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बैठी मजार के सामने और फैलाया UP विधानसभा के पास नमाज पढ़ रही हूँ : उजमा परवीन के खिलाफ FIR दर्ज, बोली- ‘मैं कार्रवाई से नहीं डरती’

CAA विरोधी हिंसक प्रदर्शनों के दौरान चर्चा में आईं उजमा परवीन ने सोमवार (27 मार्च 2023) को एक झूठा ट्वीट करके कई लोगों को गुमराह किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर नमाज़ पढ़ते अपना वीडियो शेयर किया और कहा कि ये नमाज लखनऊ विधानसभा के आगे बैठकर पढ़ी गई है। इस बात पर उन्हें कई लोगों ने शाबाशी दी। हालाँकि अब पुलिस ने उजमा की पोल खोलते हुए कहा है कि नमाज़ को विधानसभा के बजाय एक मजार के आगे पढ़ा गया। इस झूठ को फैलाने के आरोप में पुलिस ने उजमा पर FIR भी दर्ज कर ली है। वहीं पोल खुलने के बाद सोशल मीडिया के कई मुस्लिम यूजर्स भी उजमा को ट्रोल कर रहे हैं।

यह मामला लखनऊ के थानाक्षेत्र हुसैनगंज का है। मामले में शिकायतकर्ता थाने के ही पुलिस सब इंस्पेक्टर सागर खुराना हैं। 29 मार्च 2023 (बुधवार) को उनके द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत में उजमा के ट्विटर हैंडल पर शेयर फोटो और लिखे गए शब्दों का हवाला दिया गया है। इसमें लिखा गया था, “अलहम्दुलिल्लाह लखनऊ विधानसभा के सामने असर की नमाज़ अदा की। जो यह कहते हैं हमारी नमाज़ पर पाबंदी लगा देंगे तो हम भी अपने हिंदुस्तान की हर सरज़मीन पर नमाज पढ़कर दिखा देंगे। हमारा देश आजाद है इसीलिए मुझे आज़ादी से नमाज पढ़ने का अधिकार है।”

पुलिस के मुताबिक उजमा द्वारा विधानसभा के आगे नमाज पढ़ने का दावा झूठा है। यह नमाज़ विधानसभा से कुछ दूर सड़क के किनारे बनी एक मजार के आगे पढ़ी गई थी। पुलिस ने इस हरकत को समाज में अशाँति फैलाने वाला बताते हुए उजमा पर IPC की धारा 153, 200, 283 और 290 के साथ IT एक्ट की धारा 66 के तहत केस दर्ज कर लिया है।

पुलिस FIR में खुली पोल

पोल खुलने के बाद भी जारी रहे ट्वीट

पोल खुलने के बाद भी उजमा ने अपनी बयानबाजी जारी रखी। उन्होंने ताबड़तोड़ ट्वीट कर के अपनी करतूत को चर्चा में रखने की पूरी कोशिश की। कई मीडिया रिपोर्ट्स में भी उजमा के झूठ को सच मान लिया गया। उजमा ने खुद उन मीडिया रिपोर्ट्स के स्क्रीनशॉट शेयर किए हैं।

उजमा परवीन के ट्वीट्स

झूठ पर मिली खूब शाबासी

उजमा के फैलाए झूठ को सच मान कर उन्हें सोशल मीडिया पर ढेर सारी बधाइयाँ मिलने लगीं। किसी ने उनके सम्मान में शायरी पढ़ी तो किसी ने भारी यादव ने उन्हें LOVE YOU तक बोल दिया। साहिल ने भी बेशक लिख कर दिल का निशान ट्वीट किया।

उजमा को झूठ पर मिली शाबासी, चित्र साभार- @UzmaParveenLKO

मुस्लिम यूजर्स ने ही बताया पब्लिसिटी स्टंट

हालाँकि उजमा की पोल खुल जाने के बाद मुस्लिम समाज के ही कई यूजर्स उनके खिलाफ खड़े हो गए। तमाम लोगों ने उजमा द्वारा शेयर वीडियो को पब्लिसिटी स्टंट बताया है। तमाम नेटीजेंस उजमा परवीन को ट्रोल कर रहे हैं।

उजमा को मिले जवाब, चित्र साभार- @UzmaParveenLKO

उजमा खुद को समाजिक और मानवाधिकारी कार्यकर्ता बताती हैं। फिलहाल लखनऊ पुलिस पूरे मामले की जाँच कर रही है।

इंदौर में धँसी महादेव मंदिर की बावड़ी, 12 की मौत, कई घायल: आँध्र प्रदेश के मंदिर में भी आग लगी, बड़ा हादसा होने से बचा

मध्य प्रदेश के इंदौर में रामनवमी (30 मार्च 2023) के मौके पर एक मंदिर में बड़ा हादसा हो गया। इस हादसे में अब तक 12 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायल हो गए हैं। वहीं, आंध्र प्रदेश के पश्चिमी गोदावरी जिले में रामनवमी पर बड़ा हादसा होने से बच गया। यहाँ के वेणुगोपाल मंदिर परिसर में रामनवमी के लिए बनाए गए पंडाल में शार्ट सर्किट के बाद भीषण आग लग गई, लेकिन मौके पर श्रद्धालुओं को मंदिर से बाहर निकाल लिया गया। इसके बाद से मंदिर के आस-पास के इलाके में लोगों की आवाजाही रोक दी गई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पटेल नगर में श्री बेलेश्वर महादेव झूलेलाल मंदिर में रामनवमी के मौके पर भारी संख्या में लोग दर्शन के लिए आए थे। उसी दौरान मंदिर की छत ढहने से लगभग 25 से अधिक लोग बावड़ी (एक बड़े से कुएँ) में गिर गए। फिलहाल, कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। राहत एवं बचाव कार्य जारी है। कहा जा रहा है कि मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है।

बताया जा रहा है कि घटनास्थल की स्थिति काफी खराब है। हादसे का शिकार हुए लोगों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। बावड़ी में से महिला और बच्ची समेत 19 लोगों को बाहर निकाला जा चुका है। अन्य लोगों के लिए ऑक्सीजन सप्लाई की गई है। हादसे के बाद से लोगों में काफी आक्रोश है।

निगम अफसरों के मुताबिक, बावड़ी 40 फीट गहरी है, उस पर लोहे की जाली लगी हुई थी। लोहे की जाली पर ही स्लैब डालकर इसका निर्माण किया गया था। हवन के दौरान बावड़ी की छत पर ज्यादा लोगों के होने से जाली टूट गई और हादसा हो गया। इंदौर के जिला कलेक्टर इलैयाराजा टी ने कहा, “अगले 30 मिनट में अन्य लोगों को भी बचाया जाएगा। हमारा ध्यान सबसे पहले बचाव कार्यों पर है।”

बता दें कि बावड़ी हादसे को लेकर पीएम मोदी ने भी दुख जताया है। उन्होंने ट्वीट किया, “इंदौर में हुए हादसे से बेहद आहत हूँ। सीएम शिवराज सिंह चौहान शिवराज से बात की और स्थिति की जानकारी ली। राज्य सरकार बचाव और राहत कार्य में तेजी से आगे बढ़ रही है। मेरी प्रार्थना उन सभी प्रभावितों और उनके परिवार वालों के साथ है।”

‘फर्जी एनकाउंटर केस में ले लो मोदी का नाम’ : अमित शाह ने बताया कैसे UPA कार्यकाल में CBI ने बनाया था दबाव, कोर्ट ने कहा था- ये राजनीतिक प्रतिशोध

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने बुधवार (29 मार्च) को न्यूज18 राइजिंग इंडिया समिट 2023 के मंच पर दावा किया कि कॉन्ग्रेस नीत यूपीए सरकार के कार्यकाल में केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने उन पर पीएम मोदी (उस समय गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री) को फँसाने के लिए दबाव डाला था। गृहमंत्री ने पीएम मोदी द्वारा केंद्रीय एजेंसियों के कथित दुरुपयोग के खिलाफ विपक्ष के बढ़ते विरोध को लेकर पुरानी घटना को साझा किया।

उन्होंने कहा, “उस वक्त एक फर्जी एनकाउंटर हुआ था। तब मैं राज्य का गृहमंत्री था। मुझ पर केस कर दिया। सीबीआई ने मुझे अरेस्ट कर लिया। सीबीआई के रिकॉर्ड में आज भी वह टेप पड़ा होगा। उस वक्त सीबीआई के अफसरों ने उसे प्रमाणिकता से रिकॉर्ड किया था। वह होगा, अगर कॉन्ग्रेस ने उसे मिटाया नहीं होगा तो। 90 फीसदी सवालों में यही पूछा गया कि काहे को परेशान हो रहे हो। मोदी का नाम दे दो, आपको छोड़ देंगे।”

शाह ने कहा, “इसको लेकर हमने तो काले कपड़े नहीं पहने। कोई विरोध नहीं किया। गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी जी के खिलाफ एक एसआईटी बनाई। कोई भ्रष्टाचार का मामला नहीं था। दंगों में फर्जी टाइप का इन्वाल्वमेंट किया, जो अंत में सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। हमने तो उस समय कभी कोई हाय तौबा नहीं की थी। कभी भी काले कपड़े पहनकर संसद को जाम नहीं किया था।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं बताता हूँ आपको इसका क्या नतीजा आया था। उन्होंने मुझे अरेस्ट किया, लेकिन हाईकोर्ट ने मुझे 3 दिन में ही बेल दे दी। हाईकोर्ट ने कहा कि अरेस्ट करने के लिए पर्याप्त प्रूफ ही नहीं हैं। हम इस केस को गुजरात से बाहर ले गए।”

शाह के मुताबिक, “मुंबई की अदालत ने कहा कि राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से सीबीआई ने राजनीतिक इशारों पर यह केस किया है। इसलिए हम अमित शाह के खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों को खारिज करते हैं। उस वक्त हमने तो हाय तौबा नहीं मचाई। तब यही लोग थे। यही चिदम्बरम बैठे थे। यही सोनिया गाँधी यूपीए का नेतृत्व करती थीं। यही मनमोहन सिंह थे और यही राहुल गाँधी सांसद थे। अब क्या हो गया? हमने ने इन पर बदजुबानी का केस किया है, कोई फर्जी केस नहीं किया।”

बता दें कि बीते दिनों ‘मोदी’ सरनेम पर विवादित टिप्पणी किए जाने के बाद सूरत की अदालत ने राहुल गाँधी को 2 वर्ष की सज़ा सुनाई। इसके बाद लोकसभा सचिवालय ने उनकी संसद सदस्यता का नोटिफिकेशन जारी कर दिया। इसको लेकर कॉन्ग्रेस के सभी सांसद विरोध जताने के लिए काले कपड़ों में संसद भवन पहुँचे थे। सांसदी जाते ही राहुल को दिल्ली के तुगलक लेन स्थित सरकारी बँगले को खाली करने का नोटिस दिया गया।

गुजरात के वडोदरा में भी रामनवमी की शोभा यात्रा पर पथराव, मस्जिद के पास हुआ बवाल: पुलिस ने उपद्रवियों को खोजना शुरू किया

गुजरात के वडोदरा जिले में रामनवमी की शोभा यात्रा पर पत्थरबाजी की खबर है। इस घटना के बाद इलाके में तनाव फ़ैल गया है। पत्थरबाजी एक मस्जिद के पास की गई। हालात काबू करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। आरोपितों की धर-पकड़ के लिए CCTV फुटेज खँगाले जा रहे हैं। थोड़ी देर के लिए बाधित हुई यात्रा फिलहाल आगे बढ़ चुकी है। घटना गुरुवार (30 मार्च 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक फतेहपुरा गराना पुलिस चौकी क्षेत्र का है। गुरुवार को हिन्दुओं द्वारा यहाँ से रामनवमी की शोभा यात्रा निकाली गई थी। इस दौरान जैसे ही शोभा यात्रा इस क्षेत्र की एक मस्जिद के सामने से हो कर गुजरी वहाँ किसी बात को ले कर दो पक्षों में विवाद हो गया। थोड़ी ही देर की बहस के बाद मस्जिद के पास से जुलूस में शामिल श्रद्धालुओं पर पत्थरबाजी शुरू हो गई। इस विवाद से घटनास्थल पर तनाव फ़ैल गया। फिलहाल दोनों पक्ष ने एक दूसरे पर हमले के आरोप लगाए हैं।

मामले की जानकारी होते ही वडोदरा के तमाम बड़े अधिकारी मौके पर पहुँच गए। भारी संख्या में पहुँचे पुलिस बल ने हालात को काबू किया। नाराज श्रद्धालुओं को समझा-बुझा कर जुलूस को आगे बढ़ाया गया। पुलिस ने CCTV फुटेज के आधार पर आरोपितों की पहचान करनी शुरू कर दी है। फ़िलहाल किसी प्रकार की तोड़फोड़ नहीं हुई है। पुलिस के मुताबिक हालात काबू में हैं। पुलिस ने बताया कि पत्थरबाजी में कोई घायल नहीं हुआ है।

इस यात्रा का आयोजन विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दल द्वारा किया गया है। यात्रा में युवा हाथों में भगवा झंडे ले कर चल रहे है। यात्रा की झाँकी के साथ बड़ी सँख्या में लोग भी चल रहे हैं। इसमें वाहनों का भी काफिला है। यात्रा के पोस्टर पर भगवान् राम के चित्र छपे हैं।

AMU के छात्र ने कैंची से गोदकर की अम्मी-अब्बू की हत्या, खिड़की से पड़ोसी चिल्लाते रहे: बंद कमरे की पूरी Video वायरल, लाश के साथ भी हैवानियत की

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में हत्या का एक वीभत्स मामला सामने आया है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के छात्र गुलामुद्दीन ने अपने अब्बू इशहाक और अम्मी शहजादी की हत्या कर दी। मौत के बाद वह अपने अम्मी-अब्बू के शव पर कैंची से लगातार वार करता रहा। इसका वीडियो भी सामने आया है।

वीडियो में साफ दिख रहा है कि गुलामुद्दीन हत्या के बाद शांत भाव से बैठकर अपने अब्बू के शव पर ऐसे कैंची मार रहा है, जैसे चिकन शॉप में वह चिकन काट रहा हो। घटनास्थल पर चारों तरफ खून फैला हुआ है, लेकिन गुलामुद्दीन को इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा। कोई आम आदमी होता तो वह विचलित होकर बेहोश हो गया होता या वहाँ भाग गया होता।

वीडियो में कुछ लोगों को बोलते हुए भी सुना जा सकता है। वे गुलामुद्दीन को मना कर रहे हैं कि शव पर अब कैंची ना मारे, लेकिन उस पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। वह लोगों की तरफ देखता है और फिर अंधाधुन शव पर कैंची मारने लगता है। इस दौरान दूसरे कमरे में सोई उसकी बहनें खिड़की से चिल्लाती रहती हैं, फिर भी वह नहीं मानता है।

शोरगुल सुनकर पड़ोसी भी वहाँ आ जाते हैं और उसे मना करते हैं, लेकिन वह नहीं मानता है। गेट बंद होने के कारण कोई व्यक्ति अंदर जाने की स्थिति में नहीं था। इसी दौरान किसी पड़ोसी ने उसका वीडियो बना लिया और किसी ने पुलिस को फोन करके इसकी जानकारी दी।

घटना बुधवार (29 मार्च 2023) की है। अलीगढ़ के एसपी ने बताया कि इस घटना की जानकारी पुलिस को 112 पर मिली थी। पुलिस के अनुसार, हत्या के लिए गुलामुद्दीन ने प्रेस और कैंची का इस्तेमाल किया है। क्वार्सी थाना के अंतर्गत जाकिर नगर के गली नंबर 7 में हुई घटना के आरोपित 24 साल के गुलामुद्दीन को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

गुलामुद्दीन अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में B.Com का छात्र है। लोगों का कहना कि पिछले कई दिनों से उसका अपने अम्मी-अब्बू से अनबन चल रहा था। यह भी कहा जा रहा है कि आरोपित युवक का मानसिक संतुलन ठीक नहीं था। हालाँकि, एसपी ने कहा कि उसे मानसिक बीमारी है या नहीं, इसकी जाँच की जा रही है।

जिस घर में यह परिवार रहता था, उसका मकान मालिक मोहम्मद सलीम है। सलीम ने बताया कि यह परिवार चार-पाँच दिन पहले ही उसके घर में किराए पर रहने के लिए आया था। सलीम के अनुसार, उसका मानसिक संतुलन ठीक नहीं था और यह घर से भाग गया था। इलाज के बाद भी वह अपने अम्मी-अब्बू के साथ नहीं रहना चाहता था।

सलीम ने बताया कि बुधवार की देर शाम को गुलामुद्दीन ने गेट बंद करके अपने अम्मी-अब्बू का गला काट दिया। जिस वक्त उसने घटना को अंजाम दिया, उस वक्त उसके अन्य भाई-बहन सो रहे थे। हत्या के बाद भी वह रूका नहीं। वह शव पर कैंची से लगातार वार करता रहा।

सलीम के यहाँ इशहाक (62) और उसकी बीवी शहजादी बेगम (57) अपने दो बेटों और दो बेटियों के साथ किराए पर रहते थे। गुलामुद्दीन अपने चार भाई-बहनों में दूसरे स्थान पर है। उससे बड़ी एक उसकी बहन है। इशहाक का परिवार मूल रूप से रामपुर जिले का रहने वाला है।

भास्कार डॉट कॉम के अनुसार, पूछताछ में गुलामुद्दीन ने पुलिस को बताया कि उसे वहम हो गया था कि उसकी अम्मी शहजादी उसकी सौतेली माँ है। जब पुलिस ने वहम का कारण पूछा तो उसने बताया कि दो साल पहले जब उसे कोरोना हुआ था, तब उसे किसी ने बताया था कि उसका DNA उसके अब्बू से मिलता है, लेकिन उसकी अम्मी से नहीं। तभी से उसे यह वहम था।

उसने बताया कि जब उसकी अम्मी पढ़ाई-लिखाई को लेकर उसको कुछ कहती थी तो वह तुरंत झगड़ा करने लगता था। उसको यह लगता था कि वह सौतेला बेटा है, इसलिए उसके साथ ऐसा बर्ताव किया जा रहा है। पिछले तीन-चार दिनों से भी माँ-बेटे के बीच कई बार विवाद हुआ था।

फोन छीना, मारपीट की… फिर भी कोई कार्रवाई नहीं: पत्रकार से बदसलूकी केस में सलमान खान को राहत, बॉम्बे HC ने शिकायत रद्द की

बॉम्बे हाईकोर्ट ( Bombay High Court) से बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान (Salman Khan) को बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने गुरुवार (30 मार्च 2023) को अभिनेता को क्लीन चिट देते हुए एक पत्रकार द्वारा 2019 में उनके खिलाफ दर्ज की गई शिकायत को रद्द करने का आदेश दिया। दरअसल, पत्रकार अशोक पांडेय ने सलमान और उनके बॉडीगार्ड नवाज शेख पर उनका फोन छीनने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कारवाई थी। पत्रकार ने अभिनेता पर दुर्व्यवहार और मारपीट का आरोप भी लगाया था।

जस्टिस भारती डांगरे की एकल पीठ ने आज सलमान खान और नवाज शेख द्वारा दायर याचिका को स्वीकार करते हुए अपना आदेश सुनाया। अदालत ने खान और शेख के खिलाफ जारी समन भी रद्द कर दिया। अब एक्टर को अँधेरी कोर्ट में हाजिरी नहीं लगानी पड़ेगी। सलमान खान ने मार्च 2022 में अँधेरी मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा जारी आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था। यह समन पत्रकार अशोक पांडेय की शिकायत के आधार पर जारी किया गया था, जिसमें आरोप लगाया था कि खान और उनके बॉडीगार्ड ने उन्हें धमकी दी और उनके साथ मारपीट की।

शिकायत के अनुसार, खान और शेख ने अप्रैल 2019 में पत्रकार के साथ दुर्व्यवहार किया और मारपीट की। सलमान खान मुंबई की सड़कों पर साइकिल चला रहे थे, इस दौरान अशोक उनका वीडियो बनाने लगा। ये बात सलमान को अच्छी नहीं लगी और वो भड़क गए। उन्होंने उसका (पांडेय) फोन भी छीन लिया। दूसरी ओर, ‘टाईगर जिंदा है’ फिल्म के अभिनेता ने दावा किया था कि पांडेय की शिकायत में विरोधाभास है। उन्होंने पांडेय से कुछ भी नहीं कहा था। हालाँकि, सलमान के बॉडीगार्ड ने अपनी शिकायत में पुलिस को बताया था कि वह शख्स सलमान खान की इजाजत के बिना उनका पीछा कर रहा था। साथ ही उनका विडियो भी बना रहा था।

बता दें कि इस पत्रकार ने सलमान खान पर मुंबई मेट्रोपॉलिटन मैजिस्ट्रेट कोर्ट के समक्ष 25 जून को धारा 323, 392, 426, 506, और 34 के तहत लूट, मारपीट और आपराधिक धमकी के लिए शिकायत दर्ज की थी। अशोक पांडेय के अनुसार, सलमान खान ने उनका मोबाइल छीना था। वहीं, पत्रकार के वकील ने कहा था कि सलमान खान ने उसके मुवक्किल के मोबाइल से उनका डाटा भी डिलीट कर दिया था।

रामनवमी पर बंगाल में ‘मुस्लिम इलाकों’ की चिंता, शांति के लिए बिहार में सैकड़ों DJ जब्त: ताजिया जुलूस का स्वागत तो हिंदुओं से नफरत क्यों?

आज पूरे देश में रामनवमी (Ramnavami) का पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जा रहा है। सुबह से ही मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। इस खास मौके पर कोलकाता में भी 43 जुलूस निकाले जाने हैं। इनमें काशीपुर रोड और वटगंज में दो बड़े रामनवमी जुलूस हैं। लेकिन पश्चिम बंगाल में रामनवमी पर राजनीति शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विपक्ष को रामनवमी पर किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचने की चेतावनी दी है।

उन्होंने कहा, “रामनवमी मनाओ, लेकिन रमजान के महीने का पालन करते हुए। रमजान का महीना भी चल रहा है। अगर तुम किसी मुस्लिम इलाके में जाकर हमला करते हो तो याद रखना, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”

इसी तरह रामनवमी से दो दिन पहले बिहार के बेगूसराय में डीजे पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया और फिर बिहार की बेगूसराय पुलिस 24 घंटे के दौरान 62 डीजे ज़ब्त कर थाने लेकर आ गई, ताकि रामनवमी के दिन डीजे न बज सके। इतना ही नहीं, बिहार में डीजे संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई। एसपी ने इस कदम के पीछे बताया कि रामनवमी पर्व, चैती दुर्गा पूजा व चैती छट पर्व से लेकर रमजान पर्व को लेकर शांति व्यवस्था के लिए जिले की पुलिस अलर्ट मोड पर है। इसी क्रम में ऐसा किया गया है।

अब प्रश्न ये उठता है कि आखिर ये मुस्लिम इलाका होता क्या है जिसका हवाला देकर हिंदुओं को चेतावनी दी जा रही है? अगर यह वास्तव में होता है, तो क्या इसी तर्ज पर हिन्दू इलाका नहीं होना चाहिए? और अगर नहीं होता, तो फिर कहाँ जाने से रामनवमी पर हिंदुओं को रोका जाता है?

ताजिया जुलूस से कोई दिक्कत क्यों नहीं

ध्यान दें कि इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक, मुहर्रम के 10वें दिन मुस्लिम सम्प्रदाय के लोग सड़कों पर ताजिया जुलूस निकालते हैं। इस जुलूस में ये लोग शोक व्यक्त करते हैं और अपनी छाती पीटकर इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हैं। इस दौरान जुलूस में शामिल मुस्लिम लाठी-डंडों से करतब भी दिखाते हैं। यह जुलूस कई कस्बों और विभिन्न मार्गों से होकर गुजरता है, जहाँ बड़ी संख्या में हिन्दू भी रहते हैं। इसके कारण सड़कों पर भीड़ इकट्ठा होने से कई बार माहौल खराब हो जाता है। जूलूस से ट्रैफिक भी प्रभावित होता है।

देश के कई राज्यों में, जहाँ बड़ी संख्या में हिन्दू रहते हैं, उन जगहों पर मस्जिद बनी हुई है। वहाँ मुस्लिम लाउडस्पीकर पर नमाज अदा करते हैं। हद तो तब हो गई, जब 2021 और दिसंबर 2022 में हरियाणा के गुरुग्राम में मुस्लिम सड़कों पर ही नमाज पढ़ने के लिए जुट गए। क्या इस दौरान नेता हिंदू इलाका और मुस्लिम इलाका का फर्क भूल जाते हैं।

हिंदुओं को अपने पर्व मनाने के लिए किस इलाके में जाना होगा? क्या उसे (हिंदुओं) हमेशा अपने त्योहारों को मनाने के लिए अपना मन मारना पड़ेगा? क्या आजाद भारत में उन्हें अब भी अपने त्योहार मनाने की आजादी नहीं मिल पाई है? यह सवाल उन राज्यों की सरकारों से है, जो सभी समुदाय को एक दृष्टि से देखने का दंभ भरती हैं। क्या उनके लिए हिंदू केवल एक वोट बैंक है, जो उन्हें चुनाव के समय ही याद आता है। क्या उनकी धार्मिक आस्था इन लोगों के लिए कोई मायने नहीं रखती है?

हिंदुओं से इतनी घृणा का कारण क्या है?

बहरहाल, पश्चिम बंगाल हो या फिर बिहार केंद्र की मोदी सरकार को घेरने के लिए नए-नए हथकंडे अपनाती रही है। कई बार देश की सबसे पुरानी पार्टी कॉन्ग्रेस के साथ मिलकर क्षेत्रीय दलों ने मोदी सरकार के खिलाफ अपने एजेंडे को भुनाने के भरसक प्रयास किए, लेकिन वे हमेशा अपने नापाक मंसूबे में विफल ही रहे। आखिर, हिंदुओं से इतनी घृणा का कारण क्या है? क्या हिंदुस्तान में केवल तथाकथिक अल्पसंख्यकों को ही खुश करने में लगी रहेंगी ये राजनीतिक पार्टियाँ?

खैर, ममता बनर्जी तो पहले ही इस बात को पुख्ता कर चुकी हैं कि वह हिंदुओं और उनके त्योहारों से कितनी घृणा करती हैं। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2021 के नतीजे घोषित होने के बाद से बड़े पैमाने पर राजनीतिक हिंसा हुई। इसमें जॉय प्रकाश यादव, कुश खेत्रपाल और अभिजीत सरकार के अलावा कई हिंदू मारे गए थे। सीबीआई की 34 एफआईआर में से कई में ‘TMC गुंडों’ के नाम सामने आए थे। उन पर आरोप लगाया गया था कि वे हिंदू धर्म खत्म कर देंगे और सबको मार देंगे।

जो करते हैं हिंदुस्तान को बदनाम, उनको पैसे नहीं दें भारत के बिजनेसमैन: उपराष्ट्रपति धनखड़ ने IIT-IIM की दी सलाह

भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि पिछले 8-9 वर्षों में बहुत बड़ा परिवर्तन हुआ है। सत्ता के मध्यस्थों से मुक्ति मिली है और उन लोगों से भी मुक्ति मिली है, जो अतिरिक्त कानूनी माध्यमों से शासन प्रणाली का लाभ उठाते थे।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भाजपा के शासन में नए भारत का मंत्र है ‘न्यूनतम सरकार, अधिकतम सुशासन’। ‘जीवन में सुगमता’ के बड़े उद्देश्य के साथ कार्यपालिका ‘कारोबार में सुगमता’ को सुलभ बना रही है। उन्होंने कहा कि आज भारत अवसरों, नवाचारों और निवेश के पसंदीदा वैश्विक स्थल बन गया है।

उपराष्ट्रपति ने दिल्ली के भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (IIPA) में दूसरा डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद स्मृति व्याख्यान को संबोधित करते हुए कहा, “आगामी 25 साल देश के लिए महत्वपूर्ण है। पिछले 9 वर्षों में हमने सकारात्मक कदमों की एक नींव रखी है कि 2047 में जब देश आजादी की शताब्दी मना रहा होगा, तो हमें पहले नंबर पर होना है और मेरे युवा साथी 2047 के योद्धा होंगे।”

उन्होंने कहा कि देश में जिस तरह का पारिस्थितिकी तंत्र विकसित हुआ है और स्थिरता देखने को मिल रही है, इससे स्पष्ट है कि भारत उस समय दुनिया में नंबर एक होगा। कोविड के दौरान भारत ने न केवल दवाओं, उपकरणों और टीकों के विकास और उत्पादन के लिए अपनी क्षमताओं को बढ़ाया और अस्पतालों एवं ऑक्सीजन संयंत्रों की स्थापना की, बल्कि महामारी के प्रसार की निगरानी के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म भी विकसित किए गए।

उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा, “जब कोविड महामारी ने हमें चुनौती दी तो हम अपनी सभ्यता से जुड़े लोकाचारों को नहीं भूले। हमने अपने टीकों को उपलब्ध कराकर 100 से अधिक देशों को मदद दी। उनमें से बहुत को मित्रवत भाव के रूप में ये मदद मिली।”

अपने संबोधन के दौरान उपराष्ट्र ने भारत को एक शक्ति के रूप में उभरने पर उसे बदनाम की साजिश की भी बात कही। उन्होंने कहा, “हमें बदनाम करने के लिए भारत के मूल्यों, अखंडता और इसकी संस्थाओं पर व्यवस्थित तरीके से हमला किया जा रहा है। वैश्विक शक्ति के रूप में उभरते हुए भारत के खिलाफ एक पारिस्थितिकी तंत्र को पोषित किया जा रहा है।”

उपराष्ट्रपति ने कहा कि कुछ बाहरी संस्थानों द्वारा राष्ट्र के रूप में भारत की वैधता और इसके संविधान पर हमला किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “भारत के कुछ अरबपति और बुद्धिजीवी परिणाम की परवाह किए बिना इन संस्थानों को फंड देकर इस तरह के विनाशकारी षडयंत्रों के शिकार हो गए हैं।”

उन्होंने कहा कि उद्योगपति को सीएसआर फंड के पैसे का इस्तेमाल देश के बाहर करने के बजाय IIMs और IITs जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों को वित्तपोषित करना चाहिए। उन्होंने कहा, “मुझ याद है कि देश के एक अरबपति ने सीएसआर के 200 करोड़ रुपए एक अमेरिकी संस्थान को दे दिए। इसी तरह 2008 में खुद भारत सरकार ने 20 करोड़ दूसरे संस्थान को दिए थे।”

न्यायपालिका को लेकर उपराष्ट्रपति ने एक बार फिर हमला बोला। उन्होंने कहा कि कानून बनाने का विशेषाधिकार संसद के पास है और बनाए गए कानून का विश्लेषण, मूल्यांकन या हस्तक्षेप किसी अन्य पक्ष (न्यायपालिका या कार्यपालिका) को करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि इससे नाजुक संतुलन बिगड़ जाएगा।

मोदी सरकार द्वारा साल 2014 में जजों की नियुक्ति से संबंधित कॉलेजियम सिस्टम की जगह बनाए गए नेशनल ज्यूडिशियल अपॉइंटमेंट कमेटी की भी उन्होंने चर्चा की। उपराष्ट्रपति ने कहा, “इसे सर्वसम्मति से बनाया गया था और लोकसभा एवं राज्यसभा द्वारा पास किया गया। 16 राज्य की विधानसभाओं ने इसका समर्थन किया। देश के माननीय राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 111 के तहत अपने संवैधानिक अधिकार के तहत इस पर हस्ताक्षर किए। आगे क्या हुआ, सब जानते हैं।” बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून को रद्द कर दिया था।

उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों के चयन में भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श की बात कही गई थी। इसे न्यायिक आदेश के जरिए सहमति बना दिया गया। उन्होंने कहा कि परामर्श और सहमति के बीच एक मूलभूत अंतर है। न्यायपालिका ने कहा कि परामर्श ही सहमति होगी। उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने 24 मई 1949 को संविधान सभा में इस तरह के सुझाव का कड़ा विरोध किया था।

उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा कि किसी भी मूल संरचना का आधार कानून निर्माण में संसद की सर्वोच्चता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत में और बाहर कुछ लोग हैं, जो देश की प्रगति को देखकर प्रसन्न नहीं हैं। देश के बुद्धिजीवियों और उद्योगपतियों को ऐसे तत्वों सावधान रहने और उनके नीच मंसूबों का विरोध करने का अनुरोध किया।

कट्टर मुस्लिमों ने सचिन तेंदुलकर को कर दिया OUT: इजरायल-फिलिस्तीन के चक्कर में लपेटा, बोला – ‘आप लोगों से उम्मीद नहीं’

विश्व के महानतम बल्लेबाजों में से एक भारत के पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने 18 मार्च 2023 (शनिवार) को अपने इंस्टाग्राम हैंडल से एक फोटो शेयर की। इस फोटो में वो जेरुसलम शहर के अल-अक्सा मस्जिद के आगे खड़े दिखाई दे रहे हैं। तस्वीर की लोकेशन में जेरुसलम इजरायल के पुराने शहर के तौर पर आ रहा है। इस तस्वीर के हैशटैग में सचिन ने #Israel लिखा है। इसके बाद कट्टर मुस्लिम लोग सचिन पर भड़क गए।

सचिन तेंदुलकर ने इस यात्रा का उद्देश्य बताया घूमना-टहलना। उन्हें शायद अंदाजा नहीं होगा कि इजरायल शब्द उनकी इस तस्वीर पर कितना भारी पड़ेगा। इस फोटो पर कुछ कट्टर मुस्लिम लोग आपत्ति दर्ज करा रहे हैं। उनका कहना है कि जेरुसलम इजरायल का नहीं बल्कि फिलिस्तीन का हिस्सा है।

इस तस्वीर में सचिन ने जैकेट पहन रखी है और उनके सिर पर टोपी है। पीछे कुछ अन्य लोग अल-अक्सा के साथ ग्रुप सेल्फी लेते दिखाई दे रहे हैं। सचिन ने अल-अक्सा की 3 अलग-अलग एंगल से तस्वीरें ली हैं जिसमें वो खुद भी दिखाई दे रहे हैं। इन तस्वीरों में कैप्शन के तौर पर सचिन ने लिखा, “मेरा सलाम फ्रॉम जेरुसलम” और इंग्लिश में इजरायल का हैशटैग भी लगाया।

सचिन, जेरुसलम, इजरायल और विवाद

सचिन तेंदुलकर द्वारा जेरुसलम को इजरायल का शहर बताने वाली इस फोटो को 12 लाख से ज्यादा यूजर्स ने लाइक किया है। लेकिन यह कई मुस्लिम यूजर्स को रास नहीं आया। इन यूजर्स में कई लोग खुद को सचिन तेंदुलकर का फैन बताते हुए उनका विरोध कर रहे हैं। कुछ ने कमेंट बॉक्स में जेरुसलम को फिलिस्तीन का बताया है।

नाराजगी जता रहे लोगों में भारत के अलावा कई अन्य देशों के मुस्लिम शामिल हैं। विरोध कर रहे लोगों में अल जजीरा के पत्रकार सैफ खालिद भी शामिल हैं। उन्होंने लिखा है कि भारतीय खेल जगत के सबसे बड़े नाम सचिन तेंदुलकर ने जेरुसलम को इजरायल का बता कर न सिर्फ फिलिस्तीनियों को आहत किया है बल्कि इजरायल के अवैध कब्ज़े को भी जायज ठहराया है।

सचिन तेंदुलकर का विरोध उनके इंस्टाग्राम पर भी जारी है। मुम्शाद अहमद, मुल्ला मोहम्मद उमर और कुरान द गाइडेंस नाम के यूजर्स ने कमेंट करके जेरुसलम को फिलिस्तीन का बताया है। वहीं अशरफ कमाल ने लिखा, “हम बहुत बड़े फैन थे सचिन के लेकिन इन्हीं सबकी वजह से अब फैन नहीं हैं। इजरायल की जगह फिलिस्तीन लिखना चाहिए था लेकिन आप लोगों से उम्मीद भी नहीं है।”

सचिन तेंदुलकर की इंस्टाग्रम प्रोफ़ाइल पर आए कमेंट

हालाँकि कई नेटीजेंस ने सचिन का समर्थन भी किया है। उन्होंने न सिर्फ सचिन की तारीफ की है बल्कि जेरुसलम को इजरायल का ही हिस्सा माना है।

मस्जिद के आगे से गुजरा रामनवमी का जुलूस, DJ सुन कट्टरपंथी मुस्लिम भीड़ भड़की: जलगाँव में पत्थरबाजी के बाद 45 गिरफ्तार, 4 घायल

महाराष्ट्र के जलगाँव से साम्प्रदायिक हिंसा की खबर है। यहाँ विवाद एक मस्जिद के आगे निकल रहे हिन्दुओं के जुलूस में DJ की आवाज को ले कर शुरू हुआ। कुछ ही देर में मामला हिंसक रूप ले लिया। इस दौरान पत्थरबाजी की गई। घटना में कुछ लोग घायल हुए हैं जिनका इलाज अस्पताल में चल रहा है। मामले में 2 FIR दर्ज हुए हैं जिसमें हिन्दू और मुस्लिम दोनों को आरोपित किया गया है। अब तक कुल 45 आरोपितों की गिरफ्तारी की खबर है। घटना मंगलवार (28 मार्च 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मामला जलगाँव के पालधी गाँव का है। विवाद की शुरुआत तब हुआ जब हिन्दू समाज का एक धार्मिक जुलूस गाँव की मस्जिद के आगे से गुजरा। इस जुलूस का नाम ‘दिंडी’ था जो नासिक जिले से निकल कर जलगाँव के रास्ते होते हुए वाणी जा रहा था। बताया जा रहा है कि इस जुलूस में DJ बज रहा था जिसमें कुछ धार्मिक गाने बजाए जा रहे थे। इन गानों पर मस्जिद और आस-पास के कट्टरपंथी मुस्लिम लोगों ने आपत्ति दर्ज की और इसे बंद करने को कहा।

जानकारी के मुताबिक हिन्दू पक्ष ने थोड़े समय के लिए म्यूजिक बंद कर दिया। थोड़ा आगे जाने के बाद फिर से म्यूजिक बजने लगा। आरोप है कि इसके चलते कुछ लोग उग्र हो उठे। पहले तो दोनों पक्षों में बहस हुई और बाद में विवाद इतना बड़ा कि पत्थर चलने लगे। इस घटना से आस-पास अफरातफरी मच गई। घटना की जानकारी पुलिस को हुई तो उसने मौके पर पहुँच कर हालात को संभाला और हमलावरों को तितर-बितर किया। पुलिस के अनुसार हालात पूरी तरह से नियंत्रण में हैं। इस घटना में 4 लोग घायल हुए हैं जिनको इलाज के लिए भेजा गया।

दोनों पक्षों द्वारा एक दूसरे पर हमले के आरोप लगाए जा रहे हैं। पुलिस के मुताबिक अब तक इस मामले में 2 FIR दर्ज हुई है। एक केस में हिन्दू पक्ष के 9 लोगों को आरोपित किया गया है। वहीं दूसरी FIR में मुस्लिम पक्ष के 63 लोग नामजद हुए हैं। अब तक कुल 45 लोगों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। पुलिस का कहना है कि अन्य आरोपितों की तलाश में दबिश दी जा रही है। साथ ही मामले की जाँच चल रही है। दोनों पक्षों द्वारा एक दूसरे पर हमले के आरोप लगाए जा रहे हैं। मुस्लिमों द्वारा अपने साथ लूटपाट के आरोपों को पुलिस ने गलत बताया है।