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मंदिर के गेट का ताला तोड़ा, फिर बजरंग बली की मूर्ति तोड़ी: CCTV से पकड़ा गया रमीज अहमद, ‘मानसिक रोगी’ बता रही रही रांची पुलिस

झारखंड की राजधानी रांची के एक मंदिर का ताला तोड़कर बजरंग बली की मूर्ति को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। सीसीटीवी की जाँच से रमीज अहमद पकड़ा गया। पुलिस उसे ‘मानसिक रोगी’ बता रही है। लेकिन स्थानीय लोग इस दावे पर सवाल उठा रहे हैं।

घटना मंगलवार (27 सितम्बर 2022) रात की है। इसकी जानकारी स्थानीय लोगों को अगली सुबह हुई। लोगों के आक्रोश को देखते हुए इलाके में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला हिन्दपीढ़ी थाना क्षेत्र का है। यहाँ मेन रोड पर स्थित हनुमान मंदिर में बुधवार की सुबह विक्की विश्वकर्मा साफ-सफाई के लिए पहुँचा तो मंदिर का ताला टूटा हुआ था। अंदर जाकर देखा तो मंदिर में स्थापित हनुमान मूर्ति का नाक, माथा और गदा तोड़ दिया गया था। इसके अलावा मंदिर के अन्य सभी सामान सही सलामत थे। दान पेटी का पैसा भी सुरक्षित था।

स्थानीय लोगों ने आज तक से बात करते हुए बताया कि आरोपित को भले ही पुलिस द्वारा मानसिक रोगी बताया जा रहा हो लेकिन उसने चांदी के मुकुट और दानपेटी के पैसे को छोड़ कर सिर्फ मूर्ति को टारगेट क्यों किया।

इस घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोग मंदिर में जुटे। प्रदर्शन के बाद पुलिस मौके पर पहुँची। CCTV फुटेज की जाँच हुई। इसके आधार पर रमीज अहमद को गिरफ्तार किया गया। हिंदपीढ़ी के SHO ने रमीज अहमद को मानसिक रोगी बताया है।

तनाव को देखते हुए शहर में फ्लैग मार्च की भी सूचना है। भाजपा ने इस घटना के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार बताया है। मंदिर का शुद्धिकरण कराने की घोषणा भी हुई है।

घटना की रात लगे थे मज़हबी नारे

रमीज को मानसिक रोगी बताए जाने के पुलिसिया दावे से स्थानीय लोग सहमत नहीं हैं। स्थानीय लोगों ने आज तक से बात करते हुए कहा जिसे पुलिस मानसिक रोगी बता रही है उसने चाँदी के मुकुट और दान पेटी के पैसे को छोड़ कर सिर्फ मूर्ति को टारगेट क्यों किया। एक अन्य स्थानीय व्यक्ति का दावा है कि मूर्ति तोड़े जाने की रात वे दुर्गा पूजा के लेकर चर्चा कर रहे थे। इसी दौरान कुछ लोगों ने मजहबी नारे लगाकर उन्हें भड़काने की कोशिश की थी।

गौरतलब है कि इसी नवरात्रि हैदराबाद में बुर्का पहन कर 2 मुस्लिम महिलाओं ने एक पंडाल में घुस कर माँ दुर्गा की मूर्तियों को क्षतिग्रस्त करने का प्रयास किया था। मौके पर मौजूद श्रद्धालुओं ने दोनों को पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया था। गिरफ्तारी के बाद इन दोनों महिलाओं को भी मानसिक रोगी बताया जाने लगा था।

दीपक त्यागी की सिर कटी लाश, हत्या पशुओं की गर्दन काटने वाले छूरे से: ‘दूसरे समुदाय की लड़की से प्रेम’ एंगल को जाँच रही UP पुलिस

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में दीपक त्यागी नाम के एक युवक की गला काट कर हत्या कर दी गई है। बताया जा रहा है कि मृतक का दूसरे समुदाय की एक लड़की से प्रेम प्रसंग चल रहा था। इस बात की आशंका जताई जा रही है कि हत्या इसी प्रेम प्रसंग की वजह से की गई है।

यूपी पुलिस ने अब तक 6 संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। घटना की रिपोर्ट अज्ञात आरोपितों के खिलाफ दर्ज करवाई गई है। दीपक का सिर कटा शव मंलगवार (27 सितम्बर 2022) को बरामद हुआ है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना थानाक्षेत्र परीक्षितगढ़ के गाँव खजूरी की है। यहाँ के रहने वाले दीपक त्यागी रविवार (25 सितम्बर 2022) को अपने नौकर के साथ खेतों में जानवरों के लिए चारा लाने गए थे। बताया जा रहा है कि चारा लेकर घर आने के बाद दीपक अचानक ही गायब हो गए। परिजनों ने उनकी काफी तलाश की लेकिन उसका कुछ भी पता नहीं चला।

बताया जा रहा है कि मंगलवार (27 सितम्बर 2022) को खेतों में काम करने जा रहे मुनकाद और शाहरुख़ नाम के ग्रामीणों ने गाँव की सड़क पर खून के छींटे देखे। दोनों खून की बूंदों के सहारे आगे बढ़े तो लगभग 20 मीटर दूर गन्ने के खेत में एक व्यक्ति की सिर कटी लाश थी। गाँव में जानकारी फैल जाने के बाद दीपक त्यागी के परिजनों ने उसकी पहचान की। दीपक 6 भाई-बहनों में सबसे छोटे थे।

दीपक की हत्या की खबर सुनते ही गाँव वाले भड़क गए। ग्रामीणों ने दीपक के सिर को बरामद करने की माँग के साथ सड़क पर जाम लगाए दिया। मौके पर पहुँचे SSP रोहित साजवान ने कटे सिर की जल्द बरामदगी और घटना के दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया। प्रदेश सरकार के सिंचाई राज्यमंत्री दिनेश खटीक के आश्वासन पर ग्रामीणों का गुस्सा शांत हुआ और तब जाकर जाम खुला।

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक जिस लड़की से दीपक का प्रेम संबंध था, वो एक हेयर ड्रेसर की बेटी है। बताया जा रहा है कि पुलिस को दोनों की बातचीत के सबूत मिले हैं। लड़के के घर वालों के मुताबिक उन्होंने दीपक से इस रिश्ते का बहुत विरोध किया था। जानकारी के मुताबिक पुलिस लड़की और उसके परिजनों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।

6 मुस्लिम हिरासत में, दीपक त्यागी की हत्या पशुओं की गर्दन काटने वाले छूरे से

यूपी पुलिस अपनी जाँच में सभी पहलुओं को देख रही है। इसमें एक पहलू यह भी है कि दीपक त्यागी का प्रेम प्रसंग दूसरे समुदाय की एक लड़की (हेयर ड्रेसर की बेटी) से चल रहा था। आपसी रंजिश वाले एंगल पर भी पुलिस काम कर रही है। जाँच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने अहमदपुर बढ़ला गाँव के 6 मुस्लिम युवकों को हिरासत में लिया है, पूछताछ कर रही है। दीपक त्यागी की हत्या पशुओं की गर्दन काटने वाले छूरे से की गई है, इस तथ्य को भी सामने रख लोगों की लिस्ट बना पुलिस छानबीन कर रही है।

दीपक त्यागी के खेत पास के अहमदपुर बढ़ला गाँव से जुड़े हुए हैं। उनके खेतों में काम करने वाले ज्यादातर इसी गाँव से आते थे। इसी कारण से वहां के मुस्लिम लोगों में दीपक का काफी आना-जाना भी था। पुलिस मान रही है कि दीपक हत्याकांड के तार अहमदपुर बढ़ला गाँव से जुड़े हो सकते हैं।

गाँव में तनाव को देखते हुए पुलिस बल को तैनात कर दिया गया है। इस मामले में मेरठ पुलिस का कहना है कि घटना का खुलासा जल्द ही किया जाएगा।

गरबा पंडाल में पहचान छिपाकर घुसे मुस्लिम युवक, हिंदू युवतियों की बना रहे थे वीडियो: इंदौर से अहमदाबाद तक पिटाई

गरबा पंडाल में पहचान छिपाकर मुस्लिम युवकों के घुसने के मामले सामने आए हैं। पकड़े जाने पर गुजरात के अहमदाबाद और मध्य प्रदेश के इंदौर में ऐसे युवकों को लोगों ने पीट दिया। इन पर हिंदू लड़कियों के फोटो-वीडियो बनाने के आरोप हैं।

इंदौर के पंढरीनाथ चौराहे के गरबा पंडाल से बुधवार (28 सितंबर 2022) को पुलिस ने 7 मुस्लिम युवकों को पकड़ा है। ये हिंदू लड़कियों के वीडियो बना रहे थे। वहीं, अहमदाबाद में गरबा पंडाल में घुसे मुस्लिम युवकों को विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल (Bajrang Dal) के कार्यकर्ताओं ने जमकर पीटा। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो वायरल हो रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंदौर के पंढरीनाथ चौराहे के गरबा पंडाल में घुसे मुस्लिम युवकों की हरकतें बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को संदिग्ध लगी। इसके बाद उन पर नजर रखी गई। वे मोबाइल से लड़कियों और महिलाओं के फोटो और वीडियो भी बना रहे थे। शंका होने पर कार्यकर्ताओं ने उनका नाम पूछा और आईडी दिखाने को कहा। सभी युवकों ने अपने नाम गलत बताए। किसी ने अपना नाम संदीप तो किसी ने बबलू बताया और आईडी भी नहीं दिखाई। बाद में सभी के असली नामों की पहचान होने पर उन्हें पुलिस के हवाले कर दिया गया। मुस्लिम युवकों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक धाराओं में केस दर्ज किया गया। इन सभी को बुधवार को कोर्ट में पेश किया गया था। कोर्ट से उन्हें जमानत मिल गई।

बजरंग दल की चेतावनी के बाद भी घुसे पंडाल में

ऑपइंडिया से खास बातचीत में बजरंग दल अहमदाबाद ईस्ट एरिया कोऑर्डिनेटर हिरेन रबारी ने कहा, “हर बार हम सभी को पहले से बता देते हैं कि इस हिंदू त्योहार में कोई गैर-हिंदू प्रवेश न करे। हमने इस साल भी सभी को चेतावनी दी थी। मंगलवार (27 सितंबर 2022) को हम कुछ पंडालों में पहुँचे।” वह कहते हैं, “वहाँ प्रवेश द्वार के सामने खड़े हो गए हम लोगों को ‘लव जिहाद’ के बारे में सतर्क कर रहे थे। हर युवा तिलक लगाकर पंडाल में प्रवेश कर रहे थे। सभी का पहचान पत्र भी देख रहे ताकि कोई भी गैर हिंदू झूठ बोलकर प्रवेश न करे। इसी दौरान कुछ मुस्लिम युवक पहचान छिपाकर पंडाल में घुस गए थे।”

हिरेनभाई ने ऑपइंडिया को बताया कि जब वह एसपी रिंग रोड पर एक पंडाल चेकिंग के लिए पहुँचे तो अंदर गरबा खेल रहे दो युवक उन्हें संदिग्ध लगे, जिसके बाद दोनों को चेतावनी देकर पंडाल से बाहर कर दिया गया।

‘फेक न्यूज़ बंद करो’: UK में हिन्दुओं ने ‘The Guardian’ के दफ्तर के बाहर किया तगड़ा प्रदर्शन, मुस्लिम कट्टरपंथियों को बचा रहा है मीडिया संस्थान

यूके में हिन्दुओं के खिलाफ मुस्लिम भीड़ ने जम कर हिंसा की। अव्वल तो ये कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने पीड़ित हिन्दुओं की आवाज़ उठाने की बजाए उन्हें बदनाम किया और मुस्लिम कट्टरपंथियों को बचाने के लिए पक्षपाती रिपोर्टिंग की। इसमें BBC जैसा मीडिया संस्थान भी शामिल था। अब लेस्टर हिन्दू विरोधी हिंसा में पक्षपाती रिपोर्टिंग को लेकर भारतीयों ने ‘द गार्डियन’ के दफ्तर के बाहर जम कर विरोध प्रदर्शन किया है।

लेस्टर के अलावा बर्मिंघम में भी हिन्दुओं के खिलाफ हिंसा हुई थी। ‘द गार्डियन’ एक ब्रिटिश अख़बार है, जो हिन्दुओं को बदनाम करने में लगा हुआ है। हाल ही में उसने नाजी चिह्न, जो कि ईसाई सिंबल ‘हुक्स क्रॉस’ से आया है, उसे हिन्दू प्रतीक स्वस्तिक बताते हुए इसे हिंसा से जोड़ा। अब दर्जनों प्रदर्शनकारी ‘Hindu Lives Matter’ और ‘Stop Spreading Fake News’ जैसे पोस्टरों के साथ मीडिया संस्थान को आइना दिखाया है।

भारतीयों ने ऐसे पोस्टर भी ले रखे थे, जिसमें बताया गया था कि हिन्दू समाज शांति में यकीन रखता है और ‘द गार्डियन’ उन्हें बदनाम कर के हिन्दुओं के जीवन को खतरे में डालना बंद करे। ‘द गार्डियन’ ने एक ओपिनियन लेख लिख कर ‘हिन्दू राष्ट्रवाद’ की उलटी-सीधी परिभाषा दी थी और इसे यूके हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराया था। मीडिया संस्थान ने न सिर्फ लेस्टर में हिंसा के लिए हिन्दुओं को जिम्मेदार ठहराया, बल्कि हिंदुत्व और ‘दक्षिणपंथी कट्टरवाद’ को एक-दूसरे का पर्यायवाची बता दिया।

यूके स्थित वामपंथी मीडिया आउटलेट ‘द गार्जियन’ की पत्रकार आइना खान ने अब दावा किया था कि लेस्टर में ‘अच्छे ईमान वाले’ लोग हिंदू मंदिर की रखवाली कर रहे थे, जबकि सच्चाई ये है कि हिंदुओं के समूह पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने हमला किया। आइना खान ने मीडिया संस्थान में लेख और अपने ट्वीट्स के माध्यम से लगातार हिन्दुओं को बदनाम किया और मुस्लिम भीड़ को बचाने के लिए झूठी ख़बरें फैलाती हुई दिखीं।

तुर्की तक पहुँचा ईरान का हिजाब विरोधी प्रदर्शन, महिला सिंगर ने स्टेज पर ही काट डाले बाल: उधर पूर्व राष्ट्रपति की बेटी हुई गिरफ्तार

हिजाब को उतार फेंक अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरने वाली ईरान (Anti-Hijab Protest in Iran) की महिलाओं के खिलाफ वहाँ की इस्लामी सरकार बर्बरतापूर्वक व्यवहार कर रही है। हालाँकि, महिलाएँ भी किसी कीमत पर पीछे हटने को तैयार नहीं है और शरिया कानून का सार्वजनिक रूप से बहिष्कार कर रही हैं।

पूरे ईरान में जारी महिलाओं के प्रदर्शन के बीच वहाँ की पुलिस ने पूर्व राष्ट्रपति अली अकबर हाशमी रफसंजानी (Ali Akbar Hashemi Rafsanjani) की बेटी फाजेह हाशमी (Faezeh Hashemi) को गिरफ्तार कर लिया है। फाजेह पर आरोप लगाया गया है कि वह ईरान की राजधानी तेहरान में महिला प्रदर्शनकारियों को उकसा रही हैं।

वहीं, हिजाब को लेकर ईरान की महिलाओं के समर्थन में तुर्की की प्रसिद्ध गायिका मलेक मोस्सो (Melek Mosso) ने एक स्टेज शो के दौरान सार्वजनिक रूप से अपने बाल को काट दिया। आज बाल मुस्लिम महिलाओं की आजादी का प्रतीक बन गया है।

हिजाब के खिलाफ संघर्ष में ईरान की महिलाओं को दुनिया भर से समर्थन मिल रहा है। इसमें समाज के उच्च तबके से लेकर निचले पायदान के लोग भी शामिल है। दुनिया भर के लोग अलग-अलग तरीकों से ईरानी महिलाओं के प्रति समर्थन जता रहे हैं।

बता दें कि पूर्व राष्ट्रपति की बेटी ईरान की नीतियों की आलोचक रही हैं। उन्हें साल 2009 में विरोध प्रदर्शन के बाद गिरफ्तार किया गया था। उसी साल उन्हें बेअदबी और सरकार के खिलाफ काम करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उन पर पैगंबर मुहम्मद का अपमान करने का भी आरोप लगाया गया था।

हाशमी के पिता अली अकबर हाशमी रफसंजानी ईरान में इस्लामी शासन की स्थापना करने वाले लोगों में शामिल रहे हैं। वे ईरान के दो बार राष्ट्रपति रहे। अली अकबर की साल 2017 में निधन हो चुका है।

गौरतलब है कि ईरान में 13 सितंबर 2022 को हिजाब न पहनने की वजह से महसा अमीनी को मोरल पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उन्हेें पीट-पीट कर कोमा में पहुँचा दिया गया था। गिरफ्तारी के दिन बाद यानी 16 सितंबर को महसा की मौत हो गई थी। इसके बाद से ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन शुरू हुए, जो कि सरकार की दमनकारी नीतियों के कारण हिंसक होते चले गए।

ईरान के लगभग हर शहर में महिलाएँ मोरल पुलिसिंग और हिजाब कानून के खिलाफ सड़कों पर उतर गई हैं। ईरान में महिलाएँ सरकार के लिए मुश्किल का सबसे बड़ा सबब बन गई हैं। न तो वो हिजाब पहनने को तैयार हैं और न ही बाल ढँकने को तैयार हैं। इसी तरह प्रदर्शन करने वाली एक युवती को वहाँ की पुलिस ने 6 गोलियाँ दाग दीं। उस युवती की मौत के बाद आंदोलन और उग्र हो गया है।

हिजाब विरोधी प्रदर्शन से ईरान में अब तक चार महिलाओं समेत करीब 76 लोगों की मौत हो चुकी है। प्रदर्शनों से घबराई इब्राहिम रईसी सरकार दमन पर उतारू है। कट्टरपंथी इस्लामिक विचारधारा वाली सरकार ने कुछ दिन पहले ईरान में इंटरनेट भी बंद कर दिया था। इसके कारण वहाँ से काफी कम जानकारी सामने आ रही है।

जिस बिशप को मिला नोबेल पुरस्कार, वो निकला गरीब बच्चों का यौन शोषण करने वाला: नंगा कर के करता था ओरल सेक्स, बदले में देता था पैसे

नोबेल पुरस्कार विजेता 75 वर्षीय रोमन बिशप कार्लोस फिलिपे जिमेनेस बेलो पर यौन शोषण के आरोप लगे हैं, जिसकी जाँच अब वेटिकन करेगा। एक डच पत्रिका में उनके सेक्स स्कैंडल को लेकर रिपोर्ट प्रकाशित हुई है। बताया जा रहा है कि जब वो दक्षिण-पूर्वी एशियाई देश ईस्ट तिमोर में बतौर बिशप कार्यरत थे, तब की ये घटना है। उन पर 1980 और 90 के दशक में डिली में कई लड़कों का यौन शोषण करने के आरोप लगे हैं।

पत्रिका ने अपनी रिपोर्ट में कुछ पीड़ितों के बयान भी प्रकाशित किए हैं, जिन्होंने बताया कि बिशप कार्लोस फिलिपे जिमेनेस बेलो ने उनका यौन शोषण किया और बदले में पैसे दिए। ये पीड़ित तब किशोरावस्था में थे और काफी गरीब परिवारों से आते थे। पीड़ितों ने बताया कि वो इस बारे में बात करने को लेकर डरे हुए थे। ईस्ट तिमूर का ये कैथोलिक चर्च वहाँ के लोगों के बीच काफी सम्मानजनक है। जब मैगजीन ‘De Groene Amsterdammer’ ने इस संबंध में बात करने के लिए बिशप बेलो को कॉल किया तो उन्होंने फोन काट दिया।

एक पीड़ित ने कहा कि वो इस घटना को लेकर चर्च से और बिशप कार्लोस फिलिपे जिमेनेस बेलो से माफीनामा चाहता है। उसने कहा कि वो चाहता है कि ये घटना सबके सामने आए और आगे कोई सत्ता के नशे में चूर होकर इस तरह की यौन हिंसा न करे। उसने कहा कि जो पीड़ितों पर बीती, उस पर चर्च और आरोपित को अफ़सोस जताना चाहिए। वेटिकन के प्रवक्ता ने इस मामले पर ध्यान देने का आश्वासन दिया है। बेलो को 1996 में नोबेल पुरस्कार मिला था।

एक 42 वर्षीय पीड़ित ने बताया कि तब बिशप ने उसे नंगा कर के उसके साथ ओरल सेक्स किया था। बिशप बेलो को नोबेल पुरस्कार देते हुए कहा गया था कि उन्होंने अहिंसक तरीके से अपनी मातृभूमि ईस्ट तिमोर पर इंडोनेशिया के 24 साल के कब्जे के खिलाफ अभियान चलाया। उनके साथ-साथ जोस रामोस होर्टा को भी ये पुरस्कार मिला था, जो फ़िलहाल ईस्ट तिमूर के राष्ट्रपति हैं। वो फ़िलहाल पुर्तगाल में रहते हैं। 1975-99 तक ईस्ट तिमोर में इंडोनेशिया का कब्ज़ा था और इस बीच भारी कत्लेआम हुआ।

‘हम कानून का पालन करने वाले लोग’: बैन होने के बाद PFI ने किया संगठन भंग करने का ऐलान, अब सोशल मीडिया हैंडलों और बैंक खातों पर एजेंसियों की नजर

केंद्र सरकार द्वारा 5 वर्षों के लिए प्रतिबंधित किए जाने के बाद अब PFI ने अपने संगठन को भंग करने का ऐलान किया है। प्रतिबंधित संगठन की केरल यूनिट के ‘जनरल सेक्रेटरी’ अब्दुल सत्तार ने कहा कि संगठन ने केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी की गई अधिसूचना का संज्ञान लिया है और ‘कानून का पालन करने वाले नागरिक’ होने के कारण संगठन को भंग करने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि संगठन इस निर्णय को स्वीकार करता है।

इधर जाँच एजेंसियाँ अब PFI पर बैन के बाद अगले कदम की तैयारी में जुट गई है। कई ठिकानों पर 2 राउंड्स में हुई छापेमारी में संगठन के कई कार्यकर्ता पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं और सबूत के रूप में कई भड़काऊ दस्तावेज भी मिले हैं। अब PFI और उससे जुड़े सोशल मीडिया हैंडलों को भी हटवाया जाएगा। इसके लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MeitY) की मदद ली जा रही है। साथ ही सभी संबंधित बैंकों से संपर्क कर PFI और इससे जुड़े बैंक खातों को तुरंत फ्रीज करने को कहा गया है।

इसके साथ ही केंद्र ने सभी राज्य सरकारों को भी कहा है कि वो इस प्रतिबंधित संगठन से जुड़ी सभी संपत्तियों को तुरंत अपने कब्जे में ले लें। भाजपा ने अपनी सरकार के इस निर्णय की पीठ थपथपाते हुए कहा है कि ये समय पर लिया हुआ मजबूत निर्णय है। पार्टी ने कहा कि कुछ लोग इसमें भी राजनीतिक फायदे देख रहे हैं। ‘ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़’ नामक संगठन ने इस बैन का स्वागत किया है। संगठन ने कहा है कि PFI देश के सामाजिक सौहार्द और भाईचारे के विरुद्ध कार्य कर रहा था।

पसमांदा मुस्लिमों के संगठन ने कहा कि राष्ट्रवाद की भावना से ही भारत जगद्गुरु बनेगा। 12 वर्ष पहले जिन प्रोफेसर टीएस जोसफ की PFI के कट्टरपंथियों ने हाथ काट लिया था, उन्होंने इस निर्णय पर कहा कि कभी-कभी प्रतिक्रिया देने की बजाए चुप रहना ही बेहतर होता है। उन्होंने बताया कि वो इस मामले के पीड़ित रहे हैं। वहीं PFI से जुड़े संगठन SDPI ने ‘अघोषित आपातकाल’ का रोना रोते हुए कहा कि ये गलत है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया कि नए भारत में देश की एकता को खंडित करने वाले हर ताकत को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

दुनिया भर की T20 लीग्स में भारत के बढ़ते दबदबे और निवेश से परेशान हुआ Pak, कहा- हमारे खिलाड़ियों को नहीं मिल रहे मौके: मोईन अली ने भी जताया दुःख

दुनिया भर के T-20 लीग्स में भारत के दबदबे से पाकिस्तान बौखला गया है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के बढ़ते आकार और असर पर चिंता जाहिर की है। PCB का कहना है कि फ्रेंचाइजी T-20 लीग में भारतीय निवेश बढ़ने के कारण उसके खिलाड़ी अवसरों से वंचित रह जाएँगे।

दरअसल ये, T-20 लीगों में भारतीय उद्योगपतियों और IPL फ्रेंचाइजी मालिकों की बढ़ती पैठ और उनके निवेश के बाद PCB प्रमुख रमीज रजा ने यह चिंता जाहिर की है। रमीज ने यह चिंता अन्य क्रिकेट बोर्डों के साथ साझा की है। उनका कहना है कि भारतीयों के दबदबे के कारण पाकिस्तानी क्रिकेटरों को अवसर नहीं मिलेंगे।

क्रिकेट वेबसाइट ईएसपीएन-क्रिकइंफो की एक रिपोर्ट के अनुसार, साउथ अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात द्वारा शुरू किए गए T-20 लीग में IPL फ्रेंचाइजी के मालिकों ने निवेश किया है। साउथ अफ्रीका की SA-20 लीग की फ्रेंचाइजी की नीलामी में सभी 6 टीमों IPL फ्रेंचाइजी के मालिकों ने खरीदा है। वहीं, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की ILT-20 लीग की 6 टीमों में पाँच को भारतीयों ने खरीदा है।

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की ILT-20 लीग के लिए साइन किए गए एकमात्र खिलाड़ी आजम खान हैं। आजम खान को अमेरिकी स्वामित्व वाली डेजर्ट वाइपर (Desert Viper) द्वारा साइन किया गया है। इसी हाल को देखकर पाकिस्तान का क्रिकेट बोर्ड चिंतित है। वहीं, मोईन अली ने भी इस पर दुख जताया है।

बता दें कि भारत और पाकिस्तान के बीच राजनीतिक हालात ठीक नहीं होने का असर क्रिकेट पर भी पड़ा है। पाकिस्तानी खिलाड़ी IPL में नहीं खेल पा रहे हैं। वहीं, पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को चिंता है कि इन देशों के भारतीय स्वामित्व वाली टीमों में भी उन्हें जगह नहीं मिलेगा। वहीं, PCB की हालत भी आर्थिक रूप से खस्ता हो गई है।

साल 2008 में IPL लीग के पहले सीजन में पाकिस्तानी खिलाड़ी लीग का हिस्सा थे। उसके बाद जितने भी सीजन हुए, इनमें से किसी में भी पाकिस्तानी खिलाड़ियों को नहीं लिया गया। दोनों देशों के बीच साल 2012 के बाद से कोई द्विपक्षीय क्रिकेट सीरीज भी नहीं खेली गई है। दोनों टीमों का आमना-सामना सिर्फ ICC और ACC टूर्नामेंट में ही होता है।

जहाँ से निकला ‘सत्यमेव जयते’ वहाँ भी घुस गए ईसाई मिशनरी, प्राचीन मंदिर और मूर्ति वाली जमीन पर क्रॉस वाले मंच से सज रहा ‘मसीही मेला’

सत्यमेव जयते (Satyamev Jayate)। भारत का राष्ट्रीय आदर्श वाक्य। संभवतः आप जानते होंगे कि यह मंत्र ‘मुण्डकोपनिषद्’ से लिया गया है। कहते हैं कि माण्डूक्य ऋषि ने इसकी रचना मदकू द्वीप (Madku Dweep) पर की थी। यह द्वीप आज के छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस द्वीप पर सबसे बड़ा जमावड़ा हर साल फरवरी में लगता है? यह जमावड़ा सप्ताह भर चलने वाले मसीही मेला को लेकर लगता है? मसीही मेला 113 साल से लग रहा है?

संभव है कि जिस तरह से हिंदुओं का ईसाई धर्मांतरण हो रहा है, जिस तरीके से ईसाई मिशनरी देश के गली-गली में पसर रहे हैं, वैसे में एक द्वीप पर मसीही मेला लगना आपके लिए आश्चर्यजनक न हो। लेकिन मदकू द्वीप की भौगोलिक स्थिति से परिचित होने पर यह न केवल आपको अचंभित करेगा, बल्कि ईसाई मिशनरियों के उस खतरनाक इरादे से भी परिचित करवाएगा जिसके तहत वे जल, जंगल, जमीन… हर जगह कब्जा कर रहे हैं। इसी रणनीति के तहत वे आबादी बहुल मैदान से लेकर निर्जन द्वीप तक फैल रहे हैं।

शिवनाथ नदी से घिरा मदकू द्वीप

छत्तीसगढ़ के एक प्रमुख शहर बिलासपुर से मदकू द्वीप करीब 40 किलोमीटर है। इस द्वीप पर पहुँचने के लिए आपको शिवनाथ नदी को पार करना पड़ता है। नदी पार करने का एकमात्र साधन नाव है। नदी तक पहुँचने से पहले आप बैतलपुर, सरगाँव जैसे ग्रामीण इलाको से गुजरते हैं। सड़क से गुजरते हुए घरों पर दिखने वाले क्रॉस के निशान और सड़क से सटे कब्रिस्तान इन इलाकों में ईसाई मिशनरियों की पहुँच की आपको पूर्व सूचना दे देते हैं। नदी पर एक एनी कट (पानी का प्रवाह रोकने के लिए निर्मित छोटा बाँध) बना हुआ है। नदी में जब पानी कम होता है तो एनी कट के रास्ते भी लोग पैदल या छोटे वाहनों से द्वीप तक चले जाते हैं। लेकिन सितंबर 2022 में जब हम मदकू द्वीप पहुँचे तो शिवनाथ नदी पूरे वेग में बह रही थी। एनी कट डूबा हुआ था।

मदकू द्वीप जाने के लिए शिवनाथ नदी को पार करना पड़ता है

नाम मदकू द्वीप क्यों?

इस जगह का नाम मदकू द्वीप होने के पीछे दो मुख्य तर्क दिए जाते हैं। इतिहासकार डॉ. विष्णु सिंह ठाकुर के अनुसार यह जगह माण्डुक्य ऋषि की तपोस्थली थी। मदकू को माण्डुक्य का ही अपभ्रंश माना जाता है। दूसरा तर्क यह है कि शिवनाथ नदी की जलधारा के कारण यह जगह तैरते हुए मेढक जैसी दिखती है। मण्डूक का अर्थ मेढक भी होता है जो कालांतर में मदकू में परिवर्तित हो गया।

मदकू द्वीप का हरिहर क्षेत्र

नाव से जब आप करीब 50 एकड़ में फैले मदकू द्वीप पहुँचेंगे तो चारों तरफ घना जंगल दिखेगा। इसी घने जंगल के बीच स्थित है श्री हरिहर क्षेत्र। हरिहर क्षेत्र में कई मंदिर हैं। इनमें से एक प्राचीन गणेश मंदिर की पुनः प्रतिष्ठा 2021 में ही हुई है। इस मंदिर में भगवान गणेश की जो अष्टभुजी प्रतिमा है, वह 10-11वीं सदी की बताई जाती है। इसी मंदिर से सटा एक आवास है। इसमें हरिहर क्षेत्र के पुजारी वीरेंद्र शुक्ल अपने परिवार के साथ रहते हैं। शुक्ल ने ऑपइंडिया को बताया कि वे मूल रूप से मुंगेली जिले के ही लोरमी विकास खंड के तुरबारी पठारी गाँव के रहने वाले हैं। वे 1985 में अपने पिता के साथ इस द्वीप पर आए थे। मंदिर समिति ने पूजा-पाठ के लिए उनके पिता को यहाँ नियुक्त किया था। 1990 में वीरेंद्र शुक्ल के पिता का देहांत हो गया और उसके बाद से मंदिरों में पूजा-अर्चना का दायित्व उनके पास है।

हरिहर क्षेत्र स्थित गणेश मंदिर, पुजारी का आवास और खुदाई में मिले मंदिर तथा मूर्तियों के अवशेष

परिसर में ही एक कुटिया भी है। शुक्ल ने बताया कि इस कुटिया में करीब ढाई साल से एक साधु निवास करते हैं जो अमरकंटक से आए हुए हैं। जिस दिन हम पहुँचे वे साधु मदकू द्वीप पर नहीं थे। हरिहर क्षेत्र में ही उन प्राचीन मंदिरों और मूर्तियों के अवशेष भी रखे हुए हैं जो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को इस द्वीप पर खुदाई में मिले हैं। लेकिन इन धरोहरों की सुरक्षा के लिए हमें कोई पुख्ता इंतजाम नहीं दिखा। शुक्ल ने ऑपइंडिया को बताया, “2010-11 में एनीकट बनने के बाद आवागमन में थोड़ी सुविधा है। लेकिन यह जुलाई से अक्टूबर तक डूबा रहता है। इस जगह आमतौर पर कोई नहीं आता। शनिवार और रविवार के दिन कुछ श्रद्धालु और पर्यटक आ जाते हैं। अलग छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद थोड़ा-बहुत विकास इस जगह का हुआ है। लेकिन अभी भी सुविधाओं का घोर अभाव है। सबसे ज्यादा भीड़ इस द्वीप पर फरवरी में एक सप्ताह तक रहती है, जब मसीही मेला लगता है।”

मदकू द्वीप पर कैसे शुरू हुआ मसीही मेला?

मसीही मेला यहाँ कैसे शुरू हुआ इस संबंध में पूछे जाने पर शुक्ल बताते हैं, “सबसे पहले बैतलपुर में कुष्ठ रोगियों के लिए एक हॉस्पिटल खोला गया। उसके बाद यहाँ धीरे-धीरे लोगों का आना शुरू हो गया। कुछ साल बाद यहाँ मेला लगने लगा। मेला के समय को छोड़कर यहाँ मिशनरी के लोगों की गतिविधि नहीं रहती है।” जिस दिन हम द्वीप पर पहुँचे थे, उस दिन गिनती के ही श्रद्धालु हरिहर क्षेत्र में थे। रमाकांत पटेल और कोलाराम पटेल अपने परिवार के साथ आए थे। दोनों सरकारी शिक्षक हैं। उन्होंने ऑपइंडिया को बताया, “छुट्टी के दिनों में हम बच्चों को लेकर यहाँ आ जाते हैं ताकि वे अपनी संस्कृति के बारे में जान सके।” एक अन्य श्रद्धालु सची नारायण हैदराबाद के रहने वाले थे। पेशे से डॉक्टर नारायण ने बताया कि वे छत्तीसगढ़ की यात्रा पर आए हुए हैं। इस जगह के बारे में जानकारी मिली तो घूमने चले आए। उन्होंने ऑपइंडिया को बताया, “इस परिसर को देखने के बाद मन को थोड़ा कष्ट होता है। यह इतना विशेष भूमि, पवित्र भूमि है इसको डेवलप करने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। ऐसी जगहों पर आने में आसानी रहना चाहिए ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग अपनी संस्कृति के बारे में जान सकें।” (मदकू द्वीप पर खुदाई में मिले अवशेष और यहाँ के मंदिरों पर विस्तार से हम आगे की रिपोर्ट में बात करेंगे)

मदकू द्वीप पर क्रॉस वाला मंच

हरिहर क्षेत्र से कुछ दूरी पर एक मंच है। यदि आप एनीकट के रास्ते द्वीप पर आते हैं तो बाईं तरफ यह मंच है, जबकि दाईं ओर जो रास्ता जाता है वह आपको हरिहर क्षेत्र ले जाता है। मंच से पहले एक शिलापट्ट लगा है। इस पर मसीही मेला के बारे में जानकारी दर्ज है। साथ ही बताया गया है कि 2019 में मेला के 110 साल पूरे होने पर इस शिलापट्ट को लगाया गया है। इस शिलापट्ट से कुछ दूरी पर क्रॉस निशान वाला लंबा-चौड़ा मंच है। उस पर उल्लेखित जानकारी के अनुसार मसीही मेला की शुरुआत यहाँ 1909 में हुई थी। 2008 में 10-17 फरवरी के बीच मसीही मेला लगा था, जो आयोजन का शताब्दी वर्ष था।

मदकू द्वीप का वह मंच जहाँ लगता है मसीही मेला

नाव से नदी पार कराने वाले सुदर्शन केवट ने ऑपइंडिया को बताया, “बैतलपुर में क्रिश्चियन लोगों का बस्ती है। अंग्रेज जमाने में वहाँ से इस द्वीप पर आना-जाना शुरू हुआ। उसके बाद ये मेला शुरू हुआ। जो क्रॉस गड़ा है, वह उनका इलाका है। बाकी उनका कुछ नहीं है। बाकी सब हिंदू का है।” केवट ने बताया, “अगल-बगल के सभी गाँव में क्रिश्चियन हैं। अभी भी वे लोग (ईसाई मिशनरी) आते-जाते रहते हैं। कभी-कभी किसी गाँव में कोई क्रिश्चियन भी बन जाता है।” उन्होंने हमें यह भी बताया कि जब से छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस की सरकार बनी है इस द्वीप पर काम नहीं हुआ है। विकास के जो भी काम दिखते हैं वे रमन सिंह के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार के जमाने के हुए हैं।

जो द्वीप निर्जन है। खुदाई में मिले अवशेष जिस जगह के सनातन परंपरा का एक महत्वपूर्ण अध्याय होने का प्रमाण देते हैं। उस जगह यज्ञ स्थल से कुछ ही दूर क्रॉस निशान वाले मंच का होना, धर्मांतरित हिंदुओं का सालाना जमावड़ा लगना, बताता है कि कैसे ईसाई मिशनरी हमारी विरासतों पर कब्जा जमा रहे हैं।

अब कंडोम भी मुफ्त में देना पड़ेगा… बिहार में कार्यक्रम का नाम ‘सशक्त बेटी’, छात्रा ने माँगे सैनिटरी पैड तो भड़की IAS ने कहा – पाकिस्तान चली जाओ

बिहार की बेटियों को जागरुक करने के लिए मंगलवार (27 सितंबर, 2022) को ‘सशक्त बेटी समृद्ध बिहार’ वर्कशॉप का आयोजन किया गया। वर्कशॉप का उद्देश्य लैंगिक असमानता मिटाने वाली सरकारी योजनाओं से बच्चियों को जागरुक कराना था, लेकिन जब छात्राओं ने महिला आईएएस (IAS) ऑफिसर हरजोत कौर बम्हरा से इन्हीं योजनाओं से जुड़े सवाल पूछे तो उन्हें बेहद संवेदनहीन जवाब दिए गए। इस दौरान वर्कशॉप में शामिल सभी लोग हैरान हो गए। इसका वीडियो भी वायरल हो रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘सशक्त बेटी, समृद्ध बिहार: टुवर्ड्स एन्हान्सिंग द वैल्यू ऑफ गर्ल चाइल्ड’ विषय पर आधारित इस वर्कशॉप को महिला एवं बाल विकास निगम द्वारा यूनिसेफ, सेव द चिल्ड्रेन एवं प्लान इंटरनेशनल ने संयुक्त रूप से आयोजित किया था। वर्कशॉप में एक लड़की ने पूछा कि स्कूल का शौचालय टूटा है और अक्सर लड़के यहाँ घुस जाते हैं। लड़कियों ने कहा कि शौचालय न जाना पड़े, इसलिए वो कम पानी पीती हैं। इसके बाद छात्रा ने कहा कि क्या सरकार 20-30 रुपए का सैनिटरी पैड नहीं दे सकती?

इसके जवाब में महिला एवं बाल विकास निगम की एमडी हरजोत कौर बम्हरा ने कहा कि इस माँग का कोई अंत नहीं है। उन्होंने कहा, “20-30 रुपए का सैनिटरी पैड दे सकते हैं। कल को जींस-पैंट दे सकते हैं। परसों सुंदर जूते क्यों नहीं दे सकते हैं? जब परिवार नियोजन की बात आएगी तो निरोध भी मुफ्त में भी देना पड़ेगा। खुद सक्षम बनो।” वह आगे कहती हैं, “अच्छा यह बताओ, तुम्हारे घर में अलग से शौचालय है। हर जगह अलग से बहुत कुछ माँग करोगी तो कैसे चलेगा।”

इस पर छात्रा कहती है कि जो सरकार के हित में है, कम से कम उसे तो दे। छात्रा ने कहा कि सरकार को पैसा इसलिए देना चाहिए, क्योंकि वह हमसे वोट लेने आती है। इस सवाल पर आगबबूला होते हुए हरजोत कौर ने कहा, “बेवकूफी की भी हद होती है। मत दो वोट। चली जाओ पाकिस्तान। वोट तुम पैसों के लिए देती हो क्या! सुविधाओं के बदले में देती हो क्या! बताओ!” इस पर छात्रा ने बड़ी ही बेबाकी से कहा, “मैं हिन्दुस्तानी हूँ, तो पाकिस्तान क्यों जाऊँ।”