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जहाँ की SP हैं लिपि सिंह, वहाँ कोर्ट परिसर में सरेआम हत्या: बिहार पुलिस के सामने ही अपराधियों ने बरसाई गोलियाँ

बिहार के सहरसा में पेशी के लिए कोर्ट लाए गए कैदी की गोली मार कर हत्या कर दी गई। कोर्ट परिसर में दिन-दहाड़े हुए हत्याकांड से इलाके में हड़कंप मच गया। मृतक की पहचान प्रभाकर कुमार पंडित के तौर पर हुई है। उसे हत्या के एक मामले में कोर्ट में पेश किया जा रहा था। हमलावरों में से एक को पकड़ लिया गया है। जबकि अन्य भीड़ का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, तीन से चार की संख्या में आए हमलावरों ने घात लगाकर प्रभाकर पर गोलियाँ बरसा दीं। अंधाधुंध फायरिंग से जख्मी प्रभाकर वहीं गिर गया। जख्मी कैदी को आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। कोर्ट परिसर में बेखौफ अपराधियों द्वारा हत्याकांड को अंजाम दिए जाने से बिहार की कानून व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

घटना उस स्थान पर अंजाम दी गई जहाँ बिहार पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह की बेटी और चर्चित आईपीएस लिपि सिंह एसपी हैं। बिहार में सुपरकॉप के नाम से मशहूर आईपीएस शिवदीप लांडे भी इसी क्षेत्र (कोसी) के डीआईजी हैं। घटना की जानकारी मिलते ही लिपि सिंह मौके पर पहुँची। लिपि सिंह ने मीडिया को जानकारी दी कि हत्याकांड के आरोपितों में से एक आलोक कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसके पास से देसी कट्टा, एक पिस्टल और कई जिंदा कारतूस बरामद हुए हैं।

पुलिस ने जानकारी दी है कि मृतक प्रभाकर ने लगभग साल भर पहले उदय यदुवंशी नामक शख्स की हत्या की थी। इसी हत्या के मामले में उसे कोर्ट लाया गया था। उदय के भाई विवेक यदुवंशी ने अपने साथियों के साथ घटना को अंजाम दिया है। घटनास्थल की जाँच की जा रही है। सीसीटीवी फुटेज को खंगाला जा रहा है। अपराधियों की धर-पकड़ के लिए टीम का गठन किया गया है। बहुत जल्दी अपराधियों को पकड़ लिया जाएगा।

मेनस्ट्रीम मीडिया की ‘मूत्रकारिता’ के बाद The Wire की ‘खच्चरकारिता’: आरफा ने माफिया की महिमा गाते हुए खेला OBC कार्ड

भाजपा ने कभी नहीं कहा कि नीरव मोदी और ललित मोदी OBC समाज से आते हैं। भाजपा ने राहुल गाँधी पर मुकदमा नहीं ठोका। भाजपा ने सिर्फ इतना कहा कि राहुल गाँधी ने पूरे मोदी समाज का नाम लेकर गलत किया, ये OBC समुदाय का अपमान है। चूँकि न्यायपालिका उन्हें इसी मामले में सज़ा सुना चुकी है, इसी मामले को लेकर उनकी संसद सदस्यता जा चुकी है और 19 सालों से वो लुटियंस दिल्ली में जिस सरकारी बँगले पर जमे बैठे हैं, उन्हें छोड़ना पड़ेगा – ऐसे में इसमें भाजपा कहाँ से आ गई?

एक तो हो गया एक अलग मामला। अब दूसरे मामले पर आते हैं। फूलपुर से एक बार सांसद और इलाहाबद पश्चिम से लगातार 5 बार विधायक रहा अतीक अहमद एक दुर्दांत अपराधी है। उस पर 100 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज रहे हैं। हाल ही में उसने अपने परिवार के साथ मिल कर उमेश पाल को मरवाया। वो राजू पाल हत्याकांड में गवाह थे, जिन्हें अतीक अहमद ने ही मरवाया था। वो जेल से ही अपराध जारी रखे था, जिस कारण उसे गुजरात के साबरमती जेल भेज दिया गया।

मीडिया ने ‘गाड़ी पलटेगी’ का हौव्वा बनाया और एनकाउंटर की चर्चाएँ चलने लगीं, क्योंकि उमेश पाल के अपहरण के 17 साल पुराने मामले में सज़ा सुनाए जाने को लेकर अतीक अहमद को यूपी पुलिस प्रयागराज लेकर आई। रास्ते भर मीडिया उसके पीछे लगी रही। पेशाब करते हुए भी उसका फोटो-वीडियो बना लिया। आमजनों ने इसे ‘मूत्रकारिता’ नाम दिया। अतीक अहमद 44 वर्षों के आपराधिक इतिहास में पहली बार दोषी करार हुआ है।

ऐसे में ‘The Wire’ मूत्रकारिता से भी आगे बढ़ कर ‘खच्चरकारिता’ लेकर आ गया। इस प्रोपेगंडा पोर्टल के बड़े चेहरों में से एक आरफा खानुम शेरवानी ने राहुल गाँधी के मामले को अतीक अहमद के मामले से जोड़ दिया। दोनों में दूर-दूर तक कोई सम्बन्ध नहीं है, लेकिन ये तो एजेंडाधारी मीडिया संस्थान हैं। इनका काम ही यही है। राहुल गाँधी की बदजुबानी पर उन्हें सज़ा और अपहरण-हत्या-रंगदारी-कब्जे के मामलों में संलिप्त रहे अतीक अहमद के मामले को ‘The Wire’ ने जोड़ दिया।

अब लॉजिक देखिए (अगर ऐसा कुछ है तो)। आरफा खानुम शेरवानी कहने लगीं कि अतीक अहमद के परिवार का पुश्तैनी धंधा खच्चरों के पालन का रहा है। बता दें कि नर गदहे और घोड़ी से जो जानवर पैदा होता है, उसे ही खच्चर नाम दिया गया है। ये काफी मेहनती होता है। बेचारे खच्चर भी आज सोच रहे होंगे कि भारत में कैसे वामपंथी मीडिया संस्थान हैं जो अपने प्रोपेगंडा के लिए उनके नाम का भी गलत इस्तेमाल करने से गुरेज नहीं कर रहे हैं।

अब आरफा खानुम शेरवानी का कहना है कि अगर ललित मोदी और नीरव मोदी को कुछ कहने से मोदी समाज की भावनाएँ आहत होती हैं तो फिर अतीक अहमद को सज़ा दिए जाने से भी गद्दी समाज की भावनाएँ आहत होनी चाहिए। बता दें कि गद्दी समाज मुस्लिमों की एक जाति है। इसके अंदर भी कई बिरादर होते हैं। सामान्यतः, निकाह बिरादर के अंदर ही किया जाता है। सुन्नी समाज के ये मुस्लिम जानवरों के पालन का काम करते आ रहे हैं।

यहाँ दो बातें हैं। पहली तो ये कि नीरव मोदी और ललित मोदी की आलोचना से OBS समाज आहत है, ऐसे किस भाजपा नेता ने कहा? ‘The Wire’ की आरफा खानुम शेरवानी ने इस बारे में कुछ नहीं बताया। दूसरी बात, अतीक अहमद को अब न्यायपालिका ने दोषी ठहरा दिया है और प्रयागराज के लोग उसके खौफ के साक्षी हैं, ऐसे में एक अपराधी को सज़ा देना कैसे उसकी पूरी जाति पर प्रहार हो गया? ये ‘The Wire’ की ‘खच्चरकारिता’ नहीं तो और क्या है।

जिस तरह से दुर्दांत अपराधी अतीक अहमद का बचाव अरफ़ा खानुम शेरवानी ने वीडियो बना कर किया है, वैसे तो शायद उसके परिजन और वकील तक न कर पाएँ। अतीक अहमद का बेटा फरार है। सीसीटीवी में उसे गोली चलाते हुए साफ़ देखा गया है। उसकी बीवी उमेश पाल की हत्याकांड में शामिल है, वो भी फरार है। अतीक अहमद पर एक-दो या दर्जन नहीं बल्कि 100 मामले दर्ज हैं, ऐसे में इस व्यक्ति का कोई कैसे बचाव कर सकता है और क्यों?

‘The Wire’ की ‘खच्चरकारिता’ का आलम ये है कि उसे अतीक अहमद की चिंता उसके परिजनों से ज्यादा है। वो अतीक अहमद की पैरवी उसके वकीलों से भी ज्यादा मजबूती से कर रहा है। आरफा खानुम शेरवानी को इस बात से भी चिंता है कि मीडिया में अतीक अहमद को अपराधी क्यों बताया जा रहा है। क्या वो कहना चाहती हैं कि अतीक अहमद ही गद्दी समाज का इकलौता प्रतिनिधि है? वो जो कर रहा है, गद्दी समाज के सभी लोग वैसे ही अपराध करते हैं? ये सच तो नहीं ही हो सकता।

आरफा खानुम शेरवानी हों या ‘The Wire’, अपराधी या दंगाई अगर मुस्लिम हो तो उसे बचाने का लंबा इतिहास इनलोगों का रहा है, भले ही इसके लिए क्यों न पीड़ितों को ही गुंडा साबित करना पड़े। दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों से लेकर अतीक अहमद प्रकरण तक इसके कई उदाहरण देखने को मिले हैं। खच्चर और घोड़ों को बीच में लाकर अतीक अहमद का बचाव किया जा रहा है। ऐसा व्यक्ति, जो देवरिया के जेल में खुलेआम व्यापारियों को टाँग कर मँगवाता था और उन्हें पीटता था।

जहाँ तक बात नीरव मोदी और ललित मोदी की है, क्या आरफा खानुम शेरवानी ‘The Wire’ के प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर के ये नहीं बताएँगी कि किस पार्टी के शासनकाल में इन दोनों के सबसे ज्यादा मजे थे? ललित मोदी 2008 में IPL का अध्यक्ष था, BCCI में सबसे ज्यादा हैसियत रखता था, किसकी सरकार थी केंद्र में तब? 2010 के आसपास के समय में जब नीरव मोदी अपनी अमीरी के शिखर पर था, जब केंद्र में कौन शासन कर रहा था?

ये सब दर्शकों को नहीं बताया जाएगा, क्योंकि इससे ‘खच्चरकारिता’ पर असर पड़ेगा। 2024 का लोकसभा चुनाव सामने है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने विपक्ष का कोई नेता टिकता हुआ नहीं दिख रहा है, ऐसे में मीडिया का वामपंथी वर्ग अब खच्चरों पर उतर आया है। राहुल गाँधी नहीं, खच्चर ही सही – कहीं तो उन्हें उम्मीद दिख रही है। वैसे भी, आतंकियों को ‘शिक्षक का बेटा’ बता कर उनका महिमामंडन करने वाले अतीक अहमद, जिसे सपा का खुला संरक्षण प्राप्त था, उसके लिए पैरवी करें तो इसमें आश्चर्य ही क्या!

‘पहले Kiss दो, फिर सैलरी दूँगा’: शिक्षिका के साथ छेड़खानी कर रहा था स्कूल संचालक अफरोज अख्तर, पूछता था – हमसे मोहब्बत कब करोगी?

बिहार के बेतिया में बंगाल की युवती ने स्कूल संचालक अफरोज अख्तर पर छेड़खानी और प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। युवती शिकारपुर थाना इलाके में स्थित सेंट्रल स्कूल में प्रबंधन (Management) का काम देखती है। युवती ने बेतिया एसपी से शिकायत में आरोप लगाया है कि अफरोज उसके साथ गलत हरकत करने की कोशिश करता रहता है।

सेंट्रल स्कूल में नौकरी कर रही लड़की दार्जिलिंग की रहने वाली है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार स्कूल के संचालक अफरोज ने उसे 25 हजार रुपए प्रतिमाह तनख्वाह और 10 हजार खाने-पीने के लिए अतिरिक्त देने का वादा कर बेतिया बुलाया था। 26 वर्षीय लड़की सात महीने से स्कूल में काम कर रही थी। आरोप है कि अब तक उसे सिर्फ 65 हजार रुपए मिले हैं।

युवती जब भी अपनी सैलरी की माँग करती तो वह छेड़खानी करने लगता। आरोप है कि स्कूल में ही अफरोज उसका हाथ पकड़ लेता है। विरोध करने पर धमकी देता है। अफरोज अक्सर उससे कहता है कि हमेशा स्कूल पर ध्यान दोगी…. हमसे मोहब्बत कब करोगी? सैलरी माँगने पर अफरोज कहता है, “पहले किस दो फिर सैलरी दूँगा।” संचालक ने यहाँ तक कहा कि तुम्हें दो काम के लिए बुलाया है लेकिन कर एक ही रही हो।

पीड़िता की शिकायत पर बेतिया एसपी उपेंद्र नाथ वर्मा ने कहा है कि मामले की जाँच शिकारपुर थाना पुलिस कर रही है। सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। उधर स्कूल संचालक ने प्रबंधन का काम देख रही युवती के आरोपों को बेबुनियाद करार दिया है। अफरोज ने कहा है कि लड़की ने 15 दिन पहले स्कूल छोड़ दिया था। उनकी सैलरी की रकम दी जा चुकी है। 11 हजार रुपए देने बाकी हैं जो एक हफ्ते के भीतर दे दिए जाएँगे।

अभिनेत्री आकांक्षा दुबे की मौत के बाद फरार हुआ गायक समर सिंह: अखिलेश यादव के लिए माँग चुका है वोट, सपा के लिए गाए गाने

भोजपुरी अभिनेत्री और मॉडल आकांक्षा दुबे (Akanksha Dubey) की मौत के मामले में गायक समर सिंह और उसके भाई के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया है। आकांक्षा दुबे की माँ मधु दुबे ने दोनों भाईयों पर बेटी को टॉर्चर करने, काम के बदले पैसे न देने समेत कई आरोप लगाए हैं। यूपी पुलिस की टीम दोनों की तलाश कर रही है। फरार समर सिंह के बारे में पता चला है कि वह समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव का करीबी है।

मधु दुबे ने मीडिया के सामने आकांक्षा के सुसाइड की बात को नकार दिया। उन्होंने कहा कि आकांक्षा ने काफी तकलीफें झेलकर अपना करियर बनाया था। वह आत्महत्या नहीं कर सकती। उन्होंने समर सिंह और उसके भाई पर हत्या की धमकी देने का आरोप लगाया था। मधु दुबे के मुताबिक 21 मार्च को समर सिंह ने उनकी बेटी को हत्या की धमकी दी थी और 25 मार्च को वह वाराणशी के सारनाथ के होटल में मृत मिली।

आकांक्षा दुबे की माँ ने सारनाथ थाने में सिंगर समर सिंह, उसके भाई संजय सिंह और दो अन्य के खिलाफ केस दर्ज कराया है। मामला दर्ज होने के बाद से ही पुलिस उनकी तलाश कर रही है। इस बीच समर सिंह का सपा कनेक्शन सामने आया है।

समर सिंह का सपा कनेक्शन

आजमगढ़ के मेहनगर इलाके के रहने वाले समर सिंह भोजपुरी गाने गाते हैं। समर भोजपुरी फिल्मों में भी अभिनय कर चुके हैं। उन्हें सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का करीबी माना जाता है। उन्होंने सपा के लिए कई गाने गाए हैं। 2022 में यूपी विधानसभा चुनावों के दौरान भी समर सिंह ने सपा के लिए गाने गाए। रिपोर्टों में तो यहाँ तक कहा गया कि कई स्थानों पर उन्होंने सपा उम्मीदवारों के लिए वोट भी माँगे। उनके द्वारा गाया गया गाना ‘सपा आई रे…’ वायरल हुआ था। जिसे समाजवादी पार्टी के कार्यक्रमों में खूब बजाया गया और आज भी बजाया जाता है।

समर सिंह ने हाल ही में होली के अवसर पर गाने गाए थे। गाने के पोस्टर में अखिलेश यादव के साथ उनकी तस्वीर लगाई गई थी। सपा कार्यकर्ता इन गीतों को समाजवादी होली गीत कहकर प्रचारित कर रहे थे।

भोजपुरी गायक समर सिंह का ट्विटर हैंडल

इतना ही नहीं समर सिंह के ट्विटर अकाउंट पर भी कवर फोटो में अखिलेश के साथ उनकी तस्वीर लगी हुई है। हालाँकि, बायो में उन्होंने सिर्फ भोजपुरी अभिनेता और गायक ही लिखा हुआ है।

राहुल गाँधी के समर्थन में कॉन्ग्रेस का ‘सत्याग्रह’, जनता तो दूर कॉन्ग्रेसी भी नहीं पहुँचे: भड़के प्रदेश अध्यक्ष ने की कार्रवाई की बात, राजस्थान में इसी साल चुनाव

राहुल गाँधी की लोकसभा सदस्यता समाप्त होने के बाद कॉन्ग्रेस द्वारा आयोजित सत्याग्रह में कई कॉन्ग्रेसी रुचि नहीं ले रहे हैं। इन सभाओं में भीड़ न जुटने पर राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के हाईकमान वाले नेता नाराज हैं। पीसीसी अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को निष्क्रिय बता कर 86 नेताओं के नाम भेजे जाने के दावे किए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि इन नेताओं पर कॉन्ग्रेस आला कमान जल्द कार्रवाई कर सकता है। इस कार्रवाई में पार्टी में महत्वहीन पद देना और आने वाले चुनावों में बड़ी जिम्मेदारी से अलग करना भी शामिल हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से खबर दी जा रही है कि पीसीसी अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने धरने-प्रदर्शन से दूर नेताओं को कार्रवाई का इशारा भी कर दिया है। उन्होंने कहा कि पार्टी लाइन पर न चलने वाले नेताओं की कॉन्ग्रेस में कोई जरूरत नहीं है। जयपुर के एक सम्मेलन में खुद वह पहले पहुँच गए थे, लेकिन अन्य कार्यकर्ता बाद में आए। इस दौरान उन्होंने यह भी पाया कि पार्टी मुख्यालय की तरफ से भेजे गए पोस्टरों को अनदेखा कर के जयपुर जिला टीम ने अपना खुद का पोस्टर बना डाला था। इस बात से डोटासरा का पारा सातवें आसमान पर पहुँच गया।

बताया जा रहा है कि गोविन्द सिंह डोटसरा ने गुस्से में यह तक कह डाला कि पर्दे के पीछे जो भी लोग खेल कर रहे हैं उन पर पार्टी की नजर है। धरने-प्रदर्शन से दूर लोगों गोविन्द सिंह ने 6 महीने का अल्टीमेटम दिया। उन्होंने कहा कि इसके बाद पार्टी लाईन से हट कर चल रहे लोग कॉन्ग्रेसी नहीं रह जाएँगे। राहुल गाँधी की लोकसभा सदस्य्ता खत्म होने का जिक्र करते हुए गोविन्द सिंह ने कहा कि अब भी जिसका खून नहीं खौल रहा है उसके कॉन्ग्रेसी होने पर प्रश्नचिन्ह है। अंत में उन्होंने राहुल के साथ नहीं तो कॉन्ग्रेसी नहीं भी कहा।

राहुल गाँधी की शान में कसीदे गढ़ते हुए गोविन्द सिंह ने कहा, “लानत है ऐसी राजनीति के ऊपर। ऐसी पार्टी जिसने हमें मान सम्मान दिया। ऐसा नेता जिसने इस देश को अपने और अपने परिवार के खून से सींचा है। अगर उसके ऊपर इस तरह की बात आती है तो मान लो कि देश के हर नागरिक को तैयार रहना चाहिए। जो AC के अंदर बैठे TV पर कौन आया-कौन गया देख रहे हैं ऐसे कॉन्ग्रेसियो की हमको जरूरत नहीं है।”

कनाडा में फिर तोड़ी गई महात्मा गाँधी की मूर्ति: 5 दिन के अंदर दूसरी घटना, भारत ने विरोध जताया

कनाडा में एक बार फिर महात्मा गाँधी की मूर्ति तोड़ी गई है। भारत ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। साथ ही कनाडाई अधिकारियों से मामले की जाँच कर आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई करने की माँग की है। बीते एक सप्ताह में कनाडा में दूसरी बार महात्मा गाँधी की मूर्ति तोड़ी गई।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत में स्थित साइमन फ्रेजर विश्वविद्यालय परिसर में महात्मा गाँधी मूर्ति लगी थी। उपद्रवियों ने इस मूर्ति पर हमला करते हुए तोड़ दिया। आशंका जताई जा रही है कि खालिस्तान समर्थकों ने ही इस घटना को अंजाम दिया होगा।

भारत के महावाणिज्य दूतावास ने ट्वीट कर इस घटना की निंदा की है। इस ट्वीट में कहा गया है, “शांति के अग्रदूत महात्मा गाँधी की मूर्ति को क्षति पहुँचाने के जघन्य अपराध की कड़ी निंदा करते हैं। कनाडाई अधिकारियों से मामले की तत्काल जाँच करने और आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई करने का अनुरोध करते हैं।”

बता दें कि इससे पहले इससे पहले गुरुवार (23 मार्च 2022) को कनाडा के ओंटारियो प्रांत के हेमिल्टन शहर में स्थित सिटी हॉल में बनी महात्मा गाँधी की मूर्ति को भी नुकसान पहुँचाया गया था। आरोपितों ने मूर्ति में स्प्रे पेंट भी कर दिया था। इस घटना को लेकर कहा गया था कि खालिस्तान समर्थकों ने मूर्ति को क्षतिग्रस्त किया है।

जुलाई 2022 में कनाडा के रिचमंड हिल स्थित एक विष्णु मंदिर के बाहर लगाई गई महात्मा गाँधी की मूर्ति को क्षतिग्रस्त किया गया था। बता दें कि दुनियाभर के कई देशों में स्थित खालिस्तानी समर्थक भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। इसमें हिंदुओं के पवित्र मंदिरों को निशाना बनाना भी शामिल है। इसी साल 13 फरवरी को मिसिसॉगा ने स्थित एक राममंदिर को खालिस्तानी समर्थकों ने नुकसान पहुँचाने की कोशिश की थी। खालिस्तानियों ने मंदिर की दीवारों में भारत विरोधी नारे भी लिखे थे।

पराँठा बनाने पर हुआ झगड़ा, लाश पंखे से लटकी मिली: आकांक्षा दुबे के बाद उड़िया अभिनेत्री की मौत, पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

भोजपुरी एक्ट्रेस आकांक्षा दुबे (Akanksha Dubey) की संदिग्ध मौत के गम से उनके फैंस अभी तक उबर नहीं पाए हैं। इसी बीच एक और अभिनेत्री की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की खबर सामने आई है। उड़िया एक्ट्रेस-सिंगर रुचिस्मिता गुरु (Ruchismita Guru) अपने रिश्तेदार के घर पर मृत पाई गईं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रुचिस्मिता का शव रविवार (26 मार्च 2023) की रात उनके रिश्तेदार के घर में सीलिंग फैन से लटका मिला। वह ओडिशा के बलांगीर शहर के तलपाली में अपने परिवार के साथ रहती थीं। हाल ही में एक शॉट वेकेशन के लिए एक्ट्रेस सुड़ापाड़ा में अपने रिश्तेदार के घर पर रहने के लिए आई थी।

सूचना मिलने पर बलांगीर पुलिस ने मौके पर पहुँचकर शव को कब्जे में ले लिया। एक्ट्रेस के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल भेज दिया गया है। पुलिस पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। इसके बाद स्थानीय पुलिस ने परिवार के सदस्यों को एक्ट्रेस की मौत की सूचना दी।

रुचिस्मिता गुरु ने कई एल्बम में काम किया था। वह एक्टिंग के साथ-साथ सिंगिंग की दुनिया में भी सक्रिय थीं। इसके अलावा उन्होंने कई स्टेज शो में भी परफॉर्म किया था। रुचिस्मिता की माँ का कहना है कि बेटी से उनकी आलू का पराँठा बनाने को लेकर कहासुनी हुई थी।

रुचिस्मिता की माँ ने बताया, “मैंने उसे रात आठ बजे आलू का पराँठा बनाने को कहा था, लेकिन उसने कहा कि वह रात को 10 बजे बनाएगी। इसी बात को लेकर हमारे बीच झगड़ा हुआ था।” कहा जा रहा है कि एक्ट्रेस ने इससे पहले भी कई मौकों पर आत्महत्या करने का प्रयास किया था।

वहीं, स्थानीय लोगों ने दावा किया है कि सिंगर के एक युवक से कथित प्रेम संबंध को लेकर पारिवारिक विवाद चल रहा था। हालाँकि, अभी तक इस बारे में कोई पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल, पुलिस एक्ट्रेस की मौत की वजह पता लगाने के लिए जाँच में जुटी है।

बता दें कि 25 मार्च 2023 को भोजपुरी एक्ट्रेस आकांक्षा दुबे आकांक्षा दुबे के सुसाइड करने की खबर सामने आई थी। आकांक्षा दुबे के मेकअप आर्टिस्ट राहुल और हेयर आर्टिस्ट रेखा मौर्या का कहना है कि उन्हें किसी चीज का तनाव नहीं था और वो न ही परेशान थीं। एक्ट्रेस की माँ मधु दुबे ने इस मामले में सिंगर समर सिंह सहित चार के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। मधु दुबे ने आरोप लगाया है कि समर सिंह करीब तीन साल से उनकी बेटी को टाॅर्चर कर रहा था। फिल्म में काम करने के पैसे नहीं देता था। जब आकांक्षा उससे काम के पैसे माँगती तो वह उससे मारपीट करता था। दूसरों की फिल्म और गाने में काम करने से भी उसे रोकता था।

AAP सांसद ने राघव चड्ढा और परिणीति चोपड़ा के रिलेशनशिप पर लगाई मुहर, दी बधाई: लोगों ने पूछा – अब शादी का फैसला कन्फर्म?

बॉलीवुड अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा और ‘आम आदमी पार्टी (AAP)’ से सांसद राघव चड्ढा के रिलेशन को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार चर्चाएँ हो रहीं हैं। इस बीच AAP के राज्यसभा सांसद संजीव अरोड़ा ने परिणीति और राघव चड्ढा को उनके मिलन के लिए बधाई दी है। इसे इन दोनों के रिलेशनशिप में मुहर की तरह देखा जा रहा है।

दरअसल, परिणीति चोपड़ा और राघव चड्ढा को मुंबई के एक रेस्टॉरेंट में डिनर करते देखा गया था। इसके बाद से उनकी रिलेशनशिप की बातें हो रहीं हैं। वहीं अब सांसद संजीव अरोड़ा ने परिणीति चोपड़ा और राघव चड्ढा की फोटो शेयर की है। इस फोटो के साथ उन्होंने लिखा है, “मैं राघव चड्ढा और परिणीति चोपड़ा को हार्दिक बधाई देता हूँ। आशा करता हूँ कि दोनों का साथ प्यार आनंद और कंपेनियनशिप से भरपूर रहे। मेरी शुभकामनाएँ।”

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजीव अरोड़ा के इस ट्वीट पर नेटिजेन्स अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं। एक यूजर ने पूछा “किस बात की बधाई दे रहे हो भाई?”

एक अन्य यूजर ने कहा, “कैसे लिबिर-लिबिर चटाई हो रही है। सीधा प्रमोटेड ट्वीट।”

कुमार विक्रांत सिंह नामक यूजर ने कहा, “संसद में दूल्हे राजा काले लिबास में राजनैतिक विरोध जताते हुए। राघव चड्ढा यूँ ही नहीं कहते कि, मुझसे यहाँ राजनीति की बात कीजिए। परिणीति की नहीं। बधाई हो।”

सौरभ नामक यूजर ने लिखा, “इसके बस का और कुछ तो था नहीं। राजनीति में आया है तो कुछ तो फायदा उठाए।”

अंजू चोपड़ा नामक यूजर ने लिखा, “परिणीति चोपड़ा प्लीज कह दो ये सब झूठ है।”

एक यूजर ने मीम शेयर करते हुए लिखा, “अब केजरीवाल चड्ढा को भी जेल में डालेगा।”

नितिन नामक यूजर ने लिखा, “अपने ही साथी के बारे में प्रमोटेड ट्वीट कौन करता है गॉसिप के लिए।” इसके साथ ही उन्होंने अरविंद केजरीवाल की एक फ़ोटो शेयर की। इसमें लिखा था, “उन्होंने लगभग हाँ कर दिया।”

लंच और डिनर करते स्पॉट हुए थे राघव चड्ढा और परिणीति चोपड़ा

बता दें कि दोनों को मुंबई के एक रेस्टोरेंट में साथ डिनर के लिए जाता देखा गया था। दोनों ने इस दौरान सफेद रंग की शर्ट पहनी हुई थी। इसके अलावा एक और वीडियो सामने आई है जिसमें कहा जा रहा है कि वो दोनों बांद्रा में भी लंच के लिए साथ गए।

एक वीडियो में देखा जा सकता है कि रात के समय राघव चड्ढा और परिणीति गाड़ी से निकलकर डिनर के लिए जा रहे हैं। पैपराजी लगातार उन्हें आवाज देते हैं। हालाँकि वो सुनने की बजाय उन्हें अनदेखा करके आगे बढ़ जाते हैं। वहीं परिणीति थोड़ी देर रुकती हैं, पोज देती हैं और उसके बाद राघव भी फोटो खिंचाते हैं।

इस बारे में राघव चड्ढा से सवाल पूछा गया तो उन्होंने शर्माते हुए कहा, “आप मुझसे राजनीति पर सवाल करिए, परिणीति पर नहीं।”

जब उनसे सवाल किया गया कि जो परिणीति के बारे में सवाल कर रहे हैं उनको आप क्या जवाब देंगे। इस पर राघव ने मुस्कुराते हुए कहा कि आपको जवाब देंगे। उनसे आगे यह पूछा गया कि आपकी मुस्कुराहट से और कयास लगेंगे, तो राघव ने थैंक्यू कहकर बात खत्म कर दी और कार में बैठकर चले गए।

भाई से गले मिल कर रोया, उम्रकैद की सज़ा सुनते ही बेहोश हो गया अतीक अहमद: वकीलों ने लगाए ‘फाँसी दो, फाँसी दो’ के नारे

प्रयागराज जिले की MP-MLA कोर्ट ने उमेश पाल अपहरण के 28 फरवरी 2006 के केस में माफिया अतीक अहमद को 2 अन्य साथियों सहित उम्रकैद की सजा सुनाई है। हालाँकि इसी केस में आरोपित अतीक के छोटे भाई अशरफ को बरी कर दिया गया है। इस फैसले के बाद उमेश पाल और अतीक अहमद दोनों पक्षों ने हाईकोर्ट में अपील करने का ऐलान किया। जहाँ उमेश पाल का परिवार अशरफ की रिहाई से नाखुश है तो वहीं अतीक के वकील ने इस सजा को ऊपरी अदालत में चुनौती देने की बात कही है।

कहा जा रहा है कि कोर्ट में अतीक अहमद की सजा मुकर्रर होते ही वो कोर्ट रूम में बेहोश हो गया और भाई से गले मिल रोया भी। जबकि प्रयागराज कोर्ट में उसके ही आगे वकीलों ने ‘फाँसी दो-फाँसी दो’ की नारेबाजी की।

दोनों पक्ष जाएँगे हाईकोर्ट

अतीक अहमद को मिली सजा पर उमेश पाल की माँ ने उसे फाँसी के लायक बताया। उन्होंने कहा कि कई साल तक फैसले का इंतजार करना पड़ा। उमेश पाल की माँ ने शांति देवी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर पूरा विश्वास जताया है। वहीं उमेश पाल की पत्नी जया देवी ने अशरफ को बरी किए जाने के फैसले को समाज के लिए नुकसानदेह बताया है। उन्होंने अपने वकील से बात कर के इस फैसले को हाईकोर्ट में चैलेन्ज देने की जानकारी दी। उमेश पाल के वकील ने भी हाईकोर्ट में सजा को चुनौती देने का एलान किया है। वकील ने कहा कि घटना में अशरफ की पिस्टल शामिल थी ऐसे में अशरफ को बरी करने को हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी।

अतीक के वकील भी जाएँगे हाईकोर्ट

अतीक अहमद को मिली उम्रकैद की सजा पर उनके वकील दयाशंकर मिश्रा की भी प्रतिक्रिया सामने आई। दयाशंकर ने अतीक अहमद को मिली उम्रकैद की सजा को हाईकोर्ट में चुनौती देने की बात कही। वकील दयाशंकर ने अपील को अधिकार बताया है। गौरतलब है कि 100 केसों में नामजद अतीक को पहली बार कोई सजा सुनाई गई है।

उमेश पाल के 8 गवाह अतीक के 51 गवाहों पर भारी पड़े

उमेश पाल के वकील ने बताया कि उनकी तरफ से 8 गवाहों ने कोर्ट में गवाही दी थी। वहीं अतीक अहमद ने अपने पक्ष में 51 गवाह पेश किए। हालाँकि अतीक के गवाहों में अधिकतर लोग आपराधिक प्रवित्ति के बताए जा रहे हैं। अंत में कोर्ट ने उमेश पाल के गवाहों को विश्वसनीय माना।

मिल रही जानकारी के मुताबिक फ़िलहाल अभी अतीक अहमद को प्रयागराज की नैनी जेल में ही रखा जाएगा। अब पुलिस उमेश पाल हत्याकांड में दर्ज हुए नए केस में उस से जल्द ही पूछताछ कर सकती है। इस बाबत पुलिस टीम अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ का रिमांड भी लेने की तैयारी कर रही है।

उद्धव ठाकरे, बेटे आदित्य और MP संजय राउत को दिल्ली हाईकोर्ट का समन, मानहानि के मुकदमे में फँसे: ‘सामना’ में गलत जानकारी देने का आरोप

दिल्ली हाईकोर्ट ने मानहानि के एक मामले में महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, उनके बेटे आदित्य ठाकरे और राज्यसभा एमपी संजय राउत को समन जारी किया है। शिवसेना नेता राहुल रमेश शेवाले ने तीनों पर दीवानी मानहानि (Civil defamation) का मामला दर्ज कराया था। इसे लेकर कोर्ट ने तीनों नेताओं को समन जारी किया है। मामले की सुनवाई 17 अप्रैल, 2023 को होगी।

राहुल शेवाले ने शिवसेना (उद्धव ठाकरे) के मुखपत्र सामना में लिखे एक लेख को लेकर आपत्ति जताई थी। पिछले दिनों लिखे गए एक लेख में राहुल शेवाले का जिक्र किया गया था। जिसके बाद शिवसेना नेता ने छवि खराब करने का आरोप लगाते हुए उद्धव ठाकरे, आदित्य ठाकरे और संजय राउत के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज करा दिया। मामले में जस्टिस जालान ने उद्धव, आदित्य और संजय राउत के साथ-साथ गूगल और ट्विटर को भी 30 दिनों के भीतर जवब दाखिल करने को कहा है।

शेवाले ने इस कंटेंट को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटवाने की भी माँग की है।

‘सामना’ में क्या छपा था?

आरोपों के मुताबिक कुछ महीने पहले ‘सामना’ में “राहुल शेवाले का कराची में होटल, रियल एस्टेट का कारोबार!” हेडिंग के साथ एक लेख छपा था। इसमें दावा किया गया था कि शेवाले पाकिस्तान के कराची स्थित एक होटल के मालिक हैं। शेवाले ने इस खबर को तथ्यहीन बताते हुए अदालत का रुख किया था। उनका दावा है कि लेख में प्रकाशित जानकारी गलत है।

बता दें कि मानहानि दो तरह की होती है। एक सिविल (दीवानी) जो राहुल शेवाले ने किया है और दूसरा आपराधिक मानहानि (Criminal Defamation)। सिविल मानहानि के मामले में दोषी व्यक्ति को आर्थिक दंड (मुआवजा) देना पड़ता है। जबकि आपराधिक मानहानि के लिए कारावास की सजा का भी प्रावधान है। आपराधिक मामले में सांसद/विधायक को अयोग्य करार दिए जाने का खतरा होता है। राहुल गाँधी आपराधिक मानहानि के मामले में दोषी पाए गए हैं।