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रैली में कॉन्ग्रेस नेता डीके शिवकुमार ने उड़ाए ₹500 के नोट: कर्नाटक से वीडियो वायरल, 2019 में मनी लॉन्ड्रिंग केस में जा चुके हैं जेल

साल 2019 में मनी लॉन्ड्रिंग केस में जेल जा चुके कर्नाटक के कॉन्ग्रेस प्रमुख डीके शिवकुमार ने श्रीरंगपटना में आयोजित ‘प्रजा ध्वनि यात्रा’ के दौरान कलाकारों पर 500 रुपए के नोट उड़ाए। घटना मांड्या जिले के बेविनाहल्ली के पास की है। घटना का वीडियो भी सामने आया है।

वीडियो में दिख रहा है कि भारी भीड़ के बीच एक बस चल रही है जिसके टॉप पर खुद डीके शिवकुमार हैं और वो बगल में ढोल-नगाड़े बजाने वाले कलाकारों को इनाम का रुपया दे रहे हैं।

इस वीडियो के आने के बाद सोशल मीडिया पर पूछा जा रहा है कि क्या ऐसा करने की इजाजत राजनेताओं को होती है। कुछ ने कहा कि पहले ये नेता इस तरह खुलेआम पैसे उड़ाते हैं और उसके बाद जब ईडी का छापा पड़ता है तो रोना रोने लगते हैं

उल्लेखनीय है कि कर्नाटक विधानसभा की चुनावों की तारीख को लेकर निर्वाचन आयोग आज प्रेस कॉनफ्रेंस करने वाला है। ऐसे में रैली के दौरान जनता के बीच पैसे उड़ाने की हरकत पर लोगों का सवाल है कि क्या चुनाव से पहले एक उन्हें पैसों का लालच देना ठीक है।

कर्नाटक बीजेपी ने भी यह वीडियो शेयर किया है। बीजेपी ने लिखा है, “ये कहते हैं कि इनकी चार पीढ़ियाँ कॉन्ग्रेस में रही हैं। अब यह वीडियो देखने के बाद हर कोई असलियत समझ जाएगा।”

बता दें इस वीडियो पर अभी तक कॉन्ग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन नेटीजन्स हैरान हैं कि डीके शिवकुमार साल 2019 में मनी लॉन्ड्रिंग केस में तिहाड़ जाने के बावजूद ऐसी हरकत कैसे कर सकते हैं। उस समय दिल्ली हाईकोर्ट ने 2 लाख 50 हजार रुपए के निजी मुचलके पर जमानत दी थी।

होशियारपुर में चारों ओर से घिरा ‘अमृतपाल’, गाड़ी से कूद खेतों में भागा: पुलिस ने भेजा अलर्ट, दिल्ली से CCTV फुटेज सामने आई

खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह बुधवार (29 मार्च 2023) को एक बार फिर से पंजाब पुलिस के हाथों से फिसल गया है। होशियारपुर में चारों तरफ से घिर जाने के बाद अमृतपाल के इनोवा गाड़ी से खेतों में कूद कर फरार होने की जानकारी सामने आ रही है। फ़िलहाल भागा व्यक्ति अमृतपाल ही है या कोई और अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। पुलिस ने इलाके को चारों तरफ घेर लिया है और चप्पे-चप्पे की तलाशी ली जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पंजाब पुलिस के ख़ुफ़िया विभाग को अमृतपाल के एक इनोवा गाड़ी में होने की सूचना मिली थी। इस सूचना पर पुलिस टीमों ने गाड़ी नंबर PB 10 CK 0527 की तलाश शुरू की तो वह होशियारपुर इलाके में मिली। पुलिस को पीछा करता देख इनोवा ने स्पीड बढ़ा दी। इस बीच अन्य पुलिस टीमों को भी अलर्ट भेज दिया गया और इनोवा की चौतरफा घेराबंदी होने लगी। थोड़ी देर बाद इनोवा होशियारपुर जिले के गाँव मरनाइया में घुस गई। यहाँ एक गुरुद्वारा के अंदर इनोवा को ले जाया गया।

बताया जा रहा है कि इस दौरान इनोवा से 2 लोग कूद गए और खेतों की तरफ भागे। जब पुलिस गाड़ी के पास पहुँची तो उसमें कोई भी नहीं था। इस बीच इलाके में भारी संख्या में पुलिस बल पहुँच गया। पूरे क्षेत्र को सील कर के खेतों के साथ लोगों के घरों की भी तलाशी शुरू कर दी गई है। गाड़ी से कूदे दूसरे व्यक्ति को पप्पलप्रीत बताया जा रहा है। फ़िलहाल पुलिस अभी स्पष्ट रूप से यह नहीं कह पा रही है कि कार से कूद कर भागा व्यक्ति अमृतपाल ही है या कोई और। कुछ रिपोर्ट्स में इनोवा गाड़ी में 4 लोगों के होने की बात कही जा रही है।

दिल्ली भी आया था अमृतपाल

इस बीच दिल्ली पुलिस को अमृतपाल और उसके साथी पप्पलप्रीत का एक CCTV फुटेज मिला है। जानकारी के मुताबिक यह फुटेज दिल्ली के प्रीत विहार इलाके का बताया जा रहा है। पुलिस के मुताबिक अमृतपाल 21 मार्च को अपने साथी के साथ दिल्ली आया था और यहाँ वो अपने एक परिचित के घर रुका था। CCTV फुटेज में अमृतपाल बिना पगड़ी के डेनिम जैकेट में है। उसने मास्क और चश्मा भी लगा रखा है।

इस बीच मंगलवार (28 मार्च 2023) को पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट में दावा किया है कि अमृतपाल को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। यह जवाब ईमान सिंह नाम के एक वकील की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर दिया गया है। वकील ईमान सिंह ने आरोप लगाया था कि पंजाब पुलिस ने अमृतपाल सिंह को अवैध तौर पर हिरासत में रखा है।

यूपी पुलिस के साथ फिर से शुरू हुआ अतीक अहमद का सफर: प्रयागराज से साबरमती जेल के लिए हुआ रवाना, भाई अशरफ वापस बरेली कारागार में

17 साल पुराने उमेश पाल अपहरण मामले में माफिया अतीक अहमद को प्रयागराज कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई। इस मामले में अतीक के अलावा उसके साथी हनीफ और दिनेश पासी को भी आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। साथ ही अपहरण केस में अतीक के भाई अशरफ समेत 7 अन्य आरोपितों को बरी कर दिया गया है। सुनवाई के बाद अब अतीक को गुजरात के साबरमती जेल ले जाया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक अतीक को सिर्फ उमेश पाल अपहरण मामले की सुनवाई के लिए प्रयागराज लाया गया था। केस में उसे सजा हो गई है इसलिए उसे साबरमती जेल में ही रखा जाएगा। नैनी जेल में रखे जाने से पूर्व में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का उल्लंघन माना जाएगा। अतीक को नैनी जेल से लेकर यूपी पुलिस का काफिला गुजरात के लिए निकल चुका है।

रिपोर्टों के अनुसार, कोर्ट में सुनवाई के बाद नैनी जेल लाए जाने के बाद अतीक को जेल में दाखिल नहीं होने दिया गया। कैदी वाहन 5 घंटो तक जेल के गेट पर ही खड़ी रही। जेल अधीक्षक की तरफ से कहा गया कि उनके पास अतीक को जेल में रखने का आदेश नहीं है। ऐसे में उसे अहमदाबाद के साबरमती जेल ले जाया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, यदि उमेश पाल हत्याकांड को लेकर दी गई अर्जी पर कोर्ट में सुनवाई शुरू हो जाती तो संभवतः अतीक को यूपी में रखा जा सकता था। कुछ कानूनी पेचीदगी के कारण ऐसा नहीं हो सका। इसी वजह से यूपी पुलिस को अतीक की कस्टडी या रिमांड नहीं मिल सकी। वहीं अतीक के भाई अशरफ को भी बरेली सेंट्रल जेल भेज दिया गया है।

बता दें कि नैनी कोर्ट के फैसले के बाद उमेश पाल और अतीक अहमद दोनों पक्षों ने हाईकोर्ट में अपील करने की बात कही है। जहाँ उमेश पाल का परिवार अशरफ की रिहाई से नाखुश है तो वहीं अतीक के वकील ने इस सजा को ऊपरी अदालत में चुनौती देने की बात कही है।

‘राहुल गाँधी ने डिलीट किए वीर सावरकर पर अपने सारे ट्वीट्स, विपक्ष में फूट के बाद अब केस होने का डर’: सोशल मीडिया पर वायरल दावा, जानें क्या है सच्चाई

हाल ही में कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने वीर सावरकर का अपमान किया। हालाँकि, ये पहली बार नहीं है जब राहुल गाँधी ने विनायक दामोदर सावरकर का अपमान किया हो। वो और उनकी पार्टी कई वर्षों से लगातार ऐसा करती आ रही है। इससे उनके ही गठबंधन साथी उद्धव ठाकरे ने आपत्ति जताई है। महाराष्ट्र में पार्टी के प्रति गुस्सा बढ़ रहा है, लेकिन वहाँ के कॉन्ग्रेस नेता गाँधी परिवार की चाटुकारिता के कारण कुछ नहीं बोल रहे।

अब सोशल मीडिया पर कुछ लोग दावा कर रहे हैं कि राहुल गाँधी ने आलोचनाओं और विपक्षी एकता में फूट के बाद वीर सावरकर पर किए अपने सारे ट्वीट्स डिलीट कर लिए हैं। इस दावे के साथ स्क्रीनशॉट्स भी शेयर किए जा रहे हैं। इंजीनियर राजेश सिंह नामक ट्विटर यूजर ने लिखा, “अरे चमचो! क्या हुआ? राहुल बाबा की हवा निकल गई। वीर सावरकर पर सारे ट्वीट ही डिलीट कर डाले। ये डर अच्छा लगा” कई अन्य लोगों ने भी ऐसे दावे किए।

राहुल गाँधी को ‘मोदी समाज’ को भला-बुरा कहने के बाद अदालत द्वारा 2 वर्ष की सज़ा सुनाई जा चुकी है, जिसके बाद न सिर्फ उनकी संसद सदस्यता चली गई बल्कि उन्हें लुटियंस दिल्ली के तुगलक रोड स्थित उस बँगले को भी खाली करने को कहा गया, जहाँ वो 19 वर्षों से रहते हैं। दीप मणि त्रिपाठी नामक यूजर ने लिखा, “राहुल गाँधी द्वारा वीर सावरकर पर की गई टिप्पणी पर, केस दर्ज कराने की बात की चर्चा पर राहुल गाँधी ने सावरकर वाले ट्वीट डिलीट कर दिए। डर अच्छा है।”

विनोद कुमार जांगिड़ नामक यूजर ने लिखा, “कथित तौर पर राहुल गाँधी ने वीर सावरकर पर अपने सभी ट्वीट डिलीट कर दिए हैं, सावरकर जी के पोते द्वारा वीर सावरकर जी के खिलाफ लगातार अपमानजनक और निराधार बयानों के लिए राहुल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की धमकी देने के बाद।”

‘राहुल गाँधी ने वीर सावरकर पर अपने सारे ट्वीट्स डिलीट किए’ – जानें क्या है सच्चाई

हालाँकि, जब हमने ऑनलाइन पड़ताल की तो पाया कि राहुल गाँधी ने इस अवधि में अपना कोई ट्वीट डिलीट नहीं किया है। उन्होंने पिछले कुछ दिनों में कोई ट्वीट डिलीट नहीं किया है। ऐसे में वीर सावरकर पर अपने ट्वीट्स डिलीट किए जाने की बात झूठी है, अफवाह है। राहुल गाँधी के ‘Cached Tweets’ में भी कोई ऐसा ट्वीट नहीं दिख रहा जिसे डिलीट किया गया हो। ये भी हो सकता है कि वीर सावरकर पर उन्होंने ट्वीट किया ही न हो इसीलिए ट्विटर पर नहीं दिख रहा हो, क्योंकि उन्होंने अधिकतर ऐसे बयान प्रेस कॉन्फ्रेंस-रैलियों में दिए हैं और पार्टी के ट्विटर हैंडल से ये सब डाला गया।

जवाहरलाल नेहरू के खानदान से ताल्लुक रखने वाले राहुल गाँधी को वीर सावरकर की आलोचना करने में शर्म आनी चाहिए, क्योंकि नेहरू जब पहली बार जेल गए थे तब उन्हें बाहर निकालने के लिए उनके पिता मोतीलाल ने दिन-रात एक कर दिया था। नेहरू मुश्किल से 12 दिन जेल में टिके। जबकि, वीर सावरकर ने लगातार 11 वर्षों कालापानी की सज़ा झेली, जहाँ उन्हें काफी प्रताड़ित किया गया। इसके बाद उन्हें घर में नजरबन्द कर दिया गया था।

जहाँ की SP हैं लिपि सिंह, वहाँ कोर्ट परिसर में सरेआम हत्या: बिहार पुलिस के सामने ही अपराधियों ने बरसाई गोलियाँ

बिहार के सहरसा में पेशी के लिए कोर्ट लाए गए कैदी की गोली मार कर हत्या कर दी गई। कोर्ट परिसर में दिन-दहाड़े हुए हत्याकांड से इलाके में हड़कंप मच गया। मृतक की पहचान प्रभाकर कुमार पंडित के तौर पर हुई है। उसे हत्या के एक मामले में कोर्ट में पेश किया जा रहा था। हमलावरों में से एक को पकड़ लिया गया है। जबकि अन्य भीड़ का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, तीन से चार की संख्या में आए हमलावरों ने घात लगाकर प्रभाकर पर गोलियाँ बरसा दीं। अंधाधुंध फायरिंग से जख्मी प्रभाकर वहीं गिर गया। जख्मी कैदी को आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। कोर्ट परिसर में बेखौफ अपराधियों द्वारा हत्याकांड को अंजाम दिए जाने से बिहार की कानून व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

घटना उस स्थान पर अंजाम दी गई जहाँ बिहार पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह की बेटी और चर्चित आईपीएस लिपि सिंह एसपी हैं। बिहार में सुपरकॉप के नाम से मशहूर आईपीएस शिवदीप लांडे भी इसी क्षेत्र (कोसी) के डीआईजी हैं। घटना की जानकारी मिलते ही लिपि सिंह मौके पर पहुँची। लिपि सिंह ने मीडिया को जानकारी दी कि हत्याकांड के आरोपितों में से एक आलोक कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसके पास से देसी कट्टा, एक पिस्टल और कई जिंदा कारतूस बरामद हुए हैं।

पुलिस ने जानकारी दी है कि मृतक प्रभाकर ने लगभग साल भर पहले उदय यदुवंशी नामक शख्स की हत्या की थी। इसी हत्या के मामले में उसे कोर्ट लाया गया था। उदय के भाई विवेक यदुवंशी ने अपने साथियों के साथ घटना को अंजाम दिया है। घटनास्थल की जाँच की जा रही है। सीसीटीवी फुटेज को खंगाला जा रहा है। अपराधियों की धर-पकड़ के लिए टीम का गठन किया गया है। बहुत जल्दी अपराधियों को पकड़ लिया जाएगा।

मेनस्ट्रीम मीडिया की ‘मूत्रकारिता’ के बाद The Wire की ‘खच्चरकारिता’: आरफा ने माफिया की महिमा गाते हुए खेला OBC कार्ड

भाजपा ने कभी नहीं कहा कि नीरव मोदी और ललित मोदी OBC समाज से आते हैं। भाजपा ने राहुल गाँधी पर मुकदमा नहीं ठोका। भाजपा ने सिर्फ इतना कहा कि राहुल गाँधी ने पूरे मोदी समाज का नाम लेकर गलत किया, ये OBC समुदाय का अपमान है। चूँकि न्यायपालिका उन्हें इसी मामले में सज़ा सुना चुकी है, इसी मामले को लेकर उनकी संसद सदस्यता जा चुकी है और 19 सालों से वो लुटियंस दिल्ली में जिस सरकारी बँगले पर जमे बैठे हैं, उन्हें छोड़ना पड़ेगा – ऐसे में इसमें भाजपा कहाँ से आ गई?

एक तो हो गया एक अलग मामला। अब दूसरे मामले पर आते हैं। फूलपुर से एक बार सांसद और इलाहाबद पश्चिम से लगातार 5 बार विधायक रहा अतीक अहमद एक दुर्दांत अपराधी है। उस पर 100 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज रहे हैं। हाल ही में उसने अपने परिवार के साथ मिल कर उमेश पाल को मरवाया। वो राजू पाल हत्याकांड में गवाह थे, जिन्हें अतीक अहमद ने ही मरवाया था। वो जेल से ही अपराध जारी रखे था, जिस कारण उसे गुजरात के साबरमती जेल भेज दिया गया।

मीडिया ने ‘गाड़ी पलटेगी’ का हौव्वा बनाया और एनकाउंटर की चर्चाएँ चलने लगीं, क्योंकि उमेश पाल के अपहरण के 17 साल पुराने मामले में सज़ा सुनाए जाने को लेकर अतीक अहमद को यूपी पुलिस प्रयागराज लेकर आई। रास्ते भर मीडिया उसके पीछे लगी रही। पेशाब करते हुए भी उसका फोटो-वीडियो बना लिया। आमजनों ने इसे ‘मूत्रकारिता’ नाम दिया। अतीक अहमद 44 वर्षों के आपराधिक इतिहास में पहली बार दोषी करार हुआ है।

ऐसे में ‘The Wire’ मूत्रकारिता से भी आगे बढ़ कर ‘खच्चरकारिता’ लेकर आ गया। इस प्रोपेगंडा पोर्टल के बड़े चेहरों में से एक आरफा खानुम शेरवानी ने राहुल गाँधी के मामले को अतीक अहमद के मामले से जोड़ दिया। दोनों में दूर-दूर तक कोई सम्बन्ध नहीं है, लेकिन ये तो एजेंडाधारी मीडिया संस्थान हैं। इनका काम ही यही है। राहुल गाँधी की बदजुबानी पर उन्हें सज़ा और अपहरण-हत्या-रंगदारी-कब्जे के मामलों में संलिप्त रहे अतीक अहमद के मामले को ‘The Wire’ ने जोड़ दिया।

अब लॉजिक देखिए (अगर ऐसा कुछ है तो)। आरफा खानुम शेरवानी कहने लगीं कि अतीक अहमद के परिवार का पुश्तैनी धंधा खच्चरों के पालन का रहा है। बता दें कि नर गदहे और घोड़ी से जो जानवर पैदा होता है, उसे ही खच्चर नाम दिया गया है। ये काफी मेहनती होता है। बेचारे खच्चर भी आज सोच रहे होंगे कि भारत में कैसे वामपंथी मीडिया संस्थान हैं जो अपने प्रोपेगंडा के लिए उनके नाम का भी गलत इस्तेमाल करने से गुरेज नहीं कर रहे हैं।

अब आरफा खानुम शेरवानी का कहना है कि अगर ललित मोदी और नीरव मोदी को कुछ कहने से मोदी समाज की भावनाएँ आहत होती हैं तो फिर अतीक अहमद को सज़ा दिए जाने से भी गद्दी समाज की भावनाएँ आहत होनी चाहिए। बता दें कि गद्दी समाज मुस्लिमों की एक जाति है। इसके अंदर भी कई बिरादर होते हैं। सामान्यतः, निकाह बिरादर के अंदर ही किया जाता है। सुन्नी समाज के ये मुस्लिम जानवरों के पालन का काम करते आ रहे हैं।

यहाँ दो बातें हैं। पहली तो ये कि नीरव मोदी और ललित मोदी की आलोचना से OBS समाज आहत है, ऐसे किस भाजपा नेता ने कहा? ‘The Wire’ की आरफा खानुम शेरवानी ने इस बारे में कुछ नहीं बताया। दूसरी बात, अतीक अहमद को अब न्यायपालिका ने दोषी ठहरा दिया है और प्रयागराज के लोग उसके खौफ के साक्षी हैं, ऐसे में एक अपराधी को सज़ा देना कैसे उसकी पूरी जाति पर प्रहार हो गया? ये ‘The Wire’ की ‘खच्चरकारिता’ नहीं तो और क्या है।

जिस तरह से दुर्दांत अपराधी अतीक अहमद का बचाव अरफ़ा खानुम शेरवानी ने वीडियो बना कर किया है, वैसे तो शायद उसके परिजन और वकील तक न कर पाएँ। अतीक अहमद का बेटा फरार है। सीसीटीवी में उसे गोली चलाते हुए साफ़ देखा गया है। उसकी बीवी उमेश पाल की हत्याकांड में शामिल है, वो भी फरार है। अतीक अहमद पर एक-दो या दर्जन नहीं बल्कि 100 मामले दर्ज हैं, ऐसे में इस व्यक्ति का कोई कैसे बचाव कर सकता है और क्यों?

‘The Wire’ की ‘खच्चरकारिता’ का आलम ये है कि उसे अतीक अहमद की चिंता उसके परिजनों से ज्यादा है। वो अतीक अहमद की पैरवी उसके वकीलों से भी ज्यादा मजबूती से कर रहा है। आरफा खानुम शेरवानी को इस बात से भी चिंता है कि मीडिया में अतीक अहमद को अपराधी क्यों बताया जा रहा है। क्या वो कहना चाहती हैं कि अतीक अहमद ही गद्दी समाज का इकलौता प्रतिनिधि है? वो जो कर रहा है, गद्दी समाज के सभी लोग वैसे ही अपराध करते हैं? ये सच तो नहीं ही हो सकता।

आरफा खानुम शेरवानी हों या ‘The Wire’, अपराधी या दंगाई अगर मुस्लिम हो तो उसे बचाने का लंबा इतिहास इनलोगों का रहा है, भले ही इसके लिए क्यों न पीड़ितों को ही गुंडा साबित करना पड़े। दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों से लेकर अतीक अहमद प्रकरण तक इसके कई उदाहरण देखने को मिले हैं। खच्चर और घोड़ों को बीच में लाकर अतीक अहमद का बचाव किया जा रहा है। ऐसा व्यक्ति, जो देवरिया के जेल में खुलेआम व्यापारियों को टाँग कर मँगवाता था और उन्हें पीटता था।

जहाँ तक बात नीरव मोदी और ललित मोदी की है, क्या आरफा खानुम शेरवानी ‘The Wire’ के प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर के ये नहीं बताएँगी कि किस पार्टी के शासनकाल में इन दोनों के सबसे ज्यादा मजे थे? ललित मोदी 2008 में IPL का अध्यक्ष था, BCCI में सबसे ज्यादा हैसियत रखता था, किसकी सरकार थी केंद्र में तब? 2010 के आसपास के समय में जब नीरव मोदी अपनी अमीरी के शिखर पर था, जब केंद्र में कौन शासन कर रहा था?

ये सब दर्शकों को नहीं बताया जाएगा, क्योंकि इससे ‘खच्चरकारिता’ पर असर पड़ेगा। 2024 का लोकसभा चुनाव सामने है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने विपक्ष का कोई नेता टिकता हुआ नहीं दिख रहा है, ऐसे में मीडिया का वामपंथी वर्ग अब खच्चरों पर उतर आया है। राहुल गाँधी नहीं, खच्चर ही सही – कहीं तो उन्हें उम्मीद दिख रही है। वैसे भी, आतंकियों को ‘शिक्षक का बेटा’ बता कर उनका महिमामंडन करने वाले अतीक अहमद, जिसे सपा का खुला संरक्षण प्राप्त था, उसके लिए पैरवी करें तो इसमें आश्चर्य ही क्या!

‘पहले Kiss दो, फिर सैलरी दूँगा’: शिक्षिका के साथ छेड़खानी कर रहा था स्कूल संचालक अफरोज अख्तर, पूछता था – हमसे मोहब्बत कब करोगी?

बिहार के बेतिया में बंगाल की युवती ने स्कूल संचालक अफरोज अख्तर पर छेड़खानी और प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। युवती शिकारपुर थाना इलाके में स्थित सेंट्रल स्कूल में प्रबंधन (Management) का काम देखती है। युवती ने बेतिया एसपी से शिकायत में आरोप लगाया है कि अफरोज उसके साथ गलत हरकत करने की कोशिश करता रहता है।

सेंट्रल स्कूल में नौकरी कर रही लड़की दार्जिलिंग की रहने वाली है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार स्कूल के संचालक अफरोज ने उसे 25 हजार रुपए प्रतिमाह तनख्वाह और 10 हजार खाने-पीने के लिए अतिरिक्त देने का वादा कर बेतिया बुलाया था। 26 वर्षीय लड़की सात महीने से स्कूल में काम कर रही थी। आरोप है कि अब तक उसे सिर्फ 65 हजार रुपए मिले हैं।

युवती जब भी अपनी सैलरी की माँग करती तो वह छेड़खानी करने लगता। आरोप है कि स्कूल में ही अफरोज उसका हाथ पकड़ लेता है। विरोध करने पर धमकी देता है। अफरोज अक्सर उससे कहता है कि हमेशा स्कूल पर ध्यान दोगी…. हमसे मोहब्बत कब करोगी? सैलरी माँगने पर अफरोज कहता है, “पहले किस दो फिर सैलरी दूँगा।” संचालक ने यहाँ तक कहा कि तुम्हें दो काम के लिए बुलाया है लेकिन कर एक ही रही हो।

पीड़िता की शिकायत पर बेतिया एसपी उपेंद्र नाथ वर्मा ने कहा है कि मामले की जाँच शिकारपुर थाना पुलिस कर रही है। सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। उधर स्कूल संचालक ने प्रबंधन का काम देख रही युवती के आरोपों को बेबुनियाद करार दिया है। अफरोज ने कहा है कि लड़की ने 15 दिन पहले स्कूल छोड़ दिया था। उनकी सैलरी की रकम दी जा चुकी है। 11 हजार रुपए देने बाकी हैं जो एक हफ्ते के भीतर दे दिए जाएँगे।

अभिनेत्री आकांक्षा दुबे की मौत के बाद फरार हुआ गायक समर सिंह: अखिलेश यादव के लिए माँग चुका है वोट, सपा के लिए गाए गाने

भोजपुरी अभिनेत्री और मॉडल आकांक्षा दुबे (Akanksha Dubey) की मौत के मामले में गायक समर सिंह और उसके भाई के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया है। आकांक्षा दुबे की माँ मधु दुबे ने दोनों भाईयों पर बेटी को टॉर्चर करने, काम के बदले पैसे न देने समेत कई आरोप लगाए हैं। यूपी पुलिस की टीम दोनों की तलाश कर रही है। फरार समर सिंह के बारे में पता चला है कि वह समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव का करीबी है।

मधु दुबे ने मीडिया के सामने आकांक्षा के सुसाइड की बात को नकार दिया। उन्होंने कहा कि आकांक्षा ने काफी तकलीफें झेलकर अपना करियर बनाया था। वह आत्महत्या नहीं कर सकती। उन्होंने समर सिंह और उसके भाई पर हत्या की धमकी देने का आरोप लगाया था। मधु दुबे के मुताबिक 21 मार्च को समर सिंह ने उनकी बेटी को हत्या की धमकी दी थी और 25 मार्च को वह वाराणशी के सारनाथ के होटल में मृत मिली।

आकांक्षा दुबे की माँ ने सारनाथ थाने में सिंगर समर सिंह, उसके भाई संजय सिंह और दो अन्य के खिलाफ केस दर्ज कराया है। मामला दर्ज होने के बाद से ही पुलिस उनकी तलाश कर रही है। इस बीच समर सिंह का सपा कनेक्शन सामने आया है।

समर सिंह का सपा कनेक्शन

आजमगढ़ के मेहनगर इलाके के रहने वाले समर सिंह भोजपुरी गाने गाते हैं। समर भोजपुरी फिल्मों में भी अभिनय कर चुके हैं। उन्हें सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का करीबी माना जाता है। उन्होंने सपा के लिए कई गाने गाए हैं। 2022 में यूपी विधानसभा चुनावों के दौरान भी समर सिंह ने सपा के लिए गाने गाए। रिपोर्टों में तो यहाँ तक कहा गया कि कई स्थानों पर उन्होंने सपा उम्मीदवारों के लिए वोट भी माँगे। उनके द्वारा गाया गया गाना ‘सपा आई रे…’ वायरल हुआ था। जिसे समाजवादी पार्टी के कार्यक्रमों में खूब बजाया गया और आज भी बजाया जाता है।

समर सिंह ने हाल ही में होली के अवसर पर गाने गाए थे। गाने के पोस्टर में अखिलेश यादव के साथ उनकी तस्वीर लगाई गई थी। सपा कार्यकर्ता इन गीतों को समाजवादी होली गीत कहकर प्रचारित कर रहे थे।

भोजपुरी गायक समर सिंह का ट्विटर हैंडल

इतना ही नहीं समर सिंह के ट्विटर अकाउंट पर भी कवर फोटो में अखिलेश के साथ उनकी तस्वीर लगी हुई है। हालाँकि, बायो में उन्होंने सिर्फ भोजपुरी अभिनेता और गायक ही लिखा हुआ है।

राहुल गाँधी के समर्थन में कॉन्ग्रेस का ‘सत्याग्रह’, जनता तो दूर कॉन्ग्रेसी भी नहीं पहुँचे: भड़के प्रदेश अध्यक्ष ने की कार्रवाई की बात, राजस्थान में इसी साल चुनाव

राहुल गाँधी की लोकसभा सदस्यता समाप्त होने के बाद कॉन्ग्रेस द्वारा आयोजित सत्याग्रह में कई कॉन्ग्रेसी रुचि नहीं ले रहे हैं। इन सभाओं में भीड़ न जुटने पर राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के हाईकमान वाले नेता नाराज हैं। पीसीसी अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को निष्क्रिय बता कर 86 नेताओं के नाम भेजे जाने के दावे किए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि इन नेताओं पर कॉन्ग्रेस आला कमान जल्द कार्रवाई कर सकता है। इस कार्रवाई में पार्टी में महत्वहीन पद देना और आने वाले चुनावों में बड़ी जिम्मेदारी से अलग करना भी शामिल हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से खबर दी जा रही है कि पीसीसी अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने धरने-प्रदर्शन से दूर नेताओं को कार्रवाई का इशारा भी कर दिया है। उन्होंने कहा कि पार्टी लाइन पर न चलने वाले नेताओं की कॉन्ग्रेस में कोई जरूरत नहीं है। जयपुर के एक सम्मेलन में खुद वह पहले पहुँच गए थे, लेकिन अन्य कार्यकर्ता बाद में आए। इस दौरान उन्होंने यह भी पाया कि पार्टी मुख्यालय की तरफ से भेजे गए पोस्टरों को अनदेखा कर के जयपुर जिला टीम ने अपना खुद का पोस्टर बना डाला था। इस बात से डोटासरा का पारा सातवें आसमान पर पहुँच गया।

बताया जा रहा है कि गोविन्द सिंह डोटसरा ने गुस्से में यह तक कह डाला कि पर्दे के पीछे जो भी लोग खेल कर रहे हैं उन पर पार्टी की नजर है। धरने-प्रदर्शन से दूर लोगों गोविन्द सिंह ने 6 महीने का अल्टीमेटम दिया। उन्होंने कहा कि इसके बाद पार्टी लाईन से हट कर चल रहे लोग कॉन्ग्रेसी नहीं रह जाएँगे। राहुल गाँधी की लोकसभा सदस्य्ता खत्म होने का जिक्र करते हुए गोविन्द सिंह ने कहा कि अब भी जिसका खून नहीं खौल रहा है उसके कॉन्ग्रेसी होने पर प्रश्नचिन्ह है। अंत में उन्होंने राहुल के साथ नहीं तो कॉन्ग्रेसी नहीं भी कहा।

राहुल गाँधी की शान में कसीदे गढ़ते हुए गोविन्द सिंह ने कहा, “लानत है ऐसी राजनीति के ऊपर। ऐसी पार्टी जिसने हमें मान सम्मान दिया। ऐसा नेता जिसने इस देश को अपने और अपने परिवार के खून से सींचा है। अगर उसके ऊपर इस तरह की बात आती है तो मान लो कि देश के हर नागरिक को तैयार रहना चाहिए। जो AC के अंदर बैठे TV पर कौन आया-कौन गया देख रहे हैं ऐसे कॉन्ग्रेसियो की हमको जरूरत नहीं है।”

कनाडा में फिर तोड़ी गई महात्मा गाँधी की मूर्ति: 5 दिन के अंदर दूसरी घटना, भारत ने विरोध जताया

कनाडा में एक बार फिर महात्मा गाँधी की मूर्ति तोड़ी गई है। भारत ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। साथ ही कनाडाई अधिकारियों से मामले की जाँच कर आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई करने की माँग की है। बीते एक सप्ताह में कनाडा में दूसरी बार महात्मा गाँधी की मूर्ति तोड़ी गई।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत में स्थित साइमन फ्रेजर विश्वविद्यालय परिसर में महात्मा गाँधी मूर्ति लगी थी। उपद्रवियों ने इस मूर्ति पर हमला करते हुए तोड़ दिया। आशंका जताई जा रही है कि खालिस्तान समर्थकों ने ही इस घटना को अंजाम दिया होगा।

भारत के महावाणिज्य दूतावास ने ट्वीट कर इस घटना की निंदा की है। इस ट्वीट में कहा गया है, “शांति के अग्रदूत महात्मा गाँधी की मूर्ति को क्षति पहुँचाने के जघन्य अपराध की कड़ी निंदा करते हैं। कनाडाई अधिकारियों से मामले की तत्काल जाँच करने और आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई करने का अनुरोध करते हैं।”

बता दें कि इससे पहले इससे पहले गुरुवार (23 मार्च 2022) को कनाडा के ओंटारियो प्रांत के हेमिल्टन शहर में स्थित सिटी हॉल में बनी महात्मा गाँधी की मूर्ति को भी नुकसान पहुँचाया गया था। आरोपितों ने मूर्ति में स्प्रे पेंट भी कर दिया था। इस घटना को लेकर कहा गया था कि खालिस्तान समर्थकों ने मूर्ति को क्षतिग्रस्त किया है।

जुलाई 2022 में कनाडा के रिचमंड हिल स्थित एक विष्णु मंदिर के बाहर लगाई गई महात्मा गाँधी की मूर्ति को क्षतिग्रस्त किया गया था। बता दें कि दुनियाभर के कई देशों में स्थित खालिस्तानी समर्थक भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। इसमें हिंदुओं के पवित्र मंदिरों को निशाना बनाना भी शामिल है। इसी साल 13 फरवरी को मिसिसॉगा ने स्थित एक राममंदिर को खालिस्तानी समर्थकों ने नुकसान पहुँचाने की कोशिश की थी। खालिस्तानियों ने मंदिर की दीवारों में भारत विरोधी नारे भी लिखे थे।