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कर्नाटक में PM मोदी की सुरक्षा में फिर हुई चूक: भागता हुआ कार के करीब आया शख्स, हिरासत में लेकर हो रही पूछताछ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi Security Breach) की सुरक्षा में एक बार फिर चूक हुई है। पीएम मोदी कर्नाटक के दौरे पर हैं। जहाँ वह दावणगेरे में रोड शो कर रहे थे। इसी दौरान एक युवक दौड़ता हुआ उनके काफिले के पास आ गया। हालाँकि पीएम तक पहुँचने से पहले ही सुरक्षा बलों ने उसे पकड़ लिया। फिलहाल उससे पूछताछ की जा रही है।

‘रिपब्लिक’ ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि सुरक्षा में सेंध लगाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास पहुँचने की कोशिश करने वाला युवक कोप्पल का रहने वाला है। पहले वह गमित कॉलेज परिसर में छिपा हुआ था। प्रधानमंत्री के रोड शो को देखने के बाद वह दौड़ता हुआ उनकी गाड़ी के पास जाने की कोशिश कर रहा था।

हालाँकि इससे पहले ही प्रधानमंत्री की सुरक्षा में लगे स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) के जवानों ने उसे पकड़ लिया। फिलहाल आरोपित से पूछताछ की जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी के काफिले में हुई इस घटना को बड़ी चूक माना जा रहा है। दरअसल, प्रधानमंत्री के रोड शो को लेकर 3-4 लेयर की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। सड़क के दोनों ओर बैरिकेड भी लगाए थे। यही नहीं, लोगों को बेरिकेड लाँघकर न आने की बात भी कही गई थी। इसके बाद भी युवक काफिले में घुसने की कोशिश कर रहा था।

बता दें कि इससे पहले इसी साल जनवरी में कर्नाटक के हुगली में भी प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक का मामला सामने आया था। तब एक 6वीं क्लास का बच्चा हाथ में माला लेकर प्रधानमंत्री की ओर बढ़ रहा था। हालाँकि सुरक्षा में मुस्तैद एसपीजी के जवानों ने बच्चे को देख लिया और उससे माला लेते हुए वापस भेज दिया था। बच्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को माला पहनाना चाहता था। इस घटना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में चूक बताया गया था। लेकिन कर्नाटक पुलिस ने इसे सुरक्षा में चूक मानने से इनकार कर दिया था।

संस्कृति यूनिवर्सिटी में कश्मीरी छात्रों ने पढ़ी नमाज: वीडियो हुआ वायरल: मथुरा में हिन्दू संगठनों का विरोध प्रदर्शन, पूछा – विद्या के मंदिर में ये सब क्यों?

उत्तर प्रदेश के मथुरा में स्थित संस्कृति यूनिवर्सिटी में मुस्लिम छात्रों द्वारा नमाज पढ़ने का मामला सामने आया है। इसका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद हिंदू संगठन इसका जमकर विरोध कर रहे हैं। हिंदू महासभा ने कहा है कि नमाज पढ़ने वालों पर कार्रवाई नहीं हुई है तो वे यूनिवर्सिटी में हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मथुरा की प्रतिष्ठित संस्कृति यूनिवर्सिटी परिसर में नमाज पढ़ने वाले छात्र कश्मीर के रहने वाले हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में यूनिवर्सिटी के गार्डन में छात्रों को नमाज पढ़ते हुए देखा जा सकता है। कहा जा रहा है कि यह वीडियो यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले किसी छात्र ने ही बनाया है और फिर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।

यूनिवर्सिटी में नमाज पढ़ने का विरोध करते हुए ‘अखिल भारतीय हिंदू महासभा’ ने कलेक्ट्रेट में जमकर प्रदर्शन किया। साथ ही, कलेक्टर को ज्ञापन भी सौंपा है। हिंदू महासभा की जिला अध्यक्ष छाया गौतम का कहना है कि यूनिवर्सिटी में बहुत पहले से नमाज पढ़ी जा रही है। इसकी सूचना उनको मिलती थी। लेकिन सबूत नहीं था। अब वीडियो सामने आने के बाद इसका सबूत भी मिल गया है। यदि आरोपित छात्रों पर कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन होगा।

छाया गौतम ने यह भी कहा है कि उन्हें जानकारी मिली है कि यूनिवर्सिटी में सरकारी छात्रवृत्ति प्राप्त 82 मुस्लिम छात्र पढ़ते हैं। इनमें से अधिकांश छात्र जम्मू-कश्मीर के रहने वाले हैं। यूनिवर्सिटी में बीते 6 दिनों में लगातार नमाज पढ़ी जा रही है। इसका वीडियो भी उनके पास है।

वहीं अखिल भारत हिंदू महासभा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष दिनेश शर्मा ने यूनिवर्सिटी में नमाज पढ़ने को गंभीर मामला बताया है। उन्होंने कहा है कि विद्या के मंदिर में इस तरह से नमाज पढ़ने को अखिल भारतीय हिंदू महासभा कतई बर्दाश्त नहीं करेगा। यदि इस मामले में जल्द ही कार्रवाई नहीं होती है तो हिंदू महासभा यूनिवर्सिटी में हनुमान चालीसा का पाठ करेगा। लगातार विरोध और कार्रवाई के बाद भी समुदाय विशेष के लोग अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। जल्द ही हिन्दू महासभा के पदाधिकारी कैंपस को गंगा जल से धुलवाकर शुद्धिकरण करेंगे।

हालाँकि यूनिवर्सिटी के PRO किशन चतुर्वेदी ने मामले को पुराना बताया है। उन्होंने क्या है कि 25-30 दिन पहले नमाज पढ़ी गई थी। मामला संज्ञान में आने के बाद छात्रों को समझाइश दी गई है। छात्र अपने हॉस्टल के कमरों में ही धार्मिक कार्य करते हैं। बिना वजह ही मामले को तूल दिया जा रहा है।

‘मुस्लिमों को 4 शादियों की इजाजत, समाज में बढ़ रहे यौन अपराध’: ‘शरीयत एक्ट’ के खिलाफ HC में याचिका, केंद्र से माँगा जवाब

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) आवेदन अधिनियम 1937 को चुनौती देने वाली याचिका पर भारत के अटॉर्नी जनरल को नोटिस जारी किया है। याचिका में आईपीसी की धारा 494 की संवैधानिक वैधता को भी चुनौती दी गई है। ‘हिंदू पर्सनल लॉ बोर्ड’ द्वारा जनहित याचिका दायर की गई थी, जिसपर जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की बेंच ने यह आदेश जारी किया।

‘पिछले दिनों कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान ‘हिंदू पर्सनल लॉ बोर्ड’ के वकील अशोक पाँडे ने कहा कि धारा 494 हिंदू, बौद्ध, सिख और ईसाई धर्म के मानने वालों पर लागू होती है।’ इसके तहत यदि व्यक्ति अपने पत्नी के रहते दूसरा विवाह करता है तो उसे मान्य नहीं माना जाएगा। साथ ही व्यक्ति को सात साल की कैद की सजा और जुर्माना लगा दिया जाएगा लेकिन देश के मुस्लिमों पर यह धारा लागू नहीं होती।

अदालत को जानकारी दी गई कि आईपीसी की धारा 494 मुस्लिमों पर इसलिए लागू नहीं होताी क्योंकि उन्हें मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) आवेदन अधिनियम 1937 के तहत सुरक्षा प्राप्त है। शरीयत अप्लीकेशन एक्ट मुस्लिम पुरुष को चार शादियाँ करने की इजाजत देता है। यह सीधे तौर पर धर्म के आधार पर भेदभाव का मामला है। जो कि संविधान के अनुच्छेद 15 का उल्लंघन है। इसलिए आईपीसी की धारा 494 को असंवैधानिक करार दे कर निरस्त कर देना चाहिए।

याचिका कर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि मुस्लिमों को प्राप्त इस विशेषाधिकार की वजह से समाज में बलात्कार जैसी घटनाएँ बढ़ रही हैं। दौलतमंद और ताकतवर मुस्लिम कई शादियाँ कर रहे हैं जबकि गरीब मुस्लिमों को एक शादी भी नसीब नहीं हो रही, जिससे समाज में यौन अपराधों में वृद्धि हुई है। याचिका में कहा गया है कि अधिनियम 1937 महिलाओं को प्राप्त मौलिक और बुनियादी मानवाधिकारों का लिंग के आधार पर हनन करती है।

इस याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की बेंच ने केंद्र सरकार को छह हफ्ते में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया। आईपीसी की धारा 494 की वैधता पर सवाल उठाए जाने पर कोर्ट ने अटार्नी जनरल को भी नोटिस जारी किया। कोर्ट ने कहा कि केंद्र की तरफ से जवाब दाखिल होने के बाद याचिका कर्ता को भी प्रत्युत्तर देने के लिए 2 हफ्ते का समय दिया जाएगा। अगली सुनवाई मई 2023 में होने की उम्मीद है।

‘इतिहास का प्रचार-प्रसार भारत के उत्थान का सबसे बड़ा उपाय’: गलत से समझौते के खिलाफ थे गणेश शंकर विद्यार्थी, भाले-लाठी से पीट-पीट कर भीड़ ने मार डाला

दिन था देवोत्थान एकादशी का और तारीख़ थी 9 नवम्बर 1913, जब गणेश शंकर विद्यार्थी ने ‘प्रताप’ को जन्म दिया था। ना तो कोई सहायक, ना छापाखाना, रुपए-पैसे से ना कोई मदद करने वाला -कुछ भी नहीं था उनके पास उन दिनों। किन्तु, अपनी जनसेवा की इच्छा, अटूट लगन, दृढ़ निश्चय, अनोखे आत्मविश्वास के साथ मात्र भगवान के भरोसे उन्होंने अपनी बरसों की इच्छा को ज़मीन पर ला खड़ा किया था।
उनके लेखन के शुरुआत तो मैट्रिक की पढ़ाई के दौरान ही हो गई थी ,जब मिस चार्लोट एम यंग द्वारा लिखित पाठ्यपुस्तक ‘बुक ऑफ गोल्डन डीड्स’ से प्रभावित होकर उन्होंने ‘हमारी आत्मोत्सगर्ता’ शीर्षक से एक पुस्तक लिखना शुरू कर दिया था।

इसमें उन्होंने उन भारतीय नायकों की कहानियाँ लिखी थी, जिन्होंने दूसरों के लिए अपना बलिदान दिया था। भारतवासियों के आत्मत्याग की ऐतिहासिक कथाओं का संग्रह था यह। छात्र जीवन में ही विद्यार्थी जी लालित्य पढ़ने के लिए इतना समर्पित थे कि उन्होंने उस समय के सांस्कृतिक और राजनीतिक वातावरण को पूर्ण रूप से आत्मसात कर लिया था। 19 वर्ष की अपनी उम्र में इस पुस्तक की अप्रकाशित प्रस्तावना, में उन्होंने लिखा था कि अपनी मातृभूमि की सेवा प्रत्येक मनुष्य का प्रमुख कर्तव्य है तथा इतिहास का प्रचार-प्रसार भारत के उत्थान का सबसे बड़ा उपाय है। यह हमारा कर्तव्य है कि आस्था और विश्वास के अनुसार मातृभूमि की सेवा के लिए हमें अपना जीवन समर्पित करना चाहिए।

उन्होंने यह भी लिखा था, कि महान हिंदूवीरों की पुरानी दंतकथाओं को सुनकर ही महाराणा प्रताप स्वतंत्रता के उपासक बने थे। महाभारत और रामायण की कथाओं ने ही एक पराधीन पिता के एक पराधीन पुत्र को महाराष्ट्र के छत्रपति में बदल दिया था। उन्होंने गाँवों में जोश और वीरता से ओतप्रोत गए जाने वाले आल्हा का भी जिक्र अपनी इस प्रस्तावना में किया था। उनके कहने का अर्थ यह था कि इतिहास लोगों को नींद से जगा सकता है, उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने की ताकत दे सकता है।

उनका कहना था कि मृत आत्माओं में जीवन डालना और सूखे फूल को हरा-भरा बनाना या तो अमृत से (यदि अमृत जैसा कुछ है) या इतिहास से ही प्राप्त किया जा सकता है। शेली, स्टुअर्ट मिल, स्पेंसर, मॉपासाँ, टॉलस्टॉय, शेक्सपियर, एच.जी. वेल्स से लेकर दादाभाई नैरोजी, फिरोज़ शाह मेहता, गोखले, तिलक, गान्धी आदि राजनैतिक लेखक और रवीन्द्रनाथ, सूर, तुलसी, भारतेन्दु हरिश्चन्द्र, प्रताप नारायण मिश्र, बालमुकुन्द तथा महावीर प्रसाद द्विवेदी जैसे साहित्यिक लेखक उनके विशेष प्रेम-पात्र हुआ करते थे।

आप उनकी लेखनी को देखेंगे तो पाएँगे कि गीता के निष्काम कर्म के सिद्धान्त ने उन पर बड़ा असर डाला है। विद्यार्थी जी वैसे तो देश-विदेश के सभी प्रमुख राजनैतिक और साहित्यिक लेखकों को पढ़ते थे लेकिन विक्टर ह्यूगो पर उनका विशेष प्रेम दिखता है। उनको जहाँ मौका मिलता है वो विक्टर की तारीफ़ करने से चूकते नहीं हैं। विक्टर ह्यूगो का “ला मिज़राब्ल्स” उनकी सर्वप्रिय कृति है। यह उपन्यास विश्व के चुनिंदा उपन्यासों में से एक है। जिस सजीवता से असहनीय व्याकुलता, विद्रोही विचार, करुणामय दृश्य को इस उपन्यास में वर्णित किया गया है वह अकल्पनीय है?

इस कृति को समझना हर किसी के बस की बात नहीं है, विद्यार्थी जी पर इन भावनाओं का बहुत असर पड़ा था। गणेश शंकर विद्यार्थी जी की विचारधारा और शैली में विक्टर ह्यूगो साफ़ दिखाई देते हैं। उनकी बड़ी इच्छा थी कि ह्यूगो की सभी कृतियों का हिन्दी अनुवाद कर के हिंदी पाठकों के सामने लाया जाए। जब ‘प्रताप’ का पहला अंक निकला था तो विधार्थी जी के गुरु आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी ने आशीर्वाद स्वरूप दो पंक्तियाँ विद्यार्थी जी को भेजी थी,-

“जिसको न निज गौरव तथा निज देश का अभिमान है
वह नर नहीं, नर पशु निरा है, और मृतक समान है”

वो ही मात्र एक ऐसे पत्रकार थे जिन्होंने ब्रिटिश शासन के साथ-साथ देसी सामंतों को भी नहीं बक्शा था। पत्रकारिता के पेशे को ही अपने जीवन का एकमात्र ध्येय माना हुआ था उन्होंने। अंत तक उन्होंने अपनी पत्रकारिता को किसी दल से जोड़ना मंजूर नहीं किया। विद्यार्थी जी अपनी लेखनी के माध्यम से जनजागरण करते आए, जिसके फलस्वरूप उनका एक पैर जेल में और एक घर में रहता करता था। भारत के उन सभी प्रदेशों में जहाँ-जहाँ हिन्दी भाषा बोली जाती है, अनेक भाषाप्रेमी उनको अपना गुरु माना करते थे।

बिहार, संयुक्त प्रान्त, मध्य भारत, राजस्थान और पंजाब के सैकड़ों नवयुवक उन्हें उनकी निडरता, निर्भीकता के लिए अपना नेता मानते थे। उनका अपने सभी शिष्यों से हमेशा यही कहना होता था कि अन्याय और अत्याचार के खिलाफ़ आवाज़ उठाने की आदत डाल लेनी चाहिए। विद्यार्थी जी में यह मनोवृत्ति बचपन से ही थी। छोटी-से-छोटी बात में भी मानव चरित्र की महानता की परख होती है ओर उसी से पता चल जाता है कि आगे चलकर वह दुनिया में क्या कर सकेगा। अगर किसी मनुष्य के भविष्य को जानना हो तो उसकी बचपन की मनोवृत्ति और आचार-विचार को ध्यान से देखिए। आप यह अनुमान लगा सकते हैं कि इस व्यक्ति की रुचि किस प्रकार की है और इसका भावी जीवन किस प्रकार का होने वाला है।

यह बात उन दिनों की है जब पोस्टकार्ड का टिकट काट कर किसी कागज़ या सादे कार्ड पर लगा कर भेजना कानूनी था। लेकिन एक बार इसी प्रकार के एक पोस्टकार्ड को पोस्ट आफिस वालों ने बैरंग कर दिया। श्री गणेश शंकर जी को यह बात गलत लगी। उन्होंने इसका विरोध करने के लिये एक पोस्टकार्ड का स्टाम्प काट कर एक दूसरे कागज पर चिपका कर उसे अपने नाम पर पोस्ट कर दिया। जब पोस्टकार्ड बैरंग हो कर उनके पास वापस आया तो पैसा दे कर उन्होंने उसे छुड़ा लिया।

इसके बाद वो पोस्ट मास्टर के पास गए और इसकी शिकायत कर डाली। शुरुआत में तो पोस्ट मास्टर साहब आनाकानी करते रहे लेकिन विद्यार्थी जी ने इतनी लिखा-पढ़ी कर डाली कि अन्त में डाक-विभाग के अधिकारियों को अपनी गलती माननी ही पड़ी। विद्यार्थी जी जब तक इस मसले में लगे रहे जब तक उनके वो पैसे वापस नहीं हुए। जब उनके एक मित्र ने उनसे यह सवाल पूछा कि मात्र चौथाई आने के लिए आपने इतनी माथा-पच्ची की तो उनका जवाब था कि बात चौथाई आने की नहीं थी। बात सिद्धांतों की थी।

उनका कहना था कि अगर आप छोटी-मोटी गलत बातों पर समझौता करने लगेंगे तो वो दिन दूर नहीं जब आपको सभी गलत बातें सही लगने लगेंगी। उनका मानना था कि गलत बात से समझौता नहीं करना है, चाहे वो कितनी ही छोटी हो या बड़ी। आपको यह भी हैरत होगी कि यह घटना उस समय की है, जब विद्यार्थी जी निरे विद्यार्थी थे यानी मिडिल में पढ़ते थे। वैसे तो उनके पिताजी तो फतेहगढ़ के रहने वाले थे लेकिन विद्यार्थी जी का जन्म उनके ननिहाल इलाहाबाद के अतरसुइया मोहल्ले में 26 अक्टूबर, 1890 को हुआ था।

एक बार विद्यार्थी जी ने किसी चर्चा में हँसते-हँसते बताया था कि गंगा देवी ने स्वप्न में गणेशजी की एक मूर्ति उनकी माता के हाथ में दी थी। उनकी माँ उस समय गर्भवती थीं और इस स्वप्न के अनुसार उन्होंने निश्चय कर लिया कि अगर पुत्र का जन्म हुआ तो उसका नाम गणेश और यदि वह पुत्री हुई तो उसका नाम गणेशी रखा जाएगा। संयोगवश पुत्र ही पैदा हुआ और पूर्व निश्चयानुसार उसका नाम गणेश ही रखा गया, जो आगे चल कर गणेश शंकर हो गया था।

जब उन्होंने लिखना शुरू किया तब उन्होंने अपना उपनाम ‘विद्यार्थी’ रख लिया था। विद्यार्थी का अर्थ है ‘ज्ञान का साधक”। वो कहते थे कि प्रत्येक मनुष्य जीवन भर विद्या का साधक ही बना रहता है। ताउम्र वह कुछ ना कुछ सीखता ही रहता है किन्तु उसके ज्ञान का भण्डार भरता ही नहीं। जीवन भर शिक्षा लाभ करते रहने पर भी मनुष्य का ज्ञान भण्डार परिपूर्ण नहीं होता तथा वो आचार्य नहीं हो पाता है। विद्यार्थी ही रहता है। संसार को एक पाठशाला मानते हुए वो अपने को एक तुच्छ शिक्षार्थी समझते थे।

भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की फाँसी के बाद कानपुर में भड़के सांप्रदायिक दंगों के सामने ‘प्रताप’ समाचार पत्र के संपादक गणेश शंकर विद्यार्थी ने अनुकरणीय साहस और करुणा का परिचय दिया था। उन्होंने हिंसा में फंसे हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के सैकड़ों निर्दोष लोगों को बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल दी थी। पत्रकार होते हुए भी विद्यार्थी ने मानवता के प्रति अपने कर्तव्य की भावना से कार्य करने में संकोच नहीं किया और वह दिन भर दंगा प्रभावित इलाकों में घूमते रहे।

जब भी उन्हें हिंसा में लोगों के फँसे होने की सूचना मिली उन्होंने त्वरित कार्रवाई की और लगभग 200 मुस्लिमों को बंगाली इलाके से बचाया और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की थी। हालाँकि, 25 मार्च, 1931 के उस दुर्भाग्यपूर्ण दिन, चौबे गोला इलाके में फँसे 200 हिंदुओं को बचाने की कोशिश करते समय, हिंसक भीड़ द्वारा विद्यार्थी पर हमला किया गया था। कुछ लोगों द्वारा पहचाने जाने के बावजूद, उन्हें भाले से वार किया गया और लाठियों से तब तक पीटा गया जब तक कि उनकी मौत नहीं हो गई। गणेश शंकर विद्यार्थी का त्याग और वीरता आज भी लोगों को प्रेरित करती है। उन्हें सांप्रदायिक सद्भाव के नायक और पत्रकारिता के उच्चतम आदर्शों के अवतार के रूप में याद किया जाता है।

(मनीष श्रीवास्तव की पुस्तक श्रृंखला ‘क्रांतिदूत‘ का संपादित अंश)

बैग, जैकेट, ट्राउजर और चश्मा…: हुलिया बदलकर UP के लखीमपुर में घूमता दिखा अमृतपाल, J&K में बैठे करीबी गिरफ्तार

पाकिस्तान के सहयोग से देश को एक बार फिर खालिस्तानी अलगाववाद की आग में झोंकने की कोशिश करने वाले ‘वारिस पंजाब दे’ के भगोड़ा मुखिया अमृतपाल को सुरक्षा एजेंसियाँ तलाश कर रही हैं। उसकी एक नई तस्वीर भी सामने आई है, जिसमें वह चश्मा पहने नजर आ रहा है। उससे जुड़े और मदद करने वालों को भी पुलिस गिरफ्तार कर रही है।

हरियाणा के कुरुक्षेत्र में 19 मार्च की रात अमृतपाल सिंह को पनाह देने वाली महिला बलजीत कौर को गिरफ्तार किया गया था। अब पुलिस ने जम्मू-कश्मीर से एक कपल को गिरफ्तार किया है। आरएसपुरा निवासी अमरीक सिंह और उनकी पत्नी सरबजीत कौर पर आरोप है कि उनके अमृतपाल के साथी पपलप्रीत सिंह के साथ संबंध हैं।

कहा जाता है कि पपलप्रीत ही अमृतपाल को गिरफ्तारी से बचा रहा है और उसे जगह-जगह छिपने में मदद कर रहा है। बलजीत कौर भी पपलप्रीत की ही जानकारी है। इससे पहले अमृतपाल के एक अन्य सहयोगी को मध्य प्रदेश के इंदौर से गिरफ्तार किया गया था। उत्तराखंड के देहरादून, उधमसिंहनगर और हरिद्वार में अमृतपाल को लेकर खास तौर पर अलर्ट जारी किया गया है।

अमृतपाल कहाँ है, इसकी जानकारी किसी को नहीं है। उसे गिरफ्तार करने के लिए सुरक्षा एजेंसियाँ दिल्ली सहित कई जगहों पर छापेमारी कर रही है। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और दिल्ली में अमृतपाल की तलाश की जा रही है। बता दें कि साल 2016 से पिछले साल तक 5 से अधिक खालिस्तानी समर्थक उत्तराखंड से गिरफ्तार हो चुके हैं।

अमृतपाल का एक नया वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वह टी-शर्ट और जिंस के साथ जैकेट पहने मोबाइल पर बात करते हुए जा रहा है। कहाँ जा रहा है कि यह वीडियो 23 मार्च 2023 का लखीमपुर खीरी का है। इस वीडियो में वह एक बैग लिए नजर आ रहा है। साथ ही वह अपना मुँह ढँके नजर आ रहा है। लखीमपुर नेपाल बॉर्डर से सिर्फ 5 किलोमीटर की दूरी पर है।

इसके पहले एक और वीडियो सामने आया था। ये वीडियो फुटेज CCTV के हैं। इस फुटेज में अमृतपाल जैकेट, ट्राउजर और चश्मा पहने नजर आ रहा है। यह फुटेज अमृतसर का बताया जा रहा है। कुछ मीडिया हाउस में इसे पटियाला का कहा जा रहा है। यह फुटेज 20 मार्च का बताया जा रहा है।

वहीं, एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया कि अमृतपाल दिल्ली की तरफ जाने की कोशिश कर रहा है। कहा जा रहा है कि अमृतपाल साधु के वेश में एक बस टर्मिनल पर उतरा था। इस घटना के बाद पुलिस की टीम दिल्ली के कश्मीरी गेट स्थित इंटर स्टेट बस टर्मिनल पर मौजूद सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है।

‘राहुल गाँधी के परिवार के लिए अलग कानून होना चाहिए’ : कॉन्ग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी की माँग, BJP नेता ने पूछा- इतनी चाटुकारिता कौन करता है…

राहुल गाँधी की संसद सदस्यता खत्म होने के बाद से कॉन्ग्रेस में बौखलाहट मची हुई है। इस बीच कॉन्ग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि राहुल गाँधी के परिवार के लिए कानून अलग होना चाहिए। उनके इस बयान को लेकर भाजपा हमलावर है।

दरअसल, कॉन्ग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा है कि राहुल गाँधी के परिवार के लिए कानून अलग होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा है कि दोषी ठहराने में कानून बराबर होना चाहिए लेकिन सजा देने के लिए कानून अलग होना चाहिए। जब किसी को दोषी ठहराया जाता है तो उसमें किसी का परिवार या किसी की पृष्ठभूमि नहीं देखी जाती बल्कि अपराध देखा जाता है। लेकिन जब सजा देने की बात आती है तो उसमें आदमी का चाल चलन, उसका स्तर, पारिवारिक पृष्ठभूमि देखी जानी चाहिए।

प्रमोद तिवारी ने उदाहरण देते हुए आगे कहा है, “यदि कोई शिक्षक है और वह किसी तरह से हत्या के मामले में फँस गया है। ऐसे में उसे मौत की सजा नहीं दी जाएगी क्योंकि वह आदतन अपराधी नहीं है। इसलिए राहुल गाँधी को सजा देने में उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि, राहुल गाँधी की पृष्ठभूमि सबका आँकलन होना चाहिए था।”

यही नहीं, प्रमोद तिवारी ने ट्वीट कर कहा है कि वह अपने बयान पर कायम हैं। उन्होंने लिखा है, “बोलने के पहले पढ़ना चाहिए। मैं अपने बयान पर कायम हूँ। गाँधी परिवार को दोषी ठहराने के लिए नहीं परन्तु सजा देने के मामले में दो प्रधानमंत्री की शहादत, राहुल गाँधी का सांसद होना, पहली बार अपराध करना, कोई आपराधिक इतिहास न होने के कारण अलग कानूनी नजरिए से देखना चाहिए।”

हालाँकि उनके इस बयान को लेकर भाजपा हमलावर है। भाजपा के नवीन जिंदल ने कहा है कि इतनी बड़ी चाटुकारिता कौन करता है। वहीं भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने ट्वीट कर कहा है कि गाँधी परिवार के लिए अलग कानून की माँग करने वाले लोग कल अलग देश की माँग भी कर सकते हैं। उन्होंने लिखा है, ‘सजा पर गाँधी परिवार के लिए देश में अलग कानून होना चाहिए’ -प्रमोद तिवारी, कॉन्ग्रेस सांसद। गाँधी परिवार के लिए इन्हें आज अलग कानून चाहिए, कल अलग न्यायालय चाहिए, फिर अलग संसद चाहिए फिर कहीं ये अलग देश की माँग भी कर सकते हैं। यही कॉन्ग्रेस पार्टी का असली चाल, चरित्र और चेहरा है।”

गुजरात की 17 जेलों में 1700 पुलिसवालों का छापा, अतीक अहमद की जेल में 300 पहुँचे: चप्पे-चप्पे का लाइव टेलीकास्ट, 39 घातक हथियार बरामद

गुजरात पुलिस की तरफ से शुक्रवार (24 मार्च 2023) की रात राज्य के 17 जेलों में बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन चलाया गया। इस ऑपरेशन की मॉनिटरिंग राज्य के गृहमंत्री हर्ष संघवी ने खुद की। अहमदाबाद के साबरमती जेल में लगभग 300 पुलिसकर्मियों ने सर्च ऑपरेशन चलाया। इसी जेल में माफिया अतीक अहमद भी कैद है। छापेमारी के दौरान कई मोबाइल फोन और मादक पदार्थ मिलने की बात कही जा रही है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक राज्य भर की 17 प्रमुख जेलों में एक साथ मेगा सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। ऑपरेशन में कुल 1700 पुलिसकर्मियों की मदद ली गई। टीम में एसओजी और लोकल क्राइम ब्राँच के ऑफिसर भी शामिल थे। बॉडी वियर कैमरों से लैश पुलिसकर्मियों ने जेल का चप्पा-चप्पा खंगाला। रात भर चले इस तलाशी अभियान की मॉनिटरिंग राज्य के गृहमंत्री हर्ष संघवी ने की। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने भी सीएम डेशबोर्ड से रेड पर नजर रखी।

गुजरात पुलिस की तरफ से राज्य के अहमदाबाद, राजकोट, सूरत, बड़ौदा, बनासकाठा, भावनगर, जामनगर, महेसाणा समेत 17 जेलों का औचक निरीक्षण किया गया। छापेमारी का लाइव टेलीकास्ट भी किया जा रहा था जिसे गाँधीनगर स्टेट कंट्रोल रूम में देखा जा रहा था।

बड़ा होने के कारण साबरमती जेल में 300 पुलिसकर्मियों ने छापेमारी की। माफिया अतीक अहमद भी इसी जेल में बंद है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक छापेमारी की खबर से उसकी नींद उड़ गई। कुछ दिन पहले खबरें आई थी कि अतीक अहमद जेल में मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहा था।

गुजरात में चलाए गए मेगा सर्च ऑपरेशन के दौरान 16 मोबाइल फोन, 10 इलेक्टॉनिक सामान, 39 घातक हथियार और 500 से अधिक नशीले पदार्थ पाए गए। पुलिस सुत्रों की मानें तो छापेमारी का मकसद जेल में अवैध गतिविधियों का पता लगाना और कैदियों को दी जा रही सुविधाओं का जायजा लेना था। बताया जा रहा है कि ऑपरेशन के दौरान पुलिस टीमों द्वारा कैदियों से बातचीत की गई और उनकी काउंसलिंग भी की गई।

‘उसने अपनी गंदी जीभ मेरे मुँह में डाली’ : एक्ट्रेस ने टीवी शो के जज पर लगाया यौन उत्पीड़न का आरोप, बोलीं- पहले नहीं थी बताने की हिम्मत

हॉलीवुड अभिनेत्री शेरिल ली राल्फ (Sheryl Lee Ralph) ने एक टीवी शो के मशहूर जज पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि उनका यौन शोषण सबके सामने हुआ था लेकिन किसी ने भी टीवी शो के उस जज के खिलाफ आवाज नहीं उठाई। हालाँकि राल्फ ने आरोपित जज का नाम नहीं बताया है।

दरअसल, शेरिल ली राल्फ ‘वे अप विद एंजेला यी’ (Way Up with Angela Yee) नामक पॉडकास्ट में बात कर रहीं थीं। इस दौरान शो की होस्ट एंजेला यी ने उनसे मीटू (#MeToo) कैंपेन से जुड़े उनके अनुभव को लेकर सवाल पूछा। इस पर शेरिल ली राल्फ ने कहा है कि एक टीवी शो के मशहूर जज ने उनका यौन शोषण किया था। यह सब सालों पहले हुआ था।

राल्फ ने कहा है, “मैं एक पब्लिक प्लेस पर थी। वहाँ एक टेलीविजन शो की शूटिंग चल रही थी। तभी वो मशहूर जज मेरे सामने से चलकर आया और उसने पीछे से मेरी गर्दन को पकड़ लिया। मैं घबरा गई और पीछे मुड़कर देखा। मेरे पीछे देखते ही उसने अपनी गंदी जीभ मेरे मुँह के अंदर डाल दी। हम दोनों एक ही नेटवर्क के लिए काम कर रहे थे। वहाँ सभी लोग मौजूद थे लेकिन वे लोग मेरे साथ ऐसा होता देखते रहे। किसी ने कुछ नहीं कहा। सब तमाशा देख रहे थे।”

शेरिल ली राल्फ ने आगे कहा है कि यौन उत्पीड़न के बाद उन्होंने न्यू ऑरलियन्स के तत्कालीन मेयर मार्क मोरियल को इस घटना की शिकायत करने के लिए बुलाया था। मेयर उनकी मदद करना चाहते थे। वह पुलिस भेजने के लिए भी तैयार थे। लेकिन एक व्यक्ति ने उनके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा था कि ‘प्लीज ये सब मत करो।’

राल्फ ने आगे कहा है कि वो लोग अपने शो को लेकर कोई भी बुरी चीज नहीं चाहते थे। लेकिन किसी को भी इस बात की कोई परवाह नहीं करते थे कि उनके साथ क्या हुआ है। उन्होंने यह भी कहा है कि उन्होंने उस समय कुछ नहीं कहा था क्योंकि तब उनके अंदर इतनी हिम्मत नहीं थी। लेकिन आज यह सब इसलिए बता रहीं हैं क्योंकि इससे अन्य महिलाओं को बोलने की हिम्मत मिलेगी।

PFI के 2 दफ्तरों को किया गया सील, राजस्थान के जयपुर और कोटा में NIA की कार्रवाई: आतंकवाद के पैसों से चल रहे थे, एक ऑफिस मस्जिद के पास

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने राजस्थान के कई जिलों में प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) के ऑफिसों और सम्पत्तियों के खिलाफ कार्रवाई की है। इस सिलसिले में NIA की टीम ने कोटा और जयपुर में PFI के कार्यालयों को UPPA के तहत अटैच किया है। जाँच एजेंसी ने बताया कि इन ऑफिसों को आतंकवाद से कमाए गए पैसों से संचालित किया जा रहा था।। यह एक्शन शुक्रवार (24 मार्च, 2023) को हुआ है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक NIA ने जिन सम्पत्तियों को अटैच किया है उसमें एक जगह कोटा के रामपुरा थाना क्षेत्र की है। जाँच एजेंसी ने यहाँ लाडपुरा लाल जी की घाटी स्थित अराकेन बड़ी मस्जिद के पास बने मदरसा फुरकानिया पर नोटिस चस्पा किया है। जिस दूसरी जगह NIA ने कार्रवाई की है वह राजस्थान की राजधानी जयपुर में है। यहाँ पर मोती डूंगरी रोड स्थित पंजाब नेशनल बैंक के पास स्थित मकान नंबर 2 पर ताला लगाया गया है। NIA ने दोनों ही स्थानों की कमाई आतंकवाद के जरिए होने की जानकारी दी है।

राजस्थान के कोटा जिले की रामपुरा थाना कोतवाली पुलिस ने बिल्डिंग पर एक नोटिस अटैच होने की जानकारी दी है। इस से पहले NIA की टीम पिछले माह फरवरी की 18 तारीख को इसी बिल्डिंग पर एक्शन के लिए कोटा पहुँची थी। तब कोटा में 2 स्थानों पर कार्रवाई हुई थी। दूसरी जगह विज्ञान नगर थाना क्षेत्र में है। शुक्रवार को हुई कार्रवाई के दौरान बिल्डिंग पर कोई भी मौजूद नहीं मिला। इस बिल्डिंग के पास मौजूद मस्जिद के सदर से NIA के अधिकारियों ने बात की।

क्या है पूरा मामला

दरअसल साल 2022 के सितंबर माह में NIA ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया के प्लान 2047 का पर्दाफाश किया था। इस मामले में दर्ज FIR में PFI पर आरोप लगाया गया था कि वह भारत को 2047 तक इस्लामिक स्टेट बनाना चाह रहा था। इसकी तैयारी के लिए PFI द्वारा मुस्लिम युवाओं को न सिर्फ मज़हबी कट्टरता बल्कि हथियारों की भी ट्रेनिंग दी जा रही थी। जाँच के दौरान इस नेटवर्क की साजिश में कोटा के मोहम्मद आसिफ और बारां के सादिक सराफ भी शामिल मिले थे।

जिस चीन के कर्ज के जाल में फँस बर्बाद हुआ श्रीलंका, अब फिर उसी से डील: हंबनटोटा में तेल रिफाइनरी प्रोजेक्ट लगाएगी चीनी कंपनी

चीन के कर्ज के जाल में फँसकर पिछले साल अराजकता झेल चुके श्रीलंका में अब चीनी कंपनी तेल के उत्पादन में निवेश करेगी। इसके लिए वह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण और भारत के लिए बेहद अहम हंबनटोटा बंदरगाह निवेश करेगी। इस कंपनी नाम सिनोपेक (Sinopec) है। वर्तमान में यह कंपनी श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह पर बंकरिंग सेवाएँ प्रदान करती है।

सिनोपेक चीन की राजधानी बीजिंग में मुख्यालय वाली चीन की सरकारी तेल कंपनी है। यह तेल और गैस की खोज और उत्पादन में लगी हुई है। यह फॉर्चुन ग्लोबल लिस्ट 2022 में पाँचवें नंबर पर है। यह दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी कंपनी और तीसरी सबसे बड़ी केमिकल कंपनी है। इसे चाइना पेट्रोकेमिकल कॉरपोरेशन के नाम से भी जाना जाता है।

सिनोपेक ग्रुप और चाइना मर्चेंट्स ग्रुप के एक शीर्ष प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में कोलंबो में पेट्रोलियम, बंदरगाह और औद्योगिक पार्क संचालन सहित अन्य व्यापार में सहयोग और निवेश का पता लगाने के लिए श्रीलंका का दौरा किया था। प्रस्तावित निवेश पर दोनों पक्षों के बीच फिलहाल बातचीत चल रही है। हंबनटोटा को पेट्रोलियम वितरण केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।

लंका इंडियन ऑयल कंपनी इस समय श्रीलंका में रिटेन फ्यूल ट्रेड करने वाली एकमात्र विदेशी कंपनी है। यह भारत की प्रमुख ऑयल कंपनी इंडियन ऑयल की श्रीलंका में सहायक कंपनी है। इसकी स्थापना साल 2003 में की गई थी और आज यह श्रीलंका की आठवीं सबसे बड़ी कंपनी है।

श्रीलंका के बिजली और ऊर्जा मंत्री कंचना विजेसेकरा ने कहा कि स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के लिए देश के खुदरा बाजार में तीन वैश्विक आपूर्तिकर्ता कंपनियाँ प्रवेश करेंगी। प्रस्तावित निवेश को लेकर उन्होंने को ट्वीट किया, “एक बार जब राष्ट्रीय ऊर्जा समिति अपनी मंजूरी दे देती है तो इसे कैबिनेट के सामने पेश किया जाएगा।”

श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने इसके पूर्व वाली सरकार ने 1.5 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश के बाद हंबनटोटा को चीन की इस सरकारी कंपनी को 99 साल के लीज पर दे दिया था। इस बंदरगाह शहर में चीन 15,000 एकड़ में औद्योगिक जोन स्थापित करना चाहता है।

वहीं, श्रीलंका ने पूर्वी जिले के बंदरगाह शहर त्रिकोंमाली को दक्षिण एशिया का ऊर्जा हब बनाना चाहता है। इसके लिए उसने समझौता किया है। यह समझौता भारत की सरकारी कंपनी ऑयल इंडिया द्वारा किया गया है। श्रीलंका को उम्मीद है कि इन दोनों बंदरगाहों के विकास के बाद उसे काफी मुनाफा होगा और वह आर्थिक संकट से निकल जाएगा।

दरअसल, आर्थिक संकट को दूर वित्तीय अनिश्चितता से निकलने के लिए श्रीलंकाई सरकार हाथ-पैर मार रही है। श्रीलंका को वर्तमान में IMF से $2.9 अरब के बेलआउट पैकेज की प्रतीक्षा है। उसे 9 मार्च को इस मामले में श्रीलंका को चीन का समर्थन मिला था।

बता दें कि साल 2018 में चीन की कंपनी ने 1.1 अरब डॉलर का ऋण देकर हंबनटोटा को वर्ष 2117 के लिए खरीद लिया था। श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे की सरकार ने हंबनटोटा के निर्माण के लिए चीनी बैंकों से 8 बिलियन डॉलर का ऋण लिया था। महँगा ब्याज चुकाने के कारण श्रीलंका आर्थिक संकट में फँस गया।

श्रीलंका के ऐसे हालात हो गए वहाँ देश भर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए और लोगों ने राष्ट्रपति भवन पर कब्जा तक कर लिया। तब भारत ने महत्वपूर्ण पड़ोसी देश होने के नाते भारत ने श्रीलंका को करोड़ों डॉलर की आर्थिक मदद दी थी। श्रीलंका अब भी लिए गए ऋण का भुगतान करने के लिए संघर्ष कर रहा है।