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ब्रिटेन को पहला हिन्दू PM मिलना लगभग तय! रेस से हटे बोरिस जॉनसन, 16 साल में इस पद को संभालने वाले 7वें नेता होंगे ऋषि सुनक

ब्रिटेन में प्रधानमंत्री का पद बीते कई महीनों से वैश्विक चर्चा का विषय बन गया है। देश की सत्‍तारूढ पार्टी में ही इस पद के लिए घमासान मचा हुआ है। कुछ दिन पहले पार्टी के अंदर ही महीनों उठापटक के बाद पीएम बनीं ल‍िज ट्रस ने इस्‍तीफा दे दिया। लिज ट्रस ने भारतीय मूल के ऋषि सुनक को हराकर यह पद हासिल किया था। लेकिन, आज वही सुनक इस पद की रेस में सबसे आगे हैं। दरअसल ट्रस के इस्‍तीफे के बाद प्रधानमंत्री पद का दावा ठोंकने वाले जॉनसन ने रेस से पीछे हटने की घोषणा की है। इसके साथ ही सुनक अब प्रधानमंत्री पद के सबसे बड़े दावेदार हैं।

इंडीपेंडेंट की रिपोर्ट के अनुसार, बोरिस जॉनसन ने घोषणा की है कि वह टोरी नेतृत्व प्रतियोगिता के लिए खड़े नहीं होंगे। विवादास्पद पूर्व प्रधानमंत्री ने दावा करते हुए कहा क‍ि उन्होंने कंजरवेटिव सांसदों के मतपत्र पर उपस्थित होने के लिए आवश्यक 102 नामांकन की उच्च बाधा को पार कर लिया है। उन्होंने कहा, “मैं दुख के साथ इस निष्कर्ष पर पहुँचा हूँ कि यह करना सही नहीं होगा। आप प्रभावी ढंग से शासन नहीं कर सकते जब तक कि आपके पास संसद में एक संयुक्त पार्टी न हो।”

जॉनसन के बयान से अब उनके कट्टर प्रतिद्वंद्वी, 42 वर्षीय पूर्व वित्त मंत्री सुनक के प्रधानमंत्री बनने का मार्ग लगभग साफ़ हो गया है। यदि उनके प्रधानमंत्री बनने पुष्टि हो जाति है तो है, तो ऋषि सुनक, लिज़ ट्रस की जगह लेंगे, जिन्हें वित्तीय बाजारों में उथल-पुथल शुरू करने वाले आर्थिक कार्यक्रम शुरू करने के बाद इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा था। 2007 में टोनी ब्लेयर की सरकार जाने के बाद से अब तक 5 प्रधानमंत्री ब्रिटेन देख चुका है। इस तरह 16 साल में ऋषि सुनक 7वें नेता होंगे, जिन्हें यूरोपीय देश इस पद पर देखेगा।

जॉनससन के प्रधानमंत्री पद की दौड़ से हटने के कुछ देर बाद ही सुनक ने ट्वीट कर कहा कि हम ब्रिटेन में ब्रेक्सिट और वैक्सीन रोलआउट देने के लिए और यूक्रेन पर व्लादिमीर पुतिन के ख‍िलाफ स्‍टैंड लेने के लिए जॉनसन के आभारी हैं।

एक अन्‍य ट्वीट में उन्‍होंने कहा, “हालाँकि उन्होंने फिर से पीएम के लिए चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है, लेकिन मुझे उम्मीद है कि वह देश और विदेश में सार्वजनिक जीवन में योगदान देना जारी रखेंगे।”

द गार्जियन’ की रिपोर्ट के अनुसार, जॉनसन के पीएम पद की रेस से हटने के बाद सुनक को अब 165 सांसदाें का समर्थन प्राप्‍त है। ऋषि सुनक ने रविवार को अपने आधिकारिक अभियान की शुरुआत इस घोषणा के साथ की कि वह अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के साथ-साथ देश को एकजुट करना चाहते हैं। दौड़ में तीसरी उम्मीदवार पेनी मोर्डौंट ने भी अपना अभियान शुरू किया है और उन्हें लगभग 27 सांसदों का समर्थन प्राप्त है।

उल्‍लेखनीय है कि 20 अक्टूबर को लिज ट्रस ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। ट्रस केवल 45 दिनों के लिए प्रधानमंत्री पद पर रहीं। यह किसी भी ब्रिटिश प्रधानमंत्री का अब तक का सबसे छोटा कार्यकाल रहा है। डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर उन्होंने कहा था, ”मैं वह काम नहीं कर सकी, जिसके लिए मैं चुनी गई थी।”

सोमालिया के होटल में इस्लामी आतंकी हमला, 9 की मौत और 47 घायल: पीड़ितों में कई स्कूली छात्र भी, 4 आतंकियों ने बरपाया कहर

पूर्वी अफ्रीकी देश सोमालिया के सबसे बड़े शहरों में से एक किसमायो के एक होटल पर हुए हमले में 47 लोग घायल हुए हैं जबकि 9 लोगों की मौत हो गई है। यह हमला रविवार (23 अक्टूबर, 2022) को भारतीय समयानुसार देर रात 12:45 पर हुआ है। चूँकि, यह हमला स्कूल के पास हुआ है, इसलिए इसमें कई छात्रों के घायल होने की भी खबर है। इस्लामी चरमपंथी संगठन अल-शबाब ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, किसमायो के तवाकल होटल में हुआ यह हमला आत्मघाती हमला था। इसमें, कार सवार एक आतंकी ने कार को होटल के गेट से टकरा दिया जिससे उसमें विस्फोट हो गया। इस विस्फोट से आसपास की दुकानों और बिल्डिंग्स को काफी नुकसान हुआ है। सुरक्षा अधिकारियों ने बताया है कि कार विस्फोटक से भरी हुई थी। इसके बाद, तीन बंदूकधारी आतंकी होटल में घुसे और अंधाधुंध फायरिंग करनी शुरू कर दी। इसके बाद, सुरक्षा अधिकारियों ने जवाबी कार्रवाई में सभी आतंकियों को मार गिराया है।

किसमायु के सुरक्षा अधिकारी फराह मोहम्मद ने कहा है कि यह हमला तब हुआ जब होटल में आतंकी संगठन अल शबाब से लड़ने की प्लानिंग के लिए एक मीटिंग चल रही थी। इसलिए, ऐसा कहा जा रहा है कि हमलावरों ने यहाँ मीटिंग कर रहे सुरक्षा अधिकारियों को निशाना बनाते हुए ही विस्फोट किया है।

इस पहले को लेकर जुबालैंड के सुरक्षा मंत्री युसुफ हुसैन धूमल ने कहा है कि इस हमले में चार आतंकी शामिल थे। इनमें से तीन आतंकियों को सुरक्षा बलों ने मार गिराया, जबकि एक आतंकी की मौत बम विस्फोट से हो गई।

सुरक्षा मंत्री धूमल ने यह भी कहा है कि इस विस्फोट में छात्रों और नागरिकों सहित नौ लोग मारे गए हैं जबकि 47 अन्य घायल हुए हैं। घायलों में से कुछ लोगों की हालत गंभीर है ऐसे में मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। चूँकि, जिस होटल में हमला हुआ है वह स्कूल के पास था। इसलिए, कई छात्र भी घायल हुए हैं।

बता दें, सोमालिया में बीते एक दशक से अल शबाब ऐसे हमले करता आ रहा है। इस्लामिक आतंकी संगठन अल शबाब के हमले से बीते एक दशक में हजारों लोग मारे गए हैं। गौरतलब है कि इसी साल अगस्त में अगस्त में अल शबाब ने मोगादिशू के हयात होटल पर हमला किया था, जिसमें 21 लोग मारे गए थे जबकि 117 घायल हुए थे। साल 2019 में भी अल शबाब ने किसमायो के एक होटल पर इसी तरह से हमला किया था, जिसमें 26 लोग मारे गए और 56 घायल हुए थे।

धनतेरस के दिन हुई ₹45000 करोड़ की कमाई, केवल गहने ₹25000 करोड़ के बिके: भारतीय उत्पादों पर ग्राहकों ने प्यार दिखाया, चीन को ₹75000 करोड़ का नुकसान

हिंदू धर्म में धनतेरस के दिन बर्तन, गहने के रूप में कोई धातु खरीदना एक परंपरा की तरह रही है। इसी परंपरा के कारण बाजार में, व्यापार में जो उछाल आता है, उसका अंदाजा कोई नहीं लगा पाता। साल 2022 में ये त्योहार भारत में दो दिन मना- 22 अक्टूबर और 23 अक्टूबर। इन दो दिनों में 45 हजार करोड़ रुपए का व्यापार किया गया। केवल गहनों की बात करें तो 25 हजार करोड़ का व्यापारा भारत में हुआ है। बाकी के 20 हजार करोड़ रुपए का बिजनेस ऑटोमोबाइल, कंप्यूटर, फर्नीचर, साज-सजावट, मिठाई, बर्तन, इलेक्ट्रिक सामान आदि के जरिए हुआ।

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया के अनुसार, “दो दिन धनतेरस त्योहार होने के कारण देश में सोने और चांदी के सिक्कों, नोटों, मूर्तियों और बर्तनों के साथ-साथ सोने और चाँदी की भारी बिक्री हुई। लगभग 25 हजार करोड़ की।”

CAIT के महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल कहते हैं, कल और आज दो दिन देश भर के बाजारों में ग्राहकों की उमड़ी भीड़ और सामान खरीदने की उत्सुकता इस बात का सबूत है कि लोगों में भारतीय सामान खरीदने की कितनी चाह है, खासकर ऑफलाइन मार्केटों से। दो साल के कोरोना के चलते बाजार से दूर रहने वाले ग्राहक अब फिर वापिस बाजार में पूरे जोर शोर से आ गए हैं।

CAIT का अनुमान है कि इस दिवाली व्यापार 1, 50,000 करोड़ से ज्यादा का होने वाला है और सबसे अच्छी बात ये है कि भारतीय बाजारों में सामान की खरीद के लिए लोग अब भारतीय उत्पादों को ही पसंद कर रहे हैं। इस वर्ष दिवाली से संबंधित सामान में चीन को 75 हजार करोड़ से अधिक का नुकसान होगा।

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बीसी भरतिया ने बताया कि गहनों के अलावा ऑटोमोबाइल सेक्टर में 6000 करोड़ का बिजनेस हुआ, फर्नीचर में 1500 करोड़ का, 2500 करोड़ कम्प्यूटर व उससे जुड़े सामानों की बिक्री से आए। इसी तरह फएमसीजी में लगभग 3 हजार करोड़, इलेक्ट्रॉनिक्स सामान में लगभग 1 हजार करोड़, स्टेनलेस स्टील, एल्युमीनियम और पीतल के बर्तनों में लगभग 500 करोड़, किचन के उपकरण और किचन के अन्य सामन में लगभग 700 करोड़, टेक्सटाइल, रेडीमेड गारमेंट और फैशन के कपडे में लगभग 1500 करोड़ का व्यापार हुआ है।

त्योहार के मौके पर भारतीय बाजारों के हाल देखते हुए कैट के सहयोगी संगठन ऑन इंडिया ज्वेलर्स और गोल्डस्मिथ फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज अरोड़ा ने कहा कि भारत में सोने की इंडस्ट्री पूरी तरह से कोविड काल से उबर चुकी है। अब भारत में सोना खरीदने की चाह अपने चरम पर है। आर्थिक गतिविधियों में आई उछाल और उपभोक्ता की माँग में हुई सुधार के बाद भारत में सोने की माँग जुलाई से सितंबर के बीच 80 फीसद बढ़ी है। पंकज अरोड़ा ने बताया कि धनतेरस के दिन देश भर में लगभग 25 हजार करोड़ रुपए के सोने चांदी के सिक्के, नोट, मूर्तियाँ और बर्तन मिले।

दिवाली को प्रदूषण से जोड़ते हुए लाइव वीडियो बना रही थी ‘भारत की ग्रेटा थनबर्ग’, मोबाइल फोन उड़ा ले गए उचक्के: कह रही थी – जानवर परेशान होते हैं

11 वर्षीय तथाकथित पर्यावरण एक्टिविस्ट लिसिप्रिया कंगुजम उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में में दिवाली को प्रदूषण से जोड़ते हुए सोशल मीडिया पर लाइव आ रही थीं, लेकिन इसी बीच लुटेरे उनका मोबाइल फोन ही छीन कर भाग निकले। उन्होंने ट्विटर पर नोएडा पुलिस को टैग करते हुए इसे अर्जेन्ट बताया है। उन्होंने बताया कि रविवार (23 अक्टूबर, 2022) को रात 8:30 बजे बाइक सवार दो चोरों ने उनका मोबाइल फोन झपट लिया।

लिसिप्रिया कंगुजम ने अपने ट्विटर हैंडल ने जानकारी दी है कि ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 16B स्थित बेल्लाना स्ट्रीट मार्किट के सामने ‘निराला एस्पायर’ के पास से वो फेसबुक लाइव कर रही थीं, तभी ये घटना हुई। उन्होंने नोएडा पुलिस से मदद माँगी है। हालाँकि, रिप्लाई में लोगों ने चोरों को सही ठहराते हुए कहा है कि बच्चों को मोबाइल फोन नहीं रखना चाहिए। एक व्यक्ति ने लिखा कि फोन चोरी होने के बावजूद आप ट्वीट कर रही हैं, इसका अर्थ है कि आपका हैंडल कोई और चलाता है।

एक व्यक्ति ने तो दिवाली के प्रदूषण पर ज्ञान दे रही लिसिप्रिया कंगुजम को समझाया कि मोबाइल फोन बनाने में कैडमियम, लीड, लिथियम, मर्करी और ब्रोमिनैट जैसे हैवी मेटल्स का इस्तेमाल किया जाता है, ऐसे में पर्यावरण एक्टिविस्ट को इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। हालाँकि, DCP सेन्ट्रल नोएडा ने बताया कि आवश्यक कार्यवाही के लिए बिसरख के थाना प्रभारी को निर्देशित किया गया है। पुलिस ने बताया कि पीड़िता से बातचीत कर घटना की जानकारी ली है और जल्द मामले का पर्दाफाश होगा

लाइव वीडियो के दौरान लिसिप्रिय कंगुजम को दिवाली पर लाइटिंग से सजाए गए घरों को दिखाते हुए ये कहते देखा जा सकता है कि ये सब अच्छी बात है, लेकिन पटाखे उड़ाना गंदी बात है और वो इसे लेकर उदास हैं। उन्होंने कहा कि ये हमारे पर्यावरण के लिए ठीक नहीं है, क्योंकि ये हवा को प्रदूषित करता है और नॉइज़ पॉल्यूशन से जानवर भी परेशान होते हैं। उन्होंने पूछा कि अगर हवा को प्रदूषित करोगे तो साँस कैसे लोगे?

सिखों के लिए दोगुनी ख़ुशी का त्योहार है दिवाली: भगवान श्रीराम की तरह लौटे थे छठे गुरु भी, 52 राजाओं को जहाँगीर की कैद से छुड़ाने के लिए अपनाई थी तरकीब

बच्चे-बच्चे को पता है कि हम दीपावली अथवा दिवाली का त्योहार इसीलिए मनाते हैं, क्योंकि त्रेता युग में इसी दिन भगवान श्रीराम लंका में रावण का वध कर के वापस अयोध्या लौटे थे। उन्हें 14 वर्ष का वनवास हुआ था, ये भी बताने की ज़रूरत नहीं है। अपने लोकप्रिय राजा का अयोध्या की जनता ने दीप जला कर और आतिशबाजी से स्वागत किया। लेकिन, क्या आपको पता है कि सिखों के लिए दिवाली दोगुने उत्साह का दिन है? ये दिन गुरु हरगोबिंद से जुड़ा हुआ है और ‘बन्दी छोड़ दिवस’ के रूप में भी मनाया जाता है?

आइए, आपको सिखों के छठे गुरु हरगोबिंद साहिब जी की कहानी सुनाते हैं। सिख समाज के पाँचवें गुरु अर्जन देव जी को जहाँगीर ने सिर्फ इसीलिए मरवा दिया था, क्योंकि उसे पवित्र गुरु ग्रन्थ साहिब के कुछ अंश मुस्लिम विरोध लगे थे और वो उसे हटाने के लिए तैयार यहीं हुए थे। इस तरह की क्रूर मुगलिया करतूतों के बाद सिख समाज को लगा कि हथियार उठाए बिना काम नहीं चलेगा। अतः, गुरु हरगोबिंद ने भक्ति के साथ-साथ शक्ति पर भी जोर देना शुरू कर दिया।

सन् 1606 में अपने पिता की हत्या के बाद हरगोबिंद जी को काफी कम उम्र में ही गुरु की पदवी स्वीकार करनी पड़ी थी। ये वो समय था, जब सिखों के उत्थान से मुग़ल साम्राज्य को अपनी नींव हिलती हुई महसूस हो रही थी। मात्र 11 वर्ष की उम्र में गुरु बने हरगोबिंद जी अपने साथ दो तलवार रखते थे, जिसे मीरी और पीरी के नाम से जाना गया। मीर से बना है मीरी, अर्थात नेता या शासक। पीर से बना है पीरी, अर्थात आध्यात्मिक गुरु।

गुरु हरगोबिंद ने अपने साथ-साथ 52 राजाओं/राजकुमारों को कैद से मुक्त कराया

अब आप समझ गए होंगे कि ये दोनों तलवार भौतिक विजय और आध्यात्मिक चेतना जागृत करने का प्रतीक थे। सन् 1612 में जहाँगीर ने उन्हें भी गिरफ्तार करवा दिया था। उन्हें ग्वालियर स्थित एक जेल में रखा गया था। 1614-15 ईस्वी में जिस दिन उन्हें कैद से मुक्त किया गया था, उस दिन दिवाली ही थी। इस दिन को सिख समाज इसके बाद से ‘बन्दी छोड़ दिवस’ के रूप में मनाने लगा, अर्थात जेल से छूटने के उत्सव के रूप में। जब वो अमृतसर पहुँचे, तो उनका दीप और पटाखों के साथ स्वागत किया गया था।

इसका अर्थ ये कतई नहीं लगाइएगा कि इससे पहले सिख समाज दिवाली नहीं मनाता था। असल में यही तो दिन होता था, जब गुरु की संगत में दूर-दूर के लोग जुटते थे और उनके प्रवचन का आध्यात्मिक लाभ लेते थे। इन पर्व-त्योहारों का सिख धर्म में भी महत्व है। असम में दिवाली के दिन पहुँचे गुरु नानक ने वहाँ के लोगों को उपदेश दिया था। गुरु गोविन्द सिंह ने रामायण की कथा को फिर से लिखा। गुरु हरगोबिंद का वापस आने दोहरी ख़ुशी का कारण बना।

हालाँकि, बाहर भी मुगलों के जासूस उनके पीछे पड़े रहते थे। उन्होंने जहाँगीर की कैद से मुक्त होकर सिख समाज का फिर से नेतृत्व करना शुरू किया। उस जेल में पहले से ही जहाँगीर ने 52 राजाओं और राजकुमारों को कैद कर के रखा था। उन सभी को कैद के दिनों में गुरु के आध्यात्मिक ज्ञान का लाभ मिला और उन सबने हरगोबिंद साहिब को अपना गुरु माना। लेकिन, इस रिहाई के पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है।

जब गुरु गरगोबिन्द ने जहाँगीर के सामने ये माँग रखी कि उनके साथ-साथ उन 52 राजाओं और राजकुमारों को भी छोड़ा जाए, तब बादशाह ने एक शर्त रखी। इस्लामी आक्रांता ने कहा कि गुरु के कपड़े को जितने राजा पकड़ सकेंगे, उतने ही रहा होंगे। गुरु ने भी ऐसा कुर्ता सिलवाया, जिसके 52 हिस्से थे और एक-एक कर सभी राजा बाहर आ गए। जहाँगीर अपनी बेइज्जती की वजह से कुछ नहीं कह सका। गुरु हरगोबिंद के बाद उनके पोते हर राय गुरु बने थे।

जानबूझ कर गुरु हरगोबिंद को पंजाब से दूर ग्वालियर में कैद कर के रखा गया था। वो गुरु हरगोबिंद ही थे, जिन्होंने युवाओं को घुड़सवारी और तलवारबाजी सीखने के लिए आह्वान किया। उन्होंने अपनी सेना बनाई, युवाओं को प्रशिक्षण दिया। उन्होंने ही 1609 ईस्वी में हरमंदिर साहिब के मुख्य द्वार पर ‘अकाल तख़्त’ की स्थापना की। इसका अर्थ है – सत्य का सिंहासन। समाज की भाई के कार्यों के लिए ये पद सृजित किया गया था।

जहाँगीर ने कैसे करवाई थी गुरु अर्जन देव जी की हत्या

15 अप्रैल, 1563 को पंजाब के तंरतारन स्थित गोयंदवाल जन्मे गुरु अर्जुन देव जी को मुग़ल आक्रांता जहाँगीर के अत्याचारों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपना सिर नहीं झुकाया और न ही अधर्मियों की बात मानी। जहाँगीर हर हाल में सिख गुरु अर्जुन देव को मृत देखना चाहता था, जिसके काई कारण थे। मुगलों को लगता था कि गुरु ग्रन्थ साहिब में इस्लाम को लेकर कुछ गलत बातें लिखी गई हैं, जिन्हें हटाया जाना चाहिए।

जहाँगीर को ये भी लगता था कि गुरु अर्जुन देव जी बागी शहजादा खुसरो की सहायता कर रहे हैं। लेकिन, सबसे बड़ा कारण ये था कि सिख संप्रदाय जिस तरह से आगे बढ़ रहा था, उससे इस्लामी आक्रांता भयभीत हो उठे थे। गुरु अर्जुन देव जी को ‘शहीदों का सरताज’ कहा जाता है। गुरु रामदास की पत्नी बीबी भानी के तीन पुत्र थे – जिनमें सबसे बड़े का नाम पृथ्वी चंद्र था और सबसे छोटे तीसरे पुत्र अर्जुन देव थे। इन दोनों के बीच में जो थे, उनका नाम महादेव रखा गया था।

उन दिनों सिखों के तीसरे गुरु अमरदास गोयंदवाल में ही रहा करते थे। गुरु अर्जुन दास तीनों भाइयों में सबको सबसे ज्यादा योग्य लगते थे और साथ ही उनमें अपने पिता और नाना अमर दास के गुण भी भरे पड़े थे। इस कारण सभी उनसे प्रेम करते थे। उनका विवाह जालंधर जिले के मऊ गाँव के कृष्ण चंद्र की पुत्री गंगा देवी से हुआ था। गंगा देवी की कोख से ही सिखों के छठे गुरु हरगोविंद का जन्म हुआ था। असल में ये उनका दूसरा विवाह था, क्योंकि पहली पत्नी का देहांत हो चुका था और उनकी कोई संतान नहीं हुई थी।

गुरु अर्जन देव जी को पहले रावी नदी के किनारे ले जाया गया। वहाँ एक जलती हुई भट्ठी के ऊपर लोहे की चादर डाली गई, जो काफी गर्म हो उठी थी। उन्हें तपती हुई लोहे की चादर पर बिठा दिया गया और ऊपर से गर्म बालू डाला गया। इस तरह गुरु अर्जुन देव जी को सिख संप्रदाय में ‘प्रथम शहीद’ का दर्जा मिला। इस तरह उन्हें मृत्युदंड दिए जाने के पीछे जहाँगीर के मन में एक और कारण था, वही विचारधारा, जिस पर चल कर आज भी हिन्दू विरोधी हिंसा की जाती है।

गुरु अर्जुन देव जी पर जब शहजादा खुसरो की सहायता का आरोप लगाया गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि गुरु के दरबार में आने से किसी को रोका नहीं जा सकता और यहाँ जाति-पाति या धर्म-मजहब का भेदभाव भी नहीं चलता है, ऐसे में अन्य लोगों के समान खुसरो भी गुरु के दरबार में आया था और उसे रोकना गुरु परंपरा के विरुद्ध था। 30 मई, 1606 को उन्हें जहाँगीर के आदेश पर मार डाला गया। वो बलिदान हो गए।

‘अंपायर ने धोखा दिया, BCCI वाले चला रहे हैं अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट’: हार से तिलमिलाए Pak फैंस ने भारत पर लगाया ‘रनों की डकैती’ का आरोप, कहा – हमें लूट लिया

रविवार (23 अक्टूबर, 2022) को टी20 विश्वकप में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए मैच भारत ने पाकिस्तान को 4 विकेट से करारी शिकस्त दी है। एक समय टीम इंडिया मुश्किल में फँस चुकी थी और मैच बेहद रोमांचक हो गया था। हालाँकि, आखिरी ओवर में पाकिस्तानी गेंदबाज मोहम्मद नवाज ने नो बॉल फेंक दी, जो मैच का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट रहा। मोहम्मद नवाज की गेंद को अंपायर द्वारा नो बॉल करार देने पर पाकिस्तान के क्रिकेट प्रेमी सोशल मीडिया पर आँसू बहा रहे हैं।

ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में हुए इस मैच में टीम इंडिया के जीत के हीरो रहे विराट कोहली और हार्दिक पांड्या 20वें ओवर में बल्लेबाजी कर रहे थे। इस ओवर में टीम इंडिया को जीत के लिए 16 रनों की जरूरत थी। गेंद पाकिस्तान के मोहम्मद नवाज के हाथों में थी। उन्होंने पहली ही गेंद पर हार्दिक पांड्या को बाबर आजम के हाथों कैच कराकर मैच में पाकिस्तान की पकड़ मजबूत कर दी थी।

इसके बाद, बल्लेबाजी करने आए दिनेश कार्तिक ने एक रन लेकर विराट कोहली को स्ट्राइक दे दी। इसके बाद कोहली ने तीसरी गेंद पर 2 रन लिए और फिर मोहम्मद नवाज ने अगली गेंद विराट कोहली की कमर से काफी ऊपर फेंक दी जिस पर कोहली ने छक्का जड़ते हुए टीम इंडिया की वापसी करा दी। यह गेंद कमर से काफी ऊपर थी, जिसका मतलब साफ था कि यह नो बॉल है।

चूँकि, ऐसी स्थिति में गेंद को नो बॉल करार देने की जवाबदेही लेग अंपायर की होती है। लेकिन, उन्होंने इसे नो बॉल नहीं दिया। ऐसे में, मेन अंपायर ने गेंद नो बॉल करार दी। इसके बाद पाकिस्तानी कप्तान बाबर आजम समेत कई प्लेयर अंपायर से आकर बहस करने लगे। हालाँकि, इसके बाद भी अंपायर ने अपना फैसला नहीं बदला और गेंद नो बॉल ही रही। यह नो बॉल ही मैच का बड़ा टर्निंग प्वाइंट रही।

टीम इंडिया के हाथों पाकिस्तान को मिली करारी शिकस्त के बाद पाकिस्तानी क्रिकेट फैंस सोशल मीडिया पर नो बॉल को चीटिंग बताते हुए आँसू बहाते दिख रहे हैं। इसके कारण ट्विटर पर ‘नो बॉल’ और ‘चीटिंग’ ट्रेंड कर रहा है। इसको लेकर ट्विटर यूजर @teepusahab ने ट्वीट कर कहा “वह नो बॉल नहीं थी। कोहली के बोल्ड होने के बाद के उन 3 रन की गिनती नहीं की जानी चाहिए। हमें लूटा गया है।”

@ikarachiwala नामक ट्विटर यूजर ने लिखा “विराट कोहली क्रीज से बाहर थे और गेंद उनकी कमर की ऊँचाई पर थी, गेंदबाज भी स्पिनर था, इसलिए गेंद को कमर की ऊँचाई के नीचे होना था। यह एक गलत नो बॉल थी और अगली ही गेंद पर विराट क्लीन बोल्ड हो गए। अगर फ्री हिट के कारण वह नॉट आउट हो जाते हैं, तो एक डॉट बॉल होनी चाहिए।”

@Gotoxytop1 नामक यूजर ने टीम इंडिया की जीत के बाद विराट कोहली के बयान “मेरे पास कोई शब्द नहीं है” को कोट करते हुए लिखा “एक फ्री नो बॉल और एक बॉल के 3 अतिरिक्त रन मिलने के बाद वास्तव में आपके पास शब्द नहीं होंगे। क्योंकि आपके पिता बीसीसीआई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट चलाते हैं और जब चाहें डकैती कर सकते हैं।”

एक ने ट्विटर यूजर ने लिखा “नवाज और पक्षपाती ‘अंपायर’, पाकिस्तान के लिए कभी अच्छे साबित नहीं हुए। वह नो बॉल नहीं थी।”

@Naya_Pakistan नामक ट्विटर यूजर ने अंपायर्स को दोषी ठहराते हुए लिखा, “अंपायर के धोखे से पाकिस्तान यह मैच हार गया। नो बॉल नहीं थी।”

वहीं, इस पर भाजपा नेता शहजाद पूनावाला ने नो बॉल पर रोने वालों पर व्यंग्य करते हुए ट्वीट किया, “भारत-पाकिस्तान मैच में “नो बॉल” के फैसले के बारे में रोने वाले कुछ लोग बिल्कुल चुनाव हारने के बाद ईवीएम के बारे में रोने वालों की तरह लगते हैं।”

‘राम के अस्तित्व पर लगाए जाते थे प्रश्नचिह्न, 8 साल में देश ने हीनभावना की बेड़ियों को तोड़ा’: सरयू तट पर बोले PM मोदी – अयोध्या हमारी महान संस्कृति का प्रतिबिंब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिवाली की पूर्व संध्या पर रविवार (23 अक्टूबर, 2022) को अयोध्या में रामलला विराजमान के दर्शन किए, राम मंदिर के निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया और भगवान श्रीराम का राज्याभिषेक करने के साथ-साथ सरयू तट पर दीपोत्सव के भी साक्षी बने। इस दौरान उन्होंने कहा कि आज अयोध्या जी, दीपों से दिव्य हैं, भावनाओं से भव्य हैं, आज अयोध्या नगरी, भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण के स्वर्णिम अध्याय का प्रतिबिंब है।

पीएम मोदी ने कहा, “हमने त्रेता की उस अयोध्या के दर्शन नहीं किए, लेकिन प्रभु श्रीराम के आशीर्वाद से आज हम अमृतकाल में अमर अयोध्या की अलौकिकता के साक्षी बन रहे हैं। हम उस सभ्यता और संस्कृति के वाहक हैं, पर्व और उत्सव जिनके जीवन का सहज-स्वाभाविक हिस्सा रहे हैं। दीपावली के दीपक हमारे लिए केवल एक वस्तु नहीं है। ये भारत के आदर्शों, मूल्यों और दर्शन के जीवंत ऊर्जापुंच हैं। ‘जगत प्रकास्य प्रकासक रामू।’ – अर्थात, भगवान राम पूरे विश्व को प्रकाश देने वाले हैं। वो पूरे विश्व के लिए एक ज्योतिपुंज की तरह हैं।”

पीएम मोदी ने कहा कि मध्यकाल और आधुनिक काल तक भारत ने कितने अंधकार भरे युगों का सामना किया है, जिन झंझावातों में बड़ी-बड़ी सभ्यताओं के सूर्य अस्त हो गए, उनमें हमारे दीपक जलते रहे, प्रकाश देते रहे और फिर उन तूफानों को शांत कर उद्दीप्त हो उठे। उन्होंने याद दिलाया कि एक समय था, जब राम के बारे में, हमारी संस्कृति और सभ्यता के बारे में बात करने तक से बचा जाता था। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे राम के अस्तित्व पर प्रश्नचिह्न लगाए जाते थे। साथ ही कहा कि बीते 8 वर्षों में देश ने हीनभावना की इन बेड़ियों को तोड़ा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भगवान राम ने अपने वचन में, अपने विचारों में, अपने शासन में, अपने प्रशासन में, जिन मूल्यों को गढ़ा, वो सबका साथ-सबका विकास की प्रेरणा हैं और सबका विश्वास-सबका प्रयास का आधार हैं। उन्होंने कहा कि अयोध्या भारत की महान सांस्कृतिक विरासत का प्रतिबिंब है। बकौल पीएम मोदी, राम अयोध्या के राजकुमार थे, लेकिन आराध्य वो पूरे देश के हैं। प्रधानमंत्री ने समझाया कि उनकी प्रेरणा, उनकी तप-तपस्या, उनका दिखाया मार्ग, हर देशवासी के लिए है और भगवान राम के आदर्शों पर चलना हम सभी भारतीयों का कर्तव्य है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भगवान राम, मर्यादा पुरुषोत्तम कहे जाते हैं। उन्होंने समझाते हुए कहा कि मर्यादा, मान रखना भी सिखाती है और मान देना भी, और मर्यादा, जिस बोध की आग्रही होती है, वो बोध कर्तव्य ही है। पीएम ने कहा कि हमारे यहाँ जब भी समाज ने कुछ नया किया, हमने एक नया उत्सव रच दिया। उन्होंने कहा कि सत्य की हर विजय के, असत्य के हर अंत के, मानवीय संदेश को हमने जितनी मजबूती से जीवंत रखा, इसमें भारत का कोई सानी नहीं है। उन्होंने कहा कि दीप से दीपावली तक, यही भारत का दर्शन है, यही भारत का चिंतन है, यही भारत की चिरंतर संस्कृति है।

चली गई सलमान रुश्दी की एक आँख, एक हाथ भी हो गया अपाहिज: लेखक के गर्दन-छाती और शरीर पर 18 गंभीर जख्म, इस्लामी कट्टरवादी ने किया था हमला

2 महीने पहले न्यूयॉर्क के एक कार्यक्रम में भाषण देने से ठीक पहले अंतरराष्ट्रीय लेखक सलमान रुश्दी पर एक इस्लामी कट्टरपंथी ने हमला किया था। अब उनके एजेंट ने जानकारी दी है कि सलमान रुश्दी की एक आँख चली गई है। इतना ही नहीं, वो अब सिर्फ अपने एक ही हाथ का इस्तेमाल कर पाएँगे। 75 वर्षीय लेखक को 80 के दशक से ही उनकी पुस्तक ‘The Satanic Verses’को लेकर ईरान से धमकियाँ मिलती रही हैं।

उन्हें उनके गले और कमर में चाकू घोंपा गया था। उन पर 12 अगस्त, 2022 को ‘Chautauqua Institution’ में हमला हुआ था, जहाँ वो ‘कला में आज़ादी’ विषय पर आख्यान देने गए थे। अब तक ये अस्पष्ट था कि उन पर जख्मों का क्या असर हुआ है और इलाज में क्या चल रहा है। उनके घाव काफी गंभीर हैं। उनके गर्दन में तीन जगह गंभीर जख्म हैं। उनका एक हाथ हमेशा के लिए अपाहिज हो गया है, क्योंकि उस हाथ में Nerves को काटने पड़े।

उनकी छाती और शरीर में इसके अलावा भी 15 अन्य जख्म हैं। उनके एजेंट ने बताया कि ये एक जानलेवा हमला था। फ़िलहाल वो अस्पताल में ही हैं, लेकिन उनके एजेंट ने इसकी पुष्टि नहीं की है। लेकिन उसका ये कहना है कि सबसे राहत वाली बात ये है कि वो ज़िंदा रहेंगे। सलमान रुश्दी ने पूर्व में अपने ऊपर इस तरह के हमले की आशंका जताई थी। कई फतवे जारी होने के बाद उन्हें डर था कि कहीं से कोई एक व्यक्ति आकर अचानक से उन पर हमला कर सकता है।

उनके एजेंट ने कहा कि ऐसी घटनाओं को आप टाल नहीं सकते, क्योंकि ये एकदम अचानक से होता है और बेतुका होता है। उसने अंग्रेजी गायब जॉन लेनन की हत्या से इसकी तुलना की, जिन्हें 1980 में 40 की उम्र में गोली मार दी गई थी। सलमान रुश्दी के एजेंट एंड्रू वैली ने कहा कि दुनिया उथल-पुथल से गुजर रही है और अमेरिकी में भी यही हाल है। हालाँकि, उन्होंने जिस जिस इस्लामी कट्टरवाद ने रुश्दी का ये हाल किया, उसकी आलोचना की बजाए राष्ट्रवाद और दक्षिणपंथ के बढ़ने पर चिंता जताई।

‘अब्बू ने अम्मी को कुछ पिलाया, इसके बाद वो उठी ही नहीं’: बच्ची के बयान के बाद पुलिस ने कब्र से निकाला शव, दहेज़ के लिए प्रताड़ित करता था फसीज कुरैशी

झारखंड के वासेपुर में एक व्यक्ति पर अपनी पत्नी की शातिराना ढंग से हत्या करने का आरोप लगा है। यहाँ, जैनब खातून नामक की महिला के घर वालों ने उसके शौहर फसीज कुरैशी पर दहेज की लालच में हत्या करने का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया है। वहीं, मृतक की बेटी का कहना है कि उसके अब्बू ने अम्मी को कुछ पिलाया था जिसके बाद उसकी मौत हुई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बिहार के भोजपुर में रहने वाली जैनब खातून के मायके वालों को उसके ससुराल वालों ने फोन कर बताया था कि जैनब की मौत रोड एक्सीडेंट में हो गई है। इसके बाद, मृतक जैनब खातून के मायके वाले झारखंड के वासेपुर से आकर अपनी बेटी का शव धनबाद ले आए और यहाँ लाकर उन्होंने उसकी लाश को कब्रिस्तान में दफना दिया।

इसके बाद, जैनब खातून की 10 साल की बेटी समैया के एक बयान ने पूरी कहानी को पलट कर दिया। समैया ने जैनब खातून के मायके वालों को बताया है कि एक दिन उसके अब्बू यानी फसीज कुरैशी ने उसकी अम्मी (जैनब) को कुछ पिलाया जिसके बाद वह नहीं उठी। समैया ने कहा, “मौत के एक दिन पहले अब्बू ने बोतल में कुछ मिलाकर अम्मी को पिलाया था। इसके बाद वो सो गईं और उठी ही नहीं।”

समैया के यह बताने के बाद जैनब के मायके वालों ने इस मामले में जैनब के शौहर फसीज कुरैसी समेत 15 लोगों पर दहेज प्रताड़ना और हत्या का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया है। जिसके बाद, कोर्ट और एसपी के आदेश पर मामले की जाँच के लिए पाँच सदस्यीय टीम का गठन किया गया है जो इस मामले की जाँच कर रही है। फिलहाल, मृतक जैनब खातून का शव कब्रिस्तान से निकालकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है। फिलहाल, पुलिस पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने का इंतजार कर रही है। यह रिपोर्ट सामने आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

बताया जा रहा है कि धनबाद जिले के वासेपुर में रहने वाले कलीमुल्लाह ने साल 2010 में अपनी बेटी जैनब खातून की शादी बिहार के भोजपुर में रहने वाले फसीज कुरैशी से की थी। मृतक जैनब खातून के घरवालों का आरोप है कि शादी के कुछ समय बाद से ही फसीज कुरैशी उसके घर वाले दहेज के लिए जैनब को परेशान करने लगे। इस बात की जानकारी जब जैनब के भाई को मिली तो उसने अपनी बहन को सुखी देखने के लिए पटना स्थित एक जमीन उसके ससुराल वालों के नाम कर दी।

जैनब के घरवालों ने आरोप लगाया है कि जमीन देने के बाद भी फसीज कुरैशी के घर वालों का लालच खत्म नहीं हुआ था। कुछ दिन बाद ही उन लोगों ने चार लाख रुपए और एक कार की माँग जैनब खातून के घरवालों के सामने रख दी थी। लेकिन, अब तक की गई माँगे पूरी करने वाले जैनब के परिवार वाले यह पूरी नहीं कर सकते थे।

इस दौरान, जैनब को उसके ससुराल वाले लगातार परेशान कर रहे थे। लेकिन, उसके मायके पक्ष वाले बने हुए रिश्ते को तोड़ना नहीं चाहते थे। इसलिए, उन लोगों ने कई बार पंचायत कर जैनब का घर बसाने की कोशिश की। लेकिन, फसीज कुरैशी और उसके घरवाले दहेज की लालच के आगे अंधे हो चुके थे।

अभिषेक बच्चन को ट्विटर यूजर ने कहा बेरोजगार, अभिनेता ने दिया जवाब – बुद्धि और रोजगार का कोई संबंध नहीं

बॉलीवुड एक्टर अभिषेक बच्चन ने उन्हें ट्रोल करने की कोशिश करने वाले एक सोशल मीडिया यूजर को जवाब दिया है। ट्विटर पर एक यूजर ने अभिषेक बच्चन के एक ट्वीट पर कमेंट करते हुए कहा था कि वह बुद्धिमान नहीं हैं और बेरोजगार हैं। इस ट्वीट का जवाब देते हुए अभिषेक ने कहा बुद्धि और रोजगार का कोई संबंध नहीं है।

दरअसल, इस पूरी बातचीत की शुरुआत ट्विटर पर WION की पूर्व पत्रकार पालकी शर्मा के एक ट्वीट से हुई। पालकी ने धनतेरस की शुभकामनाएँ देते हुए अखबारों में बड़ी संख्या में छपे विज्ञापनों का मुद्दा उठाया था। पालकी ने लिखा, “धनतेरस की शुभकामनाएँ। आज की खबरों तक पहुँचने के लिए आपको कितने पन्ने पलटने पड़े? क्या आप सप्लीमेंट से मेन पेज बता सकते हैं? आपके अखबार के कितने फ्रंट पेज हैं? क्या दीवाली के विज्ञापन आपके खरीदारी निर्णयों को प्रभावित करते हैं? (एक दोस्त के लिए पूछ रही हूँ।)।”

अभिषेक बच्चन ने इस ट्वीट का जवाब देते हुए पूछा, “क्या लोग अब भी अखबार पढ़ते हैं?” इसके बाद, ‘CJain (@CJain3018)’ नाम के एक ट्विटर यूजर ने अभिषेक बच्चन के ट्वीट का जवाब देते हुए लिखा, “बुद्धिमान लोग पढ़ते हैं। आप जैसे बेरोजगार लोग नहीं।”

Cjain नामक ट्विटर यूजर के इस कमेंट के बाद अभिषेक बच्चन ने लिखा, “ओह, देखता हूँ। इस जानकारी के लिए धन्यवाद। वैसे, बुद्धि और रोजगार का कोई संबंध नहीं हैं। उदाहरण के लिए आप को ही देखें। मुझे यकीन है कि आप के पास नौकरी है और मुझे यह भी यकीन है (आपके ट्वीट को देखते हुए) कि आप बुद्धिमान नहीं हैं।”

अभिषेक बच्चन के जवाब के बाद, कई अन्य ट्विटर यूजर्स ने उनकी तारीफ की। एक यूजर ने लिखा, “अच्छा कहा जूनियर बच्चन। अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर किसी को नीचा दिखाने की कोशिश करने वाले कुछ लोगों के दुस्साहस से मैं हैरान नहीं हूँ। दु:खद हकीकत।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “अभिषेक बच्चन, आप इतना लोड क्यों लेते हैं? बोलने दीजिए जिसको जो बोलना है। किसी के कुछ बोलने से आपका कुछ नही बिगड़ेगा क्योंकि आप एक बहुत ही बेहतरीन इंसान हैं। हमेशा पैसा, पॉवर, सक्सेस होना बड़ी बात नहीं है, अगर लक साथ दे तो वो कोई भी पा सकता है। मगर, अच्छा इंसान होना बड़ी बात है जो आप हैं।”

बता दें, अभिषेक बच्चन आखिरी बार फिल्म ‘दसवीं’ में यामी गौतम और निम्रत कौर के साथ नजर आए थे। फिल्म की स्ट्रीमिंग 7 अप्रैल, 2022 को नेटफ्लिक्स और जियो सिनेमा पर शुरू हुई थी। इस फिल्म की कहानी शुरू होती है गंगा राम चौधरी (अभिषेक बच्चन) से जो ‘हरित प्रदेश’ के आठवीं पास मुख्यमंत्री है। लेकिन, टीचर भर्ती घोटाले में उनको जेल हो जाती है, इस जेल में इस मंत्री को मिलती है आईपीएस अफसर ज्योति देसवाल (यामी गौतम) जो बेहद कठिन स्वभाव की होती हैं।

फिल्म की कहानी आगे बढ़ती है और अब इस अनपढ़ मंत्री को अपना पुराना सपना दसवीं पास करने का मन करता है। और जेल से अपने शिक्षा का अधिकार लेते हुए वह दसवीं की तैयारी करता है और सफल होता है। यही इस फिल्म की पूरी कहानी है।