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कानपुर में हनुमान मंदिर पर कब्जे और तोड़फोड़ का आरोप, हिन्दू संगठनों की पुलिस से झड़प: साधु-संतों का प्रदर्शन, DSP सलमान ने कहा – कब्जेदारी का विवाद

बुधवार (01 मार्च, 2023) को उत्तर प्रदेश के कानपुर में हनुमान मंदिर पर कब्जे और तोड़फोड़ का विरोध कर रहे साधु-संतो व हिंदू संगठन के लोगों की पुलिस के साथ झड़प हो गई। बताया जा रहा है कि मंदिर को पुलिस ने सील कर दिया। जिसके बाद बजरंग दल कार्यकर्ताओं और हिंदू संगठन के लोगों ने प्रदर्शन किया। खबर है कि पुलिस ने कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज भी किया है। तनाव को देखते हुए कई थाना की पुलिस को मंदिर के पास तैनात किया गया है।

‘दैनिक भास्कर’ की रिपोर्ट के मुताबिक, कानपुर के जूही थाना क्षेत्र के परमपुरवा में स्थित संकटहारी बाला जी दरबार मंदिर और मंदिर की जमीन पर कब्जा कर लिया गया है। रविवार (26 फरवरी, 2023) से मंदिर परिसर में भक्तों को प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा है। मंदिर पर कब्जे के खिलाफ पुजारी और साधु-संत शिकायत लेकर डीएसपी साउथ के दफ्तर पहुँचे। इसके बाद पुलिस की टीम मौके पर पहुँची।

मौके पर पुलिस के पहुँचते ही हिंदू संगठनों और बजरंग दल के कार्यकर्ता भी मंदिर पर पहुँचे। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने मंदिर में तोड़फोड़ का आरोप लगाते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की। हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं का आरोप है कि मंदिर में तोड़फोड़ की गई है। कार्यकर्ता मंदिर को खोलने की माँग करने लगे। रिपोर्ट के मुताबिक कार्यकर्ताओं को शांत करने के लिए पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया और कार्यकर्ताओं को खदेड़ दिया गया।

ख़बरों के मुताबिक, पुलिस ने ‘बजरंग दल’ के जिला संयोजक दिलीप सिंह को हिरासत में ले लिया है। फिलहाल पुलिस ने मंदिर को सील कर दिया है। जिससे हिंदू संगठन के कार्यकर्ता और भी भड़क उठे। तनाव को देखते हुए मौके पर 10 थानों की फोर्स तैनात की गई है।

मामले पर पुलिस का पक्ष

जूही थाना पुलिस ने ऑपइंडिया से बात करते हुए इस विवाद को मंदिर विवाद नहीं बल्कि कब्जेदारी विवाद करार दिया है। डीसीपी साउथ सलमान ताज पाटिल ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान जानकारी दी कि साधु संतो द्वारा विरोध प्रदर्शन के बाद मामले की जाँच की गई। प्रकरण कब्जेदारी विवाद से जुड़ा है। सलमान ताज ने बताया कि एक व्यक्ति की जमीन पर कई किराएदार रहते हैं। मालिक किसी मामले में फरार था। इस बीच एक किराएदार के घर में कुछ लोग जबरन दाखिल हो गए। कुछ महिलाएँ ताला बंद कर के अंदर बैठ गईं।

साधु-संतों का आरोप है कि महिलाओं ने मकान मालिक के इशारे पर कब्जा किया है। दरअसल, इस जगह पर साधु-संत किराए पर रह रहे थे। उनका कहना है कि पूजा की सामग्री व अन्य चीजें नहीं दी जा रही हैं। इसे लेकर साधु-संत विरोध कर रहे थे। डीएसपी का कहना है कि महिलाओं को भी समझाने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस ने धारा 145 के तहत कार्रवाई की बात कही है। पुलिस का कहना है कि न्यायालय के निर्देश के अनुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।

‘मस्जिद में लगाओ 2 पेड़ और 21 दिन तक पढ़ो 5 टाइम की नमाज’: दोष साबित होने पर मालेगाँव कोर्ट ने सुनाई सज़ा

महाराष्ट्र की मालेगाँव कोर्ट ने सड़क दुर्घटना में दोषी पाए गए एक मुस्लिम व्यक्ति को 21 दिनों तक दिन में 5 बार नमाज़ और मस्जिद में 2 पेड़ लगाने की सजा सुनाई है। सोमवार (27 फरवरी, 2023) को ये अनोखी सजा सुनाने वाले जज का नाम तेजवंत सिंह संधू है, जबकि सजा पाने वाले व्यक्ति का नाम रऊफ खान है। मामला साल 2010 का है, जब लगभग 13 साल पहले रऊफ पर एक व्यक्ति पर हमला कर के उसे सड़क दुर्घटना में घायल करने का आरोप लगा था।

‘लाइव लॉ’ के मुताबिक, 29 अप्रैल, 2010 को मालेगाँव के रहने वाले मोहम्मद शरीफ नाम के पीड़ित ने पुलिस में रउफ खान के खिलाफ शिकायत दी थी। तब मोहम्मद शरीफ ने बताया था कि 1 दिन पहले वह बाइक से सोनपुरा गया था। यहाँ बाइक गली में लगा कर वह किसी से बात कर रहा था। तभी अचानक उसे अपनी बाइक के गिरने की आवाज आई। जब मोहम्मद शरीफ वहाँ पहुँचा तब पाया कि रिक्शा चला रहे रऊफ ने उसकी गाड़ी को ठोकर मारी थी। इसी बात पर दोनों पक्षों में बहस शुरू हो गई।

FIR के मुताबिक, इसी बहसबाजी के दौरान रऊफ ने अपने साथियों लतीफ, अजीज और अयूब को बुला कर मोहम्मद शरीफ की पिटाई कर दी। पिटाई में शरीफ का एक दाँत भी टूट गया। मारपीट में शरीफ के पेट और आँखों पर भी चोटें आईं थीं। इसी के साथ आरोपितों द्वारा पीड़ित का पर्स और मोबाइल भी छीन लिया गया था। इस मारपीट के दौरान पीड़ित को गालियाँ और धमकियाँ मिलीं। मोहम्मद शरीफ ने इस घटना की शिकायत पुलिस में की तब आरोपित पर IPC की धारा 323, 325, 504 और 506 के तहत केस दर्ज हुआ।

आरोपित रऊफ मालेगाँव के ही सोनापुरा झोपड़पट्टी में पड़ने वाले क्रान्ति नगर का रहने वाला है। लगभग 13 साल तक हुई कोर्ट की बहस और दलीलों में यह बात भी सामने आई कि रऊफ ने खुद को इस्लाम का प्रबल अनुयायी माना। हालाँकि, उसने अदालत में कहा कि समय की कमी के चलते वह 5 बार नमाज़ नहीं पढ़ पाता। अदालत ने रऊफ को IPC 325, 504 और 506 के आरोप से बरी कर दिया लेकिन IPC 323 में उसे 21 दिन तक लगातार पाँचों टाइम की नमाज़ पढ़ने और मस्जिद में 2 पेड़ लगाने का दंड सुनाया।

मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी तेजवंत सिंह संधू के फैसले में मस्जिद का जिक्र इसलिए आया क्योंकि जिस जगह उसने पीड़ित की पिटाई थी की वह सोनपुरा मस्जिद के पास थी। अदालत के फैसले में पाँचों नमाज़ बाकायदा नाम के साथ दर्ज हैं, जिन्हे फज्र, असिर, जोहर, मगरिब और ईशा के नाम से दर्ज दिया गया है।

प्रयागराज गोलीकांड में तीसरी मौत, उमेश पाल और संदीप निषाद के बाद गनर राघवेंद्र भी नहीं रहे: तय हो गई थी शादी की तारीख़, पिता भी पुलिस में थे

प्रयागराज गोलीकांड में अब उमेश पाल और उनके गनर संदीप निषाद के बाद उनके एक अन्य गनर राघवेंद्र की भी मौत हो गई है। राजधानी लखनऊ स्थित PGI अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। प्रयागराज से ‘ग्रीन कॉरिडोर’ बना कर उन्हें यहाँ लाया गया था। 5 मई को राघवेंद्र की शादी होने वाली है। बता दें कि ये घटना धूमनगंज में शुक्रवार (24 फरवरी, 2023) को हुई थी। उमेश पाल और संदीप निषाद की उसी दिन मौत हो गई थी।

राघवेंद्र को ICU में भर्ती कराया गया था, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। राघवेंद्र रायबरेली के लालगंज के रहने वाले थे, लेकिन उन्हें प्रयागराज में तैनाती मिली थी। उमेश पाल की जान बचाने के लिए वो हमलावरों और अतीक अहमद के गुर्गों के बीच आ गए थे। गुंडों ने उन्हें गोली मारी थी और साथ ही उन पर बम भी फेंके थे। बम से उनका कंधा उड़ गया था। प्रयागराज के SRN (स्वरूप रानी नेहरू) अस्पताल में उनके शरीर से गोलियाँ निकाल दी गई थीं।

हालाँकि, उनके शरीर से अत्यधिक खून बह चुका था। बम लगने के कारण उनके फेफड़े भी जख्मी हो गए थे। उनके शरीर में गंभीर संक्रमण फ़ैल रहा था। उनकी मौत शाम के पौने 6 बजे के करीब हुई। राघवेंद्र के पिता भी पुलिस में रहे हैं। राघवेंद्र की सगाई हो चुकी थी, ऐसे में घर वाले भी शादी की तैयारियों में जुटे हुए थे। यूपी पुलिस में भी इस घटना के बाद शोक की लहर है। इस तरह प्रयागराज गोलीकांड में मृतकों की संख्या अब 3 हो गई है।

उमेश पाल की हत्या के मामले में पुलिस ने अतीक अहमद के भाई, बेटों और बीवी समेत दर्जन भर गुर्गो के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। फिलहाल हत्या के इस मामले के ज्यादातर आरोपित फरार हैं। आरोपितों की तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। इधर प्रशासन ने खालिद जफर के घर को गिरा दिया। कहा जा रहा है कि हत्याकांड के बाद माफिया अतीक अहमद की बीवी शाइस्ता परवीन इसी घर में रुकी हुई थी।

बायो में ‘हिंदू’, फोटो BJP नेताओं के साथ: यूट्यूबर एल्विश यादव से क्यों इतना किलसा पत्रकार, पुलिस ने भी बोला- गमला चोरी से कोई लेना-देना नहीं

गुरुग्राम की गमलाचोरी घटना ने ट्विटर पर एक नई बहस छेड़ दी है। ये बहस यूट्यूबर एल्विश यादव को लेकर है। जब ट्रोलर्स ने गमलाचोरी मामले में उनका नाम लेना शुरू किया तब कई लोग एक साथ ये साबित करने में जुटे हुए हैं कि पूरी चोरी के पीछे एल्विश ही जिम्मेदार हैं। हालाँकि इस बीच यूट्यूबर लगातार अपनी सफाई देते रहे हैं। लेकिन मीडिया ने उनका नाम उछालना बंद नहीं किया। अब इस मामले पर पुलिस का बयान आ चुका है। उन्होंने साफ कह दिया है एल्विश का घटना से कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन उसके बाद भी एक पत्रकार यूट्यूबर से किलस गया। अब इन दोनों के बीच ट्विटर पर जुबानी जंग जारी है।

दरअसल, एल्विश यादव 9.21 मिलियन सब्सक्राइबर्स के साथ एक सफल यूट्यूबर हैं। उनके ट्विटर पर भी 2 लाख से ज्यादा फैन फॉलोइंग है। बायो देखें तो उस पर सिर्फ हिंदू लिखा है। अब इतना बड़ा इन्फ्लुएंसर होने के बावजूद उनका नाम गमलाचोरी घटना में आना वाकई हैरान करने वाली बात है। हालाँकि इस पूरे मामले में पुलिस द्वारा क्लीनचिट मिलने के बाद मामला शांत हो जाना चाहिए था। लेकिन उत्कर्ष सिंह नामक पत्रकार लगातार एल्विश पर आरोप मढ़े जा रहे हैं।

इसको लेकर उत्कर्ष सिंह ने मंगलवार (28 फरवरी, 2023) को एक ट्वीट किया था। इस ट्वीट में उन्होंने आरोप लगाया था, “गुरुग्राम में सड़क किनारे गमले चुराने वाले वीडियो में दिख रही Kia कार्निवाल कार यूट्यूबर एल्विश यादव की है।”

हालाँकि इसके बाद एल्विश ने ट्वीट कर कहा था, “वह मेरी कार नहीं है। मैं सभी से अनुरोध करता हूँ कि मेरे बारे में कोई भी गलत जानकारी न फैलाएँ। मैं उन लोगों पर मुकदमा कर रहा हूंँ जो मेरे बारे में गलत जानकारी फैला रहे हैं।”

बेशक इस ट्वीट में एल्विश ने पत्रकार उत्कर्ष सिंह का नाम नहीं लिया था। लेकिन इस ट्वीट के बाद उत्कर्ष सिंह को पत्रकार होने के नाते मामले की जाँच करनी चाहिए थी। लेकिन वह इस बात को उछालते रहे कि कार एल्विश की ही है। यही नहीं, उन्होंने अपने चैनल पर वीडियो डालकर आरोप लगाया कि यह कार एल्विश ही है।

इन आरोपों के बीच एल्विश यादव ने एक और ट्वीट किया। इसमें उन्होंने लिखा, “मुझे एक बार कार में देखा गया था। इसका मतलब यह नहीं है कि मैं इसका मालिक हूँ। कुछ गंदे दिमाग वाले लोग जिन्हें फर्जी बातें करने की आदत है, एक बार फिर एक नई कहानी के साथ फालतू बातें कर रहे हैं। मुझे भूल जाइए, वे देश या प्रधानमंत्री को भी नहीं छोड़ते। आप उनसे अधिक की उम्मीद नहीं कर सकते।”

आरोपों को झुठलाए जाने के बाद अब उत्कर्ष सिंह एल्विश यादव का इंटरव्यू लेने की माँग पर अड़ गए हैं। उनका कहना है कि एल्विश लाइव इंटरव्यू देकर और उन्हें झूठा साबित कर दे।

हालाँकि इसके बाद एल्विश ने ट्विटर पर मैसेज कर उत्कर्ष को इंटरव्यू लेने के लिए बुलाया है। इसका स्क्रीनशॉट भी एल्विश ने ट्वीट किया है। हालाँकि सब इंटरव्यू देने को लेकर उत्कर्ष का कहना है कि एल्विश उनसे डर कर भाग रहे हैं। वहीं एल्विश का कहना है कि वह किसी दूसरे के लिए दिनभर टाइम नहीं निकाल सकते। उन्होंने जब उत्कर्ष सिंह को बुलाया था तब वह फिक्स टाइम पर नहीं आए थे।

वहीं इस पूरे मामले को लेकर ट्विटर यूजर्स का कहना है कि हिंदू हितों की बात करने के कारण एल्विश को टारगेट किया जा रहा है। रैंडम इंडियन नामक ट्विटर यूजर ने इसको लेकर कहा है, “वामपंथियों ने मिलकर एल्विश यादव को ट्रोल करना शुरू कर दिया है। इसका कारण यह है कि वह एक हिंदू है जो युवाओं को गर्व से धर्म को बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित करता है। एल्विश ने अपनी कार पर “हिंदू” लिखा है। एल्विश ने अपनी रैली में किसी की कार का इस्तेमाल किया था। यदि उस कार से कुछ गलत किया जाता है तो इसके लिए एल्विश कैसे जिम्मेदार है?”

युक्ति राठी नामक यूजर ने कहा है, “जिस तरह से राष्ट्रवादियों को परेशान किया जा रहा है वह खतरनाक है। इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा। एक प्रसिद्ध व्यक्ति के बारे में झूठी जानकारी फैलाना इतना आसान क्यों है, खासकर मीडिया आउटलेट्स के माध्यम से? कोई सबूत नहीं, कोई वैध जानकारी नहीं, ये लोग एल्विश यादव को किस आधार पर टारगेट कर रहे हैं?”

थप्पड़, घूँसे, गालियाँ और जेल… सेना के जवान से बिहार पुलिस की बदसलूकी के खिलाफ 8 दिन से आंदोलन, स्थानीय लोगों के साथ धरने पर YouTuber

बिहार के पूर्वी चंपारण में सेना के जवान राधामोहन गिरी की रिहाई की माँग को लेकर लोगों का धरना प्रदर्शन जारी है। रक्सौल में पुलिसकर्मियों ने सेना के जवान को गालियाँ दी, सरेआम उनकी पिटाई की और जेल में डाल दिया। मामले का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि 8 दिन से प्रदर्शन किया जा रहा है लेकिन अभी तक दोषी पुलिस वालों पर कार्रवाई नहीं हुई है और न ही फौज के जवान को रिहा किया गया है।

रक्सौल में नसीम अख्तर नाम के शख्स के एफआईआर के बाद गिरफ्तार सेना के जवान की रिहाई की माँग को लेकर मोतिहारी में प्रदर्शन जारी है। बिहार के चर्चित यूट्यूब पत्रकार मनीष कश्यप, स्थानीय समाजिक कार्यकर्ता अनिकेत आनंद और सोशल वर्कर पूर्णिमा भारती जवान के रिहाई की माँग कर रहे हैं। पूर्व सैनिक संघ के बैनर तले चार दिनों से जारी धरने में बैठे प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जवान के रिहाई तक धरना जारी रहेगा।

सामाजिक कार्यकर्ता अनिकेत आनंद का कहना है कि गिरफ्तार जवान राधामोहन की गिरफ्तारी ईगो की वजह से हुई है। अनिकेत ने कहा कि इस तरह की हरकत से लोगों का पुलिस पर से भरोसा कम होगा। लोग पुलिस के पास न्याय माँगने से कतराएँगे। उन्होंने वायरल वीडियो के हवाले से कहा कि पुलिस वालों ने बिना उनकी बात सुने सेना के जवान के साथ हाथापाई शुरू कर दी। मामले में पुलिस ने जरूरी नियमों का पालन नहीं किया।

मामले को लेकर प्रदर्शनकारी राजनीतिक दलों पर भी निशाना साध रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यही हरकत यदि किसी नेता के बेटे के साथ हुआ होता तो रातों रात सरकार बदल जाती। लोगों का कहना है कि मामले को लेकर सियासी नेताओं को भी आवाज उठानी चाहिए थी। सचतक न्यूज के नाम से यूट्यूब चैनल चलाने वाले पत्रकार मनीष कश्यप भी प्रदर्शन को समर्थन दे रहे हैं।

मनीष कश्यप ने कहा है कि उनकी लड़ाई देश के जवान के लिए है। उन्होंने भी जवान की रिहाई तक आवाज उठाते रहने की बात कही। मनीष कश्यप ने कहा कि समाज को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने की आवश्यकता है। जिस दिन लोग जागरूक हो गए उस दिन समाज के लोगों को न्याय की लड़ाई लड़ने के लिए किसी नेता की जरूरत नहीं होगी।

क्या है पूरा मामला ?

सेना के जवान राधामोहन बेलाघाटी के निवासी हैं। वो अपनी पत्नी काजल को परीक्षा दिलाने के लिए रक्सौल जा रहे थे। बताया जा रहा है कि इस दौरान लक्ष्मीपुर में कार के लुकिंग ग्लास से एक व्यक्ति को चोट लग गई। चोट लगने के बाद फौज के जवान और स्थानीय लोगों में कहासुनी होने लगी। स्थानीय इंस्पेक्टर जितेंद्र कुमार भी घटनास्थल पर पहुँचे और सेना के जवान को थाने लेकर जाने का आदेश दिया।

राधामोहन गिरी पहले परीक्षा केंद्र पहुँचे। उन्होंने अपने परिवार के लोगों को परीक्षा केंद्र पर उतारा और गाड़ी पार्क करने लगे। इतने में सब-इंस्पेक्टर ने उनसे बदसलूकी करनी शुरू कर दी। नसीम अख्तर नाम के शख्स की FIR को आधार बना कर बिहार पुलिस जवान के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। बिहार के चर्चित यूट्यूब पत्रकार मनीष कश्यप ने FIR की कॉपी भी साझा की है, जिसे नसीम अख्तर ने दर्ज कराया है। नसीम का दावा है कि चोट लगने से उसके चाचा बेहोश हो गए और सेना के जवान ने ही उससे गाली-गलौच की। उधर वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि पुलिसकर्मी सेना के जवान को गालियाँ दे रहे हैं और उनपर थप्पड़ और घूँसे बरसा रहे हैं।

3000 मंदिर बनवाएगी आंध्र प्रदेश सरकार, गरीबों के इलाकों में होगा निर्माण: हिंदू आस्था बचाने के लिए लिया फैसला, तिरुपति देवस्थानम से सबको ₹10 लाख मिलेंगे

हिंदुओं की आस्था की रक्षा को लेकर आंध्र प्रदेश सरकार ने राज्य में 3000 से अधिक मंदिर बनवाने का फैसला किया है। सरकार का कहना है कि राज्य के प्रत्येक गाँव में मंदिर हो इस लक्ष्य से काम कर रही है। उपमुख्यमंत्री कोट्टु सत्यनारायण ने कहा है कि राज्य में पहले 1330 मंदिरों का निर्माण होना था। अब इसमें 1465 मंदिर और जोड़े जाएँगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मंगलवार (28 फरवरी 2023) को मीडिया से बातचीत करते हुए उप-मुख्यमंत्री कोट्टु सत्यनारायण ने कहा है कि सरकार ने हिंदू आस्था का बड़े पैमाने पर प्रचार करने के उद्देश्य से गरीब वर्ग के लोगों के इलाकों में मंदिर बनाने का फैसला किया है। उन्होंने कहा है कि राज्य में पहले 1330 मंदिरों का निर्माण होना था। अब इसमें 1465 मंदिर और जोड़े गए हैं। यही नहीं, विधायकों के अनुरोध पर 200 अन्य मंदिर भी जोड़े जाएँगे।

सत्यनारायण ने यह भी कहा है कि इन हिंदू मंदिरों के निर्माण के लिए तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम का श्री वाणी ट्रस्ट हर मंदिर को 10 लाख रुपए देगा। बंदोबस्ती विभाग द्वारा बनाए जा रहे 978 मंदिरों का निर्माण तेजी से हो रहा है। वहीं 25 मंदिरों के निर्माण का काम एक सहायक इंजीनियर को दिया गया है। इसके अलावा कुछ अन्य सहायक इंजीनियरों को भी नियुक्त किया गया है। वहीं कुछ अन्य मंदिरों का निर्माण एनजीओ द्वारा किया जा रहा है।

उन्होंने यह भी कहा है कि कुछ मंदिरों के पुनर्निर्माण और मंदिरों में अनुष्ठानों के लिए आवंटित किए गए 270 करोड़ रुपए में से 238 करोड़ रुपए जारी हो जा चुके हैं। इसी तरह, इस वित्तीय वर्ष में प्रति मंदिर 5000 रुपए की दर से अनुष्ठानों (धूप दीप नैवेद्यम) के लिए निर्धारित किए 28 करोड़ रुपए में से 15 करोड़ रुपए मंदिरों को दिए जा चुके हैं। धूप दीप नैवेद्यम योजना के अंतर्गत साल 2019 तक केवल 1561 मंदिर ही रजिस्टर्ड हुए थे। वहीं अब यह संख्या बढ़कर 5000 हो गई है।

बता दें कि आंध्र प्रदेश में कुल 26 जिले हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य सभी जिलों के प्रत्येक गाँव में मंदिर बनवाने का है। इसके लिए तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम के श्री वाणी ट्रस्ट द्वारा जो 10 लाख रुपए की राशि दी जानी है उसमें से 8 लाख रुपए मंदिर निर्माण में खर्च होगा। वहीं, शेष बची 2 लाख की राशि का उपयोग मूर्तियों के निर्माण या खरीदने में किया जाएगा।

जिस यूसुफ को ‘चाचा’ कहती थी 2 साल की मासूम, उसी ने रेप करके मौत के घाट उतारा: प्राइवेट पार्ट पर मिले चोट के निशान, पेट भी काटा

गुजरात के सूरत से दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ पड़ोस में रहने वाले यूसुफ हाजत उर्फ इस्माइल ने दो साल की बच्ची से दुष्कर्म करने के बाद उसका गला दबाकर हत्या कर दी। पुलिस ने मंगलवार (28 फरवरी 2023) को आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। 23 वर्षीय इस्माइल बच्ची के पिता का दोस्त था और अक्सर उसके साथ खेलने के लिए उनके पर घर आया करता था। बच्ची उसे चाचा कहकर बुलाती थी। एक अन्य मीडिया रिपोर्ट में बच्ची की उम्र 21 महीने बताई जा रही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना सूरत जिले के सचिन क्षेत्र की है। वारदात को अंजाम देने वाला आरोपित बच्ची के पड़ोस में रहता था। बच्ची के घर वाले उस पर बहुत भरोसा करते थे। रविवार (26 फरवरी 2023) रात करीब 8 बजे आरोपित बच्ची को चॉकलेट और चिप्स दिलाने के बहाने अपने साथ बाहर लेकर गया था। लेकिन जब वह देर रात तक नहीं लौटा, तो बच्ची के परिजनों ने उसकी तलाश शुरू कर दी। उन्होंने पुलिस को भी इसके बारे में सूचित किया।

वहीं, आरोपित इस्माइल ने परिजन को बताया कि वह बच्ची को घर के बाहर छोड़ चला गया था। इसके बाद उसने परिवार वालों के साथ मिलकर बच्ची को तलाशने का नाटक किया। पुलिस भी कई टीमें गठित कर मासूम की तलाश में जुट गई थी। बाद में कपलेटा गाँव के तालाब के पास एक सुनसान जगह पर बच्ची का शव मिला।

पुलिस ने इलाके के आसपास के सारे सीसीटीवी फुटेज भी खँगाले। एक फुटेज में इस्माइल भागता हुआ नजर आया था। इसके बाद पुलिस ने तुरंत आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपित पर आईपीसी और पॉक्सो एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत बलात्कार और हत्या का मामला दर्ज किया है। इसके अलावा उस पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अधिनियम के तहत भी केस दर्ज किया गया है।

पुलिस के अनुसार, लड़की के पेट पर काटने के निशान हैं। उसके प्राइवेट पार्ट में भी चोट के निशान पाए गए हैं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही उसकी मौत का सही कारण पता चलेगा। पुलिस ने आरोपित का मोबाइल फोन बरामद कर लिया है और इसे जाँच के लिए फोरेंसिक लैब भेजा जाएगा। पुलिस ने बताया कि जिस वक्त आरोपित को पकड़ा गया वह नशे में नहीं था।

मिट्टी में मिला अतीक अहमद की बीवी को पनाह देने वाले का 2 मंजिला मकान, प्रयागराज में गरजा ‘बाबा का बुलडोजर’: हत्याकांड के बाद यहीं जुटे थे गुर्गे

उमेश पाल हत्याकांड के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में कहा था कि वह माफियाओं को मिट्टी में मिला देंगे। राज्य में यही होता दिख भी रहा है। दरअसल, प्रशासन ने खालिद जफर के घर को गिरा दिया। कहा जा रहा है कि हत्याकांड के बाद माफिया अतीक अहमद की बीवी शाइस्ता परवीन इसी घर में रुकी हुई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, योगी सरकार के निर्देश के बाद प्रयागराज विकास प्राधिकरण (पीडीए) उमेश पाल हत्याकांड के सभी आरोपितों के घरों और ठिकानों पर बुलडोजर चलाकर ‘मिट्टी में मिलाने’ की तैयारी कर चुकी है। इसी कड़ी में खालिद जफर का दो मंजिला मकान जमीदोंज किया गया है।

प्रयागराज के धूमनगंज थाना इलाके के कालिंदीपुरम कसारी मसारी में बने इस घर से पहले सामान बाहर निकाला गया। बाद में बुलडोजर चला। इस दौरान पुलिस ने दो विदेशी बंदूकें और एक तलवार भी बरामद की है। हालाँकि, बंदूकें लाइसेंसी है या नहीं अब तक यह साफ नहीं हो पाया है। कहा जा रहा है कि उमेश पाल की हत्या के बाद अतीक अहमद के गुर्गे इसी घर में शाइस्ता परवीन से मिलने आए थे। इसके बाद सभी आरोपित फरार हो गए थे।

वहीं, शाइस्ता परवीन के वकील सौलत का कहना है कि इस घर में शाइस्ता किराए से रह रही थी। यह सामने आया है कि सितंबर 2020 में माफिया अतीक अहमद के अवैध घर में बुलडोजर चलने के बाद से अतीक की पत्नी शाइस्ता इसी घर में रह रही थी। एक ओर जहाँ अतीक अहमद के करीबी खालिद जफर का घर गिरा दिया गया है। वहीं प्रयागराज विकास प्राधिकरण (PDA) अन्य आरोपितों के घरों और ठिकानों की लिस्ट खँगालने में जुटा हुआ है। ऐसे में, उमेश पाल हत्याकांड के सभी आरोपितों के घरों में बुलडोजर चलना तय माना जा रहा है।

उमेश पाल की हत्या के मामले में पुलिस ने अतीक अहमद के भाई, बेटों और बीवी समेत दर्जन भर गुर्गो के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। फिलहाल हत्या के इस मामले के ज्यादातर आरोपित फरार हैं। आरोपितों की तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है।

इस हत्याकांड को लेकर हुए एक खुलासे के अनुसार गुजरात की साबरमती जेल में बंद अतीक अहमद व्हाट्सएप से शूटरों के सम्पर्क में था। उमेश पाल पर हमला करने वाले कुल शूटरों की तादाद 13 बताई जा रही है। जब 6 शूटर उमेश और उनके गनर पर हमला कर रहे थे, तब 7 अन्य आसपास खड़े हो कर बैकअप में तैयार थे। STF ने साबिर नाम के एक शूटर की पहचान भी कर ली है। इस हमले की साजिश प्रयागराज यूनिवर्सिटी के मुस्लिम हॉस्टल में रची गई थी। दावा यह भी किया जा रहा है कि अशरफ भी बरेली जेल से व्हट्सएप चलाता था। शूटरों को डायरेक्शन देने में उसका भी नाम सामने आ रहा है।

यह खुलासा साजिश में शामिल सदाकत खान से हुई पूछताछ के बाद हुआ। सदाकत खान इलाहबाद हाईकोर्ट में वकालत करता है और अवैध तौर पर मुस्लिम हॉस्टल के कमरा नंबर 36 में रहता था। सदाकत खान को समाजवादी पार्टी का करीबी बताया जा रहा है। उसकी एक तस्वीर अखिलेश यादव के साथ हाथ मिलाते हुए वायरल हो रही है। बताया जा रहा है कि सदाकत नेपाल भागने की फिराक में था लेकिन उसे STF ने रास्ते में ही दबोच लिया।

बता दें कि शुक्रवार 24 फरवरी को बहुजन समाज पार्टी के विधायक रहे राजू पाल हत्याकांड के प्रमुख गवाह उमेश पाल की हत्या कर दी गई थी। गोली और बम से किए गए हमले में उमेश पाल के गनर संदीप निषाद की भी मौत हो गई जबकि दूसरे गनर राघवेंद्र सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। राजू पाल की हत्या का आरोप गैंगस्टर अतीक अहमद और उसके भाई पर है। जिस समय हत्या को अंजाम दिया गया, उस समय उमेश पाल कोर्ट से गवाही देकर घर लौटे थे।

70 सेकेंड में 70 डंडे… मदरसा शिक्षक फहाद भगत नूरी ने नाबालिग छात्र को बेरहमी से पीटा, केस दर्ज होते हुए फरार: वीडियो आया सामने

महाराष्ट्र के ठाणे जिले से मदरसे में एक नाबालिग छात्र को बेरहमी से पीटने का मामला सामने आया है। पिटाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में मदरसा टीचर 14 वर्षीय छात्र को काफी देर तक डंडे से निमर्मता से पीटते हुए दिखाई दे रहा है। निजामपुरा थाने में विभिन्न धाराओं में शिक्षक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। बताया जा रहा है कि शिक्षक फहाद भगत नूरी (32) गुजरात के भरूच का रहने वाला है। वह केस दर्ज होने के बाद फरार हो गया है। पुलिस की टीम उसकी तलाश में जुट गई है।

निजामपुरा पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी ने मंगलवार (28 फरवरी, 2023) को इसकी जानकारी दी। अधिकारी ने कहा कि शिकायत के अनुसार, 14 वर्षीय बच्चा रोज की तरह उस सुबह भी मदरसा गया था, लेकिन ठीक से पाठ याद न करने के कारण 32 वर्षीय शिक्षक ने उसे बेरहमी से पीटा और घायल कर दिया। उन्होंने कहा कि अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, नाबालिग छात्र को 70 सेकेंड में 70 बार डंडे मारने की बात कही जा रही है। यह घटना पिछले साल 24 नवंबर की है। लेकिन मदरसा टीचर द्वारा छात्र को पीटने का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसको लेकर ‘दिनी मदरसा’ के ट्रस्टी ने प्राथमिकी दर्ज करवाई है। एफआईआर के अनुसार, मदरसा भिवंडी इलाके में दारुल उलूम हसनैन करीमन से जुड़ा हुआ है।

गौरतलब है कि पिछले साल दिसंबर में उत्तराखंड के हरिद्वार जिले से एक मदरसे में 9 साल के बच्चे की पिटाई का मामला सामने आया था। यह घटना भगवानपुर के रहमानिया मदरसा की थी। यहाँ पर मोह अली तीसरी क्लास में पढ़ाई करता था। बताया गया था कि मृतक छात्र क्लास में किसी से बात कर रहा था। इस दौरान मदरसा टीचर जीशान शोरगुल सुन कर कमरे में आया। आरोप है कि इस बीच जीशान ने बच्चे का सिर उठाकर डेस्क पर पटक दिया, जिससे मोह अली बुरी तरह से घायल हो गया। उसके कान और नाक से खून निकलने लगा।

बाद में बच्चे का सिर ब्लैकबोर्ड पर भी पटक दिया। इससे उस बच्चे की मौत हो गई।

बिहार में गलवान के बलिदानी के पिता से बदसलूकी, जेल भेजा: तेजस्वी यादव ने पुलिस को दी क्लीन चिट, BJP का सदन से वॉकआउट, CID करेगी जाँच

बिहार विधानसभा में वैशाली में बलिदानी सैनिक जयकिशोर सिंह के पिता राजकपूर सिंह के साथ पुलिस की बदसलूकी का मामला गूंजा। मुद्दे को लेकर विधानसभा में भाजपा विधायकों ने प्रदर्शन किया और सदन से वॉक आउट कर गए। तेजस्वी यादव ने भी शहीद के परिवार को दोषी ठहराने की कोशिश की। उन्होंने कहा है कि परिवार के लोग बलिदानी की मूर्ति दलित की जमीन पर लगाना चाहते थे। तेजस्वी ने राजकपूर सिंह की गिरफ्तारी पर कहा कि कानून अपना काम कर रहा है। उधर बिहार के डीजीपी ने बलिदानी के पिता के साथ हुए गलत व्यवहार की जाँच की जिम्मेदारी सीआईडी को सौंपी है।

वैशाली के जंदाहा थाना इलाके के चकफतेहा गाँव में बलिदानी के पिता के साथ हुए दुर्व्यवहार को लेकर बिहार विधानसभा में जमकर हंगामा हुआ। भाजपा विधायकों ने बलिदानी के पिता की गिरफ्तारी पर सवाल उठाते हुए प्रदर्शन किया। भाजपा विधायकों ने वेल में पहुँचकर बिहार सरकार शर्म करो के नारे लगाए। पूरे मामले को लेकर तेजस्वी यादव ने बलिदानी के पिता को ही दोषी ठहराने की कोशिश की।

तेजस्वी यादव ने कहा कि परिवार वाले चाहते थे कि बलिदानी का स्मारक बने लेकिन वे जमीन देने के लिए तैयार नहीं थे। उनका दावा है कि परिवार वाले बगल के दलित की जमीन पर स्मारक बनाना चाहते थे। साथ ही पूछा कि यह कैसे मुमकिन हो सकता था? उन्होंने कहा कि जहाँ तक बलिदानी के पिता की गिरफ्तारी की बात है उसकी जाँच पुलिस कर रही है। नेता प्रतिपक्ष विजय सिन्हा ने गलवान में बलिदान हुए वैशाली के जवान के पिता को जेल भेजे जाने पर आपत्ति जताई और सरकार पर सैनिकों व बलिदानियों के अपमान का आरोप लगाया। भाजपा नेता विरोध जताते हुए विधानसभा से वॉकआउट कर गए।

उधर बिहार पुलिस के डीजीपी राजविंदर सिंह भट्टी ने मामले की जाँच के लिए सीआईडी की टीम को जिम्मेदारी सौंपी है। पुलिस मुख्यालय की तरफ से आधिकारिक बयान जारी कर कहा गया है कि इस पूरे प्रकरण की जाँच अपराध अनुसंधान विभाग (CID) के की टीम करेगी। बिहार के पुलिस महानिदेशक राजविंदर सिंह भट्टी का कहना है कि जाँच में दोषी पाए जाने वाले पुलिस अधिकारी के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

बिहार सरकार में भवन निर्माण मंत्री और जदयू नेता अशोक चौधरी ने गलवान के बलिदानी के पिता को अपमानित किए जाने पर खेद जताया है। हालाँकि, उन्होंने बलिदानी के पिता के साथ गलत व्यवहार करने वाले पुलिस के जवानों के खिलाफ एक भी शब्द नहीं बोला।

क्या है पूरा मामला?

वैशाली जिले के जंदाहा थाना क्षेत्र में चकफतेहा गाँव निवासी राजकपूर सिंह अपने बलिदानी बेटे के लिए स्मारक बनवा रहे थे। जिस जमीन पर स्मारक बनवाया जा रहा है उसे लेकर विवाद चल रहा है। जमीन के बगल में हरिनाथ राम नाम के शख्स की जमीन है। हरिनाथ राम का आरोप है कि उसकी जमीन के बगल में स्थित सरकारी जमीन पर बिना सरकार के इजाजत के स्मारक बनवाया जा रहा है। हरिनाथ ने आरोप तब लगाया जब राजकपूर ने स्मारक को घेरने के लिए चारों तरफ दीवार खड़ी की।

हरिनाथ राम ने बलिदानी के पिता पर जमीन पर अवैध कब्जे समेत एससी एसटी एक्ट के तहत भी मामला दर्ज करा दिया। जिसके बाद थाना प्रभारी विश्वनाथ राम राजकपूर को गिरफ्तार करने पहुँचे। आरोप है कि उन्होंने बलिदानी के पिता का न सिर्फ अपमान किया बल्कि उन्हें मारते-पीटते घसीटकर जीप में बैठाया।

बलिदानी के पिता के अपमान की खबर इलाके में फैलते ही बजरंग दल और दूसरे संगठनों से जुड़े लोग व परिवार के परिजन मौके पर जमा हुए और थाना प्रभारी पर हरिनाथ राम के पक्ष में कार्रवाई करने का आरोप लगाया। लोगों का आरोप है कि थाना प्रभारी विश्वनाथ राम और हरिनाथ राम की बिरादरी के होने के कारण उनके पक्ष में कार्रवाई कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि पुलिस की कार्रवाई का वीडियो भी बनाया गया है। लोग थाना प्रभारी के इस्तीफे की माँग कर रहे हैं।