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‘बहुत बढ़िया किया, वह इसी लायक था, उसे मारना चाहिए था’: हिंदूवादी नेता सुधीर सूरी की हत्या को पंजाबी हिरोइन सोनिया मान ने ठहराया जायज

नवंबर 2022 में पंजाब में हिंदूवादी नेता सुधीर सूरी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। शिवसेना (टकसाली) के इस नेता की हत्या को अब पंजाबी अभिनेत्री सोनिया मान ने जायज ठहराया है। हिरोइन से एक्टिविस्ट बनी मान का कहना है कि सूरी मारे जाने के ही लायक थे। उसने उन्हें गोली मारने वाले संदीप सिंह की भी प्रशंसा की है।

पंजाबी न्यूज चैनल रोजाना स्पोक्समैन को दिए एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में सोनिया ने कहा कि सूरी की हत्या कर सिंह ने बढ़िया काम किया। उसने कहा, “संदीप जी ने सूरी को मार डाला। उन्होंने बढ़िया काम किया। वह इसी लायक था। वैसे तो हत्या और हिंसा में किसी को शामिल नहीं होना चाहिए, लेकिन सूरी की हत्या जरूरी थी।” मान ने यह बात खालिस्तान समर्थक और ‘वारिस पंजाब दे’ के मौजूदा प्रमुख अमृतपाल सिंह की आलोचना करते हुए कही। उसने कहा कि अमृतपाल सिंह ने संदीप सिंह का साथ नहीं दिया।

मान ने कहा , “संदीप सिंह अमृतपाल के भाषणों और गतिविधियों से प्रभावित थे। आपने (अमृतपाल सिंह) उनके लिए क्या किया। वह इस बात से आहत थे कि उनका करीबी लवप्रीत तूफान तीन दिनों से जेल में था। जब पुलिस ने सूरी की हत्या के लिए संदीप सिंह को गिरफ्तार किया था तो उन्होंने आवाज क्यों नहीं उठाई?”

अमृतपाल सिंह को स्वार्थी बताते हुए सोनिया मान ने कहा कि उसकी खालिस्तान की विचारधारा कमजोर है। वह सिख साम्राज्य के पहले महाराजा रंजीत सिंह के ‘खालिस्तान’ के विचार को आगे बढ़ाएँगी, न कि अमृतपाल सिंह के विचार को। मान ने कहा, “इन दोनों (रणजीत सिंह और अमृतपाल सिंह) के खालिस्तान के विचार ऐसे हैं जैसे एक लाइन के दो छोर हों। वे कभी नहीं मिल सकते। राजा रणजीत सिंह ने एक ऐसे साम्राज्य का लक्ष्य रखा था, जिसमें हर व्यक्ति के साथ समान व्यवहार हो। वहाँ शिक्षा को महत्व और सभी के लिए सम्मान हो। आज अमृतपाल सिंह जिस चीज के लिए लड़ रहे हैं, वह सिर्फ सत्ता है। वह एक कट्टरपंथी नेता हैं और खालिस्तान क्या होना चाहिए, इसके बारे में उनका अलग विचार है।”

सोनिया मान ने कहा कि अमृतपाल सिंह इस बात को लेकर भी असमंजस में है कि वह अपनी जिंदगी को निजी रखना चाहता है या सिख समुदाय के लिए काम करना चाहता है। उसने कहा, “अमृतपाल सिंह खालिस्तानी समर्थक नारे लगाकर पंजाब की छवि खराब कर रहे हैं। हाल ही में अजनाला विरोध प्रदर्शन कट्टरता का ही परिणाम था। उन्होंने अपने करीबी के जेल में होने के कारण पुलिस स्टेशन को घेर लिया। लेकिन जब संदीप जी को जेल भेजा गया था, तब वह कहाँ थे?” दिलचस्प बात यह है कि सोनिया के पिता बलदेव सिंह मान की साल 1986 में खालिस्तानियों ने ही हत्या की थी। तब सोनिया महज एक साल की थी।

बता दें कि सुधीर सूरी अमृतसर में कूड़े में भगवान की मूर्तियाँ मिलने के बाद गोपाल मंदिर के बाहर धरना दे रहे थे। इसी दौरान उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

मोदी विरोधी एकता की अधूरी रह गई कहानी, अकेले ही लोकसभा चुनाव लड़ेंगी ममता बनर्जी: क्षेत्रीय क्षत्रपों की महत्वाकांक्षा से BJP की 2024 की राह और आसान

विपक्षी एकता तो झटका देते हुए तृणमूल कॉन्ग्रेस की चीफ (TMC Chief) एवं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (West Bengal Chief Minister Mamata Banerjee) ने आखिरकार घोषणा कर दिया कि वह 2024 के लोकसभा चुनाव में अकेले उतरेंगी। इसके पहले वह भाजपा के खिलाफ मोर्चा बनाने की खूब कोशिश कीं, लेकिन वे इसमें सफल नहीं रहीं। ऐसे में क्षेत्रीय क्षत्रपों की महत्वाकांक्षा ने 2024 में भाजपा की राह आसान कर दी है।

ममता बनर्जी ने कहा, “2024 में हम तृणमूल और लोगों के बीच एक गठबंधन देखेंगे। हम किसी अन्य राजनीतिक दल के साथ नहीं जाएँगे। जनता के सहयोग से हम अकेले लड़ेंगे। जो बीजेपी को हराना चाहते हैं, मुझे विश्वास है कि वे हमें वोट देंगे।”

बंगाल के सरदिघी उपचुनाव में कॉन्ग्रेस ने सत्तारूढ़ तृणमूल से विधानसभा सीट छीन ली है। इससे तमतमाई ममता बनर्जी ने आरोप लगा दिया कि कॉन्ग्रेस, वामपंथी और भाजपा ने सरदिघी में सांप्रदायिक कार्ड खेला है। बता दें कि 2021 के बंगाल विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस ने अपने वोट TMC को ट्रांसफर करवाकर भाजपा को रोकने की कोशिश की थी।

दरअसल, 2024 का लोकसभा चुनाव अकेले लड़ने का ममता बनर्जी का यह कदम आत्मविश्वास और जीत की उम्मीद के कारण उठाया हुआ नहीं लगता है, क्योंकि त्रिपुरा विधानसभा चुनावों में टीएमसी का खाता भी नहीं खुला है और ना ही इसके पहले के चुनावों में टीएमसी को कोई उल्लेखनीय लाभ मिला है। ममता बनर्जी का यह कदम आपसी खींचतान और महत्वाकांक्षा का परिणाम है।

साल 2021 में पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनावों में जीत के बाद ममता बनर्जी खुद को राष्ट्रीय परिदृश्य पर देखने लगी थी। जैसे कि आजकल बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुद को देख रहे हैं। ममता बनर्जी की इस महत्वाकांक्षा के पीछे मोदी लहर में भी बंगाल के अपने किले को सुरक्षित बचा ले जाना महत्वपूर्ण कारण था। ममता बनर्जी साल 2019 लोकसभा चुनावों के नतीजों के बाद से ही विपक्षी एकता की प्रमुख वर्ताकार रही थीं, लेकिन यह महत्वाकांक्षा 2021 में बनीं।

ऐसा नहीं कि गैर-भाजपा दलों ने मोदी सरकार के खिलाफ मजबूती से खड़ा होने के लिए कोई प्रयास नहीं किया। कॉन्ग्रेस, टीएमसी, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली तत्कालीन शिवसेना, शरद पवार की एनसीपी, लालू यादव की आरजेडी सहित की पार्टियाँ थीं। उस दौरान ममता एक ताकतवर नेता के रूप में उभरी थीं।

जिस तरह नीतीश कुमार आज दिल्ली और अन्य राज्यों में जा-जाकर मुख्यमंत्रियों और क्षेत्रीय दलों के नेताओं से मिल रहे हैं, उसी तरह विधानसभा चुनाव जीतने के बाद ममता बनर्जी ने शुरू किया था। वे कोलकाता के बजाय अधिकांश समय दिल्ली में रहती थीं। वह भाजपा के खिलाफ एक एक मजबूत मोर्चा बनाने की तैयारी कर रही थीं।

हालाँकि, उस समय भी तेलंगाना राष्ट्र समिति (अब भारत राष्ट्र समिति – BRS) के प्रमुख के चंद्रशेखर राव (KCR) खुद की अपनी अलग राह पकड़े हुए थे। वे दक्षिण भारत के नेताओं सहित कुछ अन्य पार्टियों के नेताओं के साथ मिलकर तीसरा मोर्चा बनाने में लगे थे। केसीआर की महत्वाकांक्षा किसी दूसरे के नेतृत्व को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थी। वह किंग या फिर किंगमेकर भी भूमिका में रहना चाहते।

इधर कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली यूनाइटेड प्रोगेसिव अलाएंस (UPA) को मजबूत करने के लिए चहल-पहल बढ़ गई थी। लेकिन ममता बनर्जी चाहती थीं कि उन्हें सोनिया गाँधी की जगह पर UPA का अध्यक्ष या फिर संयोजक बनाया जाए। हालाँकि, कॉन्ग्रेस इसके लिए तैयार नहीं दिखी और ममता UPA में सोनिया गाँधी के नेतृत्व को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हुईं। इसका असर बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद ममता बढ़ी गतिविधियों में दिखी।

साल 2021 में टीएमसी चीफ ममता बनर्जी के उस बयान को याद करना भी जरूरी हो जाता है, जब उन्होंने भाजपा के विरुद्ध विपक्ष की लड़ाई में यूपीए की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ‘कौन-सा यूपीए? यूपीए कुछ नहीं है’। इसके बाद बंगाल कॉन्ग्रेस की कड़ी टिप्पणी सामने आई थी।

इस पर बंगाल के कॉन्ग्रेसी नेता अधीर रंजन चौधरी ने ममता पर सवाल उठाते हुए कहा था, “क्या ममता बनर्जी को पता नहीं कि यूपीए क्या है? मुझे लगता है उनके पागलपन की शुरुआत हो गई है। उन्हें लगता है सारा भारत ममता-ममता का जाप कर रहा है, लेकिन भारत का अर्थ बंगाल नहीं है और बंगाल का अर्थ भारत नहीं है। पिछले (विधानसभा) चुनावों की उनकी रणनीति का धीरे-धीरे खुलासा हो रहा है।”

इसके बाद कॉन्ग्रेस और टीएमसी के पास आने की संभावनाएँ खत्म हो गईं। इसके ठीक पहले तत्कालीन शिवसेना के संजय राउत ने शरद पवार को यूपीए का अध्यक्ष बनाने की बात कही। राउत के बयान का महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष नाना पटोले ने खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा था कि यूपीए के अध्यक्ष पद का विषय किसी बहस का मुद्दा नहीं हो सकता और सोनिया गाँधी ही यूपीए की अध्यक्षा रहेंगी।

साल 2021 के अंत तक खींचतान के बीच तीसरा मोर्चा बनाने की कवायद जारी रही है, लेकिन शरद पंवार, जदयू के नीतीश कुमार, आरजेडी के तेजस्वी, टीएमसी की ममता, अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी, बीजेडी के पटनायक की अपनी-अपनी महत्वाकांक्षाएँ भी कम नहीं हुईं और ये इस समय तक आकार नहीं ले सका।

गोवा विधानसभा चुनाव 2022 में कई नेताओं को टीएमसी में मिलाकर उन्होंने खुद को फिर से राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत नेता के रूप में दावेदारी पेश करने की कोशिश की। वह गोवा विधानसभा चुनावों के दौरान से ही ममता बनर्जी विपक्ष का चेहरा बनने की कोशिश करती रहीं। वह विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने का प्रयास करती दिखीं, लेकिन कॉन्ग्रेस ने ममता के नेतृत्व में विपक्षी मोर्चे को मानने से इनकार कर दिया था।

कॉन्ग्रेस के नेताओं का तर्क था कि विपक्षी दलों के किसी भी गठबंधन या मोर्चे का स्वाभाविक नेतृत्वकर्ता कॉन्ग्रेस और सोनिया गाँधी ही हैं। कॉन्ग्रेस ने इसके पीछे तर्क दिया था कि कॉन्ग्रेस राष्ट्रीय पार्टी है, जबकि TMC एक क्षेत्रीय पार्टी है, जिसका जनाधार सिर्फ एक राज्य तक सीमित है।

अप्रैल 2022 में तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) नेता रिपुन बोरा के बयान के याद करना भी आवश्यक हो जाता है। बोरा ने कहा था कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 2024 के लोकसभा चुनावों में विपक्षी मोर्चे का नेतृत्व करने के लिए सबसे उपयुक्त नेता हैं। तब भी कॉन्ग्रेस ने बोरा के बयान को खारिज कर दिया।

इसके बाद राष्ट्रपति चुनाव के समय एक बार फिर भाजपा की राष्ट्रपति उम्मीदवार के खिलाफ संयुक्त प्रत्याशी उतारकर एकता का संदेश देने की कोशिश की गई। इस दौरान संयुक्त उम्मीदवार उतारकर अधिकांश एक मंच पर दिखे। इनमें कॉन्ग्रेस, TMC, NCP, तब की शिवसेना, BJD, सपा, PDP आदि प्रमुख दल थे। यहाँ पर ममता ने अपनी पार्टी के नेता यशवंत सिन्हा को संयुक्त उम्मीदवार बनाया।

राष्ट्रपति चुनाव में जब मतदान की बारी आई तो यह एकता नहीं दिखी। यशवंत सिन्हा भले ही संयुक्त विपक्ष के साझा उम्मीदवार थे, लेकिन द्रौपदी मुर्मू का नाम उम्मीदवार के तौर पर सामने आते ही BJD, JMM, YSR कॉन्ग्रेस, शिव सेना के उद्धव गुट ने यशवंत सिन्हा से किनारा कर लिया।

यहाँ भी क्षेत्रीय दलों की महत्वकांक्षा ने एक साथ आने नहीं दिया। या ये कहा जाए कि ममता बनर्जी दूसरे के नेतृत्व को स्वीकार करने को तैयार नहीं दिखीं और दूसरे भी उनके नेतृत्व को स्वीकार करते नहीं दिखे। खरबूजे को देखकर खरबूजा रंग बदलता है। परिणाम यह हुआ कि कोई भी क्षेत्रीय दल एक-दूसरे का नेतृत्व स्वीकार करने को तैयार नहीं दिखा।

अब जबकि 2024 लोकसभा की पूर्वसंध्या पर ममता बनर्जी ने अंतत: अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। ऐसे में भाजपा के खिलाफ गठबंधन बनने की संभावना मरती जा रही है। अखिलेश यादव की सपा और जदयू एवं राजद की ओर से किसी गठबंधन की संभावना नजर नहीं आ रही है।

विपक्षी एकता के अभाव में एक बार फिर भाजपा केंद्र की सत्ता की ओर बढ़ सकती है। क्षेत्रीय क्षत्रपों की महत्वाकांक्षा ने इस राह को और आसान कर दिया है। बिना किसी मजबूत अवरोध के भाजपा लोकसभा चुनाव 2024 को आसानी से जीत सकती है। इससे पहले पूर्वोत्तर के तीन राज्यों और एवं कई सीटों पर हुए उपचुनावों में इसकी झलक मिल गई है।

‘₹1 करोड़ नहीं दिए तो जान से मार दूँगा’: स्कूल मालिक को धमकाने वाला भोजपुरी एक्टर-यूट्यूबर शाहिद गिरफ्तार, हिंदू नाम से माँगता था रंगदारी

दिल्ली पुलिस ने खुद को भोजपुरी एक्टर और यूट्यूबर बताने वाले शाहिद को स्कूल के मालिक से 1 करोड़ की रंगदारी माँगने के आरोप में गिरफ्तार किया है। उसके खिलाफ रंगदारी, धोखाधड़ी, स्नैचिंग और आर्म्स एक्ट के तहत 9 मामले पहले से दर्ज हैं। स्कूल के मालिक से पैसे माँगने का आईडिया आरोपित के दोस्त ने दिया था। जिस शख्स से शाहिद ने 1 करोड़ लूटने की योजना बनाई थी। वह 2 स्कूलों का मालिक होने के साथ बिल्डर भी था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 25 वर्षीय शाहिद ने दिल्ली के बाटला हाउस में ‘स्टार फिल्म्स’ नाम से एक ऑफिस खोल रखा है। शातिर अपराधी शाहिद कई नामों से जाना जाता है। वह खुद को कभी लल्लन, कभी लड्डन तो कभी राज सिंघानिया बताता था। शाहिद ने अपने दोस्त फहाद के साथ मिलकर दिल्ली के एक स्कूल के मालिक से 1 करोड़ की रंगदारी माँगने की योजना बनाई थी। फहाद खुद एक मर्डर केस में जामिया नगर पुलिस स्टेशन में बंद है। फहाद ने शाहिद से कहा था, “तुम इस बार कोई अमीर पार्टी पकड़ो। “इसके बाद उसने 49 साल के बिल्डर को फोन घुमाया और सीधे 1 करोड़ रुपए माँगे।

पुलिस के अनुसार, शाहिद ने 25 फरवरी 2023 को अपने दोस्त फहाद को फोन लगाया और स्कूल के मालिक को लाइन पर लिया। कॉल मर्ज करने के बाद फहाद और शाहिद ने स्कूल मालिक को 48 घंटे के अंदर 1 करोड़ रुपए देने की धमकी दी। मालिक ने तुरंत इसकी शिकायत पुलिस को दी, जिसके आधार पर पुलिस ने शाहिद को गिरफ्तार कर लिया। रंगदारी माँगने और धमकी देने वाले शाहिद पर कई धाराओं में केस दर्ज कर किया गया है।

दक्षिणपूर्व दिल्ली के डिप्टी कमिश्नर राजेश देव ने बताया कि आरोपित के खिलाफ रंगदारी, धोखाधड़ी, स्नैचिंग और आर्म्स एक्ट के तहत 9 मामले पहले से दर्ज हैं। इस बार उसने सीधे दिल्ली की एक स्कूल के मालिक से ही रंगदारी माँग ली। स्कूल के मालिक का यह दूसरा पेशा था। वह बिल्डर भी था। उसने तुरंत इसकी शिकायत पुलिस में की। राजेश देव ने आगे कहा कि जब आरोपित का मोबाइल नंबर ट्रेस किया गया, तो पता चला कि वह लगातार अपना ठिकाना बदल रहा है। हालाँकि, इसके बावजूद पुलिस ने आरोपित को जंगपुरा से गिरफ्तार कर लिया।

एक अन्य मीडिया रिपोर्ट में आरोपित का नाम मोहम्मद शाहिद बताया जा रहा है। उसने स्कूल मालिक को कॉल करके खुद का नाम फहाद बताते हुए कत्ल के आरोपित का भांजा बताया और एक करोड़ रुपए की माँग की। पैसे न मिलने पर जान से मारने की धमकी भी दी थी। दिल्ली के न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी थाने में प्राइवेट स्कूल के मालिक ने 27 फरवरी को पुलिस को बताया था कि 25 फरवरी को उनके मोबाइल पर अनजान शख्स का फोन आया था। वह खुद का नाम फहाद बता रहा था और उनसे एक करोड़ रुपए माँग रहा था। उसने पैसे नहीं देने पर उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी।

चलती गाड़ी में बनाता था बम, कच्चा सामान हमेशा पास रखता था: उमेश पाल हत्याकांड के बाद से गुड्डू मुस्लिम फरार, घर पर चलेगा योगी सरकार का बुलडोजर

प्रयागराज में हुए उमेश पाल हत्याकांड का आरोपित गुड्डू मुस्लिम हत्या के बाद से फरार है। हत्याकांड के सीसीटीवी में वह बम फेंकता नजर आया था। हालाँकि अब ऐसा कहा जा रहा है कि गुड्डू मुस्लिम गोली नहीं बल्कि बम फेंककर ही हत्या करता था। उमेश पाल हत्याकांड से पहले भी कई हत्याओं में उसका नाम आ चुका है। शुक्रवार (3 मार्च 2023) को गुड्डू मुस्लिम के घर पर बुलडोजर चलने की भी खबर है।

बीते दो दशक से अतीक अहमद के इशारे पर काम करने वाला गुड्डू मुस्लिम बम बनाने में बेहद एक्सपर्ट है। वह चलती हुई बाइक में भी बम बनाने में माहिर है। टाइम्स ऑफ इंडिया ने पुलिस सूत्रों के हवाले से कहा है कि गुड्डू मुस्लिम बहुत जल्दी बम बना लेता है। उसे बम बनाने में 4-5 मिनट का ही समय लगता है। वह बम बनाने के लिए कच्चा माल, कीलें, बारूद, छड़ और सुतली समेत अन्य जरूरी सामान अलग-अलग पैकेट में लेकर जाता था। इससे पुलिस की पकड़ से भी बचा रहता था। जब उसे किसी पर हमला करना होता था तो हमले के कुछ पहले ही चलते हुए वह बनाता था। इसके बाद टारगेट पर फेंककर वारदात को अंजाम देता था।

प्रयागराज के क्राइम ब्रांच में लंबे समय तक काम कर चुके एक पुलिस अधिकारी का कहना है कि गुड्डू 90 के दशक की शुरुआत में बम बनाना सीख गया था। धीरे-धीरे उसने इसमें महारत हासिल कर ली। ऐसा कहा जाता है कि नेपाल के एक अंडरवर्ल्ड एक्सपर्ट से उसने बम बनाना सीखा था। इलाहाबाद में जन्मा गुड्डू मुस्लिम महज 15 साल की उम्र से लूट और जबरन वसूली जैसे अपराधों में शामिल हो गया था।

उत्तर प्रदेश की पहली स्पेशल टॉस्क फोर्स (एसटीएफ) के सदस्य रहे रिटायर्ड आईजी राजेश पांडेय का कहना है कि गुड्डू मुस्लिम का नाम सबसे पहले 7 मार्च 1997 को लखनऊ के लॉ मार्टिनियर कॉलेज के फिजिकल ट्रेनिंग इंस्ट्रक्टर फ्रेडरिक गोम्स की हत्या में सामने आया था।

उन्होंने आगे कहा है कि गुड्डू मुस्लिम फैजाबाद के एक हिस्ट्रीशीटर सत्येंद्र सिंह की गैंग का सदस्य था। सत्येंद्र को श्रीप्रकाश शुक्ला ने साल 1996-97 में AK47 की गोलियों से छलनी कर दिया था। इसके बाद श्रीप्रकाश शुक्ला को पकड़ने के लिए एसटीएफ का गठन किया गया था। इस दौरान श्रीप्रकाश के ठिकानों का पता लगाने के लिए गुड्डू मुस्लिम को भी गिरफ्तार किया गया था। वह श्रीप्रकाश का भी बेहद खास था।

एक अन्य अधिकारी का कहना है कि 90 के दशक के बीच में गुड्डू अपराध की दुनिया में अपनी पहचान बना चुका था। श्रीप्रकाश शुक्ला समेत यूपी के तमाम माफियाओं से उसके अच्छे संबंध हो गए थे। लखनऊ में रहते हुए रेलवे मोबाइल टावर लगाने के सारे ठेके उसको ही मिलते थे।

लॉ मार्टिनियर कॉलेज के फिजिकल ट्रेनिंग इंस्ट्रक्टर फ्रेडरिक गोम्स की हत्या की बात भी उसने कबूल ली थी। हालाँकि इसके बाद उसको जमानत मिल गई। जेल से छूटते ही वह बिहार भाग गया। फिर गोरखपुर के माफिया परवेज टाडा के लिए बम बनाने का काम करता था। इसके बाद वह अपराध की दुनिया में लगातार आगे बढ़ता गया।

उत्तर प्रदेश पुलिस को लंबे समय से गुड्डू की तलाश थी। वह बिहार में कई खौफनाक वारदातों को अंजाम दे रहा था। इस दौरान उसने लूट पाट की कई घटनाओं को अंजाम दिया। वह परवेज टाडा के कहने पर अपराधों को अंजाम देने वह गोरखपुर भी जाता था। 2001 में पुलिस ने उसे गोरखपुर से गिरफ्तार भी किया था। विधायक राजू पाल हत्याकांड में भी उसका नाम सामने आया था। इस मामले में साल 2019 में सीबीआई ने उसके खिलाफ चार्जशीट भी दायर की थी।

गुड्डू मुस्लिम के घर चलेगा योगी सरकार का बुलडोजर

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार माफियाओं को मिट्टी में मिलाने के अभियान में जुटी है। उमेश पाल हत्याकांड से जुड़े सभी आरोपितों के खिलाफ प्रशासन को सख्त कार्रवाई करने के निर्देश हैं। इसी कड़ी में प्रशासन आरोपितों के घरों और ठिकानों पर बुलडोजर चलाने की तैयारी में है। ऐसी खबर है कि शुक्रवार (3 मार्च 2023) को अतीक अहमद के गुर्गे गुड्डू मुस्लिम के प्रयागराज स्थित घर में भी बुलडोजर चल सकता है। इससे पहले, खालिद जफर और सफदर अली के घर पर बुलडोजर चल चुका है।

जिस सीट पर कभी नहीं हारा लेफ्ट, वहाँ एक महिला ने खिलाया कमल: जानिए कौन हैं प्रतिमा भौमिक, त्रिपुरा के CM बनने के चर्चे

त्रिपुरा में भाजपा लगातार दूसरी बार सरकार बनाने जा रही है। 60 सदस्यीय विधानसभा में पार्टी को 32 सीटें मिली है। वैसे तो इस लाल गढ़ को बीजेपी ने 2018 में ही भेद दिया था। लेकिन धनपुर वह सीट थी जो पिछली बार भगवा लहर में भी लेफ्ट के साथ रही। 2023 के विधानसभा चुनावों में लेफ्ट का यह गढ़ भी ढह गया है। बीजेपी की प्रतिमा भौमिक ने इस सीट पर कमल खिलाया है।

प्रतिमा की जीत कितनी महत्वपूर्ण है इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि नतीजों के बाद से उनके त्रिपुरा की पहली महिला मुख्यमंत्री बनने की अटकलें लगाई जा रही है। वैसे चुनावों से पहले बीजेपी ने माणिक साहा को ही सीएम चेहरे के तौर पर मैदान में उतारा था। लेकिन अब मीडिया रिर्पोटों में कहा जा रहा है कि प्रतिमा उनकी जगह ले सकती हैं।

त्रिपुरा विधानसभा चुनाव के नतीजे (साभार: eci.gov.in)

प्रतिमा भौमिक (BJP leader Pratima Bhoumik) अभी केंद्र की मोदी सरकार में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री हैं। उन्होंने CPM के गढ़ में भगवा फहराकर सभी को हैरान कर दिया है। प्रतिमा भौमिक ने जिस धनपुर सीट से सीपीएम उम्मीदवार कौशिक चंदा को हराया है, उस सीट से त्रिपुरा के गठन के बाद से कभी लेफ्ट हारा नहीं था। त्रिपुरा राज्य 1972 में अस्तित्व में आया था। उसके बाद से धनपुर का प्रतिनिधित्व कम्युनिस्ट दिग्गज समर चौधरी और माणिक सरकार करते रहे।

त्रिपुरा को राज्य का दर्जा मिलने के बाद समर चौधरी ने पहले विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की थी। वह लगातार 1993 तक इस सीट पर काबिज रहे। 1998 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में धनपुर विधानसभा सीट से माणिक सरकार चुनाव जीते और राज्य के मुख्यमंत्री बने। 2018 के भाजपा लह​र में भी माणिक सरकार यह लाल गढ़ बचाने में कामयाब रहे। उन्होंने पिछले चुनाव में प्रतिमा भौमिक को करीब 5400 वोटों से हराया था।

इस बार के विधानसभा चुनाव में जीत के बाद से 53 वर्षीय प्रतिमा भौमिक को त्रिपुरा में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार भी माना जा रहा है। कहा जा रहा है कि त्रिपुरा को इस बार प्रतिमा के रूप में एक महिला मुख्यमंत्री मिल सकती है। भौमिक के सीएम बनाए जाने की अटकलों के बारे में पूछे जाने पर एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “इससे ​इनकार नहीं किया जा सकता। अगर उन्हें सीएम बनाया जाता है, तो माणिक साहा को केंद्र सरकार में जगह दी जा सकती है।”

धनपुर में सीपीएम के कौशिक चंदा को प्रतिमा भौमिक ने हराया (साभार: eci.gov.in)

कृषक परिवार से आती हैं प्रतिमा भौमिक

प्रतिमा भौमिक धनपुर गाँव के कृषक परिवार से आती हैं। उनका गाँव भारत-बांग्लादेश सीमा के करीब है। उन्होंने अगरतला के महिला कॉलेज से जीवन विज्ञान में स्नातक की है। प्रतिमा अपने पिता की मदद करना चाहती थीं, इसलिए पढ़ाई करने के बाद वह गाँव आईं। यहाँ वह खेती और छोटे व्यवसाय में अपने पिता का हाथ बँटाती थीं। इसके अलावा गाँव में वह समाज सेवा करती थीं। वह आरएसएस में काम करने के दौरान बीजेपी से जुड़ गई थीं।

समर्थकों के लिए प्रतिमा दी

प्रतिमा भौमिक ‘प्रतिमा दी’ के नाम से भी लोकप्रिय हैं। वह पिछले लोकसभा चुनावों में पश्चिम त्रिपुरा लोकसभा क्षेत्र से निर्वाचित हुई थीं। इससे पहले वह भाजपा की त्रिपुरा इकाई की महासचिव भी रह चुकी हैं। वह केंद्रीय मंत्री बनने वाली त्रिपुरा की पहली महिला हैं। इससे पहले सिर्फ दो बार केंद्रीय मंत्रिमंडल में त्रिपुरा का प्रतिनिधित्व हुआ है। 1967 और 1968 में राज्यसभा के लिए मनोनीत जादवपुर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ त्रिगुण सेन केंद्रीय शिक्षा मंत्री थे। बाद में, असम की बराक घाटी से कॉन्ग्रेस के संतोष मोहन देब, 1989 और 1991 में त्रिपुरा से दो बार चुने गए और 1996 तक केंद्रीय इस्पात राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रहे।

जिस हिंसा को ‘झुठला’ रहा तमिलनाडु, उसकी रोंगटे खड़ी करने वाली कहानी बता रहे घर लौटे मजदूर: बिहार विधानसभा में भी हंगामा

तमिलनाडु में बिहारी मजदूरों पर हो रहे हमलों का मामला बढ़ता जा रहा है। यह मामला बिहार विधानसभा में गुँजा और की नेताओं ने इस मुद्दे को उठाकर बिहार के नीतीश कुमार की सरकार की मुश्किल बढ़ा दी है। हालाँकि, तमिलनाडु के डीजीपी ने इस घटना को झूठा बताया था, लेकिन वहाँ से लौटने वाले मजदूर वहाँ के वास्तविक हालात को बता रहे हैं।

बता दें कि तमिलनाडु से बिहार लौट रहे कुछ मजदूरों ने बताया था कि तमिलनाडु में बिहारी मजदूरों की हत्याएँ हुई हैं और शवों को नवादा, लखीसराय, जमुई भेजा गया है। लोग जैसे-तैसे तमिलनाडु से बिहार आ रहे हैं। मगर टिकट मिलने में बहुत दिक्कत है। तमिलनाडु में रहने वाले लोगों के परिजन इन घटनाओं को लेकर भयभीत और चिंतित हैं। वे अपने परिजनों की सकुशल वापसी के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। श्रवण नाम के एक मजदूर ने बताया कि माहौल खराब है

वहीं, तमिलनाडु की सरकार ने इस घटना से इनकार किया है, लेकिन तमिलनाडु से बिहारियों का पलायन जारी है। वे डर-सहमे ट्रेनों में दुबक कर भागे आ रहे हैं। उनका कहना है कि ट्रेनों में भी बिहारियों की पिटाई हो रही है। धनबाद-एलेप्पी एक्सप्रेस से बुधवार (1 मार्च 2023) को हिंदी भाषियों का एक जत्था राँची लौटा।

राँची लौटे एक व्यक्ति ने बताया कि वहाँ पिछले 20 दिन से माहौल खराब है। वहाँ के स्थानीय लोग पकड़-पकड़कर लोगों से पूछ रहे हैं कि वे कहाँ से हैं। अगर वे हिंदीभाषी राज्य से बताते हैं तो उन्हें तमिल में गालियाँ दी जाती हैं और मारपीट की जाती है। तमिलनाडु में रहने वाले बिहारी लोगों का कहना है कि वे बाहर निकलने से कतरा रहे हैं।

तमिलनाडु की सरकार भले ही इन घटनाओं को नकारे, लेकिन हाल के कुछ दिनों में हुई हत्याएँ वहाँ की स्टालिन सरकार पर सवाल उठा रहे हैं। सिकंदरा थाना क्षेत्र में दो युवकों की मौत तथा दो के घायल होने की खबर है। वहीं, 21 फरवरी 2023 को त्रिपुर में धधौर निवासी कामेश्वर यादव के पुत्र पवन यादव की हत्या नारियल काटने वाले धारदार हथियार से कर दी गई थी।

कामेश्वर यादव को बचाने की चेष्टा कर रहे भाई नीरज के सिर पर भी धारदार हथियार से प्रहार किया गया था। उसके ममेरे भाई भुल्लो निवासी बलिराज की भी पिटाई करके गंभीर रूप से घायल कर दिया गया था। सिकंदरा रविदास टोला के युवक की भी संदिग्ध मौत हो गई थी। कहा जा रहा है कि युवक का शव 26 फरवरी 2023 को फंदे से झूलता हुआ मिला था।

बिहार विधानसभा में हंगामा

तमिलनाडु में हिंदीभाषी मजदूरों पर हमले के भाजपा ने नीतीश कुमार की सरकार को घेरा है। बिहार विधानसभा में बजट सत्र के पाँचवें दिन यानी शुक्रवार (3 मार्च 2023) को भी जमकर हंगामा हुआ। भाजपा के सदस्यों ने अन्य मुद्दों सहित तमिलनाडु में बिहारियों पर हो रहे हमले को उठाया और नीतीश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

इससे पहले गुरुवार (2 मार्च 2023) को सदन में हंगामा करते हुए भाजपा के सभी सदस्य वेल में आ गए। इस दौरान वे नारेबाजी करते रहे। विधानसभा अध्यक्ष अवध बिहारी चौधरी ने विपक्षी सदस्यों को शांत करने की कोशिश की और उन्हें अपनी जगह पर जाकर बात रखने का अनुरोध किया। बाद में भाजपा के सदस्य सदन से बाहर चले गए।

भाजपा नेता संजय जायसवाल ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से माँग की कि वे तमिलनाडु में हिंसा के दौरान बिहार के कितने लोग मारे गए हैं, उसकी जानकारी सार्वजनिक करें। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में बिहारी श्रमिकों की दुर्दशा से वे आहत हैं।

स्टालिन के साथ भोज में शामिल होने पर तेजस्वी ट्रोल

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने कहा कि तमिलनाडु में अनगिनत बिहारियों की हत्याएँ हो रही हैं और उस दौरान बिहार के उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव तमिलनाडु जाकर वहाँ के सीएम एमके स्टालिन के साथ गलबहियाँ कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव वहाँ बिहारियों की हत्या पर नहीं बोलते हैं।

भाजपा विधायक उमाकांत सिंह ने ट्वीट कर कहा कि तमिलनाडु में 12 बिहारी मजदूरों की हत्या और 50 से अधिक मजदूर घायल हो चुके है! तमिलनाडु में बिहारियों पर हो रहे हमले को लेकर भाजपा ने आज सदन से वॉकआउट किया और श्रमिक भाइयों की सुरक्षा सुनिश्चित तथा दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की माँग की है। उधर, उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के 70वें जन्मदिन समारोह में शामिल होकर भोज खा रहे हैं।

सोशल मीडिया पर भी लोगों ने तेजस्वी यादव को ट्रोल किया। एक यूजर ने लिखा कि तमिलनाडु में हिंदी बोलने पर बिहार के लोगों के साथ अत्याचार हुआ, जिसमें से 12 की दुखद मृत्यु हो गई। उसके बाद तेजस्वी यादव बेशर्मी से स्टालिन के साथ मिलकर जन्मदिन की पार्टी करते रहे।

खुशबू चौधरी नाम के यूजर ने लिखा कि तमिलनाडु में बिहार के मजदूरों पर हमले हो रहे हैं। इस घटनाक्रम के दौरान उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव बुधवार (1 मार्च 2023) को तमिलनाडु के CM स्टालिन के जन्मदिन समारोह में शामिल होने चेन्नई गए। इस घटना पर चाचा-भतीजा चुप हैं।

अपडेट: दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में तमिलनाडु में हिंदी भाषिक श्रमिकों की हत्या, अंगुलियाँ काटने, फाँसी पर लटकाने जैसे दावे किए गए थे। हमने स्पष्ट रूप से दैनिक भास्कर को क्रेडिट देते हुए ये दावे प्रकाशित किए थे। लेकिन राष्ट्रव्यापी विवाद के बाद दैनिक भास्कर ने अपनी रिपोर्ट अपडेट करते हुए वे दावे हटा लिए हैं। चूँकि भास्कर अपनी पूर्व की रिपोर्ट में किए गए दावों से पीछे हट गया है, इसलिए हमने भी अपनी रिपोर्ट में आवश्यक बदलाव किए हैं।

‘जिन्होंने मोदी को वोट दिया, उन्हें अस्पताल में जगह मत दो’: कॉमेडियन ने कोविड पीड़ितों के लिए उगला जहर, लताड़ लगाने वालों को इंस्टा पर किया ट्रोल

कॉमेडी के नाम पर ओछापन दिखाने की रिवायत अब पुरानी हो गई है। 3 फरवरी को डेनियल फर्नांडिस ने ‘Alive and Vaccinated’ टाइटल से वीडियो अपने यूट्यूब चैनल पर डाली। इस 1 घंटे 39 मिनट की वीडियो में डेनियल अपनी कट्टरता दिखाते दिखे और इसमें उन्होंने लोगों के मरने की कामना की। साथ ही हिंदू विरोधी विचारों को भी व्यक्त किया।

डेनियल वीडियो में उन कोविड मरीजों का मजाक उड़ा रहे थे जिन्होंने नरेंद्र मोदी को वोट किया। अपनी वीडियो में उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को अस्पताल में जगह ही नहीं मिलनी चाहिए जिन्होंने नरेंद्र मोदी को वोट दिया। उन्होंने कहा कि उनका दोस्त भी यही सोचता है। अपने बेनाम दोस्त का जिक्र करते हुए वह बोले कि ये आइडिया उनके दोस्त ने उन्हें दिया है कि जिन लोगों ने भी कभी पीएम को वोट दिया उन्हें अस्पतालों में जगह नहीं मिलनी चाहिए।

वीडियो वायरल होने के बाद हर जगह से डेनियल को उनकी घटिया सोट के लिए लताड़ मिली। हालाँकि तब उन्होंने ग्लानि महसूस करने की बजाय या माफी माँगने की बजाय अपना गुस्सा व्यक्त किया और लोगों का मजाक उड़ाने लगे।

मामला इंस्टा पर लाते हुए उन्होंने उन लोगों को ट्रोल करवाया जिन्होंने उनकी वीडियो पर सवाल खड़े किए। एक मोनिका वर्मा नाम की लड़की ने कहा था कि स्टैंड कॉमेरी के नाम पर मोदी के प्रति नफरत दिखाना आम हो गया है।

डेनियल ने इसी कमेंट को पोस्ट करके कुछ इमोजी लगाई जिसके बाद उनके फॉलोवर्स उस लड़की का मजाक उड़ाने लगे।

‘prinaik24’ आईडी से पूछा गया कि आखिर ऐसी बुद्धि वाले लोग कैसे बुद्धिजीवी या उदारवादी घोषित हो सकते हैं वो भी तब जब वो महामारी में लोगों की मौत की कामना करते है। उन्होंने उन दर्शकों को भी शर्म करने को कहा जो ऐसे मजाकों पर हँसते और तालियाँ बजाते हैं।

यहाँ भी डेनियल ने गलती मानने की बजाय पोस्ट पर कमेंट करते हुए कहा- “दर्शकों तुम्हें शर्म आना चाहिए।”

एक इंस्टा यूजर ने डेनियल की वीडियो देख कहा कि ये सब सिर्फ व्यूज और पब्लिसिटी के लिए किया जाता है ताकि बिल भरे जा सकें। इस कमेंट का भी डेनियल मजाक उड़ाते दिखे। और रोने वाले इमोजी लगाते हुए कहा- “मेरे बहुत सारे बिल हैं।”

बता दें कि कोविड-19 के पीड़ितों का मजाक उड़ाने वाले डेनियल अक्सर मौका पाते ही हिंदू धर्म का मखौल उड़ाते हैं। लेकिन जब बात दूसरे मजहब के उल्लेख की आती है तो वहाँ बीप का इस्तेमाल करते हैं शायद उन्हें पता है कि उनका हश्र क्या हो सकता है।

उनके एक मजाक में दूसरे मजहब के शख्स की बात थी। लेकिन उन्होंने उस हर शब्द पर बीप लगाया जिसपर विवाद हो सकता था। जोक सुनाते हुए उन्होंने कहा, “जीसस, बुद्धा और….. बार में गए।  बार वाले ने उन्हें देखा और पूछा कि मैं आप दोनों के लिए क्या ला सकता हूँ?” इस पूरी लाइन में डेनियल ने कोई ऐसा शब्द इस्तेमाल नहीं किया कि मजहबी लोग आहत हों। जहाँ उन्हें इस्लाम से जुड़े शब्द प्रयोग करने थे वहाँ-वहाँ उन्होंने बीप का यूज किया और अपने मुँह पर इमोजी भी लगाया ताकि किसी को पता न चले कि उन्होंने क्या बोला है। लेकिन ये सतर्कता डेनियल ने कभी हिंदू धर्म के लिए नहीं बरती और खुलेआम हिंदू धर्म का मखौल उड़ाया।

कैम्ब्रिज में राहुल गाँधी ने खोल दिया पूरा ‘टूलकिट’, कोर्ट से लेकर प्रेस तक फैलाया प्रोपेगेंडा: बोले अुनराग ठाकुर- उनके दिमाग में है पेगासस

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी इस समय सात दिनी ब्रिटेन के दौरे पर हैं। विदेश धरती पर भी वे उस टूलकिट का अनुसरण कर रहे हैं जो भारत और मोदी सरकार को बदनाम करने की नीयत से तैयार की गई है। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में अपने संबोधन के दौरान कॉन्ग्रेस नेता ने पेगासस, कोर्ट, प्रेस से लेकर संसद तक पर प्रोपेगेंडा को आगे बढ़ाने का काम किया।

उन्होंने संबोधन के दौरान बड़ी संख्या में नेताओं के फोन में पेगासस होने का दावा किया। कहा कि उनके फोन में भी पेगासस था। कथित तौर पर इंटेलीजेंस अधिकारियों ने उन्हें फोन का सँभलकर इस्तेमाल करने की सलाह दी थी, क्योंकि फोन की रिकॉर्डिंग की जा रही थी। राहुल गाँधी ने भारत में लोकतंत्र पर हमले होने की बात भी कही। कहा कि मीडिया, न्यायपालिका और लोकतंत्र पर प्रहार हो रहा है। अल्पसंख्यकों और जनजातीय लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।

गौरतलब है जुलाई 2021 में आई एक ग्लोबल रिपोर्ट में भारत सहित कई देशों में मोबाइल को पेगासस स्पाईवेयर द्वारा निशाना बनाए जाने का दावा किया गया था। विपक्षी दलों ने केंद्र की मोदी सरकार पर जासूसी कराए जाने का आरोप लगाते हुए इस इजरायली स्पाईवेयर को लेकर खूब हंगामा मचाया ​था। इजरायली कंपनी ने इसके गलत इस्तेमाल से इनकार किया था। केंद्र सरकार ने भी कई मौके पर नेताओं के फोन टैप किए जाने की बात को नकारा था। सुप्रीम कोर्ट के पैनल ने भी जिन फोनों की जाँच की थी उनमें से केवन 5 में स्पाईवेयर मिले थे। इनके भी पेगासस होने के सबूत नहीं मिले थे। बावजूद इसके कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए झूठ बोलने से राहुल गाँधी ने गुरेज नहीं किया।

केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा है कि राहुल गाँधी को मेघालय, त्रिपुरा और नागालैंड विधानसभा चुनावों के नतीजों का अंदाजा पहले से था। इसलिए वे विदेशी धरती पर जाकर रोने-धोने का काम रहे हैं। पेगासस मामले पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पेगासस उनके फोन में नहीं दिमाग में है। राहुल गाँधी की क्या मजबूरी थी कि उन्होंने अपना फोन जमा नहीं करवाया। भ्रष्टाचार के मामले में बेल पर चल रहे राहुल गाँधी के फोन में ऐसा क्या था कि उन्हें छिपाने की जरूरत पड़ी।

ठाकुर ने राहुल गाँधी पर विदेशी धरती पर विदेशी दोस्तों के जरिए देश को बदनाम करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आज दुनिया भर में पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत का सम्मान बढ़ा है। दुनिया भर के बड़े-बड़े नेता इस बात को स्वीकार कर रहे हैं। राहुल गाँधी किसी और की नहीं कम से कम इटली के पीएम और उनके नेताओं की सुन लेते। राहुल गाँधी दुनिया के नेताओं द्वारा भारतीय प्रधानमंत्री की प्रसन्नता स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं।

बता दें कि गुरुवार (2 मार्च, 2023) को प्रधानमंत्री मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी से मुलाकात की थी। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जियोर्जिया मेलोनी ने कहा था, “प्रधानमंत्री मोदी दुनिया के सबसे चहेते नेता हैं। ये साबित हो चुका है कि वो कितने बड़े लीडर हैं। इसके लिए उन्हें बधाई।”

वहीं भाजपा नेता शहजाद पुनावाला ने राहुल गाँधी को सुप्रीम कोर्ट का फैसला याद दिलाया है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा है कि एक व्यक्ति (प्रधानमंत्री) के लिए उनकी (राहुल गाँधी) नफरत बार-बार देश के लिए नफरत में बदल जाती है। मामले पर सुप्रीम कोर्ट फैसला सुना चुकी है, लेकिन वो फिर भी झूठ फैला रहे हैं। जिनकी दादी ने आपातकाल लगाया वे लोकतंत्र का उपदेश दे रहे हैं।

जिस DFRL को अमेरिकी सरकार देती है पैसा, वह 40 हजार ट्विटर अकाउंट करवाना चाहता था सेंसर: कपिल मिश्रा से लेकर वाराणसी एयरपोर्ट तक का नाम

अटलांटिक काउंसिल का डिजिटल फॉरेंसिक रिसर्च लैब (DFRL) 40 हजार ट्विटर अकाउंट सेंसर करवाना चाहता था। इस लैब को अमेरिकी सरकार से फंड मिलता है। स्वतंत्र पत्रकार और लेखक मैट टैबी (Matt Taibbi) ने अपने ट्विटर फाइल्स के नए संस्करण में इसका खुलासा किया है। इन अकाउंट्स को हिंदू राष्ट्रवाद और विशेष तौर पर बीजेपी से जुड़ा बताते हुए DFRL ने कार्रवाई को कहा था।

DFRL ने इन अकाउंट्स को बैन या शैडो बैन करने के लिए ट्विटर को ईमेल भेजा था। इससे DFRL की बीजेपी और राष्ट्रवादियों के प्रति घृणा का पता चलता है। टैबी ने दावा किया है कि वर्ष 2021 में डीएफआरएल के मैनेजिंग एडिटर एंडी गारविन ने 40 हजार भारतीय ट्विटर हैंडल्स की लिस्ट जारी कर उन पर भाजपा के वर्कर या पेड कर्मचारी होने और हिंदू राष्ट्र के समर्थक होने का आरोप लगाते हुए बैन या शैडो बैन (पहुँच कम करना) करने की माँग की थी।

टैबी के अनुसार लिस्ट में कुछ ऐसे अमेरिकियों के भी नाम थे, जिनमें से कई का भारत से कोई संबंध नहीं था और भारतीय राजनीति के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं थी। हालाँकि ट्विटर ने उस वक्त इन अकाउंट्स पर कोई कार्रवाई नहीं की थी। ट्विटर उस वक्त के ट्रस्ट एंड सेफ्टी प्रमुख योएल रोथ ने यह कहते हुए ट्विटर अकाउंट्स पर कार्रवाई करने से इनकार कर दिया कि अकाउंट वास्तविक लोगों के हैं।

40 हजार की लंबी लिस्ट में से ऑपइंडिया को 66 ऐसे भारतीयों के अकाउंट की जानकारी मिली है, जिस पर अमेरिकी वित्त पोषित संस्था द्वारा कार्रवाई की माँग की गई थी। इनमें अशोक गोयल, बेबी कुमारी बीजेपी, कपिल मिश्रा, किशोर अजवानी, नवीन कुमार जिंदल, पीयूष गोयल ऑफिस, तजिंदर पाल सिंह बग्गा जैसे भाजपा कार्यकर्ता और राष्ट्रवादियों के नाम शामिल हैं।

दिलचस्प बात यह है कि डीएफआर लैब वाराणसी हवाई अड्डे (@AAIVNSAIRPORT), उत्तर प्रदेश सरकार के एमएसएमई विभाग (@upmsme) और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के कार्यालय के आधिकारिक ट्विटर हैंडल को भी सेंसर करने की माँग कर रहा था। बता दें अमेरिकी विदेश विभाग की इकाई के रूप में सूचीबद्ध DFR Lab को अमेरिकी सरकार और ग्लोबल एंगेजमेंट सेंटर (GEC) द्वारा वित्त पोषित किया जाता है। GEC को पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल के अंतिम वर्षों में बनाया गया था।

नींद से जगाया, गाली दी-कपड़े फाड़े, घसीटकर ले गए: गलवान के बलिदानी के पिता को बेल, कहा- बिहार पुलिस ने जानवरों सा व्यवहार किया

बिहार के वैशाली में बलिदानी सैनिक जयकिशोर सिंह के पिता राज कपूर सिंह जेल से रिहा हो गए हैं। गुरुवार (02 मार्च, 2023) की शाम उन्हें बेल मिल गई। जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने पुलिस पर गाली-गलौज और मारपीट करने जैसे गंभीर आरोप लगाए। उधर बिहार के पूर्वी चंपारण के रक्सौल में सेना के जवान के साथ मारपीट मामले में दारोगा और सिपाही को निलंबित किया गया है।

हाजीपुर व्ययवहार न्यायलय ने गलवान में बलिदान हुए जय किशोर सिंह के पिता राज कपूर सिंह को 10-10 हजार के 2 मुचलकों पर जमानत दी। जमानत मिलने के बाद राज कपूर सिंह ने बताया कि बिहार पुलिस ने उनके साथ जानवरों जैसा व्यवहार किया। उन्होंने बताया कि शनिवार (28 फरवरी, 2023) की रात वे अपने बलिदानी बेटे के स्मारक के पास सो रहे थे, तभी पुलिस पहुँची। उन्हें थाने चलने के लिए नींद से जगाया। गाली-गलौज और दुर्व्यवहार किया। अपराधी की तरह घसीट पुलिस की गाड़ी तक ले जाया गया। इस दौरान उन्होंने कुर्ता पहनने की कोशिश की तो उसे फाड़ दिया गया। सिंह का आरोप है कि थाने में भी उनके साथ मारपीट की गई।

सिंह के साथ हुए दुर्व्यवहार को लेकर इसके पहले 1 मार्च को बिहार विधानसभा में भी जमकर हंगामा हुआ था। भाजपा विधायकों ने बलिदानी के पिता की गिरफ्तारी पर सवाल उठाए थे। उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने बलिदानी के पिता को ही दोषी ठहराने की कोशिश की थी। बिहार पुलिस के डीजीपी राजविंदर सिंह भट्टी ने मामले की जाँच सीआईडी को सौंपी थी। मामला बढ़ने के बाद कई अधिकारियों ने स्मारक स्थल का मुआयना किया था।

बता दें कि बलिदानी जय किशोर सिंह के परिवार और हरिनाथ राम के बीच स्मारक को लेकर विवाद है। हरिनाथ राम ने बलिदानी परिवार पर सरकारी जमीन हड़पने का आरोप लगाया है। साथ ही मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए एससी/एसटी एक्ट के तहत भी केस दर्ज कराया है। थाना प्रभारी विश्वनाथ राम पर हरिनाथ राम के पक्ष में एकतरफा कार्रवाई का आरोप है।

उधर पूर्वी चंपारण के रक्सौल में सेना के जवान राधा मोहन गिरि साथ हुए मारपीट मामले में कार्रवाई की गई है। रक्सौल के एएसपी की जाँच रिपोर्ट के आधार पर सेना के जवान के साथ मारपीट करने वाले सब इंस्पेक्टर जितेंद्र कुमार और एक सिपाही को सस्पेंड कर दिया गया है। बता दें कि पिछले दिनों रक्सौल मुख्य सड़क पर सेना के एक जवान के साथ पुलिस की बदसलूकी का वीडियो वायरल हुआ था। वीडियो में पुलिसकर्मी सेना के जवान राधा मोहन को गाली देते, पिटाई करते और घसीटते हुए दिखे थे।