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‘इस बार बैसाखी ऐतिहासिक हो’ : सिखों को भड़काते अमृतपाल की वीडियो-ऑडियो मीडिया में वायरल, रिपोर्ट्स- सरेंडर के लिए भगोड़े ने रखी 3 शर्त

हर रोज अलग-अलग जगहों से भगोड़े अमृतपाल सिंह की तस्वीरें सामने आने की खबरों के बीच अब पता चला है कि वह खालिस्तानी समर्थक पंजाब में ही छिपा है। दावा किया जा रहा है कि अमृतपाल ने एक वीडियो मैसेज जारी किया है। इस संदेश में उसने देश और विदेशों में रह रहे सिखों को बड़े मकसद के लिए एकजुट होने के लिए कहा है। ये वीडियो कब की है और कहाँ रिकॉर्ड की गई है, इसकी पुष्टि ऑपइंडिया नहीं करता। इस वीडियो पर कई नामी मीडिया संस्थान जैसे टाइम्स नाऊ, आजतक, हिंदुस्तान टाइम्स आदि ने रिपोर्ट की हुई है।

दावा है कि ये पहली वीडियो इन मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक एक यूट्यूब चैनल पर जारी वीडियो मैसेज में अमृतपाल ने 18 मार्च की घटना के बारे में जानकारी दी। उसने कहा कि सरकार उसके समर्थकों यहाँ तक की महिलाओं और बच्चों पर अत्याचार कर ही है। सरकार ने कई साथियों पर एनएसए लगा दिया और असम भेज दिया। उसने कहा, “हम जिस रास्ते पर चल रहे हैं एक न एक दिन यह दिन आना ही था और हमें इसका सामना करना होगा।”

वीडियो में आगे अमृतपाल बैसाखी के मौके पर होने वाले सरबर खालसा (सिख संगठनों का सम्मेलन) कार्यक्रम में शामिल होने के लिए देश-विदेश के सिखों को न्योता दे रहा है। वह कहता है, “जिस तरह सरकार ने हमसे धोखा किया है हमें ध्यान रखना होगा। पंजाब के मसलों को हल करने के लिए एकसाथ आना होगा।” अमृतपाल कहता है कि सरकार ने जिस तरह लोगों के बीच में डर पैदा किया है, इस साल की बैसाखी का त्योहार ऐतिहासिक होना चाहिए।

फिलहाल यह पता नहीं चल सका है कि वीडियो को कहाँ रिकॉर्ड किया गया है। इसके साथ साथ अमृतपाल ने अपना एक ऑडियो भी जारी किया है जो पंजाबी में है। इस ऑडियो में वह पंजाब के लोगों को भड़काने की कोशिश कर रहा है। वह पुलिस और सिस्टम को चुनौती देते हुए कह रहा है कि कमर कसने का वक्त आ गया है। अगर आज नहीं जागे तो फिर कभी नहीं हो पाएगा। इस ऑडियो की रिकॉर्डिंग डेट भी पुष्टि नहीं हो पाई है।

पंजाब पुलिस की मानें तो मंगलवार (28 मार्च 2023) की रात को अमृतपाल पंजाब में देखा गया था। खबरें ये भी हैं कि अमृतपाल अमृतसर में गोल्डन टेंपल के श्री अकाल तख्त साहिब में आकर सरेंडर कर सकता है। कुछ रिपोर्टों में कहा जा रहा है कि वह बठिंडा के तलवंडी साहिब स्थित तख्त श्री दमदमा साहिब में सरेंडर कर सकता है। ऐसे में दोनों स्थानों की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। दोनों शहरों में चेकिंग बढ़ा दी गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स में पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि सरेंडर के लिए अमृतपाल ने तीन शर्तें रखी हैं। पहली शर्त है कि पुलिस हिरासत में उसके साथ मारपीट न हो। दूसरी शर्त है कि उसे पंजाब के बाहर न ले जाया जाए। अमृतपाल की तीसरी शर्त है कि उसको सरेंडर को गिरफ्तारी न दिखाई जाए। कहा जा रहा है कि कुछ धार्मिक नेता उसके सरेंडर को लेकर मध्यस्थता कर रहे हैं।

गाइडलाइन्स में लिखी थी ‘आधी बाजू’… फिर भी हिजाब पहन SET परीक्षा देने की जिद्द पर अड़ीं 3 छात्राएँ: वायरल Video में दावा- कॉलेज ने एंट्री नहीं दी

राजस्थान के जयपुर में तीन छात्राएँ हिजाब पहनकर सेट की परीक्षा में शामिल होने की जिद कर रही थीं। तीनों को परीक्षा केंद्र के गेट पर ही रोक दिया गया। मामला यूनिवर्सिटी राजस्थान कॉलेज का है। इस संबंध में तीन छात्राओं का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया जा रहा है।

टीवी 9 भारतवर्ष की एक रिपोर्ट के मुताबिक रविवार (26 मार्च 2023) को आयोजित राजस्थान सेट की परीक्षा में शामिल होने आई तीन लड़कियों को गेट के अंदर दाखिल नहीं होने दिया गया। तीनों छात्राएँ हिजाब पहनकर परीक्षा में शामिल होने की जिद कर रही थीं। जाँच कर रहे स्टाफ ने छात्राओं को हिजाब उतार कर अंदर जाने को कहा। छात्राएँ ऐसा करने को तैयार नहीं हुईं और अपनी जिद पर अड़ी रहीं।

कॉलेज प्रबंधन ने छात्राओं को अंदर आने की अनुमति नहीं दी। जिसके बाद परीक्षा केंद्र के बाहर छात्राओं का वीडियो बनाया गया। जो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। इसमें दावा किया गया है कि एडमिट कार्ड पर कहीं भी नहीं लिखा कि हिजाब या बुर्के में परीक्षा में शामिल नहीं होना है। जबकि ध्यान से देखें तो साफ दिख रहा है कि एडमिट कार्ड में ड्रेस कोड का पालन करने को कहा गया है।

बता दें कि SET परीक्षा को लेकर विस्तार से गाइडलाइन्स दी गई थी। इसे परीक्षा से ठीक पहले कई न्यूज पोर्टल्स पर प्रकाशित किया गया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार ड्रेस कोड में पुरुषों के लिए आधी बाजू वाली शर्ट या टी शर्ट, पैंट एवं हवाई चप्पल/स्लीपर पहनकर आने के लिए कहा गया था। वहीं महिला उम्मीदवारों को सलवार सूट या साड़ी, आधी आस्तीन वाला कुर्ता/ब्लाउज, हवाई चप्पल/स्लीपर पहनकर ही परीक्षा में शामिल होना था। बालों में सिर्फ साधारण रबड़ बैंड लगा कर आने की इजाजत थी।

गाइडलाइन्स के अनुसार परीक्षार्थियों को घड़ी, सैंडल, सन ग्लास, बैल्ट,कैप, स्कार्फ, स्टॉल, शॉल, मफलर इत्यादि पहनकर परीक्षा में शामिल होने की इजाजत नहीं थी। यदि किसी पहनावे को लेकर विवाद हो तो परीक्षा केंद्र के अधिकारी का निर्णय मान्य होगा।

लालच में बने ईसाई, फिर याद हिन्दू धर्म की आने लगी: MP में एक परिवार के 8 लोगों ने 9 साल बाद की घर वापसी, बोले- सनातन धर्म सबसे सच्चा

मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में 9 साल पहले धर्मान्तरित हुए एक परिवार ने घर वापसी की है। ईसाई मत से अपने मूल धर्म हिन्दू में वापस आने वाले एक ही परिवार के 8 सदस्य हैं। इन सभी ने 9 साल पहले अपने धर्म परिवर्तन को खुद का भटकाव कहा और घर वापसी पर ख़ुशी जताई। विश्व हिन्दू परिषद के पदाधिकारियों ने वापस लौटे सभी सदस्यों का स्वागत किया है। घर वापसी का यह कार्यक्रम मंगलवार (28 मार्च 2023) को महादेव शिव के मंदिर में आयोजित हुआ था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घर वापसी करने वाला परिवार झाबुआ जिले के गाँव धामंदा का रहने वाला है। घर वापसी करने वाले कैलाश और उनके परिवार वालों ने बताया कि 9 साल पहले उनके घर में कुछ लोग बीमार रहा करते थे। इस बीच ईसाई मिशनरियों से जुड़े एक व्यक्ति की उनसे मुलाकात हुई। उस व्यक्ति ने ईसाई बन जाने पर हिन्दू परिवार को बेहतर इलाज का झाँसा दिया। कैलाश के मुताबिक उसी लालच में वो ईसाई बन गए थे। हालाँकि बाद में उन्हें अपने मूल धर्म की याद आने लगी। अपनी संस्कृति को याद करते हुए घर वापसी करने वाले परिवार ने कहा कि सनातन धर्म ही सच्चा है।

घर वापसी करने वालों में कैलाश, शुकली, दुर्गेश, गोविन्द, काली, मुकेश, मोनिका और अभिषेक शामिल हैं। कैलाश और शुकली पति-पत्नी हैं और बाकी सभी उनके बेटे और बेटियाँ हैं। इन सभी ने खुद को फिर से हिन्दू धर्म में आ कर बेहद खुश बताया। विहिप कार्यकर्ताओं ने बताया कि इन सभी की मुलाकात धर्म परिवर्तन के खिलाफ अभियान चला रहे हिन्दू संगठन के सदस्यों से हुई। उन्होंने इस परिवार को सुबह का भूला बता कर घर वापसी का कार्यक्रम तय किया।

जानकारी के अनुसार यह कार्यक्रम गाँव कोकावद में बने महादेव धाम में आयोजित हुआ। घर वापसी करने वाले सदस्यों ने यहाँ बाकायदा वेदमंत्रों के बीच हिन्दू देवी-देवताओं की आराधना की। मंदिर के संत कमल ने सभी को आशीर्वाद दिया और हवन करवाया। घर वापसी करने वालों ने संत खूमसिंह महाराज की प्रतिमा को भी नमन किया। इस मौके पर ग्रामीण और हिन्दू संगठन के लोग जुटे थे। हिन्दू संगठनों ने धर्म परिवर्तन को गंभीर समस्या बताया।

‘मेरा घर राहुल गाँधी का घर’: कॉन्ग्रेसियों ने शुरू किया नया अभियान, छोटे बच्चों और बुजुर्गों के हाथ में तख्ती पकड़ाई

लोकसभा की सदस्यता खत्म होने के बाद कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) काे नई दिल्ली में स्थित सरकारी बँगला खाली करने का नोटिस दिया गया है। इसके विरोध में कॉन्ग्रेस पार्टी ने महाभियान शुरू किया है। इसका नाम ‘मेरा घर राहुल गाँधी का घर’ है।

इस क्रम में उत्तर प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय ( Ajay Rai) ने अपने घर पर राहुल गाँधी की नेम प्लेट लगाई है। पूर्व विधायक और उनकी पत्नी ने शहर के लहुराबीर इलाके में अपने घर पर मंगलवार (28 मार्च 2023) को एक बोर्ड लगाया, जिसमें लिखा है, “मेरा घर श्री राहुल गाँधी जी का घर।”

अजय राय ने अपने ट्विटर हैंडल पर कुछ तस्वीरें भी शेयर की हैं। इसके साथ ही उन्होंने लिखा, “तानाशाह आप कितने घर खाली कराओगे? हर कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता का घर राहुल जी का घर है। आज हमने काशी स्थित आवास को राहुल गाँधी जी को समर्पित किया। आइए राहुल जी, काशी में आपका स्वागत है। हर हर महादेव।”

उन्होंने आगे कहा कि राहुल गाँधी के समर्थन में यह अभियान काशी सहित पूरे प्रयागराज क्षेत्र में शुरू किया गया है। गाँधी परिवार ने पूरे आनंद भवन (प्रयागराज में) को राष्ट्र को समर्पित किया है।

इसी तरह प्रदेश कॉन्ग्रेस प्रवक्ता अशोक सिंह ने कहा कि ‘मेरा घर आपका घर’। अशोक सिंह ने बुधवार (29 मार्च 2023) को ट्वीट किया, “जिसने लोगों के दिल में घर कर लिया, उसके लिए हर घर ने अपने दरवाजे खोल दिए हैं, क्योंकि राहुल गाँधी ने नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान खोलने का संकल्प लिया है। मेरे नेता, मेरी प्रेरणा, मेरे भाई राहुल जी, मेरा घर आपका घर।”

बता दें कि कॉन्ग्रेस अपनी राजनीति के लिए भले ही यह अभियान शुरू करे, लेकिन इसमें बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक का इस्तेमाल किया जा रहा है। छोटे-छोटे बच्चों और बुजुर्गों के हाथ में ‘मेरा घर आपका घर’ तख्तियाँ पकवाड़कर फोटो खिंची जा रही हैं और उसे सोशल मीडिया पर डाला जा रहा है। ये एक तरह से राजनीतिक टूल बनते हुए नजर आ रहे हैं।

बता दें कि राहुल गाँधी तुगलक लेन स्थित सरकारी बँगले में पिछले 12 वर्षों से रह रहे हैं। अमेठी से पहली बार सांसद बनने के बाद उन्हें 2004 में 12 तुगलक लेन बँगला दिया गया था। चूँकि वो सांसद नहीं रहे, इसीलिए उन्हें ये बँगला खाली करना पड़ेगा। राहुल गाँधी ने 2019 लोकसभा चुनाव में केरल के वायनाड से जीत दर्ज की थी।

‘मोदी’ सरनेम पर टिप्पणी किए जाने के बाद सूरत की अदालत ने उन्हें 2 वर्ष की सज़ा सुनाई। इसके बाद लोकसभा सचिवालय ने उनकी संसद सदस्यता का नोटिफिकेशन जारी कर दिया। इसके बाद कॉन्ग्रेस के सभी सांसद विरोध जताने के लिए काले कपड़ों में संसद भवन पहुँचे थे। अब सांसदी जाते ही उन्हें बँगला खाली करने का नोटिस दे दिया गया।

राष्ट्रगान अपमान केस में बॉम्बे HC ने दिया ममता बनर्जी को झटका, याचिका खारिज: कार्रवाई रोकने के लिए अर्जी करवाना चाहती थीं रद्द

राष्ट्रगान का अपमान करने के मामले में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को बॉम्बे हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। न्यायमूर्ति अमित बोरकर की पीठ ने जनवरी 2023 के सत्र अदालत (Session court) के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। सत्र अदालत ने राष्ट्रगान का अपमान करने के मामले में कार्रवाई करने की माँग वाली अर्जी को पुनर्विचार के लिए मजिस्ट्रेट अदालत में भेज दिया था। जबकि ममता बनर्जी चाहती थीं कि इस अर्जी को रद्द कर देना चाहिए।

दरअसल, मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की कोर्ट में सीएम ममता पर भाजपा नेता विवेकानंद गुप्ता ने राष्ट्रगान का अपमान करने के आरोप में शिकायत दर्ज कराई थी। मामला दिसंबर 2021 का था। इस शिकायत पर कोर्ट ने मार्च 2022 में ममता बनर्जी को समन जारी किया था। ममता बनर्जी ने इस समन को सेशन कोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट ने मामले को मजिस्ट्रेट के पास भेज दिया था और शिकायत पर नए सिरे से विचार करने को कहा था।

इसी मामले को लेकर ममता बनर्जी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इस अर्जी में ममता बनर्जी ने कहा कि सत्र अदालत को समन हमेशा के लिए रद्द कर देना चाहिए था न कि मामले को दोबारा विचार करने के लिए मजिस्ट्रेट के पास भेजना चाहिए था। जस्टिस बोरकर ने कहा कि हाईकोर्ट को इस मामले में दखल देने की जरूरत नहीं है।

सीएम ममता बनर्जी पर क्या है आरोप ?

भाजपा नेता की शिकायत के अनुसार दिसंबर 2021 में ममता बनर्जी कार्यक्रम के सिलसिले में मुंबई के यशवंतराव चव्हाण ऑडिटॉरियम पहुँची थीं। कार्यक्रम में राष्ट्रगान बजने के बाद तक वे बैठी रहीं। इसके बाद अचानक से उठीं। राष्ट्रगान की 2 पक्तियाँ गाने के बाद राष्ट्रगान के बीच हीं वे कार्यक्रम स्थल से चली गईं। बीजेपी नेता विवेकानंद गुप्ता ने मार्च 2022 में इसकी शिकायत की थी। जिसके बाद बंगाल की सीएम को समन जारी किया गया।

जयपुर के जिन 8 बम ब्लास्टों में हुई 71 लोगों की मौत, उसके चारों दोषी बरी: राजस्थान हाईकोर्ट ने दिया फैसला, जाँच के भी आदेश

राजस्थान हाईकोर्ट ने राजधानी जयपुर में हुए सीरियल ब्लास्ट के सभी 4 दोषियों को बरी कर दिया है। इसके साथ ही जाँच अधिकारियों के खिलाफ जाँच का निर्देश दिया है। आरोपितों के खिलाफ पुलिस अदालत के समक्ष पुख्ता सबूत पेश नहीं कर पाई। बता दें कि 13 मई 2008 को जयपुर में कई बम ब्लास्ट किए गए थे, जिनमें 71 लोग मारे गए थे।

मामले के सभी आरोपितों की अपीलों पर सुनवाई करने के दौरान जस्टिस पंकज भंडारी और समीर जैन की खंडपीठ ने कहा कि जाँच अधिकारी को कानून की जानकारी नहीं है। कोर्ट ने जाँच अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए राज्य के DGP को भी निर्देश दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को भी जाँच अधिकारियों की जाँच कराने के लिए कहा है।

इस मामले में फाँसी की सजा पाए चारों आरोपितों सहित 28 अपीलों पर सुनवाई करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने बरी कर दिया। कोर्ट ने ATS द्वारा दिए गए सबूतों को खारिज करते हुए कहा कि ये सबूत भरोसे के लायक नहीं हैं।

बता दें कि 13 मई 2008 को जयपुर में 8 जगहों पर सीरियल बम ब्लास्ट हुए थे। इन धमाकों में 71 लोगों की मौत हो गई थी और 185 लोग घायल हो गए थे। इस मामले में पुलिस ने मोहम्मद सैफ, सैफुर्रहमान, सरवर आजमी और मोहम्मद सलमान सहित 13 लोगों को आरोपित बनाया था। इसके बाद कोर्ट ने इन चारों को हत्या, राजद्रोह और विस्फोटक अधिनियम के तहत दोषी पाया था।

इस मामले में 3 आरोपित अभी भी फरार हैं। इन सबके अलावा, 3 आरोपित हैदराबाद और दिल्ली की जेल में बंद हैं। बाकी बचे दो आरोपित दिल्ली के बाटला हाउस मुठभेड़ में मार गिराए गए थे। वहीं, चार आरोपित जयपुर जेल में बंद थे। इन्हीं चार लोगों को निचली अदालत ने फाँसी की सजा सुनाई थी।

पुलिस ने साल 2008 में यूपी के मौलवीगज निवासी शाहबाज हुसैन, आजमगढ़ के सरायमीर निवासी मोहम्मद सैफ को गिरफ्तार किया गया था। आजमगढ़ के चाँदपट्टी निवासी मोहम्मद सरवर आजमी और सैफ उर्फ सैफुर्रहमान को साल 2009 में तथा यूपी के निजामाबाद निवासी मोहम्मद सलमान को साल 2010 को गिरफ्तार किया था।

निचली अदालत में सुनवाई में 24 गवाह बचाव पक्ष ने पेश किए थे, जबकि सरकार की ओर से 1270 गवाह पेश हुए थे। सरकार की ओर से वकीलों ने 800 पेज की बहस की थी। कोर्ट ने 2500 पेज का फैसला सुनाया था। इस तरह कोर्ट ने दिसंबर 2019 में चार दोषियों को फाँसी की सजा दी।

सजा सुनाते वक्त कोर्ट ने कहा था कि विस्फोट के पीछे जेहादी मानसिकता थी। यह मानसिकता यहीं नहीं थमी। जयपुर हमले के बाद आरोपितों ने दिल्ली और अहमदाबाद में भी विस्फोट किए। तब से ये आरोपित फाँसी की प्रतीक्षा में जेल में बंद थे।

शाकाहारियों से नफरत और जैन समुदाय का मजाक: प्राप्ति एलिजाबेथ की ‘नकली हँसी’ देख नेटीजन्स को आया गुस्सा, बोले- दिमाग डॉक्टर को दिखाओ

सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर प्राप्ति एलिजाबेथ (Prapti Elizabeth) का सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें वह जैन समुदाय का मजाक उड़ाते हुए नजर आ रही हैं। इस वीडियो को ट्विटर यूजर आदित्य नायक ने 27 मार्च 2023 को शेयर किया था। इसमें उन्होंने लिखा, “सभी शाकाहारी पुरुषों, खासकर जैनियों को अपने भगवान का शुक्रिया अदा करना चाहिए कि इस दो-बिट राइस बैग ने उन्हें नकार दिया।”

दरअसल, प्राप्ति एलिजाबेथ ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर 15 दिसंबर 2022 को यह वीडियो शेयर किया था। लेकिन यह अभी वायरल हो रहा है। इसमें उसने शाकाहारी पुरुषों के साथ डेटिंग करने के बारे में अपने विचार रखे हैं। साथ ही पोस्ट के कैप्शन में लिखा है, “एक शाकाहारी, अकेले आदमी को टैग करें और उसे बताएँ कि समस्या क्या है।” उसने वीडियो में शाकाहारी जैन पुरुष का मजाक उड़ाते हुए कहा, “मुझे पूरी उम्मीद है कि आप सभी वेजी पुरुषों को अपनी तरह मिल जाएगी, लेकिन मैं ऐसी बिल्कुल नहीं हूँ। इस लॉस के लिए खेद है।” इसके बाद वह जोर-जोर से हँसने लगती है।

सोशल मीडिया पर यह वीडियो वायरल होने के बाद एलिजाबेथ की जमकर आलोचना की जा रही है। साथ ही यूजर्स उसकी हँसी को रामायण सीरियल के एक किरदार की हँसी से जोड़ कर देख रहे हैं। कुछ लोग ऐसी नकली हँसी हँसने के लिए उन्हें डॉक्टर के पास जाने की सलाह दे रहे हैं।

ट्विटर और इंस्टाग्राम यूजर्स ने प्राप्ति एलिजाबेथ को जैन समुदाय का मज़ाक उड़ाने पर आड़े हाथों लिया। ट्विटर यूजर अदिति ने लिखा, “पेटा को अपने नियमित कंटेन्ट के बजाए इस वीडियो का प्रचार करना चाहिए… मुझे यकीन है कि 97% लोग इस वीडियो को देखकर ही मांसाहार छोड़ देंगे।” एक यूजर ने लिखा, “लक्की जैन।”

डॉक्टर मेघनाथ नाम के यूजर ने लिखा, “यह वीडियो मीट का नहीं, बल्कि नफरत का लगता है।”

ट्विटर यूजर ईशान जैन ने कहा, “कितना भाग्यशाली होगा वह जैन आदमी? जो इस जैसी महिला को डेट करने से बच गया।”

दिपेन्द्र जैन ने इंस्टा पर लिखा था, “तुम 2 कोड़ी के content creator, तुम्हारी औकात क्या है? मासूम पशुओं को मारकर खाते हो। दम है तो खुद को मारकर खाओ, तब बेचारे पशुओं का दर्द समझ आएगा। मैं इस अकाउंट की रिपोर्ट करने जा रहा हूँ और आप सभी से भी इसकी रिपोर्ट करने का अनुरोध करता हूँ।”

प्राप्ति एलिजाबेथ के इंस्टाग्राम पोस्ट का स्क्रीनशॉट
एलिजाबेथ की इंस्टा स्टोरी का स्क्रीनशॉट

एलिजाबेथ कौन है?

प्राप्ति बी एलिजाबेथ एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं, जो टाइम्स इंटरनेट में एक प्रोड्यूसर के रूप में काम करती हैं। वह तीन साल से अधिक समय से टाइम्स इंटरनेट के साथ जुड़ी हुई हैं। उसने 2014 में एक रिसर्च असिस्टेंट के रूप में अपना करियर शुरू किया। अगस्त 2015 में एक साल के करीब उसने ब्लूगैप के लिए काम किया। बाद में वह Scoop Whoop के साथ जुड़ गई। यह मीडिया इंडस्ट्री में उसका बड़ा ब्रेक था। उसने MensXP के साथ भी कुछ समय के लिए काम किया और फिर इंडिया टुडे ग्रुप जॉइन कर लिया। यहाँ उसने 5.8 साल तक काम किया। यही नहीं Jan.E.Man नाम की एक मलयालम फिल्म में भी उसने एक अभिनेत्री के रूप में काम किया, जो 2021 में रिलीज हुई थी।

‘मुझे पुलिस पर भरोसा है, बिहार के नेताओं पर नहीं’: यूट्यूबर मनीष कश्यप को पुलिस ले गई तमिलनाडु, एयरपोर्ट पर बताया- हिरासत में कैसा हो रहा बर्ताव

बिहार के यूट्यूबर मनीष कश्यप उर्फ त्रिपुरारी कुमार तिवारी को तमिलनाडु पुलिस प्रोडक्शन वारंट पर अपने साथ ले गई। कश्यप मदुरै की अदालत में पेश किया जाएगा। आरोप है कि उन्होंने तमिलनाडु में बिहार के कुछ निवासियों के साथ हिंसक घटनाओं की भ्रामक खबरें, फोटो और वीडियो शेयर की थीं। इस मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद उन्होंने बिहार पुलिस के आगे आत्मसमर्पण कर दिया था। अब उन्हें तमिलनाडु पुलिस अपने साथ ले गई है।

तमिलनाडु पुलिस कश्यप से पूछताछ के लिए कोर्ट से 15 दिनों की रिमांड माँग सकती है। कश्यप पर तमिलनाडु में भी लगभग एक दर्जन मामले दर्ज हैं। तमिलनाडु ले जाने के दौरान यूट्यूबर ने पटना एयरपोर्ट पर कहा कि पुलिस भी उनके साथ अच्छा व्यवहार कर रही है। हालाँकि, उन्होंने नेताओं पर अविश्वास जताया। उन्हें 31 मार्च को मदुरै कोर्ट में पेश किया जा सकता है।

मनीष कश्यप ने कहा कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है। सिर्फ मजदूरों की आवाज उठाई थी। उन्होंने कहा कि उन्हें न्यायालय पर भरोसा है। बता दें कि भ्रामक खबरें फैलाने के आरोप में पूछताछ के लिए बिहार पुलिस ने 5 दिन की रिमांड पर लिया था। यह रिमांड सोमवार (27 मार्च 2023) को खत्म हो रही थी। इसके बाद तमिलनाडु पुलिस के अनुरोध पर प्रोडक्शन वारंट जारी किया गया।

बता दें कि 18 मार्च 2023 को मनीष कश्यप के सरेंडर करते ही तमिलनाडु पुलिस बिहार पहुँच गई थी। गिरफ्तारी के बाद बिहार पुलिस और आर्थिक अपराध शाखा की टीम उनसे पूछताछ कर रही थी। बताया जा रहा है कि मनीष के साथ बिहार पुलिस की टीम भी तमिलनाडु गई है।

‘नवरात्रि में नहीं खुलेगी मीट की दुकान…आदेश है’ : BJP नेता का Video वायरल, मंडावली में शटर गिरवाए

सोशल मीडिया पर बीजेपी नेता रविंद्र सिंह (BJP leader Ravindra Singh) का एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है। इसमें वह नवरात्रि के दौरान एक मुस्लिम इलाके में चिकन की दुकानों को बंद करवाते हुए दिखाई दे रहे हैं। यह वीडियो पश्चिम दिल्ली के विनोद नगर में मंडावली फजलपुर इलाके का है।

वायरल वीडियो में बीजेपी नेता को पुलिस और अन्य लोगों के साथ देखा जा सकता है। इसमें सिंह मीट की दुकानों के मालिकों से कह रहे हैं, “अभी नवरात्रि का समय है। इस समय मीट की दुकानों को बंद रखने का आदेश दिया गया है। सभी दुकानदार अपनी दुकानों को बंद रखें। नवरात्रि में मीट की कोई भी दुकान नहीं खुलेगी।” इसके बाद एक दुकानकार अपनी दुकान का शटर बंद कर देता है। थोड़ा आगे जाने के बाद बीजेपी नेता अन्य दुकानदारों से कहते हैं कि आप नवरात्रि को छोड़कर साल भर अपनी दुकानें खोल सकते हैं।

सोशल मीडिया पर जहाँ कुछ लोग इस कदम की सराहना कर रहे हैं। वहीं, कट्टरपंथी मुस्लिम और वामपंथी पत्रकार बीजेपी नेता पर निशाना साध रहे हैं। वामपंथी पत्रकार विनोद कापड़ी ने इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा, “क्या ये आदमी दिल्ली पुलिस का नया कमिश्नर है? अगर नहीं है तो पुलिस इसकी गुंडागर्दी पर कार्रवाई करके दिखाइए।” इस ट्वीट में विनोद कापड़ी ने सीपी पुलिस और दिल्ली पुलिस को टैग भी किया है।

विनोद कापड़ी को जवाब देते हुए सुधीर चतुर्वेदी ने लिखा, “क्या गलत है इसमें। आदेश के तहत नवरात्रों में मांस का व्यापार अगर नौ दिन नहीं चलेगा, तो कौन सी आफत आ जाएगी। हिन्दू दुकानदार भी तो मुस्लिम त्योहारों में अपनी दुकानें बंद कर लेते हैं। वैसे भी निवेदन के साथ आदेश का पालन करवाया जा रहा है।”

इन्द्रपाल सिंह लिखते हैं, “कपटी जी क्या नवरात्रि में मीट दुकान बंद रखने से तुम्हारी खुद की दुकान तो बंद नहीं हो रही। सच बताना कहीं, भेड़िए की खाल में घुसे लक्कड़बग्घे तो नहीं हो।”

वहीं, फैजल लिखता है, “क्या इसके बारे में कुछ नियम है? बंद दुकानें मतलब उन लोगों की आजीविका का नुकसान होगा। साथ ही रमजान चल रहा है, ऐसे में रोजेदार हर दो दिन में नॉनवेज को अपनी डाइट में शामिल करना चाहते हैं।”

शम्स उर रहमान अलवी लिखता है, “भले ही इस पर कार्रवाई न हो, लेकिन विरोध करना जरूरी है। इसके खिलाफ एक औपचारिक शिकायत दर्ज करें।”

NCP नेता मोहम्मद फैजल को वापस मिली सांसदी, ‘हत्या के प्रयास’ में सजा पाकर हुए थे ‘अयोग्य’ करार: लक्षद्वीप में उपचुनाव रद्द

लक्षद्वीप से राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) के सांसद मोहम्मद फैजल की अयोग्यता रद्द कर दिया गया है। लोकसभा सचिवालय ने अपने पुराने आदेश को रद्द कर फैजल की लोकसभा सदस्यता बहाल कर दी है। फैजल की हाल में लोकसभा सदस्यता रद्द कर दी गई थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहली ही लोकसभा सचिवालय ने आदेश जारी कर दिया।

बता दें कि एनसीपी सांसद को केरल हाईकोर्ट द्वारा 10 साल की सजा सुनाए जाने के बाद लोकसभा सचिवालय ने उन्हें सांसदी के अयोग्य ठहरा दिया था। इसके बाद चुनाव आयोग ने इस सीट पर उपचुनाव कराने की भी घोषणा कर दी। आज बुधवार (29 मार्च 2023) को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी थी।

हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले ही लोकसभा सचिवालय ने अपने पुराने फैसले को रद्द कर फैजल की सांसदी को बहाल कर दिया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को भी निस्तारित कर दिया। इसके साथ ही चुनाव आयोग ने भी उस सीट पर उपचुनाव के अपने फैसले को रद्द कर दिया।

लोकसभा सचिवालय के इस फैसले पर मोहम्मद फैजल ने कहा कि सदस्यता को बहाल करने में देरी सराहनीय नहीं है। उन्होंने कहा, “मेरी सजा घोषित होने के अगले ही दिन लोकसभा सचिवालय ने जल्दबाजी में मुझे अयोग्य घोषित करने का निर्णय लिया। कम-से-कम मेरी रद्द सदस्यता को बहाल करने में भी इतनी तेजी दिखानी चाहिए थी।

दरअसल, हत्या के प्रयास के एक मामले में फैजल को लक्षद्वीप की एक अदालत ने मोहम्मद फैजल सहित चार लोगों को 10 साल की जेल की सजा सुनाई थी। यह मामला साल 2009 में एक व्यक्ति के हत्या के प्रयास से जुड़ा है। लक्षद्वीप के सेशन कोर्ट द्वारा 11 जनवरी 2023 को सजा सुनाई।

इसके बाद लोकसभा सचिवालय ने 13 जनवरी 2023 को एक अधिसूचना जारी करके दो बार के सांसद मोहम्मद फैजल को अयोग्य ठहरा दिया। फैजल की सांसदी जाने के बाद चुनाव आयोग ने उस सीट पर लोकसभा उपचुनाव की घोषणा कर दी।

मोहम्मद फैजल ने इस निर्णय के खिलाफ केरल हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। 25 जनवरी 2023 को केरल हाईकोर्ट की एकल बेंच ने मोहम्मद फैजल की सजा को निलंबित कर दिया। न्यायाधीश बेचू कुरियन जोसेफ ने कहा कि सांसद के पास के पास कोई घातक हथियार नहीं मिला था और नहा ही पीड़ित को गंभीर चोट लगी थी।

केरल हाईकोर्ट के फैसले को लक्षद्वीप सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सु्प्रीम कोर्ट ने इस मामले को स्वीकार करते हुए 29 मार्च 2023 को सुनवाई की तारीख तय की। हालाँकि, सुनवाई शुरू होने से पहले ने लोकसभा सचिवालय ने अपना फैसला पलट दिया और चुनाव आयोग ने भी उपचुनाव को रद्द कर दिया।

बता दें कि ऐसे ही एक मामले में कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी सदस्यता रद्द कर दी गई है। उन्हें मिले आवास को भी खाली करने का नोटिस दिया गया है। इसको लेकर देश भर में बवाल जारी है। इस बीच मोहम्मद फैजल का मामला सामने आने के बाद कॉन्ग्रेस के नेताओं में एक उम्मीद जगी है।