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मुझे मारना चाहते हैं… अतीक अहमद को लेकर साबरमती जेल से निकली यूपी पुलिस, काफिले के पीछे आने से मीडिया को रोका गया: 1300 Km का है रास्ता

उमेश पाल हत्याकांड के मुख्य आरोपित अतीक अहमद (Atique Ahmed) को अहमदाबाद के साबरमती जेल से प्रयागराज लाया जा रहा है। यूपी एटीएस उसे लेकर साबरमती जेल से निकल चुकी है। जेल से बाहर आने के बाद अतीक ने मीडिया के सामने अपनी हत्या की आशंका जताई है। वहीं, पुलिस ने अतीक अहमद को लेकर निकले काफिले को मीडिया पीछा करते हुए कवर करना चाहती थी। लेकिन, इससे पहले ही पुलिस ने उन्हें रोक दिया।

उत्तर प्रदेश एटीएस और यूपी पुलिस की एक टीम अतीक अहमद को प्रयागराज शिफ्ट करने के लिए रविवार (26 मार्च, 2023) की सुबह अहमदाबाद के साबरमती जेल पहुँची थी। प्रयागराज शिफ्ट करने से पहले उसका मेडिकल चेकअप कराया गया। इसके बाद जरूरी कार्रवाई के बाद अब ट्रांसफर वॉरंट पर उसे प्रयागराज ले जाया जा रहा है।

यूपी एटीएस रविवार (26 मार्च, 2023) की शाम 5 बजकर 44 मिनट पर अतीक अहमद को लेकर जेल से बाहर आई थी। इसके बाद उसे वैन में बैठाकर प्रयागराज के लिए रवाना हो गई। इससे पहले उसने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि ये लोग कोर्ट के कंधे पर बंदूक रखकर उसे मारना चाहते हैं। प्रयागराज लाने के यूपी पुलिस को करीब 1300 किलोमीटर का रास्ता तय करना पड़ेगा। इसमें 30-35 घण्टे का समय लग सकता है। चूँकि, अतीक को सड़क मार्ग से लाया जा रहा है। ऐसे में, प्रदेश की सीमा तक गुजरात पुलिस भी इस काफिले के साथ रहेगी।

यूपी पुलिस मंगलवार (28 मार्च, 2023) को अतीक अहमद को प्रयागराज के एमपी-एमएलए कोर्ट में पेश करेगी। अतीक के भाई अशरफ अहमद की भी कोर्ट में पेशी होनी है। वह फिलहाल बरेली जेल में बंद है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि जल्द ही उसे भी प्रयागराज जेल में लाया जा सकता है। अतीक अहमद के प्रयागराज जेल में हो रहे ट्रांसफर को लेकर गाड़ी पलटने की भी चर्चाएँ जोरों पर हैं।

क्यों लाया जा रहा है प्रयागराज

दरअसल, उमेश पाल बसपा विधायक रहे राजू पाल की हत्या के मुख्य गवाह थे। राजू पाल की हत्या के एक साल बाद 28 फरवरी, 2006 को अतीक अहमद ने उमेश पाल का अपहरण कर लिया था। आरोप है कि अतीक और उसके भाई अशरफ ने राजू पाल की हत्या मामले में उमेश पाल को धमकाया और इसके बाद डरा कर कोर्ट में उनकी गवाही दर्ज करा ली। यह सब जब हो रहा था तब यूपी में समाजवादी पार्टी की सरकार थी। दवाब के चलते पुलिस ने उमेश पाल की शिकायत पर मुकदमा नहीं लिखा।

हालाँकि इसके बाद प्रदेश में सरकार बदलने पर मुकदमा दर्ज हुआ। इस मामले में कोर्ट की सुनवाई पूरी हो चुकी है। अब 28 मार्च 2023 को कोर्ट अपना फैसला सुनाएगी। यही नहीं, उमेश पाल हत्याकांड में भी अतीक अहमद और उसका भाई अशरफ आरोपित है। ऐसे में यूपी पुलिस दोनों से इस मामले में भी पूछताछ करेगी।

जिनसे भगत सिंह ने ली प्रेरणा, नेताजी बोस ने जिनकी सलाह पर किया अमल, जिनकी सुनवाई में पत्नी सहित पहुँचे आंबेडकर: राहुल गाँधी, आसमान पर मत थूकिए

राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस पार्टी लगातार वीर विनायक दामोदर सावरकर का अपमान करने में लगी हुई है। “मैं माफ़ी नहीं माँगूँगा, मैं सावरकर नहीं हूँ” – राहुल गाँधी बार-बार ये डायलॉग बोल रहे हैं और कॉन्ग्रेस पार्टी इसका वीडियो भी शेयर कर रही है। ये अलग बात है कि राफेल से लेकर ‘मोदी’ सरनेम वाले लोगों को गाली देने तक, राहुल गाँधी अदालतों में माफ़ी माँगते रहे हैं। इतने चुनाव हारने के बावजूद बार-बार एक महान स्वतंत्रता सेनानी का अपमान किया जा रहा है।

असल में राहुल गाँधी सावरकर बन भी नहीं सकते। जब राहुल गाँधी के दादी के पिता जवाहरलाल नेहरू नहीं बन पाए, तो राहुल गाँधी क्या बनेंगे। जवाहरलाल नेहरू जब नाभा जेल में थे, तब उनके पिता ने न जाने कहाँ-कहाँ पैरवी कर के उन्हें 12 दिनों में ही निकलवा लिया था। जबकि, वीर सावरकर ने 11 वर्षों तक जेल भी नहीं, बल्कि उससे भी खौफनाक कालापानी की सज़ा भुगती। उनके भाई गणेश भी उसी जेल में थे, लेकिन दोनों की मुलाकात तक नहीं होती थी।

सीधी बात है कि राहुल गाँधी, आप सावरकर बन भी नहीं सकते। भारत के सूचना आयुक्त उदय माहुरकर ने अपनी पुस्तक ‘Veer Savarkar: The man Who could have prevented partition’ में बताया है कि कैसे कई स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर से प्रेरित थे। उन्होंने लिखा है कि कैसे वामपंथी बार-बार इस तथ्य को नज़रअन्दाज़ करते हैं कि बलिदानी भगत सिंह वीर सावरकर की पुस्तक ‘1857 का स्वतंत्रता समर’ से प्रेरित थे।

वीर सावरकर ने सन् 1952 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के साथ हुई अपनी एक 12 साल पुरानी मुलाकात का भी जिक्र किया था। नेताजी के बॉम्बे स्थित आवास पर हुई इस बैठक में सावरकर ने उन्हें एक महत्वपूर्ण सलाह दी थी। ये सलाह ये थी कि वैश्विक मंच पर दुश्मन के दुश्मन को दोस्त माना जाए और राष्ट्रमण्डली में कोई भी देश अस्थायी दुश्मन नहीं होता, बस राष्ट्रहित ही स्थायी है। इस मुलाकात के कुछ ही महीनों बाद नेताजी भारत छोड़ कर अंग्रेजों को चकमा देते हुए निकल गए।

सावरकर की सलाह का ही योगदान था कि सुभाष चंद्र बोस ने ‘आज़ाद हिंद फ़ौज (INA)’ का पुनर्गठन किया और उसमें जान फूँकी। भगत सिंह के चाचा अजित सिंह भी अंग्रेजों की सेना में विद्रोह कराने के लिए वीर सावरकर की मदद कर रहे थे। खुद भगत सिंह ने लिखा था कि वीर सावरकर विश्व-बंधुत्व में यकीन रखने वाले बहादुर हैं। उन्होंने अपनी डायरियों में 6 बार वीर सावरकर की पुस्तक ‘हिन्दूपदपादशाही’ से उद्धरण लिया है।

वो कॉन्ग्रेस की ताकतें ही थीं, जिसने वीर सावरकर को महात्मा गाँधी की हत्या में फँसाने की साजिश रची। जबकि वीर सावरकर का स्पष्ट मानना था कि अराजकतावादी गतिविधियों का सहारा लेना विदेशी शत्रु के खिलाफ तो ठीक है, लेकिन अपने ही देश के लोगों के खिलाफ ये रास्ता नहीं आजमाया जा सकता। जिस राष्ट्र के लिए उन्होंने जीवन खपा दिया, उसी देश में उन्हें जेल में ठूँस दिया गया। पहले अंग्रेजों से यातनाएँ मिलीं, फिर नेहरू सरकार में प्रताड़ना।

वीर सावरकर इन चीजों से काफी टूट गए थे। उदय माहुरकर ने एक बार बड़ी बात लिखी है कि बाबासाहब भीमराव आंबेडकर ने सावरकर के वकील और ‘हिन्दू महासभा’ के नेता भपोतकर से दिल्ली में गुप्त मुलाकात कर के कहा था कि उन्हें लगता है कि सावरकर के खिलाफ केस कमजोर है और वो बरी होंगे। उन्होंने मजबूती से मुकदमा लड़ने को प्रेरित किया। आंबेडकर 2 बार अदालत में भी सुनवाई के दौरान पहुँचे, एक बार अपनी पत्नी के साथ।

अब बताइए, क्या राहुल गाँधी कभी वीर सावरकर बन सकते हैं? ऐसा व्यक्ति, जिनसे सुभाष चंद्र बोस सलाह लें। ऐसा व्यक्ति, जिनसे भगत सिंह प्रेरणा लें। ऐसा व्यक्ति, जिनकी सुनवाई में आंबेडकर अपनी पत्नी के साथ पहुँचें। एक ऐसे व्यक्ति, जिनके साथ महात्मा गाँधी वैचारिक बहस करते हों। एक ऐसे व्यक्ति, जिनसे जवाहरलाल नेहरू को प्रधानमंत्री रहते इतना डर लगता है कि उनकी पेंशन रोक देते हैं, उन्हें जेल में डाल दिया जाता है।

विक्रम सम्पत भी अपनी पुस्तक ‘Savarkar: A Contested Legacy, 1924-1966′ में बताते हैं कि कैसे वीर सावरकर की पुस्तक का चौथा संस्करण भगत सिंह ने भारत में गुप्त तरीके से प्रकाशित करवाया था, क्योंकि ये अंग्रेजों द्वारा प्रतिबंधित था। लाहौर के द्वारकादास पुस्तकालय में वीर सावरकर के जीवन को लेकर एक पुस्तक थी, जिसे पढ़ कर भगत सिंह प्रेरित हुए थे – विक्रम सम्पत की मानें तो ऐसे भी प्रमाण मिलते हैं।

‘हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपल्बिकन (HRA)’ के क्रांतिकारियों को जब जब लाहौर प्रकरण में गिरफ्तार किया गया था, तब लगभग सभी के पास से सावरकर की पुस्तक की प्रतियाँ मिली थीं। चित्रगुप्त ने ‘लाइफ ऑफ बैरिस्टर सावरकर’ नामक एक किताब लिखी थी, जिसे HRA के लोग पढ़ते थे। हमें ये भी विदित है कि किस तरह महात्मा गाँधी और जवाहरलाल नेहरू जैसे नेताओं ने राजगुरु, भगत सिंह और सुखदेव को बचाने की चेहता नहीं की।

जब क्रूर अंग्रेजों ने इन तीनों वीरों को फाँसी पर लटका दिया, तब सावरकर के रत्नागिरी स्थित आवास पर युवा बलिदानियों की याद में काला झंडा लगाया गया था। इससे पहले एक भगवा झंडा उनके घर की पहचान हुआ करता था। वीर स्वरकार ने तीनों बलिदानियों के लिए एक कविता भी लिखी, जो महाराष्ट्र में काफी लोकप्रिय हुआ। 4 महीने बाद ‘श्रद्धानन्द’ पत्रिका में उन्होंने एक लेख के जरिए इन बलिदानियों को याद किया।

वीर सावरकर को अक्सर मुस्लिमों से घृणा करने वाला बताया जाता है और कॉन्ग्रेस पार्टी को लगता है कि उन्हें गाली देकर पार्टी को मुस्लिमों के वोट मिल जाएँगे। सबसे बड़ी बात तो ये कि महाराष्ट्र में पार्टी की यूनिट ये सब बर्दाश्त करती है, चाटुकारिता के कारण कोई नेता आवाज़ नहीं उठाता। काकोरी प्रकरण में बलिदान हुए अशफाकुल्लाह खान की याद में भी वीर सावरकर ने एक लेख लिखा था। ऐसे वीर सावरकर पर राहुल गाँधी कीचड़ उछालते हैं।

आसमान पर थूकने का परिणाम क्या होता है, ये राहुल गाँधी को मालूम होना चाहिए। राहुल गाँधी ये फिर कॉन्ग्रेस पार्टी के किसी नेता में इतनी हैसियत नहीं है कि वीर सावरकर की आलोचना कर सके। महात्मा गाँधी जैसी हस्ती के साथ उनका वाद-विवाद चलता था। अमर क्रांतिकारी उनसे प्रेरणा लेते थे। राहुल गाँधी वीर सावरकर की आलोचना कर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का मजाक बना रहे हैं। सरे बलिदानियों का अपमान कर रहे हैं।

भगोड़े अमृतपाल को पनाह देने वाली एक और महिला गिरफ्तार, पटियाला में 6 घंटों तक रखा अपने घर में: खुलासा – Pak से मँगाए गए थे हथियार, बातचीत के लिए कोडवर्ड्स

पंजाब पुलिस से लगातार भाग रहे खालिस्तान समर्थक अमृतपाल के सहयोगियों पर लगातार कार्रवाई जारी है। पुलिस ने पटियाला से एक महिला को गिरफ्तार किया है जिस पर भगोड़े अमृतपाल को शरण देने का आरोप है। इसके अलावा पुलिस की जाँच में फरारी के दौरान अमृतपाल द्वारा प्रयोग किए जाने वाले कुछ कोडवर्ड का भी खुलासा किया गया है। अमृतपाल के पोस्टरों को नेपाल सीमा पर चस्पा कर दिया गया है और वहाँ पुलिस की गश्त बढ़ा दी गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वारिस दे पंजाब संगठन के मुखिया अमृतपाल को फरारी के दौरान पटियाला की एक अन्य महिला ने लगभग 6 घंटे तक शरण दी थी। तब अमृतपाल का साथ पप्पलप्रीत भी उसके साथ मौजूद था। जाँच के दौरान पुलिस को अमृतपाल के 3 अन्य CCTV फुटेज मिले हैं। इन वीडियो में से एक में अरोपिता को अमृतपाल के साथ देखा जा सकता है। बताया यह भी जा रहा है कि पटियाला से ही अमृतपाल सिंह अपना हुलिया बदल कर शाहाबाद की तरफ फरार हुआ था। वह पटियाला में 19 मार्च को रुका था। रविवार (26 मार्च, 2023) को पुलिस ने महिला की गिरफ्तारी की पुष्टि की है।

एक अन्य खुलासे के मुताबिक, फरारी के दौरान अमृतपाल अपने साथियों से कोडवर्ड में बात किया करता था। बताया जा रहा है कि कुरुक्षेत्र से गिरफ्तार एक अन्य महिला बलजीत कौर की स्कूटी लेने के लिए उन्हें पर्ची पर एक कोड और फोन नंबर लिख कर कर दिया गया था। इस कोड में ‘बुआ जी मैं रिनू बोल रहीं हूँ, स्कूटी की चाबी मैट के नीचे है’ फोन पर बोलना था। दुखहरन गुरूद्वारे पर स्कूटी ले कर पहुँची बलजीत ने ऐसा ही किया था। हालाँकि दूसरी तरफ से जो आवाज आई उसमें एक लड़की ने बलजीत से खुद से मिल कर जाने को कहा था जिसे बलजीत ने नहीं माना और बिना मिले ही लौट आई थी।

इस बीच अमृतपाल सिंह के विदेश भागने की आशंका के चलते पुलिस ने भारत-नेपाल सीमा पर उसके पोस्टर चस्पा करवा दिए हैं। पोस्टरों में अमृतपाल का एक रूप पगड़ी के साथ और दूसरा बिना पगड़ी के है। इस पोस्टर की हेडलाइन में वांटेड लिखा हुआ है। दावा इस बात का भी किया जा रहा है कि अमृतपाल ने पाकिस्तान से 6 AK 47 और 2 AK 56 राइफल की खेप मँगवाई थी।

अमृतपाल के साथ फरार हुए पप्पलप्रीत सिंह का कनेक्शन जम्मू से निकला है। यहाँ की पुलिस ने एक पति-पत्नी को हिरासत में ले कर पंजाब पुलिस को सौंपा है। हिरासत में लिए गए दम्पति का नाम अमरीक सिंह और परमजीत कौर है। ये दोनों जम्मू के आर एस पुरा क्षेत्र में रहते हैं। पुलिस इस जोड़े से पूछताछ कर रही है।

इलाज के नाम पर झोलाछाप डॉक्टर करता था यौन शोषण, 80+ ‘अश्लील वीडियो’ वायरल: 400 महिलाओं ने पत्र लिख मदद की गुहार लगाई

महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में एक झोलाछाप डॉक्टर की घिनौनी हरकत सामने आई है। उसने क्लीनिक में आने वाली कई महिलाओं का यौन शोषण कर उनका वीडियो बनाया है। डॉक्टर की इस हरकत के 80 से अधिक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद करीब 400 महिलाओं ने पत्र लिखकर झोलाछाप डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला कोल्हापुर जिले के मुरगुड का है। वहाँ आरोपित झोलाछाप डॉक्टर अपने प्राइवेट क्लीनिक को चलाने के लिए सोशल मीडिया पर विज्ञापन देता था। इस विज्ञापन के कारण लोग उसे असली डॉक्टर समझकर इलाज कराने आते थे। इसका फायदा उठाकर उसने इलाज कराने आने वाली महिलाओं का यौन शोषण करना शुरू कर दिया।

कैसे खुला मामला

आरोपित झोलाछाप डॉक्टर महिलाओं का यौन शोषण कर अपने फोन में वीडियो बनाता था। इसके बाद इन वीडियो को लैपटॉप में स्टोर करता था। इसी बीच उसके लैपटॉप में कुछ गड़बड़ी आ गई। वह लैपटॉप रिपेयर कराने के लिए ले गया। इसके बाद ही अश्लील वीडियो वायरल हुए।

ऐसी आशंका जताई जा रही है कि लैपटॉप रिपेयर करने वाले ने ही वीडियो वायरल किए हैं। झोलाछाप डॉक्टर की इस हरकत का शिकार होने वाले लोगों में स्थानीय महिलाएँ भी शामिल हैं। वहीं, मुरगुड पुलिस का कहना है कि इस मामले में अब तक कोई भी शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।

400 महिलाओं ने लिखे पत्र

सोशल मीडिया पर एक के बाद करीब 80 वीडियो वायरल होने के बाद पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है। NBT के अनुसार, करीब 400 महिलाओं ने सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, नेताओं और पुलिस को पत्र लिखा है। पत्र के साथ ही अश्लील वीडियो वाला पेन ड्राइव भी भेजा गया है। कहा जा रहा है कि ये सभी पत्र डाक द्वारा भेजे गए हैं।

क्षेत्र की महिलाओं द्वारा भेजे गए इस पत्र में कहा गया है कि फर्जी डॉक्टर की इस हरकत ने मुरगुड का नाम बदनाम हुआ है। एक मरीज के लिए डॉक्टर भगवान की तरह होता है, लेकिन झोलाछाप डॉक्टर ने घिनौनी हरकत से डॉक्टरों का नाम भी बदनाम किया है।

पत्र में यह भी कहा गया है कि देश में महिलाओं को सम्मान देकर महिला दिवस मनाया जाता है, लेकिन फर्जी डॉक्टर की इस हरकत ने यह साबित कर दिया है कि इस क्षेत्र में महिलाएँ सुरक्षित नहीं हैं। इस पत्र में आरोपित झोलाछाप डॉक्टर का समर्थन करने वालों पर भी कार्रवाई की माँग की गई है।

लॉ छात्र से सड़क पर बदसलूकी करने वाले AAP विधायक कोर्ट में दोषी करार, जल्द मिलेगी सजा: 2020 में चुनाव के वक्त हुई थी मारपीट

दिल्ली के मॉडल टाउन से आम आदमी पार्टी के विधायक अखिलेश पति त्रिपाठी को साल 2020 में एक लॉ छात्र को परेशान व बदसलूकी करने के मामले में दोषी करार दिया गया है। अखिलेश पर आरोप था कि उन्होंने छात्र पर जातिगत टिप्पणियाँ की थीं।

विशेष न्यायाधीश गीतांजलि गोयल ने कहा, “अभियोजन ने आईपीसी की धारा 323 के तहत त्रिपाठी के अपराध को साबित कर दिया है और उन्हें उसी के लिए दोषी ठहराया गया है, जबकि उन्हें धारा 341/506 (1) आईपीसी और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण अधिनियम), 1989 की धारा 3(1)(आर) और 3(1)(एस) के तहत बरी किया गया है।”

बता दें कि इस मामले में अदालत ने इसी साल 16 मार्च को फैसला सुरक्षित रख लिया था और 10 दिना बाद यानी कि 26 मार्च को इस पर फैसला सुनाया गया। अब कोर्ट में आप नेता की सजा पर सुनवाई 13 अप्रैल 2023 को होगी। इस दौरान कोर्ट ने त्रिपाठी को 10 दिनों के भीतर अपनी संपत्ति और आय का हलफनामा पेश करने का निर्देश दिया है।

उल्लेखनीय है कि यह पूरा मामला साल 2020 में हुए दिल्ली चुनाव से एक दिन पहले का है। शिकायतकर्ता संजीव कुमार ने कहा था कि 7 फरवरी 2020 की रात करीब 11:30 बजे वह अपने दोस्त राज किशोर के साथ कूड़ा फेंककर अपने घर जा रहे थे तभी अखिलेश त्रिपाठी ने उन्हें अपने समर्थकों के साथ उन्हें झंडेवालान चौक पर रोका और उसके बाद उनकी स्कूटी की चाबी छीन, बुरी तरह पीटा। संजीव का कहना था कि इस दौरान उनपर जातिगत टिप्पणियाँ भी हुईं। हालाँकि कोर्ट ने अखिलेश को इस मामले में दोषी नहीं पाया और सिर्फ धारा 323 के तहत उन्हें दोषी पाया।

‘खालिस्तानी तत्वों के खिलाफ हुई क्या कार्रवाई ?’: दूतावास पर हमले के बाद भारत ने किया कनाडा राजदूत से सवाल, वियना संधि की याद दिलाई

देश और विदेश में खालिस्तानियों के नापाक हरकतों को लेकर सरकार सख्त है। एक तरफ देश में अमृतपाल के खिलाफ के खिलाफ कार्रवाई तेज है तो दूसरी तरफ कनाडा में खालिस्तानियों के हमले को लेकर वहाँ के राजदूत को तलब किया गया है।

बता दें कि हाल के दिनों में कनाडा में भारतीय वाणिज्य दूतावासों को निशाना बनाया गया था। इसको लेकर भारत ने चिंता व्यक्त की थी। अब सरकार ने कनाडा के राजदूत को तलब कर पूछा है कि इन चरमपंथियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है।

इस मामले को लेकर विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत सरकार ने शनिवार (25 मार्च 2023) को राजदूत से स्पष्टीकरण माँगा। उनसे पूछा गया कि खालिस्तानी तत्वों को पुलिस की मौजूदगी में भारतीय राजनयिक मिशन और वाणिज्य दूतावासों की सुरक्षा में सेंध लगाने की अनुमति कैसे दी गई।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि कनाडा को विएना संधि के तहत अपने दायित्वों की याद दिलाई गई। उन्हें ऐसे लोगों को गिरफ्तार कर उन पर मुकदमा चलाने के लिए कहा गया, जिनकी पहचान पहले ही इस तरह के कृत्यों में शामिल होने के रूप में की जा चुकी है।

विदेश मंत्रालय ने आशा व्यक्त है कि कनाडा की सरकार अपने राजनयिकों और उनके परिसरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सभी कदम उठाएगी। बता दें कि पिछले रविवार को खालिस्तान समर्थकों के हिंसक विरोध के बाद ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत में एक कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया।

इस कार्यक्रम में भारतीय राजदूत हिस्सा लेने वाले थे। इस दौरान विरोध प्रदर्शन को कवर कर रहे भारतीय मूल के पत्रकार समीर कौशल पर भी प्रदर्शनकारियों ने हमला किया कर दिया था।

भारत के उच्चायुक्त संजय कुमार वर्मा की पश्चिमी तट की पहली यात्रा पर उनका स्वागत करने के लिए कार्यक्रम आयोजित किया गया था। यह कार्यक्रम ताज पार्क कन्वेंशन सेंटर, सरे में आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम को आखिरकार सुरक्षा कारणों की वजह से रद्द कर दिया गया था।

दरअसल, पंजाब में ‘वारिस पंजाब दे’ के का मुखिया और खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह के खिलाफ कार्रवाई के कारण विदेशों में बैठे उसके समर्थक बौखला गए हैं। इस बौखलाहट में वे भारतीय राजदूत और राजनयिक परिसरों को निशाना बना रहे हैं। ब्रिटेन, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा सहित कई देशों में इस तरह की घटनाएँ सामने आ चुकी हैं।

VHP नेता को ‘काफिर’ बता कर ‘सर तन से जुदा’ की धमकी, हरे रंग के लिफाफे में मिला पत्र: इंदौर में पहले भी हिन्दू नेताओं को बनाया था निशाना

मध्य प्रदेश के इंदौर में एक विश्व हिन्दू परिषद (VHP) पदाधिकारी को ‘सर तन से जुदा’ की धमकी दी गई है। पीड़ित का नाम संतोष शर्मा है, जो धर्म प्रसार के प्रांत संयोजक हैं। यह धमकी उन्हें एक पत्र भेज कर दी गई है जो उनकी कार के वाइपर पर हरे रंग के लिफ़ाफ़े में रखा गया था। पत्र में मुस्लिम समुदाय के लोगों के खिलाफ किए जा रहे काम से हटने की नसीहत दी गई थी। पुलिस ने केस दर्ज कर के आरोपितों की तलाश शुरू कर दी है। यह धमकी गुरुवार (23 मार्च 2023) को मिली है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला इंदौर के मूसाखेड़ी इलाके का है। यहाँ के विहिप पदाधिकारी संतोष शर्मा गोकुल रेजीडेंसी में रहते हैं। शुक्रवार (24 मार्च) को उन्होंने पुलिस में खुद को धमकी दिए जाने की शिकायत दर्ज करवाई है। अपनी शिकायत में संतोष ने बताया कि घटना के अपने इनोवा वाहन से अपने साथी शरद और ड्राइवर योगेश के साथ एक बाजार फलाहार लेने गए थे। एक रेस्टॉरेंट पर उन्होंने गाड़ी खड़ी की और सबके साथ अंदर चले गए। जब संतोष लौट कर आए तब उनकी गाड़ी के वाइपर पर एक हरे रंग का लिफाफा रखा हुआ था।

संतोष ने बताया कि उस लिफ़ाफ़े को खोल कर देखा गया तो उसमें धमकी लिखी हुई थी। लिफ़ाफ़े में संतोष को काफिर बताते हुए इस्लामी चरमपंथ के खिलाफ किए जा रहे कामों को बंद करने की धमकी दी गई थी। अपने बात न मानने पर पत्र में संतोष शर्मा का सिर तन से जुदा करने का एलान भी किया गया था। बकौल संतोष, यह हरकत उन्हें डराने के लिए की गई है। हालाँकि मामले की शिकायत तिलक नगर थाने में कर दी गई है। पुलिस ने केस दर्ज कर के आरोपितों की पहचान और पकड़ के प्रयास शुरू कर दिए हैं।

गौरतलब है कि इंदौर में हिन्दूवादी नेताओं को मौत की धमकियाँ दिए जाने का यह पहला मामला नहीं है। इस से पहले बजरंग दल पदाधिकारी तन्नू शर्मा, वकील अनिल नायडू और एडवोकेट मनीष गड़कर को जान से मार डालने की धमकियाँ दी गई हैं। मनीष गड़कर पर तो जुनैद नाम के आरोपित सहित 3 हमलावरों द्वारा उनके ऑफिस में हमला किए जाने का भी आरोप है। धमकी देने वाले कुछ आरोपितों की गिरफ्तारियाँ भी पुलिस ने की हैं।

‘लॉरेंस बिश्नोई का नाम लेना बंद करो, वरना जान से मार देंगे’: सिद्धू मूसेवाला के पिता को फिर मिली धमकी, राजस्थान से मेल आया

पंजाबी सिंगर रहे सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह को फिर धमकी मिली है। यह धमकी उन्हें एक ई-मेल के माध्यम से दी गई। बलकौर सिंह को भेजे गए धमकी भरे ई-मेल में कहा गया है कि वह गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का नाम लेना बंद कर दें नहीं तो उन्हें जान से मार दिया जाएगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मृत सिंगर सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह को धमकी भरा ई-मेल राजस्थान से भेजा गया है। धमकी देने वाले ने लिखा है बलकौर सिंह अपनी स्पीच में लॉरेंस का नाम लेना बंद कर दे नहीं तो जान से मार देंगे। इस ई-मेल को लेकर बलकौर सिंह ने कहा है, “मुझे राजस्थान से ई-मेल पर धमकी मिली है। मुझे जल्द ही मार जाएगा। धमकी में लॉरेंस विश्नोई का नाम लेने से परहेज करने के लिए कहा गया है।”

इस धमकी को लेकर बलकौर सिंह ने सवाल पूछते हुए कहा है, “क्या मैं गलत कर रहा हूँ? क्या मुझे अपने बेटे का केस नहीं लड़ना चाहिए? इससे पहले मुझे फरवरी में तीन बार धमकी दी गई थी। यह धमकी 18, 24 और 27 फरवरी को दी गई थी। इस धमकी में कहा गया था कि 25 अप्रैल से पहले ही मुझे मार दिया जाएगा। मैं सरकार से कहना चाहता हूँ कि वो मेरी सुरक्षा वापस ले ले। मैं अपनी लड़ाई जारी रखूँगा।”

सिद्धू मूसेवाला के पिता को धमकी देने के इस मामले में पुलिस ने अज्ञात आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जाँच की जा रही है। इससे पहले 7 मार्च को 2023 को बलकौर सिंह ने पंजाब विधानसभा के बाहर विरोध प्रदर्शन किया था। इस दौरान उन्होंने मूसेवाला की हत्या की जाँच सीबीआई से कराने की माँग की थी।

उन्होंने कहा था, “पिछले 10 महीनों में मैं कई बार पुलिस और प्रशासन के पास गया। मुझे आश्वासन दिया गया था। लेकिन यहाँ जो हो रहा है वह मेरे बेटे की हत्या पर पर्दा डालने के लिए किया जा रहा है। मेरे पक्ष में कुछ नहीं जा रहा है। इसलिए, मुझे विधानसभा तक आना पड़ा। इस मामले की जाँच सीबीआई को करनी चाहिए।”

उन्होंने गोल्डी बराड़ के खिलाफ सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा था, “ये गैंगस्टर कौन हैं? ये लोग तो सिर्फ गुर्गे हैं। उन्होंने पैसे लिए और उसे गोली मार दी। जिसने मेरे बेटे को निशाना बनाया वह मास्टरमाइंड गोल्डी बराड़ है। उसके खिलाफ क्या कार्रवाई की जा रही है?”

बता दें कि पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की 29 मई 2022 को पंजाब के मनसा जिले में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्या में पुलिस ने गैंगस्टर लॉरेंस विश्नोई, जग्गू भगवानपुरिया समेत 34 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर की है। इसमें करीब 1 दर्जन से अधिक शार्प शूटर के नाम शामिल हैं।

प्रियंका गाँधी वाड्रा ने भगवान राम और पांडवों से की भाई राहुल गाँधी की तुलना, बोलीं- इस झंडे (तिरंगे) में हमारे परिवार का खून लगा है

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मानहानि मामले में राहुल गाँधी को 2 साल की सजा होने के बाद उनकी संसद सदस्यता रद्द कर दी गई। इसको लेकर पूरी कॉन्ग्रेस पार्टी राहुल गाँधी का बचाव कर रही है। वहीं, भाजपा पर हमला बोलते हुए प्रियंका गाँधी वाड्रा ने अपने परिवार की तुलना भगवान श्रीराम और पांडवों से की है। उनके इस बयान की जमकर आलोचना हो रही है।

दरअसल, कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा रविवार (26 मार्च 2023) को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहीं थीं। इस दौरान उन्होंने गाँधी परिवार की तुलना भगवान राम से करते हुए कहा है,

“भाजपा परिवारवाद की बात करती है। मैं पूछना चाहती हूँ कि भगवान राम कौन थे? उन्होंने अपने परिवार अपनी धरती के लिए अपना धर्म निभाया, क्या वो परिवारवादी थे या पांडव परिवारवादी थे जो अपने परिवार के संस्कारों के लिए लड़े? हमारे परिवार के लोग इस देश के लिए शहीद हुए क्या इसके लिए हमें शर्म आनी चाहिए? इस देश के लोकतंत्र को मेरे परिवार ने खून से सींचा है।”

प्रियंका गाँधी के इस बयान की सोशल मीडिया पर जमकर आलोचना हो रही है। वहीं, भाजपा भी प्रियंका गाँधी पर हमलावर है। भाजपा आईटी सेल प्रभारी अमित मालवीय ने ट्वीट कर कहा है, “प्रियंका वाड्रा ने राहुल गाँधी जैसे भोगी की तुलना भगवान राम से और नेहरू-गाँधी परिवार को राजा दशरथ के समान बता दिया। ये करोड़ों राम भक्तों की आस्था पर गहरा प्रहार है। ये कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता। कल कॉन्ग्रेस के बड़े नेता ने नेहरू-गाँधी परिवार के लिए अलग कानून की माँग की थी।”

उत्तर प्रदेश बीजेपी के सोशल मीडिया संयोजक शशि कुमार ने ट्वीट कर कहा है, “सजायाफ्ता राहुल गाँधी की तुलना भगवान प्रभु श्रीराम से करना, ये कहना कि भारत के लोकतंत्र को प्रियंका गाँधी के परिवार ने सींचा है। भारत की मिट्टी में उनके परिवार के का खून मिला है। यह बताता है कि गाँधी खानदान के लोग अपने आप को इस देश के राजा समझते हैं। इतना घमंड कहाँ से आता है?”

एक अन्य ट्वीट में शशि कुमार ने कहा है, “जब सरकार थी तो भगवान राम के अस्तित्व को मानने से इनकार कर दिया। अपनी पार्टी के वकीलों को लगाकर राम मंदिर का फैसला सला टलवाते रहे। अब जब जेल जाने कि नौबत आयी तो राहुल गाँधी की भगवान राम से तुलना कर राम का अपमान करने लगे। यह है गाँधी परिवार और कॉन्ग्रेस की घटिया राजनीति।”

भाजपा महिला मोर्चा की नेता नीतू डबास ने कहा है, “राहुल गाँधी जैसे समाज विरोधी की तुलना भगवान श्रीराम से और नेहरू-गाँधी परिवार की राजा दशरथ से तुलना कर प्रियंका वाड्रा ने राम भक्तों की आस्था और विश्वास पर बड़ा हमला किया है। देश के करोड़ों राम भक्त इसको बिल्कुल स्वीकार नहीं करेंगे, इसका अंजाम कॉन्ग्रेस को भुगतना होगा।”

अंकिता नामक यूजर ने लिखा, “मैडम प्रियंका …बस मैं, मेरा भाई, मेरा परिवार। इस देश के लोकतंत्र को तुम्हारे परिवार के खून ने नहीं इस वतन की सुरक्षा के लिए मिटने वाले जवानों ने सींचा है, यहाँ रहने वाले हर मेहनती मजदूर ने सींचा है। हमारे आराध्य श्री राम की तुलना अपने मतलबी परिवार से करने कि जो बेशर्मी करते हो ना। इतना अहंकार इतना घमंड थोड़ी तो शर्म कर लो।”

राजा सिंह सेवारा नामक यूजर ने ट्वीट कर कहा है, “कॉन्ग्रेसियों के लिए तो भगवान श्री राम काल्पनिक थे। प्रियंका वाड्रा के परिवार का कोई भी सदस्य देश के लिए शहीद नहीं हुआ। प्रियंका वाड्रा के परिवार के जितने भी लोग मारे गए वह सब अपने कर्मों की वजह से मारे गए। जब 1971 में जंग छिड़ी तो प्रियंका वाड्रा का बाप राजीव विदेश भाग गया था।”

जनजातीय समाज के लोगों पर कुल्हाड़ी और तलवार से हमला, अरबाज़ और उसके साथियों पर आरोप: MP के गाँव में बड़ी संख्या में पुलिस फ़ोर्स तैनात

मध्य प्रदेश के खंडवा में साम्प्रदायिक तनाव की खबर है। यहाँ के एक गाँव में जनजातीय और मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग आपस में भिड़ गए। मामूली बातचीत से शुरू हुआ यह विवाद मारपीट का रूप ले लिए। आरोप है कि हमलावरों ने लाठी-डंडों के साथ कुल्हाड़ी और तलवारों का भी प्रयोग किया। आरोपितों के नाम अशफाक, समीर, अरबाज़ और असलम बताए जा रहे हैं। विवाद में दोनों पक्षों के लोग घायल बताए जा रहे हैं जिनका इलाज अस्पताल में चल रहा है। घटना शनिवार (25 मार्च 2023) की है।

मामला खंडवा के थाना पंथाना की बोरगाँव चौकी क्षेत्र का है। यहाँ के गाँव टेमीखुर्द में हुए विवाद के बाद घायल जनजातीय पक्ष के युवक राम बहार ने अस्पताल से मामले की जानकारी मीडिया को दी। उसने बताया कि हमलावरों ने पुराने किसी मामले को झगड़े का मुद्दा बनाया था। एक घायल युवक ने बताया कि आज दूसरे पक्ष को समझाया जा रहा था जिसके बाद हमलावरों ने हथियार निकाल लिए और हमला बोल दिया। पीड़ित के मुताबिक उनके पक्ष के लगभग 3 से 4 लोग घायल हुए हैं। हमलवारों ने पीड़ितों के हाथों और सिर पर वार किए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमलावरों ने लाठी-डंडों के साथ कुल्हाड़ी और तलवारें भी चलाईं। घायलों में सबसे अधिक चोट विशाल गोलकार को लगी बताई जा रही है। उनके सिर पर वार किया गया है। इस मामले की जानकारी पुलिस को मिली तो भारी संख्या में फ़ोर्स गाँव में पहुँची। घायलों को फ़ौरन अस्पताल पहुँचाया गया। मामले की जाँच भी शुरू कर दी गई है। गाँव में फैले तनाव को देखते हुए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। फिलहाल हालात पूरी तरह से प्रशासन के नियंत्रण में है।

वहीं मुस्लिम पक्ष ने इस घटना का आरोप जनजातीय पक्ष पर जड़ दिया है। आरोपित किए गए समीर ने बताया कि घटना के दिन गाँव में मुस्लिम समुदाय के लोग तरावीह की नमाज़ पढ़ रहे थे, जिस समय जनजातीय समाज के लोग बाहरी लोगों के साथ नारेबाजी करते हुए नमाजियों की तरफ बढ़े। समीर का आरोप है कि नमाज़ियों और मस्जिद पर पत्थर मारे गए। समीर ने पुलिस पर भी कार्रवाई न करें और उलटे मुस्लिमों को ही प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। समीर का आरोप है कि मुस्लिम समाज के लोग भाईचारा चाहते हैं लेकिन जनजातीय लोग ऐसा नहीं चाहते।