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जिस बॉक्सर को छोटे कपड़े पर टोकते थे रिश्तेदार, उसने सलमान खान को बताया ‘मेरी जान’: वर्ल्ड चैंपियन निखत जरीन को एक्टर ने दी बधाई

भारत की महिला मुक्केबाज निखत जरीन ने तुर्की में आयोजित विश्व चैंपियनशिप में 52 किलोग्राम केटेगरी में गोल्ड मेडल जीता है। वो बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान की बहुत बड़ी फैन हैं। उनके पिता ने बताया कि बेटी को मुक्केबाज बनाने के लिए परिवार ने काफी संघर्ष किया है। एक समय था, जब रिश्तेदार और दूसरे लोग कहते थे कि छोटे कपड़े मत पहनो। आज वो वर्ल्ड चैंपियन बन गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई दी है।

‘वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप’ में स्वर्ण पदक जीतने वाली निखत जरीन के पिता मोहम्मद जमील फुटबॉलर और क्रिकेटर हुआ करते थे और उनका सपना था कि उनकी चार बेटियों में से कोई एक स्पोर्ट्स में रुचि दिखाए। उनकी तीसरी बेटी ने मुक्केबाजी का प्रशिक्षण शुरू किया। निजामाबाद की रहने वाली निखत जरीन ने अपने एक चाचा की सलाह पर मुक्केबाजी में करियर बनाने की ठानी और मात्र 14 साल की उम्र में ‘वर्ल्ड यूथ बॉक्सिंग चैंपियनशिप’ अपने नाम किया।

अब हाल ही में थाईलैंड की जितपोंग जुटामेंस को 5-0 से हरा कर विश्व चैंपियन बनने वाली वो भारत की पाँचवीं महिला मुक्केबाज हैं। मुक्केबाजी से पहले एथलेटिक्स में निखत जरीन ने स्टेट चैंपियन बनीं, लेकिन फिर मुक्केबाजी में कदम रखा। भारत में मुक्केबाजी में सबसे बड़ा नाम मैरी कॉम हैं, जिन्होंने 6 बार ये ख़िताब अपने नाम किया है। 2017 में चोट के कारण निखत बॉक्सिंग रिंग में नहीं उतर पाई थीं। उनके पिता ने कहा कि जरीन की ये जीत मुस्लिम लड़कियों के साथ-साथ देश की हर लड़की को बड़ा लक्ष्य तय कर के उसे हासिल करने का हौसला देगी।

कभी सऊदी अरब में बतौर सेल्स अस्सिस्टेंट काम करने वाले निखत के पिता ने बताया कि रिश्तेदार कभी-कभार टोक देते थे कि लड़कियों को ऐसे स्पोर्ट्स में नहीं उतरना चाहिए, जिसमें उन्हें शॉर्ट्स पहनना पड़े। निखत की दो बहनें डॉक्टर हैं और उनकी छोटी बहन बैडमिंटन खेलती हैं। 2016 में फ्लाईवेट कैटेगरी में वो सीनियर नेशनल चैंपियन बनी थीं। 2019 की एशियन चैंपियनशिप में भी उन्हें मेडल मिला। उन्होंने 2-3 साल से अपनी पसंदीदा डिश बिरयानी नहीं खाई है, लेकिन फ़िलहाल फिर से व्यस्त होने से पहले हैदराबाद में उन्हें ये सब खाने-पीने का मौका मिलेगा। उनके घर पर जश्न का माहौल हैं।

विश्व चैंपियन बनने के बाद निखत जरीन ने सलमान खान से मिलने की इच्छा जताई थी, जिसके बाद सलमान खान ने भी ट्वीट कर उन्हें गोल्ड मेडल के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि सलमान खान दूसरों के लिए ‘भाई’ हो सकते हैं, लेकिन उनके लिए ‘जान’ हैं। सलमान खान से मुंबई में मिलना उनका सपना है। उनका एक और सपना है – ओलंपिक मेडल जीतना। जब निखत जरीन ने सलमान खान की बधाई पर कहा कि उन्हें इसका विश्वास नहीं हो रहा, तो सलमान खान ने कहा, “बस मुझे नॉकआउट मत करना। मेरे हीरो सिल्वेस्टर स्टैलोन की तरह पंच करती रहो।”

इमरान खान ने लाँघी मर्यादा, भरी सभा में नवाज शरीफ की बेटी के लिए की ‘सेक्सी’ बात: बोले जरदारी- इतना नीचे मत गिरो

पाकिस्तान में जारी सियासी लड़ाई के बीच पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) ने अब भाषाई मर्यादा को भी तिलांजलि दे दी है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की बेटी PML-N की उपाध्यक्ष मरियम नवाज (Maryam Nawaz) को लेकर अश्लील टिप्पणी की है। पाकिस्तान तहरीक-ए इंसाफ के प्रमुख इमरान ने मरियम को लेकर सेक्सिस्ट टिप्पणी एक रैली के दौरान की। इसको लेकर उनकी तीखी आलोचना हो रही है। लोग उन्हें महिला विरोधी और उनके बयान को अनुचित बता रहे हैं।

मुल्तान में एक राजनीतिक रैली को संबोधित करते हुए इमरान खान ने कहा, “मुझे सोशल मीडिया पर मरियम के भाषण की तकरीर भेजी। जिसमें मरियम इतनी बार और इस जुनून से मेरा नाम ले रही थीं कि मैं उन्हें ये कहना चाहता हूँ कि मरियम देखो। थोड़ा ध्यान करो। आपके शौहर नाराज न हो जाएँ, जिस तरह से आप मेरा नाम लेती हैं।”

इमरान खान का ये अश्लील बयान तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मरियम नवाज के चाचा शाहबाज शरीफ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने भी इमरान खान के इस बयान की भर्त्सना की है। उन्होंने ट्वीट कर कहा है, “देश की बेटी मरियम नवाज शरीफ के खिलाफ इस अपमानजनक भाषा की देश भर में, विशेष तौर पर महिलाओं को कड़ी निंदा करनी चाहिए। देश के खिलाफ आप अपने अपराधों को हास्य के जरिए दबा नहीं सकते। मस्जिद ए नबी के नियमों को तोड़ने वाले से महिलाओं के सम्मान की उम्मीद नहीं की जा सकती।”

वहीं पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने भी इस बयान की निंदा की है। उनका कहना है कि जिन लोगों के घरों में अम्मी और बहनें होती हैं, वे दूसरी महिलाओं को लेकर इस तरह की बातें नहीं करते। जरदारी ने इमरान खान को राजनीति के लिए इतना नीचे नहीं गिरने की नसीहत दी है।

गौरतलब है कि इमरान खान बीते अप्रैल में पीएम की कुर्सी पर बने रहने के लिए जरूरी विश्वास मत संसद में हासिल नहीं कर पाए थे। वे पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री थे, जिसकी कुर्सी विश्वासमत हारने से गई।

उद्धव का मंत्री, पवार का खास: अदालत ने भी माना ‘डी गैंग’ से नवाब मलिक के संबंध, ED ने चार्जशीट में बताया- मुंबई ब्लास्ट के दोषी से कई बार हुई थी मुलाकात

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने गंभीर आरोपों में गिरफ्तारी के बावजूद अपने जिस मंत्री नवाब मलिक को हटाने से इनकार किया था, उनके डी गैंग से लिंक होने की बात अदालत ने भी मानी है। शरद पवार की एनसीपी से ताल्लुक रखने वाले नवाब मलिक फिलहाल मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जेल में बंद हैं।

इस संबंध में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से दायर की गई चार्जशीट पर स्पेशल कोर्ट ने शुक्रवार (20 मई 2022) को संज्ञान लिया। कोर्ट ने कहा कि इस बात के सबूत हैं कि मलिक सीधे तौर पर और जानबूझकर कुर्ला स्थित गोवावाला कंपाउंड पर कब्जा करने के लिए मनी लॉन्ड्रिंग और आपराधिक साजिश में शामिल थे। इस मामले में 1993 बम धमाकों का दोषी सरदार शाहवाली खान भी आरोपित है।

विशेष न्यायाधीश राहुल एन रोकाडे ने कहा कि नवाब मलिक ने D-कंपनी के सदस्य मसलन हसीना पारकर, सलीम पटेल और सरदार खान के साथ मुनिरा प्लंबर से संबंधित प्रॉपर्टी हड़पने के लिए आपराधिक साजिश रची थी। बता दें कि NIA ने दाऊद इब्राहिम कासकर और अन्य के खिलाफ अधिनियम, 1967 आईपीसी की धारा 120 बी और गैरकानूनी गतिविधियों (रोकथाम) की धारा 17, 18, 20, 21, 38 और 40 के तहत 3 फरवरी, 2022 को FIR दर्ज की थी। उल्लेखनीय है कि दाऊद इब्राहिम कास्कर, जिसे संयुक्त राष्ट्र द्वारा वैश्विक आतंकवादी के रूप में नामित किया गया है, एक अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी नेटवर्क चलाता है जिसका नाम डी कंपनी है, जो टेरर फंडिग में शामिल है।

ईडी का दावा है कि नवाब मलिक ने डी-कंपनी के सदस्यों के साथ मिलकर गोवावाला कॉम्प्लेक्स हड़पने के लिए आपराधिक साजिश रची। ईडी ने अपनी जाँच के दौरान पिछले साल दिसंबर में, मुंबई में 1993 के सिलसिलेवार बम धमाकों के लिए उम्रकैद की सजा काट रहे सरदार खान का बयान दर्ज किया था। ईडी के मुताबिक सरदार खान ने अपने बयान में कहा है कि सलीम पटेल, हसीना पारकर का करीबी सहयोगी था और कुर्ला स्थित प्रॉपर्टी के संबंध में उसी के निर्देश पर हर फैसला लिया गया। ईडी ने अपनी चार्जशीट में सरदार खान के उस बयान का हवाला दिया है, जिसमें उसने दावा किया था कि कुर्ला वाली संपत्ति के संबंध में उसके, सलीम पटेल, हसीना पारकर और नवाब मलिक के बीच कई दौर की बैठकें हुई थीं।

ईडी की चार्जशीट में दर्ज सरदार खान के बयान के मुताबिक नवाब मलिक और हसीना पारकर एक समझौते पर पहुँचे थे और एनसीपी नेता ने हसीना को 55 लाख, सलीम पटेल को 15 लाख एवं सरदार खान को 5 लाख रुपए का भुगतान करने पर सहमति व्यक्त की थी। आपको बता दें कि सलीम पटेल और हसीना पारकर दोनों की मृत्यु हो चुकी है। ईडी ने कहा है कि सरदार खान इन बैठकों में उपस्थित रहा था, इस नाते उसके बयान को चार्जशीट में शामिल किया गया है। ईडी का दावा है कि चारों (नवाब मलिक, हसीना पारकर, सलीम पटेल और सरदार खान) ने ‘आपराधिक साजिश’ की थी और कुर्ला प्रॉपर्टी के असली मालिक मुनीरा प्लंबर को गुमराह करके, सलीम पटेल के पक्ष में ‘पावर ऑफ अटॉर्नी’ बनाकर संपत्ति पर अनधिकृत कब्जा कर लिया।

अब कहाँ गायब हो गया ज्ञानवापी ढाँचे में दिखा शिवलिंग? पूर्व महंत ने तस्वीरों से खोले राज़, हनुमान मूर्ति और कमल के फूल भी दिखे

काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉक्टर कुलपति तिवारी ने ज्ञानवापी विवादित ढाँचे और शिवलिंग को लेकर पुरानी तस्वीरें दिखाते हुए बड़ा दावा किया है। उन्होंने तस्वीर दिखाते हुए कहा है कि ज्ञानवापी विवादित ढाँचे में एक और शिवलिंग है। तस्वीर में देखा जा सकता है कि दीवार में बनी एक जगह पर छोटा सा शिवलिंग रखा हुआ है। डॉ तिवारी ने कहा कि उस शिवलिंग को अब उस जगह से हटा दिया गया है। तस्वीर 17 वर्ष पुरानी बताई जा रही है।

ज्ञानवापी विवादित ढाँचे की पश्चिमी दीवार पर बने खाँचे में रखे इस शिवलिंग को लेकर बड़ा सवाल ये है कि अब ये आखिर कहाँ पर है और इसे हटा कर कहाँ रखा गया है? उन्होंने उस दीवार पर कमल के फूल और घंटा की आकृतियाँ भी दिखाई। उन्होंने कहा कि उनके पास जो भी सबूत हैं, वो प्रमाणित हैं। ‘दैनिक भास्कर’ ने कुछ अन्य तस्वीरें भी प्रकाशित की हैं, जो काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ कुलपति तिवारी ने ही भेजी है।

एक और तस्वीर है, जिसे डेढ़-दो साधक पुराना बताया जा रहा है। इसमें देखा जा सकता है कि ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के उस हिस्से में बच्चे खेल रहे हैं, वहाँ पर ही श्रृंगार गौरी का मंदिर बताया जाता है। विवादित ढाँचे के परिसर के पास स्थित चबूतरे पर बच्चों को खेलते हुए देखा जा सकता है। एक अन्य तस्वीर में ज्ञानवापी ढाँचे की पिछली दीवार साफ़ नजर आ रही है, जो किसी प्राचीन मंदिर का ही प्रतीत हो रहा है। मंदिर के अवशेष पर ही इसे इस्लामी आक्रांताओं द्वारा बनाया गया था।

एक अन्य दस्तावेजी तस्वीर है, जिसमें अंग्रेजी में ज्ञानवापी का अर्थ ‘Well Of Knowledge’ लिखा हुआ है, अर्थात – ज्ञान का कुआँ। इस तस्वीर में नंदी की मूर्ति और उसके पीछे भगवान हनुमान की प्रतिमा दिखाई दे रही है। बता दें कि मंदिर को लेकर जो प्राचीन कथा है, वो भी यहाँ ‘ज्ञान का कुआँ’ होने की बात बताती है। डॉ तिवारी ने बताया कि इस कूप का निर्माण भगवान शिव ने खुद अपने त्रिशूल से किया था और इसमें स्नान करने के बाद माँ पारवती भगवान विश्वेश्वर की पूजा करती थीं।

उन्होंने हाल ही में मिले शिवलिंग को ही विश्वेश्वर भगवान बताया। हालाँकि, अंजुमन इस्लामिया मस्जिद कमिटी ने इन तस्वीरों को नकारते हुए कहा है कि पूरे मस्जिद परिसर में ऐसी कोई शिवलिंग है ही नहीं। उन्होंने दावा किया कि कोई भी आकर देख सकता है। उन्होंने दीवार पर बनी नक्काशी को अकबर के तब के नए मजहब ‘दीन-ए-इलाही’ के चिह्न बताते हुए कहा कि सन् 1585 के आसपास इसे बनाया गया था। उन्होंने कहा कि इस ‘मस्जिद’ को जौनपुर के सुल्तानों ने बनवाया था, जिसका औरंगजेब ने जीर्णोद्धार किया।

सिखों के जख्म पर नमक छिड़क राजीव गॉंधी को अधीर रंजन चौधरी ने दी श्रद्धांजलि, कॉन्ग्रेस नेता ने लिखा- जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है…

लोकसभा में कॉन्ग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने राजीव गाँधी की की बरसी पर श्रद्धांजलि देते हुए विवादित ट्वीट कर के फिर उसे डिलीट कर दिया। दरअसल, अधीर रंजन चौधरी ने जो ट्वीट किया, उसमें राजीव गाँधी का ये विवादित बयान लिखा हुआ था, “जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है।” राजीव गाँधी ने अपनी माँ और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद हुए सिख नरसंहार को जायज ठहराने के लिए ये टिप्पणी की थी।

अधीर रंजन चौधरी ने लिखा कि वो राजीव गाँधी को उनकी पुण्यतिथि पर याद कर रहे हैं। हालाँकि, विवाद होने के बाद उन्होंने अपना ये ट्वीट डिलीट कर लिया और सफाई देते हुए लिखा, “मेरे ट्विटर हैंडल के साथ जो ट्वीट वायरल हो रहा है, उसका मेरे विचारों से कोई लेनादेना नहीं है। मेरी विरोधी ताकतों द्वारा मेरे खिलाफ दुर्भावनापूर्ण अभियान चलाया जा रहा है।” इस पर लोगों ने पूछा कि अगर ट्वीट में कुछ भी गलत नहीं था, तो उन्होंने उसे डिलीट क्यों किया?

इस ट्वीट को डिलीट करने के बाद अधीर रंजन चौधरी ने दोबारा राजीव गाँधी को उनकी बरसी पर श्रद्धांजलि देने के लिए ट्वीट किया और उसमें उनका दूसरा उद्धरण लगाया, जिसमें उन्होंने जनता के विकास में मानवीय पहलू पर जोर देने की बात की थी। लोग उनके पुराने ट्वीट को सिखों का अपमान भी बता रहे हैं। सिख नरसंहार को जायज ठहराने के आरोप उन पर लग रहे हैं। लोगों ने कहा कि अब कहीं अधीर रंजन चौधरी अकाउंट हैक होने वाली थ्योरी (बहाना) लेकर न आ जाएँ।

याद हो कि पिछले ही महीने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी पूर्व पीएम राजीव गाँधी के इस कुख्यात भाषण का उल्लेख किया था, जिसमें उन्होंने सिखों को नरसंहार को सही ठहराया था। बता दें कि आज भी सज्जन कुमार इस मामले में जेल में हैं, जो कॉन्ग्रेस के बड़े नेता थे। दिल्ली कॉन्ग्रेस में सक्रिय जगदीश टाइटलर हों या मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे कमलनाथ, इन ऐसे कई कॉन्ग्रेस नेताओं पर नरसंहार में शामिल होने के आरोप लगे।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद अधीर रंजन चौधरी ने बयान जारी कर के कहा है कि उनका ट्विटर हैंडल हैक हो गया था। उन्होंने कहा कि उनके ट्विटर अकाउंट से एक विवेकहीन, पक्षपाती और बुरे नीयत से एक कंटेंट शेयर कर दिया गया। उन्होंने कहा कि तब वो पार्टी के एक कार्यक्रम के दौरान मंच पर व्यस्त थे और उनके फोन उनके पास नहीं था। उन्होंने अपना ट्विटर हैंडल हैक होने का आरोप भी लगाया। उन्होंने साइबर पुलिस से कार्रवाई की भी माँग की।

ज्ञानवापी विवादित ढाँचे में है स्वयंभू ज्योतिर्लिंग, 100 फीट नीचे स्थित है आदि विश्वेश्वर का शिवलिंग: लॉर्ड्स नेक्स्ट फ्रेंड का दावा

वाराणसी के ज्ञानवापी विवादित ढाँचे (Gyanvapi Controversial Structure, Varanasi) को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) में हिंदू पक्ष ने शुक्रवार (20 मई 2022) को तर्क दिया कि ज्ञानवापी में आदि विश्वेश्वर का स्वयंभू ज्योतिर्लिंग है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट में लॉर्ड्स नेक्स्ट फ्रेंड (प्रतिवादी) के वकील विजय शंकर रस्तोगी ने लाइव लॉ से कहा कि वजूखाने में मिला शिवलिंग आदि विश्वेश्वर का शिवलिंग नहीं है। वह तारकेश्वर महादेव हैं। उन्होंने कहा कि आदि विश्वेश्वर का शिवलिंग ज्ञानवापी ढाँचे के केंद्रीय गुंबद के ठीक नीचे हो सकता है। यह स्वयंभू शिवलिंग पृथ्वी की सतह से 100 फीट नीचे स्थित है।

बता दें कि स्वयंभू का अर्थ होता है, जो स्वयं प्रकट हुआ हो यानी जिसे बनाया नहीं गया हो। इस अर्थ में भगवान आदि विश्वेश्वर को स्वयं प्रकट हुआ शिवलिंग माना जाता है, जो भगवान शिव के रूप का प्रतिनिधित्व करता है। पुराणों के अनुसार, काशी स्थित शिवलिंग 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और सबसे प्राचीन है। ज्योतिर्लिंगों का एक लंबा इतिहास है और इसका वर्णन वेद, उपनिषद, पुराण सहित कई हिंदू धर्मशास्त्रों में अंकित है।

एडवोकेट रस्तोगी ने बताया कि अंग्रेजी शासन के दौरान विश्वनाथ मंदिर का एक पुराना नक्शा वाराणसी के तत्कालीन डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट जेम्स प्रिंसेप द्वारा बनवाया गया था। वह नक्शा का उल्लेख ‘हिस्ट्री ऑफ बनारस रिटन बाय डॉक्टर एएस एलटेकर (हेड ऑफ डिपार्टमेंट, बीएचयू वाराणसी)’ में किया गया है। उसमें दिखाया गया है कि किस-किस स्थान पर कौन-कौन देवता के मंदिर थे।

साल 1991 से वाराणसी के सिविल कोर्ट में चल रहे काशी विश्वनाथ और ज्ञानवापी मस्जिद मामले में आदि विशेश्वर की ओर से वादमित्र रस्तोगी ने कहा कि उस नक्शे के आधार पर वजूखाना का स्थान तारकेश्वर मंदिर को ओर इशारा करता है। उन्होंने कहा कि इस मंदिर को गिराकर सपाट कर दिया गया था। अगर वह शिवलिंग है तो वह उसी तारकेश्वर महादेव का हो सकता है।  

कई बार तोड़ा गया और बनाया गया विश्वनाथ मंदिर

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पूर्व विशेष कार्याधिकारी डॉ. विश्वनाथ पांडेय के अनुसार, काशी विश्वनाथ मंदिर पाँच बार बनाने का प्रमाण इतिहास में मिलता है। पहला 2050 साल पहले महाराजा विक्रमादित्य ने वरुणा-गंगा संगम के पास बनवाया गया था। संस्कृत सीखने 402 ईस्वी में काशी आए पहले चीनी यात्री फाहियान ने इस महाराजा विक्रमादित्य द्वारा बनवाए गए आदि विश्वेश्वर के पन्ने की शिवलिंग देखने की बात लिखी है।

दूसरी बार विश्वेश्वर गंज के तालाब के पास बना था, लेकिन इस स्थान लेकर इतिहासकारों को विशेष जानकारी नहीं मिली। उन्होंने बताया कि वाराणसी के राजघाट में पुरातात्विक उत्खनन के दौरान 2,500 साल प्राचीन एक अविमुक्तेश्वर सील मिली थी, जिसे भगवान शिव की पूजा से जोड़ा गया था।

काशी के राजा मोतीचंद की लिखी पुस्तक ‘काशी का इतिहास‘ पुस्तक के अनुसार, सबसे पहले आदि काशी विश्वेश्वर को 1194 ईस्वी में कुतुबुद्दीन ने तोड़ा था। उसके बाद मंदिर को फिर बनवाया गया, लेकिन 1447 ईस्वी में जौनपुर के तत्कालीन सुल्तान महमूद शाह शर्की ने फिर इसे तोड़वा दिया था।

इसके बाद अकबर के शासनकाल 1585 में राजा मान सिंह ने वित्त मंत्री टोडरमल के द्वारा काशी विश्वेश्वर मंदिर बनवाया था। इस बनवाने में नारायण भट्ट ने मदद की थी। इसी को ढहाकर 1669 ईस्वी में औरंगजेब ने ज्ञानवापी ढाँचा बनवाया था।

औरंगजेब के शासन काल के दौरान राजा जय सिंह ‘द्वितीय’ ने 1680 ईस्वी में आदि विश्वेश्वर को बनवाया था। उसके बाद 1780 ईस्वी में महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने काशी विश्वनाथ मंदिर तैयार कराया। कहा जाता है कि इसी मंदिर में मुस्लिम आक्रमणकारियों से बचाने के लिए भगवान आदि विश्वेश्वर मंदिर का मूल अरघा (जिस पर शिवलिंग स्थापित किया जाता है) रखा है।

मस्जिद के सामने छात्रों का हनुमान चालीसा पाठ, लाउडस्पीकर पर अजान से पढ़ाई में पड़ रही थी बाधा: जम्मू की घटना

मस्जिद के लाउडस्पीकर की आवाज से परेशान छात्रों ने जम्मू-कश्मीर (Jammu Kahsmir) में ह​नुमान चालीसा का पाठ किया। इसके बाद जम्मू के गाँधी मेमोरियल गवर्नमेंट कॉलेज के करीब 6 छात्रों को शुक्रवार (20 मई 2022) को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इन छात्रों ने एक स्थानीय मस्जिद के सामने इकट्ठा होकर हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) का पाठ किया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, गाँधी मेमोरियल गवर्नमेंट कॉलेज के छात्र जिस वक्त हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे थे, उस दौरान मस्जिद में मुस्लिम नमाज अदा कर रहे थे। छात्रों का आरोप है कि बेफिजूल के शोर के कारण वे पढ़ाई नहीं कर पा रहे थे। जिसके कारण वे स्थानीय मस्जिद के खिलाफ विरोध करने पर विवश हो गए।

उल्लेखनीय है कि 17 मई 2022 को जम्मू नगर निगम (JMC) ने धार्मिक और सार्वजनिक स्थानों पर बिना अनुमति के चल रहे सभी लाउडस्पीकरों को हटाने का आदेश जारी किया था। ये प्रस्ताव भाजपा के पार्षद नरोत्तम शर्मा ने पेश किया था। हालाँकि, आदेश के बाद भी इसकी अनदेखी कर मस्जिद ने लाउडस्पीकर नहीं हटाया।

लाउडस्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव पेश करने वाले शर्मा ने कहा था कि इससे बहुत ही अधिक मात्रा में ध्वनि प्रदूषण हो रहा है, जिससे लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मंगलवार को इस प्रस्ताव को पारित करते हुए जम्मू नगर निगम के मेयर चंदर मोहन गुप्ता ने कहा, “संकल्प बहुमत के साथ पारित किया गया है। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार कार्य किया जाएगा।”

कई रिपोर्ट्स में बताया गया है कि लाउडस्पीकर का विरोध करने वाले छात्र स्थानीय मस्जिद से लाउडस्पीकर को बंद नहीं करवा पाने पर प्रशासन से भी नाखुश थे। इन छात्रों को पहले राज्य पुलिस ने गिरफ्तार किया और बाद में उन्हें छोड़ दिया।

क्या है लाउडस्पीकर विवाद

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के प्रमुख राज ठाकरे ने मस्जिदों समेत तमाम धार्मिक स्थलों पर अवैध रूप से लगाए गए लाउडस्पीकरों को हटाने के लिए एक मुहिम छेड़ी थी। इसी के बाद ये विवाद शुरू हुआ। इसके तहत उन्होंने उद्धव ठाकरे सरकार को पहले 4 मई 2022 तक सभी मस्जदों से लाउडस्पीकर हटाने को लेकर चेतावनी दी थी। हालाँकि, जब ऐसा नहीं हुआ तो उन्होंने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को जहाँ भी मस्जिदों में लाउडस्पीकर में नमाज हो, वहाँ पर दोगुनी आवाज में हनुमान चालीसा का पाठ करने को कहा था।

मनसे के इस ऐलान के बाद राज्य की कई मस्जिदों ने संबंधित प्रशासन के पास मस्जिदों में लाउडस्पीकर लगाकर अजान करने के लिए अप्लाई किया। इसी तरह से उत्तर प्रदेश सरकार ने धार्मिक स्थलों के ऊपर से अवैध लाउडस्पीकरों को तेजी से हटाने का कार्य किया। इनमें से करीब 40000 से अधिक अवैध लाउडस्पीकरों को प्रशासन ने हटवा दिया, जबकि, करीब 55000 को डेसिबल लिमिट के नियमों का पालन करने का आदेश दिया गया।

अपराधी नोमान को पकड़ने आई पुलिस पर पथराव, छतों से फायरिंग भी: 9 महिलाओं समेत 18 गिरफ्तार

UP के मथुरा जिले में बुधवार (18 मई 2022) को दबिश देने गई हरियाणा पुलिस पर हमला हुआ। इस हमले में 5 पुलिसकर्मी घायल हो गए। इनमें एक महिला स्टाफ भी थी। पुलिस पर पथराव और हवाई फायरिंग की गई थी। हमलावरों ने धोखाधड़ी के आरोपित नोमान को कस्टडी से छुड़ा लिया था। अब इस मामले में 18 हमलावरों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपितों में 9 महिलाएँ भी शामिल हैं। पुलिस ने इस कुल 34 लोगों को नामजद किया है।

इस कार्रवाई की जानकारी देते हुए DSP छाता ने बताया, “घटना के दिन हरियाणा पुलिस के साथ थाना शेरगढ़ पुलिस मिलकर एक अपराधी के घर दबिश देने गई थी। इस दौरान गाँव जंघावली में कुछ महिलाओं और पुरुषों ने पुलिस पर हमला कर दिया। हमले में पथराव हुआ और छतों से हवाई फायरिंग भी की गई। इसकी सूचना पर आसपास के थानों की फ़ोर्स बुला कर गाँव में दबिश दी गई। अब तक 18 आरोपितों की गिरफ्तारी की गई है। इसमें पुरुष और महिलाएँ दोनों शामिल हैं। सभी आरोपितों के खिलाफ गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर के आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।”

मथुरा पुलिस द्वारा ट्वीट किए गए एक समाचार पत्र की खबर के मुताबिक पुलिस ने OLX पर ठगी के आरोप में नगला इस्लाम नगर क्षेत्र के गाँव जंघावली में दबिश दी थी। यह ठगी 36 हजार रुपए की थी, जिसकी शिकायत फरीदाबाद के सेक्टर-31 थाने में की गई थी। दबिश के दौरान नोमान को हिरासत में ले लिया गया था। नोमान के पास चोरी का मोबाइल फोन बरामद किया गया था। इसी दौरान पुलिस पर हमला कर दिया गया।

पुलिस पर हमले के आरोप में अब तक गिरफ्तार आरोपितों के नाम शौक़ीन, रशीद, आरिश, तारिफ, रिज़वान, रोबिन, मुश्ताक और आसिफ हैं। साथ ही 9 महिलाओं को भी गिरफ्तार किया गया है। इसी के साथ नोमान, शाकिर, राहुल, मुफीद, मुकीम, अनीस, जुबैद, भल्ला, तालीम, फारुख, जुनैद, मोव्वी, शईदा, सम्मन, आबाद, इकबाल, रफ़ीका, अरशीदा, रपशीना, अरफीना, बरफ़ीना, अमीना, मोसमीना, रेहाना, कईफा आदि की तलाश जारी है। हमले में 8 से 10 अन्य अज्ञात लोगों पर भी केस दर्ज हुआ है।

एक चिंगारी और पूरे भारत में लग जाएगी आग… कैम्ब्रिज में बैठ राहुल गाँधी ने उगला देश विरोधी जहर, कहा- हालात अच्छे नहीं

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने यूके के कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में ‘आइडियाज फॉर इंडिया’ के नाम पर जम कर नकारात्मकता फैलाई। उन्होंने इस दौरान भारत के केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख की तुलना यूक्रेन से कर डाली, जो एक अलग देश है और जिसका रूस के साथ युद्ध चल रहा है। राहुल गाँधी ने दावा किया कि पूरे भारत में भाजपा ने केरोसिन छिड़क रखा है और आग लगाने के लिए एक छोटी सी चिंगारी ही काफी है।

इस सम्मेलन में बोलते हुए राहुल गाँधी ने शुक्रवार (20 मई, 2022) को कहा कि भाजपा हमारी आवाज़ को दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने दावा किया कि कॉन्ग्रेस फिर से भारत को हासिल करने के लिए लड़ रही है और उनके नेता लोगों की आवाज़ सुन रहे हैं, जबकि भाजपा देश का निर्माण करने वाले संस्थानों पर हमले कर रही है। बता दें कि इस सम्मेलन में राजद के तेजस्वी यादव, मनोज झा, TMC की महुआ मोइत्रा और कॉन्ग्रेस के सलमान खुर्शीद सहित कई नेता पहुँचे हैं।

उन्होंने भाजपा पर ध्रुवीकरण के कारण सत्ता में रहने का आरोप लगाते हुए दावा कर डाला कि भारत में रोजगार में बड़ी कमी आई है। उन्होंने कहा कि भारत में हालात अच्छे नहीं हैं। उन्होंने हर संस्थान पर सरकार का कब्ज़ा होने की बात करते हुए एक तरह से भारत में मानवाधिकार के उल्लंघन की भी बात कही। उन्होंने ये भी कह दिया कि चीन ने लद्दाख में यूक्रेन जैसी स्थिति बना दी। उन्होंने कहा कि सीमा पर समस्या है और हमें तैयार रहने की जरूरत है।

उन्होंने दोकलाम में चीनी सेना की उपस्थिति का आरोप लगाते हुए कहा कि अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख के लिए उसने ऐसा किया है। उन्होंने ये भी दावा किया कि चीनी सेना भारत में बैठ कर अपने इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण कर रही है। उन्होंने भाजपा और RSS को ‘सोने की चिड़िया’ बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसी की नहीं सुनते हैं। उन्होंने धृवीकरण और ‘मीडिया में दबदबे’ को भाजपा की लगातार जीत का कारण करार दिया।

PM मोदी की लोकप्रियता बरकरार, 44.77 प्रतिशत लोग उनके कार्यों से संतुष्ट: मुख्यमंत्रियों में असम के CM सरमा आगे, 43% खुश

सत्ता में आठ साल रहने के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की लोकप्रियता बरकरार है। पीएम मोदी अभी भी लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं और लोग उनके कामों से खुश हैं। वहीं, मुख्यमंत्री के रूप में असम (Assam) के सीएम हिमंत बिस्व सरमा (CM Himanta Bisa Sarma) ने अन्य मुख्यमंत्रियों को पीछे छोड़ दिया है।

IANS-CVoter की सर्वे के अनुसार, 44.77 प्रतिशत भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए गए कार्यों से संतुष्ट हैं। वहीं, 37.66 प्रतिशत भारतीय भाजपा के नेतृत्व वाली वर्तमान केंद्र सरकार के काम से बहुत संतुष्ट हैं। अगर मुख्यमंत्रियों की बात करें तो असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा को सबसे लोकप्रिय चीफ मिनिस्टर का दर्जा दिया गया है।

पिछले 12 महीने में दैनिक आधार पर किए गए इस सर्वे में देश के 45.92 प्रतिशत लोग कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी (Congress President Sonia Gandhi) के कार्यों से बिल्कुल संतुष्ट नहीं हैं। वहीं, 44.44 प्रतिशत लोगों ने पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) के प्रदर्शन पर असंतोष जताया। अगर केंद्र की भाजपा सरकार को लेकर असंतुष्ट लोगों की बात करें तो 29.94 प्रतिशत लोग उनके काम से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हैं।

असम के मामले में मुख्यमंत्री के रूप में सबसे अधिक हिमंत बिस्व सरमा से लोग संतुष्ट दिखे। असम के 43 प्रतिशत से अधिक उत्तरदाताओं ने कहा कि वे हिमंत बिस्व सरमा के प्रदर्शन से बहुत संतुष्ट हैं। वहीं, केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन (Kerala CM Pinarayi Vijayan) और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन (Tamil Nadu CM M.K. Stalin) से 41 प्रतिशत लोगों ने संतोष व्यक्त किया है।

इस मामले में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (West Bengal CM Mamata Banerjee) तीसरे स्थान पर रहीं। इस सर्वेक्षण में 39 प्रतिशत लोगों ने उनके काम पर संतोष व्यक्ति किया।

सर्वे के अनुसार, देश भर में 34.2 प्रतिशत लोग अपने-अपने विधायकों द्वारा किए गए विकास कार्यों से बहुत संतुष्ट नहीं हैं। वहीं, 35.24 प्रतिशत लोग अपने-अपने सांसदों से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हैं। केवल 27.75 प्रतिशत भारतीयों ने कहा कि वे उनके काम से बहुत संतुष्ट हैं। वहीं, 36.48 प्रतिशत भारतीय अपने राज्यों में विपक्ष के नेता के काम से संतुष्ट नहीं हैं।