Home Blog Page 2304

‘भारत को मजबूत राष्ट्र के रूप में नहीं उभरने देना चाहते थे ब्रिटिश’: महाराजा के विलय प्रस्ताव को स्वीकारने में नेहरू ने देरी की, पाकिस्तान ने J&K में चला दिया ‘ऑपरेशन गुलमर्ग’

26 अक्टूबर 2022 को जम्मू-कश्मीर रियासत के भारतीय अधिराज्य में अधिमिलन के 75 वर्ष पूरे हो गये हैं। उल्लेखनीय है कि तत्कालीन जम्मू-कश्मीर रियासत के भारतीय संघ में अधिमिलन के सम्बन्ध में तथाकथित इतिहासकारों और लेफ्ट-लिबरल बुद्धिजीवियों द्वारा तथ्यों और ऐतिहासिक घटनाओं को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया जाता रहा है। इसी साजिश का परिणाम है कि भारत का सिरमौर जम्मू-कश्मीर भारतवासियों का सिरदर्द बन गया।

अधिमिलन दिवस की 75 वर्ष पूरे होने पर इतिहास की इन विकृतियों का पर्दाफाश करना आवश्यक है। जम्मू-कश्मीर के सन्दर्भ में अब तक जो मैकॉले-मार्क्स पुत्रों द्वारा औपनिवेशिक और वामपंथी नैरेटिव पढ़ाया-सुनाया जाता रहा है, उसके बरक्स राष्ट्रवादी पाठ को जानना-समझना जरूरी है।

जम्मू-कश्मीर के अधिमिलन में हुई देरी और उसके दुष्परिणामों के दोष से तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को बरी करने के लिए महाराजा हरिसिंह को कठघरे में खड़ा किया जाता रहा है। बार-बार यह बताया जाता है कि महाराजा हरिसिंह अपनी रियासत जम्मू-कश्मीर को भारतीय अधिराज्य या पाकिस्तानी अधिराज्य में शामिल न करके स्वतंत्र राष्ट्र बनाने की संभावनाएँ टटोल रहे थे।

हालाँकि, तथ्य यह है कि भारत स्वतंत्रता अधिनियम-1947 में तमाम रियासतों के राजाओं-नवाबों के पास दो ही विकल्प थे- या तो वे अपनी रियासत को भारतीय अधिराज्य में शामिल कर सकते थे या फिर पाकिस्तानी अधिराज्य में शामिल हो सकते थे। अपनी रियासत को स्वतंत्र राष्ट्र बनाने जैसा कोई तीसरा विकल्प किसी भी रियासत के पास नहीं था।

महाराजा हरिसिंह का भारत-प्रेम सन् 1931 में लन्दन में आयोजित गोलमेज सम्मेलन में जगजाहिर हो गया था। उस सम्मेलन में उन्होंने तमाम रजवाड़ों के प्रतिनिधि के तौर पर भारत की स्वतंत्रता और एकता-अखंडता की पुरजोर वकालत की थी।

इस सम्मेलन में अंग्रेजों के विरोध में और भारत के पक्ष में दिए गए अपने राष्ट्रवादी भाषण के परिणामस्वरूप वे अंग्रेजों के निशाने पर आ गए थे। इससे पहले भी वे जम्मू-कश्मीर रियासत में किये जा रहे अनेक लोकतान्त्रिक और प्रगतिशील कामों के कारण अंग्रेजों की आँख की किरकिरी बने हुए थे।

इसी तरह अधिमिलन काल के एक अन्य मिथ्या प्रवाद की सच्चाई जानना आवश्यक है। 22 अक्टूबर 1947 को जम्मू-कश्मीर पर हुए आक्रमण को आजतक कबाइली हमला लिखा-पढ़ा जाता रहा है, जबकि वास्तविकता यह है कि ‘ऑपरेशन गुलमर्ग’ पाकिस्तानी सेना द्वारा कबाइलियों के वेश में अंजाम दिया गया था।

पाकिस्तानी और अंग्रेज जान-समझ रहे थे कि महाराजा हरिसिंह अपनी रियासत को हर-हाल में भारत में ही शामिल करेंगे। वे ऐसा होने से पहले ही उसे छीन लेना चाहते थे। जम्मू-कश्मीर के जल-स्रोतों, प्राकृतिक संसाधनों और भू-रणनीतिक स्थिति पर पाकिस्तान की नज़र गड़ी हुई थी।

इसी प्रकार द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद शीतयुद्ध की छाया में पनपी ‘द ग्रेट गेम’ की राजनीति के तहत अमेरिका और ब्रिटेन भारत को एक सशक्त राष्ट्र के रूप में नहीं उभरने देना चाहते थे। इसलिए वे किसी भी तरह पाकिस्तान को मजबूत करते हुए उसे भारत के सामने खड़ा करना चाहते थे। पाकिस्तानी सेना के तत्कालीन मेजर जनरल अकबर खान ने अपनी पुस्तक ’रेडर्स इन कश्मीर’ में और हुमायूँ मिर्जा ने अपनी पुस्तक ‘फ्रॉम प्लासी टू पाकिस्तान’ में इसका खुलासा किया है।

अकबर खान ने लिखा है कि तत्कालीन भारतीय नेतृत्व द्वारा जम्मू-कश्मीर के भारत में अधिमिलन में की जा रही देरी के मद्देनज़र पाकिस्तानी प्रधानमंत्री लियाकत अली सहित शीर्ष राजनीतिक और अंग्रेजी सैन्य नेतृत्व ने अगस्त-सितम्बर माह में ही उसे सैन्य-शक्ति द्वारा हड़पने की रणनीति बनाने का काम सौंप दिया था।

इस योजना को उसने अपने साथियों लेफ्टिनेंट कर्नल मसूद, ज़मान कियानी, खुर्शीद अनवर और एयर कमोडोर जंजुआ के साथ मिलकर सर्दियाँ शुरू होते ही 22 अक्टूबर 1947 को अमलीजामा पहनाया। दरअसल, नेहरू अपने मित्र शेख अब्दुल्ला को जम्मू-कश्मीर की बागडोर सौंपने के लिए महाराजा हरिसिंह पर दबाव बनाने के कारण अधिमिलन में देरी कर रहे थे।

यह वही शेख अब्दुल्ला था, जो सन् 1931 से ही जम्मू-कश्मीर में साम्प्रदायिकता का बीज बोकर प्रजावत्सल और प्रगतिशील महाराजा हरिसिंह के ख़िलाफ़ मुहिम चला रहा था। वह खुद वजीरेआजम बनने का ख्वाब देख रहा था। उसकी क्रमशः बढ़ती इस्लामपरस्ती और पाकिस्तानपरस्ती के कारण अंततः नेहरू को ही अपनी ‘मित्रता और मुस्लिम तुष्टिकरण’ की नीति का परित्याग करके उसे जेल में डालना पड़ा, लेकिन तब तक अपूरणीय क्षति हो चुकी थी।

1947 के अपने आक्रमण के दौरान पाकिस्तानी सेना ने पुंछ, राजौरी, मीरपुर और मुजफ्फराबाद जैसे क्षेत्रों में क्रूरतम नरसंहार किया। इस आक्रमण में हजारों निर्दोष लोगों को अपनी जान गँवानी पड़ी। लाखों लोगों को अपना घर-द्वार छोड़कर विस्थापित होना पड़ा। हजारों माताओं-बहनों का शीलभंग हुआ। लाखों की संख्या में घर उजड़ गये। उनके बाशिंदे दर-दर की ठोकरें खाने को विवश हुए।

जम्मू-कश्मीर की सरकारों ने भी प्रायः इन पीड़ितों की उपेक्षा की। इसलिए वे देश के अलग-अलग स्थानों पर कैम्पों में रहने को अभिशप्त हुए। उनके बच्चे अपनी घर वापसी चाहते हैं। नागरिक अधिकार, सम्मान और सुरक्षा चाहते हैं। लेकिन, लम्बे समय तक उनकी कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। इस ऐतिहासिक अपराध का जिम्मेदार कौन है? जम्मू-कश्मीर के अधिमिलन में जान-बूझकर देरी क्यों की गयी?

पाकिस्तानी सेना ने आक्रमण करके भारत के लाखों वर्ग किलोमीटर भू-भाग को हड़प लिया और आजतक उस पर कब्ज़ा जमाये बैठा हुआ है। हमारे आस्था के केंद्र, अनेक उपासना-स्थल और तीर्थ-स्थान आजतक पाकिस्तान के कब्जे में हैं। उसकी जिम्मेदारी किसकी है? पाक अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर और चीन अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर के बाशिंदों के साथ आज भी भेदभाव और जुल्मो-सितम हो रहे हैं।

उनके पास शिक्षा, स्वास्थ्य, रोटी-रोज़गार जैसी आधारभूत सुविधाएँ तक नहीं हैं। वे भारत की नागरिकता की गुहार लगा रहे हैं। अधिमिलन-पत्र में उल्लेखित सम्पूर्ण जम्मू-कश्मीर को भारत में शामिल करने की माँग कर रहे हैं, इसलिए उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। उनके इस दमन और उत्पीड़न का जिम्मेदार कौन है? उनकी इस पीड़ा की समाप्ति कब और कैसे होगी? अधिमिलन दिवस की 75 वीं वर्षगाँठ के अवसर पर इन प्रश्नों को पूछा जाना चाहिए और इनके उत्तर ढूंढे जाने चाहिए।

केंद्र की वर्तमान सरकार ने 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 और 35 ए जैसे संक्रमणकालीन और अस्थायी संवैधानिक प्रावधानों की समाप्ति करके जम्मू-कश्मीर के एकीकरण की प्रक्रिया को पूर्ण करते हुए भारत की एकता, अखंडता और प्रभुसत्ता का उद्घोष किया। पिछले तीन साल में जम्मू-कश्मीर में अनेक सकारात्मक परिवर्तन हुए हैं।

जम्मू-कश्मीर में नयी औद्योगिक नीति, प्रेस नीति, फिल्म नीति, भाषा नीति और शिक्षा नीति लागू की गयी है। त्रि-स्तरीय पंचायती राज-व्यवस्था की शुरुआत करके लोकतंत्र का सशक्तिकरण और सत्ता का विकेंद्रीकरण किया गया है। विधानसभा का परिसीमन करके क्षेत्रीय असंतुलन को समाप्त किया गया है। आरक्षण नीति के माध्यम से वंचित वर्गों और क्षेत्रों के साथ न्याय सुनिश्चित किया गया है। 225 से अधिक नागरिक सेवाओं को ऑनलाइन करके प्रशासन को पारदर्शी और जवाबदेह बनाया गया है।

आतंकवादियों और अलगाववादियों की नकेल कसी गयी है। हुर्रियत कॉन्फ्रेंस जैसे अलगाववादी और आतंकी संगठनों की हवाला फंडिंग बंद करने से जम्मू-कश्मीर एक टेररिस्ट हॉटस्पॉट की जगह टूरिस्ट हॉटस्पॉट बन रहा है। इस वर्ष रिकॉर्ड 22 लाख से अधिक पर्यटक जम्मू-कश्मीर आये हैं। पर्यटकों की आमद क्रमशः बढ़ रही है।

साल 2019 से पहले के लगभग 70 वर्षों में जम्मू-कश्मीर में कुल 15 हजार करोड़ का निजी निवेश हुआ था, जबकि उसके बाद के तीन साल में 56 हजार करोड़ का निजी निवेश हुआ है। आज स्थानीय नौजवानों के हाथ में पत्थर और बंदूक की जगह किताब-कलम, मोबाइल और लैपटॉप हैं। आतंकियों और उनके आकाओं की कमर तोड़ी जा जा रही है। उनके सहयोगियों की पहचान करके उन्हें नौकरी से बर्खास्त किया जा रहा है और भारतीय दंड संहिता के तहत सख्त कार्रवाई की जा रही है।

एंटी करप्शन ब्यूरो और कैग जैसी संस्थाएँ भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम चला रही हैं। इससे गुपकार गैंग और आतंकी बौखलाए हुए हैं। इसलिए वे उलजलूल बयानबाजी कर रहे हैं। निर्दोष और निरीह नागरिकों की टारगेट किलिंग कर रहे हैं। यह दीये के बुझने से पहले की फड़फड़़ाहट है। स्थानीय समाज भी उनकी इन कायराना हरकतों के खिलाफ सुरक्षा बलों के साथ खड़ा हो रहा है।

पिछले दिनों पूर्णकृष्ण भट्ट की हत्या के खिलाफ कैंडल मार्च और शांति रैलियाँ निकाली गईं, तिरंगा लहराकर हिन्दुस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए गए। यही नहीं, पिछले तीन दशक से आतंकी और अलगाववादी गतिविधियों के केंद्र रहे श्रीनगर के राजबाग स्थित हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के कार्यालय का होर्डिंग तोड़ डाला गया।

इतना ही नहीं, उसके गेट को पोतकर उस पर सफ़ेद रंग से ‘इण्डिया’ लिख दिया गया। दीवार पर ‘आखिर कब तक?’ का बैनर लगाया गया। यह कश्मीर में हो रहे बदलाव की बानगी है। पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर का बेसुरा राग छेड़कर स्वयं आतंक और अशांति के हिमायती के रूप में बेनकाब हो रहा है।

अभी 22 फरवरी 1994 को भारत की संसद में सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव को पूरा किया जाना शेष है। इस प्रस्ताव के अनुसार, सम्पूर्ण जम्मू-कश्मीर राज्य (अधिमिलन-पत्र में उल्लेखित) भारतीय संघ का अविभाज्य अंग था, है और रहेगा। यही भारतीय जनमानस की सामूहिक और संगठित आकांक्षा है। इस प्रस्ताव को फलीभूत करने के लिए भारतवासियों को अपने साहस, संगठन और संकल्प का सामूहिक शंखनाद करना होगा।

(लेखक जम्मू केन्द्रीय विश्वविद्यालय में अधिष्ठाता, छात्र कल्याण हैं।)

जिस केमिकल से हो सकती है खुजली-जलन, छठ से पहले उसे यमुना में डलवा रही केजरीवाल सरकार: BJP सांसद ने उठाए सवाल, अधिकारी को फटकारते हुए Video वायरल

दिल्ली की केजरीवाल सरकार के ऊपर छठ पर्व से पहले यमुना में केमिकल छिड़काव करवाने का आरोप लग रहा है। भाजपा ने इन रसायनों को जहरीला कहते हुए दिल्ली सरकार पर हमला बोला है। इस बीच भाजपा सांसद की जल विभाग के अधिकारियों से उलझते हुए एक वीडियो भी सामने आई है।

वीडियो में वह अधिकारी पर इस बात को लेकर गुस्सा हो रहे हैं कि आखिर छठ से पहले नदी में केमिकल क्यों डाला जा रहा है जबकि सब जानते हैं कि छठ में लोग यहाँ आकर डुबकी लगाते हैं।

प्रवेश वर्मा की वीडियो आने के बाद जहाँ इस बात पर सवाल हो रहे हैं कि वह अधिकारी के साथ क्यों उलझे। उन्होंने उससे क्यों कहा- ‘केमिकल तुम्हारे सिर पर डाल दूँ’। वहीं दूसरी ओर प्रवेश वर्मा का मामले को लेकर कहना है,

“आज यमुना के पास छठ घाट का दौरा करने पर हमें वहाँ जहरीले केमिकल के कंटेनर मिले। इस केमिकल को नदी में डाल दिया जाएगा। वहाँ मौजूद अधिकारी से पूछा कि लोगों को नुकसान के लिए कौन जिम्मेदार होगा?”

उन्होंने आगे कहा, “मैंने उनसे बार-बार कहा कि यमुना नदी में केमिकल न डालें। अगर अधिकारी इस मामले में मेरी बात नहीं सुनते हैं तो मैं क्या मैं गुस्सा नहीं हो सकता? दिल्ली की जनता के भले के लिए अगर मुझे इस तरह से बात करनी पड़ रही है तो यही सही, मुझे इसमें कोई दिक्कत नहीं है।”

सिलिकॉन डिफॉर्मर का इस्तेमाल कर रही केजरीवाल सरकार

दरअसल, दिल्ली सरकार हर वर्ष यमुना की सफाई को लेकर बड़े-बड़े दावे करते रही है। हालाँकि, प्रदूषण कभी कम होता नहीं दिख। लेकिन, इस साल अपनी छवि सुधारने के लिए उन्होंने सिलिकॉन डिफॉमर नामक केमिकल का उपयोग करने का निर्णय लिया। इस केमिकल को लेकर जानकरों का मानना है कि इससे नदी साफ होने की बजाय और भी अधिक दूषित हो जाएगी। साथ ही इस केमिकल के संपर्क में आने वाले व्यक्ति को खुजली, आँखों में जलन समेत कुछ अन्य समस्याएँ भी हो सकती हैं।

मनोज तिवारी ने उठाए थे सवाल

बता दें कि केजरीवाल सरकार पर इससे पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद मनोज तिवारी ने भी सवाल खड़े किए थे। उन्होंने कहा था, “दिल्ली सरकार यमुना नदी में जहरीले केमिकल का छिड़काव करके यमुना को साफ करने में अपनी विफलता को छिपाने की कोशिश कर रही है।”

इसके अलावा उन्होंने दावा करते हुए कहा था, “यमुना की प्रदूषण की स्थिति का जायजा लेने के लिए कालिंदी कुंज क्षेत्र का दौरा किया। हमें यह देखकर आश्चर्य हुआ कि झाग को छिपाने के लिए एक बहुत ही जहरीले केमिकल का छिड़काव किया जा रहा था। जो लोग छिड़काव कर रहे थे वह हमें देखकर तुरंत भाग गए। हमने शिकायत दर्ज कराई है।”

दिल्ली भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष आदेश गुप्ता ने आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र सरकार के 2500 करोड़ देने के बाद भी यमुना नदी में प्रदूषण नियंत्रण नहीं हुआ है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “8 साल में 8 बार अरविंद केजरीवाल कह चुके हैं कि हम यमुना जी को इतना साफ कर देंगे की आप डुबकी लगा सको। लेकिन इनकी नाकामी की वजह से आज भी यमुना जी मैली है और छठ घाट गंदे पड़े हैं। केंद्र सरकार के 2500 करोड़ देने के बाद भी दिल्ली सरकार ने यमुना जी की सफाई करवाने में हाथ खड़े कर दिए हैं।”

आतंकी मुबीन के घर मिलीं 109 विस्फोटक चीजें, जिहाद वाली नोटबुक भी बरामद: कोयम्बटूर सिलिंडर ब्लास्ट में NIA की FIR से खुलासा

तमिलनाडु के कोयम्बटूर में रविवार (23 अक्टूबर 2022) को कोट्टई ईश्वरम मंदिर के सामने एक कार में हुए सिलिंडर ब्लास्ट में आतंकी जमिज़ा मुबीन मारा गया था। मुबीन के घर से बड़ी मात्रा में विस्फोटक भी बरामद हुआ था। आशंका इस बात की भी जताई जा रही थी कि घटना दीवाली के दौरान मंदिर को निशाना बनाने की साजिश थी। वहीं NIA द्वारा घटना के संबंध में की गई एफआईआर से मुबीन के घर से अन्य संवेदनशील चीजों के बरामद होने की जानकारी मिली है।

NIA ने अपनी एफआईआर में कहा, ”मृतक जमिज़ा मुबीन के परिसरों की तलाशी में 109 वस्तुएँ जब्त की गईं, जिनमें पोटेशियम नाइट्रेट, काला पाउडर, नाइट्रोग्लिसरीन, पीईटीएन पाउडर, एल्युमिनियम पाउडर, सल्फर पाउडर, स्टेराइल सर्जिकल, जिहाद के बारे में विवरण के साथ नोटबुक आदि शामिल हैं।”

मुबीन से 2019 में आईएसआईएस से लिंक को लेकर पूछताछ की गई थी। हालाँकि पुलिस का दावा है कि जमिज़ा मुबीन का कोई पुराना आतंकी या आपराधिक रिकार्ड नहीं पाया गया है। शुरुआती जाँच में पुलिस को मुबीन की गाड़ी में लोहे की कीलें मिली थीं, जिसे गाड़ियों को पंचर करने में प्रयोग किया जाता है। उसकी गाड़ी से मार्बल भी बरामद हुए थे। विस्फोट में उसकी मारुति 800 कार के भी परखच्चे उड़ गए थे। यह अंदेशा भी जताया जा रहा है कि वह जहरान हाशिम नेटवर्क से जुड़ा था। जहरान हाशिम ईस्टर पर श्रीलंका में हुए सीरियल ब्लास्ट का मास्टरमाइंड है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार कोयम्बटूर में 1998 में हुए सीरियल ब्लास्ट से भी इसके लिंक मिल रहे हैं। कार ब्लास्ट के बाद पकड़े गए लोगों में मोहम्मद थलका भी शामिल है। वह नवाब खान का बेटा है, जो 1998 सीरियल ब्लास्ट में जेल में बंद है। सीरियल ब्लास्ट के लिए जिम्मेदार आतंकी संगठन अल-उमाह का मुखिया उसका चाचा सैयद अहमद बाशा ही है।

रिपोर्ट के अनुसार मुबीन उक्कडम में रहता था। यह इलाका हमेशा से संवेदनशील रहा है। खासकर 1998 के सीरियल ब्लास्ट के बाद से। यही कारण है कि विस्फोट के बाद जब मुबीन के घर के तलाशी ली जा रही थी, उसी समय अल-उमाह से जुड़े लोगों के घर पर भी दबिश दी गई। इनमें से एक घर नवाब खान का भी था। इसके बाद नवाब खान के बेटे थलका से पूछताछ की गई और बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

23 अक्टूबर को हुए ब्लास्ट की पड़ताल में जिस तरह से चीजें सामने आ रही हैं, उससे लगता है कि 1998 के सिलसिलेवार धमाकों की तरह ही बड़ी साजिश रची गई थी। लेकिन किन्हीं कारणों से 24 साल बाद आतंकी उसी तरह की घटना को अंजाम देने में विफल रहे।

यूरोप में चिड़िया हमारे नियमों के अनुसार उड़ेगी’: एलन मस्क का ट्वीट देख EU के अधिकारी ने दी चेतावनी, ट्विटर के नए मालिक ने कहा था- पंछी आजाद है

टेस्ला (Tesla) और स्पेस एक्स (SpaceX) के मालिक एलन मस्क (Elon Musk) ने आखिरकार ट्विटर (Twitter) को खरीद लिया। हालाँकि, ट्विटर खरीदने की खबर के वक्त से ही अधिग्रहण के बाद प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता को लेकर चिंता जाहिर की जाती रही है। इसी के तहत यूरोप के शीर्ष अधिकारी ने ट्विटर के नए बॉस को कड़ी चेतावनी दी है।

लगभग 44 अरब डॉलर के इस डील के पूरा होने से कुछ घंटे पहले यूरोपीय संघ के आंतरिक बाजार आयुक्त थियरी ब्रेटन ने ट्विटर पर मस्क को चेतावनी दी है। ब्रेटन ने कहा, “यूरोप में चिड़िया हमारे नियमों के अनुसार उड़ेगी।” दरअसल, एलन मस्क ने ट्वीट किया था, “चिड़िया आजाद हो गई”। इसके जवाब में ब्रेटर ने यह टिप्पणी की है। बता दें कि ट्विटर का लोगो एक पंछी है।

बता दें कि इस साल मई में ब्रेटन ने अमेरिका के टेक्सास की यात्रा की थी और वहाँ ट्विटर के लिए फ्री-स्पीच पर एलन मस्क से चर्चा की थी। उन्होंने उन्हें यह भी याद दिलाया कि यह दृष्टिकोण यूरोपीय संघ के अपने कंटेंट मॉडरेशन कानूनों के तहत होना चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार, उस बैठक में एलन मस्क के साथ ब्रेटन की कंटेंट मैनेजमेंट या ट्विटर पर पोस्ट करने के दृष्टिकोण पर ‘कोई असहमति नहीं’ थी।

यहाँ बताना आवश्यक है कि यूरोपीय संघ का डिजिटल सेवा अधिनियम सरकार को बड़ी तकनीकी कंपनियों को अवैध एवं हानिकारक सामग्री के प्रसार को सीमित करने और दुष्प्रचार के खिलाफ कार्रवाई करने की शक्ति देता है। इसका उल्लंघन करने पर कंपनी के कुल सालाना बिक्री का 6 प्रतिशत जुर्माना के रूप में देना होगा। यही नहीं, सरकार पूरे क्षेत्र में कंपनी के परिचालन पर रोक भी लगा सकती है।

उधर मस्क ने भी विज्ञापनदाताओं को भेजे गए एक नोट में कहा कि वे पैसा कमाने या नफरत फैलाने के लिए ट्विटर नहीं खरीद रहे हैं। उन्होंने कहा था कि वे नहीं चाहते कि ट्विटर ‘सभी के लिए एक फ्री-फॉर-हेलस्केप बन जाए, जहाँ बिना किसी परिणाम के कुछ भी कहा जा सकता है’। मस्क का कहना है कि वे चाहते हैं कि लोगों को एक ऐसा मंच दें, जहाँ हिंसा का सहारा लिए बिना स्वस्थ तरीके से कई मतों पर बहस हो सके।

दरअसल, गुरुवार (27 अक्टूबर 2022) को 44 बिलियन डॉलर (करीब 3,62,46,12,20,000 रुपए) में ट्विटर की डील फाइनल करने वाले मस्क ने ‘द बर्ड इज फ्रीड (the bird is freed) यानी आजाद हुई चिड़िया’ ट्वीट के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की है कि ट्विटर के पक्षपाती सेंशरशिप के दिन अब बीत गए। 

रायटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, मस्क ने जिन अधिकारियों की छुट्टी की है उनमें कंपनी के सीईओ पराग अग्रवाल (Parag Agrawal) के अलावा CFO नेड सेगल और लीगल अफेयर-पॉलिसी हेड विजया गाड्डे शामिल हैं। इन्हें कंपनी हेडक्वार्टर से भी बाहर निकलवा दिया गया।

केरल: NIA ने PFI के पूर्व राज्य सचिव रऊफ को किया गिरफ्तार, संगठन पर बैन लगने के बाद से था फरार

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) ने केरल के पलक्कड़ जिले से गुरुवार (27 अक्टूबर 2022) को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के पूर्व राज्य सचिव सीए रऊफ को गिरफ्तार किया। एजेंसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कई महीनों से फरार चल रहे रऊफ को पट्टांबी इलाके में उसके घर पर छापेमारी के बाद गिरफ्तार किया गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, रऊफ कई महीनों से फरार चल रहा था। वह केरल पुलिस के साथ-साथ एनआईए की रडार पर था। एएनआई (NIA) के अधिकारियों ने कहा कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के खिलाफ बड़े पैमाने पर देशव्यापी अभियान शुरू करने और इसके विभिन्न कैडरों को गिरफ्तार करने के बाद से रऊफ छिपा हुआ था। उसे गिरफ्तार करने के लिए हरसंभव कोशिश की जा रही थी।

बता दें कि इस साल सितंबर में भारत सरकार ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और उससे जुड़ी 8 संस्थाओं पर 5 साल के लिए बैन लगा दिया था। केंद्र सरकार ने PFI को देश विरोधी और गैर कानूनी गतिविधियों में संलिप्त पाया था, जिसके बाद ये फैसला लिया गया। अपने आदेश में मोदी सरकार ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और उससे जुड़ी 8 संस्थाओं को देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताया था।

पीएफआई और आतंक का इतिहास

पीएफआई का हिंसा फैलाने का काफी पुराना इतिहास है। नागरिकता संशोधन अधिनियम के मद्देनजर दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों और देश भर में दंगे की जाँच के दौरान पीएफआई की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी। साथ ही, पीएफआई के कई सदस्यों को दंगों में शामिल होने के लिए गिरफ्तार भी किया गया था। इसके अलावा, नवंबर 2020 में कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया ने देश के विभिन्न हिस्सों में दंगे और हिंसा उकसाने के आरोपित किसानों के सरकार विरोधी प्रदर्शन को अपना समर्थन दिया था। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को संविधान के संरक्षण के लिए संघर्ष करने के लिए कहा था।

…पत्थर, डंडे सब लाओ अपने साथ: पाकिस्तान में इमरान खान ने छेड़ा ‘जिहाद’, बोले- ‘मैं मुल्क को आजाद देखना चाहता हूँ, ISI की पोल खोल दूँगा’

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) देश में चुनाव कराए जाने को लेकर शुक्रवार (28 अक्टूबर 2022) से ‘हकीकी आजादी मार्च’ निकाल रहे हैं। यह मार्च लाहौर के लिबर्टी चौक से शुरू होकर राजधानी इस्लामाबाद बाद तक जाएगा। इमरान खान ने कसम खाई है कि वो पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी की पोल खोल कर रखेंगे। इससे पहले उन्होंने इस मार्च को ‘जिहाद’ का नाम दिया था।

मार्च के दौरान सैंकड़ों लोग इमरान कान के साथ दिख रहे हैं। ब्रिज पर चढ़ कर उनसे हाथ मिलाने की कोशिश हो रही है। ऐसी वीडियोज सामने आई हैं जिसमें इमरान कहते हैं, “ISIS के डीजी अपने कान खोल सुन लो, मैं तुम्हारे बारे में बहुत कुछ जानता हूँ, लेकिन चुप हूँ क्योंकि मैं देश को नुकसान नहीं पहुँचाना चाहता… मैं सबको सब बता दूँगा और ISI की पोल खोलूँगा। हम अल्लाह के अलावा किसी के आगे नहीं झुकेंगे। किसी भी कुर्बानी के लिए तैयार हैं। मैं नवाज शरीफ जैसा भगोड़ा नहीं।”

आगे इमरान खान ने कहा, “मैं पाकिस्तान को आजाद देश के तौर पर देखना चाहता हूँ, हमें इसके लिए शक्तिशाली सेना चाहिए। फौज कमजोर होगी तो देश अपनी आजादी खो देगा। ISI का इस्तेमाल कर हम कमजोर हो रहे हैं। मैं जो मर्जी वो कहूँ, लेकिन मैं अपने देश को कमजोर नहीं देख सकता।”

इमरान खान ने मार्च को कहा जिहाद

दरअसल, इमरान खान ने मंगलवार (25 अक्टूबर 2022) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मार्च निकालने की घोषणा की थी। इमरान ने इस मार्च को पाकिस्तान के इतिहास का सबसे बड़ा मार्च बताते हुए कहा था

“मैंने शुक्रवार को लाहौर के लिबर्टी चौक से इस्लामाबाद तक सुबह 11 बजे लॉन्ग मार्च शुरू करने का फैसला किया है। मैं सरकार पर तत्काल चुनाव की घोषणा करने का दबाव बनाने के लिए मार्च कर रहा हूँ। यह देश के इतिहास में सबसे बड़ा और लंबा मार्च होगा।”

इसके अलावा उन्होंने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के खिलाफ इस मार्च को जिहाद करार देते हुए कहा था “यह मार्च राजनीति से हटकर है। यह इन चोरों से आजादी के लिए एक युद्ध है जो हमारे ऊपर थोपा गया है। यह जिहाद तय करेगा कि देश किस ओर जाएगा।”

हालाँकि, उन्होंने इस मार्च को लेकर हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि यह पूरी तरह शांति पूर्ण होगा। लेकिन उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ (PTI) ने इस मार्च में शामिल होने वाले लोगों से इस्लामाबाद में धरने के लिए गैस मास्क, चादरें, कंबल, तौलिये, तीन जोड़ी कपड़े, छोटे आकार के टेंट, स्लिंग-शॉट्स, मार्बल्स और डंडों की व्यवस्था करने को कहा है।

ऐसा कहा जा रहा है कि इमरान खान और उनकी पार्टी इस्लामाबाद में लंबे समय के लिए डेरा डालने की प्लानिंग के साथ काम कर रही है। साथ ही, डंडों को साथ रखने का मतलब यह है कि यह मार्च हिंसक भी हो सकता है। इस मार्च को लेकर सामने आए ताजा वीडियो में लाहौर के लिबर्टी चौक में इमरान खान समर्थक भारी संख्या में नजर आए हैं।

इस्लामाबाद में 13000 फौजी तैनात

रिपोर्ट के अनुसार, शहबाज शरीफ सरकार ने इमरान खान के इस मार्च को इस्लामाबाद में पहुँचने से पहले ही रोकने की तैयारी में है। जिसके लिए बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है। मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों को रोकने और खराब हालात से निपटने के लिए आँसू गैस और पैपर गन से लैस 13,000 से अधिक जवानों को इस्लामाबाद में तैनात किया गया है।

गौरतलब है कि इससे पहले भी इमरान खान इसी साल मई में आजादी मार्च निकाल चुके हैं। हालाँकि, इस्लामाबाद पहुँचने के बाद इमरान समर्थकों और सुरक्षा बलों के बीच जमकर झड़प हुई थी। इस झड़प में कई लोग घायल हो गए थे यहाँ तक कि मेट्रो स्टेशन में आग लगा दी गई थी। जिसके बाद, मार्च को अत्यधिक हिंसक होता देख इमरान खान ने ‘आजादी मार्च’ को रद्द कर दिया था।

इमरान खान पर लगा बैन

उल्लेखनीय है कि गत 21 अक्टूबर को पाकिस्तान के चुनाव आयोग ने तोशाखाना केस में उन्हें दोषी ठहराते हुए आगामी 5 वर्षों के लिए चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी थी। हालाँकि, इसके बाद हाईकोर्ट ने राहत देते हुए उनके चुनाव लड़ने पर लगी रोक को हटा दिया था। इसके अलावा, हाल ही में उनके खिलाफ जानलेवा हमला करने के मामले में भी केस दर्ज किया गया था। यह केस पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज़ नामक संगठन के नेता मोहसिन शाहनवाज़ राँझा ने दर्ज करवाया था। इसके अलावा, प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़े ऑडियो लीक और प्रतिबंधित फंडिंग के मामले में भी इमरान ने के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।

‘जहाँ कोई हिलता दिखे, तुरंत गोली मारो’ : 26/11 वाले ताज होटल में UNSC की बैठक, भारत ने सबको सुनवाई PAK आतंकी की ऑडियो

मुंबई आतंकी हमले (Mumbai Terrorist Attack) को अगले महीने 14 साल पूरे हो जाएँगे। उससे पहले एक बार फिर भारत ने पाकिस्तान को UNSC की आतंकवाद विरोधी समिति के सामने बेनकाब किया। दरअसल, शुक्रवार (28 अक्टूबर 2022) को मुंबई के ताज होटल (Taj Hotel) में चल रही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने आतंकी हमले में पाकिस्तान के कनेक्शन का खुलासा किया है।

इस संबंध में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने देश-विदेश के प्रतिनिधियों के सामने एक ऑडियो क्लिप भी पेश किया। यह क्लिप मुंबई के छबाड़ हाउस का है। इसमें पाकिस्तानी आतंकी और 26/11 का साजिशकर्ता साजिद मीर फोन पर आतंकियों को निर्देश दे रहा है, “जहाँ भी मूवमेंट (हिलता) दिखे। कोई बंदा छत पर चल रहा हो या कोई आ रहा है या जा रहा है, उस पर फायर ठोको (गोली चलाओ)। उसे नहीं पता वहाँ क्या हो रहा है।” इसके बाद साजिद मीर को जबाव देते हुए फोन पर दूसरा आतंकी उसे ऐसा करने का भरोसा देता है।

विदेश मंत्री एस जयशंकर (S Jaishankar) ने कहा कि 26 नवंबर 2008 को किया गया आतंकवादी हमला सिर्फ मुंबई पर ही नहीं, बल्कि समूचे अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर था। अभी भी इस हमले का हिसाब पूरा नहीं हुआ है। इससे जुड़े साजिशकर्ता और अपराधियों को सजा दिलाने का सिलसिला जारी है। मुंबई में चल रही इस बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर के अलावा यूके के विदेश मंत्री जेम्स क्लेवर्ली, घाना के विदेश मंत्री, यूएई के गृहमंत्री समेत अन्य देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

साजिद मीर पर इनाम

साजिद मीर के बारे में कहा जाता है कि वह 2010 तक लश्कर-ए-तैयबा के ऑपरेशन्स चीफ जकी-उर-रहमान लखवी की सुरक्षा का जिम्मा संभालता था। वह विदेश में आतंकियों की भर्ती करता था और पाकिस्तान में भी टेरर कैंप चलाता था। वह और आईएसआई के इंडियन मुजाहिदीन ऑपरेशन का भी हिस्सा था। एफबीआई ने साजिद मीर पर 50 लाख डॉलर (412415000 रुपए) का इनाम रखा है। अमेरिका और भारत इस आतंकी को पिछले एक दशक से खोज रहे हैं। साजिद मीर ने डेविड कोलमैन हेडली समेत बाकी आतंकवादियों के साथ मुंबई में आतंकवादी हमला करने की योजना बनाई थी। उसे लश्कर-ए-तैयबा के सरगना हाफिज मोहम्मद सईद का करीबी माना जाता है। बता दें कि यह मीटिंग मुंबई के उसी ताज पैलेस होटल में हो रही है, जिसे 26/11 हमले में आतंकियों ने निशाना बनाया था।

‘मेक इन इंडिया’ के तहत पहली बार देश में बनेगा मिलिट्री एयरक्राफ्ट: TATA का यूरोपीय कंपनी Airbus के साथ डील, वडोदरा में PM मोदी करेंगे प्लांट का उद्घाटन

गुजरात के वडोदरा (Vadodara, Gujarat) में टाटा समूह (TATA Group) और एयरबस (Airbus) मिलकर भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) के लिए C-295 परिवहन विमान (Transport Aircraft) का निर्माण करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) रविवार (30 अक्टूबर 2022) को इस प्लांट का शिलान्यास करेंगे।

केंद्र सरकार ने गुरुवार (27 अक्टूबर 2022) को बताया था कि इस परियोजना की कुल लागत 21,935 करोड़ रुपए है। टाटा समूह ने यूरोपीय कंपनी एयरबस के साथ मिलकर यह डील की है। भारत में इससे पहले कभी भी इस तरह के एयरक्राफ्ट नहीं बनाए गए। एयरबस पहली विदेशी कंपनी है, जिसे भारत में सी-295 विमान बनाने की मंजूरी दी गई है।

क्या है C-295 एयरक्राफ्ट डील

इस डील के तहत टाटा और एयरबस वायुसेना के लिए वडोदरा के इस प्लांट में कुल 40 एयरक्राफ्ट बनाएँगे। इसके अलावा जो दूसरे जरूरी इक्विपमेंट हैं, उन्हें भी इसी प्लांट में तैयार करने की तैयारी है। सितंबर 2022 में भारत ने 21 हजार करोड़ से अधिक की एक डील की थी।

उस डील में एयरबस डिफेंस से भारत 56 C-295 एयरक्राफ्ट खरीदने वाला है। इसमें 16 एयरक्राफ्ट पूरी तरह तैयार होकर भारत को मिलने वाले हैं, वहीं जो बचे हुए 40 एयरक्राफ्ट हैं, उनका निर्माण भारत में किया जाएगा। ये वही बचे हुए 40 एयरक्राफ्ट हैं, जिन्हें गुजरात के वडोदरा में तैयार किया जाएगा।

एयरक्राफ्ट की खासियत

भारत में एयरक्राफ्ट के निर्माण से मोदी सरकार की ‘मेक इंन इंडिया’ योजना को बल मिलेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना भारत को डिफेंस के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर बनाना है। यही कारण है कि वे अपने संबोधनों में भी इस पर जोर देते हैं। इस क्रम में पहली बार एक विदेशी कंपनी भारत में ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट का निर्माण करने वाली है।

इस एयरक्राफ्ट की खासियत यह है कि इसमें एक बार में 71 ट्रूप या 50 पैराट्रूपर्स को मुश्किल जगहों पर आसानी से ले जाया जा सकता है। प्राकृतिक आपदा के वक्त भी ये एयरक्राफ्ट काफी कारगर है। इसके अलावा रेस्क्यू ऑपरेशन में भी वायुसेना को इस एयरक्राफ्ट से काफी मदद मिलेगी।

C-295 विमान समकालीन तकनीक के साथ 5-10 टन क्षमता का एक परिवहन विमान है, जो भारतीय वायुसेना (IAF) के पुराने एवरो-748 विमानों की जगह लेगा। इसमें सैनिकों और कार्गो के पैरा ड्रॉपिंग के लिए एक रियर रैंप दरवाजा है।

रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि ये विमान पूरी तरह से स्वदेशी होंगे। सितंबर 2023 से अगस्त 2025 के बीच 16 एयरक्राफ्ट रेडी कंडीशन में सौंप दिए जाएँगे। वहीं, देश में बनने वाले 40 विमानों की आपूर्ति 2026 से 2031 तक की जाएगी।

छोटी लड़कियों की नीलामी, माँ से रेप: राजस्थान के हाल देख भड़की NCW, जाँच के लिए भेजी जाएगी टीम, मंत्री बोले- यहाँ ऐसे काम नहीं होते

राजस्थान के भीलवाड़ा से स्टाम्प पेपर पर लड़कियों को बेचे जाने के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। इस संबंध में एक मीडिया रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी, जिसमें कई चौंकाने वाले खुलासे किए गए थे। इसमें बताया गया था कि लड़कियों को बेचे जाने से मना करने पर लड़कियों की माँ के साथ रेप किया जाता है। इसके पीछे जातीय पंचायतों की भूमिका बताई गई थी। हालाँकि राजस्थान के मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने इस बात से इंकार किया है कि प्रदेश में लड़कियों को बेचा जाता है।

रिपोर्ट को लेकर पहले राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने गुरुवार (27 अक्टूबर 2022) को राजस्थान सरकार को नोटिस जारी किया था और राज्य सरकार से चार सप्ताह में जवाब देने को कहा था। नोटिस में कहा गया था मीडिया रिपोर्ट में जिस घिनौनी प्रथा का दावा किया गया है, वह मानवाधिकारों का उल्लंघन है।

रिपोर्ट पर अब राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की प्रमुख रेखा शर्मा ने भी चिंता जताई है और बयान जारी किया है। उन्होंने कहा, ”एनसीडब्ल्यू की एक टीम को राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में भेजा जा रहा है। 1 नवंबर को मैं राजस्थान के सीएस और भीलवाड़ा एसपी से मिलूँगी। पिछले कुछ वर्षों से राज्य से ऐसी ही घटनाएँ सामने आई हैं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है ।”

घटना पर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने भी संज्ञान लिया है। एनसीपीसीआर के चेयरपर्सन प्रियांक कानूनगो ने घटना पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, ”हम मामले की जाँच करेंगे। 7 नवंबर को, मैं ट्रेफिकिंग से प्रभावित गाँव का दौरा करूँगा, प्रभावित परिवारों से मिलूँगा और यह जानने की कोशिश करूँगा कि इस गठजोड़ में कौन शामिल हैं। हम यह सुनिश्चित करने की कोशिश करेंगे कि इस सांठगांठ पर प्रतिबंध लगाया जाए और आरोपी को दंडित किया जाए।

राजस्थान राज्य महिला आयोग ने भी इस संबंध में मीडिया रिपोर्ट पर संज्ञान लिया है और पुलिस महानिदेशक और भीलवाड़ा कलेक्टर को नोटिस जारी कर तत्काल कार्रवाई करने की माँग की है और 7 दिनों में तथ्यात्मक रिपोर्ट सौंपने को कहा है।

दूसरी ओर राजस्थान सरकार के मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने इस बात से इनकार किया है कि प्रदेश में लड़कियों को बेचा जाता है। उन्होंने कहा, ”यह जाँच का विषय है। जब इस तरह की जानकारी सामने आती है तो हम तब तक सच्चाई नहीं जान सकते जब तक कि जाँच न हो जाए। एनएचआरसी को इस बारे में पहले राजस्थान पुलिस से बात करनी चाहिए थी। प्रदेश में लड़कियों की बिक्री नहीं होती।”

मीडिया रिपोर्ट में क्या है?

लड़कियों की ब्रिकी से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट राजस्थान के भीलवाड़ा से संबंधित है। इसमें पीड़ितों के हवाले से बताया गया है कि लड़कियों को नीलाम कर देश के विभिन्न राज्यों सहित विदेशों तक भेजा जा रहा है। इसमें बताया गया है कि भीलवाड़ा की कई बस्तियों में विवाद या कर्ज के मामलों का निपटारा पुलिस की जगह जातीय पंच कर रहे हैं। वे लड़कियों की नीलामी करवा रहे हैं। इनकार करने पर उनकी माताओं से बर्बरता की जाती है।

रिपोर्ट में कई मामलों का जिक्र किया गया है। ऐसे ही एक मामले के बारे में बताया गया है कि 15 लाख रुपए के भुगतान के बदले जातीय पंचायत ने एक आदमी को पहले अपनी बहन को बेचने के लिए मजबूर किया। इसके बाद उसे 12 साल की बेटी को बेचने को मजबूर किया गया। इस तरह एक-एक कर उस व्यक्ति की सभी पाँच बेटियाँ गुलाम बन गई। बावजूद उस व्यक्ति का कर्ज खत्म नहीं हुआ।

₹2180 करोड़ की लागत, 14000 फीट का सेतु: LAC पर भारत होगा और मजबूत, रक्षा मंत्री ने 75 नई परियोजनाओं का किया उद्घाटन

चीन और पाकिस्तान की लगती सीमा (LAC) पर भारत अपने आधारभूत ढाँचे को मजबूत करने के लिए युद्ध स्तर पर जुटा हुआ है। इसी के तहत रक्षामंत्री राजनाथ सिंह (Defence Minister Rajnath Singh) ने सीमा लगे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 75 इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को राष्ट्र को समर्पित किया।

दो दिवसीय लद्दाख दौरे पर पहुँचे रक्षामंत्री राजनाथ सिंह द्वारा बुनियादी ढाँचे वाले जिन परियोजना का उद्घाटन किया है, उनमें लेह का श्योक सेतु भी शामिल है। इस परियोजनाओं को सीमा सड़क संगठन (BRO) ने तैयार किया है। इस मौके पर BRO के लेफ्टिनेंट जनरल राजीव चौधरी भी मौजूद थे।

शुक्रवार (28 अक्टूबर 2022) को रक्षामंत्री ने जिन 75 परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया उनमें 44 पुल, 28 सड़कें, 2 हेलीपैड और एक शून्य-कार्बन आवास हैं। ये परियोजनाएँ 6 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों में फैली हुई हैं।

पुल, सड़क और हेलीपैड वाली ये सभी परियोजनाएँ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के साथ वाले क्षेत्रों में स्थित हैं। ये वही क्षेत्र है, जहाँ भारतीय सैनिकों और चीनी सेना का गतिरोध हुआ है। कहा जा रहा है कि इन बुनियादी ढाँचों के विकास से भारतीय सेना को बढ़त हासिल होगी।

बता दें कि चीन भारत के साथ लगते वास्तविक सीमा पर और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में भी वर्षों से इसी तरह के बुनियादी ढाँचे का निर्माण कर रहा है। भारत ने साल 2023 तक अपनी उत्तरी सीमाओं से लगे 272 सड़कों का निर्माण पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण परियोजनाओं को BRO ने रिकॉर्ड समय में कुल 2,180 करोड़ रुपए की लागत से पूरा किया गया है। इनमें कई अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण डी-एस-डीबीओ रोड पर 14,000 फीट की ऊँचाई पर बना श्योक सेतु है। इस ब्रिज की लंबाई 120 मीटर है।

जिन पुलों का उद्घाटन किया गया है, उनमें जम्मू और कश्मीर में 12, लद्दाख में 7, हिमाचल प्रदेश में 3, उत्तराखंड में 6, सिक्किम में 2 और अरुणाचल प्रदेश में 13 स्थित हैं। अगर सड़कों की बात करें तो राजस्थान में 6, पंजाब में 1, जम्मू-कश्मीर में 7, लद्दाख में 8, सिक्किम में 2 और अरुणाचल प्रदेश में 4 सड़कों का निर्माण किया गया है। वहीं, दो हेलीपैडों में से एक न्योमा में स्थित है, जो पूर्वी लद्दाख में एलएसी के करीब है।