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जहाँगीरपुरी में नहीं निकलेगी ‘रामनवमी’ पर शोभा यात्रा’: दिल्ली पुलिस ने अनुमति देने से इनकार किया, 2022 में कट्टरपंथियों ने किया था श्रद्धालुओं पर हमला

रामनवमी का त्योहार इस साल गुरुवार (30 मार्च 2023) को मनाया जाएगा। देश के कई हिस्सों में इस अवसर पर रैली निकाली जाती है। हालाँकि, दिल्ली के जहाँगीरपुरी में रामनवमी के अवसर पर श्री राम भगवान प्रतिमा यात्रा को मंजूरी नहीं दी गई है। इसी इलाके में 16 अप्रैल 2022 को हनुमान जयंती के अवसर पर निकाली गई रैली को कट्टरपंथियों ने निशाना बनाया था। रैली पर पत्थरबाजी की गई थी जिसमें 8 पुलिसकर्मी समेत एक नागरिक घायल हो गया था।

दिल्ली पुलिस ने पिछले साल की घटना को ध्यान में रखते हुए जहाँगीरपुरी में रामनवमी शोभा यात्रा निकालने की इजाजत नहीं दी। दिल्ली पुलिस की तरफ से बयान जारी कर कहा गया है कि दंगा प्रभावित जहाँगीरपुरी इलाके में भगवान श्रीराम की प्रतिमा यात्रा यानी रामनवमी रैली निकालने की इजाजत नहीं होगी। पुलिस की तरफ से कहा गया है कि पिछले साल यहाँ भारी लॉ एंड ऑर्डर की समस्या उत्पन्न हो गई थी। इसलिए इस बार शोभायात्रा की इजाजत नहीं दी गई है।

दिल्ली पुलिस ने कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए यात्रा की इजाजत नहीं दी। आदेश में कहा गया है कि पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार इस विशेष कार्यक्रम के लिए समूह को पहले कोई अनुमति नहीं दी गई। अर्थात यात्रा पारंपरिक नहीं है। केवल जहाँगीरपुरी इलाके के लिए इस यात्रा की अनुमति से इनकार किया गया है। यात्रा की इजाजत न मिलने से सोशल मीडिया पर लोगों ने नाराजगी जताई है।

इसी इलाके में स्थित नेताजी सुभाष प्लेस के एक पार्क में नमाज पढ़ने के लिए पहली बार मुस्लिमों के एक ग्रुप ने दिल्ली पुलिस से इजाजत माँगी थी। दिल्ली पुलिस ने इसे भी अस्वीकार कर लिया। पुलिस ने नमाजियों को पहले की तरह मस्जिद या अपने घरों में नमाज पढ़ने की सलाह दी। पुलिस ने कहा कि यहाँ पहले कभी खुले में नमाज नहीं पढ़ा गया इसलिए इसकी इजाजत नहीं दी जा सकती।

बता दें साल 2022 की हनुमान जयंती के अवसर पर निकाली गई शोभा यात्रा के दौरान मुस्लिमों के एक समूह ने यात्रा पर हमला कर दिया था। यात्रा की सुरक्षा में तैनात 8 पुलिसकर्मी इस हमले में घायल हो गए थे। पत्थरबाजी के दौरान तीन राउंड फायरिंग की भी जानकारी सामने आई थी। फायरिंग में एक पुलिसकर्मी जख्मी हो गए थे।

वंदे भारत एक्सप्रेस पर पत्थर फेंकने वालों को हो सकती है 5 साल जेल: रेलवे ने दी चेतावनी, 39 पत्थरबाज गिरफ्तार

भारत की सेमी-हाई-स्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस के शुरू होने के बाद से यात्रियों के लिए सफर बेहद आसान और आरामदायक हो गया है। लेकिन जैसे-जैसे केंद्र सरकार अधिक मार्गों पर वंदे भारत ट्रेन शुरू कर रही है, पथराव की घटनाएँ भी लगातार बढ़ रही हैं। इसको लेकर दक्षिण मध्य रेलवे ने मंगलवार (28 मार्च 2023) को चेतावनी दी है कि अब वंदे भारत ट्रेनों पर पथराव करने वाले लोगों को पाँच साल तक की सजा हो सकती है।

दक्षिण मध्य रेलवे (एससीआर) ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि ट्रेनों पर पथराव एक अपराध है। अपराधियों के खिलाफ रेलवे अधिनियम की धारा 153 के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसमें 5 साल तक की सजा का प्रावधान है। दरअसल, रेलवे ने यह चेतावनी तेलंगाना में हाल ही में विभिन्न जगहों पर वंदे भारत ट्रेनों पर पथराव की कई घटनाएँ सामने आने के बाद जारी की है। इन जगहों में काजीपेट, खम्माम, काजीपेट-भोंगीर और एलुरु-राजमुंदरी शामिल हैं। इस साल जनवरी से ऐसी नौ घटनाएँ सामने आ चुकी हैं।

प्रेस रिलीज में दक्षिण मध्य रेलवे ने आगे कहा कि हाल के दिनों में वंदे भारत ट्रेनों को असामाजिक तत्वों ने निशाना बनाया। रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने वंदे भारत एक्सप्रेस पर पथराव करने के आरोप में कई मामले दर्ज होने के बाद अब तक 39 अपराधियों को गिरफ्तार किया है। पथराव की कुछ घटनाओं में 6 से 17 साल के बच्चे भी शामिल थे। एससीआर (SCR) ने कहा कि इसलिए, यह समाज के प्रत्येक माता-पिता, शिक्षक और बुजुर्गों की जिम्मेदारी है कि वे अपने बच्चों को ऐसी गतिविधियों से दूर रखने के लिए उन्हें अच्छी शिक्षा दें और उनका मार्गदर्शन करें। इसके साथ ही रेलवे अधिकारियों और आरपीएफ ने जनता से रेलवे संपत्ति को नुकसान नहीं पहुँचाने और पथराव जैसी असामाजिक गतिविधियों में शामिल नहीं होने की अपील की।

गौरतलब है कि इस साल 3 जनवरी की शाम वंदे भारत एक्सप्रेस न्यू जलपाईगुड़ी से हावड़ा लौट रही थी। इसी दौरान, मालदा जिले के कुमारगंज के पास अज्ञात लोगों ने ट्रेन पर पत्थर फेंके। पथराव के कारण ट्रेन के कोच सी-13 का दरवाजे को नुकसान हुआ साथ ही विंडो में दरार आ गई।

इसके कुछ दिन बाद ही आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में ‘वंदे भारत’ ट्रेन पर पत्थरबाजी की घटना सामने आई थी। फिर मैसूर और चेन्नई के बीच चलने वाली ट्रेन नंबर 20608 पर कृष्णराजपुरम-बेंगलुरु छावनी रेलवे स्टेशनों के बीच पत्थरबाजी हुई। इस पत्थरबाजी से ट्रेन की दो खिड़कियाँ क्षतिग्रस्त हो गई थीं। इसको लेकर दक्षिण पश्चिम रेलवे, बेंगलुरु डिवीजन ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा था कि रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने दक्षिण पश्चिम रेलवे के बेंगलुरु डिवीजन में जनवरी 2023 में पथराव के 21 मामले और फरवरी 2023 में 13 मामले दर्ज किए हैं।

शौहर निकम्मा, जेठ अय्याश… बिस्तर पर पटक कर कपड़े फाड़े: महिला ने AMU प्रोफेसर के खिलाफ दर्ज कराया तीन तलाक केस, दहेज माँगने का आरोप

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले (Aligarh, Uttar Pradesh) में ट्रिपल तलाक का नया मामला सामने आया है। पीड़िता ने 27 मार्च 2023 को अपने शौहर खालिद के खिलाफ फोन पर तीन तलाक देने और दहेज में स्कॉर्पियो कार और 20 लाख रुपए माँगने का आरोप लगाते हुए FIR कराई। शिकायत में AMU (अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी) के प्रोफेसर भी को भी नामजद किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला अलीगढ़ के थाना क्षेत्र क्वार्सी का है। यहाँ की रहने वाली पीड़िता का निकाह 27 जनवरी 2013 को कानपुर के किदवई नगर क्षेत्र के जुही लाल कालोनी निवासी खालिद हनीफ से हुआ था। AMU में कंप्यूटर विभाग का प्रोफेसर सैफुल इस्लाम इस निकाह में गवाह था।

शिकायत के मुताबिक, निकाह अच्छे गेस्ट हाउस में हुआ और लड़की के अब्बा ने उसे महँगे जेवरात आदि देकर विदा किया। पीड़िता का आरोप है कि हर तरह से ससुराल की सेवा करने के बाद भी उसके ससुराल वाले अतिरिक्त दहेज़ की माँग करते रहे। इनमें AMU प्रोफेसर सैफुल भी शामिल था।

शिकायत में आगे कहा गया है कि पीड़िता का शौहर हनीफ और जेठ तारिक शराबी हैं। उन पर जुआ और सट्टा खेलने के आरोप हैं। निकाह से पहले लड़की के घर वालों को हनीफ के बारे में सही जानकारी नहीं दी थी। उसके घरवालों ने बताया था कि हनीफ एक बड़ी कम्पनी में काम करता है।

इस बीच पीड़िता के शौहर हनीफ ने दिसंबर 2014 में दिल्ली के शाहीन बाग़ में एक फ्लैट खरीदा। इसमें हनीफ ने पीड़िता के अब्बू अर्थात अपने ससुर से भी 10 लाख रुपए उधार के रूप में लिए थे। पीड़िता ने आरोप लगाया कि हनीफ ने यह उधारी भी उसके अब्बू को नहीं चुकाई और पैसे हड़प लिए।

पीड़िता ने अपने जेठ तारिक को भी अय्याश बताया है। वह अपनी पहली बीवी रश्मि उर्फ़ फातिमा को 3 तलाक दे चुका है। बाद में उसने दूसरी बीवी से तौर पर रीना उर्फ़ आमना से निकाह किया। पीड़िता ने अपने जेठ तारिक पर खुद पर भी बुरी नजर रखने का आरोप लगाया है। आरोप है कि तारिक पीड़िता को नहाते और वॉशरूम जाते हुए झाँका करता था।

महिला ने आरोप लगाया कि 1 सितम्बर 2022 को रात 10 बजे तारिक ने पीड़िता के कमरे में घुसकर उसे प्रपोज तक कर दिया था। इस दौरान उसने पीड़िता को पाने के बाद अपनी दूसरी बीवी को छोड़ देने की बात कही थी। 7 साल के बेटे की माँ पीड़िता ने जब मना किया, तब तारिक ने उसके कपड़े फाड़ दिए और उसे बिस्तर पर पटक दिया था।

शिकायत में आरोप है कि जब पीड़िता अपने जेठ की हरकतों का विरोध करती थी तो उसकी पिटाई होती थी। इस पिटाई में उसका शौहर भी शामिल रहता था। आखिरकार महिला ने अपने मायके वालों को पूरे मामले की जानकारी दी। दोनों घर वालों की पंचायत हुई।

इस पंचायत में लड़की के ससुराल वालों ने आश्वासन दिया कि उसे जल्दी दिल्ली ले जाया जाएगा। इसके बाद ससुरालवालों ने उसे 12 सितम्बर 2022 को उसके मायके भेज दिया। जाते-जाते पीड़िता के सारे गहने आदि भी अपने पास रख लिए। इसके बाद ससुराल वालों ने पीड़िता की खोज-खबर लेनी बंद कर ली।

बार-बार विनती के बाद आखिरकार 12 फरवरी 2023 को लड़की के मायके और ससुराल वालों के बीच फिर पंचायत प्रोफेसर सैफुल इस्लाम के घर हुई। इस पंचायत में पीड़िता के शौहर ने उसे अपने साथ रखने से साफ़ मना कर दिया। महिला को साथ रखने के लिए उसके अब्बा से 10 लाख रुपए की माँग की। इंकार करने पर लड़की के अब्बा को बेइज्जत कर भगा दिया गया।

पीड़िता के मुताबिक, 18 फरवरी 2023 को उसके शौहर हनीफ ने मोबाइल पर नेट कालिंग करके उसे तीन तलाक दे दिया। 2 दिन बाद 20 फरवरी को हनीफ ने अपने वकील के माध्यम से भी तलाक का नोटिस भिजवा दिया। पुलिस ने इस मामले में शौहर हनीफ, जेठ तारिक, निशा, आमना, नूरी, सादिया, अमान, आदिल के साथ AMU प्रोफेसर सैफुल इस्लाम और उसकी बीवी फरीन के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।

ऑपइंडिया के पास मौजूद शिकायत की कॉपी के अनुसार, इस मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498-A, 323, 354, 506 के साथ दहेज़ प्रतिषेध अधिनियम की धारा 4 और ट्रिपल तलाक कानून की धारा 3/4 के तहत कार्रवाई की गई है।

224 सीटें, 58282 बूथ, 5 करोड़ वोटर: कर्नाटक में एक चरण में ही पूरा होगा विधानसभा चुनाव, EC ने जारी की तारीख

भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव (Karnataka Assembly Election 2023) के तारीखों की घोषणा कर दी है। राज्य के विधानसभा की कुल 224 सीटों पर एक ही चरण में मतदान होगा। मतदान की तारीख 10 मई 2023 घोषित की गई है। वहीं, चुनाव नतीजों की घोषणा 13 मई को की जाएगी। चुनाव का नोटिफिकेशन 13 अप्रैल को जारी किया जाएगा।

चुनावों में हिस्सा लेने वाले उम्मीदवारों के नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 20 अप्रैल 2023 है। वहीं, नामांकन पत्रों की जाँच 21 अप्रैल तक पूरे कर लिए जाएँगे। इसके बाद 24 अप्रैल 2023 तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे। वहीं, कुल 224 सीटों में से 36 आदिवासी और 15 सीटें दलित समुदाय के लिए आरक्षित हैं।

राज्य में पारदर्शी और साफ-सुथरा चुनाव कराने के लिए कुल 58,282 मतदान केंद्र बनाए जाएँगे। इस तरह एक मतदान केंद्र पर औसतन 883 मतदाता होंगे। इनमें से आधे मतदान केंद्रों में वेबकास्टिंग की सुविधा है। वहीं, 1320 मतदान केंद्रों का प्रबंधन महिला अधिकारी को दिया गया है।

चुनाव आयोगकी तैयारियों की बारे में बात करते हुए चुनाव आयोग ने कहा कि कर्नाटक के सभी 19 जिलों में 171 अंतरराज्यीय चेकपोस्ट बनाए जाएँगे। इसके जरिए चुनाव में धनबल और बाहुबल के इस्तेमाल पर नकेल पर नकेल कसी जाएगी। इसके लिए चुनाव आयोग टीमों को मजबूत कर रहा है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि राज्य के चुनावों के दौरान धनबल पर लगाम कसने के लिए 2400 स्टेटिक सर्विलांस टीमें निगरानी रखेंगी। सभी जिलों से लगने वाली अंतरराज्यीय चेकपोस्ट पर दूसरे राज्यों की सीमा से लगने वाली वाली पुलिस से तालमेल और समन्वय स्थापित कर कार्रवाई की जाएगी।

राज्य में कुल 5 करोड़ 21 लाख मतदाता हैं। इनमें 16,976 मतदाता ऐसे हैं, जो 100 साल से ऊपर के हैं, 80 साल से ज्यादा उम्र के 12.15 लाख वोटर्स हैं। इसके अलावा, 5.55 लाख मतदाता विकलांग और 4,699 मतदाता तीसरे लिंग के हैं। इस बार राज्य के विधानसभा चुनावों में 9.17 लाख मतदाता पहली बार मतदान करेंगे।

बता दें कि साल 2018 के कर्नाटक विधानसभा चुनावों में भाजपा को 104 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। वहीं, 80 सीटें जीतकर कॉन्ग्रेस दूसरे स्थान पर थी। जनता दल सेक्युलर (JDS) को 37 सीटें मिली थीं। भाजपा को इस चुनाव में 36.3 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि कॉन्ग्रेस को 38.1 और जेडीएस को 18.3 प्रतिशत वोट मिले थे।

उस दौरान येदियुरप्पा ने सरकार बनाई, लेकिन बहुमत साबित नहीं कर पाए। इसके बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। बाद में कॉन्ग्रेस और जेडीएस ने गठबंधन की सरकार बनाई और JDS के एचडी कुमारस्वामी मुख्यमंत्री बने। हालाँकि, 14 महीने बाद ही सरकार गिर गई। इसके बाद बोम्मई के नेतृत्व में फिर भाजपा की सरकार बनी।

मदरसे में सो रहा था नाबालिग छात्र, ‘मौलवी’ ने पीछे से आकर रेप किया: मुँह दबाकर दी धमकी, शिकायत के बाद गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में एक मदरसे के सीनियर छात्र ( रिपोर्ट्स के मुताबिक मौलवी) पर अपने जूनियर नाबालिग बच्चे से अप्राकृतिक दुष्कर्म का आरोप लगा है। आरोपित का नाम अल्तमस नोमान है जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। कुकर्म के बाद नोमान ने बच्चे को मुँह बंद रखने की भी धमकी दी थी। लगभग 19 वर्षीय आरोपित सीनियर छात्र इस मदरसे में अपने जूनियर बच्चों को पढ़ाता भी है। 14 साल के पीड़ित छात्र को मेडिकल जाँच के लिए अस्पताल भेजा गया है। घटना सोमवार (27 मार्च 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला अलीगढ़ जिले के थाना रोरवर का है। मूल रूप से जिला मुजफ्फरनगर का रहने वाला नोमान यहाँ के अरबिया मुफक्ता उलूम मदरसे में दीन की तालीम लेता है। वह कुछ अन्य छात्रों के साथ उसी मदरसे में रहता है। मदरसा संचालक की कभी-कभार गैर मौजूदगी में नोमान अन्य छात्रों को पढ़ाता भी है। सोमवार की रात उसी मदरसे में पढ़ने वाला एक नाबालिग छात्र सो रहा था। तभी नोमान छात्र के पास पहुँचा और उसे दबोच लिया। बच्चे ने शोर मचाना चाहा तो नोमान ने उसका मुँह दबा दिया।

आरोप है कि इसके बाद नोमान ने पीड़ित छात्र के साथ कुकर्म किया। कुकर्म के बाद नोमान ने बच्चे को धमकाते हुए किसी से कुछ न बताने और मुँह बंद रखने को कहा। अगले दिन मंगलवार को डरा-सहमा बच्चा घर पहुँचा तो परिवार वालों ने उसके गुमसुम रहने की वजह पूछी। थोड़ी देर के बाद बच्चे ने अपने परिजनों को नोमान की करतूत बता दी। घटना की जानकारी होने पर पीड़ित बच्चे के परिवार वाले रोरावर थाने पहुँचे और नोमान के खिलाफ शिकायत दी। पुलिस ने केस दर्ज कर के मौलवी को गिरफ्तार कर लिया।

आरोप यह भी है कि नाराज लोगों ने मौलवी की पिटाई भी की है। पीड़ित छात्र का मेडिकल करवाया गया है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है। मदरसा संचालक के मुताबिक सभी छात्र रात में 10 बजे तरावीह की नमाज़ के बाद खाना खा कर सोने के लिए हॉल में चले गए थे। घटना के बाद आरोपित को मदरसे से निकाल दिया गया है। मदरसा संचालक के मुताबिक उन्होंने आरोपित नोमान को पीड़ित के परिजनों को ‘जो चाहे वो करने’ के लिए सौंप दिया था। ऑपइंडिया के पास मदरसा संचालक का बयान मौजूद है।

स्कर्ट-टॉप पहन TISS के छात्रनेता गए भाषण देने, प्रोफेसर ने रोका तो आँसू निकले: कहा- कम कपड़े पहनने की आदत है

मुंबई स्थित टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) में अजीब कपड़े पहन कर मंच पर पहुँचे छात्र संघ के अध्यक्ष को संस्थान से बाहर कर दिया गया। छात्र संघ अध्यक्ष का नाम प्रतीक परमे है जो मंच पर लड़कियों जैसे कपड़े पहन कर पहुँच गए थे। प्रतीक परमे ने इंस्टिट्यूट के इस फैसले से खुद को मानसिक तनाव में बताया जिसे दूर करने के लिए वो गोवा चले गए हैं। यह घटनाक्रम शनिवार (25 मार्च 2023) का है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रतीक परमे सेंटर फॉर हेल्थ एंड मेंटल हेल्थ से मास्टर द्वितीय वर्ष के छात्र हैं। वह असम के गोगामुख के रहने वाले हैं। प्रतीक अपने गाँव की आबादी को जनजातीय बहुल और कम कपड़ों में भी सहज बताते हैं। वह टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज के छात्रसंघ अध्यक्ष भी हैं। 25 मार्च को उन्हें छात्र संघ के प्रतिनिधि के रूप में आंबेडकर मेमोरियल लेक्चर के लिए मंच पर बुलाया गया था। यह कार्यक्रम शाम 6 बजे से शुरू होने वाला था जो 7 बजे शुरू हुआ।

परमे के अनुसार, कार्यक्रम से 5 मिनट पहले उन्हें कहा गया कि वो इस तरह के इवेंट में ऐसे कपड़ नहीं पहन सकते। बताया जा रहा है कि इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए प्रतीक बूट के साथ ब्लैक टॉप और स्कर्ट पहन कर पहुँचे थे। उनके इन्हीं कपड़ों पर एक फैकेल्टी मेंबर ने आपत्ति जताई। उस सदस्य ने कार्यक्रम की गंभीरता बताई और प्रतीक को 5 मिनट का समय देते हुए कपड़े बदल कर आने को कहा।

प्रतीक का कहना है कि ये सुन कर उनके आँसू निकल आए। उन्होंने खुद को अपमानित महसूस किया और कायर्कम से बाहर चले गए। प्रतीक ने बताया कि प्रोफेसर की बात को सुन कर वो असहज हो गए और कुछ भी बोलने की हालत में नहीं थे। प्रतीक की गैरमौजूदगी में छात्र संघ को TISS के महासचिव ने सम्बोधित किया।

प्रतीक ने इस घटना के बाद खुद को मानसिक तनाव में बताया और कहा कि वो उत्तर-पूर्वी भारत से आते हैं जहाँ उन्हें कम कपड़े पहनने की आदत है। उन्होंने इस संबंध में इंस्टिट्यूट के वीमन एंड जेंडर डेवलपमेंट सेल को शिकायत दे दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर बताया कि वो इससे उबरने के लिए फ़िलहाल गोवा में समय बिता रहे हैं। प्रतीक सोशल मीडिया पर भी अपने लड़कियों की तरह पहने जाने वाले पोशाक के लिए चर्चित हैं। अपने इंस्टाग्राम पर वह अक्सर पोज भी दिया करते हैं। प्रतीक का कहना है कि वो खुद को वैसे ही दिखाएँगे जैसे वो चाहते हैं।

रैली में कॉन्ग्रेस नेता डीके शिवकुमार ने उड़ाए ₹500 के नोट: कर्नाटक से वीडियो वायरल, 2019 में मनी लॉन्ड्रिंग केस में जा चुके हैं जेल

साल 2019 में मनी लॉन्ड्रिंग केस में जेल जा चुके कर्नाटक के कॉन्ग्रेस प्रमुख डीके शिवकुमार ने श्रीरंगपटना में आयोजित ‘प्रजा ध्वनि यात्रा’ के दौरान कलाकारों पर 500 रुपए के नोट उड़ाए। घटना मांड्या जिले के बेविनाहल्ली के पास की है। घटना का वीडियो भी सामने आया है।

वीडियो में दिख रहा है कि भारी भीड़ के बीच एक बस चल रही है जिसके टॉप पर खुद डीके शिवकुमार हैं और वो बगल में ढोल-नगाड़े बजाने वाले कलाकारों को इनाम का रुपया दे रहे हैं।

इस वीडियो के आने के बाद सोशल मीडिया पर पूछा जा रहा है कि क्या ऐसा करने की इजाजत राजनेताओं को होती है। कुछ ने कहा कि पहले ये नेता इस तरह खुलेआम पैसे उड़ाते हैं और उसके बाद जब ईडी का छापा पड़ता है तो रोना रोने लगते हैं।

उल्लेखनीय है कि कर्नाटक विधानसभा की चुनावों की तारीख को लेकर निर्वाचन आयोग आज प्रेस कॉनफ्रेंस करने वाला है। ऐसे में रैली के दौरान जनता के बीच पैसे उड़ाने की हरकत पर लोगों का सवाल है कि क्या चुनाव से पहले एक उन्हें पैसों का लालच देना ठीक है।

कर्नाटक बीजेपी ने भी यह वीडियो शेयर किया है। बीजेपी ने लिखा है, “ये कहते हैं कि इनकी चार पीढ़ियाँ कॉन्ग्रेस में रही हैं। अब यह वीडियो देखने के बाद हर कोई असलियत समझ जाएगा।”

बता दें इस वीडियो पर अभी तक कॉन्ग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन नेटीजन्स हैरान हैं कि डीके शिवकुमार साल 2019 में मनी लॉन्ड्रिंग केस में तिहाड़ जाने के बावजूद ऐसी हरकत कैसे कर सकते हैं। उस समय दिल्ली हाईकोर्ट ने 2 लाख 50 हजार रुपए के निजी मुचलके पर जमानत दी थी।

होशियारपुर में चारों ओर से घिरा ‘अमृतपाल’, गाड़ी से कूद खेतों में भागा: पुलिस ने भेजा अलर्ट, दिल्ली से CCTV फुटेज सामने आई

खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह बुधवार (29 मार्च 2023) को एक बार फिर से पंजाब पुलिस के हाथों से फिसल गया है। होशियारपुर में चारों तरफ से घिर जाने के बाद अमृतपाल के इनोवा गाड़ी से खेतों में कूद कर फरार होने की जानकारी सामने आ रही है। फ़िलहाल भागा व्यक्ति अमृतपाल ही है या कोई और अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। पुलिस ने इलाके को चारों तरफ घेर लिया है और चप्पे-चप्पे की तलाशी ली जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पंजाब पुलिस के ख़ुफ़िया विभाग को अमृतपाल के एक इनोवा गाड़ी में होने की सूचना मिली थी। इस सूचना पर पुलिस टीमों ने गाड़ी नंबर PB 10 CK 0527 की तलाश शुरू की तो वह होशियारपुर इलाके में मिली। पुलिस को पीछा करता देख इनोवा ने स्पीड बढ़ा दी। इस बीच अन्य पुलिस टीमों को भी अलर्ट भेज दिया गया और इनोवा की चौतरफा घेराबंदी होने लगी। थोड़ी देर बाद इनोवा होशियारपुर जिले के गाँव मरनाइया में घुस गई। यहाँ एक गुरुद्वारा के अंदर इनोवा को ले जाया गया।

बताया जा रहा है कि इस दौरान इनोवा से 2 लोग कूद गए और खेतों की तरफ भागे। जब पुलिस गाड़ी के पास पहुँची तो उसमें कोई भी नहीं था। इस बीच इलाके में भारी संख्या में पुलिस बल पहुँच गया। पूरे क्षेत्र को सील कर के खेतों के साथ लोगों के घरों की भी तलाशी शुरू कर दी गई है। गाड़ी से कूदे दूसरे व्यक्ति को पप्पलप्रीत बताया जा रहा है। फ़िलहाल पुलिस अभी स्पष्ट रूप से यह नहीं कह पा रही है कि कार से कूद कर भागा व्यक्ति अमृतपाल ही है या कोई और। कुछ रिपोर्ट्स में इनोवा गाड़ी में 4 लोगों के होने की बात कही जा रही है।

दिल्ली भी आया था अमृतपाल

इस बीच दिल्ली पुलिस को अमृतपाल और उसके साथी पप्पलप्रीत का एक CCTV फुटेज मिला है। जानकारी के मुताबिक यह फुटेज दिल्ली के प्रीत विहार इलाके का बताया जा रहा है। पुलिस के मुताबिक अमृतपाल 21 मार्च को अपने साथी के साथ दिल्ली आया था और यहाँ वो अपने एक परिचित के घर रुका था। CCTV फुटेज में अमृतपाल बिना पगड़ी के डेनिम जैकेट में है। उसने मास्क और चश्मा भी लगा रखा है।

इस बीच मंगलवार (28 मार्च 2023) को पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट में दावा किया है कि अमृतपाल को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। यह जवाब ईमान सिंह नाम के एक वकील की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर दिया गया है। वकील ईमान सिंह ने आरोप लगाया था कि पंजाब पुलिस ने अमृतपाल सिंह को अवैध तौर पर हिरासत में रखा है।

यूपी पुलिस के साथ फिर से शुरू हुआ अतीक अहमद का सफर: प्रयागराज से साबरमती जेल के लिए हुआ रवाना, भाई अशरफ वापस बरेली कारागार में

17 साल पुराने उमेश पाल अपहरण मामले में माफिया अतीक अहमद को प्रयागराज कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई। इस मामले में अतीक के अलावा उसके साथी हनीफ और दिनेश पासी को भी आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। साथ ही अपहरण केस में अतीक के भाई अशरफ समेत 7 अन्य आरोपितों को बरी कर दिया गया है। सुनवाई के बाद अब अतीक को गुजरात के साबरमती जेल ले जाया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक अतीक को सिर्फ उमेश पाल अपहरण मामले की सुनवाई के लिए प्रयागराज लाया गया था। केस में उसे सजा हो गई है इसलिए उसे साबरमती जेल में ही रखा जाएगा। नैनी जेल में रखे जाने से पूर्व में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का उल्लंघन माना जाएगा। अतीक को नैनी जेल से लेकर यूपी पुलिस का काफिला गुजरात के लिए निकल चुका है।

रिपोर्टों के अनुसार, कोर्ट में सुनवाई के बाद नैनी जेल लाए जाने के बाद अतीक को जेल में दाखिल नहीं होने दिया गया। कैदी वाहन 5 घंटो तक जेल के गेट पर ही खड़ी रही। जेल अधीक्षक की तरफ से कहा गया कि उनके पास अतीक को जेल में रखने का आदेश नहीं है। ऐसे में उसे अहमदाबाद के साबरमती जेल ले जाया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, यदि उमेश पाल हत्याकांड को लेकर दी गई अर्जी पर कोर्ट में सुनवाई शुरू हो जाती तो संभवतः अतीक को यूपी में रखा जा सकता था। कुछ कानूनी पेचीदगी के कारण ऐसा नहीं हो सका। इसी वजह से यूपी पुलिस को अतीक की कस्टडी या रिमांड नहीं मिल सकी। वहीं अतीक के भाई अशरफ को भी बरेली सेंट्रल जेल भेज दिया गया है।

बता दें कि नैनी कोर्ट के फैसले के बाद उमेश पाल और अतीक अहमद दोनों पक्षों ने हाईकोर्ट में अपील करने की बात कही है। जहाँ उमेश पाल का परिवार अशरफ की रिहाई से नाखुश है तो वहीं अतीक के वकील ने इस सजा को ऊपरी अदालत में चुनौती देने की बात कही है।

‘राहुल गाँधी ने डिलीट किए वीर सावरकर पर अपने सारे ट्वीट्स, विपक्ष में फूट के बाद अब केस होने का डर’: सोशल मीडिया पर वायरल दावा, जानें क्या है सच्चाई

हाल ही में कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने वीर सावरकर का अपमान किया। हालाँकि, ये पहली बार नहीं है जब राहुल गाँधी ने विनायक दामोदर सावरकर का अपमान किया हो। वो और उनकी पार्टी कई वर्षों से लगातार ऐसा करती आ रही है। इससे उनके ही गठबंधन साथी उद्धव ठाकरे ने आपत्ति जताई है। महाराष्ट्र में पार्टी के प्रति गुस्सा बढ़ रहा है, लेकिन वहाँ के कॉन्ग्रेस नेता गाँधी परिवार की चाटुकारिता के कारण कुछ नहीं बोल रहे।

अब सोशल मीडिया पर कुछ लोग दावा कर रहे हैं कि राहुल गाँधी ने आलोचनाओं और विपक्षी एकता में फूट के बाद वीर सावरकर पर किए अपने सारे ट्वीट्स डिलीट कर लिए हैं। इस दावे के साथ स्क्रीनशॉट्स भी शेयर किए जा रहे हैं। इंजीनियर राजेश सिंह नामक ट्विटर यूजर ने लिखा, “अरे चमचो! क्या हुआ? राहुल बाबा की हवा निकल गई। वीर सावरकर पर सारे ट्वीट ही डिलीट कर डाले। ये डर अच्छा लगा” कई अन्य लोगों ने भी ऐसे दावे किए।

राहुल गाँधी को ‘मोदी समाज’ को भला-बुरा कहने के बाद अदालत द्वारा 2 वर्ष की सज़ा सुनाई जा चुकी है, जिसके बाद न सिर्फ उनकी संसद सदस्यता चली गई बल्कि उन्हें लुटियंस दिल्ली के तुगलक रोड स्थित उस बँगले को भी खाली करने को कहा गया, जहाँ वो 19 वर्षों से रहते हैं। दीप मणि त्रिपाठी नामक यूजर ने लिखा, “राहुल गाँधी द्वारा वीर सावरकर पर की गई टिप्पणी पर, केस दर्ज कराने की बात की चर्चा पर राहुल गाँधी ने सावरकर वाले ट्वीट डिलीट कर दिए। डर अच्छा है।”

विनोद कुमार जांगिड़ नामक यूजर ने लिखा, “कथित तौर पर राहुल गाँधी ने वीर सावरकर पर अपने सभी ट्वीट डिलीट कर दिए हैं, सावरकर जी के पोते द्वारा वीर सावरकर जी के खिलाफ लगातार अपमानजनक और निराधार बयानों के लिए राहुल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की धमकी देने के बाद।”

‘राहुल गाँधी ने वीर सावरकर पर अपने सारे ट्वीट्स डिलीट किए’ – जानें क्या है सच्चाई

हालाँकि, जब हमने ऑनलाइन पड़ताल की तो पाया कि राहुल गाँधी ने इस अवधि में अपना कोई ट्वीट डिलीट नहीं किया है। उन्होंने पिछले कुछ दिनों में कोई ट्वीट डिलीट नहीं किया है। ऐसे में वीर सावरकर पर अपने ट्वीट्स डिलीट किए जाने की बात झूठी है, अफवाह है। राहुल गाँधी के ‘Cached Tweets’ में भी कोई ऐसा ट्वीट नहीं दिख रहा जिसे डिलीट किया गया हो। ये भी हो सकता है कि वीर सावरकर पर उन्होंने ट्वीट किया ही न हो इसीलिए ट्विटर पर नहीं दिख रहा हो, क्योंकि उन्होंने अधिकतर ऐसे बयान प्रेस कॉन्फ्रेंस-रैलियों में दिए हैं और पार्टी के ट्विटर हैंडल से ये सब डाला गया।

जवाहरलाल नेहरू के खानदान से ताल्लुक रखने वाले राहुल गाँधी को वीर सावरकर की आलोचना करने में शर्म आनी चाहिए, क्योंकि नेहरू जब पहली बार जेल गए थे तब उन्हें बाहर निकालने के लिए उनके पिता मोतीलाल ने दिन-रात एक कर दिया था। नेहरू मुश्किल से 12 दिन जेल में टिके। जबकि, वीर सावरकर ने लगातार 11 वर्षों कालापानी की सज़ा झेली, जहाँ उन्हें काफी प्रताड़ित किया गया। इसके बाद उन्हें घर में नजरबन्द कर दिया गया था।