Home Blog Page 2161

राहुल बन कहलाए बॉलीवुड के बादशाह, फिर फिल्में हुईं कम मुस्लिम कैरेक्टर बढ़ गए: पर्दे पर ‘पठान’ दिखना अजीब संयोग या उम्माह वाला प्रयोग

धंधेबाज उसे बॉलीवुड का बादशाह कहते हैं। फैन किंग खान। नाम है- शाहरुख खान (Shah Rukh Khan)। आजकल चर्चा में हैं अपनी आने वाली फिल्म पठान (Pathaan) को लेकर। बेशरम रंग (Besharam Rang) गाने पर चल रहे विवाद के बीच इस फिल्म का एक और गाना झूमे जो (Jhoome Jo) भी रिलीज हो गया है।

करीब 5 साल बाद बड़े पर्दे पर आ रही शाहरुख खान की इस फिल्म से जुड़े कई विवाद हैं। इनमें से एक भगवा रंग का अपमान कर हिंदुओं को नीचा दिखाने की भी है। वैसे शाहरुख खुद को सेकुलर बताते हैं। सिख हिंदू महिला से शादी भी की है। हाल ही में उमराह कर मक्का से आने के बाद उन्हें वैष्णो देवी मंदिर में भी देखा गया। लेकिन इन सबके बीच तीन दशक से अधिक समय से बॉलीवुड में काम कर रहे शाहरुख के फिल्मी किरदारों का ‘मजहब’ दिलचस्प तरीके से बदला है।

कभी शाहरुख खान साल में 5 से 7 फिल्में किया करते थे। साल 1995 में कुल 7 फिल्में की थी। इनमें से एक ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएँगे’ थी। इसी तरह साल 2000 में ‘मोहब्बतें’ समेत 6 फिल्मों में वे दिखे थे। 1989 में ‘फौजी’ सीरियल से अभिनय की दुनिया में आने वाले शाहरुख की पहली फिल्म 1992 में आई थी। उनके फिल्मी करियर को हम तीन हिस्सों में बाँटकर देख सकते हैं। 1992 से 2002। 2002 से 2012 और 2012 से अब तक। इससे पता चलता है कि जैसे-जैसे वे बॉलीवुड में स्थापित होते गए मुस्लिम किरदार के लिए उनका मोह बढ़ते गया।

1992-2002 के बीच उन्होंने करीब 40 फिल्मों में काम किया। लेकिन इनमें से एक ही में उनके किरदार का मजहब इस्लाम था। यह फिल्म थी 1999 में आई हे राम। कमल हासन की मुख्य भूमिका वाली इस फिल्म में शाहरुख ने अमजद अली खान का किरदार निभाया था। इसी कालखंड में वे पर्दे पर राहुल और राज बनकर लोकप्रिय हुए थे। बादशाह और किंग खान जैसे तमगे मिले थे।

2002-2012 के बीच उनकी 25 फिल्में आई। इनमें से कुछ में उनका स्पेशल या गेस्ट अपीयरेंस भी था। इस समय अंतराल में उनकी फिल्में 40 से घटकर भले आधी हो गई, लेकिन पर्दे पर वे तीन फिल्मों में मुस्लिम का किरदार निभाते दिख गए। 2007 में आई ‘चक दे इंडिया’ में वे कबीर खान बने। 2009 में आई ‘बिल्लू’ में साहिर खान। 2010 में रिलीज हुई ‘माई नेम इज खान’ में रिजवान खान’।

यदि जनवरी 2023 में रिलीज हो रही पठान को भी जोड़ लें तो 2012 के बाद से उनकी 10 फिल्में आई हैं। लेकिन इनमें से चार में वे मुस्लिम कैरेक्टर में हैं। 2016 में आई ‘ऐ दिल है मुश्किल’ में वे ताहिर खान थे तो उसी साल आई ‘डियर जिंदगी’ में डॉ. जहाँगीर खान। इसी तरह 2017 में आई ‘रईस’ में उनके किरदार का नाम रईस आलम था। अब आ रही है पठान।

एक तरफ शाहरुख खान की फिल्मों की रफ्तार कम हो रही है। दूसरी ओर पर्दे पर उनके मुस्लिम किरदार बढ़ रहे हैं। आप चाहें तो इसे अजीब संयोग भी कह सकते हैं। लेकिन जो व्यक्ति 57 साल की उम्र में भी बोटॉक्स और वीएफएक्स पर खर्च कर 37 साल की दीपिका पादुकोण के साथ छिछोरे स्टेप्स लगाने का मोह नहीं छोड़ पा रहा हो, संभव है कि वह मजहबी किरदारों के साथ उम्माह वाला कोई प्रयोग भी कर रहा हो। वैसे भी सबको पता है कि ‘चक दे इंडिया’ के पीछे जिसकी कहानी प्रेरणा थी, वह असल जिंदगी में हिंदू हैं, भले वह पर्दे पर इस्लाम को मानने वाला कबीर खान दिखाया गया है। जरा सोचिएगा!

किडनी बची थी आधी, चमड़ी तक छीली: जिसे दिलदार अंसारी ने काटा उसके साथ हैवानियत देख डॉक्टर भी हैरान, कहा- कभी ऐसा पोस्टमार्टम नहीं किया

झारखंड के साहिबगंज में दिलदार अंसारी द्वारा रिबिका पहाड़िन की बेरहमी से हत्या करने के मामले में अब कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पहले जहाँ पता चला था कि दिलदार ने रिबिका के शव को टुकड़ों-टुकड़ों में काटा। वहीं अब जानकारी हुई है कि अंसारी ने शव को काटने से पहले रिबिका के शरीर से उसकी चमड़ी छीली थी। पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर भी ऐसी क्रूरता देख हैरान थे। उनका कहना है कि उन्होंने ऐसा पोस्टमार्टम कभी नहीं किया।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, पोस्टमार्टम कर रहे डॉक्टरों ने बताया है कि रिबिका के शव के साथ दरिंदगी की गई। उसकी हत्या करने के बाद शव से खाल उतार दी गई और शव को कई टुकड़ों में काट दिया गया। डॉक्टर का कहना है कि शव के छोटे-छोटे टुकड़े किए गए थे और इसे काटने में करीब 7 से 8 घंटे का वक्त लगा था।

रिपोर्ट के अनुसार, डॉक्टरों ने बताया कि पोस्टमार्टम के लिए रिबिका के करीब 28 अंग लाए गए थे और दोनों किडनियाँ आधी थीं। डॉक्टरों ने साथ ही बताया कि इनमें से कई अंग मौजूद नहीं थे। डॉक्टरों के अनुसार रिबिका के सिर, कई अंगुलियाँ, बाईं हिस्से की पसली इत्यादि अंग को पोस्टमार्टम के लिए नहीं लाया जा सका। डॉक्टरों ने बताया कि रिबिका की बच्चेदानी मिली है, जिसे आगे की जाँच के लिए रख लिया गया है।

इससे पहले इस मामले में बुधवार (21 दिसंबर 2022) को नया खुलासा हुआ था। पुलिस के मुताबिक दिलदार अंसारी की माँ मरियम निशा, रिबिका को किसी तरह से अपने रास्ते से हटाना चाहती थी और इसके लिए उसने अपने सगे भाई मोईनुल अंसारी को 20,000 रुपए एडवांस में दिए थे। दरअसल जिस बोरियो थाना में रिबिका की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी, वहाँ की एएसआई सुषमा कुमारी ने दिलदार अंसारी के भाई आमिर अंसारी से पूछताछ की थी, जिसने इसका खुलासा किया था।

पुलिस की जाँच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है मामले में रौंगटे खड़े कर देने वाले खुलासे हो रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हत्या के समय रिबिका गर्भवती थी। दिलदार के मामा और उसके दोस्त ने रिबिका के क़त्ल से पहले उसके साथ जबरदस्ती भी की थी। सूत्रों का दावा है कि आरोपितों ने गुनाह कबूल लिया है।

ये भी पता चला है कि रिबिका के शौहर दिलदार अंसारी के मामा मोइनुद्दीन अंसारी और उसके दोस्त मैनुल अंसारी ने बलात्कार के बाद रिबिका की गला दबाकर हत्या कर दी गई। हत्या के बाद शव को मामा के दोस्‍त मैनुल अंसारी के घर ले जाया गया क्‍योंकि मोइनुद्दीन के घर पर लाश को बोटियों में काटने के लिए पर्याप्त जगह नहीं थी।

मैनुल के घर पर प्‍लास्टिक बिछाकर शव के टुकड़े किए गए। शव के टुकड़े करने के लिए जिन धारदार हथियारों का इस्तेमाल हुआ उनमें से कुछ बरामद हो चुके हैं और कुछ की तलाश की जा रही है। रिबिका की बेदर्दी से हुई हत्‍या से उसके गाँव के लोगों में आक्रोश है। सभी आरोपितों की फाँसी की माँग कर रहे हैं।

दिशा सालियान की मौत की होगी SIT जाँच: डिप्टी CM फडणवीस का ऐलान, BJP विधायक ने कहा- आदित्य ठाकरे का हो नार्को टेस्ट

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की पार्टी बाला साहेब शिवसेना के सासंद राहुल शेवाले ने बुधवार (21 दिसंबर 2022) को संसद में बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़े कई चौंकाने वाले खुलासे किए थे। उनके बाद शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के विधायक भरत गोगावले (Bharat Gogavale) और बीजेपी विधायक नितेश राणे (Nitesh Rane) ने महाराष्ट्र विधानसभा में आज सुशांत सिंह राजपूत की मैनेजर दिशा सालियान की मौत का मुद्दा उठाया और इस मामले की जाँच की माँग की। इसके बाद सदन में विधायकों का हंगामा शुरू हो गया।

वहीं डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने ऐलान किया कि इस मामले की जाँच अब स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम द्वारा करवाई जाएगी। यह जाँच बिलकुल निष्पक्ष होगी

नितेश राणे ने इस मामले में आदित्य ठाकरे का नार्को टेस्ट कराने की माँग भी की है। राणे ने गुरुवार (22 दिसंबर 2022) को मीडियाकर्मियों से कहा, “दिशा सालियान की मौत का सच सामने आने दीजिए। यह मामला अभी भी मुंबई पुलिस के पास है। अभी तक इसकी सीबीआई जाँच नहीं कराई गई है। मैं सीएम से इसकी जाँच कराने का अनुरोध करूँगा। फाइनल पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और पूरी किताब के पन्ने अभी मिलने बाकी हैं। आदित्य ठाकरे का नार्को टेस्ट कराया जाना चाहिए।”

बीजेपी विधायक ने आगे कहा कि सुशांत सिंह राजपूत और उनकी मैनेजर दिशा सालियान मौत का केस फिर से खोला जाए। दिशा की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट अभी तक सामने नहीं आई है। इसलिए अगर आदित्य ठाकरे का नार्को टेस्ट किया जाता है, तो सच्चाई सामने आ जाएगी। जैसे श्रद्धा वाकर मर्डर केस में आफताब अमीन पूनावाला का नार्को टेस्ट कराया गया था, वैसे ही आदित्य ठाकरे का भी नार्को टेस्ट कराया जाए।

नितेश राणे ने यह भी कहा कि सुशांत राजपूत मौत मामले में आदित्य ठाकरे का नाम ही क्यों लिया जा रहा है। राहुल शेवाले कभी मातोश्री के चाहने वाले थे। उन्होंने ही इस मुद्दे को उठाया था। शेलावे का कहना है कि सुशांत की मौत से पहले रिया चक्रवर्ती को आदित्य ठाकरे 44 कॉल आए हैं।” नितेश राणे ने पूछा, फिर इस मामले में जाँच अधिकारी क्यों बदले गए।

बता दें कि लोकसभा में सांसद राहुल शेवाले ने कहा था, “रिया चक्रवर्ती को सुशांत की मौत से पहले 44 बार AU के नाम से फोन किया गया। रिया चक्रवर्ती की लीगल टीम ने AU को अनन्या उदास बताया था, लेकिन बिहार पुलिस की जाँच में AU का मतलब आदित्य उद्धव ठाकरे था। इसकी जाँच की जानी चाहिए और सच्चाई सामने आनी चाहिए।”

हालाँकि पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ने इसे सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति अपनी पार्टी के प्रति वफादार नहीं रहा उससे किसी तरह अपेक्षा नहीं की जा सकती। वैसे यह पहली बार नहीं है जब सुशांत और उनकी मैनेजर रही दिशा सालियान को लेकर आदित्य पर सवाल उठे हैं। इससे पहले इस केस में उनका नाम कई बार लिया गया है। अब इस मामले की जाँच स्पेशन इन्वेस्टिगेशन टीम द्वारा होगी। यह ऐलान प्रदेश के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा किया गया है।

जीसस के कारण कोरोना से बचा भारत, विकास भी उन्हीं की वजह से हुआ: तेलंगाना के हेल्थ डायरेक्टर का बयान वायरल, सफाई में कहा- ‘मैंने ये सब नहीं बोला’

दुनिया भर में बढ़ रहे कोरोना के मामलों के बीच तेलंगाना के स्वास्थ्य निदेशक जी श्रीनिवास राव का अजीब बयान सामने आया है। उन्होंने क्रिसमस से पूर्व आयोजित एक कार्यक्रम में ईसाइयत का महिमामंडन करते हुए कहा कि ईसा मसीह की वजह से ही भारत में कोविड को नियंत्रित किया जा सका। जीसस के चलते हीं लोग कोरोना महामारी से बच पाए।

श्रीनिवास ने भद्राद्री कोठागुडेम जिले में आयोजित क्रिसमस से पूर्व एक समारोह में यह विवादास्पद बयान दिया। टीवी 9 तेलुगु में छपी रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा, ”ईसाई धर्म की वजह से ही भारत का विकास हुआ है। ईसा मसीह की कृपा से ही कोविड कम हुआ है। बहुत से लोगों का सोचना है कि कोरोना कम हो गया क्योंकि हम अच्छा काम कर रहे हैं। यह वास्तविकता नहीं है। जीसस क्राइस्ट की वजह से मामले कम हुए हैं।”

श्रीनिवास ने आगे कहा, ”मानव जाति का अस्तित्व खतरे में है। ईश्वर तो बहुत हैं, लेकिन केवल केवल यीशु ही है जो पृथ्वी पर चले थे।” श्रीनिवास ने कहा कि उनके पूर्वजों ने यह सब देखा है और आने वाली पीढ़ियों को यह बताया है। उन्होंने आगे लोगों से जाति और धर्म की परवाह किए बिना ईसा मसीह के संदेश को आगे ले जाने और इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने का आह्वान किया।

आश्चर्यजनक है कि सरकारी पद पर बैठा व्यक्ति एक पादरी की तरह बातें कर रहा है। यह पहली बार नहीं है कि श्रीनिवास विवादों में आए हैं। इससे पहले भी वह तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के पैर छूने को लेकर विवादों में रह चके हैं। श्रीनिवास के बयान को लेकर तेलंगाना भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया जताई है। राज्य भाजपा ने स्वास्थ्य निदेशक का बयान को पूरी तरह से अस्वीकार्य करार दिया है।

तेलंगाना भाजपा के नेता कृष्णा सागर राव ने कहा, ”एक तो वह कह रहे हैं कि भारत का जो भी विकास हुआ है वह जीसस क्राइस्ट ने किया है। वह यह भी कह रहे हैं कि कोविड-19 और उसके बाद की स्थितियों को यीशु ने संभाला। यह उनकी निजी आस्था हो सकती है लेकिन सार्वजनिक रूप से वह ऐसा कैसे कह सकते हैं। फिर वह स्वास्थ्य निदेशक क्यों हैं। उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए और यीशु को इसकी रक्षा करने देना चाहिए।”

वहीं विवाद बढ़ता देख श्रीनिवास ने ट्वीट कर सफाई दी है। उन्होंने एक वीडियो शेयर करते हुए कहा, ”मेरी छवि को खराब करने के लिए लोगों के एक वर्ग द्वारा मेरे भाषण को गलत तरीके से पेश किया गया है। मेरा पूरा वीडियो देखिए, मैंने केवल इतना कहा है कि सरकार के प्रयासों, स्वास्थ्य कर्मचारियों और सभी धर्मावलंबियों की प्रार्थनाओं की वजह से हम कोरोना पर लगाम कस पाए।”

तेलंगाना के स्वास्थ्य निदेशक के दावों के विपरीत भारत अपनी रणनीति की वजह से कोरोना के घातक लहरों से उबर पाया था। देश में कड़े लॉकडाउन लगाए गए, जिससे सामुदायिक संक्रमण कम हुआ।प्रभावशाली टीकों का निर्माण किया गया और इतनी बड़ी आबादी के लिए सफलता पूर्वक टीकाकरण कार्यक्रम शुरू किया गया। हालाँकि दुनियाभर में फिर से पाँव पसार रहे कोरोना ने भारत की भी चिंता बढ़ा दी है।

इस्लाम छोड़ हिंदू बने थे महामुद्दीन खान, माता मंदिर में करते थे पूजा-अर्चना: राजस्थान में धारदार हथियार से काटा, बोरों में भरकर लाश के टुकड़े फेंके

राजस्थान के धौलपुर में इस्लाम छोड़ हिंदू पुजारी बने शख्स की नृशंस हत्या का मामला सामने आया है। यह घटना कंचनपुर थाना क्षेत्र के टोंटरी गाँव की है। 60 वर्षीय महामुद्दीन खान माता मंदिर के पुजारी थे। मंगलवार (20 दिसंबर 2022) रात को कुछ बदमाशों ने धारदार हथियारों से काटकर उनकी बेरहमी से हत्या कर दी। इसके बाद लाश के कई टुकड़े करके उसे बोरों में भरकर फेंक दिया।

अगले दिन ग्रामीणों ने बोरों में बंद लाश देखने के बाद इसकी सूचना कंचनपुर थाना पुलिस को दी गई। पुलिस ने घटनास्थल पर पहुँचकर शव के टुकड़ों को अपने कब्जे में ले लिया और जाँच में जुट गई। बताया जा रहा है कि मंदिर के पास एक गुफा में रहने वाले तीन साधु घटना के बाद से फरार हैं। इनका महामुद्दीन के साथ मनमुटाव चल रहा था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मृतक पुजारी महामुद्दीन खान ने 10 साल पहले इस्लाम मजहब को छोड़कर हिंदू धर्म अपना लिया था। हिंदू धर्म अपनाने के बाद से वह टोंटरी गाँव के नजदीक पार्वती नदी के बीहड़ों में स्थित चामण माता के मंदिर में पूजा-अर्चना करते थे और यहीं पर रहते थे। दो दिन पहले बदमाशों ने पुजारी की निर्मम हत्या कर, उनकी लाश के टुकड़े कर पार्वती नदी किनारे चार अलग-अलग बोरों में डालकर फेंक दिया। बुधवार (21 दिसंबर 2022) सु​ब​ह ग्रामीणों ने जब बोरों में बंद खून से लथपथ लाश देखी तो इलाके में हड़कंप मच गया। इसके बाद उन्होंने पुलिस को घटना की जानकारी दी।

कुछ मीडिया रिपोर्ट में पुजारी का नाम बहाबुद्दीन खान बताया जा रहा है। धौलपुर जिला पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह ने इस संबंध में कि टोंटरी गाँव के चामण माता मंदिर में महामुद्दीन पुजारी था। पुजारी की धारदार हथियारों से काटकर हत्या की गई। शव के टुकड़ों को चार प्लास्टिक के बारों में पार्वती नदी के किनारे से बरामद किया गया है। प्रारम्भिक जाँच में सामने आया है कि चामण माता मंदिर के पास एक गुफा है, जहाँ तीन साधु भी रहते हैं। इन साधुओं के साथ महामुद्दीन का मनमुटाव चल रहा था। ये तीनों अभी फरार हैं। पुलिस टीम गठित कर उनके संबंधित ठिकानों पर दबिश दे रही है।

चीन जैसे नहीं होंगे हालात, 2% भारतीय हो सकते हैं कोरोना+: चौथी लहर पर IIT प्रोफेसर का गणितीय मॉडल, पहले लगा चुके हैं सटीक आकलन

चीन में कोरोना की विस्फोटक स्थिति से पूरी दुनिया चिंतित है। अस्पतालों में बेड नहीं है। अंतिम संस्कार के लिए कब्रिस्तानों में लाइन लगी है। ओमीक्रोन के सब वेरिएंट BF.7 और BA.5 से यह हालात पैदा हुए हैं। भारत में भी इसके कुछेक मामले सामने आ चुके हैं।

लेकिन आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर मणींद्र अग्रवाल का मानना है कि कोरोना की चौथी लहर की वजह से भारत में चीन जैसे हालात पैदा नहीं होंगे। उन्होंने बताया ​है कि करीब 2 प्रतिशत भारतीय खतरे में हैं, जबकि शेष 98 प्र​तिशत भारतीयों में कोविड से लड़ने के लिए इम्यूनिटी डेवलप हो चुकी है। प्रोफेसर अग्रवाल ने ट्विटर पर थ्रेड के जरिए अपने आकलन को शेयर किया है। उन्होंने अपने गणितीय मॉडल के जरिए पूर्व की लहरों का भी सटीक आकलन किया था।

साभार प्रो. मणींद्र अग्रवाल ट्विटर हैंडल

प्रोफेसर मणींद्र अग्रवाल ने ट्विटर थ्रेड के जरिए बताया है कि आने वाले समय में चीन के हालात और खराब होने वाले हैं। उनका मानना है चीन की 90 प्रतिशत जनसंख्या कोरोना संक्रमित हो सकती है। चीन में ओमिक्रॉन फैमिली का सब-वैरिएंट BF.7 फैला है, जो चीनी वैक्सीन के असर को निष्प्रभावी कर रहा है। यही वजह है कि चीन में स्थिति बेकाबू होती जा रही है।

प्रोफेसर अग्रवाल का मानना है कि नेचुरल इम्यूनिटी कोरोना के हर वेरिएंट को मात दे सकती है। उनका दावा है कि 98 प्रतिशत भारतीयों में नेचुरल इम्यूनिटी विकसित हो चुकी है। इसलिए भारतीयों को घबराने की जरूरत नहीं है। करीब 2 प्रतिशत भारतीयों पर ही ओमिक्रोन के सब वेरिएंट BF.7 का ख़तरा है।

प्रोफेसर अग्रवाल ने यह भी बताया है कि भारतीयों के मुकाबले चीनी नागरिकों की इम्यूनिटी विकसित क्यों नहीं हो सकी। उनके मुताबिक चीन में जीरो कोविड पॉलिसी लागू की गई थी। इस पॉलिसी के तहत कोविड होने के बाद लोगों को बाहर आने की इजाजत नहीं दी गई। चीन की यही पॉलिसी उसके लिए खतरनाक साबित हो रही है। इसके उलट भारत में कोरोना से ठीक होने के बाद मरीजों पर बाहर निकलने के लिए प्रतिबंध नहीं लगाए गए। इसकी वजह से लोगों में तेजी के साथ नेचुरल इम्यूनिटी विकसित हुई। हालाँकि उन्होंने यह भी कहा है कि एक समय के बाद नेचुरल इम्यूनिटी भी कम होने लगती है।

प्रोफेसर अग्रवाल का कोविड को लेकर पहले भी आकलन सही साबित हो चुका है। प्रोफेसर अग्रवाल और उनकी टीम ने कोरोना संक्रमण की स्टडी के लिए अपना गणितीय मॉडल ‘सूत्र’ ईजाद किया है। संक्रमण को लेकर पूर्वानुमान लगाने के लिए प्रोफेसर अग्रवाल की टीम कोरोना संक्रमण की शुरुआत से लेकर उसके चरम तक पहुँचने तक के आँकड़ों का गहन अध्ययन करती है। इसमें तकरीबन एक हफ्ते के केस पर अनुमान लगाते हुए एक मॉडल बनाया जाता है और अंत में परिणाम साझा किए जाते हैं।

Oscars तक पहली बार पहुँचा भारत का कोई गाना: RRR का ‘नाटू-नाटू’ शॉर्टलिस्ट, गुजराती फिल्म ‘छेल्लो शो’ का भी सूची में नाम

साउथ की ब्लॉकबस्टर फिल्म RRR का सुपरहिट गाना ‘नाटू-नाटू (Naatu-Naatu)’ ऑस्कर अवार्ड्स 2023 (Oscar Awards 2023) की ‘बेस्ट ओरिजनल सॉन्ग (Best Original Song)’ कैटगरी की लिस्ट में शॉर्टलिस्ट हुआ है। ट्विटर पर आरआरआर मूवी के ट्विटर हैंडल ने खुद इस खबर की जानकारी दी है।

अपने ट्वीट में आरआरआर मूवी की ओर से लिखा गया, “नाटू-नाटू पहला भारतीय गाना है जो एकेडमी अवॉर्ड्स के लिए शॉर्टलिस्ट हुआ है। आप सब का इस पूरे सफर में साथ देने के लिए बहुत धन्यवाद।”

फिल्म समीक्षक तरण आदर्श ने भी इस खबर को साझा करते हुए लिखा, “क्या तरीका है दिन को शुरू करने का। आरआरआर फिल्म का नाटू-नाटू…2022 में जिसपर सबसे ज्यादा डांस हुए…ऑस्कर 2023 के ‘ओरिजनल सॉन्ग’ कैटेगरी के लिए शॉर्टलिस्ट हुआ है।”

उन्होंने एक ट्वीट में बताया कि गुजराती फिल्म ‘चे छेल्लो शो (लास्ट फिल्म शो)’ भी बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म कैटेगरी में शॉर्टलिस्ट हुई है।

बता दें कि तेलुगु फिल्म आरआरआर ने विश्व भर में 1200 करोड़ रुपए का बिजनेस किया था। ऑस्कर अवॉर्ड्स से पहले इस फिल्म को ‘गोल्डन ग्लोबल अवॉर्ड 2023’ की नॉमिनेशन लिस्ट में भी जगह मिल चुकी है। ये फिल्म ‘बेस्ट पिक्चर- नॉन इंग्लिश लैंगुएज’ और ‘ओरिजनल सॉन्ग-मोशन पिक्चर’ जैसी दो कैटेगरी में नॉमिनेट हुई थी। इसके अलावा लंदन क्रिटिक्स सर्कल अवार्ड में भी फिल्म ‘बेस्ट फॉरेशन लैंगुएज ऑफ द ईयर’ और ‘टेक्निकल अचीवमेंट अवार्ड (स्टंट्स)’ की लिस्ट में शामिल किया गया है।

अब ऑस्कर में नाम आने के बाद फिल्म निर्माताओं की ओर से उन सभी लोगों का आभार व्यक्त किया गया जिन्होंने इस फिल्म को पसंद किया, जिनके कारण ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट हुई और वैश्विक मंच पर भारतीय सिनेमा का प्रतिनिधित्व कर पाई।

छात्रा को पहले फेल किया, फिर पास करने के लिए सेक्स का डाला दबाव: राजस्थान का प्रोफेसर पकड़ा गया, छात्र को बना रखा था दलाल

राजस्थान के कोटा में सेक्स की डिमांड करने वाला प्रोफेसर गिरीश परमार पकड़ा गया है। उस पर एक छात्रा को पहले फेल करने और फिर पास करने के बदले शारीरिक संबंध बनाने का दबाव डालने का आरोप है। पुलिस ने अर्पित अग्रवाल नाम के एक छात्र को भी पकड़ा है। बताया जा रहा है कि वह परमार के लिए बिचौलिए के तौर पर काम करता था।

राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय (RTU) में पढ़ने वाली बीटेक की छात्रा ने आरोप लगाया है कि गिरीश परमार नाम के एसोसिएट प्रोफेसर ने टेस्ट में अच्छे अंकों से पास करने के बदले उस पर शारीरिक संबंध बनाने का दबाव डाला। इसके लिए प्रोफेसर ने छात्रा के अर्पित नाम के सहपाठी का सहयोग लिया। छात्रा का आरोप है कि प्रोफेसर ने पहले तो उसे फाइनल ईयर के सेमेस्टर परीक्षा में फेल कर दिया। इसके बाद छात्रा को पास करवाने के बदले सेक्स की डिमांड की। अर्पित अग्रवाल प्रोफेसर का प्रस्ताव छात्रा तक पहुँचा रहा था। आहत छात्रा ने सारी बात अपने परिवारजनों को बता दी। जिसके बाद प्रोफेसर गिरीश परमार और अर्पित अग्रवाल के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया।

प्रोफेसर पर मामला दर्ज होते ही कई और छात्राओं को टारगेट करने की बात भी सामने आई। पता चला है कि अर्पित के जरिए प्रोफेसर ने परीक्षा में पास करने की बात कह कर अन्य छात्राओं पर भी इसी तरह दबाव डाला था। एक अन्य छात्रा ने भी प्रोफेसर के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। रिपोर्ट्स की मानें तो प्रोफेसर के खिलाफ कुछ ऑडियो क्लिप भी पुलिस के हाथ लगे हैं। इनकी जाँच की जा रही है। सूत्रों की मानें तो गिरीश परमार लंबे समय से छात्राओं को फेल कर रहा है। फिर पास करने के एवज में सेक्स की डिमांड करता था।

47 साल का गिरीश परमार आईआईटीयन और गोल्ड मेडलिस्ट रहा है। गिरीश मूलतः श्रीगंगानगर का रहने वाला है। वहीं अर्पित अग्रवाल महावीर नगर का रहने वाला बताया जा रहा है। छात्रों ने आरोप लगाया है कि यूनिवर्सिटी ने पहले छात्रा के इल्ज़ाम को नकार दिया था। जिससे आरोपित एसोसिएट प्रोफेसर गिरीश परमार बचता रहा। रिपोर्ट्स के मुताबिक कई छात्राओं ने तो उसके खिलाफ शिकायत ही नहीं दी। जिससे उसके हौसले बढ़ते गए। पुलिस के मुकदमा दर्ज कर लेने के बाद यूनिवर्सिटी भी सक्रिय हुई है। कहा जा रहा है कि यूनिवर्सिटी ने तीन सदस्यीय जाँच कमेटी बनाई है।

सुशांत की ‘मौत’ से पहले रिया को AU का 44 फोन कॉल: बाला साहेब शिवसेना के MP ने लोकसभा में बताया, आदित्य ठाकरे पर उठाए सवाल

अभिनेता सुशांत सिह राजपूत (sushant singh rajput) की मौत का मसला बुधवार (21 दिसंबर 2022) को संसद में उठा। लोकसभा में ड्रग्स पर चर्चा के दौरान महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की पार्टी बाला साहेब शिवसेना के सासंद राहुल शेवाले ने यह मुद्दा उठाया। उन्होंने इस केस की सीबीआई जाँच के निष्कर्षों को लेकर सवाल पूछते हुए कहा कि सुशांत की मौत से पहले रिया चकवर्ती (Rhea Chakraborty) को AU का 44 बार कॉल आया था। उन्होंने पूछा कि क्या AU का मतलब आदित्य उद्धव से तो नहीं है।

दक्षिण-मध्य मुंबई के सांसद शेवाले के इन आरोपों ने महाराष्ट्र की राजनीति को गर्मा दिया है। हालाँकि पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ने इसे सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति अपनी पार्टी के प्रति वफादार नहीं रहा उससे किसी तरह अपेक्षा नहीं की जा सकती। वैसे यह पहली बार नहीं है जब सुशांत और उनकी मैनेजर रही दिशा सालियान को लेकर आदित्य पर सवाल उठे हैं।

लोकसभा में सांसद राहुल शेवाले ने कहा, “रिया चक्रवर्ती को सुशांत की मौत से पहले 44 बार AU के नाम से फोन किया गया। रिया चक्रवर्ती की लीगल टीम ने AU को अनन्या उदास बताया था, लेकिन बिहार पुलिस की जाँच में AU का मतलब आदित्य उद्धव ठाकरे था। इसकी जाँच की जानी चाहिए और सच्चाई सामने आनी चाहिए।”

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में जारी जाँच को लेकर अपडेट्स साझा नहीं किए जाने पर भी उन्होंने सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि मामले में बिहार पुलिस, मुंबई पुलिस और सीबीआई ने जाँच की। लेकिन जनता के मन में इसे लेकर प्रश्न हैं। जैसे सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले में सीबीआई की जाँच कहाँ तक पहुँची? क्या सीबीआई की जाँच पूरी हो चुकी है? उन्होंने पूछा कि सुशांत सिंह राजपूत के शरीर पर चोट के निशान कैसे थे? सुशांत सिंह राजपूत और उनकी पूर्व मैनेजर दिशा सालियान के बीच फोन पर हुई बातचीत की जाँच की गई या नहीं? क्या रिया चक्रवर्ती के फोन की जाँच की गई? क्या यह सच है कि रिया एक राजनेता के संपर्क में थी?

लोकसभा में यह मामला उठाए जाने के बाद ठाकरे गुट के सांसदों ने ऐतराज जताया। ठाकरे ग्रुप के सांसदों ने लोकसभा स्पीकर से माँग की कि आदित्य और उद्धव ठाकरे पर लगाए गए आरोपों को सदन की कार्यवाही से बाहर किया जाए। इसके बाद स्पीकर ने राहुल शेवाले के आरोपों को सदन की कार्यवाही से अलग कर दिया।

पत्रकारों से बात करते हुए राहुल शेवाले ने संसद के बाहर भी ठाकरे परिवार पर हमला जारी रखा। उन्होंने आदित्य ठाकरे के हालिया बिहार दौरे पर भी सवाल उठाए। शेवाले ने पूछा कि आदित्य ठाकरे ने पटना में तेजस्वी यादव से मुलाकात क्यों की थी? इस बात की भी जाँच होनी चाहिए।

गौरतलब है कि सुशांत सिंह राजपूत 14 जून 2020 को बांद्रा में अपने अपार्टमेंट में मृत पाए गए थे। मुंबई पुलिस ने आकस्मिक मौत की रिपोर्ट (एडीआर) दर्ज की थी। लेकिन 25 जुलाई 2020 को सुशांत के पिता केके सिंह ने रिया और 5 अन्य पर बिहार के पटना में प्राथमिकी दर्ज कराते हुए आत्महत्या करने के लिए उकसाने का आरोप लगाया था। इस केस की जॉंच को लेकर बिहार और मुंबई पुलिस में भी ठन गई थी। बाद में यह केस सीबीआई के हवाले कर दिया। शुरुआत से ही सुशांत की गर्लफ्रेंड रही रिया पर सवाल उठते रहे हैं। उन पर सुशांत को ड्रग्स मुहैया कराने के भी आरोप हैं। उन्हें कुछ समय जेल में भी बिताना पड़ा था। फिलहाल जमानत पर बाहर हैं।

खून, भगवान नरसिंह और जटिल समीकरण… वेदज्ञ गणितज्ञ, जिन्हें स्वयं महालक्ष्मी पढ़ाती थीं गणित: 100 साल में भी बन न पाए जो सवाल, मंदिर के फर्श पर उकेरते थे जवाब

भारत के महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन को भला कौन नहीं जानता, जिनकी जयंती 22 दिसंबर को ‘राष्ट्रीय गणित दिवस (National Mathematics Day)’ के रूप में मनाया जाता है। उन पर कई डॉक्यूमेंट्री और फ़िल्में भी बन चुकी हैं। गणित को लेकर उन्होंने एक से बढ़ कर एक सिद्धांत दिए। कई पुरानी समस्याओं को हल भी किया। उनके दिए कई समीकरणों पर आज तक शोध चल रहा है। मात्र 32 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया था, लेकिन तब तक देश-विदेश में वो अपना डंका बजा चुके थे।

श्रीनिवास रामानुजन ने कई ऐसी गणितीय सवालों को हल किया, जिसे असंभव माना जाता था। उस समय के बड़े अंग्रेज गणितज्ञ गॉडफ्रे हैरोल्ड (GH) हार्डी ने पत्राचार के दौरान उनकी क्षमता को पहचाना और उन्हें कैम्ब्रिज बुलाने की व्यवस्था की। हार्डी का कहना है कि वो श्रीनिवास रामानुजन के थ्योरम्स से अवाक् रह गए थे। उनका कहना था कि इस तरह की चीज इससे पहले कभी नहीं देखी गई थी। निधन के 56 साल बाद जब श्रीनिवास रामानुजन की एक नोटबुक सामने आई थी, तो उस समय के दुनिया भर के गणितज्ञों में इसके कंटेंट चर्चा का विषय बने थे।

श्रीनिवास रामानुजन का ईश्वर में अटूट विश्वास था। आज भले ही भगवान राम या श्रीकृष्ण को मानने वालों को वामपंथी लोग गँवार बताते हैं और नास्तिक होने को बुद्धिजीवी होने की कसौटी मानते हैं, उन्हें श्रीनिवास रामानुजन के बारे में जानना चाहिए। नमक्कल की महालक्ष्मी उनकी पारिवारिक इष्टदेवी थीं और उनमें श्रीनिवास रामानुजन का अटूट विश्वास था। रामानुजन का कहना था कि उनके लिए उस गणितीय समीकरण का कोई मतलब नहीं है, जो ईश्वर की धरना का प्रतिनिधित्व नहीं करता हो। वो शुद्ध शाकाहारी थे।

भारत के अन्य प्राचीन गणितज्ञों की तरह ही श्रीनिवास रामानुजन गणितीय समीकरणों के अंतिम परिणाम तक पहुँचते थे और बीच की प्रक्रियाओं को नोट करने में उनकी खास दिलचस्पी नहीं होती थी। वो फॉर्मूला का केवल अंतिम परिणाम और एक मोटा-मोटी समरी ही रखते थे। उनका स्पष्ट कहना था कि उनकी प्रतिभा, ज्ञान और सारे गणितीय खोज नमक्कल की महालक्ष्मी की देन है। उन्होंने अपने एक सपने के बारे में भी बात की थी, जिसमें वो महालक्ष्मी के पति नरसिंह (भगवान विष्णु के अवतार) को भी देखते थे, जो खून की बूँदों से बने हुए दिखते थे।

उन्हें ‘Highly Composite Numbers’ पर शोध करने के लिए PhD मिला था। वो यूनाइटेड किंगडम की ‘रॉयल सोसाइटी’ के दूसरे भारतीय फेलो थे और सबसे युवा भी। कैम्ब्रिज स्थित ट्रिनिटी कॉलेज में चुने जाने वाले भी वो पहले भारतीय फेलो थे। असल में जब श्रीनिवास रामानुजन सपने में रक्त को देखते थे। अक्सर इस तरह की हिंसक चीजों को देखने से कोई भी इसे अशुभ का सूचक मान लेगा। लेकिन, रामानुजन को खून की बूँदों से बने भगवान नरसिंह दिखते थे।

श्रीनिवास रामानुजन का कहना था कि सोते समय महालक्ष्मी खुद उनके साथ बैठती हैं और उन्हें गणितीय समीकरणों को हल कर के बताती हैं। सपने में उन्हें महालक्ष्मी का हाथ दिखता था, जिससे वो कुछ लिखती रहती थीं और ये गणित से ही जुड़ा होता था। नामगिरी या नमक्कल – ये महालक्ष्मी के ही नाम हैं। नरसिंह द्वारा हिरण्यकश्यप का सीना चीरने की कहानी तो सभी को पता है, ऐसे में क्या नरसिंह का स्वरूप रक्त का दिखना रामानुजन के लिए कोई सन्देश होता था या इसमें उनके भविष्य के लिए कोई संकेत छिपा था – इस पर चर्चा होती रहती है।

इंग्लैंड में रहने के दौरान भी श्रीनिवास रामानुजन प्रतिदिन सुबह उठ कर स्नान करते थे और महालक्ष्मी की पूजा करते थे। ठंड प्रदेश इंग्लैंड में रोज नहाना असामान्य बात थी और वहाँ के वातावरण में खानपान के कारण भी रामानुजन अभ्यस्त नहीं हो पाए और उन्हें बीमारियों ने घेर लिया था। रामानुजन ने अपने अलप जीवन काल में 3900 के करीब फॉर्मूले/समीकरण दिए, जिनमें से लगभग सभी सही साबित हुए। असल में श्रीनिवास रामानुजन की माँ भी नामगिरी देवी की भक्त थीं।

श्रीनिवास रामानुजन के माता-पिता ने भी माँ नामगिरी के मंदिर जाकर प्रार्थना की थी, जब शादी के कई वर्षों बाद तक भी उन्हें संतान नहीं हुई थी। उनकी माँ और दादी इस बात पर विश्वास करती थीं कि महालक्ष्मी ही उन्हें गणितीय समीकरणों से रूबरू कराती हैं। जब हार्डी ने रामानुजन को कैम्ब्रिज बुलाया था, तब भी रामानुजन नमक्कल स्थित महालक्ष्मी मंदिर पहुँचे थे और कहते हैं कि 3 दिनों बाद समुद्री यात्रा के लिए देवी से उन्हें अनुमति मिली थी।

श्रीनिवास रामानुजन सभी वेदों, उपनिषदों और कई अन्य हिन्दू साहित्यों में पारंगत थे। सोचिए, जिसके बारे में ‘The Man Who Knew Infinity’ कहा जाता है, उसकी महालक्ष्मी में इस तरह की आस्था थी और अपने धर्म में उन्हें इतना विश्वास था। श्रीनिवास रामानुजन कहते थे कि उनकी जिह्वा पर गणितीय समीकरण नमक्कल की नामगिरी महालक्ष्मी ही डालती हैं। वो अक्सर मंदिर में बैठ कर गणित के समीकरणों को हल करते थे।

अमेरिकी लेखक डेविड लेविट श्रीनिवास रामानुजन के एक दोस्त के हवाले से लिखते हैं कि उसने जब एक बार मंदिर में जाकर देखा तो पाया था कि रामानुजन कुछ लिख रहे हैं और उनके चारों तरफ जमीन पर आकृतियाँ बनी हुई हैं। असल में ये गणित के ही समीकरण और फॉर्मूले थे, जिन्हें उन्होंने चॉक से मंदिर की ही फर्श पर लिख रखा था। कई बार ऐसा होता था कि श्रीनिवास रामानुजन कुछ दिनों के लिए गायब हो जाते थे और कई दिनों के बाद लौटते थे।

उनके पड़ोसी उन्हें इस हरकत के लिए सनकी समझने लगे थे। उनका कहना था कि जितनी भी संख्याएँ हैं, वो हमें किसी उच्च-सत्ता से संपर्क कराती हैं। श्रीनिवास रामानुजन की प्रतिभा और उनकी मेहनत को कोई उनसे नहीं छीन सकता, लेकिन ये चर्चा अवश्य होती है कि क्या कोई दैवी शक्ति उनका साथ दे रही थी? ऐसी कोई शक्ति साथ दे, इसके लिए भी मनुष्य में उस तरह की निष्ठा, प्रतिभा, लगन और काफी कुछ ख़ास होना चाहिए।

श्रीनिवास रामानुजन अक्सर गहन ध्यान करते थे, जिसे आजकल मैडिटेशन भी कहते हैं। 100 साल से हजारों गणितज्ञ जिन समस्याओं के हल के खोज कर रहे थे, उन्हें भारत के इस महान गणितज्ञ ने चुटकियों में हल किया। इन गणितीय समस्याओं को हल करने के लिए बीच की प्रक्रिया में लिखने के लिए कई पन्ने लगते, शायद इसीलिए शुरुआती समय में गरीबी के कारण उन्होंने परिणाम और संक्षिप्त विवरण पर ही ध्यान दिया हो, ये भी हो सकता है। वो गणना के लिए स्लेट का उपयोग करते थे।