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उद्धव ठाकरे ने लाइव आकर दी बाला साहब की दुहाई, CM कुर्सी के साथ शिवसेना छिनने का भी खतरा: एकनाथ शिंदे चुने गए विधायक दल के नेता, नया चीफ व्हिप भी

शिवसेना के बागी नेता एकनाथ शिंदे ने पार्टी द्वारा विधायकों को दी गई चेतावनी को नज़रअंदाज़ करते हुए अपना चीफ व्हिप नियुक्त कर लिया है। एकनाथ शिंदे ने शिवसेना के कदम को अवैध बताते हुए कहा है कि उनके पास 46 विधायकों का समर्थन है। उधर शिवसेना के 34 विधायकों ने एक प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसे उद्धव सरकार में मंत्री रहे अनिल देशमुख और नवाब मलिक पर भ्रष्टाचार के आरोपों पर असंतोष जताया है।

उधर उद्धव ठाकरे ने मीडिया को सम्बोधित करते हुए कहा है कि वो इस पर ज्यादा चर्चा नहीं करना चाहते हैं कि हिंदुत्व के लिए उनकी पार्टी ने क्या-क्या किया है। उन्होंने अपने पिता बाल ठाकरे की दुहाई दी।

14वीं महाराष्ट्र विधानसभा के इन 34 सदस्यों ने एकनाथ शिंदे को शिवसेना के विधायक दल का नेता घोषित कर दिया है। विधायकों ने अपने हस्ताक्षरित प्रस्ताव में कहा कि 2019 विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी का भाजपा के साथ गठबंधन था, लेकिन उसके बाद NCP-कॉन्ग्रेस के साथ जाने के कारण और भ्रष्टाचार के तमाम मामलों के सामने आने के कारण कार्यकर्ताओं में असंतोष है। पुलिस पोस्टिंग और प्रशासन में भी भ्रष्टाचार की बात कही गई है।

साथ ही इन विधायकों ने यह भी कहा कि कॉन्ग्रेस-NCP के साथ जाने के कारण उन्हें विपक्ष के हाथों व्यक्तिगत और राजनीतिक रूप से प्रताड़ना का सामना भी करना पड़ा है। हालाँकि, शिवसेना के विधायकों को तोड़ने के लिए 37 के नंबर की आवश्यकता है। ये भी खबर आ रही है कि उद्धव ठाकरे कोविड-19 नेगेटिव पाए गए हैं और उन्हें कोरोना नहीं है। फ़िलहाल एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस विधायक असम के गुवाहाटी स्थित रेडिसन ब्लू होटल में रुके हुए हैं।

इन 34 विधायकों ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को भेजे गए पत्र में एकनाथ शिंदे को अपना समर्थन दिया है। एकनाथ शिंदे ने भारत गोगावले को शिवसेना का चीफ का चीफ नियुक्त किया है। शिवसेना ने अपने पत्र में उन्हें बैठक में उपस्थित रहने के लिए कहा गया है। पत्र में कहा गया है कि जो भी विधायक अनुपस्थित रहेगा, ये समझा जाएगा कि उसने स्वेच्छा से शिवसेना छोड़ दी है। साथ ही बिना किसी पूर्व सूचना या वैध कारण के अनुपस्थित रहने वाले विधायकों को संवैधानिक प्रक्रिया के तहत उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द कराने की धमकी भी दी गई है।

‘मुस्लिम-OBC-दलित-ST… फर्क नहीं पड़ता आप फासीवादी पार्टी से हैं’: द्रौपदी मुर्मू की राष्ट्रपति उम्मीदवारी पर शुरू हो गया लेफ्ट-लिबरल गैंग का रोना

एनडीए ने मंगलवार (21 जून 2022) को जैसे ही झारखंड की पूर्व राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाने का ऐलान किया है। तभी से उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर एक नकारात्मक माहौल बनाए जाने लगा है। जहाँ आज के मौजूदा राजनीतिक दौर में बीजेपी के इस राजनीतिक कदम की सामाजिक न्याय को प्राथमिकता देने की वजह से तारीफ होनी चाहिए थी और बड़े तबके में हो भी रही है। वहीं जाति आधारित राजनीति करने वाले कुछ दल, उनके नेता और समर्थकों के साथ ही इस्लामी और वामपंथी समूह थोड़े उखड़े हुए हैं। और कहीं न कहीं इस पूरे कदम को एक निम्नतम स्तर पर पहुँचाने के लिए भाषा और लिखने-बोलने की मर्यादा को तार-तार करते हुए सोशल मीडिया पर अपनी भड़ास निकाल रहे हैं।

हमने ऐसे लोगों के कुछ ट्वीट इकट्ठे किए हैं ताकि आप देख सकें कि बीजेपी के विरोध में ये सभी आदिवासी-वनवासी समाज के ही विरोध में उतर आए हैं। यहाँ तक कि अब अचानक से इनकी जनजाति पहचान को ही फासिज्म से जोड़कर हो हल्ला मचा रहे हैं।

किसी अभिषेक सिंह नाम के ट्विटर यूजर ने द्रौपदी मुर्मू की उम्मीदवारी में वनवासी या दलित समाज की उन्नति को ख़ारिज करते हुए लिखा, “आरएसएस का दलित या आदिवासी भी संघी है, इसलिए ऐसी उम्मीदवारी पर खुश होना बंद कीजिए।”

दिल्ली विश्वविद्यालय में हिंदी के प्रोफेसर अपूर्वानंद ने द्रोपदी मुर्मू को राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाए जाने पर तंज करते हुए लिखा, “एक मुस्लिम, ओबीसी, दलित, आदिवासी के रूप में आपकी पहचान से कोई फर्क नहीं पड़ता जब तक कि आप फासीवादी पार्टी के साथ हैं या काम करते हैं। आप इन समुदायों के लिए काम नहीं करते, केवल फासीवादियों को उन पर आधिपत्य जमाने में मदद करते हैं। या अपनी ऐसी एक पहचान के तौर पर आप अपनी कब्र खुद खोदते हैं।”

वहीं अपूर्वानंद के ट्वीट पर सवाल करते हुए अर्बन श्रिंक नाम के एक ट्विटर यूजर ने पूछा, “तो क्या सवर्ण हिंदुओं को फासीवादी पार्टी के लिए काम करने से छूट दी गई है, क्योंकि आपका ट्वीट केवल हाशिए की पहचान के लिए है!”

वहीं JNU की शोधछात्रा और खुद को अम्बेडकरवादी बताने वाली दीपिका सिंह ने भी अपनी भड़ास निकालते हुए लिखा, “कितना दुर्भाग्यपूर्ण है कि भारत को अपना पहला आदिवासी राष्ट्रपति मिलने जा रहा है, जो एक रूढ़िवादी पार्टी की पसंद है, जबकि तथाकथित प्रगतिशील दल अभी भी अपर कास्ट उम्मीदवारों को चुनने में लगे हुए हैं! क्या “प्रगतिशील” सवर्णों के लिए एक अवधारणा के स्तर पर ही प्रतिनिधित्व करना इतना कठिन है?

बाद में एक दूसरे ट्वीट में लोगों की ओर इशारा करते हुए दीपिका ने लिखा, “वह भी आरएसएस की कठपुतली होगी और आदिवासी समुदाय के लिए कुछ भी अच्छा नहीं करेगी। मुझे पता है दोस्तों। इसलिए मैंने ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ शब्द का उल्लेख किया। मेरा कहना था, एक आदिवासी को भारत का पहला आदिवासी राष्ट्रपति बनने में 70+ साल नहीं लगने चाहिए थे और वह भी भाजपा द्वारा चुना गया!”

वहीं किसी दलित लेनिनवादी विचारक अपने नाम में जोड़े हुए अनुभव सिंह नामक ट्विटर यूज़र ने लिखा, “द्रौपदी मुर्मू को प्रेसिडेंट उम्मीदवार के रूप में चुनकर भाजपा ने हाशिए पर खड़े समुदाय को बिना कोई राजनीतिक शक्ति प्रदान किए बिना एक समान हिंदू पहचान को आगे बढ़ाने के अपने प्रयासों में, प्रतिनिधित्व की राजनीति में महारत हासिल की है। फिर भी यह देखा जाना है कि क्या इस तरह के झाँसे को उन लोगों द्वारा उजागर किया जाएगा जिनके निशाने पर ऐसी पार्टियाँ हैं।”

आगे एक दूसरे ट्वीट में अपनी बात आगे बढ़ाते हुए अनुभव सिंह ने लिखा, “हालाँकि, यह सिर्फ पहचान की राजनीति नहीं है। क्षेत्रीय राजनीति भी मायने रखती है। वह ओडिशा से ताल्लुक रखती हैं, जो 22.5% आदिवासी आबादी वाला राज्य है और जहाँ दशकों से उच्च जाति पटनायक परिवार का वर्चस्व है। एक ऐसा क्षेत्र जहाँ बीजेपी का सीधा मुकाबला बीजद से है।”

वहीं तीसरे ट्वीट के थ्रेड में अनुभव सिंह ने लिखा, “हिंदुत्व बहुस्तरीय है और इसे जिस तरह से कई क्षेत्रीय पहचानों और उनकी अनूठी राजनीति के साथ तालमेल बिठाता है, उससे ध्यान हटाता है। यही इसकी सफलता की कुंजी है जबकि हम बायनेरिज़ में फँसे रहते हैं जो केवल एक बाहरी परत है।”

अनुभव सिंह के ही ट्वीट पर टिप्पणी करते हुए अनुराग वर्मा नाम के ट्विटर यूजर ने लिखा, “यही कारण है कि किसी भी पहचान का व्यक्तिगत प्रतिनिधित्व ज्यादा मायने नहीं रखता। अधिक से अधिक यह व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है लेकिन समुदाय के लिए शायद ही कभी। शायद हर क्षेत्र में, केवल सांकेतिक प्रतिनिधित्व के बजाय व्यवस्था में संरचनात्मक परिवर्तन की माँग करना महत्वपूर्ण है।”

बता दें कि ऐसे दो-चार नहीं बल्कि सोशल मीडिया पर कई लोग हैं जिन्हें द्रौपदी मुर्मू की उम्मीदवारी में आदिवासी, वनवासी या जनजाति समुदाय का हित नजर नहीं आ रहा है। बल्कि ऐसे लोग कहीं न कहीं उन्हें ख़ारिज करने और आलोचना में ही लगे हैं। ऐसे लोगों के लिए अब यहाँ सामाजिक न्याय नहीं बल्कि राजनीतिक एजेंडा ज़्यादा महत्वपूर्ण हो गया है।

गौरतलब है कि राष्ट्रपति पद के लिए द्रौपदी मुर्मू का नाम घोषित होने के बाद मुर्मू ने आज (22 जून 2022) सुबह मंदिरों के दर्शन किए। वह ओडिशा के मयूरभंज में रायरंगपुर जगन्नाथ मंदिर गईं। फिर वहाँ से वह शिव मंदिर पहुँची और इसके बाद उन्होंने आदिवासी पूजा स्थल जहिरा जाकर भी आशीर्वाद लिया।

वहीं एनडीए द्वारा मुर्मू को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद उनको जेड प्लस सेक्योरिटी मिल गई है। साथ ही एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है जो उनका नाम राष्ट्रपति पद के लिए भेजे जाने पर उनके मंदिर जाने के क्षण को गौरवान्वित करने वाला क्षण कह रहे हैं और उनकी हिन्दू छवि को देखकर अभी से उन्हें अपना राष्ट्रपति भी मान चुके हैं।

समुद्र में पेशाब किया तो देने होंगे ₹61000, साबुन-शैंपू पर भी बैन: स्पेन में Beach को बचाने के लिए प्रशासन ने लिए फैसले

स्पेन के वीगो नामक शहर में स्पेनिश रिजॉर्ट्स ने समुद्र में पेशाब करने वालों के ऊपर 645 पाउंड यानी ₹61 हजार रुपए का फाइन लगाने का निर्णय लिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार उत्तरी गैलिसिया क्षेत्र में बसे वीगो में अधिकारियों ने समुद्र को बचाने के लिहाज से ऐसा निर्णय लिया है।

अधिकारियों ने कहा है कि वह बीच के नजदीक पब्लिक टॉयलेट बनाएँगे। मगर, किसी कीमत पर बीच में पेशाब करने वालों को रियायत नहीं दी जाएगी। हालाँकि अभी ये बात साफ नहीं है कि इस बात का पता कैसे लगाया जाएगा कि किसने समुद्र में पेशाब किया है या किसने नहीं।

बताया जा रहा है कि स्पेन के समुद्र को सुरक्षित रखने के लिए कुछ अन्य नियम भी बनाए गए हैं। जैसे यहाँ आने वालों के लिए अपने साबुन और शैंपू लाना सख्त मना है और बर्तन आदि धोने का सवाल तो इस बीच पर उठता ही नहीं। अगर ऐसा करता कोई पाया गया तो उसे भी 620 पाउंड यानी 59, 534 रुपए देने होंगे।

इसके अलावा अच्छे पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए इस बीच पर धूम्रपान को बैन किया गया है। अधिकारी उम्मीद कर रहे हैं कि इस तरह के प्रतिबंध लगाकर वह तटीय क्षेत्र को प्रदूषण रहित रख सकेंगे। इसी तरह जो लोग बीच पर छुट्ठी मनाने आएँगे, अगर वह नंगे होकर बीच पर जाते हैं तो इसके लिए भी उन्हें फाइन देना होगा।

बता दें कि केवल बीच के नजदीक ही प्रतिबंध नहीं लगाए गए हैं। कई सी-साइड रेस्टोरेंट्स ने भी अपने बैन लगाए हैं। इनमें कपड़ों पर लगाया प्रतिबंध भी शामिल है। जैसे यहाँ फुटबॉल वाली जर्सी पहनकर या बिन शर्ट के आने की अनुमति नहीं है। इसके अलावा तैरने के लिए कपड़े, शॉर्ट्स आदि को भी रोडसाइड विक्रेताओं से खरीदना बैन है। सामने आई जानकारी के अनुसार बार्सेलोना और मल्लोर्का में अब तक सबसे तक जुर्माना लगा है।

दुनिया का सबसे हसीन चेहरा किसका, जिसने कोर्ट से कहा था- पति ने लात-घूँसे मारे, शराब की बोतल घुसेड़ी… एम्बर हर्ड की खूबसूरती पर साइंस की मुहर

हॉलीवुड अभिनेत्री एम्बर हर्ड (Amber Heard) हाल ही में पूर्व पति जॉनी डेप के साथ विवादों को लेकर सुर्खियों में थीं। अब वे चर्चा में हैं क्योंकि एक ब्रिटिश सर्जन का दावा है कि दुनिया में सबसे खूबसूरत या यूँ कहें कि परफेक्ट चेहरा एम्बर हर्ड का ही है। सर्जन ने फेस मैपिंग तकनीक के नतीजों को इस निष्कर्ष पर पहुँचने का आधार बताया है।

साइंस के आधार पर यह दावा करने वाले ब्रिटिश कॉस्मेटिक सर्जन हैं डॉक्टर जूलियन डि सिल्वा (Julian De Silva)। रिपोर्ट के अनुसार अपने रिसर्च में उन्होंने एम्बर हर्ड का चेहरा 91.85 फीसदी एक्यूरेट पाया। डॉ. सिल्वा ने फेस मैपिंग तकनीक का इस्तेमाल करते हुए 12 प्रमुख बिंदुओं का विश्लेषण किया। आँख, नाक, होंठ, ठुड्डी, जबड़े और चेहरे के आकार समेत विभिन्न फीचर्स का मूल्यांकन किया।

इस तकनीक के तहत चेहरे की सुंदरता का मूल्यांकन करने के लिए सबसे पहले चेहरे की लंबाई और चौड़ाई नापी जाती है। इसका आदर्श परिणाम लगभग 1.6 है। चेहरे की सुंदरता में इसकी समरूपता और अनुपात को अहम माना जाता है। चेहरे की खूबसूरती को मापने के लिए ब्यूटी ‘फी’ के ग्रीक गोल्डेन रेश्यो (Golden Ratio) का इस्तेमाल किया जाता है। हजारों सालों से इसे चेहरा मापने का सबसे अच्छा तरीका माना जाता है। इसी तकनीक के आधार पर हर्ड को सबसे खूबसूरत महिला बताया गया है। उनका चेहरा इस तकनीक के आधार पर 91.85 सटीक बैठता है।

बता दें कि वर्जीनिया की एक अदालत ने इस महीने की शुरुआत में कभी पति-पत्नी रहे हॉलीवुड स्टार जॉनी डेप और एक्ट्रेस एम्बर हर्ड के हाई-प्रोफाइल मानहानि केस में अपना फैसला सुनाया था। जॉनी डेप के पक्ष में फैसला सुनाते हुए सात सदस्यीय वर्जीनिया जूरी ने एक्ट्रेस को हर्जाने के तौर पर अपने पूर्व पति को 15 मिलियन डॉलर (1164142500 रुपए) देने का आदेश दिया था।

इस मामले की सुनवाई के दौरान एम्बर हर्ड ने जॉनी डेप पर यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि डेप नशीली दवाओं और शराब के नशे में उनका शारीरिक और यौन शोषण करते थे। इस दौरान वह ‘राक्षस’ बन जाते थे। दावा किया था कि 2015 में डेप ने उन्हें तीन दिनों तक बंधक बनाकर रखा था। इस दौरान उनको जमीन पर पटका। लात-घूँसों से मारा। उनके प्राइवेट पार्ट में शराब की बोतल घुसेड़ दी थी। एक के बाद एक कई बोतलें उनके ऊपर फेंकी और फिर फर्श पर टूटे हुए बोतलों पर उन्हें घसीटा भी था।

द्रौपदी मुर्मू की उम्मीदवारी से चर्चा में प्रतिभा पाटिल, देश की पहली महिला राष्ट्रपति के लिए कॉन्ग्रेस के मंत्री ने कहा था- इंदिरा के बर्तन धोती थी

राष्ट्रपति चुनाव के लिए भाजपा के नेतृत्व वाले ‘राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA)’ ने ओडिशा के रायरंगपुर की रहने वाली जनजाति समाज की द्रौपदी मुर्मू को उम्मीदवार घोषित किया है और उनकी जीत भी तय है, क्योंकि राज्य की सत्ताधारी पार्टी बीजद ने भी उनका समर्थन करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने इसे गर्व का क्षण बताया। इसके बाद सोशल मीडिया पर 2007-12 के बीच भारत की राष्ट्रपति रहीं प्रतिभा पाटिल भी लोगों को याद आ रही हैं।

वो प्रतिभा पाटिल का ही कार्यकाल था, जिस दौरान कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली केंद्र की यूपीए सरकार में तमाम घोटाले हुए। प्रधानमंत्री के रूप में मनमोहन सिंह तो पूरे 10 वर्ष रोबोट की तरह बने रहे, वहीं असली सत्ता गाँधी परिवार के हाथ में रही। इसी दौरान प्रतिभा पाटिल को भी ‘रबड़ स्टांप’ होने का ही लोगों का ख़िताब दिया। राष्ट्रपति भले ही प्रमुख फैसले न लेते हों, लेकिन प्रतिभा पाटिल के कार्यकाल के दौरान शायद ही ऐसी कोई उपलब्धि हो जो लोगों के जेहन में हो।

द्रौपदी मुर्मू ने एक-एक कर चढ़ी सीढियाँ, कदम-कदम पर मनवाया अपना लोहा

जहाँ तक द्रौपदी मुर्मू की बात है, 2015-21 में झारखंड के राज्यपाल के रूप में उनका कार्यकाल निर्विवाद रहा। वो दूसरी महिला हैं, जो राष्ट्रपति बनने जा रही हैं। साथ ही जनजाति समाज से देश को पहली राष्ट्रपति मिलेगी। वो भारत के इतिहास की पहली जनजाति महिला हैं, जो राज्यपाल के पद पर पहुँची थीं। जुलाई 2021 में कार्यकाल ख़त्म होने के बाद से वो रायरंगपुर स्थित अपने गाँव में ही रह रही थीं। 2017 में भी राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी के लिए उनके नाम पर चर्चा हुई थी, लेकिन फिर NDA ने रामनाथ कोविंद के नाम पर मुहर लगाई।

राज्यपाल का कार्यकाल ख़त्म होने के बाद 2020 में उनके कार्यकाल को एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया गया था, क्योंकि कोरोना माहमारी आपदा के बीच नए राज्यपाल की नियुक्ति नहीं हो सकी थी। जनजाति मामले, शिक्षा कानून व्यवस्था और स्वास्थ्य सम्बंधित मुद्दे को लेकर वो राज्यपाल के रूप में भी प्रखर रहीं। उन्होंने इन मुद्दों को उठाया और राज्य सरकार के फैसलों पर सवाल भी खड़े किए, लेकिन संवैधानिक मर्यादा और शिष्टाचार के दायरे में रह कर।

राज्यपाल के रूप में वो राज्य के विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति भी थीं, ऐसे में उनके समय में कई यूनिवर्सिटीज के कुलपति के खाली पद को भरा गया। वो उच्च शिक्षा सम्बंधित मुद्दों के लिए ‘लोक अदालत’ लगाती थीं, जिनमें 5000 से अधिक यूनिवर्सिटी शिक्षकों और कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान किया गया। एनरोलमेंट प्रक्रिया को उन्होंने सेंट्रलाइज किया और चांसलर का पोर्टल जारी किया। 1997 में उन्होंने राजनीति में एंट्री ली थी।

उस समय उन्हें रायरंगपुर के डिस्ट्रिक्ट बोर्ड में काउंसिलर चुना गया था। इससे पहले वो ‘श्री ऑरोबिन्दो इंटीग्रल एजुकेशन एंड रिसर्च सेंटर’ में बतौर ऑनररी अस्सिस्टेंट शिक्षिका कार्यरत थीं। फिर उन्होंने सिंचाई विभाग में जूनियर अस्सिस्टेंट के रूप में काम किया। 2 बार विधायक रहीं द्रौपदी मुर्मू भाजपा-बीजद की संयुक्त राज्य सरकार में मंत्री भी थीं। ओडिसा की विधानसभा ने उन्हें सर्वश्रेष्ठ विधायक का ‘नीलकंठ अवॉर्ड’ से सम्मानित किया था।

प्रतिभा पाटिल: लोग कहते हैं कॉन्ग्रेस की ‘रबड़ स्टांप’ राष्ट्रपति

प्रतिभा पाटिल कहने को तो देश की पहली महिला राष्ट्रपति थीं, लेकिन कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी के सामने उस समय राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के पद की क्या इज्जत रह गई थी – ये सभी को बखूबी पता है। अभी भी सोशल मीडिया पर लोग उन्हें ‘Worst President’ बता रहे हैं और सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रपति के रूप में डॉ राजेंद्र प्रसाद और एपीजे अब्दुल कलाम का नाम ले रहे हैं। वहीं प्रणब मुखर्जी और रामनाथ कोविंद की भी लोग तारीफ़ कर रहे हैं।

प्रतिभा पाटिल सोनिया गाँधी के विश्वस्तों में से एक रही हैं। राष्ट्रपति रहते हुए उन पर करदाताओं के ज़रूरत से ज़्यादा रुपए को अपनी विदेशी यात्राओं में लुटाने के आरोप लगे। उनके और उनके परिवार की विदेश यात्राओं का सरकार खर्च 205 करोड़ रुपए के आसपास था। जब वो विदेश में छुट्टियाँ मनाने जाती थीं तो उनके परिजन भी उनके साथ होते थे, खासकर ग्रैंडचिल्ड्रन। एक बार गोवा में छुट्टियाँ मनाते हुए भी उनकी तस्वीर वायरल हुई थी।

इतना ही नहीं, राष्ट्रपति को जो भी गिफ्ट्स मिलते हैं, उन्हें भी वो महाराष्ट्र के अमरावती स्थित अपने घर पर ले गई थीं। इन्हें ‘नेशनल ट्रीजरी’ में जमा कराना होता है। उन्हें बाद में ऐसे 150 गिफ्ट्स को वापस राष्ट्रपति भवन को सौंपने के लिए कहा गया था। 2012 में प्रतिभा पाटिल अपने परिजनों के साथ सेशेल्स और दक्षिण अफ्रीका की यात्रा पर गई थीं। 14 घरेलू और 4 विदेशी यात्राओं पर उनके परिवार के कम से कम 3 से 11 परिवार के सदस्य उनके साथ रहे।

2009-10 के बीच कई राज्यों की यात्राओं के दौरान उनके पति देवीसिंह शेखावत, बेटे राजेन्द्र सिंह शेखावत, बहू मंजरी शेखावत, बेटी शेखावत और दामाद जयेश शेखावत के अलावा उनके बेटे-बेटी के बच्चे सुरभि शेखावत, पृथ्वी सिंह शेखावत, ध्रुवेश राठौड़ और दिव्या राठौड़ साथ रहे। इन सभी को ‘प्रेसिडेंशियल गेस्ट्स’ की सारी सुविधाएँ दी जाती थीं। पोलैंड, स्पेन, रूस, तजाकिस्तान, यूके, साइप्रस और चीन की यात्रा में उनके साथ कम से कम दो परिजन जरूर रहे

तब की मनमोहन सिंह सरकार ने इसे ‘सामान्य राजनयिक प्रक्रिया’ बताते हुए इसका बचाव किया था। प्रतिभा पाटिल और उनके परिजनों की विदेशी यात्राओं पर ‘एयर इंडिया’ ने 169 करोड़ रुपए खर्च किए और उनके लिए हमेशा बोईंग 747-400 का प्रयोग ही किया जाता था। इसके अलावा विदेश मंत्रालय ने अन्य खर्च के लिए 36 करोड़ रुपए अलग से खर्च किए। प्रतिभा पाटिल ने 79 दिन विदेश में गुजारे। कुल 12 विदेश यात्राओं में उन्होंने 4 महाद्वीपों के 22 देशों का दौरा किया।

रिटायरमेंट के बाद पुणे में रक्षा मंत्रालय की जमीन पर प्रतिभा पाटिल द्वारा एक मकान बनवाने की योजना की खबर भी सामने आई थी। उनका परिवार ‘विद्या भारती शैक्षणिक मंडल’ चलाता है, जिसके म्यूजियम में उन्होंने बतौर राष्ट्रपति मिले 150 गिफ्ट्स को रख दिया था। प्रणब मुखर्जी के राष्ट्रपति बनने के बाद सेक्रेटेरिएट ने उन्हें ये सब वापस सौंपने को कहा। इनमें अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा दिया गया स्टोन बॉक्स, ब्रिटिश पीएम का दिया कैंडल सेट, वियतनाम के राष्ट्रपति का दिया लकड़ी के फ्रेम वाली तस्वीर, FIFA प्रेजिडेंट द्वारा दिया गया मोमेंटो, चीन का गिफ्ट बॉक्स और नेल्सन मंडेला के गोल्ड और सिल्वर मेडल शामिल थे

गाँधी परिवार की पुरानी वफादार रही हैं प्रतिभा पाटिल

फरवरी 2011 में राजस्थान में कॉन्ग्रेस के ही एक मंत्री अमीन खान ने कहा था कि 1977 में जब इंदिरा गाँधी की प्रधानमंत्री की कुर्सी चली गई थी, तब प्रतिभा पाटिल उनके लिए किचन में भोजन पकाती थीं और बर्तन धोती थीं, इसीलिए उन्हें राष्ट्रपति बनाया गया। उन्होंने कहा था कि प्रतिभा पाटिल ने बदले में कभी कुछ नहीं माँगा, इसीलिए उन्हें राष्ट्रपति बनाया गया। बाद में उन्हें इस बयान के लिए इस्तीफा देना पड़ा था। प्रतिभा पाटिल ने एक ‘श्रम साधना ट्रस्ट’ की स्थापना भी की थी।

इसके अलावा वो ‘संत मुक्ताबाई सहकारी साखर कारखाना’ का संचालन भी करती हैं। ‘प्रतिभा महिला सहकारी बैंक’ की फंडिंग भी वो करती थीं। 2003 में RBI ने इसका लाइसेंस सीज कर दिया और ट्रेडिंग बंद हो गई। बैंक के शेयर कैपिटल से ज्यादा तो उनके सम्बन्धियों को लोन दे दिए गए थे। बैंक के शीर्ष 10 डिफॉलटर्स में 6 उनके सम्बन्धी थे। रिटायरमेंट के बाद वो अपने प्राइवेट कार के ईंधन का खर्च भी सरकार से ही चाहती थीं।

प्रतिभा पाटिल पर आरोप लगे थे कि जब वो अमरावती की सांसद हुआ करती थीं, तब उन्होंने अपने पति द्वारा संचालित ट्रस्ट में MPLADS फंड के 36 लाख रुपए उधर डाइवर्ट कर दिए थे। ये भी याद रखने वाली बात है कि तब शिवसेना ने राजद में रहते गठबंधन प्रत्याशी भैरोंसिंह शेखावत की जगह प्रतिभा पाटिल का समर्थन किया था, क्योंकि वो मराठी थीं। वंशानुगत बीमारियों से पीड़ित लोगों को उन्होंने स्टरलाइज करने की बात कही थी, ताकि आगे कोई बीमारी न हो। उन्होंने 1975 में ये बयान दिया था।

कानपुर में जुमे पर हुई हिंसा में बाबा बिरयानी वाला मुख्तार गिरफ्तार: पत्थरबाजों को बिरयानी सप्लाई के लगे थे आरोप, रेस्टोरेंट के भी मंदिर पर खड़े होने का दावा

उत्तर प्रदेश के कानपुर में 3 जून 2022 को जुमे की नमाज के बाद हुई हिंसा में एसआईटी ने मुख्तार बाबा को गिरफ्तार किया है। वह कानपुर के बाबा बिरयानी रेस्टोरेंट का मालिक है। बताया जा रहा है कि वह कानपुर हिंसा के मुख्य आरोपित हयात जफर हाशमी की संस्था जौहर फैंस एसोसिएशन को फंडिंग करता था।

रिपोर्ट के मुताबिक, बिल्डर मोहम्मद बसी और मुख्तार बाबा हिंसा के बाद से ही एसआईटी और कानपुर पुलिस की रडार पर थे। इनके नाम हिंसा के सिलसिले में गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ में सामने आए थे। अब इसी क्रम में मुख्तार बाबा की गिरफ्तारी हुई है। ये फरार चल रहे थे। न्यूज 18 ने ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर आनंद प्रकाश तिवारी के हवाले से उसकी गिरफ्तारी की पुष्टि की है। उन्होंने बताया, “कई नाम सामने आए हैं। इनसे पूछताछ की जा रही है। मुख्तार बाबा का नाम भीड़ की फंडिंग में सामने आया था। उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।”

गौरतलब है कि बाबा बिरयानी पर 3 जून की हिंसा में शामिल पत्थरबाजों को बिरयानी खिलाने के आरोप भी लगे थे। हालॉंकि मुख्तार के बेटे महमूद ने ऑपइंडिया से बातचीत में इन आरोपों का खंडन किया था। लेकिन कुछ स्थानीय नेताओं का दावा था कि अपना अवैध कब्जा बनाए रखने के लिए बाबा बिरयानी और उसके साथी हिंसा की काफी समय से साजिश रच रहे थे। दरअसल, बाबा बिरयानी जिस जगह पर खड़ा है उसके भी मंदिर की जमीन होने की बात कही जाती है।

पिछले दिनों कुछ रिपोर्टों में बताया गया था कि सरकारी रिकॉर्ड में जो जगह राम-जानकी मंदिर के तौर पर दर्ज है, वहीं इस समय बाबा बिरयानी रेस्टोरेंट की चल रही है। शत्रु संपत्तियों की तलाश के दौरान यह बात सामने आई थी। रिपोर्टों के अनुसार कानपुर के बेकनगंज स्थित डॉक्टर बेरी चौराहा का भवन संख्या 99/14ए रिकॉर्ड में राम-जानकी मंदिर ट्रस्ट का है। यहाँ भगवान श्रीराम का मंदिर था। अस्सी के दशक तक यहाँ पूजा हुआ करती थी। लेकिन अब मंदिर का कुछ ही हिस्सा बचा हुआ है। वह भी जर्जर हाल में है। मंदिर के अन्य हिस्सों को तोड़कर उसका इस्तेमाल रेस्टोरेंट की रसोई के तौर पर किया जा रहा है। कथित तौर पर मुख़्तार कभी राम-जानकी मंदिर के एक हिस्से में साइकिल रिपेयरिंग का काम करता था। 

विजय माल्या ने क्रिस गेल के साथ डाली फोटो, बताया- गुड फ्रेंड: नेटीजन्स ने याद दिलाए फ्रॉड, पूछा- अपना बकाया तो माँगने नहीं आया था

भारत में भगौड़ा घोषित हो चुके विजय माल्या ने हाल में वेस्टइंडीज के दिग्गज क्रिकेट खिलाड़ी क्रिस गेल से मुलाकात करके सोशल मीडिया पर एक तस्वीर साझा की। अपनी फोटो के साथ माल्या ने बताया कि उसकी दोस्ती गेल के साथ कितनी गहरी है।

तस्वीर के कैप्शन में माल्या ने लिखा, “अपने दोस्‍त क्रिस्‍टोफर हेनरी गेल- यूनिवर्स बॉस से मिलकर काफी अच्‍छ लगा। जबसे मैंने उन्‍हें आरसीबी की टीम में नियुक्त किया था तभी से हमारी दोस्‍ती है। सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का चुनाव।”

माल्या के इस ट्वीट में क्रिस गेल को देखते ही सोशल मीडिया पर लोगों को अलग-अलग प्रतिक्रिया आने लगी। तारीफ तो दूर लोगों ने गेल के नाम पर माल्या को ट्रोल करना शुरू कर दिया।

यूजर पूछने लगे कि आखिर माल्या होता कौन है ये कहने वाला कि उसने गेल को नियुक्त किया। परितोष अरोड़ा ने कहा, “तुमने उसे आरसीबी की तरफ से खेलने के लिए फीस दी थी। वह तुम्हारा कर्मचारी नहीं है।”

यूजर्स ने माल्या को एसबीआई के नाम से ट्रोल करना शुरू किया। यूजर बोले कि माल्या भारत आकर अपने पुराने दोस्त स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से भी मुलाकात कर ले।

भारतीय यूजर्स ने क्रिस गेल के साथ यह तस्वीर देख गेल को चेतावनी दी कि वह बचकर रहें वरना हो सकता है कि माल्या उनका रुपया भी खा जाए।

कुछ नेटीजन्स ने तंज कसते हुए पूछा- “क्रिस गेल का कहीं कुछ पैसा तो बकाया नहीं था, कहीं वो भी अपना उधार माँगने आया हो।”

इसी तरह अन्य यूजर्स भी माल्या का मजाक उड़ाते दिखे। किसी ने गाना गाते हुए कहा- “घर आजा परदेसी तुझको बैंक बुलाए रहे।” किसी ने लिखा- “दादाजी अय्याशी बंद करो और मेरे पैसे मेरे अकॉउंट में डालो।”

भगौड़ा विजय माल्या ने किस बैंक से लिया कितना कर्ज

बता दें कि SBI की अगुवाई वाले 11 बैंकों ने विजय माल्या को लोन दिया था, जिसे उसने चुकाया भी नहीं और 9000 करोड़ की धोखाधड़ी व मनीलॉन्ड्रिंग करके देश से फरार हो गया। फिलहाल भारत सरकार ने उसे भगौड़ा घोषित किया हुआ है और उसे लगातार भारत वापस लाने की कोशिश कर रही है। यहाँ माल्या के ख़िलाफ देश की कई अदालतों में मुकदमा चल रहा है।

जानकारी के अनुसार माल्या की किंगफिशर एयरलाइन को दिए गए 6,900 करोड़ रुपए के मूल कर्ज में सर्वाधिक 1,600 करोड़ रुपए स्टेट बैंक ने दिए हैं। इसके अलावा, जिन अन्य बैंकों ने एयरलाइन को कर्ज दे रखा है, उनमें पंजाब नेशनल बैंक (800 करोड़ रुपए), आईडीबीआई बैंक (800 करोड़ रुपए), बैंक ऑफ इंडिया (650 करोड़ रुपए), बैंक ऑफ बड़ौदा (550 करोड़ रुपए), सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (410 करोड़ रुपए) शामिल हैं।

46 MLA साथ, शिवसेना-उद्धव से बात नहीं: एकनाथ शिंदे ने क्लियर किया प्लान, बोले असम के CM- बाढ़ के समय टैक्स देने वाले पर्यटकों का स्वागत

महाराष्ट्र में सियासी उठा-पटक के बीच सूरत में डेरा जमाए शिवसेना के बागी विधायकों को अब असम के गुवाहाटी में शिफ्ट किया गया है। बागी दल के नेता एकनाथ शिंदे ने बताया है कि उनके पास 46 विधायकों का समर्थन है, जिनमें से 6-7 निर्दलीय हैं और बाकी के शिवसेना के हैं। उन्होंने बताया कि फ़िलहाल न तो उन्हें भाजपा की तरफ से कोई ऑफर आया है, न ही उनकी पार्टी से कोई बात हो रही है। उन्होंने बताया कि शिवसेना या पार्टी सुप्रीमो उद्धव ठाकरे से भी फ़िलहाल कोई बात नहीं हो रही।

ANI से बात करते हुए एकनाथ शिंदे ने कहा, “जहाँ तक ताज़ा राजनीतिक हालात की बात है, हमलोग बालासाहेब ठाकरे के शिवसैनिक हैं और हमेशा शिवसैनिक ही रहेंगे। भविष्य में क्या करना है, इस सम्बन्ध में अभी हमने कोई निर्णय नहीं लिया है।” उधर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा है कि बाढ़ आपदा के इस समय में टैक्स देने वाले होटल अतिथियों का राज्य में स्वागत है। उन्होंने कहा कि ये जो टैक्स देते हैं, उससे सरकार को राजस्व प्राप्त होता है।

सीएम सरमा ने कहा कि अगर गुवाहाटी सभी राज्यों का राजनीतिक केंद्र बन जाता है, यहाँ तक कि केंद्र सरकार और अन्य देशों का भी, वो इसका स्वागत करेंगे। असम के मुख्यमंत्री ने कहा कि बस यहाँ के होटल बुक रहने चाहिए। उन्होंने कहा कि बाढ़ के इस आपदा के समय राज्य को वित्त चाहिए और टैक्स देने वाले पर्यटक चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर होटल के कमरे फुल हो जाते हैं तो इससे सरकार की भी कमाई होगी।

उधर शिवसेना के चीफ व्हिप सुनील प्रभु ने पार्टी के सभी विधायकों के नाम एक पत्र जारी किया है, जिसमें उन्हें बुधवार (22 जून, 2022) की शाम होने वाली महत्वपूर्ण बैठक में उपस्थित रहने के लिए कहा गया है। पत्र में कहा गया है कि जो भी विधायक अनुपस्थित रहेगा, ये समझा जाएगा कि उसने स्वेच्छा से शिवसेना छोड़ दी है। साथ ही बिना किसी पूर्व सूचना या वैध कारण के अनुपस्थित रहने वाले विधायकों को संवैधानिक प्रक्रिया के तहत उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द कराने की धमकी भी दी गई है।

‘तेरा घमंड तो चार दिन का है… हमारी बादशाही खानदानी है’: महाराष्ट्र में सियासी उठापठक के बीच संजय राउत के घर के बाहर लगे पोस्टर

महाराष्ट्र की सियासत में एकनाथ शिंदे ने भूचाल ला दिया है। शिवसेना टूट की ओर बढ़ती दिख रही है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की सरकार के भविष्य को लेकर कयास लग रहे। इस बीच शिवसेना नेता संजय राउत के घर के बाहर बुधवार (22 जून 2022) की सुबह दिखे पोस्टर की भी चर्चा हो रही है।

इस पोस्टर पर राउत की तस्वीर लगी है। साथ ही लिखा है, “तेरा घमंड तो 4 दिन का है पगले, हमारी बादशाही तो खानदानी है। जय महाराष्ट्र।” पोस्टर पर इसे लगाने वाली महिला की तस्वीर भी है। दीपमाला बढ़े नामक की इस महिला नेता को शिवसेना का कॉरपोरेटर बताया गया है।

इधर शिंदे अपने समर्थक विधायकों के साथ असम में डेरा डाले हुए है। उन्होंने अपने साथ 40 से अधिक विधायकों के होने का दावा किया है। इनमें 7 निर्दलीय बताए जा रहे हैं।

इस बीच, केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री रामदास आठवले ने कहा है कि देवेंद्र फडणवीस महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बनेंगे और एकनाथ शिंदे उप-मुख्यमंत्री। ‘रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (RPI)’ के मुखिया ने ‘TV9 भारतवर्ष’ से बात करते हुए कहा कि भाजपा, एकनाथ शिंदे और RPI मिल कर सरकार बनाएँगे। उधर महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के बाद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे भी कोरोना पॉजिटिव हो गए हैं।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में कुल विधायकों की संख्या 288 है। इनमें भाजपा के पास अभी 106, शिवसेना पर 55, एनसीपी पर 52, और कॉन्ग्रेस पर 42 सीटें हैं। बहुमत के लिए किसी भी दल को 144 सीटें चाहिए। साल 2019 के चुनाव में भाजपा से अलग होकर शिवसेना ने कॉन्ग्रेस-एनसीपी के साथ मिल ये आँकड़ा जुटाया था। लेकिन अब स्थिति पलटती नजर आ रही है। भाजपा को सरकार बनाने के लिए 30-32 विधायकों की जरूरत है। अगर ऐसे में शिंदे भाजपा को समर्थन दे देते हैं तो उद्धव सरकार गिर जाएगी। यही वजह है कि लगातार इन सभी नेताओं को मनाने के प्रयास हो रहे हैं।

जिस एक्ट्रेस को शरद पवार पर पोस्ट के लिए पकड़ा, उसकी जमानत का अब विरोध नहीं करेगी महाराष्ट्र पुलिस: फार्मेसी स्टूडेंट को भी बेल

महाराष्ट्र (Maharashtra) में NCP के मुखिया शरद पवार (Sharad Pawar) को लेकर कथित तौर पर ट्विटर पोस्ट करने के मामले में महाराष्ट्र पुलिस के द्वारा गिरफ्तार किए गए 21 साल की फार्मेसी स्टूडेंट निखिल भामरे को बॉम्बे हाई कोर्ट ने जमानत दे दी। वहीं मराठी एक्ट्रेस केतकी चितले को भी लंबे वक्त के बाद राहत मिली है।

निखिल की जमानत याचिका को मंजूर करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि वह एक छात्र हैं और एक महीने से पुलिस की हिरासत में हैं। इसके साथ ही अदालत ने पुलिस को सख्त आदेश दिया कि जिन मामलों में उसे गिरफ्तार नहीं किया गया। उन मामलों में किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी। निखिल भामरे के मामले में सुनवाई जस्टिस नितिन जामदार और जस्टिस एनआर बोरकर की बेंच ने की। कोर्ट ने सीआरपीसी की धारा 256, 482 और 407 का हवाला देकर दायर की गई याचिका पर अपना फैसला सुनाया।

इससे पहले 14 जून 2022 को इस मामले में सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस एसएस शिंदे की बेंच ने महाराष्ट्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि सोशल मीडिया के जिस पोस्ट पर उसकी गिरफ्तारी की गई उसमें हकीकत में कोई व्यक्ति विशेष का नाम ही नहीं है। इस गिरफ्तारी के कारण निखिल की परीक्षा भी छूट गई। इसके अलावा कोर्ट ने ये भी कहा था कि खुद शरद पवार भी नहीं चाहेंगे कि एक छात्र जेल में रहे। उल्लेखनीय है कि निखिल को 11 मई को गिरफ्तार किया गया था। उनके खिलाफ 6 एफआईआर दर्ज की गई थी।

केतकी चितले को भी मिली राहत

शरद पवार पर कथित पोस्ट के मामले में बीते एक महीने से जेल में बंद मराठी अभिनेत्री केतकी चितले को भी बड़ी राहत मिली है। अभी तक उनकी जमानत याचिका का विरोध कर रही महाराष्ट्र पुलिस ने ठाणे सत्र अदालत में अचानक से यूटर्न लेते हुए एक्ट्रेस के बेल का विरोध नहीं करने का फैसला किया है।

सेशन जज न्यायाधीश एचएम पटवर्धन के समक्ष सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने ये बात कही। गौरतलब है कि चितले को 14 मई को 2022 को महाराष्ट्र पुलिस ने शरद पवार पर कमेंट करने को लेकर उठाया था। उनके खिलाफ कई सारे केस दर्ज किए गए थे।