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बिजनेस में फेल हुई महिला ने फ्रीलांस काम करके कमाए ₹10 करोड़: कोका-कोला, माइक्रोसॉफ्ट जैसी 500 कंपनियाँ एलन से बनवाती हैं PPT

दुनियाभर में लोग फ्रीलांसिंग करके जीवनयापन कर रहे हैं। लेकिन फ्रीलांसरों ने इस क्षेत्र में नया मुकाम हासिल किया। इन्हीं में से एक हैं कर्टनी एलन (Courtney Allen) । वो एक फ्रीलांस ग्राफिक डिजाइनर और पावरपॉइंट बनाने का काम करती हैं। उन्होंने फ्रीलांसरों के लिए मार्केट प्लेस अपवर्क (Upwork) के लिए काम करके अब तक कुल 1.3 मिलियन डॉलर (10,08,98,850 भारतीय रुपए) की कमाई की है।

रिपोर्ट के मुताबिक, कर्टनी एलन ने 2016 में एक बिजनेस शुरू किया, लेकिन वो उसमें असफल रहीं। हालाँकि, इस कोशिश में उनके क्रेडिट कार्ड पर $25,000 (19,42,360 भारतीय रुपए) का कर्ज जरूर बढ़ गया। इसके बाद साल 2017 में 32 वर्षीय एलन ने अपनी खुद की एजेंसी 16×9 शुरू की। ये कंपनी Upwork के जरिए कंपनियों से अनुबंध कर उनके लिए ग्राफिक डिजाइनिंग और पॉवर पॉइंट प्रेजेंटेशन बनाना शुरू किया। चूँकि इससे पहले वो सिस्को सिस्टम्स में सीनियर ऑफिशियल्स के लिए प्रेजेंटेशन डिजायनर के तौर पर काम किया था। इसलिए उसने अपनी इसी स्किल का इस्तेमाल अपने लिए किया।

एलन ने कोका-कोला, सिस्को, माइक्रोसॉफ्ट और फॉर्च्यून जैसी 500 कंपनियों के साथ काम किया है। वो कहती हैं कि दुनियाभर में हजारों फ्रीलांसर हैं, लेकिन प्रेजेंटेशन डिजाइनिंग बहुत ही छोटा सबसेट है। पिछले साल 2021 में उनकी डिजाइन फर्म ने 350 से अधिक क्लाइंट्स के साथ काम किया था। एलन के मुताबिक, Upwork के साथ काम करके उन्होंने अपने बिजनेस को रफ्तार दी है।

हाई रेट से बढ़ता है आत्मविश्वास

कर्टनी एलन के मुताबिक, उन्होंने Upwork पर जब फ्रीलांसिंग शुरू की थी तो वो $27 (2,097 भारतीय रुपए) प्रति घंटे के हिसाब से चार्ज किया था। हालाँकि, 5 महीने तक इसी रेट में काम करने के बाद उन्होंने अपने रेट को बढ़ाकर $150 (11,654 भारतीय रुपए) कर दिया। एलन का कहना है कि उनके क्लाइंट्स ने उसे बताया कि उसके नए रेट ने उनकी विशेषज्ञता को नया विश्वास दिया है।

खुद को एक आकस्मिक उद्यमी कहने वाली एलन का कहना है कि वो अपना खुद का बिजनेस शुरू नहीं करने वाली थीं। हालाँकि, Upwork पर एक साल के बाद उन्हें इतना काम मिल रहा था कि उसे कई फ्रीलांसरों को काम पर रखना पड़ा। आज उनकी 10 लोगों की टीम में तीन परमानेंट एम्प्लाई के साथ ही कई फ्रीलांसर हैं।

क्या है Upwork

Upwork इंक ऑनलाइन मार्केटप्लेस संचालित करने वाली अमेरिकी कंपनी है। ये कंपनी व्यवसायों को अधिक कुशल फ्रीलांस प्रोफेशन्स ढूँढने और उनके साथ काम करने का प्लेटफॉर्म देती है। इस कंपनी का व्यापार अमेरिका, भारत, फिलीपींस और बाकी दुनिया भर में फैला है।

स्वर्ग मतलब हिमाचल: दुनिया की सबसे उँची पोस्ट ऑफिस, गाड़ी जाने लायक सबसे ऊँचा गाँव – दुर्गम प्रदेश के सुगम लोगों की कर्मठता का उदाहरण

“आपने हमारा पूरा गाँव देखा कि नहीं? स्वर्ग से कम नहीं है हमारा गाँव।” बड़ी सहजता से सरला देवी ने कहा था। हम हिमाचल प्रदेश की खूबसूरत सांगला घाटी में थे। अप्रतिम सुंदरता का धनी सरला देवी का गाँव रक्षम बास्पा नदी के दोनों ओर बसा हुआ है।

समुद्र तल से कोई साढ़े दस हजार फ़ीट की ऊँचाई पर हिमालय की गोदी में बसा ये गाँव किन्नौर और लाहौल स्पीति की हमारी यात्रा का दूसरा पड़ाव था। इसकी ऊँचाई का अंदाज़ा लगाने के लिए आपको बता दें कि शिमला कोई साढ़े सात हज़ार, नैनीताल कोई छह हजार आठ सौ फ़ीट और मनाली कोई छह हजार सात सौ फ़ीट की ऊँचाई पर है।

हम चंडीगढ़ से शिमला होते हुए पहली रात रामपुर बुशहर में रुके थे। सतलुज नदी पर बसा ये शहर भी कोई कम सुन्दर नहीं। उसके बाद दुनिया के सबसे कठिन रास्तों में से एक कहलाने वाले करचम-सांगला रास्ते पर गाड़ी चलाते हुए शाम को हम रक्षम पहुँचे थे।

हुआ यों कि पिछली गर्मियों में हमने एकसाथ यात्रा करने का फैसला किया था। हम यानी मैं और सीमा तथा कॉलेज के दोस्त कर्नल बलदेव सिंह सैनी और पम्मी भाभी ने। पहाड़ों पर सुबह जल्दी ही हो जाती है, सो मैं और मिंटी बिना चाय पिए होटल के पीछे बह रही बास्पा नदी के किनारे टहल रहे थे कि दूसरी ओर से हाथ में जानवरों के लिए चारा ले जाते हुए किन्नौरी टोपी पहने हुए एक महिला आती दिखाई दी।

हरे लाल रंग की किन्नौरी टोपी, एक हाथ में वहीं से इकट्ठा किया गया पशुओं का चारा और दूसरे हाथ में एक लकड़ी। एक तरफ बहती बास्पा नदी, दूसरी तरफ हरी भरी चोटियाँ और उनके शिखरों पर बर्फ के बीच सरला देवी बिल्कुल उस दृश्य का जीवंत हिस्सा लग रहीं थीं। बड़ी सहजता से उन्होंने हमारा अभिवादन स्वीकार किया और फिर यों ही बातचीत शुरू हो गई।

मालूम हुआ कि वे गाँव में आशा वर्कर के तौर पर भी काम करतीं हैं। जब कोरोना का माहौल है तो बात उसी पर होनी थी। सबसे पहले तो बड़ी मासूमियत से उन्होंने हमसे ही पूछ लिया, “आप दिल्ली शहर से आए हो, कहीं कोरोना लेकर तो नहीं आए?”

हमने उन्हें आश्वस्त कराया कि हम पूरे इंजेक्शन लगवा चुके हैं और नेगेटिव आरटी पीसीआर रिपोर्ट भी हमारे पास है, तो उन्हें तसल्ली हुई। कहने लगीं कि ये तो बड़े लोगों और शहरों की बीमारी है। वे ही यहाँ आकर इसे दे जाते हैं। सरला देवी ने हमें बताया कि उनके गाँव में भी वे टीके लगवा रहीं हैं। इतनी ऊँचाई पर बसे गाँव में कोरोना के प्रति इतनी जागरूकता होगी, हमने सोचा न था।

स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार ने अपने काम मुस्तैदी से ही किया होगा तभी तो खाली रक्षम में ही नहीं बल्कि सांगला घाटी के अन्य गाँवों जैसे सांगला, चितकुल तथा अन्य स्थानों पर भी जहाँ भी हमने आम लोगों से बातचीत की, वे लोग कोरोना को लेकर खूब जागरूक थे। सांगला के बस अड्डे पर रिकांगपिओ से आई धरम दासी नामकी महिला ने भी वहाँ हो रहे टीकाकरण की तस्दीक की।

सिर्फ किन्नौर ही नहीं बल्कि उससे आगे लाहौल जिले के भी जिन गाँवों में हम गए, हमने ऐसा ही पाया। फिर वह स्पीति घाटी का 15500 फ़ीट पर बसा कोमिक गाँव हो, 14000 फ़ीट की ऊँचाई पर बसा किब्बर हो, 14735 फ़ीट पर हिक्किम, 12460 फ़ीट पर काजा, 10000 फ़ीट पर बसा ताबो गाँव हो या 7400 फ़ीट पर बसा पू गाँव हो।

लोगों को जोड़ती पोस्ट ऑफिस
सबसे ऊँचाई पर बसा गाँव, जहाँ जा सकती हैं गाड़ियाँ

ये सभी जगहें अपनी अपनी विशिष्टताओं के लिए जानी जातीं हैं। हिक्किम में दुनिया का सबसे ऊँची जगह पर चल रहा पोस्ट ऑफिस है; कोमिक दुनिया का सबसे ऊँचाई पर बसा गाँव है, जहाँ मोटर वाहन जा सकते हैं; ताबो अपने प्राचीन बौद्ध मठों के लिए विख्यात है; काजा में दुनिया का सबसे ऊँचाई पर चल रहा पेट्रोल पम्प है; पू गाँव अपनी खुमानियों और सेब के लिए मशहूर है।

हिमाचल के प्राचीन बौद्ध मठ
हिमाचल के प्राचीन बौद्ध मठ
हिमाचल में ही है सबसे ऊँचाई पर चल रहा पेट्रोल पम्प

सांगला घाटी को छोड़ दिया जाए तो बाकी ये सब स्थान ठंडे रेगिस्तानी इलाके हैं, जहाँ पहुँचना और 2-4 दिन रहना हमारे जैसे सैलानियों के लिए तो रोमांचकारी और आल्हादित करने वाला हो सकता है; पर वहाँ बसना और रोज़ रहना कोई आसान बात नहीं। इतनी दुर्गम जगहों पर बसे इन सभी गावों में कोरोना के टीके लगाना कोई मामूली बात नहीं हैं। टीके पहुँचाना, लोगों को जानकारी देना और लोगों को इकट्ठा करके फिर उन्हें टीके लगाना। इन स्थानों के लिए बड़ी बात है। लेकिन लगभग इन सभी स्थानों पर सरकार ने सभी वांछित वयस्क नागरिकों को समय से कोरोना के टीके लगाकर सराहनीय कार्य किया है।

पूर्ण टीकाकरण करना, सबको राशन मुहैया कराना और आपदा के समय लोगों को मदद पहुँचाना… ये सारे काम सरकार ने अच्छी तरह किया है। इसकी बानगी हमें हर जगह मिली। गए साल इन इलाकों में पहाड़ गिरने, भू स्खलन से सड़कें टूटने और जनजीवन अस्त-व्यस्त होने के समाचार भी मिले थे। रक्षम और बटसेरी के पास पहाड़ ढहने से चितकूल तक का रास्ता बाधित हो गया था। इस दौरान भी स्थानीय प्रशासन और लोगों ने अपने मेहमानों का खूब ख्याल रखा था।

सरला देवी जैसी आशा वर्कर और उनकी तरह के अन्य स्थानीय कर्मियों की भूमिका सिर्फ सराहनीय नहीं बल्कि स्तुति के योग्य है। जब हम दुनिया के अन्य अत्यंत विकसित देशों में कोरोना के टीकों को लेकर संकोच यानी वैक्सीन हेसिटेंसी देखते हैं तो ये बात बिलकुल स्पष्ट होती है कि हमारा ग्रामीण समाज इन देशों के कथित प्रगतिशील और आधुनिक लोगों से कितना आगे है। अमेरिका की बाइबल बेल्ट के राज्यों से लेकर रूस के बड़े इलाके में और यूरोप के कई देशों में टीकाकरण का गंभीर विरोध चल रहा है। इसका परिणाम वहां कोरोना मामलों की बढ़ती संख्या में दिखाई भी दे रहा है।

आपको बता दें कि सरला देवी और उन जैसे आशा वर्करों को इस सारे काम के लिए जो मेहनताना मिलता है, वह 2500 से 3000 रुपए महीने ही बैठता है। वे सिर्फ टीके ही नहीं लगवातीं बल्कि प्रशासन के प्रेरित अन्य कामों को भी करतीं हैं।

रक्षम गाँव देश सबसे साफ़ गावों में से एक है। इसके लिए इस गाँव को कई पुरस्कार भी मिल चुके हैं। वैसे महीने के इतने कम पैसे में जनजागरण और स्वास्थ्य का इतना बड़ा काम करना हैरान कर देता है। लेकिन उनके स्वाभिमान और आत्मविश्वास ने हमें हैरान सा कर दिया।

सरला देवी से बातों ही बातों में हमने फ्री राशन की भी चर्चा की। हमने पूछा कि आपको फ्री राशन मिलता है क्या? बड़े गौरव के साथ उन्होंने हमसे कहा, “साहब पहाड़ों में हमारे घरों में कम से कम दो साल का राशन तो हम लोग इकट्ठा करके रखते ही हैं। फ्री राशन आता तो है, पर ज़्यादातर लोग लेते नहीं। किसी-किसी को ही ज़रूरत पड़ती है।” जिस देश में लोग फ्री का कुछ भी लेने को टूट पड़ते है, वहाँ दुर्गम हिमाचल में एक सामान्य ग्रामीण महिला का ये स्वाभिमान से भरा उत्तर हमें आकंठ हर्षित कर गया।

जहाँ ऐसा स्वाभिमानी और स्वाबलंबी समाज हो, वहाँ प्रसन्नता तो रहती ही है। ये आनन्द हमें अपनी यात्रा के दोनों हफ़्तों में खूब देखने को मिला। सरलता, सहजता और ईमानदारी हिमाचल के लोगों की खासियत है। इसके कई उदाहरण हमें मिले। एक का ज़िक्र करना काफी होगा। काज़ा के रास्ते ताबो में हमारी गाड़ी का टायर पंक्चर हो गया। देखा तो स्टेपनी से भी हवा निकल चुकी थी। किसी तरह पंक्चर ठीक करवाया और दोनों पहियों में हवा भरवाई। सोचा कि स्टेपनी में नया ट्यूब डलबा लिया जाए। वह काजा में ही हो सकता था। उसकी भी बस एक ही दुकान थी। हमने सीधे उससे ट्यूब बदलने या नया टायर लगाने को कहा। हमें डर था कि चंद्रताल आते-जाते कुंजुम दर्रे जैसी दुर्गम जगहों को पार करते हुए अटक गए तो क्या होगा।

वर्कशॉप में जब पहुँचे तो स्टेपनी निकाल कर उसने जाँच की और कहा कि रेगिस्तानी इलाके में ट्यूबलेस टायर में कभी रिम के किनारों से रेत घुस जाती है। उसने उसे ठीक किया और कहा कि काम हो गया। हमने फिर भी आग्रह किया कि हम जोखिम नहीं लेना चाहते इसलिए वह कम से कम नया ट्यूब तो डाल ही दे। पर दुकानदार ने कहा कि इसकी ज़रूरत नहीं है। सारे काम के बमुश्किल 50 रुपए उसने हमसे लिए। सोचिए, नया टायर देने या ट्यूब डालने में उसे फायदा ही होता और हम तो आग्रह कर ही रहे थे। देश के किसी और हिस्से का दुकानदार होता तो वह अपना फायदा सोचता। एक छोटे से वर्कशॉप पर ये ईमानदारी हमें अंदर तक छू गई।

सरल, सहज, कर्मठ और स्वाभिमानी हिमाचली सरला देवी

खैर लौटते हैं, रक्षम गाँव की सरला देवी पर। उनसे बात खत्म हुई तो जाते-जाते उन्होंने हमसे कहा, “साहब इस पुल से ही लौट मत जाइएगा, पार करके पीछे की तरफ कोई आधा किलोमीटर दूर चलने पर आपको कई जलधाराएँ मिलेंगी। उनको ज़रूर देखिएगा। आपको मालूम पड़ जाएगा कि ‘हमारा रक्षम स्वर्ग जैसा’ क्यों दिखता है।”

हम वहाँ गए तो वाकई दृश्य मनोहारी ही था। कल-कल छल-छल बहती नदी, उसमें मिलती जलधाराओं के बीच छोटे-छोटे घास के मैदानों में खिलते फूल, चारों तरफ घने वृक्षों के पहाड़ और तनिक सर ऊँचा उठाकर देखो तो मानों हरी साड़ी के पल्लुओं पर सफ़ेद बर्फ की चित्रकारी। जितना खूबसूरत है हिमाचल उससे भी कहीं अधिक स्वाभिमानी और सहज मिले वहाँ के लोग।

मौका लगे तो एक बार किन्नौर की सांगला घाटी और लाहौल के उन स्थानों पर ज़रूर जाइएगा जिनकी चर्चा हमने ऊपर की है। यकीन मानिए आप को अपनी कल्पना से भी कहीं अधिक सुन्दर नज़ारे मिलेंगे।

जिसने रचा था कानपुर हिंसा का षड्यंत्र… UP पुलिस ने उस जफर हयात हाशमी को दबोचा

कानपुर हिंसा (Kanpur Voilence) मामले की साजिश रचने वाला जफर हयात हाशमी को गिरफ्तार कर लिया गया है। उससे पूछताछ जारी है। हयात जफर हाशमी पर हिंसा फैलाने और लोगों को भड़काने का आरोप है। जफर हयात हाशमी ने फेसबुक पोस्ट के जरिए लोगों को कानपुर में बाजार बंद करने और जेल भरो आंदोलन की अपील की थी।

जफर हयात हशामी मौलाना मुहम्मद जौहर अली फैन्स एसोसिएशन का संचालक है। इसके पहले उसका नाम  CAA-NRC के विरोध में हुए हिंसक प्रदर्शन में भी सामने आया था। इस मामले में कानपुर के कर्नलगंज थाने में जफर हयात हाशमी के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी।

कानपुर में शुक्रवार को जुमे की नमाज के के बाद हिंसा भड़की। एक न्यूज डिबेट में बीजेपी की प्रवक्ता नूपुर शर्मा ने कथित रुप से पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी कर दी थी, जिसको लेकर अल्पसंख्यक समुदाय के लोग नाराज थे। इसके विरोध में मुस्लिम पक्ष ने जुलूस निकाला था। इस दौरान हिंसा भड़क गई। पुलिस ने हिंसा में शामिल 36 उपद्रवियों को हिरासत में लिया है। हिंसा की शुरुआत यतीमखाना इलाके की मुख्य सड़क और बाजार से हुई। मजहब के नाम पर सामने आए दो गुटों के बीच पहले बहस हुई। इसके बाद टकराव हुआ और फिर पथराव हुए। 

बता दें कि अवैध रूप से बने धार्मिक ढाँचे भी विवाद के महत्वपूर्ण कारण हैं। इसको लेकर उत्तर प्रदेश में समय-समय पर शिकायतें की जाती रही हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इसके जरिए जमीन कब्जा करने की कोशिश की जाती हैं और कई मामलों इन ढाँचों के कारण सड़कों पर दुर्घटनाएँ होती रहती हैं।

कानपुर मामले में PFI की भूमिका और उसका इतिहास

वहीं कानपुर पुलिस कमिश्नर विजय मीणा का कहना है कि प्रशासन से बातचीत के लिए बंद के ऐलान को वापस ले लिया गया था, लेकिन शुक्रवार को नमाज के बाद अचानक हिंसा फैल गई। एमएमए जौहर फैन्स एसोसिएशन के अध्यक्ष हयात जफर हाशमी सहित कुछ स्थानीय नेताओं ने बंद का आह्वान किया था। उन्होंने कहा कि इस घटना में शामिल किसी भी साजिशकर्ता या संगठन को बख्शा नहीं जाएगा।

माना जा रहा है कि इस हिंसा में PFI की भी भूमिका हो सकती है, क्योंकि ऐसे मामलों को सांप्रदायिक रंग देने का उसका इतिहास रहा है। पुलिस कानपुर मामले में इस ऐंगल से भी जाँच कर रही है। पुलिस जाँच कर रही है कि बंद बुलाने वाले संगठनों का PFI या किसी अन्य कट्टरपंथी संगठनों से संपर्क तो नहीं है।

‘भगवान कृष्ण के जवानी में थे अवैध संबंध’ : TV शो में फिर उगली गई हिंदू देवताओं के लिए घृणा, हिंदूफोबिक रैली का खुलकर बचाव

आए दिन लगभग हर रोज सोशल मीडिया, टीवी और विभिन्न मंच पर हिंदू धर्म के देवी-देवताओं का मजाक उड़ाया जाता है। ऐसा ही एक मामला फिर देखने को मिला है। जहाँ तमिलनाडु के विदुथलाई चिरुथैगल काची (VCK) पार्टी के प्रवक्ता विक्रमन ने भगवान कृष्ण को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की। उन्होंने बीते दिनों उनकी पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा मदुरई में की गई रैली में हिंदू विरोधी नारों का बचाव करते हुए अपनी टिप्पणी की। इस रैली में पूछा गया था कि आखिर कृष्णा और अय्प्पा भगवान कैसे हो सकते हैं।

टाइम्स नॉउ पर डिबेट के दौरान उन्होंने भगवान कृष्ण पर गोपियों ने अनैतिक संबंध रखने का आरोप लगाया। विक्रमन ने कहा, “कृष्णा का युवा करियर वृंदावन की महिलाओं के साथ अवैध (अनैतिक) प्रेमसंबंधों से भरा हुआ था। इसे रासलीला कहा गया।” इस दौरान उन्होंने ‘पुराण’ का हवाला दिया।

हिंदू कार्यकर्ता राहुल ईश्वर ने इस पर दुख और आपत्ति जताते हुए कहा कि वो इस तरह से किसी के भगवान का अपमान नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि पुराण एक प्रतीकात्मक वर्णन है। उसे वैसे ही नहीं लिया जा सकता, जैसे कि इसमें कहा गया कि रावण के दस सिर थे। इसका मतलब यह नहीं हुआ कि उसके वाकई में दस सिर थे। इसका अर्थ यह होता है कि उसके पास दस सिर के बरारबर बुद्धिमत्ता थी। इससे यह दिखाने का प्रयास किया गया था कि वह काफी विद्वान था। 

इसी तरह जब कोई कहता है कि अयप्पा, शिव और विष्णु के पुत्र हैं तो इसका अर्थ यह नहीं होता कि शिव ने विष्णु से शादी की थी। यह उन दोनों की चमत्कारिक आध्यात्मिक शक्ति से उत्पन्न हुए थे। इसी तरह कृष्ण का गोपियों के साथ आध्यात्मिक संबंध था न कि अनैतिक। हिंदू देवी-देवताओं के बारे में इस तरह की टिप्पणी करना हिंदूफोबिया के अलावा और कुछ भी नहीं है। इस तरह के लोग हिंदू सभ्यता और मान्यता को नीचा दिखाना चाहते हैं। इसलिए इस तरह की अभद्र, अश्लील और आपत्तिजनक टिप्पणी करते हैं।

गौरतलब है कि पिछले दिनों गुजरात के वडोदरा स्थित महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी में फाइन आर्ट फैकेल्टी एक प्रदर्शनी में कुछ छात्रों द्वारा लगाई गई हिंदू देवी-देवताओं की तस्वीरें आपत्तिजनक थीं। प्रदर्शनी में हिंदू देवी-देवताओं और भारत के कुछ राष्ट्रीय चिन्हों के चित्रों को रेप केसों से जोड़ा गया था। इतना ही नहीं, हिंदू देवी और देवताओं के चित्र बनाने के लिए उन अखबारों का प्रयोग किया गया था, जिन पर रेप की खबरें छपी हुई थी।

कानपुर दंगे से कनेक्शन वाला कौन है हयात जफर हाशमी? माँ-बहन को उकसा आत्मदाह कराने वाले का है कॉन्ग्रेसी गठजोड़

उत्तर प्रदेश के कानुपर में शुक्रवार (3 जून 2022) को नमाज के बाद हुई हिंसा का सूत्रधार मौलाना मोहम्मद अली (एमएमए) जौहर फैंस एसोसिएशन का अध्यक्ष हयात जफर हाशमी को बताया जा रहा है। हाशमी के कहने पर ही शहर में 3 जून को बंद का आह्वान करते हुए पोस्टर लगाए गए थे। यह पहले भी शहर में सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाकर माहौल को खराब करने की कोशिश कर चुका है।

राशन कोटे का दुकान चलाने वाला हयात जफर हाशमी सांप्रदायिक नफरत फैलाने का उस्ताद माना जाता है। यह पहले भी कई मौकों पर शहर में नफरत के बीज बो चुका है। इतना ही नहीं, इस्लाम के नाम पर हिंदू-मुस्लिम के बीच खाई को बढ़ाते हुए जफर हाशमी शहर में कई बार उपद्रव करा चुका है।

लाउडस्पीकर पर सरकारी आदेश के बावजूद हयात जफर हाशमी का भड़काऊ पोस्ट

इतना ही नहीं, अपने मंसूबों के लिए इसने अपनी माँ और बहन तक इस्तेमाल कर लिया। हाशमी ने मकान खाली कराने को लेकर अपनी माँ और बहन को उकसाया और उन्हें जिलाधिकारी कार्यालय भेजा था। यहाँ पर दोनों ने इसके कहने पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा ली थी। बाद में उपचार के दौरान दोनों की मौत हो गई थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, हयात जफर हाशमी सोशल मीडिया पर खूब सक्रिय रहता है और लोगों को उकसाते रहता है। NRC और CAA के विरोध के नाम पर हुए बवाल के दौरान भी इसने सक्रिय भूमिका निभाई थी। इसी तरह यह विरोध प्रदर्शनों का अगुआ रह चुका है।

पिछले साल 21 अक्टूबर को हयात जफर हाशमी ने मूलगंज से मेस्टन रोड, शिवाला बाजार, रामनारायण बाजार होते हुए फूलबाग तक जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला था। इस जुलूस को लेकर उसके खिलाफ मुकदमा भी दर्ज हुआ था। हालाँकि, यह सोशल मीडिया पर समाजसेवी होने का खूब दिखावा करता है।

यति नरसिंहानंद के बयान और जितेंद्र त्यागी बने वसीम रिजवी द्वारा कुरान की आयतों को लेकर कोर्ट में दी गई याचिका को लेकर भी जफर हाशमी ने खूब बवाल काटा था और जमकर लोगों से विरोध प्रदर्शन करवाए थे। हाशमी के जहरीले बोल वाले कॉन्ग्रेस के राज्यसभा उम्मीदवार इमरान प्रतापगढ़ी के साथ भी ताल्लुक हैं।

सूफी खानकाह एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष कैसर हसन मजीदी का कहना है कि कानुपर में शुक्रवार को जो बवाल हुआ है, उसका कहीं-न-कहीं पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) ms कनेक्शन है। PFI के स्थानीय सक्रिय सदस्यों की मदद से इस हिंसा को अंजाम दिया गया।

कैसे साजिश रची गई दंगे की साजिश

दरअसल, 26 मई को एक न्यूज चैनल पर ज्ञानवापी मामले को लेकर डिबेट के दौरान मुस्लिम नेताओं के आपत्तिजनक बयान पर भाजपा नेता नुपुर शर्मा ने विरोध जताया था। उन्होंने कहा था कि अगर मुस्लिमों के पैगंबर मोहम्मद को लेकर वह भी कुछ कहेंगी तो बुरा लगेगा। नूपुर शर्मा के बयान पर कई मुस्लिम संगठनों ने आपत्ति जताई।

इसके बाद 27 मई को मौलाना मोहम्मद अली जौहर फैंस एसोसिएशन के अध्यक्ष हयात जफर हाशमी ने इसके विरोध में कानपुर बाजार बंद करने का ऐलान किया। नूपुर के बयान पर कानपुर में पोस्टर लगाए गए। वहीं, 28 मई को हयात ने जेल भरो आंदोलन का आह्वान किया।

मुस्लिम इलाकों के हजारों लोगों ने हयात को समर्थन देते हुए एक बैठक की। इसके बाद हयात ने 5 जून तक बंदी और जेल भरो आंदोलन टाल दिया, लेकिन बाजार में लगे 3 जून के बंदी के पोस्टर नहीं हटाए गए। 2 जून को बेकनगंज इलाके में फिर दुकानों को बंद करने की अपील की गई।

शुक्रवार को मस्जिदों की तकरीरों में मौलानाओं ने कहा कि वे पैगंबर मुहम्मद पर की गई किसी भी टिप्पणी को बर्दाश्त नहीं करेंगे। इसके बाद नमाज पढ़कर निकले लोगों ने जबरन दुकानें बंद करानी शुरू कर दीं। दूसरे पक्ष ने दुकानें बंद करने से मना किया तो उन पर पत्थरबाजी की जाने लगी।

इस तरह यह घटना कानपुर के कई इलाकों में एक साथ शुरू हो गई। इससे अंदेशा जताया जा रहा है कि घटना बहुत सोची-समझी साजिश के तहत की गई है। हालाँकि, प्रशासन के साथ बातचीत में जफर ने बंद के आह्वान को वापस लेने की बात कही, लेकिन हालात को देखकर कहा जा सकता है कि यह बस दिखावा मात्र था।

तमिल ब्राह्मणों का नरसंहार हो, पेरियार ने जैसे कहा… वैसा कत्लेआम हो: DMK नेता राजीव गाँधी, विवाद बढ़ने पर दी सफाई

तमिलनाडु में सत्ताधारी पार्टी DMK के प्रवक्ता आर राजीव गाँधी ने एक विवादित बयान दिया है। उनके मुताबिक तमिल ब्राह्मणों को पेरियार के निर्देशों के अनुसार कत्ल कर दिया जाना चाहिए। ये बातें उन्होंने 3 जून 2022 (शुक्रवार) को राजनैतिक विश्लेषक सुमंत रमण के एक ट्वीट के रिप्लाई में कही हैं।

DMK प्रवक्ता ने अपने ट्वीट में लिखा, “अगर हम शूद्रों ने पेरियार के आदेशों का पालन किया तो हमें तुम ब्राह्मणों से न्याय, समानता और अधिकारों की लड़ाई न लड़नी पड़ती। तुम 3% ब्राह्मण अभी भी तमाम क्षेत्रों में हावी हो।”

विवाद बढ़ने के बाद हालाँकि DMK प्रवक्ता आर राजीव गाँधी ने सफाई दी है। एक नया ट्वीट करके उन्होंने कहा, “फादर पेरियार वो नहीं हैं, जो तुम्हे कत्ल करते हैं बल्कि वो हैं जो राजनीतिक ढंग से ज्ञान के हथियार से लड़ने की प्रेरणा देते हैं। वो मानवता के दुश्मनों के विरुद्ध और समान अधिकारों की लड़ाई के प्रतीक हैं। उनके मुताबिक हर कोई हाड़-मांस का इंसान है।”

चित्र साभार- राजीव गाँधी का ट्विटर

जिस ट्वीट के जवाब में DMK प्रवक्ता आर राजीव गाँधी ने ये बातें लिखी हैं, उसमें सुमंत रमण ने पेरियार के साल 1973 में तमिलनाडु के करिकुडी में कही गई बातों के कुछ अंश थे। उस भाषण में हिन्दू विरोधी विचारधारा वाले पेरियार ने तमिल ब्राह्मणों के विनाश का आह्वान किया था। तब उन्होंने बताया था कि एक ब्राह्मण भगवान मुरुगन ने राक्षस राजा सूरा पदमन को इसलिए मार डाला था क्योंकि वो किसी भगवान को नहीं मानता था।

इसी बयान में पेरियार ने आगे कहा था, “तमिल ब्राह्मणों ने उसे (सूरा पदमन) मारा था तो अब हम उन्हें मार सकते हैं। शायद ये कानूनी तौर पर गलत हो पर हमें इसके नाम पर परेशान नहीं किया जा सकता है। हमें फैसला करना ही होगा। हमें जहाँ भी मंदिर दिखे, उसमें घुस कर मूर्तियों को तोड़ देना चाहिए। जहाँ भी पापान (तमिल ब्राह्मणों के लिए गाली) मिल जाए, उन्हें खत्म कर देना चाहिए। ऐसा उन्होंने हमारे साथ किया है और हमें भी इसका बदला लेना चाहिए।”

पेरियार ने ब्राह्मणों को मारने के दौरान बीच में आने वाले गैर ब्राह्मण को भी मारने में संकोच न करने की बात कही थी। सुमंत रमण ने हैरानी जताते हुए लिखा कि कैसे भारत के कई हिस्सों में पेरियार द्वारा अपने जीवन में फैलाई गई नफरत के बारे में पता ही नहीं है। अपने ट्वीट में सुमंत रमण ने जयललिता, इंदिरा गाँधी को नरसंहार से बचाने का धन्यवाद दिया। साथ ही उन्होंने बाकी भारत से भी पेरियर के उस भाषण को सुनने की अपील की।

हिन्दुओं से नफरत के लिए प्रसिद्ध थे पेरियर

वर्ष 1953 में, पेरियार ने भगवान गणेश की मूर्तियों के अपमान का अभियान चलाया था। जिस दिन एक साथ हजारों मूर्तियों को तोड़ा गया, वो गौतम बुद्ध का जन्मदिन था। इसके चलते पेरियार पर FIR भी दर्ज हुई थी लेकिन अदालत ने केस ख़ारिज कर दिया था।

अगस्त 1956 में पेरियार ने भगवान राम की तस्वीरें जलाने का अभियान चलाया था। ये कृत्य वो मरीना में करने वाले थे, जहाँ तैनात पुलिस बल ने उनके समर्थकों पर लाठीचार्ज किया था। पेरियार को गिरफ्तार कर लिया गया था। तब पेरियार के लगभग 890 समर्थकों को भी पकड़ा गया था। पेरियार को ढाई घंटे बाद छोड़ दिया गया था क्योकि उन्होंने रिहा होने के बाद विरोध न करने का वचन दिया था।

पेरियार आर्यों को अयोग्य और द्रविड़ों को असली धार्मिक मानते थे। यद्दपि उनके पास अपने तथ्यों या तर्कों का कोई ठोस आधार नहीं था।

सलीम पर गौहत्या का केस, HC ने 1 माह तक गायों की सेवा करने और ₹1 लाख गौशाला में दान देने की शर्त पर दिया बेल

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में गौकशी के एक आरोपित को जमानत देने के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट का बड़ा दिलचस्प फैसला आया। कोर्ट ने सलीम उर्फ कालिया नाम के आरोपित को बेल देने से पहले शर्त रखी कि उसे 1 लाख रुपए गौशाला को देने होंगे। साथ ही एक महीने गायों की सेवा करने के निर्देश सलीम को दिए गए।

जानकारी के मुताबिक आरोपित सलीम ने गौकशी के आरोप में बंद होने के बाद पहले भी जमानत याचिका दी थी लेकिन कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया था। हालाँकि इलाहाबाद कोर्ट की जस्टिस शेखर कुमार यादव की एकल पीठ ने अपने आदेश में कहा कि सलीम ने जमानत पर छूटने के बाद शर्तों का पालन नहीं किया तो उसकी जमानत को निरस्त कर दी जाएगी। कोर्ट ने कई शर्तों पर सलीम को जमानत दी है। सलीम ने भी बेल लेने के लिए कोर्ट को कहा कि वह हर प्रकार से कोर्ट का सहयोग करेगा और अपनी जमानत का दुरुपयोग हीं करेगा।

बता दें कि गौवध निरोधक कानून के तहत बरेली के भोजीपुरा इलाके से सलीम को पिछले साल 3 अगस्त 2021 को गिरफ्तार किया गया था। उसके ऊपर गौहत्या अधिनियम, 1955 की धारा 3/8 के तहत मामला दर्ज किया गया था। अपनी बेल याचिका में उसने खुद को निर्दोष बताया और दावा किया कि उसके पास से किसी गौमाँस की बरामदगी नहीं हुई। जो बरामदगी दिखाई गई है उसके स्वतंत्र गवाब नहीं है।

हालाँकि पुलिस ने सलीम के पास से मिले गौमाँस की बरामदगी दिखाई है। केस का ट्रायल जल्द पूरा होने की संभावना है। सलीम ने कोर्ट से कहा है कि वो इस केस में हर प्रकार का सहयोग देगा। वहीं कोर्ट ने उसकी जमानत दो शर्तों पर मंजूर की है। कोर्ट ने कहा, “आवेदक रिहा होने के एक माह के भीतर जिला बरेली के किसी रजिस्टर्ड गौशाला के पक्ष में एक लाख रुपए जमा करवाएगा। जेल से तुरंत छूटने के बाद आवेदक स्वयं गौशाला जाएगा और 1 माह तक गायों की सेवा करेगा।”

कानपुर हिंसा के बाद CM योगी के तेवर सख्त: 15 दिनों में अवैध धार्मिक ढाँचों की पहचान का निर्देश, PFI की भूमिका की जाँच

उत्तर प्रदेश के कानपुर (Kanpur, Uttar Pradesh) में शुक्रवार (3 जून 2022) को नमाज के बाद की गई हिंसा के मामले में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) के तेवर सख्त हो गए हैं। उन्होंने सार्वजनिक जगहों पर बनाए गए अवैध धार्मिक ढाँचों की पहचान कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।

बता दें कि भाजपा नेता नुपुर शर्मा द्वारा इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद के कथित अपमान को लेकर फैलाई गई इस हिंसा में कट्टरपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) की भूमिका पर संदेह जताया जा रहा है। इस मामले में इस एंगल से भी जाँच की जा रही है। कानपुर की हिंसा में अब तक 3 एफआईआर दर्ज की गई हैं और 36 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, बाकी लोगों की पहचान की प्रक्रिया जारी है।

रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने यूपी के पुलिस महानिदेशक (DGP) और राज्य के मुख्य सचिव (CS) के साथ-साथ अतिरिक्त मुख्य सचिव को सड़कों पर अवैध रूप से बनाए गए धार्मिक स्थलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का विशेष निर्देश दिया गया है। सीएम योगी ने 15 दिनों के भीतर ऐसी सभी धार्मिक स्थलों की पहचान करने के लिए सभी जिलों में अभियान चलाने को कहा।

बता दें कि अवैध रूप से बने धार्मिक ढाँचे भी विवाद के महत्वपूर्ण कारण हैं। इसको लेकर उत्तर प्रदेश में समय-समय पर शिकायतें की जाती रही हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इसके जरिए जमीन कब्जा करने की कोशिश की जाती हैं और कई मामलों इन ढाँचों के कारण सड़कों पर दुर्घटनाएँ होती रहती हैं।

कानपुर मामले में 40 नामजद 1,000 अज्ञात पर 3 FIR

कानपुर हिंसा मामले में 3 FIR दर्ज हो चुकी हैं। दो FIR पुलिस ने दर्ज कराई है, जबकि एक FIR यतीमखाना के पास चंदेश्वर हाते में रहने वाले लोगों ने दर्ज करवाई है। इनमें 40 लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया गया है और 1,000 अज्ञात लोगों पर केस दर्ज किया गया है। पुलिस कमिश्नर विजय मीणा के अनुसार, मामले में अब तक 36 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

शहर की तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए 2 बजे यतीमखाना में पुलिस कमिश्नर और डीएम ने फ्लैग मार्च किया। इस दौरान घरों में दबिश देकर संदिग्ध दंगाइयों को हिरासत में लिया गया। अभी तक मिले फोटो और वीडियो के आधार पर पुलिस दंगाइयों की पहचान कर रही है।

संगठन ने किया था बंद का आह्वान

दरअसल, 26 मई को एक न्यूज चैनल पर ज्ञानवापी मामले को लेकर डिबेट के दौरान मुस्लिम नेताओं के आपत्तिजनक बयान पर भाजपा नेता नुपुर शर्मा ने विरोध जताया था। उन्होंने कहा था कि अगर मुस्लिमों के पैगंबर मोहम्मद को लेकर वह भी कुछ कहेंगी तो बुरा लगेगा। नूपुर शर्मा के बयान पर कई मुस्लिम संगठनों ने आपत्ति जताई।

इसके बाद 27 मई को मौलाना मोहम्मद अली जौहर फैंस एसोसिएशन के अध्यक्ष हयात जफर हाशमी ने इसके विरोध में कानपुर बाजार बंद करने का ऐलान किया। नूपुर के बयान पर कानपुर में पोस्टर लगाए गए। वहीं, 28 मई को हयात ने जेल भरो आंदोलन का आह्वान किया।

मुस्लिम इलाकों के हजारों लोगों ने हयात को समर्थन देते हुए एक बैठक की। इसके बाद हयात ने 5 जून तक बंदी और जेल भरो आंदोलन टाल दिया, लेकिन बाजार में लगे 3 जून के बंदी के पोस्टर नहीं हटाए गए। 2 जून को बेकनगंज इलाके में फिर दुकानों को बंद करने की अपील की गई।

शुक्रवार को मस्जिदों की तकरीरों में मौलानाओं ने कहा कि वे पैगंबर मुहम्मद पर की गई किसी भी टिप्पणी को बर्दाश्त नहीं करेंगे। इसके बाद नमाज पढ़कर निकले लोगों ने जबरन दुकानें बंद करानी शुरू कर दीं। दूसरे पक्ष ने दुकानें बंद करने से मना किया तो उन पर पत्थरबाजी की जाने लगी। इस तरह यह मामले कानपुर के कई इलाकों में एक साथ हुआ। जाहिर सी बात है कि बिना साजिश के कई इलाकों में इस तरह की घटना एक साथ नहीं हो सकती।

कानपुर मामले में PFI की भूमिका और उसका इतिहास

कानपुर पुलिस कमिश्नर विजय मीणा का कहना है कि प्रशासन से बातचीत के लिए बंद के ऐलान को वापस ले लिया गया था, लेकिन शुक्रवार को नमाज के बाद अचानक हिंसा फैल गई। एमएमए जौहर फैन्स एसोसिएशन के अध्यक्ष हयात जफर हाशमी सहित कुछ स्थानीय नेताओं ने बंद का आह्वान किया था। उन्होंने कहा कि इस घटना में शामिल किसी भी साजिशकर्ता या संगठन को बख्शा नहीं जाएगा।

माना जा रहा है कि इस हिंसा में PFI की भी भूमिका हो सकती है, क्योंकि ऐसे मामलों को सांप्रदायिक रंग देने का उसका इतिहास रहा है। पुलिस कानपुर मामले में इस ऐंगल से भी जाँच कर रही है। पुलिस जाँच कर रही है कि बंद बुलाने वाले संगठनों का PFI या किसी अन्य कट्टरपंथी संगठनों से संपर्क तो नहीं है।

बता दें कि 21 मई 2022 को केरल के अलाप्पुझा में PFI ने एक रैली का आयोजन किया था, जिसमें एक छोटे बच्चे को हिंदुओं के खिलाफ जहर उगलते हुए सुना गया था। उसका वीडियो इंटरनेट पर खूब वायरल हुआ था। वीडियो में लड़के को एक आदमी ने अपने कंधों पर उठाया हुआ है।

इस दौरान वह लड़का कहता है, “चावल तैयार रखो। यम (मृत्यु के देवता) आपके घर आएँगे। यदि आप सम्मानपूर्वक रहते हैं, तो आप हमारे स्थान पर रह सकते हैं। अगर नहीं, तो हम नहीं जानते कि क्या होगा।”

पीएफआई का हिंसा करने का काफी पुराना इतिहास है। नागरिकता संशोधन अधिनियम के मद्देनजर हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों और देश भर में हिंसा की जाँच के दौरान, पीएफआई की भूमिका संदिग्ध रही है और पीएफआई के कई सदस्यों को दंगों में शामिल होने के लिए गिरफ्तार किया गया था।

इसके अलावा, साल 2020 में कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया ने देश के विभिन्न हिस्सों में दंगों और हिंसा के लिए उकसाने के आरोपित किसानों के विरोध को अपना समर्थन दिया और प्रदर्शनकारियों को संविधान के संरक्षण के लिए संघर्ष करने के लिए कहा था।

पीएफआई और SIMI जैसे कट्टरपंथी इस्लामी संगठन विभिन्न राष्ट्र विरोधी गतिविधियों की फंडिंग के लिए कुख्यात हैं। दिसंबर 2019 में CAA के विरोध प्रदर्शनों के दौरान गृह मंत्रालय के साथ शेयर की गई एक खुफिया रिपोर्ट ने कुछ ‘राजनीतिक दलों’ की तरफ इशारा किया था और SIMI जैसे कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया था।

इस तरह के आपत्तिजनक नारे को केरल में रहने वाले हिंदुओं और ईसाइयों को सीधे तौर पर धमकी के रूप में देखा गया। चरमपंथी संगठन PFI ने चेतावनी हिंदू-ईसाइयों को धमकाते हुए कहा था कि अगर वे रास्ते पर नहीं आते हैं तो उन्हें मौत की सजा दी जाएगी।

इसके अलावा, PFI के कई सदस्यों पर धनशोधन निरोधक अधिनियम (मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) के तहत मामला दर्ज कर उनके ठिकानों पर छापेमारी हो चुकी है। आयकर विभाग ने 15 जून 2021 को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) का 80जी पंजीकरण रद्द कर दिया था। आयकर विभाग ने कहा कि इस्लामी संगठन समुदायों के बीच ‘सद्भावना’ और ‘भाईचारे’ को खत्म कर रहा है।

इंद्राणी ने सुमैया बन सैयद अली से किया निकाह… बेटी की माहवारी आते ही बेचने लगी अंडाणु, सौतेला अब्बा करता था यौन शोषण

तमिलनाडु के ईरोड में एक नाबालिग लड़की का अंडाणु खरीद-फरोख्त करवाने के आरोप में 3 आरोपित गिरफ्तार किए गए हैं। गिरफ्तार 3 लोगों में 2 महिला और एक पुरुष शामिल हैं। आरोपितों में लड़की की माँ और उसका प्रेमी (दूसरा पति भी) सैयद अली भी शामिल है। पीड़िता के साथ ये अत्याचार 8 बार किया गया। आरोपितों की गिरफ्तारी शुक्रवार (3 जून 2022) को की गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पीड़िता की उम्र 16 साल है। उसके अंडाणु को एक प्राइवेट सुधा अस्पताल में डोनेट करवाया जाता था। इसके एवज में लड़की की माँ इंद्राणी उर्फ़ सुमैया को 25000 रुपए मिलते थे। पैसे पाने के बाद आरोपिता ने अपने लालच को आदत में बदल डाला और बार-बार पीड़िता पर अंडाणु डोनेट करने के दबाव बनाया जाने लगा। आखिरकार पीड़िता अपने रिश्तेदारों के घर चली गई और अपनी आपबीती बताई।

पीड़ित लड़की के रिश्तेदार सालेम में रहते हैं। उन्होंने इस कृत्य की शिकायत पुलिस में की। पीड़ित लड़की इंद्राणी उर्फ़ सुमैया के पहले पति से पैदा हुई बेटी है। सैयद अली पीड़ित लड़की का सौतेला अब्बा है। पुलिस के अनुसार मासिक धर्म (माहवारी, पीरियड्स) आने के बाद से ही पीड़ित लड़की को अंडाणु डोनेट करने के लिए प्रताड़ित किया जाता था। सौतेला अब्बा सैयद अली ने कई बार पीड़ित लड़की का यौन शोषण भी किया है।

पुलिस ने केस दर्ज कर के पीड़िता की माँ, उसके प्रेमी सैयद अली और एक अन्य महिला मालाठी को गिरफ्तार कर लिया। हर अंडाणु डोनेट करने में सुमैया को मिलने वाले 25000 रुपए में 5000 मालाठी का हिस्सा होता था। पूछताछ में अरोपित माँ ने अपना गुनाह कबूल करते हुए ये सब पैसे के लिए करना बताया। अरोपित माँ उसी अस्पताल में पहले से दलाल का काम करती थी।

जिस अस्पताल में नाबालिग का अंडाणु डोनेट करवाया जाता था, वहाँ के मैनेजमेंट से भी सवाल-जवाब किए जा रहे हैं। गिरफ्तार अन्य आरोपितों से भी इस अवैध काम में अस्पताल की भूमिका के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।

एरोड दक्षिण के पुलिस इंस्पेक्टर पी विजय ने भी इस गिरफ्तारी की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि आरोपित बच्ची का जबरन अंडाणु डोनेट करवा रहे थे। तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री ने इस मामले में बताया कि अगर इस अपराध में प्राइवेट अस्पताल की भूमिका सामने आती है तो उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों ने हिजबुल कमांडर निसार को मार गिराया, 3 जवान भी घायल: आतंकी हमले के कारण 2 मजदूर अस्पताल में

जम्मू-कश्मीर में बदलते माहौल से घबराए पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन के इस्लामी आतंकी लगातार आम लोगों को निशाना बना रहा हैं। दक्षिण कश्मीर के शोपियां में शुक्रवार (3 जून 2022) की रात को गैर-स्थानीय मजदूरों पर ग्रेनेड फेंककर हत्या करने की कोशिश की। इसमें दो मजदूर घायल हो गए हैं। वहीं, सुरक्षाबलों ने एनकाउंटर में एक आतंकी को मार गिराया है।

दक्षिण कश्मीर में अनंतनाग के ऋषिपोरा में शुक्रवार की शाम को एनकाउंटर के दौरान सुरक्षाबलों ने एक आतंकवादी को मार गिराया। वहीं, आतंकियों के साथ एनकाउंटर में सेना के तीन जवान और एक नागरिक घायल हो गए हैं। घायलों को इलाज के लिए एयरलिफ्ट कर श्रीनगर के 92 बेस कैंप अस्पताल में ले जाया गया है।

मारा गया आतंकी प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन (HM) का कमांडर है। उसकी पहचान मोहम्मद निसार खांडे के रूप में हुई हैं। मारे गए आतंकी के पास से सुरक्षाबलों ने एक AK-47 राइफल सहित अन्य हथियार, गोला-बारूद और आपत्तिजनक सामग्री बरामद की है।

सुरक्षाबलों ने कई आतंकियों को घेर रखा है और आतंकियों को भागने का मौका नहीं मिल रहा है। दोनों ओर गोला-बारी हो रही है। कश्मीर के IGP (Inspector General of Police) ने बताया कि ऑपरेशन अभी जारी है।

बता दें कि आतंकियों ने शोपियां के जौनपोरा में मजदूरों पर हथगोले फेंके थे। इसमें दोनों मजदूर घायल हो गए हैं। पहले यह बात सामने आई कि सिलिंडर फटा है, जिसकी वजह से धमाके की आवाज आई है और मजदूर घायल हुए हैं। हालाँकि, बाद में पुलिस ने स्पष्ट किया कि यह आतंकी हमला है।

बता दें कि बडगाम में गुरुवार (2 जून 2022) को ईंट भट्ठे पर काम करने वाले गैर-स्थानीय मजदूरों पर हमला किया था, जिनमें एक मजदूर की मौत हो गई थी। वहीं, दूसरा मजदूर बुरी तरह जख्मी है। मृतक मजदूर का नाम दिलखुश है और वह बिहार का रहने वाला था। वहीं, घायल व्यक्ति का नाम राजन है और वह पंजाब का रहने वाला है।

घाटी में आतंकियों के निशाने पर गैर-स्थानीय और गैर-मुस्लिम लोग हैं। पिछले कुछ दिनों में आतंकियों ने टारगेट किलिंग के तहत कई लोगों की हत्या कर दी। आतंकियों ने चेतावनी दी थी कि जो लोग बाहर से बाहर के लोग हैं, वे घाटी छोड़कर चले जाएँ, नहीं तो उनकी हत्या कर दी जाएगी। हालाँकि, सुरक्षाबल आतंकियों को निपटाने में लगे हुए हैं।