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भारत आने से पहले से ही बीमार थी ‘साशा’, कुनो नेशनल पार्क में हुई मादा चीते की मौत: किडनी संक्रमण से थी पीड़ित

मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया से लाई गई मादा चीता ‘साशा’ की मौत हो गई। वह बीते कई महीनों से किडनी में हुए इंफेक्शन से जूझ रही थी। भारत आने से पहले ही उसके किडनी में संक्रमण हो गया था। साशा की मौत सोमवार (27 मार्च 2023) को हुई।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नामीबिया से भारत लाई गई मादा चीता साशा को कूनो नेशनल पार्क के बड़े बाड़े में बने कंपार्टमेंट नंबर 5 में रखा गया था। इस कंपार्टमेंट में वुसक साथ दो अन्य मादा चीता सवाना और सियाया भी रह रही थीं। कूनो नेशनल पार्क में चीतों की मॉनिटरिंग करने वाली टीम ने 22 जनवरी 2023 को पाया कि साशा बीमार है। इसके बाद उसे एक अन्य बाड़े में शिफ्ट किया गया। बीमारी की वजह से वह खाना भी नहीं खा रही थी।

इसके बाद उसका ब्लड टेस्ट किया गया। इस टेस्ट में सामने आया कि उसके किडनी में इंफेक्शन है। कूनो नेशनल पार्क में मौजूद तीन डॉक्टर और भोपाल से पहुँची डॉक्टरों ने भी उसकी जाँच की। इस जाँच में भी किडनी में इंफेक्शन की पुष्टि हुई। इसके बाद भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून के वरिष्ठ वैज्ञानिकों और कूनो नेशनल पार्क ने नामीबिया के चीता कंजर्वेशन फाउंडेशन से साशा के इलाज को लेकर जानकारी माँगी।

इस रिपोर्ट में 15 अगस्त 2022 को नामीबिया में लिए गए अंतिम ब्लड टेस्ट में साशा के खून में क्रियेटिनिन का स्तर 400 से ज्यादा पाया गया। इससे इस बात की भी पुष्टि हुई कि नामीबिया से भारत आने से पहले ही मादा चीता साशा को किडनी में इंफेक्शन था। हालाँकि इसके बाद डॉक्टरों की टीम लगातार उसके इलाज में जुटी रही। इस दौरान अफ्रीका के विशेषज्ञ डॉक्टरों से भी भारतीय डॉक्टर लगातार संपर्क में थे। लेकिन संक्रमण बढ़ जाने के कारण उसके स्वास्थ्य में सुधार नहीं हो रहा था। लगातार बिगड़ते स्वास्थ्य के बाद सोमवार (27 मार्च 2023) को उसकी मौत हो गई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर भारत आए थे 8 चीते…

बता दें कि 17 सितंबर 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर 8 चीतों को नामीबिया से भारत लाया गया था। पीएम मोदी ने ही इन चीतों को कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा था। नामीबिया से लाए गए 8 चीतों में से 5 मादा और 3 नर थे। इसमें से एक मादा चीता साशा की मौत हो गई। शेष 7 चीते स्वस्थ हैं और वह खुलकर शिकार भी कर रहे हैं।

मोहम्मद इश्ताक ने परिजनों के साथ मिल कर युवती को पिला दिया एसिड, सेना में है क्लर्क: कर रहा था यौन शोषण

बिहार के खगड़िया में प्रेमी और उसके परिजनों द्वारा एक युवती को जबरन एसिड पिलाने का मामला सामने आया है। इस घटना में युवती की हालत गंभीर बनी हुई है। इस मामले में लड़की के पिता ने गाँव के ही छह लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराई है। इसमें युवती के प्रेमी मोहम्मद इश्ताक का नाम भी शामिल है। इश्ताक सेना में क्लर्क बताया जा रहा है।

यह घटना 20 मार्च 2023 की है। खगड़िया जिले के परबत्ता प्रखंड के बबराहा गाँव में प्रेमी इश्ताक और उसके परिजनों द्वारा लड़की को एसिड पिलाने के बाद इलाज के लिए उसे निजी अस्पताल भर्ती कराया गया। वहाँ से युवती को भागलपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में रेफर कर दिया गया। 

यह बात सामने आई है कि मोहम्मद इश्ताक और पीड़िता के बीच पिछले 10 सालों से ही प्रेम प्रसंग चल रहा था। इसको लेकर दोनों पक्षों के बीच मुकदमेबाजी और पंचायत भी हुई थी। फिर भी दोनों के बीच प्रेम प्रसंग जारी रहा। इस बीच साल 2020 में इश्ताक का सेना में नौकरी लग गई।

इश्ताक ट्रेनिंग के लिए दिल्ली चला गया, लेकिन प्रेम प्रसंग जारी रहा। दोनों के बीच तय हुआ कि ट्रेनिंग खत्म होने के बाद निकाह कर लेंगे। इस बीच परिजनों ने इश्ताक का कहीं और रिश्ता तय कर दिया। इश्ताक पर इसके लिए गाँव आया हुआ था। इस बीच प्रेमिका इश्ताक के घर पहुँचकर विरोध करने लगी। इस पर इश्ताक और परिजनों ने युवती को जबरन एसिड पिला दिया।

युवती के पिता का कहना है कि इश्ताक नौकरी लगने के बाद शादी का बहाना बनाकर बेटी का शारीरिक शोषण कर रहा था। जब नौकरी लगी तो उसने बहाना बनाना शुरू कर दिया। इस बीच युवकों की ओर से इश्ताक और युवती के बीच वीडियो कॉल का स्क्रीन रिकार्डिंग वीडियो उपलब्ध कराया गया है।

’24 घंटे में अमृतपाल के साथियों को रिहा करो’: सरकार को SGPC की चेतावनी, गुरुद्वारा कमिटी ने कहा- मीडिया पर करेंगे मुकदमा, सिखों को बदनाम किया

अलगाववादी खालिस्तान समर्थक और ‘वारिस पंजाब दे’ का मुखिया अमृतपाल को सुरक्षा एजेंसियाँ सरगर्मी से खोज रही हैं। इस बीच हाइवे के किनारे एनर्जी ड्रिंक पीते हुए उसकी तस्वीर सामने आई है। इस बीच सिखों के संगठन शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी (SGPC) ने गिरफ्तार/हिरासत में लिए गए अमृतपाल के 200 से अधिक लोगों को 24 घंटे में छोड़ने की चेतावनी दी है।

SGPC के प्रमुख हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि अगर अमृतपाल के साथियों को 24 घंटे में रिहा किया तो संगठन गाँव-गाँव जाकर लोगों को जागरूक करेगी। धामी ने उन लोगों को उनसे संपर्क करने के लिए कहा है, जिनके परिजनों को इस मामले में पंजाब पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इसके बाद कोर्ट में याचिका दाखिल की जाएगी।

सिखों के प्रमुख संगठन के मुखिया धामी ने कहा कि अमृतपाल के खिलाफ हुए एक्शन में जो मीडिया कवरेज किया गया, उसमें सिखों को बदनाम करने की साजिश की गई है। उन्होंने नेशनल मीडिया के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की भी बात कही है।

पंजाब बठिंडा रेंज के आईजी सुखचैन सिंह ने कुछ दिन पहले जानकारी दी थी कि पंजाब पुलिस ने 207 लोगों को पकड़ा है, जिनमें 177 लोगों को हिरासत में रखा गया है। वहीं, 30 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया गया है। इसके पहले IG ने कहा था कि जिन्हें हिरासत में रखा गया है, उन्हें चेतावनी देकर छोड़ा जा सकता है। इसके बाद 24 मार्च 2023 को 44 लोगों को रिहा कर दिया गया था।

इधर, अमृतपाल की एक नई तस्वीर सामने आई है। इस तस्वीर में वह अपने साथी पपलप्रीत के साथ हाइवे के किनारे बैठकर एनर्जी ड्रिंक रहा है। ये तस्वीर कहाँ की है, इसका पता नहीं लग पाया है। हालाँकि, दोनों को सुरक्षा एजेंसियाँ हर जगह तलाश रही हैं।

इसके पहले भी अमृतपाल की कई तस्वीरें सामने आई थीं। इन तस्वीरों में वह जुगाड़ पर बैठा दिख रहा था तो एक में वह छाता लिए हुए कहीं जा रहा है। इसके अलावा, एक अन्य तस्वीर में वह बैग लिए हुए और अपना मुँह ढँक कर तेजी से आगे जाते हुए दिख रहा था।

बीच चौराहे पर युवती ने मचाया उत्पात: राह चलते लोगों से स्कूटी-कार छीन कर चढ़ने लगी, पुलिस बैरिकेड उठा कर फेंक डाला

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक लड़की ने बीच चौराहे जमकर हँगामा किया। उसकी हरकतों की वजह से सड़क पर जाम जैसी स्थिति बन गई। लड़की ने राह चलने वालों का वाहन छीनकर चलाने की कोशिश की। यही नहीं, एक कार के ऊपर बैठकर उसने काफी तक बवाल काटा। इसके बाद पुलिस को मामले की सूचना दी गई।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला ग्वालियर के फूल बाग चौराहे का है। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि लड़की ने चौराहे पर करीब 1 घण्टे तक हँगामा किया। इसका एक वीडियो भी सोशल में वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में लड़की को बीच सड़क उत्पाद मचाते हुए देखा जा सकता है। उसकी इस हरकत से कई लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

वीडियो में लड़की पहले एक कार को रोकने की कोशिश करती है। लेकिन, ड्राइवर कार नहीं रोकता। इसके बाद वह स्कूटी सवार एक व्यक्ति को रोकती है और उसकी स्कूटी छीनकर चलाने लगती है। उसका हँगामा यहीं नहीं थमा। वीडियो में वह पुलिस बैरिकेड को फेंकते हुए देखी जा सकती है।

इसके बाद वह चौराहे से गुजर रही एक कार के बोनट में चढ़ कर हँगामा करने लगी। कभी वह बोनट पर बैठती तो कभी खड़े होकर चिल्लाती। इस दौरान वह रास्ते से गुजरने वाले लोगों पर ऊलजलूल टिप्पणी कर रही थी। इसके बाद वह कार में ही लेट गई। बाद में वहाँ मौजूद महिलाओं और आशा कार्यकर्ताओं ने उसे जबरदस्ती कार से उतारा। हालाँकि, इसके बाद भी उसका हँगामा नहीं रुका।

लड़की के हँगामे से परेशान होकर लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। महिला बल के साथ मौके पर पहुँची पुलिस उसे थाने ले गई। लड़की को कार से नीचे उतारने वाली महिलाओं का कहना है कि लड़की मानसिक रूप से परेशान लग रही थी। शायद उसे किसी ने प्यार में धोखा दिया है।

जिसे सुनाई गई थी सज़ा-ए-मौत, उसे सुप्रीम कोर्ट ने 28 साल बाद रिहा किया: 2 बच्चों और गर्भवती महिला की हत्या का मामला, कहा – घटना के वक्त नाबालिग था आरोपित

सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सजा पाए एक व्यक्ति को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है। मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पाया कि आरोपित नारायण चेतनराम चौधरी वारदात के समय महज 12 वर्ष का था। उम्र के आधार पर उसे ऐसी सजा नहीं दी जा सकती। वह बीते 28 साल से जेल में बंद है। सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सोमवार (27 मार्च, 2023) को सुनाया।

दरअसल, महाराष्ट्र के पुणे में साल 1995 में राठी परिवार के दो बच्चों और एक गर्भवती महिला की हत्या कर दी गई थी। चेतनराम को इस मामले में निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक ने फाँसी की सजा सुनाई थी। हत्या के इस मामले में नारायण चेतनराम चौधरी और जितेंद्र नैनसिंह गहलोत ने साल 2016 में राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दाखिल की थी।

जितेंद्र नैनसिंह गहलोत की दया याचिका को देखते हुए राष्ट्रपति ने उसकी सजा-ए-मौत को उम्रकैद में बदल दिया था। लेकिन, इस बीच नारायण चेतनराम चौधरी ने अपनी दया याचिका वापस लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की। इस याचिका में उसने दावा किया कि हत्या के समय वह नाबालिग था। वहीं, सजा सुनाए जाने के दौरान कोर्ट में उसकी उम्र 20-22 साल के बीच में दर्ज थी।

खुद को नाबालिग साबित करने के लिए नारायण चेतनराम चौधरी ने राजस्थान में हुई उसकी पढ़ाई का रिकॉर्ड कोर्ट में पेश किया। उसने कोर्ट में बताया कि राजस्थान के जिस स्कूल में उसने पढ़ाई की थी, उसका रिकॉर्ड उसे साल 2015 में मिला। कोर्ट में पेश किए गए इस रिकॉर्ड के अनुसार, राठी परिवार की हत्या के समय वह 12 साल का था। इससे पहले वह खुद को नाबालिग इसलिए साबित नहीं कर पाया क्योंकि उसके ऊपर हत्या का आरोप महाराष्ट्र में लगा था। नारायण ने महाराष्ट्र में डेढ़ साल ही पढ़ाई की थी।

जनवरी 2019 में, सुप्रीम कोर्ट ने पुणे के प्रधान जिला और सत्र न्यायाधीश को नारायण की उम्र और उसके द्वारा पेश किए दस्तावेजों की जाँच करने का आदेश दिया। इसके बाद न्यायधीश ने जाँच कर अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी। इसके बाद कोर्ट ने मई 2019 में ही उसे नाबालिग मान लिया। लेकिन रिहाई का आदेश देने में सुप्रीम कोर्ट को 4 साल का लंबा वक्त लग गया। मामले की सुनवाई सुप्रीम के जस्टिस अनिरुद्ध बोस, जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस हृषिकेश रॉय की बेंच ने की।

लड्डू गोपाल को लेकर अदालत पहुँचा हिन्दू पक्ष, ईदगाह मस्जिद में पहले सर्वे वाली माँग खारिज: कमिश्नर की नियुक्ति से भी कोर्ट का इनकार

श्रीकृष्ण जन्मस्थान ईदगाह मस्जिद मामले में उत्तर प्रदेश की मथुरा कोर्ट ने मस्जिद सर्वे की अर्जी पर पहले फैसला करने की याचिका खारिज कर दी है। वहीं, हिंदू महासभा लड्डू गोपाल जी (भगवान श्रीकृष्ण) को लेकर अदालत पहुँच गई। उधर, अदालत में सुन्नी वक्फ बोर्ड के हाजिर न होने पर उसे आखिरी मौका दिया गया है।

महासभा के कोषाध्यक्ष दिनेश शर्मा ने अदालत से कहा है कि औरंगज़ेब ने मंदिर को तोड़कर शाही ईदगाह मस्जिद बनाई थी। इसलिए यह मस्जिद श्रीकृष्ण जन्मस्थान की भूमि पर अतिक्रमण है। महासभा ने 13.37 एकड़ पर मौजूद शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने की माँग की है। सोमवार (27 मार्च 2023) को हुई सुनवाई में अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 28 अप्रैल की तारीख दी।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि केस में शाही ईदगाह मस्जिद में अमीन सर्वे के लिए प्रार्थना पत्र पहले ही दिया जा चुका है। उधर, बार-बार सूचना देने के बावजूद यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड पर अदालत में हाजिर नहीं हो रहा है। अदालत ने वक्फ बोर्ड को हाजिर होने के लिए ये आखिरी मौका दिया है।

उधर अदालत ने हिंदू याचिकाकर्ताओं के उस रिवीजन एप्लिकेशन को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने पहले शाही ईदगाह मस्जिद का सर्वेक्षण करने के लिए अपनी याचिका के सुनवाई पूरा करने की माँग की थी। दरअसल, हिंदू याचिकाकर्ताओं ने निचली अदालत के आदेश के खिलाफ रिवीजन एप्लीकेशन दायर किया था।

निचली अदालत ने 21 जुलाई 2022 को यह फैसला दिया था। निचली अदालत ने हिंदू याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर मुकदमे की अनुरक्षणीयता (Maintainability) को चुनौती देते हुए शाही ईदगाह मस्जिद प्रबंधन समिति के वकील द्वारा दायर आवेदन पर रोजाना सुनवाई का आदेश दिया था।

अदालत ने शनिवार (25 मार्च 2023) को रिवीजन एप्लिकेशन पर सुनवाई करते हुए कहा कि निचली अदालत का आदेश सबूतों के आधार पर पारित किया गया था। इसलिए इसमें हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नहीं है। इसके बाद आवेदन को खारिज कर दिया गया।

उधर, एडीजे 6th की कोर्ट में इस मामले में कोर्ट कमिश्नर को नियुक्त करने से इनकार कर दिया। हालाँकि, शाही ईदगाह परिसर के सर्वे मामले की सुनवाई लोअर कोर्ट में चलती रहेगी। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह ने कोर्ट कमिश्नर की नियुक्ति की माँग करते हुए याचिका दायर की थी। याचिका में उन्होंने कहा था कि विरोधी पक्ष मंदिर के सबूत नष्ट कर रहा है।

महेंद्र प्रताप सिंह ने शाही ईदगाह का सर्वे कराए जाने को लेकर सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की कोर्ट में वाद दाखिल किया था। अदालत ने इस याचिका को खारिज कर दिया। इसके बाद उन्होंने जिला जज की कोर्ट में रिवीजन एप्लिकेशन दाखिल किया। जिला जज ने इस केस को एडीजे 6th की कोर्ट में भेज दिया था। अब एडीजे 6th ने इसे खारिज कर दिया।

‘हिंदी थोपने’ का लगाते रहे हैं आरोप, अब पत्नी-बच्चों सहित मुंबई शिफ्ट हुए सूर्या: ₹70 करोड़ में खरीदा घर, लोगों ने पूछा – अब बच्चों को कैसे पढ़ाएँगे तमिल?

तमिलनाडु में ‘सिंघम (2010)’ और ‘जय भीम (2021)’ जैसी फिल्मों के लिए पहचाने जाने वाले अभिनेता सूर्या अपनी पत्नी अभिनेत्री ज्योतिका और बच्चों सहित मुंबई में सेटल हो गए हैं। बताया जा रहा है कि दंपति ने महाराष्ट्र की राजधानी में 70 करोड़ रुपए का घर भी खरीदा है। 47 वर्षीय सूर्या और 44 वर्षीय ज्योतिका ने अपने बच्चों का दाखिला भी मुंबई के एक बड़े स्कूल में कराया है। ज्योतिका एक हिंदी वेब सीरीज में भी काम कर रही हैं।

अब तक सूर्या अपने पिता शिवकुमार और माँ लक्ष्मी के साथ चेन्नई में रहते आ रहे थे। शिवकुमार तमिल फिल्म इंडस्ट्री के पुराने अभिनेता रहे हैं, जिन्होंने 70, 80 और 90 के दशक में काफी फिल्मों में काम किया है। उन्होंने 1965 में फिल्मों में डेब्यू किया था। फिल्मों के बाद उन्होंने टीवी जगत में भी काफी काम किया है। सूर्या के भाई कार्ति भी लोकप्रिय अभिनेता हैं, जिन्हें ‘कैथी (2019)’ और ‘PS 1 (2022)’ जैसी बड़ी फिल्मों में काम किया है।

सूर्या का चेन्नई से मुंबई शिफ्ट होना इसीलिए भी हैरान करने वाला है, क्योंकि वो अब तक हिंदी भाषा का विरोध करते आ रहे थे। वो ‘National Eligibility-cum-Entrance Test (NEET)’ की परीक्षा और मोदी सरकार द्वारा जारी नई शिक्षा नीति की भी जम कर आलोचना कर चुके हैं। अब जब वो भाजपा शासित महाराष्ट्र में शिफ्ट हुए हैं, लोग उनके दोहरे रवैये पर सवाल उठा रहे हैं। ‘रौकेट्री’ में सूर्या ने ‘जय हिन्द’ भी नहीं बोला था, जबकि हिंदी डब में उसी दृश्य में शाहरुख़ खान को ऐसा कहते सुना गया था।

सूर्या उस प्रोपेगंडा को आगे बढ़ाने वालों में रहे हैं, जिसके तहत कहा जाता है कि मोदी सरकार जानबूझ कर दक्षिण भारतीय राज्यों पर हिंदी थोप रही है। उनकी बेटी दीया और बेटे देव की शिक्षा-दीक्षा अब मुंबई में ही होगी। लोगों में ये जानने की भी उत्सुकता है कि सूर्या-ज्योतिका के बच्चे जिस स्कूल में पढ़ेंगे, वहाँ तमिल पढ़ाई जाती है क्या? सूर्या ने कहा था कि वो अपने बच्चों को भी किसी तीसरे भाषा की शिक्षा नहीं दे सकते। उन्होंने NEET को भी पक्षपाती बताया था।

अतीक को लेकर प्रयागराज पहुँची यूपी पुलिस, भाई अशरफ सहित कोर्ट में होगी पेशी: 17 साल पुराने मामले में सुनाया जाएगा फैसला

माफिया और गैंगस्टर अतीक अहमद को अहमदाबाद की साबरमती जेल से प्रयागराज लाया गया है। साथ ही अतीक के भाई अशरफ को भी बरेली से प्रयागराज लाया गया है। दोनों भाइयों को यहाँ नैनी सेंट्रल जेल में रखा गया है। पुलिस अतीक और अशरफ को मंगलवार (28 मार्च, 2023) को कोर्ट में पेश करेगी।

क्यों लाया गया प्रयागराज

अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ को 17 साल पुराने एक मामले के चलते प्रयागराज लाया गया है। यह मामला पूर्व बसपा विधायक राजू पाल की हत्या के मुख्य गवाह उमेश पाल के अपहरण का है। दरअसल, 25 जनवरी, 2005 को राजू पाल की हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड में उमेश पाल मुख्य गवाह थे। अतीक और अशरफ को उमेश पाल की गवाही से सजा होने का डर था। इसलिए दोनों भाइयों ने 28 फरवरी, 2006 को उमेश पाल का अपहरण कर लिया।

अपहरण के बाद उमेश पाल को जान से मारपीट और जान से मारने की धमकी देने समेत कई तरीकों से जमकर डराया गया। इसके बाद उन्हें अतीक अहमद के पक्ष में गवाही देने के लिए कहा गया। अतीक और अशरफ चाहते थे कि उमेश पाल कोर्ट में यह कह दें कि हत्या के समय अतीक और अशरफ वहाँ मौजूद नहीं थे और वह किसी तरह की गवाही नहीं देना चाहते।

अपहरण के इस मामले में उमेश पाल अतीक अहमद और अशरफ अहमद के खिलाफ FIR दर्ज कराना चाहते थे। लेकिन, राज्य में समाजवादी पार्टी सत्ता में थी। अतीक अहमद इसी पार्टी से सांसद था। ऐसे में दबाव के चलते FIR दर्ज नहीं हुई। राज्य की सत्ता में बदलाव हुआ और इसी के साथ अतीक अहमद और उसके भाई समेत अन्य लोगों के खिलाफ उमेश पाल के अपहरण मामले में मुकदमा दर्ज हुआ।

उमेश पाल अपहरण मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी है। एमपी-एमएलए कोर्ट के न्यायाधीश डॉ दिनेश चंद्र शुक्ल ने 17 मार्च, 2023 को फैसला सुरक्षित रख दिया था। इसके बाद अब मंगलवार (28 मार्च 2023) को कोर्ट में आरोपितों के खिलाफ फैसला सुनाया जाना है। रिपोर्ट के अनुसार अतीक और अशरफ के खिलाफ जिन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है, उस हिसाब से इन्हें आजीवन कारावास या सजा-ए-मौत भी मिल सकती है।

उमेश पाल की हत्या

राजू पाल हत्याकांड में मुख्य गवाह उमेश पाल 24 फरवरी 2023 को गवाही के बाद वह घर लौट रहे थे। इसी दौरान उनकी हत्या कर दी गई थी। गोली और बम से किए गए हमले में उमेश पाल के गनर संदीप निषाद और राघवेंद्र सिंह की भी मौत हो गई थी। अब तक इस मामले में पुलिस कई आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है। वहीं, कुछ आरोपित पुलिस मुठभेड़ में भी ढेर हुए हैं। हालाँकि मुख्य शूटर और अतीक अहमद की पत्नी तथा बेटे अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं।

पुलिस ने इन पर इनाम घोषित किया है। चूँकि अतीक और अशरफ उमेश पाल हत्याकांड में भी आरोपित हैं। ऐसे में पुलिस इस मामले में भी दोनों भाइयों से पूछताछ करेगी।

राहुल गाँधी को अब सरकारी बँगला भी छोड़ना होगा: सांसदी खत्म होने के बाद लोकसभा की हाउसिंग कमिटी ने दिया नोटिस, 19 साल से था ठिकाना

कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी को हाल ही में लोकसभा ने सांसदी से अयोग्य घोषित कर दिया। इसके बाद अब उन्हें नई दिल्ली में स्थित सरकारी बँगला भी खाली करने का नोटिस दिया है। तुगलक लेन स्थित इस बँगले में वो पिछले 12 वर्षों से रह रहे हैं। अब चूँकि वो सांसद नहीं रहे, इसीलिए उन्हें ये बँगला खाली करना पड़ेगा। राहुल गाँधी ने 2019 लोकसभा चुनाव में केरल के वायनाड से जीत दर्ज की थी, लेकिन अब वो सांसद नहीं रहे।

‘मोदी’ सरनेम पर टिप्पणी किए जाने के बाद सूरत की अदालत ने उन्हें 2 वर्ष की सज़ा सुनाई। इसके बाद लोकसभा सचिवालय ने स्वतः ही उनकी संसद सदस्यता रद्द कर दी। 2004 में राहुल गाँधी को 12, तुगलक लेन बँगला दिया गया था। उसी साल उन्होंने अमेठी से पहली बार लोकसभा चुनाव भी जीता था। ये नोटिस तब जारी हुआ है, जब कॉन्ग्रेस के सभी सांसद विरोध जताने के लिए काले कपड़ों में संसद भवन पहुँचे हैं।

लोकसभा की ‘हाउसिंग कमिटी’ ने राहुल गाँधी को सरकारी बँगला छोड़ने का नोटिस जारी किया है। सामान्यतः ऐसे मामलों में एक तय समयसीमा दी जाती है, राहुल गाँधी के मामले में उन्हें 30 दिनों (अदालत के फैसले से), अर्थात एक महीने का समय दिया गया है। हालाँकि, सूरत की अदालत ने भी उन्हें 30 दिनों की मोहलत दी थी। ऐसे में अब देखना है कि वो क्या फैसला लेते हैं। राहुल गाँधी को अदालत से राहत मिलती है या नहीं, इस पर भी सभी की नजरें हैं।

राहुल गाँधी को 22 अप्रैल, 2023 तक ये सरकारी बँगला खाली करना पड़ेगा। 23 मार्च को उन्हें कोर्ट ने सज़ा सुनाई थी। हालाँकि, अभी फ़िलहाल राहुल गाँधी की टीम का कहना है कि उन्हें नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है। राहुल गाँधी लगातार गौतम अडानी पर हमला करने में व्यस्त हैं। साथ ही उन्होंने कई बार वीर सावरकर का भी अपमान किया। इस कारण उद्धव ठाकरे के गुट वाली शिवसेना ने विपक्ष की बैठक का बहिष्कार किया है।

वाइब्रेटर कितनी बार और किस स्पीड से किया इस्तेमाल…सबका डेटा ‘सेक्स टॉयज’ बनाने वाली कंपनी के पास: पोल खुलने पर लगा ₹24 करोड़ का जुर्माना

सेक्स टॉयज बनाने वाली कंपनी पर 2.4 मिलियन पाउंड यानी करीब 24 करोड़ रुपए का भारी भरकम जुर्माना लगाया गया है। कंपनी पर ग्राहकों को जानकारी दिए बिना उनकी सेक्सुअल एक्टिविटी पर नजर रखने का आरोप लगाया गया है।

Lad Bible की रिपोर्ट के अनुसार, 2017 में एक मुकदमे के बाद कनाडाई ब्रांड वी-वाइब के निर्माता ने इसके इस्तेमाल पर नजर रखने के लिए अपने ‘स्मार्ट वाइब्रेटर’ का उपयोग करने के बाद प्रति ग्राहक पर £6,120 (6 लाख से अधिक रुपए) तक खर्च करने पर हामी भरी थी। सेक्स टॉय वी-वाइब 4 की कीमत £90 (9 हजार रुपए से अधिक) है। इसे दुनिया में कहीं से भी ऐप के जरिए कंट्रोल किया जा सकता है। ऐप में इसके इस्तेमाल के बारे में भी बताया गया है।

हालाँकि, लोगों को बाद में पता चला कि यह ऐप उनकी सेक्सुअल एक्टिविटी (Sexual Activity) पर नजर रख रहा था। उनका डेटा इकट्ठा कर रहा था और स्टैंडर्ड इनोवेशन को वापस भेज रहा था, जिसमें यह भी शामिल था कि यूजर्स ने कितनी बार इसका उपयोग किया और किस तीव्रता के साथ किया। कोर्ट के दस्तावेजों के अनुसार, लगभग 3,00,000 लोगों ने Bluetooth Enabled WeVibe प्रोडक्ट खरीदे। इनमें से लगभग एक-तिहाई लोगों ने इस ऐप का इस्तेमाल किया।

स्टैंडर्ड इनोवेशन ने इस बात पर जोर दिया कि इस जानकारी का उपयोग केवल टेस्ट (Diagnostic Purposes) के लिए किया गया था। एक महिला जो वाइब्रेटर को अपने से दूर रह रहे प्रेमी के साथ उपयोग करने के लिए लाई थी, उसने 2017 में डेली मिरर को बताया कि उसके लिए यह बात काफी चौंकाने और डराने वाली थी।

उसने कहा, “मुझे लगा कि मैं अपने पार्टनर के साथ जो भी शेयर कर रही हूँ, वह हम दोनों के बीच पर्सनल है। लेकिन मैंने एक सेकंड के लिए यह बिल्कुल भी नहीं सोचा कि यह कंपनी को हमारी पर्सनल डिटेल दे रहा है। उन्होंने यह बहुत गलत किया। बिना हमें बताए उन्होंने हमारी सेक्सुअल एक्टिविटी पर नजर रखी। यह काफी भयावह है। हास्यास्पद है कि उन्होंने सोच भी कैसे लिया कि वे ऐसा कर सकते हैं।”