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घर पर दादी को गोली मारी, फिर स्कूल में बच्चों पर बरसाई गोलियाँ: 22 की मौत, टेक्सास के हमलावर ने जन्मदिन पर खरीदी थी AK-47

अमेरिका के टेक्सास राज्य में मंगलवार (24 मई, 2022) को एक स्कूल में 18 साल के युवक ने छात्रों और टीचरों को निशाना बनाते हुए अंधाधुध फायरिंग की । घटना में 18 छात्र समेत 22 लोगों की मौत हो गई। इनमें 3 टीचर्स भी थे। कुल 13 बच्चे, स्कूल के स्टाफ मेंबर और पुलिसवाले भी फायरिंग में घायल हुए। बताया जा रहा है कि युवक ने AK-47 स्कूल में चलाने से पहले इसका प्रयोग घर में किया था और पहले अपने दादी को गोली मार चुका था।

पूरी घटना टेक्सास के युवाल्डे के रॉब एलिमेंट्री स्कूल की है। यहाँ हमलावर ने दूसरी, तीसरी और चौथी क्लास के छात्रों को अपना निशाना बनाया। संदिग्ध युवक की पहचान स्वाडोर रामोस बताई जा रही है। वह हाईस्कूल का छात्र था। रिपोर्ट्स के अनुसार, हमलावर ने स्कूल में फायरिंग से पहले अपने घर पर अपनी दादी को गोली मारी थी। 

इसके बाद वह एक गाड़ी से बाहर आया और एक वाहन में भी टक्कर मारी। जब पुलिस उसे पकड़ने चली तो वो स्कूल में घुस गयाऔर बिना इधर-उधर देखे क्लास में घुसकर फायरिंग स्टार्ट कर दी। इस दौरान चौथी क्लास की  टीचर इवा मायरलेस ने बच्चों को बचाने का खूब प्रयास किया मगर लेकिन गोली लगने के बाद उन्होंने भी दम तोड़ दिया। 

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने घटना पर दुख जताया और कहा, “हमें पूछना होगा कि एक राष्ट्र के रूप में हम कब बंदूक की लॉबी के खिलाफ खड़े होंगे और वो करेंगे जो हमें करना चाहिए। वे माता-पिता अपने बच्चों को कभी नहीं देख पाएँगे। बहुत सारी आत्माएं आज कुचली गई है। यह वक्त है जब हमें इस दर्द को एक्शन में बदलना है।”

बता दें कि इस घटना के बाद खबर आ रही है कि पुलिस द्वारा की गई फायरिंग में हमलावर को मार गिराया गया है। वहीं अन्य घायल लोग व हमलावर की दादी अस्पताल में भर्ती हैं। टेक्सास के गवर्नर ने कहा है, “हत्यारा 18 साल का है और उसने रायफल से फायरिंग की है। हालांकि, पुलिस के साथ एनकाउंटर में वो भी मारा गया है। हम मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रहे हैं, जो भी दोषी होगा उसे बख्शेंगे नहीं।” 

उल्लेखनीय है कि अमेरिका के स्कूल में इस तरह छात्रों को निशाना बनाए जाने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले साल 2012 में भी न्यूटाउन के स्कूल में घुसकर छात्रों के ऊपर फायरिंग की गई थी। हमले में 20 बच्चे समेत 26 लोग मारे गए थे। हमलावर का नाम एडम लांजा था। आज टेक्सास की घटना देखने के बाद जहाँ पूरा अमेरिका सकते में है वहीं कुछ लोग इस घटना को 2012 वाली घटना से जोड़ कर देख रहे हैं। लोगों की चिंता इस दिशा में है कि अमेरिका में पिछले कुछ समय में मास शूटिंग की घटनाएँ तेजी से बढ़ी हैं। सिर्फ 2022 में मास शूटिंग में कम से कम 212 घटनाएँ घटित हुई हैं।

हमलावर को जानने वालों ने उसे ‘शांत’ किस्म का बतयाा और कुछ ने उसे ‘गुस्सैल’ कहा। एक सहकर्मी ने अपना नाम न बताने की शर्त पर मीडिया को बताया कि वो शख्स लड़कियों से हमेशा अकड़ के बात करता था और एक बार उसने एक कुक को धमकाते हुए कहा था, ‘तुम जानते हो मैं कौन हूँ।’ उसने घटना को अंजाम देने से पहले अपने सोशल मीडिया पर एक लड़की को मैसेज भी भेजे थे, जिसमें लिखा था- ‘मैं तुम्हें सीक्रेट बताना चाहता हूँ।’ हालाँकि लड़की ने तब उसे कोई जवाब नहीं दिया और बाद में इन संदेशों का खुलासा किया। अब हमलावर का अकॉउंट इंस्टा से हटा दिया गया है। उसके इंस्टा पर बंदूकों की तस्वीरें थी। वहीं से ये भी पता चला कि घटना के समय जो  एके-47 उसके हाथ में थी वो उसने अपने जन्मदिन पर खरीदी थी।

हिन्दुओं को सौंपा जाए ज्ञानवापी परिसर, मुस्लिमों के आने-जाने पर लगे रोक: कोर्ट ने स्वीकार की नई याचिका, कानूनी लड़ाई में कूदीं एक और हिन्दू महिला

वाराणसी में ज्ञानवापी विवादित ढाँचे मामले में मंगलवार (24 मई, 2022) को कोर्ट में एक नई याचिका दाखिल की गई है। इस याचिका में ज्ञानवापी परिसर में मुस्लिमों का प्रवेश रोकने और उसे हिन्दुओं को सौंपने की माँग की गई है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यहाँ कहा जा रहा है कि सीनियर डिवीजन सिविल जज रवि कुमार दिवाकर की कोर्ट ने इस याचिका को स्वीकार कर लिया है। जिस पर सुनवाई कल बुधवार (25 मई, 2022) को होगी।

रिपोर्ट के अनुसार याचिका में तीन प्रमुख माँगे रखी गई हैं। जिसे विश्व वैदिक सनातन संघ की अंतरराष्ट्रीय महामंत्री किरण सिंह ने भगवान आदि विश्वेश्वर विराजमान के नाम से दाखिल की है। वहीं इस मामले में याचिकाकर्ता किरण सिंह के पति जितेंद्र सिंह बिसेन ने कहा, “कोर्ट ने हमारा प्रार्थना पत्र मुकदमे के तौर पर स्वीकार कर लिया है। हमारे वाद पर विपक्षियों को नोटिस जारी करने का आदेश कोर्ट ने दिया है। हमारी जो विशेष और तात्कालिक माँग थी कि भगवान आदि विश्वेश्वर विराजमान की पूजा-पाठ का आदेश दिया जाए। उस माँग पर सुनवाई के लिए 25 मई की तारीख तय की गई है।”

किरण सिंह की याचिका पर अदालत के आदेश की प्रति (साभार-दैनिक भास्कर)

बता दें कि किरण सिंह, सनातन संघ के प्रमुख जितेंद्र सिंह बिसेन की पत्नी हैं। वहीं भगवान आदि विश्वेश्वर विराजमान बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के इस मुकदमे के माध्यम से तीन माँगे कोर्ट के सामने रखी गई हैं।

  1. ज्ञानवापी परिसर में तत्काल प्रभाव से मुस्लिमों का प्रवेश प्रतिबंधित हो।
  2. ज्ञानवापी का पूरा परिसर हिंदुओं को सौंपा जाए।
  3. भगवान आदि विश्वेश्वर स्वयंभू ज्योतिर्लिंग, जो अब सबके सामने प्रकट हो चुके हैं, उनकी पूजा शुरू करने की इजाजत दी जाए।

गौरतलब है कि ज्ञानवापी विवादित ढाँचे को कोर्ट में ले जाने वाली पहले भी पाँच महिलाएँ ही हैं। उनकी याचिका किरण सिंह की याचिका से अलग है। पहले की पाँच महिलाओं ने मस्जिद परिसर में श्रृंगार-गौरी स्थल पर प्रार्थना की अनुमति माँगी है। 

इनमें कोई ब्यूटी पार्लर चलाती है, कोई जनरल स्टोर चलाती है तो कोई गृहिणी है। कोर्ट में याचिका लगाने वाली महिलाओं में लक्ष्मी देवी, सीता साहू, मंजू व्यास और रेखा पाठक वाराणसी में रहती हैं, जबकि पाँचवी और मुख्य याचिकाकर्ता राखी सिंह दिल्ली में रहती हैं।

पूजा करने ब्रह्मदेव मंदिर पहुँचे भक्त, मिली पुजारी की लहूलुहान लाश: झोंपड़ी में सो रहे थे बालकराम यादव, ईंट से सिर कुचल कर मार डाला

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में पुजारी की निर्मम हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। मंगलवार (24 मई 2022) सुबह ब्रह्म देव मंदिर स्थल पर पूजा करने पहुँचे भक्तों ने जब पुजारी का लहूलुहान शव देखा, तो उन्होंने इसकी सूचना पुलिस को दी। प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुर्सी थाना क्षेत्र के बाबूपुर मजरे दरांवा गाँव में आज सुबह ब्रह्मदेव मंदिर स्थल के निकट झोपड़ी में पुजारी बालकराम यादव का शव पाया गया।

बताया जा रहा है कि अज्ञात बदमाशों ने उनकी सिर कुचलकर हत्या कर दी। पुजारी की निर्मम हत्या करके अज्ञात बदमाश मंदिर से घंटा और दान पात्र भी लूटकर ले गए। इस घटना के बाद से गाँव में हड़कंप मचा हुआ है। ग्रामीणों ने इसके बारे में पुलिस को सूचित किया, जिसके बाद भारी पुलिस बल के साथ एसपी अनुराग वत्स मौके पर पहुँचे। एसपी डॉग स्क्वायड और फॉरेंसिक टीम के साथ सबूत इक्कठा करने में जुट गए हैं।

थाने के इंस्पेक्टर धर्मवीर सिंह ने बताया कि बालकराम यादव इसी गाँव के रहने वाले हैं। सोमवार रात को झोपड़े में सो रहे बालकराम की अज्ञात लोगों ने हत्या कर दी। वहीं, मौके पर मौजूद ग्रामीण अरविंद यादव ने बताया कि मृतक बालकराम यादव करीब दस वर्षों से इस झोपड़े में रह रहे थे। रात में चोरों ने घंटा खोला, जिसकी आवाज से ये जग गए और उन्होंने इनकी हत्या कर दी। वहीं अन्य ग्रामीणों का यह भी कहना है कि पिछले कई दिनों से चौकी इंचार्ज अनिल कनौजिया गश्त पर आ रहे थे, लेकिन वो भी दो दिनों से गश्त पर नहीं आए।

एसपी अनुराग वत्स ने घटना का जल्द खुलासा करने का दावा करते हुए कहा कि बाबूपुर गाँव में एक व्यक्ति की हत्या की सूचना मिली थी, जो इसी गाँव के निवासी बालकराम यादव थे और देव स्थल में पूजा पाठ करते थे। देर रात किसी ने उनके सिर को ईंट या किसी भारी चीज से कुचलकर उन्हें मारा डाला। डॉग स्क्वायड व अन्य सबूतों की मदद से जल्द घटना का खुलासा किया जाएगा।

राहुल गाँधी के कंधे पर भारत विरोधी नेता का हाथ: लंदन में आतंकियों के ‘दोस्त’ और Pak के हमदर्द जेरेमी कॉर्बिन से मिले, कश्मीर को बताता है भारत से अलग

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी इस समय इंग्लैंड के दौरे पर हैं जहाँ वह आजादी के 75 साल बाद भारत के भविष्य पर चर्चा करने के लिए कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में एक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए गए हैं। जहाँ एक राष्ट्र के रूप में भारत के अस्तित्व को खारिज करने से लेकर घरेलू भारतीय मुद्दों में पश्चिमी हस्तक्षेप की माँग तक, राहुल गाँधी एक के बाद एक भारत विरोधी बयान देने में व्यस्त हैं। यही नहीं भारत विरोधी रुख को आगे बढ़ाते हुए, राहुल गाँधी ने न सिर्फ भारत विरोधी बल्कि पाकिस्तान समर्थक जेरेमी कॉर्बिन से भी मुलाकात की, जो ब्रिटेन में लेबर पार्टी के प्रमुख थे।

मीडिया में एक तस्वीर आई है जिसमें इंडियन ओवरसीज कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सैम पित्रोदा के साथ, राहुल गाँधी को पूर्व लेबर नेता के साथ खड़े देखा जा सकता है, जो राहुल गाँधी की ही तरह राष्ट्रीय चुनावों में अपनी पार्टी को 2 हार का मुँह दिखा चुके हैं।

यहाँ असली सवाल ये है कि कौन हैं ये जेरेमी कॉर्बिन और क्यों राहुल गाँधी से उनकी मुलाकात भारतीयों को खास तौर पर परेशान करने वाली है। हम कॉर्बिन के उनके पिछले रिकॉर्ड पर एक नज़र डालते हैं, यह समझने के लिए कि भारत में चुनावी प्रक्रिया में लगे किसी भी व्यक्ति को उनके करीब क्यों नहीं आना चाहिए।

जम्मू और कश्मीर के भारतीय क्षेत्र में हस्तक्षेप करने का प्रयास

कॉर्बिन ने हमेशा कश्मीरी अलगाववादियों का समर्थन किया है और कश्मीर के विषय पर पाकिस्तान की बयानबाजी को कायम रखा है। यहाँ तक कि लेबर पार्टी के मुखिया के तौर पर अपने कार्यकाल में उनकी पार्टी के सांसदों ने पाकिस्तान की बातों को दोहराते हुए कई बार कश्मीर के मुद्दे में दखल देने की कोशिश की। लेबर पार्टी ने एक प्रस्ताव भी पारित किया जिसमें कश्मीर में अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप और संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व में जनमत संग्रह का आह्वान किया गया।

कॉर्बिन ने कश्मीर के मुद्दे पर कॉन्ग्रेस पार्टी के माध्यम से सीधे-सीधे कश्मीर के मामले में हस्तक्षेप करने की कोशिश की, यहाँ तक कि चर्चा करने के लिए उनके प्रतिनिधियों से मुलाकात भी की, हालाँकि, उस समय न तो कॉर्बिन और न ही कॉन्ग्रेस सत्ता में थी।

हालाँकि, बैठक के बाद भारत में कॉन्ग्रेस की पाकिस्तान समर्थक से मुलाकात पर भारी हंगामा हुआ था जिसपर कॉन्ग्रेस ने यह कहकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की कि वे लेबर पार्टी के नेता से केवल जम्मू-कश्मीर के भारतीय क्षेत्र पर उनके द्वारा पारित प्रस्ताव की निंदा करने के लिए मिले थे।

इतना ही नहीं, लेबर पार्टी के सांसद लियाम बर्न पाकिस्तानी मॉब के नेतृत्व में निकाले गए मार्च में सबसे आगे थे, जिसने लंदन में भारतीय उच्चायोग में तोड़फोड़ की थी। बर्न ने अपने निर्वाचन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर मुस्लिमों के होने के कारण कश्मीर पर पाकिस्तानी रुख का जोरदार समर्थन किया था।

जेरेमी कॉर्बिन: आतंकियों से हमदर्दी

जेरेमी कॉर्बिन का हर जगह आतंकवादियों और चरमपंथियों का समर्थन करने का एक लंबा इतिहास रहा है। चाहे वे आयरलैंड से हों या कश्मीर, लेबनान या गाजा से, कॉर्बिन की दिल में ऐसे आतंकी समूहों के लिए हमेशा एक सॉफ्ट कॉर्नर रहा।

पहले भी कई अवसरों पर कॉर्बिन ने कट्टरपंथी इस्लामी आतंकवादियों, हमास और हिज़्बुल्लाह को ‘दोस्त’ बताया है, एक बयान जिस पर बाद में कॉर्बिन ने माफ़ी भी माँगी लेकिन उसने कसम भी खाई कि वह उनके साथ बात करना बंद नहीं करेंगे। बदले में, कॉर्बिन को हमास से एक एंडोर्समेंट और “सैल्यूट” भी मिला। हमास ने अपने एक बयान में कहा, “ब्रिटिश लेबर पार्टी के नेता जेरेमी कॉर्बिन द्वारा सामूहिक रैली में भाग लेने वालों के लिए भेजे गए एकजुटता संदेश की वजह से हमें बहुत सम्मान और सराहना मिली है।”

कॉर्बिन ने पहले आयरिश रिपब्लिकन आर्मी (IRA) का भी सार्वजनिक रूप से समर्थन किया है, जिसने आयरलैंड को ब्रिटेन से मुक्त कराने के अपने प्रयास में आतंकवाद की एक नई श्रेणी को बढ़ावा दिया था। कॉर्बिन वामपंथी पत्रिका लेबर ब्रीफिंग के संपादकीय बोर्ड के महासचिव भी थे जिसने IRA हिंसा का समर्थन किया और स्पष्ट रूप से ब्राइटन होटल बॉम्बिंग का समर्थन किया, जिसमें 5 लोग मारे गए और 31 अन्य लोग अपंग हो गए।

2015 में, बीबीसी रेडियो अल्स्टर पर, कॉर्बिन ने आईआरए हिंसा और आतंकवाद की विशेष रूप से निंदा करने के लिए पांच बार मना कर दिया। तब उन्होंने सवाल का जवाब देने के बजाय फोन काटने का फैसला किया। एक ब्रिटिश इतिहासकार और पत्रकार लियो मैककिंस्ट्री के अनुसार, द टेलीग्राफ के लिए लिखते हुए लिखा था, “कॉर्बिन, वह व्यक्ति है जिसने 1980 के दशक में हिंसक आयरिश रिपब्लिकनवाद के प्रति सहानुभूति व्यक्त की, 1984 में ब्राइटन बमबारी के एक पखवाड़े बाद IRA प्रतिनिधियों को कॉमन्स में आमंत्रित किया और, 1987 में ट्रूप्स आउट मीटिंग, SAS आत्मघाती हमले में मारे गए आठ IRA आतंकवादियों को सम्मान देने के लिए एक मिनट का मौन रखा।”

कॉर्बिन के खिलाफ यहूदी विरोधी भावना के आरोप

लेबर पार्टी के नेता के रूप में कॉर्बिन के कार्यकाल में, पार्टी के भीतर यहूदी-विरोधी भावना रखने वाले लोग बहुतायत में थे। उस समय कॉर्बिन के नेतृत्व में पार्टी जिस दिशा में जा रही थी। इनके ज़बरदस्त यहूदी विरोधी भावना की वजह से तब कई लेबर पार्टी समर्थकों का मोहभंग हुआ था। यूके में मानवाधिकारों पर निगरानी रखने वालों ने कॉर्बिन के साढ़े चार साल के नेता के रूप में कार्यकाल को “गैरकानूनी” उत्पीड़न और भेदभाव के लिए जिम्मेदार पाया था। इसी वजह से कॉर्बिन को अंततः उनकी पार्टी से निलंबित कर दिया गया था।

अन्य ‘दुर्व्यवहार’

जेरेमी कॉर्बिन ने ईरानी राज्य प्रसारण नेटवर्क प्रेस टीवी पर अपनी प्रजेंस मात्र के लिए £20,000 (लगभग 27,000 डॉलर) लिए थे, और एक ऐसे प्रोग्राम में हिस्सा लिया था जिसमें ईरानी पत्रकार मज़ियार बहारी पर अत्याचारों को दिखाया गया था। वह 2009-12 के बीच करीब पाँच बार चैनल पर दिखाई दिए।

कॉर्बिन ने रायद सालाह को भी समर्थन दिया है, जो एक कट्टरपंथी मुस्लिम है और जो यहूदियों के प्रति घृणा रखता है। सालाह ने एक बार यहूदियों के खिलाफ ‘ब्लड लिबेल’ फैलाया था, दरअसल, यह एक यहूदी विरोधी गाली है जिसका अर्थ है कि यहूदी अपनी रोटी बनाने के लिए अन्यजातियों के बच्चों के खून का इस्तेमाल करते हैं। इतना ही नहीं, उन पर नस्लीय घृणा और हिंसा भड़काने का आरोप लगाया गया और यह भी दावा किया गया कि 9/11 के पीछे यहूदियों का हाथ था। कई अलग-अलग मौकों पर, कॉर्बिन ने उनके बारे में कहा, “सालाह एक बहुत सम्मानित नागरिक है’, ‘सालाह एक ऐसी आवाज है जिसे सुना जाना चाहिए।”

इस प्रकार, देखा जाए तो हमारे पास कॉन्ग्रेस के एक ऐसे नेता राहुल गाँधी हैं, जो ब्रिटेन के एक खतरनाक राजनेता से मिलते हैं, जिनका आतंकवादियों और चरमपंथियों का समर्थन करने का इतिहास है, जिसने हमेशा कश्मीर पर पाकिस्तान की बयानबाजी का समर्थन किया है, और यहाँ तक ​​कि पहले कश्मीर के अंदरूनी मामले में भी हस्तक्षेप करने की कोशिश की है। एक ऐसा राजनेता जिसका यहूदी-विरोधी रवैया उनकी अपनी पार्टी के लिए भी बर्दास्त के बाहर हो गया, जिसका वह नेतृत्व कर रहे थे उस पार्टी को भी उन्हें निलंबित करना पड़ा। एक ऐसे नेता का हाथ उनके कंधे पर है जो दुनिया के कुछ सबसे खूंखार आतंकवादियों को अपना दोस्त कहता है।

मुस्लिम भीड़ ने जलाई एक दर्जन से भी अधिक घर और दुकानें, ईशनिंदा के आरोप में महिला की करना चाहते थे मॉब लिंचिंग

अफ्रीकी देश नाइजीरिया से इस्लामी हिंसा का मामला सामने आया है। यहाँ सोमवार (23 मई, 2022) को कुछ कट्टरपंथी मुस्लिमों की भीड़ ने एक दर्जन से अधिक वाहनों में तोड़फोड़ की कई दुकानों और घरों को आग के हवाले कर दिया। इसके अलावा सार्वजनिक संपत्ति को भी काफी नुकसान पहुँचाया। यह घटना बाउची के वारजी में एक कस्बे की है। बताया जा रहा है कि कुछ मुस्लिमों की हिंसक भीड़ ने कथित ईशनिंदा के आरोप में एक 40 वर्षीय ईसाई महिला को पकड़ने में नाकाम रहने के बाद इस घटना को अंजाम दिया था।

उस ईसाई महिला पर आरोप है कि उसने सोशल मीडिया पर इस्लाम के बारे में अपमानजनक टिप्पणी की है। इसलिए भीड़ ‘ईशनिंदा’ की आरोपित महिला की पीट पीटकर हत्या करना चाहती थी।

पिछले हफ्ते, वारजी काउंसिल क्षेत्र में चिकित्सा विभाग की एक कर्मचारी रोडा जटाउ (Rhoda Jatau) ने व्हाट्सएप पर एक वीडियो शेयर किया था। इसमें कथित तौर पर इस्लाम की आलोचना की गई थी। घाना में बनाए गए इस वीडियो को जटाउ द्वारा 20 लोगों के ग्रुप में भेजा गया था, जिनमें 15 मुस्लिम भी थे। उसे कई इस्लामवादियों ने वीडियो हटाने की धमकी दी थी। इसके बाद वारजी के चिकित्सा विभाग के उप निदेशक को मामले में हस्तक्षेप करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

महिला चिकित्साकर्मी को जान से मारने की धमकी मिलने के बाद उसके पड़ोसियों ने उसकी सुरक्षा के इंतजाम किए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इलाके में कुछ कट्टरपंथी मुस्लिमों की भीड़ ने हंगामा किया और छह घरों और सात दुकानों को आग लगाकर अपना विरोध जताया। उनके द्वारा की गई आगजनी में कई लोग घायल हो गए थे, लेकिन वे फिर भी रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। क्योंकि वे यहाँ सोशल मीडिया पर इस्लाम की आलोचना वाले वीडियो को शेयर करने वाली महिला को पकड़ने आए थे।

उसे पकड़ने में नाकाम रहने पर उन्होंने जमकर उत्पात मचाया। पुलिस ने कहा कि यह घटना शुक्रवार (20 मई, 2022) शाम करीब 5:45 बजे की है। तब से अधिकारियों ने इस इलाके में सुरक्षा बलों, मोबाइल पुलिस बल और रैपिड रिस्पांस स्क्वॉड (आरआरएस) को तैनात कर दिया है, जिनके संयुक्त प्रयासों से स्थिति अब नियंत्रण में है।

इस्लामिक देशों में ईशनिंदा के आरोप और मॉब लिंचिंग

इस्लाम की किसी भी तरह की आलोचना दुनिया भर के इस्लामिक कट्टरपंथियों को बेहद अपमानजनक लगती है। इसी तरह का एक मामला 10 दिन पहले नाइजीरिया के सोकोतो में आया था। यहाँ भी ईशनिंदा के आरोप में इस्लामिक भीड़ ने डेबोरा सैमुअल नाम की एक ईसाई छात्रा को पीट-पीट कर मार डाला था। बताया गया था कि व्हाट्सएप ग्रुप पर डेबोरा के कुछ मित्रों ने कमेंट किए थे, जिसे इस्लामिक कट्टरपंथियों ने ईशनिंदा मान लिया और इस वारदात को अंजाम दिया। पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसमें देखा जा सकता है कि इस्लामिक भीड़ ने अल्लाहु अकबर जैसे मजहबी नारे लगाते हुए डेबोरा की मॉब लिचिंग की और उसे जला दिया। आरोपितों को वीडियो में माचिस की तीली दिखाते और खुशी मनाते हुए देखा जा सकता है।

मृतक डेबोरा सैमुअल सोकोतो राज्य के शेहू शगरी कॉलेज ऑफ एजुकेशन की छात्रा थीं। दावा है कि एक व्हाट्सएप ग्रुप को डेबोरा अपने दोस्तों के संग मिलकर चला रही थीं। उसी ग्रुप में इस्लामिक पोस्ट शेयर हुए थे, जिस पर डेबोरा ने भी कमेंट किया था, जिसे इस्लामियों ने ‘ईशनिंदा’ मान लिया। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक, डेबोरा ने केवल एक कॉलेज व्हाट्सएप ग्रुप में रिलीजियस कंटेंट पोस्ट करने पर आपत्ति जाहिर की थी।

बता दें कि इसी तरह वर्ष 2020 में याहया शरीफ-अमीनू नाम के एक नाइजीरियाई गायक को शरिया अदालत ने पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ ईशनिंदा करने के लिए मौत की सजा सुनाई थी। यहाया पर आरोप था कि उसने अपने एक गीत में तिजानिया मुस्लिम ब्रदरहुड के एक इमाम की तारीफ करते हुए उसे पैंगबर से ज्यादा तरजीह दी और उसे मार्च महीने में व्हॉट्सएप के जरिए वायरल भी किया।  राज्य के हौसावा फिलिन हॉकी क्षेत्र में एक ऊपरी शरिया अदालत ने यहाया के मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि 22 वर्षीय यहाया शरीफ-अमीन मार्च महीने में व्हाट्सएप के माध्यम से प्रसारित एक गीत के लिए ईशनिंदा का दोषी है।

‘ऐ शेख, मेरे मंदिर का चमत्कार देख कि तेरा खुदा भी…’: जब एक बूढ़े ब्राह्मण ने औरंगजेब को करा दिया चुप, दशनामी साधुओं ने काशी बचाने को किया युद्ध

काशी विश्वनाथ मंदिर को औरंगजेब ने ध्वस्त करवाया और फिर उस पर एक विवादित ढाँचे को खड़ा कर दिया, जिसे मुस्लिम ‘मस्जिद’ बताने लगे। वो 2 दिसंबर, 1669 का दिन था जब मुग़ल बादशाह के फरमान पर इस मंदिर को ध्वस्त किया गया था। उससे पहले अकबर के समय राजस्व मंत्री रहे राजा टोडरमल ने नारायण भट्ट नामक साधु के कहने पर इसे बनवाया था। औरंगजेब के समय ही शिवलिंग को ज्ञानवापी में डाल दिया गया था।

बताया जाता है कि जिस समय मंदिर को ध्वस्त किया गया, तब वहाँ के मुख्य पुजारी ने जल्दी-जल्दी में प्रतिमाओं को बचाने के लिए कुएँ (ज्ञानवापी) में समाहित कर दिया। साथ ही शिवलिंग को भी उसमें ही स्थापित कर दिया। इसके बाद से ही ज्ञानवापी हिन्दुओं की श्रद्धा का और बड़ा केंद्र बन गया। मंदिर को पूरा ध्वस्त न करते हुए औरंगजेब ने उसके ऊपर मस्जिद के गुंबद उठवा दिए। गर्भगृह को मस्जिद का दालान बना दिया गया।

शिखर को बुरी तरह ध्वस्त कर दिया गया। मंदिर के अधिकतर द्वार बंद कर दिए गए। इतिहासकार मीनाक्षी जैन अपनी पुस्तक ‘Flight Of Deities And Rebirth Of Temples’ में बताती हैं कि कैसे औरंगजेब ने होली और दीवाली जैसे त्योहारों को प्रतिबंधित करने के अलावा हिन्दुओं को यमुना के किनारे अंतिम संस्कार पर भी रोक लगा दी थी। उसने केशव देव मंदिर को ध्वस्त करने के भी आदेश दिए। फिर वहाँ शाही ईदगाह मस्जिद बनवा दिया गया।

मीनाक्षी जैन वाराणसी के केदार मंदिर के बारे में भी बताते हैं, जिन्हें विश्वेश्वर का बड़ा भाई मान कर पूजा की जाती थी और ये काशी का सबसे प्राचीन शिवलिंग है। स्थानीय लोगों के बीच प्रचलित था कि जब औरंगजेब की फ़ौज ने नंदी की प्रतिमा को तबाह किया तो उसके गर्दन से खून टपकने लगा, जिसके बाद वो वहाँ से डर के मारे भाग खड़े हुए। औरंगजेब के समय बनारस में कृत्तिवासेश्वर, ओंकार, महादेव, मध्यमेश्वर, विश्वेश्वर, बिंदु माधव और काल भैरव समर अनगिनत मंदिर ध्वस्त कर दिए गए।

इनमें से अधिकतर जगह हिन्दुओं के लिए बंद कर दिए गए और वहाँ मस्जिद खड़े कर दिए गए। उस समय वाराणसी में रह रहे विदेशी यात्रियों ने भी अपने संस्मरण में लिखा है कि पुरातन काल के मंदिरों को मुस्लिम शासन ने ध्वस्त कर के मस्जिद और दरगाहों में बदल दिया। हालाँकि, औरंगजेब की फ़ौज को इस मंदिर को ध्वस्त करने से पहले दशनामी साधुओं से युद्ध लड़ना पड़ा। अखाड़ों के साधुओं ने हथियारों का प्रशिक्षण लिया था और वो मुग़ल फ़ौज का सामना करने निकले।

‘अखाड़ा’ नाम से ही पता चलता है कि वहाँ पहलवानी और युद्धकालाओं का प्रशिक्षण मिलता रहा होगा। जानबूझ कर मंदिर की दीवारों पर ही मस्जिद बना दिया गया, लेकिन इसका नाम ‘ज्ञानवापी’ ही रह गया। ये नाम किसी भी मुस्लिम साहित्य में नहीं मिलता, सनातनी ग्रंथों में जरूर इसका जिक्र है। इसी ध्वस्तीकरण के बाद ज्ञानवापी के दक्षिण की तरफ शिवलिंग की स्थापना की गई। वहाँ कोई मंदिर नहीं बनाया गया और हिन्दू चुपचाप गुप्त रूप से भगवान शिव की पूजा करते थे, ताकि मुगलों को इसके बारे में पता न चल जाए।

कुछ दस्तावेजों से पता चलता है कि रेवा के महाराज भाव सिंह, उदयपुर के जगत सिंह, और रेवा के अनिरुद्ध सिंह अलग-अलग वर्षों में यहाँ पूजा करने पहुँचे। सन् 1734 में उदयपुर के महाराज जवान सिंह ने विश्वेश्वर के नजदीक ही एक शिवलिंग की स्थापना की, जो जवानेश्वर कहलाया। उदयपुर के महाराज संग्राम सिंह और असी सिंह भी यहाँ पहुँचे। अंत में अहिल्याबाई होल्कर ने यहाँ मंदिर का निर्माण करवाया, जिनकी प्रतिमा काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में भी लगाई गई है।

औरंगजेब के समय वाराणसी के जिन तीन बड़े मंदिरों के ऊपर मस्जिद बनाए गए, वो हैं – विश्वेश्वर मंदिर की जगह ज्ञानवापी ‘मस्जिद’, पंचगंगा घाट पर बिंदु माधव मंदिर की जगह धरहरा मस्जिद (यहाँ के दो मीनारों के ऊपर चढ़ कर पूरा शहर देखा जा सकता था) और कृत्तिवासेश्वर मंदिर की जगह दारानगर में आलमगीरी मस्जिद। बिंदु माधव की मीनारों को लंबे समय तक ‘माधव का धरहरा’ कहा जाता रहा, मंदिर की याद में। हालाँकि, भक्ति संतों के प्रयासों और आम लोगों की श्रद्धा ने हिन्दुओं को मानसिक रूप से मजबूत रखा और वो अपने धर्म से जुड़े रहे।

हम जानते हैं कि कैसे तुलसीदास ने वाराणसी में रह कर ही ‘रामचरितमानस’ की रचना की और वहाँ एक शिवलिंग समेत भगवान हनुमान के 4 मंदिरों की स्थापना की, जिनमें संकटमोचन प्रमुख है। हालाँकि, औरंगजेब की मौत के साथ ही वाराणसी में मजहबी आक्रांताओं के हमलों का भी अंत हो गया। इसके बाद मराठा शक्ति का उदय हुआ, जिसके रहते यहाँ कोई गड़बड़ी नहीं हुई। फिर अंग्रेज आए और उनके शासनकाल के बाद भारत आज़ाद हुआ।

ज्ञानवापी मंदिर को पूरा इसीलिए नहीं तोड़ा गया था, ताकि आने वाले समय तक हिन्दू इसे देख कर इस क्रूरता को याद कर के डरते रहें। फ़ारसी साहित्य में ज्ञानवापी ध्वस्तीकरण पर एक रोचक प्रसंग मिलता है। औरंगजेब के दरबार में एक कवि था, जिसका कहना था कि वो ब्राह्मण है और 100 बार काबा जाने के बावजूद ब्राह्मण ही रहेगा। उसका कहना था कि उसका हृदय ‘कुफ्र’ से इतना मोहित है कि सौ बार काबा फर्क भी ब्राह्मण ही लौटेगा।

बता दें कि हिन्दुओं को इस्लामी कट्टरपंथी और आक्रांता ‘कुफ्र करने वाला’, अर्थात ‘काफिर’ कहते रहे हैं। ‘बरहमन’ नाम से लेखन कार्य करने वाले उस कवि चंद्रभान से औरंगजेब ने जब पूछा कि क्या काशी में मंदिर ध्वस्त किए जाने और उस पर मस्जिद बनाए जाने पर वो कुछ कहना चाहेगा, तो उसने लिखा, “ऐ शेख, मेरे मंदिर की ये चमत्कारिक महानता तो देख कि यहाँ तुम्हारा खुदा भी तभी आया जब ये बर्बाद हुआ।” कहा जाता है कि बूढ़े कवि की इस बात पर बादशाह चुप रहा। कुबेर नाथ शुक्ल ने ‘Varanasi Down The Ages’ पुस्तक में इसका जिक्र किया है।

चन्द्रभान शाहजहाँ के समय से ही मुगलों के दरबार में हुआ करता था और उसके पिता भी मुग़ल शासन में एक अधिकारी हुआ करते थे। उसे पता था कि काशी को लेकर हिन्दू क्या सोचते हैं, उनकी क्या श्रद्धा है। विश्वनाथ मंदिर, जिसे बाद में टोडरमल ने बनवाया था, वो भी भव्य था। 124 फ़ीट के प्रत्येक साइड वाले वर्ग की आकृति में वो मंदिर बना था, जिसके बीच में गर्भगृह था। चारों तरफ 16*10 के मंडप थे। चारों कोने पर बाहर अलग से चार मंडप और छोटे-छोटे मंदिर थे।

कश्मीर में आतंकियों ने पुलिसकर्मी और 7 साल की बेटी को गोलियों से भूना: पिता की मौत, बच्ची का चल रहा है इलाज

जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर के सौरा इलाके में मंगलवार (24 मई, 2022) को आतंकवादियों ने एक पुलिसकर्मी की हत्या कर दी। उनकी पहचान सैफुल्ला कादरी (अब्बा का नाम मोहम्मद सैयद कादरी) के रूप में हुई है। इस हमले में पुलिसकर्मी की सात साल की बेटी भी घायल हो गई है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि अंचर सौरा के पास आतंकवादियों ने पुलिसकर्मी पर गोलीबारी की। गंभीर हालत में उन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सौरा इलाके में जम्मू-कश्मीर पुलिस के पुलिसकर्मी पर आतंकवादियों ने ताबड़तोड़ गालियाँ चलाई। गोलीबारी में कादरी गंभीर रूप से जख्मी हो गए, जिनकी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। इस हमले में उनकी बेटी भी गंभीर रूप ये घायल हुई है, जिसे पास के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यहाँ उसका इलाज चल रहा है। इस बीच वरिष्ठ डॉ जी एच यातू ने बताया कि पुलिसकर्मी को अस्पताल में मृत लाया गया था, जबकि उसकी बेटी की हालत स्थिर है।

बताया जा रहा है कि गोलाबारी की आवाज सुनने के बाद सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों पर जवाबी कार्रवाई की, लेकिन आतंकी वहाँ से भागने में कामयाब रहे। सुरक्षाबलों ने इस इलाके को घेर लिया है और आतंकियों को पकड़ने के लिए तलाशी अभियान शुरू कर दिया है।

बता दें कि इससे पहले आतंकियों ने बडगाम ज‍िले में 12 मई को राजस्व विभाग के एक कर्मचारी पर ताबड़तोड़ गोलियाँ चलाकर उनकी हत्या कर दी थी। यह घटना मध्य कश्मीर के चदूरा में तहसीलदार कार्यालय में हुई थी। मृतक की पहचान कश्मीरी पंडित राहुल भट के रूप में हुई थी। वहीं, 7 मई 2022 को आतंकवादियों ने जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में एक पुलिसकर्मी गुलाम हसन को गोली मारकर घायल कर दिया था। इसके तुरंत बाद घायल कांस्टेबल को अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

समलैंगिकों के बीच यौन संबंधों से फैला मंकीपॉक्स, रेव पार्टियों में सेक्सुअल गतिविधियाँ हैं कारण: WHO ने बताया, भारत में भी दस्तक

कोरोना वायरस के बीच दुनिया के कई देश मंकीपॉक्स की चपेट आ गए हैं। वायरस को लेकर WHO चिंतित है। WHO के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, पुर्तगाल, स्पेन, स्वीडन, यूके और यूएस के बाद अब भारत में भी मंकीपॉक्स के केस समाने आने लगे हैं। डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि मंकीपॉक्स के मामले और बढ़ सकते हैं। मंकीपॉक्स को लेकर एक नया दावा यह है कि ये रोग यौन संबंधों के कारण भी फैल रहा है।

यौन संबंध से फैलता है ये वायरस ?

मंकीपॉक्स को लेकर अब तक यही तथ्य सामने था कि ये जानवरों से फैलता है, लेकिन अब डब्ल्यूएचओ का दावा है कि ये यौन संबंधों के जरिए भी फैल सकता है। जब कोई स्वस्थ व्यक्ति, संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आता है इस रोग के बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है। वायरस त्वचा, रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट या आँख, नाक और मुँह के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकता है। मानव-से-मानव में ये आमतौर पर रेस्पिरेटरी ड्रॉपलेट्स के जरिए ही फैलता है।

WHO का कहना है कि यूरोप में हाल में हुईं दो रेव पार्टी में सेक्सुअल एक्टीविटीज के कारण मंकीपॉक्स तेजी से फैला है। WHO के इमरजेंसी डिमार्टमेंट के हेड रहे डॉ डेविड हेमन ने कहा कि यौन संबंधों की वजह से इस बीमारी का फैलाव हुआ है।

WHO एक्सपर्ट का कहना है कि स्पेन और बेल्जियम में आयोजित दो रेव पार्टी में समलैंगिकों और अन्य लोगों के बीच सेक्सुअल एक्टीविटीज की वजह से बीमारी का प्रसार हुआ है। मंकीपॉक्स तब फैल सकता है, जब संक्रमित के करीबी संपर्क में कोई आता है और यौन संबंधों की वजह से इस बीमारी का प्रसार और बढ़ जाता है। जर्मनी में भी मंकीपॉक्स के बढ़ने का कारण पार्टी को माना जा रहा है, जहाँ, सेक्सुअल एक्टीविटीज हुई थी।

कितनी संक्रामक ये बीमारी?

मंकीपॉक्स संक्रामक बीमारी है और इसके खतरे कम नहीं, लेकिन ये कोरोना संक्रमण जितनी खतरनाक नहीं है। हेमन ने मौजूदा महामारी का आकलन करने के लिए संक्रामक रोग पर डब्ल्यूएचओ के परामर्श समूह की बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि अभी ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है कि मंकीपॉक्स ज्यादा संक्रामक रूप में बदल सकता है। मंकीपॉक्स आमतौर पर बुखार, ठंड लगने, चेहरे या जननांगों पर दाने और घाव का कारण बनता है।

यह किसी संक्रमित व्यक्ति या उसके कपड़ों या चादरों के संपर्क के माध्यम से फैल सकता है, लेकिन अभी तक यौन जनित संक्रमण का दस्तावेजीकरण नहीं किया गया है। अधिकतर लोगों को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं होती और कुछ हफ्तों के भीतर बीमारी से ठीक हो जाते हैं। चेचक के खिलाफ टीके मंकीपॉक्स को रोकने में भी प्रभावी हैं और कुछ एंटीवायरल दवाएँ विकसित की जा रही हैं।

अयोध्या से काशी तक और ताजमहल से टीले वाली मस्जिद तक: हिंदुओं के लिए 100+ केस लड़ने वाली पिता-पुत्र की जोड़ी, जिनके आगे दूसरे पक्ष की दलीलें हुई फेल

ज्ञानवापी विवादित ढाँचे में शिवलिंग मिलने के बाद से जैसे-जैसे ये मामला तूल पकड़ रहा है वैसे-वैसे टीकाधारी वकील हरिशंकर जैन और वकील विष्णु जैन लगातार मीडिया चर्चा में हैं। इन्हीं पिता-पुत्र की जोड़ी ने वाराणसी कोर्ट के अंदर हिंदू पक्ष को इतना मजबूत किया है कि दूसरे पक्ष की हर दलील घुटने टेक रही है। ऐसा पहली दफा नहीं है कि इस जोड़ी ने हिंदुओं को उनका हक दिलाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाया हो। लगभग ऐसे 102 मामले बताए जाते हैं जिनमें इस जोड़ी ने या इनमें से कम से कम एक ने हिंदुओं को अदालत में मजबूत करने का काम किया है।

मौजूदा जानकारी के अनुसार, ज्ञानवापी केस को हिंदुओं की तरफ से लड़ने वाले वरिष्ठ वकील हरिशंकर जैन को वकालत करते-करते 4 दशक बीत गए हैं। उन्होंने 1976 में वकालत शुरू की थी। वहीं उनके बेटे विष्णु जैन का जन्म 9 अक्टूबर 1986 को हुआ था और उन्होंने 2010 में कानून की पढ़ाई पूरी करके वकालत में अपने करियर का आरंभ किया था। विष्णु पढ़ाई से फारिक होकर अपने पिता की सहायता में तब से लेकर आज तक लगे हैं। साल 2016 में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता का पेपर पास करके नई उपाधि हासिल की थी और उसके बाद उनकी प्रैक्टिस की शुरुआत ही श्रीराम जन्मभूमि मामले से हुई थी।

हिंदुओं से संबंधी करीब 102 मामले ऐसे हैं जिनमें हरिशंकर जैन और विष्णु जैन में से कोई एक या फिर दोनों अदालत में पेश हुए हों। इनमें सबसे पुराना मामला साल 1990 का है। दिलचस्प बात ये है कि ज्यादातर केसों को पिता-पुत्र की जोड़ी ने जिता कर ही दम लिया। वहीं कुछ हैं जो अब भी चल रहे हैं। 

मथुरा में श्री कृष्ण जन्मभूमि का मामला सबसे बड़े मामलों में से एक है जिसे इस पिता-पुत्र की जोड़ी ने संभाला है। इसके अलावा कुतुब मीनार बनाने के लिए मुस्लिम आक्रांताओं द्वारा तोड़े गए 27 हिंदू और जैन मंदिरों का केस, ताजमहल के शिवमंदिर होने का दावा, वर्शिप एक्ट औक वक्फ एक्ट 1995 को चुनौती देने का मामला भी यही दोनों संभाल रहे हैं। ऐसे ही हिंदुओं की ओर से लखनऊ में स्थित टीले वाली मस्जिद के शेष गुफा होने का दावा भी इनके द्वारा करवाया जा रहा है। सबसे बड़ी बात कि हरिशंकर जैन और विष्णु जैन ने भारत के संविधान की प्रस्तावना में जो सोशलिस्ट और सेकुलर शब्द शामिल किया गया है उस संशोधन की वैधता को भी चुनौती दी है।

ज्ञानवापी मामले के बाद हर जगह सराही जा रही इस जोड़ी से जुड़े और भी कई किस्से हैं। जैसे एक बार विष्णु जैन ने अपने पिता के बारे में बताया था कि श्रीराम जन्मभूमि मामले में उन्हें बाबरी विवादित ढाँचे का पक्ष रखने का प्रस्ताव आया था लेकिन उन्होंने अंतरात्मा न बेचने का फैसला किया और फीस मिलने के बाद भी प्रस्ताव मना कर दिया। इतना ही नहीं 6 दिसंबर 1992 को हरिशंकर की माँ का देहांत हुआ था। वे अपनी माँ से बहुत जुड़े थे क्योंकि उन्हीं से उन्हें हिंदुत्व का और धर्म का ज्ञान मिला था। वे टूटे लेकिन जब उनकी माँ की तेहरवीं खत्म हुई तो 20 दिसंबर 1992 को मुंडा हुआ सिर लेकर हिंदू पक्ष के लिए याचिका डालने इलाहाबद कोर्ट पहुँच गए और तब तक जी जान लगाए रखी जब तक कि कोर्ट ने श्रीराम भगवान की पूजा अर्चना की अनुमति नहीं दी।

पहले धूप-अगरबत्ती से पूजा, फिर शिवलिंग पर कुदाल से वार: पत्नी मायके से नहीं लौटी तो भगवान पर निकालता था गुस्सा, चल रहा है तलाक का केस

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के खजनी थानाक्षेत्र के उनवल में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। पत्नी के मायके से न आने से नाराज एक व्यक्ति ने शिवलिंग पर कुदाल से प्रहार कर दिया। अचरज की बात यह है कि वह हर हफ्ते रविवार और मंगलवार को पूजा करने मंदिर आता था। वह पहले भगवान की पूजा करता था, फिर उसी शिवलिंग पर फावड़ा से प्रहार करता था। 

उक्त व्यक्ति गणेश की पत्नी 6 महीने से अपने मायके में रह रही है। पत्नी के घर न आने पर वह मंदिर जाकर भोलेनाथ की अनोखी पूजा करता था। पहले वह शिवलिंग की धूप-अगरबत्ती से पूजा करता था। फिर कुदाल से उस पर प्रहार किया। इस बात का पता मंदिर के पुजारी और ग्रामीणों को चला तो उन्होंने उसे पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया।

शिवल‍िंंग पर निशान देख हुआ शक

यह पूरा मामला गोरखपुर के खजनी थानाक्षेत्र के उनवल नगर पंचायत उनवल वार्ड नंबर-3 टेकवार झारखंडी शिव मंदिर का है। जहाँ गणेश का विवाह 2016 में हुआ था। इसका पिछले 6 महीने से अपनी पत्नी से विवाद चल रहा था। मायके पक्ष के लोगों ने तलाक का मुकदमा भी किया था। इसको लेकर पत्नी वियोग में गणेश गाँव के बगल में स्थित शिव मंदिर पर हर रविवार और मंगलवार जाता था। 

वहाँ शिवलिंग की पूजा करने के बाद उस पर कुदाल से प्रहार करता था। मंदिर की साफ सफाई के दौरान जब मंदिर के पुजारी और गाँव के लोगों ने देखा कि शिवलिंग पर चोट के निशान हैं। इस पर उन लोगों को चिंता सताने लगी। मंदिर में आने वाले भक्तों पर नजर रखी जाने लगी।

घरवालों के सुपुर्द किया गया

मंदिर के पुजारी जोखू दास ने बताया कि उनकी नजर एक दिन गणेश पर पड़ गई। इसके बाद उन्होंने ग्रामीणों की मदद से उसे पकड़ कर पुलिस को सौंप दिया। पूछताछ में उसने बताया कि उससे उसकी पत्नी से काफी दिनों से विवाद चल रहा था। वह 6 महीने से अपने मायके से वापस ससुराल नहीं आ रही थी। इस कारण वह काफी परेशान था। चौकी इंचार्ज ने बताया कि ग्रामीणों द्वारा सूचना पर पुलिस वहाँ पहुँची और व्यक्ति को कुदाल सहित हिरासत में ले लिया गया। उसे समझा-बुझाकर परिवार वालों को सुपुर्द कर दिया गया है।