Home Blog Page 1927

‘माधुरी दीक्षित कुष्ठ रोग से ग्रसित Pros****te हैं’: अभिनेत्री के फैन ने ‘बिग बैंग थ्योरी’ के एपिसोड को हटाने की माँग की, Netflix को नोटिस

ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स के शो ‘बिग बैंग थ्योरी’ पर मशहूर बॉलीवुड अभिनेत्री माधुरी दीक्षित के अपमान का आरोप लगाया गया है। इसे लेकर लेखक और राजनीतिक विश्लेषक मिथुन विजय कुमार ने नेटफ्लिक्स को नोटिस भी भेजा है। नोटिस में ‘बिग बैंग थ्योरी’ के एक एपिसोड को हटाने की माँग की गई है। आरोप है कि शो के दूसरे सीजन के पहले एपिसोड में एक किरदार ने माधुरी दीक्षित पर अपमानजनक टिप्पणी की है।

विजय कुमार की तरफ से नेटफ्लिक्स को नोटिस जारी कर कहा गया है कि वेब सीरीज के एक दृश्य में बॉलीवुड अभिनेत्रियों पर टिप्पणी की गई है। इसमें राज कुथरापल्ली नामक किरदार ने माधुरी दीक्षित के संदर्भ में अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया। इस तरह की टिप्पणियों का समाज पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। यह कंटेट भारतीय संस्कृति और महिलाओं के प्रति अपमानजनक है। मुंबई स्थित नेटफ्लिक्स ऑफिस में भेजे गए कानूनी नोटिस में उन्होंने शो के इस एपिसोड को हटाने की माँग की है। विजय कुमार ने ऐसा न करने पर ओटीटी प्लेटफॉर्म के खिलाफ कानूनी कदम उठाए जाने की बात कही है।

विजय कुमार की तरफ से नोटिस की जानकारी देते हुए एक ट्वीट भी किया गया। ट्विटर पर उन्होंने लिखा कि वे बचपन से ही माधुरी के फैन हैं और शो में बॉलीवुड अभिनेत्री के संदर्भ में जो कुछ भी कहा गया वो उन्हें पसंद नहीं आया।

वेब सीरीज में राज कुथरापल्ली का रोल एक्टर कुणाल नय्यर निभा रहे हैं। जिस एपिसोड को हटाए जाने की माँग हो रही है, उसके एक दृश्य में राज और शेल्डॉन नाम के किरदार राज के अपार्टमेंट में साथ बैठे हुए हैं। दोनों टीवी देख रहे हैं। शेल्डॉन पूछता है, “क्या स्क्रीन पर ऐश्वर्या राय थीं?” राज हाँ में जवाब देता है और कहता है कि वो एक अच्छी अभिनेत्री हैं, है न? इसके बाद शेल्डॉन कहता है कि ऐश्वर्या राय गरीबों की माधुरी दीक्षित हैं। इस पर भारतीय मूल के एस्ट्रोफिजिसिस्ट राज नाराज हो जाते हैं और कहते हैं कि ऐश्वर्या राय एक देवी हैं और माधुरी दीक्षित “कुष्ठ रोग ग्रसित प्रोस्ट***ट” हैं।

मिथुन विजय कुमार ने नेटफ्लिक्स जैसी कंपनियों को कंटेंट की गुणवत्ता का खास ख्याल रखने की नसीहत दी है। भेजे गए नोटिस में उन्होंने कहा है कि ओटीटी प्लेटफॉर्म को किसी के प्रति अपमानजनक और भेद-भाव पूर्ण कंटेट नहीं दिखाया जाना चाहिए। खबर लिखे जाने तक नेटफ्लिक्स के तरफ से कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।

अतीक अहमद का ‘खात्मा’ चाहती हैं उमेश पाल की पत्नी और माँ, कहा- वह जिंदा रहा तो हम सबको खत्म कर देगा… वह डर से काँप-काँप कर मरे

गैंगस्टर अतीक अहमद को पेशी के लिए साबरमती जेल से प्रयागराज लाया गया है। फिलहाल उसे नैनी जेल में रखा गया है। इस बीच मृतक उमेश पाल की पत्नी ने कहा है कि जब तक अतीक जिंदा रहेगा, तब तक कोई न कोई उमेश मरता रहेगा। इसलिए उसके जीने का हक छीन लेना चाहिए। वहीं, उमेश पाल की माँ ने कहा है कि अतीक अहमद के मरने के बाद ही उन्हें तसल्ली मिलेगी। बता दें कि पिछले महीने अतीक के शूटरों ने उमेश पाल की हत्या कर दी थी।

अतीक अहमद को प्रयागराज लाए जाने को लेकर उमेश पाल की पत्नी जया पाल ने कहा, “मैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी निवेदन करती हूँ कि मेरे पति की हत्या करवाने में जिन लोगों का हाथ रहा है उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। उसका जीने का हक पूरी तरह से छीन लिया जाए। अतीक अहमद जब तक जिंदा रहेगा, तब तक कुछ न कुछ होता रहेगा। इसी तरह कोई न कोई उमेश पाल खत्म होता रहेगा। इसलिए उसका खात्मा जरूरी है।”

साबरमती जेल से बाहर आने के बाद अतीक अहमद ने अपनी हत्या की आशंका जताई है। इसको लेकर जया पाल ने कहा कि जब अतीक किसी को मारने में पीछे नहीं रहा तो उसे मरवाने में क्या दिक्कत है। उन्होंने आगे कहा, “उसने हमारा सुहाग उजाड़ा है। उसने हमारा परिवार उजाड़ दिया है। अतीक अहमद ने जो किया है, उसका कौन जिम्मेदार है? इन सबका वो खुद जिम्मेदार है। मैंने और मेरे पति ने उसका क्या बिगाड़ा था? अब उसको डर लग रहा है तो मेरी बद्दुआ है कि वह काँप-काँप कर मरे। पूरे परिवार का सर्वनाश हो जाए। गाड़ी पलटे या न पलटे बस भगवान करे कि वो खत्म हो जाए।”

अतीक अहमद को होने वाली सजा को लेकर उन्होंने आगे कहा, “मैं चाहती हूँ कि उस आदमी को सजा-ए मौत मिले। मैं नहीं चाहती कि वो जिंदा रहे। जिंदा रहेगा तो वह हम सबको खत्म कर देगा। ये पता है मुझे। मैं जज, शासन-प्रशासन सबसे यही गुहार करूँगी कि उसे छोड़ा न जाए। यदि वह जेल में भी रहेगा तो वह कुछ भी करवा सकता है।”

वहीं, उमेश पाल की माँ शांति देवी ने कहा, “अदालत को जो भी फैसला होगा हमें मंजूर है। अतीक अहमद जेल से बैठकर ही सारा कार्यक्रम करता आ रहा है। बाहर रहता है तो भी करता है और जेल में रहता है तो भी करता है। अगर इसकी मौत हो जाएगी, तब मुझे तसल्ली मिलेगी। जैसे मेरे बेटे की हत्या की थी, वैसे ही इसका भी होना चाहिए”

अतीक अहमद को प्रयागराज ट्रांसफर करने की खबर सामने आने के बाद से उसके एनकाउंटर की चर्चा जोरों पर थी। हालाँकि, वह सुरक्षित प्रयागराज के नैनी जेल पहुँच गया है। उसे जेल में हाई-सिक्योरिटी बैरक में अकेला रखा गया। उसके सेल में सीसीटीवी कैमरा लगाया गया है। इसके साथ ही जेल कर्मचारियों को उनके रिकॉर्ड के आधार पर चुनकर तैनात किया गया। इन कर्मियों के पास बॉडी वियर कैमरे हैं।

एनकाउंटर को लेकर उठ रहे सवालों पर यूपी के डीजीपी देवेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि यूपी पुलिस की गाड़ियाँ नहीं पलटतीं, बल्कि अपराधी पलटता है। उन्होंने कहा कि अगर पुलिस के ऊपर कोई गोली चलाएगा तो पुलिस इसका जवाब गोली से ही देती है। यही ट्रेनिंग है।

अतीक अहमद के गुर्गों ने की थी उमेश पाल की हत्या

बहुजन समाज पार्टी के विधायक रहे राजू पाल हत्याकांड में उमेश पाल प्रमुख गवाह थे। 24 फरवरी 2023 को गवाही के बाद वह घर लौट रहे थे। इसी दौरान उनकी हत्या कर दी गई थी। गोली और बम से किए गए हमले में उमेश पाल के गनर संदीप निषाद और राघवेंद्र सिंह की भी मौत हो गई थी।

अब तक इस मामले में पुलिस कई आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है। वहीं, कुछ आरोपित पुलिस मुठभेड़ में भी ढेर हुए हैं। हालाँकि, मुख्य शूटर और अतीक अहमद की पत्नी तथा बेटे अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। पुलिस ने इन पर इनाम घोषित किया है।

बिहार पुलिस की जमीन से लेकर सदन तक धुलाई: कहीं शराब तो कहीं बालू माफिया के लोगों ने पीटा, FIR में मनमानी पर विधायकों ने घेरा

एक तरफ बिहार पुलिस माफियाओं से पिट रही है, वहीं दूसरी ओर सत्ताधारी दल के विधायक भी उस पर मनमानी का आरोप लगा रहे हैं।रविवार (26 मार्च 2023 ) को 2 अलग-अलग स्थानों पर पुलिस की टीम पर हमले की घटना सामने आई है। पहली घटना भोजपुर जिले की है, जहाँ देर शाम शराब माफियाओं के खिलाफ छापेमारी करने पहुँची पुलिस को निशाना बनाया गया। दूसरी घटना गया जिले के बेलागंज की है। यहाँ फल्गु नदी से अवैध रूप से बालू निकालने वालों ने पुलिस के साथ हाथापाई की और जब्त जेसीबी मशीन छुड़ा ले गए। वहीं सोमवार को विधानसभा में सत्ताधारी दल के कई विधायकों ने पुलिस की मनमानी पर सवाल उठाए।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक भोजपुर जिले के मुफस्सिल थाना इलाके के अरगसंडा-लाल बाजार के बिंद टोली में अवैध शराब की बिक्री हो रही थी। इसकी जानकारी पाकर पुलिस टीम छापेमारी करने पहुँची। पुलिस ने शराब का धंधा करने वाले 4 लोगों को पकड़ लिया। गिरफ्तारी के बाद 50-60 लोगों ने पुलिस की टीम पर हमला बोल दिया। पुलिस की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक छापेमारी के बाद ही भीड़ जमा होने लगी थी। लाठी-डंडों और ईंट-पत्थरों से पुलिस की टीम पर हमला किया गया।

हमले में एएसआई अनिल कुमार सिंह समेत 6 पुलिसकर्मियों के जख्मी होने की खबर है। पुलिस की गाड़ी को क्षति पहुँचाई गई। साथ ही हमलावर भीड़ गिरफ्तार शराब माफियाओं को भी छुड़ा ले गई। जानकारी के मुताबिक पुलिस पर हमला करने वालों में महिलाएँ भी शामिल थीं।

वहीं दूसरा मामला गया के बेलागंज थाना इलाके के दलेलचक गाँव के पास का है। पुलिस को फल्गु नदी से अवैध बालू खनन की जानकारी प्राप्त हुई। इसके बाद पुलिस की टीम मौके पर पहुँची। बालू खनन में इस्तेमाल किए जा रहे जेसीबी को कब्जे में ले लिया गया। इस दौरान मौके पर रेत माफिया के लोग जमा हो गए। पुलिसकर्मियों को घेरकर वे हाथापाई करने लगे और जेसीबी मशीन छुड़ा ले गए।

मौके पर मौजूद लोगों ने पुलिस ऑफिसर के हाथ में जबरन रुपया थमाते हुए वीडिया बनाया। रेत माफिया दिखाना चाहते थे कि पुलिस उनसे रिश्वत लेने पहुँची है। पुलिस की टीम पर हुए हमले की जानकारी मिलने के बाद डीएसपी के नेतृत्व में अतिरिक्त बलों की टीम मौके पर पहुँची। बताया जा रहा है कि मामले में तीन लोगों की गिरफ्तारी हुई है।

इस बीच बिहार विधानसभा में राजद, वाम दल और काॅन्ग्रेस के विधायकों ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए। कहा कि थाने में एफआईआर दर्ज करने को लेकर पुलिस मनमानी करती है। राजद विधायक ऋषि कुमार और भाई वीरेंद्र ने कहा कि बिना पैरवी पुलिस केस नहीं दर्ज करती है। वामपंथी विधायक अजय कुमार ने कहा कि पुलिस शिकायत लेकर थाने पहुँचे लोगों के साथ सही व्यवहार नहीं करती है। काॅन्ग्रेस विधायक विजय शंकर दुबे ने कहा कि बिना किसी कारण के लोगों को थाने में पकड़कर रखा जाता है। उनके साथ साथ दुर्व्यवहार किया जाता है।

राजस्थान में अस्पताल छोड़ सड़क पर डाॅक्टर, महिला चिकित्सक ने गोलगप्पे का लगाया ठेलाः ‘राइट टू हेल्थ’ बिल वापस लेने की माँग

राजस्थान में डॉक्टरों की भीड़ सड़क पर है। वह सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। यह विरोध अशोक गहलोत सरकार द्वारा पास किए गए ‘राइट टू हेल्थ’ (Right to Health) बिल को लेकर हो रहा है। सरकार का कहना है कि इस बिल से जनता को स्वास्थ्य सेवाएँ हासिल करने का कानूनी अधिकार मिलेगा। वहीं, डॉक्टरों का कहना है कि सरकार वाहवाही लूटने के लिए जबरदस्ती अपनी योजनाएँ हॉस्पिटल पर थोप रही है।

दरअसल, राजस्थान सरकार ने सितंबर 2022 में यह बिल विधानसभा में पेश किया था। इसके बाद इस बिल को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू हुए थे। विधानसभा में भी भाजपा ने हंगामा किया था। विवाद बढ़ता देख अशोक गहलोत सरकार ने इस बिल को सलेक्शन कमेटी के पास भेजा था। इसके बाद अब चालू बजट सत्र में इस बिल को एक बार फिर पेश किया गया। हालाँकि तमाम विरोध और हंगामें के बीच मंगलवार (21 मार्च 2023) को यह बिल विधानसभा में पारित हो गया।

इस बिल के पेश होने के पहले से ही डॉक्टर्स विरोध कर रहे थे और अब बिल पास होने के बाद डॉक्टर्स एक बार फिर सड़क पर उतर आए हैं। शुरुआत में इस बिल का विरोध निजी हॉस्पिटल के डॉक्टर ही कर रहे थे। लेकिन बाद में सरकारी डॉक्टर भी विरोध कर रहे हैं। यही नहीं, डॉक्टर्स अपने घरों पर भी मरीजों को परामर्श नहीं दे रहे हैं। एक महिला चिकित्सक अनिता चौधरी ने तो गोलगप्पे का ठेला लगाकर ये विरोध शुरू किया है। उनका कहना है कि गाड़ी चलाने के लिए उन्हें कुछ तो करना पड़ेगा।

राइट टू हेल्थ बिल के विरोध में सोमवार (27 मार्च 2023) को सैकड़ों डॉक्टरों ने राजस्थान की राजधानी जयपुर की सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। इस विरोध को मुंबई से लेकर दिल्ली और भोपाल तक में समर्थन मिल रहा है।

डॉक्टरों ने जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज के बाहर से पैदल मार्च निकाला है। वहीं, बिल के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने भी देशव्यापी बंद का ऐलान किया था। इस बंद के कारण मेडिकल सर्विस काफी हद तक ठप पड़ गई। बंद का सबसे बड़ा असर राजधानी जयपुर में ही देखने को मिला। जहाँ डॉक्टर्स की हड़ताल के चलते मरीजों को समस्या का सामना करना पड़ रहा है। राजस्थान सरकार के इस विवादित बिल को लेकर जारी विरोध को शुरू हुए एक हफ्ते से अधिक का समय हो चुका है। इसके बाद भी सरकार और डॉक्टरों के बीच बात नहीं बन पाई है।

बिल वापस हो, सीएम गहलोत से ही करेंगे बात…

इस बिल का विरोध कर रहे डॉक्टर और सरकार के बीच रविवार (26 मार्च 2023) को बातचीत हुई। बातचीत करने के लिए सरकार की ओर से मुख्य सचिव उषा शर्मा, अतिरिक्त मुख्य सचिव अखिल अरोड़ा, प्रमुख सचिव टी रविकांत और जयपुर कलेक्टर मौजूद थे। लेकिन डॉक्टर्स ने दो टूक कह दिया कि वह बिल वापसी से कम कुछ और नहीं चाहते। डॉक्टरों का यह भी कहना है कि वह मुख्यमंत्री के अलावा किसी और से बात नहीं करना चाहते, क्योंकि बिल वापसी का अधिकार उन्हीं के पास है।

29 मार्च को और खराब हो सकते हैं हालात…

सरकारी हॉस्पिटल के मेडिकल ऑफिसरों का संगठन अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ भी इस बिल का विरोध कर रहा है। संगठन के प्रदेशाध्यक्ष अजय चौधरी ने कहा है कि आगामी 29 मार्च को सभी डॉक्टर सामूहिक अवकाश में रहेंगे। यदि 29 मार्च को सभी डॉक्टर्स अवकाश में चले गए तो राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा जाएगी और मरीजों को समस्याओं से दो-चार होना पड़ेगा।

क्या है राइट टू हेल्थ बिल?

राइट टू हेल्थ बिल या स्वास्थ्य का अधिकार विधेयक 2022 के अंतर्गत किसी भी स्थिति में कोई भी अस्पताल मरीज के इलाज के लिए मना नहीं कर सकता। इमरजेंसी की स्थिति में यदि इलाज का खर्च मरीज नहीं दे पा रहा है तो ऐसी स्थिति में उसके इलाज का खर्च सरकार उठाएगी। गंभीर बीमारी की स्थिति में मरीज किसी भी हॉस्पिटल में भर्ती हो सकता है। इस स्थिति में उसके इलाज का खर्च सरकार वहन करेगी।

इसके अलावा यदि किसी दुर्घटना में घायल व्यक्ति को कोई हॉस्पिटल पहुँचाता है तो ऐसे व्यक्ति को 5000 रुपए की प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान किया गया है। राइट टू हेल्थ का उल्लंघन करने या इलाज से मना करने वाले हॉस्पिटल पर 10 से 20 हजार तक का जुर्माना लगाया जाएगा। पहली बार उल्लंघन पर यह जुर्माना 10 हजार होगा। इसके बाद 20 हजार तक का जुर्माना देना होगा।

क्यों हो रहा है विरोध…

इस बिल के विरोध की सबसे बड़ी वजह ‘इमरजेंसी‘ शब्द को बताया जा रहा है। दरअसल, बिल में इमरजेंसी के समय हॉस्पिटल को मुफ्त इलाज करने के लिए कहा गया है। ऐसे में प्राइवेट हॉस्पिटल के डॉक्टरों का कहना है कि बिल में इमरजेंसी को सही तरीके से नहीं बताया गया है। यदि सभी मरीज अपनी बीमारी को इमरजेंसी बताएँगे तो हॉस्पिटल को मुफ्त में इलाज करना पड़ेगा। ऐसे में हॉस्पिटल अपना खर्च कैसे चलाएगा?

इसे इस तरह से भी समझा जा सकता है कि यदि किसी दाँत के डॉक्टर के पास कोई गंभीर बीमारी वाला मरीज पहुँच गया तो वह उसका इलाज कैसे करेगा। इसी तरह महिलाओं की डिलीवरी वाले हॉस्पिटल में यदि सर्पदंश का मरीज आ गया तो उसका इलाज कैसे होगा। यही नहीं, डॉक्टर्स का कहना है कि यदि मरीज इमरजेंसी हालत में हॉस्पिटल आया और उसकी मौत हो गई तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?

बिल में यह भी कहा गया है कि यदि कोई मरीज बेहद गंभीर हालत में है और उसे किसी अन्य हॉस्पिटल में रेफर करना है तो इसके लिए एंबुलेंस की व्यवस्था अनिवार्य होगी। इसको लेकर डॉक्टरों का कहना है कि एंबुलेंस देने में कोई समस्या नहीं है। लेकिन इसका खर्च कौन वहन करेगा? मरीज या सरकार कोई भी दे। इस बारे में बिल में स्पष्ट रूप से कुछ भी नहीं कहा गया।

राइट टू हेल्थ बिल के तहत प्राइवेट हॉस्पिटल को सरकारी योजनाओं के अनुसार सभी बीमारियों का इलाज फ्री में करना होगा। ऐसे में इन डॉक्टरों का आरोप है कि सरकार अपनी वाहवाही लूटने के लिए सरकारी योजनाओं को निजी अस्पतालों पर थोप रही है। सरकार को यदि अपनी योजना चलानी है तो सरकारी अस्पतालों में चलाए, प्राइवेट अस्पतालों को बिना वजह परेशान किया जा रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि सरकारी योजनाओं में इलाज के लिए जो राशि निर्धारित की गई है वह लागत मूल्य की अपेक्षा कम है। ऐसे में हॉस्पिटल अपना खर्च कैसे निकालेंगे?

राहुल गाँधी पर काॅन्ग्रेस से भागने लगे सहयोगी: उद्धव गुट ने ‘मैं गाँधी, सावरकर नहीं’ बयान पर चेताया, विपक्ष की बैठक से भी किया किनारा

सांसदी रद्द होने के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कॉन्ग्रेस राहुल गाँधी ने कहा था कि वे माफी नहीं माँग सकते हैं, क्योंकि उनका नाम गाँधी है सावरकर नहीं। अब उनके बयान को लेकर राजनीति तेज हो गई है। सावरकर को लेकर उद्धव ठाकरे के गुट ने राहुल गाँधी को चेतावनी दी है और कहा है कि उनका अपमान वह बर्दाश्त नहीं कर सकती।

उधर, राहुल गाँधी के बयान को लेकर महाराष्ट्र के भाजपा सांसदों ने विरोध प्रदर्शन किया। सांसदों ने सावरकर के अपमान पर संसद में छत्रपति शिवाजी जी महाराज की प्रतिमा के सामने विरोध प्रदर्शन किया।

उद्धव ठाकरे ने रविवार (26 मार्च 2023) को एक रैली को संबोधित करते हुए उनकी पार्टी का भले ही कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन है, लेकिन सावरकर के खिलाफ किसी भी गलत बयानबाजी को वह बर्दाश्त नहीं करेगी। ठाकरे ने इस स्वतंत्रता सेनानी का अपमान उसे बर्दाश्त नहीं है।

उद्धव ठाकरे की चेतावनी के बाद उद्धव गुट ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर आज सोमवार (27 मार्च 2023) को होने वाली बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया है। ठाकरे के सहयोगी संजय राउत ने कहा, “उद्धव ठाकरे गुट ने आज मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर आयोजित होने वाली बैठक में शामिल नहीं होने का फैसला किया है, क्योंकि राहुल गाँधी ने कहा था कि मैं सावरकर नहीं हूँ, मैं गाँधी हूँ।”

संजय राउत ने कहा, “राहुल गाँधी का बयान गलत है। वह गाँधी हैं, लेकिन सावरकर का नाम घसीटने की जरूरत नहीं है। सावरकर हमारी प्रेरणा हैं। हमारी लड़ाई के पीछे छत्रपति शिवाजी महाराज और वीर सावरकर हैं।” उन्होंने कहा कि अगर वे राहुल गाँधी से मिलते हैं तो इसको लेकर वे जरूर सवाल करेंगे।

दरअसल, राुहल गाँधी के ‘सारे चोर मोदी हैं’ बयान के बाद सूरत कोर्ट ने उन्हें 2 साल की सजा सुनाई है। इस सजा के आधार पर लोकसभा ने उनकी लोकसभा की सदस्यता को रद्द कर दिया है। इस कार्रवाई के खिलाफ कॉन्ग्रेस 27 मार्च को देश भर में प्रदर्शन कर रही है। विपक्षी दलों के सांसद सदन में काले कपड़े पहनकर गए। वहीं, युवा कॉन्ग्रेस ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया।

इस घटना को लेकर और आगे की रणनीति बनाने के लिए राज्यसभा में प्रतिपक्ष नेता और कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 27 मार्च की रात दिल्ली स्थित अपने आवास पर एक बैठक बुलाई है। इस बैठक में लिए समान विचारधारा वाले सभी दलों के नेताओं को आमंत्रित किया है। अब, कॉन्ग्रेस की सहयोगी उद्धव गुट ने इस बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया।

भोजपुरी हिरोइन आकांक्षा दुबे की मौत में नया मोड़, माँ ने सिंगर सहित 4 पर करवाई FIR: कहा- मेरी बेटी को टॉर्चर कर रहा था समर सिंह

भोजपुरी एक्ट्रेस आकांक्षा दुबे (Akanksha Dubey) की मौत के मामले में नया मोड़ आया है। एक्ट्रेस की माँ मधु दुबे ने सिंगर समर सिंह सहित चार के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। उनका कहना है कि समर सिंह करीब तीन साल से उनकी बेटी को टाॅर्चर कर रहा था। फिल्म में काम करने के पैसे नहीं देता था। जब आकांक्षा उससे काम के पैसे माँगती तो वह मारपीट करता था। दूसरों की फिल्म और गाने में काम करने से भी उसे रोकता था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आकांक्षा दुबे की माँ ने सारनाथ थाने में सिंगर समर सिंह, उसके भाई संजय सिंह और दो अन्य के खिलाफ केस दर्ज कराया है। उन्होंने मीडियाकर्मियों को बताया, “समर ने मेरी दुनिया उजाड़ दी। उसने मेरी बेटी को मार डाला। संजय सिंह ने 21 मार्च को मेरी बेटी को धमकी दी और 25 मार्च को उसे मरवा डाला। मेरी लड़की सुसाइड नहीं कर सकती है। मेरी बेटी इतना संघर्ष करके आगे बढ़ी। इतनी तकलीफ सहने के बाद जब उसने सुसाइड नहीं किया, तो आज इतना नाम कमाने के बाद क्या वो सुसाइड कर लेगी? समर सिंह और संजय सिंह ने मेरी बेटी को मारा है। संजय सिंह, समर सिंह का भाई है।”

मधु दुबे ने बताया, “समर सिंह ने नई गाड़ी ली थी और अपना स्टेटस लगाया था। इस पर मेरी बेटी ने कहा कि तुम दूसरों के पैसों पर ऐश कर रहे हो। वो बोलता है कि ऐसे कैसे तूने बोल दिया। तुझे मैं गायब करा दूँगा। उसके भाई संजय ने कहा कि तू मुझे अभी जानती नहीं है। मैं तेरा मर्डर करा दूँगा। मैंने इन दोनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कारवाई है। मेरी लड़की को इंसाफ चाहिए। इन दोनों ने ही मेरी लड़की को मारा है।”

वहीं, इस मामले में एडिशन सीपी संतोष सिंह ने बताया कि शुरुआती जाँच में आत्महत्या का केस लग रहा है, क्योंकि दरवाजा अंदर से बंद था। मधु दुबे की शिकायत पर सिंगर समर सिंह समेत 4 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। पोस्टमॉर्टम कराया जा रहा है। सारे साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। आगे की कार्रवाई जारी है।

बता दें कि 25 मार्च 2023 को आकांक्षा दुबे के सुसाइड करने की खबर सामने आई थी। इसके बाद 26 साल की आकांक्षा दुबे का एक वीडियो सामने आया था। इस वीडियो में उनकी आँखों में आँसू दिख रहे हैं। फिर वो फूट-फूट कर रोने लगती हैं। आकांक्षा दुबे के मेकअप आर्टिस्ट राहुल और हेयर आर्टिस्ट रेखा मौर्या का कहना है कि उन्हें किसी चीज का तनाव नहीं था और वो न ही परेशान थीं।

जिस डॉक्टर ने करौली बाबा के आश्रम में लगाया मारपीट का आरोप, वो उस दिन CM योगी के आवास में घुसने की कर रहा था कोशिश: वीडियो आया सामने

कानपुर में ‘करौली शंकर महादेव’ बाबा पर पिछले दिनों में एक डॉक्टर को पिटवाने के आरोप लगे थे, जिसके बाद अब आश्रम ने नया बयान जारी किया है। ‘लवकुश आश्रम’ का कहना है कि बाबा को बदनाम करने वाले चिकित्सक के विरुद्ध ही सरे साक्ष्य मिले हैं, एक वीडियो भी सामने आया है जिससे उसका झूठ का पर्दाफाश हुआ है। आश्रम ने कहा कि ईश्वरीय सत्ता सर्वोपरि है और सब कुछ उसी के अधीन है, उसी से नियंत्रित है।

बाबा के आश्रम प्रशासन ने अपने बयान में कहा, “करौली शंकर महादेव धाम भी उसी ईश्वरीय सत्ता का एक अंश है और नियति के विधान के अनुसार ही संचालित है, पोषित है। ऐसे पवित्र स्थल या उस स्थल की सेवा करने वाले जीवों या मनुष्यों की रक्षा-सुरक्षा भी नियति ही करती है। कालांतर में अनेक बार यह प्रमाणित हो चुका है, आज फिर यह सिद्ध हो गया है कि जिसकी सुरक्षा में स्वयं शिव और माँ कामाख्या हों, उसे कोई छू नहीं सकता, आहत नहीं कर सकता। करौली शंकर महादेव परिवार पर आरोप लगाने वाले नोएडा निवासी चिकित्सक के लगातार झूठ का पर्दाफाश हो चुका है और बाकायदा वीडियो साक्ष्य के साथ हुआ है।”

बता दें कि उक्त चिकित्सक (डॉक्टर सिद्धार्थ चौधरी) ने बुधवार (22 फरवरी, 2023) से आश्रम में मारपीट किए जाने का आरोप लगाना शुरू कर दिया था। आश्रम के अनुसार, अब एक अन्य वीडियो के द्वारा वास्तविकता यह सामने आई है कि 22 फरवरी को सुबह वो करीब 8 बजे लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आवास में जबरन घुसने का प्रयास कर रहे थे। सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोका तो चिकित्सक ने उनसे मारपीट की, फिर सड़क पर गिर गए। वीडियो में डॉक्टर सीएम आवास के बाहर जमीन पर सोए हुए भी देखे जा सकते हैं।

इस वीडियो में साफ दिख रहा है कि उनकी नाक व आसपास खून बह रहा है और वे सुरक्षाकर्मियों पर चिल्ला रहे हैं। सुरक्षाकर्मी उन्हें सड़क से उठाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वे उठा नहीं पा रहे हैं। सुरक्षाकर्मी उससे कह रहे हैं कि अस्पताल चलो, तो अस्पताल जाने को भी मना कर रहा है। यह वीडियो तो कुल 36 सेकंड का है, लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि इस वीडियो के बनने से पहले और बाद में भी चिकित्सक ने सुरक्षाकर्मियों से मारपीट की है और उसमें वह घायल हुआ है। उन सुरक्षाकर्मियों से चिकित्सकों के पिता ने यह कहते हुए बचाया है कि यह मनोरोगी है, उसे क्षमा कर दीजिए।

उसके कुछ ही घंटे बाद चिकित्सक ‘करौली शंकर महादेव’ धाम पहुँचे हैं। आश्रम प्रशासन की मानें तो वहाँ गेट पर उनकी दोपहर 12:53 बजे की एंट्री है। आश्रम में कई सेवादारों ने बताया कि चिकित्सक जब आश्रम पहुँचे, तब भी उनके सिर पर पीछे की और खून के धब्बे थे, चेहरे पर हल्की खरोंच के निशान थे, लेकिन आश्रम में इन सब बातों को इसलिए गंभीरता से नहीं लिया गया, क्योंकि यहाँ तो इस प्रकार स्वयं को चोटिल, घायल करके काफी मनारोगी पहुँचते हैं।

बताया गया है कि इनमें कई तो ऐसे होतेे हैं, जिनके हाथ पैर रस्सियों या जंजीरों में बाँध कर उनके ही परिजनों द्वारा लाया जाता है। जानकारी मिली कि दोपहर बाद चिकित्सक बाबा के समक्ष आए, तब भी उनकी मनोस्थति नियंत्रित नहीं थी। आश्रम में इस तथ्य पर विचार करने को कहा है कि जिस व्यक्ति के साथ सुबह में इतनी बड़ी दुर्घटना हुई हो कि वह अपमानजनक तरीके से सड़क पर पड़ा हो, वह व्यक्ति कुछ ही घंटे बाद गुरु जी के समक्ष पहुँच कर अपनी समस्याएँ या पीड़ाएँ बताने के बजाए उन्हें चमत्कार दिखाने के लिए चुनौती देने लगता है।

आश्रम का कहना है कि यह उनकी मनोस्थिति ठीक न होने का स्वयं सबसे बड़ा साक्ष्य है। इसके बाद आश्रम से चले जाने पर भी चिकित्सक ने कहीं कोई शिकायत नहीं की, बल्कि एक माह बाद मुकदमा लिखाने फिर से कानपुर पहुँचे। आश्रम ने पूछा है कि कुछ ही घंटों के अंतर पर लखनऊ व कानपुर में मारपीट करने वाले चिकित्सक ने कानपुर से नोएडा तक फिर किसी से मारपीट नहीं की होगी, इसकी क्या गारंटी है ? इस माह में उनके साथ कहाँ, कितनी मारपीट हुई या नहीं हुई, सब रिपोर्ट और आरोप मिथ्या ही हैं या नहीं?

इन चीजों को जाँच का विषय बताते हुए आश्रम परिवार ने आशंका जताई है कि यह सारा प्रकरण ऐसे लोगों की किसी बड़ी साजिश या षड्यंत्र का हिस्सा है, जो कि सनातन संस्कृति और वैदिक चिकित्सा पद्धति को पनपते नहीं देखना चाहते हैं, इसलिए उन्होंने चिकित्सक को मोहरा बनाकर आश्रम को बदनाम करने के लिए इतना बड़ा नाटक कराया है, जिसमें कुछ मीडिया संस्थानों या उनके कर्मचारियों ने भी उनका सहयोग किया है।

इस आशंका का कारण समझाते हुए आश्रम प्रशासन ने कहा कि एक माह बाद चिकित्सक द्वारा आरोप लगाने के बाद भी ऐसे मीडिया संस्थानों ने किसी जाँच-पड़ताल की कोई प्रतीक्षा नहीं की, स्वयं से भी सच जानने की कोशिश नहीं की कि एक माह तक कहाँ रहे, चुप क्यों रहे? आरोप है कि उन्होंने उस घटना या दुर्घटना पर ध्यान केंद्रित करने की बजाए पहले ही दिन से ‘करौली महाराज’ का चरित्र हनन शुरू कर दिया, उन्हें किसी अपराधी की तरह से पेश किया।

आश्रम ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, “यदि जानने की कोशिश की जाती तो सच उसी दिन सामने आ गया था। उसी दिन एक प्रतिष्ठित टीवी चैनल पर उनके पिता कह रहे हैं कि हम 19 फरवरी को कानपुर पहुँचे और 20 फरवरी को गुरूजी से मुलाकात हुई, जबकि सच यह है कि वे 22 फरवरी को आए थे। जो मुकदमे की रिपोर्ट है, उसमें भी चिकित्सक ने 22 फरवरी को ही आश्रम पहुँचने की बात लिखी है। यानी, पिता द्वारा एक साजिश के तहत झूठ बोला गया तो दूसरे वीडियो में चिकित्सक स्वयं झूठ बोलते दिख रहे हैं कि उनसे सिर पर उनकी माँ व पत्नी ने पट्टी बाँधी, जबकि माँ कह रही हैं कि वे वॉशरूम गई थीं, जब वाशरूम से आईं तो देखा उनके सिर पर पट्टी बँधी थी।”

आश्रम ने आगे कहा कि ये सारे विरोधाभासी वीडियो उसी दिन के थे। कोई भी मीडिया कर्मी या संस्थान जरा सा भी पत्रकारीय धर्म निभाता तो सच सामने आ गया होता। साथ ही आरोप लगाया है कि अधिकांश मीडिया संस्थान और मीडिया कर्मी इस सच को समझ गए थे कि चिकित्सक झूठ बोल रहे हैं, आरोप झूठे हैं, इसलिए उन्होंने संतुलित खबरें लिखीं और दिखाई। लेकिन, जो मीडिया संस्थान और कर्मचारी इस साजिश में शामिल थे, वे लगातार सच छिपाते रहे, झूठ पर झूठ रिपोर्ट बनाते रहे, चरित्र-हनन करते रहे, जनता को गुमराह करते रहे, जिसके चलते जांचकर्ताओं और प्रशासन को भी परेशानी हुई।

आश्रम परिवार का मानना है कि चिकित्सक से अधिक अपराध और पाप तो इस साजिश में शामिल लोगों ने और मीडियाकर्मियों ने किया है, जिन्होंने सनातन संस्कृति और वैदिक चिकित्सा के प्रभावों से जनता को सीधे-सीधे वंचित करने की कोशिश की है, अपमानित करने की कोशिश की है। आश्रम परिवार ने ईश्वर से कामना की है कि ऐसे साजिशकर्ताओं, चिकित्सकों, मीडिया संस्थानों और मीडिया कर्मचारियों को सद्बुद्धि दे, ताकि वे भी आगे चलकर बिना किसी दुराग्रह, पूर्वाग्रह के सुंदर सनातनी मानवीय समाज बनाने में अपना सहयोग देकर इस कृत्य का पश्चाताप कर सकें।

करौली बाबा ने जानकारी दी है कि अप्रैल माह में पूर्णमासी से 5, 6 और 7 तारीख़ को आश्रम में विशाल यज्ञ व ध्यान शिविर का आयोजन निर्धारित है, जो कि प्रत्येक पूर्णमासी को होता है। इसमें दीक्षा पाए पुराने भक्तजन भी शामिल हो रहे हैं। इस ध्यान शिविर में ये सभी भटके हुए साजिशकर्ता, मीडिया संस्थान और मीडियाकर्मी भी आमंत्रित हैं, वे स्वयं आकर आश्रम और यहाँ की वैदिक पद्धतियों को देख लें, जाँच लें और सच जनता के सामने ले जाएँ।

उन्होंने यह यह अनुरोध भी किया है और चेतावनी भी है। उन्होंने चेताया है कि इसमें भी उनका प्रदर्शन सनातन संस्कृति या वैदिक चिकित्सा विरोधी पाया जाता है तो फिर आश्रम परिवार उनके विरूद्ध न्यायालय में जाकर सत्य की ताकत का अहसास कराएगा। बकौल बाबा, क्योंकि, जिनकी आस्था पर चोट पहुँची है, ऐसे आक्रोशित भक्तजन ऐसा चाहते हैं और आश्रम परिवार के लिए भक्तजनों की अपेक्षाएँ ही सर्वोपरि हैं। ‘करौली शंकर महादेव’ के प्रवक्ता अजय यादव ने ये बयान जारी किया है।

8 साल का बच्चा होगा तिब्बत का तीसरा बौद्ध धर्मगुरु: अमेरिका में जन्म, हिमाचल में समारोह; बोले दलाई लामा- मंगोलिया में मिलना शुभ

तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा (Dalai Lama) ने अमेरिका में जन्मे एक मंगोलियाई बच्चे को बौद्ध धर्म का तीसरा सबसे महत्वपूर्ण दर्जा दिया है। 87 साल के दलाई लामा ने 8 वर्षीय मंगोलियाई बच्चे को 10 वें खलखा जेटसन धम्पा रिनपोछे का पुनर्जन्म बताया है। द टाइम्स के अनुसार, यह बच्चा दलाई लामा और पंचेन लामा के बाद बौद्ध धर्म का तीसरा सबसे बड़ा धर्मगुरु बना है।

हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में 8 मार्च 2023 को नए धर्मगुरु के मिलने का समारोह आयोजित किया गया था। लेकिन इसकी जानकारी अब सामने आई है। समारोह में 600 मंगोलियाई मौजूद रहे। इस दौरान दलाई लामा ने कहा- “हमारे पूर्वजों के चक्रसंवर के कृष्णाचार्य वंश से गहरे रिश्ते थे। इनमें से एक ने मंगोलिया में एक मठ की भी स्थापना की थी। ऐसे में तीसरे धर्मगुरु का मंगोलिया में मिलना काफी शुभ है।”

मंगोलियाई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह बच्चा जुड़वाँ लड़कों में से एक है। इनके नाम अगुइदाई और अचिल्टाई अल्टानार है। इनके पिता का नाम अलतनार चिंचुलुन और माता का नाम मोनखनासन नर्मंदख है। बच्चे के पिता अलतनार चिंचुलुन एक विश्वविद्यालय में गणित के प्रोफेसर और राष्ट्रीय संसाधन समूह के कार्यकारी हैं। वहीं, लड़के की दादी मंगोलिया की गरमजाव सेडेन पूर्व सांसद रही हैं।

भड़क सकता है चीन

दलाई लामा का यह कदम काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में मंगोलियाई बच्चे को बौद्ध धर्म के आध्यात्मिक नेता के पुनर्जन्म के रूप में मान्यता देने से चीन भड़क सकता है। चीन पहले ही इस बात की घोषणा कर चुका है कि धर्मगुरु नियुक्त करने का अधिकार केवल उसके पास है। इससे पहले भी 1995 में जब दलाई लामा ने दूसरे सबसे बड़े धर्मगुरु पंचेन लामा को चुना था, तो चीन के अधिकारियों ने उसे जेल में डाल दिया था। इसके बाद चीन ने इस पद पर खुद के चुने हुए धर्मगुरु को नियुक्त किया था। अब तीसरे तिब्बती धर्मगुरु मिलने के बाद बौद्धों में उसकी सुरक्षा को लेकर चिंता है।

बता दें कि दलाई लामा ने 2016 में मंगोलिया का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने घोषणा की थी कि जेटसन धम्पा का एक नया अवतार पैदा हुआ है, जिसकी खोज चल रही है। इस यात्रा के बाद चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए आक्रोश व्यक्त किया था। चीन ने मंगोलिया को धमकी भी दी थी। दलाई लामा उनका जन्म 1935 में हुआ था। जब वह 2 साल के थे, तब उन्हें पिछले धर्मगुरु का पुनर्जन्म बताया गया था। तिब्बत पर चीन के कब्जे के बाद 1959 में दलाई लामा वहाँ से भागकर भारत आ गए थे। तिब्बती धर्म गुरु दलाई लामा को 10 दिसंबर, 1989 को शांति नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया था।

दादा बनने की लालू यादव की खुशी हुई काफूर, सुप्रीम कोर्ट ने बेल पर माँगा जवाब: झारखंड हाईकोर्ट द्वारा जमानत देने के खिलाफ CBI की याचिका

बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को बेटी के रूप में पहली संतान मिलने की खुशी उनके पिता एवं राजद सुप्रीमो लालू यादव को ज्यादा देर तक नहीं रह सकी। सुप्रीम कोर्ट ने चारा घोटालेे को लेकर उन्हें नोटिस जारी किया। सीबीआई ने सर्वोच्च न्यायालय में लालू यादव की जमानत रद्द करने के लिए याचिका दी थी। इसी पर यह नोटिस जारी कर जवाब माँगा गया है।

लालू यादव चारा घोटाले के एक मामले में सजायाफ्ता अपराधी हैं। वे अभी जमानत पर हैं। इस बीच सीबीआई ने अन्य मामलों से जोड़ते हुए लालू यादव की जमानत को रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने लालू से उनका जवाब माँगा है।

बता दें कि लालू यादव को जमानत पर रिहा झारखंड हाईकोर्ट ने किया है। हाईकोर्ट के इसी आदेश को सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। बता दें कि दोनों किडनी में खराबी के बाद पिछले दिनों वे सिंगापुर के अस्पताल में भर्ती हुए थे। वहाँ उनकी बेटी ने एक किडनी दी थी, जिसे उनके शरीर में प्रत्यारोपित किया गया है।

लालू यादव पर चारा घोटाले में ही कई केस हैं। इसके अलावा IRCTC, आय से अधिक संपत्ति और जॉब्स पर लैंड जैसे मामले भी चल रहे हैं। इन मामलों की जाँच सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रही है। इसके पहले ईडी ने इस मामले में 24 ठिकानों पर छापेमारी भी की थी।

छापेमारी में एक करोड़ रुपए नकद और 600 करोड़ की संपत्ति की जानकारी सामने आई थी। एजेंसी का कहना है कि लालू यादव ने यूपीए के पहले कार्यकाल में रेल मंत्री रहते हुए इस घोटाले को अंजाम दिया था। रिश्वत के रूप में जमीन लेकर लोगों को ग्रुप डी में नौकरी दी गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने लालू यादव को उसी दिन नोटिस भेजा है, जिस दिन वे पहली बार दादा बने हैं। लालू यादव नाना तो बन चुके थे, लेकिन दादा नहीं बने थे। बड़े बेटे तेज प्रताप यादव की शादी के दुखद के बाद छोटे बेटे तेजस्वी की शादी हुई थी। इसके बाद उनको पुत्री के रूप में पहली संतान हुई है।

‘दिल्ली में फहराएँगे इस्लामी झंडा, हर मदरसा बन जाएगा हथियारों से लैस छावनी’: बांग्लादेशी मौलाना का वीडियो वायरल, ‘जिहाद’ के ऐलान के बाद ‘अल्लाहु अकबर’ की गूँज

भारत और बांग्लादेश के बीच गहरे व्यापारिक रिश्ते हैं, लेकिन इस्लामी कट्टरपंथी नफरत फैलाने से बाज नहीं आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर एक कट्टरपंथी बांग्लादेशी मौलाना का विवादित बयान खूब वायरल हो रहा है। मौलाना का नाम इनायतुल्लाह अब्बासी (Enayetullah Abbasi) है। वह वीडियो में भारत के खिलाफ जहर उगल रहा है। अब्बासी धमकी दे रहा है कि बांग्लादेशी मुस्लिम दिल्ली में इस्लाम का झंडा फहराएँगे। अगर कोई बांग्लादेश पर कब्जा करने आता है, तो हर मदरसे को हथियारों से लैस कर छावनी में तब्दील कर दिया जाएगा। जिहाद के लिए हर मुस्लिम बांग्लादेश की सेना के साथ खड़ा होगा।

‘वॉइस ऑफ बांग्लादेश’ के ट्विटर हैंडल ने 23 मार्च 2023 को यह वीडियो शेयर किया था। वीडियो के साथ इसमें लिखा है, “इनायतुल्ला अब्बासी बांग्लादेशी इस्लामिक स्कॉलर हैं, जो बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ अपने जहरीले बयानों के लिए जाना जाता है। उसने भारत में इस्लाम का झंडा फहराने की धमकी दी है और बांग्लादेश की सेना को भारत के खिलाफ जिहाद की तैयारी करने के लिए कहा है।”

बांग्लादेश के मौलाना का वीडियो को ‘पाकिस्तान अनटोल्ड’ नाम के ट्विटर हैंडल ने रविवार (26 मार्च, 2023) को शेयर किया। इसमें वह भारत के हिंदुओं को धमकाते हुए कहता है, “म्यांमार का हमारे लिए कोई महत्व नहीं है। बांग्लादेश के मुस्लिमों में इतनी ताकत है कि वो दिल्ली में भी इस्लाम का झंडा फहरा देंगे। इंशाअल्लाह यह भविष्य में होगा।” इसके बाद उसे सुन रहे मुस्लिमों ने ‘इस्लाम के दुश्मन काफिर हैं’ और ‘सावधान, सावधान और अल्लाह हू अकबर’ का नारा लगाया।

सोशल मीडिया पर यह वीडियो देखने के बाद लोग भड़के हुए हैं। एक यूजर ने लिखा, “मैं इसलिए भारतीय गवर्नमेंट को बताता हूँ कि भारत किसी भी मुल्ले या मुस्लिमों की मदद ना करे, चाहे वो किसी और देश का हो या अपने देश का… क्योंकि आज तक क्या किया है बांग्लादेशी लोगों के लिए भारत ने, वो इतिहास गवाही दे रहा है… लेकिन इन मुस्लिमों को बस मुस्लिम ही अच्छे लगते हैं।”

एक अन्य यूजर ने कहा कि म्यांमार को सँभाल लो, उतना ही काफी है।

द्रुपत माथुर लिखते हैं, “इतना बोलने पर पसीना आ गया। बार-बार मुँह पोंछ रहा है। हिंदुस्तान का नाम लेने का फैशन हो गया है।”

सोशल मीडिया पर और लोगों ने भी मौलाना को आड़े हाथों लिया उन्होंने कहा कि आ जाओ…तुमको भी सबक सीखा देंगे। जय हिन्द की सेना।

बता दें कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले कोई नई बात नहीं है। ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं। 15 जुलाई 2022 (शुक्रवार) को जुमे की नमाज के बाद नरैल के लोहागारा में चरमपंथी इस्लामी भीड़ ने हिन्दुओं के घरों, मंदिर और दुकानों में तोड़फोड़ की थी। यह हमला एक फेसबुक पोस्ट का बहाना ले कर किया गया था जिसे लिखने का आरोप एक 18 साल के लड़के पर था।