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मुख्य दागदार पर ‘कृपा’, रमन सिंह जैसों को फँसाने के लिए CM बघेल ने बनाई ‘हिटलिस्ट’: छत्तीसगढ़ में नान घोटाले की जाँच पर हो रहा खेल दस्तावेजों-चैट से बेनकाब

वर्ष 2015 में जब छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी की सरकार थी और डॉ. रमन सिंह मुख्यमंत्री थे। उस वक्त कॉन्ग्रेस ने आरोप लगाया था कि पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS) के तहत खराब गुणवत्ता वाले अनाज का वितरण किया जा रहा है। कॉन्ग्रेस ने अधिकारियों पर राइस मिल मालिकों से रिश्वत ले कर घटिया क्वालिटी के चावल खरीदकर बाँटने का आरोप लगाया। छत्तीसगढ़ में नागरिक आपूर्ति निगम (NAN) सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत खाद्यान्न खरीदकर लोगों को राशन बाँटने का काम करती रही है। तात्कालिक भाजपा सरकार ने नागरिक आपूर्ति निगम घोटाले की जाँच शुरू की। मुख्य आरोपित अनिल टुटेजा और आलोक शुक्ला समेत 27 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। बाद में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच भी शुरू की और 2015 में चार्जशीट दायर की गई। तब तक छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में भाजपा हार जाती है और कॉन्ग्रेस सत्ता में आ जाती है।

घोटाले का मुख्य आरोपित अनिल टुटेजा अब तक किए गए जाँच पर लगातार सवाल उठा रहे थे। भूपेश बघेल ने सत्ता संभालने के बाद NAN घोटाले की जाँच के लिए एसआईटी का गठन किया। ऐसे कई सबूत सामने आए हैं जो यह साबित करते हैं कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल व्यक्तिगत रूप से मुख्य आरोपी अनिल टुटेजा का बचाव कर रहे थे। साथ ही बघेल पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह को घोटाले में फँसाने की कोशिश कर रहे थे। साल 2020 में टुटेजा को जमानत मिल गई और बघेल सरकार ने उन्हें वाणिज्य और उद्योग विभाग के संयुक्त सचिव (Joint Secretary for Commerce and Industries) और आलोक शुक्ला को शिक्षा और अन्य विभागों का प्रभारी प्रधान सचिव (Principal Secretary in charge of Education and other departments) बना दिया।

साल 2015 में कॉन्ग्रेस ने ही सबसे पहले NAN घोटाले के आरोप लगाए थे। जैसे-जैसे जाँच आगे बढ़ी इसमें कॉन्ग्रेस के ही पदाधिकारी फँसते नजर आए। यहाँ तक कि मुख्यमंत्री बघेल खुद आरोपित अनिल टुटेजा का बचाव करते पाए गए।

ऑपइंडिया को प्राप्त एक्सक्लूसिव व्हाट्सएप चैट से हुआ खुलासा

फरवरी 2020 में आयकर विभाग द्वारा छापेमारी के दौरान आईपीएस अनिल टुटेजा और उनके बेटे यश टुटेजा के फोन जब्त कर लिए गए थे। व्हाट्सएप पर टुटेजा के दूसरे अधिकारियों के साथ चैट में विभाग को कई अहम जानकारियाँ मिली हैं। ऑपइंडिया के पास भी यह एक्सक्लूसिव व्हाट्सएप उपलब्ध है। चैट में टुटेजा के एसआरपी कल्लूरी, इंदिरा कल्याण एलेसेला, जीपी सिंह और आरिफ शेख जैसे अधिकारियों के साथ की गई बातचीत उपलब्ध है। चैट में उपलब्ध बातचीत से यह साफ हो गया है कि अनिल टुटेजा और उनके बेटे यश टुटेजा के इशारे पर राज्य में आपराधिक न्याय प्रणाली का जमकर दुरुपयोग किया गया। व्हाट्सएप चैट से यह भी स्पष्ट होता है कि कैसे राज्य के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी NAN घोटाले के मुख्य अभियुक्तों के सहायक बनकर रह गए हैं। चैट से पता चलता है कि राज्य के अधिकारी, आरोपित टुटेजा के साथ मिलकर उनके केस को कमजोर करने और उनके विरोधियों पर मुकदमा दर्ज कराने की साजिश रच रहे थे।

राज्य के एक प्रमुख आईपीएस अधिकारी जीपी सिंह द्वारा दिए गए शपथ पत्र और अनिल टुटेजा के साथ हुई व्हाट्सएप चैट से भी मामले में कई चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। जानकारी के मुताबिक अनिल टुटेजा, उनके बेटे यश टुटेजा, अन्य बड़े पुलिस अधिकारियों और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मिलकर राजनीतिक विरोधियों की एक हिटलिस्ट तैयार की थी। मुख्यमंत्री बघेल न सिर्फ टुटेजा की मदद कर रहे थे बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह, उनके परिवार के लोगों, पूर्व प्रमुख सचीव अमन सिंह उनकी पत्नी यास्मीन सिंह, पूर्व डीजी (पुलिस) मुकेश गुप्ता, अशोक चतुर्वेदी और चिंतामणि चंद्राकर जैसे अधिकारियों को भी फँसाने की कोशिश कर रहे थे।

व्हाट्सएप चैट से सामने आ रही जानकारी के मुताबिक राज्य के पुलिस महानिदेशक ने अनिल टुटेजा के बेटे को पुलिस विभाग में तबादलों और पोस्टिंग जैसे निर्णयों में शामिल होने दिया। इतना ही नहीं पुलिस विभाग में अधिकारियों के तबादले, पोस्टिंग और निलंबन इस तरह किए गए कि इसका फायदा अनिल टुटेजा को मिले। इसके अलावा NAN घोटाला मामले में अभियोजन पक्ष (prosecution) और जाँच एजेंसी की हर रणनीति या तो अनिल टुटेजा तय करते या उनके बेटे यश टुटेजा। कुल मिलाकर कहें तो व्हाट्सएप चैट से पता चलता है कि एसआरपी कल्लूरी, कल्याण एलेसेला, जीपी सिंह, डीएम अवस्थी (उस वक्त के डीजीपी) और आरिफ शेख जैसे अधिकारी अनिल टुटेजा के इशारों पर नाच रहे थे।

चैट से पता चलता है कि किस तरह छोटे-छोटे एहसानों के बदले आईपीएस अधिकारी इंदिरा कल्याण एलेसेला हाई कोर्ट में मुख्य आरोपित अनिल टुटेजा द्वारा संशोधित और प्रभावित की गई स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर रहे थे। चैट से यह भी पता चलता है कि EOW/ACB के प्रमुख के रूप में कल्लूरी की जगह लेने वाले एडीजी जीपी सिंह न सिर्फ आरोपित अनिल टुटेजा के हितों का ध्यान रखते हुए सुप्रीम कोर्ट के प्रस्तावित आदेश का मसौदा तैयार कर रहे थे, बल्कि अनिल टुटेजा के हवाला ऑपरेटर के रूप में भी काम कर रहे थे।

मजे की बात यह है कि जिस जीपी सिंह को NAN मामले में अनिल टुटेजा का साथ देने और जाँच की दिशा बदलने में मदद करने व मुकेश गुप्ता और अमन सिंह जैसे अधिकारियों के खिलाफ खड़े होने के लिए एडीजी रैंक पर पदोन्नति दी गई। उन्हीं जीपी सिंह को छत्तीसगढ़ की कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा न सिर्फ निलंबित किया गया बल्कि कई एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तार भी कर लिया गया। जीपी सिंह ने अब सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर कहा है कि उनपर इसलिए कार्रवाई की जा रही है क्योंकि वे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा दी गई राजनीतिक हिटलिस्ट को निशाना बनाने में विफल रहे थे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की तरफ से उन्हें रमन सिंह, उनकी पत्नी वीणा सिंह, उनके बेटे अभिषेक सिंह, पूर्व प्रधान सचिव अमन सिंह व उनकी पत्नी यास्मीन सिंह, मुकेश गुप्ता, पुनीत गुप्ता, अशोक चतुर्वेदी और चिंतामणि चंद्राकर जैसे लोगों को घोटाले में फँसाने के लिए कहा गया था। यह आरोप इसलिए भी प्रसांगिक है क्योंकि जब जीपी सिंह ईओडब्ल्यू के प्रभारी थे तब मुकेश गुप्ता, अमन सिंह और उनकी पत्नी यास्मीन सिंह के खिलाफ अनिल टुटेजा की मिलीभगत से एफआईआर दर्ज की गई थी। जैसा कि व्हाट्सएप रिकॉर्ड से स्पष्ट हो रहा है।

18 नवंबर 2021 की टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक ईडी ने हाईकोर्ट द्वारा NAN घोटाले में अभियुक्त आईएएस अनिल टुटेजा को अग्रीम जमानत दिए जाने का विरोध किया था। टुटेजा की जमानत का विरोध कर रहे ईडी की तरफ से दी गई अर्जी से भी इस बात का पता चलता है कि कैसे टुटेजा राज्य सरकार और दूसरे अधिकारियों के साथ मिलकर जाँच को प्रभावित कर रहे थे।

आईटी विभाग द्वारा जब्त व्हाट्सएप चैट से खुलासा हुआ है कि मुख्य आरोपित अनिल टुटेजा, आलोक शुक्ला, आर्थिक अपराध शाखा (EOW) व एंटी करप्शन ब्योरो (ACB) के नए चीफ और उच्च न्यायालय के वरिष्ठ कानून अधिकारी इन सब की मिलीभगत चल रही थी। मुख्यमंत्री ने हस्तक्षेप कर एसआईटी की रिपोर्ट अपने अनुकूल बनवाया। इधर गवाहों को धमका कर भ्रष्टाचार के केस को कमजोर कर दिया गया।

व्हाट्सएप संदेशों के अध्ययन से स्पष्ट होता है कि किस तरह एक केस को प्रभावित करने के लिए सत्ता का दुरुपयोग हुआ। सबूतों के साथ छेड़-छाड़ किया गया और गवाहों को प्रभावित करने के लिए साजिश रची गई जिसमें संवैधानिक पदों पर बैठे अधिकारी भी शामिल हैं।

प्रवर्तन निदेशालय ने ट्रांसक्रिप्ट (व्हाट्सएप चैट) की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए इसे सीलबंद लिफाफे में अदालत में पेश किया। ऑपइंडिया का मानना है कि उच्च पदस्थ सरकारी अधिकारियों के भ्रष्ट गठजोड़ को छिपाने वाला गोपनीयता का पर्दा जनता के हित में नहीं है और इस तरह के पर्दे का फायदा अनिल टुटेजा जैसे अधिकारी उठाते हैं। जैसे NAN मामले में आरोपित आईपीएस अधिकारियों ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल,अन्य नेताओं और दूसरे भ्रष्ट अधिकारियों की सहायता से राज्य के न्याय व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रिया को रौंद दिया।

ऑपइंडिया को प्राप्त चैट से साबित होता है कि मुख्यमंत्री और मुख्य आरोपी अनिल टुटेजा के इशारे पर कॉन्ग्रेस सरकार के पदाधिकारी डॉक्टर रमन सिंह और उनकी पत्नी को फँसाने के लिए सबूत गढ़ रहे थे और गवाहों को धमका रहे थे। चैट से यह भी पता चलता है कि आरोपित होने के बाद भी अनिल टुटेजा NAN जाँच के प्रमुख के रूप में काम कर रहे थे, इतना ही नहीं वे आईपीएस अधिकारियों के स्थानांतरण, पदोन्नति और महत्वपूर्ण फैसलों को भी प्रभावित कर रहे थे जिनसे केस पर असर पड़ रहा था। चैट से पता चलता है कि उनकी सहायता न करने वाले अधिकारियों को दंडात्मक पोस्टिंग दी जा रही थी। कुछ को झूठे मामलों में फँसाया जा रहा था।

आरोपितों के जमानत से पहले हाईकोर्ट जज से मिले थे सीएम बघेल – ईडी, व्हाट्सएप चैट से भी हो रही है पुष्टि

19 अक्टूबर 2022 को छत्तीसगढ़ के NAN घोटाला मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में ईडी ने दावा किया कि मुख्य आरोपितों अनिल टुटेजा और आलोक शुक्ला की राज्य सरकार के बड़े अधिकारियों के साथ मिली भगत है। जो उन्हें बचाने की कोशिश में लगे हैं। ईडी ने मामले को राज्य से बाहर ट्रांसफर करने की अपील की थी।

रिपोर्ट में हम जिन चैट के हवाले से अपने तथ्य रख रहे हैं उनमें से एक में जीपी सिंह (GP) अनिल टुटेजा (NAN घोटाले के मुख्य आरोपी) से बात कर रहे हैं। चैट में जीपी सिंह, अनिल टुटेजा के खिलाफ मामले में गवाहों के नाम भेज रहे हैं। जीपी सिंह आरोपित टुटेजा से कहते हैं कि “तमरकार” (NAN का कर्मचारी), को बाहर निकाल दिया जाना चाहिए क्योंकि वह चिंतामणि (NAN का एक अन्य कर्मचारी) का समर्थन करता है। इसके आगे, जीपी सिंह टुटेजा से कहते हैं कि चिंतामणि को भी और लात मारने की जरूरत है।

NAN घोटाले की जाँच के दौरान छापेमारी में बरामद डायरी के एक नोट में “सीएम सर” का जिक्र है। उस नोट में “सीएम सर” का अर्थ चिंतामणि (Chinta mani) है। हालाँकि, बाद में यह बात सामने आई कि सीएम बघेल ने गवाहों पर दबाव डालते हुए “सीएम सर” को डॉ. रमन सिंह साबित करने की कोशिश की। (NAN घोटाला रमन सिंह के मुख्यमंत्री रहते सामने आया था ) मुख्यमंत्री बघेल की कशिश थी कि इस सबूत का इस्तेमाल यह साबित करने में किया जाए कि रमन सिंह ने रिश्वत ली थी।

दिलचस्प बात यह है कि इस चैट के कुछ दिनों बाद ही NAN कर्मचारी चिंतामणि के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई ताकि उसपर यह स्वीकार करने का दबाव बन सके कि ‘सीएम सर’ वास्तव में डॉ. रमन सिंह थे, न कि वह खुद।

व्हाट्सएप चैट

ईडी का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कहा था कि मामले के मुख्य आरोपी (टुटेजा) को जमानत मिलने से कुछ दिन पहले हाई कोर्ट के जज ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मुलाकात की थी। तुषार मेहता ने तत्कालीक सीजेआई यूयू ललित, जस्टिस अजय रस्तोगी और एस रवींद्र भट की बेंच के सामने यह दावा किया था। ईडी ने आरोपित को बचाने के लिए सीएम भूपेश बघेल और अन्य बड़े पदाधिकारियों की सक्रिय मिलीभगत के सामने आने के बाद ही मुकदमे को राज्य से बाहर स्थानांतरित करने का अनुरोध किया था। आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ राज्य सरकार का पक्ष कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल रख रहे थे।

तुषार मेहता ने अपने आरोपों को सिद्ध करने के लिए कोर्ट में एक व्हाट्सएप चैट को पढ़ा था। चैट की बातों से सीएम बघेल और हाई कोर्ट के जज के मुलाकात की पुष्टि हो रही थी।

एसजी तुषार मेहता ने कहा- “कृपया इसे देखें – मैं सोच रहा था कि क्या HCM उनके साथ बात कर सकते हैं।” HCM का मतलब माननीय मुख्यमंत्री (Hon’ble Chief Minister) है। “वह HCM से मिले हैं”। यह 11 अक्टूबर 2019 को हुआ और उसके बाद जमानत दी गई। उपरोक्त बातें आरोपित सहआरोपित को बता रहा है। “AG को आवश्यक निर्देश दिए गए। फिर वे एक दूसरे को बधाई देते नजर आए।”

इस टाइमलाइन की पुष्टि उन चैट्स से भी होती है जिन्हें ऑपइंडिया ने प्राप्त किया है। जीपी सिंह (जीपी) ने एटी (अनिल टेटुजा) को मैसेज कर बताया कि आलोक शुक्ला (दूसरे सह आरोपी) को जमानत मिल गई है। जवाब में टेटुजा, जीपी सिंह को बधाई देते हैं। जिससे जीपी सिंह (उस समय EOW के प्रमुख), कॉन्ग्रेस सरकार के पदाधिकारियों, EOW और NAN घोटाले के मुख्य आरोपी के बीच स्पष्ट मिलीभगत के संकेत मिलते हैं।

व्हाट्सएप चैट

वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अदालत में कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कभी भी हाई कोर्ट के किसी न्यायाधीश से नहीं मिले। मुख्य आरोपित को बचाने के लिए मुख्यमंत्री और राज्य के पदाधिकारियों के बीच कोई मिलीभगत नहीं है। ईडी ने मुख्यमंत्री बघेल, अनिल टुटेजा और आलोक शुक्ला पर जाँच प्रभावित कर NAN घोटाले में अपने सुविधानुसार मसौदा रिपोर्ट लिखवाने जैसे आरोप भी लगाए थे। इन आरोपों को भी कपिल सिब्बल ने खारिज कर दिया।

लेकिन ऑपइंडिया के पास उपलब्ध व्हाट्सएप चैट से ईडी के आरोप सही साबित होते हुए नजर आते हैं। इसी सिलसिले में हम कल्याण एलेसेला और अनिल टुटेजा के बेटे यश टुटेजा के बीच हुई व्हाट्सएप चैट का उल्लेख कर रहे हैं। कल्याण एलेसेला EOW के एसपी थे। उनके समय में ही एसआरपी कल्लूरी, जीपी सिंह और आरिफ शेख EOW के चीफ रहे जिन्होंने रमन सिंह और उनके परिवार के लोगों को घोटाले में घसीटने की कोशिश की। यश टुटेजा, कल्याण एलेसेला को एक ड्राफ्ट (स्टेटस रिपोर्ट) भेजते हुए कह रहे हैं,”इस स्टेटस रिपोर्ट को 3 बजे से पहले भर देना है।” इस पर एलेसेला जवाब देते हैं कि आपको यह रिपोर्ट पहले भेजनी चाहिए थी। कल्लूरी सर (EOW प्रमुख) को भी यह ड्राफ्ट देखनी होगी। इस पर यश कहता है कि कल्लूरी को सिर्फ इनपर हस्ताक्षर करने हैं। यह इंगित करता है कि उच्च न्यायालय में दायर की जाने वाली EOW की स्टेटस रिपोर्ट का मसौदा भी मामले के मुख्य अभियुक्त द्वारा तैयार किया जा रहा था।

व्हाट्सएप चैट

2021 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में आरोपियों के बीच हुई चौंकाने वाली बातचीत पेश की। मिली जानकारी के मुताबिक कोर्ट को बताया गया कि नागरिक आपूर्ति निगम (NAN) घोटाले के प्रमुख आरोपी अनिल टुटेजा और आलोक शुक्ला ने न केवल घोटाले में अपनी भूमिका की जाँच के लिए एसआईटी के गठन में पसंद के ऑफिसर्स की तैनाती करवाई बल्कि अपने खिलाफ मामले को कमजोर करने के लिए मामले की जाँच प्रभावित की और मसौदा रिपोर्ट में बदलाव किया।

इस लेख में अब तक हमने जिन व्हाट्सएप चैट का जिक्र किया है, उससे यह स्पष्ट हो जाता है कि ईडी द्वारा लगाए गए आरोप सही हैं। ईडी द्वारा कोर्ट को सौंपे गए हजारों पन्नों के दस्तावेज में एक प्रमुख नाम हैं आईपीएस अधिकारी जीपी सिंह। जीपी सिंह भी रमन सिंह व अन्य को घोटाले में फँसाने की साजिशकर्ताओं में से एक हैं। छत्तीसगढ़ में जब भाजपा की सरकार थी उस वक्त भी जीपी सिंह के पास अच्छी पोस्टिंग थी। फिर जब कॉन्ग्रेस सत्ता में आई तो उन्हें आर्थिक अपराध शाखा (EOW) का प्रमुख बना दिया गया। लेकिन जब जीपी सिंह पूर्व सीएम रमन सिंह, मुकेश गुप्ता, अमन सिंह और अन्य लोगों के नाम NAN घोटाले से नहीं जोड़ सके तो उन्हें इसकी सजा भी दी गई। जीपी सिंह को बाद में पोस्ट से हटा दिया गया। कथित तौर पर कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा उनपर झूठे मामले दर्ज करा दिए गए।

आपको बता दें मुकेश गुप्ता और अमन सिंह दो ऐसे आईपीएस अधिकारी हैं जिन्हें भूपेंद्र बघेल की कॉन्ग्रेस सरकार, डॉ. रमन सिंह के साथ NAN घोटाले में फँसाने की कोशिश कर रही है। जब राज्य में भाजपा की सरकार थी और रमन सिंह मुख्यमंत्री थे उस वक्त मुकेश गुप्ता EOW के प्रमुख थे और उन्होंने एक अन्य घोटाला मामले में कॉन्ग्रेस नेता भूपेश बघेल के खिलाफ जाँच शुरू की थी। रमन सिंह के मुख्यमंत्री रहते अमन सिंह उनके प्रधान सचिव थे। उनके नाम इस लेख में आगे भी दिखाई देंगे। जिससे यह स्पष्ट हो पाएगा कि कैसे उन्हें सीएम भूपेश बघेल द्वारा झूठा फँसाया जा रहा था।

राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार NAN घोटाले के लिए भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहराती है। उनका दावा है कि छापेमारी में बरामद एक डायरी में रमन सिंह का जिक्र है उस वक्त वे राज्य के मुख्यमंत्री थे। उधर जीपी सिंह का दावा है कि उन्हें भूपेश बघेल ने NAN घोटाले में रमन सिंह, उनके परिवार के लोगों और सहयोगियों को फँसाने के लिए कहा था, जब उन्होंने इनकार कर दिया तो उनपर देशद्रोह और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले दर्ज करा दिए गए। ऑपइंडिया द्वारा प्राप्त चैट्स में जीपी सिंह द्वारा मुख्य आरोपी टुटेजा को बचाने और रमन सिंह को फँसाने के लिए की गई कोशिशों का पता चलता है।

कोर्ट में जीपी सिंह की तरफ से दी गई याचिका और सीएम भूपेश बघेल द्वारा जीपी सिंह को दी गई “हिटलिस्ट”

22 दिसंबर, 2022 को जीपी सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर यह जानकारी दी कि किस तरह उन्हें टुटेजा को बचाने और भाजपा नेता को फँसाने के लिए दबाव बनाया गया। ऑपइंडिया के पास उपलब्ध इस याचिका में जीपी सिंह ने अदालत को बताया कि 14 सितंबर, 2019 को उन्हें रात के अंधेरे में मुख्यमंत्री (भूपेश बघेल) के आवास पर बुलाया गया था। इस दौरान NAN घोटाला में प्राप्त सबूतों के आधार पर उन्हें रमन सिंह को फँसाने के निर्देश दिए गए। उनसे कहा गया कि छापेमारी में बरामद डायरी में जिस सीएम सर और सीएम मैडम का उल्लेख है उनका इस्तेमाल रमन सिंह के खिलफ करें। जीपी सिंह ने भूपेश बघेल से कहा कि सीएम सर और सीएम मैडम का अर्थ यहाँ उस वक्त के मुख्यमंत्री नहीं बल्कि NAN में तैनात एक अधिकारी चिंता मणि चंद्राकर है। भूपेश बघेल ने जीपी सिंह को NAN घोटाला मामले में शिव शंकर भट्ट (कर्मचारी) का बयान लेने के लिए कहा। यह शख्स कॉन्ग्रेस सरकार की कृपा से जेल से बाहर आया था।

बकौल जीपी सिंह उनसे कहा गया कि वे शंकर भट्ट का स्टेटमेंट लें। शंकर भट्ट यह स्वीकार करेंगे कि डायरी में उल्लेखित सीएम सर, रमन सिंह के लिए लिखा गया है। भट्ट यह स्टेटमेंट देगा क्योंकि उसे बेल दिलाने में सरकार ने मदद की है। इस पर जीपी सिंह ने कहा कि कानूनन यह सही नहीं होगा। इसके बाद भूपेश बघेल के दबाव में उनसे हलफनामा तैयार करवाया। इस हलफनामें में लिखा गया कि “सीएम सर” का उल्लेख रमन सिंह के लिए ही किया गया है।

जीपी सिंह और सीएम बघेल के बीच आधी रात को हुई बैठक के खत्म होने से पहले जीपी सिंह से NAN घोटाले के मुख्य आरोपी अनिल टुटेजा को जाँच में हुई प्रगति के बारे में सूचित करने के लिए कहा गया था। इसके बाद भी टुटेजा ने जाँच के अपडेट्स और दूसरे कार्यों के लिए उनसे संपर्क किया। टुटेजा ने भी इस बात पर जोर दिया कि तात्कालीन सीएम रमन सिंह और भाजपा सरकार के पदाधिकारियों को NAN घोटाले में फँसाया जाना चाहिए।

जीपी सिंह का कहना है कि 10 मई, 2020 को उन्हें सीएम भूपेश बघेल के साथ एक निजी बैठक के लिए फिर से बुलाया गया। इस बैठक के दौरान उन्हें एक बार फिर भाजपा नेता रमन सिंह और उनकी पत्नी को NAN घोटाले में फँसाने के निर्देश दिए गए। उन्हें मीडिया के सामने डॉ. रमन सिंह और वीणा सिंह को दोषी ठहराने वाले बयान देने के लिए कहा गया। उनपर जल्दी से जल्दी जाँच खत्म करने का भी दबाव बनाया गया।

जीपी सिंह ने जिस “राजनीतिक हिटलिस्ट” का जिक्र किया था, उसे याचिका के साथ संलग्न कर कोर्ट में जमा कराया गया है।

जीपी सिंह द्वारा प्रस्तुत हिटलिस्ट

याचिका में आगे कहा गया है कि सीएम भूपेश बघेल की उम्मीदों पर खड़ा न उतरने के कारण कुछ ही हफ्तों में उनका तबादला हो गया। याचिका में उन्होंने इसे दंडात्मक तबादला (punishment posting) कहा है।

पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के कार्यकाल के दौरान प्रमुख सचीव रहे अमन सिंह को फँसाने की कोशिश

सीएम भूपेश बघेल ने EOW के तत्कालीन प्रमुख जीपी सिंह को एक हिटलिस्ट सौंपा था। जीपी सिंह उस वक्त अनिल टुटेजा के साथ मिलकर भूपेश बघेल के इशारे पर काम कर रहे थे। बघेल द्वारा सौंपे गए हिटलिस्ट में अमन सिंह और उनकी पत्नी यास्मीन सिंह का नाम प्रमुख था। ऑपइंडिया द्वारा प्राप्त किए गए दस्तावेजों से यह स्पष्ट हो जाता है कि जीपी सिंह और अनिल टुटेजा ने मिलकर अमन सिंह और उनकी पत्नी के खिलाफ मनगढ़ंत मामला दर्ज कराया था। अदालत में जीपी सिंह द्वारा किए गए खुलासे से स्पष्ट है कि कॉन्ग्रेस के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ही जीपी सिंह को अमन सिंह और उनकी पत्नी को फँसाने का निर्देश दिया था। दस्तावेजों में आगे अनिल टुटेजा को केस से निकालने के लिए अधिकारियों के मिलीभगत का जिक्र किया गया है।

सत्ता परिवर्तन के बाद निशाने पर मुख्यतः पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह, उनके प्रधान सचिव अमन कुमार सिंह और उनकी पत्नी यास्मीन सिंह थी। चैट से पता चलता है कि EOW की तरफ से अमन सिंह और यास्मीन सिंह के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में जाँच की जा रही थी। EOW चीफ और अनिल टुटेजा के बीच व्हाट्सएप चैट से स्पष्ट है कि अमन सिंह और उनकी पत्नी को सबक सिखाने के लिए साजिश की जा रही थी। टुटेजा EOW चीफ के हैंडलर की तरह काम कर रहे थे।

व्हाट्सएप चैट में की गई बातों के अनुसार आय से अधिक संपत्ति के मामले में अमन सिंह और यास्मीन सिंह के खिलाफ प्राथमिकी संख्या 09/2020 दर्ज कराई गई। तीन प्राथमिक चैट हैं जो अमन सिंह और उनकी पत्नी को फँसाने की साजिश का खुलासा करती हैं। उदाहरण के तौर पर एक चैट जो 14 जनवरी 2020 की है। इसमें जीपी सिंह, अनिल टुटेजा से कह रहे हैं कि एजेंसियों को निर्देश दिया जाए कि वे EOW को जानकारी उपलब्ध कराएँ। यहाँ यह पूछना उचित होगा कि एडीजी NAN घोटाले के मुख्य आरोपित अनिल टुटेजा को EOW से सूचना उपलब्ध कराने के निर्देश क्यों दिए जा रहे थे और कैसे कॉन्ग्रेस की सरकार में टुटेजा ने इतनी ताकत का इस्तेमाल किया।

व्हाट्सएप चैट

21 अक्टूबर, 2019 को जीपी सिंह और टुटेजा के बीच उपरोक्त चैट से पहले जीपी सिंह ने अनिल टुटेजा को दो दस्तावेज भेजे थे।

व्हाट्सएप चैट

इन संलग्न दस्तावेजों के अध्ययन से पता चलता है कि जीपी सिंह भ्रष्टाचार निवारण के तहत जाँच की स्वीकृति के लिए पत्र भेज रहे थे। पत्र एसपी द्वारा जीएडी को भेजा गया था। जिस दिन यह अनुरोध जीएडी को भेजा गया था उसी दिन इस पत्र को जीपी सिंह ने अनिल टुटेजा को भेज दिया था।

यहाँ चैट में अटैचमेंट की एक तस्वीर है, जिसे अनिल टुटेजा को भेजा गया था।

व्हाट्सएप चैट से भेजा गया अटैचमेंट

एक और दस्तावेज था जो जीपी सिंह ने अनिल टुटेजा को भेजा था, यह उस जानकारी की एक आंतरिक जाँच सूची थी जिसे EOW, GAD से प्राप्त करना चाहते थे। यह चेकलिस्ट EOW डिपार्टमेंट के आंतरिक उद्देश्यों के लिए बनाई गई है। तथ्य यह है कि EOW के प्रमुख इसे NAN मामले के मुख्य आरोपितों को भेज रहे थे जो न केवल अमन सिंह और उनकी पत्नी के खिलाफ रची गई साजिश की कोशिश में मिलीभगत को दर्शा रही हैं बल्कि इससे यह भी स्पष्ट है कि कॉन्ग्रेस सरकार में टुटेजा कितने निरंकुश व शक्तिशाली थे।

व्हाट्सएप चैट से भेजा गया अटैचमेंट

नीचे अमन सिंह से जुड़े चैटिंग का सारांश है।

व्हाट्सएप चैट

अगर इन चैट्स की टाइमलाइन पर गौर करें तो यह समझना आसान होगा कि अदालत में जीपी सिंह ने सीएम बघेल के साथ जिस बैठक का जिक्र किया, वह बैठक 14 सितंबर, 2019 को हुई थी। उसके एक महीने बाद ही जीपी सिंह ने अनिल टुटेजा को अमन सिंह के खिलाफ जाँच की अनुमति का अनुरोध करते हुए पत्र भेजा। 14 जनवरी, 2020 को जीपी सिंह ने टुटेजा से जीएडी को अमन सिंह और उनकी पत्नी के बारे में जानकारी देने का अनुरोध किया और 20 फरवरी, 2020 को अमन सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।

इसलिए व्हाट्सएप चैट से दो बातें स्पष्ट हैं, एक अमन सिंह और उनकी पत्नी को सीएम बघेल के इशारे पर गलत तरीके से फँसाया जा रहा है। दूसरा NAN मामले में अनिल टुटेजा के मिलीभगत से उन्हें बचाने की कोशिश हो रही है।

कुछ व्हाट्सएप चैट में डॉ.रमन सिंह के मुख्यमंत्री रहते EOW के प्रमुख रहे मुकेश गुप्ता को फँसाने के लिए कहा गया था

व्हाट्सएप चैट से पता चलता है कि न केवल मुकेश गुप्ता को फँसाने के लिए एक ठोस और निरंतर प्रयास किया गया था, बल्कि ऐसे हर अधिकारी को परेशान किया जा रहा था जो अनिल टुटेजा के साथ सहमत नहीं था। या जो मुकेश गुप्ता को फँसाने में बाधक था। कई अधिकारियों को मुकेश गुप्ता का करीबी होने का इल्जाम लगाते हुए या तो परेशान किया गया या उसका ट्रांसफर कर दिया गया।

व्हाट्सएप चैट
व्हाट्सएप चैट

उपरोक्त दोनों चैट्स से साफ है कि जीपी सिंह अनिल टुटेजा से चर्चा कर रहे हैं कि आईपीएस अधिकारियों को सजा वाली पोस्टिंग दी जानी चाहिए। NAN घोटाले के एक प्रमुख आरोपित अनिल टुटेजा एडीजी के साथ तबादले और पोस्टिंग को प्रभावित कर रहे हैं। उनसे सलाह और अनुमति माँगी जा रही है।

कई अन्य बातचीत भी हैं जो मुकेश गुप्ता को फँसाने के लिए मिलीभगत की ओर इशारा करती हैं। आने वाले समय में फॉलो अप आर्टिकल्स (follow up articles) में इन चैट्स का विश्लेषण किया जाएगा।

हवाला लिंक – जीपी सिंह, जिन्होंने EOW/ACB प्रमुख के रूप में एसआरपी कल्लूरी का स्थान लिया, अनिल टुटेजा के लिए हवाला ऑपरेटर का काम कर रहे थे

इस लेख की शुरुआत में बताया गया था कि कैसे 2015 में ACB द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच शुरू की गई थी, जिसके बाद NAN मामले में आरोप पत्र दायर किया गया था।

आयकर विभाग द्वारा अनिल टुटेजा और अन्य के खिलाफ अदालत में दी गई सबमिशन रिपोर्ट विशेष रूप से हवाला लिंक के बारे में बात किया गया है। सबमिशन के पैरा 4 में आयकर विभाग कहता है, “इसके अलावा वॉट्सऐप चैट पर दिनांक 24.10.2019 को 10 रुपये के 2 नोटों की तस्वीरें भेजीं गईं। इसके बाद आरोपित नंबर 4 ने श्री रावत का नाम और मोबाइल नंबर भेजा। 10 मिनट बाद आरोपित नंबर 1 ने टैंगो के नाम से मैसेज भेजा। इसके बाद आरोपित नं. 1 ने 10 रुपये के नोट की 2 और तस्वीरें भेजीं, इसके बाद श्री ढेबर ने 20 रुपये के नोट की तस्वीरें भेजीं। इसके अलावा, आरोपी नंबर 4 द्वारा 24-10-19 को सूचित किए गए नोट विवरण को आगे श्री जीपी सिंह को सूचित किया गया था। उक्त चैट को लेकर आरोपित संख्या 1 से आईटी अधिनियम, 1961 की धारा 131 (ए) दिनांक 8-10-2020 के बयान के दौरान सवाल पूछा गया। आरोपी नं.1 ने अपने द्वारा किए गए हवाला लेनदेन का जवाब देने से बचने की कोशिश की…”

यह चैट व्हाट्सएप पर हुई बातचीत का एक हिस्सा है जो ऑपइंडिया के पास उपलब्ध है।

व्हाट्सएप चैट

इसमें जीपी सिंह 10 रुपये का नोट अनिल टुटेजा को भेजते हैं और टुटेजा फिर ऑपरेटर रावत का नाम जीपी को भेजते हैं। दिलचस्प बात यह है कि जीपी जानते हैं कि हवाला ऑपरेशन के रूप में यह पकड़ा जा सकता है और फिर टुटेजा को पिछले वाले मैसेज हटाने के लिए कहते हैं। जीपी का कहना है कि लेन-देन के लिए तारीख तय होती थी। इसलिए यह स्पष्ट है कि एडीजी NAN घोटाले के मुख्य आरोपित अनिल टुटेजा के लिए हवाला ऑपरेटर के रूप में काम कर रहे थे। जिसे सीएम भूपेश बघेल और अन्य लोग बचाने की कोशिश कर रहे थे।

इनकम टैक्स की दलीलों में कहा गया है कि जीपी सिंह ने अनिल टुटेजा के कहने पर समीर गोयल से हवाला के जरिए 1 करोड़ रुपये लिए थे।

अब तक सामने आई चैट से निम्नलिखित निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं-

1-कॉन्ग्रेस सरकार NAN मामले के मुख्य आरोपित को बचाने की कोशिश कर रही है

2-कॉन्ग्रेस के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आईपीएस अधिकारियों और अनिल टुटेजा के साथ मिलकर डॉ. रमन सिंह और अन्य को NAN घोटाले में फँसाने की साजिश कर रहे थे

3-अनिल टुटेजा के लिए हवाला संचालकों के रूप में काम करने वाले राज्य के अधिकारी बड़े पैमाने पर हवाला लेनदेन करते थे

4-अनिल टुटेजा और उनके बेटे यश टुटेजा राज्य में इतने शक्तिशाली हैं कि वे न केवल अपने खिलाफ जारी जाँच को प्रभावित कर सकते हैं बल्कि अधिकारियों के तबादलों और निलंबन को भी प्रभावित कर सकते हैं। जो भूपेश बघेल के समर्थन के बिना संभव नहीं है।

5-मनगढ़ंत सबूतों के साथ जाँच की दिशा को बदली जा रही है। गवाहों को धमकाया और खरीदा जा रहा है।

6-न्यायपालिका में भी ऐसे तत्व हैं जो अपने कर्तव्य से समझौता कर रहे हैं और अनिल टुटेजा को बचाने की साजिश का हिस्सा हैं

हजारों करोड़ रुपये के NAN घोटाले में कॉन्ग्रेस ने लगातार डॉ. रमन सिंह को फँसाने की कोशिश की। लेकिन ऑपइंडिया को प्राप्त इन व्हाट्सएप चैट का विश्लेषण कुछ और ही कहानी कहता है। बाद के लेखों में हम इनसे और तथ्य जुटाने की कोशिश करेंगे। यह स्पष्ट है कि रमन सिंह, मुकेश गुप्ता और अमन सिंह को कॉन्ग्रेस की सरकार द्वारा फँसाने की कोशिश की जा रही है और मुख्य आरोपित को बचाया जा रहा है।

ऑपइंडिया का मानना है कि लोकतंत्र में नागरिकों को अपने सार्वजनिक पदाधिकारियों द्वारा किए गए प्रत्येक सार्वजनिक कार्य को जानने का अधिकार है। लोग सार्वजनिक पदाधिकारियों के हर भ्रष्ट लेन-देन का विवरण जानने के हकदार हैं और इसलिए ऑपइंडिया के पास उपलब्ध व्हाट्सएप चैट के स्क्रीन शॉट्स यहाँ अपलोड किए गए हैं।

https://drive.google.com/drive/folders/1KqlOtQ-1ty2eyghcUlg0FJ8rmkGYBpqm?usp=sharing

नोट: नुपूर शर्मा की यह रिपोर्ट मूल रूप से अंग्रेजी में लिखी गई है। इसे आप इस लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं। इसका अनुवाद राजन झा ने किया है।

नाम- मोहम्मद सादिक, पहचान- रिपोर्टर, काम- PFI हिट स्क्वॉड के लिए डाटा जुटाना: केरल से गिरफ्तार, टारगेट थे काफिर

प्रतिबंधित कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) का ‘रिपोर्टर’ पकड़ा गया है। उसकी पहचान मोहम्मद सादिक के तौर पर हुई है। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने उसे केरल के कोल्लम जिले से गिरफ्तार किया है। पीएफआई ‘रिपोर्टर’ के तौर पर ‘हिट स्क्वॉड’ के लिए गैर मुस्लिमों (काफिर) की पहचान कर उनके बारे में जानकारी जुटाता था।

मलयाला मनोरमा की रिपोर्ट के अनुसार, एनआईए ने मंगलवार (17 जनवरी 2023) को कोल्लम जिले के चावरा स्थित मोहम्मद सादिक के घर में छापेमारी की थी। उसके घर से कई संदिग्ध दस्तावेज, पासबुक, इलेक्ट्रॉनिक व डिजिटल उपकरण बरामद हुए थे। इन उपकरणों की जाँच के बाद एनआईए ने सादिक से करीब 38 घंटे पूछताछ की। इसके बाद बुधवार (18 जनवरी 2023) को उसे गिरफ्तार किया।

NIA ने कहा है कि मोहम्मद सादिक की जिहाद के तहत आतंकी गतिविधियों को अंजाम देकर भारत में इस्लामिक शासन स्थापित करने की साजिश से जुड़ा था। वह ‘गैर मुस्लिम’ नेताओं पर हमले के लिए लिस्ट तैयार कर रहा था। जाँच एजेंसी के प्रवक्ता ने यह भी कहा है कि सादिक युवाओं का माइंडवाश कर लश्कर-ए-तैयबा और इस्लामिक स्टेट जैसे आतंकी संगठनों में शामिल कराने लिए उकसाता था।

दरअसल, इससे पहले एनआईए ने राजस्थान में पीएफआई के ठिकानों पर छापेमारी कर कुछ लोगों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ में खुलासा हुआ था कि कुछ लोग पीएफआई के लिए ‘रिपोर्टिंग’ कर रहे हैं। इनका काम हमले के लिए विरोधी नेताओं की लिस्ट तैयार करना है। इसके आधार पर, एनआईए ने जाँच करते हुए यह कार्रवाई की।

एंटी टेरर एजेंसी के एक प्रवक्ता का कहना है कि आरोपित मोहम्मद सादिक केरल के मन्नेझाथु थाटा का रहने वाला है। एनआईए ने केरल में देश विरोधी साजिश रचने और गैरकानूनी गतिविधियों से जुड़े एक मामले में PFI के नेताओं व सहयोगियों के ठिकाने पर छापेमारी की। पीएफआई विभिन्न धर्मों के बीच दुश्मनी पैदा करने की साजिश रच रहा है।

एनआईए ने बुधवार (18 जनवरी 2023) को कोल्लम जिले के चिरविला वडक्कम में निसारुद्दीन नामक व्यक्ति के घर में भी छापा मारा था। हालाँकि, निसारुद्दीन घर पर नहीं मिला। जाँच एजेंसी ने उसके घर से डायरी समेत कई संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए हैं।

‘मैंने इस्लाम कबूल किया’: शौहर के साथ उमराह करने जाएँगी हिजाबी राखी सावंत, आदिल ने गर्भपात की खबरों को नकारा

टीवी एक्ट्रेस राखी सावंत (Rakhi Sawant) सुर्खियाँ में रहने के लिए तमाम हथकंडे अपनाती रही हैं। इस बार वह अपनी शादी को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने अपने बॉयफ्रेंड आदिल खान दुर्रानी (Adil Khan Durrani) से गिले-शिकवे दूर कर लिया है। राखी ने कहा कि उन्होंने इस्लाम कबूल करके उन्होंने आदिल से निकाह किया है और अब वह हज करने जाएँगी।

राखी सावंत ने कहा है कि उन्होंने निकाह के लिए इस्लाम कुबूल कर लिया है और अब उनका नाम फातिमा है। इस दौरान राखी सावंत ने कहा कि लव जिहाद क्या होता है, वह नहीं जानती हैं। वह जात-पाँत को नहीं मानती और सिर्फ मोहब्बत को मानती हैं।

इंस्टैंटबॉलिवुड को दिए एक इंटरव्यू में राखी ने कहा, “पहले हम उमराह करने जाएँगे। अगर वहाँ रिश्ता पक्का हो गया तो फिर दुनिया की कोई ताकत उसे खत्म नहीं कर सकती। अल्लाह जिसके साथ है उसे कोई अलग नहीं कर सकता है। मुझे अपना घर बसाने के लिए लोगों के दुआ की जरूरत है, अल्लाह की जरूरत है। बस मेरा घर बस जाए।”

उधर राखी के गर्भपात की खबर को उनके पति आदिल ने अफवाह बताकर खारिज कर दिया। आदिल ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर करके कहा कि इस तरह की फर्जी खबरें ना फैलाएँ। राखी ने इस खबर को बकवास बताया। राखी ने कहा, “अबॉर्शन? आप पागल हैं क्या? ये बिल्कुल अफवाह है, बिल्कुल गलत बात है। न अबॉर्शन है, ना प्रेग्नेंसी।”

7 साल, 10 करोड़ पेड़… गौतम अडानी ने जलवायु परिवर्तन की दिशा में किया बड़ा संकल्प, अब तक 3 करोड़ पेड़ लगा चुका है समूह

अरबपति गौतम अडानी (Gautam Adani) के अडानी ग्रुप (Adani Group) ने देश का सबसे बड़ा वृक्षारोपण संकल्प लिया है। इस ग्रुप ने विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum) के ट्रिलियन ट्रीज प्लेटफॉर्म 1t.org पर साल 2030 तक 100 मिलियन यानी 10 करोड़ पौधे लगाने का संकल्प लिया है।

अडानी ग्रुप ने मंगलवार (17 जनवरी, 2022) को ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है। उन्होंने लिखा,”ग्रुप के प्रमुख गौतम अडानी ने संकल्प लिया है कि अडानी ग्रुप साल 2030 तक 100 मिलियन पेड़ लगाएगा। यह भारतीय इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा वृक्षारोपण संकल्प है। एक स्वच्छ और हरित भारत की खोज वह प्रगति है, जिसकी हमें आवश्यकता है।” ग्रुप ने ‘ट्रिलियन ट्रीज प्लेटफॉर्म’ 1t.org पर यह प्रतिबद्धता जताई है।”

‘1t.org’ एक बहु-हितधारक मंच है। यह 2030 तक 1 ट्रिलियन पेड़ों के संरक्षण, उनके जीर्णोद्धार और उन्हें विकसित करने के लिए एक वैश्विक आंदोलन का नेतृत्व कर रहा है। यह मंच संयुक्त राष्ट्र के समर्थन में है। 1t.org इस पहल में कॉर्पोरेट क्षेत्र की भागीदारी चाहता है। ट्रिलियन ट्री मूवमेंट का मुख्य उद्देश्य वातावरण से बड़ी मात्रा में कार्बन डाईऑक्साइड को हटाकर जलवायु परिवर्तन को धीमा करना है। साथ ​ही जलवायु और जैव विविधता की दिशा में सकारात्मक काम करना है।

अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी ने कहा कि ट्रिलियन पेड़ लगाने के लिए 1t.org की महत्वाकांक्षा का पैमाना बहुत प्रेरणादायक है। यह मानवता के लचीलेपन का प्रतिबिंब है। समान विचारधारा वाले लोगों की सामूहिक शक्ति के माध्यम से हम बड़े से बड़ा लक्ष्य हासिल कर सकते हैं। उन्होंने कहा, “पारिस्थितिक तंत्र को बहाल करना, जैव विविधता के नुकसान को कम करना, मिट्टी के कटाव को कम करना एक हरित दुनिया के निर्माण के लिए आवश्यक है। इस संदर्भ में मैं संकल्प लेता हूँ कि अडानी ग्रुप 2030 तक 100 मिलियन पेड़ लगाएगा, जो एक अग्रणी भूमिका निभाने की भारत की घोषणा का हिस्सा होगा।”

‘अडानी समूह इस लक्ष्य को पूरा करने में सबसे आगे’

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में 1t.org और नेचर-बेस्ड सॉल्यूशंस के निदेशक निकोल श्वाब (Nicole Schwab) ने कहा, “1 ट्रिलियन पेड़ों का संरक्षण, उनका जीर्णोद्धार और उन्हें विकसित करने का वैश्विक लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, जो प्राप्त किया जा सकता है। जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संकटों से निपटने के लिए अडानी समूह इस लक्ष्य को पूरा करने में सबसे आगे है। 1t.org इंडिया प्लेटफॉर्म बढ़ रहा है। इस आंदोलन में अधिक से अधिक व्यवसाय, ईकोप्रेन्योर, सामुदायिक समूह और युवा शामिल हो रहे हैं।

जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए पेड़ों का संरक्षण और उनका जीर्णोद्धार महत्वपूर्ण हैं। क्योंकि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव जंगलों और कृषि पर निर्भर लाखों लोगों की आजीविका को खतरे में डालते हैं।”

उल्लेखनीय है कि अडानी ग्रुप अब तक 29.52 मिलियन (29520000) पेड़ लगा चुका है, जिसके संरक्षण का उसने संकल्प लिया है। ग्रुप का लक्ष्य 2030 तक 37.10 मिलियन (37,100,000) मैंग्रोव पेड़ लगाना है। इसमें पेडों के संरक्षण के साथ-साथ वनीकरण भी शामिल है। मैंग्रोव तटीय खतरों को कम करने में भी मदद करते हैं। समुद्री जैव विविधता को बढ़ाते हैं। स्थानीय लोगों को आजीविका प्रदान करते हैं। खारे पानी के आने से रोकते हैं। मछली और अन्य जलीय जीवों के लिए प्रजनन स्थल प्रदान करते हैं।

‘जो काले किसानों के खिलाफ कानून आए थे…’: ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में फिर ट्रॉल हुए राहुल गाँधी, लोग बोले – गोरा किसान एक ही है रॉबर्ड वाड्रा

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) भारत जोड़ो यात्रा के तहत अभी पंजाब (Punjab) में हैं। राहुल गाँधी का एक और वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह केंद्र द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों की बात कर रहे हैं।

राहुल गाँधी के इस छोटे से वीडियो क्लिप में कहते हुए सुना जा सकता है, “जो काले किसान के खिलाफ कानून आए थे, तीन कानून…।” इसमें मंच से राहुल गाँधी ‘काले कानून’ कहने के बजाय ‘काले किसान’ कहते नजर आए।

राहुल गाँधी का यह क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। राहुल गाँधी के इस बयान को लेकर केंद्र की सत्ताधारी पार्टी भाजपा (BJP) के नेता उन पर सवाल उठा रहे हैं। वहीं सोशल मीडिया यूजर राहुल गाँधी मजाक बना रहे हैं।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला कहते हैं, “राजस्थान के किसानों को दस दिनों में कर्जमाफी नहीं देकर धोखा देने और उन्हें बिजली से वंचित करने के बाद (जैसा कि राजस्थान में उनके अपने मंत्री ने स्वीकार किया है) अब राहुल गाँधी किसानों को “काले किसान” कहते हैं।”

भाजपा के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने कहा, “काले किसान? ये किसानों का अपमान है… राजस्थान से छत्तीसगढ़ तक, कॉन्ग्रेस ने किसानों को बदहाली के कागार पर लाकर खड़ा कर दिया है।”

मध्य प्रदेश भाजपा के प्रदेश मंत्री राहुल कोठारी ने इस पर तंज कसते हुए कहा, “काले किसान !!! गोरा तो एक ही है ‘रॉबर्ट वाड्रा‘।”

हरीशचंद्र वर्णवाल नाम के यूजर ने लिखा, “काले किसान के खिलाफ क़ानून… राहुल जी क्या हो गया आपको, देखिए कहीं सॉफ़टवेयर करप्ट तो नहीं हो गया।”

मलम सिंह राठौर लिखते हैं, “लो करलो बात आज और एक नया कारनामा काले किसान… पक्का ये आदमी कांग्रेस का अंतिम संस्कार करके ही मानेगा।”

गौरतलब है कि राहुल गाँधी की यात्रा के दौरान कई बार ऐसी बातें कहीं, जिसके कारण उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल किया गया। भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान राहुल गाँधी ज्यादातर समय टीशर्ट में ही दिखे हैं। जब पत्रकारों ने सवाल पूछा तो वायनाड के सांसद ने उलटे पूछ दिया कि आपने स्वेटर क्यों पहनी है? जब पत्रकार ने ठंड को कारण बताया तो राहुल गाँधी बोले, “नहीं, इसका कारण यह नहीं है कि सर्दी है। इसका कारण यह है कि आप सर्दी से डरते हो। मैं सर्दी से डरता नहीं हूँ।”

इसी तरह एक अन्य पत्रकार के सवाल का जवाब देते हुए राहुल गाँधी ने कहा था, “राहुल गाँधी आपके दिमाग में है, मैंने मार दिया उसको, वो है ही नहीं, मेरे माइंड में है ही नहीं। गया वो, जिस व्यक्ति को आप देख रहे हो वो राहुल गाँधी नहीं है, वो आपको दिख रहा है। बात नहीं समझे आप। हिंदू धर्म को पढ़ो जरा, शिवजी को पढ़ो जरा। बात समझ में आ जाएगी।”

राहुल गाँधी के इसी तरह एक बयान में कहा था, “इस यात्रा में कुत्ते भी आए, लेकिन उन्हें किसी ने नहीं मारा। इसमें गाय भी आई… भैंस भी आई… सूअर भी आए। मैंने देखा। सब जानवर आए। सब लोग आए। लेकिन, यहाँ पर कोई नफरत नहीं दिखी। जैसा हमारा हिंदुस्तान है, वैसे ही ये यात्रा है। कोई नफरत नहीं, कोई हिंसा नहीं, कोई गलत सवाल नहीं।” 

भगवद्गीता और महाभारत पर राहुल गाँधी का ज्ञान दिया था, “जब अर्जुन मछली की आँख में तीर मार रहा था, तो क्या उसने कहा कि इसके बाद मैं क्या करूँगा? कहा था क्या? नहीं कहा था न? उस कहानी का मतलब गीता में भी है – काम करो, फल की चिंता मत करो।”

सुकेश ने मेरी ज़िन्दगी नरक बना दी… कोर्ट में जैकलीन फर्नांडिस का खुलासा – प्राइवेट जेट में घुमाता था महाठग, खुद को बताया था ‘सन टीवी’ का मालिक

जैकलीन फर्नांडिस ने कहा है कि महाठग सुकेश चंद्रशेखर ने न सिर्फ उनकी भावनाओं के साथ खेला, बल्कि उनकी ज़िन्दगी भी नर्क बना दी थी। बॉलीवुड अभिनेत्री ने दिल्ली स्थित पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई के दौरान अपने बयान में कहा कि सुकेश चंद्रशेखर ने उन्हें गुमराह किया, करियर के साथ-साथ उनके आम जीवन को भी तबाह कर दिया। उन्होंने जानकारी दी थी कि महाठग उनसे ‘एक बड़ा सरकारी अधिकारी’ बन कर मिला था।

हालाँकि, जैकलीन फर्नांडिस का ये भी कहना है कि उस दौरान उन्हें महसूस हुआ था कि कोई उन्हें बेवकूफ बना रहा है। ‘इंडिया टुडे’ ने जैकलीन फर्नांडिस के बयान की कॉपी का हवाला देते हुए खुलासा किया है कि पिंकी ईरानी ने ही जैकलीन फर्नांडिस की जान-पहचान सुकेश चंद्रशेखर से करवाई थी। पिंकी ने अभिनेत्री के मेकउप आर्टिस्ट शान मुथथिल को भरोसा दिलाया था कि सुकेश एक बड़ा सरकारी अधिकारी है, जो केंद्रीय गृह मंत्रालय में कार्यरत है।

उसने खुद को ‘सन टीवी’ का मालिक बताया और साथ ही कहा कि तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री (अब दिवंगत) जयललिता उसकी आंटी हैं। सुकेश चंद्रशेखर ने तब खुद को जैकलीन फर्नांडिस का बड़ा फैन भी बताया था। उसने दावा किया था कि जैकलीन फर्नांडिस को दक्षिण भारतीय फिल्मों में भी काम करना चाहिए और ‘सन टीवी’ का मालिक होने के नाते उसके पास कई प्रोजेक्ट्स हैं जो लाइन में हैं। उसने साउथ की फिल्मों में साथ काम करने का ऑफर भी दिया था। ज्ञात हो कि ‘सन टीवी नेटवर्क’ के मालिक अरबपति कलानिधि मारन हैं, जो करुणानिधि के परिवार से ताल्लुक रखते हैं।

इसके बाद दोनों फोन और वीडियो कॉल पर रोज लगभग 3 बार बात करने लगे थे। जैकलीन फर्नांडिस ने बताया है कि सुबह उनकी शूटिंग शुरू होने से पहले सुकेश चंद्रशेखर कॉल करता था, एक बार दिन में करता था और फिर रात को सोने से पहले। इस दौरान उसने कभी नहीं बताया कि वो जेल में हैं। एक कोने में सोफे होता था, जहाँ से वह वीडियो कॉल करता था। जैकलीन फर्नांडिस ने यह भी बताया है कि 8 अगस्त, 2021 की दोनों की कॉल पर आखिरी बार बात हुई थी।

उन्होंने बताया कि इसके बाद उन्हें सुकेश की गिरफ़्तारी और अपराध के बारे में पता चला और फिर कभी दोनों की बातचीत नहीं हुई। उन्होंने बताया कि पिंकी ईरानी ने उन्हें शुरू से मूर्ख बनाने की कोशिश की और जिसे वो शेखर समझती थीं, उसका असली नाम सुकेश निकला। अभिनेत्री ने दावा किया कि पिंकी ईरानी को सुकेश के बारे में सब पता था, लेकिन उसने छिपा कर रखा। चेन्नई में दो बार जैकलीन फर्नांडिस की सुकेश चंद्रशेखर से मुलाकात हुई और वो उसके प्राइवेट जेट में भी घूमीं। केरल की 2 यात्राओं के दौरान उसने अभिनेत्री के लिए हैलीकॉप्टर का इंतजाम किया था।

परशुराम कुंड के स्नान घाट पर बना दिया चाँद-तारे का निशान, मंदिर से चोरी: पूर्वोत्तर के कुंभ में ऐसी घटनाओं से लोग चिंतित, सफाईकर्मियों में कई मुस्लिम

पूर्वोत्तर का कुंभ कहे जाने वाले अरुणाचल प्रदेश के परशुराम कुंड मकर संक्रांति मेले में हर साल हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं। हालाँकि, इस साल की यात्रा में चोरी की कई घटनाएँ सामने आई हैं, जिसके कारण स्थानीय लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच गई हैं।

इस वर्ष मेले के दौरान परशुराम मंदिर के महंत बाबा हरिशरण दास सुबह जागकर अपने कक्ष के बाहर बैठे थे। इस दौरान उन्होंने देखा कि कुछ संदिग्ध लोग मंदिर में घुस रहे हैं। उन्होंने अपने शिष्यों को आवाज देकर मंदिर की चल पड़े। इस संबंध में महंत ने 16 जनवरी 2023 को पुलिस थाने में शिकायत दी है।

महंत हरिशरण दास के मंदिर पहुँचने से पहले ही एक बदमाश तब तक दान का पैसा लेकर भाग गया। हालाँकि, दो अन्य को लोगों ने पकड़ लिया। उनकी जब तलाशी और पहचान की जाँच की गई तो वे मुस्लिम निकले। इसके बाद स्थानीय लोगों में गुस्सा फैल गया।

इस साल मेले में जो सबसे बड़ी और आपत्तिजनक घटना सामने आई, वह लोगों के दिमाग को झकझोर कर रख दिया है। इस साल मेले में परशुराम कुंड के पवित्र स्नान घाट के पास वाली दीवार पर किसी ने चाँद-तारा का निशान बना दिया है। यह इस्लामी निशान माना जाता है।

बता दें कि परशुराम यात्रा के दौरान कई मुस्लिम परिवार सफाई कर्मचारी के रूप में मेले में शामिल होते हैं। स्थानीय प्रशासन इन लोगों को पहचान पत्र जारी कर, इन्हें मेले में घुसने की अनुमति देता है। इसके बाद वे मेले में सफाई आदि का काम देखते हैं।

चोरी इस घटना को लेकर स्थानीय लोग भविष्य को लेकर गंभीर हो गए हैं। इन लोगों ने माँग की है कि यात्रा में इन लोगों को बुलाने वाले और इनको भेजने वाले ठेकेदार के बारे में पता लगाई जाए। स्थानीय लोगों ने इस मामले की उच्चस्तरीय जाँच की माँग की है।

यात्रा के दौरान होने वाली बहुत सी ऐसी घटनाएँ हैं, जिनके बारे में पता लगाने की जरूरत है। मान्यता के अनुसार, यात्रा में शामिल होने वाले यात्री नहाने के बाद अपने कुछ गीले कपड़े फेंक देते हैं। इन फेंके हुए कपड़ों को ये मुस्लिम उठाते थे। हालाँकि, इस साल नहाने गए लोगों के घाट पर सूखे कपड़ों के गायब होने की कई घटनाएँ सामने आईं।

इसके साथ ही हर वर्ष की अपेक्षा इस साल मेले में पॉकेटमारी की घटनाएँ भी खूब हुईं। भी कहा जाता है कि यात्रा के दौरान आने-जाने वाले रास्तों पर इन्हीं सफाई कर्मचारियों के परिवार के लोग भिखारी बनकर बैठते हैं। यात्रा के बाद वे सारा सामान, कपड़े और अनाज आदि गाड़ी में लेकर जाते हुए देखे गए हैं।

फिर से सिनेमाघरों में रिलीज होगी ‘द कश्मीर फाइल्स’, बोले अनुपम खेर – ‘नरसंहार दिवस’ पर कश्मीरी हिन्दुओं को श्रद्धांजलि देने के लिए…

कश्‍मीरी हिंदुओं के नरसंहार पर आधारित डायरेक्टर वि​वेक अग्निहोत्री (Vivek Agnihotri) की फिल्‍म ‘द कश्मीर फाइल्स’ (The Kashmir Files) एक बार फिर सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। डायरेक्टर ने बुधवार (18 जनवरी, 2023) को ट्वीट कर दर्शकों को यह जानकारी है। इसके साथ ही उन्होंने ‘द कश्मीर फाइल्स’ को दोबारा सिनेमाघरों में रिलीज करने का कारण भी बताया है।

विवेक अग्निहोत्री ने अपने ट्विटर हैंडल पर ‘द कश्मीर फाइल्स’ का एक पोस्टर शेयर किया है, जिसमें उसकी नई रिलीज डेट 19 जनवरी, 2023 लिखी हुई इै। इसके साथ ही निर्देशक ने कैप्शन में लिखा, “द कश्मीर फाइल्स को एक बार फिर 19 जनवरी को रिलीज किया जा रहा है। उस दिन कश्मीरी हिंदू नरसंहार दिवस है। यह पहली बार है, जब कोई फिल्म एक साल में दो बार रिलीज हो रही है। अगर आप इसे बिग स्क्रीन पर देखने से चूक गए हैं, तो अभी अपनी टिकट बुक करें।”

वहीं, ‘द कश्मीर फाइल्स’ में अहम भूमिका निभाने वाले बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर ने भी इस फिल्म को लेकर ट्वीट किया है। अनुपम खेर ने ट्विटर पर इस फिल्म का पोस्टर शेयर करते हुए लिखा, “कश्मीरी पंडितों के पलायन और नरसंहार के 33 साल पूरे होने पर उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए कृपया कल फिर से ‘द कश्मीर फाइल्स’ को जरूर देखें। यह पहली बार है, जब किसी फिल्म को एक साल में दूसरी बार रिलीज किया जा रहा है।”

यह फिल्म पहली बार 11 मार्च, 2022 को रिलीज हुई थी। ‘द कश्मीर फाइल्स’ 2022 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली बॉलीवुड फिल्मों में से एक है। इसने कमाई के मामले में बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया था। 14 करोड़ के बजट में बनी ‘द कश्मीर फाइल्स’ ने बॉक्स ऑफिस पर करीब 340 करोड़ रुपए से भी ज्यादा की बंपर कमाई की थी। इस फिल्म में 1990 में कश्मीरी हिंदुओं के पलायन और उनके नरसंहार की सच्ची घटना को दिखाया गया है। इस फिल्म में अभिनेता अनुपम खेर, दर्शन कुमार, पल्लवी जोशी और मिथुन चक्रवर्ती ने मुख्य भूमिका निभाई है।

बता दें कि डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री इन दिनों अपने अगली फिल्म ‘द वैक्सीन वॉर की’ शूटिंग में बिजी हैं। भारतीय सिनेमा के इतिहास में यह पहली फिल्म होगी, जो एक साथ 11 भाषाओं हिंदी, इंग्लिश, गुजराती, बांग्ला, मराठी, कन्नड़, तमिल, तेलुगू, मलयालम, पंजाबी और भोजपुरी में रिलीज की जाएगी। ‘द वैक्सीन वॉर’ भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा कोरोना महामारी के खिलाफ टीका विकसित करने के प्रयासों पर आधारित है। इस फिल्म को 15 अगस्त, 2023 को सिनेमाघरों में रिलीज किया जाएगा।

बिहार में शराब के धंधेबाजों को पकड़ने गया था सिपाही, बूढ़ी गंडक में फेंक कर मार डाला: लाश देख फफक पड़े साथी, Video

बिहार में पुलिस पर शराब तस्करों के हमले की कई घटनाएँ हो चुकी है। अब आबकारी विभाग के एक सिपाही को तस्करों ने नदी में डूबोकर मार डाला है। मृतक सिपाही 23 वर्षीय दीपक कुमार का बुधवार (18 जनवरी 2023) को भागलपुर के उनके पैतृक गाँव रसलपुर में अंतिम संस्कार किया गया। मुजफ्फरपुर जिले में सोमवार (16 जनवरी 2023) की रात छापेमारी के दौरान तस्करों ने बूढ़ी गंडक में उन्हें फेंक दिया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना दरधा के दियारा इलाके की है। आबकारी विभाग को यहाँ बूढी गंडक नदी के किनारे शराब माफिया द्वारा अवैध शराब बनाने की सूचना मिली थी। इस सूचना पर आबकारी विभाग की टीम रात में छापेमारी करने गई थी। सूचना सही पाई गई थी और उत्पाद विभाग (आबकारी) की टीम ने मौके से शराब माफिया को पकड़ लिया। आरोपितों को नाव से लाया जा रहा था। इसी दौरान उनकी जवानों से झड़प हो गई और दीपक की नदी में धकेल दिया।

एनबीटी ने एक चश्मदीद के हवाले से बताया है कि तस्कर दीपक को घसीटकर ले गए और नदी में फेंक दिया। आबकारी विभाग के अधीक्षक संजय कुमार राय ने बताया है कि छापेमारी के दौरान दीपक ने 2 तस्करों को पकड़ रखा था। लेकिन वे दीपक को खींचकर एक छोटी नाव पर ले गए। हाथापाई के बाद उसे नदी में फेंक दिया। नदी में गिरने के बाद दीपक तेज धार में फँस गया और डूबकर उसकी मौत हो गई।

छापेमारी के दौरान दीपक के साथ टीम में 19 सदस्य और थे। दीपक को नदी में फेंकने के बाद मची अफरातफरी का फायदा उठा कर हिरासत में लिए गए तस्कर भाग निकले। साथी जवानों ने दीपक को जब तक नदी से निकाला उनकी साँसे थम चुकी थी।

इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वारयल हो रहा है। वायरल वीडियो में दीपक को नदी में से निकाल कर ले जा रहे साथी जवान रोते हुए सुनाई दे रहे हैं। इसी वीडियो में जवान दीपक की जान निकलने की बात भी कह रहे हैं। रात के करीब 12:30 बजे दीपक को नदी में फेंका गया था। उनका शव करीब 3 बजे बरामद हुआ था।

इस घटना के बाद आबकारी विभाग ने घटनास्थल पर पुलिस फ़ोर्स मँगवाया। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करवाया। वहीं दीपक की मौत से साथी सिपाही आक्रोशित हैं। दीपक के परिवार के लिए सरकार से मुआवजे की माँग कर रहे हैं। दीपक के भाई प्रशांत ने इस घटना के पीछे साजिश की आशंका जताई है।

‘मंदिर जाने वाले मूर्ख, राम मंदिर दुकानदारी’: यूपी के नायब तहसीलदार का वीडियो वायरल, चैलेन्ज देते हुए कहा – जा किसी को भी दिखा दे, मैं किसी से कमजोर नहीं

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में तैनात एक नायब तहसीलदार का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में हिम्मत बहादुर नाम के अधिकारी ने अयोध्या में बन रहे राम मंदिर को दुकानदारी बताया है। इसी के साथ उसने मंदिर जाने वालों को मूर्ख कह कर सम्बोधित किया है। वीडियो वायरल होने के बाद गाजीपुर की DM ने जाँच करवाने की बात कही है। वहीं अयोध्या के संतों ने नायब तहसीलदार के बयान पर कड़ी नाराजगी जताई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नायब तहसीलदार हिम्मत बहादुर जिले के सेवराई तहसील में पोस्टेड है। 1:28 मिनट के वीडियो में वो लोगों की मौजूदगी में न सिर्फ राम मंदिर और हिन्दू आस्थाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर रहा है, बल्कि वीडियो बना रहे व्यक्ति से किसी को भी जा कर दिखाने का चैलेन्ज कर रहा है। अपनी चुनौती के दौरान हिम्मत बहादुर ‘किसी से कमजोर न होने’ का भी ताव देते सुनाई दे रहा है। उनके इस बयान पर आस-पास मौजूद कुछ लोग ठहाके भी लगाते सुनाई दे रहे।

जानकारी के मुताबिक, हिम्मत बहादुर के वीडियो पर जिले की DM ने संज्ञान ले लिया है और जाँच करवाने की बात कही है। ऑपइंडिया ने इस बयान की पुष्टि के लिए सेवराई के तहसीलदार से बात की। उन्होंने बताया कि यह बयान मंगलवार (17 जनवरी, 2022) का है। हमें बताया गया कि नायब तहसीलदार हिम्मत बहादुर का ट्रांसफर 1 दिन पहले ही जिला मुख्यालय हो चुका था, लेकिन किसी कारणवश वो वहाँ जॉइन नहीं कर पाया था।

संतों ने उठाई कार्रवाई की माँग

नायब तहसीलदार हिम्मत बहादुर के इस बयान पर सोशल मीडिया के अलावा संतों ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। रामलला के पुजारी महंत सत्येंद्र दास ने नायब तहसीलदार पर को पद से हटाने की माँग करते हुए ईशनिंदा के आरोप में जेल में डालने की जरूरत बताया। हिम्मत बहादुर को वर्ण शंकर और नास्तिक बताते हुए सत्येंद्र दास ने उसके शब्दों को बनावटी बताया।