तालिबान ने अफगानिस्तान में मानवाधिकार संस्थानों को खत्म करने का फैसला किया है। इसके अलावा 4 प्रमुख विभागों पर भी तालिबान ने ताला लटका दिया है। मानवीय अपराधों के लिए कुख्यात तालिबान की सरकार के इस फैसले पर सवाल उठ रहे हैं। तालिबान सरकार का कहना है कि उसके पास फंड की कमी है, ऐसे में इन विभागों का संचालन कर पाना आसान नहीं होगा। तालिबान ने कहा कि देश घाटे का सामना कर रहा है, इसलिए इन्हें बंद किया गया है। यही नहीं, तालिबान ने मानवाधिकार आयोग जैसे विभाग को गैर-जरूरी करार दिया है।
तालिबान सरकार के उप-प्रवक्ता इनामुल्लाह समांगनी ने कहा, “ये विभाग बहुत जरूरी नहीं थे और इन्हें बजट में शामिल नहीं किया गया था। इसलिए इन्हें भंग कर दिया गया है।” मानवाधिकार आयोग के अलावा जिस विभाग को भंग किया गया, वह है संविधान को लागू करने के लिए बना आयोग। तालिबान ने बीते साल अगस्त में अफगानिस्तान की सत्ता सँभाली थी।
तब तालिबान ने दावा किया था कि वह अपने गवर्नेंस मॉडल में उदारता को शामिल करेगा। हालाँकि मानवाधिकार और संविधान से जुड़े विभागों को भंग कर तालिबान ने अपने इरादे जाहिर कर दिए हैं।
यही नहीं मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की चिंताएं भी तालिबान के इस कदम से बढ़ गई हैं। तालिबान ने जिन 5 विभागों को बंद किया है, उनमें राष्ट्रीय पुनर्गठन उच्च परिषद और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद भी शामिल हैं। अफगानिस्तान की सत्ता सँभालने के बाद तालिबान सरकार ने पहली बार बजट पेश किया है और उसने कई संस्थाओं के लिए फंडिंग में कटौती कर दी है।
तालिबान का कहना है कि उन्होंने जरूरी उद्देश्यों को हासिल करने के लिए बजट को पेश किया है। हालाँकि तालिबान ने कहा कि यदि आने वाले वक्त में इन विभागों की जरूरत पड़ती है तो इन्हें फिर से शुरू किया जा सकता है।
ज्ञानवापी विवादित ढाँचे को लेकर छिड़े विवाद पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने जिला प्रशासन को आदेश देते हुए कहा कि जिस स्थान पर शिवलिंग मिला है, उसे सील कर दिया जाए और पूरी सुरक्षा दी जाए लेकिन इसके चलते नमाज में बाधा नहीं आनी चाहिए। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए गुरुवार 19 मई की तारीख तय कर दी है।
Delhi | Today, Supreme Court said that the place where the shivling was found should be preserved by the DM and also allows people from the Muslim community to use it for performing prayers and religious observance in the mosque: Advocate Barun Kumar Sinha representing Hindu Sena pic.twitter.com/75rBUpKl6K
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, “अगली सुनवाई तक के लिए हम वाराणसी के डीएम को आदेश देते हैं कि शिवलिंग मिलने वाले स्थान की सुरक्षा की जाए, लेकिन मुस्लिमों को नमाज पढ़ने में कोई समस्या नहीं आनी चाहिए।”
Supreme Court orders that DM Varanasi shall ensure that the area where the Shivling is reported to be found, shall be duly protected.
वहीं ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के सर्वे पर रोक लगाने से इनकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (17 मई, 2022) को कहा कि इस मामले की सुनवाई निचली अदालत में चल रही है, ऐसे में जरूरी है कि जिला अदालत के फैसले का इंतजार किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने वाराणसी के जिला अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद की याचिका पर हिंदू याचिकाकर्ताओं और यूपी सरकार को नोटिस जारी किया है। 19 मई तक जवाब दाखिल करना है।
Supreme Court also orders that direction to protect the area where Shivling is reported to be found shall not in any manner restrain or impede access of Muslims to the mosque or use of it for performing prayers and religious observances.
बता दें कि आज सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्ह की पीठ वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद के मामलों का प्रबंधन करने वाली प्रबंधन समिति ‘अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद’ की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस दौरान यूपी सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यूपी सरकार को कुछ मुद्दों पर उनसे सहायता की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट में अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद कमेटी ने वाराणसी कोर्ट की ओर से सर्वे कराए जाने के आदेश को चुनौती दी है, जिसके तहत परिसर की वीडियोग्राफी की जा रही है।
मस्जिद कमिटी के वकील होजैफा अहमदी ने कोर्ट से कहा कि तीन बातें हैं। उन्होंने कोर्ट को बताया कि ये पूजा के अधिकार का मामला है और इसमें माँ गौरी, हनुमान एवं अनुन्देवता के पूजा की माँग की गई है। उन्होंने फिर कहा है कि रोजाना वहाँ जाने में अवरोध न हो, यानी उस जगह का कैरेक्टर बदलने की माँग है जो इस वक्त मस्जिद है।
अहमदी ने आगे अपनी दलीलों में कहा, “हमारा कहना है कि ये याचिका स्वीकार ही नहीं होनी चाहिए थी। दूसरी बात ये है कि पुलिस की सहायता चाहिए। इस पर आदेश हमें सुने बिना किया गया। फिर कहा गया कि इस खास आदमी को कोर्ट कमिश्नर बनाया जाए। निचली अदालत के ये तीन आदेश हैं, जिसे हम चुनौती दे रहे हैं।”
Ahmadi : What is happening is, under the garb of commission proceedings, and on the oral plea of the plaintiff according to what he saw, the entry to the mosque is restricted and the spot is sealed.#GyanvapiMosque
हुजेफा अहमदी ने कहा कि शनिवार और रविवार को कमिश्नर सर्वे करने गए और कमिश्नर को पूरी तरह से पता था कि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और इस बेंच के समक्ष सूचीबद्ध है। वाराणसी कोर्ट ने सोमवार को आयुक्त द्वारा बताए जाने के बाद परिसर में एक स्थान को सील करने का आदेश दिया कि ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के अंदर एक शिवलिंग पाया गया है। कार्यवाही रोकी जानी चाहिए, यथास्थिति बने रहे।
J Chandrachud : What is the status of survey?
Ahmadi : How can they seal the premises? There’s a string of illegal orders. If you seal the premise, you’re altering status quo. Section 3 of the Act makes it clear that it can’t be done.#GyanvapiMosque
अहमदी का कहना है कि वह निचली अदालत द्वारा आयुक्त की नियुक्ति सहित सभी आदेशों पर रोक लगाने की माँग कर रहे हैं और यथास्थिति का आदेश दिया जाना चाहिए क्योंकि ये आदेश अवैध हैं और संसद के कानून के खिलाफ हैं। परिसर सील नहीं रह सकते हैं और आदेश अवैध हैं। यदि परिसर को सील कर दिया जाता है, तो यथास्थिति में परिवर्तन होता है। उन्होंने प्लेसेज ऑफ वर्शिप ऐक्ट का हवाला देते हुए कहा कि इसके सेक्शन 3 में यथास्थिति की बात कही गई थी।
उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर में मंगलवार (17 मई, 2022) को एक युवक ने इस्लाम से हिंदू धर्म में घर वापसी की है। विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल ने उसकी घर वापसी कराई। शहर के खिरनीबाग मुहल्ला स्थित राम जानकी मंदिर में विधि विधान से गुलनाज की धर्म वापसी कराई। उन्होंने उनके तिलक किया। श्रीराम नाम का पटका पहनाया। पूजन व आरती कराने के साथ ही गीता भी भेंट की। इसके बाद गुलनाज उर्फ विराट कुमार ने ‘जय श्री राम’ और ‘हर हर महादेव’ का उद्घोष किया। उन्होंने बताया कि वह रामचंद्र मिशन थाना क्षेत्र के मिश्रीपुर गाँव के रहने वाले हैं। बढ़ई का काम करते हैं।
मीडिया से बात करते हुए उन्होंने बताया कि अपनी मर्जी से उन्होंने इस्लाम धर्म छोड़ कर सनातन धर्म में वापसी की है। उन्होंने कहा, “पहले हमारा नाम गुलनाज था। अब हमारा नाम विराट है। हमारे पूर्वज सनातनी थे। वहीं से देखते हुए मुझे समझ में आ गया कि क्या अच्छा है और क्या खरबा है। इसके बाद हम अपने मूल धर्म में वापस आ गए।”
गुलनाज से विराट बने युवक ने बताया कि उनके परिवार में माँ, बहन और भाई हैं। अभी उन्होंने अकेले ही सनातन धर्म में वापसी की है। यह पूछे जाने पर कि वह भी तो उसी घर में रहेंगे तो क्या किसी तरह की परेशानी नहीं होगी? विराट ने कहा कि नहीं, कोई दिक्कत नहीं होगी। उनके इस्लाम छोड़कर सनातन धर्म में वापसी पर परिवार के किसी सदस्यों ने आपत्ति जाहिर नहीं किया है और न ही किसी ने विरोध किया। किसी को कोई ऐतराज नहीं है। वह अपने फैसले से खुश हैं।
गौरतलब है कि पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में दो मुस्लिम परिवारों के 8 सदस्यों की हिंदू धर्म में वापसी कराई गई थी। इसमें बघरा स्थित स्वामी यशवीर आश्रम परिषद के महंत स्वामी यशवीर महाराज और स्वामी मृगेंद्र महाराज ने हवन-पूजन और विधि-विधान के साथ इन लोगों को गंगाजल के आचमन से शुद्धिकरण और मंत्रोच्चारण कर हिंदू धर्म ग्रहण कराया था। हिंदू धर्म में वापसी करने वाले इन सभी लोगों ने बताया था कि अब वे काफी खुश हैं।
वाराणसी के ज्ञानवापी में सर्वे खत्म होने के बाद आज इस सर्वेक्षण की रिपोर्ट कोर्ट को दी जानी थी। हालाँकि सुनवाई के दौरान एडवोकेट कमिश्नर विशाल सिंह ने अपील की कि रिपोर्ट पेश करने के लिए दो दिन का समय दिया जाए। इस बाबत उन्होंने सिविल जज सीनियर डिवीजन कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया और दो दिन का समय माँगते हुए बताया कि 15 घंटे की वीडियोग्राफी और 1500 फोटोज होने के कारण फाइल नहीं बन पाई है। इसलिए वह रिपोर्ट पेश करने के लिए दो दिन का समय माँगते हैं।
कोर्ट कमिश्नर की अपील पर सुनवाई करते हुए वाराणसी कोर्ट ने जहाँ इस मामले में रिपोर्ट जमा कराने के लिए दो दिन का समय दिया। वहीं मुस्लिम पक्ष की गुहार पर आज सर्वे से कोर्ट कमिश्नर अजय मिश्रा को अलग कर दिया गया। अब अजय प्रताप सिंह और विशाल सिंह कोर्ट कमिश्नर किए गए हैं।
बता दें कि अजय मिश्रा को कोर्ट कमिश्नर के पद से हटवाने के लिए मुस्लिम पक्ष काफी समय से कोशिश कर रहा था। हालाँकि पिछली बार उनकी माँग खारिज हो गई थी और कमिश्नर को न हटाने के साथ-साथ सर्वे जारी रखने को भी कहा गया था। लेकिन इस बार अजय मिश्रा को कोर्ट कमिश्नर के तौर पर हटाने के निर्देश दिए जा चुके हैं।
ज्ञानवापी सर्वे मामला- कोर्ट कमिश्नर अजय मिश्रा को अलग किया गया। अजय प्रताप सिंह और विशाल सिंह कोर्ट कमिश्नर बने रहेंगे।
— अनंत विजय/ Anant Vijay (@anantvijay) May 17, 2022
मालूम हो कि आज कोर्ट की सुनवाई के दौरान सीता साहू, मंजू व्यास और रेखा पाठक नामक तीन महिलाओं ने नई याचिका दायर की है। इसमें विवादित ढाँचे की उस दीवार को तोड़ कर जाँच कराने का आग्रह है जो नंदी महाराज के सामने है। याचिका में माँग की गई कि सारा मलबा हटा कर शिवलिंग की लंबाई, चौड़ाई और ऊँचाई नापी जाए। इसके अलावा आज की सुनवाई में विवादित ढाँचे के अंदर तालाब की मछलियों को निकालकर अलग शिफ्ट करने को कहा गया। साथ ही नमाजियों के वज्जू के लिए इंतजाम हो इसकी अपील की गई।
हिमांत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने हाल ही में असम के मुख्यमंत्री के रूप में एक साल पूरा किया। इस मौके पर उन्होंने ‘टाइम्स नाउ’ से बातचीत की। अब उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। इसे शेयर करते हुए लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं।
इंटरव्यू के दौरान उन्होंने ज्ञानवापी मस्जिद, कॉन्ग्रेस, राहुल गाँधी, यूनिफॉर्म सिविल कोड, सीएए, एनआरसी, जिग्नेश मेवानी की गिरफ्तारी, ओवैसी समेत कई मुद्दों पर बेबाकी से अपनी बात की। उन्होंने कहा कि चुनावों में किए वादों को अमल कर रहे हैं और पिछला एक साल बेहतर रहा है।
ज्ञानवापी मामले में उन्होंने कहा कि राम मंदिर मामला था जो सुलझ गया, दूसरे लांबित मामले भी सुलझने चाहिए। उन्होंने कहा कि ज्ञानवापी मंदिर है या नहीं जानना जरूरी है और हर हिंदू को जानने का हक है। उन्होंने कहा, “सर्वे रिपोर्ट आने के बाद चर्चा होना चाहिए। आपस में मामलों को सुलझाना जरूरी है। देश की जनता ने बीजेपी को बहुमत दिया है। कॉन्ग्रेस का नाम सुनकर लोग अब चिढ़ते हैं। कॉन्ग्रेस ने तुष्टिकरण की सियासत की। “
यह पूछे जाने पर कि क्या बीजेपी का कॉन्ग्रेसीकरण हो रहा है, उन्होंने कहा कि जो लोग जमीन से जुड़े हैं वे कॉन्ग्रेस में नहीं रहेंगे। उन्होंने कहा, “2031 तक कॉन्ग्रेस में कोई नहीं रहेगा। उसका वजूद खत्म हो जाएगा।” वहीं राहुल गाँधी पर उन्होंने कहा कि वह क्या करेगा क्या नहीं करेगा, कोई नहीं कह सकता है। वह रिसर्च का विषय हैं। उन्होंने कहा, “राहुल गाँधी पर आप यह नहीं कह सकते हैं कि वह जो कहेगा वह वही करेगा।” कॉन्ग्रेस के वन फैमिली वन टिकट पर उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस चिंतन शिविर से हमारा क्या लेना देना। कॉन्ग्रेस में परिवारवाद है। कॉन्ग्रेस में परिवारवाद खत्म नहीं हो सकता है।
यूनिफॉर्म सिविल कोड पर उन्होंने कहा कि हिंदू में पिता की संपत्ति पर बेटी का अधिकार होता है लेकिन मुस्लिम बेटी को ये अधिकार नहीं है। बकौल सीएम शर्मा, मुस्लिमों में कई शादी करता है और देश में यूनिफॉर्म सिविल कोड होना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि मुस्लिम बेटियों के उत्थान के लिए यूसीसी जरूरी है और यह जल्द आना चाहिए। इससे देश में सामाजिक न्याय होगा। एक पुरुष को एक से अधिक महिला से शादी करने का अधिकार नहीं होना चाहिए। अगर 36 प्रतिशत महिलाओं के पास अधिकार नहीं तो सामाजिक न्याय की बात नहीं कर सकते हैं। सामाजिक न्याय सबके लिए जरूरी है। मुस्लिम समाज में भी जातियाँ हैं। उस पर ध्यान दिया जाना चाहिए। जैसे हिंदू में है।
उन्होंने आगे कहा कि एनआरसी, सीएए से आप मुस्लिम जनसंख्या की वृद्धि पर रोक नहीं लगा सकते हैं। इसके लिए आपको शिक्षा, हेल्थ पर ध्यान देना होगा। एनआरसी, सीएए न्याय के लिए है। असम में मुस्लिम बेटियों की शिक्षा पर काम किया। दंगे पर उन्होंने कहा कि बीजेपी की सरकार में सांप्रदायिक हिंसा नहीं होती है। हिजाब का मुद्दा कर्नाटक में कॉलेज तक सीमित था। यह कॉलेज का यूनिफॉर्म का मुद्दा था। इस मुद्दे को बेवजह तूल दिया गया।
जिग्नेश मेवानी की गिरफ्तारी पर उन्होंने कहा कि उसने भगवान और गोडसे की तुलना की, पीएम मोदी पर ट्वीट की वजह से गिरफ्तारी नहीं हुई। एक राज्य से दूसरे राज्य में जाकर गिरफ्तार करना हमेशा से होता रहा है। सरमा ने कहा कि वह हमेशा कानून का पालन करते हैं। जिग्नेश की गिरफ्तारी कानून प्रक्रिया के तहत हुई।
राजद्रोह कानून के राजनीतिक इस्तेमाल पर सरमा ने कहा कि देशद्रोहियों के खिलाफ यूएपीए लगाया, राजनीतिक दुर्भावना से देशद्रोह का केस नहीं लगाया। कानून का दुरुपयोग नहीं गलत है। असम में राजनीतिक नेताओं के खिलाफ देशद्रोह नहीं लगा। उल्फा के खिलाफ लगा।
बीजेपी मुख्यमंत्रियों के बदलने पर उन्होंने कहा कि बीजेपी के किसी भी कार्यकर्ता को पद से लगाव नहीं होना चाहिए। बिप्लब देब त्रिपुरा काम के लिए अच्छा काम किया। अगला सवाल था – बीजेपी असली मुद्दे से लोगों को भटका रहे हैं? उन्होंने कहा कि महँगाई से निकालना सरकार का फर्ज है। पीएम ने राज्यों को तेल के दाम कम करने को कहा। महँगाई का मुद्दा परमानेंट नहीं है।
वहीं अकबरुद्दीन ओवैसी के औरंगजेब के मजार पर चादर चढाए जाने को बीजेपी द्वारा भड़काऊ कहे जाने की बात पर सरमा ने कहा, “कोई औरंगजेब की मजार पर भी जा सकता है क्या? आज आप औरंगजेब की मजार जाएँगे, कल आप कहेंगे कि आप अल-कायदा के मजार पर जाना चाहते हैं। आप देश के सांसद भी हैं। जिस औरंगजेब ने देश को तबाह कर दिया, उनके मजार में आप क्यों जाते हो? अगर वह आपका पिता है, तो जाइए। मैं आपत्ति नहीं करूँगा, लेकिन यदि नहीं है तो फिर क्यों जाते हो? आप उससे क्या प्रेरणा लोगे? आप शिवाजी महाराज से प्रेरणा लीजिए। आप लाचित बोड़फकन से प्रेरणा लीजिए। औरंगजेब से प्रेरणा लेकर क्या आप देश को औरंगजेब के जमाने में लेकर जाना चाहते हो।”
आगे उन्होंने सड़कों का नाम बदलने को सही ठहराते हुए कहा कि जिसने आपका मंदिर तोड़ा, जिसने आपकी बहन-बेटियों को पकड़कर उसके साथ अत्याचार किया, जिसने आपको धर्म परिवर्तन के के लिए मजबूर किया, क्या उस सबका नाम देश में होना चाहिए? उन्होंने कहा कि ये सब मुद्दे खत्म हो जाएँगे तब नया भारत बन जाएगा। लंबित मुद्दे खत्म होने चाहिए। उसके बाद हिंदू-मुस्लिम मिलकर देश को बनाने में लग जाएँगे।
इस वीडियो के वायरल होने के बाद नेटिजन्स खूब मजे ले रहे हैं और जमकर कमेंट्स कर रहे हैं। यहाँ देखिए नेटिन्स द्वारा किए गए कुछ कमेंट्स…
I really avoid commenting on any political figure, but there can’t be any better leader than @himantabiswa !! Every word comes from his heart!! To the point. @BJP4India should feel lucky that Himanta da is holding the fort in east! https://t.co/thBTgAh0vu
काशी की ज्ञानवापी विवादित ढाँचे में सर्वे और वहाँ शिवलिंग मिलने के बाद अब मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मस्थली के पास स्थित प्रसिद्ध शाही ईदगाह मस्जिद को सील करने की याचिका सिविल कोर्ट ने स्वीकार कर ली है। याचिका में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर से सटी शाही ईदगाह मस्जिद की सुरक्षा बढ़ाए जाने के साथ ही वहाँ आने-जाने पर रोक और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की माँग की गई है। कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई के लिए 1 जुलाई, 2022 की तारीख तय की है।
#UPDATE | Shri Krishna Janmabhoomi-Shahi Idgah Masjid dispute: Civil Judge Senior Division, Mathura to next hear on 1st July, the petition filed by Mahendra Pratap Singh to increase security at Shahi Idgah and appoint a security officer.
बता दें कि मथुरा में कुल 13.37 एकड़ जमीन के मालिकाना हक को लेकर सिविल कोर्ट में पहले से ही एक मामले पर सुनवाई चल रही है। इस जमीन में से 11 एकड़ भूमि कृष्ण जन्मभूमि मंदिर के पास और बाकी शाही ईदगाह के पास है। श्रीकृष्ण जन्म भूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष और कोर्ट में याचिका दाखिल करने वाले वादी महेंद्र प्रताप सिंह ने मथुरा सिविल जज सीनियर डिवीजन की कोर्ट में अर्जी लगाते हुए कहा है कि जिस तरह से ज्ञानवापी मस्जिद का मामला सामने आया है, अब कृष्ण जन्म भूमि की जमीन पर बनी ईदगाह के गर्भस्थल को सील किया जाए।
महेंद्र प्रताप सिंह ने अपने इस प्रार्थना पत्र में ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के विवाद का जिक्र करते हुए कहा, “ज्ञानवापी मस्जिद, वाराणसी में जिस प्रकार से हिंदू शिवलिंग के अवशेष मिले हैं उससे स्थिति स्पष्ट हो गई है कि प्रतिवादीगण वहाँ इसी वजह से शुरू से विरोध करते रहे हैं।”
उन्होंने अपनी याचिका में कहा, “यह स्थिति श्रीकृष्ण जन्मभूमि संपत्ति की है, जो असली गर्भगृह है, वहाँ पर सभी हिंदू धार्मिक अवशेष कमल शेषनाग,ऊँ, स्वास्तिक आदि हिंदू धार्मिक चिह्न व अवशेष हैं। इसमें से कुछ को मिटा दिया गया है और कुछ को प्रतिवादीगण मिटाने के प्रयास में हैं। इस स्थिति में अगर हिंदू अवेशेषों को मिटा दिया गया तो कैरेक्टर ऑफ प्रॉपर्टी बदल जाएगा और वाद का उद्देश्य समाप्त जाएगा।”
गौरतलब है कि कि ज्ञानवापी विवादित ढाँचे में सर्वे के दौरान हिन्दू पक्ष ने दावा किया कि ज्ञानवापी के वजूखाना में शिवलिंग मिली है। शिवलिंग के दावे के बाद हिन्दू पक्ष ने कोर्ट में याचिका दी और वजूखाना को सील करने की माँग कि जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने फिलहाल वजूखाना को सील करने का आदेश देते हुए। उसे सील करवाकर CRPF के हवाले करवा दिया है।
बता दें कि कुछ दिनों पहले ही हाईकोर्ट ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले में सुनवाई करते हुए 4 महीने में सभी अर्जियों का निपटारा करने के आदेश दिया था। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने विवादित स्थल का मौका-मुवायना करने की बात भी कही है, जिससे वहाँ की स्थिति स्पष्ट हो सके। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि निर्धारित समय के अंदर कृष्ण जन्मभूमि प्रकरण का निस्तारण किया जाए।
जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी हिंदू के नरसंहार पर ‘द कश्मीर फाइल्स’ रिलीज होने के बाद फारूक अब्दुल्ला ने हाल में इस फिल्म के बैन की माँग उठाई और सवाल किया- ‘क्या इतने गिरे लगते हैं हम कि खून से सने चावल खिलाएँगे’। उन्होंने ये सवाल उन कट्टरपंथी मुसलमानों की नीयत को लेकर पूछा जिन्होंने बीके गंजू की पत्नी को पति के खून से सने चावल खिलाए थे।
फारूक अब्दुल्ला के बयान से साफ है कि वो ये नहीं मानते है कि कोई मुसलमान इतना गिर सकता है कि ऐसी हरकत करे जबकि हकीकत ये है कि कट्टरपंथी अपने शिकार के साथ सोच से भी ज्यादा निर्ममता करते हैं, इसका अंदाजा यजीदी महिला से साथ घटित घटना से चलता है जिसे अपने ही 1 साल के बेटे को पका कर खाने पर मजबूर किया गया था।
#WATCH We met LG Manoj Sinha to raise the issue of the law & order situation in J&K. During the meeting, I told him that the film 'The Kashmir Files' has given birth to hate in the country. Such things (films) should be banned: Dr Farooq Abdullah, National Conference pic.twitter.com/Z1BkoNijRO
साल 2017 में न्यूयॉर्क पोस्ट में इस संबंध में एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी। इसमें इराकी नेता वियान दाखिल के उस बयान का जिक्र था जिसमें उन्होंने यजीदी महिला पर बात की थी। उन्होंने कहा था, “हमने ISIS की चंगुल से एक महिला को छुड़ाने में सफलता पाई जो तीन दिन तक बिन खाने-पीने के जेल में रखी गई थी। उसने बताया कि एक दिन आतंकी उसके पास मीट और चावल लाए। वो इतनी भूखी थी कि सब खाना गई। लेकिन जैसे ही उसका खाना खत्म हुआ। उसे कहा गया कि हमने तुम्हारे 1 साल के लड़के को पकाया था और वहीं तुमने अभी-अभी खाया है।”
A sex slave captured by ISIS was forced to eat her 1-year-old son with a side of rice, according to a gut-wrenching report. The unnamed Yezidi woman — who was starved for three days in an Iraq basement unwittingly ate the boy after barbaric guards cooked and served him to her1/2 pic.twitter.com/AEbN03TOnQ
ISIS आतंकी मानते थे कि महिला यजीदी धर्म अपना कर शैतान की इबादत करती है। इसलिए उन्होंने उसे बंदी बनाया और उसके लड़के को पका कर खा गए। साथ में महिला को भी खिलाया। महिला नेता ने ये जानकारी भी दी थी कि कैसे ISIS आतंकियों ने एक 10 साल की बच्ची का रेप उसके पिता और बहनों के सामने ही कर दिया था
बता दें कि ये कोई अकेली घटना नहीं है जहाँ इस्लामी कट्टरपंथ का घिनौना चेहरा उजागर हुआ हो। तमाम मामले में जब दूसरे धर्म के लोगों को काफिर बता महिला से लेकर बच्चों तक को टुकड़ों में काटा गया। लेकिन फिर भी फारूक अब्दुल्ला सवाल करते हैं कि क्या इतने गिरे हैं कि खून से सने चावल खिलाएँगे।
इस देश में अपनों के खून से सने चावल हिंदुओं को खिलाने की घटना न केवल कश्मीर में बल्कि बंगाल में भी घटी थी। बंगाल के सेनबाड़ी हत्याकांड के दौरान सीपीआई (एम) के कार्यकर्ताओं की भीड़ ने घरों में आग लगा दी, परिवार के दो भाइयों, प्रणब कुमार सेन और मलय कुमार सेन को परिवार के सदस्यों के सामने काट दिया गया था। बाद में मारे गए भाइयों की माँ को अपने मृत बेटों के खून से सना चावल खाने के लिए मजबूर किया गया था।
कन्नड़ धारावाहिकों ‘गीता’ और ‘दोरेसानी’ में अहम भूमिका निभाने वाली मशहूर अभिनेत्री चेतना राज (Kannada actress Chethana Raj) का निधन हो गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बेंगलुरु के एक निजी अस्पताल में प्लास्टिक सर्जरी कराने के बाद 21 वर्षीय अभिनेत्री का निधन हो गया। बताया जा रहा है कि सोमवार (16 मई 2022) को चेतना राज को ‘फैट फ्री’ (fat-free plastic surgery) सर्जरी के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शाम को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने लगी और उनके फेफड़ों में पानी जमा होने लगा, जिससे उनकी मौत हो गई।
रिपोर्ट्स में ऐसा दावा किया जा रहा है कि अभिनेत्री ने अपने माता-पिता को भी सर्जरी के बारे में नहीं बताया था। वह 16 मई को सुबह ‘फैट फ्री’ सर्जरी कराने के लिए अपने दोस्तों के साथ अस्पताल गई थीं। शाम को सर्जरी के बाद अचानक उनकी तबियत बिगड़ने लगी, उनके फेफड़ों में पानी जमा होने लगा, जिससे कुछ ही देर बाद ही चेतना की मौत हो गई। डॉक्टर भी काफी कोशिशों के बाद अभिनेत्री को नहीं बचा पाए।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 21 वर्षीय एक्ट्रेस के माता-पिता ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। वे दावा कर रहे हैं कि डॉक्टर की लापरवाही के कारण उनकी बेटी की असमय मौत हो गई। यही नहीं चेतना राज के माता-पिता ने अस्पताल के अधिकारियों के खिलाफ पास के थाने में शिकायत भी दर्ज कराई है। फिलहाल चेतना का शव अभी अस्पताल में ही है। उसे कल (18 मई 2022) सुबह पोस्टमॉर्टम के लिए रमैया अस्पताल भेजा जाएगा।
मालूम हो कि दो साल पहले (2 अक्टूबर, 2020) हिंदी और बांग्ला फिल्मों की एक्ट्रेस मिष्टी मुखर्जी (Mishti Mukherjee) का भी कीटो डाइट की वजह से बेंगलुरु में निधन हो गया था। बताया जाता है कि उस वक्त वह सिर्फ 27 साल की थी और अपना वजन कम करने के लिए कीटो डाइट ले रही थीं, जिससे उनकी किडनी फेल हो गई थी। अभिनेत्री के एक प्रतिनिधि ने उस वक्त बताया था, “कीटो डाइट की वजह से उनकी किडनी फेल हो गई थी, जिससे वह बेहद कम उम्र में ही हमें छोड़कर चली गईं।”
रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह लंबे समय से किडनी की समस्या से जूझ रही थीं। मिष्टी ने साल 2012 में फिल्म ‘लाइफ की तो लग गई’ से बॉलीवुड में अपना डेब्यू किया था। इसके बाद वे साल 2013 में आई फिल्म ‘मैं कृष्णा हूँ’ के एक गाने में रजनीश दुग्गल के साथ नजर आई थीं। इस फिल्म में जूही चावला लीड रोल में थीं। ऋतिक रोशन और कैटरीना कैफ का स्पेशल अपीयरेंस था। इसके अलावा मिष्टी कुछ आइटम नंबर्स में भी नजर आई थीं। उन्होंने हिंदी बंगाली के अलावा तेलुगू फिल्मों में भी काम किया था।
अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में, ट्विटर के एक वरिष्ठ इंजीनियर को यह स्वीकार करते हुए सुना जा सकता है कि माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ट्विटर (Twitter) पर कैसे वामपंथियों के कब्जे में है और यह दक्षिणपंथी एकाउंट्स पर कैसे शिकंजा कसता है।
वायरल वीडियो में सिरु मुरुगेसन (Siru Murugesan) के नाम से पहचाने जाने वाले इंजीनियर ने इस साल 28 अप्रैल को प्रोजेक्ट वेरिटास के साथ काम करने वाले एक पत्रकार से बात करते हुए कई खुलासे किए थे। वीडियो को पत्रकार टिम पूल ने मंगलवार (17 मई) को ट्विटर पर शेयर किया था।
मुरुगेसन कहते हैं, “ट्विटर फ्री स्पीच में विश्वास नहीं करता है। एलोन फ्री स्पीच में विश्वास करते हैं। वह एक पूँजीवादी है और हम वास्तव में पूँजीवादी के रूप में नहीं बल्कि एक सोशलिस्ट की तरह काम कर रहे थे। जैसे हम सभी अपनी ऐसी-तैसी करा रहे थे।”
Breaking from Project Veritas
Twitter employee confirms bias at Twitter
Seems I was right
Because conservatives tolerate leftist speech and leftist won’t tolerate the right, Twitter opts to censor the right as “balance”@elonmuskpic.twitter.com/zjAYwcIbol
वह आगे कहते हैं, “वैचारिक रूप से, ऐसी बातों का कोई मतलब नहीं है, क्योंकि हम वास्तव में वामपंथ को नहीं बल्कि दक्षिणपंथ को सेंसर कर रहे हैं। तो, हर दक्षिणपंथी ऐसा ही होगा। ब्रो, ठीक है, बस इसे टॉलरेट करना होगा। लेकिन वामपंथी ऐसा नहीं होगा, नहीं, मैं इसे बर्दाश्त नहीं करने वाला। मुझे इसे सेंसर करने की आवश्यकता है अन्यथा मैं प्लेटफॉर्म पर जगह नहीं देने वाला हूँ।”
वहीं ट्विटर इंजीनियर ने यह भी कहा, “तो, यह सही है कि राइट विंग के साथ भेदभाव करता है। यह सच है। पक्षपात होता है। मुझे नहीं पता कि एक मंच पर दो पार्टियाँ कैसे सह-अस्तित्व में रह सकती हैं।” सिरु मुरुगेसन ने बताया कि उनके लेफ्टिस्ट सहकर्मियों को ‘पूँजीवादी’ एलोन मस्क द्वारा ट्विटर अधिग्रहण के विचार से ही नफरत थी।
मुरुगेसन ने कहा कि जब से ट्विटर डील हुई है, तब से कंपनी की संस्कृति में ‘बहुत कुछ बदल गया है। “ओह माय गॉड! मैं कम से कम इसके साथ ठीक हूँ। लेकिन मेरे कुछ सहकर्मी सुपर लेफ्ट जैसे हैं। वे ऐसे हैं कि अगर ऐसा होता है तो यह मेरा आखिरी दिन होगा।”
“हमने इसके खिलाफ विद्रोह करने के लिए हर संभव प्रयास किया। बहुत सारे कर्मचारियों ने इसके खिलाफ विद्रोह किया। लेकिन अंत में, निदेशक मंडल के हस्तक्षेप के बाद मामला थोड़ा ठीक हो गया क्योंकि कोई अपने खिलाफ मुकदमा नहीं छठा था।”
ट्विटर इंजीनियर ने काम के माहौल में लापरवाही पर भी प्रकाश डाला। उसने कबूल किया कि कैसे आखिरी तिमाही में वह हफ्ते में सिर्फ 4 घंटे ही ऑफिस जाता था।
उन्होंने जोर देकर कहा, “अनिवार्य रूप से जैसे हर किसी को वह काम करने को मिलता है जो वे चाहते हैं, कोई भी वास्तव में (ऑपरेटिंग व्यय) की परवाह नहीं करता है, पूंजीपतियों की तरह, वे संख्याओं की परवाह करते हैं या व्यवसाय को और अधिक कुशल बनाने के बारे में परवाह करते हैं।”
उन्होंने आगे बताया, “लेकिन ट्विटर में, ऐसा लगता है कि मानसिक स्वास्थ्य ही सब कुछ है, जैसे अगर आप अच्छा महसूस नहीं कर रहे हैं, तो आप कुछ दिनों की छुट्टी ले सकते हैं। लोगों ने महीनों की छुट्टी ली है, और उसके बाद वे वापस आएँगे। लेकिन जैसा आप पसंद करते हैं, किसी भी समय आप अपना सर्वश्रेष्ठ परफॉर्मेंस दे सकते हैं। और यही वह संस्कृति है और आप जानते हैं कि जितना संभव हो सके बिजनेस चलाएँगे।”
उन्होंने यह भी बताया कि कैसे ट्विटर के लिए काम करने से उनके अपने राजनीतिक विचारों पर भी असर पड़ा है। उन्होंने कहा, “जैसे मैंने ट्विटर पर काम करना शुरू किया और लेफ्टिस्ट हो गया। मुझे लगता है कि यह वैसा ही माहौल है जैसा वहाँ हैं और आप उसी तरह के हो जाते हैं।”
एलोन मस्क और ‘ट्विटर डील’
बता दें कि एलोन मस्क, पहले से ही ट्विटर के सबसे बड़े व्यक्तिगत शेयरधारक थे, उनके पास कंपनी का 9.2% हिस्सा था। उन्होंने पहले कहा था कि उन्हें प्रबंधन में कोई भरोसा नहीं था और उनके तहत ट्विटर की अपनी वास्तविक क्षमता को पूरा करते हुए कार्य नहीं कर सकता था। उन्होंने कंपनी को निजी कंपनी बनाने की बात की ताकि उनका इस पर पूरा नियंत्रण हो सके और ट्विटर को अपनी पूरी क्षमता हासिल करने के लिए निर्देशित कर सकें।
ट्विटर के बोर्ड ने एलोन मस्क द्वारा अधिग्रहण बिड को प्रभावित करने की पूरी कोशिश की थी। हालाँकि, मस्क की पेशकश की कीमत ट्विटर शेयरधारकों के बहुमत के साथ अंततः ट्विटर बोर्ड को विवश कर देती है।
एलोन मस्क, जो पहले से ही इलेक्ट्रिक वाहन दिग्गज टेस्ला और स्पेसएक्स के सीईओ हैं, ने 44 बिलियन डॉलर के सौदे में माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ट्विटर को खरीद लिया था।
हाल ही में, मस्क ने घोषणा की कि सौदे को अस्थायी रूप से रोक दिया गया था, क्योंकि एक अनुमान के मुताबिक माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म पर 5% से कम उपयोगकर्ता स्पैम / नकली थे। इससे ट्विटर स्टॉक के मूल्य में अचानक गिरावट आई थी।
हिंदी को राष्ट्रीय भाषा नहीं बताकर विवाद को जन्म देने वाले साउथ के स्टार किच्चा सुदीप की अपकमिंग फिल्म ‘विक्रांत रोणा’ के लिए बॉलीवुड एक्टर सलमान खान ने अपना हाथ आगे बढ़ाया है। यह एक पैन इंडिया फिल्म है जिसे हिन्दी, तेलुगू, मलयालम तमिल और कन्नड़ भाषाओं में रिलीज किया जाएगा।
खान फिल्म विक्रांत रोना को हिंदी भाषा में रिलीज करने वाले हैं। सलमान खान ने किच्चा सुदीप की एक्शन ड्रामा 3डी फिल्म के साथ जुड़ने का मेगा ऐलान अपने सोशल मीडिया हैंडल से किया है। साथ ही उन्होंने किच्चा सुदीप की फिल्म के दृश्यों की भी तारीफ की है।
सलमान खान ने लिखा, “मैं अभी तक फिल्म के सीन्स से अभिभूत हूँ भाई किच्चा सुदीप। ‘विक्रांत रोणा’ का हिंदी वर्जन पेश करने को लेकर काफी खुश हूँ। यह भारतीय सिनेमा का सबसे बड़ा 3डी अनुभव होगा।”
सलमान खान के साथ ही किच्चा सुदीप ने भी सोशल मीडिया पर अपनी फिल्म के हिंदी वर्जन को 3डी में पोस्ट किया है। इस वीडियो के साथ अभिनेता ने कैप्शन में लिखा, “विक्रांत रोणा को एसकेएफ के साथ जुड़कर गर्व हो रहा है। ‘सलमान खान फिल्म्स’ के साथ जुड़ने पर गर्व है।”
फिल्म ‘विक्रांत रोणा’ का निर्देशन अनूप भंडारी ने किया है और जैक मंजूनाथ द्वारा उनके प्रोडक्शन शालिनी आर्ट्स के तहत निर्मित किया जा रहा है। यह एक 3डी फिल्म होगी, जिसमें किच्चा सुदीप के साथ जैकलीन फर्नांडीज भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। फिल्म 28 जुलाई को देश भर में रिलीज हो रही है।
किच्चा सुदीप ने कहा था- हिंदी अब एक राष्ट्रीय भाषा नहीं है
गौरतलब है कि पिछले दिनों एक इंटरव्यू के दौरान किच्चा सुदीप ने कहा था कि ‘हिंदी अब एक राष्ट्रीय भाषा नहीं है।’ किच्चा सुदीप के इस बयान पर विवाद हो गया था। इसके बाद अजय देवगन ने उनकी टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी थी। अजय देवगन ने कहा था, “अगर हिंदी राष्ट्रीय भाषा नहीं है तो अपनी फिल्में हिंदी में क्यों डब करते हो।” इस विवाद ने साउथ बनाम हिंदी इंडस्ट्री की बहस छेड़ दी थी।