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वायरल हुआ बीवी का बिना चेहरा ढँका फोटो तो भड़के शाहीन शाह, शाहिद अफरीदी की बेटी अंशा से रचाया है निकाह

शाहिद अफरीदी की बेटी अंशा के साथ निकाह की तस्वीरें लीक होने से शाहीन शाह अफरीदी ने निराशा जताई है। दरअसल, इसका कारण बताया जा रहा है कि इन तस्वीरों में अंशा ने हिजाब, पर्दा या बुर्का वगैरह नहीं पहना हुआ है और उसका पूरा चेहरा भी दिख रहा है। शाहीन शाह अफरीदी पाकिस्तान के तेज़ गेंदबाज हैं, वहीं शाहिद अफरीदी मुल्क की क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान। अपने करियर में कई छक्के लगाने और T20 क्रिकेट में गेंदबाजी के लिए उनके मुल्क के लोग उन्हें लीजेंड मानते हैं।

शाहीन अफरीदी ने ट्वीट कर के लिखा, “ये काफी निराशाजनक है कि बार-बार निवेदन करने के बावजूद हमारी प्राइवेसी को ठेस पहुँचाया गया और लोगों ने बिना कोई अपराधबोध के इन तस्वीरों को कई बार शेयर किया। मैं विनम्रतापूर्वक सभी से ये निवेदन करना चाहूँगा कि हमारा सहयोग करें और और हमारे इस यादगार दिन को बिगाड़ने की कोशिश न करें।” शाहीन अफरीदी ने खुद भी निकाह की तीन तस्वीरें ट्वीट की हैं।

इसमें से एक तस्वीर में वो अपनी नई बीवी के साथ दिख रहे हैं, लेकिन इसमें उसका चेहरा पूरी तरह ढँका हुआ है। वहीं दूसरी तस्वीर में वो अपने ससुर शाहिद अफरीदी के साथ दिखाई दे रहे हैं। तीसरी तस्वीर में दोनों परिवारों के करीबी लोग हैं। लेकिन, जो तस्वीर वायरल हो रही है उसमें शाहीन शाह और अंशा अफरीदी साथ में बैठे दिख रहे हैं, वहीं अंशा का चेहरा भी नहीं ढँका हुआ है। कई कट्टर इस्लामी सेलेब्रिटी अपनी बीवियों का चेहरा नहीं दिखाते।

शाहीन शाह अफरीदी टेस्ट क्रिकेट में 100 विकेट का आँकड़ा पूरा करने से महज एक विकेट दूर हैं, वहीं वनडे क्रिकेट में भी उन्होंने 62 विकेट अपने नाम किया है। T20 इंटरनेशनल में भी उनके नाम 58 विकेट हैं। वो कभी-कभी छोटी-मोटी पारियाँ बल्ले से भी खेलने की क्षमता रखते हैं। बता दें कि पाकिस्तानी क्रिकेटर अक्सर इस्लामी धर्मांतरण पर जोर देते हैं और क्रिकेट को माध्यम बना कर जिहाद को आगे बढ़ाने में लगे रहते हैं।

BJP नेता वीरेंद्र शर्मा को जनता ने जिता दिया, हारे हुए उम्मीदवार महफूज अंसारी ने मरवा दिया: बिहार में दिन-दहाड़े मुखिया की हत्या; अंजुम, फरहान, इश्तियाक धराए

बिहार के बेगूसराय स्थित परना पंचायत के मुखिया वीरेंद्र शर्मा के हत्यारे अंजुम, फरहान एवं इश्तियाक को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि महफूज फरार है। पुलिस ने 72 घंटों के भीतर हत्यारों को पकड़ लिए जाने का दावा तो किया है, लेकिन अब मुखियाओं के संघ ने राज्य की नीतीश कुमार सरकार से सुरक्षा की माँग की है। महफूज ताज़ा मामले का मुख्य अभियुक्त है, जिसके बारे में कहा जा रहा है कि वो बिहार से बाहर भाग गया है।

हालाँकि, उसके खिलाफ वॉरंट जारी कर दिया गया है और साथ ही कुर्की-जब्ती के आदेश भी दिए गए हैं। गुरुवार (2 फरवरी, 2023) को दोपहर में तब मुखिया वीरेंद्र शर्मा की हत्या कर दी गई थी, जब वह पंचायत के काम से ही जिला मुख्यालय बेगूसराय जा रहे थे। ये घटना चाँदपुरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत हुई है। वीरेंद्र शर्मा ने चुनाव में तत्कालीन मुखिया मोहम्मद महफूज को हराया था, जिसके बाद उसने शूटरों को हायर कर के विजेता मुखिया को मरवा दिया।

मोहम्मद महफूज ने इस इस पूरी घटना की साजिश रची थी। पंचायत चुनाव में हार-जीत का फैसला महज 20 वोटों से ही हुआ था, जिसके बाद से मोहम्मद महफूज लगातार वर्तमान मुखिया को धमकी दे रहा था। ‘जन अधिकार पार्टी (JAP)’ के संस्थापक पप्पू यादव भी मृतक के परिजनों से मिलने पहुँचे। मुखिया वीरेंद्र शर्मा भाजपा के परना पंचायत के पिछड़ा प्रकोष्ठ के सक्रिय कार्यकर्ता थे। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजय सिन्हा और विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष सम्राट चौधरी भी उनके घर पहुँचे।

दिन-दहाड़े हुए इस हत्याकांड के बाद विपक्ष का कहना है कि राजद के सत्ता में लौटते ही बिहार में फिर से जंगलराज आ गया है। 2 बाइक पर सवार 4 बदमाशों ने इस घटना को अंजाम दिया था। मोहम्मद महफूज अंसारी इससे पहले ही बिहार से निकल गया था, ताकि किसी को उस पर शक न हो। गिरफ्तार फरहान उसका बेटा है। हालाँकि, इस घटना में शामिल शूटरों में से अभी एक को भी नहीं पकड़ा जा सका है। गिरफ्तार आरोपितों ने हत्या की साजिश में शामिल होने की बात कबूली है।

IMDb पर दुनिया भर में ‘पठान’ की कमाई सिर्फ ₹180 करोड़! शाहरुख़-दीपिका की फिल्म का बजट ही ₹250 करोड़, लोगों ने कहा – छिपाए जा रहे असली आँकड़े

शाहरुख़ खान, जॉन अब्राहम और दीपिका पादुकोण की फिल्म ‘पठान’ का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन विवादों में आ गया है भारतीय फिल्म समीक्षकों की मानें तो फिल्म ने अब तक दुनिया भर में 700 करोड़ रुपए से भी अधिक का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन कर लिया है, वहीं भारत में इसका नेट कलेक्शन 364 करोड़ रुपए के आसपास है। इस मामले में इससे आगे सिर्फ ‘बाहुबली 2’ और ‘KGF 2’ के हिंदी वर्जन को ही दिखाया जा रहा है।

हालाँकि, चर्चाओं का बाजार इसे लेकर गर्म है कि आखिर IMDb (इंटरनेट मूवी डेटाबेस) पर इसका कलेक्शन कम क्यों दिखाया जा रहा है। जब हमने IMDb पर चेक किया तो उस पर ‘पठान’ का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन मात्र $21,902,358 (180 करोड़ रुपए) बताया जा रहा है। ध्यान दीजिए, ये वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन के आँकड़े हैं, घरेलू नेट कमाई के नहीं। इसका मतलब है कि भारत में ग्रॉस और नेट कलेक्शन काफी कम है।

IMDb की मानें तो इसमें से आधी कमाई तो अमेरिका और कनाडा में हुई है। बता दें कि अक्सर विदेशों में शाहरुख़ खान के फैंस बड़ी संख्या में होने का दावा किया जाता रहा है और उनके फोकस शुरू से NRIs पर रहा भी है। अब सोशल मीडिया में लोग कह रहे हैं कि यही ‘पठान’ का असली बॉक्स ऑफिस कलेक्शन है, जिसे छिपाया जा रहा है। ट्विटर पर एक फैन के पूछने पर भी शाहरुख़ खान ने कलेक्शंस को लेकर गोलमोल जवाब दे दिया और कहा कि उन्होंने करोड़ों मुस्कुराहटें कमाई हैं।

इसके बदले में शाहरुख खान के फैंस भी IMDb से ही सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों के स्क्रीशॉट्स साझा कर रहे है, जिस लिस्ट में ‘पठान’ का कलेक्शन 700 करोड़ रुपए से पार बताया जा रहा है। हालाँकि, इसके पेज पर ये कलेक्शन काफी कम हो जाता है। अब सोचने वाली बात ये है कि अगर सच में भारत में इसकी कमाई 100 करोड़ रुपए भी नहीं है, फिर इसे लेकर इतना ज्यादा हाइप क्यों क्रिएट किया गया। प्रोड्यूसरों पर अक्सर गलत आँकड़े देने लगते रहे हैं।

‘भारत को कम मत आँकना’: अडानी विवाद के बीच अंतरराष्ट्रीय मीडिया को आनंद महिंद्रा की चेतावनी, कहा – ऐसे कई दौर देखे हैं

महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा सोशल मीडिया काफी सक्रिय रहते हैं। वह अक्सर वायरल वीडियो और फोटोज को शेयर करते दिखाई देते हैं। हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद अडानी ग्रुप के शेयरों में आई गिरावट के बाद आनंद महिंद्रा ने ग्लोबल मीडिया को भारत को कम न समझने की चेतावनी दी है।

आनंद महिंद्रा ने ट्वीट कर कहा है, “ग्लोबल मीडिया अनुमान लगा रहा है कि क्या व्यापार क्षेत्र की मौजूदा चुनौतियाँ वैश्विक आर्थिक शक्ति बनने की भारत की महत्वाकांक्षाओं को नाकाम कर देंगी। मैंने भूकंप, सूखा, मंदी, युद्ध और आतंकवादी हमलों के कई दौर देखे हैं। मैं केवल यही कहना चाहता हूँ कि भारत को कभी भी कम समझो।”

दरअसल, गत 24 जनवरी को हिंडनबर्ग ने रिपोर्ट आने के बाद से अडानी ग्रुप के शेयरों में तेजी से गिरावट देखी गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, अडानी ग्रुप की कंपनियों के शेयर में सामूहिक रूप से 50 फीसदी से अधिक की गिरावट देखी गई है। इससे अडानी ग्रुप को अब तक 10 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।

बता दें कि हिंडेनबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में अडानी समूह पर कई आरोप लगाए थे। इनमें मनी लॉन्ड्रिंग, अनऑथोराइज्ड ट्रेडिंग, वित्तीय गड़बड़ी, भारी-भरकम लोन सहित कई गंभीर आरोप थे, जो किसी कंपनी के लिए घातक बताए गए थे। बाद में अडानी समूह ने अमेरिकी रिसर्च कंपनी हिंडनबर्ग द्वारा लगाए गए आरोपों का जवाब दिया था। कंपनी ने 413 पन्नों के जवाब में हिंडनबर्ग द्वारा लगाए गए आरोपों को झूठ करार दिया था। कंपनी ने कहा था कि ये आरोप भारत और यहाँ की कंपनियों तथा देश के विकास पर सुनियोजित हमला है।

अडानी ग्रुप की कंपनियों के शेयर में इस कदर गिरावट देखी गई है कि लगातार शॉर्ट सर्किट झेलने के बाद शेयर साल के न्यूनतम स्तर पर पहुँच गए हैं। शुक्रवार (फरवरी, 2023) को अडानी एंटरप्राइजेज के शेयर में 35 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई।

पाकिस्तान ने Wikipedia को किया बैन, ‘ईशनिंदा’ वाले कंटेंट हटाने को राजी नहीं हुई कंपनी

इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान कथित ईशनिंदा से संबंधित कंटेंट हटाने से इनकार करने पर विकिपीडिया (Wikipedia) को ब्लॉक करने का फैसला किया है। पाकिस्तान का कहना है कि विकिपीडिया को तभी बहाल किया जाएगा, जब वह ईशनिंदा (Blasphemy) से संबंधित कंटेंट को हटाएगा।

इससे पहले, पाकिस्तान टेलीकम्युनिकेशन अथॉरिटी (PTA) ने कंटेंट को हटाने के लिए 48 घंटे का समय देते हुए इस ऑनलाइन इनसाइक्लोपीडिया की पहुँच को सीमित कर दिया था। पाकिस्तान ने विकिपीडिया को 1 फरवरी 2023 को चेतावनी दी थी। हालाँकि, उसने यह नहीं बताया कि पाकिस्तान किस कंटेंट को ईशनिंदा मानता है।

पाकिस्तानी ऑनलाइन मीडिया वेबसाइट द न्यूज (The News) के मुताबिक, एक कानून और अदालती आदेश के तहत विकिपीडिया को नोटिस जारी किया गया था और उससे ईशनिंदा से संबंधित सामग्री को ब्लॉक करने/हटाने के लिए कहा गया था। हालाँकि, विकिपीडिया ने इस आदेश का पालन नहीं किया।

PTA के प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान ने विकिपीडिया को सुनवाई के लिए उपस्थित होने या ‘ईशनिंदा’ सामग्री को हटाने का अवसर दिया था, लेकिन उसने दोनों में से किसी पर भी ध्यान नहीं दिया। इसलिए PTA ने उसे ब्लॉक करने का फैसला लिया।

साल 2012 में पाकिस्तान सरकार ने इस्लाम विरोधी एक फिल्म के 700 से अधिक YouTube लिंक को ब्लॉक कर दिया था। इस फिल्म को लेकर कई देशों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था। वहाँ की सुप्रीम कोर्ट ने इन्हें ब्लॉक करने का आदेश दिया था।

बता दें कि पाकिस्तान गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है और महँगाई के कारण वहाँ खाद्यान्नों की कीमतें आसमान छू रही हैं। आटा-चावल खरीदना एक आम पाकिस्तानी के लिए मुश्किल हो गया है। इसके कारण पूरे देश में अराजकता फैल गई है। जगह-जगह दंगे और लूट-मार मची है।

इस बीच लोगों का ध्यान हटाने के लिए वहाँ की संसद ने जनवरी 2023 में वहाँ की क्रूर ईशनिंदा कानून को और कड़ा कर दिया। इस कानून का इस्तेमाल वहाँ अल्पसंख्यकों को सताने और धर्मांतरण के लिए किया जाता है। इतना ही नहीं, आम मुस्लिम भी व्यक्तिगत झगड़ों से निपटने के लिए इस कानून का खूब इस्तेमाल करता है।

ईशनिंदा कानून में इस्लाम, उसके पैगंबर मुहम्मद और कुरान का अपमान करने के दोषी को मौत की सजा का प्रावधान है। अब इस कानून में बदलाव करके उन लोगों को भी दंडित करने का प्रावधान किया जा सकता है, जो उनसे जुड़े लोगों का अपमान करने के दोषी पाए जाते हैं।

काशी के अस्सी घाट पर स्कूल ड्रेस में खुलेआम सुट्टा मारती दिखीं छात्राएँ, टोकने पर उलटे उलझ पड़ीं: पर्यटन स्थल पर पार्टी से बिफरे लोग

वाराणसी के मशहूर अस्सी घाट का एक वीडियो सोशल मीडिया (Social video) पर वायरल हो गया है। वीडियो में चार-पाँच छात्राएँ यहां सीढ़ियों पर सिगरेट का कश लगाते देखी जा सकती हैं। किसी ने इस वीडियो को रिकॉर्ड कर लिया और इसे सोशल मीडिया पर डाल दिया। हालाँकि, वीडियो दूर से रिकॉर्ड किया गया है। इसीलिए, इसमें छात्राओं को चेहरा साफ तौर नजर नहीं आ रहा है।

एक सोशल मीडिया यूजर ने कहा, “प्रशासन ने घाट पर सिगरेट पीने पर रोक लगाई है। माता पिता को समझाओ, उसके बाद उसे वीडियो भेजो।”

एक रिपोर्ट के अनुसार, जब वहाँ कुछ लोगों ने छात्राओं को ऐसा करने से मना किया तो वे समझाने वाले लोगों से ही उलझ पड़ी। दरअसल, ये छात्राएँ फेयरवेल पार्टी मनाने अस्सी घाट पहुँची थी और काफी देर तक बड़ी ही बेशर्मी से सिगरेट का कश लगाती रहीं। उल्लेखनीय है कि सार्वजनिक जगहों और पर्यटन स्थलों पर धूम्रपान करने पर ‘तम्बाकू नियंत्रण अधिनियम (सीओटीपीए)’ 2003 के तहत कार्रवाई का प्रावधान है।

छात्राओं के इस व्यवहार की लोग काफी आलोचना कर रहे हैं। लोग स्कूल प्रबंधन के साथ माता-पिता की परवरिश पर भी सवाल उठा रहे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, भले ही छात्राओं का चेहरा वीडियो में स्पष्ट तौर पर नहीं दिख रहा है, लेकिन स्कूल ड्रेस से पता चलता है कि ये छात्राएँ लहरतारा इलाके में स्थित एक स्कूल में पढ़ती हैं।

हालाँकि, स्कूल प्रबंधन का कहना है कि छात्राएँ इतनी दूर फेयरवेल मनाने नहीं जा सकती है। प्रबंधन ने आगे कहा कि ड्रेस देखकर तो यही लग रहा है कि छात्राएँ उसी के स्कूल की है। छात्राओं की पहचान कराई जा रही है। पहचान होने के बाद इनपर कार्रवाई की जाएगी। 

‘ये मुस्लिम विरोधी कार्रवाई’: असम में बाल विवाह के खिलाफ एक्शन से भड़के ओवैसी, अब तक 2200 गिरफ्तार – इनमें सैकड़ों मौलवी-पुजारी

असम में बाल विवाह के खिलाफ ताबड़तोड़ एक्शन जारी है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने राज्य में बाल विवाह के खिलाफ मुहिम छेड़ी हुई है। मामले में अब तक 4 हजार से ज्यादा केस रजिस्टर किए गए हैं तो वहीं 2200 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और एआईयूडीएफ चीफ मौलाना बदरुद्दीन अजमल ने राज्य सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाए हैं।

बाल विवाह के खिलाफ असम में गुवाहाटी, विश्वनाथ, गोलपारा, करीमगंज, जोरहाट,मोरी गाँव, बोंगाईगाँव जैसे इलाकों में कार्रवाई की गई है। असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने जानकारी दी है कि अब तक पूरे प्रदेश में बाल विवाह से संबंधित 4074 केस दर्ज किए गए हैं। कुल 8134 आरोपितों की पहचान की गई है। शनिवार (04 फरवरी, 2023) सुबह तक 2211 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी और हमें लगभग 3500 लोगों को गिरफ्तार करना होगा।

मीडिया रिपोर्टों में राज्य सरकार की इस कार्रवाई को बाल विवाह के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा एक्शन कहा जा रहा है। कार्रवाई के तहत दूल्हे और उसके परिजनों के अलावा पंडितों और मौलवियों को भी गिरफ्तार किया जा रहा है।

मुस्लिम लीडर कर रहे हैं विरोध

असम सरकार के एक्शन पर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार के फैसले का विरोध किया है। ओवैसी ने कहा कि बीजेपी की सरकार मुस्लिमों के खिलाफ है। ओवैसी ने गिरफ्तारियों पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आप लड़कों को जेल भेज देंगे तो लड़कियों का क्या होगा? उन्होंने सीएम सरमा से पूछा कि आपने असम में अब तक कितने स्कूल खोले हैं।

ओवैसी के अलावा ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के चीफ मौलाना बदरुद्दीन अजमल ने भी बाल विवाह के खिलाफ कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। बदरुद्दीन अजमल ने भाजपा सरकार पर लोगों को धर्म के आधार पर बाँटने का आरोप लगाया। अजमल पुलिस की कार्रवाई को मुस्लिम विरोधी बताते हुए कहा कि चुनावों को देखते हुए भाजपा शासित राज्यों में कुछ न कुछ गुल खिलाए जाएँगे। अजमल ने यहाँ तक कहा कि गिरफ्तार किए गए लोगों में ज्यादातर मुस्लिम होंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री पर जानबूझकर मुस्लिमों को परेशान करने का आरोप लगाया।

सीएम सरमा ने बाल विवाह को जघन्य अपराध करार दिया

बता दें कि बाल विवाह को लेकर मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा कई बार फिक्र जता चुके हैं। 23 जनवरी, 2023 को असम कैबिनेट ने बाल विवाह के खिलाफ कार्रवाई करने को लेकर फैसला लिया था। मुख्यमंत्री सरमा ने बाल विवाह को जघन्य अपराध करार दिया था। इसके साथ ही कानून में बड़ा बदलाव करते हुए 14 साल से कम उम्र में लड़की की शादी करने के मामले पॉक्सो (Protection of Children from Sexual Offences-POCSO) एक्ट लगाने को मंजूरी दी गई। कैबिनेट की मंजूरी के बाद से ही पुलिस एक्शन में है।

टूरिस्ट वीसा पर भारत आया पाकिस्तानी मूल का ब्रिटिश मुस्लिम प्रचारक, धार्मिक गतिविधियों में ले रहा भाग: AMU भी गया, गृह मंत्रालय में शिकायत

कानूनी कार्यकर्ता समूह ‘लीगल राइट्स प्रोटेक्शन फोरम’ (LRPF) ने एक विदेशी इस्लामी उपदेशक मुहम्मद साकिब बिन इकबाल शमी उर्फ साकिब इकबाल शमी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। शमी पर्यटक वीसा पर भारत आकर कई शहरों में आयोजित इस्लामी मजहबी सम्मेलनों में शामिल हुए थे। उन्होंने उत्तर प्रदेश में के अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) द्वारा आयोजित ऐसे ही एक कार्यक्रम में भी भाग लिया था।

संस्था ने गृह मंत्री अमित शाह और उनके कार्यालय, यूके में भारत के उच्चायोग, यूपी और तेलंगाना के डीजीपी और वारंगल सीपी को टैग करते हुए ट्वीट किया। अपने ट्वीट में फोरम ने लिखा, “पाकिस्तान से जुड़े यूके स्थित इस्लामी उपदेशक साकिब इकबाल शमी द्वारा भारतीय वीसा प्रावधानों का घोर उल्लंघन और आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप किया गया। @AmitShah जी, @HMOIndia @IndiainUK, @cpwarangal1 @TelanganaDGP @dgpup और इमिग्रेशन से उनके प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की शिकायत दर्ज की गई है।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तानी मूल ब्रिटिश उपदेशक टूरिस्ट वीसा पर भारत का दौरा कर रहे हैं और विभिन्न शहरों में इस्लामी मजहबी आयोजन कर रहे हैं। अपने कार्यक्रम के एक भाग के रूप में वह 4 फरवरी 2023 को मुख्य अतिथि और मुख्य वक्ता के रूप में वारंगल के आजम जाही मिल मैदान में आयोजित एक विशाल धार्मिक आयोजन में भाग लेंगे।

उन्होंने 2 फरवरी 2023 को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में एक सामूहिक इस्लामी धार्मिक आयोजन में भाग लिया। साकिब बिन इकबाल शमी ने AMU में आयोजित कार्यक्रम की झलकियों को ट्विटर पर साझा करते हुए इसे ‘सबसे बड़ी राजनीतिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और इस्लामी सभा’ बताया।

साकिब कट्टर इस्लामी उपदेशक हैं। YouTube पर इनके 776 हजार फॉलोअर हैं। वे कंज़ उल हुदा नामक एक संगठन का नेतृत्व करते हैं। इसके जरिए वे नियमित रूप से मजहबी तकरीर करते हैं और दावा या इस्लामिक धर्मांतरण में संलग्न रहते हैं। साकिब का YouTube चैनल गैर-मुस्लिमों को इस्लाम में परिवर्तित होने के लिए मजबूर करने वाले वीडियो से अटा पड़ा है।

फोरम ने अपनी शिकायत में कहा कि साकिब भारत की आंतरिक मामलों में दखल दे रहे हैं। गृह मंत्रालय को भेजी गई शिकायत में LRPF ने कहा, “उपरोक्त परिस्थितियों और सबसे गंभीर मामले को देखते हुए, हम आपसे विनम्रतापूर्वक अनुरोध करते हैं कि वारंगल में होने वाले उनके कार्यक्रम को रोकने के लिए निवारक कदम उठाएँ और उनके और कार्यक्रम के प्रायोजकों/आयोजकों के खिलाफ विदेशी अधिनियम, 1946 की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई करें। हम भविष्य में भारत आने से रोकने के लिए उन्हें काली सूची में डालने का भी अनुरोध करते हैं।”

उल्लेखनीय है कि टूरिस्ट वीसा या किसी अन्य वीसा पर देश में आए विदेशियों के महजबी प्रचार में शामिल होना गैरकानूनी है। मिशनरियों के लिए, मिशनरी वीसा इस शर्त के साथ दिया जाता है कि मिशनरी कार्य में धर्मांतरण शामिल नहीं होगा। भारतीय वीसा नियमों के अनुसार, भारत उन प्रचारकों को वीजा नहीं देता है, जो भारत में धर्म प्रचार के लिए आना चाहते हैं। भारत में स्थित कोई संगठन भी उन्हें बुलाना चाहे तो उन्हें वीसा जारी नहीं किया जा सकता है।

बता दें कि गृह मंत्रालय ने वर्ष 2020 में भारत में महजबी गतिविधियों में शामिल होकर वीसा शर्तों का उल्लंघन करने पर तबलीगी जमात के 960 विदेशी सदस्यों के टूरिस्ट वीसा को रद्द कर दिया था और उन्हें काली सूची में डाल दिया था।

इसके अलावा, जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में तबलीगी जमात के सदस्य मौजूद हैं, उनसे भी केंद्र ने विदेशी अधिनियम, 1946 के प्रावधानों का उल्लंघन करने के लिए उनके खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने के लिए कहा था। इसमें निर्वासन के लिए $500 जुर्माना लेना भी शामिल है।

AMU में एक बार फिर गूँजा ‘अल्लाहु अकबर’ और ‘नारा-ए-तकबीर’, जुमे की नमाज के बाद प्रदर्शन: BBC की प्रोपेगंडा डॉक्यूमेंट्री को बताया सही

उत्तर प्रदेश की ‘अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU)’ में गणतंत्र दिवस के दिन इस्लामी नारे लगाने के कारण एक छात्र को निलंबित किया गया था। निलंबित छात्र के समर्थन में शुक्रवार (3 फरवरी, 2023) को जुमे की नमाज के बाद एक बार छात्रों ने इस्लामिक नारेबाजी की है। हंगामा कर रहे छात्र ‘नारा ए तकबीर’, और ‘अल्लाह हू अकबर’ जैसे नारे लगाते दिखाई दिए।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जुमे की नमाज के बाद इस्लामवादी छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के प्रॉक्टर वसीम अली को लिखित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में निलंबित छात्र को तत्काल प्रभाव से बहाल करने की माँग की गई।

दरअसल, गणतंत्र दिवस पर वाहिदुज्जमा नामक छात्र और एनसीसी कैडेट ने इस्लामिक नारे लगाए थे। इसके बाद यूनिवर्सिटी ने कार्रवाई करते हुए उसे निलंबित कर दिया था। इस निलंबन का विरोध करते हुए छात्रों ने न केवल नारेबाजी की। बल्कि एमएमयू के माहौल को बिगाड़ने की भी कोशिश की।

हालाँकि, इस मामले में पहले यह कहा गया था कि गणतंत्र दिवस पर सिर्फ एक छात्र ने ‘अल्लाह हू अकबर’ का नारा लगाया है। लेकिन बाद में ऐसे वीडियो सामने आए थे जिसमें कुछ अन्य एनसीसी कैडेट्स नारेबाजी कर रहे थे।

इसके अलावा, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में जुमे की नमाज के बाद प्रॉक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में केंद्र सरकार द्वारा प्रतिबंधित बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री को सही बताया गया है। इस ज्ञापन ने एएमयू प्रबंधन के उस दावे की पोल खोल कर रख दी है, जिसमें कहा गया था कि कैंपस में बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री के क्यूआर वाले पोस्टर छात्रों ने नहीं बल्कि बाहरी लोगों ने लगाए हैं।

दरअसल, गुरुवार (2 फरवरी, 2023) को खबर आई थी कि एएमयू कैंपस की दीवारों पर क्यूआर कोड वाले कई पोस्टर चिपकाए गए हैं। इन क्यूआर कोड को स्कैन कर छात्र बीबीसी की प्रतिबंधित डॉक्यूमेंट्री अपने मोबाइल फोन पर देख सकते हैं। इस घटना का संज्ञान लेते हुए एएमयू प्रॉक्टर ने पोस्टरों को हटाने के आदेश जारी किया था। साथ ही कहा कि पोस्टर बाहरी लोगों द्वारा लगाए गए हैं। इसमें एएमयू के छात्र शामिल नहीं हैं।

‘कोई मारपीट नहीं हुई, हमारा खून ज़्यादा गर्म’: जिन कश्मीरियों के सामान फेंके जाने की खबर चला रहा मीडिया, उन्होंने कैमरे पर कबूला – UP पुलिस करती है सपोर्ट

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ (Lucknow) में ड्राई फ्रूट्स बेचने वाले कश्मीरियों के साथ कथित मारपीट करने और उनका सामान फेंकने की फर्जी खबरें गुरुवार (2 फरवरी, 2023) को कई मीडिया संस्थानों ने चलाई थी। वहीं इनके सपोर्ट में कई सोशल मीडिया यूजर्स ने भी ट्वीट कर प्रोपेगेंडा चलाने की कोशिश की थी। लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट ने हालाँकि पहले ही सामान फेंके जाने जाने की बात का खंडन कर दिया है। ऑपइंडिया की टीम ने भी जब ग्राउंड जीरो पर जाकर पड़ताल की तो पता लगा कि कश्मीरियों ने झूठ फैलाया था। 

घटना को लेकर मोहम्मद नदीम सिद्दीकी ने 2 फरवरी, 2023 को ट्वीट किया था। इसमें एक मुस्लिम युवक कहता है, “हम पुल पर अपना माल बेच रहे थे और इतने में नगर निगम वाले आए और पुल पर माल को न बेचने के लिए कहने लगे। फिर कुछ युवक गाड़ी से आए और सामान उठाकर नीचे फेंक दिया। वे हमें गाली देने लगे। फिर हमने पुलिस को फोन किया और वे मौके पर पहुँचे।”

वहीं लखनऊ पुलिस ने सामान फेंके जाने का खंडन किया था। पुलिस ने ट्वीट कर कहा, “जब हमने मामले की जाँच की तो पता चला कि जनसंपर्क अनुभाग स्मारक समिति एलडीए के सुपरवाइजर दीपक सिंह 1090 चौराहे के पास मौजूद पुल पर साज-सज्जा के लिए साफ सफाई करवा रहे थे। इसी क्रम में ड्राइफ्रूट बेचने वाले को वहाँ से हटने के लिए कहा। इसका उन्होंने विरोध किया। वहीं ड्राइ फ्रूट फेंके जाने के संबंध में कोई साक्ष्य प्राप्त नहीं हो रहे हैं।”

वहीं ऑपइंडिया ने LDA (लखनऊ विकास प्राधिकरण) के अधिशाषी अभियंता (एग्जीक्यूटिव इंजिनियर) राज कुमार से बात की। उन्होंने कहा, “G 20 सम्मेलन आयोजित होने से पहले हम दिन रात एक कर के काम कर रहे हैं। ऐसे में कुछ लोग हैं जो इस प्रकार की आधारहीन बातें कर के गलत माहौल पैदा करना चाहते हैं। कश्मीरियों या किसी के भी साथ किसी भी LDA स्टाफ ने गलत हरकत नहीं की है।”

दूसरी ओर इतने बवाल के बाद शनिवार (4 फरवरी 2023) को भी कश्मीरी फिर से वहाँ ड्राई फ्रूट बेचते नजर आए। कल तक जो कश्मीरी रो-रो कर मीडिया से बात कर रहे थे, शनिवार को जब ऑपइंडिया ने उनसे बात की तो मेहराब नाम के कश्मीरी ने कहा, “मारपीट का कोई मसला नहीं है। हम कश्मीरी हैं। हमारा खून ज्यादा गर्म है। हम बर्दाश्त नहीं कर पाते। वरना हमें कोई कुछ नहीं कहेगा।” वहीं वह आगे कहता है कि पुलिस का सपोर्ट हमें यहाँ खूब मिलता है।

उसने कहा कि पुलिस वाले हमारी यहाँ इज्जत करते हैं। वहीं कुलगाम के सोहेल ने भी दावा किया कि मारपीट की कोई घटना नहीं हुई है। वह दावा करता है कि केवल सामान उठाकर फेंका गया है।