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फतेहपुर के रिटायर रेलवे कर्मचारी अब्‍दुल जमील बने हिंदू, नाम रखा श्रवण कुमार, कहा- ‘इस्लाम में भाई, भाई का नहीं, संपत्ति के लिए खून कर देते हैं’

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में अब्दुल जमील ने गुरुवार (21 जुलाई 2022) को इस्लाम त्यागकर संकटमोचन मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार और पूरे विधि-विधान के साथ पूजा कर हिंदू धर्म अपना लिया। उन्होंने अपना नाम श्रवण कुमार रखा है। सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त अब्दुल जमील ने बताया कि पिछले कई वर्षों से सनातन धर्म के प्रति उनमें दिलचस्पी पैदा हुई थी।

अब्दुल जमील मूल रूप से हाथरस जिले के सादाबाद तहसील के जमील हैं और वर्तमान में फतेहपुर नगर के देवीगंज मोहल्ले में रहते हैं। 38 वर्षों तक रेलवे में सेवा के बाद मुख्य आरक्षण पर्यवेक्षक के पद से सेवानिवृत्त होने वाले 66 वर्षीय अब्दुल जमील ने बताया कि बचपन से ही सनातन धर्म के प्रति आस्था थी।

जमील ने बताया कि करीब दो साल से उनके मन में हिंदू धर्म स्वीकार करने की इच्छा थी। कुछ दिनों पहले उनकी मुलाकात अखिल भारत हिंदू महासभा के प्रांतीय महामंत्री से मुलाकात हुई और इसके बाद दोनों के बीच नजदीकियाँ बढ़ीं। इसके बाद उन्होंने अपने मन की बात कही और धर्म धर्म अपना लिया।

श्रवण कुमार बनने के बाद उन्होंने कहा, “मुस्लिम धर्म में बहुत भेदभाव है। यहाँ भाई, भाई का नहीं है। लोग लालची हैं और संपत्ति के लिए खून तक कर देते हैं। इन सभी बातों से मैं परेशान रहता था। मैंने निश्चय कर कि मैं हिंदू धर्म अपनाऊँगा। मैं भगवान राम की पूजा करता हूँ और वह मेरे आराध्य हैं। मुझे बहुत अच्छा लगा जब पहली बार विष्णु-विष्णु बोलकर हवन पूजन कर रहा था।

उन्होंने कहा कि उन्होंने कोई धर्म परिवर्तन नहीं किया, बल्कि अपने मूल सनातन धर्म में वापसी की है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम को अपना आदर्श बताते हुए श्रवण कुमार बने जमील ने कहा कि राम तो समूचे भारत के पूर्वज हैं, इसे सबको सहर्ष स्वीकार करना चाहिए।

जमील का कहना है कि हिंदू बनने के लिए उन पर किसी तरह दबाव नहीं था। उनका कहना है कि उनके पूर्वज क्षत्रिय थे। उनके परबाबा का नाम पुत्तू सिंह था। पिता का नाम अब्दुल हमीद बेग है। उन्होंने कहा कि दो पीढ़ी पहले हमारा खानदान राजपूतों से ताल्लुक रखता था।

करीब दो महीने पहले सनातन धर्म में वापसी की बात जानकर उनके साले बाबर ने अब्दुल जमील को समझाने की कोशिश की थी। हालाँकि, जब वह नहीं माने तो उसने मारपीट भी की थी। उनका कहना है कि उनकी आस्था सनातन से जुड़ चुकी है और अब कोई भी उससे डिगा नहीं सकता।

अब्दुल जमील के अनुसार, “हिंदू धर्म में जाने की बात सुनकर उनके साले बाबर उर्फ मुस्तकीम ने घर पर बंधक बनाकर बहुत मारा था। मुझे अपने आराध्य भगवान राम पर विश्वास था। मैं उनकी पूजा पिछले तीन माह से घर पर कर रहा हूँ।”

श्रवण कुमार बने जमील ने कहा कि अब उन्हें किसी से डर नहीं लगता। उन्होंने कहा कि अगर किसी उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश की तो वे पुलिस में शिकायत दर्ज कराएँगे। इसके साथ ही जिलाधिकारी से मिलकर सुरक्षा माँगने की बात भी कही।

अब्दुल जमील की तीन बेटियाँ व एक बेटा है। उनकी बड़ी बेटी की शादी हो चुकी है। दूसरी बेटी इंजीनियर है, जबकि तीसरी बेटी एमबीबीएस डॉक्टर है। उनकी पत्नी आरजूमंद बानो बेटियों के साथ लखनऊ में रहतीं हैं। वहीं, बेटा मोहम्मद शमील दिल्ली में पायलट ऑफिसर का कोर्स कर रहा है। उनका कहना है कि उनके परिवार पर अब सामाजिक दबाव बहुत बढ़ गया है।

उन्होंने बताया कि 30 अक्टूबर 1978 को वह रेलवे की नौकरी में शुरू की थी। पहली पोस्टिंग फतेहपुर जिले में आरक्षण पर्यवेक्षक के पद पर हुई और 20 साल तक वहीं रहे। इसके बाद उनका स्थानांतरण शिकोहाबाद हो गया। वहाँ उन्होंने 18 साल तक नौकरी की और फिर साल 2014 में रिटायर हो गए।

देश की पहली आदिवासी और 15वीं राष्ट्रपति निर्वाचित हुईं द्रौपदी मुर्मू: PM मोदी ने दी बधाई, कहा- भारत ने रच दिया इतिहास

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू (Draupdi Murmu) के रूप में देश को 15वाँ राष्ट्रपति मिल गया। तीसरे दौर की मतगणना में उन्होंने विपक्ष के साझा उम्मीदवार यशवंत सिन्हा (Yashwant Sinha) को काफी पीछे छोड़ दिया।

महामहिम श्रीमती द्रौपदी मुर्मू नए राष्ट्रपति के रूप में 25 जुलाई 2022 को अपने पद और गोपनीयता की शपथ लेंगी। बता दें कि वर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (Ramnath Kovind) का कार्यकाल 24 जुलाई को खत्म हो रहा है।

द्रौपदी मुर्मू की जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह सहित तमाम नेताओं ने उन्हें बधाई दी। प्रधानमंत्री ने द्रौपदी मुर्मू के आवास पर जाकर उनसे विशेष रूप से उनसे मुलाकात की।

प्रधानमंत्री मोदी ने सबसे पहले मूर्म को उनके घर जाकर बधाई दी और ट्वीट करते हुए कहा कि जब 1.3 अरब भारतीय आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं, तब पूर्वी भारत के एक सुदूर हिस्से में जन्मीं आदिवासी समुदाय की भारत की एक बेटी हमारी राष्ट्रपति बनी है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने इतिहास रच दिया है और मुर्मू का जीवन एक प्रेरणा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी एक उत्कृष्ट विधायक और मंत्री रही हैं। झारखंड के राज्यपाल के रूप में उनका कार्यकाल शानदार रहा। मुझे विश्वास है कि वह एक उत्कृष्ट राष्ट्रपति होंगी, जो आगे बढ़कर नेतृत्व करेंगी और भारत की विकास यात्रा को मजबूत करेंगी।”

प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा, “मैं पार्टी लाइन के उन सभी सांसदों और विधायकों को धन्यवाद देना चाहता हूँ, जिन्होंने श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी की उम्मीदवारी का समर्थन किया है। उनकी रिकॉर्ड जीत हमारे लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत है।”

द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति चुनाव में कुल 64 प्रतिशत वोट मिले, जबकि विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा के पक्ष में 36 प्रतिशत वोट आए। उधर, कहा जा रहा है कि वोटिंग के दौरान 17 सांसदों और 126 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की है।

NDA से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू ने तीसरे दौर की मतगणना के बाद कुल वैध मतों का 50% का आँकड़ा पार कर लिया था। जीत के लिए 5,43,261 मूल्य के वोट चाहिए थे और सत्ताधारी एनडीए की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को तीसरे चरण की मतगणना में ही 5,77,777 मूल्य के मत मिल गए हैं। वहीं, विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को सिर्फ 2,61,062 मूल्य के वोट प्राप्त हुए हैं।

दूसरे चरण की मतगणना में द्रौपदी मुर्मू को 809 वोट मिले, जबकि यशवंत सिन्हा को 329 वोट मिले। राज्यसभा के महासचिव पीसी मोदी ने बताया, “दूसरे दौर में पहले 10 राज्यों के मतपत्रों की वर्णानुक्रम (Alphabetically) में गणना की गई है। कुल वैध मत 1138 है और उनका कुल मूल्य 1,49,575 है। इस गणना के मुताबिक, द्रौपदी मुर्मू को 809 वोट मिले, जिनका मूल्य 1,05,299 है। वहीं, यशवंत सिन्हा को 329 वोट मिले, जिनका मूल्य 44,276 है।”

इसके पहले चरण के वोटों की गिनती में भी वह यशवंत सिन्हा से आगे थीं। राज्यसभा के महासचिव पीसी मोदी के अनुसार, सांसदों के वोटों की गिनती में द्रौपदी मुर्मू ने 3,78,000 मूल्य के 540 वोट हासिल किए।

वहीं, यशवंत सिन्हा को 1,45,600 मूल्य के 208 वोट मिले। इस दौरान कुल 15 वोट अवैध पाए गए। पीसी मोदी ने बताया कि ये संसद के आंकड़े हैं। इस संबंध में अगली घोषणा जल्द ही करने की बात उन्होंने कही।

बता देें कि राष्ट्रपति चुनावों में सोमवार (18 जुलाई 2022) को संसद में 98.91 प्रतिशत मतदान हुआ था। कुल 736 मतदाताओं (727 सांसदों और 9 विधायकों) को संसद में मतदान की अनुमति दी गई थी, जिनमें से 728 (719 सांसदों और 9 विधायकों) ने वोट दिया था।

द्रौपदी मुर्मू के पैतृक गाँव ओडिशा के रायरंगपुर में पहले से ही जश्न की तैयारियाँ शुरू हैं। बीते दिनों से ही मिठाइयाँ बन रही हैं। ग्रामीणों ने मुर्मू का विजय जुलूस निकलने के साथ ही आदिवासी नृत्य की भी योजना पहले से ही बना ली है।

भारत के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ, जब कोई आदिवासी महिला भारत की राष्ट्रपति बनी। रायरंगपुर और पूरे ओडिशा के लिए आज एक ऐतिहासिक दिन है। उत्सव जैसा माहौल है। 20,000 मिठाइयाँ बनाने के अलावा आतिशबाजी की भी पूरी तैयारी भी पहले ही की गई। 

द्रौपदी मुर्मू जिस सरकारी उच्च प्राथमिक विद्यालय में पढ़ती थीं, उसके प्रधानाध्यापक रह चुके बिस्वेश्वर मोहंती ने उस वक्त को याद किया। उन्होंने बताया कि वह 1968 से 1970 तक स्कूल में हेड टीचर थे। उस दौरान द्रौपदी मुर्मू वहाँ पढ़ाई करती थीं और वह बहुत मेधावी थीं। उन्होंने बताया कि मुर्मू के बारे में जानकर उन्हें बहुत गर्व महसूस होता है।

इस बीच द्रौपदी के ससुराल के घर की तस्वीर भी सामने आई है। बता दें कि पति और दो बेटों की मौत के बाद द्रौपदी ने अपने ससुराल पहाड़पुर की सारी जमीन ट्रस्ट बनाकर बोर्डिंग स्कूल में बदल दिया गया। ट्रस्ट का नाम पति और बेटों के नाम पर SLS ट्रस्ट रखा गया है। इसमें ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे पढ़ाई करते हैं।

उल्लेखनीय है कि कुल 10,86,431 मतों में से राजग उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू के पास 6.67 लाख से अधिक वोट होने का अनुमान लगाया गया है। उन्हें सत्ताधारी गठबंधन के अलावा बीजद, वाईएसआर कॉन्ग्रेस, अकाली दल ही नहीं विपक्षी खेमे के कई दलों जैसे जेडीएस, झामुमो, शिवसेना और तेदेपा का समर्थन भी मिला है। साथ ही चुनाव में क्रॉस वोटिंग की भी खबरें सामने आई हैं।

गुजरात में NCP विधायक कंधाल जडेजा ने कहा कि उन्होंने मुर्मू को वोट दिया। ओडिशा में कॉन्ग्रेस विधायक मोहम्मद मोकीम ने मुर्मू के पक्ष में मतदान किया। हरियाणा के कॉन्ग्रेस विधायक कुलदीप बिश्नोई ने भी मुर्मू के समर्थन में वोट किया। वहीं असम में AIUDF के नेता करीमुद्दीन ने भी कॉन्ग्रेस के क्रॉस वोटिंग करने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि ये आँकड़ा 20 से अधिक भी हो सकता है।

क्या आप हिंदुओं के खिलाफ मुस्लिमों की हिंसा की निंदा करने को तैयार हैं? : डच सांसद गीर्ट वाइल्डर्स ने बांग्लादेश हिंसा और नूपुर शर्मा का मुद्दा संसद में उठाया

आतंकवाद और धार्मिक असहिष्णुता को लेकर मुखर रहने वाले डच सांसद गीर्ट वाइल्डर्स (Geert Wilders) ने इस बार भारत और बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ इस्लामी हिंसा को लेकर अपनी आवाज बुलंद की है। उन्होंने संसद में हिंदुओं का समर्थन करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस ओर ध्यान देने की माँग की है। इस दौरान उन्होंने पूर्व भाजपा प्रवक्ता नूपुर शर्मा के मुद्दे पर भी चर्चा की, जिन्हें ‘ईशनिंदा’ के आरोप में जान से मारने की धमकियाँ मिली थी।

वाइल्डर्स ने ट्विटर पर हिंदुओं, उनकी सुरक्षा और उनके समर्थन में 13 महत्वपूर्ण प्रश्न वाले दस्तावेज साझा किए हैं। उन्होंने बांग्लादेश और भारत में हिंदुओं के खिलाफ मुस्लिम हिंसा, नूपुर शर्मा के समर्थन में खड़े नहीं होने और हिंदुओं की सुरक्षा लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक ध्यान और समर्थन देने के बारे में लिखा है।

डच सांसद ने सवालों की सूची में भारत में हिंदुओं पर हमले की हालिया घटनाओं को भी शामिल किया है और आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने नूपुर शर्मा का समर्थन करने पर दो मुस्लिमों द्वारा एक हिंदू दर्जी (कन्हैया लाल) का सिर कलम करने की घटना पर भी प्रकाश डाला है। वाइल्डर्स ने मंत्रालय से इन मुद्दों पर विचार करने की माँग की और अंतरराष्ट्रीय रुख अपनाने को कहा।

डच सांसद ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने विदेश मंत्रालय से बांग्लादेश में हिंदू घरों, पूजा स्थलों और दुकानों में आग लगानी वाली घटना पर विचार करने को कहा। मालूम हो कि 15 जुलाई 2022 को बांग्लादेश में लोहागारा के सहपारा इलाके में कट्टरपंथी मुस्लिमों की भीड़ ने हिन्दुओं के एक मंदिर, किराने की दुकान और कई घरों को तोड़ दिया था। पुलिस ने बताया था कि 18 साल के हिन्दू लड़के की फेसबुक पोस्ट ने मुस्लिमों को हिंसा के लिए उकसाया, जिसके बाद जुम्मे की नमाज के बाद इस घटना को अंजाम दिया गया।

वाइल्डर्स द्वारा पूछे गए दो महत्वपूर्ण प्रश्न हैं, “क्या आप हिंदुओं के खिलाफ मुस्लिमों की हिंसा की खुले तौर पर निंदा करने के लिए तैयार हैं? अगर नहीं तो क्यों?” और दूसरा प्रश्न है। “क्या आप हिंदुओं की बेहतर सुरक्षा के लिए काम करने के लिए भारत और बांग्लादेश दोनों सरकारों से अनुरोध करने के लिए तैयार हैं? अगर नहीं तो क्यों?”

ध्यान देने के लिए वाइल्डर्स ने यह भी उल्लेख किया कि नूपुर शर्मा को समर्थन देने के लिए उन्हें भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के कई इस्लामवादियों से मौत की धमकी मिल रही है। उन्होंने संसद से पूछा, “इस पर आपकी क्या राय है? क्या संदिग्धों का पता लगाकर उन पर कार्रवाई की जाएगी? इसके लिए आप क्या अंतरराष्ट्रीय कदम उठाएंगे?”, 14 जुलाई को डच सांसद ने नुपुर शर्मा का समर्थन करते हुए कहा था, “भारत के हिंदुओं, अपने लिए खड़े हो, अपनी सुरक्षा, मूल्यों और संस्कृति के लिए, नूपुर शर्मा के लिए। आप इसके योग्य हैं।’ उन्होंने यह भी कहा, “साहसी बनें। मैं आपसे प्यार करता हूँ और आपका समर्थन करता हूँ।”

गीर्ट ने इससे पहले मुस्लिमों के त्योहार बकरीद को लेकर ट्वीट कर कहा था, “आज से शुरू हो रहे घिनौने बर्बर इस्लामी कुर्बानी के त्यौहार ईद हत्याकांड पर रोक लगाओ।” गीर्ट ने इसके साथ ही एक भेड़ की हत्या का वीभत्स फोटो भी साझा किया था। वहीं गीर्ट ने 11 जून को किए गए अपने ट्वीट में कट्टरपंथियों द्वारा नूपुर शर्मा को दी गई धमकी का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए लिखा था, “यही है, जिसके कारण मैं बहादुर नूपुर शर्मा का समर्थन कर रहा हूँ। जान से मारने की सैकड़ों धमकियाँ। यह मुझे उनका समर्थन करने के लिए और भी अधिक दृढ़ बनाता है। क्योंकि, बुराई कभी नहीं जीत सकती। कभी नहीं।”

बता दें कि नुपूर शर्मा का समर्थन करने वाले डच सांसद को कट्टरपंथियों ने गर्दन काट मीनार पर लटकाने की धमकी दी थी। इन धमकियों की जानकारी गीर्ट वाइल्डर्स ने अपने ट्वीट में दी थी। उन्होंने लिखा था, “…तो बहादुर नुपूर शर्मा को समर्थन देने के बदले मुझे ये सब मिल रहा है। सैंकड़ों मौत की धमकियाँ। ये सब मुझे और भी ज्यादा गर्व महसूस कराता है कि मैंने नुपूर को समर्थन दिया। शैतान कभी नहीं जीतेगा। कभी नहीं।” इस ट्वीट में गीर्ट वाइल्डर्स ने एक बार फिर #Isupportnupursharma टैग का प्रयोग किया और साथ में कट्टरपंथियों की धमकियों के कुछ स्क्रीनशॉट भी लगाए थे।

सिंगापुर नहीं जा पाएँगे केजरीवाल: दिल्ली के LG ने AAP मुखिया को नहीं दी इजाजत, कहा- मेयरों के सम्मेलन में मुख्यमंत्री का क्या काम

आम आदमी पार्टी के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सिंगापुर नहीं जा पाएँगे वहीं उन्होंने दौरे को लेकर नई तरह की सियासत भी शुरू कर दी है। दरअसल, सिंगापुर जाने के लिए अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना से इजाजत माँगी थी, जिसे उन्होंने खारिज कर दिया है। एलजी ऑफिस ने केजरीवाल के टूर को कैंसिल किए जाने के पीछे कारण बताया है कि यह मेयर्स का सम्मेलन है, जिसमें सीएम के जाने की कोई आवश्यकता नहीं है।

लेफ्टिनेंट गवर्नर के इस कदम के बाद आम आदमी पार्टी में उबाल है। दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा है मुख्यमंत्री को निजी तौर पर ये आमंत्रण दिया गया है और उप राज्यपाल द्वारा बताए गए कारण से वो संतुष्ट नहीं हैं। सिसोदिया ने कहा है कि वो इस मामले में विदेश मंत्रालय के समक्ष आवेदन करेंगें। आप नेता ने इशारों में केंद्र पर गलत परंपरा को शुरू करने का आरोप लगाया है।

वहीं इस मामले में अरविंद केजरीवाल का कहना है कि वो एक मुख्यमंत्री हैं कोई अपराधी नहीं। केजरीवाल ने कहा कि लगता है कि ये सब एक राजनीतिक एजेंडे के तहत किया जा रहा है। उन्होंने पीएम मोदी को लिखा था कि उन्हें सिंगापुर न जाने देना गलत है। बता दें कि आम आदमी पार्टी भी लगातार यात्रा की मंजूरी की माँग कर रही थी। पार्टी का दावा है कि केजरीवाल वहाँ दिल्ली में शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर हुए काम के बारे में बताने जा रहे हैं।

क्या कहते हैं नियम

सीएम अरविंद केजरीवाल को विदेश जाने की इजाजत नहीं मिलने पर ये सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या सीएम को भी विदेश दौरे के लिए इजाजत की आवश्यकता है? जबाव है हाँ। कोई भी सरकारी कर्मचारी, अधिकारी या फिर मुख्यमंत्री अथवा केंद्रीय मंत्री ही क्यों न हों, उन्हें विदेश दौरे के लिए परमीशन लेने की आवश्यकता है। सभी को विदेश मंत्रालय की अनुमति लेनी होती है।

26 अगस्त साल 2010 में मनमोहन सिंह की अगुवाई वाली यूपीए सरकार ने एक गाइडलाइन जारी की थी। इसमें कहा गया था कि अगर कोई केंद्रीय मंत्री विदेश दौरे पर जाते हैं तो उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय की इजाजत लेनी होगी। निजी यात्रा के दौरान केंद्रीय मंत्रियों को एफसीआरए क्लीयरेंस भी देना होगा। इसी तरह से राज्यों के मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को विदेश दौरे के लिए केंद्रीय सचिवालय और विदेश मंत्रालय से इजाजत लेनी होगी। इसके साथ ही इन्हें भी एफसीआरए भी लेना होगा।

इधर मनी लॉन्ड्रिंग को लेकर सोनिया गाँधी से ED कर रही थी सवाल, उधर वाहनों को फूँक रहे थे कॉन्ग्रेसी: हिंसक प्रदर्शन से नेशनल हेराल्ड केस में पूछताछ का विरोध

नेशनल हेराल्ड (National Herald) मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी (Soniya Gandhi) की आज (21 जुलाई 2022) प्रवर्तन निदेशालय (ED) के सामने पेशी हुई। दो घंटे की पूछताछ के बाद ईडी ने 25 जुलाई को उन्हें फिर से तलब किया है। पूछताछ के विरोध में देश के कई हिस्सों में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने हिंसक प्रदर्शन किया।

कर्नाटक के बेंगलुरु में कई स्थानों पर कॉन्ग्रेसियों ने विरोध प्रदर्शन किया। बेंगलुरु के शांतिनगर में ईडी कार्यालय के सामने युवा कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने एक कार में आग लगा दी।

बेंगलुरु के डीसीपी सेंट्रल आर श्रीनिवास गौड़ा ने बताया कि शेषाद्रिपुरम और शांतिनगर से वाहन में आग लगाने की कोशिश किए जाने की सूचना मिली थी। इसके बाद 11 लोगों को हिरासत में लिया गया है।

दिल्ली में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने शिवाजी ब्रिज रेलवे स्टेशन पर एक ट्रेन को रोका और रेलवे ट्रैक जाम कर दिया। समाचार एजेंसी एएनआई ने कॉन्ग्रेसियों द्वारा किए गए हिंसक प्रदर्शन की तस्वीरें और वीडियो भी शेयर की है। इनमें आप देख सकते हैं कि किस तरह प्रदर्शनकारी कॉग्रेस नेता सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी का पोस्टर हाथों में लेकर वाहनों को आग के ​हवाले कर रहे हैं और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचा रहे हैं।

वहीं, हैदराबाद के बशीरबाग में तेलंगाना कॉन्ग्रेस के नेताओं (Telangana Congress Leaders Protests) ने सोनिया गाँधी के समर्थन में प्रवर्तन निदेशालय के दफ्तर के पास मोदी सरकार और ईडी के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया और एक स्कूटर को आग के हवाले कर दिया। इस दौरान उन्होंने पीएम मोदी और भाजपा के खिलाफ नारे भी लगाए।

देश के कई अन्य हिस्सों से भी कॉन्ग्रेसियों द्वारा यातायात जाम करने और छिटपुट हिंसा-आगजनी की खबर है। विरोध-प्रदर्शनों की शुरुआत सोनिया गाँधी के ईडी दफ्तर पहुँचने से पहले ही हो गई थी। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पुलिस ने विरोध के कारण हिरासत में ले लिया था। विपक्ष की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा ने कहा कि ED नेताओं को परेशान कर रही है। उन्होंने कहा कि ED के अधिकारियों को सोनिया गाँधी से पूछताछ के लिए उनके घर जाना चाहिए था। उधर लोकसभा में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने विरोध-प्रदर्शन पर सवाल उठाते हुए कहा, “कानून के समक्ष सब बराबर है। क्या कॉन्ग्रेस अध्यक्ष कोई महामानव हैं?” गौरतलब है कि इससे पहले राहुल गाँधी से ईडी की पूछताछ के वक्त भी कॉन्ग्रेस ने सड़कों पर उतरकर विरोध-प्रदर्शन किया था।

LuLu मॉल में नमाज पढ़ने को लेकर जो 4 हुए गिरफ्तार, वे निकले मदरसाछाप: सबसे बड़ा लुकमान चलाता है मदरसा

लखनऊ के लुलु मॉल (LuLu Mall) में नमाज पढ़ने और उसका वीडियो बनाने वाले 9 नमाजियों में से 4 पुलिस की गिरफ्त में हैं। इनके नाम नोमान, लुकमान, आतिफ और रेहान हैं। नोमान और लुकमान सगे भाई हैं। इनके साथियों की तलाश जारी है। इस बीच मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि गिरफ्तार चारों आरोपितों का मदरसा कनेक्शन सामने आया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नोमान, रेहान और आतिफ़ तीनों मदरसे में पढ़ाई करते हैं। इन सभी की उम्र 19 से 20 वर्ष के आसपास है। चौथा आरोपित मोहम्मद लुकमान मदरसा चलाता है। वो इन सभी में सबसे बड़ा 25 साल का है।

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक मोहम्मद रेहान का घर लखनऊ के ही अबरार नगर में है। रेहान मदरसा छात्र है। आतिफ खान लखनऊ के अबरारपुर इलाके में रह कर दीनी तालीम हासिल कर रहा है। वह मूल रूप से लखीमपुर खीरी का रहने वाला है। नोमान भी अबरारपुर के ही एक मदरसे में पढ़ता है। वह सीतापुर के गाँव मंगोलपुर का रहने वाला है। लुकमान लखनऊ के अबरार नगर में मदरसा चलाता है। नोमान और लुक़मान के अब्बा का नाम मंसूर अली है।

पुलिस इस नमाज़ प्रकरण में फरार चल रहे अन्य आरोपितों की तलाश में भी जुटी है। पुलिस पकड़े गए आरोपितों से मॉल के अंदर नमाज़ पढ़ने की उनकी मंशा पर भी सवाल-जवाब कर रही है। गौरतलब है कि लुलु मॉल में 12 जुलाई 2022 को नमाज़ का वीडियो वायरल होने के बाद 14 जुलाई को पुलिस ने मॉल प्रशसन की तहरीर पर FIR दर्ज की थी। इस नमाज़ के विरोध में हिन्दू संगठन के सदस्यों ने भी मॉल के आगे विरोध प्रदर्शन किया था।

इस मॉल के मालिक यूसुफ अली हैं, जो कि एक अरबपति व्यवसायी हैं। वो मूल रूप से केरल के रहने वाले हैं। लेकिन, रहते अबू धाबी में हैं। नमाज का वीडियो वायरल होने के बाद प्रबंधन ने मॉल के हर फ्लोर पर सिक्योरिटी को बढ़ाते हुए 200 सुरक्षा गार्डों को तैनात कर दिया था। साथ ही 1016 सीसीटीवी कैमरों को एक्टिव कर दिया था।

‘नदी साफ करने का स्टंट कर डायरिया करवा लिया’: यूजर ने लिए मजे, पेट दर्द के बाद अस्पताल में भर्ती पंजाब के CM मान को मिली छुट्टी

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान (Punjab CM Bhagwant Mann) को दिल्ली के अपोलो अस्पताल से गुरुवार (21 जुलाई 2022) को डिस्चार्ज कर दिया गया। भगवंत मान को मंगलवार की रात (19 जुलाई 2022) पेट में तेज दर्द की शिकायत हुई थी। उसके बाद उन्हें तत्काल दिल्ली लाकर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने कहा कि उन्हें इनफेक्‍शन हो गया है। हालाँकि, एक दिन अस्पताल में बिताने के बाद मान को डिस्चार्ज कर दिया गया।

इसके बाद से सोशल मीडिया पर AAP की पंजाब यूनिट द्वारा बीते दिनों शेयर किया गया वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह काली बेंई का जल पीते हुए दिख रहे हैं। ट्वीट में लिखा गया था, “मुख्यमंत्री भगवंत मान गुरु नानक साहिब की चरण स्पर्श वाली भूमि सुल्तानपुर लोधी में पवित्र जल पीते हुए। राज्यसभा सदस्य संत सीचेवाल जी ने पवित्र स्थान की सफाई का बीड़ा उठाया है।”

दरअसल, 17 जुलाई को प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और राज्यसभा सांसद बाबा बलबीर सिंह सीचेवाल ने मुख्यमंत्री को काली बेईं की सफाई की 22वीं वर्षगांठ में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था। इस दौरान उन्होंने पंजाब के सुल्तानपुर लोधी में प्रदूषित नदी का एक गिलास पानी पिया था, जिसमें कस्बों और गाँवों का सीवेज बहता है। इस अवसर पर सीएम ने नदी की सफाई के लिए संत बाबा सीचेवाल के प्रयासों की जमकर सराहना भी की थी।

हालाँकि, कुछ दिनों बाद उन्हें इलाज के लिए दिल्ली के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। ऐसे में कहा जा रहा है कि काली बेईं नदी का प्रदूषित पानी पीने की वजह से भगवंत बीमार हो गए हैं। सोशल मीडिया पर एक यूजर ने भगवंत मान के मजे लेते हुए लिखा, “नदी साफ कर दी साबित करने का स्टंट कर रहे थे। डायरिया करवा लिया।”

बाद में डिप्टी कमिश्नर अशोक कौरा (Deputy Commissioner Ashok Kaura) ने मीडियाकर्मियों से कहा कि बेईं में कई कस्बों और गाँवों का गंदा पानी बहता है। उन्होंने कहा कि वह सीएम को इसका पानी ना पीने की सलाह देने के लिए मौके पर मौजूद नहीं थे।

शिवसेना की लड़ाई से शरद पवार की नींदें भी उड़ी, भंग किए पार्टी के सभी राष्ट्रीय प्रकोष्ठ: भतीजे अजीत पवार अतीत में दिखा चुके हैं बागी तेवर

राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (राकांपा) के प्रमुख शरद पवार ने पार्टी के सभी विभागों और प्रकोष्ठों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। पार्टी का यह फैसला मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में महाराष्ट्र की महा विकास अघाड़ी सरकार (MVA) के गिरने के बाद लिया गया है। जिस तरह से शिवसेना का बिखराव सामने आया है तो वहीं अतीत में भतीजे अजीत पवार भी बागी तेवर दिखा चुके हैं। ऐसे में अब NCP राष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व में बड़ा बदलाव करने जा रही है।

राकांपा के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल ने बुधवार (20 जुलाई 2022) को ट्वीट कर पार्टी के फैसले के बारे में जानकारी दी। पार्टी के महासचिव प्रफुल्ल पटेल ने कहा, “राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद पवार के अनुमोदन से राष्ट्रवादी महिला कॉन्ग्रेस को छोड़कर, राकांपा के सभी विभाग और प्रकोष्ठ तत्काल प्रभाव से भंग किए जाते हैं।” हालाँकि, पटेल ने पार्टी द्वारा अचानक उठाए गए कदम के कारण का खुलासा नहीं किया।

इस संबंध में पटेल ने सभी प्रकोष्ठ और विभागों के प्रमुखों को पत्र भी जारी किए हैं। इसमें कहा गया है कि राकांपा के सभी विभागों को तत्काल प्रभाव से भंग किया जाता है। यह फैसला राकांपा अध्यक्ष शरद पवार की सहमति से लिया गया है। उन्होंने अपने दूसरे ट्वीट में कहा कि यह फैसला महाराष्ट्र या किसी अन्य राज्य इकाई पर लागू नहीं होता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजनीतिक गलियारों में ऐसी चर्चा है कि यह अहम फैसला 2024 में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र में लिया गया है।

उल्लेखनीय है कि एनसीपी शिवसेना के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार का हिस्सा थी। शुरू से ही एनसीपी और शिवसेना के नेताओं के बीच मतभेद रहे हैं। शिवसेना सांसद संजय जाधव ने एनसीपी पर आरोप लगाया था कि वह शिवसेना को कमजोर कर रही है। राकांपा के दखल से वह अपने कार्यकर्ताओं के साथ न्याय नहीं कर पा रहे हैं। इसके चलते परभणी से शिवसेना सांसद संजय जाधव ने लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा तक दे दिया था। इसका कारण जिंतुर नगरपालिका में एनसीपी का दखल बताया जा रहा था। उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र भी लिखा था। संजय जाधव ने अपने पत्र में कहा था कि वह अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ न्याय नहीं कर पा रहे हैं। इस आधार पर उन्हें सांसद बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।

बता दें कि महाराष्‍ट्र में सत्ता गँवाने के बाद उद्धव ठाकरे को एक और झटका लग सकता है और इस बार शिवेसना पर उनका दावा ही हाथ से निकलने की सम्भावना नजर आ रही है। दरअसल, शिंदे गुट ने पार्टी चुनाव चिह्न पर अपना दावा पेश किया है। एकनाथ शिंदे समूह ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर शिवसेना के धनुष-बाण चुनाव चिह्न को आवंटित करने की माँग की है।

द्रौपदी मुर्मू के गृहनगर में मिठाइयाँ बनकर तैयार: सांसदों के वोटों की गिनती पूरी, यशवंत सिन्हा को केवल 208 वोट

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू (Draupdi Murmu) का राष्ट्रपति बनना लगभग तय हो गया है। अभी तक की गिनती में वह विपक्ष के साझा उम्मीदवार यशवंत सिन्हा (Yashwant Sinha) से आगे हैं।

राज्यसभा के महासचिव पीसी मोदी के अनुसार, द्रौपदी मुर्मू ने 3,78,000 मूल्य के 540 वोट हासिल किए हैं। वहीं, यशवंत सिन्हा को 1,45,600 मूल्य के 208 वोट मिले। इस दौरान कुल 15 वोट अवैध पाए गए। पीसी मोदी ने बताया कि ये संसद के आंकड़े हैं। इस संबंध में अगली घोषणा जल्द ही करने की बात उन्होंने कही।

बता देें कि राष्ट्रपति चुनावों में सोमवार (18 जुलाई 2022) को संसद में 98.91 प्रतिशत मतदान हुआ था। कुल 736 मतदाताओं (727 सांसदों और 9 विधायकों) को संसद में मतदान की अनुमति दी गई थी, जिनमें से 728 (719 सांसदों और 9 विधायकों) ने वोट दिया था।

द्रौपदी मुर्मू के पैतृक गाँव ओडिशा के रायरंगपुर में जश्न की तैयारियाँ शुरू हो गई हैं। मिठाइयाँ बनने लगी हैं। ग्रामीणों ने मुर्मू का विजय जुलूस निकलने के साथ ही आदिवासी नृत्य की भी योजना बनाई ली थी।

भारत के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ, जब कोई आदिवासी महिला भारत की राष्ट्रपति बनी। रायरंगपुर और पूरे ओडिशा के लिए आज एक ऐतिहासिक दिन है। उत्सव जैसा माहौल है। 20,000 मिठाइयाँ बनाने के अलावा आतिशबाजी की भी पूरी तैयारी भी पहले ही की गई। 

द्रौपदी मुर्मू जिस सरकारी उच्च प्राथमिक विद्यालय में पढ़ती थीं, उसके प्रधानाध्यापक रह चुके बिस्वेश्वर मोहंती ने उस वक्त को याद किया। उन्होंने बताया कि वह 1968 से 1970 तक स्कूल में हेड टीचर थे। उस दौरान द्रौपदी मुर्मू वहाँ पढ़ाई करती थीं। उन्होंने बताया कि मुर्मू के बारे में जानकर उन्हें बहुत गर्व महसूस होता है।

मोहंती कहते हैं कि वह एक मेधावी छात्रा थीं। उन्हें याद है कि एक बार छात्रों से पूछा गया कि वे भविष्य में क्या करना चाहते हैं तो सभी ने विभिन्न व्यवसायों का जिक्र किया, लेकिन जब यही सवाल द्रौपदी से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह लोगों की सेवा करना चाहती हैं।

मोहंती ने कहा कि पहले द्रौपदी मुर्मू ने राज्यपाल के रूप में कार्य किया और अब वे देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन होंगी। वहीं उस स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को भी द्रौपदी मुर्मू पर गर्व महसूस हो रहा है।

इस बीच द्रौपदी के ससुराल के घर की तस्वीर भी सामने आई है। बता दें कि पति और दो बेटों की मौत के बाद द्रौपदी ने अपने ससुराल पहाड़पुर की सारी जमीन ट्रस्ट बनाकर बोर्डिंग स्कूल में बदल दिया गया। ट्रस्ट का नाम पति और बेटों के नाम पर SLS ट्रस्ट रखा गया है। इसमें ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे पढ़ाई करते हैं।

उल्लेखनीय है कि कुल 10,86,431 मतों में से राजग उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू के पास 6.67 लाख से अधिक वोट होने का अनुमान लगाया गया है। उन्हें सत्ताधारी गठबंधन के अलावा बीजद, वाईएसआर कॉन्ग्रेस, अकाली दल ही नहीं विपक्षी खेमे के कई दलों जैसे जेडीएस, झामुमो, शिवसेना और तेदेपा का समर्थन भी मिला है। साथ ही चुनाव में क्रॉस वोटिंग की भी खबरें सामने आई हैं।

गुजरात में NCP विधायक कंधाल जडेजा ने कहा कि उन्होंने मुर्मू को वोट दिया। ओडिशा में कॉन्ग्रेस विधायक मोहम्मद मोकीम ने मुर्मू के पक्ष में मतदान किया। हरियाणा के कॉन्ग्रेस विधायक कुलदीप बिश्नोई ने भी मुर्मू के समर्थन में वोट किया। वहीं असम में AIUDF के नेता करीमुद्दीन ने भी कॉन्ग्रेस के क्रॉस वोटिंग करने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि ये आँकड़ा 20 से अधिक भी हो सकता है।

ईसाई मिशनरी स्कूल सेंट फ्रांसिस में सिख छात्रों के पगड़ी, कृपाण, कड़ा पर रोक: पैरेंट्स ने किया विरोध, योगी सरकार से कार्रवाई की अपील

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बरेली में ईसाई मिशनरियों द्वारा चलाया जा रहा ‘सेंट फ्रांसिस स्कूल’ सिख (Sikh) भावनाओं को आहत करने के मामले में विवादों में घिर गया है। स्कूल प्रबंधन ने सिख छात्रों के स्कूल में पगड़ी, कृपाण और कड़ा पहनकर आने पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही स्कूल प्रबंधन ने मनमानी करते हुए कहा है कि अगर किसी को ये सब पहनना है तो वो अपना नाम कटाकर जा सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, उक्त स्कूल जिले के बारादरी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आता है। डेलापीर स्थित ये स्कूल 12वीं तक का है। ये मामला उस वक्त सामने आया, जब बुधवार को प्रार्थना सभा में स्कूल की एक शिक्षक ने सभी को समान ड्रेस कोड में आने को कह दिया। इसके साथ ही शिक्षक ने ये भी कहा कि जो पगड़ी, कृपाण और कड़ा पहनकर आते हैं वो भी ये सब बंद कर दें। इसकी जानकारी लगते ही सिख बच्चों के माता-पिता ने इसका विरोध शुरू कर दिया।

वहीं इस मामले को लेकर गुरुवार (21 जुलाई 2022) को यूथ खालसा समूह के अध्यक्ष मनजीत सिंह बिट्टू ने संजय नगर गुरुद्वारा में समुदाय के लोगों की एक बैठक की। इसके बाद आक्रोशित सिखों ने स्कूल में जाकर धरना दिया और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की। इस मामले में मॉडल टाउन गुरुद्वारा कमेटी के पूर्व अध्यक्ष मालिक सिंह कालरा ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता पर खतरा करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शनों के कारण छात्रों को स्कूल में परेशान किया जा रहा है। इसी कारण खुलकर कोई भी अभिभावक सामने नहीं आ रहा है। सिख भावनाओं को आहत करने के मामले में प्रिंसिपल सिस्टर लिसमिन को हटाने की माँग की गई है।

इसी तरह से स्कूल में विरोध प्रदर्शन करने पहुँचीं अमनदीप कौर ने आरोप लगाया कि ऐसा करके स्कूल प्रबंधन सिखों की धार्मिक भावनाओं को कुचलने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने इस मामले में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कार्रवाई करने की माँग की है। आंदोलनकारियों ने स्कूल प्रबंधन से तुगलकी फरमान को वापस लेने की माँग की है।