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जम्मू-कश्मीर: श्रीनगर में 9 साल की बच्ची का यौन उत्पीड़न, ट्यूशन टीचर अब्दुल वाहिद गिरफ्तार

जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में ट्यूशन टीचर ने 9 साल की बच्ची का यौन उत्पीड़न किया। इस मामले में मंगलवार (14 मार्च 2023) को पीड़िता के परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने आरोपित शिक्षक अब्दुल वाहिद भट को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार चनापोरा के खान कॉलोनी के रहने वाले अब्दुल ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है।

श्रीनगर पुलिस की तरफ से ट्वीट कर घटना की जानकारी दी गई। पुलिस के अनुसार 9 साल की बच्ची के ट्यूशन टीचर ने उसे गलत तरीके से छुआ और यौन उत्पीड़न किया। पुलिस ने परिजनों की शिकायत के आधार पर इस मामले में चनपुरा थाने में एफआईआर दर्ज की है। आरोपित अब्दुल के खिलाफ आईपीसी की धारा 354 और 2023 के पॉक्सो एक्ट की धारा 12 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

पुंछ जिले के मेंढ़र से भी इसी तरह का एक मामला पिछले महीने भी सामने आया था। मेंढर सब डिविजन के बालाकोट के धारघलून मिडिल स्कूल के एक गवर्मेंट शिक्षक मोहम्मद ताज नियाजी पर 2 छात्राओं के यौन उत्पीड़न का आरोप लगा था। जिसके बाद उसे सस्पेंड कर गिरफ्तार कर लिया गया था।

जानकारी के अनुसार बालाकोट खंड शिक्षा अधिकारी नजीर अहमद के स्कूल के औचक निरीक्षण के दौरान रोती-चिल्लाती छात्राओं ने उनसे शिक्षक मोहम्मद ताज नियाजी की शिकायत की। मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपित टीचर को फौरी तौर पर सस्पेंड कर आगे की कार्रवाई की जाने लगी। नियाजी पर पॉक्सो एक्ट व अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया।

इतना ही नहीं सितंबर 2022 में दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले के एक निजी स्कूल के प्रिंसिपल मोहम्मद मकबूल गनी को 2 छात्राओं से दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था। मकबूल पर काकापोरा इलाके की रहने वाली 2 नाबालिग बहनों ने रेप का आरोप लगाया था। अक्टूबर 2022 में शोपियाँ की एक अदालत ने आरोपित मकबूल को बलात्कार का दोषी पाते हुए 20 साल की कैद और 10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया था।

शराब घोटाले के बाद जासूसी कांड में फँसे मनीष सिसोदिया: CBI ने दर्ज की दूसरी FIR, CM केजरीवाल के सलाहकार का भी नाम

शराब घोटाले में फँसे दिल्ली के पूर्व उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया अब जासूसी कांड में फँसे हैं। सीबीआई ने मनीष सिसोदिया के खिलाफ फीडबैक यूनिट मामले में केस दर्ज किया है।

जानकारी के मुताबिक, ये मामला साल 2016 से संबंधित है। उस समय आम आदमी पार्टी ने एक फीडबैक यूनिट तैयार की थी जिससे कई लोगों की जासूसी कराई गई थी। अब इसी मामले में दावा है कि AAP ने ऐसा कराने से पहले केंद्र की अनुमति नहीं ली।

शिवम प्रताप सिंह द्वारा शेयर की गई एफआईआर में मनीष सिसोदिया समेत 6 लोगों को आरोपित बनाया गया है। इसमें सीएम के सलाहकार का काम करने वाले आरके सिन्हा और सतीश पर भी मुकदमा दर्ज हुआ है।

बता दें सीबीआई ने पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के खिलाफ यह दूसरी एफआईआर दर्ज की। इससे पहले सीबीआई ने दिल्ली में शराब घोटाले में केस दर्ज किया गया था। जिसमें उनकी गिरफ्तारी 26 फरवरी को हुई थी।

इसके बाद मनी लॉन्ड्रिंग के केस में 9 मार्च 2023 को करीब 8 घंटे की पूछताछ के बाद ईडी ने सिसोदिया को गिरफ्तार किया था। वहीं उनकी जमानत पर सुनवाई 21 मार्च तक के लिए टल गई थी। वे फिलहाल 17 मार्च तक प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कस्टडी में हैं।

‘योगी जी माफ करना, गलती म्हारे से हो गई’: UP में एनकाउंटर से डरे अपराधी ने तख्ती लेकर किया सरेंडर, 2 सप्ताह में 50+ का आत्मसमर्पण

उत्तर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (UP CM Yogi Adityanath) के नेतृत्व वाली सरकार में अपराधियों में ऐसा खौफ है, जो पूरे देश में कहीं भी और और कहीं भी नहीं देखा गया। यूपी में सरकार की कड़ाई से डरकर अपराधी खुद ही थाने जाकर आत्मसमर्पण कर रहे हैं। ऐसा ही एक नजारा बुधवार (15 मार्च 2023) को देखने को मिला।

अपने अपराध के लिए माफी माँगते हुए मुजफ्फरनगर के मंसूरपुर थाने में एक बदमाश अंकुर उर्फ राजा अपने हाथों में तख्ती लेकर पहुँच गया। आरोपित की तख्ती पर लिखा था, ‘योगी जी माफ करना, गलती म्हारे से हो गई’। थाने में पहुँचकर बदमाश ने प्रभारी निरीक्षक के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। इस दौरान उसके परिजन भी थे।

अंकुर उर्फ राजा ने भविष्य में अब कोई अपराध ना करने की शपथ भी ली। इस दौरान उसने पुलिस को आश्वासन दिया कि इलाके में होने वाले अपराधों में वह उनका सहयोग करेगा। अंकुर जिले का हिस्ट्रीशीटर है। उस पर लूट-पाट के मामले दर्ज हैं। अंकुर को कोर्ट में पेश करके जेल भेज दिया गया है।

इसके पहले इस अपराधी के दो साथियों को पुलिस ने एनकाउंटर के बाद गिरफ्तार किया था। मंगलवार (14 मार्च 2023) की रात हुए मुठभेड़ में पुलिस ने दोनों बदमाशों को गिरफ्तार के साथ-साथ उनके पास से लूटी गई बाइक भी बरामद की थी। इस दौरान यह आरोपित फरार हो गया था। अगले दिन उसने थाने में खुद सरेंडर कर दिया।

अंकुर उर्फ राजा शाहपुर थाना क्षेत्र के गोयला गाँव का रहने वाला है। अंकुर अपने अपने दो साथियों- बागपत के छपरौली थाना निवासी अजय और मेरठ के दरौला निवासी वंश छोकर के साथ मिलकर मंसूरपुर थाना क्षेत्र और रतनपुरी थाना क्षेत्र में बाइक लूट की दो घटनाओं को अंजाम दिया था।

गौरतलब है कि एनकाउंटर और बुलडोजर के डर से कई बड़े अपराधी खुद ही सरेंडर कर चुके हैं। दो सप्ताह में 50 से अधिक अपराधियों ने सरेंडर कर दिया है। इस मामले को लेकर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) प्रशांत कुमार ने बताया कि 15 दिनों में 50 से अधिक अपराधियों ने ना सिर्फ सरेंडर किया, बल्कि फिर अपराध में शामिल ना होने की कसम भी खाई।

आजतक के अनुसार, यूपी के सहारनपुर जिले के एक थाने में 24 अपराधी लाइन में लग गए थे और क्राइम से दूर रहने का संकल्प लिया था। इसी तरह देवबंद में 4 शराब तस्करों ने सरेंडर कर दिया। शामिल में भी ऐसा हुआ। प्रतापगढ़ में रेलवे स्टेशन पर एक महिला का रेप करने वाले अपराधी ने भी एनकाउंटर के डर से सरेंडर कर दिया था।

हरदोई में तो अस्पताल में लाया गया एक अपराधी पुलिस के साथ जाने से ही इनकार करते हुए हंगामा कर दिया। उसने कहा कि पुलिस पैर में गोली मार देती है। उसने कहा कि पुलिस लिखकर दे कि वह गोली नहीं मारेगी, तभी वह उसके साथ जाएगा।

‘पत्थर पर पानी डाला… शर्म आनी चाहिए’ : महबूबा मुफ्ती को जलाभिषेक करते देख भड़के कट्टरपंथी, देवबंद के मौलाना ने कहा- इस्लाम विरोधी

जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने हाल में एक मंदिर में जाकर पूजा पाठ की। यह मंदिर पूंछ जिले का नवग्रह मंदिर है। इसे पूर्व पीडीपी एमएलसी यशपाल शर्मा द्वारा बनवाया गया था। यहीं पहुँचकर महबूबी ने पहले शिवलिंग का जलाभिषेक किया और फिर वहाँ फूल चढ़ाए।

मंदिर जाकर पूजा-पाठ करने की उनकी वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल है। इसे देख कट्टरपंथी उनसे नाराज हैं। कहा जा रहा है कि ये सब चुनावों को मद्देनजर रखकर हो रहा है। वहीं देवबंद के मौलाना असद कासमी ने कहा है, “महबूबा ने जो किया वो सही नहीं है, उनका मंदिर जाना, शिवलिंग पर जल चढ़ाना, इस्लाम के खिलाफ है।”

एक ट्विटर यूजर ने महबूबा की वीडियो देख लिखा- “ये सब इस्लाम में बिलकुल स्वीकार्य नहीं है। चाहे ये महबूबा करे या कोई और।”

काशिफ शेख ने लिखा- “एक पत्थर पर ही तो पानी डाला है। पत्थर समझ कर ही पानी डाला होगा।”

मुस्तफिज आलम ने कहा, “मैं किसी धर्म के खिलाफ नहीं हूँ लेकिन जो भी किया वो इस्लाम के खिलाफ है। शर्म आनी चाहिए ये सब करने पर।”

वहीं भाजपा ने भी उनके मंदिर जाकर पूजा-पाठ करने को नौटंकी बताया। प्रदेश प्रवक्ता रणवीर सिंह ने कहा कि ये नौटंकी करके महबूबा मुफ्ती को कुछ हासिल नहीं होने वाला है। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे “2008 में महबूबा मुफ्ती और उनकी पार्टी ने अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड को भूमि आवंटन का विरोध किया था। महबूबा मुफ्ती की पार्टी ने तीर्थयात्रियों के लिए हट के निर्माण के लिए श्राइन बोर्ड को भूमि के अस्थायी हस्तांतरण की अनुमति नहीं दी थी।”

उत्तरी प्रवेश द्वार पर हाथी और पूर्व में गरूड़: नए संसद भवन में मिलेगी 5000 साल पुरानी भारतीय संस्कृति की झलक, 1000 देसी कारीगरों ने तैयार किया आर्टवर्क

दिल्ली में बन रहे नए संसद भवन से ना सिर्फ गुलामी के प्रतीकों से मुक्ति मिलेगी, बल्कि इसमें भारतीय सभ्यता की 5,000 साल पुरानी तस्वीरों को भी दर्शाया जाएगा। इसके लिए सनातन धर्म और वास्तु कला से जुड़े लगभग 5,000 आर्ट तैयार किए गए हैं। इन कलात्मक मूर्ति/तस्वीरों में पेंटिंग, डेकोरेटिव पीस, दीवार पैनल, पत्थर की मूर्तियाँ और धातु की वस्तुएँ आदि शामिल हैं।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, प्रवेेश द्वार पर भारतीय संस्कृति में शुभ माने जाने वाले हाथी, मोर, गरुड़, हंस गाय आदि जैसे शुभ जीव-जंतुओं को दर्शाया जाएगा। इन शुभ जानवरों को भारतीय संस्कृति और वास्तु शास्त्र में ज्ञान, शक्ति, सफलता, शुभता, समृद्धि आदि जैसे गुणों को प्रदर्शित करने के लिए किया जाता है। इन्हें इसी महत्व एवं आधार पर चुना गया है।

64,500 वर्गमीटर में फैले नए संसद भवन में इन आर्ट वर्क को प्रदर्शित किया जाएगा। उत्तर के प्रवेश द्वार पर हाथी की मूर्ति लगाई गई है। सनातन धर्म में हाथी को ज्ञान, बुद्धि, स्मृति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। पूर्वी प्रवेश द्वार पर जन आकांक्षाओं के प्रतीक गरुड़ को दर्शाया है। वहीं, उत्तर-पूर्वी प्रवेश द्वार पर हंस है, जो विवेक और ज्ञान का प्रतिनिधित्व करता है।

भारत की ज्ञान परंपरा, भक्ति परंपरा, वैज्ञानिक परंपराओं का भी पर्याप्त ध्यान दिया गया है। इसके अलावा, इमारत के अंदर प्रत्येक दीवार पर खास पहलू को दर्शाया जाएगा। जैसे कि आदिवासी और महिला नेताओं द्वारा योगदान आदि। संसद भवन की थीम वास्तु शास्त्र को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।

नए संसद भवन के में कलाकृतियों को लगाने के लिए पुराने संसद भवन के स्टोर से की एक भी कलाकृति का उपयोग नहीं किया गया है। नई कलाकृतियों को बनाने के लिए 1,000 से अधिक कारीगर और कलाकार लगे हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक देश भर के स्वदेशी और जमीनी कलाकारों को इसके लिए शामिल करने का प्रयास किया गया है।

लगभग 1,200 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित नया संसद भवन सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का हिस्सा है। इसमें संयुक्त केंद्रीय सचिवालय, राजपथ का नवीनीकरण, नया प्रधानमंत्री आवास, प्रधानमंत्री का नया कार्यालय और एक नया उप-राष्ट्रपति एन्क्लेव शामिल है।

भारत का वर्तमान संसद भवन ब्रिटिश वास्तुकार सर एडविन लुटियंस और हर्बर्ट बेकर द्वारा डिज़ाइन किया गया था। औपनिवेशिक युग के इसक भवन को बनाने में छह साल लगे थे, जो 1921 से 1927) तक बना था। ब्रिटिश काल में काउंसिल हाउस कहलाने वाले इस भवन में इंपीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल स्थित थी।

भारत जब आजाद हुआ, तब अधिक जगह की जरूरत को देखते हुए सन 1956 में संसद भवन में और दो मंजिल बनाए गए। साल 2006 में भारत की 2,500 वर्षों की समृद्ध लोकतांत्रिक विरासत को प्रदर्शित करने के लिए संसद भवन में संग्रहालय बनाया गया था। अब इसमें 2500 वर्षों की लोकतांत्रिक विरासत के साथ-साथ 5000 वर्षों की सभ्यता को भी प्रदर्शित किया जाएगा।

नोबेल प्राइज कमिटी के डेप्यूटी लीडर भी हुए PM मोदी के मुरीद: बताया- सबसे भरोसेमंद नेता, कहा- उनकी नीतियों से समृद्ध और शक्तिशाली बन रहा भारत

नोबेल प्राइज कमिटी के डेप्युटी लीडर एस्ल टोये (Asle Toje) ने अपनी भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की जमकर तारीफ की है। उन्होंने कहा कि वे एक ताकतवर देश के नेता हैं और उनकी बातों को दुनिया भर में बहुत गंभीरता से सुनी जाती है।

गुरुवार (15 मार्च 2023) को मीडिया संस्थान ABP से बात करते हुए एस्ल टोये ने पीएम मोदी को दुनिया में शांति स्थापित करने वाले बड़े एवं विश्वसनीय चेहरों में से एक बताया। देश की आर्थिक और सामाजिक प्रगति पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि पीएम मोदी की नीति के कारण भारत एक समृद्ध और शक्तिशाली देश बन रहा है।

रूस-यूक्रेन युद्ध और PM मोदी का रोल

मीडिया रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि लंबे समय से चल रहे रूस-यूक्रेन युद्ध को रोकने में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी एस्ल टोये (Asle Toje) ने बात की। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ऐसे नेता हैं, जो न केवल भारत और इसकी अर्थव्यवस्था के उत्थान का ख्याल रखते हैं, बल्कि दुनिया भर के मामलों में योगदान और भागीदारी भी करते हैं। नेस्ले के हवाले से कहा गया:

“पीएम मोदी बहुत ताकतवर देश से आते हैं। उन्हें बहुत ही गंभीरता से लिया जाता है। उनके भीतर बेहद विश्वसनीयता है। वे अपनी विश्वसनीयता और ताकत का इस्तेमाल इस भयावह युद्ध को रोकने में करेंगे।”

एस्ल टोये ने अमेरिका और चीन से तुलना करते हुए कहा कि परमाणु युद्ध और बचाव की बात करने के बजाय इन दोनों देशों को भारत से सीखना चाहिए। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने यह भी कहा कि पूरी दुनिया को भारत से सीखने की जरूरत है और अंततः भारत का सुपरपावर बनना तय है।

इसके पहले मीडिया रिपोर्ट में कहा गया था कि PM नरेंद्र मोदी नोबेल शांति पुरस्कार के सबसे बड़े दावेदार हैं। मीडिया रिपोर्ट में कहा गया कि यह बात नोबेल प्राइज कमिटी के डेप्युटी लीडर एस्ल टोये (Asle Toje) ने कही है। हालाँकि, बाद में टोये ने इस तरह के किसी भी बयान से इनकार कर दिया। उन्होंने इसे फेक न्यूज बताया।

नॉर्वेजियन नोबेल समिति के उपनेता एस्ल टोये ने गुरुवार (15 मार्च 2023) को मीडिया में आई उन खबरों को खारिज कर दिया, जिसमें दावा किया गया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नोबेल शांति पुरस्कार के ‘सबसे बड़े दावेदार’ हैं। टोये ने इसे फेक न्यूज बताते हुए इस पर चर्चा से इनकार कर दिया। हालाँकि, उन्होंने पीएम मोदी की जमकर तारीफ की।

एस्ल टोये ने इसे फेक न्यूज बताया। समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए टोये ने कहा कि वह भारत में नोबेल समिति के उपनेता के रूप में नहीं, बल्कि इंटरनेशनल पीस एंड अंडरस्टैंडिंग (IPU) के डायरेक्टर और इंडिया सेंटर फाउंडेशन (ICF) के मित्र के रूप में आए हैं।

टोये ने जोर देकर कहा, “फर्जी समाचार ट्वीट भेजा गया था, हमें इसे फेक न्यूज मानना चाहिए।” दिल्ली स्थित एनजीओ ICF के कार्यक्रम में शामिल होने आए टोये ने कहा, “मैं आपकी राजनीति और विकास के बारे में बात करने के लिए भारत आया हूँ।” उन्होंने पीएम की जमकर तारीफ की।

टोये ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को यह याद दिलाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना की कि ‘यह युद्ध का युग नहीं है।’ ANI से उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह बयान कि ‘यह युद्ध का युग नहीं है’ आशा की अभिव्यक्ति थी। भारत ने संकेत दिया है कि हमें आज विश्व विवादों को इस तरह (युद्ध करके) नहीं सुलझाना चाहिए। पीएम मोदी के पास दुनिया की बहुसंख्यक आबादी है।”

(अपडेट: कुछ शुरुआती मीडिया रिपोर्टों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नोबेल शांति पुरस्कार का सबसे बड़ा दावेदार बताया गया था। नोबेल प्राइज कमिटी के डेप्यूटी लीडर एस्ल टोये के हवाले से यह दावा किया गया था। लेकिन टोये का पूरा बयान सामने आने के बाद हमने इस रिपोर्ट में आवश्यक बदलाव किया है।)

30 साल पहले ही खत्म हो गया होता अतीक अहमद का आतंक: पूर्व DGP ने बताया वो किस्सा जब राजनीतिक दबाव में पड़ा छोड़ना

उमेशपाल हत्याकांड के बाद लगातार अतीक अहमद के ऊपर और उसके करीबियों के ऊपर शिकंजा कसता जा रहा है। उसके खिलाफ दायर पुराने केसों से लेकर हर अवैध संपत्ति पर कार्रवाई हो रही है। ऐसे माहौल में यूपी के पूर्व डीजीपी ओपी सिंह का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में दावा किया है कि अतीक अहमद का आतंक 1990 में ही खत्म हो जाता अगर उनके ऊपर राजनैतिक दबाव नहीं होता।

इंडिया टुडे से बातचीत में उन्होंने बताया कि उस वक्त (1989-90) उनकी इलाहाबाद में तैनाती थी। उन लोगों ने एक एफआईआर के बाद उसके घर पर रेड मारी थी। मगर तब अतीक के समर्थकों ने उनकी टीम को घेर लिया और गोली मारने को तैयार हो गए। पूर्व डीजीपी की मानें तो उस समय पूरी टीम को गोली मार दी जाती अगर वो ये नहीं कहते कि एक भी गोली चली तो अतीक और उसके सारे समर्थक मार दिए जाएँगे।

पूर्व डीजीपी ओपी सिंह के अनुसार, पुलिस के आला अधिकारी अतीक को उसी समय वहीं गिरफ्तार करना चाहते थे। मगर उनके ऊपर राजनैतिक दबाव डाला गया और बिन गिरफ्तारी उन्हें वहाँ से लौटना पड़ा। उनके अनुसार, अगर उस दिन अतीक गिरफ्तार होता या उसका एनकाउंटर होता तो आज ये सब नहीं हो रहा होता। उन्होंने ये भी कहा कि उनकी टीम की बहादुरी को भाजपा और इलाहाबाद के अन्य लोगों द्वारा खूब सराहा गया। मगर तत्कालीन सत्ताधारी पार्टी उस माफिया का समर्थन करती थी। वही माफिया आगे आगे खूँखार गैंगस्टर बन गया।

सीएम योगी ने किया- माफियाओं को मिट्टी में मिलाने का ऐलान

बता दें कि साल 1989 की शुरुआत में कॉन्ग्रेस के नारायण दत्त तिवारी और दिसंबर 1989 के बाद से जून 1991 तक मुलायम सिंह यादव प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। इसी दौरान यूपी पुलिस ने अतीक के घर रेड मारी थी।

करीबन 30 साल बाद इस मामले पर पूर्व डीजीपी का बयान आया है कि 90 के दौर में अतीक की गिरफ्तारी हो जाती अगर उनके ऊपर राजनैतिक दबाव न होता। हालाँकि अब हालात अलग हैं। उमेश पाल हत्याकांड के बाद खुद यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विधानसभा में ये ऐलान कर चुके हैं कि वो प्रदेश के हर माफिया को मिट्टी में मिला देंगे।

उन्होंने अपनी बात रखने के दौरान अखिलेश यादव पर भी निशाना साधा था। उन्होंने कहा था, “आप सारे अपराधियों को पालेंगे। उनका माल्यार्पण करेंगे और उसके बाद तमाशा बनाते हैं आप लोग। एक तरफ अपराधियों को प्रश्रय देंगे और दूसरी तरफ दोषारोपण करेंगे।”

इस पर अखिलेश ने कहा कि उनसे कहा था, “आप बताइए, बीएसपी से आपकी दोस्ती है। इसलिए आप उसके खिलाफ नहीं बोल रहे हैं।” जवाब में सीएम योगी ने कहा था कि जिस अतीक अहमद के खिलाफ राजू पाल के परिवार ने केस दर्ज कराया, वह सपा का पोषित अपराधी है। उसको मिट्टी में मिला देंगे।

‘वे तलवार, पेट्रोल बम लेकर आए थे, हिंदुओं ने बचाई जान’: तापसी पन्नू ने बताया 1984 के सिख नरसंहार में कैसे बचे थे उनके पिता

अभिनेत्री तापसी पन्नू ने हाल में इंटरव्यू के दौरान 1984 का सिख नरसंहार याद किया। उन्होंने बताया कि कैसे दिल्ली के शक्ति नगर में उनके पिता उस समय अकेले सिख थे और अगर आस-पास हिंदू न होते तो न जाने क्या हो जाता।

द लल्लनटॉप को दिए अपने इंटरव्यू में तापसी ने बताया कि उनके परिवार के साथ उस दौरान जो हुआ उसके बारे में उन्होंने कभी नहीं सोचा। अपने अल्पसंख्यक समुदाय से होने का भी उन्हें बहुत बड़े होने के बाद पता चला। वह बताती हैं,

“मेरे मम्मी-पापा की तब शादी नहीं हुई थी। मेरी मम्मी पूर्वी दिल्ली में रहती थी और पापा शक्ति नगर में। जो भी मुझे उस समय का पता है वो सब मैंने उन्हीं से सुना है। मेरी मम्मी तो कहती हैं कि उनके उधर उस समय सब ठीक था। मगर शक्ति नगर में जहाँ मेरे पिता रहते थे, वहाँ हम अकेले सिख परिवार थे। हम अपने घर के बाहर जोंगा पार्क करते थे। तब हर किसी पर कार नहीं थी।”

तापसी बताती हैं कि एक कार की वजह से दंगाई पहचान गए थे कि उनका घर कौन सा है। तापसी के मुताबिक, “वे लोग तलवार, पेट्रोल बम लेकर आए। उन्हें पता था कि हम अकेले सिख परिवार हैं। हम लाइटें बंद करके घर में छिपे रहे। भागने का कोई ऑप्शन नहीं था, क्योंकि पता था सब आ चुके हैं। अगर भागते भी तो कहाँ जाते। तो हम जहाँ किराए पर रहते थे वहाँ 4 परिवार थे। हमें छोड़ बाकी तीनों हिंदू थे। हम लोग लाइट दरवाजा बंद करके छिपे और जब दंगाई हमारे दरवाजे तक आए तो आसपड़ोस के लोगों ने कहा कि अब वो लोग तो यहाँ से भाग चुके हैं। इतना सुन उन लोगों ने जोंगा को जलाया और वहाँ से चले गए।” तापसी कहती हैं, “हम बचे क्योंकि हमारे आसपास के लोगों ने हमें बचाया।”

बता दें कि सिख नरसंहार पर के अलावा तापसी पन्नू ने अपने इंटरव्यू में कई मुद्दों पर बात की। उन्होंने अपनी पर्सनल और सोशल लाइफ से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की।

सिख नरसंहार और ऑपरेशन ब्लू स्टार

बता दें कि 1984 में हुए सिख नरसंहार से पहले उसी साल एक बड़ी घटना पंजाब में हुई थी। ऑपरेशन ब्लू स्टार। ये ऑपरेशन इंदिरा सरकार ने उन खालिस्तानी तत्वों के सफाए के लिए कराया था जो लगातार हिंदुओं को निशाना बनाने में लगे थे और हरिमंदिर साहिब परिसर में कब्जा करके बैठ गए थे । इसी ऑपरेशन के बाद अक्टूबर में इंदिरा गाँधी को गोली मार दी गई। कॉन्ग्रेसियों ने उस घटना को एक तरफ से सिख विरोधी दंगे में बदल दिया और फिर दिल्ली में जो हुआ उसका दर्द आज भी सिख परिवारों के जहन में जिंदा है।

बिहार के छपरा से अगवा RJD नेता बरामद, इरफान और मोहम्मद आलमताब गिरफ्तार: बताया- न जमीन दी-न पैसा लौटाया, इसलिए उठाया

बिहार के छपरा में सारण पुलिस ने अपहृत राजद नेता व रिटायर्ड वायु सेना के सैनिक सुनील राय को सकुशल ढूँढ निकाला है। सुनील राय का अपहरण 14 मार्च की तड़के सफेद स्कॉर्पियो में हुआ था। इस मामले में पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान मोहम्मद इरफान और मोहम्मद आलमताब खान के तौर पर हुई है। पुलिस अब इस मामले में आगे की जाँच कर रही है।

स्कॉर्पियों में हुआ था अपहरण

14 मार्च की सुबह हुए इस अपहरण पर ऑपइंडिया ने आपको बताया था कि ये घटना मुफस्सिल थानाक्षेत्र के बाजार समिति के पास हुई थी। सुनील राय के पिता रामविलास राय ने मामले की जानकारी दी थी। उन्होंने कहा था कि सुबह किसी ने उनके बेटे को फोन कर के बुलाया। इस कॉल के बाद तड़के लगभग 4 बजे सुनील अपने घर से निकल कर ऑफिस की तरफ गए थे। उसी समय सफेद रंग की स्कॉर्पियो गाड़ी वहाँ पहुँची। गाड़ी से कुछ लोग उतर कर सुनील को अंदर घसीटने लगे। सुनील ने काफी विरोध किया, लेकिन अपहरणकर्ताओं ने उनको अंदर खींच लिया। इसके बाद सभी स्कॉर्पियों से फरार हो गए।

अपहरण के पीछे ‘जमीन’ थी वजह, आरोपितों ने हत्या की साजिश रची थी

रामविलास राय का कहना था कि उनके बेटे से किसी की दुश्मनी नहीं है। हालाँकि पुलिस ने सुनील राय के सकुशल मिलने के बाद जो प्रेस नोट जारी किया है उसमें अपहरण के पीछे जमीन से जुड़ा केस बताया जा रहा है। प्रेस नोट में लिखा है कि पूछताछ में आरोपित मोहम्मद आलमताब ने बताया कि उन लोगों ने जमीन खरीदने के लिए 1 करोड़ 80 लाख सुनील राय को दिए थे। इनमें से 90 लाख रुपया बैंक से ट्रांसफर हुए थे और फिर बाकी का रुपया नगद दिया गया था। 

आरोपितों का कहना है कि राजद नेता ने न तो उन्हें जमीन दी और न दी पैसा वापस किया। इसी गुस्से में उन लोगों ने ये किडनैपिंग की। आरोपितों के अनुसार, उनका मकसद या तो सुनील राय से पैसा लेना था नहीं तो सुनील राय की हत्या करना था। इसके लिए उन्होंने साजिश बनाई हुई थी। इसी मकसद से उन्होंने सफेद स्कॉर्पियों से सुनील राय का अपहरण किया। पुलिस की एसआईटी टीम ने इस मामले में छापेमारी करते हुए घटना में प्रयोग होने वाली गाड़ी बरामद कर ली है। साथ ही उन्हें सुनील राय का क्षतिग्रस्त फोन भी मिला है।

‘सोनिया गाँधी की डिग्री दिखाओ, घर पर नौकर बन करूँगा काम’: सूरत के कारोबारी ने कॉन्ग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत को दी चुनौती

कॉन्ग्रेस के नेता देश के प्रधानमंत्री की शिक्षा को लेकर अक्सर विवाद खड़ा करने की कोशिश करते रहते हैं। अक्सर उनकी शैक्षिक डिग्री माँगी जाती है। ऐसे में ट्वीटर यूजर ऋषि बागरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्रियाँ सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दीं और कॉन्ग्रेस पार्टी से राहुल गाँधी व सोनिया गाँधी की डिग्रियाँ दिखानी की माँग करने लगे।

ऋषि बागरी की पोस्ट के बाद कई अन्य यूजर्स ने उनका समर्थन किया और कॉन्ग्रेस नेताओं से राहुल गाँधी व सोनिया गाँधी की शैक्षिक डिग्री दिखाने की माँग करने लगे। ऋषि बागरी ने ट्वीटर पर लिखा, “मैं पीएम मोदी की बीए और एमए की डिग्री पोस्ट कर रहा हूँ। अब मैं कॉन्ग्रेस पार्टी को राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी की शैक्षिक डिग्री पोस्ट करने की चुनौती दे रहा हूँ।

ऋषि बागरी की इस ट्वीट को रौशन सिन्हा उर्फ मिस्टर सिन्हा (Mr. Sinha) ने शेयर करते हुए कॉन्ग्रेस नेत्री सुप्रिया श्रीनेत को टैग किया। उन्होंने लिखा, “हेलो सुप्रिया श्रीनेत… यदि आप सोनिया गाँधी की डिग्री पोस्ट करती हैं तो मैं ट्विटर छोड़ दूँगा और आपके घर पर घर का काम करना शुरू कर दूँगा जैसे आप 10JP में करती हैं।”

बता दें कि ट्विटर पर Mr. Sinha के नाम से मशहूर रौशन सूरत के कारोबारी हैं। मिस्टर सिन्हा सूरत में एक प्लास्टिक कंपनी, एक कूरियर सर्विस और एक जिम के मालिक हैं। इसके अलावा मिस्टर सिन्हा सोशल मीडिया कंसल्टेंसी कंपनी भी चलाते हैं।

बता दें कि राहुल गाँधी ने 2004 के आम चुनावों और 2009 व 2014 के चुनावों में अलग-अलग शैक्षिक योग्याताओं का उल्लेख किया था। 2009 और 2014 के अनुसार राहुल गाँधी ने 1989 में माध्यमिक परीक्षा पास की। उसके बाद 1994 में स्नातक हुए और 1995 में ट्रिनिटी कॉलेज कैम्ब्रिज से एम.फिल किया।

लेकिन वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव के लिए दिए गए उनके हलफनामे में माध्यमिक और ट्रिनिटी कॉलेज की शिक्षा का तो उल्लेख है लेकिन किसी स्नातक डिग्री की जानकारी नहीं दी गई है। 2004 के हलफनामे के अनुसार सेकेंडरी स्कूल पास करने के बाद राहुल गाँधी ने एम.फिल किया।

इसी तरह सोनिया गाँधी की शैक्षिक डिग्री को लेकर भी 2 चुनावों में अलग-अलग जानकारी दी गई। वर्ष 2004 के आम चुनावों के लिए दिए गए हलफनामे के अनुसार उन्हें कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के लोमेक्स कूक स्कूल से अंग्रेजी का सर्टिफिकेट मिला हुआ था। बाद में पता चला कि कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के तहत ऐसा कोई स्कूल है ही नहीं। सोनिया गाँधी ने 2009 के आम चुनावों में दिए हलफनामे में इसे लोमेक्स कूक स्कूल, कैम्ब्रिज बताया। जिसका अर्थ यह हुआ कि यह कैंब्रिज यूनिवर्सिटी का नहीं बल्कि कैंब्रिज शहर स्थित एक स्कूल है।

नोट- हमारे इस पोस्ट को मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया है जिसे आम इस लिंक पर जा कर पढ़ सकते हैं।