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लालू यादव के इलाज का सारा खर्च उठाएगी बिहार सरकार: CM नीतीश कुमार का ऐलान, राजद सुप्रीमो से अस्पताल में मिले

आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव की तबीयत अचानक बिगड़ गई है, जिसके बाद उन्हें पटना के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। राजद सुप्रीमो को आज शाम 7 बजे पटना से दिल्ली एयर एंबुलेंस से ले जाया जाएगा। इसी बीच बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बुधवार (6 जुलाई, 2022) को लालू प्रसाद यादव से मिलने पटना के पारस अस्पताल पहुँचे। जहाँ नीतीश कुमार ने डॉक्टरों से भी उनकी स्थिति के बारे में बातचीत की।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी भी अस्पताल में मौजूद रहीं। लालू यादव से मुलाकात के बाद नीतीश कुमार ने कहा, “लालू जी कि स्थिति पहले से बेहतर है। उन्हें दिल्ली ले जाकर इलाज और हर तरह का टेस्ट कराने का फैसला किया गया है। सब कुछ सरकार करेगी कोई दिक्कत नहीं है।” नीतीश कुमार ने उनके जल्दी स्वस्थ्य होने की कामना भी व्यक्त की है।

CM नीतीश कुमार ने यह भी कहा, “लालू जी को 10-15 दिन बाद किडनी ट्रांसप्लांट के लिए सिंगापुर ले जाना था लेकिन अब फ्रेक्चर हो चुका है। दिल्ली में डॉक्टरों से बात करेंगे जो सिचुएशन होगी उस हिसाब से तय करेंगे।”

वहीं नीतीश कुमार ने लालू यादव से मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा, “समाचार मिलने के बाद तुरंत लालू जी की जानकारी ली, आज खुद लालू जी से मिलने पहुँचा हूँ। लालू जी की तबीयत पहले से बेहतर हुई है। लालू जी के साथ हमारे पुराने दिनों के संबंध रहे हैं। आज लालू जी को दिल्ली ले जाकर इलाज कराने का फैसला लिया गया है। बेहतर है दिल्ली जाकर सभी चीज की बेहतर जाँच होगी।”

बता दें कि सरकारी खर्च पर इलाज होने के सवाल पर नीतीश कुमार ने कहा, “ये कोई पूछने वाली बात ही नहीं है। इस पर लालू जी का हक बनता है। सारी बातों को लेकर बिहार में नियम बना हुआ है।”

वहीं तेजस्वी यादव ने बताया कि लालू यादव की तबीयत बिगड़ने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने भी फोन कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली है। उन्होंने कहा, “मंगलवार (5 जुलाई) को प्रधानमंत्री मोदी का फोन आया था। जब से लालू जी एडमिट हुए हैं तब से लगातार मुख्यमंत्री भी जानकारी ले रहे हैं। राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी से भी हमारी बात हुई है। सब यही दुआ कर रहे हैं कि जल्द से जल्द लालू जी ठीक हो जाएँ।”

गौरतलब है कि बीते रविवार, 3 जुलाई की शाम को लालू प्रसाद यादव राबड़ी आवास में सीढ़ी से उतरने के दौरान गिर गए थे। इससे उनके कमर और कंधे में चोट आई थी। गिराने की वजह से लालू यादव के दाएँ कंधे में माइनर फ्रैक्चर बताया गया था। इसके बाद 4 जुलाई की सुबह उन्हें पटना के पारस अस्पताल में भर्ती करवाया गया।

SC/ST आरक्षण लागू नहीं कर रहा जामिया, आयोग ने कुलपति नजमा अख्तर को किया तलब: दलित शिक्षक से कहा – बर्तन धो, चाय बनाओ

जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय की वॉइस चांसलर नजमा अख्तर मुश्किलों में घिर गई हैं। उन्होंने 1 जुलाई 2022 को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने पूछताछ के लिए समन जारी किया है। आरोप है कि विश्वविद्यालय नियुक्तियों और प्रमोशन में कानूनन अनुसूचित जनजाति/ जाति के लोगों को मिलने वाले आरक्षण को लागू ही नहीं कर रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन को इस जानबूझकर लागू नहीं करने का आरोप है। इसी मामले में 19 जुलाई को कुलपति जनमा अख्तर को तलब किया गया है।

जातिगत अत्याचार का है मामला

दरअसल, विश्वविद्यालय में ही काम करने वाले हरेंद्र कुमार नाम के व्यक्ति आयोग में शिकायत कर नियुक्तियों में आरक्षण संबंधी नियमों का पालन नहीं करने का आरोप लगाया था। अनुसूचित जाति से आने वाले कुमार ने विश्वविद्यालय के अधिकारियों पर भेदभाव करने का आरोप लगाया है। उनकी नियुक्ति यूनिवर्सिटी द्वारा संचालित एक स्कूल में अतिथि कंप्यूटर शिक्षक के रूप में हुई थी। उनका आरोप है कि विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने उनके खिलाफ साजिश रची और बाद में उन्हें अवैध तरीके से नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। इसी मामले को लेकर पिछले साल 2021 में भी आयोग ने वीसी को तलब किया था।

जामिया की कुलपति को आयोग द्वारा भेजा गया समन

आयोग को की गई शिकायत में हरेंद्र कुमार ने आरोप लगाया कि जिस स्कूल में वो कार्यरत थे, वहाँ की प्रधानाचार्य ने एक महिला शिक्षक के साथ मिलकर उनके खिलाफ साजिश रची। कुमार के वकील सुशांत ने आरोप लगाया है कि कुमार को स्कूल के प्रिंसिपल के लिए चाय बनाने और बर्तन धोने जैसे काम करने के लिए कहा गया था। उन्होंने कहा,”शिकायत में जाति और धर्म आधारित भेदभाव गहराई से अंतर्निहित था।” हालाँकि, इसे अपना और अपने पद का अपमान बताते हुए हरेंद्र ने ऐसा करने से इनकार कर दिया तो उनके खिलाफ स्कूल की ही महिला शिक्षक को परेशान करने का झूठा आरोप जड़ा गया।

हरेंद्र की शिकायत की जाँच के लिए आयोग ने तीन सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया। समिति की रिपोर्ट को सौंपे जाने के बाद प्राचार्य द्वारा दायर शिकायत को वापस ले लिया गया। लेकिन इस प्रक्रिया को पूरा होने में चार साल का लंबा वक्त लगा और इस दौरान कुमार को झूठे कलंक के साथ जीना पड़ा।

खुद पर लगे आरोपों को लेकर कुमार कहते हैं, “मुझे प्रिंसिपल के कक्ष में बचे हुए बर्तन धोने और उनके और उनके मेहमानों के लिए चाय तैयार करने के लिए कहा गया था। प्रिंसिपल मुर्सलीन हर छोटी-छोटी बात पर मुझे ये कहकर नीचा दिखा रहे थे कि मैंने मुस्लिम की एक सीट पर कब्जा कर लिया है। मैं स्कूल में रहने के लायक नहीं हूँ, क्योंकि मैं एक हिंदू हूँ और वह भी एक अनुसूचित जाति। वो अक्सर कहते थे कि विश्वविद्यालय प्रशासन में उनके बड़े कनेक्शन हैं और अगर मैं उनकी बातें मानने से इनकार करता हूँ तो वो मुझे बाहर करवा देंगे।”

कुमार ने ये भी आरोप लगाया कि एक बार तो उन्हें अपने मोबाइल पर अश्लील वीडियो डाउनलोड करने के लिए मजबूर किया, जिससे उन्होंने इनकार कर दिया। कुमार ने कहा, “उन्होंने (प्रिंसिपल) ने मुझे जाति सूचक गालियाँ दी और कहा कि कमीने ‘चमार’ मैं तेरा करियर तबाह कर दूँगा। हालाँकि, बाद में स्कूल के कुछ शिक्षकों के बीच-बचाव के बाद मामला शांत हुआ।”

मामले के शांत होने के बाद हरेंद्र कुमार को लगा कि मामला शांत हो गया है, लेकिन आश्चर्यजनक ढंग से एक महिला शिक्षक ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। कुमार ने कहा, “मुझसे जबरदस्ती अलग तरीके के माफीनामे पर हस्ताक्षर करवाया गया। मेरी नौकरी खत्म करने की धमकी दी गई। मैं अपने परिवार में इकलौता कमाने वाला हूँ, इस कारण से उन्होंने जहाँ भी हस्ताक्षर करने के लिए कहा। वहाँ मैंने कर दिया। इसके बाद गैर कानूनी तरीके से मुझे टर्मिनेशन लेटर थमा दिया गया।”

विश्वविद्यालय के अधिकारियों द्वारा टर्मिनेशन के बारे में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी जा रही थी, जिसके बाद कुमार ने पुलिस में शिकायत करने का फैसला किया। हालाँकि, पहले तो वो ऐसा नहीं कर पाए, लेकिन बाद में साकेत कोर्ट के आदेश के बाद उनकी एफआईआर दर्ज की गई। इसके साथ ही उन्होंने एनसीएससी में शिकायत भी दर्ज कराई। इसके साथ ही कुमार ने आरोप लगाया है कि आरोपित प्रिंसिपल उनके गाँव भी गया था और वहाँ उसने उनके माता-पिता को धमकाया कि वो उन्हें केस को वापस लेने को कहें।

नियुक्तियों और प्रमोशन में आरक्षण खत्म करने का आरोप

जामिया मिल्लिया इस्लामिया को केंद्र सरकार फंडिंग करती है। ऐसे में अब कुमार की शिकायत के बाद नियुक्तियों और प्रमोशन में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण को लागू नहीं करने के मामले में जाँच के दायरे में है।

जामिया की कुलपति को आयोग द्वारा जारी किया गया नोटिस

दिल्ली हाई कोर्ट में अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थानों के राष्ट्रीय आयोग (एनसीएमईआई) के आदेश को चुनौती देने वाला एक मामला लंबित है। आयोग ने ही 2011 में विश्वविद्यालय को धार्मिक अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा दिया था। एनसीएमईआई ने कहा था, “जामिया की स्थापना मुस्लिमों ने मुस्लिमों के फायदे के लिए की थी। इसने मुस्लिम अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान के रूप में अपनी पहचान कभी नहीं खोई।” इसमें कहा गया है, “विश्वविद्यालय अनुच्छेद 30 (1) राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थान अधिनियम की धारा 2 (जी) के साथ कवर किया गया है।”

हालाँकि, इस आदेश के तुरंत बाद दिल्ली हाई कोर्ट में तुरंत इसे चुनौती दी गई। लंबित मामले के बावजूद विश्वविद्यालय ने 2011 के एनसीएमईआई आदेश का हवाला देते हुए 2014 में अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के आरक्षण और धर्म-आधारित नियुक्तियों और आरक्षणों को मंजूरी दे दी।

इस मसले पर ऑपइंडिया से बात करते हुए कुमार के वकील ने कहा कि इसी तरह के मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक और मामला लंबित है। शीर्ष अदालत और दिल्ली उच्च न्यायालय में लंबित दो मामलों में कानून के अनुसार आरक्षण के तहत अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति समुदाय के उम्मीदवारों की नियुक्ति और पदोन्नति पर रोक लगाने का कहीं भी आदेश नहीं है। कुमार ने हालाँकि, लंबित मामलों पर कोई निर्देश नहीं माँगा, लेकिन आयोग से शिक्षण और गैर-शिक्षण दोनों पदों पर नियुक्ति और पदोन्नति में एससी/एसटी समुदाय के आरक्षण को बहाल करने की माँग की है।

संविधान के अनुच्छेद 338 के अनुसार, आयोग को संविधान के तहत और सरकार द्वारा पारित किसी भी कानून के तहत अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों को प्रदान किए गए सुरक्षा उपायों से संबंधित सभी मामलों की जाँच और निगरानी के लिए उचित कदम उठाने का अधिकार है।

जामिया को अल्पसंख्यक का दर्जा देने केंद्र ने किया था विरोध

2018 में केंद्र सरकार ने पिछली सरकार द्वारा जमा किए गए हलफनामे के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में एक एफिडेविट फाइल कर एनसीएमईआई द्वारा जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय को अल्पसंख्यक का दर्जा दिए जाने का विरोध किया था।

जामिया में डेमोग्राफिक चेंज पर चिंता

पिछले साल 2021 स्वराज्य पत्रिका में एक रिपोर्ट पब्लिश हुई थी, जिसमें विश्वविद्यालय में डेमोग्राफिक चेंज की ओर इशारा किया गया था। इसके मुताबिक, एडमिशन में 50% सीटें मुस्लिम छात्रों के लिए आरक्षित हैं, जहाँ प्रत्येक कार्यक्रम में 30% सीटें मुस्लिम आवेदकों के लिए आरक्षित हैं, 10% मुस्लिम महिला आवेदकों के लिए और 10% ओबीसी या ओबीसी मुस्लिमों व अनुसूचित जनजाति या एसटी के लिए आरक्षित हैं।

इसके अलावा, जामिया स्कूल से कक्षा 10 और कक्षा 12 की परीक्षा उत्तीर्ण करने वालों के लिए 5% सीटें आरक्षित हैं। अन्य 5% कश्मीर के छात्रों के लिए आरक्षित हैं। इसी तरह, 10% सीटें विदेशों के छात्रों के लिए और 5% दिव्यांग छात्रों के लिए आरक्षित हैं। प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह से मुस्लिम छात्रों के पक्ष में है।

‘महुआ मोइत्रा आप कमाल हो’ : स्वरा भास्कर ने ‘काली’ पर ठोकी पीठ, शशि थरूर ने भी हिंदुओं को दिया ‘उपदेश’

माँ काली को माँस-मदिरा का सेवन करने वाली हिंदुओं की देवी बताने के बाद तृणमूल कॉन्ग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ भोपाल में प्राथमिकी दर्ज हुई है। धार्मिक भावनाएँ आहत करने के आरोप में उनके विरुद्ध आईपीसी की धारा 295 ए के तहत कार्रवाई की गई है।

महुआ के खिलाफ शिकायत होने के बाद अब उनके समर्थन में लिबरल अपने ट्वीट कर रहे हैं। हिंदू देवी का पर की गई टिप्पणी सुनने के बाद स्वरा भास्कर ने महुआ के लिए कहा, “तुम जबरदस्त हो महुआ। तुम्हारी आवाज और मजबूत हो!”

इसी  तरह शशि थरूर ने कहा, “दुर्भानपूर्ण ढंग से गढ़े गए विवाद से मैं अंजान नहीं हूँ लेकिन महुआ पर होते हमलों से हैरान हूँ जो कि उस बात के लिए किए जा रहे हैं जो हर हिंदू जानता है कि हमारे पूजा के ढंग राज्यों के हिसाब से भिन्न हैं। आप देवी को क्या भोग लगाते हैं ये देवी से ज्यादा आपके बारे में बताता है।”

उन्होंने कहा, “हम लोग उस मुकाम पर पहुँच गए हैं जहाँ बिन किसी के आहत हुए धर्म के किसी पहलू पर बात नहीं होती। ये जाहिर सी बात है कि महुआ किसी का अपमान नहीं करना चाहती थीं। इस मामले को हल्के में लें और धर्म का अनुसरण लोगों को प्राइवेट में करने दें।”

बता दें कि महुआ मित्रा द्वारा काली माँ पर की गई टिप्पणी के बाद उनका नाम सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है। भाजपा ने उनकी गिरफ्तारी की माँग उठाई। सामान्य जन भी लोग कह रहे हैं कि महुआ को हिंदू भावना आहत करने के लिए अरेस्ट किया जाना चाहिए।

वही टीएमसी ने भी अपने आधिकारिक अकॉउंट से ट्वीट करके कहा कि जो भी महुआ ने माँ काली को लेकर कहा वो उनके निजी नजरिया है। इसका पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है जबकि कट्टरपंथी उन्हें सोशल मीडिया पर बंगाल की बहादुर महिला कह रहे हैं।

‘हमें प्रताड़ित कर रही केरल सरकार, उनसे लड़ने में असमर्थ’: NGO ने स्वप्ना सुरेश को नौकरी से निकाला, कहा – आतंकियों जैसा हो रहा बर्ताव

केरल सोना तस्करी (Kerala Gold Smuggling) मामले की मुख्य आरोपित स्वप्ना सुरेश (Swapna Suresh) को बुधवार (6 जुलाई, 2022) को नौकरी से निकाल दिया गया। वह पलक्कड़ में हाईरेंज रूरल डेवलपमेंट सोसाइटी (HRDS) एनजीओ के साथ काम कर रही थीं। एनजीओ ने स्वप्ना सुरेश को इस साल फरवरी में नियुक्त किया था। उन्होंने (NGO) राज्य सरकार पर आरोप लगाया है कि वह उनके साथ आतंकियों की तरह बर्ताव कर रही है। वहीं स्वप्ना सुरेश भी लगातार यह बात कहती रही हैं कि सीएम का नाम लेने के बाद से उन पर दबाव डाला जा रहा है।

एचआरडीएस सचिव अजीकृष्णन (Ajikrishnan) ने एक बयान में कहा कि मुख्यमंत्री पिनराई विजयन पर सोना तस्करी मामले में स्वप्ना सुरेश ने गंभीर आरोप लगाए थे। अब वे (NGO) राज्य सरकार से ‘लड़ने’ में असमर्थ हैं, इसलिए उन्होंने सुरेश को नौकरी से निकाल दिया है। बयान में आगे कहा गया है, “चार महीने पहले स्वप्ना सुरेश को नौकरी देने के कारण एचआरडीएस को राज्य सरकार द्वारा प्रताड़ित किया गया है।”

अजीकृष्णन ने कहा कि एचआरडीएस ने तय किया था कि सोने की तस्करी मामले के आरोपितों मुख्यमंत्री के पूर्व प्रधान सचिव एम शिवशंकर और स्वप्ना सुरेश में से एक को फिर से नौकरी पर रखा जाएगा। इसलिए स्वप्ना को नौकरी दिए जाने में कुछ भी गलत नहीं था।

बयान में यह भी कहा गया है, “हमें उम्मीद है कि जो राज्य सरकार स्वप्ना सुरेश की नियुक्ति के लिए एचआरडीएस के साथ आतंकियों जैसा बर्ताव कर रही है, वह एम शिवशंकर को बर्खास्त करके मिसाल कायम करेगी। इसके साथ ही सरकार खुद को इस आरोप से बचा सकती है कि वे शिवशंकर का बचाव नहीं कर रही है।”

उल्लेखनीय है कि मंगलवार (5 जुलाई, 2022) को स्वप्ना सुरेश ने कहा था, “मुझे गिरफ्तारी का कोई डर नहीं है। मैंने डरने के लिए कुछ भी नहीं किया। यह फर्जी केस है। यह शुरुआत में जमानती था, लेकिन बाद में इसे गैर जमानती बना दिया गया। मुझे इसका सामना करने दो।”

बताया जा रहा है कि स्वप्ना को 18 फरवरी, 2022 को संगठन ने सीएसआर महिला सशक्तिकरण विभाग की निदेशक के तौर पर नियुक्त किया था। अधिकारी ने कहा उनके नियुक्त होने के बाद से ही एनजीओ पर दबाव बनाया जाने लगा। उनके स्टाफ सदस्य भी काफी दबाव में आ गए हैं, क्योंकि पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है। बयान में यह भी कहा गया है कि उनकी सैलरी (सुरेश) एचआरडीएस के फंड से दी गई थी। एचआरडीएस इंडिया के उपाध्यक्ष केजी वेणुगोपाल, जो आरएसएस से जुड़े रहे हैं, उन्होंने कहा था कि जब तक वह उनके संगठन की कर्मचारी हैं, तब तक हम उनकी रक्षा करेंगे।

गौरतलब है कि सोना तस्करी मामले की मुख्य आरोपित स्वप्ना सुरेश ने 7 जून 2022 को मुख्यमंत्री विजयन पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। कोच्चि की अदालत में पेशी के बाद उसने मीडिया से बात करते हुए कहा था कि विजयन डिप्लोमेटिक बैगेज की आड़ में सोने की तस्करी में शामिल थे। उसने कहा था, “इस मामले में मैंने अदालत से केरल के मुख्यमंत्री, उनके पूर्व प्रमुख सचिव एम. शिवशंकर, विजयन की पत्नी कमला, बेटी वीणा, उनके अतिरिक्त निजी सचिव सी.एम. रवींद्रन, पूर्व नौकरशाह नलिनी नेट्टो और पूर्व मंत्री के.टी. जलील की संलिप्तता के बारे में भी बताया है। साथ ही मैंने कोर्ट में अपनी सुरक्षा की माँग करते हुए याचिका भी दायर की है।”

क्या है गोल्ड स्मगलिंग केस

केरल में सोना तस्करी का मामला जुलाई 2020 में सामने आया था। डिप्लोमेटिक बैगेज की आड़ में सोने की तस्करी का मामला स्वप्ना सुरेश से शुरू हुआ और फिर इसके तार मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के दफ्तर तक पहुँच गए। स्वप्ना सुरेश पर आरोप था कि उन्होंने फर्जी डाक्यूमेंट्स पेश कर 2 जुलाई 2020 को ‘डिप्लोमेटिक इम्युनिटी’ का प्रयोग कर खाड़ी देशों से 30 किलो सोने की तस्करी की। इसका खुलासा 6 जुलाई को तब हुआ, जब कस्टम के अधिकारियों ने यूएई कॉन्सुलेट के एक अधिकारी से पूछताछ की, जो PRO के पद पर तैनात था।

वकील अबु सोहेल ने नूपुर शर्मा की गिरफ्तारी के लिए डाली याचिका, सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नुपूर शर्मा की गिरफ्तारी की माँग को लेकर दाखिल याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। वकील अबु सुहेल द्वारा दाखिल इस याचिका में अधिकारियों को नूपुर शर्मा पर एक्शन लेने एवं उन्हें गिरफ्तार करने का आदेश देने की माँग की गई है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, याचिकाकर्ता अबू सोहेल ने याचिका में कहा कि नुपूर के खिलाफ FIR होने के बाद भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं किया है। इस याचिका में पुलिस से मामले में निष्पक्ष और स्वतंत्र जाँच की माँग की गई है। इसके अलावा इस अर्जी में हेट स्पीच मामले तहसीन पूनावाला के फैसले को लागू करने की माँग की गई है।

वहीं इस मामले में न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी और न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी की अवकाशकालीन पीठ ने याचिकाकर्ता अबु सोहेल को रजिस्ट्रार के समक्ष इसका उल्लेख करने की सलाह दी। इस पर वकील वहाँ रजिस्टर होने की बात बताते हुए कहा कि वहाँ मिले डेट के अनुसार उच्चतम न्यायालय 11 जुलाई को सुनवाई कर सकता है।

बता दें कि इससे पहले मंगलवार (5 जुलाई, 2022) को पूर्व न्यायाधीशों और IAS अधिकारियों ने नूपुर शर्मा के खिलाफ उच्चतम न्यायालय की हालिया टिप्पणियों की निंदा की और आरोप लगाया कि शीर्ष अदालत ने इस मामले में ‘लक्ष्मण रेखा’ पार कर दी। 15 पूर्व न्यायाधीशों, अखिल भारतीय सेवा आईएएस के 77 पूर्व अधिकारी और 25 अन्य लोगों ने कहा, “न्यायपालिका के इतिहास में, ये दुर्भाग्यपूर्ण टिप्पणियाँ बेमेल हैं। इस मामले में तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाने का आह्वान किया जाता है।”

वहीं इसके जवाब में वकीलों के एक संगठन ऑल इंडिया बार एसोसिएशन ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिख कर सुप्रीम कोर्ट द्वारा नूपुर शर्मा पर की गई हालिया टिप्पणी का समर्थन भी किया है। एसोसिएशन के चेयरमैन आदिश अगरवाला ने पत्र लिखकर कहा है कि जो भी याचिका सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के खिलाफ दाखिल की जा रही है, उनको खारिज करना चाहिए।

गौरतलब है कि टीवी डिबेट के दौरान बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता ने पैगंबर मोहम्मद पर विवादित टिप्पणी कर दी थी। इसके बाद पार्टी ने उन्हें प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया था। वहीं इस विवाद में अलग-अलग राज्यों में दर्ज मामलों को दिल्ली ट्रांसफर करने की अपील लेकर नूपुर शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। जहाँ सुनवाई के दौरान न्यायाधीश सूर्यकान्त और पारदीवाला ने उनके खिलाफ तल्ख टिप्पणियाँ कीं और उदयपुर में कन्हैयालाल की हत्या का जिम्मेदार बताते हुए कहा कि उन्हें टीवी पर आकर देश से माफी माँगनी चाहिए।

‘बोल देना नशे में था…’: राजस्थान पुलिस का Video वायरल; अजमेर दरगाह के जिस खादिम ने माँगी नूपुर शर्मा की गर्दन, उसे बताया ‘बचाव का रास्ता’

राजस्थान पुलिस का एक नया वीडियो वायरल हो रहा है, जिसके बाद उस पर इस्लामी कट्टरवादियों से मिले होने के आरोप लगाए जा रहे हैं। इसमें राजस्थान पुलिस सलमान चिश्ती को गिरफ्तार कर के ले जा रही है। साथ ही ‘आ जाओ’ की आवाजें आ रही हैं। वीडियो में कोई कहता है, “हम साथ में ही हैं, चिंता मत कर।” इसमें पुलिस वाले ‘चलो-चलो, बेफिकर रह’ भी कह रहे हैं। साथ ही पूछते हैं, “कौन सा नशा कर रखा था वीडियो बनाते समय?”

इसके बाद पुलिस वाले सलमान चिश्ती को सलाह देते हैं कि बोल देना, नशे में था। राजस्थान पुलिस ने अपने बयान में भी कहा था कि खादिम भड़काऊ बयान देने वक्त नशे में था। वो हिस्ट्रीशीटर है और उस पर 13 मामले दर्ज हैं, इसके बावजूद उसके लिए राजस्थान पुलिस की सहानुभूति लोगों की समझ से बाहर है। राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस की सरकार है। अजमेर पुलिस बार-बार जोर दे रही है कि वो नशे में था।

वायरल वीडियो में सलमान चिश्ती ने कहा था, “कसम है मुझे पैदा करने वाली मेरी माँ की, मैं उसे सरेआम गोली मार देता। मुझे मेरे बच्चों की कसम, मैं उसे गोली मार देता और आज भी सीना ठोक कर कहता हूँ जो भी नुपुर शर्मा की गर्दन लाएगा, मैं उसे अपना घर दे दूँगा और रास्ते पर निकल जाऊँगा। ये वादा करता है सलमान।” इसके अलावा, उसने खुद को ‘ख्वाजा का सच्चा सिपाही’ बताते हुए मुस्लिमों को भड़काने की कोशिश की थी।

भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने इसे सीएम अशोक गहलोत का हिन्दू विरोधी चेहरा का सबूत करार दिया। उन्होंने वीडियो साझा करते हुए बताया कि खादिम सलमान चिश्ती कह रहा है कि वो नशा नहीं करता, लेकिन इसके बावजूद राजस्थान पुलिस उससे कहती है, “बोल देना नशे में था, ताकि बचाया जा सके।” एक महिला की गर्दन पर इनाम रखने वाले व्यक्ति के साथ राजस्थान पुलिस की इस मिलीभगत के बाद कॉन्ग्रेस के मुस्लिम तुष्टिकरण पर भी सवाल उठ रहे हैं।

सिगरेट वाली ‘काली’, लक्ष्मी बम, गाड़ी को धक्का लगाते भगवान शंकर… मनोरंजन के नाम पर देवी-देवताओं का मजाक, इस हिंदू घृणा का इलाज क्या

मनोरंजन के नाम पर हिंदू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाना फिल्ममेकर्स का शौक रहा है। कहानी में कैसे भगवान शिव, दुर्गा और काली की एंट्री करानी है, हिंदुओं की आस्था से कैसे खिलवाड़ करना है, इसे वह बखूबी जानते हैं। लीना मणिमेकलई (Leena Manimekalai) की डॉक्यूमेंट्री ‘काली’ इसका ताजा नमूना है।

तमिलनाडु के मदुरै में जन्मी लीना कनाडा की टोरंटो बेस्ड फिल्ममेकर हैं। ट्विटर (Twitter) ने लीना के उस पोस्ट पर रोक लगा दी है, जिसे उन्होंने 2 जुलाई 2022 को शेयर किया था। इस पोस्टर में एक्ट्रेस को ‘काली’ के रूप में सिगरेट पीते हुए दिखाया गया है, जिसने एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में LGBTQ का झंडा थाम रखा है। हालाँकि, लीना पहली बार विवादों में नहीं हैं। उन्होंने साल 2002 में शॉर्ट डॉक्यूमेंट्री ‘मथम्मा’ से अपने करियर की शुरुआत की थी। काली के अलावा उनकी पिछली कई फिल्में जैसे ‘सेंगडल’, ‘पराई’, ‘व्हाइट वैन स्टोरीज’ भी विवादों का हिस्सा रह चुकी है।

हिंदू देवी-देवताओं को इस तरह चित्रित करने का भी यह पहला मामला नहीं है। डायरेक्टर अनुराग बासु भी अपनी फिल्म ‘लूडो’ में इसका पूरा ख्याल रखा गया था कि कैसे हिंदुओं को नीचा दिखाना है और उनकी भावनाओं को आहत करना है। ढाई घंटे की बेसिरपैर की फिल्म ‘लूडो’ का एक ही मकसद था। सीधे-सीधे हिन्दू धर्म का उपहास। सांकेतिक रूप से पूरी फिल्म में हिन्दू संस्कृति को चोट पहुँचाने की कोशिश की गई थी। इस फिल्म में हिन्दू त्रिदेवों का बेशर्मी से मजाक बनाया गया था और उसको बिलकुल उसी ढंग से ही फिल्माया गया था, जिस तरीके से आमिर खान की ‘पीके’ में दिखाया गया था। स्वांग रचने वाले तीन लोग ब्रह्मा, विष्णु, महेश का भौंडा सा रूप धरे सड़क पर नाच-कूद कर रहे थे, जिन्हें देख कर फिल्म का हीरो आदित्य रॉय कपूर वितृष्णा के भाव से मुँह बना रहा था। एक सीन में तो भगवान शंकर और महाकाली गाड़ी को धक्का भी देते दिखे थे।

अक्षय कुमार की फिल्म ‘लक्ष्मी बम’ (विरोध के बाद नाम बदलकर लक्ष्मी किया), आमिर खान की फिल्म ‘पीके’ समेत अन्य कई फिल्मों में भी भावनाओं को ठेस पहुँचाया गया था। वर्ष 2021 में निर्देशक अली अब्बास की वेब सीरीज ‘तांडव’ में भगवान शिव और राम को लेकर विवादित सीन और डायलॉग्स दिखाए गए थे। एक्टर सैफ अली खान-स्टारर इस सीरीज को इसके कारण काफी विरोध भी झेलना पड़ा था।। बावजूद इसके हिन्दू देवी-देवताओं का फिल्मों में मजाक उड़ाना बंद नहीं हुआ। इससे स्पष्ट है कि यह हिंदुओं की संस्कृति पर हमले की एक सोची-समझी साजिश है। आधुनिकता, सृजनात्मकता की आजादी के नाम पर ऐसी चीजों को परोसा जा रहा है, जिसका कोई औचित्य नहीं है।

यह भी साफ है कि ऐसा जानबूझकर किया जाता है। यदि ऐसा नहीं होता तो कभी किसी भी फिल्ममेकर ने अन्य मजहब के खिलाफ ऐसा लिखा या फिल्माया क्यों नहीं है। उन्हें पता है कि हिंदू देवी-देवताओं का उपहास करना सरल है। विवाद होने पर मुफ्त प्रमोशन और कमाई के चांस भी बढ़ जाते हैं। ज्यादा तूल पकड़ने पर कभी कभार नाम बदलकर या सीन को कट कर रिलीज कर दिया जाता है। लेकिन, इन सबमें उन्हें वह जोखिम नहीं झेलना होता है जो अन्य मजहब पर टिप्प्णी करने के कारण पैदा होता है।

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या हिंदू देवी-देवताओं को अपमानित करने के लिए माफी माँगना और टाइटल बदल लेना ही काफी है? आखिर क्यों बार-बार ऐसी फिल्मों को बनाया जाता है, जिसमें हिंदुओं की आस्था का मजाक उड़ाया जाता है। ऐसे में जब तक इस तरह की विवादित फिल्मों का निर्माण करने वालों, कलाकारों पर हमेशा के लिए बैन नहीं लगेगा, तब तक हिंदू संस्कृति का मजाक बनता रहेगा और हिन्दी फिल्मों में देवी-देवताओं को फूहड़ स्वांग रचा कर पेश किया जाता रहेगा।

बम, बंदूक, तलवार से कभी खत्म नहीं होगा हिंदुत्व: BJP नेता दिलीप घोष, पूछा- जब हजारों का कत्लेआम हुआ, तब नूपुर शर्मा थीं क्या

बंगाल में भाजपा के उपाध्यक्ष दिलीप घोष ने हाल में इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2022 में नुपूर शर्मा के ऊपर बात की। उन्होंने एक टीवी डिबेट शो के बाद देश में भड़के कट्टरपंथियों को लेकर कहा कि जो लोग तर्कों से नहीं जीत पाते वो बहस को तलवार से जीतने की कोशिश करते हैं। हिंदुत्व कभी तलवार, बम या बंदूक से नहीं खत्म हो सकता। इतिहास में बहुत कोशिशें हुई लेकिन जीत कोई नहीं पाया।

ट्विटर पर साझा की गई वीडियो में देख सकते हैं कि जब उनसे नुपूर शर्मा पर सवाल किया जाता है तो वह पूछते हैं, “अभी जो हो रहा है वो हो रहा है लेकिन स्वतंत्रता से पहले जो होता था तब भी नुपूर शर्मा थीं क्या? इतने सारे कत्लेआम किए गए। हजारों लोगों को मार दिया गया।”

इस पर एंकर ने उनसे पूछा कि क्या वो ये सब जस्टिफाई करने की कोशिश कर रहे हैं। इस पर दिलीप घोष ने कहा,

ये सब जिस विचारधारा के कारण हो रहा है उसे बोलने से लोग डरते हैं। नुपूर का विषय कोर्ट में है। अगर गलत बात कही है तो उसका फैसला वहाँ पर हो जाएगा। आपके पास तर्क है तो उस तर्क को काटिए। चौड़े में आओ, टीवी चैनल पर बताओ गलत क्या कहा है। लेकिन आप जानते हैं सही कहा है तो आपका कपड़ा उतर जाएगा। विचारधारा को कोई तलवार से नहीं खत्म कर सकता। अगर ऐसा होता तो हजार साल राज हुआ तो हिंदुत्व खत्म हो जाता। क्यों नहीं हुआ?बम, बंदूक, तलवार सब चले। हजार लोग कत्लेआम हुए। खिलजी से लेकर नादिर शाह ने पूरे देश में खून की नदी बहा दी। लेकिन हिंदू खत्म हुए क्या? आज भी 100 करोड़ यही हैं। विचारधारा को खत्म नहीं किया जा सकता। आप खत्म हो जाएँगे। ये लोग तर्क से डरते हैं कि उन्होंने जो बोला सच था या गलत था ये सब चर्चा में साबित होना चाहिए।

बता दें कि इस चर्चा के दौरान घोष ने प्रदेश सीएम ममता बनर्जी पर धर्म दूषित करने का इल्जाम लगाया। उन्होंने कहा, “हमारा धर्म सिखाता है कि अपने धर्म का आचरण करो और दूसरे के धर्म का आदर। यहाँ उलटा होता है। हमारी मुख्यमंत्री हिंदू ब्राह्मण परिवार से हैं। पर पता नहीं वो आचरण क्या करती हैं। शाम में वो जाकर नमाज पढ़ती हैं। रोजे में भर पेट खाकर इफ्तार करती हैं। वह दूसरे के धर्म को भी दूषित करती हैं और अपने धर्म को भी दूषित करती हैं।”

जीसस क्राइस्ट पर टिप्पणी, केरल के मौलवी के खिलाफ केस दर्ज: BJP नेता ने की थी शिकायत, कहा – ईसाइयों की भावनाएँ आहत हुईं

केरल में बुधवार (6 जुलाई 2022) को कोच्चि की साइबर पुलिस ने ईसा मसीह पर अपमानजनक टिप्पणी के जरिए ईसाई समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के मामले में वसीम अल हिकामी (Waseem Al Hikami) नाम के एक इस्लामिक मौलवी के खिलाफ केस दर्ज किया है। आरोपित मौलवी के खिलाफ भाजपा नेता अनूप एंटनी ने पुलिस में शिकायत की थी। इसके बाद ये एक्शन लिया गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोपित मौलवी मलप्पुरम जिले के कोंडोट्टी का रहना वाला है। पिछले साल दिसंबर 2021 में आरोपित मौलवी ने यूट्यूब पर एक वीडियो अपलोड किया था। इस वीडियो में कथित तौर पर ईसाईयों को लेकर कई अपमानजनक टिप्पणियाँ की थी। इसी मामले में भाजपा नेता अनूप एंटनी ने शिकायत की थी। अनूप एंटनी भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के पूर्व राष्ट्रीय सचिव हैं।

शिकायत में बीजेपी नेता ने आरोप लगाया है कि मौलवी वसीम अल हिकामी ने ईसा मसीह के जन्म को लेकर घटिया टिप्पणी की थी। उन्होंने इसमें कहा, “कई लोगों ने उन टिप्पणियों के बारे में शिकायत की थी, जो यीशु मसीह के लिए अपमानजनक थीं, लेकिन कोई कानूनी कार्यवाही नहीं की गई थी। उसके बाद मैंने सीधे राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) से शिकायत कर एर्नाकुलम साइबर सेल में भी एक याचिका दर्ज की थी। जिस तरह की मुझे उम्मीद थी, वैसी प्रतिक्रिया तो नहीं मिली, जिसके बाद मैंने एर्नाकुलम के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट से संपर्क किया और माननीय अदालत ने निर्देश दिया कि मामले को संज्ञान में लेने की जरूरत है। जिसके बाद राज्य पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की।”

बीजेपी नेता ने कहा कि वो इस मामले में तब तक कार्रवाई करते रहेंगे, जब इसका समाधान नहीं हो जाता। उल्लेखनीय है कि इस मामले में केरल पुलिस ने 28 जून को एर्नाकुलम के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट के निर्देश पर धारा इंडियन पीनल कोड की धारा 153-A (विभिन्न धार्मिक समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), 295A (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना) और 505 (सार्वजनिक शरारत के लिए अनुकूल बयान) के तहत केस दर्ज किया था।

पहले भी दर्ज हुआ था केस

गौरतलब है कि इससे पहले भी आरोपित इस्लामिक मौलवी के खिलाफ केस दर्ज हुआ था। इसी साल जनवरी 2022 में हाबिल फ्रांसिस नाम के एक शख्स की शिकायत पर केस दर्ज हुआ था। एंटनी का आरोप है कि केरल पुलिस ने इसी तरह के मामलों में पीसी जॉर्ज को गिरफ्तार करने में बड़ी तेजी दिखाई थी, लेकिन इस मामले में कुछ नहीं किया। उन्होंने दोहराया कि वो वसीम अल हिकामी के खिलाफ मामले को आगे बढ़ाएँगे।

BJP नेता के परिवार को उड़ाने की धमकी, कन्हैया लाल की हत्या पर कहा था- जिहादियों का बहिष्कार करो: नूपुर शर्मा का फोटो लगाने वाले वकील टारगेट पर

उदयपुर में कन्हैया लाल और अमरावती में उमेश कोल्हे की बर्बर हत्याओं के बाद से इस्लामवादियों द्वारा धमकी दिए जाने के मामले लगातार सामने आ रहे है। गुजरात के एक अहमदाबाद में वकील कृपाल रावल को हत्या की धमकी दी गई है। वहीं, राजस्थान के बाड़मेर में बीजेपी आईटी सेल संयोजक भूर सिंह राजपुरोहित को परिवार समेत बम से उड़ाने की धमकी दी गई है।

अहमदाबाद के रहने वाले वकील कृपाल रावल (32) ने पिछले महीने नूपुर शर्मा की तस्वीर अपने व्हाट्सएप स्टेटस में लगाई थी। ये इमेज केवल तीन मिनट के लिए अपलोड की गई थी। इसके बाद इसे उन्होंने हटा लिया था। लेकिन इसके बाद से उन्हें लगातार इस्लामवादी धमकियाँ दे रहे हैं। व्हाट्सएप स्टेटस हटाने के करीब दो घंटे बाद उन्हें व्हाट्सएप पर मैसेज आया। इसमें उन्हें गाली देते हुए नूपुर शर्मा को सपोर्ट करने का कारण पूछा गया।

इसके कुछ घंटों के बाद एक अज्ञात व्यक्ति ने उन्हें नूपुर शर्मा वाले मामले को लेकर हत्या की धमकी दी। इसके बाद रावल ने साबरमती पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आईपीसी की धारा 507 के तहत केस दर्ज किया है। उल्लेखनीय है कि 13 जून को रावल ने नूपुर शर्मा के प्रति अपना समर्थन जताने के लिए उनकी इमेज को स्टेटस बनाया था।

इसी तरह से राजस्थान में बीजेपी नेता भूर सिंह राजपुरोहित को धमकी मिली है। उन्हें अज्ञात लोगों ने फोन पर 24 घंटे के अंदर मारने की धमकी दी। फोन करने वाले ने उनकी पूरी फैमिली को खत्म करने की बात भी कही। उसने कहा कि घर में घुसकर बम विस्फोट करूँगा।

घटना के बाद जिले के एसपी से मिलकर बीजेपी नेता ने सुरक्षा की गुहार लगाई। एसपी दीपक भार्गव के मुताबिक, फिलहाल बीजेपी नेता की सुरक्षा में एक गनमैन को लगा दिया गया है। भूर सिंह के मुताबिक, 4-5 दिनों से अलग-अलग नंबरों से दर्जनों फोन आ चुके हैं। उन्होंने बताया कि कन्हैया लाल की हत्या के बाद एक फेसबुक पोस्ट में उन्होंने जिहादियों का बहिष्कार करने की बात कही थी। इसमें असंवैधानिक या गैर कानूनी शब्दों का प्रयोग नहीं किया। केवल इतना लिखा कि जिहादियों का बहिष्कार करो। इसके बाद से ही धमकी आने का सिलसिला शुरू हो गया।