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माणिक साहा ने 8 मंत्रियों समेत दोबारा ली त्रिपुरा के CM पद की शपथ, PM मोदी भी रहे मौजूद: पटना से की है पढ़ाई, कॉन्ग्रेस-CPM ने किया समारोह का बहिष्कार

त्रिपुरा में हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में वामपंथी पार्टियों का सफाया कर के भाजपा ने लगातार दूसरी बार सत्ता में वापसी की। बुधवार (8 मार्च, 2023) को डॉ माणिक साहा ने त्रिपुरा के मुख्यमंत्री के रूप में दूसरी बार शपथ ली। शपथग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अलावा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी मौजूद रहे। सत्यदेव नारायण आर्य ने 8 अन्य मंत्रियों को भी शपथ दिलाई।

त्रिपुरा की राजधानी स्थित स्वामी विवेकानंद मैदान में ये शपथग्रहण समारोह आयोजित हुआ। जिन मंत्रियों ने डॉक्टर माणिक साहा के साथ शपथ ली, वो हैं – रतन लाल नाथ, प्रणजीत सिंघा रॉय, सुशांत चौधरी, टिंकू रॉय, विकास देववर्मा, सुधांग्शु दास, शांतन चकमा और शुक्लचारण नोआटिया। टिंकू, विकास और नोआटिया इस मंत्रिमंडल में नए चेहरे हैं। नोआटिया ‘इंडिजिनस पीपल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (IPFT)’ के एकमात्र विजेता उम्मीदवार हैं।

शपथग्रहण समारोह में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा भी मौजूद रहे, जिन्हें उत्तर-पूर्व में भाजपा की सफलता का सूत्रधार माना जाता है। अरुणाचल प्रदेश के सीएम पेमा खांडा, मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह और सिक्की के मुख्यमंत्री पीएस तमांग ने भी कार्यक्रम में उपस्थिति जताई। इस चुनाव में ‘TIPRA Motha’ (TMP) ने 13 सीटें जीती हैं। माणिक साहा मंत्रिमंडल में 3 सीटें खली रखी गई हैं, क्योंकि अगर TMP सरकार में शामिल हुई तो ये उनके खाते में जा सकती है।

केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण मंत्री प्रतिमा भौमिक ने भी धनपुर से विधानसभा चुनाव जीता था, लेकिन वो फ़िलहाल सांसद बनी रहेंगी और विधायक पद से इस्तीफा देंगी। CPM और कॉन्ग्रेस ने चुनाव परिणाम जारी होने के बाद हिंसा का आरोप लगाते हुए शपथग्रहण समारोह का बहिष्कार किया। 60 सदस्यीय त्रिपुरा विधानसभा में भाजपा के पास 32 सीटें हैं। माणिक साहा ने पटना स्थित गवर्नमेंट डेब्टल कॉलेज से BDS की डिग्री ली है। वो ‘टीचर्स एसोसिएशन ऑफ ऑफ त्रिपुरा मेडिकल’ के अध्यक्ष भी रहे हैं।

तमिलनाडु में बिहार के श्रमिकों के साथ हिंसा पर पप्पू यादव ने एक और वीडियो किया शेयर, कहा- मामले को दबाने के लिए पत्रकारों पर केस

तमिलनाडु में हिंदी भाषी खासकर बिहार के श्रमिकों के साथ कथित हिंसा के दावों को राज्य सरकार और पुलिस झुठला रही है। कई लोगों पर केस भी किए गए हैं। जन अधिकार पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व सांसद पप्पू यादव ने कहा है कि ऐसा मामले को दबाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने एक वीडियो भी शेयर किया है जिसमें श्रमिक तमिलनाडु में हुई हिंसा के बारे में बात कर रहे हैं।

7 मार्च 2023 को किए गए इस ट्वीट में पप्पू यादव ने कहा है, “क्या यह भी झूठ है? क्या यह भी अफवाह है? कब तक बिहार के नेतृत्वकर्ता तमिलनाडु पुलिस के हाथों का खिलौना बने रहेंगे? वैसे बिहार पुलिस जिस तरह से इस मामले को दबाने के लिए पत्रकारों पर केस कर रही है तो बीजेपी की मक्कार सरकार और इनमें क्या अंतर रह गया?”

इस ट्वीट के साथ पूर्व सांसद ने दो मिनट 11 सेकेंड का एक वीडियो भी शेयर किया है। इसमें एक युवक कह रहा है कि 3 मार्च की शाम करीब 7 बजे वह ड्यूटी कर अपने कमरे लौट रहा था तो दो तमिल उसके पास आए। उन लोगों ने उससे एक जगह का नाम पूछा। इसके बाद उस पर चाकू से हमला कर दिया। इस हमले में उसके सीने, पेट और पीठ और गर्दन में चोट लगी है। उसने हमलावरों पर मोबाइल और पैसे छीनने के भी आरोप लगाए हैं। साथ ही बताया है कि वह किस तरह जान बचाकर भागने में सफल रहा।

अपने साथ हिंसा का दावा करने वाले इस युवक का यह भी कहना है कि एक स्थानीय हॉस्पिटल में उसका इलाज मालिक ने करवाया। मालिक ने उससे कहा कि यदि वह हमले को लेकर शिकायत दर्ज कराता है तो हॉस्पिटल में उसका इलाज नहीं होगा। वीडियो की शुरुआत में युवक अपने घाव दिखाता हुए देखा जा सकता है।

वीडियो में एक अन्य युवक कहता है कि इसने हिंदी में बात किया तो उन लोगों ने चाकू निकालकर हमला कर दिया। वहीं, एक और युवक कहता है बिहारियों को जानवर की तरह काटा-मारा जा रहा है। वहाँ बहुत बड़ा अन्याय हो रहा है।

बता दें कि तमिलनाडु में बिहार के श्रमिकों के साथ हुई कथित हिंसा को लेकर पप्पू यादव शुरुआत से ही मुखर हैं। 6 मार्च को उन्होंने ट्वीट कर कहा था, “तमिलनाडु में बिहार के लोगों के साथ कुछ हुआ ही नहीं, मैं यह मानने को तैयार नहीं हूँ। सरकार दबाव डाल मामले को छिपा रही है। क्या संयोग है 10-15 दिनों में बिहार, झारखंड, यूपी के कई मजदूरों की वहाँ मौत हुई। पुलिस के अनुसार सब के सब दुर्घटना में या आपसी लड़ाई में मारे गये? ऐसा कैसे हुआ?”

उससे पहले 5 मार्च को ट्वीट कर पप्पू यादव ने तमिलनाडु में मारे गए सिकंदरा जमुई के धधौर गाँव निवासी पवन यादव के घर पर होने की बात कही थी। उन्होंने लिखा था, “बिहार के बल पर राजनीतिक सुख सुविधा भोगने वाले कोई होली खेलने में तल्लीन हैं तो कोई तमिलनाडु प्रशासन के पिट्ठू बन गए हैं। पर हम तो लड़ेंगे, न्याय लेकर रहेंगे।”

गौरतलब है कि तमिलनाडु पुलिस हिंसा के दावों के साथ सोशल मीडिया में वायरल वीडियो को फर्जी बता चुकी है। पुलिस का कहना है कि अधिकांश वायरल वीडियो का बिहार के श्रमिकों के साथ हिंसा से कोई लेना-देना नहीं है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन भी हिंदी भाषियों के साथ किसी भी घटना से इनकार कर रहे हैं। बिहार सरकार भी तमिलनाडु सरकार के सुर में बात करती दिख रही है।

जिस ‘बिकिनी गर्ल’ को कॉन्ग्रेस ने लड़ाया था UP चुनाव, उसे प्रियंका गाँधी के PA ने दी धमकी: केस दर्ज, अर्चना गौतम को जातिसूचक शब्द कहने का भी आरोप

‘बिकिनी गर्ल’ के तौर पर मशहूर अभिनेत्री अर्चना गौतम के पिता ने कॉन्ग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा के पीए संदीप सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। उत्तर प्रदेश के मेरठ में दर्ज कराए गए मामले में संदीप सिंह पर अभिनेत्री को जान से मारने की धमकी देने और जाति सूचक टिप्पणी करने का आरोप है।

टीवी शो बिग बॉस-16 की टॉप 5 फाइनलिस्ट में रहीं गौतम को कॉन्ग्रेस ने 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में हस्तिनापुर से उम्मीदवार बनाया था। अर्चना गौतम के पिता गौतम बुद्ध ने संदीप सिंह के खिलाफ शिकायत दर्ज कराते हुए कहा है कि उनकी बेटी लंबे समय से प्रियंका गाँधी वाड्रा से मिलने की कोशिश कर रही है। लेकिन उनका पीए संदीप सिंह उन्हें मिलने नहीं दे रहा। गौतम बुद्ध ने कहा है कि प्रियंका गाँधी वाड्रा के कहने पर अर्चना गौतम को रायपुर में हुए कॉन्ग्रेस के महाधिवेशन में बुलाया गया था। अर्चना ने वहाँ प्रियंका से मिलने का समय माँगा। लेकिन संदीप ने उन्हें मिलने नहीं दिया।

अर्चना के पिता ने संदीप पर अपनी बेटी के साथ बदतमीजी करने, जातिसूचक टिप्पणी करने, उठवा लेने तथा जेल में डलवाकर करियर चौपट करने की धमकी देने का आरोप लगाया है। अर्चना के पिता की शिकायत पर मेरठ के परतापुर पुलिस ने संदीप सिंह के खिलाफ धारा 504, 506 तथा एससी, एसटी एक्ट की धारा 3 (1) और 3 (1) डी के तहत मुकदमा दर्ज किया है।

इस मामले में मेरठ सिटी के एसपी पीयूष सिंह का कहना है, “अर्चना गौतम के पिता की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया है। बिग बॉस की पूर्व कंटेस्टेंट और कॉन्ग्रेस नेता अर्चना गौतम को कथित तौर पर धमकी देने को लेकर कॉन्ग्रेस नेता प्रियंका गाँधी वाड्रा के पीए के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।”

बात दें कि इससे पहले अर्चना गौतम ने 26 फरवरी 2023 को फेसबुक लाइव पर संदीप सिंह पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था, “मैंने पार्टी प्रियंका दीदी के लिए ज्वाइन की है। तुम जैसे नल्लों के लिए नहीं। पूरी पार्टी तुम्हारे खिलाफ है। कोई कुछ बोलता नहीं है] क्योंकि किसी में गुदा नहीं है। मैं बोलूँगी। करके दिखाओ तुम मेरा बाल भी बांका।”

अर्चना ने यह भी कहा था, “तुम कुतर-कुतर कर पार्टी खा गए हो। ये जो बड़े-बड़े अधिवेशन हो रहे हैं, उनका कोई फायदा नहीं है क्योंकि ये नालायक-नल्ले लोग जब तक पार्टी में रहेंगे तब तक पार्टी नहीं बढ़ सकती। पूरे स्टाफ को निकाला जाए क्योंकि ये लोग SC-ST कम्युनिटी के लोगों को बढ़ावा नहीं देते। इनको एक आशंका होती है कि कहीं हम लोग ऊपर न चले जाए। ये चाहते हैं हम आज भी जूते तले रहें। अरे भैया हम जूते तले नहीं रहते। हम सीना चौड़ा करके चलते हैं। तुम जैसे आए और गए… जो तुम मुझे कह रहे हो न कि मुझे थाने में करवाओगे। बैठी हूँ मुझे थाने में करवाकर दिखा।”

बिग बॉस कंटेस्टेंट रहीं अर्चना गौतम ने आरोप लगाया था कि संदीप ने उन्हें दो कौड़ी की औरत कहा और धमकी दी कि अगर वो ज्यादा बोलीं तो उन्हें जेल के पीछे डाल दिया जाएगा। इसके बाद अर्चना ने संदीप से कहा कि अगर उनमें दम है तो वह जेल में डलवाकर दिखाएँ। बता दें कि विधानसभा चुनाव में हस्तिनापुर सीट पर अर्चना गौतम को महज 1519 वोट ही मिले थे। इसके अलावा बिग बॉस में भी वो अपने लड़ाकू व्यवहार के कारण ही चर्चा में रही थीं।

श्री आनंदपुर साहिब में कनाडा से आए प्रदीप की हत्या, निहंगों के वेश में होला मोहल्ला में था शामिल: मृतक की माँ बोली- अश्लील गाने का विरोध करने पर मार डाला

पंजाब के श्री आनंदपुर साहिब में 24 साल के प्रदीप सिंह उर्फ प्रिंस की हत्या किए जाने का मामला सामने आया है। प्रिंस निहंगों के वेश में होला मोहल्ला में शामिल था। वह कनाडा से आया था और उसके पास वहां की स्थायी नागरिकता है। घटना मंगलवार (7 मार्च 2023) की है।

प्रदीप की माँ बलविंदर कौर का कहना है कि अश्लील गाने बजाने का विरोध करने पर उनके बेटे की हत्या की गई। इंडिया टीवी की रिपोर्ट में उनके हवाले से कहा गया है, “प्रदीप शाम को बाजार गया था। वहाँ अश्लील गाने बजा रहे थे। इसे सुनकर उसने कहा कि गुरु के घर पर आए हो तो कोई ढंग के गाने लगाओ। प्रदीप के इतना कहने के बाद निहंग भड़क गए और लड़ाई करने लगे। 15-20 लोगों ने मेरे बेटे को तलवार से मारा। वह गिर गया था। लेकिन इसके बाद भी वो लोग उसे पत्थर मारते रहे और गालियाँ देते रहे।”

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रूपनगर जिले स्थित श्री आनंदपुर साहिब में होला मोहल्ला मेले का आयोजन किया गया था। इस मेले में लोग बाइक और ट्रैक्टर लेकर आते हैं। बाइक्स के या तो साइलेंसर निकले होते हैं या फिर मॉडिफाइड होती हैं। वहीं, ट्रैक्टर की बात करें तो लोग इसमें बड़े-बड़े स्पीकर लगाकर आते हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में प्रदीप को निहंगों के बीच घिरा हुआ देखा जा सकता है। घायल होने के बाद वह खुद को बचाने के लिए भागता हुआ भी दिखाई देता है। हालाँकि तलवारों के हमले से घायल होने के कारण वह थोड़ा दूर चलने के बाद गिर जाता है। इस दौरान भीड़ में से एक व्यक्ति को ‘बस करो, छोड़ दो, जाने दो’ कहते हुए सुना जा सकता है। हमले के बाद प्रदीप बुरी तरह से घायल हो गया था। इसके बाद उसे रोपड़ सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। हालाँकि मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि उसकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई थी।

इस घटना को लेकर रूपनगर के एसएसपी विवेक शील सोनी ने कहा है कि घटना रात करीब साढ़े दस बजे की है। प्रदीप बेहोशी की हालत में मिला। इसके बाद उसे सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। वह निहंग के वेश में था। लेकिन शुरुआती जाँच में सामने आया है कि वह निहंगों के किसी गुट से नहीं जुड़ा था। पुलिस आरोपितों की तलाश में जुटी हुई है।

वहीं, डीएसओ का कहना है कि प्रथम दृष्टया यह मामला उकसावे का लग रहा है। मृतक और आरोपितों के बीच कोई आपसी रंजिश की बात सामने नहीं आई है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, इसमें लोग उसे पत्थर मारते दिख रहे हैं। पुलिस यह पता लगाने में जुटी हुई है कि कहीं यह मामला रोड रेज से जुड़ा तो नहीं है।

मैं अधर्मी नहीं हूँ… मिलिए Swiggy के डिलीवरी बॉय सचिन पांचाल से, जिन्होंने मंदिर परिसर में मटन की डिलीवरी से कर दिया इनकार: अब किए गए सम्मानित

दिल्ली में फूड डिलीवरी करने वाली कंपनी स्विगी के डिलीवरी बॉय सचिन पांचाल ने मंदिर परिसर में मटन डिलीवर करने से मना कर दिया था। यही नहीं, उसने इसका वीडियो सोशल मीडिया पर भी अपलोड किया था। वीडियो वायरल होने के बाद मंदिर के पुजारियों ने डिलीवरी बॉय का सम्मान किया है। वहीं, सचिन को नौकरी से निकाले जाने की खबरों का स्विगी ने खंडन किया है।

दरअसल, दिल्ली के कश्मीरी गेट इलाके में स्थित प्राचीन मरघट हनुमान मंदिर के अंदर से मटन कोरमा ऑर्डर किया गया था। लेकिन, स्विगी के डिलीवरी बॉय सचिन पांचाल ने यह कहते हुए डिलीवरी करने से मना कर दिया था कि वह मंदिर के अंदर मटन लेकर नहीं जाएगा। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में भी देखा जा सकता है कि डिलीवरी बॉय मंदिर के अंदर डिलीवरी करने से मना कर रहा है।

बता दें कि स्विगी की पॉलिसी के अनुसार डिलीवरी बॉय को ऑर्डर देने वाले के दरवाजे तक सामान पहुँचाना होता है। लेकिन सचिन ने मंदिर की मर्यादा को ध्यान में रखते हुए मटन को मंदिर के अंदर ले जाने से इनकार कर दिया।

आज तक की रिपोर्ट के अनुसार, सचिन ने स्विगी के कस्टमर केयर पर भी बात करते हुए भी कहा था कि वह मंदिर के अंदर मटन लेकर नहीं जाएगा। सचिन का तर्क था कि मंदिर परिसर में जहाँ पर उसे ऑर्डर देना है वहाँ पर भगवान हनुमान को चढ़ाने वाला प्रसाद बनाया जाता है। हालाँकि, कस्टमर केयर से उसे कहा गया है कि वह गलत नहीं कर रहा है। लेकिन कंपनी के नियम के अनुसार उसे ग्राहक के दरवाजे तक ऑर्डर पहुँचाना चाहिए।

कस्टमर केयर से बात करते हुए सचिन ने यह भी कहा कि वह ‘अधर्मी’ नहीं है और नॉनवेज आर्डर देने मंदिर के अंदर नहीं जाएगा। यही नहीं, उसने यह भी कहा कि यदि उसे मंदिर के अंदर मटन ले जाने के लिए मजबूर किया गया तो वह इस कॉल की रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया पर डाल देगा।

सचिन का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा था। लोग उसकी जमकर तारीफ कर रहे थे। तारीफ के बीच ही अब मरघट हनुमान मंदिर के बोर्ड द्वारा उसे सम्मानित किया गया है। मरघट बाबा मंदिर के प्रभारी व ट्रस्टी पंडित वैभव शर्मा का कहना है, “सचिन पांचाल ने हिंदू धर्म की रक्षा के लिए जो कुछ भी किया है वह उन्होंने अपनी नैतिकता और सोच के साथ किया है। वह किसी हिंदू संगठन या किसी राजनीतिक दल तथा किसी धार्मिक संगठन से जुड़े हुए व्यक्ति नहीं हैं। यह उन लोगों के लिए एक संदेश है जो कहते हैं कि हिंदू सो रहा है। हिन्दू अब जाग गया है।”

बता दें कि वीडियो वायरल होने के बाद कई हिंदूवादी संगठन उस दुकान पर पहुँच गए थे। जहाँ से मटन का ऑर्डर दिया गया था। लोगों का कहना है कि जो व्यक्ति दिन में मंदिर के लिए प्रसाद बनाता है वह रात में उसी दुकानमें मटन खाता है। इस पूरे मामले को लेकर हिंदूवादी संगठन की नाराजगी के बाद दुकान के बाहर सीआरपीएफ और दिल्ली पुलिस के जवानों की तैनाती की गई है।

वहीं, मीडिया में ऐसी खबरें थीं कि मंदिर में मटन ले जाने से इनकार करने के बाद स्विगी ने अपने डिलीवरी बॉय सचिन पांचाल को नौकरी से निकाल दिया है। हालाँकि स्विगी ने ऐसी खबरों का खंडन किया है।

‘PM मोदी कहते हैं – सिख दोयम दर्जे के नागरिक हैं’: राहुल गाँधी ने झूठ बोल कर आगे बढ़ाया खालिस्तानी एजेंडा, कैम्ब्रिज में देश विरोधी बातें

28 फरवरी, 2023 को राहुल गाँधी ने कैंब्रिज विश्वविद्यालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरने के चक्कर में लगातार देश विरोधी बयान देते रहे। इस दौरान राहुल गाँधी ने वो सब भी कहा जो खालिस्तान की माँग करने वाले देश विरोधी तत्व कहा करते हैं। अपने भाषण के दौरान राहुल गाँधी ने सभा में बैठे एक सिख की तरफ इशारा करते हुए कहा कि सिखों को भारत में दोयम दर्जे का नागरिक (second class citizen) बना दिया गया है।

राहुल गाँधी के यूट्यूब चैनल पर उनका यह भाषण अपलोड किया गया है। इसमें 53:40 मिनट से राहुल को सिखों और मुस्लिमों के बारे में कहते सुना जा सकता है। राहुल कह रहे हैं कि पीएम मोदी भारत पर एक ऐसा विचार थोप रहे हैं जिसे भारत कभी स्वीकार नहीं कर सकता। भारत राज्यों का एक संघ है। यदि एक यूनियन पर आप कोई विचार थोपने का प्रयास करेंगे तो उसकी प्रतिक्रिया होगी।

ऐसे समय में जब अलगाववादी सिख नौजवानों के मन में खालिस्तान के नाम पर अलगाववाद पनपाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे समय में राहुल गाँधी वैश्विक मंच से उनके समर्थन में बातें कर रहे हैं। राहुल गाँधी पीएम मोदी पर अल्पसंख्यकों को दूसरे दर्जे का नागरिक समझने का आरोप लगाते हुए कहते हैं, “यहाँ मेरे सामने एक सिख बैठे हैं। वो भारत से आते हैं। क्या में सही हूँ? राहुल बोलना जारी रखते हैं, “भारत में मुस्लिम हैं, ईसाई भी हैं और सभी भारतीय हैं। लेकिन नरेंद्र मोदी ऐसा नहीं मानते। नरेंद्र मोदी उन्हें दोयम दर्जे का नागरिक मानते हैं। मैं उनसे सहमत नहीं हूँ।

कॉन्ग्रेस और खालिस्तान आंदोलन

राहुल गाँधी के इन भ्रामक बयानों ने उन खालिस्तानी अलगाववादियों का हौसला बढ़ाया है जो देश तोड़कर खालिस्तान बनाने के अपने दावों को वैध साबित करने की कोशिश में हैं। पंजाब में खालिस्तान आंदोलन ने 1980 के दशक में जोर पकड़ा। इस आंदोलन का नेता हुआ जरनैल सिंह भिंडरावाला जिसे पहले इंदिरा गाँधी और कॉन्ग्रेस द्वारा संरक्षण प्राप्त हुआ और बाद में जब वह भस्मासुर साबित होने लगा तो उसका सफाया कर दिया गया।

कुछ सालों में राज्य में पाकिस्तान समर्थित खालिस्तानी उग्रवाद को दबा दिया गया। खालिस्तान आंदोलन खत्म हो गया। आंदोलन से जुड़ा कोई भी बड़ा चरमपंथी अब देश में नहीं है। केंद्र द्वारा लाए गए कृषि कानूनों के खिलाफ कॉन्ग्रेस समर्थित आंदोलन में भी खालिस्तानियों ने अपना हित साधने की कोशिश की थी। रेफरेंडम 2020 के नाम पर खालिस्तान आंदोलन को पुनर्जिवित करने की कोशिश हुई। ऑपइंडिया ने विस्तार से अपने रिपोर्टों में दिखाया था कि कैसे आंदोलन के लिए लगाए गए शिविर खालिस्तानी चरमपंथियों के लिए प्रजनन स्थल बन गए थे।

कृषि विरोधी कानून आंदोलन की सफलता से उत्साहित खालिस्तान समर्थकों ने राज्य में अराजकता और अशांति पैदा करना शुरू कर दिया। हिंदुओं पर हमले किए गए। ऐसे समय में जब पंजाब की कानून व्यवस्था अमृतपाल सिंह जैसे खालिस्तानी नेताओं को काबू करने में नाकाम साबित हो रही है। राहुल गाँधी सिखों को भड़का कर देश के खिलाफ उकसाने की कोशिश कर रहे हैं।

राहुल ने मुस्लिमों को भी बताया दोयम दर्जे का नागरिक

कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में अपने संबोधन के दौरान राहुल गाँधी ने दावा किया कि पीएम मोदी सिखों के साथ-साथ मुस्लिमों को भी दोयम दर्जे का नागरिक समझते हैं। राहुल गाँधी ऐसा करते हुए उन इस्लामवादियों के दावों का समर्थन कर रहे थे जो कहते फिरते हैं कि मुस्लिम भारत में सुरक्षित नहीं हैं। 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद इन बातों को बढ़ा-चढ़ा कर प्रचारित किया जा रहा है।

असम में नागरिकों के एनआरसी और नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) जैसी पहलों के बारे में बड़े पैमाने पर झूठ फैलाए जाने के बाद शुरू हुए आंदोलन और आंदोलन के नाम पर हिंसा और अगजनी पूरी दुनिया ने देखी। किस तरह वर्ष 2020 में दिल्ली में आंदोलन की आड़ में हिंदू विरोधी दंगे भड़काए गए यह किसी से छिपा नहीं है। दिल्ली के अलावा देश के कई हिस्सों में आंदोलन के नाम पर सड़के जाम कर अराजकता फैलाने की कोशिश हुई। आज के समय में देश के बहुसंख्यक हिंदू कट्टर इस्लामवादियों के हमले झेल रहे हैं। राहुल को संयम बरतते हुए दुनिया के सामने देश की गलत छवि परोसने से बचना चाहिए था।

तमिलनाडु में झारखंड का मनोज यादव गिरफ्तार, फेक वीडियो से हिंदी श्रमिकों में डर का माहौल बनाने का आरोप: पुलिस बोली – दोस्तों संग मिल खुद को पीड़ित दिखाया

तमिलनाडु में हिंदी भाषियों पर कथित हमले की खबरों को वहाँ की पुलिस ने सिरे से नकार दिया है। पुलिस ने कहा है कि सोशल मीडिया पर वायरल सभी वीडियो फर्जी हैं। पुलिस का कहना है कि आपसी रंजिश को लेकर हुई हत्या के वीडियो को तमिलनाडु में हिंसक घटनाओं का वीडियो बताकर वायरल किया गया था।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, त्रिरुपुर के पुलिस आयुक्त अभिषेक शुक्ला ने कहा है कि झारखंड के रहने वाले उपेंद्र धारी ने बिहारी मजदूर पवन यादव की हत्या आपसी रंजिश के चलते की थी। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद इसे सोशल मीडिया पर तमिलनाडु में उत्तर भारतीयों पर हो रही हिंसा के रूप में दिखाया गया था। उन्होंने यह भी कहा है कि आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है। फर्जी वीडियो शेयर करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है।

यही नहीं, वायरल वीडियो को पुराना बताते हुए त्रिची एसपी सुजीत कुमार ने कहा है कि बिहारियों पर हमले की खबरें पूरी तरह से अफवाह हैं। कोयंबटूर के डीएम क्रांति कुमार पाटिल और एसपी सिटी वी बालाकृष्णन ने भी वीडियो को फर्जी बताते हुए बिहारी मजदूरों को सुरक्षा का आश्वासन दिया है। इसी तरह तूतीकोरिन के एसपी बालाजी सरवनन ने कहा है, “उत्तरी राज्य के मजदूरों (बिहार) पर हमले के संबंध में सोशल मीडिया पर फैलाई गई अफवाह झूठी है। यह तूतीकोरिन जिले की घटना है, सभी पुलिसकर्मी सुरक्षा के लिए तैनात हैं।”

डीडब्ल्यू की रिपोर्ट के अनुसार, तमिलनाडु में बिहारियों के साथ हो रही हिंसा की अफवाह के बीच तमिलनाडु में हुई एक और मौत की खबर से इस अफवाह को बल मिला। दरअसल, 26 फरवरी को बिहार के जमुई जिले के एक युवक का शव फंदे से झूलता हुआ मिला था। इस मौत को भी बिहारियों पर हुए हमले से जोड़कर दिखाया गया। इससे तमिलनाडु में रहने वाले हिंदी भाषी दहशत में आ गए।

यही नहीं, तमिलनाडु के मराईमलाई में रहने वाले झारखंड के मनोज यादव और उसके दोस्तों ने भी एक वीडियो शेयर किया था। इस वीडियो में उन लोगों ने दावा किया था कि चेन्नई से हिंदी भाषियों को भगाया जा रहा है। वीडियो में उसने सरकार से विनती करते हुए कहा था कि उसके पास तमिलनाडु से निकलने का कोई रास्ता नहीं है। साथ ही कहा कि ट्रेन और बस से जाने वालों को मारा जा रहा है। यह वीडियो भी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था। हालाँकि, अब तमिलनाडु पुलिस ने वीडियो शेयर करने वाले व्यक्ति मनोज को गिरफ्तार कर लिया है।

गिरफ्तारी के बाद मनोज ने स्वीकार किया है कि उसने फेमस होने के लिए वीडियो बनाया था।

दरअसल, सोशल मीडिया में कोई भी खबर सामने के बाद यूजर्स उसे अन्य लोगों के साथ शेयर करना शुरू कर देते हैं। फेसबुक से लेकर ट्विटर और यूट्यूब तक बिहारियों के साथ तमिलनाडु में हो रही हिंसा की खबरें वायरल हो रही थीं। ऐसे कई वीडियो सामने आ रहे थे, जिनमें दावा किया जा रहा था कि तमिलनाडु में हिंदी भाषियों के साथ हिंसा हो रही है। हालाँकि, इसको लेकर तमिलनाडु और बिहार पुलिस दोनों की ही तरफ से कड़ी कार्रवाई की जा रही है।

इस मामले में बिहार पुलिस ने यूट्यूबर मनीष कश्यप समेत 4 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। इसमें से एक आरोपित अमन कुमार को गिरफ्तार भी किया है। वहीं तमिलनाडु पुलिस ने 9 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। तमिलनाडु के डीजीपी सी सिलेंद्र बाबू ने कहा है, “हमने मीडिया में जो कुछ भी देखा है। वह सब फर्जी वीडियो हैं। इनमें से अधिकांश तमिलनाडु वीडियो का तमिलनाडु से कोई संबंध नहीं है। जिन जगहों पर उत्तर भारतीय लोग काम कर रहे हैं वहाँ हमने पुलिस गश्त तेज कर दी है। हिंदी जानने वाले पुलिसकर्मी लगातार उनके संपर्क में हैं। हमने चैनलों से फेक कंटेंट हटाने का अनुरोध किया है। वीडियो न हटाने वाले 9 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।”

राजस्थान की सब-इंस्पेक्टर, हरियाणा की पहलवान, माँ-पिता रहे सरपंच, 5 लाख फॉलोवर्स… राहुल गाँधी के साथ ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में दिखी, अब गिरफ्तार

राजस्थान की एक महिला पुलिस अधिकारी खासी चर्चा में हैं। SI निंदा कँवल को राहुल गाँधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में देखा गया था। अब उन्हें गिरफ्तार किया गया है। मीडिया अक्सर उन्हें राजस्थान की ‘हसीन और खूबसूरत पुलिस अधिकारी’ बताता रहा है। दरअसल, उन पर अवैध हथियार रखने का मामला चल रहा है, जिस कारण उन्हें निलंबित भी किया जा चुका है। दिल्ली पुलिस ने भी उनके घर पर दबिश दी, जिसके बाद उनकी गिरफ़्तारी हुई।

दरअसल, अपहरण के मामले में फरार चल रहे सुमित नांदल नामक व्यक्ति की तलाश में दिल्ली पुलिस ने नैना कँवल के घर पर दबिश दी थी। दिल्ली पुलिस सुमित नांदल की तलाश कर रही थी। इसी दौरान राजस्थान पुलिस में ट्रेनी नैना कँवल को हरियाणा में अवैध हथियारों के साथ गिरफ्तार किया गया। राजस्थान पुलिस के अतिरिक्त महानिदेशक (अपराध) एस सेंगाथिर ने उनके निलंबन का आदेश जारी किया। उन पर अपहरण का भी आरोप है।

इसी कारण दिल्ली पुलिस ने उनकी गिरफ़्तारी को अंजाम दिया है। नैना कँवल हरियाणा में पहलवान भी रही हैं। राजस्थान पुलिस में होने के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी उनकी अच्छी फैन फॉलोविंग है। इंस्टाग्राम पर उनके 2.52 लाख फॉलोवर्स हैं। साथ ही फेसबुक पर भी उनके लगभग सवा 5 लाख फॉलोवर्स हैं। उनकी माँ और उनके पिता, दोनों ही सरपंच रह चुके हैं। उन्हें 7 बार ‘हरियाणा केसरी’ का ख़िताब मिल चुका है।

उनके पिता और भाई भी कुश्ती के शौक़ीन रहे हैं। खेल कोटे से ही उन्हें 2022 में राजस्थान में सब-इंस्पेक्टर का पद मिला था। 1996 में पानीपत के सुतना गाँव में जमी नैना कँवल के फ़्लैट से दो अवैध पिस्टल भी बरामद हुए। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कई कुश्ती टूर्नामेंट्स में उन्हें अवॉर्ड मिले हैं। उनकी फिटनेस के कारण भी सोशल मीडिया पर उन्हें लोग फॉलो करते हैं। ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में राहुल गाँधी के साथ भी उन्होंने तस्वीरें डाली थीं।

5 साल की मासूम बच्ची से बलात्कार की कोशिश, नाकाम रहने पर काट डाला गला: 24 घंटे में यूपी पुलिस ने दबोचा

उत्तर प्रदेश के बिजनौर में 5 साल के मासूम की हत्या की गुत्थी सुलझ गई है। पुलिस ने जानकारी दी है कि रेप में नाकाम रहने पर पास के ही अमान खान (19) नाम के शख्स ने बच्ची की गला रेत कर हत्या कर दी। बच्ची की लाश बरामद होने के बाद पुलिस ने दिन रात एक कर 24 घंटे में आरोपित को गिरफ्तार कर मामले का खुलासा कर दिया।

मामला बिजनौर के किरतपुर थाना इलाके का है। 3 मार्च, 2023 की दोपहर बच्ची अपने घर से चॉकलेट खरीदने के लिए निकली थी। घर के पास रहने वाले अमान ने बच्ची को चॉकलेट का लालच दिया और पास के खाली पड़े घर में ले गया। पुलिस के अनुसार यहाँ अमान ने बच्ची के साथ दरिंदगी की कोशिश की। अमान की हरकतों से बच्ची रोने और चिल्लाने लगी। लड़की के शोर मचाने के बाद अमान ने चाकू से उसका गला रेत दिया और फरार हो गया।

इधर लड़की के काफी देर तक घर न लौटने से परेशान घर वाले शाम तक उसकी तलाश करते रहे। खाली घर के पास खेल रहे बच्चों को मासूम की लाश नजर आई। आनन-फानन में पुलिस को बुलाया गया। पुलिस ने गर्दन कटी खून से लथपथ लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर जाँच शुरू कर दी। जाँच के दौरान पुलिस को बच्ची के अमान खान के साथ देखे जाने की जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ में अमान ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। उसने बताया कि चॉकलेट का लालच देकर वह बच्ची को अपने साथ ले गया था और जबरदस्ती की कोशिश करने लगा। शोर मचाने के बाद उसने धारदार हथियार से बच्ची की गर्दन काट दी। पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियार को भी बरामद कर लिया है। अमान ने कहा है कि बच्ची के घर उसका आना जाना था। अमान के माता- पिता गुजर चुके हैं और वह अपने मामा तालीब के घर रहा करता था।

‘हिंदू धर्म छोड़कर मुस्लिम-ईसाई बने लोगों को न मिले आरक्षण का फायदा’: VHP की संगोष्ठी के बाद माँग, सरकार को भी सौंपा जाएगा ज्ञापन

देश में धर्मपरिवर्तन कर चुके लोगों को मिल रहे आरक्षण का विरोध अब जोर पकड़ता जा रहा है। उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में आयोजित एक संगोष्ठी के बाद विश्व हिंदू परिषद की तरफ से कहा गया है कि आरक्षण का फायदा ऐसे लाभार्थियों को नहीं मिलना चाहिए जिन्होंने अपना धर्म बदल लिया है। संगोष्ठी का आयोजन 4 और 5 मार्च, 2023 को ग्रेटर नोएडा के गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी में हुआ था।

ग्रेटर नोएडा के गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी में विश्व संवाद केंद्र, जीबीयू और हिंदू विश्व पत्रिका द्वारा ‘धर्मांतरण एवं आरक्षण’ विषय पर दो दिवसीय संगोष्ठी आयोजित की गई। संगोष्ठी के दौरान अलग-अलग वर्ग के 150 लोगों ने धर्मपरिवर्तन कर चुके लोगों को मिल रहे आरक्षण पर अपने विचार व्यक्त किए। इनमें पूर्व न्यायाधीश, विश्व विद्यालयों के कुलपति, प्रोफेसर, पत्रकार और वकील शामिल थे। ज्यादातर लोगों का कहना था कि धर्म परिवर्तन करने वालों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए।

विश्व हिंदू परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार के अनुसार संगोष्ठी के बाद आरएसएस की मीडिया शाखा विश्व संवाद केंद्र ने न्यायमूर्ति के जी बालकृष्णन आयोग को एक ज्ञापन सौंपने का फैसला लिया है। केंद्र सरकार ने न्यायमूर्ति के जी बालकृष्णन आयोग को धर्मांतरण कर चुके अनुसूचित जाति व जनजाति के लोगों को आरक्षण देने के मुद्दे का परीक्षण करने की जिम्मेदारी दी है।

वीएचपी का कहना है कि तार्किक और उचित निष्कर्ष पर पहुँचने के लिए आयोग के सामने तथ्यों को रखने के लिए सभी संभव कदम उठाए जाएँगे। परिषद की तरफ से कहा गया है कि मुसलमानों और ईसाइयों में ओबीसी विभिन्न राज्यों में संबंधित कोटा के तहत आरक्षण का लाभ पहले से ही लेते हैं। अन्य गरीब मुस्लिम और ईसाई तबके के ऐसे लोग जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं केवल उन्हें ही आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए।

इस मुद्दे को लेकर आलोक कुमार की तरफ से एक ट्वीट भी किया गया है। उन्होंने लिखा है कि मुस्लिम समुदाय को ओबीसी कोटे के तहत आरक्षण मिल रहा है। अल्पसंख्यकों के नाम पर मिलने वाली सुविधाएँ प्राप्त हो रही हैं। संविधान के अनुच्छेद 30 के तहत लाभ प्राप्त हो रहे हैं। इसके अलावा मुफ्त राशन, घर, घर में नल, शौचालय, बिजली और गैस की सुविधाएँ मिल रही हैं। फिर अनुसूचित जाति में आरक्षण की जिद्द क्यों की जा रही है?

बता दें कि कुछ मुस्लिम संगठन और नेता मुस्लिमों के लिए आरक्षण की माँग करते रहे हैं। आलोक कुमार ने ‘ईटीवी भारत’ से कहा कि अनुसूचित वर्ग को मिल रहा आरक्षण तब तक जारी रहना चाहिए जब तक यह सुनिश्चित न हो जाए कि अब समाज के किसी भी वर्ग के साथ सामाजिक भेदभाव नहीं रहा।