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लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) अनिल चौहान बने देश के नए CDS, दिवंगत बिपिन रावत की लेंगे जगह: आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन्स का है लंबा अनुभव

लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) अनिल चौहान को मोदी सरकार ने देश का नया CDS (चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ) नियुक्त किया गया। वो दिवंगत जनरल बिपिन रावत की जगह लेंगे। अनिल चौहान ‘डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन्स (DGOML)’ के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। जब वो रिटायर हुए, उस वक्त वो भारतीय सेना के ईस्टर्न कमांड में ‘जनरल ऑफिसर कमांडर इन चीफ (GOC-in-C)’ थे। इस पद को ईस्टर्न कमांडर भी कहा जाता है।

सेना के दो सबसे संवेदनशील कमांडों में एक ईस्टर्न आर्मी और एक नॉर्थर्न आर्मी है। अनिल चौहान 31 मई, 2021 को अपने पद से रिटायर हुए थे। उस समय उनकी उम्र 60 वर्ष थी। वरिष्ठता के मामले में वो तीनों सेनाओं के अध्यक्षों से सीनियर हैं। इसीलिए, उन्हें CDS बनाने में सीनियोरिटी की भी कोई दिक्कत नहीं आई। रिटायर होने के बाद से वो ‘नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल’ के सदस्य के रूप में काम कर रहे थे। NSA (राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार) अजीत डोभाल से उनके अच्छे संबंध हैं।

वह भारत सरकार के सैन्य मामलों से जुड़े विभाग के सचिव के रूप में भी कार्य करेंगे। उनके पास जम्मू कश्मीर के अलावा उत्तर-पूर्वी राज्यों में आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन्स का अच्छा अनुभव है। खास बात ये भी है कि दिवंगत बिपिन रावत की तरह ही अनिल चौहान भी उत्तराखंड से ही ताल्लुक रखते हैं। पूर्व सैन्य अधिकारी केजेएस ढिल्लों ने कहा है कि अनिल चौहान एक शानदार मिलिट्री प्रोफेशनल हैं और एक उम्दा व्यक्तित्व भी हैं।

अनिल चौहान की पढ़ाई-लिखाई पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता स्थित केंद्रीय विद्यालय से हुई है। 1981 में उन्हें ’11 गोरखा राइफल्स’ में एंट्री मिली थी। महाराष्ट्र के खडकवासला स्थित NDA (राष्ट्रीय रक्षा एकेडमी) का भी वो हिस्सा रहे हैं। साथ ही उन्होंने देहरादून स्थित मिलिट्री एकेडमी से भी प्रशिक्षण लिया। दक्षिण-पश्चिमी अफ्रीका के अंगोला में यूएन के मिशन का भी वो हिस्सा रहे। उन्हें 2020 में ‘परम वसिष्ट सेना मेडल’ और 2018 में ‘उत्तम युद्ध सेवा मेडल’ प्रदान किया गया था।

पार्थ के बच्चे की माँ बनना चाहती थी अर्पिता मुखर्जी, थाईलैंड सहित कई देशों में बिताई रातें: ED का खुलासा – अभिनेत्री की बहन को भी दिलाई सरकारी नौकरी

पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री और तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के नेता रहे शिक्षक भर्ती घोटाले के आरोपित पार्थ चटर्जी फ़िलहाल जेल में बंद हैं। सेशन कोर्ट में बुधवार (28 सितंबर, 2022) को पार्थ चटर्जी की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पार्थ को जमानत देने का विरोध किया। ED ने अपने 14,643 पन्नों के दस्तावेज कोर्ट में जमा किए हैं। ED ने खुलासा किया कि पार्थ ने अपनी पत्नी की मौत के बाद उसकी कंपनी टेक्स्ट फैब प्राइवेट लिमिटेड के अधिकांश शेयर अर्पिता के नाम कर दिए थे।

शिक्षा मंत्री रहते हुए पार्थ ने अर्पिता की बहन को सरकारी नौकरी दिलाई। एजेंसी ने दोनों की करीब 10 करोड़ रुपए की संपत्ति का ब्योरा भी कोर्ट में जमा किया है।

इसके अलावा पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी को लेकर ईडी ने अपने चार्जशीट में और भी कई अहम खुलासे किए हैं। ईडी ने दावा किया है कि अर्पिता और पार्थ दोनों थाइलैंड के फुकेट गए थे। अर्पिता मुखर्जी, पार्थ के बच्चे की माँ बनना चाहती थीं। लेकिन ये कोलकाता में रहकर संभव नहीं था। इसलिए दोनों ने कई देशों की यात्रा की। पार्थ ने थाइलैंड में एक बंगला भी खरीदा था। बताया जाता है कि दोनों 2014-15 में साथ में थाईलैंड गए थे। यहीं दोनों आराम से रात गुजारते थे।

अर्पिता के शॉपिंग बिल का भुगतान भी पार्थ ही करते थे। इस बंगले की आधी हिस्सेदारी अर्पिता के पास थी। जाँच कर रहे अधिकारियों का मानना है कि थाईलैंड में संपत्तियों को एपीए यूटिलिटी सर्विसेज के नाम पर खरीदा गया था। एपीए यूटिलिटी सर्विसेज फर्म में पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी साझेदार थे।

बता दें कि पश्चिम बंगाल के एसएससी घोटाले में पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी को ईडी ने 23 जुलाई 2022 को गिरफ्तार किया था। अपनी करीबी अर्पिता मुखर्जी के अलग-अलग फ्लैटों में मिले करोड़ों रुपए को लेकर पार्थ चटर्जी ने अलग ही कहानी बयाँ की थी। पार्थ चटर्जी (Partha Chatterjee) ने बताया था, “मैं अर्पिता को आत्मनिर्भर बनाना चाहता था। मैं चाहता था कि वो मॉडलिंग और फिल्म इंडस्ट्री में अपना खुद का मुकाम हासिल करे। पार्टी को अपने ढेर सारे पैसे छिपाने के लिए एक सेफ जगह की तलाश थी।”

इस काम के बदले अर्पिता को कमीशन देने का वादा किया गया था। कई बड़े अधिकारी अर्पिता के नाम पर लिए गए घरों का दौरा भी कर चुके हैं।” पार्थ चटर्जी पर जेल में 24 घंटे निगरानी रखी जाती है। उन्हें कम से कम किसी कैदी से मिलने दिया जा रहा है। सीनियर जेलर खुद हर घंटे उनकी जेल में जाकर चीजों का मुआयना करते हैं। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि जेल के कैदियों का व्यवहार उनके प्रति अलग है।

वक्फ घोटाले में AAP विधायक अमानतुल्लाह खान को जमानत, भरना होगा ₹1 लाख का बॉन्ड: MLA ने कहा – ‘ये सच की जीत’

दिल्ली ओखला से आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) के विधायक अमानतुल्लाह खान (Amanatullah Khan) को दिल्ली वक्फ बोर्ड करप्शन केस में जमानत मिल गई है। यह जमानत उन्हें एक लाख रुपए के निजी मुचलके पर दी गई है। इसी केस में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने अमानतुल्लाह के तमाम ठिकानों पर छापेमारी करने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। खान को यह जमानत 28 सितम्बर 2022 (बुधवार) को मिली है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमानतुल्लाह को ये जमानत CBI कोर्ट ने दी है। यह निर्णय दिल्ली की राऊज़ एवेन्यू जिला न्यायालय द्वारा सुनाया गया है। मामले की सुनवाई स्पेशल जज विकास ढुल ने की। एंटी करप्शन ब्यूरो की तरफ से सरकारी वकील अतुल कुमार श्रीवास्तव और मनीष रावत ने बहस की। जमानत का विरोध करते हुए इन वकीलों ने कोर्ट को बताया कि इस मामले की जाँच के लिए 22 सदस्यीय बोर्ड का गठन हुआ है। वहीँ अमानतुल्लाह के वकील राहुल मेहरा ने एंटी करप्शन के आरोपों को झूठा बताते हुए जमानत की माँग की।

अमानतुल्लाह खान के ट्विटर हैंडल से कोर्ट के इस फैसले को सत्य की जीत बताया गया है।

अमानतुल्लाह खान 17 सितम्बर से न्यायिक अभिरक्षा में हैं। इस को आधार बना कर अमानतुल्लाह के वकीलों ने कोर्ट में जमानत की अर्जी दी थी। एंटी करप्शन ब्यूरो का कहना है कि अमानतुल्लाह के ठिकानों की तलाशी के दौरान 24 लाख रुपए कैश के अलावा 2 अवैध हथियार भी बरामद हुए थे। सोशल मीडिया में वायरल वीडियो में छापेमारी के दौरान अमानतुल्लाह के समर्थकों द्वारा एंटी करप्शन टीम के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट भी की गई थी।

एक रिपोर्ट के अनुसार अमानतुल्ला खान पर यह भी आरोप है कि दिल्ली वक्फ बोर्ड की सेवा नियमों का उल्लंघन करते हुए अवैध तौर पर 33 लोगों की नियुक्ति की थी। इसी के साथ उनके बैंक खतों में भी आर्थिक लेन-देन में गड़बड़ी का आरोप लगा था। कहा जा रहा है कि इन सभी के अतिरिक्त वक्‍फ की संपत्तियों में किरायेदारी के निर्माण और वाहन खरीद में भ्रष्टाचार का भी उन पर आरोप लगा है। फिलहाल ACB सभी मामलों की जाँच कर रही है।

PFI का ‘ISIS-स्टाइल’ वाला ट्रेनिंग कैंप, सीरिया में जिहाद के लिए करता था भर्ती: देश तोड़ने के लिए सशस्त्र जिहाद की कर रहा था तैयारी

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार (Narendra Modi Government) ने आतंकी संगठन ISIS के रास्ते पर चल निकलने वाले पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) पर प्रतिबंध लगाने से पहले उसके कारनमों की कुंडली बटोरी है। PFI के सदस्य ना सिर्फ मुस्लिमो के नाम पर विदेशों से फंड बटोरते थे, बल्कि सीरिया, इराक, लीबिया जैसे देशों में जाकर ट्रेनिंग भी लिए।

PFI की गतिविधियाँ कितनी विध्वंसक थी, इसे राजनीतिक आरोपों-प्रत्यारोपों को पढ़-सुनकर नहीं समझा जा सकता। PFI अपने नाम पर आतंक फैलाने के लिए ना सिर्फ बड़े एवं हिंदूवादी नेताओं की हत्या करता था, बल्कि शक्ति प्रदर्शन के लिए हथियारों के साथ सैनिक जैसे यूनिफॉर्म में सार्वजनिक प्रदर्शन भी करता था।

बिहार के फुलवारी शरीफ में इस साल जुलाई में PFI के ठिकाने पर छापेमारी के दौरान पता चला था कि वह देश को 2047 तक इस्लामी मुल्क बनाने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए वह देश भर में मुस्लिम युवाओं को हथियार चलाने की ट्रेनिंग दे रहा था। इतना ही नहीं, वह लोन वुल्फ अटैक के लिए भी ब्रेनवॉश करता था।

PFI द्वारा हथियारों का प्रशिक्षण

अप्रैल 2013 में केरल के कन्नूर के नराट में PFI और उसकी राजनीतिक शाखा SDPI ने एक आतंकी कैंप का आयोजन किया था। यहाँ लोगों के हथियार चलाने के अलावा, बम बनाने की भी ट्रेनिंग दी जा रही थी। इस घटना के संबंध में जब स्थानीय पुलिस को पता चला तो उसने छापेमारी की। इस दौरान कई हथियार सहित दो जिंदा बम भी बरामद हुए थे।

यह सब थनन फाउंडेशन नाम के एक चैरिटेबल ट्रस्ट की बिल्डिंग में ये गतिविधियाँ संचालित की जा रही थीं। जाँच के दौरान पता चला कि PFI-SDPI के नेता और कार्यकर्ता इस तरह की गतिविधियों को आयोजित कर रहे हैं और युवाओं को जिहाद के लिए तैयार कर रहे थे।

सीरिया में ISIS के लिए जिहाद करने गए थे PFI सदस्य

जब इराक और सीरिया में ISIS का कहर वहाँ के यजीदी एवं अन्य अल्पसंख्यक समुदायों पर बरस रहा था, तब PFI के सदस्य भी सीरिया में इस्लामिक स्टेट के जिहाद में शामिल होने के लिए सीरिया रवाना हो चुके हैं। इनमें दो PFI के सदस्य सीरिया में जेहाद के दौरान मारे गए।

केरल पुलिस को साल 2015 में पता चला कि केरल से सीरिया जाकर ISIS के लिए जिहाद करने वाले अधिकांश युवाओं के PFI से कनेक्शन हैं। इस आधार पर केरल पुलिस ने छानबीन शुरू की और केंद्रीय गृहमंत्रालय को सूचित किया।

PFI के डिवीजनल अध्यक्ष मोहम्मद सीर उर्फ अबू सफवान के साथ मिलकर हमजा नाम का शख्स केरल के युवाओं का ब्रेनवॉश कर उन्हें सीरिया भेजता था। इनमें अब्दुल मनाफ और अबू सफवान केरल से सऊदी अरब, मलेशिया और तुर्की होते हुए सीरिया पहुँच गए और अंतत: लड़ाई के दौरान मारे गए।

PFI से जुड़े केरल के कई लोग भारत से निकलकर तुर्की तक पहुँचने में कामयाब रहे। वहीं, भारत छोड़ने से पहले कई युवाओं को सुरक्षा एजेंसियों ने दबोच लिया और उन्हें रिहैबिली सेंटर में भर्ती कराया। तुर्की से भी कई सदस्यों को भारत लाया गया और उनका पुनर्वास कराया गया। सररकार ने ऐसे कम-से-कम 17 युवाओं की पहचान की थी, जो सीरिया जाने वाले थे।

ISIS के साथ मिलकर सरकार के खिलाफ हिंसक विरोध

दक्षिण के राज्य में 15 युवाओं का एक ऐसा मॉड्यूल का पता चला, जो हथियार और विस्फोटक के जरिए भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने की कोशिश में लगा हुआ था। वहीं, ‘अंसार-उल खिलाफा केएल’ नाम का एक मॉड्यूल युवाओं को ISIS के लिए भर्ती अभियान चला रहा था।

इस मामले में साल 2016 में पाँच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज उनके खिलाफ तलाशी अभियान एवं जाँच शुरू की गई। पूछताछ के दौरान पता चला कि सोशल मीडिया के विभिन्न चैनलों के माध्यमों से ये पाँचों देश के भीतर और विदेशों में कई लोगों के साथ संपर्क में थे। ये ISIS की विचारधारा को को फैलाकर युवाओं को लुभाने का काम करते थे।

पता चला कि इन लोगों ने यहूदियों और अहमदिया समुदाय के साथ-साथ बड़े नेताओं और हाईकोर्ट के जजों एवं वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर भी हमले की योजना बनाई थी। इस मॉड्यूल में पकड़े गए कई लोगों के संबंध PFI से थे।

कन्नूर ISIS मामला

केरल में कई मॉड्यूल का पता चलने और वहाँ के युवाओं के सीरिया जाकर इस्लामिक स्टेट के लिए जेहाद करने के बाद दिल्ली पुलिस ने ISIS के मामलों की जाँच शुरू की थी। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को एक दिन सूचना मिली की केरल के कन्नूर का रहने वाला शाहजहाँ दिल्ली आने वाला है। इसके पहले वह तुर्की-सीरिया भी जा चुका है।

वहाँ वह ISIS की आतंकी गतिविधियों में भाग लेने के लिए गया था और उसे वहाँ वापस भेजा गया था। इस दौरान पुलिस को पता चला कि वह मोहम्मद इस्लाईल नाम से एक फर्जी पासपोर्ट बनवाकर फिर से सीरिया जाने की कोशिश कर रहा था और इसमें वह सफल भी रहा।

इसके बाद उसे एक अन्य आरोपित अब्दुल रज्जाक कुनहिल के साथ उसे तुर्की से वापस भेज दिया गया। यह जुलाई 2017 था। उसी साल फरवरी में उसे तुर्की से वापस भेजा गया। वह बार बार सीरिया जाकर ISIS के लिए जिहाद करना चाहता था।

जाँच में पता चला कि साल 2006 में शाहजहाँ ने नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट (NDF) ज्वॉइन किया था, जो उसी साल कई समान विचारधारा वाले इस्लामिक संगठनों के विलय के बाद पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) हो गया था।

वह PFI की सभी सभाओं में भाग लेने जाता था। वहाँ लोगों को बताया जाता था कि भारत में काफिरों द्वारा मुस्लिमों को प्रताड़ित किया जा रहा है। इसके बाद वल्लापतट्टनम के अध्यक्ष मोहम्मद समीर ने उसे ISIS विचारधारा की ओर मोड़ा और उसे कुरान एवं हदीस के अनुसार जिहाद करने के लिए हिजरा करने को कहा।

मोहम्मद समीर पहले सीरिया पहुँच चुका था। इसके बाद शाहजहाँ अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ मलेशिया पहुँचा। वहाँ उसे राशिद मिला। राशिद के साथ वह ईरान पहुँचा। ईरान में उसे साजिल एवं उसका परिवार और मिडलाज मिला। इसके बाद वे तुर्की पहुँचे। वहाँ अब्दुल मनाफ से मिले।

फरवरी 2017 में जब शाहजहाँ और मुनाफ सीरिया जाने के लिए बॉर्डर क्रॉस कर रहे थे, तभी तुर्की के अधिकारियों ने इन्हें पकड़ लिया और वापस भारत भेज दिया। हालाँकि, इस दौरान मुनाफ बॉर्डर पार करने में सफल रहा, जो बाद में मारा भी गया।

इस तरफ देश में PFI ना सिर्फ समाज विरोधी गतिविधियों में शामिल था, बल्कि खतरनाक आतंकी संगठन ISIS के साथ मिलकर भारत में भी जेहाद फैलाने की कोशिश कर रहा था। PFI ने इसके लिए एक विंग और यूनिफॉर्म तो बनाया और उसे ट्रेनिंग भी थी। इसके अलावा, डर फैलाने के लिए जो भी हत्या करते थे, वे IS के स्टाइल में ही करते थे।

केरल में 2 हिरोइन के साथ भीड़ ने की छेड़छाड़: मॉल में कर रही थीं फिल्म का प्रोमोशन, वीडियो हुआ वायरल

मलयालम एक्ट्रेस सानिया अय्यप्पन (Saniya Iyappan) और ग्रेस एंटनी (Grace Antony) ने सोशल मीडिया पर चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि केरल के कोझीकोड जिले में स्थित एक मॉल में वह अपनी अपकमिंग फिल्म ‘सैटरडे नाइट’ के प्रमोशन के लिए पहुँची थीं। यहाँ भीड़ का फायदा उठाकर उनके और साथी एक्ट्रेस ग्रेस एंटनी के साथ बदसलूकी की गई।

इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है। यह वीडियो आज (28 सितंबर 2022) सुबह से वायरल हो रहा है, जिसमें सानिया एक शख्स को थप्पड़ मारती हुई दिखाई दे रही हैं। वीडियो वायरल होने के बाद मलयालम फिल्मों की फेमस अभिनेत्रियों ने इंस्टाग्राम पर अपने साथ हुए सेक्शुअल हैरेसमेंट के बारे में लिखा है।

सानिया ने अपनी पोस्ट में लिखा, “मैं और फिल्म की टीम हमारी अपकमिंग फिल्म ‘सैटरडे नाइट’ के प्रमोशन के लिए कालीकट के एक मॉल में पहुँची थी। कालीकट में सभी जगहों पर प्रमोशन इवेंट अच्छे से हुए। मुझे इतना प्यार देने के लिए मैं आप लोगों का शुक्रिया अदा करना चाहती हूँ। इस इवेंट के दौरान मॉल में बहुत भीड़ थी और सिक्योरिटी गार्ड भीड़ को संभाल नहीं पा रहे थे।”

सानिया ने आगे लिखा, “इवेंट के बाद मैं और मेरी सहयोगी वापस जा रहे थे। इसी दौरान एक लड़के ने मेरी सहयोगी से बदसलूकी की। भीड़ की वजह से मेरी साथी उस लड़के को न तो देख पाई और न ही कोई रिएक्शन दे सकी। इसके बाद मेरे साथ भी इसी तरह की हरकत हुई।”

सानिया अंत में लिखती हैं, “मैं यह देखकर शॉक्ड हो गई और मैंने जो रिएक्शन दिया, उसे आप वीडियो में देख सकते हैं। मैं ये दुआ करती हूँ कि किसी को भी अपनी लाइफ में इस तरह के ट्रॉमा का सामना न करना पड़े। उम्मीद है कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा की इस घटना के बाद इन लोगों के खिलाफ एक्शन लिया जाएगा।”

छेड़खानी की शिकार दूसरी एक्ट्रेस ग्रेस एंटनी (Grace Antony) ने भी ऐसी ही एक पोस्ट मलयालम में अपने सोशल मीडिया पर लिखी। सानिया अय्यप्पन (Saniya Iyappan) ने ग्रेस की इस पोस्ट को भी शेयर किया है।

वीडियो सामने आने के बाद केरल पुलिस का कहना है कि जाँच शुरू कर दी गई है। साथ ही दोषियों की पहचान कर उनका पता लगाने का भी प्रयास किया जा रहा है। इस घटना के बाद पूरी फिल्म इंडस्ट्री दोनों के सपोर्ट में आ गई है और दोषियों को सजा देने की माँग कर रही है। फिल्म ‘कुडुक्कू 2025’ के निर्देशक ने कहा कि ऐसे अपराधियों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए।

गरीबों को 3 महीने और मिलेगा फ्री राशन, केंद्रीय कर्मचारियों का 4% बढ़ा DA: पर्व-त्योहारों से पहले मोदी सरकार का फैसला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत मिलने वाले फ्री राशन की स्कीम की अवधि और बढ़ा दी है। यह समय सीमा 2 दिन बाद 30 सितम्बर 2022 को समाप्त हो रही थी, जो अब दिसम्बर 2022 तक जारी रहेगी।

यह निर्णय आज बुधवार (28 सितम्बर 2022) को हुई बैठक में लिया गया। यह योजना लॉकडाउन के दौरान मार्च 2020 में लॉन्च हुई थी। इस योजना से लगभग 80 करोड़ लोग लाभ पाते हैं। इस निर्णय की पुष्टि केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने की।

अपने ट्वीट में पीयूष गोयल ने केंद्र सरकार के इस कदम को ‘त्यौहार का उपहार’ कहा है और प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद दिया है। इस योजना के तहत 80 करोड़ नागरिकों को हर माह 5 Kg अनाज फ्री दिया जाता है।

योजना के विस्तर के बाद अब अगले 3 माह में 122 लाख मीट्रिक टन अनाज और बाँटा जाएगा। दिसंबर 2022 तक इस योजना के 28 माह पूरे हो जाएँगे। तब तक कुल बँटे अनाज की अनुमानित मात्रा 1121 लाख मीट्रिक टन होगी, जिस पर लगभग 3.91 लाख करोड़ रुपए का खर्च आएगा।

केंद्रीय कर्मचरियों के DA में 4% बढ़ोत्तरी

पर्व-त्यौहारों के इस मौसम में कैबिनेट की बैठक में केंद्रीय कर्मचरियों को भी बड़ा तोहफा मिला है। केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों के DA में 4% की बढ़ोत्तरी की है। इस बढ़ोत्तरी का लाभ 1 करोड़ से ज्यादा कर्मचारियों को मिलेगा।

इस बढ़ोत्तरी के बाद अब केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 38% हो चुका है। यह बढ़ोत्तरी जुलाई 2022 से लागू मानी जाएगी। सरकारी आदेश के अनुसार कर्मचारियों का बकाया भुगतान अगले माह के वेतन के साथ दे दिया जाएगा।

फिल्म प्रोडक्शन में उतरीं मलाला यूसुफजई, मुस्लिम लेखकों-निर्देशकों को देंगी मौका: लोग पूछ रहे – ईरान की महिलाओं के साथ सड़क पर कब उतरोगी?

नोबेल पुरस्कार विजेता मलाल यूसुफजई ने अब फिल्म प्रोडक्शन की दुनिया में कदम रखा है। इससे पहले उन्होंने एप्पल टीवी के साथ 4 ड्रामा सीरीज के लिए डील साइन की थी, वहीं अब ‘Extracurricular’ ने ‘Indie Studio A24’ के साथ एक फिल्म बनाने के लिए करार किया है। इसमें दक्षिण कोरिया के जेजु द्वीप पर रहने वाली मछलीपालक महलाओं के समुदाय ‘Haenyeo’ पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री भी शामिल हैं।

हालाँकि, उधर मलाला यूसुफजई से लोग ईरान की महिलाओं के साथ सड़क पर उतर कर हिजाब का विरोध करने की माँग कर रहे हैं। मलाला यूसुफजई ने एक ट्वीट कर कहा था कि उन्हें बाल ढकने के लिए कहा जाएगा तब भी वो प्रदर्शन करेंगी और हिजाब हटाने के लिए कहा जाएगा तब भी विरोध करेंगी। ईरान में हिजाब न पहनने के कारण वहाँ की पुलिस ने महसा अमिनी नामक महिला की हत्या कर दी, जिसके बाद वहाँ बड़ी संख्या में महिलाएँ सड़क पर उतर कर विरोध प्रदर्शन कर ही हैं।

उधर इस मामले में मलाला यूसुफजई के ट्वीट को ‘खानापूर्ति’ बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि सॉइल मीडिया पर ट्रॉलिंग झेलने के बाद उन्होंने एक ट्वीट कर के इतिश्री कर ली। ‘इंडिया टुडे’ की पत्रकार ज्योति गुप्ता ने ‘iChowk’ पर प्रकाशित एक लेख में याद दिलाया है कि कैसे कर्नाटक में हिजाब के समर्थन में मुस्लिम छात्राओं के प्रदर्शन के समर्थन में मलाला मुखर थीं। उन्होंने लिखा कि मलाला यूसुफजई का बयान इससे नरम नहीं हो सकता था और इस्लाम में हिजाब अनिवार्य है, चॉइस का मामला नहीं है।

जहाँ तक मलाला यूसुफजई की बात है, वो अब फिल्म निर्माण में व्यस्त हो गई हैं। उनकी पहली फिल्म Disorientation नामक पुस्तक पे आधारित होगी, जो कि एक सटायर है। इसमें एक छात्र को एक युवा कवि के ऊपर थीसिस लिखते हुए दिखाया जाएगा। इसके अलावा एक अन्य पुस्तक Fifty Words for Rain पर वो दूसरी फिल्म बनाएँगी, जो जापान में दूसरे विश्व युद्ध के समय की कहानी है। मलाला यूसुफजई ने कहा कि वो मुस्लिम लेखकों, निर्देशकों को आगे लाने और महिलाओं के ‘विविध रंग दिखाने’ के लिए फिल्म प्रोडक्शन में उतरी हैं

लोगों में डर पैदा करने के लिए RSS कार्यकर्ता से लेकर हिंदू नेता तक हत्या: मर्डर से पहले PFI-SDPI के लोग रचते थे साजिश, बताते थे ‘जिहाद’

भारत सरकार ने आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के कारण पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) पर फिलहाल पाँच साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। इसके पहले NIA और राज्य ATS ने 11 राज्यों में दो बार छापेमारी कर 350 से अधिक PFI के सदस्यों को हिरासत में लिया है।

PFI का इतिहास हिंसा में सना रहा है। कई हिंसक मुस्लिमों संगठनों के विलय के बाद साल 2006 में PFI अस्तित्व में आया था। इसके बाद से यह सामूहिक हत्या, टारगेटेड मर्डर और दंगे फैलाने जैसे कामों में संलिप्त करा। इतना ही नहीं, PFI पर लव जिहाद को बढ़ावा देने, महिलाओं का ब्रेनवॉश करने और धर्मांतरण कराने का भी आरोप है।

पॉपुलर फ्रंट में पेंटर से लेकर मजदूर तक, वकील से लेकर चूड़ी बेचने वाले और बेकरी बनाने वाले तक नेता है। इसका काम भी अलग-अलग है, लेकिन मकसद एक है- भारत को इस्लामी राज्य बनाना और इसके लिए मुस्लिम समाज के लोगों को कट्टर बनाना। PFI सदस्यों के कुछ कारनामे देश भर में चर्चा के विषय बने हैं।

तमिलनाडु में हिंदू संगठन के नेता शशिकुमार की हत्या

शशिकुमार कर्नाटक में हिंदू संगठन ‘हिंदू मुन्नानी’ के प्रवक्ता थे। शशिकुमार 22 सितंबर 2016 को तमिलनाडु के कोयंबटूर में अपनी स्कूटर के घर लौट रहे थे। उस दौरान दो बाइकसवारों ने उनका पीछा किया और बिना किसी कारण के चक्रविनायक मंदिर के पास उन पर हथियारों से घातक हमले किए। इस हमले में उन्हें गंभीर रूप से चोट लगी और अंतत: अस्पताल में उनकी मौत हो गई।

जाँच के दौरान पता चला कि इस हत्या के पीछे PFI का हाथ है। इस तरह की हत्याओं को अंजाम देकर PFI समाज के खास वर्ग में दहशत फैलाना चाहता था और इसके साथ ही अपने आधार को भी बढ़़ाना चाहता था। इसके लिए PFI ने शशिकुमार को चुना, क्योंकि शशिकुमार एक हिंदू संगठन के प्रवक्ता थे और उनकी काफी ख्याति थी।

शशिकुमार कोयंबटूर में गणेश चतुर्थी पर बड़े पैमाने पर गणेश पूजा का आयोजन करते थे। इसलिए एक संदेश देने के लिए PFI के सदस्य सद्दीम हुसैन, सुबैर, मुबारक और मोहम्मद रफीक ने हत्या के लिए विनायक मंदिर का स्थान चुना।

हत्या से ठीक एक साल पहले शशिकुमार ने कोयंबटूर के राजस्व कार्यालय के नजदीक लहराए गए PFI के राजनीतिक विंग SDPI के झंडे को हटवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके बाद PFI ने उनकी हत्या का निर्णय ले लिया।

धर्मांतरण का विरोध करने पर रामलिंगम हत्या

तमिलनाडु के तंजावुर जिले में 5 फरवरी 2019 को एक स्थानीय नेता 40 वर्षीय रामलिंगम को PFI के सदस्यों ने मार दिया। रामलिंगम को पता चला था कि PFI दावा के सदस्य उनके निकटवर्ती गाँव के गरीबों का इस्लाम में जबरन धर्मांतरण करा रहे हैं। रामलिंगम ने इसका खुलकर विरोध किया।

तिरुभुवनम के हिंदू बहुल गाँव में गरीबों का धर्मांतरण करा रहे PFI दावा के एक सदस्य की नमाज टोपी लेकर रामलिंगम ने खुद पहन लिया और उसके माथे पर विभूति लगा दिया। इस दौरान रामलिंगम ने कहा कि सभी धर्म एक हैं और किसी में धर्मांतरण करने की जरूरत नहीं है। इसका वीडियो भी खूब वायरल हुआ था।

उसी रात रामलिंगम अपने बेटे के साथ घर लौट रहे थे। उस दौरान 4 अज्ञात लोगों ने उन पर अवैध हथियारों से हमला कर दिया। इस हमले में उनकी कोहनी में गहरे घाव लगे और लगातार खून बहने के कारण उन्होंने अस्पताल में दम तोड़ दिया।

जाँच में पता चला कि PFI दावा के सदस्य के साथ रामलिंगम की बहस को लेकर SDPI के ऑफिस में तंजावुर के जिला अध्यक्ष मोहम्मद अली जिन्ना से इसकी चर्चा की गई। इसके बाद वहाँ रामलिंगम के दोनों हाथों को काटने के लिए कहा गया।

इसके बाद चार आरोपितों ने रामलिंगम पर हमला कर उनके दोनों काटने की कोशिश की। इस हमले में लगे घाव के कारण रामलिंगम के शरीर से अधिक खून बह जाने के कारण उनकी मौत हो गई। इस मामले में NIA ने 18 लोगों को आरोपित बनाया, जिनमें जिन्ना भी शामिल है।

RSS नेता रुद्रेश की हत्या

कर्नाटक के बेंगलुरु में PFI के सदस्यों ने RSS के कार्यकर्ता रुद्रेश की सिर्फ इसलिए हत्या कर दी, ताकि लोगों में दहशत फैलाई जा सके। 16 अक्टूबर 2016 को PFI के 5 सदस्यों ने रुद्रेश को मौत के घाट उतार दिया। रुद्रेश पर हमला करते हुए मुस्लिम कट्टरपंथी ‘छिनाल के काफिर’ चिल्लाए और उन पर घातक हथियारों पर कई वार कर दिए।

जाँच में पता कि पाँचों हमलावर PFI के राजनीतिक विंग SDPI के सदस्य हैं। हत्या से पहले आरोपितों ने कर्नाटक के छोटा चारमीनार मस्जिद के पास इसके लिए साजिश रची थी। इस हमले का असली सूत्रधार PFI का बेेंगलुरु जिला अध्यक्ष असिम शेरिफ था। असिम ने सबका ब्रेनवॉश करते हुए कहा था कि RSS के लोगों की हत्या करना, उनका धार्मिक कर्तव्य है।

जाँच में यह बात भी सामने आई कि उत्तर प्रदेश के मेरठ, मुजफ्फरनगर, देओबंद से भी इनका संपर्क रहा था। वे इन जगहों पर मजहबी शिक्षा के लिए आते रहे थे।

ईशनिंदा के नाम पर हत्या

साल 2020 में PFI ने सदस्यों ने कथित ईशनिंदा के नाम पर बेंगलुरु के थाने पर हमला कर उसे नष्ट कर दिया था। दरअसल, फिरदौस पाशा नाम के एक शख्स ने थाने में शिकायत दी कि कॉन्ग्रेस विधायक के भतीजे नवीन ने पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है।

इस की जानकारी मिलते ही थाने के बाहर एक हजार से अधिक मुस्लिम इकट्ठा हो गए। इस दौरान पुलिस वालों को मारने और थाने को जलाने के लिए नारे लगाए जाते रहे। बाद में भीड़ ने थाने पर हमला कर दिया और जब तक पुलिस लाठी चार्ज करती, तब तक भीड़ बड़ा नुकसान कर चुकी थी।

मामले में पता चला कि PFI से जुड़े SDPI के जिला अध्यक्ष मोहम्मद शेरिफ और मुज्जमिल पाशा ने लोगों को हिंसा के लिए उकसाया था। इन लोगों के उकसाने के कारण हजार से अधिक की भीड़ थाने पर हंगामा करने लगी।

इस तरह PFI ने देश में आतंक फैलाने के लिए ना सिर्फ लोगों का ब्रेनवॉश किया, बल्कि सुनियोजित तरीके से हत्या कर लोगों में अपने नाम का खौफ पैदा करने की कोशिश की। ऊपर के सारे मामलों में PFI की सक्रिय भूमिका मिली है और इन सारे मामलों की जाँच NIA ने की है।

‘मन की अयोध्या तब तक सूनी, जब तक राम न आए’: PM मोदी ने याद किया लता दीदी का भजन, अयोध्या के भव्य ‘लता मंगेशकर चौक’ पर गूँजेंगे सुर साम्राज्ञी के भजन

सुर-साम्राज्ञी लता मंगेशकर की जयंती के अवसर पर बुधवार (28 सितंबर, 2022) को अयोध्या में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनके नाम पर एक चौक का लोकार्पण किया, जिस कार्यक्रम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संबोधित किया। 8.50 करोड़ रुपए की लागत से बने इस चौक पर लता मंगेशकर के भाजन गूँजेंगे। 14 टन की वीणा वहाँ स्थापित की गई है। इस पर माँ सरस्वती के चित्र हैं। लता मंगेशकर का जीवन भी यहाँ उकेरा गया है

इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि लता मंगेशकर माँ सरस्वती की एक ऐसी ही साधिका थीं, जिन्होंने पूरे विश्व को अपने दिव्य स्वरों से अभिभूत कर दिया। उन्होंने कहा कि अयोध्या में लता मंगेशकर चौक पर स्थापित की गई माँ सरस्वती की विशाल वीणा संगीत की साधना का प्रतीक बनेगी। प्रधानमंत्री ने इसे अभिनव प्रयास बताते हुए सीएम योगी की सरकार, अयोध्या विकास प्राधिकरण और अयोध्या की जनता को धन्यवाद दिया।

उन्होंने कहा कि लता दीदी के साथ जुड़ी मेरी कितनी ही यादें हैं, कितनी ही भावुक और स्नेहिल स्मृतियाँ हैं। उन्होंने बताया कि जब भी उनकी लता दीदी से बात होती, उनकी वाणी की युग-परिचित मिठास हर बार उन्हें मंत्र-मुग्ध कर देती थी। बकौल पीएम मोदी, दीदी अक्सर उनसे कहती थी कि मनुष्य उम्र से नहीं, कर्म से बड़ा होता है। पीएम मोदी ने बताया कि जब अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए भूमिपूजन संपन्न हुआ था, तो उनके पास लता दीदी का फोन आया था।

प्रधानमंत्री ने बताया, “वो बहुत खुश थीं, आनंद में थी। उन्हें विश्वास नहीं हो रहा था कि आखिरकार राम मंदिर का निर्माण शुरू हो रहा है। आज मुझे लता दीदी का गाया वो भजन भी याद आ रहा है, ‘मन की अयोध्या तब तक सूनी, जब तक राम ना आए’। अयोध्या के भव्य मंदिर में श्रीराम आने वाले हैं और उससे पहले करोड़ों लोगों में राम नाम की प्राण प्रतिष्ठा करने वाली लता दीदी का नाम अयोध्या शहर के साथ हमेशा के लिए स्थापित हो गया है।”

पीएम मोदी ने कहा कि प्रभु राम तो हमारी सभ्यता के प्रतीक पुरुष हैं। राम हमारी नैतिकता के, हमारे मूल्यों, हमारी मर्यादा, हमारे कर्तव्य के जीवंत आदर्श हैं। उन्होंने कहा कि अयोध्या से लेकर रामेश्वरम तक, राम भारत के कण-कण में समाये हुए हैं। प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि लता दीदी के नाम पर बना ये चौक, हमारे देश में कला जगत से जुड़े लोगों के लिए भी प्रेरणा स्थली की तरह कार्य करेगा और बताएगा कि भारत की जड़ों से जुड़े रहकर, आधुनिकता की ओर बढ़ते हुए, भारत की कला और संस्कृति को विश्व के कोने-कोने तक पहुँचाना – ये भी हमारा कर्तव्य है।

पीएम मोदी ने याद दिलाया कि भारत की हजारों वर्ष पुरानी विरासत पर गर्व करते हुए, भारत की संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुँचाना, ये भी हमारा दायित्व है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि श्री अयोध्या जी दुनिया का सबसे सुंदर और वैभवशाली नगर बनेगा, इसमें कोई संदेह किसी को नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रभु श्री राम के सर्वाधिक भजन गाने वाली लता दीदी ने अपना पूरा जीवन कला व संगीत जगत को नई ऊंचाई प्रदान करने हेतु समर्पित किया।

सीएम योगी ने कहा, “लता मंगेशकर ने अपनी संगीत की पवित्र साधना को वंदनीय बनाया। आज श्री राम के धाम में उनके नाम पर निर्मित पहले स्मारक को लोकार्पित कर हार्दिक प्रसन्नता हुई है। अयोध्या के हर चौराहे को भव्यता देने के लिए उनका नामकरण पूज्य संतों के नाम पर किया जाएगा। सुश्री लता मंगेशकर जी ने भगवान श्रीराम, श्रीकृष्ण व राष्ट्रभक्ति से संबंधित गीतों को एक नई ऊँचाई देकर संगीत की अपनी पवित्र साधना को प्रत्येक भारतीय के लिए वंदनीय बनाया है।”

‘UPA के समय ही IB ने किया था आगाह, फिर भी PFI को बढ़ने दिया गया’: पूर्व मेजर जनरल का बड़ा खुलासा, कहा – इसी के दबाव में नीतीश ने छोड़ा BJP का साथ

केंद्र की मोदी सरकार ने 27 सितम्बर, 2022 (मंगलवार) को पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) पर देशविरोधी गतिविधियों में संलिप्त होने के कारण प्रतिबंध लगा दिया। उससे पहले देश भर में हुई छापेमारी में NIA, ATS और पुलिस बल ने सामूहिक रूप से PFI के कई सदस्यों को गिरफ्तार किया था। ऑपइंडिया ने इस मुद्दे पर प्रसिद्ध रक्षा विशेषज्ञ मेजर जनरल एस पी सिन्हा (रिटायर्ड) से बात की।

ऑपइंडिया से बात करते हुए मेजर जनरल एस पी सिन्हा (रिटायर्ड) ने कहा कि PFI की संदिग्ध हरकतों के बारे में IB ने साल 2011 में दिल्ली के विज्ञान भवन में सरकार को बाकायदा प्रेजेंटेशन दे कर आगाह किया था। सिन्हा ने दावा किया कि जानबूझ कर लगभग 11 साल इन संगठन को सिर्फ वोटबैंक के लिए पनपने दिया गया और अब ये बहुत बड़ा संगठन बन चुका था जिसकी जड़ें विदेश तक में जम चुकी थीं।

भारतीय सेना के समांतर खड़ी कर रहा था अपनी सेना

मेजर जनरल सिन्हा का दावा है कि जिस प्रकार से भारतीय फ़ौज में कई कैडर और बटालियन आदि होती हैं, उसी प्रकार PFI भी अपने संगठन को खड़ा कर रहा था। उन्होंने बताया कि PFI में भर्ती से ले का लड़ने वालों का पूरा पैटर्न सेना की नकल जैसा था। सिन्हा ने दावा किया कि इसे खड़ा करने में बहुत व्यापक फंडिंग हुई है, जिसमें देश और विदेश के लोग शामिल हैं।

नीतीश ने PFI के दबाव में छोड़ा BJP का साथ

खुद को मूलतः बिहार का बताते हुए मेजर जनरल सिन्हा ने दावा किया कि नीतीश कुमार के अचानक ही भाजपा का साथ छोड़ कर RJD से गठबंधन कर लेने के पीछे PFI का ही दबाव था। उनकी मानें तो जब से फुलवारी शरीफ के अंदर सुरक्षा एजेंसियों ने PFI के ‘मिशन 2047’ का पर्दाफाश किया था, तभी से नीतीश कुमार पर भाजपा का साथ छोड़ने के लिए काफी दबाव था। सिन्हा के मुताबिक, बिहार में हुई छापेमारी से ही PFI को लग गया था कि अगर कुछ नहीं किया गया तो पूरे देश में उसका नेटवर्क खतरे में पड़ जाएगा।

अपने दावे को पुख्ता करने के लिए नीतीश कुमार पर सवाल खड़े करते हुए मेजर जनरल सिन्हा ने सवाल किया कि बिहार के मुख्यमंत्री पाकितान की यात्रा क्यों करते हैं? उन्होंने कहा कि बिहार तो पाकिस्तान का बॉर्डर नहीं है और न ही नीतीश का ऐसा पद है कि उनका पाकिस्तान जाना जरूरी है।

PFI जैसे संगठन ही हैं ढाई मोर्चा

पूर्व CDS दिवंगत जनरल विपिन रावत के ‘ढाई मोर्चे पर लड़ाई’ वाले बयान की याद दिलाते हुए जनरल एस पी सिन्हा ने कहा कि यही PFI जैसे संगठन ही चीन और पाकिस्तान के बाद वो आधा मोर्चे हैं जो देश के अंदर ही देश के दुश्मन हैं। उन्होंने बताया कि अगर वर्तमान हालत की बात की जाए तो अभी देश इस आधे मोर्चे से लड़ने के लिए तैयार नहीं हो पाया है।

हामिद अंसारी का पद भारत माँ से बड़ा नहीं

कभी हामिद अंसारी के PFI के मंच पर दिखने के सवाल पर मेजर जनरल सिन्हा ने कहा कि वो कोई भी हों या उनका पद कितना भी बड़ा हो, लेकिन कोई भी भारत माता के कद से बड़ा नहीं हो सकता। हामिद अंसारी की जाँच की माँग करते हुए जनरल सिन्हा ने कहा कि यदि वो दोषी पाए जाएँ तो उन्हें कठोरतम दंड दिया जाए।

मेजर जनरल सिन्हा का मानना है कि देश के अंदर ऐसे सगंठन को फलने और फूलने के लिए कुछ तथाकथित सेक्युलर और वोटबैंक की लालच वाले नेता ही जिम्मेदार हैं। उन्होंने मनमोहन सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी सरकार में वक्फ बोर्ड जो जो खाद-पानी मिली है, उसी का प्रतिफल ऐसे संगठनों का उभार है।