बिहार के नालंदा में भवन निर्माण मंत्री अशोक चौधरी ने एक कार्यक्रम के दौरान मुस्लिम समुदाय को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने बिहारशरीफ के गगन दीवान मोहल्ले में शनिवार (18 मार्च 2023) को जेडीयू (JDU) द्वारा आयोजित भीम चौपाल में कहा कि भारत के मुसलमान लंदन-अमेरिका-अफगानिस्तान से नहीं आए हैं, ये वो मुस्लिम हैं जो कभी दलित थे और ब्राह्मण व्यवस्था व छुआ-छूत से तंग आकर मुस्लिम बन गए। अशोक चौधरी के मुताबिक 90 फीसदी मुसलमान कन्वर्टेड हैं।
न्यूज 18 की रिपोर्ट में सुन सकते हैं कि अशोक चौधरी ने बयान बिहार सरकार के उस फैसले के पक्ष में दिया जहाँ रमजान के दौरान मुस्लिम कर्मचारियों को दफ्तर जल्दी आने और जाने की छूट दी गई है। उन्होंने नवरात्रि पर ऐसी छूट माँगने वाली भाजपा पर आरोप मढ़ कि केवल हिंदू-मुस्लिम करने के लिए वह ऐसी माँग उठा रहे हैं।
उन्होने कहा, “अल्पसंख्यकों को छूट देने का काम सालों से हो रहा है। भाजपा तो ऐसे ही कुछ भी बोलती है हिंदू-मुस्लिम करने के लिए। कुछ भी करो, तो बस पूछते हैं कि मुस्लिम के लिए क्यों किया, हिंदुओं के लिए क्यों नहीं किया। अरे जो लोग माइनॉरिटी हैं उनके लिए ये किया जाता है ये सब कोई नया थोड़ी है। ऐसा तो बहुत पहले से होता आया है। और ये लोग मुसलमान-मुसलमान करते हैं। ये कोई लंदन-अमेरिका से आए हैं। ये सबको तो आपने ब्रह्मवाद की व्यवस्था में छुआछूत में फँसा दिया तो सब मुसलमान बन गए क्योंकि मुस्लिमों में छुआछूत नहीं था, कुछ बौद्ध बन गए…ये सब दलित लोग हैं।90% मुसलमान इस देश में कन्वर्टेड हैं।”
बता दें कि बिहार सरकार ने कुछ दिन पहले रमजान के मद्देनजर ये अनुमति दी थी कि सरकारी कर्मचारी जो मुस्लिम हैं वो शाम को समय से एक घंटा पहले छुट्टी ले सकते हैं और एक घंटा पहले ड्यूटी आ सकते हैं। उनके इसी आदेश के बाद भाजपा ने कहा था कि रामनवमी और नवरात्रि के लिए भी ऐसी छूट हिंदुओं को मिले। हालाँकि इस माँग पर पार्टी नेता बिगड़ गए और मुस्लिमो को रियायतत देने के पीछे अपनी सफाई दी।
मध्य प्रदेश की इंदौर कोर्ट ने नाबालिग लड़के का बलात्कार करने के आरोप में कोर्ट ने लड़की को 10 साल की सजा सुनाई। आरोप है कि लड़की बहला फुसलाकर लड़के को गुजरात ले गई। इसके बाद उसने कई बार उसका बलात्कार किया।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला इंदौर के बाणगंगा थाना क्षेत्र का है। जहाँ 5 नवंबर 2018 को एक महिला ने अपने 15 वर्षीय लड़के की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। महिला ने अपनी शिकायत में कहा था कि उसका बेटा घर से दूध लेने के लिए निकला लेकिन दो दिन बीत जाने के बाद भी घर वापस नहीं आया। महिला की शिकायत के आधार पर पुलिस ने लड़के की तलाश शुरू की।
मामले की जाँच करते हुए पुलिस को लड़के की लोकेशन गुजरात में मिली। लड़के की तलाश में जब पुलिस गुजरात गई तो लड़के साथ में 19 साल की एक लड़की भी मौजूद थी। लड़की ने किराए पर घर लिया हुआ था और लड़के के साथ उसी घर में रह रही थी। पुलिस ने दोनों से पूछताछ शुरू की। इस पूछताछ में लड़के ने बताया कि लड़की बहला-फुसलाकर उसे अपने साथ गुजरात ले गई थी। जहाँ टाइल बनाने वाली कंपनी में उसकी नौकरी लगवादी थी।
पीड़ित लड़के ने पुलिस को बताया था कि लड़की उसे अपने साथ बार-बार संबंध बनाने के लिए मजबूर करती थी। यही नहीं, लड़का अपने घर वालों से बात न कर सके। इसलिए उसने उसका मोबाइल भी छीन लिया था। लड़के के बयानों के आधार पर पुलिस ने आरोपित लड़की को गिरफ्तार कर पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था। साथ ही, लड़की का मेडिकल टेस्ट कराया गया। टेस्ट रिपोर्ट में लड़की पर लगे बलात्कार के आरोप सही पाए गए।
अब इस मामले में सुनवाई करते हुए इंदौर की पॉक्सो अदालत ने आरोपित लड़की को 10 साल की सजा सुनाने के साथ ही 3 हजार रुपए का जुर्माना भरने का आदेश दिया है। साथ ही कोर्ट ने पीड़ित लड़के को बतौर मुआवजा 50 हजार रुपए देने का भी आदेश दिया।
अभिनेत्री सोनाली कुलकर्णी ने हर तरफ आलोचना होने के बाद अपने विवाद बयान पर माफी माँग ली है। उन्होंने कहा कि एक महिला होने के नाते उनका मकसद किसी महिला का अपमान करना नहीं था। बता दें कि सोनाली ने कहा था कि आजकल की लड़कियाँ आलसी हैं। वे मेहनत करना नहीं चाहती हैं, लेकिन बॉयफ्रेेंड अमीर चाहती हैं।
सोनाली कुलकर्णी ने ट्विटर पर एक नोट शेयर कर अपनी बात रखी। प्रेस और मीडिया को धन्यवाद देते हुए उन्होंने कहा कि महिलाओं के समर्थन में वे खुद आगे आकर बोलती रही हैं। उनके बयान की सराहना या आलोचना करने के वाले लोगों को आभार व्यक्त किया। उन्होंने आशा व्यक्त किया कि विचारों के अधिक आदान-प्रदान होता रहेगा।
सोनाली ने आगे कहा, “यदि अनजाने में मुझे कष्ट हुआ हो तो मैं ह्रदय की गहराइयों से क्षमा माँगती हूँ। मैं सुर्खियों में नहीं आना चाहती और न ही मैं सनसनीखेज स्थितियों का केंद्र बनना चाहती हूँ। मैं कट्टर आशावादी हूँ और मेरा दृढ़ विश्वास है कि जीवन वास्तव में सुंदर है। आपके धैर्य और समर्थन के लिए धन्यवाद। मैंने इस घटना से बहुत कुछ सीखा है।”
हाल ही में एक कार्यक्रम में भूपेंद्र सिंह राठौर के साथ बातचीत के दौरान सोनाली ने कहा था, “भारत में बहुत सारी लड़कियाँ आलसी हैं। वे एक ऐसा प्रेमी या पति चाहती हैं, जो अच्छी कमाई करता हो, एक घर का मालिक हो और जिसके वेतन में नियमित वृद्धि होती हो। लेकिन, इन सबके बीच महिलाएँ अपने लिए स्टैंड लेना भूल जाती हैं। महिलाओं को नहीं पता कि वे क्या करेंगी। मैं सभी से आग्रह करती हूँ कि वे अपने घरों में ऐसी महिलाओं को लाएँ जो सक्षम हो और अपने लिए कमा सकती हो।”
उन्होंने आगे कहा था, “मुझे लगता है कि जब लड़के 18 साल के होते हैं तो उन पर यह दबाव होता है कि पढ़ाई और मौज-मस्ती खत्म होने वाली है और अब आपको कमाना है। मुझे अपने भाइयों और अपने पति के लिए रोने का मन करता है। जब वह 20 साल का था, तब कैंपस इंटरव्यू से उसका चयन हो गया और उसने कमाई शुरू कर दी थी।”
सोनाली कुलकर्णी के बयान के बाद फेमिनिस्टों ने उन्हें निशाना बनाना शुरू कर दिया था। यहाँ तक कि बॉलीवुड में भी उनके बयान की आलोचना की गई। अभिनेता उर्फी जावेद और गायिका सोना महापात्रा ने भी सोनाली के शब्दों की आलोचना की। बता दें कि सोनाली कुलकर्णी मराठी और हिंदी फिल्मों की दिग्गज अभिनेत्री हैं।
बिहार के बेगूसराय में मारुति कंपनी के शोरूम के संचालकों पर सशस्त्र बल के एक पूर्व कॉन्स्टेबल (General Duty) ने गलत व्यवहार किए जाने के आरोप लगाए हैं। CRPF में सेवा दे चुके रॉबिन्स सिंह दिव्यांग हैं। उनके दोनों पाँव नहीं हैं। नक्सलियों द्वारा किए गए एक ब्लास्ट के कारण उन्हें ये क्षति पहुँची। अर्थात, देश के लिए अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए उनके दोनों पैर चले गए। आइए, बताते हैं कि पूरा मामला क्या है।
25 फरवरी, 2021 को झारखंड के गुमला में नक्सलियों ने एक IED ब्लास्ट किया था। ऐसी घटनाओं के तुरंत बाद बलिदानियों और घायलों के लिए बड़ी-बड़ी बातें की जाती हैं, नेता लोग वादे करते हैं और बड़ी संख्या में लोग सड़क पर उतर कर उनकी बहादुरी को सलाम करते हैं। लेकिन, समय बीतने के साथ उनकी या उनके परिवार की क्या स्थिति है – कोई पूछने भी नहीं जाता। उससे भी बड़ी दुःख की बात ये है कि उन्हें जानबूझ कर परेशान किया जाता है।
गुमला IED ब्लास्ट में रॉबिन्स कुमार ने खो दिए थे अपने दोनों पैर
गुमला जिले के चैनपुर प्रखंड स्थित कुरुमगढ़ थाना क्षेत्र के सिविल रोडेंग गाँव के जंगल में उक्त आईईडी ब्लास्ट हुआ था। इससे पहले CRPF और जिला पुलिस की नक्सलियों के साथ मुठभेड़ भी हुई थी। इसके बाद चलाए गए तलाशी अभियान के दौरान ये घटना हुई। झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता भी घायल रॉबिन्स कुमार को देखने पहुँचे थे। इलाज के लिए उन्हें हैलीकॉप्टर से राँची भेजा गया था। रॉबिन्स उस समय सीआरपीएफ में कॉन्स्टेबल जीडी के रूप में कार्यरत थे।
इस घटना के बाद रॉबिन्स सिंह को आर्टिफिसियल पाँव भी लगाए गए थे। सरकार की तरफ से भी उन्हें सहायता मिली थी। दिव्यांग होने के कारण रॉबिन्स कुमार दौड़-धूप करने की स्थिति में भी सक्षम नहीं है, ऐसे में मारुति शोरूम द्वारा उन्हें सरकारी योजना का लाभ नहीं दिया जा रहा है। ये सब इसके बावजूद किया जा रहा है, जब उनके पास पुख्ता दस्तावेज भी मौजूद हैं। ऊपर से उनके साथ एकदम रूखा व्यवहार किया जा रहा है।
दिव्यांगों के केंद्र सरकार की योजना, 10% GST छूट के साथ ही ले सकते हैं ‘Adapted Vehicles’
सबसे पहले उस योजना के बारे में बताते हैं, जिसके लाभ के वो पात्र हैं। इस योजना के तहत उन्हें गाड़ी खरीदने के दौरान 10% छूट मिलनी चाहिए। बता दें कि केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रालय लोगों के जीवन को आसान बनाने (Ease Of Living) की दिशा में ये योजना लेकर आया है। इसके तहत ‘Orthopedic Physical Disability’ से पीड़ित व्यक्ति को गाड़ी खरीदने के दौरान GST में छूट मिलती है। इसके लिए मंत्रालय की तरफ से एक प्रमाण-पत्र (Certificate) जारी किया जाता है, जिसके लिए मोदी सरकार ने एक पोर्टल भी लॉन्च किया है।
इस पोर्टल पर बताया गया है कि किस तरह के कारों के लिए ये योजना लागू होती है और खरीददार को 28% की जगह मात्र 18% जीएसटी देनी होती है। वाहन खरीदने से पहले इसके लिए आवेदन करना होता है, क्योंकि इसमें रिफंड की कोई सुविधा नहीं है। विशिष्ट दिव्यांगता प्रमाण-पत्र या दिव्यांगता प्रमाण-पत्र न होने की स्थिति में सिविल सर्जन या ऑर्थोपेडिक डॉक्टर के हस्ताक्षर वाला प्रमाण-पत्र भी चलेगा, जिस पर पंजीकरण संख्या दर्ज हो।
साथ ही इसमें ये भी बताया गया है कि अगर कार विक्रेता अथवा RTO अगर इस प्रमाण-पत्र के होने के बावजूद इस योजना का लाभ नहीं देता है, तो ‘भारतीय ऑटोमोबाइल विक्रेता संघ (FADA)’ या केंद्रीय सड़क, परिवहन एकत्व राजमार्ग मंत्रालय को शिकायत की जा सकती है। यदि खरीद किए बिना ही प्रमाण-पत्र की वैधता समाप्त हो जाती है, तो इसे आगे बढ़ाने की प्रक्रिया के लिए भी आवेदन करने की व्यवस्था है। हाल ही में सरकार ने फैसला लिया कि ऐसे प्रमाण-पत्रों की वैधता 2 वर्षों के लिए बढ़ा दी जाए।
रॉबिन्स कुमार को इस दस्तावेज को बनवाने में 6 महीने का समय लगा। उन्होंने बेगूसराय स्थित ‘G S Motors’ नामक दुकान से बलेनो गाड़ी खरीदने को लेकर बात भी कर ली थी। उन्होंने आश्वासन दिया था कि एक बार दस्तावेज आ जाने के बाद वो गाड़ी देने के लिए तैयार हैं। लेकिन, जब उक्त रिटेलर के नाम से दस्तावेज बन कर आ गया, उसके बढ़ उन्होंने गाड़ी बुक करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि उनके पोर्टल पर ये सब नहीं दिखा रहा है।
असल में ये दस्तावेज किसी खास रिटेलर के नाम से बनवाया जाता है, जिसका मतलब है कि किसी अन्य रिटेलर से इसके आधार पर गाड़ी की खरीद नहीं की जा सकती। उसके लिए फिर अलग से दस्तावेज बनवाना होगा। रॉबिन्स कुमार ने बताया कि पिछले 15 दिनों से गाड़ी बुक करने में टालमटोल की जा रही है। जब उन्होंने कंज्यूमर फोरम में जाने की चेतावनी दी, तब ‘G S Motors’ के संचालकों ने कहा कि जहाँ जाना है जाइए।
पीड़ित रॉबिन्स कुमार बेगूसराय के खम्हार बभनगामा के रहने वाले हैं। इसे रतनमन बभनगामा के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने इस सम्बन्ध में ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया, “मैंने मारुति कंपनी में भी शिकायत की, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। इसके बाद मैंने अपने दोस्तों को इस बारे में बताया। मैंने जयपुर स्थित मारुति रिटेलर से ‘G S Motors’ के संचालक की बात कराई। उन्होंने इस नियम के बारे में बताया गया। फोन कॉल पर उन्होंने आश्वासन दिया, लेकिन बाद में फिर पलट गए।”
उन्होंने कहा कि मंत्रालय से इसके बाद कोई बात नहीं हुई, दस्तावेज देने के बाद उनका काम ख़त्म हो गया। इस दस्तावेज को प्राप्त करने और दौड़-धूप में उनके भांजे ने उनका सहयोग किया। रॉबिन्स कुमार पूछते हैं कि अगर घर में रहने के बावजूद उन्हें इस सरकारी नियम के बारे में पता है तो इस इंडस्ट्री में काम कर रहे लोगों को कैसे नहीं पता होगा? उनका स्पष्ट मानना है कि रिटेलर जानबूझकर उनके साथ ऐसा कर रहा है।
केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय ने दिव्यांगों को ड्राइविंग लाइसेंस देने के लिए भी अलग से व्यवस्था की है। इसके लिए विशेष दिशानिर्देश भी जारी किए गए हैं। वहीं भारी उद्योग मंत्रालय ने 40% से अधिक दिव्यांगता वाले लोगों के लिए GST में छूट वाली व्यवस्था की। अगर कोई व्यक्ति दिव्यांग है और गाड़ी चलाने की स्थिति में नहीं है, उसे भी छूट का लाभ देने का प्रावधान है। वो गाड़ी चलाने के लिए ड्राइवर रख सकता है।
रॉबिन्स कुमार को जारी किया गया सर्टिफिकेट, जिसके तहत वो गाड़ी खरीद में 10% GST छूट के पात्र हैं
रॉबिन्स कुमार को जारी किए गए दस्तावेजों की प्रति ऑपइंडिया के पास मौजूद है। उनके पास ‘Unique Disability’ आईडी कार्ड भी है। इसमें स्पष्ट लिखा है कि वो 100% ‘Locomotor Disability’ से पीड़ित हैं। इसका अर्थ है हड्डियों या मांसपेशियों में ऐसी दिव्यांगता जिससे उनका मूवमेंट ही न हो सके। उनके पास गुमला सदर अस्पताल द्वारा जारी किया गया दिव्यांगता प्रमाण-पत्र भी है। ‘वाहन’ की वेबसाइट पर भी उन्हें जारी दस्तावेज को चेक किया जा सकता है।
शिकायत किए जाने के बाद रॉबिन्स कुमार ने ‘मारुति’ कंपनी में शिकायत भी दर्ज कराई थी, जिसके बाद उन्हें कस्टमर अधिकारी की तरफ से एक कॉल आया। शिकायत करने के कुछ दिन बाद जब उन्होंने ट्विटर पर शिकायत की, तब ये फोन कॉल उन्हें आया। इस कॉल पर उनसे सारी जानकारी ली गई। साथ ही आश्वासन दिया गया कि उनकी समस्या का निपटारा हो जाएगा। हालाँकि, अब तक की सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आए हैं।
जिस ‘G S Motors Pvt Ltd’ द्वारा उन्हें परेशान किया जा रहा है, वो बेगूसराय में राष्ट्रीय राजमार्ग 31 पर अमरपुर-कीरतपुर मार्ग में HP पेट्रोल पंप के पास स्थित है। पीड़ित रॉबिन्स कुमार ने DTO (जिला परिवहन पदाधिकारी) से भी बात की, जिन्होंने बताया कि गाड़ी बुक किए जाने के बाद ही वो इसे GST छूट के लिए इसे आगे बढ़ाएँगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक रिटेलर बुकिंग नहीं लेता, उनकी तरफ से भी कुछ नहीं किया जा सकता।
क्या कहना है ‘G S Motors’ का
इस प्रकरण के सम्बन्ध में हमने जीएस मोटर्स के ‘रिलेशनशिप मैनेजर (RM)’ ब्रजकिशोर कुमार से बातचीत की। उन्होंने कहा कि इन्क्वायरी नंबर जिसके नाम से रहता है, वो सेल्समैन मामले को डील करता है। उन्होंने कहा कि सद्दाम नाम के सेल्समैन इस मामले को देख रहे थे और उनसे रॉबिन्स कुमार की बात हुई थी। ब्रजकिशोर ने कहा कि अगर सीनियर कह दें कि इस मामले में आपको इन्वॉल्व नहीं होना है तो इसका पालन करना पड़ता है।
हमने उनसे पूछा कि क्या उन पर उनके सीनियर का कोई दबाव था, तो उन्होंने इस बात से इनकार किया। हमने इस बारे में अधिक जानकारी के लिए सद्दाम को भी कॉल किया। उन्होंने इस बात से इनकार किया कि गाड़ी की बुकिंग नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रोसेस में लगा हुआ है और उनके सीनियर इस बारे में बात कर रहे हैं, क्लियर होते ही सब हो जाएगा। उन्होंने कहा कि ये नॉर्मल रजिस्ट्रेशन नहीं है, ये हट कर होता है और इसमें समय लगता ही है।
उन्होंने बताया कि रॉबिन्स कुमार ने उनसे शुरू में ही सारी जानकारी ली थी और उन्होंने तभी बता दिया था कि इसमें 2-3 महीने का वेटिंग होता है। इसके बाद रॉबिन्स कुमार ने पहले प्रमाण-पत्र बनवाने, फिर बुकिंग की बात कही। सद्दाम का कहना है कि दिव्यांग व्यक्ति को GST छूट संबंधी ये उनके करियर का पहला मामला है। उन्होंने कहा कि इसके बाद बहुत सारी प्रक्रियाएँ हैं और अलग लेवल से, अलग तरीके से इसे किया जाता है।
उन्होंने कहा कि कंपनी के रजिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट को ईमेल किया गया है और वहाँ से कुछ अपडेट आने के बाद ही प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने ये भी दावा किया कि आगे की कई प्रक्रियाएँ हैं, जो रिटेलर को भी पूरा करना है और ग्राहक को भी। हालाँकि, इन प्रक्रियाओं के बारे में वो स्पष्ट कुछ नहीं बता पाए। उन्होंने दावा किया कि सीनियर अधिकारी ऊपर बात कर रहे हैं। हमने सीनियर अधिकारी प्रशांत से भी बातचीत की।
उन्होंने इस प्रकरण के बारे में आपका पक्ष रखते हुए कहा, “इस केस में है तो कुछ भी नहीं। हमारे पास ‘Adapted Vehicles’ के लिए लाइसेंस है ही नहीं। ये प्राप्त करना डीलरशिप का ही काम है। इस तरह की गाड़ियाँ (जो दिव्यांगों के अनुकूल हो) बेचने के लिए लाइसेंस प्राप्त करने में समय लगता है। हम इसके लिए अप्लाई भी करने वाले हैं। DTO से हम मिलने भी जा रहे हैं। वहाँ से कुछ स्पष्ट हो जाए, तब पता चलेगा इसमें कितना समय लगेगा।”
उन्होंने दावा किया कि अगर बुकिंग लेने के बाद गाड़ी मँगवा भी ली जाती है तो भी वो डिलीवर नहीं कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि रॉबिन्स कुमार का एक टाइम फ्रेम है कि उन्हें इस अवधि में गाड़ी चाहिए। उन्होंने ये भी दावा किया कि उन्हें जानकारी दिए बिना उनकी एजेंसी के नाम से उन्होंने प्रमाण-पत्र जारी करवा लिया। उनका कहना है कि रजिस्ट्रेशन के लिए वो ऑथोराइज्ड भी नहीं हैं। प्रशांत कहना है कि उनकी एजेंसी के लिए भी ये इस तरह का पहला मामला है, इसीलिए उन्हें भी इसे समझने में थोड़ा समय लगा।
हालाँकि, रॉबिन्स कुमार इन आरोपों से इनकार करते हैं। उनका कहना है कि वो खुद गाड़ी देखने के लिए ‘G S Motors’ में गए थे और गाड़ी में बैठ कर चेक भी किया था कि उनके लिए सुविधाजनक है या नहीं। उनका कहना है कि सर्टिफिकेट बनवाने के लिए उन्हें डिटेल्स भी वहाँ उपलब्ध कराए गए थे। उन्होंने व्हाट्सएप्प चैट्स और ऑडियो कॉल्स का हवाला देते हुए बताया कि अब उन्हें कहा जा रहा है कि उनके पास अथॉरिटी नहीं है।
बीते कुछ सालों से मीडिया को लेकर कई तरह की बातें की जा रहीं हैं। देश के प्रतिष्ठित व्यवसाई अडानी-अंबानी से लेकर सरकार तक सब पर मीडिया को नियंत्रित करने के आरोप लगते रहे हैं। इन आरोपों को लेकर इंडिया टुडे ग्रुप की उपाध्यक्ष कली पुरी ने जवाब दिया है। कली ने बताया कि कि साल 2014 से पहले एक बार उनके सवालों से नाराज होकर एक पार्टी ने अपने सभी मंत्रियों को कार्यक्रम से हटा दिया था।
दरअसल, इंडिया टुडे ग्रुप ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में दो दिवसीय इंडिया टुडे कॉन्क्लेव का आयोजन किया था। इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए इंडिया टुडे ग्रुप की उपाध्यक्ष कली पुरी ने कहा है, “आजकल मीडिया को ‘बिका हुआ’ और ‘गोदी मीडिया’ कहने का एक नया चलन शुरू हुआ है। लोग मुझसे कहते हैं कि मुझे ईमानदारी से या निजी तौर पर या फिर ऑफ रिकॉर्ड बताएँ कि क्या बहुत दवाब है। मैं इस मंच से कहना चाहती हूँ कि हाँ बहुत दवाब है। यह दवाब राजनीतिक दलों से लेकर व्यापार घरानों और विदेशी सरकारों तक सबके द्वारा बनाया जाता है। यह दवाब नया नहीं है।” कली पुरी के बयान को वीडियो में 4 मिनट के बाद से सुना जा सकता है।
कली पुरी ने आगे कहा है, “कवर स्टोरी चलाने के लिए हमें सबसे बड़े औद्योगिक घराने द्वारा 10 साल तक धमकी दी गई थी। दलाई लामा को लेकर को लेकर कवर स्टोरी करने पर हमें एक राजदूत द्वारा धमकी दी गई थी। यही नहीं, एक ऐसी पार्टी भी है जिसने कॉन्क्लेव से पहले अपने सभी 24 मंत्रियों को कॉन्क्लेव से हटा दिया था। वह पार्टी उन सवालों से खुश नहीं थी, जो हम उनसे पूछ रहे थे। यह सब साल 2014 के पहले का है।”
उन्होंने इस दवाब को लेकर यह भी कहा है कि लोग चैनल्स का बॉयकॉट कर देते हैं। ऐप्स को अनइंस्टॉल कर देते हैं। रेटिंग घटाई जाती है। हालाँकि इस दवाब से निपटने के लिए किसी की जरूरत नहीं है। यह सब सामान्य चीजें हैं।
कली के इस बयान के बाद अमित मालवीय ने यह मुद्दा उठाया। उन्होंने वीडियो शेयर कर कहा, “आज राहुल गाँधी कहते हैं कि लोकतंत्र खतरे में है, अभिव्यक्ति की आजादी खतरे में, ये इंडिया टुडे की उपाध्यक्ष हैं बता रही हैं कि कैसें 2014 से पहले एक पॉलिटिकल पार्टी ने अपने मंत्रियों को कॉन्क्लेव से हटा दिया था क्योंकि उन्हें सवाल नहीं पसंद थे।”
For all of Rahul Gandhi’s talk on democracy in danger, freedom of expression blah blah, here is Vice Chairperson of India Today group telling how before 2014, a certain political party pulled out all its ministers hours before the conclave because they didn’t like the questions… pic.twitter.com/0jYbyIk7gz
दरअसल, साल 2014 के बाद से अब तक विपक्ष ने हजारों बार ‘बिका हुआ’ से लेकर ‘गोदी मीडिया’ तक जैसे शब्दों से मीडिया पर कीचड़ उछालने का प्रयास किया है। हालाँकि सच्चाई यह है कि मीडिया पर हर दौर में दवाब रहा है। लेकिन टेक्नोलॉजी और डिजीटलीकरण के इस दौर में मीडिया पर किसी तरह का दवाब दिखाई नहीं देता।
आज जो विपक्ष मीडिया पर दवाब होने आरोप लगाता है उसे तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी द्वारा पूरे देश पर थोपे गए आपातकाल को याद करना चाहिए। वह एक ऐसा दौर था जहाँ अखबारों से लेकर रेडियो तक पर सेंसर लगा दिया गया था। सरकार विरोधी बातें करने पर जेल में डाल दिया जाता था। यही नहीं, इंदिरा गाँधी ने उस दौर के सबसे मशहूर गायक किशोर कुमार के गानों के प्रसारण पर भी बैन लगा दिया था।
यौन पीड़िताओं से संबंधित बयान को लेकर दिल्ली पुलिस ने कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी से मुलाकात की और पीड़िताओं के संबंध में जानकारी माँगी। हालाँकि, इस बार भी राहुल गाँधी ने इस संबंध में पुलिस को कोई जानकारी नहीं है। इसके बाद पुलिस ने उन्हें एक बार नोटिस थमा दिया। वहीं, कॉन्ग्रेस ने धमकी वाले अंदाज में कहा कि दिल्ली पुलिस की राहुल गाँधी के घर में घुसने की हिम्मत कैसे हो गई?
दिल्ली पुलिस के स्पेशल सीपी सागर प्रीत हुड्डा आज रविवार (19 मार्च 2023) को राहुल गाँधी से मुलाकात कर इस बारे में जानकारी हासिल करने के लिए उनके आवास पर गए थे। इसके बाद पत्रकारों से बता करते हुए हुड्डा ने कहा, “हमने राहुल गाँधी के साथ बैठक की। उन्होंने कहा कि उन्हें कुछ समय चाहिए और वे हमें वह जानकारी देंगे जो हमने माँगी है।”
विशेष पुलिस आयुक्त हुड्डा ने आगे कहा, “राहुल गाँधी बोले कि यह एक लंबी यात्रा थी और इस दौरान कई लोगों से मुलाकात की थी। इसे संकलित करने के लिए समय चाहिए। आज हमने एक नोटिस दिया है, जिसे उनके कार्यालय ने स्वीकार कर लिया है।”
Rahul Gandhi said it was a long yatra and he met many people and needs time to compile it. He has assured us that he will give the information soon and we will begin our proceedings as soon as we receive the information: Special CP(L&O) Sagar Preet Hooda pic.twitter.com/2bJgPM3CRd
हुड्डा ने आगे बताया, “उन्होंने हमें आश्वासन दिया है कि वह जल्द ही जानकारी देंगे और सूचना मिलते ही हम अपनी कार्यवाही शुरू कर देंगे। अगर पूछताछ की जरूरत हुई तो हम करेंगे।” बता दें कि सुबह हुड्डा दिल्ली पुलिस के अधिकारियों की एक टीम के साथ राहुल गाँधी के आवास 12, तुगलक लेन पर लगभग 10.30 बजे गए थे।
यह पूरा मामला भारत जोड़ो यात्रा के दौरान की है। राहुल गाँधी की यह यात्रा जब कश्मीर में श्रीनगर पहुँची तो वहाँ उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए 30 जनवरी 2023 को एक बयान दिया था। इस बयान में राहुल गाँधी ने कहा था कि यौन शोषण की शिकार कई महिलाएँ उनसे मिली थीं। उनमें से कई महिलाओं का रेप हुआ था।
दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई पर कॉन्ग्रेस भड़क गई है। उसने भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला है। राज्यसभा सांसद और पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि बिना किसी नोटिस के दिल्ली पुलिस राहुल गाँधी के घर पहुँच जाती है। यह दिखाता है कि उन्हें परेशान करने के लिए सरकार किस तरह का रवैया अपना रही है। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि शुरू में हिटलर भी लोकप्रिय हुआ था, लेकिन बाद में जर्मनी का क्या हाल हुआ सबको पता है।
कॉन्ग्रेस ने इसे प्रतिशोध की राजनीति बताया है। कॉन्ग्रेस के नेताओं का कहना है कि भारत जोड़ो यात्रा को समाप्त हुए 45 दिन हो चुके हैं। दिल्ली पुलिस 45 दिनों के बाद पूछताछ के लिए जा रही है। अगर उसे इतनी ही चिंता है तो फरवरी में वह राहुल गाँधी के पास क्यों नहीं गई? अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, “आज जो घटना हुई है यह घटना मामूली नहीं है। उनकी हिम्मत कैसे हो गई?”
वहीं, भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा, “राहुल गाँधी को मूर्खता वाले बयानों से बाज आना चाहिए। वह इस तरह के बयान देते हैं, जिससे देश की महिलाओं और लोगों का अपमान होता है। अगर वो गलत बयानबाज़ी करेंगे तो पुलिस और जाँच एजेंसियाँ उनसे पूछताछ करेगी ही।” उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी को अपने बयान के लिए देश से माफी माँगनी चाहिए।
बता दें कि राहुल गाँधी के बयान को लेकर दिल्ली पुलिस के एक सीनियर अधिकारी 15 मार्च 2023 को नोटिस लेकर राहुल गाँधी से मिलने गए थे। वहाँ 3 घंटे तक इंतज़ार करने के बाद भी राहुल गाँधी उनसे नहीं मिले थे। इसके बाद वह सीनियर अधिकारी 16 मार्च 2023 को फिर से मिलने गए और राहुल गाँधी से समय माँगा। इस बार भी राहुल गाँधी ने कह दिया कि उनके पास समय नहीं है। तब राहुल गाँधी ने कहा था, “आप नोटिस दे दीजिए। मैं जवाब दे दूँगा।”
ब्रिटेन की एक अदालत ने आतंकवाद के एक मामले में असद भट्टी नाम एक युवक को दोषी करार दिया है। पुलिस के मुताबिक, असद लैपटॉप से बम बनाने की प्लानिंग कर रहा था। असद जनवरी 2021 को गिरफ्तार हुआ था और तीन मामलों में आरोपित किया गया था। जाँच में 49 वर्षीय असद को कट्टरपंथी विचारधारा से प्रेरित पाया गया था। अब आने वाले 25 अप्रैल, 2023 को कोर्ट असद भट्टी को सज़ा सुनाएगी।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला सरे के रेडहिल का है। यहाँ पर असद की एक कम्प्यूटर रिपेयर शॉप हुआ करती थी। साल 2021 में पुलिस ने एक गुप्त सूचना पर असद की दुकान पर छापेमारी की थी। इस छापेमारी में असद की दुकान में रखे लैपटॉप से 173 पन्नों का एक डॉक्यूमेंट बरामद हुआ था। यह लैपटॉप असद का ही निकला। इस डॉक्यूमेंट में हथियार, विस्फोटक, इस्लाम , शहादत और जिहाद से जुड़ी ज्यादातर बातें शामिल थीं। डॉक्यूमेंट में जिन हथियारों का जिक्र था उसमें हैंडगन और स्नाइपर राइफल प्रमुख थे।
दावा किया जा रहा है कि असद भट्टी के पास बरामद हुए डॉक्यूमेंट में बम बनाने की सरल विधि और केमिकल का भी जिक्र किया गया था। बम के सामान का जिक्र ब्लैक पाउडर के तौर पर किया गया था। पुलिस ने लैपटॉप को जब्त कर के असद के खिलाफ अन्य सबूत भी जुटाए थे। कोर्ट ने सबूतों को दोष सिद्ध के लिए पर्याप्त माना। हालाँकि, अपने बचाव में असद ने खुद पर लगे आरोपों से इंकार किया था। उसने कहा था कि वह उन सामानों का कानूनी तौर पर प्रयोग करना चाह रहा था।
कोर्ट ने असद को दोषी ठहरने से पहले 1 सप्ताह तक विचार-विमर्श किया था। आखिरकार असद को 2 अलग-अलग मामलों में दोषी ठहराया गया है। पहला मामला आतंकी उद्देश्य और दूसरा ममला विस्फोटक बनाना है। दोषी ठहरने के दौरान कोर्ट ने असद को कट्टरपंथी इस्लामी विचारधारा से प्रेरित बताया। कोर्ट न यह माना कि असद उन लोगों से नफरत इस्लाम को नहीं मानते थे। असद ने गैर इस्लामी लोगों पर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ भी की थी। ब्रटिश पुलिस ने असद को दोषी ठहराए जाने पर ख़ुशी जाहिर करते हुए कहा कि उनके द्वारा पेश किए गए सबूत अदालत द्वारा स्वीकार किए गए।
पंजाब के मानसा में गायक सिद्धू मूसेवाला की बरसी के कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। उधर खालिस्तान समर्थक भगोड़े अमृतपाल सिंह को गिरफ्तार करने के लिए पंजाब पुलिस कार्रवाई कर रही है। इसको लेकर सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह ने पंजाब सरकार पर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि बरसी में लाखों लोगों को आना है। लोग न आ पाएँ इसलिए इसी दिन कार्रवाई हो रही है।
सिद्धू मूसेवाला का बरसी कार्यक्रम मानसा जिले के नई अनाज मंडी में रखा गया है। इसको लेकर तैयारियाँ पूरी हो चुकी हैं। एक ट्रैक्टर में मूसेवाल का स्टेच्यू रखा गया है। पंजाब पुलिस की भी तैनाती की गई है। सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह का दावा है कि इस कार्यक्रम में 1 लाख से अधिक लोग शामिल होंगे। उन्होंने कहा है कि यहाँ बहुत बुरा हाल है। समझ नहीं आ रहा कि क्या हो रहा है। आज का दिन ही इसके लिए क्यों चुना गया। नेट बंद है, फोन नहीं चल रहे। कहीं कुछ दिखाया नहीं जा रहा।
दैनिक भास्कर से हुई बातचीत में बलकौर सिंह ने कहा है बरसी कार्यक्रम में उन्होंने 1 लाख लोगों के खाने-पीने का इंतजाम किया है। बड़ा कार्यक्रम होना था। मूसेवाला को चाहने वाले लाखों लोग आने वाले थे। लेकिन पंजाब सरकार ये नहीं होने देना चाहती। हालाँकि अब भी लोग आएँगे। यदि पुलिस गाड़ी नहीं आने देगी तो लोग पैदल ही आ जाएँगे। सिद्धू के लिए तो पूरा मानसा जिला ही आ जाएगा। इतना ही काफी है।
उन्होंने यह भी कहा है कि सिद्धू की बरसी पर ज्यादा लोग इकठ्ठा न हो जाएँ। कोई बड़ा ऐलान न कर दें। इसलिए पंजाब सरकार को टेंशन हो रही होगी। इसलिए ही इस समय अमृतपाल पर कार्रवाई के जरिए सब कुछ बंद किया गया है। यह सब सोची समझी प्लानिंग के तहत किया गया है।
In between Amritpal Singh’s arrest news, Sidhu Moosewala’s father S. Balkaur Singh appeals to people to maintain peace & harmony & reach safely on Moosewala’s Barsi #SidhuMoosewalapic.twitter.com/rIEHpwv5z3
मूसेवाला के पिता ने सिद्धू के चाहने वालों और बरसी कार्यक्रम में आने वालों से शांति बनाए रखने अपील की है। उन्होंने कहा है कि फिलहाल पंजाब में जिस तरह का माहौल है और बरसी के लिए इकठ्ठा होने वाले लोगों को रोकने की कोशिशें हो रही हैं। उसको देखते हुए सभी से अपील है कि भाईचारा बनाकर रखें और शांति से समय पर पहुँचने की कोशिश करें।
लॉरेंस विश्नोई के इंटरव्यू को लेकर बलकौर सिंह ने कहा है “जेल के अंदर बैठा एक अपराधी खुद को राष्ट्रवादी बता रहा है और ड्रग्स को खत्म करने की बात कर रहा है। इससे बड़ी विडंबना और क्या हो सकती है। यह सब हमारे कार्यक्रम से कुछ दिन पहले किया गया है। ताकि मेरे बेटे की छवि खराब की जा सके और उसे गैंगस्टरों से जोड़ने की कोशिश की जा सके।”
बता दें, सिद्धू मूसेवाला की 29 मई 2022 को पंजाब के मानसा जिले में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हमले में मूसेवाला के साथ कार में बैठा हुआ एक दोस्त और चचेरा भाई भी घायल हुआ था।
पंजाब पुलिस द्वारा खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं। पंजाब पुलिस ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया है। पुलिस ने अमृतपाल के फायनेंसर और सलाहकार को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए अमृतपाल के 4 खास करीबियों को विशेष विमान से असम के डिब्रूगढ़ ले जाया गया है। उन्हें यहीं की सेंट्रल जेल में रखा जाएगा। शनिवार (18 मार्च, 2023) से पंजाब पुलिस द्वारा शुरू किए गए अभियान में वारिस दे पंजाब गैंग के कुल 78 सदस्य गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमृतपाल सिंह के अमृतसर स्थित घर पर भारी फ़ोर्स तैनात कर दी गई है। अमृतपाल के गाँव का नाम जल्लूपुर खेड़ा है। इसी के साथ पूरे प्रदेश में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। इसी के साथ प्रदेश भर में तमाम खालिस्तानी समर्थकों के ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है। इसी दबिश के दौरान अमृतपाल के फाइनेंसर सरबजीत सिंह कलसी और सलाहकार दलजीत सिंह कलसी को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। अमृतपाल की 2 कारों को जब्त कर लिया गया है और उनके बंदूकधारी को हिरासत में ले लिया गया है।
वहीं गिरफ्तार किए गए अमृतपाल के 4 बेहद खास साथियों को वायुसेना के विशेष विमान से असम के डिब्रूगढ़ लाया गया है। उन्हें डिब्रूगढ़ की जेल में रखा जाएगा। चारों आरोपितों के साथ पंजाब पुलिस की 27 सदस्यीय टीम है जिसका नेतृत्व IG जेल पंजाब कर रहे हैं। वहीं पूरे पंजाब में अब तक कुल 78 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। ये सभी ‘वारिस दे’ पंजाब नाम के चरमपंथी संगठन से जुड़े हैं और अमृतपाल के करीबी बताए जा रहे हैं।
राज्य के कई जिलों में इंटरनेट सेवाएँ 20 तक बंद कर दी गईं है। पंजाब पुलिस की कार्रवाई की पुष्टि जालंधर पुसिल के कमिश्नर IPS कुलदीप सिंह चहल ने की है। उन्होंने बताया कि पूरे पंजाब में हुई छापेमारी में अभी तक 315 बोर की एक रायफल, 12 बोर की 7 रायफलें, 1 रिवाल्वर और 373 ज़िंदा कारतूस बरामद किए गए हैं। पुलिस ने किसी भी प्रकार की अफवाह न उड़ाने और न ही उस पर विश्वास करने की अपील की है।
सोशल मीडिया पर अमृतपाल का सपोर्ट
पंजाब पुलिस की तमाम कार्रवाई के बीच सोशल मीडिया पर तमाम लोगों द्वारा खालिस्तान समर्थक अमृतपाल का समर्थन किया जा रहा है। इस समर्थन में ट्विटर पर WeStandWithAmritpalSingh नाम से ट्रेंड चलाया जा रहा है। इस ट्रेंड में कुछ वेरिफाइड हैंडल भी शामिल हैं।
अमृतपाल के समर्थक ट्विटर पर चला रहे ट्रेंड
फिलहाल असम में डिब्रूगढ़ जेल के बाहर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
यूपी के प्रयागराज में गैंगस्टर अतीक अहमद के गुर्गों द्वारा उमेश पाल की हत्या के मामले में पुलिस को बहुत बड़ी सफलता मिली है। यूपी पुलिस ने रुखसार को बहराईच से गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद पता चला कि रुखसार महिला नहीं, बल्कि पुरुष है। उसका पूरा नाम रुखसार अहमद है और वह पिंटू के नाम से जाना जाता है।
दूसरी तरफ अतीक अहमद की भगोड़ी बीवी शाइस्ता परवीन का स्केच तैयार करवा रही है। प्रयागराज पुलिस ने शाइस्ता पर 25,000 रुपए का इनाम घोषित कर रखा है। घटना के बाद से वह फरार है। पुलिस का मानना ह कि शाइस्ता अतीक, असद और अशरफ के बीच की अहम कड़ी है।
रुखसार पर आरोप है कि उसने हमले के लिए अतीक के बेटे असद को गाड़ी उपलब्ध कराई थी। अभी तक यही माना जा रहा था कि यह कार महिला की है। क्रेटा (Creta) कार के दस्तावेजों में रुखसार का नाम दर्ज था।
अपराधियों ने 24 फरवरी 2023 को घटना को अंजाम देने के लिए इस कार का इस्तेमाल किया था और घटना को अंजाम देने के बाद अतीक अहमद के घर से लगभग 200 मीटर की दूरी पर लावारिस छोड़ दिया था। पुलिस ने जाँच की तो पता चला कि इस कार को बिरयानी बेचने वाले नफीस ने खरीदी थी।
इसके बाद यूपी पुलिस और STF ने नफीस को पकड़ लिया। नफीस ने खुलासा किया कि उसने यह कार करेली निवासी रुखसार को बेच दी थी। इसके बाद से यूपी पुलिस ने रुखसार के घर पर दबिश दी तो उसके घर पर ताला लगा हुआ मिला। इसके बाद से पुलिस उसकी तलाश में जगह-जगह दबिश दे रही थी।
रुखसार ट्रैवल एजेंसी का काम करता है। उसने पुलिस को बताया कि उसकी कार की बुकिंग कराई गई थी। उसे नहीं पता था कि हत्या को अंजाम देने के लिए उसका इस्तेमाल किया जाएगा। हालाँकि, पुलिस रुखसार और नफीस के अतीत की जानकारी जुटा रही है। रुखसार और नफीस करीबी रिश्तेदार बताए जा रहे हैं। उनके बैंक खातों को खंगाला जा रहा है।