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दिल्ली में ‘जय बलराम’ करते जुटे 50000 किसान, कहा – राकेश टिकैत हमारा नेता नहीं, उनके आंदोलन को थी राजनीतिक फंडिंग

दिल्ली के रामलीला मैदान में सोमवार (19 दिसंबर, 2022) को लगभग 50,000 की संख्या में किसानों का जुटान हुआ। ‘भारतीय किसान संघ’ के बैनर तले इन किसानों ने केंद्र सरकार के समक्ष अपनी विभिन्न माँगें रखी और फिर शाम होते-होते लौट गए। इस रैली में देश भी के किसान जुटे। मंच पर भारत माता और भगवान बलराम की तस्वीर लगी थी। आंदोलन एकदम शांतिपूर्ण रहा और दिल्ली पुलिस के अलावा पैरा-मिलिट्री बलों की भी अच्छी-खासी तैनाती रही।

इस दौरान हमने आंदोलन में शामिल कई किसानों से बातचीत की और उनकी माँगों को समझा। आखिर क्या कारण है कि दिल्ली की सीमाओं को एक साल तक घेर कर रखने वाले तथाकथित किसानों के आंदोलन में जम कर हिंसा हुई थी, जबकि ये आंदोलन शांतिपूर्ण है? इस सवाल के जवाब में मध्य प्रदेश के सीहोर से आए सूरज सिंह ठाकुर कहते हैं कि हमारे आंदोलन को किसी राजनीतिक पार्टी की फंडिंग नहीं है, शायद इसीलिए।

उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि तीनों कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली में उत्पात मचाने वाे तथाकथित किसानों को राजनीतिक फंडिंग थी। किसानों ने कहा कि हम अपना अधिकारी माँगने आए हैं, जबकि वो लोग किसानों को बदनाम करने के लिए आए थे। उनका ये भी कहना है कि हमलोग अपने अधिकार माँगने आए हैं, कोई भीख नहीं। इन किसानों ने ये भी बताया कि वो पिछले वाले ‘किसान आंदोलन’ का हिस्सा नहीं थे। वहीं कुछ का कहना है कि सिर्फ शुरुआत में ही वो उस आंदोलन के साथ थे।

‘किसान गर्जना रैली’ में जुटे किसानों का स्पष्ट कहना था कि वो लोग किसी को भी परेशान नहीं करना चाहते, लेकिन अपना काम करवाना चाहते हैं। उनकी केंद्र सरकार से मुख्य तीन माँगें हैं, जो इस रैली का आधार है। मध्य प्रदेश के जिन किसानों से हमारी बात हुई, उनका कहना है कि प्रत्येक वर्ष मिलने वाली ‘किसान सम्मान निधि’ को 6000 रुपए से बढ़ा कर 20,000 रुपए किया जाए। वहीं कृषि यंत्रों पर लगने वाली GST को भी खत्म किया जाना उनकी माँग है।

उनकी सबसे बड़ी माँग ये है कि लागत के आधार पर फसल को बेचने का मूल्य तय किया जाए। किसानों ने तंज कसते हुए कहा कि जिन नेताओं को ये तक पता नहीं है कि आलू जमीन के अंदर उगता है या बाहर, वो हमारे लिए मूल्य तय करने बैठे हुए हैं। प्राइवेट कंपनियों से उन्हें कोई दिक्कत है? इसके जवाब में किसानों ने कहा कि कृषि कानूनों के वो समर्थन में हैं, बस कुछ त्रुटियों को सुधार दिया जाए। इन किसानों का कहना है कि वो राष्ट्रवादी हैं और तीनों कृषि कानूनों (अब रद्द) से उन्हें कोई दिक्कत नहीं है।

किसानों ने कहा कि हम अपना कार्य अहिंसक पद्धति से निकालने आए हैं और तीनों ‘कृषि कानून’ में त्रुटियाँ दूर होने के बाद वो उनका स्वागत करते। ये किसान ‘भारत माता की जय’ और ‘जय बलराम’ के नारे भी लगा रहे थे। इन किसानों का कहना है कि वो सड़क जाम करने की बजाए वोट की ताकत में विश्वास रखते हैं। इन किसानों ने स्पष्ट कहा कि राकेश टिकैत उनके नेता नहीं हैं। उन्होंने कहा कि राकेश टिकैत जैसे लोग किसानों को फुसला रहे हैं।

‘किसान गर्जना रैली’ में माहौल काफी सांस्कृतिक था। स्थानीय नाच-गान और संगीत के माध्यम से किसान विरोध प्रदर्शन करते नज़र आए। ढोल और झाल बजाते हुए किसान भी वहाँ मौजूद थे। शाम होने के बाद कई किसान वापस रेलवे स्टेशन के लिए निकलते नज़र आए, क्योंकि अभी गेहूँ का मौसम है और और उन्हें खेतों में काम भी रहता है। सबसे बड़ी बात ये कि ‘किसान गर्जना रैली’ में महिलाओं की एक बड़ी उपस्थिति दिखी।

कई ऐसे किसान थे जो अपना सामान लेकर यहाँ आए थे और समूह में पहुँचे थे। ऐसे में यहाँ भोजन-पानी कर के वो अपने सामान की सुरक्षा भी करते दिख और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के बाद वापस लौट गए। हमारी मुलाकात ओडिशा के कुछ किसानों से हुई। इनमें से एक प्रदीप महंता ने लाभकारी मूल्य, कृषि उपकरणों से GST हटाने और ‘किसान सम्मान निधि’ को बढ़ाने को अपनी प्रमुख माँग बताया। उनका कहना है कि कम से कम 5000 रुपए के तीन किश्त हर साल मिलनी चाहिए।

इन किसानों ने भी स्पष्ट किया कि कृषि कानूनों के विरोध में हुए ‘किसान आंदोलन’ में वो सिर्फ शुरुआत में ही शामिल रहे, उसके बाद हट गए। राकेश टिकैत आपलोगों के नेता हैं या नहीं? इसके जवाब में किसानों ने एक सुर में कहा – नहीं, हर एक किसान हमारा नेता है। ओडिशा के किसानों ने भी लाल किले पर हुई हिंसा की याद दिलाने पर कहा कि हम शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन में यकीन रखते हैं। उनका कहना है कि वो सरकार के विरोधी नहीं है, बस अपना हक़ माँगने आए हैं।

ओडिशा के इन किसानों ने बताया कि कृषि कानूनों में कुछ संशोधन हो जाता तो हम उसका स्वागत करने के लिए तैयार थे। ओडिशा के किसानों ने एक और खास बात बताई कि भगवान बलराम को भगवान जगन्नाथ का बड़ा भाई माना जाता है, इसीलिए वहाँ के किसानों की आस्था उनमें बहुत है। वहाँ भगवान बलराम के कई मंदिर भी हैं। इसीलिए, ‘किसान गर्जना रैली’ में ‘जय बलराम’ का नारा खूब गूँजा। इस दौरान ‘जो हमसे टकराएगा, हमसे ही मिल जाएगा’ जैसे नारे भी लगे।

‘पिएँगे क्या – रस, खाएँगे क्या – रसगुल्ले’ – एक रोचक नारा ये भी लगा। “देश के हम भंडार भरेंगे लेकिन कीमत पूरी लेंगे।” – ये ‘भारतीय किसान संघ’ का मुख्य नारा रहा है। ‘किसान गर्जना रैली’ में खाद्यान की सुरक्षा के अलावा किसानों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की माँग भी की गई। कृषि आदानों से GST को खत्म करवाना इनका लक्ष्य है। किसानों ने बताया कि GST से पहले भी इन पर टैक्स लगता आ रहा है, ये समस्याएँ काफी पहले से हैं और किसानों की हालत जस की तस है।

दिल्ली की 15 साल की लड़की का बदायूँ में निकाह, गर्भ गिराने की कोशिश: पीड़िता ने बताया- गर्म तवे से दागता था शौहर, देता था बिजली के झटके

दिल्ली की एक मुस्लिम लड़की ने आरोप लगाया है कि उसके परिजनों ने 15 साल की उम्र में उसका जबरन निकाह करवा दिया और ससुराल वालों ने मारपीट कर घर से निकाल दिया। लड़की का कहना है कि जहाँ उसकी निकाह हुई है, वहाँ अक्सर उसके साथ मारपीट की जाती है और क्रूरतापर्वक प्रताड़ित किया जाता है। दिल्ली महिला आयोग ने लड़की की शिकायत मिलने के बाद दिल्ली पुलिस को नोटिस भेजा है।

दिल्ली के दरियागंज की रहने वाली पीड़ित लड़की ने दिल्ली महिला आयोग में शिकायत देकर कहा कि उसकी निकाह फरवरी 2022 में उत्तर प्रदेश बदायूँ में की गई थी। उस समय उसकी उम्र 15 साल थी। निकाह के बाद वह गर्भवती हो गई, लेकिन ससुराल वालों ने उसकी गर्भपात कराने की असफल कोशिश की।

पीड़िता ने कहा कि ससुराल में उसका शौहर और अन्य लोग उसके साथ मारपीट करते हैं। उसका शौहर उसे गर्म तवे से दागता है और बिजली का करंट लगाता था। इतना ही नहीं, वह बिजली की तारों और पेंचकस से भी कई बार उसे मारा। इसके बाद उसके शौहर ने उसे घर से निकाल दिया, जिसके बाद से वह दिल्ली में अपने अम्मी-अब्बू के पास रही है।

शिकायत मिलने के बाद दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने दिल्ली पुलिस से इस संबंध में की गई एफआईआर की कॉपी के साथ आरोपितों की गिरफ्तारी की जानकारी माँगी है।

उन्होंने कहा, “मैं जानती हूँ कि मुस्लिम पर्सनल लॉ 15 साल और इससे ऊपर की लड़कियों की शादी की अनुमति देता है, लेकिन मेरा मानना है कि यह पुरातन, मध्ययुगीन और बर्बर है। ऐसे मामलों में देश का कानून यानी पॉक्सो लागू होना चाहिए। हमने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है। मामले में एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए और आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।”

महान फुटबॉलर लक्षेंद्र मिश्रा और भारत के पहले फुटबॉल विश्व कप जीतने की कहानी

साल 1987 की बात है। घनी अंधेरी रात थी। बारिश भी घनघोर हो रही थी। जोगेंद्र मिश्रा की धर्मपत्नी शैली को तभी प्रसव पीड़ा का अनुभव हुआ। कैसे ले जाएँ, कहाँ ले जाएँ, कौन डॉक्टर रात में आएगा… इसी सोच में जोगेंद्र बाबू डरे जा रहे थे लेकिन इतिहास कमजोरों का नहीं, योद्धाओं का लिखा जाता है। शैली ने बिना किसी डॉक्टर, बिना किसी दाई की मदद के उस रात एक योद्धा जना। योद्धा ऐसा जिसने अपने बाप को गोद लेते वक्त ही किक मार कर अपने इरादे जता दिए थे!

लक्षेंद्र मिश्रा – संस्कृत के महाविद्वान जोगेंद्र बाबू ने अपने किकधारी बेटे का यही नाम रखा था। नाम के अनुरूप यह बालक हर लक्ष्य को भेद देता था। दिक्कत एक ही थी। पढ़ाई-लिखाई वाले मामले में इसे किताब-कॉपी दिखती ही नहीं थी। स्कूल के मैदान में लेकिन जब भी उतरता लक्षेंद्र, किक मार-मार कर छक्के छुड़ा देता था।

छोटे से कद-काठी का लक्षेंद्र मिश्रा अपने से बड़ी उम्र के लड़कों को मैदान पर ऐसे छकाता जैसे वो उनका मजाक उड़ा रहा हो। बड़े लड़के इसका बदला कभी पैर फँसा कर उसे गिरा कर लेते तो कभी केहुनी से मार कर। लक्षेंद्र योद्धा था, उसने कभी शिकायत नहीं की। मार खाकर भी खेलता और हरा कर मुस्कुरा भर देता।

बदला लेने के लिए बड़े लड़कों ने एक ग्रुप बना लिया। इनका सरगना था दिलीप मंडल। मंडल दिमाग से तेज था। उसने एक षड्यंत्र रचा – लक्षेंद्र और उसके पूरे परिवार के अस्तित्व पर सवाल खड़ा करने का। कहानी गढ़ी कि जोगेंद्र मिश्रा भारतीय ही नहीं हैं। इनके पुरखे यूरेशिया से असम आए थे। षड्यंत्र के तहत इस कहानी को फैलाया गया, प्रचारित-प्रसारित किया गया। बालक लक्षेंद्र का अटैक दिलीप मंडल के डिफेंस को इस बार ध्वस्त नहीं कर पाया। इस खेल में वो हार गया।

असम में बसा-बसाया आशियाना छोड़ पुत्र-मोह में जोगेंद्र मिश्रा अपनी धर्मपत्नी शैली के साथ पड़ोसी राज्य बंगाल की ओर चले। सुना था वहाँ के फुटबॉल दीवानों की बातें। सोचा होगा कि बेटे की प्रतिभा को पंख लगेंगे। ऐसा हो न सका। वो इसलिए क्योंकि दिलीप मंडल के पुरखे बंगाल में वामपंथ की पढ़ाई करने गए थे और अब वहीं से पूरी दुनिया में लाल सलाम को एक्सपोर्ट करते थे। मंडल और बंगाल ने लक्षेंद्र मिश्रा को उसके ही देश में विदेशी बना डाला।

लक्षेंद्र मिश्रा योद्धा था। हार उस पर हावी हो, यह उसने सीखा ही नहीं था। अंडल-मंडल के सारे षड्यंत्रों को किक मार वो चल दिया पूरे परिवार सहित अर्जेंटीना। नई पहचान के लिए जोगेंद्र बन गए जॉर्ज (Jorge Messi) और सिलिया (Celia Cuccittini) नाम रख लिया माता शैली ने।

फुटबॉल विश्व कप का 22वाँ संस्करण अर्जेंटीना ने जीता। कप्तानी लियोनेल मेसी (Lionel Messi) की। दुनिया भर की मीडिया मेसी के गुनगान कर रही है। उसके खेल की तारीफ की जा रही है। वो कितने पैसे कमाता है, इस पर लेख लिखे जा रहे… लेकिन कोई यह नहीं बता रहा कि लक्षेंद्र मिश्रा किन कठिनाइयों में लियोनेल मेसी बना, भारत और असम से कितना घना रिश्ता है उसका… मीडिया वाले ये भी छिपा ले रहे कि अगर दिलीप मंडल और वामपंथियों की नहीं चलती तो फुटबॉल विश्व कप आज भारत में होता!

लक्षेंद्र मिश्रा का एक कनेक्शन दक्षिण भारत से भी है, वो कहानी फिर कभी। फिलहाल ऊपर के चित्र से कहानी का मूल समझ सकते हैं।

‘मेरा फोन नहीं बज रहा, मैं परेशान हूँ’ : फोन को फ्लाइट मोड पर करके नेटवर्क ढूँढ रहे थे पंजाब के AAP विधायक, शिकायत भी की

पंजाब के बठिंडा जिले के मौर विधानसभा क्षेत्र से आम आदमी पार्टी के विधायक सुखवीर मैसर खाना (Sukhveer Maiser Khana) ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर कर खुद ही अपनी फजीहत करवा ली। दरअसल, शुक्रवार (16 दिसंबर 2022) को मैसर खाना को 9-10 घंटे तक कोई फोन नहीं आया, जिसके बाद उन्होंने खराब कनेक्शन को लेकर शिकायत की, लेकिन बाद में पता चला कि उन्होंने अपना फोन फ्लाइट मोड पर रखा हुआ था।

यही नहीं मैसर खाना ने अपनी आपबीती अपने फेसबुक पर भी साझा की। उन्होंने लिखा, “मुझे समझ नहीं आ रहा है कि पिछले 9-10 घंटों से मेरे फोन से कोई आवाज क्यों नहीं आ रही है और जा रही है। मैं बहुत परेशान हूँ। अन्य सभी साथियों के एयरटेल सिम ठीक से काम कर रहे हैं। मैंने इसे डीसी बठिंडा के संज्ञान में लाया है।” मैसर के इस पोस्ट पर भाजपा नेता तजिंदर बग्गा ने कमेंट किया और बोले कि इस बारे में राष्ट्रपति से भी शिकायत कर दो।

सुखवीर मैसर खाना का फेसबुक पोस्ट (फोटो साभार: सुखवीर मैसर खाना)

एयरटेल इंडिया ने समस्या के बारे में पूछताछ करने और इसे हल करने में विधायक की सहायता करने के लिए उनके पोस्ट पर तुरंत जवाब दिया। उन्होंने लिखा, “आपकी मदद के लिए हम हाजिर हैं। कृपया इनबॉक्स के माध्यम से अपनी समस्या बताएँ और अपना एयरटेल नंबर साझा करें, ताकि हम आपकी सहायता कर सकें।” हालाँकि, तब तक उनकी पोस्ट पर सैकड़ों लोग मजे ले चुके थे।

एयरटेल इंडिया ने विधायक की मदद करने के लिए उनके पोस्ट पर तुरंत जवाब दिया। (फोटो साभार: सुखवीर मैसर खाना)

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, विधायक के फोन में कोई समस्या नहीं थी। उन्होंने फोन कॉल रिसीव करने से बचने के लिए उसे खुद ही फ्लाइट मोड पर रख दिया था। आम आदमी पार्टी के विधायक से जुड़ी यह मजेदार घटना सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बीजेपी नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा भी मैसर खाना का मजाक उड़ाने से खुद को नहीं रोक पाए।

तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर लिखा, “आप विधायक ने डीसी से शिकायत की, क्योंकि उनके मोबाइल का नेटवर्क काम नहीं कर रहा था। बाद में उन्हें पता चला कि उनका फोन फ्लाइट मोड में है।”

बता दें कि आप विधायक सुखवीर मैसर खाना द्वारा अपने फोन की सेटिंग बदलने के बाद जल्द ही उनकी ‘समस्या’ हल हो गई थी। लेकिन विधायक अपनी कनेक्टिविटी समस्याओं के हल होने का उल्लेख किए बिना अपने पेज से अन्य अपडेट पोस्ट कर रहे हैं। आम आदमी पार्टी के विधायकों को तकनीकी ज्ञान न होना अधिकारियों के लिए सिरदर्द बन गया है।

दिलदार के मामा के घर से हथियार-खून लगी शर्ट बरामद, यहीं जनजातीय लड़की को काटे जाने की आशंका: आँगनबाड़ी केंद्र के पास मिले थे पैर और सीने के हिस्से

झारखंड के साहेबगंज से श्रद्धा हत्याकांड जैसा मामला सामने आने से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है। मीडिया रिपोर्टों की मानें तो आरोपित दिलदार अंसारी ने रिबिका के शव के 18 टुकड़े कर फेंक दिया था। मामले में अब नई जानकारी निकलकर सामने आ रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक अंसारी के मामा के घर से खून से सने कपड़े बरामद हुए हैं। आशंका जताई जा रही है कि अंसारी ने यहीं पर घटना को अंजाम दिया था।

न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने बताया कि आरोपित अंसारी के मामा मोईनुल अंसारी के घर से खून से सने कपड़े बरामद किए गए हैं। पुलिस को शक है कि अंसारी ने यहीं पर रिबिका के शव के टुकड़े किए होंगे। घटना के बाद से मोईनुल फरार है। पुलिस को कत्ल में प्रयोग हुआ हथियार दिलदार के मामा मोईनुल के घर से मिला था। अब मोईनुल के घर से खून से सने कपड़े मिलने से मामले में उसकी मिलीभगत का भी शक जताया जा रहा है।

मिली जानकारी के मुताबिक रिबिका पहाड़िन और दिलदार अंसारी दो साल से रिलेशनशिप में थे और कुछ दिन पहले पहले ही दोनों ने शादी की थी। हालाँकि दोनों में अक्सर झगड़े होते रहते थे। दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि अब तक रिबिका के शव के 12 टुकड़ों को बरामद किया जा चुका है। संथाल के डीआईजी सुदर्शन प्रसाद मंडल ने बताया, ”रिबिका दिलदार अंसारी की दूसरी पत्नी थी। उसकी पहले से ही एक पत्नी थी। यही उनके विवाद का कारण था। इसके चलते अंसारी ने उसकी हत्या कर दी और उसके टुकड़े-टुकड़े कर दिए। जाँच में उसके पति के शामिल होने की बात सामने आई है।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना लोगों की जानकारी में तब आई जब बोरियो थानाक्षेत्र के संताली पंचायत के मोमिन टोला में कुछ ग्रामीणों ने इंसानी शव के टुकड़े बिखरे देखे। इन टुकड़ों को कुत्ते नोच कर खा रहे थे। आँगनबाड़ी केंद्र के पास पड़े इन टुकड़ों में पैर और सीने के हिस्से थे। आखिरकार लोगों ने इसकी जानकारी पुलिस को दी। पुलिस ने मौके पर पहुँच कर लाश के बिखरे हिस्सों को कब्ज़े में लिया और जाँच शुरू कर दी।

जाँच के दौरान पुलिस ने शव की शिनाख्त करवाई। लाश जनजातीय समुदाय की महिला रिबिका पहाड़िन की निकली। इस बीच पुलिस को महिला के पति दिलदार अंसारी पर शक हुआ। पुलिस ने दिलदार को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो कुछ ही देर में उसने सच उगल दिया। शादी के बाद दिलदार और रिबिका में आए दिन झगड़े होते थे जिसके बाद उसने ये कदम उठाया।

लाश को टुकड़ों में काटने के लिए दिलदार ने लोहा काटने वाली मशीन (इलेक्ट्रिक कटर) का प्रयोग किया था। पुलिस को कत्ल में प्रयोग हुआ हथियार दिलदार के मामा मोईनुल के घर से मिला था। इसी मामले में दिलदार के परिजन मोहम्मद मुस्तकीम, उनकी बीवी मरियम खातून, दिलदार की पहली पत्नी गुलेरा, दिलदार के भाई अमीर अंसारी, महताब अंसारी और दिलदार की बहन शारेजा खातून को भी हिरासत में लिया गया है। इन सभी से पूछताछ चल रही है। कुछ रिपोर्ट की मानें तो दिलदार की माँ मरियम ने रिबिका को मरवाने के लिए उसकी 20 हजार रुपए की सुपारी दी हुई थी। वह लगातार दिलदार को भड़काती थी कि जिसकी वजह से रिबिका से लड़ाई होती रहती थी।

ST इलाकों में लैंड के लिए लव जिहाद: जनजातीय लड़कियों को दूसरी-तीसरी बीवी बना रहे मुस्लिम, PFI ने इसी ट्रिक से खरीदा था 10000 एकड़ जमीन

देश के जनजातीय समुदाय की लड़कियों के साथ शादी करके उनकी जमीनों को हड़ने का षडयंत्र देश भर में चल रहा है। अभी हाल ही में इस संबंध में मध्य प्रदेश सरकार ने एक कानून बनाया है, लेकिन इससे सबसे त्रस्त झारखंड वोट बैंक की राजनीति के कारण इसे नजरअंदाज कर रहा है।

झारखंड के विभिन्न इलाकों, खासकर साहिबगंज संताल परगना में जनजातीय युवतियों से मुस्लिम लड़के प्रेम के नाम पर दुष्कर्म, हत्या और उनकी जमीनों हो हड़पने के मामले आए दिन सामने आ रहे हैं। मुस्लिम समुदाय के अनेक युवक शादीशुदा होने के बावजूद जनजातीय युवतियों को प्रेमजाल में फँसाकर शादी कर रहे हैं।

शादी करने के बाद मुस्लिम युवकों द्वारा इन जनजातीय युवतियों को उन क्षेत्रों में चुनाव लड़वाते हैं, जो उनके लिए आरक्षित होते हैं। कई बार आदिवासियों की जमीनों को खरीदने के लिए इनका इस्तेमाल करते हैं। इतना ही नहीं, इस शादी के नाम पर मुस्लिम समुदाय के लोग वनवासियों के बीच अपनी पैठ बढ़ाते हैं और उनकी लड़कियों को नौकरी आदि का लालच देकर मानव तस्करी कर देह व्यापार में धकेल देते हैं।

पहाड़िया आदिवासियों के पास काफी जमीन हैं। ऐसे में अगर कोई मुस्लिम युवक इनकी समुदाय की लड़कियों से शादी करता है तो बाद में उनकी जमीनों पर कब्जा कर लेता है। बोरियो इलाके में पिछले एक साल में 100 से अधिक मुस्लिम युवकों ने जनजातीय युवतियों से प्रेम विवाह किया है। पहाड़िया समुदाय की बोरियो, बरहेट, तालझारी औऱ पतना प्रखंड में अच्छी-खासी आबादी है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 80 प्रतिशत पहाड़िया जनजातीय धर्मांतरण कर ईसाई बन चुके हैं। अब मुस्लिमों की इन पर नजर लगाए हैं। इस तरह इस जनजाति की संख्या दिनों-दिन घटती जा रही है। संताल परगना की प्रमुख आदिवासी जनजाति संताल से पहाड़िया की प्रतिद्वंद्विता है। ऐसे में मौका तलाशने वालों को मौका भी मिल जाता है।

प्रतिबंधित PFI का जमीनों पर कब्जा

अमित मालवीय ने कहा कि जनजातीय महिला की हत्या को PFI के भारत में इस्लामिक सत्ता कायम करने वाले एजेंडे के साथ देखना चाहिए। जनजातीय महिलाओं को दूसरी बीवी की तरह लेना, फिर उनके माध्यम से चुनाव जीतना, ज़मीन पर क़ब्ज़ा करना, रणनीति का हिस्सा है। जनजातीय महिला के बाद संपत्ति गैर-जनजातीय पति की होती है।

भाजपा नेता अमित मालवीय ने भी साहिबगंज में दो दिन पहले पहाड़िया समुदाय की एक युवती रबिका पहाड़न को उसके मुस्लिम शौहर दिलदार अंसारी ने 12 टुकड़ों में काटने का मामला उठाया। दिलदार से रबिका से शादी करने के एक सप्ताह बाद ही उसकी हत्या कर इलेक्ट्रिक कटर से शव को टुकड़े-टुकड़े कर फेंक दिया था।

इस काम में मुस्लिम की मदद प्रतिबंधित इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) भी कर रहा है। इसके आधार पर प्रतिबंध के बावजूद वह अपना आधार लगातार झारखंड में बढ़ा रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस तरह की शादियों के जरिए PFI ने झारखंड के करीब 10,000 एकड़ जमीन खरीद कर कब्जा कर लिया है।

करीब चार पहले झारखंड पुलिस की स्पेशल ब्रांच ने पुलिस मुख्यालय को भेजी गई अपनी रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि PFI प्रतिबंध के बावजूद पीएफआई पाकुड़, जामताड़ा, साहेबगंज और गोड्‌डा में संगठन का विस्तार कर रहा है।

झारखंड में जिन जगहों पर PFI ने सबसे अधिक जमीनें खरीदी हैं उनमें राजमहल, उधवा, तालझारी और बरहेट प्रखंड के अयोध्या, जोगोटोला, वृंदावन, करमटोला, महाराजपुर, बालूग्राम, गंगटिया, जाेंका, तीन पहाड़ बाजार और पाकुड़ के चंद्रापाड़ा, राशिपुर, जोगाडीह व पादरकोला गाँव शामिल हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कई गाँवों में PFI ने जमीनों पर कब्जा कर लिया और बाद में उसे औने-पौने दामों में खरीद लिया। PFI इस काम के लिए ना सिर्फ स्थानीय मुस्लिमों का इस्तेमाल कर रहा है, अवैध रूप से इन इलाकों में रहने वाले बांग्लादेशी घुसपैठियों को भी फंडिंग कर रही है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि इन जनजातियों युवतियों से शादियों के जरिए ना सिर्फ चुनाव लड़ा कर सत्ता में दखल बढ़ाई जा रही है और जमीनों पर कब्जा किया जा रहा है, बल्कि इसके जरिए नेशनल रजिस्टर फॉर सिटीजंस (NRC) से बचने का उपाय भी किया जा रहा है। संथाल परगना के चार जिलों में बांग्लादेशी घुसपैठियों के साथ मिलकर PFI ने वनवासियों की जमीन बड़े पैमाने पर खरीदी है। 

PFI के सदस्य आदिवासी लड़कियों से शादी कर उनके नाम से जमीन खरीद रहे हैं। ऐसा करके बांग्लादेशी घुसपैठिए खुद को आसानी से झारखंड का निवासी सकते हैं। दरअसल, मुस्लिमों से शादी करने वाली आदिवासी महिला अपने दस्तावेज में पति का नाम न दिखाकर पिता का नाम दर्ज कराती है। इससे उसकी जमीन का मालिक उसका गैर जनजातीय पति बन जाता है।

इस पर रोक के लिए मध्य प्रदेश ने PESA कानून बनाया

इस समस्या को देखते हुए पिछले महीने यानी नवंबर 2022 में मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान ने अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायत विस्तार अधिनियम (PESA Act) लागू किया है। इस कानून के तहत जनजातीय क्षेत्र की ग्राम सभाओं को अधिक शक्तियाँ दी गई हैं, ताकि जनजातीय लोगों की जमीन पर कब्जा करने के उद्देश्य से जनजातीय महिलाओं से विवाह एवं धर्मांतरण पर रोक लगाई जा सकें।

इसे लागू करने की घोषणा करते हुए सीएम मुख्यमंत्री चौहान ने कहा था, “कई बार धोखे से, छल-कपट से, हमारी जनजातीय बहनों-बेटियों को लालच देकर विवाह कर लिया जाता है, उनके नाम पर जमीन दे दी जाती है और वह जनजातीय भूमि कहलाती है। कभी-कभी धर्मांतरण का भी उपयोग किया जाता है। अब हम मध्य प्रदेश में ऐसा नहीं दिया जाएगा।”

मध्य प्रदेश में इस कानून के तहत राज्य के 89 जनजातीय ब्लॉकों के अंतर्गत आने वाले 5,212 पंचायतों के 2,350 गाँवों की ग्राम सभाओं को स्व-शासन की अनुमति दिया गया है। मध्य प्रदेश PESA Act लागू करने वाला देश का सातवाँ राज्य बन चुका है। इसके पहले 6 राज्य- हिमाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र पेसा कानून बना चुके हैं।

बता दें कि PFI पर पूरे देश में प्रतिबंध लगने से पहले झारखंड देश का पहला राज्य था, जिसने इस कट्टरपंथी संगठन पर प्रतिबंध लगाया था। झारखंड सरकार ने 21 फरवरी 2018 को PFI पर प्रतिबंध लगा दिया था। केंद्रीय गृहमंत्रालय ने PFI का अन्य आतंकी संगठनों से जुड़े होने के सबूत मिलने के बाद उस पर और उसके 8 सहयोगी संगठनों पर सितंबर 2022 में पाँच साल के लिए प्रतिबंध लगाया दिया है।

PFI के डॉक्युमेंट में जनजातीय लोगों से नजदीकी का जिक्र

प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) ने भारत को साल 2047 तक इस्लामी राष्ट्र बनाने के अपने ‘विजन डॉक्युमेंट’ में इस साजिश का उल्लेख किया है। छापेमारी में जब्त किए गए दस्तावेज में कहा गया है,  “पार्टी को ‘राष्ट्रीय ध्वज’, ‘संविधान’ और ‘अंबेडकर’ जैसी अवधारणाओं का उपयोग इस्लामी शासन स्थापित करने के वास्तविक इरादे को ढालने के रूप में और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/ओबीसी तक पहुँचने के लिए करना चाहिए।

PFI ने अपने विजन डॉक्यूमेंट आगे लिखा था, “इस चरण में पीएफआई का कहना है कि पार्टी (PFI) को एससी/एसटी/ओबीसी समुदाय के साथ घनिष्ठ गठबंधन बनाना चाहिए और चुनाव में कम-से-कम कुछ सीटें जीतनी चाहिए। PFI जो गठबंधन बनाना चाहता है, उसमें 50% मुस्लिमों की हिस्सेदारी और 10% एससी/एसटी/ओबीसी की हिस्सेदारी होगी। हमें यह दिखाकर आरएसएस और एससी/एसटी/ओबीसी के बीच एक विभाजन पैदा करने की जरूरत है कि आरएसएस केवल उच्च जाति के हिंदुओं के हित की बात करने वाला संगठन है।”

धर्मांतरण के जरिए जनसंख्या बढ़ाने के साथ-साथ जनजातीय इलाकों में जमीनों की क्यों जरूरत है, इसका खुलासा भी PFI के डॉक्युमेंट में किया गया है। इसमें लिखा है, “हमारे पास एडवांस PE पाठ्यक्रम संचालित करने के लिए अभी तक उचित एवं एकांत प्रशिक्षण केंद्र/स्थान नहीं हैं। चुनौती का सामना करने के लिए इकाइयों को मुस्लिम बहुल इलाकों या दूरदराज के स्थानों में भूखंडों का अधिग्रहण करना चाहिए, ताकि हथियारों और विस्फोटकों के भंडार के लिए उचित प्रशिक्षण सुविधाएँ और डिपो स्थापित किए जा सकें।”

‘मुस्लिम चिश्ती रंग की दीपिका ने पहनी बिकिनी, पठान से निकालो गाना’: NHRC से ‘बेशरम रंग’ की कंप्लेन, भगवा पर बहके छत्तीसगढ़ के CM बघेल

बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान (Shahrukh Khan) और अभिनेत्री दीपिका पादुकोण (Deepika Padukone) की फिल्म ‘पठान’ (Pathaan) के ‘बेशरम रंग’ गाने पर विवाद जारी है। हिंदू संगठनों, उलेमा बोर्ड के बाद अब आरटीआई एक्टिविस्ट दानिश खान ने भी दीपिका के बिकिनी और इसे गाने के दृश्यों पर एतराज जताया है।

उन्होंने इसे इसे मजहब का अपमान बताते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) में शिकायत की है। फिल्म से बेशरम रंग (Besharam Rang) गाने को हटाने की माँग की है। वहीं, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गाने का समर्थन करते हुए भगवा को लेकर विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि बजरंगी गुंडों ने भगवा रंग वसूली करने के लिए पहना है।

दानिश खान ने अपनी शिकायत में कहा है कि हिंदू समाज जिसे भगवा रंग बोल रहा है, दरअसल, वह मुस्लिम समुदाय के लिए भी बहुत मायने रखता है। यह मुस्लिम समुदाय के लिए चिश्ती रंग भी है। इस देश में सभी को इस रंग का सम्मान करना चाहिए। इस्लाम में भगवा रंग होता ही नहीं है, लेकिन इस देश में भगवा रंग की अलग ही इज्जत है। इसलिए इस्लाम मजहब वालों ने भी भगवा रंग अपना लिया है। जिसे चिश्ती रंग कहते हैं। ‘पठान’ फिल्म का गाना हिंदू-मुस्लिम एकता को आहत करने वाला है। है। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ​इस गाने को फिल्म से हटाने का आदेश देने की कृपा करे।

उधर बघेल ने कहा है, “भगवा रंग पहनना और धारण करना दोनों अलग हैं। जब साधु संत अपने घर-परिवार का त्याग ​कर देते हैं, तब जाकर वे भगवा वस्त्र धारण करते हैं। ये बजरंगी गुंडे भगवा रंग के गमछे पहन के निकले हैं, बताइए इन्होंने क्या त्याग किया है समाज के लिए। परिवार के लिए क्या त्याग किया है। ये तो बल्कि वसूली करने के लिए ये पहन रहे हैं। इस कलर को तो हर कोई पहन रहा है। कलर की बात है तो भारतीय जनता पार्टी के जो सांसद हैं, विधायक हैं वो हीरो हैं और ये हिरोइनों के साथ जब भगवा रंग के कपड़े पहनकर डांस कर रहे हैं उसके बारे में इनके क्या विचार हैं। रंगों से किसी की जाति, और धर्म को तय नहीं करना चाहिए।”

गौरतलब है कि इससे पहले मध्य प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा और अयोध्या के महंत राजू दास भी इस गाने का विरोध कर चुके हैं। महंत ने हाल ही में आरोप लगाया था कि ‘पठान’ फिल्म में सनातन धर्म का मजाक उड़ाया गया है। हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करने के नए-नए तरीके खोजे जा रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने दर्शकों से अपील की थी मैं चाहता हूँ कि आप लोग ऐसी फिल्मों का बहिष्कार करो और जहाँ भी, जिस भी थिएटर में ये लगे उसको फूँक दो। नहीं फूँकोगे, तो ये मानने वाले नहीं हैं। जैसे को तैसा करना पड़ता है। दुष्टों के साथ जब तक दुष्टतापूर्वक व्यवहार नहीं करोगे, तो इसके ऊपर आप कंट्रोल नहीं लगा सकते।”

आनी थी डोली, आ रही अर्थियाँ: बच्चे-बुजुर्ग, औरत-मर्द… अब तक 35 मौत, दिसंबर की एक त्रासदी जिसकी चर्चा कम हुई

जोधपुर के शेरगढ़ का भूंगरा गाँव। इस गाँव के एक परिवार में 8 दिसंबर 2022 को जश्न का माहौल था। नाते-रिश्तेदारों की हँसी से आँगन खिलखिला रहा था। शाम को बारात जानी थी। बहू की डोली आनी थी। लेकिन एक त्रासदी ने चंद सेंकेंड के भीतर सब कुछ बदल डाला। न बारात गई। न डोली आई। न बैंड बाजा बजा। उस त्रासदी के बाद से इस परिवार के 35 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक, औरत से लेकर मर्द तक शामिल हैं। कई अभी भी अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे है। बावजूद इसके राजस्थान का प्रशासन अड़ियल बना रहा तो 18 दिसंबर को मार्च करने के लिए पूरा शहर ही सड़क पर उतर आया।

8 दिसंबर की रात सुरेंद्र की बारात निकलने वाली थी। घर में खुशी का माहौल था। महिलाएँ मंगल गीत गा रही थीं। बच्चे इधर-उधर खेल रहे थे। कुछ ही देर में घर में रखे दो सिलिंडर ब्लास्ट हो गया और एक ही पल में सब कुछ तबाह हो गया। घर में खुशी का माहौल एक ही झटके में गम में तब्दील हो गया। दो बच्चों ने तो मौके पर ही दम तोड़ दिया। हादसे में 63 लोग घायल हो गए थे। इनमें से 51 को जोधपुर के सरकारी अस्पताल के बर्न यूनिट में भर्ती कराया गया।

घायलों में से 35 की हालत काफी खराब थी और ये लोग 60 प्रतिशत से ज्यादा जल चुके थे। अन्य लोगो की बर्न इंजरी 40 प्रतिशत के आसपास थी। बीते कई दिनों से घायलों में से किसी न किसी की मौत हो रही है। परिवार के अधिकतर लोगों की मौत हो चुकी है। ऐसे में गाँव वाले ही पीड़ित परिवार का सहारा बन रहे हैं और सदस्यों के अंतिम संस्कार में मदद कर रहे हैं।

किसी हादसे में एक ही परिवार के इतने सारे लोगों की मौत का मामले ने राजस्थान को हिला कर रख दिया है। खासकर जोधपुर शहर में घटना को लेकर मातम का माहौल है। लोग बस किसी तरह से मौत के इस दर्दनाक सिलसिले के खत्म हो जाने की दुआ कर रहे हैं। घटना के बाद मुआवजे को लेकर राजस्थान सरकार निशाने पर आ गई है।

अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार (15 दिसंबर 2022) को भी घायलों में से चार की मौत हो गई थी। इसके बाद मृतकों के परिजनों ने मुआवजे की माँग को लेकर शव को लेने से इनकार कर दिया और अस्पताल के बाहर धरने पर बैठ गए। वहीं रविवार को पीड़ितों को उचित मुआवजा दिलाने के लिए हजारों की संख्या में लोग सड़क पर उतर आए और जोधपुर कलेक्ट्रेट तक मार्च किया। आखिरकार देर रात मुआवजे को लेकर सहमति बनी। बकौल दैनिक भास्कर, संभागीय आयुक्त कैलाश चंद्र मीणा ने बताया कि मृतकों के परिजनों को 17 लाख रुपए व आश्रितों को संविदा पर नौकरी पर सहमति बनी है और इसके लिए प्रस्ताव सरकार को भेजा जाएगा।

‘असम में हुआ था मेस्सी का जन्म’: जिस जमीन पर इंदिरा ने घुसपैठियों को दी ‘पनाह’, वहीं अर्जेंटीना के कप्तान को कॉन्ग्रेस MP अब्दुल खलीक ने किया ‘पैदा’

असम में बांग्लादेशी घुसपैठियों को बसाने का आरोप जिस कॉन्ग्रेस पर लगती रहती है, अब उसके एक सांसद ने उसी असम को अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेस्सी का जन्मस्थान बताया है।

फीफा वर्ल्ड कप 2022 में अर्जेंटीना के जीतने के बाद भारत में कुछ नेता अपने-अपने राज्य का कनेक्शन लियोनेल मेस्सी से जोड़ने में जुटे हुए हैं। इसी कड़ी में असम के बारपेटा से कॉन्ग्रेस सांसद अब्दुल खलीक ने भी एक ट्वीट किया। अपने ट्वीट में उन्होंने मेस्सी को शुभकामनाएँ दी और साथ में उनका कनेक्शन असम से बता डाला। लोगों ने यह देख उनसे कन्फर्म किया कि सच में उनका असम से कनेक्शन है। इस पर अब्दुल ने फिर हाँ भरी और बाद में अपना ट्वीट डिलीट कर दिया।

अब्दुल खलीक के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

अब्दुल खलीक ने अपने ट्वीट में लिखा था, “दिल से बहुत ज्यादा बधाई। हमें आपके असम कनेक्शन की बहुत ज्यादा खुशी है।” अब्दुल खलीक के इस ट्वीट के बाद आदित्य शर्मा नाम के यूजर ने प्रश्न चिह्न लगाते हुए पूछा ‘असम कनेक्शन?’ इस पर अब्दुल खलीक ने जवाब दिया- ‘हाँ इनका जन्म असम में हुआ था।’

इस ट्वीट के बाद लोगों ने असम सांसद को ट्रोल करना शुरू कर दिया। किसी ने कहा कि जैसे मेस्सी असम में पैदा हुए, वैसे ही वो उनके क्लासमेट हैं।

एक यूजर ने एडिटेड फोटो शेयर करते हुए दिखाया, “वर्ल्ड कप जीतने के बाद मेस्सी अपनी पत्नी के साथ असम आए हैं। उस जगह को कभी न भूलें जहाँ आप हुए।”

एक यूजर ने मेस्सी की फोटो शेयर करके कैप्शन में लिखा, “मुझे आज पता चला कि मैं असम में पैदा हुआ था।”

एक यूजर ने कॉन्ग्रेस सांसद की बौद्धिकता पर सवाल खड़े किए और बताया, “मुझे पहले लग रहा था कि ये केवल सोशल मीडिया जोक है। मगर नेता का बायो पढ़ने के बाद…।” यूजर्स द्वारा फजीहत किए जाने के बाद अब्दुल खलीक ने इस ट्वीट को डिलीट कर दिया है।

बता दें कि इससे पहले तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेता तृणमूल कॉन्ग्रेस ने मेस्सी का बंगाल कनेक्शन बताया था। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा था, “ये जीत अर्जेंटीना की नहीं बल्कि तृणमूल कॉन्ग्रेस की है…जय बांग्ला।”

रिजू दत्ता के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

असम में 1000 बीघा जमीन खाली कराने के लिए अतिक्रमण विरोधी अभियान, अवैध निर्माणों पर CM सरमा का चला बुलडोजर, बड़ी संख्या में पुलिस तैनात

असम सरकार राज्य के एक बड़े हिस्से में अतिक्रमण विरोधी अभियान चला रही है। नागाँव जिले में स्थानीय प्रशासन ने सोमवार (19 दिसंबर 2022) की सुबह करीब 1000 बीघा सरकारी जमीन पर बने अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाकर कब्जा मुक्त करा रही है। लोगों के विरोध को देखते हुए बताद्राबा में 800 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है।

इलाके में सरकारी जमीनों पर अवैध मकान बनाकर बड़े पैमाने पर कब्जा जमा लिया गया है। इन अवैध कब्जों को हटाने के लिए यह अभियान चलाया गया है। इसके लिए 15वीं सदी के वैष्णव संत शंकरदेव की जन्मस्थली बताद्राबा के हिडुबी इलाके में सीआरपीएफ और असम पुलिस के करीब हजार जवानों को तैनात किया गया है।

बताया जा रहा है कि नागाँव जिला प्रशासन द्वारा भुमुरगुरी ग्राजिंग रिजर्व, जमाई बस्ती, रामपुर, कदमोनी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बेदखली अभियान चलाया गया है। अभी भी करीब 400 एकड़ जमीन से अतिक्रमण हटाया जाना है।

अधिकारियों के अनुसार, बेदखली अभियान से पहले ‘अवैध अतिक्रमणों’ की पहचान करने के लिए क्षेत्र में एक सर्वेक्षण किया गया था। इस साल अक्टूबर में लगभग 1,000 परिवारों को नोटिस भेजकर अतिक्रमण हटाने के लिए कहा गया था।

नागाँव जिले की पुलिस अधीक्षक लीना डोले (Leena Doley) ने बताया कि जिला प्रशासन की ओर से अतिक्रमण करने वालों को पहले ही नोटिस जारी किया गया था, क्योंकि ये सरकारी जमीन पर बने प्लॉट हैं। 13 दिसंबर से यहाँ सुरक्षाकर्मी डेरा डाले हुए हैं और फ्लैग मार्च कर रहे हैं। नोटिस के बाद कई अतिक्रमणकारी पहले ही इस इलाके को छोड़ चुके हैं।

उन्होंने आगे बताया, “हमारी रिपोर्ट के अनुसार सरकारी जमीन पर 302 अवैध मकान बनाए गए थे, जिनमें अब 72 बचे हैं। हमें इस अभियान में स्थानीय लोगों का पूरा सहयोग मिला है। अब बेदखली का अभियान शांतिपूर्वक चल रहा है। उम्मीद है कि हम 1000 बीघा जमीन कब्जा मुक्त कर पाएँगे।”

हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली असम सरकार द्वारा चलाए जा रहे बेदखली अभियान के कारण अवैध मकान बनाने वाले सैकड़ों परिवार ये जगह छोड़कर चले गए हैं। उनमें से कई लोग अपने घरों को खुद ही तोड़कर यहाँ से चले गए। इस साल सितंबर में मुख्यमंत्री सरमा ने असम विधानसभा को बताया था कि राज्य भर में कुल 4,449 परिवारों को बेदखल किया गया है, क्योंकि उन्होंने सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर रखा था।

गौरतलब है कि 23 सितंबर 2022 को दारांग जिले के गोरुखुटी इलाके में भी अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाया गया था। इस अभियान के दौरान हिंसा भड़क उठी थी। जगह खाली कराने गई पुलिस पर गाँव वालों ने हमला कर दिया था। इस हमले में दो लोग मारे गए थे और 20 से अधिक घायल हो गए थे। मारे गए लोगों में 12 साल का एक किशोर भी शामिल था।