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फिलीपींस में सिख दंपति को घर में घुस ताबड़तोड़ मारी गोली, तुरंत मौत: घटना का पूरा CCTV वीडियो सामने आया

फिलीपींस (Philippines) की राजधानी मनीला में शनिवार रात (25 मार्च 2023) अज्ञात हमलावर ने पंजाबी जोड़े की गोली मारकर हत्या कर दी। ये पंजाब के जालंधर के रहने वाले थे। दंपति की पहचान सुखविंदर सिंह (41) और किरणदीप कौर (33) के रूप में हुई है। उनकी हत्या करने का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुखविंदर के बड़े भाई लखवीर सिंह भी अपने भाई के साथ रहते थे। कुछ दिन पहले ही वह एक पारिवारिक समारोह में शामिल होने के लिए विदेश से वापस अपने गाँव आए थे। जालंधर के मेहसमपुर गाँव में मृतक दंपति के परिजनों को सोमवार (27 मार्च 2023) देर शाम इस घटना के बारे में पता चला।

सोशल मीडिया पर उनकी हत्या करने का वीडियो वायरल हो गया है। इसमें साफ दिखाई दे रहा है कि हमलावर ने सुखविंदर को 3 गोलियाँ मारकर और उसकी पत्नी को 2 गोलियाँ मारकर उनकी हत्या कर गई। मृतक के भाई ने बताया कि उनका परिवार पिछले 19 साल से मनीला में फाइनेंस का कारोबार कर रहा था। सुखविंदर की किरणदीप से तीन साल पहले ही शादी हुई थी। वह भी पाँच महीने पहले मनीला में शिफ्ट हो गई थी। उनकी किसी के साथ कोई पुरानी रंजिश नहीं थी।

लखवीर ने बताया, “हम उसे (सुखविंदर सिंह) रविवार (26 मार्च 2023) से बार-बार फोन कर रहे थे, लेकिन वह कोई जवाब नहीं दे रहा था। मैंने अपने चाचा को उनके घर आने के लिए कहा, जहाँ उन्होंने मेरे भाई और उसकी पत्नी को खून से लथपथ पाया।”

लखवीर ने आगे कहा, “मेरे परिवार की किसी से कोई दुश्मनी नहीं है। हम चाहते हैं कि भारतीय अधिकारी इस मामले को फिलीपींस में अपने समकक्ष के समक्ष उठाएँ, ताकि इस घटना को अंजाम देने वाले आरोपितों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जा सके।”

बता दें कि यह कोई पहली घटना नहीं है, जब फिलीपींस में भारत के लोगों की हत्या कि गई हो। इस साल जनवरी में भी मोगा के एक कबड्डी कोच गुरप्रीत सिंह गिंदरू (43) की राजधानी मनीला में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पाखरवाड़ गाँव के ग्रामीणों ने बताया था कि गुरप्रीत करीब चार साल पहले रोजी-रोटी कमाने के लिए फिलीपींस गया था। कारोबार चलाने के अलावा वह मनीला में युवाओं को कबड्डी की कोचिंग भी देता था।

‘प्रतिबंधित या आतंकी संगठन नहीं है सनातन संस्था: बॉम्बे हाईकोर्ट ने संगठन के सदस्यों को दी जमानत, सबूत पेश नहीं कर पाई महाराष्ट्र ATS

बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार (24 मार्च, 2023) को टिप्पणी की कि सनातन संस्था कोई प्रतिबंधित आतंकी संगठन नहीं है। हाईकोर्ट सनबर्न टेरर अटैक कॉन्सपिरेसी 2017 और नालासोपारा आर्म्स हॉल केस 2018 मामले में आरोपितों के जमानत अर्जी पर सुनवाई कर रही थी। हाईकोर्ट ने एटीएस द्वारा आरोपित बनाए गए संस्था के दो सदस्यों को जमानत दे दी। कोर्ट की तरफ से कहा गया कि आरोपितों के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं।

स्पेशल कोर्ट द्वारा जमानत अर्जी ठुकराए जाने के बाद आरोपित लीलाधर उर्फ विजय लोधी और प्रताप हाजरा ने हाईकोर्ट में अपील की थी। इस अपील पर जज सुनील शुकरे और कमल खाता की बेंच ने सुनवाई की। महाराष्ट्र एटीएस ने यूएपीए के तहत लीलाधर और प्रताप हाजरा को गिरफ्तार किया था। एटीएस की तरफ से आरोप लगाए गए थे कि लोधी सनातन संस्था का हिस्सा था जिनका मकसद हिंदू राष्ट्र की स्थापना करना है।

एटीएस ने आरोप लगाया था कि लीलाधर लोधी, प्रताप हाजरा और उनके साथियों ने कच्चे बम तैयार किए थे। आतंकवाद निरोधक दस्ते ने वर्ष 2018 में महाराष्ट्र के नालासोपारा में वैभव राउत के घर से कई कच्चे बम बरामद किए थे। इस मामले में प्रताप हाजरा,लीलाधर लोधी और वैभव राउत समेत कई लोगों को आरोपित बनाया गया था।

कोर्ट ने अपनी सुनवाई के दौरान कहा कि मिले बम लीलाधर और प्रताप हाजरा के ही हैं, इसका स्पष्ट सबूत नहीं है। क्योंकि, जिस घर से बम बरामद हुए उसका मालिक कोई और है। एटीएस ने आरोप लगाए थे कि सनातन संस्था के सदस्यों को विस्फोटक और फायर आर्म का इस्तेमाल करने की ट्रेनिंग दी गई थी। कोर्ट ने इस पर कहा कि एटीएस द्वारा इसपर कोई भौतिक सबूत पेश नहीं किया गया। जिससे पता चले प्रशिक्षण शिविर वास्तव में लगाए गए थे।

इसके अलावा एटीएस ने संस्था के सदस्यों पर सनबर्न फेस्टिवल 2017 के दौरान हमले की साजिश का आरोप लगाया था। आरोप था कि हाजरा ने मोबाइल के जरिए सनबर्न फेस्ट हमला साजिश के मुख्य आरोपित से बात की थी। कोर्ट ने कहा कि हाजरा का फोन 2020 में जब्त हुआ। हो सकता है कि 2017 में उस नंबर का इस्तेमाल कोई और कर रहा हो। कोर्ट द्वारा इस संबंध में सबूत माँगे जाने पर एटीएस पर्याप्त सबूत पेश करने में असमर्थ रहा। इसके बाद कोर्ट ने 50-50 हजार के निजी मुचलके पर लोधी और हाजरा को जमानत दे दी गई।

अदालत ने जोर देते हुए कहा कि सनातन संस्था को गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम 2004 के तहत प्रतिबंधित नहीं किया गया है। न ही इसका किसी आतंकी संगठन से कुछ लेनादेना है। वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार यह एक चैरिटेबल ट्रस्ट है। जिसका मकसद आध्यात्मिक ज्ञान को बढ़ावा देना है। इसकी स्थापना 23 मार्च 1999 को हुई थी। भक्तराज महाराज के साथ मिलकर जयंत बालाजी अठावले ने इसकी स्थापना की थी।

बिना अनुमित खाली फ़्लैट में लगाया टेंट, नमाज के लिए बाहर से बुलाई भीड़: स्वरा-Wire गिरोह ने फैलाया प्रोपेगंडा, यूपी पुलिस को बदनाम करने की साजिश

‘अल जजीरा’ और ‘द वायर’ के लिए काम करने वाले पत्रकार मीर फैज़ल ने मंगलवार (28 मार्च, 2023) को एक भ्रामक ट्वीट किया है। इस ट्वीट में उन्होंने उत्तर प्रदेश के नोएडा की एक सोसाइटी में मुस्लिमों को नमाज़ पढ़ने से रोके जाने की बात कही है। फैज़ल ने पुलिस पर भी टेंट आदि उखाड़ देने का आरोप लगाया है। फैज़ल के इस ट्वीट पर स्वरा भास्कर ने नमाज़ का विरोध करने वालों की हरकत को शर्मनाक बताया है।

वहीं, ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की पत्रकार नेहा यादव ने उत्तर प्रदेश पुलिस को इस्लामॉफ़ोबिक बताया है। ऑपइंडिया की जमीनी पड़ताल में ये तमाम दावे सच्चाई से परे मिले।

यह मामला नोएडा के बिसरख थानाक्षेत्र में आने वाले सुपरटेक इको विलेज- 2 का है। लगभग डेढ़ मिनट के इस वीडियो में सोसाइटी के अंदर कुछ लोग जमा दिख रहे हैं। मौके पर पुलिस की गाड़ी भी पहुँची हुई है। भीड़ आपस में एक दूसरे से बहस करती दिख रही है। पुलिस को देखते ही कुछ लोग जाने लगे तो बाकी लोगों ने उन्हें कहीं न जाने की सलाह दी। स्वरा भास्कर ने भीड़ को लानत भेजते हुए इस हरकत को तुच्छता कहा है।

‘हिंदुस्तान टाइम्स की पत्रकार नेहा यादव ने तो उत्तर प्रदेश पुलिस पर इस्लामोफोबिया तक का आरोप जड़ दिया। नेहा यादव ने पुलिस पर देश के संवैधानिक ढाँचे को बिगाड़ने का भी आरोप लगाया।

नेहा यादव का ट्वीट

नमाज़ न पढ़ना मुस्लिम समुदाय का फैसला

मीर फैसल द्वारा शेयर वीडियो पर प्रोपोगेंडा फैला रहे कुछ लोगों के दावे के उलट नोएडा पुलिस का बयान सामने आया है। ग्रेटर नोएडा के DCP ने बताया है कि एक खाली पड़े कमर्शियल मार्किट के तीसरी मंजिल पर नमाज़ अदा की जाती थी। इस दौरान सोसाइटी के ही लोगों की मौजूदगी हुआ करती थी। हिन्दू समुदाय का आरोप है कि नमाज पढ़ने के लिए कुछ बाहरी लोग भी आ रहे थे। पुलिस का कहना है कि हिन्दू समाज के लोगों ने बाहरी लोगों का विरोध किया था न कि सोसाइटी के स्थानीय लोगों का।

इन सबके साथ पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अब उस स्थान पर नमाज़ न पढ़ने का फैसला खुद मुस्लिम समुदाय के लोगों ने लिया है। मौके पर शाँति व्यवस्था कायम है।

नहीं थी आयोजन की आधिकारिक अनुमति

ऑपइंडिया द्वारा स्थानीय स्तर पर जुटाई गई जानकारी के मुताबिक सोसाइटी में नमाज़ के आयोजकों ने अपने आयोजन के लिए कोई भी आधिकारिक अनुमति नहीं ली थी। इसके बावजूद मौके पर बाकायदा टेंट आदि लगा दिए गए थे। खाली पड़े फ्लोर में लगे इस टेंट में कई लोगों के जमा होने लायक व्यवस्था की गई थी।

हमें बताया गया कि पिछले कुछ वर्षों से सोसाइटी की खाली जगह पर वहीं के स्थानीय लोग नमाज पढ़ा करते थे। इस बार बाहरी लोगों को बुलाने पर स्थानीय लोगों ने विरोध व्यक्त किया। जब हमने इस बावत SHO बिसरख से बात की तो उन्होंने बताया कि मामले का सोसाइटी के लोगों की सर्व सहमति से शांति और सौहार्दपूर्ण समाधान कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह के तनाव, अभद्रता आदि के आरोप निराधार हैं।

रमजान में फिर जलाई गई कुरान, तुर्की के झंडे में आग भी लगाई: डेनमार्क में हुई घटना पर इस्लामी देश भड़के, कहा- मुस्लिमों को उकसाया जा रहा

यूरोपीय देश डेनमार्क में एक बार फिर कुरान जलाने की घटना सामने आई है। इससे पहले इसी साल जनवरी में भी यहाँ कुरान जलाई गई थी। कुरान जलाने वाले लोगों ने तुर्की का झंडा भी जलाया। तुर्की, सऊदी अरब, पाकिस्तान, जॉर्डन समेत कई इस्लामिक देशों ने इस घटना की निंदा की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘पैट्रियटर्न गेर’ नामक संगठन ने शुक्रवार (24 मार्च 2023) को डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन में तुर्की दूतावास के सामने कुरान जलाने की इस घटना को अंजाम दिया। यही नहीं इन लोगों ने तुर्की के झंडे को भी जलाया है। संगठन ने इस पूरी घटना को अपने फेसबुक पेज पर भी लाइव किया।

कुरान जलाने की घटना सामने आने के बाद से इस्लामिक देश बौखलाए हुए हैं। इसको लेकर तुर्की के विदेश मंत्रालय ने कहा है, “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में इस तरह की घटना को स्वीकार नहीं किया जाएगा। रमजान के पवित्र इस्लामी महीने में किए गए इस कृत्य से एक बार फिर स्पष्ट रूप से पता चला है कि यूरोप में इस्लामोफोबिया, भेदभाव और जेनोफोबिया खतरनाक स्तर पर पहुँच गया है। पहले की घटनाओं से इन लोगों ने कोई सीख नहीं ली।”

वहीं, सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने कहा है, “कोपेनहेगन में तुर्की के दूतावास के सामने एक संगठन द्वारा पवित्र कुरान को जलाने की हम कड़ी निंदा करते हैं। सऊदी अरब बातचीत, सहिष्णुता और सम्मान के मूल्यों को मजबूत करने की जरूरत पर बल देता है। नफरत और उग्रवाद को हम अस्वीकार करते हैं।”

जॉर्डन के विदेश मंत्रालय ने कहा है, “यह घटना किसी भी तरह से स्वीकार नहीं किया जाएगा। रमजान के पवित्र महीने में यह नस्लवादी और मुस्लिमों को भड़काने वाला काम है। इस घटना ने न केवल हिंसा को उकसाया है बल्कि महजब का भी अपमान किया है।”

कतर ने भी इस घटना की निंदा करते हुए कहा है कि रमजान के महीने में कुरान को जलाने की इस घटना ने पूरी दुनिया के दो अरब से भी अधिक मुस्लिमों को उकसा दिया है।

वहीं, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मुमताज जाहरा बलोच ने एक बयान में कहा है, “इस तरह की घटनाएँ जानबूझकर की जा रही हैं। बार-बार हो रही ऐसी घटना मुस्लिमों और उनकी आस्था के खिलाफ बढ़ती नफरत, नस्लवाद और इस्लामोफोबिया का उदाहरण है। इसके अलावा, संयुक्त अरब अमीरात, मोरक्को, बहरीन समेत कुछ अन्य इस्लामिक देशों ने इसकी निंदा की है।

जनवरी में भी जलाई गई थी कुरान

इससे पहले डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन और स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में स्थित तुर्की दूतावास के सामने इसी साल जनवरी में कुरान जलाने की घटना सामने आई थी। कुरान जलाने वाले व्यक्ति की पहचान रासमस पलुदान के रूप में हुई थी। पलुदान के पास डेनमार्क और स्वीडन दोनों देशों की नागरिकता है। दोनों ही देश पड़ोसी हैं। इसलिए वह आसानी से दोनों में जाकर इस घटना को अंजाम दिया था।

पोर्न स्टार निकला अमेरिका का जज, अब नौकरी से निकाला गया: पैसे लेकर बेचता था फोटो-वीडियो, हस्तमैथुन का भी वीडियो सामने आया

अमेरिका के एक जज को मूनलाइटिंग के आरोप में नौकरी से निकाल दिया गया है। उसे अपने वर्किंग पीरियड के बाद पोर्न स्टार के रूप में काम करते हुए पाया गया। न्यूयॉर्क पोस्ट के अनुसार, 33 वर्षीय ग्रेगरी ए लोके (Gregory A. Locke) न्यूयॉर्क सिटी (एनवाईसी) के पूर्व जज हैं। लोके ने एडल्ट प्लेटफॉर्म OnlyFans ओनलीफैंस और http://JustFor.Fans पर एक पोर्न स्टार के रूप में कई वीडियो और फोटो पोस्ट की है।

पिछले हफ्ते अधिकारियों ने उनके गैर-पेशेवर व्यवहार के कारण उन्हें नौकरी से निकाल दिया। बताया जा रहा है कि जज ने अपने काम के बाद के घंटों के दौरान एक पोर्न स्टार के रूप में काम किया। लेके ने अपनी वीडियो और फोटो को देखने के लिए लोगों से प्रति माह 987 रुपए ($12) वसूले। उसने 100 से अधिक एडल्ट पोस्ट तैयार किए, जिनमें हार्डकोर पोर्नोग्राफी और व्यभिचार दिखाया गया था।

ग्रेगरी ए लोके का JustFor.Fans पर एक और एक्स-रेटेड अकाउंट भी है, जहाँ वह 821 रुपए ($9.99) चार्ज करता है। उसने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर कई बोल्ड फोटो भी शेयर की हैं।

OnlyFans पर ग्रेगरी ने अपने बायो में लिखा है, “व्हाइट कॉलर प्रोफेशनल दिन में रात में बहुत अनप्रोफेशनल। हमेशा शौकिया, हमेशा फूहड़।” ग्रेगरी ए लोके के अकाउंट में दर्जनों तस्वीर और वीडियो हैं। उन्होंने ओनलीफैन्स पर एक पोस्ट में लिखा, “मैं सिर्फ एक पुरुष द्वारा मुझे गर्भ धारण कराकर मजदूर दिवस मनाना चाहता हूँ।”

फोटो साभार: डेली मेल

कैमरे पर हस्तमैथुन करने से पहले उन्होंने नवंबर 2022 में लिखा, “अगर मैं इसे बाहर नहीं जाने देता, तो मैं कभी भी काम पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाता।” इसके अलावा उन्होंने एक अन्य पोस्ट में लिखा, “देखो मैं संभोग सुख के दौरान किस तरह से अपने काम के बीच में पोर्न देख रहा हूँ।”

हालाँकि, शहर के अधिकारी लोके के इस काम से पूरी तरह से अनजान थे। उन्हें यह भी नहीं पता था कि वह ऑनलाइन अपनी अश्लील वीडियो और फोटो भी पोस्ट करता है। आपको जानकार हैरानी होगी कि लोके ने अपने वैकल्पिक ट्विटर अकाउंट पर इस बात को कभी भी नहीं छुपाया कि वह एक जज भी है। सोशाल मीडिया पर उसने दावे के साथ कहा कि वह पोर्न इंडस्ट्री में काम करते हुए भी एक जज है और कानून का पालन करता है।

बता दें कि लोके के गैर पेशेवर व्यवहार को न्यूयॉर्क सिटी के अधिकारियों ने बहुत गंभीरता से लिया था। सिटी काउंसिलवॉमन विकी पलाडिनो ने बताया, “इस शहर को हर लेवल पर अपनी कोर्ट में पूर्ण विश्वास होना चाहिए। लोके जैसे व्यक्तियों को कानूनी पदों पर नियुक्त करना हमारे संस्थानों की व्यावसायिकता और निष्पक्षता में लोगों के विश्वास को खत्म करता है।”

‘UP पुलिस के हवाले मत करो’ : SC में खारिज हुई अतीक अहमद की याचिका, ‘जान का खतरा’ बता लगाई थी गुहार

प्रयागराज एमपी/एमएलए कोर्ट द्वारा दोषी करार दिए जाने से पहले अतीक अहमद को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा। अतीक अहमद ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर जान को खतरा बताया था। याचिका में माँग की गई थी कि उसे यूपी पुलिस के हवाले न किया जाए। इस पर कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि अतीक अहमद की सुरक्षा का ख्याल राज्य सरकार रखेगी।

अतीक अहमद की तरफ से दी गई याचिका पर जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की बेंच ने सुनवाई की। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट दखल नहीं दे सकती। सभी नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है। इस दौरान अतीक की तरफ से पेश हुए वकील ने कहा कि विधानमंडल में नेताओं द्वारा दिए गए बयान से अतीक के सुरक्षा को लेकर चिंता है। ऐसे में वो सुरक्षा की माँग कर रहे हैं। इस पर कोर्ट ने उन्हें हाईकोर्ट जाने की सलाह दी।

दरअसल, गुजरात के साबरमती जेल से उत्तर प्रदेश के नैनी जेल लाए गए अतीक अहमद ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर सुनवाई की माँग की थी। इस याचिका में उसने गुजरात के साबरमती जेल से यूपी के नैनी जेल ट्रांसफर किए जाने का विरोध किया था।

याचिका में कहा गया था कि यूपी पुलिस अहमदाबाद में ही उनसे पूछताछ कर सकती है। साथ ही अर्जी में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी की बात कही गई थी। दरअशल, अतीक को एनकाउंटर का डर सता रहा है। सुप्रीम कोर्ट को दी गई याचिका में इस बात का भी जिक्र था।

दूसरी तरफ उमेश पाल अपहरण मामले में अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ अहमद को कोर्ट में पेश किया गया है। माफिया अतीक को उमेश पाल अपहरण केस में कोर्ट ने दोषी करार दे दिया है। साथ ही 17 साल पुराने केस में भी सबी 10 आरोपितों को दोषी करार दिया गया है।

भारत में ब्लॉक किया गया BBC पंजाबी का ट्विटर हैंडल, खालिस्तानी अमृतपाल सिंह पर चला रहा प्रोपेगंडा

पंजाब में खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह के खिलाफ जारी कार्रवाई के बीच बीबीसी पर बड़ा एक्शन लिया गया है। सरकार ने बीबीसी न्यूज़ पंजाबी (BBC News Punjabi) के ट्विटर अकाउंट पर भारत में रोक लगा दी है। इससे पहले भी कुछ अन्य ट्विटर अकाउंट पर रोक लगाई गई थी।

बीबीसी पंजाबी के ट्विटर हैंडल ‘@bbcnewspunjabi’ पर जाने में एक मैसेज दिखाई दे रहा है। इस मैसेज में कहा गया है – कानूनी माँग के जवाब में इस अकाउंट को भारत में रोका गया है। ऐसा पहली बार नहीं है जब बीबीसी पर इस तरह की कार्रवाई की गई हो।

बीबीसी न्यूज़ पंजाबी के ट्विटर अकाउंट का स्क्रीनग्रैब

इससे पहले सरकार ने बीबीसी की प्रोपेगेंडा डॉक्यूमेंट्री ‘इंडिया: द मोदी क्वेश्चन’ के प्रसारण पर भी भारत में रोक लगा दी थी। यह डॉक्यूमेंट्री साल 2022 में हुए गुजरात दंगो पर आधारित थी। इस डॉक्यूमेंट्री में भारत की एकता और अखंडता पर प्रहार करने की कोशिश की गई थी।

बता दें कि इससे पहले 19 मार्च, 2023 को खालिस्तान समर्थक सांसद और शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के अध्यक्ष सिमरनजीत सिंह मान का ट्विटर अकाउंट भी इसी तरह बैन किया गया था। वह संगरूर लोकसभा सीट से सांसद हैं। सिमरनजीत के ट्विटर अकाउंट पर भी “कानूनी माँग के जवाब में इस अकाउंट को भारत में रोका गया” का मैसेज दिखाई दे रहा है।

यही नहीं, 20 मार्च 2023 को कनाडा के सांसद जगमीत सिंह का ट्विटर अकाउंट भी भारत में बैन किया गया था। बता दें कि जिन ट्विटर अकाउंट पर कार्रवाई की जा रही है उन पर अमृतपाल सिंह के खिलाफ पंजाब पुलिस की कार्रवाई को लेकर गलत तरीके से दिखाने या बताने का आरोप है।

फरार है अमृतपाल सिंह

बता दें कि खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह पुलिस कार्रवाई से बचने के फरार हो गया है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस और जाँच एजेंसियाँ लगातार प्रयास कर रहीं हैं। इस बात की भी आशंका जताई जा रही है कि अमृतपाल सिंह नेपाल भाग गया होगा। इसको लेकर भारत सरकार के अनुरोध के बाद नेपाल ने उसे निगरानी सूची में रखा हुआ है। भारत ने नेपाल से कहा है कि अमृतपाल सिंह को किसी अन्य देश में भागने की अनुमति नहीं दी जाए।

पंजाब बठिंडा रेंज के आईजी सुखचैन सिंह ने कुछ दिन पहले जानकारी दी थी कि पंजाब पुलिस ने 207 लोगों को पकड़ा है, जिनमें 177 लोगों को हिरासत में रखा गया है। वहीं, 30 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया गया है। इसके पहले IG ने कहा था कि जिन्हें हिरासत में रखा गया है, उन्हें चेतावनी देकर छोड़ा जा सकता है। इसके बाद 24 मार्च 2023 को 44 लोगों को रिहा कर दिया गया था। इधर, अमृतपाल की एक नई तस्वीर सामने आई है। इस तस्वीर में वह अपने साथी पपलप्रीत के साथ हाइवे के किनारे बैठकर एनर्जी ड्रिंक रहा है। ये तस्वीर कहाँ की है, इसका पता नहीं लग पाया है। हालाँकि, दोनों को सुरक्षा एजेंसियाँ हर जगह तलाश रही हैं।

इसके पहले भी अमृतपाल की कई तस्वीरें सामने आई थीं। इन तस्वीरों में वह जुगाड़ पर बैठा दिख रहा था तो एक में वह छाता लिए हुए कहीं जा रहा है। इसके अलावा, एक अन्य तस्वीर में वह बैग लिए हुए और अपना मुँह ढँक कर तेजी से आगे जाते हुए दिख रहा था।

जामिया हिंसा मामले में दिल्ली HC ने पलटा निचली अदालत का फैसला, शरजील इमाम समेत 9 पर चलेगा केस: कोर्ट ने कहा- हिंसा करना अधिकार में नहीं आता

साल 2019 जामिया हिंसा मामले में दिल्ली कोर्ट ने आज (28 मार्च 2023) निचली अदालत का फैसला पलटते हुए अपना निर्णय सुनाया। इस दौरान उन्होंने 11 में से 9 आरोपितों के खिलाफ आरोप तय किए। इनमें शरजील इमाम, सफूरा जरगर और आसिफ इकबाल समेत 9 का नाम है। इससे पहले निचली अदालत ने 11 आरोपितों को आरोपमुक्त किया था। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट में फैसले को लेकर अपनी याचिका डाली थी।

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने फैसला देते हुए कि शांतिपूर्ण रूप से एकजुट होने के अधिकार में कुछ प्रतिबंधों के अधीन है और हिंसा करना या हिंसक भाषणा देना किसी भी हाल में उस अधिकार में संरक्षित नहीं होते। कोर्ट ने कुछ आरोपितों पर आरोप तय करते हुए कहा, “वीडियो के शुरू में ही दिख रहा है कि भीड़ की पहली लाइन में खड़े होकर लोग दिल्ली पुलिस मुर्दाबाद के नारे लगा रहे थे और हिंसात्मक ढंग से बैरिकेड को धक्का दे रहे थे।”

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कोर्ट ने मोहम्मद कासिम, अनवर, शहजर राणा खान, उमर अहमद, मोहम्मद बिलाल नदीम, शरजील इमाम, सफूरा जरगर और चंदा यादव के खिलाफ आईपीसी की धारा 143, 147, 149, 186, 353, 427 और प्रीवेंशन ऑफ डैमेज टू पब्लिक प्रॉपर्टी एक्ट की धारा 3 के तहत आरोप तय किए हैं।

वहीं मोहम्मद शोएब और मोहम्मद अबुजर पर आईपीसी की धारा 143 लगाई गई है बाकी सभी धाराओं से कोर्ट ने उनको बरी कर दिया है। जबकि आरिफ इकबाल तन्हा को धारा 308, 323, 341 और 435 से बरी किया गया है। बाकी सब धाराओं में उसपर आरोप तय हैं।

उमेश पाल की किडनैपिंग में अतीक अहमद दोषी करार, MP-MLA कोर्ट के बाहर ‘जूतों की माला’ से हो रहा इंतजार

माफिया अतीक अहमद को प्रयागराज कोर्ट ने उमेश पाल के अपहरण के मामले में दोषी करार दिया है। बता दें कि विधायक राजू पाल की हत्या के मामले में उमेश पाल गवाह थे, जिनका अपहरण कर उन्हें डराया-धमकाया गया था। हालाँकि, फरवरी 2023 में, अपहरण की घटना के 17 साल बाद उमेश पाल की अतीक अहमद और उसके परिवार ने हत्या भी करा दी।

इसी बीच प्रयागराज MP-MLA कोर्ट के बाहर एक व्यक्ति जूतों की माला लेकर खड़ा था। उसने दावा किया कि वो अतीक अहमद को ये माला पहनाना चाहता है। उसने ये भी दावा किया कि ये जूते उमेश पाल के परिवार वालों के हैं। हालाँकि, अतीक अहमद को पुलिस वाले घेरे हुए थे। 25 जनवरी, 2005 को राजू पल की हत्या कर दी गई थी। उमेश पाल की पत्नी की शिकायत पर धूमनगंज पुलिस थाने में मामला दर्ज कराया गया था।

समाजवादी पार्टी के शासनकाल में प्रयागराज में अतीक अहमद की तूती बोलती थी। 2004 के लोकसभा चुनाव में उसने फूलपुर से जीत दर्ज की थी। साथ ही वो इलाहाबद पश्चिम सीट से लगातार 5 बार विधायक भी रह चुका है। उसके खिलाफ 100 से भी अधिक आपराधिक मामले चल रहे हैं। वो सोनेलाल पटेल द्वारा गठित ‘अपना दल’ का अध्यक्ष भी रह चुका है। उसकी बीवी शाइस्ता परवीन भी उमेश पाल की हत्या के मामले में फरार है।

अब अदालत अतीक अहमद सहित सभी दोषियों को सज़ा भी सुनाएगी। हालाँकि, उमेश पाल के परिजनों ने अतीक अहमद के लिए फाँसी की सज़ा की माँग की है। ये पहली बार हो रहा है, जब किसी मामले में अतीक अहमद को दोषी करार दिया गया हो। क्योंकि, पहले गवाहों को डराने-धमकाने से लेकर जजों के पीछे हटने तक के मामले सामने आते थे। अतीक अहमद को फ़िलहाल सुप्रीम कोर्ट से भी झटका मिला है। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि स्टेट मशीनरी कानून के हिसाब से कार्रवाई करेगी।

उमराह के लिए जा रहे थे हज यात्री, बस का ब्रेक फेल होने से 20 की झुलस कर मौत: पहाड़ी से ऊपर उठा दिखा काला धुआँ, वीडियो आया सामने

सऊदी अरब में उमराह के लिए जा रहे यात्रियों की बस दुर्घटना का शिकार हो गई है। इस हादसे में अलग-अलग देशों के लगभग 20 यात्रियों की मौत हो गई है। लगभग 29 अन्य यात्री घायल बताए जा रहे हैं, जिनका इलाज चल रहा है। हादसे की वजह बस का ब्रेक फेल होना बताया गया है। हादसे के दौरान बस में आग लग गई थी। इस हादसे का वीडियो भी वायरल हो रहा है। घटना सोमवार (27 मार्च, 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटनास्थल सऊदी अरब की असीर प्रांत और आभा शहर को जोड़ने वाली सड़क है। यहाँ एक बस में लगभग 50 की संख्या में लोग सवार हो कर मक्का की तरफ जा रहे थे। ये सभी उमराह करने मक्का की तरफ निकले थे। अचानक ही बस के ब्रेक फेल हो गए। ड्राइवर ने बस कंट्रोल में रखने की काफी कोशिश की, लेकिन वो नाकाम रहा। बस सड़क के किनारे बने एक पुल से टकरा कर पलट गई। इस टक्कर से बस में आग लग गई। जब तक कोई कुछ समझ पाता तब तक 20 यात्री बुरी तरह से झुलस गए, जिनकी मौत हो गई।

सऊदी अधिकारीयों के मुताबिक, जिस रास्ते पर हादसा हुआ है वह पहाड़ों के बीच से हो कर गुजरती है। इस राह पर 11 सुरंगे और 32 पुल बने हुए हैं। घटना के बाद पुलिस, फायर ब्रिगेड और एम्बुलेंस मौके पर पहुँची। घायलों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है जहाँ उनका इलाज चल रहा है। इस हादसे का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में एक ऊँचे पुल के नीचे से आग की लपटें उठती दिखाई दे रहीं हैं। नीचे से उठ रहा काला धुआँ भी पहाड़ी के ऊपर तक जा रहा है।

गौरतलब है कि अक्टूबर 2019 में सऊदी अरब में ही मदीना के पास एक और बस हादसा हुआ था। तब यात्रियों से भरी बस एक दूसरे वाहन से भिड़ गई थी। इस हादसे में हज करने जा रहे 35 लोगों की मौत हो गई थी जबकि 4 लोग घायल हो गए थे। इसके अलावा अगस्त 2022 में भी मक्का की ओर जा रही एक बस के एक्सीडेंट में 2 लोगों की मौत हो गई थी और 18 लोग घायल हो गए थे।