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कटोरा लेकर पूरी दुनिया में घूम रहा पाकिस्तान, PM मोदी से बात करने को गिड़गिड़ाया: बोले शहबाज शरीफ- भारत के साथ 3 युद्ध लड़े, सबक सीख लिया

कंगाल पाकिस्तान (Pakistan) अपनी अर्थव्यवस्था बचाने के लिए भीख माँग रहा है। पाकिस्तानी जनता रोटी के लिए बेहाल है। वहाँ के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ दुनिया से आर्थिक मदद की गुहार लगा रहे हैं। अब शरीफ ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बातचीत की इच्छा जताई है। कहा है कि भारत से तीन युद्ध लड़कर पाकिस्तान ने सबक सीख लिया है। इससे हमें केवल कंगाली, गरीबी और बेरोजगारी ही मिली है।

शहबाज शरीफ (Pakistan PM Shehbaz Sharif) ने यह बात अल अरेबिया न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में कही है। उन्होंने कहा, “भारत और पाकिस्तान पड़ोसी हैं। हमने भारत के साथ तीन युद्ध लड़े। हमें केवल कंगाली, गरीबी और बेरोजगारी ही मिली। हमने सबक सीख लिया है और अब हम शांति के साथ रहना चाहते हैं।”

शरीफ ने अपनी बात जारी रखते हुए आगे कहा, “शांति और तरक्की के लिए जरूरी है कि हम अपने मसलों का निपटारा करें। हम गरीबी को खत्म करना चाहते हैं। खुशहाली और तरक्की चाहते हैं। अपने लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार देना चाहते हैं। हम अपने संसाधन गोला-बारूद और हथियारों पर बर्बाद नहीं करना चाहते।”

प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत के इच्छुक पाकिस्तान के पीएम कहते हैं, “मैं यही संदेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देना चाहता हूँ कि चलिए बैठते हैं और बात करते हैं। हम परमाणु शक्ति संपन्न देश हैं। अब कोई जंग हुई तो कोई नहीं जानता कौन बचेगा। मैं कश्मीर सहित सभी मुद्दों पर ईमानदार, गंभीर और संवेदनशील बातचीत करना चाहता हूँ।”

शरीफ मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहते हैं कि इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। इंटरव्यू में उन्होंने बताया, “हमारे पास इंजीनियर, डॉक्टर और कुशल मजदूर हैं। हम इनका उपयोग समृद्धि और देश में शांति लाने के लिए करना चाहते हैं ताकि दोनों देश विकसित हो सकें। अब यह हमारे ऊपर है कि हम शांति से रहें और प्रगति करें, या फिर एक दूसरे के साथ झगड़ा करें। समय और संसाधनों को बर्बाद करें।”

मालूम हो कि इन दिनों पाकिस्तान में आटे के लिए हाहाकार मचा हुआ है। लोग रोटी के लिए तरस रहे हैं। सब्सिडी वाले आटे के लिए मची भगदड़ में कई लोगों की जानें जा चुकी हैं। सोशल मीडिया पर पाकिस्तान के कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें वहाँ के लोग अपनी झोली फैलाकर 1 किलो आटे के लिए लाइनों में लगे हुए दिखाई दे रहे हैं। वहीं, हथेलियों से नाप-नाप के उनकी झोली में आटा डाला जा रहा है।

यही नहीं आटे के लिए लोग एक दूसरे को धक्का मारकर नाले में गिराते हुए भी दिखाई दिए। इसके अलावा बीते दिनों पाकिस्तान में सुरक्षा गार्ड AK-47 लेकर ट्रक से लोगों को आटा बाँटने के लिए जाते हैं, ताकि वे आटे की रक्षा कर सकें। इस दौरान उन्हें आटा बचाने के लिए गोलाबारी करते हुए भी देखा गया।

गौरतलब है कि पाकिस्तान के कराची में इस समय आटे का भाव 140-160 किलोग्राम है, जबकि इस्लामाबाद और पेशावर में 10 किलो का आटे का बैग 1500 किलो में बिक रहा है। वहीं 20 किलो आटे का बैग 2800 का मिल रहा है। खैबर पख्तूख्वा में भी आटे के दाम आसमान छू रहे हैं। वहाँ 20 किलो आटे का बोरी 3100 में बिक रही है। सरकार बिगड़ते हालातों को स्थिर करने में असमर्थ है।

घर से उठा लेते हैं लड़कियाँ, दोगुने उम्र वाले मर्दों से निकाह, जबरन बना रहे मुस्लिम: पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों का हाल UN विशेषज्ञों ने बताया

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर चिंता जताई है। विशेषज्ञों ने कहा है कि पाकिस्तान में अपहरण, जबरन निकाह और लड़कियों के जबरन धर्मांतरण में तेजी से वृद्धि हो रही है। इसे रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने की जरूरत है।

संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने सोमवार (16 जनवरी 2023) को कहा कि पाकिस्तान को अल्पसंख्यकों पर हो रहे अपराधों को रोकने के लिए बिना किसी पक्षपात के कार्रवाई करना चाहिए। साथ ही उन्होंने घरेलू कानून तथा अन्तरराष्ट्रीय मानवाधिकार सिद्धांतों के हिसाब से इस तरह की घटनाओं को रोकने और इसकी जाँच करने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत बताई। कहा कि इसमें शामिल अपराधियों को पूरी तरह से जवाबदेह ठहराया जाए।

उन्होंने यह भी कहा है, “हमें यह सुनकर बहुत दुख हुआ कि 13 साल से उम्र की लड़कियों को उनके घरों से अगवा किया जा रहा है। इसके बाद तस्करी करके इन लड़कियों को घरों से दूर स्थानों पर भेजा जा रहा है। दोगुनी उम्र के पुरुषों से शादी करने और इस्लाम कबूल करने के लिए उन्हें मजबूर किया जा रहा है। यह सब अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का उल्लंघन है।”

संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने यह भी कहा है, “हम बहुत चिन्तित हैं कि इस तरह के विवाह और धर्मांतरण लड़कियों या उनके परिवारों को हिंसा की धमकी देकर करवाए जा रहे हैं।” इन विशेषज्ञों ने पाकिस्तान में जबरन धर्मांतरण और अल्पसंख्यक पीड़ित परिवारों को न्याय न मिल पाने को लेकर भी निराशा जताई है।

विशेषज्ञों ने पाकिस्तान में नाबालिग लड़कियों के अपहरण और जबरन धर्मांतरण में वहाँ की अदालतों और सुरक्षा बलों की मिलीभगत पर भी सवाल उठाया है। उन्होंने कहा है, “परिवार के सदस्यों का कहना है कि पीड़ितों की शिकायतों को पुलिस शायद ही कभी गम्भीरता से लेती है। कई बार पुलिस एफआईआर दर्ज करने से भी इनकार करती है। यही नहीं लड़कियों के अपहरण को ‘लव मैरिज’ का नाम देकर उचित भी ठहरा दिया जाता है।”

विशेषज्ञों ने बताया, “अपहरण करने वाले लोग पीड़ितों को फर्जी दस्तावेजों में हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर करते हैं। इन दस्तावेजों में शादी करने के लिए कानूनी तौर पर उम्र के साथ ही अपनी मर्जी से शादी करने की बात लिखी होती है। इसके बाद पुलिस इन दस्तावेजों को यह दिखाने के लिए सबूत के तौर पर पेश करती है कि कोई भी अपराध नहीं हुआ है।”

संयुक्त राष्ट्र संघ के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने यह भी कहा है, “पाकिस्तानी अधिकारियों को जबरन धर्मांतरण, बाल विवाह, अपहरण और तस्करी पर रोक लगाने वाले कानून को अपनाना और लागू करना चाहिए। इससे, गुलामी और मानव तस्करी से निपटने में सहायता मिलेगी। साथ ही, महिलाओं व बच्चों के अधिकारों का हनन नहीं होगा। ऐसा करने से अन्तरराष्ट्रीय मानवाधिकार के सिद्धांतों का पालन हो सकेगा।”

गौरतलब है कि पाकिस्तान में हिंदू लड़कियों के अपहरण के मामले सामने आते रहते हैं। कुछ ऐसे भी मामले सामने आए जिनमें, 13-14 साल की लड़कियों को उनके घर से अगवा कर लिया गया। इसके बाद, इन लड़कियों को धर्मांतरण के लिए मजबूर कर मुस्लिम व्यक्ति से निकाह कराया गया। ऐसे मामलों में, मौलवियों से लेकर पुलिस प्रशासन व अदालत तक की मिलीभगत होती है।

‘मैं क्यों किसी को घर बेचने से रोकूँगा…मुझे खुद जाना है’ : ब्रह्मपुरी पर ‘द वायर’ की रिपोर्ट को एडवोकेट प्रदीप ने कहा झूठा, बोले- यहाँ मुस्लिम 50% पार कर गए तो क्या होगा

दिल्ली का ब्रह्मपुरी इस समय मीडिया और सोशल मीडिया में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस चर्चा की वजह वामपंथी पोर्टल द वायर (The Wire) पर शनिवार (14 जनवरी 2023) को पब्लिश हुई एक रिपोर्ट है। इस रिपोर्ट में ब्रह्मपुरी की गली नंबर 13 में प्रदीप शर्मा नाम के एक वकील द्वारा मुस्लिमों को प्रॉपर्टी न बेचने के पोस्टर का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट में एक डॉक्टर के हवाले से यह भी दावा किया गया है कि दंगों के दौरान मुस्लिमों ने हिन्दुओं के घरों की रक्षा की थी और गली नंबर 13 में हिंसा ही नहीं हुई थी। खबर के अंत में एडवोकेट शर्मा से भी सम्पर्क होने की बात कही गई। इन तमाम दावों की पड़ताल करने ऑपइंडिया की टीम सोमवार (16 जनवरी 2023) को ब्रह्मपुरी पहुँची। ब्रह्मपुरी में हमने जो पाया वो द वायर के दावों को सिरे से झुठला रहा था।

‘द वायर’ ने खतरे में डाली परिवार की सुरक्षा

ब्रह्मपुरी पहुँच कर हमने सीधे एडवोकेट प्रदीप शर्मा को सम्पर्क किया। प्रदीप ने खुद को न्यू उस्मानपुर थाने पर बताया और वहीं आने के लिए कहा। घने ट्रैफिक में हमें थाने पहुँचने में लगभग 7 मिनट लग गए। प्रदीप शर्मा हमें गेट पर ही मिल गए। हमने उनसे थाने पर आने की वजह पूछी तो उन्होंने कुछ मीडिया और सोशल मीडिया पर अपनी खबर वायरल होने के बाद मिल रही धमकियों से परेशान हो कर पुलिस सुरक्षा माँगने की जानकारी दी। एडवोकेट शर्मा ने द वायर पर किसी से पैसे लेकर उनके खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि द वायर के कारण वह और उनका परिवार खतरे में आ गए हैं।

तेज आवाज में अजान से थोड़ी देर रुकी बातचीत

हम थाने के गेट पर बात ही कर रहे थे कि अचानक 2 पुलिसकर्मी किस आरोपित को पकड़ कर उधर से गुजरे। उन्होने हमसे वहाँ खड़े होने की वजह पूछी। हालाँकि मीडियाकर्मी जान कर वो वहाँ से चले गए। इस दौरान थाने के आस-पास लगे लाऊडस्पीकरों से जोर-जोर से अजान होने लगी जिसकी वजह से हमें थोड़ी देर इंटरव्यू बंद करना पड़ा। अधिवक्ता शर्मा ने अजान की उन तेज आवाजों को इलाके के लिए बेहद सामान्य बात बताया।

‘मैंने नहीं लगाए कोई पोस्टर’

अजान की आवाज खत्म होने के बाद एडवोकेट शर्मा ने फिर से बातचीत शुरू की। उन्होंने हमें बताया कि जिस पोस्टर पर विवाद खड़ा हुआ है उसे उन्होंने लगाया ही नहीं। प्रदीप के मुताबिक उन्हें अपने नाम से लगे पोस्टरों की जानकारी सोशल मीडिया से हुई। हालाँकि उन्होंने शक जताया है कि इलाके से हिन्दुओं का पलायन रोकने के लिए किसी ने उनके नाम से ये पोस्टर लगा दिए जो गलत है। वकील ने खुद के पेशे में भी कभी हिन्दू-मुस्लिम न देखने की जानकारी दी।

घर बेच रहे हिन्दू और हो रहा पलायन

एडवोकेट शर्मा ने हमें बताया कि वो दूसरों को घर बेचने से क्या रोकेंगे जब वो खुद ही अपना घर बेचने की तैयारी में हैं। अपने क्षेत्र के हालत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी गली से लगातार हिन्दू घर बेच कर जा रहे हैं। हमें बताया गया कि पहले उनके घर के चारों तरफ हिन्दू थे लेकिन अब वहाँ कई मुस्लिम हो गए। एक हिन्दू ब्राह्मण के घर को खरीद कर मस्जिद भी बनाने की जानकारी हमें दी गई जहाँ स्थानीय गली से ज्यादा बाहर के लोग नमाज़ पढ़ने आते हैं। अधिवक्ता के मुताबिक क्षेत्र में जनसंख्या का संतुलन तेजी से बदल रहा। वकील ने मुताबिक जब मुस्लिम आबादी 50% पार कर जाएगी तब न जाने क्या होगा।

पलायन की मुख्य वजह सुरक्षा की चिंता

एडवोकेट शर्मा के मुताबिक उनकी और बाकी हिन्दुओं की मुख्य चिंता सुरक्षा की है। दिल्ली दंगों की याद न दिलाने की बात कहते हुए भावुक हो गए। अधिवक्ता ने बताया कि उनकी गली में दंगाई घुस गए थे और मुहाने पर मौजूद शिव-गौरी मंदिर पर हमले का प्रयास किया गया था। खुद को चश्मदीद बताते हुए प्रदीप शर्मा ने बताया कि उनके घर के आगे दंगाइयों ने गोलियाँ बरसाईं थीं। हमें बताया गया कि ब्रह्मपुरी के तमाम हिन्दू अब साल 2020 जैसी किसी घटना को दुबारा झेलने के लिए तैयार नहीं है और इसी वजह से सुरक्षित स्थान की तरफ जाना चाहते हैं। शर्मा ने अपने आस-पास 50 हिन्दुओं का जिक्र किया जो मकान बेच कर जा चुके हैं। इसमें एक वो हिन्दू परिवार भी शामिल था जिसके घर पर अब मस्जिद बनी हुई है। हालाँकि द वायर ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि गली नंबर 13 में दिल्ली दंगों के दौरान हिंसा ही नहीं हुई थी।

ब्रह्मपुरी में हुई थी हिन्दुओं की हत्या

गौरतलब है कि साल 2020 के हिन्दू विरोधी दंगों में ब्रह्मपुरी के ही रहने वाले विनोद कुमार की दंगाइयों ने हत्या कर दी थी। वो खजूर वाली गली में रहते थे और घटना के समय अपने बेटे के साथ घर लौट रहे थे। विनोद के अलावा एडवोकेट शर्मा ने बताया कि गली नंबर 1 में एक हिन्दू सब्ज़ी वाले की भी गोली मार कर हत्या हुई थी। वकील के मुताबिक ब्रह्मपुरी में कम से कम 4-5 हिन्दू मारे गए थे।

हिन्दुओं की वजह से मुस्लिम सुरक्षित’

ब्रह्मपुरी गली नंबर 13 में 70% हिन्दू और 30% मुस्लिम आबादी बताते हुए एडवोकेट शर्मा ने कहा कि उस गली में हिन्दू लोग मुस्लिमों की रक्षा करते हैं। हिन्दुओं को सहिष्णु बताते हुए उन्होंने कहा कि 2020 दंगों में बहुत कुछ झेल कर भी हिन्दुओं ने अपनी में मौजूद मुस्लिमों की रक्षा की थी और उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुँचने दिया था।

‘मैंने कभी नहीं की The Wire से बात’

जहाँ द वायर (The Wire) ने अपनी रिपोर्ट में एडवोकेट शर्मा से बात कर के उनका पक्ष लेने का दावा किया है। वहीं प्रदीप शर्मा इस दावे को सिरे से नकार रहे हैं। उन्होंने कहा कि अपनी खबर वायरल होने से पहले वो किसी वायर नाम के संस्थान को जानते ही नहीं थे। The Wire के आर्टिकल में छपे अपने बयान को भी प्रदीप शर्मा ने बिना अनुमति जोड़ने का आरोप लगाया।

‘भाई ने मेरा घर बसा दिया’: सलमान खान का आया कॉल तो आदिल ने राखी सावंत संग कबूला निकाह, जानिए फोन पर ऐसा क्या कहा जो हाथ जोड़कर माँगी माफी

आदिल खान दुर्रानी ने राखी सावंत के साथ निकाह की बात कबूल कर ली है। राखी का दावा है कि ऐसा सलमान खान का फोन आने के बाद हुआ। आदिल ने भी कॉल आने की बात कबूली है। इससे पहले राखी के दावों को खारिज करते हुए आदिल ने उनके साथ निकाह से इनकार किया था।

अब राखी सावंत और आदिल का वीडियो सामने आया है। इसमें पैपराजी से बात करते हुए राखी ने कहा है, “आदिल को सलमान बहुत प्यार करते हैं। आदिल, भाई से मिले भी हैं। निश्चित रूप से भाई का फोन तो आया ही है इनको। आप जानते ही हैं करवाया ही है। भाई के होते हुए ये मना कर सकते हैं क्या बहन को शादी का? भाई का फोन आएगा तभी तो हो सकता है ना कुछ। सलमान भाई का फोन आया था, पूछो ना इनको। वो भाई हैं मेरे। सलमान खान का जीजा है ये…उनका दामाद है।”

राखी की इस बात पर हाँ में हाँ मिलाते हुए, आदिल खान दुर्रानी ने कहा है, “सलमान खान का फोन आया था। उन्होंने मुझसे कहा जो भी है स्वीकार करो। अगर एक्सेप्ट करना है तो कर लो नहीं तो मना कर दो। लेकिन जो सच है उसे स्वीकार करो और उसका सामना करो।”

इस पर पैपराजी ने आदिल से पूछा किसी का प्रेशर तो नहीं है। तब, राखी ने जवाब देते हुए कहा है, “दूसरे से प्रेशर आया तो कुबूल किया कुछ बीवी के प्रेशर से भी कुबूल किया करो।”

वहीं, एक अन्य वीडियो में राखी और आदिल निकाह कबूल करते नजर आ रहे हैं। आदिल ने कहा है कि उन्होंने राखी के साथ अपना निकाह कबूल कर लिया है। साथ ही, आदिल ने हाथ जोड़कर राखी से माफी भी माँगी है। वहीं, राखी ने कहा है, “सलमान खान ने मेरा घर बसा दिया। आदिल, मेरे हसबैंड मान गए हैं। जनता और मीडिया को धन्यवाद। सबको मेरी तरफ से चरण स्पर्श।”

बता दें कि इससे पहले एंटरटेनमेंट वेबसाइट ‘जूम’ को दिए इंटरव्यू में राखी सावंत ने कहा था, “देखिए इसके बारे में तो मैं कुछ भी नहीं बोलना चाहूँगी। आदिल मुझे नहीं अपनाएँगे तो लव जिहाद ही होता है। अगर वो मुझे अपना लेंगे तो लव मैरिज होता है। निकाह होता है।”

उन्होंने आगे कहा है, “मैं अल्लाह से यह गुजारिश करूँगी कि मैंने आपको अपनाया है खुदा। मुझे तो नहीं पता क्या है। मैंने सच्चे मन से निकाह किया है। या तो आदिल मुझे अपना ले या आप मुझे ऊपर उठा लो। बस अब ये कलंक मुझसे सहन नहीं होता। ये मेरा प्यार है कलंक नहीं है। मैंने निकाह किया है। ये कोई कलंक नहीं है। सच्चाई से जीना चाहती हूँ। या आदिल मुझे अपना ले या खुदा मुझे मौत दे दे।”

गौरलतब है कि 11 जनवरी 2023 को सोशल मीडिया पर राखी और आदिल खान दुर्रानी की निकाह की तस्वीर वायरल हुई थी। बाद में राखी ने दावा किया था कि उन्होंने ही निकाह की फोटो वायरल की थी, क्योंकि आदिल इस निकाह से इनकार कर रहा था। राखी ने एक यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में यह भी कहा था कि उन्होंने हराम न करके हलाल किया। फिर भी आदिल क्यों निकाह से इनकार कर रहा है, उन्हें समझ नहीं आ रहा है।

‘…तो तुम्हारा BF टीम में रहेगा’: दावा- बाबर आजम ने साथी क्रिकेटर की GF से की सेक्स चैट, जानिए क्या है पूरा माजरा

पाकिस्तान क्रिकेट टीम के कप्तान बाबर आजम को लेकर आज सोशल मीडिया पर कुछ चैट, फोटोज, वीडियो और ऑडियो सामने आए। इन सभी वायरल कंटेंट को लेकर दावा किया गया कि बाबर साथी पाकिस्तानी क्रिकेटर की गर्लफ्रेंड के साथ सेक्स चैट करते हुए हनीट्रैप का शिकार हुए हैं। लेकिन सोशल मीडिया पर जिस यूजर ने यह बखेड़ा शुरू किया उसने अब दावा किया है कि यह एक व्यंग्य था।

बाबर आजम के सेक्स चैट को लेकर बातें निमो यादव नामक एक ट्विटर यूजर के दावों से शुरू हुई थी। इंस्टाग्राम यूजर eish.rajpoot1 ने भी इससे जुड़ी चीज़ें शेयर की थी। यह यूजर कौन है अब तक इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। दूसरी ओर, बाबर आजम के फैंस लगातार दावा कर रहे थे कि फोटो और वीडियो से छेड़छाड़ की गई है। यानी कि ये ओरिजनल नहीं हैं। साथ ही फैंस का दावा था कि यह सब बाबर की छवि को नुकसान पहुँचाने के लिए किया जा रहा है।

बता दें कि इससे पहले बाबर आजम पर हमीजा मुख्तार नाम की महिला ने यौन उत्पीड़न और गर्भपात के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया था। कथित तौर पर यह बात भी सामने आई थी कि बाद में हमीजा ने आरोप वापस ले लिए थे। इसी को देखते हुए जब मीडिया में ये चैट आई तो लोगों ने यकीन कर लिया कि हो सकता है कि बाबर आजम अपने साथी क्रिकेटर की गर्लफ्रेंड से सेक्स चैट कर रहे थे। साथ ही उससे कहा था कि यदि वह उनके साथ रिश्ते में रही तो उसका बॉयफ्रेंड टीम में बना रहेगा।

बाबर आजम के खिलाफ eish.rajpoot1 द्वारा इंस्टाग्राम पोस्ट

बाबर आजम पर आरोप लगाने वाले यूजर ने इंस्टाग्राम पर एक स्टोरी में कहा था, “उम्मीद है कि आपने जो किया वो आपको मिलेगा। क्या आप एक महिला होकर एक महिला को सपोर्ट नहीं कर सकते? आप शोर मचा रहे हैं क्योंकि उसका असली चेहरा सामने आ रहा है। उसने जो किया उसका खामियाजा उसे भुगतना पड़ रहा है। सभी देखेंगे कि कैसे वह 6-7 लड़कियों को एक साथ धोखा दे रहा था। क्या हमें चुपचाप मर जाना चाहिए? मेरे आत्महत्या करने से पहले सच सामने आ जाएगा।”

(फोटो: इंस्टाग्राम)

एक अन्य स्टोरी में यूजर ने लिखा था “अल्लाह की लाठी में आवाज है। सच्चाई सबको पता चल जाएगी। थोड़ा सब्र रखो, रुको और देखो।सच्चाई सामने आ जाएगी। लोग इस व्यक्ति के बचाव में कूद पड़ते हैं। क्या वह ईमानदार है, है ना? वह आपके लिए भगवान है। सबूत दिखाओ अगर वह गलत नहीं है।”

(फोटो: इंस्टाग्राम)

बाबर आजम को लेकर पोस्ट करने वाली इंस्टाग्राम यूजर द्वारा उपयोग की गई भाषा को समझना बेहद कठिन है। यह न तो हिंग्लिश (हिंदी को अंग्रेजी टेक्स्ट में लिखना) और न ही उर्दू अंग्रेजी में लिखी गई थी। हमने इसका अनुवाद करने की पूरी कोशिश की है।

एक वीडियो कॉल रिकॉर्डिंग में आजम का चेहरा दिखाई दे रहा है। वहीं, इस वीडियो कॉल के दूसरी तरफ सिर्फ हाथ दिखाई दे रहा है। इस हाथ में नाखून बड़े दिखाई दे रहे हैं, इससे यह कहा जा सकता है कि शायद वह एक महिला है। हालाँकि, हम सिर्फ ऊँगलियों को देखकर किसी के लिंग की पुष्टि नहीं कर रहे हैं।

एक अन्य वीडियो में आजम कार में बैठे नजर आ रहे हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि वीडियो पोस्ट करने का मकसद क्या था। लेकिन, पोस्ट करने वाले यूजर ने कहा है, “कोई अपनी कजिन से सगाई कैसे कर सकता है। इसके बाद फिर 5-6 गर्लफ्रेंड से कैसे बात कर सकता है? वाह, आपको लगता है कि हीरो को कैसा होना चाहिए? ऐसे हीरो का मर जाना ही बेहतर होगा।”

एक अन्य इंस्टा स्टोरी में यूजर ने आरोप लगाया कि बाबर आजम ने उसकी स्टोरी देखी है।

(फोटो: इंस्टाग्राम)

एक अन्य पोस्ट में दिखाया गया कि बाबर आजम ने लड़की को वॉयस नोट भेजे (यह बाबर की आवाज है या नहीं हम इसकी पुष्टि नहीं कर सकते)। पोस्ट में व्हाट्सएप चैट की स्क्रीन रिकॉर्डिंग थी।

बाबर आजम के खिलाफ कार्रवाई

खबर आने के बाद कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में ऐसी चर्चा शुरू हो गई कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) बाबर आजम को टेस्ट कप्तान के पद से हटाने की योजना बना रहा है। यह भी कहा जा रहा था कि पीसीबी तीनों फॉर्मेट में अलग-अलग कप्तान नियुक्त करने की कोशिश में है। जियो न्यूज ने भी दावा किया था कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड बाबर आजम को कप्तानी से हटाकर तीनों फॉर्मेट में अलग कप्तान नियुक्त करने पर विचार कर रहा है।

ट्विटर यूजर का व्यंग्य

हालाँकि, मीडिया में बाबर की खबरें चलने के बाद डॉ निमो यादव ने ट्वीट किया। उन्होंने कहा, “हमारा मीडिया कितना बेवकूफ है। मीडिया चैनलों ने एक पूरा शो कर दिया वो भी सिर्फ मेरे व्यंग्य वाले ट्वीट पर और बाबर आजम पर गंभीर इल्जाम लगा दिए गए…बिन तथ्यों की जाँच के।”

‘मुस्लिमों के साथ मत खेलो… वे बदला लेंगे’: खामनेई के कार्टून पर ईरान ने शार्ली एब्दो को दी धमकी, कहा- सलमान रुश्दी जैसा हाल होगा

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के प्रमुख मेजर जनरल हुसैन सलामी ने फ्रांस और वहाँ की मशहूर व्यंग्य पत्रिका शार्ली एब्दो के संपादकों को धमकी दी है। कहा है कि उनका हश्र लेखक सलमान रुश्दी जैसा हो सकता है। दरअसल, शार्ली एब्दो पत्रिका में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई पर एक कार्टून पब्लिश किया था। इसी कार्टून को लेकर पत्रिका के संपादकों को धमकी दी जा रही है।

बता दें कि सलमान रुश्दी को साल 1988 में उपन्यास ‘द सैटेनिक वर्सेज’ के प्रकाशन के बाद से ही जान से मारने की धमकियाँ दी जा रही है। इसके कारण वे कई साल छिपकर रहने के लिए मजबूर हो गए थे। साल 1989 में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खुमैनी ने उनके खिलाफ फतवा तक जारी किया था। पिछले साल न्यूयॉर्क में एक कार्यक्रम के दौरान उनपर हमला हुआ था और वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के प्रमुख मेजर जनरल हुसैन सलामी ने शार्ली एब्दो को धमकी देते हुए कहा है, “मैं फ्रांस और शार्ली एब्दो के डायरेक्टर्स को सलमान रुश्दी की हालत पर नजर डालने की सलाह दे रहा हूँ। मुसलमानों के साथ मत खेलो। सलमान रुश्दी ने 30 साल पहले कुरान और इस्लाम के पवित्र पैगंबर का अपमान किया और फिर छिप गए। देर-सवेर, मुसलमान बदला लेंगे और आप बदला लेने वालों को गिरफ्तार कर सकते हैं, लेकिन जो मर जाएगा वह फिर से नहीं उठेगा।”

शार्ली एब्दो पत्रिका के संपादक, लॉरेंट सॉरीसेउ ने इस धमकी का जवाब देते हुए कहा है कि वह ईरान के मौलवियों के कुछ और कार्टून प्रकाशित करेंगे। उन्होंने कहा है “मुल्ला खुश नहीं हैं। ऐसा नहीं लगता कि उनके सर्वोच्च नेता के कार्टून ने उन्हें हँसाया है। एक तरह से यह सम्मान की बात है, लेकिन इन सबसे ऊपर यह साबित होता है कि उन्हें लगता है कि उनका शासक बेहद कमजोर है।”

दरअसल, शार्ली एब्दो ने एक प्रतियोगिता आयोजित की थी। इस प्रतियोगिता में ईरान में चल रहे हिजाब विरोधी प्रदर्शन का समर्थन करने और ईरानी नेता का विरोध करने के लिए कार्टून बनाने के लिए कहा गया था। इस प्रतियोगिता के विजेता द्वारा बनाए गए कार्टून को शार्ली एब्दो ने जारी किया था।

कार्टून पब्लिश होने के बाद ईरान और फ्रांस के बीच तनाव बढ़ गया था। इस तनाव के बाद, फ्रेंच इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च को बंद कर दिया गया। इस इंस्टीट्यूट के बंद होने को ईरान के विदेश मंत्रालय ने कार्टूनों के जवाब में पहला कदम बताया था। साथ ही फ्रांस को सबक सिखाने के लिए कुछ अन्य कदम उठाने की धमकी दी थी।

इन धमकियों के जवाब में, व्यंग्य पत्रिका शार्ली एब्दो ने बीते सप्ताह ईरान का मज़ाक उड़ाते हुए एक और कार्टून तैयार किया। इस कार्टून को पत्रिका ने अपने कवर के रूप में जारी किया। 

कुछ रिपोर्ट्स में बताया गया है कि कार्टून पब्लिश होने के बाद शार्ली एब्दो पर साइबर हमला भी हुआ था। साइबर हमले के जवाब में पत्रिका के संपादक लॉरेंट सॉरीसेउ ने कहा था, “एक डिजिटल हमला किसी को मार नहीं सकता। लेकिन यह टोन सेट करता है। मुल्ला हुकूमत इस कदर खतरा महसूस करती है कि वह अपने वजूद के लिए एक फ्रांसीसी अखबार की वेबसाइट को हैक करना जरूरी समझती है।”

5 सुल्तानों को परास्त किया, नदी में कूद भागी थी इस्लामी फ़ौज: सुबह घंटों व्यायाम करते थे सम्राट कृष्णदेवराय, बनवाए एक से बढ़ कर एक मंदिर

बात उस समय की है, जब जहाँ दिल्ली पर मुगलिया सल्तनत की नींव रखी जा रही थी और दक्षिण में भी कई इस्लामी साम्राज्य मजबूत हो रहे थे। इसी दौरान विजयनगर के रूप में एक ऐसा साम्राज्य फल-फूल रहा था, जिसने दक्षिण भारत में इस्लामी आक्रांताओं को धूल चटाते हुए उनके प्रसार को रोक दिया। विजयनगर साम्राज्य के सबसे बड़े नायक हुए कृष्णदेवराय, जो एक विद्वान कवि होने के साथ-साथ एक कुशल सैन्य रणनीतिकार भी थे।

उन्होंने खुद कई युद्धों में अपनी सेना का नेतृत्व किया और उन्हें जीत दिलाई। आगे बढ़ने से पहले आपको विजयनगर साम्राज्य और कृष्णदेवराय का परिचय दे देते हैं। वीर नरसिंह ने सन् 1505 में तुलुव वंश की स्थापना की थी। उन्होंने सालुव वंश की समाप्ति कर के सत्ता प्राप्त की थी। ये ऐसा काल था जब बहमनी वंश अपना प्रभाव बढ़ाता ही चला जा रहा था। बहमनी, गोलकुंडा और बीजापुर – ये तीन बड़े मुस्लिम राज्य विजयनगर को देखना भी नहीं चाहते थे। इनके अलावा अहमदनगर और बीदर के मुस्लिम सुल्तानों को भी उन्होंने हराया।

सम्राट कृष्णदेव राय उनके छोटे भाई थे। बड़े भाई की मृत्यु के बाद उन्होंने शासन सँभाला और विजयनगर का स्वर्ण युग भी यही रहा। उस समय विजयनगर में सामंतों ने विद्रोह कर रखा था और वो स्वतंत्र शासकों की भाँति व्यवहार कर रहे थे। ओडिशा में गजपति का शासन था। पुर्तगालियों ने समुद्री व्यापार पर कब्ज़ा जमा रखा था। कृष्णदेवराय ने राजनीति, कूटनीति और युद्धनीति – तीनों का प्रयोग करते हुए उन्होंने सारी समस्याओं का समाधान किया।

जिस साल उन्होंने सत्ता सँभाली, उसी साल बहमनी के सुल्तान महमूदशाह ने विजयनगर पर आक्रमण कर दिया। डोनी नामक स्थान पर हुए इस युद्ध में उसे बुरी हार मिली। कोविलकोण्डा तक भागती हुई बहमनी सेना का पीछा किया गया। खुद घायल सुल्तान युद्ध से भाग खड़ा हुआ। इसके बाद हुए युद्ध में बीजापुर का सुल्तान युसूफ आदिल शाह मारा गया। उस समय विजयनगर के आसपास के इस्लामी साम्राज्यों में एकता नहीं थी और अधिकतर आपस में लड़ते रहते थे।

बीजापुर साम्राज्य की स्थापना भी बहमनी से स्वतंत्र होकर की गई थी। ग़ुरबर्गा क्षेत्र पर युसूफ आदिल शाह का शासन था, जिसने बहमनी के सुल्तान महमूद शाह को बंदी बना कर रखा हुआ था। कृष्णदेवराय ने बीजापुर पर आक्रमण कर के बहमनी के सुल्तान को मुक्त कर के उसे फिर से गद्दी पर बिठाया, जिस कारण उन्हें ‘यवन राज्य प्रतिष्ठापनाचार्य’ भी कहा गया। उम्मतूर के विद्रोही सामंत गंगराजा को भी उन्होंने सबक सिखाया। वो भागते हुए मारा गया।

तत्पश्चात उन्होंने ओडिशा का रुख किया। वहाँ 5 वर्षों (1513-18) तक युद्ध चला, जो ओडिशा नरेश की क्षमा -याचना के साथ खत्म हुआ। उन्होंने अपनी बेटी की शादी सम्राट कृष्णदेवराय से कर दी। ओडिशा के युद्ध के बीच ही गोलकुंडा के सुल्तान ने सम्राट को व्यस्त जान कर आक्रमण कर डाला। हालाँकि, सम्राट कृष्णदेवराय ने अपनी सेना भेज कर उसे पराजित किया और उसके द्वारा जीते हुए क्षेत्रों को पुनः जीता। ऐसा ही दुस्साहस बीजापुर के सुल्तान ने किया।

इसके बाद कृष्णदेवराय ने बीजापुर को सबक सिखाने की ठानी। जब युद्ध हुआ तो राजधानी तक तक सम्राट कृष्णदेवराय का कब्ज़ा हो गया। उन्होंने वहाँ बंदी शहजादों को मुक्त कराया। इस तरह तीनों मुस्लिम राज्यों को जीत कर उन्होंने विजयनगर की प्रभुता को स्थापित करने का कार्य किया। उन्होंने गुलबर्गा के किले को भी ध्वस्त कर दिया। कृष्णदेवराय एक महान कवि भी थे, जिन्होंने तेलुगु में ‘आमुक्त माल्यद’ नामक पुस्तक की रचना की।

हालाँकि, उन्होंने पुतर्गालियों के साथ कूटनीति से काम लिया और उनसे युद्ध करने से वो बचते रहे। इसका कारण ये था कि पुर्तगाली, अरबों के दुश्मन थे। पुर्तगालियों ने उन्नत नस्ल के घोड़े विजयनगर को दिए थे, जिनसे युद्ध में उनका पलड़ा इस्लामी साम्राज्यों के ऊपर भारी हो जाता था। सम्राट कृष्णदेवराय ने कई बड़े मंदिरों का निर्माण कराया। उनके दरबार में कई कवि और विद्वान थे। उन्होंने कला को संरक्षण दिया। देश-विदेश से नाटककार वहाँ आते थे।

सम्राट कृष्णदेवराय ने मदुरै में स्थित सुन्दरेश्वरी और मीनाक्षी मंदिर को बड़ा दान दिया। उन्होंने ‘जाम्बवती कल्याणम’ नामक पुस्तक भी लिखी है। उन्होंने दो दशक तक विजयनगर पर शासन किया। उस दौरान पुर्तगाली घोड़ा व्यापारी डोमिंगो पीज उन्हीं के राज्य में रहता था। उसने उनके बारे में कई बातें लिखी हैं, जिससे सम्राट कृष्णदेवराय के मजबूत व्यक्तित्व और प्रभाव का पता चलता है। उनके बारे में पुर्तगाली व्यापारी ने लिखा है कि वो शारीरिक रूप से एकदम फिट थे।

वो तड़के सुबह उठ जाते थे और कई घंटों तक व्यायाम करते थे। घुड़सवारी करते थे और तलवारबाजी का भी कड़ा अभ्यास करते थे। उनके व्यवहार ऐसा होता था कि जो उनसे मिलने आता, वो उनसे प्रेरणा पाता था और प्रभावित हो जाता था। उन्होंने हम्पी में विरुपाक्ष मंदिर बनवाया। उन्होंने पूर्व में अपने अभियान की सफलता के बाद कृष्णास्वामी मंदिर का निर्माण करवाया। हज़ारा रामास्वामी मंदिर के निर्माण का श्रेय भी उन्हें ही जाता है।

रुक्मिणी और पांडुरंगा की जहाँ पूजा होती है, उस विट्ठल मंदिर को हिन्दू धर्म और कला के क्षेत्र में सम्राट कृष्णदेवराय का सबसे बड़ा योगदान माना जाता है। संत व्यासराज की प्रेरणा से उन्होंने इसका निर्माण करवाया। दक्षिण भारत के कई मंदिरों में उन्होंने गोपुरम का निर्माण करवाया। आज भले ही हम्पी वीरान पड़ा हो और इस्लामी अत्याचार का सबूत देता हो, लेकिन ये स्थल सम्राट कृष्णदेवराय के समय इतना विकसित हो गया था कि विदेशी यात्रियों ने इसकी तुलना रोम से की।

उन्होंने ग्रेनाइट से भगवान नरसिंह की एक विशाल मूर्ति का निर्माण भी करवाया। कृष्णभट्ट द्वारा बनवाई गई ये मूर्ति 6.7 मीटर की है। हालाँकि, सन्न 1565 के तालकोटा युद्ध में इस मूर्ति को बड़ा नुकसान पहुँचाया गया था। तिरुपति मंदिर में राजा कृष्णदेवराय की गहरी आस्था थी। उन्होंने वहाँ के मंदिरों को बड़ा दान भी दिया। उन्होंने न सिर्फ मंदिर, बल्कि कई उद्यान, तालाब और बाँध भी बनवाए। किसानों की सहायता के लिए कई विकास कार्य किए।

सम्राट कृष्णदेवराय बड़े दयालु भी थे और अपने घायल सैनिकों की देखभाल की व्यवस्था भी करते थे। साहसी इतने कि उदयगिरि किले के युद्ध में जब पहली पंक्ति टूट गई तो दूसरी पंक्ति का नेतृत्व कर रहे राय ने सैनिकों का मनोभल ऐसा बढ़ाया कि वो दुश्मन पर टूट पड़े और युद्ध में विजय मिली। रायचूर नामक समृद्ध स्थान को लेकर बीजापुर से हुए युद्ध में उनकी रणनीतियाँ तारीफ़ का काबिल रही हैं। रायचूर के युद्ध में उन्होंने लड़ाई के समय ऐसा बाजा बजवाया था कि पुर्तगालियों ने लिखा है कि आसमान जमीन पर गिर पड़े।

रायचूर के किले पर कब्ज़ा करने आई बीजापुर की फ़ौज को उन्होंने ऐसा खदेड़ा कि इस्लामी फौजियों को कृष्णा नदी में कूदना पड़ा। विजयनगर की सेना ने उनका पीछा किया और उनके बीच अपने प्रति भयंकर डर बिठा दिया। पुर्तगालियों ने लिखा है कि वो युद्ध में जीत के बाद तबाही मचाने में विश्वास नहीं रखते थे, इसीलिए भाग रहे सैनिकों की हत्या करने से उन्होंने अपनी सेना को रोक दिया था। कवियों को भी वो काफी दान दिया करते थे।

‘छपरा में फँस गई गंगा विलास क्रूज’: अखिलेश यादव का दावा निकला झूठा, मीडिया ने भी चलाई खबर – जानिए क्या है सच्चाई

विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स में गंगा विलास क्रूज के छपरा में फँसने की रिपोर्ट चलाई जा रही है। बताया जा रहा है कि छपड़ा में गंगा का जलस्तर कम होने की वजह से यह क्रूज फँस गया था। समाजवादी पार्टी के नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक मीडिया संस्थान के हवाले से इस संबंध में ट्वीट कर दिया था। हमने जब फैक्ट चेक किया तो पता चला कि यह खबर पूरी तरह से फर्जी है।

अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए ट्वीट किया, “अब समझ आया क्रूज़ और नाव का फ़र्क़? अब क्या इन यात्रियों को हवाई जहाज़ के माध्यम से ‘वायु विलास’ कराएँगे?”

वहीं भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) के चेयरमैन संजय बंदोपाध्याय ने इस खबर का खंडन किया। उन्होंने ट्वीट कर बताया, “तय कार्यक्रम के मुताबिक गंगा विलास पटना पहुँच गया। शिप के छपरा में फँसने की खबर में बिल्कुल भी सच्चाई नहीं है। शिप शेड्यूल के अनुसार अपनी आगे की यात्रा जारी रखेगा।”

दूसरी और पीआईबी फैक्ट चेक ने भी इस खबर को निराधार बताया है। ट्वीट में कहा गया है कि ANI ने दावा किया था कि कम पानी की वजह से क्रूज छपरा में फँस गई थी। यह दावा फर्जी है। क्रूज नहीं फँसा था और तय समय के अनुसार पटना पहुँच गया था।

केन्द्रीय बंदरगाह एवं  जहाजरानी मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने ट्वीट कर NDTV का एक एक वीडियो शेयर किया। वीडियो में चैनल की एंकर ने क्रूज के मालिक राज सिंह से बातचीत की है। राज सिंह कहते हैं कि यह खबर पूरी तरह से फर्जी है, शिप पटना पहुँच गई है। शिप अपने मुख्य चैनल में ही थी।

उन्होंने आगे कहा, “शिप सारण के चिरांद के पास रुका और कम पानी और बड़े शिप होने की वजह से इसे इसे किनारे नहीं ले जाया जा सकता। पर्यटकों को वहाँ से लाया गया। यह एक सामान्य प्रक्रिया है। हम पटना में भी क्रूज को जेट्टी के पास सुरक्षा कारणों से नहीं ले गए। यह भी एक सामान्य प्रक्रिया है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है।”

फैक्ट चेक करने के बाद हम इस नतीजे पर पहुँचे की गंगा विलास क्रूज के छपरा में फँसने की बात गलत है। क्रूज बिना किसी अवरोध के अपने तय समय से चल रही है।

‘हम दखल नहीं दे सकते, हाईकोर्ट जाइए’: सुप्रीम कोर्ट ने जोशीमठ पर सुनवाई से दूसरी बार किया इनकार, ‘राष्ट्रीय आपदा’ घोषित करने की थी माँग

उत्तराखंड के जोशीमठ में जमीन धँसने के कारण पैदा हुए संकट को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल हुई थी। इस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (16 जनवरी, 2023) को कहा है कि मामले की सुनवाई हाई कोर्ट में चल रही है। इसलिए, इसमें दखल देना सही नहीं है। इसके साथ ही, कोर्ट ने कहा है कि याचिकाकर्ता चाहें तो हाई कोर्ट जा सकते हैं।

दरअसल, शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वारानंद सरस्वती ने जोशीमठ में जमीन धँसने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस याचिका में उन्होंने इस संकट को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने समेत कई माँग की थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस पी एस नरसिम्हा की बेंच ने कहा है कि यह मामला उत्तराखंड हाई कोर्ट में पहले ही लंबित है। याचिकाकर्ता को अपनी बात वहीं चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा है, “सैद्धांतिक रूप से, हमें हाई कोर्ट को इससे निपटने की अनुमति देनी चाहिए। यदि मामला हाईकोर्ट के संज्ञान में है, तो हम हस्तक्षेप नहीं कर सकते। हम आपको हाई कोर्ट जाने की स्वतंत्रता देंगे।” इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि उनकी याचिका जोशीमठ में रहने वालों को राहत देने और उनके पुनर्वास से संबंधित है। वहीं, उत्तराखंड हाई कोर्ट में जोशीमठ शहर में बन रहे हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर प्लांट को लेकर याचिका दायर की गई है।

याचिकाकर्ता के वकील की इस टिप्पणी पर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा “आप सोशल मीडिया साउंड बाइट्स के लिए इस मुद्दे का उपयोग नहीं सकते। हाई कोर्ट के आदेश से, ऐसा लगता है कि उठाए गए मुद्दे पहले ही वहाँ चल रहे हैं। यदि आपके पास इसके अलावा कोई अन्य मुद्दा है, तो उन मुद्दों के साथ आपको हाई कोर्ट जाने की अनुमति है।”

चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने यह भी कहा है, “12 जनवरी को हाई कोर्ट ने इस मामले में आदेश पारित किए हैं। हाई कोर्ट ने विशेषज्ञ कमिटी के गठन पर भी जवाब माँगा है। सरकार और NTPC को जोशीमठ में निर्माण फिलहाल बंद रखने के लिए भी कहा है। हमें लगता है कि याचिकाकर्ता को वहीं अपनी बात रखनी चाहिए।”

गौरतलब है कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वारानंद सरस्वती ने उक्त याचिका दायर कर सुप्रीम कोर्ट से तत्काल सुनवाई करने की अपील की थी। हालाँकि, कोर्ट ने 10 जनवरी, 2023 को तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए कहा था कि हर चीज को कोर्ट में लाने की आवश्यकता नहीं है। इसे देखने के लिए लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित संस्थाएँ हैं।

बता दें कि स्वामी अविमुक्तेश्वारानंद सरस्वती ने इस जनहित याचिका में जोशीमठ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने और प्रभावितों को आर्थिक सहायता देने की अपील की थी। इस याचिका में, यह भी माँग की गई थी कि सुप्रीम कोर्ट जोशीमठ संकट से निपटने और वहाँ चल रहे निर्माण कार्य में सहयोग करने के लिए केंद्र सरकार को निर्देश दे।

TheWire है बिकाऊ, पैसे लेकर छापी रिपोर्ट… खतरे में जिंदगी: ब्रह्मपुरी के वकील ने सुनाई आपबीती, बढ़ती मुस्लिम आबादी के कारण बेच रहे घर

हाल ही में ‘The Wire’ समेत कुछ मीडिया संस्थानों ने दावा किया था कि दिल्ली के ब्रह्मपुरी में एक पोस्टर चिपकाया गया है, जिस पर हिन्दुओं से अपील की गई है कि वो मुस्लिमों को अपना घर ने बेचें दावा किया गया था कि ये पोस्टर अधिवक्ता प्रदीप शर्मा ने चिपकाया है। इसमें ब्रह्मपुरी स्थित गली संख्या 13 का पता लिखा हुआ है। हालाँकि, जब हमने ग्राउंड पर जाकर तहकीकात की तो कुछ और ही पता चला। प्रदीप शर्मा ने ऐसा कोई भी पोस्टर लगाने से इनकार किया है।

हमने उस शख्स को खोज निकाला, जिनका नाम इस पोस्टर में दिख रहा है। अधिवक्ता प्रदीप शर्मा कड़कड़डूमा कोर्ट में प्रैक्टिस करते हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस पोस्टर से उनका कोई संबंध नहीं है और उनके नाम का दुरुपयोग किया जा रहा है। वकील ने कहा कि पोस्टर में जो लिखा है, उसके बारे में उन्हें न तो इसके बारे में कुछ पता है और न ही उनका कुछ लेनादेना है। उन्होंने कहा कि उन्हें फ़िलहाल किसी पर शक नहीं है, लेकिन उन्होंने पुलिस में अज्ञात के विरुद्ध शिकायत दे दी है।

‘The Wire’ की इस खबर को अधिवक्ता प्रदीप शर्मा ने करार दिया झूठ

हालाँकि, उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ ‘रेसिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA)’ यहाँ बने हुए हैं, जो चाहते हैं कि मुस्लिमों की जनसंख्या न बढ़े और हिन्दुओं का पलायन रुके। लेकिन, उन्होंने ये भी कहा कि इस तरह की अपील करनी भी है तो लोग अपने नाम से करें, उनके नहीं। उन्होंने कहा कि RWA खुद अपने नाम से अपील जारी करे, अगर करना ही है तो। उन्होंने कहा कि किसी का नाम लेकर इस तरह सोशल मीडिया में उसे ट्रॉल करवाना सही नहीं है।

अधिवक्ता प्रदीप शर्मा उस्मानपुरी थाने भी पहुँचे, शिकायत का ज्ञापन लेकर। उन्होंने बताया कि वो अपनी तहरीर देने थाने में आए हैं, ताकि पता लगाया जाए कि किन अज्ञात लोगों ने इस पोस्टर को लगवाया है, जिस कारण उन्हें परेशान किया जा रहा है और उनके परिवार को धमकी मिल रही है। उन्होंने कहा कि ‘मुस्लिम पार्टियाँ’ (घर खरीदने वाली) इस पोस्टर को देख कर पीछे हट गई हैं, जिस कारण स्थानीय मुस्लिम नेता/प्रॉपर्टी डीलर उन्हें धमकी दे रहे हैं।

उन्होंने अपने परिवार को खतरा होने की आशंका जताई। वकील का कहना है कि उन्हें खुद इस पोस्टर के बारे में तब पता चला, जब उन्हें सोशल मीडिया के जरिए इसकी तस्वीर भेज कर उन्हें धमकी दी गई। उन्होंने बताया कि डीसीपी के अलावा लोकल थाने को भी उन्होंने शिकायत दी है। ‘The Wire’ के संबंध में उन्होंने कहा कि उनका पहला इंटरव्यू ऑपइंडिया में ही आ रहा है और ‘The Wire’ का तो उन्होंने नाम तक नहीं सुना है।

अधिवक्ता प्रदीप शर्मा ने कहा, “मेरा बयान ‘The Wire’ में कैसे आया, मैं खुद इससे अनभिज्ञ हूँ। उन्होंने किस तरह से मेरे खिलाफ सारी खबर दी है, उसके बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। ‘The Wire’ ने जो भी लिखा हो, वो मेरे शब्द ही नहीं हैं। मैंने कोई इंटरव्यू दिया ही नहीं। अलग से कुछ पत्रकारों के इस संबंध में फोन आए थे, जिन्हें मैंने बताया कि इससे मेरा कोई संबंध नहीं। ‘The Wire’ जैसे बिकाऊ चैनल को किसी ने पैसे देकर मेरे विरुद्ध खबर छपवाई है।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका बयान लेने ‘The Wire’ से कोई आया ही नहीं, लेकिन उन्होंने मुझ पर नफरत फैलाने का इल्जाम लगाते हुए ये कह दिया कि मैं हिन्दुओं को रोक रहा हूँ कि वो अपने मकान मुस्लिमों को न बेचें। प्रदीप शर्मा का कहना है कि बतौर अधिवक्ता वो क्लाइंट को बचाना अपना फर्ज समझते हैं और कई मुस्लिम आरोपितों को भी उन्होंने बचाया है मुकदमा लड़ के। उन्होंने कहा कि वो पेशे में कभी हिन्दू-मुस्लिम नहीं देखते।

वकील प्रदीप शर्मा जन्म से ही ब्रह्मपुरी में रह रहे हैं और सन् 1962 में उनके पिता ने ये मकान खरीदा था। उन्होंने बताया कि अपने परिवार की सुरक्षा को देखते हुए घर बेचने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि 2020 (जब दंगे हुए थे) जैसी स्थिति आई तो तब कुछ ही घर मुस्लिमों के थे, आज काफी हैं। उन्होंने बताया कि हिन्दू लगातार यहाँ से पलायन कर रहे हैं और 10-15 हिन्दू परिवार पलायन कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि फरवरी 2020 में मंदिर पर हमला हुआ था, उनके घर के आगे गोलियाँ चली थीं और घर के दरवाजे तोड़ने की कोशिश की गई थी।

उन्होंने बताया कि 5-6 साल पहले यहाँ मस्जिद बनी थी, जिसके बाद से यहाँ मुस्लिमों की जनसंख्या बढ़ने लगी। अधिवक्ता ने बताया कि ये कभी किसी ब्राह्मण का घर हुआ करता था, जिसे बेचे जाने के बाद मस्जिद बना दी गई। उन्होंने कहा कि इसके लिए कभी मना नहीं किया गया। साथ ही कहा कि नमाज के समय बाहरी मुस्लिम बड़ी संख्या में आते हैं और हर जुमे को 500-700 लोग आते हैं। लाउडस्पीकर से अजान भी होती है।

प्रदीप शर्मा पिछले 2-3 साल से मकान बेचने की कोशिश कर रहे हैं और जो उन्हें सही पैसे देगा उसे बेच देंगे, चाहे वो हिन्दू हो या मुस्लिम। असल में उनके घर में एक मंदिर बना हुआ है, जिस कारण घर बेचने में उन्हें तकलीफ हो रही है। उन्होंने अंदेशा जताया कि इसी कारण ये शरारत की गई हो सकती है, क्योंकि हिन्दू तो पलायन कर रहे हैं और घर खरीदने आ रहे हैं, वहीं मुस्लिम मंदिर के कारण घर खरीदने से इनकार कर देते हैं।

उन्होंने अपनी योजना बताते हुए कहा कि वो घर से मंदिर को हटाने के लिए तैयार हैं, ताकि ये बिक जाए। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में 30% हिन्दू हैं और 70% मुस्लिम हैं। उन्होंने कहा कि हिन्दू ही मुस्लिमों को सुरक्षा करते हैं और जब मुस्लिम घर छोड़ कर गए थे तब कई हिन्दुओं ने उनकी सुरक्षा की – न कोई आगजनी हुई, न हिंसा। उन्होंने कहा कि हिन्दू सहिष्णुता का परिचय देता है और वो कभी भी असहिष्णु नहीं होता है।