बागेश्वर धाम के महंत पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को लेकर सोशल मीडिया पर न्यूज पेपर की कटिंग और एक पोस्टर तेजी से वायरल हो रहा है। इसके साथ ही दावा किया जा रहा है कि बागेश्वर धाम सरकार कॉन्ग्रेस के समर्थन में पैदल यात्रा करेंगे। पोस्टर में मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ तथा कॉन्ग्रेस विधायक की भी फोटो लगी है। हालाँकि इस पोस्टर का बागेश्वर धाम और कॉन्ग्रेस विधायक ने खंडन किया है।
दरअसल, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता कमलनाथ ने बीते महीने बागेश्वर धाम जाकर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से मुलाकात की थी। इस मुलाकात को लेकर ही कहा जा रहा है कि बागेश्वर धाम सरकार ने कमलनाथ को कॉन्ग्रेस के समर्थन में पैदल यात्रा के लिए आश्वस्त किया है। अब वह 121 किमी की पैदल यात्रा करने वाले हैं।
विनीत चौबे नामक ट्विटर यूजर ने न्यूज पेपर की कटिंग ट्वीट करते हुए कहा था, “मध्यप्रदेश में कॉन्ग्रेस के समर्थन में बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री करेंगे 121 किलोमीटर की पैदल यात्रा।”
मध्यप्रदेश में कांग्रेस के समर्थन में बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री करेंगे 121 किलोमीटर की पैदल यात्रा pic.twitter.com/DnfFKbwG4b
इसी तरह एक वायरल पोस्टर में बागेश्वर धाम सरकार तथा विदिशा से कॉन्ग्रेस विधायक शशांक भार्गव और कमलनाथ की फोटो के साथ अखबार की कटिंग लगाई गई थी। इस पोस्टर में लिखा हुआ है, “संतो का मिला आशीर्वाद, लौट रहे हैं कमलनाथ”
सोशल मीडिया पर वायरल पोस्टर
यही नहीं, टाइम्स नाउ नवभारत ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा था, “बागेश्वर बाबा धीरेंद्र शास्त्री ने बढ़ा दी कॉन्ग्रेस और बीजेपी बेचैनी, करने जा रहे हैं 121 किलोमीटर की यात्रा।”
हालाँकि अब बागेश्वर धाम तथा कॉन्ग्रेस विधायक शशांक भार्गव ने ऐसी किसी भी खबर का खंडन किया है। बागेश्वर धाम की ओर से फेसबुक पोस्ट के जरिए कहा गया है, “यह खबर पूर्णतः गलत और भ्रामक है। पूज्य गुरुदेव बागेश्वर धाम सरकार ना किसी राजनीतिक पार्टी के पक्ष में हैं और ना रहेंगे। गुरुदेव भगवान की सिर्फ एक ही पार्टी है “हनुमान जी की पार्टी” जिसका झंडा है “भगवा ध्वज। ये खबर बागेश्वर धाम को बदनाम करने की साजिश है। पूज्य गुरुदेव भगवान का सिर्फ एक ही मूल मंत्र है “जो राम का नहीं वो किसी काम का नहीं” रामनाम का महिमा पूरे विश्व तक पहुँचे यही पूज्य सरकार की अभिलाषा है।”
वहीं, विदिशा से कॉन्ग्रेस विधायक शशांक भार्गव ने भी फेसबुक में पोस्ट करते हुए इसका खंडन किया है। उन्होंने कहा है, “बागेश्वर धाम सरकार ने कॉन्ग्रेस का समर्थन किया ये भ्रामक खबर किसी न्यूज पेपर में प्रकाशित की गयी थी। किसी अज्ञात व्यक्ति के द्वारा उस खबर के साथ मेरा फोटो लगाकर उसे सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचारित किया है। पूज्य महाराज जी किसी भी राजनितिक दल का समर्थन नही करते। परमपूज्य गुरुदेव की एक ही अभिलाषा है श्रीराम नाम की महिमा पूरे विश्व तक पहुँचे। वे पूर्ण रूप से सनातन धर्म के प्रचार प्रसार एवं धर्म के प्रति जागरूकता के कार्यो के लिए प्रयासरत हैं। मैं ऐसी किसी भी भ्रामक खबर का पूर्ण रूप से खंडन करता हूँ।”
माफिया मुख्तार अंसारी के खिलाफ हो रही कार्रवाई के क्रम में अब उसके दोनों बेटों के घर पर योगी सरकार का बुलडोजर चला है। जानकारी के मुताबिक अब्बास अंसारी और उमर अंसारी के दो मंजिला मकान को डीएम के आदेश पर मिट्टी में मिला दिया गया। ये मकान बिन नक्शा पास कराए बनवाया गया था। कार्रवाई शाम 4 बजे भारी पुलिस फोर्स की मौजूदगी में हुई।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ये मकान मऊ के थाना दक्षिण टोला क्षेत्र के जहांगीराबाद के मुख्य मार्ग के साइड ही बनाया गया था। बुलडोजर कार्रवाई पर नगर मजिस्ट्रेट नीतीश कुमार ने बताया दोनों बेटों के नाम से दो मंजिला मकान था। इसमें नीचे बेसमेंट भी था। कथिततौर पर पूरे मकान को बिना नक्शा पास करवाए बनाया गया था।
प्रशासन ने इसे अवैध मानते हुए बुलडोजर से ध्वस्त करवा दिया। कार्रवाई के दौरान वहाँ नगर मजिस्ट्रेट नीतीश कुमार सिंह, उप-जिलाधिकारी, तहसीलदार, नगरपालिका के अधिकारी और तीन थाने के इंस्पेक्टर मौजूद रहे।
बता दें कि अब्बास अंसारी, मऊ से विधायक है। मनी लॉन्ड्रिंग केस में उसे 3 माह की जेल हो रखी है। इस बीच उसकी बीवी निकहत उससे लगातार मिलती थीं। वह चित्रकूट जेल में नियमों को ताक पर रख अपने विधायक पति अब्बास अंसारी से मिलने जाती थीं। जब पुलिस ने उन्हें रिमांड में लेकर पूछताछ की तो उसमें कई खुलासे हुए।
निकहत के खुलासे के आधार पर पुलिस ने सपा नेता फराज खान को गिरफ्तार किया। फराज, निकहत का सबसे बड़ा सहयोगी था। निकहत को घर दिलवाने से लेकर जेल अधिकारियों से साठ-गाँठ करने में उसकी अहम भूमिका रही है।
वहीं, एसपी वृंदा शुक्ला ने कहा है कि निकहत अंसारी अपने परिजनों और सहयोगियों के साथ 18 दिसंबर, 2022 को चित्रकूट आई थी। इसके बाद उसने अब्बास अंसारी से मिलने के लिए कई जगह संपर्क बनाने की कोशिश की। लेकिन, दिसंबर में संपर्क नहीं बन पाए। हालाँकि, जनवरी की शुरुआत में ही उसके जेल अधिकारियों से अच्छे संबंध हो गए।
एसपी वृंदा शुक्ला ने आगे कहा है कि जनवरी माह में जेल अधिकारियों से निकहत के संपर्क इतने अच्छे हो गए थे कि वह अब्बास से मिलने आए दिन जेल पहुँच जाती थी। जनवरी में वह अब्बास से 25 दिन, वहीं फरवरी में 9 दिन मिलने गई थी। 10 फरवरी को गिरफ्तार होने से पहले निकहत जनवरी में 9 दिन तथा फरवरी में महज 1 दिन ही वह अब्बास से मिलने नहीं पहुँची।
दिल्ली के शराब घोटाला मामले में मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी के बाद से आम आदमी पार्टी लगातार हँगामा कर रही है। यूँ तो राजनीति में आने के बाद से अब तक AAP का चेहरा कई बार बेनकाब हो चुका है। हालाँकि अब सिसोदिया मामले में सहानुभूति बटोरने के लिए आम आदमी पार्टी नेता छोटे-छोटे बच्चों का शोषण कर रहे हैं।
दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की शिक्षा टीम की प्रमुख सदस्य रहीं, AAP विधायक आतिशी मार्लेना ने शुक्रवार को ट्विटर पर कुछ तस्वीरें शेयर की हैं। इन तस्वीरों में बच्चे हाथ से लिखे हुए कार्ड लिए मनीष सिसोदिया से जल्द वापस आने के लिए कहते हुए दिखाई दे रहे हैं।
भाजपा वालों: तुम कितने भी झूठे इलज़ाम लगा लो, पर जो दिल्ली के बच्चों का @msisodia के लिए प्यार है, उसे तुम हिला नहीं सकते हो pic.twitter.com/a7eXShIVdV
इस ट्वीट के साथ आतिशी मार्लेना ने लिखा, “भाजपा वालों: तुम कितने भी झूठे इल्जाम लगा लो, पर जो दिल्ली के बच्चों का मनीष सिसोदिया के लिए जो प्यार है, उसे तुम हिला नहीं सकते।”
आतिशी मार्लेना के अलावा आम आदमी पार्टी के कई अन्य कार्यकर्ता जनता से सहानुभूति हासिल करने और अधिकारियों पर अनावश्यक दबाव डालने के लिए इसी तरह की हरकतों में लगे हुए हैं। खुद को अल्पसंख्यक आयोग का सदस्य बताने वाले राजेन्द्र ठाकुर ने छोटे बच्चों की फोटो शेयर करते हुए कहा, “तुम एक मनीष सिसोदिया को रोकोगे तो दिल्ली के स्कूलों से 18 लाख मनीष सिसोदिया निकलेंगे। एड़ी-चोटी का जोर लगा लो, चाहे जितने तोता-मैना उड़ा लो शिक्षा क्रांति तो नहीं रुकने वाली।”
तुम एक मनीष सिसोदिया को रोकोगे तो दिल्ली के स्कूलों से 18 लाख मनीष सिसोदिया निकलेंगे
खुद को दिल्ली सरकार के एजुकेशन टास्क फोर्स का सदस्य बताने वाले शैलेश ने ट्वीट कर कहा है, “समाज के लोगों ने आज दिल्ली में बहुत से स्कूलों के बाहर I Love Manish Sisodia डेस्क लगाई है। जिस पर दिल्ली के बच्चे इस बुरे समय में अपने शिक्षामंत्री के साथ खड़े है। और लेटर के माध्यम से अपना प्यार और सम्मान दिखा रहे हैं।”
समाज के लोगों ने आज दिल्ली में बहुत से स्कूलों के बाहर I Love Manish Sisodia डेस्क लगाई है।
मासूम बच्चों की भावनात्मक अपील का फायदा उठाते हुए AAP नेता सरिता सिंह ने एक वीडियो अपलोड किया। इसमें कई स्कूली बच्चे कुर्सियों पर कागज के टुकड़े लिए नजर आ रहे हैं। इन कागजों पर कुछ लिखा हुआ है, जो स्पष्ट दिखाई नहीं दे रहा। हालाँकि इन बच्चों के पीछे एक बड़ा बैनर लगा हुआ है। इस बैनर पर लिखा है, “आई लव मनीष सिसोदिया।” दिलस्चप बात यह है कि वीडियो के बैकग्राउंड में एक महिला इन बच्चों को कहती दिख रही है “कृपया हमारी भावनाएँ मनीष सर तक पहुँचाई जाएँ।” वीडियो से स्पष्ट है कि इन बच्चों को सच्चाई का पता नहीं है। ये मासूमियत के साथ वही दोहरा रहे हैं जो उन्हें कहने के लिए कहा जा रहा है।
इस पूरे मामले पर एनसीपीसीआर ने एक्शन लिया है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने राजनीतिक एजेंडे के लिए बच्चों का इस्तेमाल करने और ट्विटर पर ‘नाबालिग की तस्वीर’ पोस्ट करने के मामले में आप नेता आतिशी के खिलाफ जाँच और कार्रवाई करने के लिए दिल्ली के मुख्य सचिव और पुलिस आयुक्त को पत्र लिखा है।
The National Commission for Protection of Child Rights writes to the Delhi Chief Secretary & Commissioner of Police to probe & take action against AAP leader Atishi for using children & for posting “picture of minor” on Twitter for alleged political agenda.
राजनीतिक फायदे के लिए बच्चों का उपयोग करती रही है आम आदमी पार्टी…
गौरतलब है कि ऐसा पहली बार नहीं है जब आम आदमी पार्टी ने राजनीतिक लाभ के लिए इस तरह के नाटक किए हों। इससे पहले भी अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेंकने के लिए AAP ने बच्चों का शोषण किया है। साल 2019 के लोकसभा चुनाव में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बच्चों के नाम पर वोट माँगे थे। यही नहीं, केजरीवाल ने राजनीति का स्तर गिराते हुए माता-पिता से अपने बच्चों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में से किसी एक को चुनने के लिए कहा था।
इसी तरह दिल्ली के राजेंद्र नगर विधानसभा उपचुनाव के दौरान आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार दुर्गेश पाठक के प्रचार में नाबालिगों का इस्तेमाल हुआ था। इसको लेकर जून 2022 में, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने FIR दर्ज करने के लिए दिल्ली पुलिस को पत्र लिखा था।
आंदोलनजीवियों ने भी किया है बच्चों का दुरुपयोग
आंदोलनजीवियों के शाहीन बाग आंदोलन से लेकर तथाकथित किसान आंदोलन तक अपनी फायदे और राजनीतिक छवि चमकाने के लिए बच्चों का इस्तेमाल किया गया है। ‘किसान’ आंदोलन के समय ऐसे कई वीडियो सामने आए थे जिनमें छोटे बच्चों को बतौर आंदोलनकारी दिखाने की कोशिश की गई थी। इसी तरह नागरिक संशोधन कानून के विरोध को लेकर भी शाहीन बाग में बैठे आंदोलनजीवी 4 महीने के शिशु मोहम्मद जहाँ को लगभग हर दिन आंदोलन वाली जगह ले जाते थे।
राहुल और प्रियंका भी पीछे नहीं
2019 में हुए विधानसभा चुनावों से पहले प्रियंका गाँधी का एक वीडियो सामने आया था। इस वीडियो में प्रियंका गाँधी के कहने पर कुछ बच्चे “चौकीदार चोर है” का नारा लगाते हुए दिखाई दिए थे। वीडियो देखकर ऐसा लग रहा था जैसे प्रियंका छोटे बच्चों का मनोरंजन कर रहीं हैं और उन्हें देश को गौरवान्वित करने वाले पद में बैठे व्यक्ति की अस्मिता का कोई ध्यान ही नहीं है।
यही नहीं राहुल गाँधी भी बच्चों का उपयोग करने के मामले में कहीं पीछे नहीं हैं। राहुल ने साल 2020 में पुरानी दिल्ली में आयोजित अपनी चुनावी रैली के दौरान एक 10 वर्षीय बच्चे का उल्लेख करते हुए यह बताने की कोशिश की थी कि मोदी सरकार के चलते देश का माहौल खराब हो गया है। इसी तरह भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भी उन्होंने एक 7-8 की उम्र के दिखने वाले बच्चे को ठंड में बिना कपड़ों के पैदल चलाते हुए राजनीतिक तमाशा बनाने की कोशिश की थी।
बॉलीवुड अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी की बीवी आलिया सिद्दीकी उर्फ अंजना किशोर पांडे ने वीडियो शेयर कर बच्चों और उन्हें घर में ना घुसने देने का आरोप लगाया है। आलिया ने ये भी इल्जाम लगाया है कि नवाज ने उन्हें सड़क पर छोड़ दिया। इसे लेकर उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट की है। वीडियो में वह अपने बच्चों के साथ रोते हुए नजर आ रही हैं।
आलिया ने इंस्टाग्राम पर 2 वीडियो शेयर करते हुए लंबा पोस्ट लिखा। वीडियो में आलिया कह रही हैं कि नवाज ने दोनों बच्चों सहित उन्हें मुंबई के बंगले में घुसने नहीं दिया। आलिया को बच्चों समेत आधी रात को उनके हाल पर छोड़ दिया गया। वीडियो में आलिया कह रही हैं कि उनके पास सिर्फ 81 रुपए हैं। वह इस हरकत के लिए नवाजुद्दीन सिद्दीकी को कभी भी माफ नहीं करेंगी।
आलिया के वीडियो में उनकी बेटी भी रोती हुई नजर आ रही हैं। पोस्ट किए गए दूसरे वीडियो में सभी एक कमरे में सोते नजर आ रहे हैं। आलिया ने अपने पोस्ट में लिखा कि वह 40 दिनों से नवाज के घर में रह रही थीं, वर्सोवा पुलिस स्टेशन ने एफआईआर के सिलसिले में उन्हें बुलाया। जब आलिया वापस लौटीं तो नवाजुद्दीन ने कई गार्ड्स लगा रखे थे जिन्होंने उन्हें घर में वापस लौटने ही नहीं दिया। आलिया का कहना है कि अपने पिता की ये हरकतें देखकर बेटी बहुत रो रही है।
आलिया ने जानकारी दी कि आधी रात को बेघर होने के बाद उन्हें एक रिश्तेदार के घर पर पनाह मिली। बता दें दोनों मियाँ-बीवी के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। एक दूसरे के खिलाफ आरोप-प्रत्यारोप लगाए जा रहे हैं। हाल ही में आलिया ने शौहर नवाजुद्दीन पर रेप का भी आरोप लगाया था। आलिया वीडियो में रो-रोकर अपना हाल बयाँ कर रही थीं। उन्होंने नवाजुद्दीन सिद्दीकी पर आरोप लगाया है कि वह उनसे बच्चों को छीनना चाहते हैं।
एक्टर के प्रवक्ता ने आरोपों को नकारा
बता दें कि एक ओर जहाँ आलिया ने अपनी वीडियो में रोती बेटी और जहाँ वो रहीं उसकी वीडियो जारी की है। वहीं नवाजुद्दीन सिद्दीकी के प्रवक्ता ने आलिया के आरोपों को नकारा है। उनका कहना है कि ये सारे आरोप झूठे हैं। वो घर नवाज की माँ का है। नवाज फैसला नहीं कर सकता वहाँ कौन आएगा कौन नहीं। घर में सिर्फ आलिया की एंट्री बैन है, बच्चों को घुसने से नहीं रोका गया। प्रवक्ता के मुताबिक नवाज ने आलिया को एक फ्लैट खरीद के दिया हुआ जिसे उन्होंने रेंट पर चढ़ा दिया है।
सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें खुद को पत्रकार बताने वाला एक शख्स बागेश्वर धाम सरकार पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की कथा के बीच कुछ टिप्पणी करता नजर आ रहा है। हालाँकि माइक नहीं होने की वजह से उसकी आवाज स्पष्ट नहीं है। इसके बाद बागेश्वर सरकार उसे मंच पर बुलाते हैं। वह खुद को पत्रकार बताते हुए कहता है कि दिल्ली से आया है और ‘मोजो स्टोरी’ से जुड़ा हुआ है। मोजो स्टोरी वामपंथन पत्रकार बरखा दत्त की अगुवाई में चल रहा है।
यह शख्स अपना नाम हर्षित शर्मा बताता है। वीडियो में आप देख सकते हैं कि जब पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री इस कथित पत्रकार का पर्चा निकालते हैं तो वह थोड़ी देर के लिए निरुत्तर हो जाता है। वह हाथ जोड़ने लगता है। कान पकड़कर माफी माँगता है। शुरुआत में शर्मा कहता है कि वह दिल्ली से कथा कवर करने आया है। बाद में वह बताता है कि वह छतरपुर की कथा में आई एक महिला की मृत्यु को लेकर सवाल पूछने आया है। इस बीच बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अपने चिर-परिचित अंदाज में नककटा, नालायक, ठठरी बाँधने जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते भी दिखते हैं।
आप वीडियो की शुरुआत में देख सकते हैं कि खुद को पत्रकार बताने वाला शर्मा मंच के नीचे से कुछ टिप्पणी करता है। इस पर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अपने खास अंदाज में बोलते हुए कहते हैं, “क्या मैं तुम्हारा नौकर हूँ? अर्जी लगाओ और सीताराम जपो। तुम्हें बोलने की तमीज नहीं है। तुम अपने कक्का (परिजन) को बुला लो मैं उनका भी और तुम्हारा भी बता दूँगा कि तुम लंगोट के ढीले हो। तुम कम नहीं हो। तुम प्लांटेड हो।” इसके बाद धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री उसे मंच पर बुलाते हैं।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री इसके बाद पत्रकार को मंच पर बुलाकर सवाल करते हैं कि तुम्हें बीच में बोलने के लिए किसने कहा? इस पर पत्रकार कहता है कि यह उसने अपनी इच्छा से किया। फिर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर फिर पूछते हैं कि इसके पीछे कौन है?
इसके बाद धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पत्रकार को दो कागज दिखाते हुए कहते हैं कि क्या वह बता सकता है कि इन दोनों पर क्या लिखा है? इस पर पत्रकार कहता है कि उसे नहीं पता। इस पर शास्त्री कहते हैं तुम्हें जो पूछना है इस पर वही लिखा है। फिर वह पत्रकार का परिचय पूछते हैं। इस पर वह अपना नाम हर्षित शर्मा और खुद को मोजो स्टोरी का पत्रकार बताता है।
इसके बाद धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री कहते हैं कि उन्होंने मोजो स्टोरी के बारे में कभी नहीं सुना। लेकिन जब वह दरबार में बैठे थे तब दो पर्चे पहले ही लिखकर रख लिए थे। इसके बाद वह पहले से लिखा हुआ एक कागज पत्रकार को दिखाते हुए पढ़ते हैं, “एक व्यक्ति परीक्षा लेने आएगा। बदतमीजी करेगा। नालायक है। उसको बुलाने की जरूरत नहीं। ठिकाने लगा देना है। टीम मोजो से आएगा। पर्चा नहीं देना है।”
इसके बाद शास्त्री दूसरा कागज दिखाते हुए कहते हैं तुम्हारा एक और पर्चा रखा हुआ है। इसके बाद पत्रकार सवाल पूछने की कोशिश करता है। लेकिन इससे पहले ही धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री रोकते हुए कहते हैं कि उन्हें सब पता है। आरोप लगते रहते हैं। फिर पत्रकार ने उनकी कथा में आई महिला की मृत्यु को लेकर सवाल पूछने के साथ ही कहा कि क्या लोगों का यह मानना जरूरी है कि वह सिर्फ आपके पास आकर ही ठीक होंगे या फिर डॉक्टर के पास जाना भी जरूरी है। इस पर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री दूसरा कागज दिखाते हुए पढ़ते हैं, “यहाँ परेशान व्यक्ति आ सकते हैं। चिंता न करें, दुआ, दवा और कृपा सबकी आवश्यकता है।” इस वीडियो में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के कहने पर ‘मोजो स्टोरी’ का पत्रकार बार-बार माफी माँगता दिखाई देता है।
उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थिति बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) के प्रशासन ने कैंपस में विद्यार्थियों को होली खेलने पर प्रतिबंध लगा दिया। आदेश में कहा गया कि जो भी इस आज्ञा का उल्लंघन करेगा, उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद प्रॉक्टर की आज्ञा का उल्लंघन करते हुए छात्र-छात्राओं ने जमकर होली खेली।
गुरुवार (2 मार्च 2023) को बीएचयू कैंपस में हर तरफ होली की मस्ती की मस्ती दिखी। इस दौरान छात्र-छात्राओं ने बीएचयू प्रशासन की ओर से सार्वजनिक स्थानों पर होली न खेलने के निर्देश से नाराज छात्र-छात्राओं ने अलग अंदाज में विरोध किया। मधुबन से लेकर कला संकाय तक होली की मस्ती का रंग हर किसी पर नजर आ रहा था।
दृश्य कला संकाय के पास पानी के टब में उतरकर छात्र-छात्राओं ने होली खेली। वहीं, मधुबन में छात्रों ने कपड़ा फाड़ होली खेली। किसी की शर्ट फटी तो किसी का कुर्ता। इस दौरान कैंपस में डीजे बजता रहा है और छात्र-छात्राएँ फिल्मी और भोजपुरी गानों पर थिरक रहे।
बीएचयू प्रशासन द्वारा निकाले गए आदेश को लेकर बीएचयू के ABVP अध्यक्ष अभय सिंह ने कहा, “यह अनुचित आदेश है। इतने विशाल परिसर वाला बीएचयू, देश के शीर्ष संस्थानों में से एक है। अगर छात्रों को यहाँ होली नहीं खेलने दी जाएगी तो वे कहाँ खेलेंगे?”
छात्रों ने कहा कि इस तरह के अनुचित आदेश जारी करने के बजाय विश्वविद्यालय प्रशासन को परिसर के अंदर सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए। छात्र नेताओं से सभी छात्र-छात्राओं से रंगों के त्योहार होली को धूमधाम से मनाने का आग्रह किया। इसके साथ ही उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को आगाह किया कि अगर कोई कार्रवाई की जाती है तो उसका विरोध किया जाएगा।
चीफ प्रॉक्टर अभिमन्यु सिंह के नाम से जारी इस आदेश में कहा गया कि विश्वविद्यालय परिसर में सार्वजनिक स्थल पर एकत्रित होकर होली खेलना, हुड़दंग करना, संगीत बजाना पूर्णतया प्रतिबंधित है। ऐसा करने वालों के विरूद्ध प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
हालाँकि, यूनिवर्सिटी प्रशासन का यह आदेश जारी होने के बाद सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। सोशल मीडिया पर बीएचयू प्रशासन की लोग आलोचना कर रहे हैं। सम्राट भाई नाम के यूजर ने लिखा, “रमजान के दौरान इफ्तारी की मेजबानी करने वाले बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति सुधीर जैन ने परिसर में होली पर प्रतिबंध लगा दिया है। शर्म करो कुलपति।”
Vice-Chancellor of Banaras Hindu University Sudhir Jain, who hosted Iftari during Ramzan, has banned Holi at the campus.@VCofficeBHU थोड़ी शर्म करो।। pic.twitter.com/Ghc6baODmL
बता दें कि यह वही विश्वविद्यालय है, जहाँ पिछले साल अप्रैल 2022 मे रोजा इफ्तारी का आयोजन किया गया था। इस मामले को लेकर बवाल हो गया था। इस पर BHU प्रशासन ने सफाई में कहा था कि विश्वविद्यालय में कई वर्षों से रोजा इफ्तार का आयोजन होता रहा है और विश्वविद्यालय परिवार का मुखिया होने के नाते कुलपति इसमें शामिल होते रहे हैं।
विश्वविद्यालय में रोजा इफ्तारी का आयोजन करने का विश्वविद्यालय होली के रंगों से डर रहा है और सार्वजनिक स्थानों पर इसे ना खेलने का निर्देश जारी किया। इतना ही नहीं, विश्वविद्यालय ने कहा कि जो भी इस आदेश का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई करने की भी धमकी दी है। हालाँकि, इसके विरोध में छात्र-छात्राओं ने जमकर होली खेली।
होली से पहले उत्तर प्रदेश में मस्जिद-मजारों को ढकने का काम शुरू हो गया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार शाहजहाँपुर में 67 मस्जिद-मजार को तिरपाल से ढका जा रहा है। संभल में भी आठ मस्जिदों को कवर किया जा रहा है। दूसरी ओर मुरादाबाद में होली से पहले हुई पीस मीटिंग के दौरान एक मौलाना ने पुलिस के सामने ही दंगे की धमकी दे डाली। इसका वीडियो वायरल है। इस संबंध में मामला दर्ज किए जाने की जानकारी मुरादाबाद पुलिस ने ट्वीट कर दी है।
होली के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने को लेकर राज्य में पुलिस द्वारा जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। संवेदनशील इलाकों में शांति समिति की बैठक आयोजित की जा रही है। होली के मौके पर निकाले जाने वाले अलग-अलग जुलूसों के मद्देनजर मस्जिद और मजारें ढकी जा रही हैं ताकि कोई उपद्रवी मस्जिदों में रंग डालकर माहौल खराब करने की कोशिश न करे।
उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर में लाट साहब का जुलूस निकाला जाता है। पुलिस और प्रशासन लाट साहब के जुलूस को शांतिपूर्ण तरीके से निकालने के लिए तैयारियाँ कर रही है। जुलूस के रास्ते में पड़ने वाली मस्जिदों और मजारों को पॉलिथीन से ढका जा रहा है। जुलूस के रास्ते में सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जा रहे हैं।
जुलूस निकालने के दौरान मस्जिदों को ढकने को लेकर मुस्लिम समुदाय द्वारा विरोध भी जताया जाता रहा है। रिपोर्टों की मानें तो विवाद से बचने के लिए पिछले 3 वर्षों से मस्जिदों को ढकने का प्रचलन जारी है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए समाज के प्रमुख लोगों और पुलिस की टीम के बीच जिले भर में पीस कमेटी की मीटिंग भी आयोजित की जा रही है।
लाट साहब का जुलूस क्या है?
शाहजहाँपुर में अंग्रेजों के जमाने से ही होली के दिन लाट साहब का जुलूस निकाला जाता है। शुरुआत में यह जुलूस अंग्रेजों के खिलाफ आक्रोश व विरोध प्रकट करने के लिए निकाला जाता था। आजादी से पहले इलाके के नवाब भी जुलूस का हिस्सा हुआ करते थे। अंग्रेजों के भारत से जाने के बाद भी जुलूस का सिलसिला जारी रखा गया। अब किसी एक शख्स को अंग्रेज ऑफिसर बनाकर जुलूस निकला जाता है।
मुरादाबाद में दंगे की धमकी
उधर मुरादाबाद में आयोजित पीस मीटिंग के दौरान एक मौलाना ने पुलिस के सामने ही दंगे की धमकी दे दी। मुरादाबाद में पुलिस की टीम थाने में मुस्लिम तबके के लोगों के साथ बैठक कर रही थी। इस दौरान होली पर हुड़दंगियों को काबू करने को लेकर बात की जा रही थी। सभी अपनी-अपनी बात रख रहे थे। तभी बिलारी के मौलाना सदाकत हुसैन ने दंगे की धमकी दे डाली।
सदाकत हुसैन ने कहा, “किसी को होली खेलने पर मजबूर न करें और न ही किसी तरह की कोई शरारत करें। ऐसा न हो कि बिलारी में फिर हंगामा हो जाए, पहले दो बार हो चुका है। अबकी बार हुआ तो मैं चेतावनी दे रहा हूँ दंगा होगा। फसाद होगा। प्रशासन को सतर्क रहना है। जो टीमें बनाई गई हैं उनके लिए हिदायत है कि जो भी उधर से (मुस्लिम इलाके) गुजरे उसकी मूवी बनाई जाए। शराब के नशे में हो या जो हो जिम्मेदार वो खुद होगा। उसका चालान जरूर होना चाहिए। मैं किसी कीमत पर उसको नहीं बख्शूँगा। शराब पियो, घर पर रहो, सीधे-सीधे निकलो। यदि किसी मस्जिद पर या किसी दुकान पर हमला किया या रंग डाला गया तो उनकी मूवी बनानी चाहिए, उसका चालान किया जाना चाहिए, उसे जेल भेजा जाना चाहिए। बस मैं अपनी बात को खत्म करता हूँ।”
पीस कमेटी की बैठक के दौरान एक व्यक्ति द्वारा आपत्तिजनक बयान देने के सम्बन्ध में थाना बिलारी पर अभियोग पंजीकृत किया गया है, अन्य विधिक कार्यवाही प्रचलित है । इस सम्बन्ध में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक @moradabadpolice की बाईट।#UPPolicepic.twitter.com/buDSM1Kzfe
दंगों की धमकी वाला वीडियो वायरल होने के बाद मौलाना सदाकत हुसैन ने माफी भी माँगी है। उन्होंने एक अन्य वीडियो के जरिए कहा है कि उनका मकसद किसी भी धर्म के त्योहार पर बयान देकर लोगों की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं था।
ईरान (Iran) में पिछले साल से हिजाब विरोधी प्रदर्शन चल रहे हैं। इस्लामिक देश में स्कूल जाने वाली कई लड़कियों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। उन्हें स्कूल जाने से रोकने के लिए जहर दिया जा रहा है। हाल ही में ईरान के उप स्वास्थ्य मंत्री यूनुस पनाही ने इसका खुलासा किया। मंत्री ने बताया कि ईरान के शहर कोम समेत कई जगहों पर लड़कियों के स्कूलों को बंद कराने के लिए कुछ लोगों द्वारा सैकड़ों छात्राओं को जहर दिया गया। जहर केमिकल कंपाउंड के रूप में दिया गया और अभी तक इस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। फिलहाल मामले की जाँच चल रही है।
बुधवार (1 मार्च 2023) को ईरान में स्कूली लड़कियों पर एक बार फिर घातक हमला हुआ है। राजधानी तेहरान और उत्तर-पश्चिमी शहर अर्दबील के कम से कम 10 स्कूलों को केमिकल-गैस अटैक से निशाना बनाया गया। इससे सैकड़ों छात्राओं की तबीयत बिगड़ गई। 100 से ज्यादा छात्राओं को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो और फोटोज सामने आ रहे हैं, जिसमें लड़कियों को अस्पताल में इलाज कराते हुए देखा जा सकता है।
بستری شدن دانشآموزان دختر مدرسه ۱۳ آبان تهرانسر در بیمارستان به دلیل مسمومیت.
در این ویدیو دستکم ۹ دانشآموز دیده میشوند که بر روی تخت بیمارستان به آنها اکسیژن وصل شده چون امکان نفس کشیدن ندارند.
अभिभावकों का दावा है कि स्कूली छात्राओं को हाल ही में सरकार विरोधी प्रदर्शनों में भाग लेने के लिए टारगेट किया जा रहा है। दरअसल, पिछले तीन महीनों में पूरे ईरान में स्कूली छात्राओं पर इस तरह के हमले के कई मामले सामने आए हैं। लेकिन अभी तक किसी को भी गिरफ्तार नहीं किया गया है। इस्लामिक देश के आंतरिक मंत्री अहमद वाहिदी ने बुधवार (1 मार्च 2023) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अब तक देश भर के स्कूलों में लड़कियों पर जहरीली गैस के हमले करने वाले किसी भी शख्स को गिरफ्तार नहीं किया गया है।
ویدیوهای رسیده به ایران اینترنشنال حاکی است در پی بروز مسمومیت ناشی از استشمام گاز در مدرسه دخترانه هاجر در تهرانسر، گروهی از خانوادهها و دانشآموزان با تجمع مقابل مدرسه شعار «مرگ بر حکومت بچهکش» سرمیدهند pic.twitter.com/3v7HeU4SXs
24 फरवरी 2023 को जमीलेह कादिवार (Politician Jamileh Kadivar) ने कहा कि अब तक कम से कम 400 स्कूली छात्राओं को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि वे हमलों की जाँच करेंगे। तेहरान में बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी (Ebrahim Raisi) ने अहमद वाहिदी को जितनी जल्दी हो सके इस तरह के हमलों का कारण पता लगाने का निर्देश दिया।
Heartbreaking;
For about three months, schoolgirls in different cities of Iran, especially in the city of Qom, have been facing symptoms of poisoning after inhaling a smell similar to the smell of fruit. Many of them were taken to the hospital.
न्यूयॉर्क स्थित सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स इन ईरान (CHRI) ने आरोप लगाया है कि हाल के महीनों में कोम और तेहरान जैसे बड़े शहरों में सैकड़ों छात्रों, जिनमें अधिकांश लड़कियाँ हैं, पर जहरीली गैस के हमले के बाद ईरान में एक लड़की की मौत हो गई है। वहीं, वाशिंगटन स्थित ईरान इंटरनेशनल न्यूज चैनल के अनुसार, ईरानी अधिकारियों ने इन खबरों का खंडन किया है कि 11 वर्षीय फतेमेह रेज़ाई (Fatemeh Rezaei) की मौत जहरीली गैस के हमले के बाद हुई है।
बता दें कि ईरान में नवंबर महीने से अब तक सैकड़ों लड़कियों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। उन्हें साँस की समस्या, चक्कर आना और थकान का सामना करना पड़ा है। कुछ लोग लगातार ईरान में लड़कियों का स्कूल बंद करने की माँग कर रहे हैं। इसलिए संदेह जताया जा रहा है कि लड़कियों को स्कूल जाने से डराने के लिए ये साजिशन किया जा रहा है।
नवंबर से अब तक 700 लड़कियों को जहर
बीबीसी के मुताबिक, ईरान में नवंबर 2022 से स्कूल की लड़कियों को जहर देना शुरू किया गया। नवंबर से अब तक 700 लड़कियों को जहर दिया जा चुका है। पहला हमला 30 नवंबर को सामने आया था। जब कोम में नौर टेक्निकल स्कूल के 18 छात्रों को अस्पताल ले जाया गया था। कोम तेहरान से लगभग 160 किमी दक्षिण में है। यह बेहद रूढ़िवादी और धार्मिक तौर पर कट्टर शहर माना जाता है। देश के ज्यादातर नेताओं और राष्ट्रपतियों ने कोम शहर से ही मजहबी तालीम ली है।
पिछले एक हफ्ते में बोरुजेर्ड शहर के चार स्कूलों में कम से कम 194 लड़कियों को कथित तौर पर जहर दिया गया है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान के पास पारडीस के खय्याम गर्ल्स स्कूल में मंगलवार (28 फरवरी 2023) को और 37 छात्राओं को जहर दिया गया।
गौरतलब है कि ईरान में पिछले साल सिंतबर में 22 साल की लड़की महसा अमीनी की पुलिस हिरासत में मौत होने के बाद यह विरोध प्रदर्शन भड़के थे। महसा को हिजाब ठीक से न पहनने के जुर्म में हिरासत में लिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कर्नाटक की प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेजों में हिजाब (Hijab) पहनकर वार्षिक परीक्षा देने की अनुमति देने की माँग वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (3 मार्च 2023) को कहा कि वह इस मामले पर होली के बाद सुनवाई करेगा।
शरीयत समिति की ओर से पेश वकील शादान फरासत ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले को जल्द लिस्टिंग कर सुनवाई की माँग की थी। वकील का कहना था कि छात्राओं की वार्षिक परीक्षाएँ 9 मार्च 2023 से शुरू हो रही हैं। इसके बाद भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि इस मामले को होली की छुट्टी से पहले अंतिम कार्यदिवस को नहीं लाना चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने कहा कि वह इस मामले की तत्कालिकता को समझते हैं, लेकिन वे इस मामले को होली के बाद सूचीबद्ध कर सुनवाई के लिए पीठ गठित करेंगे। बता दें कि होली 8 मार्च 2023 को है और शुक्रवार (3 मार्च 2023) को अंतिम कार्यदिवस था। इसके बाद कोर्ट की छुट्टियाँ हैं और कोर्ट 13 मार्च को फिर से खुलेगा।
CJI: We will hear on March 17. Counsel: Exams are starting in five days.. CJI: You have come to us so late… Counsel: This has been mentioned twice. CJI: March 17 Counsel: But what should we do now? CJI: I can’t answer that question..#hijab#SupremeCourtOfIndia
इसके पहले कर्नाटक हाईकोर्ट ने कर्नाटक सरकार एवं शिक्षण संस्थानों द्वारा स्कूल-कॉलेजों में यूनीफॉर्म को जरूरी बताते हुए हिजाब पर लगाई गई रोक को सही ठहराया था। कर्नाटक हाईकोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को राहत देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इसके बाद पिछले साल अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने खंडित फैसला सुनाया था।
सुप्रीम कोर्ट के खंडित फैसले के बाद कर्नाटक के स्कूलों में लड़कियों को हिजाब में परीक्षा देने की अनुमति नहीं दी गई है। यह परीक्षा 9 मार्च 2023 से शुरू होने वाली है। 15 मार्च 2022 को कर्नाटक उच्च न्यायालय ने उडुपी में गवर्नमेंट प्री-यूनिवर्सिटी गर्ल्स कॉलेज के मुस्लिम छात्राओं के कक्षा में हिजाब पहनने की अनुमति माँगने वाली याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा था कि हिजाब इस्लामिक विश्वास का अहम हिस्सा नहीं है।
कॉन्ग्रेस सांसद राहुल गाँधी ने अपने ब्रिटेन दौरे के दौरान कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में छात्रों को ‘लर्निंग टू लिस्निंग इन 21 सेंचुरी’ यानी ’21 वीं सदी में सुनना सीखने’ के विषय पर संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने पेगासस, कोर्ट, प्रेस से लेकर संसद तक पर प्रोपेगेंडा को आगे बढ़ाने का काम किया। अपने संबोधन में उन्होंने ‘भारत जोड़ो यात्रा’ पर लंबी चर्चा की। इस दौरान उन्होंने कश्मीर में हुए पुलवामा हमले को ‘कार ब्लास्ट’ कहकर जिक्र किया और पाकिस्तान या पाकिस्तान समर्थित आतंकियों पर एक शब्द नहीं बोला।
देश का लोकतंत्र खतरे में है- राहुल गाँधी
छात्रों को संबोधित करते हुए राहुल गाँधी ने कहा कि भारत में लोकतंत्र खतरे में है। उन्होंने कहा कि भारत में मीडिया और न्यायपालिका सरकार के नियंत्रण में है। अपने भाषण के दौरान अखबारों की कटिंग शेयर करते हुए राहुल गाँधी ने आरोप लगाया कि भारत में अल्पसंख्यक और जनजातीय समुदाय के लोग सुरक्षित नहीं हैं। केरल से लेकर कश्मीर तक भारत जोड़ो यात्रा करने वाले राहुल गाँधी ब्रिटेन जाकर देश में घूमने-फिरने की आजादी पर सवाल उठा रहे हैं।
राहुल का जेल वाला झूठ
अपने भाषण के दौरान राहुल गाँधी ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार के खिलाफ कुछ मुद्दों पर बात करने के लिए उन्हें कुछ नेताओं के साथ गिरफ्तार कर जेल में बंद कर दिया गया था। उन्होंने समाचार पत्रों के स्क्रीनशॉट और पार्लियामेंट के बाहर प्रदर्शन की एक तस्वीर दिखाते हुए यह दावा किया। हालाँकि न तो तस्वीर न ही स्क्रीनशॉट इस बात की पुष्टि कर रहे थे कि राहुल गाँधी को गिरफ्तार किया गया था क्योंकि इस तरह की कोई घटना घटी ही नहीं थी।
राहुल गाँधी ने जिस तस्वीर को पार्लियामेंट के बाहर प्रोटेस्ट का बताया था वह दरअसल साल 2020 के हाथरस कांड के बाद की तस्वीर है। हाथरस जाने के रास्ते पर यमुना एक्सप्रेस वे के पास राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी को रोक लिया गया था। उस वक्त इलाके में कर्फ्यू लगा हुआ था। राहुल गाँधी फिर भी हाथरस जाने की जिद कर रहे थे ऐसे में उन्हें कुछ घंटो के लिए उन्हें हिरासत में लिया गया था।
पेगासस से हो रही जासूसी- राहुल
संबोधन के दौरान राहुल गाँधी ने बड़ी संख्या में नेताओं के फोन में पेगासस होने का दावा किया। राहुल का दावा था कि उनके फोन में भी पेगासस था। कथित तौर पर इंटेलीजेंस अधिकारियों ने उन्हें फोन का सँभलकर इस्तेमाल करने की सलाह दी थी, क्योंकि फोन की रिकॉर्डिंग की जा रही थी। लेकिन सच्चाई यह है कि सुप्रीम कोर्ट के पैनल ने भी कुछ स्मार्ट फोन की जाँच के बाद पेगासस संबंधी सॉफ्टवेयर के सबूत न मिलने की बात कही थी।
दिलचस्प बात यह है कि राहुल गाँधी के आरोपों के बाद जब जाँच के लिए उनका फोन माँगा गया तो उन्होंने फोन देने से मना कर दिया। उनके अलावा दूसरे नेताओं ने भी फोन देने से इनकार कर दिया था। जाँच टीम द्वारा 29 स्मार्ट फोन चेक किए गए जिनमें से 5 में एक प्रकार का मालवेयर तो मिला लेकिन यह पेगासस है यह साबित नहीं हो सका था।
‘मेरे खिलाफ झूठे मुकदमे’
संबोधन के दौरान कई झूठ बोल चुके राहुल गाँधी ने अपने उपर दायर मुकदमों को झूठा करार दिया। राहुल ने दावा किया कि उनपर ऐसे क्रिमिनल केसे चलाए जा रहे हैं जो नहीं होने चाहिए थे।
बता दें कि देश में लगभग 5 दशकों तक राज करने वाले परिवार पर हजारों करोड़ रुपए के घोटाले के मामले चल रहे हैं। खुद राहुल गाँधी बेल पर हैं।
संवाद हुआ मुश्किल, इसलिए भारत जोड़ो यात्रा की
राहुल गाँधी देश भर में चुनावी सभाएँ करते हैं। संसद में घंटो तक उनका भाषण होता है। प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं। ट्विटर पर भी उनके करोड़ो फॉलोअर हैं ऐसे में उनका कहना कि लोगों के साथ संवाद मुश्किल हो गया है… हास्यासपद लगता है। राहुल जबरन भारत जोड़ो यात्रा और महात्मा गाँधी के दाँडी मार्च को समान दिखाने की कोशिश करते हैं। भारी सिक्योरिटी और सारी सुविधाओं से लैस लग्जरी कंटेनर में उन्होंने भारत जोड़ो यात्रा की। अब इस यात्रा के दौरान सामने आई मुश्किलों पर बात कर रहे हैं। यह भी आश्चर्य जनक है।
‘मिलिटेंट्स ने मुझे देखा लेकिन हानि नहीं पहुँचाई
अपने 1 घंटे से भी अधिक देर के संबोधन में राहुल ने कहा, “कश्मीर कई सालों से हिंसाग्रस्त है। यहाँ सुरक्षा अधिकारियों ने मुझसे कहा कि आप कश्मीर में नहीं चल सकते।” राहुल गाँधी ने पुलवामा हमले का भी जिक्र किया। संबोधन के दौरान राहुल ने अपनी एक तस्वीर की तरफ संकेत करते हुए कहा, “यह वही स्थान है जहाँ एक कार बम धमाके में 40 जवान शहीद हो गए थे।”
इसके बाद राहुल गाँधी ने मिलिटेंट्स से उनका सामना होने की कहानी भी सुनाई। उन्होंने कहा, “जब हम कश्मीर में चल रहे थे तो हजारों लोग तिरंगा लेकर आगे आए। एक व्यक्ति करीब आया उसने कुछ लड़कों की तरफ दिखा कर बताया कि वो मिलिटेंट हैं। उन आतंकियों ने मुझे घूर कर देखा लेकिन कुछ कर नहीं पाए।”
राहुल ने देश को किया बदनाम, पाकिस्तान का नाम तक नहीं लिया
गौरतलब है कि पेगासस, कोर्ट, प्रेस से लेकर संसद तक पर प्रोपेगेंडा फैलाकर अपने ही देश को बदनाम करने वाले राहुल गाँधी ने उसी कश्मीर को अशांत करने वाले पाकिस्तान का एक बार भी नाम नहीं लिया। राहुल गाँधी की इनती हिम्मत नहीं हुई कि भारत में पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद को लेकर या पाकिस्तानी आतंकियों द्वारा देश में हमलों पर ही उनकी निंदा कर सकें। राहुल अच्छी तरह से जानते हैं कि पुलवामा हमला करने वाले आतंकी नहीं बल्कि पाकिस्तानी आतंकी थे।
इस घटना को भी 2 नजरिए से देखा जा सकता है। एक तो यह कि राहुल गाँधी कश्मीर में पैदल चलते हैं। उनके साथ हजारों की संख्या में लोग पैदल चलते हैं। क्योंकि पीएम मोदी की नीतियों की बदौलत वहाँ यह संभव हो सका है। दूसरा यह कि राहुल गाँधी खुद को और अपनी यात्रा को सीआरपीएफ के जवानों को ले जा रही बस वाली यात्रा के विपरीत दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।
राहुल गाँधी ने दावा किया कि उन्हें आतंकियों के किसी हमले का सामना नहीं करना पड़ा क्योंकि वह ‘अहिंसा’ का संदेश दे रहे थे और वह वहाँ लोगों की बात सुनने आए थे। यह एक तरह का भारत विरोधी प्रचार है जिसे राहुल अंतरराष्ट्रीय मंच से कर रहे हैं।
कॉन्ग्रेस नेता सैम पित्रोदा ने राहुल गाँधी के इस संबोधन को अपने यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया है। वीडियो के 20 वें मिनट से राहुल गाँधी को कश्मीर पर बोलते सुना जा सकता है। बता दें सैम पित्रोदा के प्रयासों के बाद ही कैम्ब्रिज में राहुल गाँधी का संबोधन हुआ।