी प्रधानमंत्री हैं, जहाँ भाजपा की सरकार नहीं है। जिन्होंने उन्हें वोट नहीं दिया, उनके भी प्रधानमंत्री वही हैं।

केरल पुलिस की लापरवाही बहुत बड़ी है, क्योंकि जो दस्तावेज लीक हुए हैं उसमें पीएम मोदी की VVIP सुरक्षा रूट और इसकी व्यवस्था को लेकर सारे डिटेल्स हैं। इसमें ये भी बताया गया है कि किस पुलिस अधिकारी को कौन सी ड्यूटी दी गई है और कहाँ पर सुरक्षा की कैसी व्यवस्था होगी। इसमें पीएम मोदी के दौरे से संबंधित छोटी से छोटी जानकारी भी है। ऐसे में केरल पुलिस को इसकी जाँच कराते हुए जिम्मेदारी तय कर के कार्रवाई करनी चाहिए।

पीएम मोदी के दौरे में समय नहीं बचा है और भारत जैसे देश में नेता को जनता से अलग रख पाना मुश्किल है। अगर कोई नेता है, तो वो जनता के साथ मिलेगा हो, रैलियाँ करेगा ही और उनके बीच पहुँचेगा ही। प्रधानमंत्री के मामले में कई प्रोटोकॉल्स होते हैं, जिनका पालन कराने की जिम्मेदारी पुलिस और जाँच एजेंसियों की होती है। ऐसे में देखना है कि केरल पुलिस अपनी इस लापरवाही को लेकर किस तरह की कार्रवाई करती है।

केरल में कम्युनिस्ट सरकार है। वामपंथी CPM की सरकार। राहुल गाँधी भी वायनाड से ही सांसद रहे हैं। कॉन्ग्रेस का यहाँ ‘मुस्लिम लीग’ से गठबंधन है। ऐसे में कम्युनिस्ट पार्टी को कॉन्ग्रेस की राह पर चलने की बजाए प्रोटोकॉल्स का पालन करने और नियम-कानून पर ध्यान देना चाहिए। आशा यही होगी कि मुख्यमंत्री पिनरई विजयन इस मुद्दे को एक राजनीतिक मामले की तरह नहीं देखेंगे, क्योंकि इस पर उत्तर-दक्षिण वाला खेल रच कर माहौल बिगाड़ने की साजिश भी हो सकती है।

ये भी याद रखिए कि पंजाब में सुरक्षा चूक से पहले एक वीडियो जारी किया गया था खालिस्तानियों द्वारा, जिसमें हूबहू उसी स्टाइल में पीएम मोदी की हत्या के लिए उकसाया गया था। एनिमेशन वाले उस वीडियो में दिखाया गया था कि दोनों तरफ से भीड़ पीएम मोदी को एक फ्लाईओवर पर घेर लेती है और उनकी हत्या कर देती है। सुरक्षा चूक भी फ्लाईओवर पर ही हुआ। केरल में ये घटना न दोहराई जाए, इसके लिए विशेष तैयारी करनी पड़ेगी और बगैर राजनीति किए।

सेना की जिस रेजीमेंट में रहे पिता, वहीं गया पुत्र; पिता कारगिल में तो बेटा पुंछ में हो गया बलिदान: क्या पंजाब के इस बलिदानी परिवार को जानते हैं आप

जम्मू कश्मीर के पुंछ जिले में हुए आतंकी हमले में 5 जवान बलिदान हो गए। इनमें से एक लांस नायक कुलवंत सिंह का शनिवार (22 अप्रैल 2023) को अंतिम संस्कार कर दिया गया। उन्हें 3 माह के बेटे ने मुखाग्नि दी। कुलवंत सिंह के पिता भी कारगिल युद्ध में बलिदान हुए थे। पिता की ही तरह अब उन्होंने भी देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।

एक ही रेजिमेंट में रहते बलिदान हुए पिता-पुत्र

भारतीय सेना के वीर जवान लांस नायक कुलवंत सिंह पंजाब के मोगा जिले के चाडिक गाँव के रहने वाले थे। उनके बलिदान की खबर के बाद से ही चाडिक गाँव में मातम पसरा हुआ है। कुलवंत के पिता हवलदार बलदेव सिंह भी सेना में थे। साल 1999 में हुए कारगिल युद्ध में वह बलिदान हुए थे। इसके 11 साल बाद यानि साल 2010 में कुलवंत भी सेना में शामिल हो गए। कुलवंत भारतीय सेना की रेजिमेंट सिख लाइट इन्फैंट्री का हिस्सा थे। इसे संयोग ही कहा जाना चाहिए कि सिख लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंट में रहते हुए ही उनके पिता भी बलिदान हुए थे।

देश सेवा में बलिदान हुए लांस नायक कुलवंत सिंह की माँ हरिंदर कौर का कहना है कि सेना में शामिल होने के लिए जब कुलवंत घर से निकले थे तो उन्होंने उनसे कहा था कि वह अच्छे से रहेंगे और सब कुछ ठीक हो जाएगा। वहीं, कुलवंत की पत्नी हरदीप कौर का कहना है कि बलिदान से एक दिन पहले कुलवंत ने उन्हें फोन किया था। इस दौरान बातचीत में बेटे को समय पर वैक्सीन लगवाने की बात कही थी। कुलवंत अपने पीछे माँ, पत्नी, डेढ़ साल की बेटी और करीब 3 महीने का बेटा छोड़ गए हैं। कुलवंत अपने पैतृक गाँव में स्थित घर का पुनर्निर्माण कराने की भी सोच रहे थे। यह घर काफी पुराना हो गया है।

चाडिक गाँव के सरपंच गुरचरण सिंह का कहना है कि कुलवंत का जीवन बेहद गरीबी से बीता। सेना में नौकरी के बाद से सब ठीक होता दिख रहा था। करीब 3 साल पहले उनकी शादी हुई थी। 3 सप्ताह पहले ही वह घर में छुट्टी बिताकर वापस जम्मू-कश्मीर गए थे।

हमले के समय गाड़ी से कूद गए थे कुलवंत

लांस नायक कुलवंत सिंह के बलिदान को लेकर 67 इंजीनियर्स रेजिमेंट से सेवानिवृत्त सूबेदार नायब सिंह का कहना है कि सेना में तैनात जवानों से हुई बातचीत में उन्हें पता चला है कि आतंकियों ने जिस वाहन में आग लगाई थी, कुलवंत उस वाहन से कूद गए थे। लेकिन इसके बाद वह गंभीर रूप से घायल हुए और वह बलिदान हो गए।

कुलवंत सिंह अमर रहे के नारों से गूँज उठा क्षेत्र

बलिदानी लांस नायक कुलवंत सिंह को मोगा जिले में स्थित उनके गाँव चाडिक में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। बलिदानी को उनके 3 महीने के बेटे ने मुखाग्नि दी। बलिदानी की पत्नी हरदीप कौर, माँ हरिंदर कौर, बहन चरणजीत कौर व भाई सुखप्रीत सिंह समेत सैकड़ों की तादात में मौजूद लोगों ने वीर जवान को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान ‘कुलवंत सिंह अमर रहे’ के नारे गूँजते रहे।

बता दें कि जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में गुरुवार (20 अप्रैल 2023) को हुए आतंकी हमले में भारतीय सेना के 5 जवान बलिदान हो गए थे। आतंकियों ने ग्रेनेड से हमले कर सेना के वाहन में आग लगा दी थी। यही नहीं, इसके बाद आतंकियों ने भीषण गोलीबारी भी की थी।

पंजाब में AAP विधायक के पिता रेप केस में समझौता के लिए ₹10 लाख माँगने पर पकड़े गए, गुजरात में ₹1 करोड़ माँगने वाला पार्टी नेता गिरफ्तार

पंजाब में आप (AAP) विधायक जगदीप कम्बोज ‘गोल्डी’ के पिता सुरिंदर कम्बोज को भ्रष्टाचार के आरोप में शुक्रवार (21 अप्रैल 2021) को गिरफ्तार कर लिया गया। उन पर दुष्कर्म मामले में डरा-धमका कर 10 लाख रुपए की वसूली के आरोप हैं। शिकायतकर्ता सुनील कुमार नाम का प्रॉपर्टी डीलर है।

पुलिस ने इस मामले में सुरिंदर व दो महिलाओं सहित चार पर केस दर्ज किया है। पिता की गिरफ्तारी पर विधायक जगदीप का कहना है कि वो कानून के काम में कोई रुकावट नहीं डालेंगे। साथ ही उन्होंने लम्बे समय से पिता से कोई वास्ता न होने की भी बात कही है। जगदीप कम्बोज गोल्डी फाजिल्का के जलालाबाद से विधायक हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रॉपर्टी डीलर सुनील ने पुलिस को दी गई शिकायत में कहा था कि एक जानकार महिला ने 20 अप्रैल 2023 को उन्हें कॉल किया था। महिला ने कहा था कि तीन साल पहले उसके पति की मौत हो गई है और अब उस पर कर्ज पर चढ़ गया है। उसने सुनील से यह भी कहा कि वह अपना मकान बेचकर एक छोटा घर खरीदना चाहती है, ताकि कर्ज को चुकता कर सके।

सुनील ने अपनी शिकायत में आगे बताया किसी इसके बाद वह महिला के कहने पर उसे मकान दिखाने ले गया। उसी दिन शाम को पहले महिला का फोन आया। उसके बाद एक अन्य महिला का फोन आया, जो खुद को महिला की बहू बता रही थी। उसने सुनील से कहा कि वह मकान दिखाने के बहाने महिलाओं को लेकर जाता है और उससे दुष्कर्म करता है।

कुछ समय के बाद विधायक जगदीप कम्बोज के पिता सुरिंदर ने सुनील को कॉल करके उन पर रेप का केस दर्ज होने की जानकारी दी और कहा कि वह मामले को सेटल करवा देगा। इसके लिए विधायक के पिता ने सुनील से 10 लाख रुपए की माँग की। AAP विधायक के पिता से मिली इस धमकी के बाद सुनील ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। मामले में सुरिंदर कंबोज, महिला महिला, उसके बेटे और बहू को नामजद किया गया है।

आरोपितों पर IPC की धारा 384 (जबरन वसूली) और 389 (जबरन वसूली के लिए डराना) के तहत FIR दर्ज हुई है। पुलिस ने सुरिंदर कम्बोज को गिरफ्तार कर लिया है। उधर, महिला ने भी इस मामले में प्रॉपर्टी डीलर सुनील के खिलाफ रेप केस दर्ज करवाया है। महिला ने कहा कि सुनील मकान दिखाने के बहाने उसे लेकर गया और उसके साथ दुष्कर्म किया।

महिला ने अपनी शिकायत में कहा कि रेप की घटना के बाद वह घर आकर अपने बेटे और बहू को इसकी जानकारी दी और बेटे ने उसे अस्पताल में भर्ती करवाया। शिकायत पर पुलिस ने सुनील को भी गिरफ्तार किया है। डिप्टी SP अतुल सोनी के मुताबिक, मामले में जाँच की जा रही है।

पिता पर लगे आरोपों के बाद आप विधायक जगदीप कम्बोज गोल्डी ने उनसे कोई वास्ता न होने की बात कहते हुए कानून को फ्री छूट होना बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई आप सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत हुई है। वहीँ शिरोमणि अकाली दल में मामले में आप विधायक की भी संलिप्तता का आरोप लगाते हुए उनकी गिरफ्तारी की माँग की है।

गुजरात में आप नेता गिरफ्तार

वहीं गुजरात पुलिस ने 1 करोड़ रुपए की उगाही के मामले में आम आदमी पार्टी के नेता युवराज सिंह जडेजा को गिरफ्तार किया है। जडेजा की गिरफ्तारी भावनगर जिले में हुई है। उन पर राज्य की सरकारी नौकरियों में पेपर लीक मामले में डमी उम्मीदवारों को बिठाने वाले गिरोह का मेंबर होने का आरोप है। आरोपित जडेजा के मनीष सोसोदिया के साथ तस्वीर भी सोशल मीडिया पर वायरल हैं।

जिसने ट्विटर बनाया, उसका भी ब्लू टिक गया: अब एंड्राइड के लिए ‘Bluesky’ लेकर आए हैं जैक डोर्सी, क्या Twitter को खा जाएगा

माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर के को-फाउंडर और चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) रहे जैक डॉर्सी ने ट्विटर का विकल्प पेश किया है। जैक डॉर्सी ने ब्लूस्काई (Bluesky) ऐप को एंड्रॉएड (Android) पर भी लॉन्च कर दिया है। ब्लूस्काई भी ट्विटर की तरह माइक्रो ब्लॉगिंग साइट है। जिसे ऐसे वक्त में एंड्रॉएड यूजर्स के लिए पेश किया गया है जब ट्विटर ने लोगों के अकाउंट से लीगेसी ब्लू टिक हटा दिए हैं। ट्विटर पर ब्लू टिक के लिए अब पैसे देने होंगे।

जानकारी के मुताबिक ब्लूस्काई ऐप अभी भी टेस्टिंग मोड में है। Bluesky को सिर्फ एक इनवाइट कोड और OTP के जरिए खोला जा सकता है। इसपर तेजी के साथ काम किया जा रहा है। ऐप का डिजाइन शुरुआती ट्विटर की तरह ही नजर आ रहा है। ब्लूस्काई में यूजर्स 256 शब्दों की पोस्ट शेयर कर सकते हैं। पोस्ट के साथ तस्वीर लगाने का भी ऑप्शन दिया गया है। यूजर्स अकाउंट को शेयर, म्यूट या ब्लॉक कर सकते हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, ट्विटर की तरह ही इसमें बुकमार्क, मॉनिटरिंग लाइक, मॉडिफाई पोस्ट, कोट पोस्ट, डायरेक्ट मैसेज, हैशटैग जैसे फीचर्स उपलब्ध होंगे।

पोस्ट करने से पहले ट्विटर ‘What’s happening’ पूछता है। इसी तरह ब्लूस्काई अपने यूजर्स से ‘What’s up’ पूछता है। फिलहाल ब्लूस्काई के 20 हजार एक्टिव यूजर बताए जा रहे हैं। जबकि गूगल प्ले स्टोर से इसे 10 हजार से ज्यादा लोग डाउनलोड कर चुके हैं। इसे पहली बार फरवरी 2023 में आईओएस (iOS) यूजर्स के लिए लॉन्च किया गया था। इसे कुछ यूजर्स के लिए ही टेस्टिंग के मकसद से लॉन्च किया गया था।

ब्लूस्काई पर साल 2019 से ही काम चल रहा है। दावा किया जा रहा है कि ब्लूस्काई अपने यूजर्स को मौजूदा माइक्रो ब्लॉगिंग साइट्स के मुकाबले ज्यादा सुविधाएँ देगा। बता दें जैक डॉर्सी भी उनलोगों में शामिल हैं जिनसे ट्विटर ने लीगेसी ब्लू टिक वापस ले लिया है। ट्विटर के को-फाउंडर ने कहा है कि वे ट्विटर पर ब्लू टिक के लिए भुगतान नहीं करेंगे।

कुल मिलाकर कह सकते हैं कि आने वाले दिनों में ट्विटर को कई माइक्रो ब्लॉगिंग साइट से मुकाबला करने को मिल सकता है। इनमें मैस्टोडॉन (Mastodon) और भारतीय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म कू (koo) पहले से ही कई देशों में यूजर्स की पसंद बनते जा रहे हैं। ऐसे में ब्लू स्काई के साथ कई और प्लेटफॉर्म भी लॉन्चिंग को तैयार हैं।

‘मंत्रों से बढ़कर तेरा नाम… जय श्रीराम’ : आ गया आदिपुरुष का लिरिक्ल पोस्टर-16 जून को होगी रिलीज, टीजर के बाद राम से रावण तक के लुक पर हुआ था विवाद

पिछले साल टीजर लॉन्च के बाद विवादों में आई आदिपुरुष फिल्म का आज (22 अप्रैल 2023) अक्षय तृतीया के मौके पर लिरिक्ल पोस्टर रिलीज हुआ। इस पोस्टर को 5 अलग-अलग भाषाओं में जारी किया गया। प्रभास समेत आदिपुरुष की पूरी टीम ने इसे शेयर करते हुए लिखा, “जब न जा पाओ सारे धाम, तो बस ले लो प्रभु का नाम, जय श्रीराम।”

लिरिक्ल वीडियो में भी यही कहा जाता है, “तेरे ही भरोसे हैं हम, तेरे ही सहारे, दुविधा की घड़ी में ये मन तुझको ही पुरारे। तेरे ही बल से है बल हमारा। तू ही करेगा मंगल हमारा। मंत्रों से बढ़कर है तेरा नाम… जय श्रीराम, जय श्रीराम।”

इस वीडियो के अंत में प्रभास श्रीराम के लुक में नजर आते हैं। लिरिक्ल पोस्टर को देखने के बाद फैंस तरह-तरह की प्रतिक्रिया दे रहे हैं। लोगों का कहना है कि तमाम कोशिशों के बाद ये रूप ठीक है।

गौरतलब है कि साल 2022 में 2 अक्टूबर को ‘आदिपुरुष’ का टीजर सामने आने के बाद इसमें हर कैरेक्टर के लुक को लेकर बहुत बवाल हुआ था। लोगों ने राम, हनुमान और रावण सबसे लुक पर सवाल खड़े किए थे। विरोध से पहले इस फिल्म की रिलीज तारीख मकर संक्रांति रखी गई थी। हालाँकि लोगों की नाराजगी देखते हुए इस तारीख को बदल दिया गया। ये फिल्म अब 16 जून को रिलीज होगी।

इस फिल्म को हिंदी, तेलुगु, तमिल, कन्नड़ और मलयालम भाषा में रिलीज किया जाएगा। इस फिल्म में प्रभास श्रीराम के रूप में, कृति सेनन सीता के रूप में और सैफ अली खान को रावण के रूप में दिखाया जाएगा। पहले लोग इस फिल्म के बॉयकॉट की माँग उठा रहे थे। हालाँकि बदलावों की बात सामने आने के बाद से लोग शांत हैं। फिल्म डायरेक्टर को चिट्ठियाँ लिखकर फिलम से आपत्तिजनक सीन हटाने और कंटेंट हटाने की माँग की गई थी।